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Thursday, November 15, 2018

बिजली विभाग की कार्यवाही, शिफ्ट हुआ करहिया स्कूल परिसर एवं मतदान केंद्र क्रमांक 135 का खुला बिजली तार, मीडिया में आई थी बात, खबर और सामाजिक प्रयाशों का हुआ सार्थक असर (मामला ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र का जहाँ पर खुले सिर की ऊंचाई से झूलते तारों की वजह से ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार की कही थी बात)

दिनाँक 15 नवंबर 2018, स्थान- कटरा रीवा मप्र

(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

    त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र क्रमांक 135 में खुले खतरे के निशान से झूलते बिजली के तारों की बातें सामने आईं थी. मामला था शासकीय प्राथमिक पाठशाला करहिया के स्कूल परिसर में बनाये गए मतदान केंद्र क्रमांक 135 का जिंसमे खुले हुए बिजली के तार किसी भी समय अप्रिय घटना का आमंत्रण दे रहे थे. 

स्पार्किंग की वजह से फसल से लदा ट्रेक्टर हुआ था आग के हवाले

       इसके पूर्व भी पिछले जून मई-जून महीने में जब बिजली के खुले हुए तारों की वजह से डाढ़ पंचायत सरपंच सुरेंद्र मिश्रा का ट्रेक्टर देखते देखते स्पार्किंग की बजह से आग के हवाले हो गया था तब भी ग्रामों और स्कूल परिसर में खुले झूलते बिजली के तारों की बातें सामने आईं थी और लाइन को शिफ्ट करने की बात रखी गई थी लेकिन तब इस पर कोई  सार्थक कार्यवाही नही हुई थी. लेकिन अब जब शौभाग्य योजनान्तर्गत अरबों खरबों का बजट उपलब्ध है और चुनाव भी नजदीक है जब मामला सोशल मीडिया एवं प्रिंट मीडिया में रखा जाकर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधित चीफ इंजीनियर के एल वर्मा एवं जबलपुर डिस्कोम सीएमडी को ट्विटर एकाउंट में सूचित किया गया तो कार्यवाही हुई. 

लाइन शिफ्ट न होने पर मतदान से करना था बहिष्कार

      सबसे बड़ी बात यह थी की ग्रामीणों ने लाइन शिफ्ट न करने पर मतदान से बहिष्कार की बात कही थी जिसका परिणाम यह हुआ की दिनाँक 15 नवंबर 2018 को तीन पोल खड़ा करके बिजली शिफ्ट कर दी गई. साथ ही ट्रांसफार्मर का टूटा हुआ पोल भी सपोर्ट लगाकर ठीक किये जाने का प्रयाश किया जा रहा है. उपस्थित ठेकेदार प्रतिनिधि बद्री प्रसाद पांडेय निवासी पनगड़ी-पताई द्वारा बताया गया की ट्रांसफार्मर में अतिरिक्त पोल लगाकर दो तीन दिनों में सही कर दिया जाएगा.

  स्कूली बच्चों और अभिभावकों में प्रसन्नता

    इस बीच करहिया प्राथमिक पाठशाला परिसर से खतरे के निशान से झूलते हुए बिजली के तारों को शिफ्ट किये जाने से आसपास के ग्रामों डाढ़, करहिया, बड़ोखर, हिनौती आदि ग्रामों के अभिभावकों और स्कूली बच्चों सहित शिक्षकों में प्रसन्नता है. सभी ने सामाजिक कार्यों की सराहना की और कहा की यह कार्य यहां के जन प्रतिनिधियों द्वारा कराए जाने चाहिए लेकिन जन प्रतिनिधि ग्रामीणों की समस्या पर ध्यान नही देते और चुनाव जीतकर फुरसत हो जाते हैं. इसके बाद आम जनता को पांच साल दर दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ता है. 

   लालगांव डीसी अन्तर्गत अतरैला स्कूल में भी झूल रही मौत

   बता दें की पिछले वर्षों से उठाये जा रहे एक अन्य मामले में भी हालात करहिया स्कूल जैसे ही हैं. गंगेव ब्लॉक के पताई पंचायत अन्तर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक पाठशाला अतरैला में भी इससे भी अधिक खतरनाक हाई टेंशन लाइन के तार सिर की ऊंचाई से झूल रहे हैं लेकिन कई मर्तबा स्कूल प्रशासन एवं ग्रामीणों द्वारा मामले को लगातार संबंधित जिम्मेदारों के समक्ष रखे जाने के बाबजूद भी आज तक हाई टेंशन लाइन शिफ्ट नही की जा सकी है. अपना रोष व्यक्त करते हुए पताई पंचायत गंगेव ब्लॉक के ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने बताया की यदि समस्या का समाधान किया जाकर स्कूल परिसर से हाई टेंशन लाइन शिफ्ट नही की गई तो वह भी चुनाव का बहिष्कार करेंगे क्योंकि बच्चों की जिंदगी उन्हें ज्यादा प्यारी है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें कटरा डीसी अन्तर्गत शासकीय प्राथमिक पाठशाला करहिया जिसे मतदान केंद्र क्रमांक 135 बनाया गया है वहां पर दिनांक 15 नवंबर 2018 को खतरनाक स्तर पर खुले झूलते हुए बिजली के तारों को शिफ्ट कर दिया गया. कार्य करते बिजली विभाग के वर्कर.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Friday, July 13, 2018

ऊर्जा मंत्री के निर्देश पर मौहरिया का 24 घण्टे में बदला ट्रांसफार्मर, बसौली का भी 2 दिन में बदला जाएगा (मामला ज़िले के गंगेव एवं मनगवां विद्युत वितरण केंद्र का जहां मौहरिया में 2 वर्ष से अधिक समय से जला ट्रांसफार्मर 13 जुलाई को बदला गया, बसौली नं 2 का अगले 2 दिन में बदला जाएगा, सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने करवाई कार्यवाही)

दिनांक 14 जुलाई 2018, स्थान - गंगेव/मनगवां रीवा मप्र 

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    सामाजिक कार्यकर्ता की पहल पर ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन के निर्देश पर 2 से अधिक वर्षों से जला हुआ मौहरिया ग्राम का 100 केवीए का ट्रांसफार्मर दिनांक 13 जुलाई 2018 को शाम को बदल दिया गया. बता दें पिछले दिनों गंगेव डीसी के बसौली नंबर 2 एवं मनगवां डीसी के मौहरिया के जले हुए ट्रांसफार्मर न बदले जाने की खबर ट्विटर के माध्यम से मप्र के ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं अधिवक्ता जितेंद्र तिवारी के माध्यम से दी गई थी जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए ऊर्जा मंत्री ने सीएमडी जबलपुर जोन एवं चीफ इंजीनियर रीवा रीजन केएल वर्मा को तत्काल ट्रांसफार्मर बदले जाने के लिए निर्देशित किया था. जिस पर कार्यवाही करते हुए मनगवां बिजली क्षेत्र के असिस्टेंट इंजीनियर प्रशांत नागेश ने 13 जुलाई शाम 100 केवीए का मौहरिया यादव-हरिजन बस्ती के पास का 2 से अधिक वर्षों से जला हुआ ट्रांसफार्मर बदल दिया है और इसकी सूचना उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता द्विवेदी को मोबाइल फ़ोन पर दी है. इस बात की पुष्टि करने के लिए द्विवेदी द्वारा मौहरिया ग्राम निवासी आशीष चतुर्वेदी एवं सुरेश चतुर्वेदी द्वारा नए लगाए गए ट्रांसफार्मर की वहां के ग्रामीणों के साथ फ़ोटो भी प्राप्त की है जिसे यहां पर संलग्न किया जा रहा है. सहायक अभियन्ता मनगवां बिजली विभाग प्रशांत नागेश द्वारा जानकारी दी गई है की अगले 2 दिनों में गंगेव डीसी के बसौली नंबर 2 का भी ट्रांसफार्मर बदल दिया जाएगा. बता दें की बसौली नंबर 2 का ट्रांसफार्मर बबलू सिंह एवं अन्य ग्रामीणों के द्वारा  पिछले 8 माह के अधिक समय के फैल बताया गया था.

    मौहरिया का ट्रांसफार्मर बदले जाने पर वहां सभी उपभोक्तागण में खुसी की लहर है. विशेषतौर पर मोटर कनेक्शनधारी किसान ट्रांसफार्मर बदल दिए जाने से काफी खुश हैं. सुरेश एवं आशीष चतुर्वेदी आदि किसानों द्वारा बताया गया की पिछले 2 वर्षों से उनकी कृषि बुरी तरह से प्रभावित हुई थी जिसके कारण सभी किसान काफी परेशान थे. 

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें रीवा के मनगवां डीसी अन्तर्गत आने वाले मौहरिया ग्राम का बदला गया ट्रांसफार्मर एवं उपस्थित ग्रामीण उपभोक्ता.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक वआम मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Wednesday, July 11, 2018

गंगेव के बसौली नं 2 एवं मनगवां के मौहरिया ग्राम का वर्षों से जला है ट्रांसफ़ॉर्मर (मामला ज़िले के गंगेव डीसी अन्तर्गत बसौली नं 2 ग्राम एवं मनगवां डीसी के मौहरिया ग्राम के वर्षों से जले ट्रांसफार्मर का जहां पर बिजली बिल माफी एवं सरल स्कीम के बाद भी रीवा बिजली विभाग कर रहा हीलाहवाली)

दिनांक 12 जुलाई 2018, स्थान - गंगेव/मनगवां, ज़िला रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  सामाजिक कार्यकर्ता की पहल एवं ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन के निर्देश पर ज़िले के कटरा डीसी का 5 एमवीए का फैल ट्रांसफार्मर तो बहुत जल्दी बदल दिया गया परंतु अभी भी ज़िले के कई ऐसे गांव हैं जहां कई महीनों से जले हुए ट्रांसफार्मर आज तक नही बदले गई हैं.

बसौली नं 2 का 9 माह से जला है ट्रांसफार्मर

    जानकारी मिली की गंगेव ब्लॉक एवं गंगेव विद्युत वितरण केंद्र अन्तर्गत आने वाले बसौली नं 2 का 65 एचपी का ट्रांसफार्मर पिछले 9 माह से जला हुआ है जिसे अब तक नही बदला जा सका है जबकि इस बाबत कई मर्तबा शिकायतें ग्रामीणों द्वारा की गई हैं.

      जानकारी के अनुसार बसौली नम्बर 2 के बबलू सिंह ने जानकारी दी की उनके घर के पास स्थित ट्रांसफार्मर से तीन दिशाओं में लाइन सप्लाई की जाती थी. ठाकुर एवं अन्य समाज के कुछ परिवारों के अतिरिक्त लगभग 35 आदिवाशी परिवार भी हैं जिन्हें बाधित लाइन सप्लाई मिल रही है. इनमे से कुछ ने वैकल्पिक तौर पर कई सौ मीटर दूर से तार लगाकर कटिया से अन्य ट्रांसफ़ॉर्मर से लाइन ले रखी है. पर अभी भी आधे से अधिक घरों में अंधेरा व्याप्त है.

     साल भर पहले भी यही ट्रांसफार्मर जल गया था जिसे बदला गया था लेकिन बताया गया की पहले से ही खराब ट्रांसफार्मर लगाया गया जो बहुत दिनों तक चल नही पाया और वह भी जल गया. फिर इसके बाद आज 9 महीने से ऊपर हो रहे हैं ट्रांसफार्मर बदला नही गया.

विभाग के अनुसार बिजली बिल बकाया बनी समस्या

   जब इस संदर्भ में गंगेव विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री मनीष जोशी से सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी की बात की गई तो बताया गया की बसौली नंबर 2 के जले ट्रांसफार्मर से जुड़े हुए उपभोक्ताओं के बिजली बिल बकाया होने की वजह से विभाग ने उन्हें अंधेरे में ही रखना उचित समझा. जबकि ग्रामीणों से जब चर्चा की गई तो बताया की काफी लोगों ने बिजली बिल भर दिया है बस कुछ रसूखदार लोगों के बकाया होने की वजह से ऐसा किया गया है अतः इसमे उन लोगों का कोई दोष नही था जो नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्ता थे. दोष यदि है तो उनका है जिन्होंने बकाया रखा।

मनगवां डीसी के मौहरिया ग्राम का भी जला ट्रांसफार्मर

  इसी प्रकार मनगवां क्षेत्र के जितेंद्र तिवारी ने अपने ट्विटर संदेश में प्रदेश के ऊर्जामंत्री श्री पारस जैन को ट्वीट किया की मौहरिया ग्राम का भी ट्रांसफार्मर पिछले 2 वर्षों से जला हुआ है जिसे बदला जाना अनिवार्य है. लोग काफी परेशान हैं और समस्या का सामना कर रहे हैं. जिस पर तत्काल ऊर्जा मंत्री ने रिट्वीट करके संबंधित ग्राम का नाम, जले हुए ट्रांसफार्मर का डिटेल और पता की जानकारी चाही. जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा स्वयं भी तत्काल ऊर्जा मंत्री को पूरा डिटेल ट्वीट कर दिया गया साथ ही कार्यपालन अभियंता आर एक जैन एवं सहायक अभियंता प्रशांत नागेश का मोबाइल नंबर सहित सभी जानकारी ट्वीट कर दी गई साथ ही कार्यपालन अभियंता एवं सहायक अभियंता से बात करके समस्या से अवगत करवाकर समस्या के निराकरण की अपील की गई है. इस पर कनिष्ठ अभियंता, कार्यपालन अभियंता एवं सहायक अभियंता बिजली विभाग ने समस्या के निराकरण का आश्वासन दिया है.

जन कल्याण बिजली बिल माफी एवं सरल बिल स्कीम के बाद भी देरी क्यों

    मानाकि 20 प्रतिशत बिजली बिल देने की योजना पहले की है परंतु अब जब मुख्यमंत्री मप्र शासन की महत्वाकांक्षी योजना जनकल्याण संबल योजना एवं सरल बिजली बिल स्कीम लांच हो चुकी है और हितग्राहियों को लाभ दिया जा रहा है तो ऐसे में विभाग द्वारा प्रदेश के जले हुए ट्रांसफार्मर न बदला जाना आम जनता के साथ ज्यादती है. ऐसे में तो यह कहना चाहिए की बिजली विभाग शासन से भी आगे हो गया.

जले ट्रांसफार्मर मुख्यमंत्री की योजना पर लगा रहे पलीता 

    जनकल्याण संबल योजना एवं सरल बिजली बिल स्कीम के बाद तो अब पूरे ज़िले एवं संभाग के जले हुए ट्रांसफार्मर बदले जाने चाहिए. जब सरकार ने आम और गरीब जनता के लिए इतनी अच्छी योजना लांच कर ही दी है तो जले हुए ट्रांसफार्मर न बदला जाए तो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण होगा. क्योंकि यदि पूरे प्रदेश में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदले जाने का खर्चा देखा जाए तो बिजली बिल माफी एवं सरल बिजली बिल स्कीम की तुलना में 1 प्रतिशत से भी कम होगा.

जले हुए ट्रांसफार्मर न बदला जाना आम जनता का टॉर्चर

   यदि जले हुए ट्रांसफार्मर न बदले गए तो आम जनता और किसान और अधिक टॉर्चर होंगे. एक तरफ तो गर्मी का कहर दूसरी तरफ सिंचाई के लिए समस्या, कुल मिलाकर ट्रांसफार्मर बदलने में देरी मुख्यमंत्री के बिजली बिल माफी और सरल बिजली बिल स्कीम पर पलीता लगा रहे हैं. मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री को चाहिए की स्वयं भी जले हुए ट्रांसफार्मर के मामलों में तत्काल संज्ञान लेकर पूरे प्रदेश में कार्यवाही करवाएं जिससे आम जनता और अधिक टॉर्चर होने से बचे.

संलग्न - रीवा के गंगेव डीसी के ग्राम बसौली नंबर 2 का जला हुआ 65 एचपी का ट्रांसफार्मर एवं उपस्थित आमजन. साथ ही ऊर्जा मंत्री को भेजा गया ट्वीट की स्क्रीनशॉट.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Monday, May 28, 2018

ट्रांसफार्मर जलने से अतरैला ग्राम में महीने से फैला घुप अंधेरा, नलकूप सूखे, ट्यूबवेल बन्द, आमजन में त्राहि त्राहि (मामला ज़िले के लालगांव डीसी अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां बताया जा रहा है 17 लाख का बिल बकाया)

दिनांक 28 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में जगह जगह ट्रांसफार्मर जलने से गर्मियों में त्राहि त्राहि मची हुई है. एक तो ज्यादातर नलकूप सूखे पड़े हैं ऊपर से यदि ट्यूबवेल से पानी पीने की कोई भी संभावना शेष बची थी वह ट्रांसफार्मर जलने से समाप्त हो गई. अब लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं. ऐसा लगता है मानो 17 वीं सताब्दी में जीवन जिया जा रहा हो जब 5 किमी में भी बमुश्किल एक कुआं होती थी.

   लालगांव डीसी अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर महीने भर से जला

     ज़िले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र  अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से ऊपर से जला पड़ा है लेकिन  शिकायतों के बावजूद भी बदला नही गया है. जब भी कंभी जेई लालगांव अथवा एई जवा से चर्चा की जाती है तो बताया जाता है की बिजली का बिल बकाया है अतः ट्रांसफार्मर बदला नही जाएगा.

  17 लाख बिजली बिल कैसे है बकाया?

    ट्रांसफार्मर बदले जाने की जब गुहार आमजन और उपभोक्तागण द्वारा विभाग में लगायी गई तो बताया गया की 17 लाख से अधिक का बिजली बिल अतरैला ग्राम का बकाया है अतः जब तक कम से कम 20 प्रतिशत नही भरा जाएगा तब तक ट्रांसफार्मर नही बदला जाएगा.

   सबसे बड़ी बात यह है की आखिर अतरैला ग्राम का बिजली बिल इतनी अधिक अमाउंट में बकाया था तो बिजली विभाग अब तक क्या सो रहा था? यदि किसी गरीब के हज़ार रुपये बकाया होता है तो उसको नोटिस पर नोटिस भेजी जाती हैं तो यह कैसे हुआ की एक ग्राम का अकेले 17 लाख से ऊपर बकाया हो गया? क्या अतरैला ग्राम में फैक्ट्री चलती है की इतनी बिजली खपत हो रही है? प्राप्त जानकारी में लगभग 180 रजिस्टर्ड बिजली उपभोक्ता बताए गए हैं जिनमे 35 के आसपास नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्ता है. बांकी के 100 से ऊपर हरिजन आदिवाशी समूह के उपभोक्ता है. जो लिस्ट एरिया इंजीनियर जवा द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को उपलब्ध करायी गई है उसमे हरिजन आदिवाशी और अन्य उपभोक्ताओं के सबसे अधिक बकाया है और इनकी प्रतिव्यक्ति ज्यादा राशि भी बकाया है. ऐसे में सवाल यह उठता है हरिजन आदिवशियों के बिजली बिल तो सरकारें वैसे भी समय समय पर माफ करती रही है तो 30 हज़ार या 25 हज़ार प्रतिव्यक्ति हरिजन के बिल कैसे शेष हैं. इसका मतलब तो यह हुआ की 300 रुपये के आसपास प्रतिमाह औसत लगाया जाय तो  3600 रुपये सालाना बनता है तब इसका मतलब यह हुआ की 7 से 8 साल से किसी भी हरिजन आदिवाशी ने कोई बिल नही भरा और बिल माफ भी हुए थे। तब इसमे मोटर कनेक्शन धारक और अन्य ग्रामीणों का क्या दोष है जो नियमित बिल भुगतान कर रहे हैं? क्या 180 में से उन 35 नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी द्वारा अलग से बिजली सप्लाई नही दी जानी चाहिए? मानाकि 17 लाख बकाया वाले दोषी हो सकते हैं परंतु इसमे नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? बिजली कंपनी ऐसा अन्याय क्यो कर रही है? यह तो सीधे सीधे व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें की किस प्रकार इस भीषण गर्मी में नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्तागण अतरैला ग्राम (डीसी लाल गांव, डी ई त्योंथर) के समक्ष खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यक्रता,

रीवा मप्र, 7869992139, 9589152587.

Tuesday, April 10, 2018

शिक्षा के मंदिर में हादसों का भय, पानी के मानवाधिकार की जद्दोजहद में शिक्षा का अधिकार पड़ा बौना ( मामला सिरमौर तहसील अंतर्गत पनगड़ी एवं पताई पंचायत में शासकीय माध्यमिक शाला का, साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप जबकि खुली हाई टेंशन लाइन दे रही मौत को आमंत्रण)

दिनांक 11 अप्रैल 2018, स्थान - भठवा/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    राइट टू एजुकेशन अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम तो प्रारम्भ हो गया लेकिन विद्यार्थी इस शिक्षा के अधिकार का कितना लाभ ले पा रहे हैं इसका पता किसी भी ग्रामीण स्तर पर संचालित स्कूल में जाकर देखा जा सकता है.

   ग्रामीण स्तर पर संचालित सरकारी स्कूलों में न कोई सुविधा होती है और न ही शिक्षा का कोई स्तर. ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र बमुश्किल प्रमाण पत्र तो ले लेते हैं पर इसके अतिरिक्त कुछ सीख नही पाते. 100 में से कुछ दो चार विरले ही ऐसे छात्र होंगे जिन्हें उनके क्लास के स्तर का कुछ विशेष  ज्ञान हो. आज शिक्षा की दुर्दशा हो चुकी है. जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय विद्यालयों की शिक्षा बद से बदतर होती जा रही है भविष्य में युवाओं का नाकाम होकर बेरोजगार घूमना लगभग तय है. 

   ग्रामीण क्षेत्र की शासकीय स्कूलों में ज्यादातर ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो गरीब परिवार से आते हैं जैसे किसान अथवा मजदूर वर्ग. ऐसे छात्रों के लिए किसी अच्छी स्कूल में और खासकर प्राइवेट अंग्रेज़ी माध्यमों की स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर पाना एक सपना ही होता है. विरले ही गरीब छात्र होते हैं जो अच्छी शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर पाते हैं.

कैसे पढ़ेंगे जब स्कूल के समय भरेंगे पानी  - पनगड़ी शासकीय स्कूल में साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप

   शिक्षा की बात चल रही थी तो ग्रामीण स्तर पर इसको भी बता दिया जाए की मूलभूत फैसिलिटी की कमी के चलते भी शिक्षक और छात्र ज्यादातर उनकी पूर्ति करने में परेशान रहते हैं तो ऐसे में छात्र कब पढ़ पायेगा और शिक्षक कब पढ़ा पाएंगे.

    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित पत्रकार प्रमोद सिंह और पनगड़ी निवासी सोनू सुक्ला द्वारा विजिट के दौरान स्कूल में उपस्थित प्रधानाध्यापक और शिक्षकों और छात्रों से संपर्क किया गया तो जो जानकारी प्राप्त हुई वह किसी भी ग्रामीण स्तर में संचालित शासकीय शिक्षा केंद्रों की स्थिति को भलीभांति बया करती है. बताया गया की स्कूल परिसर में जो नलकूप पंचायत विभाग अथवा पी एक ई द्वारा लगाया गया था वह काम लायक नही बचा है, उसकी सभी पाइप काम लायक नही बची है. बताया गया की यहीं 500 मीटर की दूरी पर स्थित किसी ग्रामवासी के व्यक्तिगत बोरवेल से छात्र पानी भरकर लाते हैं. पूरा समय मात्र पानी भरने में ही व्यतीत हो जाया करता है. ऐसे में छात्र क्या पढ़ पाएँगे. प्रधानाध्यापक द्वारा आगे बताया गया की हमने इसकी शिकायत कई बार की है लेकिन न तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सुध ले रहा है और  न ही पंचायत विभाग लिहाज़ा हमारे स्कूल में मध्यान भोजन से लेकर बर्तन धोने तक सभी में तकलीफ होती है. कभी कभी इसी कारण मध्यान भोजन भी नही बन पाता है.

 पानी की समस्या तो है ही यहां बीच प्राँगण में लगा दिया ट्रांसफार्मर भी, किसी भी वक्त हो सकता है कोई भीषण हादसा 

  पानी की समस्या तो अपने स्थान पर है ही साथ ही स्कूल के बाहर बाउंड्री के बीचोंबीच एक ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ है जो एकदम खुले में है. अमूमन यदि किसी कारण बस ट्रांसफार्मर लगाया हुआ है तो भी ट्रांसफार्मर को चारों तरफ से बन्द किया जा सकता है और एंगल गाड़कर तार की जाली लगायी जानी चाहिए जिससे प्राइमरी कक्षा के छोटे बच्चे खेलते समय सीधे ट्रांसफार्मर और खुले तारों के संपर्क में न आ पाएं लेकिन इसकी किसी को फिकर ही नही. न इस संबंध में स्कूल प्रबंधन ने ही कुछ किया और न ही पंचायत अथवा बिजली विभाग ने. आलम यह है की हर ग्राम की स्कूलों में इसी प्रकार या की बिजली के खुले तार झूल रहे हैं अथवा ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है. सब की नीद तब खुलेगी जब कोई भीषण हदशा हो जाएगा और कोई बच्चा फसकर झुलस जाएगा.

  ज़िले की सभी सकूलों का सर्वे किया जाकर अभियान चलाकर खुले बिजली के तार खंभे और ट्रांसफार्मर स्कूल परिसर से तत्काल हटाये जाने चाहिए

    जब इस संदर्भ में ग्रामीण लोगों और बच्चों के अभिभावकों सहित शिक्षकों समाजसेवियों से चर्चा की गई तो सभी का एक स्वर में कहना था की मात्र पनगड़ी स्कूल ही नही बल्कि जिले की सभी स्कूलों में अभियान चलाकर स्कूल परिसर के अंदर से बिजली सप्लाई को हटाया जाना चाहिए. बिजली के खंभे और खुले बिजली के तार स्कूल परिसर के अंदर रखे जाने का कोई औचित्य ही नही है. स्कूल परिसर में बच्चे मध्याह्न छुट्टी होने पर खेलते कूदते रहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर खुले तारों और ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ सकते हैं ऐसे में किसी भी समय कोई भी दुखद हादसा हो सकता है.

  लालगांव विद्युत वितरण केंद्र के अतरैला शासकीय स्कूल में भी खतरे के निशान के ऊपर है हाई टेंशन लाइन के खुले तार

   भठवा निवासी और पत्रकारिता के साथ जुड़े प्रमोद सिंह ने बताया की उन्होंने ग्रामीण जनों के सहयोग के साथ पिछले कई वर्षों से उनके क्षेत्र अतरैला में शासकीय स्कूल परिसर में हाई टेंशन लाइन के खुले झूलते तारों को हटाने के लिए जद्दोजहद की है लेकिन अब तक उसका कोई स्थायी समाधान नही निकल पाया है. जब इस संबंध में कटरा विद्युत केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी से बात की गई तो उनका यह कहना था की हमारे पास कोई विशेष प्रावधान नही होता जिससे इन तारों को पोल सहित शिफ्ट किया जा सके. उन्होंने आगे बताया की स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूल प्रसाशन से लिखित तौर पर विद्युत विभाग के नाम पत्र जारी कर हमारे पास पहुचाया जाना चाहिए. आगे की प्रक्रिया में विद्युत विभाग लाइन शिफ्टिंग के लिए जरूरी खर्च का एस्टीमेट बनाकर संबंधित स्कूल प्रसाशन को भेज देता है और आगे स्कूल प्रसाशन जब रमसा के माध्यम से वह राशि विजली विभाग के खाते में ट्रांसफर कर देगा तो हम अपने कर्मचारी भेज कर लाइन शिफ्टिंग करवा देते हैं. कटरा जे ई सोनी ने बताया की इसके पहले जब वह गोविंदगढ़ क्षेत्र में पदस्थ थे तब भी इस प्रकार के कई घटनाक्रम आये थे जिनमे स्कूल शिक्षा विभाग के फण्ड से स्कूलों के अंदर से लाइन शिफ्टिंग की गई थी. इसके अतिरिक्त कोई अन्य प्रक्रिया नही है जिससे इस लाइन को स्कूल परिसर के बाहर शिफ्ट किया जाय.

    उक्त प्रक्रिया को फॉलो भी किया गया और प्रमोद सिंह द्वारा अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक से कहकर लाइन शिफ्टिंग के बाबत आवेदन लालगांव कनिष्ठ यंत्री को भेजा जा चुका है. अब देखना यह होगा इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है. क्योंकि यदि सही समय पर कार्य नही हुआ तो किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है. इस बीच अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया की स्कूल परिसर स्थित झूलते हाई टेंशन लाइन के तारों की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं जिससे आग का लुकाड़ा जमीन पर स्पार्किंग की वजह के गिरा था लेकिन शौभाग्य से बच्चे लाइन के नीचे नही थे अतः कोई अप्रिय दुर्घटना नही हुई है. नवीन स्कूल भवन हाई टेंशन लाइन के बिल्कुल 2 फ़ीट ऊंचाई से गया है जिससे यदि कोई बच्चा कभी धोखे से छत पर चढ़ जाता है तो उसकी जान जा सकती है. इस पर प्रधानाध्यापक का कहना था की उन्होंने बच्चों को शख्त हिदायत दे रखी है की कोई भी छात्र भूलकर भी नवीन स्कूल भवन की छत पर न जाए.

संलग्न - सिरमौर तहसील एवं गंगेव जनपद अंतर्गत पनगड़ी पंचायत की पनगड़ी स्कूल एवं पताई पंचायत अंतर्गत अतरैला स्कूल परिसर में खतरनाक स्तर पर हाई टेंशन लाइन के तार और ट्रांसफॉमर, साथ ही पनगड़ी स्कूल में सालों से बन्द पड़ा नलकूप.

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शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र.

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Sunday, September 25, 2016

(Rewa, MP) रीवा अंतर्गत कटरा डीसी में बिजली व्यवस्था 15 दिवस बाद भी नहीं सुधरी, मनमाना बिलिंग, इटहा का जला ट्रांसफार्मर महीनों बाद भी नहीं बदला




 
स्थान – कैथा, गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 25.09.2016, दिन रविवार,

अभी भी रीवा के कटरा डीसी में विद्युत् की बदहाल स्थिति- लाइन का फाल्ट विभाग आज तक नहीं ठीक कर पाया, सोरहवा-हिनौती के लाइनमैन सुधाकर मिश्रा पैसा लेकर सुधारते हैं बिजली

 (कैथा-गढ़, रीवा) रीवा के कटरा डीसी में बिजली व्यवस्था बदहाल स्थिति में बनी हुई है. आज दो सप्ताह का समय बीत चुका है और कटरा और त्योंथर का बिजली विभाग आज फाल्ट तक नहीं ढूंढ पाया. बिजली विभाग कल फाल्ट ठीक करता है तो आज फिर लग जाता है. समझ नहीं आता की यह फाल्ट अपने आप लग रहा है अथवा जानबूझकर लगाया जा रहा है. जनता के लिए तो यह सब रात्रि के किसी बहुत भयानक सपने की तरह है. सपना इतना भयावह की जनता रात्रि में न तो सो पा रही और न जाग पा रही. आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है की क्या बिजली विभाग को विद्युत् समस्या का बरसात में ही ध्यान आना था? आखिर क्यों मेंटेनेंस और केबलीकरण का कार्य समय पर नहीं किया गया? लाइन मेंटेनेंस का काम तो गर्मियों में किया जाना चाहिए था. क्या हुआ उस मेंटेनेंस और केबलीकरण की राशि का? उस राशि की बलि कहीं भ्रष्ट्राचार रुपी भयानक राक्षस को तो नहीं चढ़ा दी गयी? इस प्रकार के दर्ज़नों प्रश्न हैं जिनको आज बिजली विभाग के किसी भी कर्मचारी-अधिकारी में जबाब देने की क्षमता नहीं समझ आती.

गढ़ फीडर अंतर्गत इटहा ग्राम का ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से जला – कैथा पंचायत अंतर्गत आने वाले इटहा ग्राम में लालजी पटेल के घर के पास का एक ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से जला हुआ है जिसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. यह बात कटरा डीसी के कनिष्ठ यंत्री सोनी, गढ़ के लाइनमैन राजकुमार मिश्रा, प्रभाकर सिंह को बताई गयी, पर अब तक तो ट्रांसफार्मर नहीं लगा है जबकि ग्रामीणों से पता चला की इटहा ग्राम के उपभोक्ताओं ने पूरा बिजली का बिल भी भरा हुआ है. अमूमन होता यूँ है की यदि 50 प्रतिशत से कम बिजली का बिल शेष रहता है तो बिजली विभाग ट्रांसफार्मर लगाने में आनाकानी करता है परन्तु इटहा ग्राम के सन्दर्भ में ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिससे वहां पर तत्काल ट्रांसफार्मर न लगाया जाये.

हिनौती-सोरहवा के लाइनमैन सुधाकर मिश्रा कार्य में अनुपस्थित – सोरहवा-हिनौती क्षेत्र में कार्यरत लाइनमैन सुधाकर मिश्रा पैसे लेकर उपभोक्ताओं का बिल बनाते हैं. यहाँ बिल वितरण छः महीने में मात्र एक बार होता है. जब बिजली बिल पेनाल्टी सहित हजारों रुपये बन जाता है तब ग्रामीणों को उनका बिल मिलता है. इस प्रकार जिन उपभोक्ताओं का बिल 450 अथवा 500 रुपये देने होते हैं उन्हें 600 अथवा 700 देना पड़ जाता है. लाइनमैन सुधाकर मिश्रा से शिकायत पर यह व्यक्ति उपभोक्ताओं को पेनाल्टी लगाने और बिजली काटने की धमकी देता है. सोरहवा निवासी हरिबंस पटेल के पुत्र अरुणेन्द्र पटेल द्वारा दिनांक 24 सितम्बर को सोरहवा की बिजली सप्लाई बाधित होने पर पूंछने पर सुधाकर मिश्रा ने बिजली बंद कर देने की धमकी दे दी और कहा की “लाइनमैन का चार्ज होता है जो उपभोक्ताओं को देना पड़ेगा. 200 रुपये देने पर ही लाइनमैन एक बार आएगा”. सुधाकर मिश्रा का कहना था की “हम 50 हज़ार की तनख्वाह उठाते हैं और काम नहीं करते बल्कि हम कार्य करने के लिए अपने साथ प्राइवेट लाइनमैन रखते हैं जिसे प्रति विजिट उपभोक्ताओं को पैसे देने पड़ेंगे तभी बाधित लाइन बन पायेगी नहीं तो नहीं बनेगी. जहाँ तक शिकायत की बात है तो जिसको जहाँ शिकायत करनी है वहां करो क्योंकि सीएम हेल्पलाइन में हमारे कंप्यूटर ऑपरेटर जो निराकरण लिख देते हैं वही होता है चाहे जितनी और जिस लेवल में शिकायत पंहुच जाये. बिजली विभाग का कुछ नहीं होता. ज्यादा से ज्यादा हमारा ट्रान्सफर करेंगे और क्या करेंगे.” इस प्रकार से इन बिजली कर्मचारियों की स्थिति बनी हुई है.

कैथा की हरिजन आदिवासी बस्ती में वर्षों से कटी केबल नहीं लगी - मीटर रीडिंग और केबलीकरण के विषय में सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों में हुई लीपापोती
तो यह स्थिति है इन बिजली कर्मचारियों की. अब जहाँ तक सवाल है उपभोक्ताओं का उनका तो मरना तय है क्योंकि इन गाँव के गरीबों का जिनका की खेती किसानी के अतिरिक्त कोई अन्य आधार नहीं उन्हें औसत 150 रीडिंग का बिल थमा दी गयी. इनमे से तो कैथा के हरिजन और आदिवासी बस्ती के ऐसे लोग हैं जिनके घरों में बिजली सप्लाई पिछले एक वर्ष से नहीं दी गयी है. इसके विषय में सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत क्र.2056670, 2056711 और 2065662 दर्ज करवाई गयी थी परन्तु कोई समाधान नहीं दिया गया. उल्टा सीधा समाधान देकर सब कुछ ठंडा कर दिया गया, यह स्थिति है सीएम हेल्पलाइन की. इसी प्रकार पिछले वर्ष सोरहवा ग्राम निवासी वृजवासी पटेल ने मीटर रीडिंग के अनुसार और सही बिल भेजे जाने के विषय में सीएम हेल्पलाइन और रीवा बिजली विभाग के समक्ष प्रकरण रखा था परन्तु उस पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई. वृजवाशी पटेल के घर में तो बहुत पहले से ही मीटर लगा हुआ है परन्तु मीटर रीडिंग लेने कोई कर्मचारी नहीं आता. बिजली विभाग यह समझता है की यदि औसत बिलिंग से ही काम चल जाता है तो क्यों फालतू में मीटर रीडर रखा जाये. वास्तविक तौर पर देखा जाये तो लाइनमैन का ही काम है की वह अपने सम्बंधित क्षेत्र में मीटर रीडर का भी काम करे और लाइन सुधारने का, परन्तु सुधाकर मिश्रा, राजकुमार मिश्रा और प्रभाकर सिंह जैसे ऐसे लाइनमैन कटरा डीसी में हैं जिनको जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं है. संविदा और कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर कार्य करने वाले मीटर रीडर और प्राइवेट वर्कर हैं जो ले दे कर काम चला लेते हैं. जो व्यक्ति समझदार है वह इन मीटर रीडर को कुछ अधिभार दे कर मीटर रीडिंग एडजस्ट करवा लेता है. इसी कारण जिन व्यक्तियों के घरों में बिजली की सबसे ज्यादा खपत होती है उनका बिल सबसे कम और जिनके घरों में एक या दो सीएफएल बल्ब लगे हैं उनको हजारों भरने पड़ते हैं यह किस्सा है बिजली कर्मचारियों और समझदार उपभोक्ताओं के सांठ गांठ का.

कटरा डीसी अंतर्गत गढ़ के पास फीडर सेपरेसन अति आवश्यक – वर्षों से पड़ा हुआ बिजली विभाग का फीडर सेपरेसन का लंबित काम अब बहुत ही आवश्यक हो चुका है. ज्ञातव्य हो की गढ़ आज इस क्षेत्र के बहुत महत्वपूर्ण व्यावसायिक स्थलों में से एक है जो राष्ट्रीय राजमार्ग से भी सम्बन्ध रखता है. राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य में स्थित होने से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. परन्तु फिर भी बिजली विभाग के लिए इस स्थल का कोई विशेष महत्व नहीं है तभी तो पुलिस थाना, मध्यांचल बैंक, इलाहाबाद बैंक, सहित सहकारी बैंक आदि जैसी महत्वपूर्ण बैंकिंग और सरकारी संस्थाओं के बाद भी यहाँ पर लाइन दिन में लगभग पूर्णतया अवरुद्ध रहती है. इस पर बिजली विभाग की कोई रूचि नहीं है. शायद इन्ही सभी समस्याओं के मद्देनज़र कभी बिजली विभाग के उच्चधिकारियों ने गढ़ के पास स्थित 150 किमी लाइन का फीडर सेपरेसन के बारे में विचार कर प्रोजेक्ट लांच किया था परन्तु आज तक पता नहीं यह क्यों पूरा नहीं हो पाया है. आज के वर्तमान समय में जब आम जनता की डिमांड बहुत बढ़ गयी हैं और जबकि जनता से मनमाना बिल की वसूली की जा रही है यह बहुत आवश्यक है की वर्षों पुराना पड़ा फीडर सेपरेसन का कार्य पूर्ण कर लाइन मेंटेनेंस, और केबलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाये. जनता से उचित बिल तो लिया जाये पर उसको बिल के अनुरूप बिजली भी मुहैया कराई जाये.

गढ़ स्थित बैंकों में आम जनता बिजली न होने से रहती है परेशान –
जैसा की बताया गया की गढ़ आज इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण व्यावसायिक केन्द्र के रूप में उभरा है पर लगता है बिजली विभाग इसका पलीता बना कर ही दम लेगा. वैकल्पिक तौर पर आज बैंकों के पास जनरेटर की व्यवस्था तो होती है पर उसका उपयोग ज्यादातर बैंक नहीं करते. जैसे केंद्रीय जिला सहकारी बैंक मर्यादित शाखा गढ़ में जनरेटर की कोई व्यवस्था नहीं है इसी प्रकार मध्यांचल ग्रामीण बैंक में भी लाइन सप्लाई अवरुद्ध होने पर कार्य भी अवरुद्ध कर दिया जाता है. वैसे भी बैंक कर्मचारी आज बहुत ही कम काम करना चाहते हैं और उस पर यदि बिजली नहीं है तो उसका हवाला देकर ग्राहकों और बेचारे ग्रामीणों को वापस घर लौटा देते हैं. इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्र से 10 किमी और उससे ऊपर से पैदल चलकर आने वाला बुजुर्ग जिसकी की वृद्ध, अथवा अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जानी थी वह भी न मिले तो कितने बड़े शर्म और दुर्भाग्य की बात है. न तो शर्म उन बैंक कर्मचारियों को लगती जो काम नहीं करते और भला बिजली विभाग ने तो पहले ही शर्म को धो कर पी लिया है.

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शिवानन्द द्विवेदी
(सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७

मोबाइल नंबर – 07869992139