दिनांक 18 जुलाई 2026 रीवा मप्र।
रीवा मप्र के गंगेव जनपद की हिनौती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एक बार पुनः चर्चा के केंद्र में है। वजह यहाँ के क्षतिग्रस्त भवन हैं जहां 700 से अधिक कक्षा 01 से 12 तक के बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। ताजा अपडेट सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के स्कूल परिसर में प्राचार्य के साथ वार्तालाप में सामने आया जहां पालक शिक्षक संघ एवं गणमान्य नागरिकों के साथ बैठक में बातें रखीं गईं। मौके पर चर्चा के दौरान हालिया रीवा संभागीय आयुक्त शीलेन्द्र सिंह एवं रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशों की भी चर्चा हुई जहां ऐसे जर्जर भवनों में कक्षा संचालित न करने की सख्त मनाही की गई है।
*क्षतिग्रस्त भवनों की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक प्रेषित - प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय*
चर्चा के दौरान हिनौती सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य प्रमोद कुमार पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष से ही क्षतिग्रत भवनों के नवनिर्माण एवं मरम्मत कार्यों की कवायद की जा रही है और समय समय पर शासन स्तर से गूगल शीट आदि गूगल मीट आदि के माध्यम से चाही गई जानकारियां प्रेषित की जाती रहती हैं। यदि प्राचार्य की मानें तो क्षतिग्रस्त भवनों की समस्त जानकारी अधोसंरचना निर्माण की जानकारी में प्रतिवर्ष प्रेषित की जाती रहती है।
लिखित तौर पर भी प्रस्ताव एवं अन्य पत्राचार पंचायत विभाग एवं सरपंच को दिए गए हैं।
*25 लाख रुपए की कार्यपालन यंत्री द्वारा अनुमोदित तकनीकी स्वीकृति वर्षों से अधर में - सरपंच पूनम सिंह*
यदि ग्राम पंचायत सेदहा सरपंच श्रीमती पूनम सिंह की मानें तो स्कूल के क्षतिग्रस्त पड़े कमरों एवं भवनों की पूरी जानकारी ग्राम सभा के प्रस्ताव सहित पहले ही पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और इंजीनियर को भेजी जा चुकी है। सरपंच प्रतिनिधि पुष्पराज सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत द्वारा विधिवत ग्राम सभा का प्रस्ताव पारित किया जाकर कार्यपालन यंत्री, उपयंत्री एवं सहायक यंत्री द्वारा हिनौती स्कूल भवन में क्षतिग्रस्त भवनों के मरम्मत एवं पेवर ब्लॉक के कार्य के लिए पत्र क्रमांक 1252 दिनांक 17/11/2025 के माध्यम से तकनीकी स्वीकृति आदेश जारी किया गया था जो कि 25 लाख की सीमा के अंतर्गत है। लेकिन यह जिला खनिज मद से जारी किया जाना था जो कि आज दिनांक तक कार्ययोजना में ही शामिल नहीं कराया गया है जिसकी वजह से अभी प्रशासकीय स्वीकृति आदेश जारी न होने और फंड के अभाव की वजह से काम रुका है।
*तो क्या इस बाबूगिरी और लालफीताशाही के चक्कर में फंसा रहेगा 700 छात्रों का भविष्य संकट में?*
यदि प्राचार्य और सरपंच की मानें तो यहां स्थानीय निकाय स्तर एवं स्कूल ने अपना दायित्व पूरा कर दिया है। अब बड़ा सवाल यह है जब स्कूल के 700 से अधिक छात्रों एवं दर्जनों शिक्षकों का जीवन संकट में बना हुआ है ऐसे में आखिर लगभग 8 माह पूर्व वर्ष 2025 में जारी की गई तकनीकी स्वीकृति अभी तक कैसे जिला माईनिंग कार्यालय के प्रमुख संजय सिंह की टेबल में धूल फांक रही है। गौरतलब है कि जिला माईनिंग फंड कार्यालय पहले भी काफी बदनाम रहा है जहां काम वही होते हैं जब कुछ चढ़ावा चढ़ जाता है बाकी यह कोई देखने वाला नहीं है कि कार्य की अर्जेंसी और प्राथमिकता का स्तर क्या है। इसके पहले भी कई ऐसी ग्रेवल सड़कें हैं जिनके लिए गांववालों ने वर्षों पूर्व से आंदोलन किया था लेकिन वह सभी कार्य आज भी चढ़ावा के अभाव में लटके पड़े हैं जबकि अन्य बाद के कार्यों के लिए राशि जारी की जा चुकी हैं।
*क्या जिला कलेक्टर और संभाग आयुक्त जिला माईनिंग फंड के ओआईसी संजय सिंह पर करेंगे कार्यवाही?*
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने डीएमएफ विभाग को संजय सिंह से हटाकर किसी अन्य अधिकारी को आवंटित किए जाने के लिए पहले भी कमिश्नर को ज्ञापन दिया था लेकिन उस पर कार्यवाही मात्र पत्राचार तक ही सीमित रह गई है। उनका मानना है जब तक जिला माईनिंग फंड का ओआईसी नहीं बदला जाता तब तक कार्यों की प्राथमिकता और सही जानकारी कभी भी जिला कलेक्टर के समक्ष पेश नहीं की जा सकेगी। हालांकि उन्होंने वर्तमान जिला कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी पर भरोसा जताया है और जल्दी कार्यवाही किया जाकर जल्द से जल्द हिनौती स्कूल के क्षतिग्रस्त भवन परिसर के मरम्मत और निर्माण की आशा व्यक्त की है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*
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