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Saturday, July 14, 2018

8 माह पहले भरा फीस पर अब तक नही लगा ट्रांसफार्मर, किसान खा रहा दर दर की ठोकर, ठेकेदार दे रहा न लगाने की धमकी ( मामला ज़िले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने वाले बांस ग्राम का जहां हितग्राही किसान ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री का 26 हज़ार 4 सौ रुपये फीस जमा के बाद भी मुख्यमन्त्री योजना का नही लगाया गया 25 एचपी का ट्रांसफार्मर)

दिनांक 14 जुलाई 2018, स्थान - लालगांव डीसी, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

     ज़िले में कृषक मोटर पंप कनेक्शन हेतु नवीन ट्रांसफार्मर योजनान्तर्गत अलग से ट्रांसफार्मर लगाने के लिए सरकार की इस योजना का लाभ लेने की दिशा में किसानों द्वारा अपने अपने विद्युत वितरण केंद्रों में समय समय पर आवेदन किये जा रहे हैं लेकिन कहीं न कहीं ठेकेदारों की मनमानी और एसटीसी विभाग की लेटलतीफी के चलते किसानों को बिजली आफिस के चक्कर लगाने पर मजबूर किया जा रहा है.

    अभी एक ऐसा ही मामला रीवा के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र का आया है जिंसमे किसान ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री द्वारा मुख्य अभियंता मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वित्तरन कंपनी लिमिटेड के नाम लिखित शिकायत दी गई है जिंसमे उनके द्वारा माग की गई है की उनके द्वारा कृषि पंप योजना के अन्तर्गत दिनांक 4 दिसंबर 2017 जमा किये गए 26 हज़ार 4 सौ रुपये पर कार्यवाही की जाए और उनका 25 एचपी का इस योजनान्तर्गत ट्रांसफार्मर लगाया जाए.

   8 माह पहले जमा किया पैसा, आज तक नही लगा ट्रांसफार्मर

     लालगांव डीसी अन्तर्गत आने वाले ग्राम बांस निवासी ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री द्वारा बताया गया की उन्होंने दिनांक 04 दिसंबर 2017 को अब से 8 माह पहले रसीद क्रमांक 74 एवं बुक नंबर 1444 प्रोजेक्ट नंबर 337795 द्वारा दर्शायी गई संलग्न राशि 26 हज़ार 4 सौ रुपये मुख्यमंत्री कृषक पंप योजनान्तर्गत जमा किये थे लेकिन जब इसमे कोई कार्यवाही नही हुई तो उन्होंने 26 जून एवं 4 जुलाई 2018 को एसटीसी विभाग एवं चीफ इंजीनियर मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को पुनः आवेदन दिया और बरसात खरीफ 2018 के पहले तक योजनान्तर्गत नवीन 25 एचपी के ट्रांसफार्मर लगाए जाने की माग की.

  ठेकेदार द्वारा 10 दिन में कार्य का मिला था आश्वासन 

        ज्ञानेंद्र अगिहोत्री द्वारा बताया गया की लालगांव डीसी से एक माह के अंदर कार्य करवाये जाने का आश्वासन मिला था जबकि ठेकेदार अरुण मिश्रा द्वारा मात्र दस दिन के अंदर खम्भे गाड़ने का आश्वासन मिला था लेकिन कहीं से कोई कार्यवाही नही हुई है जिसके कारण व्यथित किसान ने सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया का भी सहारा लिया और उम्मीद की है इस बरसात के पहले तक उनका योजना का ट्रांसफार्मर लगाया जाए. यद्यपि इस मामले को चीफ इंजीनियर रीवा रीजन के ट्विटर एकाउंट में भी भेजा गया है जिस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नही मिली है।

ठेकेदार ने खम्भा न गाड़ने की दे डाली धमकी 

       किसान ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री द्वारा आगे बताया गया की वह बिजली विभाग रीवा जब आवेदन देने गए थे तब वहीं पर उपस्थित ठेकेदार ने कहा की तुम हमारी कंप्लेन करने आये हो तो देख लेना अब तुम्हारा ट्रांसफार्मर नही लग पायेगा जिस मंत्री के पास जाना होगा तो चले जाना. 

       इस प्रकार देखा जा सकता है की बिजली विभाग की लापरवाही के चलते ठेकेदारों के भाव इतने बढ़ गए हैं लगता है अन्य विभागों की तरह बिजली विभाग को भी ठेकेदार ही चला रहे हैं. आखिर सवाल यह है की जब किसी भी हितग्राही किसान का कार्य समय पर नही होगा तो स्वाभाविक है वह बेचारा कहीं न कहीं तो हाँथ पैर पटकेगा ही. जहां उसे आसरा मिलेगा वहां वह जाएगा. स्वाभाविक है जन प्रतिनिधि तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में इसीलिए बनाये जाते हैं की वह आम गरीब और पीड़ित जनता की समस्या को समझें और उसका समाधान करें. यदि किसान बिजली विभाग जाकर कंप्लेन दर्ज करवाया तो उसने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया की ठेकेदार उसे धमकी दे डाली की तुम्हारा ट्रांसफार्मर ही नही लगेगा. अब ऐसे मामलों में तो चाहिए की बिजली विभाग किसान की कंप्लेन के आधार पर ऐसे ठेकेदारों को तत्काल कार्य के ही हटा दे जिनका व्यवहार ही उपभोक्तओं और हितग्राहियों के साथ विद्वेषपूर्ण हो.

  अब मानसूनी बारिश उत्पन्न कर सकती है वाधा 

   वहरहाल आज दिनाँक तक हितग्राही ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री का मुख्यमंत्री कृषक पंप योजनान्तर्गत 25 एचपी का ट्रांसफार्मर नही लग पाया है जबकि आठ माह व्यतीत हो चुके हैं साथ ही मानसून आने से कार्य में बाधा भी उत्पन्न हो सकता है पर चूंकि अभी भी लालगांव और विशेषकर पूरे रीवा में अभी तक बाधा उत्पन्न करने वाली तीव्र मानसूनी बारिश नही हुई है अतः यदि बिजली विभाग और एसटीसी विभाग चाहे तो अगले कुछ दिनों में पीड़ित किसान का ट्रांसफार्मर लगा सकता है.

  संलग्न - ज़िले के लालगांव विद्युत वित्तरन केंद्र अन्तर्गत ग्राम के हितग्राही ज्ञानेंद्र अग्निहोत्री द्वारा नवीन 25 एचपी ट्रंसफॉर्मेर लगाने हेतु भरे गए फीस 26 हज़ार 4 सौ रुपये का रसीद एवं साथ ही चीफ इंजीनियर को दिए गए शिकायत की प्रति.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Friday, July 13, 2018

ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर मौहरिया का 24 घण्टे में बदला ट्रांसफार्मर, बसौली का भी 2 दिन में बदला जाएगा (मामला ज़िले के गंगेव एवं मनगवां विद्युत वितरण केंद्र का जहां मौहरिया में 2 वर्ष से अधिक समय से जला ट्रांसफार्मर 13 जुलाई को बदला गया, बसौली नं 2 का अगले 2 दिन में बदला जाएगा, सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने करवाई कार्यवाही)

दिनांक 14 जुलाई 2018, स्थान - गंगेव/मनगवां रीवा मप्र 

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन के निर्देश पर 2 से अधिक वर्षों से जला हुआ मौहरिया ग्राम का 100 केवीए का ट्रांसफार्मर दिनांक 13 जुलाई 2018 को शाम को बदल दिया गया. बता दें पिछले दिनों गंगेव डीसी के बसौली नंबर 2 एवं मनगवां डीसी के मौहरिया के जले हुए ट्रांसफार्मर न बदले जाने की खबर ट्विटर के माध्यम से मप्र के ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी के माध्यम से दी गई थी जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए ऊर्जा मंत्री ने सीएमडी जबलपुर जोन एवं चीफ इंजीनियर रीवा रीजन केएल वर्मा को तत्काल ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए निर्देशित किया था. जिस पर कार्यवाही करते हुए मनगवां बिजली क्षेत्र के असिस्टेंट इंजीनियर प्रशांत नागेश ने 13 जुलाई शाम 100 केवीए का मौहरिया यादव-हरिजन बस्ती के पास का 2 से अधिक वर्षों से जला हुआ ट्रांसफार्मर बदल दिया है और इसकी सूचना उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता द्विवेदी को मोबाइल फ़ोन पर दी है. इस बात की पुष्टि करने के लिए द्विवेदी द्वारा मौहरिया ग्राम निवासी आशीष चतुर्वेदी एवं सुरेश चतुर्वेदी द्वारा नए लगाए गए ट्रांसफार्मर की वहां के ग्रामीणों के साथ फ़ोटो भी प्राप्त की है जिसे यहां पर संलग्न किया जा रहा है. सहायक अभियन्ता मनगवां बिजली विभाग प्रशांत नागेश द्वारा जानकारी दी गई है की अगले 2 दिनों में गंगेव डीसी के बसौली नंबर 2 का भी ट्रांसफार्मर बदल दिया जाएगा. बता दें की बसौली नंबर 2 का ट्रांसफार्मर बबलू सिंह एवं अन्य ग्रामीणों के द्वारा  पिछले 8 माह के अधिक समय के फैल बताया गया था.

    मौहरिया का ट्रांसफार्मर बदले जाने पर वहां सभी उपभोक्तागण में खुसी की लहर है. विशेषतौर पर मोटर कनेक्शनधारी किसान ट्रांसफार्मर बदल दिए जाने से काफी खुश हैं. सुरेश एवं आशीष चतुर्वेदी आदि किसानों द्वारा बताया गया की पिछले 2 वर्षों से उनकी कृषि बुरी तरह से प्रभावित हुई थी जिसके कारण सभी किसान काफी परेशान थे. 

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें रीवा के मनगवां डीसी अन्तर्गत आने वाले मौहरिया ग्राम का बदला गया ट्रांसफार्मर एवं उपस्थित ग्रामीण उपभोक्ता.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक वआम मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Tuesday, July 10, 2018

ऊर्जा मंत्री पारस जैन का ट्वीट और 3 दिन में बदला कटरा डीसी रीवा का 5 मेगा बोल्ट का फैल ट्रांसफॉमर (मामला ज़िले के कटरा डीसी अन्तर्गत फैल 5 एमवीए के ट्रांसफार्मर का जिस पर महीने भर बाद हुई कार्यवाही, अब मिल सकेगी किसानों और आम नागरिकों को निर्बाध बिजली सप्लाई)

दिनाँक 10 जुलाई 2018, स्थान - कटरा विद्युत वितरण केंद्र, रीवा मप्र

 13 जून से फैल कटरा डीसी का 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर लगभग एक माह बाद दिनांक 10 जुलाई 2018 को बदल दिया गया।

  कटरा जेई अभिषेक गौरव सोनी एवं त्योंथर डी ई आर सी पटेल द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक 10 जुलाई के दिन ट्रांसफार्मर को टेलर द्वारा लाया गया और क्रेन लगाकर बदल दिया गया है. शाम बारिश के कारण थोड़ा काम में व्यवधान उत्पन्न हुआ लेकिन रात लगभग 10 बजे तक ट्रांसफार्मर बदल कर एक बड़े भाग के लिए लाइन सप्लाई चालू कर दी गई है.

  बता दें की इस विषय में मुद्दा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा काफी पहले से उठाया गया था जिंसमे रीवा एवं मप्र से प्रकाशित होने वाले लोकल और प्रादेशिक समाचार पत्रों जैसे राज एक्सप्रेस, पत्रिका  समाचार एवं अन्य अखबारों में ट्रांसफार्मर फैल होने की खबर को रिपोर्ट किया गया था.  इस विषय को फेसबुक, ट्विटर एवं ईमेल के माध्यम से ऊर्जा मंत्री पारस जैन, मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री तक रखा गया था. साथ ही चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर जबलपुर जोन से लेकर प्रिंसिपल सेक्रेटरी एनर्जी विभाग को भी ईमेल द्वारा सूचित किया गया था.

ऊर्जा मंत्री पारस जैन के हस्तक्षेप से काम में आई तेज़ी

  वैसे इस विषय में संज्ञन तो लोकल न्यूज़पेपर में आने और फेसबुक, ट्विटर में शेयर के बाद ही ले लिया गया था और रीवा ज़िले के किसी डीसी में एक 5 एमवीए के पड़े ट्रांसफ़ॉर्मर को कटरा लाकर लगाए जाने की बातें चल रही थी लेकिन कार्य में हीलाहवाली चल रही थी और एचटीएम एवं एसटीसी विभाग में सामंजस्य स्थापित न हो पाने के कारण कार्य एक दूसरे के मत्थे मढ़ा जा रहा था जिस पर दिनांक 6 जुलाई को ऊर्जा मंत्री पारस जैन को ट्वीट के माध्यम से एकबार फिर जानकारी दी गई और वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया की किस प्रकार महीने भर से आम जनता तंग है. इस पर तत्काल ऊर्जा मंत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता के ट्वीट के जबाब में बताया की सीएमडी जबलपुर जोन को तत्काल एक्शन लेकर समस्या के समाधान के लिए निर्देशित किया गया है. जिस पर कार्यवाही होकर दिनांक 10 जुलाई को रात 10 बजे तक 5 मेगा वोल्ट एम्पियर का ट्रांसफार्मर बदल दिया गया है और अब उम्मीद की जा रही है की निर्बाध बिजली से किसान भी अपनी सूखती फसल की समय समय पर सिंचाई कर सकेंगे और आम उपभोक्ता भी परेशान नही होंगे.

संलग्न - 1) सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ऊर्जा मंत्री को किया गया ट्वीट और अन्य अधिकारियों को भेजा गया ईमेल की स्क्रीनशॉट. 2) ऊर्जा मंत्री द्वारा ट्वीट के जबाब में भेजा गया ट्वीट जिस पर तत्काल 3 दिवश के अंदर कार्यवाही हुई. 3)  संलग्न तस्वीर में पुराना जला हुआ ट्रांसफार्मर ही दिखाया गया है क्योंकि अब तक रात जोन कारण नए प्रतिस्थापित ट्रांसफार्मर की तस्वीर नही मिल पायी है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, 7869992139, 9589152587

Friday, July 6, 2018

कटरा डीसी का फैल 5 एमवीए ट्रांसफ़ॉर्मर, बदलने में अभी लग सकते हैं एक और हफ्ते ( मामला ज़िले के कटरा डीसी का जहां पर पिछले 13 जून को फैल हुआ था 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर जिसे आज तक नही बदला जा सका, बिजली कटौती की वजह से जनता हलाकान)

दिनांक 06 जुलाई 2018, स्थान - कटरा विद्युत वितरण केंद्र, त्योंथर, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के त्योंथर विद्युत अनुभाग अंतर्गत आने वाले कटरा विद्युत वितरण केंद्र में पिछले महीने 13 जून को 5 मेगा वोल्ट एम्पियर (एमवीए) का जला हुआ ट्रांसफार्मर आज दिनांक तक बदला नही जा सका है. बता दें की कटरा डीसी में दो पांच मेगा वोल्ट एम्पियर के ट्रांसफ़ॉर्मर लगाए गए थे जिनमे एक ट्रांसफार्मर हिनौती एवं जमुई फीडर का लोड संभालता था जबकि दूसरा 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर गढ़, अगडाल सहित अन्य फीडरों को देखता था. पिछले महीने 13 जून को हिनौती जमुई क्षेत्र को विद्युत सप्लाई देने वाला ट्रांसफार्मर अचानक फैल हो जाने से अब पूरे कटरा विद्युत वितरण केंद्र का लोड मात्र बचे हुए 5 एमवीए के एक ट्रांसफार्मर पर आ गया है जिससे विद्युत आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है. पूरे कटरा डीसी की लाइन सप्लाई मात्र 5 एमवीए के बड़े ट्रांसफार्मर से नही हो पा रही है. 

कटरा जेई एवं त्योंथर डी ई ने ऊपर विभाग को भेजा डिटेल

     कटरा डीसी के कनिष्ठ विद्युत अभियंता अभिषेक गौरव सोनी एवं त्योंथर डीई आरसी पटेल के द्वारा बताया गया है की कटरा में 5 एमवीए के बड़े ट्रांसफार्मर के फैल होने की जानकारी अधीक्षण अभियंता शरद श्रीवास्तव एवं मुख्य अभियंता संभाग रीवा केएल वर्मा को पहले ही भेजी जा चुकी है. जानकारी लेने पर बताया गया की एसटीसी डिपार्टमेंट को गुड़हल में एक रखे 5 एमवीए के ट्रांसफार्मर को लगाने के लिए कहा गया है. जब इस संदर्भ में एसटीसी डिपार्टमेंट के एरिया इंजीनियर ओमप्रकाश द्विवेदी से बात की गई तो उन्होंने बताया की एसटीसी का कार्य नवीन कार्यों को करना है न की मरम्मत करना अतः इसमे सीधे त्योंथर डिवीज़न के डीई एवं कटरा जेई कार्य को कराएं इसमे एसटीसी का कोई रोल नही है. बता दें कि जिस पुराने 5 मेगा बोल्ट के अतिरिक्त रखे ट्रांसफ़ॉर्मर को लगाए जाने की बात की जा रही है वह एचटीएम डिपार्टमेंट के अंतर्गत आता है।

अधीक्षण अभियंता शरद श्रीवास्तव ने बताया एक हफ्ते का और लग सकता है समय

    जब फैल हुए 5 एमवीए के ट्रांसफार्मर को बदलने की जानकारी रीवा संभाग के अधीक्षण अभियंता शरद श्रीवास्तव से चाही गई तो उनके द्वारा बताया गया की मैं अभी बिल्कुल नया हूँ पर जानकारी लेकर बताया गया की अभी भी 5 एमवीए के कटरा स्थित मुख्य ट्रांसफ़ॉर्मर को बदलने में एक सप्ताह तक का समय लग सकता है. प्रयाश जारी है.

बिना औचित्य की लेटलतीफी

    जो जानकारी प्राप्त हुई है उससे सिर्फ यही समझ आ रहा है की विजली विभाग के सभी उप विभागों में सामंजस्य स्थापित न हो पाने की वजह से वेवजह 5 एमवीए के ट्रांसफार्मर बदलने में लेटलतीफी हो रही है. यदि पूरे जबलपुर जोन में ही 5 एमवीए का ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होता तब तो बात समझ आती है पर चूंकि रीवा ज़िले में ही यदि एचटीएम डिपार्टमेंट के पास एडिशनल ट्रांसफ़ॉर्मर रखा हुआ है तो उसको बदलने में इतना समय क्यों लिया जा रहा है. मुख्य ट्रंसफॉर्मेर न बदले जाने से आम जनता एवं किसानों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. एक तरफ जहां उमस और गर्मी में बिजली कटौती से आम जनमानस त्रस्त है. वहीं दूसरी तरफ किसानों को सिंचाई के लिए पानी नही मिल पा रहा है. लाइन की समस्या इतनी अधिक बनी हुई है की हर 15 मिनट में लाइन कट होती है और फिर 10 मिनट बाद आती है जिसके कारण न तो आटा चक्की और सामान्य तेल मिल ही चल पा रही है और न ही किसान खेतों में अनवरत 4 से 6 घंटे तक मोटर पंप ही चला पा रहे हैं. 


   आज जब आषाढ़ के महीने में कटरा क्षेत्र में बारिश भी नही हुई है ऐसे में सब्जी भाजी लगाने वाले किसान एवं अन्य धान की नर्सरी का बीज डाले हुए किसान काफी परेशान हैं. उनकी फसल को रुक रुक कर पानी मिल पा रहा है.

    ऐसे में देखना यह होगा की जहां मप्र सरकार द्वारा गरीबों किसानों और मजदूर वर्ग के लोगो के लिए संबल बिजली बिल माफी एवं सरल बिजली बिल स्कीम जैसी महत्वाकांक्षी योजना चलाकर राहत देने का प्रयाश किया जा रहा है ऐसे में यदि किसानों को बिजली कटौती की वजह से पर्याप्त पानी न मिल पाया तो उनकी फसल को भारी और अपूरणीय क्षति हो सकती है.

  संलग्न - कटरा डीसी त्योंथर विद्युत संभाग का जला हुआ 5 मेगा वोल्ट एम्पियर का ट्रांसफार्मर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, 

ज़िला - रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587

Wednesday, June 27, 2018

13 जून से फैल 5 मेगावाट का ट्रांसफार्मर नही बदला, पूरे कटरा की बिजली सप्लाई प्रभावित (मामला ज़िले के कटरा डीसी एवं मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत कंपनी लिमिटेड त्योंथर संभाग का जहां पिछले दो सप्ताह से अधिक समय से कटरा डीसी का मुख्य 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर अब तक नही बदला गया, पूरे कटरा डीसी की लाइन वाधित, मात्र एक ट्रांसफॉमर से काट कर दी जा रही लाइन)

दिनांक 28 जून 2018, स्थान - कटरा, रीवा-मप्र,

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)

    ज़िले के मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड संभाग त्योंथर अंतर्गत आने वाले कटरा डीसी में दो प्रमुख 5 मेगा वाट ट्रांसफार्मर में से के एक पिछले 13 जून से फैल हुआ बताया जा रहा है. जिस दिन से यह 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर फैल हुआ है उस दिन से पूरे कटरा विद्युत वितरण केंद्र में इलेक्ट्रिक सप्लाई वाधित है जिससे पूरे क्षेत्र को रुक रुक कर लाइन मिल पा रही है. स्वाभाविक है की जो कार्य कुल 10 मेगा वाट ट्रांसफार्मर से हो रहा था अब वह मात्र 5 मेगा वाट से हो रहा है. यदि जल्द ही फैल हुआ 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर नही लगा तो पूरे कटरा क्षेत्र में बिजली के लोड को देखते हुए शेष बचा 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर भी फैल होने की संभावना बनी हुई है जिससे आम आदमी की फजीहत तो बढ़ेगी ही साथ ही  बिजली विभाग की लापरवाही और लेटलतीफी से सरकार के ख़ज़ाने को और भारी नुकसान भी हो सकता है.


  चीफ इंजीनियर के एल वर्मा और अधीक्षण यंत्री रीवा संभाग खान को है सूचना

     कटरा विद्युत वितरण केंद्र एवं त्योंथर डी ई पटेल द्वारा स्वयं कटरा डीसी आकर फैल 5 मेगा वाट के ट्रांसफार्मर की जानकारी और फ़ोटो आदि ले जाकर अधीक्षण यंत्री खान एवं चीफ इंजीनियर के एल वर्मा को पहुचायी जा चुकी है लेकिन फिर भी विभागीय उदाशीनता के चलते अब तक फैल हुआ 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर नही लगाया गया है. यदि समय रहते जल्द से जल्द 5 मेगा वाट का ट्रांसफार्मर नही लगता तो वर्तमान में आंशिक रूप से कार्य कर रहे 5 मेगा वाट के दूसरे ट्रांसफार्मर के भी फैल होने की संभावना बनी हुई है साथ ही आम जनता को वाधित बिजली सप्लाई मिल रही है जिससे किसानों के कार्य भी रुके हुए हैं.

क्या कहना है जिम्मेदारों का

   जब इस संदर्भ में कटरा डीसी के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक गौरव सोनी से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि 13 जून से जले 5 एम वी ए ट्रांसफॉर्मर की लिखित जानकारी त्योंथर डी ई श्री आरसी पटेल द्वारा अधीक्षण यंत्री एवं चीफ इंजीनियर को पहुचायी जा चुकी है। ऊपर से बताया गया कि कार्यवाही चल रही है जल्द ही 5 एमवीए का फैल हुआ मुख्य ट्रांसफ़ॉर्मर बदल दिया जाएगा।

संलग्न - ज़िले के मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के त्योंथर संभाग अन्तर्गत कटरा डीसी के 13 जून 2018 से फैल हुए 5 मेगा वाट ट्रांसफार्मर की फ़ोटो और साथ ही कटरा विद्युत वितरण केंद्र का दिनांक 27 जून की शाम का परिदृश्य.

संपर्क विजली विभाग-

 1) कनिष्ठ यंत्री कटरा डीसी अभिषेक गौरव सोनी 9425824566,

 2) डी ई त्योंथर आर सी पटेल 

     मोब 9479867544,

  3) अधीक्षण यंत्री खान

  मोब 9425424302

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587

बिजली कर्मचारियों की ईपीएफ वेतन कटौती 6 वर्षों से नही पहुच रही खातों में (मामला ज़िले के त्योंथर संभाग मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के बिजली कर्मचारियों का)

दिनांक 28 जून 2018, स्थान - कटरा, रीवा-मप्र,

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा ,मप्र)

    ज़िले के बिजली कर्मचारियों की उनकी ईपीएफ के वास्ते काटी जाने वाली वेतन की राशि उनके ईपीएफ खातों में नही पहुच रही है ऐसा कहना है लगभग आधा दर्जन बिजली कर्मचारियों का. बता दें की प्राप्त जानकारी के अनुसार रीवा संभाग में पदस्थ रहे बिजली कर्मचारियों जिनमे सहायक ग्रेड 3 के कर्मचारी क्रमसः आशुतोष मिश्रा, इंद्रमणि सिंह, लक्ष्मी नारायण शर्मा, भूपेंद्र सिंह सेंगर, कनिष्ठ यंत्री लालगांव उमाशंकर द्विवेदी, एवं अन्य दो कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा और कटरा में पदस्थ भूपेंद्र सिंह बघेल सम्मिलित हैं जिन्होंने बताया की उनकी वर्ष जुलाई 2012 से ईपीएफ की वेतन कटौती की राशि उनके खातों में नही पहुची है. सभी कर्मचारियों के लिए यह एक चिंता का विषय है क्योंकि इसके लिए उन्होंने संबंधित अधीक्षण यंत्री के नाम और कलेक्टर को भी लिखित शिकायत दे रखी है लेकिन अब तक जब सुनवाई नही हुई तो सभी ने सामूहिक रूप से इकठ्ठा होकर मामला मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से रखना उचित समझा. सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को अपनी व्यथा बताते हुए उपरोक्त कर्मचारियों ने बताया की हम सब कर्मचारी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड त्योंथर संभाग के अधीनस्थ कार्यरत हैं जिन्हें ग्राम सेवा सहकारी समिति मर्यादित से मंडल कंपनी में सम्मिलियन किया गया है. बताया की आज दिनांक तक ईपीएफ की राशि की कटौती की जा रही है लेकिन राशि उनके खाते में नही आ रही है. कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से कार्यपालन अभियंता, संभागीय लेखापाल से शिकायत की गई लेकिन आश्वासन के शिवाय कोई पुख्ता कार्यवाही अब तक नही हुई है. 

     इस प्रकार दिनांक 28/06/2017 को आवक क्रमांक 07 कार्यालय अधीक्षण यंत्री, दिनांक 04/07/2017 कार्यालय कार्यपालन अभियंता, दिनांक 13/07/2017 को एक अन्य संबंधित कार्यालय में इन उपरोक्त पीड़ित कर्मचारियों ने संलग्न शिकायती आवेदन लगाकर गुहार लगाई है की यदि अचानक इन कर्मचारियों की मृत्यु हो जाती है तब इन सबका परिवार इधर उधर भटक कर दाने दाने के लिए मोहताज़ होगा जिसकी तत्काल सुनवाई की जाए.

कर्मचारियों की ईपीएफ उनके खातों में न भेजना मानवाधिकार का हनन

    यदि देखा जाए तो हर एक नागरिक का अधिकार बनता है की सरकार द्वारा संवैधानिक रूप से प्रदत्त सभी लाभ नियमानुसार उसे मिले. इसके अतिरिक्त भी यदि समाज और किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का हनन हो रहा हो जिसकी जिम्मेदार स्वयं सरकार हो तो ऐसे मामलों में सरकार को तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता होती है. सामान्य तौर पर गैर सरकारी कर्मचारी अथवा बेरोजगार आम नागरिक के मानवाधिकार की रक्षा जिसका कोई आधार न हो सर्वोपरि होती है परंतु जहां  तक मानवाधिकार हनन की बात है वह सभी नागरिकों के लिये समान रूप से लागू होता है. चाहे वह किसी जाति वर्ग का हो सरकारी हो गैर सरकारी हो धनवान हो अथवा गरीब. यदि मानवाधिकारों का हनन हो रहा है तो उसकी सुरक्षा की जानी अनिवार्य है.

बिजली कर्मियों के मानवाधिकार की हो सुरक्षा

     बिजली कर्मचारियों को उनके ईपीएफ के फण्ड से वंचित रखा जाना मूलभूत मानवाधिकारों का हनन की संज्ञा में आता है. जुलाई वर्ष 2012 से बिजली कर्मियों के ईपीएफ खातों में वेतन कटौती की राशि क्यों नही पहुच रही और इसका क्या कारण है इस पर तत्काल कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है. यदि बिजली कर्मचारियों को उनकी ईपीएफ राशि व्याज सहित नही मिलती तो उनके बाल बच्चे परेशानी का सामना करेंगे. जिस प्रकार से बिजली कर्मियों द्वारा अपने आवेदन में भी उल्लेखित किया गया की यदि अकस्मात उनकी मौत हो जाती है तो उनके परिवार बाल बच्चों की बदहाली का जिम्मेदार कौन होगा. 

यदि सरकारी कर्मचारियों की यह हालात तो आम नागरिक का क्या

    सही मायने में प्रशासनिक व्यवस्था में आज जिस प्रकार की अव्यवस्था छाई हुई है इसको तो देखकर यही लगता है की आम नागरिक की दुर्दशा और अधिक बढ़ेगी. जब सरकारी कर्मचारी अपने अधिकार नही हाशिल कर पा रहे तो आम नागरिक जिसका की कोई आधार भी नही और कोई प्रशासनिक अधिकारी भी उनका सहयोगी नही ऐसे में वह अपने मानवाधिकारों की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे यह बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.

    वहरहाल आज दिनांक तक त्योंथर संभाग बिजली कार्यालय के अधीनस्थ पदस्थ लगभग आधा दर्जन बिजली कर्मचारियों को उनका जुलाई वर्ष 2012 अर्थात 6 वर्ष के आसपास की ईपीएफ राशि उनके खातों में समायोजित नही हुई है और अभी कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं. अब देखना यह होगा बिजली विभाग स्वयं अपने ही कर्मचारियों के साथ कब तक न्याय कर पाता है.

संलग्न - संलग्न प्रपत्रों में देखें उपरोक्त शिकायती आवेदनों की फ़ोटो प्रतियां संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला - रीवा मप्र, मोब 07869992139, 09589152587

Monday, May 28, 2018

ट्रांसफार्मर जलने से अतरैला ग्राम में महीने से फैला घुप अंधेरा, नलकूप सूखे, ट्यूबवेल बन्द, आमजन में त्राहि त्राहि (मामला ज़िले के लालगांव डीसी अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां बताया जा रहा है 17 लाख का बिल बकाया)

दिनांक 28 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में जगह जगह ट्रांसफार्मर जलने से गर्मियों में त्राहि त्राहि मची हुई है. एक तो ज्यादातर नलकूप सूखे पड़े हैं ऊपर से यदि ट्यूबवेल से पानी पीने की कोई भी संभावना शेष बची थी वह ट्रांसफार्मर जलने से समाप्त हो गई. अब लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं. ऐसा लगता है मानो 17 वीं सताब्दी में जीवन जिया जा रहा हो जब 5 किमी में भी बमुश्किल एक कुआं होती थी.

   लालगांव डीसी अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर महीने भर से जला

     ज़िले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र  अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से ऊपर से जला पड़ा है लेकिन  शिकायतों के बावजूद भी बदला नही गया है. जब भी कंभी जेई लालगांव अथवा एई जवा से चर्चा की जाती है तो बताया जाता है की बिजली का बिल बकाया है अतः ट्रांसफार्मर बदला नही जाएगा.

  17 लाख बिजली बिल कैसे है बकाया?

    ट्रांसफार्मर बदले जाने की जब गुहार आमजन और उपभोक्तागण द्वारा विभाग में लगायी गई तो बताया गया की 17 लाख से अधिक का बिजली बिल अतरैला ग्राम का बकाया है अतः जब तक कम से कम 20 प्रतिशत नही भरा जाएगा तब तक ट्रांसफार्मर नही बदला जाएगा.

   सबसे बड़ी बात यह है की आखिर अतरैला ग्राम का बिजली बिल इतनी अधिक अमाउंट में बकाया था तो बिजली विभाग अब तक क्या सो रहा था? यदि किसी गरीब के हज़ार रुपये बकाया होता है तो उसको नोटिस पर नोटिस भेजी जाती हैं तो यह कैसे हुआ की एक ग्राम का अकेले 17 लाख से ऊपर बकाया हो गया? क्या अतरैला ग्राम में फैक्ट्री चलती है की इतनी बिजली खपत हो रही है? प्राप्त जानकारी में लगभग 180 रजिस्टर्ड बिजली उपभोक्ता बताए गए हैं जिनमे 35 के आसपास नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्ता है. बांकी के 100 से ऊपर हरिजन आदिवाशी समूह के उपभोक्ता है. जो लिस्ट एरिया इंजीनियर जवा द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को उपलब्ध करायी गई है उसमे हरिजन आदिवाशी और अन्य उपभोक्ताओं के सबसे अधिक बकाया है और इनकी प्रतिव्यक्ति ज्यादा राशि भी बकाया है. ऐसे में सवाल यह उठता है हरिजन आदिवशियों के बिजली बिल तो सरकारें वैसे भी समय समय पर माफ करती रही है तो 30 हज़ार या 25 हज़ार प्रतिव्यक्ति हरिजन के बिल कैसे शेष हैं. इसका मतलब तो यह हुआ की 300 रुपये के आसपास प्रतिमाह औसत लगाया जाय तो  3600 रुपये सालाना बनता है तब इसका मतलब यह हुआ की 7 से 8 साल से किसी भी हरिजन आदिवाशी ने कोई बिल नही भरा और बिल माफ भी हुए थे। तब इसमे मोटर कनेक्शन धारक और अन्य ग्रामीणों का क्या दोष है जो नियमित बिल भुगतान कर रहे हैं? क्या 180 में से उन 35 नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी द्वारा अलग से बिजली सप्लाई नही दी जानी चाहिए? मानाकि 17 लाख बकाया वाले दोषी हो सकते हैं परंतु इसमे नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? बिजली कंपनी ऐसा अन्याय क्यो कर रही है? यह तो सीधे सीधे व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें की किस प्रकार इस भीषण गर्मी में नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्तागण अतरैला ग्राम (डीसी लाल गांव, डी ई त्योंथर) के समक्ष खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यक्रता,

रीवा मप्र, 7869992139, 9589152587.

Saturday, May 19, 2018

शौभाग्य योजनान्तर्गत विद्युतीकरण के लिए ग्रामीण विद्युत अभियंता उत्कर्ष द्विवेदी ने जे ई कटरा के साथ कैथा का किया दौरा (मामला सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी की ग्रामीण विद्युत के ट्विटर एकाउंट पर की गई शिकायत का जिसमे शौभाग्य योजना के कार्यों में लेटलतीफी की बात की गई थी)

दिनांक 19 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    ज़िले प्रदेश एवं पूरे देश में शौभाग्य योजनान्तर्गत किये जा रहे विद्युतीकरण में पूरे देश में काम चल रहा है. आये दिन टारगेट अचीवमेंट के किस्से मीडिया में आ रहे हैं. परंतु देश में कई ऐसे भी स्थान हैं जहां पर अभी भी सही तरीके से खम्भे गाड़कर घर घर बिजली नही पहुचाई गई है जबकि दूरस्थ स्थित खंभों से कटिया लगाकर बिजली जलाने का सिलसिला जारी है.

   इसी परिपेक्ष्य में रीवा ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत आने वाले कैथा ग्राम में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य और साथ ही टूटे उखड़े खंभों को दुरुस्त किये जाने एवं खुल्ले तारों को केबलिकरण किये जाने और छूटे हुए लोगो को बिजली प्रदान किये जाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा पिछले कुछ समय से ग्रामीण विद्युत और आरईसी के ट्विटर एकाउंट में तथा गर्व सेल के ईमेल एड्रेस में भी शिकायत भेजी गई थी जिज़ पर तत्काल संज्ञान लेते हुए गर्व सेल एवं आरईसी से ग्रामीण विद्युत अभियंता उत्कर्ष द्विवेदी को जांच और सर्वे के लिए कैथा भेजा गया जहां दिनाँक 18 मई को जीवीए के उत्कर्ष द्विवेदी के साथ कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक गौरव सोनी एवं लाइनमैन सुधाकर मिश्रा उपस्थित हुए. इस बीच कैथा की पुरानी हरिजन बस्ती से सर्वे का कार्य प्रारम्भ हुआ जिसमे हरिजन बस्ती में टूटे हुए दो बिजली पोल को एक दो दिन में सुधारकर 25 केवीए ट्रंसफॉर्मेर से लाइन सप्लाई तत्काल किये जाने की बात हुई साथ ही पास ही केवट-पटेल बस्ती में भी आंधी की वजह से टूटे खम्भे एवं अतिरिक्त खम्भा गाड़े जाने की बात आई. इसी प्रकार भ्रमण कर पूरे कैथा ग्राम की बिजली व्यवस्था की जानकारी ली गई जिसमे पाया गया की अभी भी एक बस्ती ऐसे बची थी जिसमे अबाधित बिजली सप्लाई किये जाने वास्ते कुछ एचटी और कुछ एलटी पोल गाड़े जाने अनिवार्य होंगे साथ ही एक अतिरिक्त शौभाग्य योजनान्तर्गत 25 केवीए का ट्रांसफार्मर भी लगाया जाना होगा.

   इस प्रकार लगभग 2 घंटे चले पैदल भ्रमण और सर्वे में पूरी विद्युत व्यवस्था का जायज़ा लिया जा कर प्राक्कलन रिपोर्ट तैयार किया गया जिसे अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है. 

    इस मर्तबा किये गए सर्वे से सभी घरों में बिजली सप्लाई पहुच जाएगी जिससे दूर खंभों से कटिया लगाने की रिस्की परंपरा से भी ग्रामीणों को छुटकारा मिलेगा.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में कैथा ग्राम में सर्वे करते हुए ग्रामीण विद्युत अभियंता उत्कर्ष द्विवेदी एवं कटरा डीसी के कनिष्ठ अभियंता जे ई अभिषेक गौरव सोनी.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

मोबाइल - 07869992139, 09589152587,

Friday, May 18, 2018

लालगांव डीसी - अतरैला ग्राम का ट्रांसफॉर्मर जला, लोग पानी बिजली बिना त्रस्त (मामला ज़िला रीवा अंतर्गत लालगांव विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां पिछले एक माह से 100 केवीए का ट्रांसफार्मर जला है लेकिन कहीं सुनवाई नही, बिजली बिल 40 प्रतिशत से अधिक जमा)

दिनांक 18 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव रीवा मप्र,

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में ट्रांसफार्मर जलने के कारण जगह जगह जद्दोजहद शुरू है. पिछले दिनों कटरा विद्युत वितरण केंद्र में अमिलिया ग्राम का मामला ज्यादा पुराना नही हुआ है जहां दो जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने के लिए ग्रामीणों को 6 माह के अधिक समय लग चुका था जब यह मामला मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता की नजर में आया तो ग्रामीण उपभोक्ताओं को जाकर राहत मिली। 

लालगांव डीसी के अतरैला ग्राम में 100 केवीए का जला ट्रांसफॉर्मर 

     सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को दी गई जानकारी के आधार पर दिनांक 18 मई 2018 को अतरैला ग्राम में दौरा किया गया तो वहां पर ग्रामीणों का हुजूम जमा हो गया और सभी ने एक एक करके अपनी समस्या गिनाई जिनमे बिजली पानी से लेकर पंचायत के विकाश कार्य में अनियमितता तक सम्मिलित थे. 

   मूल रूप से जिस प्रयोजन के लिए पहुचा गया था वह था अतरैला ग्राम का महीने भर से जला हुआ ट्रांसफार्मर जिसकी वजह से न तो लोग बिजली जला पा रहे हैं और न ही उनके मोटर पंप चल रहे हैं. जहां एक तरफ नलकूप हवा और आग उगल रहे हैं ऐसे में मात्र मोटर पंप बोरवेल ही लोगों के एकमात्र सहारा हैं और यदि इस समय ट्रांसफार्मर ही जल जाए तो लोगोँ की कितनी बड़ी दुर्दशा हो सकती है यह सोचने वाली बात है.

  

   अतरैला ग्राम के लोगों ने जाहिर किया आक्रोश

  सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में अतरैला ग्राम के रहवासी चिलचिलाती धूप में घरों के बाहर आ गए और एक स्वर में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की माग की. सभी का कहना था उनकी फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं जिससे लोग त्रस्त हैं अब यदि उनका ट्रांसफार्मर नही बदला गया तो उनकी गर्मी की प्याज, मूग और सब्जियों की खेती भी चौपट हो जाएगी. लोगों द्वारा बताया गया की वह सभी नियमित बिल देने वाले उपभोक्ता हैं और मात्र कुछ ही ऐसे डिफाल्टर लोग हैं जिन्होंने बिजली बिल समय पर नही दिया है जिनकी वजह से परेशानी हो रही होगी. सभी ने बताया की इस भीषण सूखा अकाल की स्थिति में भी उनका सामूहिक रूप से 50 प्रतिशत से अधिक बिजली बिल भरा जा चुका है परंतु फिर भी विभाग समय पर ट्रांसफार्मर नही बदल रहा है जो कि ग्रामीणों के साथ ज्यादती है.

   स्थानीय ग्राम निवासी  प्रमोद सिंह, श्यामलाल शुक्ला, रोहिणी प्रसाद द्विवेदी, अजीत सिंह, अनुराग सिंह, बालेंद्र द्विवेदी, शुभम सिंह, निशांत सिंह, बृजेश विश्वकर्मा, पुष्पराज विश्वकर्मा, भगवानदीन साहू, संदीप कोरी, परमेश्वर कोरी, रामपाल कोरी, अगनु साहू, रजनीश साहू, राकेश कोरी, बृजलाल साकेत, अशोक साकेत, छोटे साकेत, आदि अतरैला ग्राम के  उपभोक्ताओं ने बताया की यदि उनका जला हुआ ट्रांसफार्मर 2 से 3 दिन के अंदर नही लगता तो सभी लोग आंदोलन करेंगे जिसकी जबावदेही बिजली विभाग और प्रशासन की होगी.

कनिष्ठ यंत्री विद्युत वितरण केंद्र लालगांव ने क्या कहा

   जब इस संदर्भ में लालगांव  विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री से सामाजिक कार्यकर्ता की बात हुई तो जेई का कहना था की प्रपोजल बनाकर त्योंथर डीई को भेजा जा चुका है और जल्द ही नया ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा. अभी प्रोसेस में दो तीन दिन का समय लग सकता है.

  संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें अतरैला ग्राम का जला हुआ ट्रांसफार्मर और ट्रांसफार्मर के पास एकत्रित अतरैला ग्राम और लाल गांव डीसी के उपभोक्ता जिन्होंने माग की हुई है जल्द से जल्द पुराना जला हुआ ट्रांसफार्मर बदल कर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

  मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Sunday, April 29, 2018

14 हज़ार लेनदेन की शिकायत आते ही बिजली अधिकारियों को लगा 440 वोल्ट का करंट - अमिलिया ग्राम के 6 महीने से जले 2 ट्रांसफॉर्मर बदले गए (मामला ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत अमिलिया ग्राम के दो जले हुए ट्रांसफॉर्मर का)

दिनाँक 29 अप्रैल 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानंद द्विवेदी)

  जब गरीब किसानों की आवाज़ कहीं न सुनी गई तो उन्होंने अपना सारा दुख दर्द सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के समक्ष आकर रो दिया. उनकी आवाज़ में इतनी पीड़ा थी की उस आवाज़ की गूंज मीडिया के माध्यम से भोपाल और दिल्ली तक सुनी गई. आखिर ऐसा कौन सा नियम है जो गरीब किसानों को बिजली जलाने से रोकता है? जब एक तरफ सरकारें इंडस्ट्री और औद्योगिक जगत को भरपूर बिजली सप्लाई दे रही हैं और बेरोकटोक सब्सिडी दिए जा रही हैं तो आखिर देश का अन्नदाता जो दिन रात खेतों में गर्मी सर्दी वर्षा के वावजूद भी कड़ी मेहनत करके अन्न उगाए जा रहा है उसको बिजली और ट्रांसफार्मर से क्यों वंचित रखा जाय? मप्र सरकार ने किसानों के हित में कई अच्छे निर्णय लिए हैं जिसका नतीज़ा है उन्हें आसान किस्तों में कम राशि पर मोटर पंप का कनेक्शन, अटल बिजली योजना, राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन, और अब शौभाग्य योजनांतर्गत घर घर बिजली. फिर भी यूं कहें की विभागीय लापरवाही अथवा कुछ अन्य कारण. फिर भी कहीं न कहीं ये बात महत्वपूर्ण है की योजनायों का सही तरीके से और समयावधि में क्रियान्वयन किया जाए. क्रियान्वयन में समस्याओं और लेटलतीफी की वजह से आम जनता को परेशानी से गुजरना पड़ता है. 

   शूखे अकाल में मात्र 20 प्रतिशत बिजली बिल जमा पर ही किसानों के बदले जाते हैं जले ट्रांसफार्मर 

    ग्रामीण इलाकों में किसानों की सिंचाई से जुड़े हुए ट्रांसफार्मर बदलने संबंधी नित नए नियम समय समय पर निकलते रहते हैं. अभी पिछले साल के शूखे के पहले तक यह 60 प्रतिशत रखा गया था इसके बाद यह घटकर 40 प्रतिशत हुआ और जब सरकार ने देखा की किसान सूखा अकाल में मारा गया है और उसके पास कुछ बचा नही है तो इस स्थिति में सरकार ने इसे घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया था. अर्थात जिस ट्रांसफार्मर से संबंधित कुल लोड का बिजली बिल यदि 20 प्रतिशत तक भर दिया गया है तो वहां ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा.

पर बिजली कंपनी नही मानती सरकार के फरमान

    अब यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है की काफी कुछ पहुच पर निर्भर करता है. यदि किसी गांव में कोई बहुत पहुच वाला है किसी नेता से संपर्क में है, मंत्री से संपर्क है तो उस स्थिति में ट्रांसफार्मर लगाने संबंधी विशेष नियम कायदों को फॉलो नही किया जाता. परंतु यदि बेचारे गांव वालों की कोई पहचान नही है तो उनके लिए जले हुए ट्रांसफार्मर बदलवाना टेढ़ी खीर हो जाता है. फिर उनकी कोई सुनवाई नही होती.

आम नागरिक और किसानों का मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता ही बनते हैं सहारा 

   ऐसे में मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता अथवा गांव का कोई चलता फिरता व्यक्ति जब इन गरीबों की आवाज़ उठाये तभी कुछ हो सकता है. जैसा की कटरा डीसी अन्तर्गत अमिलिया गांव के किसानों के साथ हुआ, जब अमिलिया के किसानों की 6 माह से कोई सुनवाई नही हुई तो वह थक हारकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के पास आये और अपनी पीड़ा व्यथा बतायी. गनीमत तो यह थी मामला जोरदार तरीके से मीडिया में रखा गया जिसमे पूरे गांव भर के इकठ्ठा हुए दर्जनों लोगों ने पहली बार कैमरे के सामने आकर दिल खोलकर पीड़ा व्यथा रखी जो यूट्यूब में वायरल हुआ और साथ ही रीवा ज़िले से प्रकाशित होने वाले लगभग कई महत्वपूर्ण अखबारों में आया तो कटरा डीसी और त्योंथर डी ई के अधिकारियों की नीद हराम हो गई. 

  मामला यहीं आकर नही रुका बल्कि पुनः आज से कल होता देख मामले को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ऊर्जा मंत्री पारस जैन के निज सचिव पुराणिक मंदर और संभागीय बिजली अधिकारियों के पास तक पहुचा दिया गया तब और भी उथल पुथल मच गई.

   आनन फानन में कटरा डीसी के जे ई अभिषेक सोनी और त्योंथर डी ई पटेल सहित बजाज कंपनी के एरिया इंजीनियर अनिल द्विवेदी एवं राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना के कार्यभार लिए हुए ओ पी द्विवेदी ने भी हाँथ पैर मरना प्रारम्भ कर दिया. बताया गया की आरजीवी योजना में गड़बड़ी की वजह से जेई और डीई को उलझना पड़ा वरना यह कार्य मात्र आरजीवी वालों का ही था.

  अमिलिया के दोनो जले ट्रांसफार्मर बदल दिए गए

     आज जहां कई ग्रामों में सालों से जले हुए ट्रांसफार्मर आज तक नही बदल पाए हैं वहीं मीडिया के प्रभाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सीधे जनहित के मुद्दे को लेकर एकजुट प्रहार से अमिलिया ग्राम के दोनो ही ट्रांसफार्मर बदल दिए गए. दिनांक 29 अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को त्योंथर डी ई द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार अब अमिलिया ग्राम खुशहाल स्थिति में है और 29 अप्रैल को ही दोनो ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं. 

पिछले 2 सप्ताह से हुए अथक प्रयास का नतीज़ा है दोनो ट्रांसफार्मर का बदलना

   पिछले दो सप्ताह से लगातार प्रतिदिन इस विषय पर जेई, डीई, आरजीवी, बजाज कंपनी, एसई, और ऊर्जा मंत्री तक के निरंतर संज्ञान में लाया गया तब जाकर आज यह दोनो ट्रांसफार्मर एक साथ बदले हैं. इसके साथ ही अमिलिया ग्रामवासियों का अधिकारियों द्वारा पैसा लेकर ट्रांसफार्मर बदलने का आरोप भी काफी महत्वपूर्ण था जिस पर संबंधित अधिकारियों की नीद हराम हो चुकी थी.

पूरे जिले में सैकड़ों अमिलिया जैसे उदाहरण फिर भी किसानों की कोई सुनवाई नही

    आज लगभग रोज ही मीडिया में यह खबर आम है की अमुक ग्राम में ट्रांसफार्मर जला हुआ है लेकिन बदला नही गया है. पर इन खबरों का कोई विशेष प्रभाव नही हो रहा है. आखिर क्यों? इसका सबसे बड़ा कारण यह है की खबर तो चल जाती है लेकिन उस ग्राम क्षेत्र के आसपास और साथ ही जनप्रतिनिधि इस पर कोई संज्ञान नही लेते हैं. आज जो काम सरपंचों, विधायकों, सांसदों, और अन्य जन प्रतिनिधियों का होना चाहिए वह मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं. आखिर सबसे बड़ा प्रश्न यही है की जिस ग्राम का ट्रांसफार्मर जला हुआ है उस गांव का सरपंच क्या सो रहा है? उस क्षेत्र का जनपद और ज़िला पंचायत सदस्य कहां गया? वहां का विधायक और सांसद कहां गया? इन प्रश्नों से स्पष्ट है कि भारत का लोकतंत्र आज मात्र दिखावा बन कर रह गया है. सभी जनप्रतिनिधि अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए हैं और आम जनता और किसान मरने के लिए मजबूर है.

  किसान सम्मान यात्राओं के ढोंग की खुलती पोल

     इसका अंदाजा इसी बात के लगाया जा सकता है की ये नेता और समाज के ठेकेदार कितना बड़ा ढोंग और प्रोपोगंडा करते हैं. अभी अभी पूरे प्रदेश में किसानो के नाम पर किसान सम्मान यात्रा निकाली गई. किसानों की रैली निकाल दिखावे के तौर पर किसानों को सम्मानित किया गया. जब किसान मर रहा है उसकी कोई सुनवाई नही हो रही तो काहे की किसान सम्मान रैली? किसान को उसकी फसल के उचित दाम नही मिल रहे. किसान द्वारा फसल में लगाए गयी पूंजी तक वसूल नही हो पा रही है, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है, किसान के पिछले 6 माह और साल भर से जले हुए ट्रांसफार्मर तक नही बदले गए हैं तो फिर काहे की किसान सम्मान रैली? क्या पार्टियों के कार्य कर रहे नुमाइंदे ग्राम में भ्रमण के दौरान किसानों की इन मूलभूत समस्याओं के विषय में नही पूंछते? क्या किसान इन ठेकेदारों को यह नही बताते की उनको क्या तकलीफ है? सच्चाई तो यह है सब को सब कुछ पता है लेकिन समस्या के उन्मूलन के लिए कोई प्रयास नही करना चाहता मात्रा दिखावा और ढोंग करना चाहता है जिसका परिणाम है की आज किसान और आम नागरिक विभिन्न प्रकार की मानवाधिकार संबंधी समस्याओं से ग्रस्त है और उसकी कहीं कोई सुनवाई नही हो रही है.

संलग्न - त्योंथर डीई द्वारा ग्रामीणों से बनवाया गया पंचनामा जिसमे शिकायतकर्ताओं से हस्ताक्षर करवाया गया है कि दोनों जले हुए ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं। साथ ही इस विषय मे शिकायतकर्ता शैलेन्द्र पटेल से चर्चा के कुछ अंश जिसमे पूरे प्रकरण को वह बता रहा है। साथ ही अन्य संलग्न फ़ाइल।

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

  मोबाइल 7869992139, 9589152587

Saturday, April 21, 2018

14 हज़ार लाओ, ट्रांसफार्मर लगवाओ (त्योंथर डी ई और कटरा डीसी में दलाली का दौर जारी, किसानों को 6 माह से किया जा रहा परेशान, जबकि गांव का बिल 75 प्रतिशत से अधिक पूर्ण, मामला कटरा डीसी का)

दिनाँक 21 अप्रैल 2018, स्थान - कटरा डीसी रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

    ज़िले के विद्युत वितरण केंद्रों में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदल कर नए ट्रासंफार्मर लगाए जाने के नाम पर दलाली का दौर जारी है. पुख्ता जानकारी के अनुसार कटरा विद्युत वितरण केंद्र में आज से 6 माह पूर्व अमिलिया ग्राम के दोनो ट्रांसफार्मर जल गए थे. कारण था - कभी भी लाइन मेंटेनेंस का काम का न होना. हाई टेंशन लाइन में फाल्ट और साथ ही एल टी लाइन में भी लगातार लगने वाले फाल्ट की वजह से आज आये दिन नए नए ट्रांसफार्मर जल जाया करते हैं और बिजली विभाग की नजरअंदाजी और उपेक्षा की वजह से करोड़ों की चपत सरकारी ख़ज़ाने में लग रही है.         आखिर रोज़ इतने ट्रांसफार्मर क्यों जल रहे हैं इसके पीछे क्या कारण हैं? ट्रांसफार्मर बदलने में फिर देरी क्यों हो रही है? क्यों आम जनता को अनायास ही परेशान किया जा रहा है जबकि देखा जाए तो औसत और मनमुताबिक बिलिंग का काम लगातार जारी है उसमे कोई सुधार नही हो रहा है. इन सब बातों को लेकर बिजली कंपनी पहले से ही कठघरे में खड़ी है.

राजीव गांधी योजना का ट्रासंफार्मर लगाने के बाद भी नही किया चालू

    वहीं अमिलिया तालाब के पूर्व एवं उत्तर के कोने में मंदिर के पास गरीबों और बीपीएल हितग्राहियों के लिए एक योजना विशेष के अंतर्गत लगाया गया राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन का ट्रांसफार्मर ठेकेदार ने चालू ही नही किया. बताया गया की ठेकेदार सामग्री और चिमनी का तेल आदि लेकर ही भाग गया. ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन और थाने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन कोई सुनवाई नही हुई.

    अमिलिया के उपभोक्ताओं में वैद्यनाथ पटेल ने बताया की मिशन अंतर्गत लगाया  गया ट्रासंफार्मर यदि चालू हो जाता तो गांव के बिजली का काफी हद तक लोड भी नियंत्रित हो जाता जिससे रोज रोज़ ट्रांसफार्मर जलने का टंटा भी टूट जाता. कौसल पटेल द्वारा बताया गया की यद्यपि राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना का ट्रांसफार्मर आज से कई माह पूर्व लगाया गया है और आज तक लाइन सप्लाई नही दी गई है फिर भी मनमुताबिक और औसत बिलिंग भेजी जा रही है. गरीबों को 5 सौ से ऊपर के बिजली बिल भेजे जा रहे हैं जबकि न तो कोई मीटर रीडिंग लेने आता और न ही यह पता करने की कहाँ बिजली चालू है और कहां बन्द. शैलेन्द्र पटेल द्वारा बताया गया की बिजली कंपनी पूरी तरह दलाली और शोषण पर आमादा है. सभी ने के स्वर में बताया की मुख्यमंत्री गरीबों और किसानों के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं की बातें कर रहे हैं पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है. सभी ने राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन अंतर्गत लगाए गए ट्रांसफार्मर को चालू किये जाने की भी बात कही है और बताया है की यदि उनकी बिजली समस्याओं का समाधान समय पर नही हुआ तो सभी ग्रामीण आंदोलन करेंगे जिसकी जिम्मेदार यह शासन प्रशासन होगा.

  6 माह पहले जला ट्रांसफार्मर, नया लगाने के लिए दिया गया 14 हज़ार रुपये का घूस

    त्योंथर डी ई एवं कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले अमिलिया ग्राम के दोनो ट्रांसफार्मर आज से 6 माह पहले जल गए थे. किसानों ने जब गुहार लगाई तो बताया गया की आपके गांव के ट्रांसफार्मर इसलिए नही लगाए जा रहे क्योंकि आपके बिजली बिल बकाया हैं. परंतु गांव वालों ने जल्दी ही बकाया का 40 प्रतिशत से अधिक की बिजली बिल जमा कर दिया और त्योंथर डी ई और कटरा जे ई को नया ट्रांसफार्मर लगाने की गुहार लगाई. तब फिर गांव वालों को बताया गया की 14 हज़ार लाइये तो नया ट्रांसफार्मर लगेगा, इस प्रकार सभी उपभोक्ताओं ने चंदा करके 14 हज़ार इकठ्ठा किया और जब इंजीनियर को दिया तब जाकर एक ट्रांसफार्मर लगा. 

   दूसरे ट्रांसफार्मर के लिए अभी भी माग रहे अतिरिक्त 5 हज़ार रुपये

    ग्राम अमिलिया के ही नियमित बिजली उपभोक्ता और कृषि कार्य हेतु मोटर पंप का कनेक्शन लिए हुए  हितग्राहियों में वैद्यनाथ पटेल पिता राम स्वयंबर पटेल अमिलिया 

आई वी आर एस नंबर -5347051658220,  कौसल पटेल पिता राजधर पटेल अमिलिया,  रामराज पटेल पिता राम पियारे पटेल अमिलिया,  शैलेंद्र पटेल पिता राजेश पटेल अमिलिया,  बृजनंदन पटेल पिता अम्बिका पटेल अमिलिया,  लल्लू पटेल पिता रामसखा पटेल अमिलिया आदि उपभोक्ताओं ने बताया की उन्होंने 6 माह पहले जले ट्रांसफार्मर को बदलने के लिए काफी प्रयाश किये लेकिन बताया गया की अलग से पैसे लगेंगे तभी ट्रांसफार्मर लग पायेगा. अभी बताया गया की जे ई और डी ई ने जमुई सरपंच राहुल पटेल की उपस्थिति में 5 हज़ार अतिरिक्त की माग की है तभी ट्रांसफार्मर लगेगा. इस बाबत सभी ग्रामवशियों ने इकठ्ठा होकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के समक्ष अपनी पीड़ा व्यथा बताई और अमिलिया हायर सेकेंडरी स्कूल परिषर में ट्रांसफार्मर के पास अपना वक्तव्य और साक्षात्कार भी दिया है. जिसमे सभी ने 14 हज़ार और 5 हज़ार दलाली के तौर पर लिए जाने वाले राशि को एकमत से स्वीकारा है और साथ ही अपने ट्रांसफार्मर को लगाए जाने की माग की है. लोगों ने बताया कि उनके घूस में लिए गए पैसे की वापसी होनी चाहिए साथ ही बिजली न उपयोग किये जाने के कारण 6 माह से लगातार दिया जा रहा अवैधानिक बिल भी काटा जाना चाहिए।

   आज इस सूखा अकाल में किसान पहले से ही मारा गया है और ऐसे में यदि सरकारी विभागों द्वारा इस प्रकार उन्हें टार्चर और शोषण किया जाएगा तो किसान का त्रस्त होकर और अधिक मरना और अतमहत्या करना तय है और तब सरकारें इस बात को गंभीरता से नही देखेंगी आखिर क्या वजहें थीं की किसान आत्महत्या कर रहे हैं. अब प्रश्न यह उठता है की ग्रामीण इलाकों में सरकारी नियमानुसार पूरे गांव के बकाया का 20 प्रतिशत और उपोभोक्ताओं की संख्या का 50 प्रतिशत में से दोनो में से कोई भी कंडीशन की पूर्ति होने पर आज तत्काल 24 घंटे में नया ट्रांसफार्मर लगाए जाने का प्रावधान है तो जब सभी कंडीशन पूर्ण हो रही हैं तो आखिर यह बिजली कंपनी क्यों मनमानी करने में तुला है ? आखिर बिजली कंपनी को सरकार के फरमान के अनुरूप काम करने में क्या आपत्ति है? आखिर किसान और परेशान जनता बिजली कंपनी के अधिकारियों को क्यों अलग के घोंस दें? जो बिजली अधिकारी यह घूंस की मांग कर रहे हैं और पूरा गांव इस बात को एक स्वर में बोल रहा है तो इनके ऊपर लोकायुक्त और ई ओ डब्लू द्वारा प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही क्यों न की जाए?

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   जब इस विषय मे जिम्मेदारों से बात की गयी तो उनका यह कहना था

 1) "कटरा डीसी में कुछ ट्रांसफॉर्मर जले थे जिनमें एक को बदल दिया गया है। हमारी त्योंथर डी ई से बात हुई है। ट्रांसफार्मर एक दो दिन में आ जाएंगे तो जल्दी ही बदल दिए जाएंगे। 14 हज़ार लेकर ट्रांसफॉर्मर बदले जाने की जानकारी हमे नही है। राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना अन्तर्गत ट्रांसफार्मर के विषय मे जानकारी हमे नही थी। पर आपने बताया है तो हम बजाज कंपनी का काम देखने वाले एरिया इंजीनियर अनिल द्विवेदी से कहकर जल्द ही सुधार कार्य करवा देंगे।" - अभिषेक सोनी, कनिष्ठ यंत्री पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण केंद्र कटरा, रीवा मप्र।

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2) "अभी तक यह बात हमारे संज्ञान में नही थी कि अमिलिया ग्राम का ट्रांसफॉर्मर जला हुआ है। लेकिन आपने बताया है तो हम जे ई कटरा से जायज़ा लेकर जल्द ही बदलवाने का प्रयास करेंगे। हम इसको जल्द ही दिखवाते हैं।" - त्योंथर डी ई श्री पटेल

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   संलग्न - ज़िले के कटरा डीसी और त्योंथर डी ई अंतर्गत आने वाले अमिलिया ग्राम के त्रस्त और परेशान किसान और उनके परिवार जो की 6 माह से जले पड़े ट्रांसफार्मर के पास खड़े हुए हैं और साथ ही पास स्थित एक वृहद तालाब और उसके पास अमिलिया हायर सेकेंडरी स्कूल.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र

  मोबाइल  - 7869992139, 9589152587

Tuesday, April 10, 2018

शिक्षा के मंदिर में हादसों का भय, पानी के मानवाधिकार की जद्दोजहद में शिक्षा का अधिकार पड़ा बौना ( मामला सिरमौर तहसील अंतर्गत पनगड़ी एवं पताई पंचायत में शासकीय माध्यमिक शाला का, साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप जबकि खुली हाई टेंशन लाइन दे रही मौत को आमंत्रण)

दिनांक 11 अप्रैल 2018, स्थान - भठवा/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    राइट टू एजुकेशन अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम तो प्रारम्भ हो गया लेकिन विद्यार्थी इस शिक्षा के अधिकार का कितना लाभ ले पा रहे हैं इसका पता किसी भी ग्रामीण स्तर पर संचालित स्कूल में जाकर देखा जा सकता है.

   ग्रामीण स्तर पर संचालित सरकारी स्कूलों में न कोई सुविधा होती है और न ही शिक्षा का कोई स्तर. ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र बमुश्किल प्रमाण पत्र तो ले लेते हैं पर इसके अतिरिक्त कुछ सीख नही पाते. 100 में से कुछ दो चार विरले ही ऐसे छात्र होंगे जिन्हें उनके क्लास के स्तर का कुछ विशेष  ज्ञान हो. आज शिक्षा की दुर्दशा हो चुकी है. जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय विद्यालयों की शिक्षा बद से बदतर होती जा रही है भविष्य में युवाओं का नाकाम होकर बेरोजगार घूमना लगभग तय है. 

   ग्रामीण क्षेत्र की शासकीय स्कूलों में ज्यादातर ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो गरीब परिवार से आते हैं जैसे किसान अथवा मजदूर वर्ग. ऐसे छात्रों के लिए किसी अच्छी स्कूल में और खासकर प्राइवेट अंग्रेज़ी माध्यमों की स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर पाना एक सपना ही होता है. विरले ही गरीब छात्र होते हैं जो अच्छी शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर पाते हैं.

कैसे पढ़ेंगे जब स्कूल के समय भरेंगे पानी  - पनगड़ी शासकीय स्कूल में साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप

   शिक्षा की बात चल रही थी तो ग्रामीण स्तर पर इसको भी बता दिया जाए की मूलभूत फैसिलिटी की कमी के चलते भी शिक्षक और छात्र ज्यादातर उनकी पूर्ति करने में परेशान रहते हैं तो ऐसे में छात्र कब पढ़ पायेगा और शिक्षक कब पढ़ा पाएंगे.

    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित पत्रकार प्रमोद सिंह और पनगड़ी निवासी सोनू सुक्ला द्वारा विजिट के दौरान स्कूल में उपस्थित प्रधानाध्यापक और शिक्षकों और छात्रों से संपर्क किया गया तो जो जानकारी प्राप्त हुई वह किसी भी ग्रामीण स्तर में संचालित शासकीय शिक्षा केंद्रों की स्थिति को भलीभांति बया करती है. बताया गया की स्कूल परिसर में जो नलकूप पंचायत विभाग अथवा पी एक ई द्वारा लगाया गया था वह काम लायक नही बचा है, उसकी सभी पाइप काम लायक नही बची है. बताया गया की यहीं 500 मीटर की दूरी पर स्थित किसी ग्रामवासी के व्यक्तिगत बोरवेल से छात्र पानी भरकर लाते हैं. पूरा समय मात्र पानी भरने में ही व्यतीत हो जाया करता है. ऐसे में छात्र क्या पढ़ पाएँगे. प्रधानाध्यापक द्वारा आगे बताया गया की हमने इसकी शिकायत कई बार की है लेकिन न तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सुध ले रहा है और  न ही पंचायत विभाग लिहाज़ा हमारे स्कूल में मध्यान भोजन से लेकर बर्तन धोने तक सभी में तकलीफ होती है. कभी कभी इसी कारण मध्यान भोजन भी नही बन पाता है.

 पानी की समस्या तो है ही यहां बीच प्राँगण में लगा दिया ट्रांसफार्मर भी, किसी भी वक्त हो सकता है कोई भीषण हादसा 

  पानी की समस्या तो अपने स्थान पर है ही साथ ही स्कूल के बाहर बाउंड्री के बीचोंबीच एक ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ है जो एकदम खुले में है. अमूमन यदि किसी कारण बस ट्रांसफार्मर लगाया हुआ है तो भी ट्रांसफार्मर को चारों तरफ से बन्द किया जा सकता है और एंगल गाड़कर तार की जाली लगायी जानी चाहिए जिससे प्राइमरी कक्षा के छोटे बच्चे खेलते समय सीधे ट्रांसफार्मर और खुले तारों के संपर्क में न आ पाएं लेकिन इसकी किसी को फिकर ही नही. न इस संबंध में स्कूल प्रबंधन ने ही कुछ किया और न ही पंचायत अथवा बिजली विभाग ने. आलम यह है की हर ग्राम की स्कूलों में इसी प्रकार या की बिजली के खुले तार झूल रहे हैं अथवा ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है. सब की नीद तब खुलेगी जब कोई भीषण हदशा हो जाएगा और कोई बच्चा फसकर झुलस जाएगा.

  ज़िले की सभी सकूलों का सर्वे किया जाकर अभियान चलाकर खुले बिजली के तार खंभे और ट्रांसफार्मर स्कूल परिसर से तत्काल हटाये जाने चाहिए

    जब इस संदर्भ में ग्रामीण लोगों और बच्चों के अभिभावकों सहित शिक्षकों समाजसेवियों से चर्चा की गई तो सभी का एक स्वर में कहना था की मात्र पनगड़ी स्कूल ही नही बल्कि जिले की सभी स्कूलों में अभियान चलाकर स्कूल परिसर के अंदर से बिजली सप्लाई को हटाया जाना चाहिए. बिजली के खंभे और खुले बिजली के तार स्कूल परिसर के अंदर रखे जाने का कोई औचित्य ही नही है. स्कूल परिसर में बच्चे मध्याह्न छुट्टी होने पर खेलते कूदते रहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर खुले तारों और ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ सकते हैं ऐसे में किसी भी समय कोई भी दुखद हादसा हो सकता है.

  लालगांव विद्युत वितरण केंद्र के अतरैला शासकीय स्कूल में भी खतरे के निशान के ऊपर है हाई टेंशन लाइन के खुले तार

   भठवा निवासी और पत्रकारिता के साथ जुड़े प्रमोद सिंह ने बताया की उन्होंने ग्रामीण जनों के सहयोग के साथ पिछले कई वर्षों से उनके क्षेत्र अतरैला में शासकीय स्कूल परिसर में हाई टेंशन लाइन के खुले झूलते तारों को हटाने के लिए जद्दोजहद की है लेकिन अब तक उसका कोई स्थायी समाधान नही निकल पाया है. जब इस संबंध में कटरा विद्युत केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी से बात की गई तो उनका यह कहना था की हमारे पास कोई विशेष प्रावधान नही होता जिससे इन तारों को पोल सहित शिफ्ट किया जा सके. उन्होंने आगे बताया की स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूल प्रसाशन से लिखित तौर पर विद्युत विभाग के नाम पत्र जारी कर हमारे पास पहुचाया जाना चाहिए. आगे की प्रक्रिया में विद्युत विभाग लाइन शिफ्टिंग के लिए जरूरी खर्च का एस्टीमेट बनाकर संबंधित स्कूल प्रसाशन को भेज देता है और आगे स्कूल प्रसाशन जब रमसा के माध्यम से वह राशि विजली विभाग के खाते में ट्रांसफर कर देगा तो हम अपने कर्मचारी भेज कर लाइन शिफ्टिंग करवा देते हैं. कटरा जे ई सोनी ने बताया की इसके पहले जब वह गोविंदगढ़ क्षेत्र में पदस्थ थे तब भी इस प्रकार के कई घटनाक्रम आये थे जिनमे स्कूल शिक्षा विभाग के फण्ड से स्कूलों के अंदर से लाइन शिफ्टिंग की गई थी. इसके अतिरिक्त कोई अन्य प्रक्रिया नही है जिससे इस लाइन को स्कूल परिसर के बाहर शिफ्ट किया जाय.

    उक्त प्रक्रिया को फॉलो भी किया गया और प्रमोद सिंह द्वारा अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक से कहकर लाइन शिफ्टिंग के बाबत आवेदन लालगांव कनिष्ठ यंत्री को भेजा जा चुका है. अब देखना यह होगा इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है. क्योंकि यदि सही समय पर कार्य नही हुआ तो किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है. इस बीच अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया की स्कूल परिसर स्थित झूलते हाई टेंशन लाइन के तारों की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं जिससे आग का लुकाड़ा जमीन पर स्पार्किंग की वजह के गिरा था लेकिन शौभाग्य से बच्चे लाइन के नीचे नही थे अतः कोई अप्रिय दुर्घटना नही हुई है. नवीन स्कूल भवन हाई टेंशन लाइन के बिल्कुल 2 फ़ीट ऊंचाई से गया है जिससे यदि कोई बच्चा कभी धोखे से छत पर चढ़ जाता है तो उसकी जान जा सकती है. इस पर प्रधानाध्यापक का कहना था की उन्होंने बच्चों को शख्त हिदायत दे रखी है की कोई भी छात्र भूलकर भी नवीन स्कूल भवन की छत पर न जाए.

संलग्न - सिरमौर तहसील एवं गंगेव जनपद अंतर्गत पनगड़ी पंचायत की पनगड़ी स्कूल एवं पताई पंचायत अंतर्गत अतरैला स्कूल परिसर में खतरनाक स्तर पर हाई टेंशन लाइन के तार और ट्रांसफॉमर, साथ ही पनगड़ी स्कूल में सालों से बन्द पड़ा नलकूप.

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शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र.

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Sunday, April 8, 2018

रीवा विद्युत विभाग की धांधली - न कोई मेंटेनेंस न कोई केबलीकरण, हर स्थान पर बिजली के तार खतरे के निशान में, अगडाल/गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी में भी हाई टेंशन लाइन के झूलते हुए तारों से किसान की फसल में लगी आग, सब जलकर खाक


दिनाँक 08 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

    ज़िले में बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार के चलते बिजली के तारों से आगजनी की वारदाते रुकने का नाम नही ले रही हैं. अभी पिछले दिनों अकलसी ग्राम में अकलसी तालाब के पश्चिम दिशा में भूतपूर्व सरपंच मिथिला प्रसाद पटेल के घर की तरफ जाने वाले रास्ते के पास स्थित खेत में स्पार्किंग और झूलते हुए तारों की वजह सेके आग लग गई थी जिसमे पूरे खेत भर में लगी फसल आग के हवाले हो गई. किसी प्रकार ग्रामीणों ने बड़े मुश्किल से आग पर काबू पाया नही तो आसपास के खेत भी साफ हो जाते. यह आग पास ही खेत के बीचों बीच स्थित हाई टेंशन लाइन के मात्र 10 फ़ीट से भी काम ऊंचाई पर झूलते हुए तारों से स्पार्किंग और गुल्ल गिरने की वजह सेके लगी थी. इसमे किसी भी किसान का कोई दोष नही था और मात्र बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार की वजह सेके ऐसे हादसे आये दिन रिपोर्ट किये जा रहे हैं. 

    मेंटेनेंस और केबलीकरण न होने के कारण बनी है समस्याएं 

   यदि गहराई से देखा जाए तो पता चलेगा की यहाँ कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वआले ज्यादातर ग्रामों में ऑन रिकॉर्ड मेंटेनेंस और केबलीकरण के काम हो चुके हैं परंतु वास्तविक धरातल पर कहीं कोई काम पिछले दशकों से नही हुआ जिसकी वजह के मेंटेनेंस के अभाव में होम लाइन और साथ ही हाई टेंशन लाइन के ज्यादातर खंभे टेढ़े हो गए हैं कहीं जरूरत से ज्यादा झुक गए हैं और इसी प्रकार विद्युत तार भी कमज़ोर होकर खतरे के निशान के बहुत बाहर हो चुकले हैं जिसकी वजह से तार आपस में लड़ते रहते हैं और स्पार्किंग की वजह से आग लगने के चान्सेस बढ़ जाते हैं. दूसरे मौसम में भी आग लगती रहती है परंतु नुकसानी सबसे ज्यादा फसली सीजन में ही होती है जिसमे किसानों की पकी फसल देखते देखते स्वाहा हो जाती है. 

    अभी दिनाँक 06 अप्रैल की शाम 7 बजे के आसपास इसी प्रकार की एक घटना में त्योंथर ब्लॉक एवं डाढ़ पंचायत के सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा की ट्रेक्टर से लदी हुई गेंहूँ की फसल में आग लगने से पूरी फसल सहित ट्रेक्टर भी जल गया था.

    मेंटेनेंस एवं केबलीकरण का मुद्दा इसके पहले भी कई मर्तबा उठाया जा चुका है लेकिन कटरा विद्युत वितरण केंद्र सहित पूरे रीवा के बिजली विभाग के कानों में जूं तक नही रेंग रही है जिसका खामियाजा आम नागरिक और किसान उठा रहे हैं और बिजली की आग से अपनी खड़ी फसल खाक होतई देख रहे हैं. 

  यदि यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले कुछ सप्ताह में ऐसे कई बारदतें और भी सामने आ सकती हैं. बिजली विभाग को मेंटेनेंस की राशि का सही और समुचित उपयोग कर हर ग्राम क्षेत्र में बिजली के तारों और खंभों को दुरुस्त किया जाना चाहिए और साथ ही केबलीकरण के नाम पर जो धांधली विद्युत वितरण कंपनी और साथ ही ठेकेदारों द्वारा की गई है उसकी सही जांच कर पूरी रिकवरी होनी चाहिए.

संलग्न - कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत अगडाल/गढ़ फीडर में आने वाले अकलसी ग्राम के किसान के खेत में हाई टेंशन लाइन की वजह से लगी आग का दृश्य.

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शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र.

मोब 07869992139

Wednesday, January 24, 2018

Rewa, MP - बिजली विभाग का बिल नही फतवा, जारी हुआ तो भरना ही पड़ेगा

दिनांक 25 जनवरी 2018, रीवा/कटरा मप्र
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) ज़िले में बिजली विभाग का कहर निरंतर जारी है। कटरा डीसी सहित अन्य वितरण केंद्रों में बिना कनेक्शन और मीटर बैठाए ही औसत बिलिंग की जा रही है। हफ्ते की तरह उपभोक्ताओं से उगाही की जा रही है।
    अभी हाल ही में सूचना मिलने पर त्योंथर तहसील एवं ब्लॉक के जमुई पंचायत में पहुचा गया तो पाया गया कि जमुई ग्राम के हरिजन आदिवासी बिजली विभाग के औसत बिलिंग से परेशान थे। सभी ने अपना बिजली का बिल दिखाया और बताया कि राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन के तहत उनके घरों में बकायदे मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन दिया जाना था लेकिन बिजली ठेकेदार द्वारा उल्टा सभी से 100 रुपये प्रत्येक के हिसाब से लिये गए और केवल कुछ घरों में खराब मीटर का डिब्बा तो बिठा दिया गया लेकिन उन्हें कोई कनेक्शन नही दिया गया।
     आज 6 माह से ऊपर हो रहे हैं और औसत बिलिंग की जा रही है लेकिन किसी भी घर मे मीटर से लाइन सप्लाई नही हो रही है।
     अब यदि देखा जाए तो यह किस्सा मात्र कटरा डीसी अथवा जमुई ग्राम का ही नही है बल्कि रीवा के बिजली विभाग में आम व्यक्ति का निरंतर शोषण चल रहा है। लगभग सभी ग्रामों में निवासरत गरीबों के यहां मुश्किल से 1 य 2 एल ई डी बल्ब और वह भी रात में जलते हैं, साथ ही ग्रामों में बड़े ही मुश्किल से 6 से 8 घंटे भी लाइन नही दी जाती ऐसे में लाइन लॉस और औसत बिलिंग के नाम पर गरीबों के नाम हज़ारों का फतवा जारी करना कहां तक उचित है।
     कटरा डीसी में पूरे जिले के ग्रामों की ही तरह 90 प्रतिशत से अधिक घरों में मीटर नही लगाए गए हैं और मात्र औसत बिलिंग की जा रही है। केबलिकरन, फीडर सेपरेशन और मीटर बैठाने की पूरी राशि हजम कर ली गई है।
     जहां तक जमुई ग्राम के हरिजन अदिवशिओं का मामला था उनका कहना था कि उन्होंने तो अब तक कोई बिजली ही नही जलाई है फिर भी उनके नाम पर कैसे बिजली बिल भेजे जा रहे हैं
    हरिजन  बस्ती के लालमणि, रामसखा, रमेश, उमेश, दिलराज, सूर्यभान, रामावतार, रामकरण आदि ने बताया कि वह सभी बिना मीटर रीडिंग के औसत बिलिंग से पीड़ित है  और सभी ने यह बात कटरा डीसी में उठाई है लेकिन कोई नही सुन रहा और बस मनमाना बिल भेजे जा रहे है। सभी ने एक स्वर में सभी घरों में मीटर लगाकर रीडिंग के आधार पर बिलिंग की माग की है।
संलग्न - हरिजन बस्ती जमुई के हरिजनों की सामूहिक फ़ोटो जो बिजली बिल से प्रताड़ित है।
    - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक आर टी आई कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139