Thursday, October 15, 2026

Breaking:// अंतरराष्ट्रीय शोध में बड़ा खुलासा: न्यूक्लियर पावर प्लांट के आसपास रहने वाली आबादी में कैंसर और ल्यूकेमिया का खतरा 9% से 17% अधिक//

*Breaking:// अंतरराष्ट्रीय शोध में बड़ा खुलासा: न्यूक्लियर पावर प्लांट के आसपास रहने वाली आबादी में कैंसर और ल्यूकेमिया का खतरा अधिक//*

*रोझौही एवं क्षेत्रीय लोगों ने इस अंतर्राष्ट्रीय शोध का हवाला देकर एक बार फिर किया प्रदर्शन//*

*रोझौही के लोगों ने कहा अधिकारियों और कंपनी के लोगों के झांसे में नहीं आएंगे//*

वैश्विक शोध का दावा: न्यूक्लियर प्लांट के 30 किमी दायरे में रहने वालों को कैंसर और ल्यूकेमिया का बढ़ा खतरा //*

*अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: परमाणु संयंत्रों के पास रहने वाले बच्चों में कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा//*

*'सुरक्षित' रेडिएशन सीमा के बावजूद न्यूक्लियर प्लांट के कर्मचारियों और आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर कैंसर का मंडरा रहा खतरा//*
दिनांक 15 अक्टूबर 2026
विशेष संवाददाता रीवा मप्र।

    विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक शोध पत्रिका 'करंट एनवायरनमेंटल हेल्थ रिपोर्ट्स' में प्रकाशित एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्रों) के आसपास रहने वाले नागरिकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इस बात को लेकर रोझौही और आसपास के दर्जनों ग्राम के लोगों ने एकबार फिर न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन किया है। 
 
17 देशों के 175 परमाणु संयंत्रों, 4.8 लाख कर्मचारियों और 75 लाख से अधिक नागरिकों के डेटा विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन के अनुसार, मानक सुरक्षा सीमाओं (Regulatory Dose Limits) के भीतर रेडिएशन एक्सपोजर के बावजूद गंभीर स्वास्थ्य जोखिम देखे गए हैं।  

*अध्ययन मात्र 30 किलोमीटर दायरे में रहने वालों के ऊपर किए गए, लेकिन खतरा इससे आगे भी:*

*बच्चों में कैंसर का सबसे अधिक जोखिम:* इस अध्ययन के मुताबिक न्यूक्लियर पावर प्लांट के 30 किमी के दायरे में रहने वाले 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुल कैंसर (All-cancer) का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है। 
 
*थायरॉयड कैंसर और ल्यूकेमिया:* प्लांट के पास रहने वाले आम नागरिकों में दूर रहने वाली आबादी की तुलना में थायरॉयड कैंसर का खतरा 17% और ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) का खतरा 9% अधिक दर्ज किया गया।  

*कुल कैंसर दर में वृद्धि:* संयंत्र के 30 किमी के भीतर रहने वाले लोगों में कुल कैंसर का जोखिम 5% से लेकर 10% तक अधिक पाया गया। और यह सब उन सामान्य परिस्थितियों में पाया गया जबकि रेगुलेटरी ऑथोरिटी कहती हैं कि रेडिएशन अपने मानक स्टैंडर्ड के अनुसार था।

*परमाणु संयंत्र कर्मचारियों पर प्रभाव:*

मेसोथेलियोमा (Mesothelioma):* परमाणु संयंत्रों में कार्यरत कर्मचारियों में सामान्य आबादी की तुलना में मेसोथेलियोमा (फेफड़े/पेट की झिल्ली का कैंसर) का खतरा 5.53 गुना अधिक दर्ज किया गया।  

*हृदय एवं रक्त वाहिका संबंधी रोग (Circulatory Disease):* शोध में रेडिएशन की संचयी खुराक (Cumulative dose) और कर्मचारियों में रक्त परिसंचरण संबंधी बीमारियों के बीच सीधा संबंध (Dose-response relationship) पाया गया।  
*मौजूदा सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल*

अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीआरपी (ICRP) द्वारा तय वर्तमान मानक सीमा (आम जनता के लिए 1 mSv/वर्ष) एवं सामान्य परिस्थितियों के बावजूद बीमारियों में यह वृद्धि पाई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कण हवा और वायुमंडलीय दिशा के अनुसार 20 से 30 किमी के दायरे में धीरे-धीरे जमा होते हैं, जिससे आसपास की आबादी प्रभावित होती है।  

शोधकर्ताओं ने कहा है कि परमाणु संयंत्रों के आसपास रहने वाली संवेदनशील आबादी (विशेषकर बच्चों) के स्वास्थ्य जोखिमों का नया आकलन किया जाना चाहिए और रेडिएशन निगरानी को और सख्त बनाने की आवश्यकता है। 
*सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में यह हाल है तब भीषण हादसों पर क्या होगा?*

  न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में निरंतर जन जागरूकता फैलाने वाले और उसके दुष्परिणामों को लोगों तक पहुंचने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के द्वारा जो रिसर्च किया गया है वह सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में किया गया है और इसमें सरकारे और कंपनियां कहती है कि विकिरण की मात्रा तय मापदंड के अनुसार है अथवा इससे कम है और इसमें मात्र आसपास के 30 किलोमीटर के दायरे में ही यह शोध किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि कहीं किसी हादसे की वजह से अथवा मानवीय भूल या की मैकेनिकल भूल की वजह से विकिरण बढ़ गया अथवा कोई दुर्घटना हो गई ऐसे में न केवल 30 या 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए यह घातक होगा बल्कि आसपास के पूरे विंध्य क्षेत्र और पूरे प्रदेश या देश को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्होंने माग की है की रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्काल निरस्त किया जाए और यहां की जनता की भावनाओं की कदर की जाए क्योंकि जनता भी नहीं चाहती कि किसी प्रकार से रीवा एवं मऊगंज या विंध्य क्षेत्र में यह रेडियोएक्टिव और जहरीला न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Wednesday, October 14, 2026

*Breaking://“4 साल कहां थे विधायक?”: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भड़की जनता, विधायक नरेंद्र प्रजापति का किया घेराव//*

*Breaking://“4 साल कहां थे विधायक?”: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट पर भड़की जनता, विधायक नरेंद्र प्रजापति का किया घेराव//*

*रीवा: रोझौही में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का तीव्र विरोध, जनता के तीखे सवालों में घिरे मनगवां विधायक//*


*कंपनी के फायदे गिनाने पहुंचे विधायक को जनता ने घेरा, रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ आर-पार के मूड में सैकड़ों गांव//"

*रीवा: रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का भारी विरोध, जनता के तीखे सवालों में घिरे विधायक नरेंद्र प्रजापति//*

*न्यूक्लियर प्लांट का फायदा बताने पहुंचे मनगवां विधायक को झेलना पड़ा जन-आक्रोश, ग्रामीणों ने पूछे तीखे सवाल//*

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 14 अक्टूबर 2026

रीवा। जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्र) को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जनता का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। जब सरकारी अधिकारी और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि असफल रहे तब पिछले दिनों परमाणु संयंत्र के फायदे गिनाने पहुंचे मनगवां विधायक नरेंद्र प्रजापति को स्थानीय नागरिकों के भारी विरोध और तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।

*जनभावनाओं को दरकिनार करने का आरोप*

क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि विधायक नरेंद्र प्रजापति स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा करने के बजाय केवल संबंधित कंपनी और न्यूक्लियर पावर प्लांट के फायदों का महिमामंडन करते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक पिछले चार वर्षों से क्षेत्र की समस्याओं से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन अब कंपनी के हितों को साधने के लिए अचानक सक्रिय हो गए हैं।
*विकिरण और परमाणु प्लांट कई प्रकार के खतरों से सहमे ग्रामीण*

प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र से निकलने वाले हानिकारक विकिरण (रेडिएशन) और उससे होने वाले पर्यावरणीय व स्वास्थ्यगत नुकसान को लेकर आसपास के सैकड़ों गांवों के लोग अत्यधिक चिंतित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि विधायक ने बैठक के दौरान संयंत्र से होने वाले किसी भी खतरे या सुरक्षा मानकों पर कोई स्पष्ट चर्चा नहीं की, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया। विधायक मात्र कंपनी के फायदे की है बात करते रहे 

*सैकड़ों गांव एकजुट, संयंत्र न लगने देने का संकल्प*

रोझौही और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण इस परियोजना के विरोध में पूरी तरह एकजुट हो चुके हैं। स्थानीय लोगों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे किसी भी कीमत पर अपने क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण नहीं होने देंगे। जनता ने विधायक पर जनभावनाओं की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
क्षेत्र में तनाव और जन-आक्रोश को देखते हुए यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि उन्हें अपने जिले में विनाशक परमाणु ऊर्जा संयंत्र नहीं चाहिए। यदि सरकार उनका विकास ही करना चाहती है तो स्कूल कॉलेज हॉस्पिटल खुलवाए अथवा कोई अन्य कपड़ा उद्योग या की ऑटोमोबाइल्स के उद्योग लगवाए। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, October 13, 2026

Breaking:// संभागायुक्त रीवा को ज्ञापन: रेडिएशन, बीमारी और विस्थापन का डर: रीवा के रोझौही में टाटा न्यूक्लीयर पावर प्रोजेक्ट का चौतरफा विरोध//

*Breaking:// संभागायुक्त रीवा को ज्ञापन: रेडिएशन, बीमारी और विस्थापन का डर: रीवा के रोझौही में टाटा न्यूक्लीयर पावर प्रोजेक्ट का चौतरफा विरोध//* 

*तत्काल न्यूक्लियर पावर प्लांट निरस्त करने संभाग आयुक्त और कलेक्टर को दिया गया पुनः ज्ञापन//* 

*रीवा: प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर घमासान, ग्रामीणों ने कहा- 'नहीं बनने देंगे पावर प्लांट’//*

*संभागायुक्त को ज्ञापन: सिरमौर के रोझौही में भू-तकनीकी जांच और भूमि आवंटन की प्रक्रिया रद्द करने की मांग*  

*न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे समाजसेवी, सौंपा ज्ञापन*
  
*ग्राम सभा के फैसलों के सम्मान की मांग; आरटीआई कार्यकर्ताओं ने रीवा प्रशासन से लगाई गुहार*

*"50 किमी का दायरा खतरे में": रेडिएशन और कैंसर के डर से न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ ज्ञापन*
  
*संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण सुरक्षा के लिए ज्ञापन, रीवा में टाटा पावर प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध*
  
*ग्राम पंचायत सरई कला के विरोध प्रस्तावों के समर्थन में उतरा रीवा जनमानस, संभागायुक्त को सौंपा ज्ञापन*
दिनांक 14 अक्टूबर 2026 रीवा मप्र।

   विशेष संवाददाता |

  रीवा जिले की सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम रोझौही में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट को लेकर जन-आक्रोश तेज हो गया है। परियोजना के तहत होने वाली भू-तकनीकी जांच, बोर लागिंग और भूमि आवंटन की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने संभागायुक्त को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
  
*ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव पर संभागायुक्त का ध्यानकर्षण*

ज्ञापन के अनुसार, ग्राम पंचायत सरई कला (जनपद पंचायत गंगेव) द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने परियोजना के खिलाफ एकजुट होकर प्रस्ताव पारित किया है:
  
*विकिरण व विस्थापन का डर:* कमिश्नर रीवा को सौंपे ज्ञापन में दिनांक 03 सितंबर 2026 को आयोजित विशेष ग्राम सभा में ग्रामीणों ने परमाणु ऊर्जा संयंत्र से फैलने वाले रेडिएशन, जल-वायु-भूमि प्रदूषण, विस्थापन तथा कैंसर व ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारियों की आशंका जताते हुए 08 बोर होल एवं भू-तकनीकी जांच की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।  
*भूमि आवंटन का विरोध:* दिनांक 06 अक्टूबर 2026 की बैठक में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पक्ष में लगभग 210.8900 हेक्टेयर (57 कित्ता) भूमि आवंटन के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया।  
*संभागायुक्त को सौंपे ज्ञापन में फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के जांच की भी मांग*

   ग्रामीणों व कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कूटरचित तरीके से ग्राम पंचायत के लेटरहेड का उपयोग कर एक फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (क्रमांक 170/2026) तैयार किया गया, जिसमें बोर होल की अनुमति मिलने का झूठा दावा किया गया था। हालांकि, ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती कोमल संजय सिंह द्वारा पत्र क्रमांक 56/2026 (दिनांक 08/10/2026) के माध्यम से इस कथित फर्जी एनओसी को खारिज कर दिया गया है। ज्ञापन में इस फर्जीवाड़े की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने की मांग की गई है। 
 
*रेडिएशन से कम से कम 50 किमी दायरे की सीधे होगी आबादी प्रभावित*

सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं जिला पंचायत रीवा सदस्य मृत्युंजय मिश्रा ने बताया कि इस पावर प्लांट का प्रतिकूल असर केवल एक गांव तक सीमित न रहकर आसपास के कम से कम 50 किलोमीटर दायरे की सैकड़ों ग्राम पंचायतों और बड़ी आबादी पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनहित, पर्यावरण सुरक्षा और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए इस प्रोजेक्ट की तमाम स्वीकृतियों व कार्रवाइयों को तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए।  

ज्ञापन सौंपते समय गणमान्य नागरिक श्री परमानंद द्विवेदी खैरा एवं दिलीप त्रिपाठी पिपरहा सहित क्षेत्र के अनेक नागरिक व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।  
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट मामला: ग्राम सभा के विरोध के बावजूद मनमानी का आरोप, ग्रामीणों ने तीसरी बार टाटा कंपनी व अधिकारियों को खदेड़ा//

*Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट मामला: ग्राम सभा के विरोध के बावजूद मनमानी का आरोप, ग्रामीणों ने तीसरी बार टाटा कंपनी व अधिकारियों को खदेड़ा//*

*संविधान बनाम मनमानी: ग्राम सभा के खारिज प्रस्ताव के बाद भी रोझौही में अफसरों की दस्तक, ग्रामीणों में आक्रोश//*

*रोझौही न्यूक्लियर प्लांट विवाद: 'पेशा' कानून के तहत ग्राम सभा की अनुमति बिना परियोजना पर उठे गंभीर सवाल//*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: ग्रामीणों ने फिर खदेड़ा टाटा कंपनी और अफसरों का अमला//*

*“रीवा की सिरमौर तहसील में घमासान: न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में एकजुट हुए ग्रामीण, अधिकारियों को तीसरी बार उल्टे पांव भागना पड़ा//*
स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 12 अक्टूबर 2026

    रीवा। जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन/कंपनी के बीच घमासान जारी है। ग्राम सभा द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में स्पष्ट प्रस्ताव पारित किए जाने के बावजूद कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार दिनांक 12 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 5 बजे तहसीलदार सिरमौर और पुलिस अधिकारी एवं टाटा कंपनी के प्रतिनिधि ग्रामीणों के बीच पहुंचे जिसके बाद ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों और अधिकारियों को तीसरी बार क्षेत्र से उल्टे पांव भागने पर मजबूर होना पड़ा।

*विरोध प्रदर्शन और तनावपूर्ण स्थिति*

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्राम सभा के असहमति के फैसले को नजरअंदाज कर कंपनी और प्रशासनिक अधिकारी आए दिन गांव में डेरा डाल रहे हैं और गांव वालों पर जबरदस्ती कर रहे हैं। सोमवार को जैसे ही अधिकारियों की टीम गांव पहुंची, ग्रामीणों ने एकजुट होकर "न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए" के जोरदार नारे लगाए और उन्हें खदेड़ दिया।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सिरमौर तहसील की तहसीलदार बिंदु तिवारी द्वारा बार-बार गांव आकर उन पर परियोजना के पक्ष में सहमति बनाने का दबाव डाला जा रहा है।
*ग्रामीणों की चेतावनी:*

ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि रात के अंधेरे में जबरन गाड़ियां या मशीनरी गांव में दाखिल करने की कोशिश की गई, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी और किसी भी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

*कानूनी सवाल: क्या ग्राम सभा की अनदेखी संभव है?*

इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1993-94 और ग्राम सभा की शक्तियों को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

*पेशा (PESA) कानून लागू:* यह पूरा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है, जहां पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी 'पेशा कानून' भी प्रभावी होना चाहिए।

*संवैधानिक अधिकार:* नियमानुसार पेशा कानून और पंचायती राज अधिनियम के तहत आदिवासी व अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी बड़ी विकास परियोजना या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की पूर्व अनुमति अनिवार्य है।

*बड़ा सवाल:* जब ग्राम सभा ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव पारित कर न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध कर दिया है, तो बिना अनुमति के इस परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रशासनिक मनमानी किस आधार पर की जा रही है?

*सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग*

रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ निरंतर आवाज उठा रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने इस पूरे मामले पर सरकार और प्रशासन के रुख की कड़े शब्दों में निंदा की है।
"सरकार को तत्काल प्रभाव से इस जनविरोधी परियोजना को रद्द करना चाहिए। लोकतंत्र में जनता की भावना और संविधान में प्रदत्त ग्राम सभा के अधिकारों की कद्र की जानी चाहिए। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर जबरन थोपी जा रही यह परियोजना क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है। न केवल रोझौही बल्कि आसपास के 30 किमी के क्षेत्र के सैकड़ों ग्राम पंचायतों में आमजन पर यह विकिरण प्रभाव डालेगा और जानलेवा बीमारियां वाला प्रदूषण फैलाएगा।"

— शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता
*प्रशासन और कंपनी ग्राम सभा के प्रस्तावों का करे सम्मान*

रोझौही क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जनआक्रोश और तीसरी बार अधिकारियों को खदेड़े जाने की घटना ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन कानून के दायरे में रहकर ग्राम सभा के फैसले का सम्मान करता है और जनभावनाओं की कद्र करता है या टकराव की स्थिति और भी गहरी होती है।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Monday, October 12, 2026

Breaking:// कटरा से रोझौही तक बिछेगी 36.6 किमी लंबी बिजली लाइन, टाटा प्रोजेक्ट को मिलेगा 10 मेगावाट का नया कनेक्शन//



Breaking:// कटरा से रोझौही तक बिछेगी 36.6 किमी लंबी बिजली लाइन, टाटा प्रोजेक्ट को मिलेगा 10 मेगावाट का नया कनेक्शन//

*रीवा में टाटा प्रोजेक्ट का 'गुप्त' प्लान उजागर: ग्रामीणों के विरोध के बीच 5.76 करोड़ की लागत से बिछेगी 36.6 किमी लंबी बिजली लाइन//*

*कथनी और करनी में अंतर: रीवा के रोझौही में मिट्टी परीक्षण का दावा, उधर 10 मेगा वाट बिजली कनेक्शन की गुपचुप तैयारी//*

*RTI से बड़ा खुलासा: ग्राम सभा के विरोध के बावजूद रोझौही में टाटा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए 132 केवी सब-स्टेशन से आपूर्ति की तैयारी//*

*विद्युत वितरण कंपनी ने तैयार किया 5.76 करोड़ का एस्टीमेट; 132 केवी सब-स्टेशन से टाटा कंपनी को मिलेगी मिलेगी बिजली*
विशेष संवाददाता
रीवा: दिनांक 12 अक्टूबर 2026 

   मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए कंपनी के डिमांड पर 132 केवी सब स्टेशन लगाए जाने का एस्टीमेट टाटा कंपनी को भेजा गया है। यह जानकारी आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी को आरटीआई से प्राप्त हुई है। क्षेत्र के ग्राम रोझौही में स्थापित हो रहे 'टाटा प्रोजेक्ट' को उच्च क्षमता की विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए 132 केवी कटरा सब-स्टेशन से रोझौही तक 33 केवी की एक नई बिजली लाइन बिछाई जाएगी।
विद्युत वितरण कंपनी के ओएंडएम संभाग त्योंथर के अंतर्गत आने वाले लालगांव वितरण केंद्र द्वारा इस परियोजना का विस्तृत एस्टीमेट (प्रोजेक्ट नंबर: 1014615) जारी किया गया है। 10 मेगा वाट एंपियर क्षमता के नए सेवा कनेक्शन के लिए तैयार इस एस्टीमेट की कुल लागत ₹5,76,48,708 (लगभग 5.76 करोड़ रुपये) तय की गई है।  
*36.6 किलोमीटर लंबी होगी मुख्य लाइन*

जारी तकनीकी रिपोर्ट के अनुसार, 132 केवी कटरा सब-स्टेशन से ग्राम रोझौही तक कुल 36.6 किलोमीटर लंबी 33 केवी लाइन का निर्माण किया जाएगा। ग्रामीण इलाके से गुजरने वाली इस पूरी लाइन को मजबूती देने के लिए 13 मीटर ऊंचे भारी एच-बीम (H-Beam) पोल और भारी डीओजी कंडेक्टर तारों का उपयोग होगा। 
*मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए लगेंगे विशेष पोल:*

डबल पोल (D.P.) स्ट्रक्चर: 42 स्थान   

ट्रिपल पोल (T.P.) स्ट्रक्चर: 06 स्थान   

फोर पोल स्ट्रक्चर: 04 स्थान   

सिंगल पोल कट पॉइंट: 12 स्थान   

*डिपॉजिट वर्क योजना के तहत होगा काम*

विद्युत अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा निर्माण कार्य 'डिपॉजिट वर्क' (Deposit Work) योजना के तहत किया जा रहा है। इसमें मुख्य सामग्री व निर्माण लागत ₹4.87 करोड़ तथा विभागीय सुपरविजन शुल्क ₹27.45 लाख निर्धारित किया गया है। एस्टीमेट को शासन एवं विद्युत मंडल के निर्धारित दिशा-निर्देशों (एस ओ आर) के आधार पर तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया है।
*कंपनी और अधिकारियों  की कथनी करनी में अंतर*

 पिछले दिनों जब ग्रामीणों ने बोर होल की गाड़ी वापस कर दी तब टाटा कंपनी के लोग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तब उन्होंने बताया कि यहां अभी मात्र बोर कर मिट्टी निकालना है जबकि आगे का निर्धारण मिट्टी परीक्षण के बाद किया जाएगा। वहीं कंपनी गुपचुप 10 मेगा वाट का पावर स्टेशन लगा रही है जिससे वह प्रारंभिक निर्माण कार्य कर सके।
  गौरतलब है कि इसके पहले भी ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित कर बोर होल करने और जमीन आवंटन करने की मनाही कर दी थी। इसके बाबजूद भी जबरन कंपनी और अधिकारी मिलकर काम करना चाह रहे हैं जिसको लेकर गांव वाले काफी आक्रोशित हैं।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, October 11, 2026

08 बोरहोल के नाम पर मात्र भूमि परीक्षण बताकर लोगों को झांसे में रखकर Tata के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट की गतिविधि तेज// टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए बिजली विभाग से मांगी 10 मेगावाट की बिजली सप्लाई//

08 बोरहोल के नाम पर मात्र भूमि परीक्षण बताकर लोगों को झांसे में रखकर Tata के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट की गतिविधि तेज// टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए बिजली विभाग से मांगी 10 मेगावाट की बिजली सप्लाई//

​रीवा (मध्य प्रदेश): दिनांक 11 अक्टूबर 2026

भारत सरकार के 'परमाणु ऊर्जा मिशन' और 'शांति अधिनियम (SHANTI Act), 2025' के तहत मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक बड़े न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट की दिशा में काफी कदम बढ़ा दिए गए हैं। जहां कंपनी एक तरफ कह रही है कि वह सिर्फ मिट्टी परीक्षण करने के लिए आई है और न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगेगा वहीं गुपचुप तरीके से प्रशासनिक सहयोग से सभी एन ओ सी प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है और अपनी कथनी 5करनी स्पष्ट नहीं कर पा रही है। टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) ने रीवा जिले के रोझौही गांव के पास प्रस्तावित 2x220 मेगा वाट क्षमता वाले न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं।

​निर्माण कार्य के लिए 10 मेगावाट बिजली की मांग

​टाटा पावर कंपनी लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट (बीडी), सर्विसेज एंड टेक्नोलॉजी प्रमुख सी. पी. तिवारी द्वारा मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड त्यौंथर संभाग के कार्यपालन अभियंता (ओ एंड एम) को 13 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में निर्माण चरण के दौरान आवश्यक लगभग 10 मेगा वाट की कंस्ट्रक्शन पावर सप्लाई की उपलब्धता और इसके सर्वेक्षण के संबंध में जानकारी मांगी गई है।

​अंतर-विभागीय बैठक में हुई थी चर्चा

​पत्र में उल्लेख किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 को रीवा संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में राजस्व, वन, जल निगम, जल संसाधन विभाग, एम पी आई डी सी और बिजली कंपनी जैसे प्रमुख विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, जिसमें प्रोजेक्ट स्थल पर बिजली आपूर्ति को लेकर चर्चा की गई थी।

​प्रोजेक्ट का प्रस्तावित स्थल और विवरण:

  • ​कंपनी: टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL)

  • ​प्रस्तावित क्षमता: 2x220 MWe न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट

  • ​स्थान: रोजहौही गांव के पास, त्योंथर तहसील, जिला रीवा (म.प्र.)

  • ​भौगोलिक निर्देशांक (Coordinates): 24°52'32.15"N, 81°29'55.01"E

  • ​आवश्यकता: 10 MVA कंस्ट्रक्शन पावर सप्लाई

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है कि ​प्रोजेक्ट की शुरुआती गतिविधियों को देखते हुए यह स्पष्ट हो चुका है टाटा कंपनी ग्राम वासियों से पूरा झूठ बोल रही है और सरकारी अधिकारी भी इस झूठ में सम्मिलित हैं। ग्राउंड में अधिकारी आकर जनता के सामने सिर्फ बोर होल किए जाने की बातें करते हैं वहीं कंपनी गुपचुप 10 मेगा वाट का पावर स्टेशन लगाकर आगे परियोजना का काम आगे बढ़ाना चाह रही है। इन सब क्रियाविधि से यह लगभग स्पष्ट है कि कंपनी और अधिकारी लोगों को झांसे में रखकर अपना पूरा काम कर रहे हैं और जनता को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। 

*टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रोजेक्ट का जमकर चल रहा विरोध*

 उधर जब से मामला ग्राम पंचायत में अनापत्ति प्रमाण प्राप्त करने का आया है और जिसमें ग्राम पंचायत सरपंच सरई कला के फर्जी लेटर हेड में एक पत्र क्रमांक 170 दिनांक 2026 जारी किया जाकर फर्जी एनओसी दिखाकर अधिकारियों के द्वारा 8 बोर होल किए जाने के लिए टाटा कंपनी को अनुमति प्रदान की गई है उसको लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बीच ग्राम पंचायत सरई कला की ग्राम सभा ने दो प्रस्ताव पारित कर ग्राम पंचायत परिसर में किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने का विरोध किया है। जबकि इसके बावजूद भी सरकारी अधिकारी और कंपनी के लोग जबरदस्ती बोर होल किए जाने के लिए तैयारी बना रही है। 


*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Saturday, October 10, 2026

Breaking:// रीवा: सिरमौर एसडीएम को रोझौही के ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना, न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ अड़ी जनता//

Beeaking:// रीवा: सिरमौर एसडीएम को रोझौही के ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना, न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ अड़ी जनता//

सरई कला में हंगामा: कंपनी के पक्ष में उतरी प्रशासन की टीम, ग्रामीणों ने नकारा प्लांट//

रीवा: रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सिरमौर एसडीएम को करना पड़ा तीखा विरोध का सामना//

टाटा के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर अड़ी जनता: सिरमौर एसडीएम और कंपनी अधिकारियों का संवाद रहा बेनतीजा, हजारों ग्रामीणों ने किया विरोध//

सुरक्षा और पर्यावरण की लड़ाई: रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में डटे ग्रामीण, अधिकारियों के तमाम प्रयास फेल//


रीवा (मध्य प्रदेश):

    दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को सिरमौर तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सरई कला (रोझौही) में टाटा कंपनी द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर चल रहा गतिरोध और गहरा गया है। प्लांट के विरोध में हजारों की संख्या में जुटें ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी के प्रतिनिधियों के सामने जमकर नारेबाजी की और साफ कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर अपने क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने देंगे।
*जनता के टैक्स पर पलने वाले जनता से इतर कंपनी के पक्ष में खड़े नजर आए अधिकारी*

   क्षेत्र की समस्याओं और संवाद के लिए पहुंची सिरमौर एसडीएम सृष्टि जायसवाल, नायब तहसीलदार बिंदु तिवारी, थाना प्रभारी बैकुंठपुर श्रृंगेश राजपूत और चौकी प्रभारी लालगांव शैल यादव को ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी आम जनता की बात सुनने के बजाय टाटा कंपनी के प्रतिनिधियों और उनके एडवाइजर्स के पक्ष में माहौल बनाते नजर आए। संवाद के दौरान अधिकारियों ने प्लांट के कथित फायदे गिनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन जब ग्रामीणों ने संभावित हादसों और सुरक्षा की गारंटी को लेकर सवाल किए, तो कंपनी और प्रशासन के नुक्कड़ अधिकारी पीछे हट गए।
*सामाजिक कार्यकर्ता पर दबाव बनाने का आरोप*

     संवाद के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब एसडीएम सृष्टि जायसवाल ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी पर ग्रामीणों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। हालांकि, जब मीडिया और ग्रामीणों से बातचीत की गई, तो जनता ने स्वतः स्पष्ट किया कि वे किसी के बहकावे में नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के लिए खुद संघर्ष कर रहे हैं।
   शिवानंद द्विवेदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी के दबाव में आने वाले नहीं हैं और क्षेत्र के पर्यावरण तथा जीवन की रक्षा के लिए जनता के साथ मजबूती से खड़े हैं। ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं पर अधिकारियों द्वारा दबाव बनाने के अब तक के तमाम प्रयास नाकाम साबित हुए।
*बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई बैठक*

हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में हुआ यह संवाद पूरी तरह बेनतीजा रहा। जागरूक जनता ने एक स्वर में न्यूक्लियर पावर प्लांट का पुरजोर विरोध किया। बैठक में जिला पंचायत रीवा सदस्य मृत्युंजय मिश्रा, 'आप' नेता प्रमोद कुमार शर्मा, उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच प्रतिनिधि संजय सिंह, पत्रकार आनंद द्विवेदी, लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी, सरपंच प्रतिनिधि सरई कला संजय सिंह, लक्ष्मण कोल, रामसुजान कोल, दयानंद कोल, राधे कोल, छोटेलाल कोल, रामकरण प्रजापति, अमरीश पांडेय, चंद्रभूषण द्विवेदी, अरविंद पांडेय, अमित बहेलिया, गोलू पाल, मोतीलाल बहेलिया समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और टाटा कंपनी के प्रतिनिधि परशुराम मिश्रा व कंपनी एडवाइजर श्री जैन उपस्थित रहे।
   फिलहाल, रोझौही और सरई कला के ग्रामीणों के कड़े रुख को देखते हुए यह साफ है कि जनता अपने पर्यावरण और जीवन की सुरक्षा को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नहीं है।

— विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (म.प्र.)