Thursday, October 29, 2026

Breaking: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट: रीवा के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर प्लांट — विकास की उम्मीद या तबाही का आसन्न खतरा?//

*Breaking: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट: रीवा के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर प्लांट — विकास की उम्मीद या तबाही का आसन्न खतरा?//*
*रीवा में टाटा का न्यूक्लियर प्लांट: विकास की आस या नरोरा-काकरापार जैसी आपदाओं का आसन्न खतरा?//*

*स्पेशल रिपोर्ट: रोझौही में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र से मंडराया बड़ा खतरा, देश के पुराने हादसों से सहमे ग्रामीण!//*

*क्या रीवा बनेगा अगला परमाणु त्रासदी का शिकार? रोझौही प्रोजेक्ट के विरोध और डरावने इतिहास की पूरी सच्चाई।//*

*टाटा का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट बनाम स्थानीय सुरक्षा: इतिहास के पन्नों में दबी परमाणु दुर्घटनाएं दे रहीं गंभीर चेतावनी।//*

*रीवा के रोझौही में परमाणु ऊर्जा संयंत्र: 28,000 करोड़ के निवेश के बीच सुरक्षा मानकों पर उठते बड़े सवाल।//*

*विकास बनाम विनाश: नरोरा और कैगा के हादसों से क्या सबक लेगा रीवा का प्रस्तावित टाटा प्लांट?//*

*रोझौही न्यूक्लियर प्लांट: विकास की उम्मीद या तबाही का खतरा?//*

*रीवा में टाटा का परमाणु संयंत्र: कितना सुरक्षित, कितना खतरनाक?//*

*परमाणु हादसों का काला इतिहास और रोझौही का सुलगता सवाल!//*
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा, मध्य प्रदेश
दिनांक: 30 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में ऊर्जा के मोर्चे पर एक नया अध्याय लिखने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर देश के इतिहास में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा और दुर्घटनाओं के डरावने आंकड़े स्थानीय आबादी की रातों की नींद उड़ाए हुए हैं। रीवा जिले की सिरमौर तहसील के अंतर्गत क्योंटी के पास रोझौही गांव में टाटा एनर्जी द्वारा देश के पहले निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट (28,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश) की स्थापना का प्रस्ताव है। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को औद्योगिक और आर्थिक विकास का मील का पत्थर बताया जा रहा है, लेकिन यदि वैश्विक स्तर पर बात करें तो चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल्स आयलैंड, एसएल-1 एवं टोकाईमुरा जैसी परमाणु संयंत्रों की भयावह दुर्घटनाएं तो हैं ही वहीं भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अब तक के सुरक्षा इतिहास और दुर्घटनाओं के दस्तावेजों ने भी बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

*भारत के परमाणु इतिहास के वे सबक, जो रोझौही के लिए चेतावनी हैं*

प्रस्तुत आधिकारिक सुरक्षा रिपोर्ट्स और एईआरबी (AERB) तथा एनपीसीआईएल (NPCIL) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न परमाणु संयंत्रों में तकनीकी विफलताएं, आग लगने की घटनाएं, भारी पानी का रिसाव और रेडिएशन एक्सपोजर आम बात रहे हैं। यदि रोझौही में टाटा का यह न्यूक्लियर प्लांट स्थापित होता है, तो क्षेत्रवासियों को निम्नलिखित ऐतिहासिक त्रासदियों से सबक लेने की आवश्यकता है: 
 
*1993 नरोरा परमाणु दुर्घटना (INES स्तर 3):* भारत के इतिहास की सबसे भयावह दुर्घटना उत्तर प्रदेश के नरोरा में हुई थी, जहां स्टीम टरबाइन के ब्लेड टूटने से भीषण आग लग गई थी और पूरा स्टेशन ब्लैकआउट हो गया था। कूलिंग पंप बंद होने से कोर पिघलने (Core Meltdown) यानी चेरनोबिल जैसी महाआपदा का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। ऐसे में रोझौही जैसे ग्रामीण और संभाग क्षेत्र में इस स्तर के संयंत्र का आना कितनी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, यह सोचने का विषय है।  

*2016 काकरापार संयंत्र दुर्घटना (INES स्तर 2):* गुजरात के काकरापार में कूलेंट पाइप क्रैकिंग और भारी पानी के भारी रिसाव के कारण रिएक्टर का दबाव तेजी से गिर गया था। इस तकनीकी चूक के कारण संयंत्र महीनों तक बंद रहा था।  

*2009 कैगा का साबाटोज और पेयजल संदूषण:* कर्नाटक के कैगा परमाणु संयंत्र में अंदरूनी अपसधिक शरारत (Sabotage) के चलते अज्ञात व्यक्ति द्वारा भारी पानी में रेडियोधर्मी ट्रिटियम मिला दिया गया था, जिससे दर्जनों कर्मचारी और ऑपरेटर रेडियोधर्मी विषमता से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे बाद में बीमारी के चलते कई की मृत्यु भी हो गई थी।  

*रावतभाटा (राजस्थान) और कल्पक्कम (तमिलनाडु) के हादसे:* राजस्थान (RAPS) और मद्रास (MAPS) परमाणु संयंत्रों में समय-समय पर आग लगने, भारी पानी लीक होने (जैसे 1999 में 42 टन भारी पानी का रिसाव) और रखरखाव के दौरान कर्मचारियों के ट्रिटियम विकिरण की चपेट में आने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।  
*रोझौही के ग्रामीणों में खौफ और विरोध के स्वर*

इन ऐतिहासिक आपदाओं और सुरक्षा चूकों के दस्तावेजों के सामने आने के बाद रीवा के रोझौही गांव के स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी रोष और डर का माहौल है। पिछले दिनों साइट पर सर्वे और ड्रिलिंग का काम शुरू होते ही हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और काम को रोक दिया था। बाद में जल सत्याग्रह और आमरण अनशन जिसमें एक महिला आदिवासी विमला कोल की मृत्यु भी हुई थी। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि किसी भी तकनीकी खराबी के चलते रेडियोधर्मी रिसाव या ट्रिटियम संदूषण जैसी घटना रीवा जैसी उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्र में होती है, तो यहाँ का जनजीवन, जल स्रोत और कृषि भूमि हमेशा के लिए तबाह हो जाएगी।

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट निरस्त करने की माग* 

   टाटा एनर्जी का यह प्रोजेक्ट भले ही क्षेत्र को ऊर्जा हब बनाने और हजारों रोजगार के दावे कर रहा हो, परंतु सुरक्षा मानकों, न्यूक्लियर वेस्ट मैनेजमेंट और ऐतिहासिक दुर्घटनाओं (जैसे नरोरा और काकरापार) के तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और कंपनी को पहले स्थानीय जनता को विश्वास में लेना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि रोझौही की जनता की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ न हो, अन्यथा यह विकास रीवा के लिए अभिशाप साबित हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ इस आंदोलन को शुरू से दिशा देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि न केवल रोझौही सरई के लोग बल्कि आसपास के सैकड़ो ग्रामों के रहवासी टाटा के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट को रोझौही से वापस लेने एवं निरस्त करने को लेकर अड़े हुए हैं और निरंतर आंदोलनरत हैं। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Wednesday, October 28, 2026

Breaking: ​'पट्टा हमारा, प्लांट आपका?' रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों का उग्र आंदोलन

*Breaking: रीवा: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर विवाद गहराया, वन अधिकार पट्टे की जमीन पर प्लांट आवंटन का आदिवासियों द्वारा विरोध//*

*'पट्टा हमारा, प्लांट आपका?' रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों का उग्र आंदोलन//*

*रीवा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट विवाद: 2020-21 के वन अधिकार पट्टों के बीच टाटा प्लांट के प्रस्ताव पर मचा बवाल*//

*सुरक्षा मानकों के घेरे में रोझौही न्यूक्लियर साइट: 5 किमी के दायरे में 30 हजार आबादी, ग्रामीणों ने मांगी परियोजना वापसी*//

*वन अधिकार बनाम न्यूक्लियर पावर प्लांट: रीवा में गरमाया भूमि विवाद, प्रशासन और टाटा की एनओसी पर सवाल*//

विशेष ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा, मध्य प्रदेश | 28 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित साइट को लेकर गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। वन अधिकार पट्टे की भूमि पर ही परमाणु संयंत्र के लिए जमीन प्रस्तावित किए जाने और सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों का उग्र विरोध प्रदर्शन आज (28 अक्टूबर 2026) भी लगातार जारी है।

*क्या है पूरा मामला?*

ग्रामीणों और आदिवासियों का आरोप है कि शासन के वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पंचायत विभाग के आपसी समन्वय से वर्ष 2020-21 में ही उन्हें उसी स्थान पर वन अधिकार पट्टे (Forest Rights Patta) वितरित किए गए थे, जहां अब टाटा कंपनी द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार की कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें पट्टे दिए जा चुके हैं, तो फिर वन और राजस्व विभागों द्वारा टाटा कंपनी को किस आधार पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया।

*सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप*

प्रस्तावित न्यूक्लियर साइट के चयन को लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी मापदंडों पर भी बड़े सवाल खड़े किए जा रहे हैं। तय मानक अनुसार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के नियमों के मुताबिक, प्रस्तावित साइट के 5 किलोमीटर के दायरे में 20,000 से कम आबादी होनी चाहिए, और 10 किलोमीटर के दायरे में 10,000 से अधिक आबादी वाला कोई बड़ा जनसंख्या केंद्र (Population Center) नहीं होना चाहिए। जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है और रोझौही न्यूक्लियर प्लांट की प्रस्तावित साइट के 5 किलोमीटर के दायरे में ही लगभग 30,000 की आबादी निवास करती है। इसके अलावा, 10 किलोमीटर के दायरे में लालगांव पंचायत का कस्बाई क्षेत्र है जिसकी अकेले की ही आबादी करीब 15,000 है। साथ ही, जिस ग्राम पंचायत 'सरई कला' में यह पावर प्लांट लगाया जाना है, अकेले वहां की आबादी भी लगभग 5,000 के आसपास है।
जानकारों और आदिवासियों का कहना है कि यह साइट चयन इन सभी सुरक्षा और जनसांख्यिकीय मापदंडों पर खरा नहीं उतरता है और घनी आबादी के बीच इस तरह का प्रोजेक्ट लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

*आदिवासियों की मुख्य मांगें*

   रोझौही और सरई कला के ग्रामीण इस पूरी परियोजना के खिलाफ लामबंद हैं और उन्होंने मांग की है कि इस न्यूक्लियर परियोजना को तत्काल प्रभाव से इस क्षेत्र से वापस लिया जाए। उनके वैध वन अधिकार पट्टों को यथावत रखा जाए और उनकी भूमि सुरक्षित की जाए।

*सामाजिक कार्यकर्ता ने भी उठाए सवाल*

भू-अधिकार और वन अधिकार के मुद्दों पर मुखर रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने भी इस चयन प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार कई तय मापदंडों पर खरी नहीं उतरती है और यह न्यूक्लियर पावर प्लांट जबरन गांव के आदिवासियों और आम नागरिकों पर थोपा जा रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो उनका यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, October 27, 2026

Breaking; 'जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट का प्रस्ताव वापस नहीं, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा': रोझौही में जल सत्याग्रह के साथ सांकेतिक फांसी देकर विरोध//

*Breaking; 'जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट का प्रस्ताव वापस नहीं, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा': रोझौही में जल सत्याग्रह के साथ सांकेतिक फांसी देकर विरोध//*
*रोझौही में टाटा पावर प्लांट पर आर-पार की लड़ाई: बिगड़े स्वास्थ्य के बावजूद डटे ग्रामीण, कांग्रेस और विचार क्रांति मंच का मिला समर्थन//*

*जल-जंगल-जमीन बचाने की जंग: क्योटी पंचायत के सामने सांकेतिक फांसी, रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध बढ़ा//*

दिनांक 26 अक्टूबर 2026
रीवा (मध्य प्रदेश):

रोझौही-सरई कला में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहा जन आंदोलन लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में क्योटी पंचायत भवन के सामने प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी दर्ज कराई।
*स्वास्थ्य बिगड़ने पर अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया*

विगत 26 अक्टूबर 2026 को रोझौही में तालाब के भीतर कई दिनों से जल सत्याग्रह और आमरण अनशन कर रहे ग्रामीणों की तबियत बिगड़ने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार सिरमौर, बिंदु तिवारी ने रात करीब 11:00 बजे पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा और अनशन कर रहे ग्रामीणों—बबली कोल, रावेंद्र कोल एवं संदीप कोल—को एम्बुलेंस के जरिए रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया।
*ग्रामीणों और आंदोलनकारियों का 'जल सत्याग्रह' और धरना-प्रदर्शन अभी भी जारी*

प्रशासन द्वारा कुछ अनशनकारियों को अस्पताल भेजे जाने के बावजूद, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को भी रोझौही में प्लांट साइट के पास स्थित तालाब में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह अनवरत जारी है। गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष इस जल सत्याग्रह एवं अनशन में डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने की आधिकारिक घोषणा नहीं करती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन और जल सत्याग्रह समाप्त नहीं होगा।
*कांग्रेस का धरना और उमंग सिंघार का ऐलान*

दूसरी ओर, सरई कला और रोझौही गांव में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में 24 अक्टूबर से चल रहा धरना-प्रदर्शन भी निरंतर जारी है, जिसमें स्थानीय लालगांव और मनगवां क्षेत्र के नेता भी शामिल हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 25 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रोझौही का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने मंच से घोषणा की थी कि जब तक सरकार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस नहीं ले लेती, तब तक कांग्रेस का तंबू यहीं गड़ा रहेगा और आंदोलन जारी रहेगा। इसी कड़ी में 27 अक्टूबर को भी कांग्रेस का धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन पूरी मजबूती के साथ चलता रहा।
*आंदोलनकारियों एवं समाजसेवियों की मौजूदगी*

क्योटी पंचायत भवन के सामने चल रहे इस जन आंदोलन को विभिन्न संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इस दौरान 'बिरसा मुंडा विचार क्रांति मंच' के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुकांत कुशवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, नागरिक आनंद कोल और समाजसेवी बृजेश गौतम सहित सैकड़ों ग्रामीण व स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
*(विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा, मध्य प्रदेश — 27 अक्टूबर 2026)*

Monday, October 26, 2026

Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबीयत बिगड़ी, अन्न के बाद जल भी त्यागा//

*Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबीयत बिगड़ी, अन्न के बाद जल भी त्यागा//*

*"प्लांट रद्द नहीं हुआ तो दे देंगे जान": रोझौही में आमरण अनशन कर रहे AAP नेता प्रमोद शर्मा की बिगड़ी तबीयत//*

*रोझौही न्यूक्लियर प्लांट विरोध: 6 दिन के अनशन और जल त्याग के बाद प्रमोद शर्मा की स्थिति नाजुक//*

*रीवा: रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में अनशनरत AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबियत बिगड़ी//*

*अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे AAP नेता प्रमोद शर्मा, डॉक्टरों ने जताई चिंता*

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश) | 26 अक्टूबर 2026

रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में पिछले 6 दिनों से आमरण अनशन कर रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रमोद शर्मा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जल सत्याग्रह के बाद भोजन का त्याग कर अनशन पर बैठे प्रमोद शर्मा ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 से जल ग्रहण करना भी पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिससे उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मदरी के डॉक्टर रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा और उनके सहयोगियों के स्वास्थ्य की जांच के बाद बताया कि अनशनकारियों के हेल्थ पैरामीटर (स्वास्थ्य मानक) सामान्य नहीं हैं। कई के वजन और रक्तचाप में सामान्य से हटकर पैरामीटर दर्ज किए गए हैं। डॉक्टर साकेत के अनुसार, बिगड़ती हालत को देखते हुए प्रमोद शर्मा और उनके साथियों को तुरंत मेडिकल निगरानी में स्थानांतरित किया जाना बेहद जरूरी है।

*बबली कोल और एक दर्जन महिलाओं का भी कड़ा रुख*

प्रमोद शर्मा के साथ आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे बबली कोल का स्वास्थ्य भी चिंताजनक बना हुआ है। पूर्व में जल सत्याग्रह का हिस्सा रहे बबली कोल पिछले 3 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उन्होंने अन्न का पूरी तरह से त्याग कर रखा है।

इस आंदोलन में उनके साथ लगभग एक दर्जन महिलाएं भी जल सत्याग्रह पर बैठी हुई हैं। प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित महिलाओं ने अपना कड़ा रुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्णय को निरस्त नहीं किया गया, तो वे प्रमोद शर्मा के साथ यहीं अपने प्राण त्याग देंगी। जल सत्याग्रह कर रही महिलाओं ने बताया कि उनकी एक बहन विमला कोल की मौत हो चुकी है जिस पर सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी है और अब इसी तरह से वह भी अपनी जान दे देंगी।

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है, वहीं आंदोलनकारियों की मांग है कि जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को रद्द नहीं किया जाता, उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, October 25, 2026

Beeaking://"विनाश नहीं विकास चाहिए": रोझौही प्लांट के विरोध में उतरा बांस और भदौंहा टोला//

*Breaking: रीवा में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ आंदोलन तेज: बांस और भदौंहा टोला के ग्रामीणों ने भरी हुंकार, सरकार से परियोजना रद्द करने की मांग//*
*रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ बांस ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का भी अब फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*

*"विनाश नहीं विकास चाहिए": रोझौही प्लांट के विरोध में उतरा बांस और भदौंहा टोला//*

*परमाणु विकिरण के खतरे से सहमे बांस और भदौंहा टोला ग्रामीण, रीवा में उग्र हुआ न्यूक्लियर प्लांट का विरोध//*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में बढ़ता जनसैलाब, बांस और भदौंहा टोला के ग्रामीण भी जुड़े आंदोलन से, सरकार से प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग//*

*रीवा में गरमाया रोझौही प्लांट का मुद्दा, बांस और भदौंहा टोला  की महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन//*

रीवा, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2026

  जिले के रोझौही गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। परियोजना के विरोध का दायरा अब आसपास के टोलों और गांवों तक फैल गया है। इसी कड़ी में रविवार को ग्राम पंचायत बांस और भदौंहा टोला के सैकड़ों ग्रामीणों ने सीएफटी भवन के पास एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की जनविरोधी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने "विनाश 5नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" के गगनभेदी नारे लगाकर पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
*भारी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल*

विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में ग्रामीणजन सम्मिलित हुए, जिसमें महिलाओं और बच्चों की भी खासी मौजूदगी रही। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बांस ग्राम पंचायत के सरपंच कमलेश पटेल के साथ-साथ देवेंद्र तिवारी, रविकांत अग्निहोत्री, रामकिशोर मिश्रा, ददन प्रसाद साकेत और सियानंद गौतम समेत कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि इस विनाशकारी परियोजना को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।

*विकिरण और रेडिएशन के खतरे से सहमें हैं ग्रामीण*

रोझौही में प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर क्षेत्र में पिछले लंबे समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। केवल रोझौही और सरई कला ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस बात को लेकर बेहद आक्रोशित हैं।

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि प्लांट के संचालन के बाद उससे निकलने वाले परमाणु विकिरण (रेडिएशन) से स्वास्थ्य, पर्यावरण, वायु, शुद्ध जल, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर बेहद घातक दुष्प्रभाव पड़ेगा। लोगों में इस बात का डर है कि इससे क्षेत्र में कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां और नवजात शिशुओं में जन्मजात विकलांगता जैसी समस्याएं पनप सकती हैं। इसी गंभीर आशंका के चलते ग्रामीण शासन-प्रशासन से इस प्लांट को अन्यत्र स्थानांतरित करने या पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्लांट के विरोध में क्षेत्र में पहले से ही जल सत्याग्रह और आमरण अनशन जैसे गांधीवादी आंदोलन भी सुलग रहे हैं।
*राजनीतिक सरगर्मी और नेता प्रतिपक्ष का दौरा*

इस संवेदनशील मामले पर राजनीतिक हलचल भी तेज है। दिनांक 26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने रोझौही गांव का दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने मृतिका विमला कोल के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी और एक लाख रुपये की सांत्वना राशि देने की घोषणा की थी। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि इस क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा।

*दिन-प्रतिदिन व्यापक हो रहा विरोध का कारवां*
रोझौही और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह विरोध प्रदर्शन अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। प्रतिदिन आसपास के अन्य गांवों के प्रभावित लोग भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी है कि जब तक सरकार इस जनविरोधी और खतरनाक प्रोजेक्ट को रद्द करने का आधिकारिक फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध इसी तरह जारी रहेगा।
*(विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा, मध्य प्रदेश)*

Thursday, October 22, 2026

Breaking:// रीवा: 'परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ' के नारों से गूंजा लालगांव का महूहा टोला, टाटा पावर प्लांट हटाने की मांग पर अड़े ग्रामीण//

*Breaking:// रीवा में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जन आंदोलन तेज: लालगांव, महूहा टोला और आसपास के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*
*"विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" — रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ गूंजे जोरदार नारे//*

*"हमें नहीं चाहिए कैंसर प्लांट" — रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट को रद्द करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का हल्लाबोल//*

*रीवा: 'परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ' के नारों से गूंजा महूहा टोला, टाटा पावर प्लांट हटाने की मांग पर अड़े ग्रामीण//*

दिनांक 23 अक्टूबर 2026, रीवा (मध्य प्रदेश):

   रोझौही में प्रस्तावित टाटा पावर के न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। सरई कला और रोझौही के बाद अब लालगांव के महूहा टोला और वार्ड 2 व 3 के ग्रामीणों ने भी इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्लांट को रद्द करने की मांग उठाई।

*नारेबाजी और आक्रोश*

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों की जुबान पर मुख्य रूप से "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए", "विनाश नहीं विकास चाहिए, कैंसर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" जैसे नारे गूंजते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्लांट उनके जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है।

*सामाजिक कार्यकर्ता का जनसंपर्क*

   सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान के दौरान सैकड़ों लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि उन्हें किसी भी कीमत पर यह न्यूक्लियर पावर प्लांट मंजूर नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन में अब लालगांव पंचायत के वार्ड 2, 3 और महूहा टोला के आम नागरिकों के साथ-साथ समाजसेवी शेखर केवट, शिवानंद पांडेय, रामकली केवट, रानी, प्रदीप पटेल, रमाकांत शुक्ला, मिठाईलाल प्रजापति, सौखीलाल केवट और राजकली कोल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
*प्रशासन की अनदेखी पर रोष*

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट को लेकर न केवल रोझौही एवं सरई बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों में भारी आक्रोश है। कुछ दिनों पूर्व जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल नामक एक आदिवासी महिला की मृत्यु हो जाने से पूरे क्षेत्र में प्रशासन के प्रति और अधिक गुस्सा व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दुर्घटना के बाद भी शासन-प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा सुधि लेने नहीं पहुंचा।
आंदोलित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि रोझौही में प्रस्तावित टाटा पावर के न्यूक्लियर प्लांट को रद्द कर यहां से नहीं हटाया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking:// 'न्याय या मौत': न्यूक्लियर प्लांट विरोध के बीच महिला आंदोलनकारी ने तोड़ा दम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश//

*Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट विरोध: जल सत्याग्रह कर रही महिला आंदोलनकारी की ठंड से मौत, प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप//*

*रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जल सत्याग्रह के दौरान महिला आंदोलनकारी की मौत//*

*सत्याग्रह की ठंड में गई जान: रोझौही प्लांट विरोध में डटी महिला की मौत, अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा आंदोलन//*

*जल सत्याग्रह के बीच सरई कला में हादसा: ठंड से महिला की मौत, प्रशासन की बेरुखी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा//*

*रोझौही प्लांट का विरोध: जल सत्याग्रह के दौरान महिला की ठंड से मौत, प्रशासन बेखबर//*

*रीवा में आंदोलन की कीमत: जल सत्याग्रह में बैठी महिला की मौत, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान//*

*'न्याय या मौत': न्यूक्लियर प्लांट विरोध के बीच महिला आंदोलनकारी ने तोड़ा दम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश//*

*सरई कला में मातम: जल सत्याग्रह के छठे दिन महिला की ठंड से गई जान, अधिकारियों ने नहीं ली सुध//*

रीवा (मध्य प्रदेश) | स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट
दिनांक 22 अक्टूबर 2026 

  रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में पिछले 6 दिनों से जारी जल सत्याग्रह के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। सरई कला पंचायत में सत्याग्रह पर बैठी महिला आंदोलनकारी विमला कोल की 22 अक्टूबर 2026 की सुबह तड़के ठंड की वजह से मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पावर प्लांट के विरोध में कई ग्रामीणों के साथ विमला कोल भी लगातार जल सत्याग्रह में हिस्सा ले रही थीं। घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मृतिका के पति जमुना कोल से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि विमला की मौत जल सत्याग्रह और लगातार जारी आंदोलन के कठिन हालात के कारण हुई है।

*शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप*

परिजनों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के रवैये पर कड़ा रोष जताया है। परिजनों का आरोप है कि इतने दिनों से चल रहे प्रदर्शन और इस दुखद घटना के बावजूद शासन या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खबर लेने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने प्रशासनिक उपेक्षा और जन-मानस की आवाज को अनसुना करने का गंभीर आरोप लगाया है।

*मौत के बाद भी नहीं थमेगा आंदोलन*

एक साथी आंदोलनकारी की मौत के बावजूद ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि सत्याग्रह रुकेगा नहीं और आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में आमजन के साथ लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा तथा समाजसेवी विष्णुकांत कुशवाहा एवं दुलहरा ग्राम से समाजसेविका नीलू दहिया एवं अन्य सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हो चुके हैं।

*क्योटी में सजा नया पंडाल, अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान*

आंदोलन का दायरा अब बढ़ता जा रहा है। 22 अक्टूबर 2026 से नजदीकी ग्राम पंचायत क्योटी में क्योटी-कलवारी मुख्य मार्ग के समीप ग्रामीणों ने नया पंडाल सजा लिया है। सत्याग्रहियों ने हुंकार भरते हुए कहा है कि यह आंदोलन अब अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक शासन प्रशासन न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस लेने का निर्णय नहीं लेता तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*