Wednesday, July 1, 2026

एक्टिविज्म का असर: हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर से हटाई गई खतरनाक बिजली लाइन, 700 विद्यार्थियों और स्टाफ को मिली राहत

*एक्टिविज्म का असर: हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर से हटाई गई खतरनाक बिजली लाइन, 700 विद्यार्थियों और स्टाफ को मिली राहत*

रीवा, 01 जुलाई 2026

   वर्षों से दुर्घटना की आशंका के बीच संचालित हो रहे गंगेव जनपद के हिनौती शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आखिरकार बिजली विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विद्यालय परिसर से गुजर रही खतरनाक एलटी बिजली लाइन और खंभों को हटाने का कार्य शुरू कर दिया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे और विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में मामला लाने के बाद संभव हो सकी। वर्तमान में बिजली विभाग के ठेकेदार द्वारा लाइन शिफ्टिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, विद्यालय परिसर के बीचोंबीच से गुजर रही खुली बिजली लाइन वर्षों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई थी। विद्यालय में लगभग 700 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी प्रतिदिन इसी परिसर में कार्य करते हैं। खुले बिजली के तार विद्यालय के खेल मैदान, प्राचार्य कक्ष तथा अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के ऊपर से गुजर रहे थे, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती थी।
*शिक्षकों ने जताई थी गहरी चिंता*

विद्यालय के शिक्षकों एवं प्राचार्य ने कई बार शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर परिसर से बिजली लाइन हटाने की मांग की थी। उनका कहना था कि प्रतिदिन सैकड़ों बच्चों और पूरे स्टाफ की जान जोखिम में डालकर शिक्षण कार्य संचालित करना उनकी मजबूरी बन गई थी। हालांकि लंबे समय तक विभागीय स्तर पर केवल पत्राचार चलता रहा और समस्या का समाधान नहीं हो सका।

*सामाजिक कार्यकर्ता की पहल के बाद हरकत में आया विभाग*

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने स्वयं विद्यालय पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया और इसकी रिपोर्ट तैयार कर बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की। उन्होंने कार्यपालन अभियंता आशीष बैन, सहायक यंत्री उमाशंकर द्विवेदी तथा कनिष्ठ अभियंता प्रणव वर्मा को अवगत कराया कि विद्यालय परिसर से गुजर रही बिजली लाइन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यपालन अभियंता एवं सहायक यंत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद बिजली विभाग ने ठेकेदार को मौके पर भेजकर लाइन शिफ्टिंग का कार्य प्रारंभ कराया। बुधवार, 01 जुलाई 2026 को विद्यालय परिसर में शिक्षकों की उपस्थिति में बिजली के तार एवं खंभों को हटाकर विद्यालय की बाउंड्री के बाहर स्थानांतरित करने का कार्य प्रगति पर रहा। अब विद्यालय को बाहरी मार्ग से सुरक्षित विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जाएगी।
*बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होने से अभिभावकों में भी राहत*

विद्यालय परिसर से बिजली लाइन हटने के बाद न केवल विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि अभिभावकों की वर्षों पुरानी चिंता भी समाप्त होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

*प्रदेशभर के स्कूलों में ऐसे मामलों के सर्वे की उठी मांग*

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है कि प्रदेश के अनेक शासकीय विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के ऊपर अथवा परिसर के बीचोंबीच आज भी हाईटेंशन एवं एलटी बिजली लाइनें गुजर रही हैं। उनका दावा है कि यदि राज्य स्तर पर व्यापक सर्वे कराया जाए तो बड़ी संख्या में ऐसे शैक्षणिक संस्थान सामने आएंगे जहां खुले बिजली के तार बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं।
उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार इस विषय पर स्पष्ट नीति एवं दिशा-निर्देश जारी कर स्कूल शिक्षा विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित करे तथा पूरे प्रदेश में अभियान चलाकर सभी विद्यालय परिसरों से खतरनाक बिजली लाइनें हटाने की कार्रवाई युद्ध स्तर पर कराई जाए।

*पहले भी कई विद्यालयों से हटवाई जा चुकी हैं बिजली लाइनें*

शिवानंद द्विवेदी के अनुसार हिनौती विद्यालय का मामला पहला नहीं है। इससे पूर्व भी उनके प्रयासों से डाढ़ पंचायत की करहिया प्राथमिक पाठशाला, पताई पंचायत के अतरैला एवं पताई सहित आसपास के लगभग आधा दर्जन विद्यालय परिसरों से हाईटेंशन एवं एलटी बिजली लाइनें हटवाई जा चुकी हैं। उनका कहना है कि ऐसे कार्य विभागों को स्वतः संज्ञान लेकर करने चाहिए, लेकिन कई मामलों में जनहित के मुद्दों को लेकर सार्वजनिक पहल करनी पड़ती है।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि हिनौती विद्यालय में हुई यह कार्रवाई केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे जिले और प्रदेश के लिए एक मॉडल बनाकर सभी शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*