Sunday, August 2, 2026

Breaking:आरटीआई अधिनियम सुदृढ़ीकरण पर 319वीं बैठक: मुख्य बिंदु और सिफारिशें

*Breaking:आरटीआई अधिनियम सुदृढ़ीकरण पर 319वीं बैठक: मुख्य बिंदु और सिफारिशें*

हाल ही में दिनांक 02 जुलाई 2026 को प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाले सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम को मजबूत करने और भारत में पारदर्शिता ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 319वीं बैठक का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने की। इस प्रस्तुति और चर्चा में देश में आरटीआई ढांचे के सामने आ रही प्रमुख चुनौतियों, कार्यान्वयन की कमियों और आवश्यक सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
*मुख्य चुनौतियाँ और वर्तमान स्थिति*

*दंड प्रावधानों का कमजोर कार्यान्वयन:* बैठक में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल लगभग 0.5% आरटीआई आवेदनों में ही दोषी अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाता है, जबकि 99.5% मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होती।

*लंबित मामले और स्टाफ की कमी:* सूचना आयोगों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या, केंद्रीय और राज्य स्तर पर जन सूचना अधिकारियों (PIOs) का अपर्याप्त प्रशिक्षण और स्टाफ की कमी मुख्य चिंता का विषय बनी हुई है।

*छूट का अनुचित प्रयोग:* लोक प्राधिकारियों द्वारा आरटीआई अधिनियम की छूट धाराओं का व्यापक और असंगत उपयोग किया जा रहा है।

*डिजिटल और सुरक्षा बाधाएं:* दूरदराज के क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी और आरटीआई कार्यकर्ताओं/उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा व संरक्षण के लिए मजबूत तंत्र का न होना।
*सुधार हेतु प्रमुख सिफारिशें*

*धारा 4 के तहत स्वतः प्रकटीकरण (Proactive Disclosure):* सरकारी निकायों द्वारा धारा 4 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को आरटीआई दायर किए बिना ही अधिकांश जानकारी मिल सके। इससे आवेदनों का बोझ कम होगा।

*एकीकृत डिजिटल पोर्टल:* सभी राज्य सूचना आयोगों को बहुभाषी सहायता वाले एक केंद्रीकृत और एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा जाए।

*मानकीकृत प्रशिक्षण:* पीआईओ (PIOs) के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित पाठ्यक्रम और अनिवार्य मानकीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएं।

*स्वतंत्रता और स्वायत्तता की बहाली:* सूचना आयुक्तों की निष्पक्षता और प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए उनकी नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और वैधानिक कार्यकाल/सुरक्षा तंत्र को बहाल किया जाए।

*सुरक्षा ढांचा:* आरटीआई उपयोगकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स के खिलाफ धमकियों और उत्पीड़न से निपटने के लिए एक समर्पित ढांचा तैयार किया जाए।

*चर्चा के अन्य पहलू*

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने धारा 2 के तहत प्रमाणित प्रतियों को प्राप्त करने की कानूनी प्रक्रिया, आवेदनों के हस्तांतरण (Transfer Procedures), द्वितीय अपील, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की वित्तीय रिपोर्टिंग की अनुपालन आवश्यकताओं और गोपनीयता बनाम जनहित के संतुलन जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर प्रश्न पूछे और कानूनी समाधानों पर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
*अगले कदम (Next Steps)*

*बैठक की सामग्री साझा करना:* सभी प्रतिभागियों के साथ बैठक की प्रस्तुति स्लाइड (Presentation Slides) और रिकॉर्डिंग साझा की जाएगी।

*प्रशिक्षण संसाधन*: पीआईओ के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और आरटीआई प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

*प्रश्नों का समाधान:* प्रतिभागियों द्वारा उठाए गए विशिष्ट आरटीआई मामलों और कानूनी प्रश्नों पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन दिया जाएगा

कार्यक्रम का सफल संचालन सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी देवेंद्र अग्रवाल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। जबकि पवन दुबे का प्रचार प्रसार ए महत्वपूर्व योगदान रहा। प्रतिभागियों में जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया, राज तिवारी, नरेश सैनी सुरेश मौर्य आदि सम्मिलित हुए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, August 1, 2026

Breaking: रीवा में Tata परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर कलेक्टर कार्यालय ने PMO को भेजा ज्ञापन// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोगों ने सौंपा था ज्ञापन// कमिश्नर के बाद कलेक्टर कार्यालय ने भी लिया संज्ञान//

*Breaking: रीवा में Tata परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने को लेकर कलेक्टर कार्यालय ने PMO को भेजा ज्ञापन// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य लोगों ने सौंपा था ज्ञापन// कमिश्नर के बाद कलेक्टर कार्यालय ने भी लिया संज्ञान//*
दिनांक 01 अगस्त 2026 रीवा मप्र

रीवा (मध्य प्रदेश)। रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) को पर्यावरण सुरक्षा के दृष्टिकोण से अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं अन्य स्थानीय नागरिकों द्वारा प्रस्तुत किए गए ज्ञापन को रीवा कलेक्टर कार्यालय ने विचार-विमर्श एवं अग्रिम कार्यवाही हेतु सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), नई दिल्ली को प्रेषित कर दिया है।

*क्या है पूरा मामला?*

कलेक्टर कार्यालय रीवा द्वारा जारी पत्र (क्रमांक 614/व.लि.-1/2026, दिनांक 30/07/2026) के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी (निवासी ग्राम कैठा, तहसील मनगवां, जिला रीवा) तथा अन्य नागरिकों ने एक ज्ञापन सौंपकर जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र की स्थापना पर गंभीर आपत्ति जताई थी।

*ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि:*
पर्यावरण एवं स्थानीय जनजीवन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित न किया जाए।

इस परियोजना को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित (Shift) किया जाए।

*प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा गया मूल ज्ञापन*

रीवा के डिप्टी कलेक्टर सुधीर कुमार बेक द्वारा हस्ताक्षरित इस आधिकारिक पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्राप्त ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए इसे मूल रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय (नई दिल्ली) को प्रेषित (सम्पेक्षित) किया जा रहा है। इसकी एक प्रतिलिपि संबंधित आवेदक शिवानन्द द्विवेदी को भी सूचनार्थ भेजी गई है।

पर्यावरण सुरक्षा पर गहराया मंथन
रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को लेकर स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों में चिंता का माहौल है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र से पर्यावरण, जल स्रोतों और आसपास की घनी आबादी पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाया जाता है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*