Thursday, October 1, 2026

Breaking:// सिरमौर के रोझौही में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज, सरई और रोझौही के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//

*Breaking:// सिरमौर के रोझौही में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध तेज, सरई और रोझौही के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्य प्रदेश) | 02 अक्टूबर 2026

  मध्य प्रदेश के रीवा जिले स्थित रोझौही क्षेत्र में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रभावित वर्गों का विरोध अब और अधिक तेज हो गया है। हाल ही में कलेक्टर कार्यालय द्वारा प्लांट से जुड़ी बोर लॉगिंग और मिट्टी परीक्षण प्रक्रिया के लिए एक पत्र जारी किए जाने के बाद से ही ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

  प्रशासन की ओर से ग्राम पंचायत सरई कला के सरपंच और सचिव से 04 बोर होल 100 मीटर गहराई तथा 04 बोर होल 50 मीटर गहराई तक करने की अनुमति मांगी गई है। इस प्रशासनिक पहल की जानकारी मिलते ही ग्राम सरई और रोझौही के लोगों ने एकजुट होकर सरकार और टाटा कंपनी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है और जमकर नारेबाजी की।

*दलित व वंचित वर्ग का आरोप और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रियता*

इस परियोजना से प्रभावित होने वाले स्थानीय वंचित और दलित वर्ग के लोगों ने सरकार पर ज्यादती का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना और उनके भविष्य को दांव पर लगाकर यह कदम उठाया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बात रखी और न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण पर कड़ा एतराज जताया। जनसंपर्क के दौरान उपस्थित कई नागरिकों ने सरकार की जनविरोधी नीति के विरुद्ध प्रदर्शन और नारेबाजी भी की। 

*"सैकड़ों पीढ़ियों के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट"*

स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेडिएशन के खतरे को देखते हुए यह परियोजना केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों के लिए एक भीषण आपदा साबित होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया, तो वे कंपनी को किसी भी स्थिति में काम नहीं करने देंगे और जिला मुख्यालय का घेराव करेंगे।

*पूरे विंध्य के इकोसिस्टम को खतरा*

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इस पावर प्लांट से केवल सरई कला और आसपास की सैकड़ों ग्राम पंचायतों का अस्तित्व ही खतरे में नहीं पड़ेगा, बल्कि पूरे रीवा, मऊगंज और विंध्य क्षेत्र के पर्यावरण व इकोसिस्टम पर भीषण संकट के बादल मंडराने लगेंगे।

वर्तमान में क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थानीय लोग इस परियोजना के पूर्ण विरोध में चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking:// रीवा के सिरमौर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुगबुगाहट: टाटा पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए भू-तकनीकी जांच और बोर लॉगिंग अध्ययन की प्रक्रिया शुरू//

*Breaking:// रीवा के सिरमौर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुगबुगाहट: टाटा पावर के प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए भू-तकनीकी जांच और बोर लॉगिंग अध्ययन की प्रक्रिया शुरू//*
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र में स्वच्छ और हरित ऊर्जा के नाम पर बहुत बड़ी विपदा का प्रारंभ हो चुका है। ग्राम पंचायत सरई कला के ग्राम रोझोही में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) / BSR परियोजना को लेकर मैदानी स्तर पर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) की स्टैंडिंग साइट सिलेक्शन कमेटी (SSSC) से साइट चयन की मंजूरी प्राप्त करने हेतु प्राथमिक भू-तकनीकी (Geotech) जांच प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
  
 *योजना के क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर रीवा ने जारी किए दिशानिर्देश, स्थानीय लोगों में आक्रोश* 

कलेक्टर कार्यालय ने जारी किए निर्देश
अपर जिला दण्डाधिकारी, जिला रीवा (म.प्र.) द्वारा पत्र क्रमांक 117/आर्म्स लाय/2026 (दिनांक 21 अगस्त 2026) के माध्यम से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिरमौर, तहसीलदार सिरमौर तथा ग्राम पंचायत सरई कला एवं रोझोही के सरपंच/सचिवों को निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के माध्यम से इस विनाशकारी परियोजना हेतु प्रस्तावित जांचों में आवश्यक अनुमति, सहमति और पूर्ण प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है।

*परियोजना से जुड़ी मुख्य बिंदु और जांच प्रक्रिया:*

बताया गया कि प्रस्तावित स्थल के तौर पर यह प्रोजेक्ट अक्षांश एवं देशांतर 24°52'32.15"एन, 81°29'55.01"ई (ग्राम रोझोही, तहसील सिरमौर, जिला रीवा) पर प्रस्तावित है। जिसके विषय में बोर लॉगिंग व ड्रिलिंग कार्य हेतु भू-तकनीकी (Geological/Geotechnical) अध्ययन के तहत कुल 08 बोर होल किए जाएंगे जिसमें 04 बोर होल 100 मीटर गहराई तक एवं 04 बोर होल 50 मीटर गहराई तक।

पत्र के माध्यम से प्राप्त जानकारी अनुसार अध्ययन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी बोर होल को नियमानुसार पूरी तरह बंद (plug back) कर दिया जाएगा। इस जियो-तकनीकी जांच का कार्य फुग्रो नामक एजेंसी द्वारा किया जाता है। समस्त कार्य एनपीसीआईएल (न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के तकनीकी मानकों के अनुसार होना बताया गया है। भूवैज्ञानिक और जियो-फिजिकल अध्ययन का निष्पादन भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रॉक मैकेनिक्स (एआआएम) द्वारा किया जाएगा।

*स्वच्छ ऊर्जा का दावा जबकि हकीकत में खतरों से भरी परियोजना, रेडिएशन से कैंसर और जन्मजात अपंगता जैसे खतरे*

  दावे किए जा रहे हैं कि यह प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उधर एक तरफ प्रशासन का कहना है कि यह एक राष्ट्रीय महत्व की स्वच्छ ऊर्जा परियोजना है, जिससे भविष्य में क्षेत्र का ढांचागत विकास होगा और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। जबकि लोगों का आरोप है कि इस परियोजना की वजह से लोगों को भारी संख्या में विस्थापित होना पड़ेगा एवं यदि वह अपने घर बार और जमीन नहीं छोड़ते हैं तो आने वाले समय में वह और उनके परिवार भीषण और खतरनाक विकिरण के शिकार होंगेजिससे असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर, ल्यूकेमिया थायराइड जेनेटिक मोडिफिकेशन जन्मजात अपंगता के शिकार होंगे। 

 *ग्राम पंचायत एवं ग्राम सभा की भूमिका काफी अहम*

   अब देखना यह है कलेक्टर रीवा के कार्यालय से जारी किए गए इस निर्देश के बाद ग्राम पंचायत सरई कला क्या निर्णय लेती है? बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्राम पंचायत सरई हजारों लाखों लोगों के जीवन को संकट में डालने वाली इस न्यूक्लियर पावर प्लांट योजना को लगाए जाने की अनुमति देती है अथवा इसका विरोध करती है? सवाल तो कई हैं लेकिन एक बात तय है जिस परियोजना को लेकर अभी तक असमंजस की स्थिति थी वह इस प्रशासनिक पत्राचार से सबके सामने आ चुकी है और यह तय हो गया है शासन प्रशासन की मंशा आमजन की भावना के उलट रोझौही ग्राम के शासकीय भूभाग में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने की है। अब देखना यह है जनता उसका किस प्रकार विरोध करती है।

*सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर परियोजना का किया विरोध* 

 सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है उनके और सैकड़ों हजारों लोगों द्वारा प्रधानमंत्री के नाम पर ज्ञापन दिए जाने के बाबजूद एवं इसका विरोध किए जाने के बाद भी शासन प्रशासन द्वारा टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने में तेजी यह साबित करती है कि यह सरकार आमजन की भावना के विपरीत मनमानी पर उतारू है एवं आमजन को जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के लगने के बाद लोगों का जीना दूभर हो जाएगा और आने वाली सैकड़ों पीढ़ियों के लिए यह बड़ा खतरा है। शिवानंद ने सरकार को आगाह किया है यदि रोझौही ग्राम में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाता है तो जनता इसका भरपूर विरोध करेगी। आवश्यकता पड़ेगी तो जनहित के लिए न्यायालय की शरण भी लेना पड़ेगा।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, September 27, 2026

Breaking:// आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 4 और व्यावहारिक चुनौतियों पर व्यापक मंथन: कानूनी प्रावधानों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर//

*Breaking:// आरटीआई अधिनियम 2005 की धारा 4 और व्यावहारिक चुनौतियों पर व्यापक मंथन: कानूनी प्रावधानों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर//*

विशेष रिपोर्ट दिनांक 27 सितंबर 2026 रीवा मप्र 
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 4 के कार्यान्वयन, पारदर्शी शासन और इसके क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर हाल ही में दिनांक 27 सितंबर 2026 को समय 11 बजे सुबह से लेकर 2 बजे दोपहर तक एक उच्चस्तरीय ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रतिभागियों ने आरटीआई कानून के प्रभावी इस्तेमाल, सार्वजनिक प्राधिकरणों की जवाबदेही तथा सूचना आयोगों की वर्तमान स्थिति पर गहन विचार-विमर्श किया।

बैठक में मुख्य वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत आने वाले 'सक्रिय प्रकटीकरण' (Proactive Disclosure) की आवश्यकताओं का बारीक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कानून की मंशा सरकारी विभागों द्वारा स्वतः सूचनाएं सार्वजनिक करने की थी, ताकि आम जनता को बार-बार आरटीआई न लगानी पड़े, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके ठीक उलट है।
*धारा 4 का कार्यान्वयन: कानूनी प्रावधान बनाम जमीनी हकीकत*

बैठक के दौरान कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा अनुशंसित 25 विस्तारित प्रकटीकरण बिंदुओं और आरटीआई कानून में शामिल मूल 17 बिंदुओं के बीच के अंतर पर विस्तृत चर्चा हुई। जिसमें कमजोर अनुपालन और सीआईसी ऑडिट के विषय में वीरेंद्र कुमार ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के ऑडिट आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 838 सार्वजनिक प्राधिकरणों में से केवल 19 ही पारदर्शिता के निर्धारित मानकों को पूरा करते हैं। वेबसाइटों की दुर्दशा के विषय में बताया गया कि अधिकांश सरकारी विभागों द्वारा दी गई जानकारी पुरानी होती है, संपर्क विवरण अपडेट नहीं होते और दस्तावेज़ खराब तरीके से स्कैन किए गए पीडीएफ प्रारूप में अपलोड किए जाते हैं, जिससे सूचना तक पहुँच बेहद कठिन हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के विषय में बताया गया कि हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य 'थर्ड पार्टी ऑडिट' और सख्त प्रवर्तन तंत्र के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, लेकिन सार्वजनिक प्राधिकरणों में उदासीनता और निष्पक्षता की भारी कमी बनी हुई है। संघीय ढांचा के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया गया कि DoPT और कार्मिक मंत्रालय की 25 सूत्रीय विस्तारित सिफारिशों को लागू करने में राज्यों के संघीय ढांचे से जुड़ी कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं, जिसके कारण कई राज्य सरकारें इन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रही हैं।

 *सूचना आयुक्तों की नियुक्ति और संवैधानिक पहलू*

बैठक में सत्येंद्र सिंह, सुनील खंडेलवाल, जयपाल सिंह खींची, फतेह चंद्र गुलेरिया, देवेंद्र अग्रवाल, राज तिवारी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी और अन्य प्रतिभागियों ने मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में सूचना आयोगों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई। बताया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया पर विवाद बना हुआ है। चर्चा के दौरान यह मुद्दा उठा कि मुख्यमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता की समिति द्वारा की जाने वाली सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट का रुख महत्वपूर्ण रहा है और इस तरह के संवैधानिक मामलों पर विचार किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता पर प्रतिभागियों ने जोर देकर कहा कि आयोगों में आयुक्तों के पद खाली रहने या नियुक्तियों में देरी से आरटीआई अधिनियम का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। इसके लिए ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति और सरकार व सूचना आयोगों के बीच समान सहयोग आवश्यक है।
*विभिन्न राज्यों से जुड़े मामले और शिकायतें*

बैठक के दौरान देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं और आरटीआई के उपयोग पर विशेषज्ञ की सलाह ली:

*नरेगा फंड का दुरुपयोग और पुलिस जांच*

डॉ. सिंह ने मनरेगा (नरेगा) निधि में हुए भ्रष्टाचार और शिकायत के बावजूद पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने का मुद्दा उठाया। वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने स्पष्ट किया कि जब पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं करती, तो केवल सूचना आयोग के भरोसे रहने के बजाय संबंधित साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर सीधे अपराधिक न्यायालय (मजिस्ट्रेट कोर्ट) में शिकायत दर्ज की जानी चाहिए, क्योंकि सूचना आयोग के पास आपराधिक मामलों जैसी शक्तियां नहीं होतीं।

*सुनील खंडेलवाल द्वारा प्रस्तुत झारखंड सूचना आयोग की स्थिति*

झारखंड में सूचना आयोग के निष्क्रयात्मक होने पर चर्चा हुई। विशेषज्ञ ने सलाह दी कि सबसे पहले आयोग के कामकाज और मुख्य सूचना आयुक्त की कार्यप्रणाली को सत्यापित किया जाए। यदि आयोग पूरी तरह ठप है, तो इस स्थिति को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय का रुख किया जा सकता है।

*निर्माण कार्य की सामग्री और भौतिक सत्यापन*

नगर परिषद की नाली निर्माण परियोजना में इस्तेमाल घटिया सामग्री की जांच के संबंध में पूछे गए सवाल पर बताया गया कि आरटीआई के तहत रिकॉर्ड का निरीक्षण (Inspection) कोई भी नागरिक कर सकता है, लेकिन निजी सामग्री या बिना सक्षम आदेश के किसी परिसर से भौतिक नमूने लेने के लिए उचित कानूनी अधिकार की आवश्यकता होती है। इसके लिए किसी अन्य विभाग से स्वतंत्र इंजीनियर द्वारा निरीक्षण की मांग की जा सकती है।

*फसल बीमा और मुआवजे का दावा*

फसल बीमा पॉलिसियों की जानकारी देने से इनकार करने पर उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने तथा सूचना मिलने में हुई अनावश्यक देरी के कारण हुए वित्तीय नुकसान के सबूत के साथ सूचना आयोग में मुआवजा मांगने की रणनीति पर चर्चा की गई।

*भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता*

सरकारी भर्तियों (अनुच्छेद 309 के तहत शक्तियों) में पारदर्शिता पर चर्चा करते हुए सलाह दी गई कि सभी आवेदन पत्रों और भर्ती विज्ञापनों का रिकॉर्ड आरटीआई से मांगा जा सकता है। डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए ऑनलाइन विज्ञापनों के स्क्रीनशॉट या फोटो ले लेना चाहिए।

बैठक के अंत में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि आरटीआई कानून को प्रभावी बनाने के लिए तीसरे पक्ष के नियमित ऑडिट, लोक सूचना अधिकारियों (PIOs) के प्रशिक्षण, नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी और कड़े प्रशासनिक सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। यदि सरकारी विभाग धारा 4 का ईमानदारी से पालन करते हुए स्वतः जानकारी सार्वजनिक करें, तो आम नागरिकों को आरटीआई आवेदनों और लंबी अपीलों के चक्रव्यूह से राहत मिल सकती है। इस महत्वपूर्ण विषय पर आगे की रणनीति और प्रगति की समीक्षा अगले रविवार आयोजित होने वाली बैठक में की जाएगी।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, September 15, 2026

Breaking:// झिरिया शिव एवं देवी मंदिर सेदहा में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ सुंदरकांड पाठ व सूक्ष्म भंडारा//

*Breaking:// झिरिया शिव एवं देवी मंदिर सेदहा में गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ सुंदरकांड पाठ व सूक्ष्म भंडारा//*
दिनाँक 16 सितंबर 2026 रीवा मप्र।

    ग्राम सेदहा स्थित झिरिया शिव एवं देवी मंदिर प्रांगण में मंगलवार (15 सितंबर 2026) को भव्य सुंदरकांड पाठ एवं सूक्ष्म भंडारे का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मंगलवार का कार्यक्रम हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण कैथा के तत्वावधान में आयोजित हुआ जो शाम 07:00 बजे से शुरू होकर देर रात तक भक्तिमय वातावरण में चलता रहा।
सुंदरकांड पाठ के समापन के उपरांत सूक्ष्म भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा अनुसार प्रत्येक मंगलवार की शाम झिरिया मंदिर प्रांगण में सुंदरकांड और भंडारे का कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किया जाता है। इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में आसपास के ग्रामवासियों एवं गणमान्य नागरिकों का सराहनीय सहयोग और योगदान रहता है। समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से यह कार्यक्रम निरंतर आयोजित हो रहा है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Saturday, September 12, 2026

Breaking// यज्ञों की पावन स्थली कैथा के श्रीमद् शारदा देवी मंदिर में भंडारे का आयोजन, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद//

*Breaking// यज्ञों की पावन स्थली कैथा के श्रीमद् शारदा देवी मंदिर में भंडारे का आयोजन, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद//*
रीवा (विशेष ब्यूरो रिपोर्ट): यज्ञों की पावन एवं पुनीत स्थली कैथा स्थित श्रीमद् शारदा देवी मंदिर प्रांगण में विगत शुक्रवार, 11 सितंबर को विशाल भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के बड़ी संख्या में भक्त श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और माता रानी का प्रसाद ग्रहण किया।
कैथा की प्राचीन परम्परानुसार, हनुमान मंदिर प्रांगण में मुख्य कार्यक्रम संपन्न होने के उपरांत देवी मंदिर प्रांगण में भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए शुक्रवार को सर्वप्रथम भगवान सत्यनारायण की कथा हुई, तत्पश्चात श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से दुर्गा चालीसा का पाठ किया। पूजन और आरती के उपरांत महाप्रसाद का वितरण प्रारंभ हुआ।
कार्यक्रम के संयोजक शिवानंद द्विवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि इन समस्त धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रीमद् भागवत कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में किया जाता है। आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Tuesday, September 8, 2026

Breaking:// हनुमान जी स्वामी मंदिर कैथा में भागवत महायज्ञ का हुआ समापन, विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब//

*Breaking:// हनुमान जी स्वामी मंदिर कैथा में भागवत महायज्ञ का हुआ समापन, विशाल भंडारे में उमड़ा जनसैलाब//*
दिनांक 8 सितंबर दिन मंगलवार रीवा मध्य प्रदेश://

(विशेष संवाददाता) यज्ञों की पावन स्थली हनुमान जी स्वामी मंदिर प्रांगण, कैथा में आयोजित श्रीमद्भागवत भक्ति ज्ञान महायज्ञ का सोमवार 7 सितंबर 2026 को पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ भव्य समापन हुआ। 31 अगस्त से प्रारंभ हुए इस 07 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन मंदिर प्रांगण में महाप्रसाद (भंडारे) का आयोजन किया गया जिसमें हजारों की संख्या में भक्त श्रद्धालुगण उपस्थित होकर महा-भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
भंडारे में कैथा सहित आसपास के दर्जनों ग्राम क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर सात्विक प्रसाद ग्रहण किया और हनुमान जी स्वामी का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से शुरू हुआ भंडारा देर शाम तक अनवरत चलता रहा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर संयोजक एवं प्रचारक शिवानंद द्विवेदी ने मंदिर समिति, सेवादारों और क्षेत्र की सभी जनता जनार्दन का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सहयोग और अपार श्रद्धा के कारण ही यह महायज्ञ व भंडारा निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सका।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Sunday, September 6, 2026

Breaking// कैथा में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन: श्रीराम और परशुराम के अनुकरणीय चरित्र का ओजस्वी वर्णन// श्रीमद भगवत कथा: भटकी मानवता का एकमात्र मार्गदर्शक// श्रीराम और श्रीकृष्ण: भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ//

*Breaking// कैथा में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन: श्रीराम और परशुराम के अनुकरणीय चरित्र का ओजस्वी वर्णन// श्रीमद भगवत कथा: भटकी मानवता का एकमात्र मार्गदर्शक// श्रीराम और श्रीकृष्ण: भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ//*


दिनांक 06 सितंबर 2026 | रीवा (मध्य प्रदेश)

  पावन यज्ञस्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत महायज्ञ एवं कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। 31 अगस्त से प्रारंभ हुआ यह पापविनाशक महायज्ञ 07 सितंबर दिन सोमवार को हवन एवं विशाल भंडारे के साथ पूर्ण आहुति देकर समाप्त होगा।

कथा व्यास ने छठे दिन नौवें और दसवें स्कंध का भावपूर्ण वर्णन करते हुए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, भगवान परशुराम के तेजस्वी चरित्र तथा भारतीय संस्कृति और वर्ण व्यवस्था के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
*श्रीमद भगवत कथा: भटकी मानवता का एकमात्र मार्गदर्शक*

कथा वाचक डॉक्टर गौरीशंकर शुक्ला ने कहा कि सम्पूर्ण श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान नारायण के 24 अवतारों और उनकी दिव्य लीलाओं पर केंद्रित है। आज के भौतिकवादी दौर में, जहाँ मानव मूल्य घट रहे हैं, श्रीमद्भागवत महापुराण भटकी हुई मानवता के लिए एकमात्र सहारा और वरदान है। यह संसार रूपी घोर अंधकार में प्रकाश पुंज की तरह काम करती है। इसमें मानव जीवन प्रबंधन के सभी अमूल्य सूत्र मौजूद हैं।

कथा में इस बात पर बल दिया गया कि शास्त्रों के आदर्शों के बिना कोई भी संस्कृति जीवित नहीं रह सकती। आज समाज भौतिक सुख-सुविधाओं को ही अपना आदर्श मान बैठा है, जबकि बिना त्याग और कठिन परिश्रम के जीवन का परिष्कार संभव नहीं है।
*परिश्रम से प्राप्त धन की तीन गतियाँ:*

नैतिक शास्त्रों का हवाला देते हुए बताया गया कि परिश्रम से अर्जित धन की केवल तीन गतियाँ होती हैं — दान, भोग और नाश। यदि धन का उपयोग दान या सात्विक उपभोग में न किया जाए, तो उसका नष्ट होना तय है। आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में भी समय पर बजट का उपयोग न होने पर उसके 'लैप्स' हो जाने का सिद्धांत इसी सनातन सत्य की पुष्टि करता है।
*श्रीराम और श्रीकृष्ण: भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ*

कथा के दौरान भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के अवतारों की तुलनात्मक एवं वैज्ञानिक विवेचना की गई जिसमें त्रेतायुग में मध्याह्न (दिन के 12 बजे) अवतरित हुए। इनका चरित्र अत्यंत शांत, सीधा, सरल और मर्यादा की प्रतिमूर्ति है। जबकि भगवान श्रीकृष्ण के विषय में उन्हें द्वापरयुग में अर्धरात्रि (रात के 12 बजे) अवतरित हुए बताया गया। इनका चरित्र अत्यंत रहस्यमयी, गूढ़ और लीलाओं से परिपूर्ण (लीला पुरुषोत्तम) है। कथा व्यास ने चिंता जताते हुए कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों का नामकरण पाश्चात्य संस्कृति के आधार पर कर रहे हैं। यदि अपनी संस्कृति के प्रति यही अंधानुकरण जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियाँ अपने वास्तविक महापुरुषों और आदर्शों को भूल जाएँगी। उन्होंने शास्त्रों की अंधभक्ति के बजाय उनकी विज्ञान-संगत और समयानुकूल व्याख्या करने पर जोर दिया।
*महर्षि जमदग्नि, परशुराम और विश्वामित्र का प्रसंग*

नौवें स्कंध के अंतर्गत कथा व्यास ने 'संस्कार के सिद्धांत' की वैज्ञानिकता को समझाया जिसमें चारु परिवर्तन कथा में राजा गाधि की पुत्री सत्यवती का विवाह ऋचिक ऋषि से हुआ था। संतान प्राप्ति हेतु ऋचिक ऋषि ने ब्राह्मण और क्षत्रिय गुणों से युक्त दो अलग-अलग 'अभिमंत्रित चारु' तैयार किए। गुण-धर्म का हस्तांतरण विषय पर बताया गया कि भूलवश चारु के आपस में बदल जाने के कारण सत्यवती के गर्भ से क्षत्रिय स्वभाव वाले जमदग्नि (भगवान परशुराम के पिता) का जन्म हुआ, जबकि क्षत्रिय कुल में जन्म लेने के बावजूद विश्वामित्र में ब्राह्मणीय सात्विक व तपस्वी गुण आए।

इस बीच भगवान परशुराम का अवतरण की कथा का वर्णन हुआ जिसमें बताया गया कि अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं और कार्तवीर्य अर्जुन के पुत्रों द्वारा ऋषि जमदग्नि के वध का प्रतिशोध लेने तथा अधर्म का नाश करने हेतु भगवान विष्णु के रूप में परशुराम जी का अवतरण हुआ।
*वैदिक वर्ण व्यवस्था: जन्म नहीं, 'गुण-कर्म-स्वभाव' पर आधारित*

कथा में वैदिक वर्ण व्यवस्था के वास्तविक स्वरूप पर गहरा चिंतन प्रस्तुत किया गया जिसमें बताया गया कि इसका एक वैज्ञानिक आधार है जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार वर्ण व्यवस्था व्यक्ति के गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित थी, न कि जन्म या जाति पर। परम पुरुष का रूपक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि ऋग्वेद में वर्णित 'परम पुरुष' के विभिन्न अंगों (शीर्ष से ब्राह्मण, भुजाओं से क्षत्रिय, उदर से वैश्य और चरणों से शूद्र) से उत्पत्ति का अर्थ समाज के विभिन्न संभागों और उनके कार्यों का प्रतीकात्मक विभाजन था।

वहीं 'द्विज' का वास्तविक अर्थ का वर्णन करते हुए बताया गया कि बाल्यावस्था में हर मनुष्य अज्ञानता के कारण शूद्र समान होता है। शिक्षा, संस्कार और ज्ञान प्राप्त करने के बाद उसका 'दूसरा जन्म' होता है, जिसे 'द्विज' कहा जाता है। इसे केवल बाहरी कर्मकांडों तक सीमित करना गलत व्याख्या है।
 *सोमवार दिनांक 07 सितंबर को भंडारे का कार्यक्रम*

     पावन यज्ञस्थली कैथा में चल रहे इस दिव्य आयोजन के अंतिम चरण में 07 सितंबर (सोमवार) को पूर्णाहुति, विशाल हवन एवं महा भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से इस पापविनाशक महायज्ञ में सम्मिलित होकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
*विशेष ब्यूरो रिपोर्ट — रीवा (मध्य प्रदेश)*