Friday, October 9, 2026

Breaking:// रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का एक बार पुनः भारी विरोध: ग्रामीणों ने रोका बोरहोल का काम, फर्जी एनओसी की जांच की मांग//

Breaking:// रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का एक बार पुनः भारी विरोध: ग्रामीणों ने रोका बोरहोल का काम, फर्जी एनओसी की जांच की मांग//

*"विकास चाहिए, रेडिएशन नहीं!" रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ जनसैलाब, बैकफुट पर प्रशासन*

*रीवा में बड़ा बवाल: पुलिस बल के साथ पहुंचे अफसरों को ग्रामीणों ने घेरा, टाटा न्यूक्लियर प्लांट का काम ठप*

*फर्जी एनओसी के सहारे न्यूक्लियर प्लांट? सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने उठाए शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल*

*रोझौही में गर्जा जन-आक्रोश: जानिए क्यों टाटा के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ खड़े हुए हजारों ग्रामीण*

दिनांक 09 अक्टूबर 2026 विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्य प्रदेश):

रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई कला और रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। दिनांक 09 अक्टूबर को जब प्रशासनिक टीम, पुलिस बल और कंपनी के अधिकारी परियोजना से जुड़ी अग्रिम प्रक्रिया के तहत एक बार पुनः बोरहोल करने पहुंचे, तो सरई कला, रोझौही और आसपास के कई गांवों के हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर इसका कड़ा विरोध किया और काम रोक दिया।
*प्रशासनिक दल और अधिकारियों की मौजूदगी*

परियोजना स्थल पर स्थिति संभालने और बोरहोल की कार्यवाही पूरी कराने के लिए भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे थे। मौके पर प्रमुख रूप से:

*प्रशासन एवं पुलिस:* सिरमौर तहसीलदार/नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पांडेय, लालगांव चौकी प्रभारी शैल यादव।

*संस्थाएं व अधिकारी:* एमपीआईडीसी (MPIDC) के प्रमुख यूके तिवारी, एनपीसीआईएल (NPCIL) के वैज्ञानिक श्री जैन, टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा व कंपनी के इंजीनियर।

*स्थानीय जनप्रतिनिधि व समाजसेवी:* सरई सरपंच श्रीमती कोमल सिंह, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, समाजसेवी एवं पत्रकार आनंद द्विवेदी, सरपंच पति संजय सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी मुख्य रूप से मौजूद रहे। 
*रेडिएशन और परमाणु कचरे के खतरे से सहमे ग्रामीण*

   प्रदर्शन के दौरान हजारों की संख्या में एकत्र ग्रामीणों ने टाटा कंपनी और न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। तहसीलदार बिंदु तिवारी, एमपीआईडीसी के अधिकारी यूके तिवारी और कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने और मनाने की काफी कोशिश की, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे। ग्रामीणों का कहना था कि न्यूक्लियर पावर प्लांट से निकलने वाले जहरीले कचरे और हानिकारक रेडिएशन से उनके क्षेत्र का पर्यावरण, स्वास्थ्य और भविष्य पूरी तरह तबाह हो जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट लहजे में प्रशासन से कहा, "यदि सरकार वाकई हमारा विकास चाहती है, तो यहां कोई अन्य उद्योग या व्यवसाय स्थापित करे, न कि जानलेवा न्यूक्लियर पावर प्लांट।"
*फर्जी एनओसी और ग्राम सभा प्रस्ताव पर उठे सवाल*

मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने प्रशासन के रवैये पर कड़ा एतराज जताते हुए लोकतंत्र और ग्राम सभा के अधिकारों का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने सरपंच के नाम पर जारी कथित फर्जी एनओसी (पत्र क्रमांक 170/2026) का मुद्दा उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
द्विवेदी ने कहा कि ग्राम सभा द्वारा पूर्व में ही 03 सितंबर और 05 अक्टूबर 2026 को इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं। जब ग्राम पंचायत, आसपास के हजारों लोग और स्थानीय ग्राम सभा इस प्रोजेक्ट के पक्ष में नहीं हैं, तो शासन-प्रशासन आखिर किसके दबाव में जबरन इस परियोजना को क्षेत्र पर थोपने का प्रयास कर रहा है?
*रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट के मामले में अब आगे क्या?*

ग्रामीणों के कड़े रुख और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए फिलहाल बोरहोल और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को रोकना पड़ा है। क्षेत्र में जन-आक्रोश चरम पर है, और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Thursday, October 8, 2026

Breaking:// रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना: टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए मांगी बिजली की आपूर्ति//

*Breaking:// रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना: टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए मांगी बिजली की आपूर्ति//*

दिनांक 09 अक्टूबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश:

   मध्य प्रदेश के रीवा जिले में परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की दिशा में प्रारंभिक कदम बढ़ाए जा रहे हैं। टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) ने भारत सरकार के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन और शांति अधिनियम 2025 के तहत रीवा जिले के रोझौही गांव के समीप 2x220 मेगा वाट क्षमता के प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाना है।  
टाटा पावर के बिजनेस डेवलपमेंट, सर्विसेज एंड टेक्नोलॉजी प्रमुख सी. पी. तिवारी द्वारा कार्यपालन यंत्री ओ एंड एम त्योंथर संभाग एमपीईबी पचामा त्यौंथर को लिखे गए पत्र दिनांक 13 जुलाई 2026 में परियोजना स्थल पर निर्माण गतिविधियों के लिए आवश्यक बिजली आपूर्ति से संबंधित विवरण की मांग की गई है।  
*इस पत्र की मुख्य बातें:*

*बिजली की आवश्यकता:* परियोजना निर्माण के दौरान लगभग 10 मेगा वाट एंपियर MVA की अस्थायी बिजली आपूर्ति की आवश्यकता होगी। 
 
*सर्वे की मांग:* पत्र में बिजली विभाग से अनुरोध किया गया है कि प्रस्तावित स्थान पर 10 बिजली आपूर्ति की संभावनाओं का आकलन करने के लिए सर्वे कराया जाए।  

*प्रस्तावित स्थान:* यह परियोजना रीवा जिले के रोझौही गांव के पास स्थापित की जानी प्रस्तावित है (भौगोलिक निर्देशांक: 24°52'32.15"एन 81°29'55.01"ई)
  
*विभागीय समन्वय:* इससे पहले 1 अप्रैल 2026 को रीवा के संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक अंतर-विभागीय समन्वय बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें राजस्व, वन, जल निगम, डब्लूआरडी, एमपीआईडीसी और मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। 
 
*सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल*

इस पूरे मामले पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने मुखर होकर प्रशासन और संबंधित कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अधिकारी और कंपनी मनमाने रवैये पर उतारू हैं और स्थानीय लोगों के हितों व जनभावनाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहे हैं। द्विवेदी ने कहा, "बिना ग्रामीणों की सहमति और उनके अधिकारों की रक्षा किए इस तरह के संवेदनशील प्रोजेक्ट को जबरन थोपना सरासर गलत है। अधिकारियों की तानाशाही और कंपनी की मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
*आंदोलन और तेज होने के आसार*

  ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित होने और सामाजिक संगठनों के समर्थन के बाद अब इस मुद्दे पर बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो चुका है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को रद्द नहीं किया जाता, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा।

  हालांकि अपने पत्र में टाटा पावर ने इस परियोजना के सुचारू संचालन के लिए संबंधित विभागों से सहयोग की अपेक्षा भी जताई है। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking:// रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए जाली सहमति पत्र बनाने का आरोप, सरपंच ने कमिश्नर और कलेक्टर से की जांच की मांग//

*Breaking:// रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए जाली सहमति पत्र बनाने का आरोप, सरपंच ने कमिश्नर और कलेक्टर से की जांच की मांग//*

*रीवा: ग्राम सभा ने खारिज किया न्यूक्लियर प्रोजेक्ट का प्रस्ताव, जाली लेटरहेड पर फर्जी सहमति पत्र उजागर*

*न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए बोरवेल खनन पर घमासान; सरपंच का दावा— "जाली दस्तखत से बनाया गया 100 और 50 मीटर बोरवेल का NOC"*

*न्यूक्लियर पावर प्लांट के नाम पर जालसाजी: ग्राम पंचायत सरई कला के फर्जी लेटरहेड पर फर्जी सहमति पत्र जारी*


   दिनांक 08 अक्टूबर 2026 रीवा मप्र।

रीवा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) के लिए बोरवेल खनन और बोरिंग स्टडी से जुड़े सहमति पत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम पंचायत सरई कला की सरपंच कोमल संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके लेटरहेड का गलत इस्तेमाल कर एक फर्जी सहमति पत्र (NOC) तैयार किया गया है। इस संबंध में उन्होंने संभाग आयुक्त (कमिश्नर) और कलेक्टर रीवा को औपचारिक शिकायत पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और फर्जी पत्र को निरस्त करने की मांग की है।  

*क्या है पूरा मामला?*

  प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट हेतु बीएसआर प्रोजेक्ट के तहत स्टैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी (एसएसएससी) डीएई की समीक्षा प्रक्रिया और जियोटेक (Geotech) आवश्यकताओं के तहत 100 मीटर एवं 50 मीटर के 8 बोरवेल किए जाने का प्रस्ताव था।  
  *न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए ग्राम सभा की असहमति*

दिनांक 3 सितंबर 2026 को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट हेतु बोरवेल किए जाने पर असहमति जताते हुए प्रस्ताव निरस्त कर दिया था। ग्राम सभा के इस निर्णय और बोरवेल की अनुमति न देने की सूचना 5 सितंबर 2026 को पत्र क्रमांक 48 के माध्यम से कलेक्टर रीवा को भेज दी गई थी।  

   *फर्जी लेटरहेड और जाली हस्ताक्षर का आरोप*

सरपंच कोमल संजय सिंह का आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को सिरमौर तहसील कार्यालय द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से मिले 27 पृष्ठों के दस्तावेजों (पी डी एफ) के अवलोकन के दौरान उन्हें एक संदेहास्पद पत्र (क्रमांक 170/2026, दिनांक 04/09/2026) मिला।  
इस पत्र में 3 प्रमुख शर्तों के साथ न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के बोरवेल हेतु सहमति देने की बात दर्शाई गई थी। सरपंच ने स्पष्ट किया है कि यह लेटरहेड (क्रमांक 170/2026) एवं इस पर किए गए हस्ताक्षर पूरी तरह से बेफर्जी, फर्जी और कूट रचित (जाली) हैं।  
ग्राम पंचायत सरई कला या सरपंच द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट हेतु कोई भी सहमति पत्र या एनओसी आज दिनांक तक जारी नहीं की गई है।  

 *सरपंच ग्राम पंचायत सरई कला श्रीमती कोमल सिंह की माग*

  सरपंच ने आयुक्त एवं कलेक्टर से मांग की है कि दिनांक 04/09/2026 के कथित सहमति पत्र (क्रमांक 170/2026) की त्वरित जांच की जाए एवं इस फर्जी पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त व शून्य घोषित किया जाय एवं कूटरचित (जाली) दस्तावेज तैयार करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, October 6, 2026

ब्रेकिंग:// "विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु प्लांट नहीं चाहिए": 28 हजार करोड़ के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में गरजे रोझौही के ग्रामीण//

*ब्रेकिंग:// "विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु प्लांट नहीं चाहिए": 28 हजार करोड़ के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में गरजे रोझौही के ग्रामीण//*


*रीवा में गूंजा नारा — "परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ": रोझौही में टाटा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध तेज!*


*सिरमौर में आर-पार की लड़ाई: 28 हजार करोड़ के पावर प्लांट के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का हुंकार!*


*28 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट और विस्थापन का खौफ: रीवा के रोझौही में क्यों भड़का परमाणु विरोधी आंदोलन?*


*रेडिएशन और बीमारी के भय से थर्राया रोझौही, ग्रामीणों ने नेताओं को बताया जनविरोधी*


*रीवा न्यूक्लियर प्लांट विवाद: जन-विरोध के बीच अब कोर्ट जाने की तैयारी में सामाजिक कार्यकर्ता*


*रोझौही का साफ संदेश: "जान देंगे, जमीन नहीं" — न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ सड़क पर उतरा जन-सैलाब*


*स्वच्छ हवा, साफ प्रकृति चाहिए, परमाणु नहीं: डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के खिलाफ रीवा में महाआंदोलन*


*बोरिंग मशीनें खदेड़ने के बाद अब सरकार को चेतावनी: रीवा में नहीं बनने देंगे न्यूक्लियर पावर प्लांट*


विशेष ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)

दिनांक: 07 अक्टूबर 2026


रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले अंतर्गत सिरमौर तहसील का रोझौही गांव इन दिनों एक बड़े जन-आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। 06 अक्टूबर 2026 को रोझौही में आयोजित विशाल जन-प्रदर्शन में हजारों की संख्या में पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के गगनभेदी नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। "परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ", "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए" और "स्वच्छ प्रकृति, साफ हवा, परमाणु नहीं इसकी दवा" जैसे तीखे नारों के साथ ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी जान और जमीन की कीमत पर इस संयंत्र को कतई स्थापित नहीं होने देंगे।  


*क्या है 28 हजार करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट?*


मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) राजेंद्र शुक्ला द्वारा पूर्व में सिरमौर क्षेत्र में इस वृहद परियोजना को लगाए जाने की घोषणा की गई थी। इसकी कुल लागत लगभग ₹28,000 करोड़ है जबकि प्रस्तावित भूमि का रकबा रोझौही एवं आसपास का 169 हेक्टेयर का क्षेत्र है।  यह न्यूक्लियर पावर प्लांट  टाटा पावर द्वारा स्थापित किया जाना है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस विशालकाय प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्र के लगभग 100 से अधिक गांवों की शांति, सुरक्षा और अस्तित्व दांव पर लग जाएगा। 


*बोरिंग मशीनों को खदेड़ चुका है जन-आक्रोश*


रोझौही और सरई कला क्षेत्र में पिछले कई महीनों से परमाणु ऊर्जा विरोधी आंदोलन सुलग रहा है। इस आंदोलन ने तब बड़ा मोड़ लिया जब पिछले दिनों एमएस फुग्रो कंपनी की बोर-होल (भूमि परीक्षण) मशीनें सर्वेक्षण के लिए गांव में दाखिल हुईं।

ग्राम सभा द्वारा पूर्व में ही कलेक्टर के पत्र (क्रमांक 117) के विरोध में प्रस्ताव पारित कर असहमति जताई जा चुकी थी। इसके बावजूद जब प्रशासन और कंपनी की गाड़ियां गांव पहुंचीं, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने लामबंद होकर मशीनों को काम करने से रोक दिया और उन्हें उल्टे पांव खदेड़ दिया। इसके तुरंत बाद सरई कला ग्राम पंचायत द्वारा बुलाई गई विशेष ग्राम सभा में भी सर्वसम्मति से न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।  


*विस्थापन और रेडिएशन का मंडराता खौफ*


ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल जमीन बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और अस्तित्व को बचाने की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से भयंकर रेडिएशन का खतरा है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी विकिरण और उसके कचरे (न्यूक्लियर वेस्ट) से कैंसर, जल-प्रदूषण और गंभीर आनुवंशिक बीमारियों का स्थायी डर बना रहेगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से बड़े पैमाने पर विस्थापन होना भी तय है। जिसमें 169 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित होने से हजारों परिवार बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे। उपजाऊ कृषि भूमि छिन जाने से किसानों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।


*सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता का बयान*


आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा "सरकार पूरी तरह से जनविरोधी रवैया अख्तियार कर रही है। जब क्षेत्र की जनता अपनी भूमि, पर्यावरण और जीवन की रक्षा के लिए न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहती, तो सरकार को तानाशाही रवैया छोड़कर इस प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द करना चाहिए। यदि जन-भावनाओं की अनदेखी कर सरकार जबरन प्लांट थोपने का प्रयास करेगी, तो हमें इस मामले को लेकर न्यायालय (कोर्ट) का रुख करना पड़ेगा।"

— शिवानंद द्विवेदी (सामाजिक एवं RTI कार्यकर्ता)


*नेताओं को बताया जनविरोधी, कोर्ट जाने की तैयारी*


प्रदर्शन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और नेताओं के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की। लोगों का कहना है कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और स्थानीय नेताओं ने क्षेत्र के विकास के नाम पर इस विनाशकारी परियोजना का समर्थन कर जनता के साथ धोखा किया है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते इस योजना को रोझौही से वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय रीवा का घेराव किया जाएगा और उग्र आंदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।  


*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, October 4, 2026

Breaking://"न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए": रीवा के सरई कला में ग्राम सभा का बड़ा फैसला, टाटा कंपनी के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण//

*Breaking://न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए': रीवा के सरई कला में ग्राम सभा का बड़ा फैसला, टाटा कंपनी के खिलाफ लामबंद हुए ग्रामीण//*

*टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, नेताओं से पूछे तीखे सवाल; जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन की दी चेतावनी*

*रीवा: चेर्नोबिल-फुकुशिमा के खौफ के साए में ग्रामीण; रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ खोला मोर्चा*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज: सरई कला ग्राम सभा ने खारिज किया प्रस्ताव, ग्रामीणों ने कहा— 'विनाश नहीं, विकास चाहिए’*
रीवा दिनांक 05 अक्टूबर 2026 

  रीवा जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। ग्राम पंचायत सरई कला में आयोजित ग्राम सभा ने न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है। इसके बावजूद शासन और कंपनी द्वारा काम आगे बढ़ाने की कोशिशों से आक्रोशित ग्रामीणों ने कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
ग्रामीणों ने "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए" के जोरदार नारों के साथ अपना विरोध दर्ज कराया।
*रेडिएशन, कैंसर और विस्थापन का सता रहा डर*

प्रस्तावित प्लांट को लेकर ग्रामीणों में रेडिएशन से होने वाले दूरगामी खतरों को लेकर गहरा भय व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि न्यूक्लियर कचरे से जल, हवा और जमीन तीनों में व्यापक प्रदूषण फैलेगा, जिससे आसपास के हजारों गांव प्रभावित होंगे। रूस के चेर्नोबिल और जापान के फुकुशिमा डाईची परमाणु हादसों का उदाहरण देते हुए ग्रामीणों ने अंदेशा जताया कि यदि यहां कोई दुर्घटना होती है तो आने वाली पीढ़ियों को जन्मजात विकलांगता और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में लगभग 3,000 की आबादी अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) वर्ग की है। पूरी ग्राम पंचायत में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी गरीब और वंचित तबके की है, जिन पर बेघर होने और विस्थापन का सीधा खतरा मंडरा रहा है।
*जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूटा गुस्सा*

ग्रामीणों का गुस्सा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों — डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला और विधायक दिव्यराज सिंह—पर भी फूटा। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में कहा कि नेता अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाते हैं और खुद वहीं बस जाएंगे, लेकिन स्थानीय गरीब ग्रामीणों को रेडिएशन और खतरनाक बीमारियों के हवाले करना चाहते हैं।

विरोध के तहत पूर्व में ग्रामीणों ने सर्वे के लिए आई मैसर्स Fugro (फूग्रो) कंपनी की बोरिंग मशीनों को काम करने से रोककर वापस लौटा दिया था।
"जनविरोधी कदम उठा रही सरकार": सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस मुद्दे पर सरकार और कंपनी के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संवैधानिक संस्था 'ग्राम सभा' ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और जनता लगातार विरोध कर रही है, तो जबरन काम कराने की कोशिश क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि लोगों को निरंतर भय के साए में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
*जिला मुख्यालय में प्रदर्शन की चेतावनी*

सरई कला और रोझौही के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई और न्यूक्लियर पावर प्लांट की योजना को रद्द नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय का घेराव कर बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking:// रीवा में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट का विरोध: ग्राम पंचायत सरई कला की ग्राम सभा ने खारिज किया बोर लागिंग का प्रस्ताव//

*Breaking:// रीवा में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट का विरोध: ग्राम पंचायत सरई कला की ग्राम सभा ने खारिज किया बोर लागिंग का प्रस्ताव//*
  दिनांक 04 अक्टूबर 2026, विशेष संवाददाता, रीवा (मध्य प्रदेश)

    जिला रीवा के तहसील सिरमौर अंतर्गत आने वाले ग्राम रोझोही और आसपास के क्षेत्रों में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) / BSR परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ग्राम पंचायत सरई कला (जनपद पंचायत गंगेव) में आयोजित एक विशेष ग्राम सभा बैठक में ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से इस परियोजना से संबंधित भू-तकनीकी (Geotech) जांच एवं बोर लागिंग अध्ययन की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया है।

*कलेक्टर के पत्र के जवाब में बुलाई गई थी विशेष ग्राम सभा*

  प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, रीवा द्वारा जारी पत्र क्रमांक 117 / आर्म्स लाय / 2026 (दिनांक 21-08-2026) के माध्यम से ग्राम पंचायत सरई कला से TPCL द्वारा प्रस्तावित 08 बोर होल (जिनमें 100 मीटर गहराई के 04 बोर होल और 50 मीटर गहराई के 04 बोर होल शामिल हैं) की भू-तकनीकी जांच और बोर लागिंग अध्ययन हेतु सहमति/अनुमति और सहयोग मांगा गया था।
यह जांच परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्टैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी (SSSC) द्वारा समीक्षा किए जाने वाले साइट सिलेक्शन स्टेज का हिस्सा थी। आरटीआई से प्राप्त जानकारी अनुसार कलेक्टर कार्यालय के इसी पत्र के संदर्भ में 03 सितंबर 2026 को पंचायत भवन में सरपंच श्रीमती कोमल संजय सिंह की अध्यक्षता में विशेष ग्राम सभा की बैठक आयोजित की गई।
*रेडिएशन, प्रदूषण और विस्थापन पर जताई गंभीर चिंता*

ग्राम सभा की बैठक में उपस्थित ग्रामीणों, क्षेत्र के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के दूरगामी और गंभीर दुष्परिणामों पर गहन चिंता व्यक्त की।
कार्यवृत्त के अनुसार, बैठक में प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई:

*स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर खतरा:* परमाणु ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाले खतरनाक न्यूक्लियर कचरे और विकिरण (Radiation) के कारण जल, वायु एवं भूमि प्रदूषण का खतरा बना रहेगा। इससे स्थानीय निवासियों में कैंसर, ल्यूकेमिया जैसी असाध्य बीमारियां और आने वाली पीढ़ियों में जन्मजात अपंगता का जोखिम बढ़ेगा।

*वैश्विक हादसों का हवाला:* ग्राम सभा में पूर्व सोवियत संघ के चेरनोबिल हादसे (1986) और जापान के फुकुशिमा परमाणु हादसे का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ऐसे हादसों के कारण लाखों लोगों की मौत, जन्य विकलांगता और व्यापक विस्थापन हुआ है, जो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित है।

*विस्थापन और पलायन की मजबूरी:* यदि इस क्षेत्र में न्यूक्लियर प्लांट स्थापित होता है, तो सरई कला और आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों के हजारों परिवारों को अपने घर-बार छोड़कर विस्थापन और पलायन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
*सर्वसम्मति से पारित हुआ असहमति का प्रस्ताव*

बैठक में उपस्थित समस्त सदस्यों ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के पुराने इतिहास और इसके विनाशकारी प्रभावों को देखते हुए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि:
TPCL द्वारा प्रस्तावित 08 बोर होल करने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जाएगी और साथ में भविष्य में भी ग्राम पंचायत सरई कला या आसपास के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थापित करने की अनुमति नहीं होगी।
ग्राम पंचायत सरई कला द्वारा इस सर्वसम्मत निर्णय और ग्राम सभा के कार्यवृत्त (पृष्ठ 1 से 04) की प्रति संलग्न कर जांच प्रतिवेदन के रूप में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, रीवा को औपचारिक रूप से प्रेषित कर दिया गया है।

*ग्राम सभा की असहमति के बाद भी मैसर्स फुग्रो नामक बोर होल करने वाली कंपनी ने जबरन घुसेड़ी मशीनें*

 गौरतलब है कि ग्राम सभा की असहमति के बाद भी पिछले दिनों टाटा कंपनी से संबंधित कंपनी बोर होल किए जाने के लिए मैसर्स फुग्रो द्वारा अपनी दो नग बोरिंग मशीन लेकर मौके पर पहुंचने वाली थीं जिनको की ग्रामीणों ने भारी विरोध के बाद वापस कर दिया था। 

  ग्रामीणों और जानकारों ने सवाल उठाये हैं कि जब ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर कंपनी को न्यूक्लियर पावर प्लांट से संबंधित किसी प्रकार के कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं मिली थी तब कैसे बिना पंचायत की अनुमति और एनओसी के टाटा कंपनी कार्य को आगे बढ़ा रही है जिसको लेकर ग्रामीणों और आसपास के जनमानस में काफी अक्रोश व्याप्त है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Thursday, October 1, 2026

Breaking:// सिरमौर के रोझौही में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज, सरई और रोझौही के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//

*Breaking:// सिरमौर के रोझौही में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज, सरई और रोझौही के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्य प्रदेश) | 02 अक्टूबर 2026

  मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित रोझौही क्षेत्र में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रभावित वर्गों का विरोध अब और अधिक तेज हो गया है। हाल ही में कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्लांट से जुड़ी बोर लॉगिंग और मिट्टी परीक्षण प्रक्रिया के लिए एक पत्र जारी किए जाने के बाद से ही ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

  प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत सरई कला के सरपंच और सचिव से 04 बोर होल 100 मीटर गहराई तथा 04 बोर होल 50 मीटर गहराई तक करने की अनुमति मांगी गई है। इस प्रशासनिक पहल की जानकारी मिलते ही ग्राम सरई और रोझौही के लोगों ने एकजुट होकर सरकार और टाटा कंपनी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है और जमकर नारेबाजी की।

*दलित व वंचित वर्ग का आरोप और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रियता*

इस परियोजना से प्रभावित होने वाले स्थानीय वंचित और दलित वर्ग के लोगों ने सरकार पर ज्यादती का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना और उनके भविष्य को दांव पर लगाकर यह कदम उठाया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी और न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण पर कड़ा एतराज जताया। जनसंपर्क के दौरान उपस्थित कई नागरिकों ने सरकार की जनविरोधी नीति के विरुद्ध प्रदर्शन और नारेबाजी भी की। 

*"सैकड़ों पीढ़ियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट"*

स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेडिएशन के खतरे को देखते हुए यह परियोजना केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों के लिए एक भीषण आपदा साबित होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया, तो वे कंपनी को किसी भी स्थिति में काम नहीं करने देंगे और जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।

*पूरे विंध्य के इकोसिस्टम को खतरा*

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इस पावर प्लांट से केवल सरई कला और आसपास की सैकड़ों ग्राम पंचायतों का अस्तित्व ही खतरे में नहीं पड़ेगा, बल्कि पूरे रीवा, मऊगंज और विंध्य क्षेत्र के पर्यावरण व इकोसिस्टम पर भीषण संकट के बादल मंडराने लगेंगे।

वर्तमान में क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग इस परियोजना के पूर्ण विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*