Tuesday, October 27, 2026

Breaking; 'जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट का प्रस्ताव वापस नहीं, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा': रोझौही में जल सत्याग्रह के साथ सांकेतिक फांसी देकर विरोध//

*Breaking; 'जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट का प्रस्ताव वापस नहीं, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा': रोझौही में जल सत्याग्रह के साथ सांकेतिक फांसी देकर विरोध//*
*रोझौही में टाटा पावर प्लांट पर आर-पार की लड़ाई: बिगड़े स्वास्थ्य के बावजूद डटे ग्रामीण, कांग्रेस और विचार क्रांति मंच का मिला समर्थन//*

*जल-जंगल-जमीन बचाने की जंग: क्योटी पंचायत के सामने सांकेतिक फांसी, रीवा में टाटा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध बढ़ा//*

दिनांक 26 अक्टूबर 2026
रीवा (मध्य प्रदेश):

रोझौही-सरई कला में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहा जन आंदोलन लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। परियोजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को भी जारी रहा। आंदोलन के समर्थन में क्योटी पंचायत भवन के सामने प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी दर्ज कराई।
*स्वास्थ्य बिगड़ने पर अनशनकारियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया*

विगत 26 अक्टूबर 2026 को रोझौही में तालाब के भीतर कई दिनों से जल सत्याग्रह और आमरण अनशन कर रहे ग्रामीणों की तबियत बिगड़ने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार सिरमौर, बिंदु तिवारी ने रात करीब 11:00 बजे पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा और अनशन कर रहे ग्रामीणों—बबली कोल, रावेंद्र कोल एवं संदीप कोल—को एम्बुलेंस के जरिए रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया।
*ग्रामीणों और आंदोलनकारियों का 'जल सत्याग्रह' और धरना-प्रदर्शन अभी भी जारी*

प्रशासन द्वारा कुछ अनशनकारियों को अस्पताल भेजे जाने के बावजूद, दिनांक 27 अक्टूबर 2026 को भी रोझौही में प्लांट साइट के पास स्थित तालाब में ग्रामीणों का जल सत्याग्रह अनवरत जारी है। गांव की बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष इस जल सत्याग्रह एवं अनशन में डटे हुए हैं। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव को पूरी तरह वापस लेने की आधिकारिक घोषणा नहीं करती, तब तक यह विरोध प्रदर्शन और जल सत्याग्रह समाप्त नहीं होगा।
*कांग्रेस का धरना और उमंग सिंघार का ऐलान*

दूसरी ओर, सरई कला और रोझौही गांव में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में 24 अक्टूबर से चल रहा धरना-प्रदर्शन भी निरंतर जारी है, जिसमें स्थानीय लालगांव और मनगवां क्षेत्र के नेता भी शामिल हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 25 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रोझौही का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने मंच से घोषणा की थी कि जब तक सरकार इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस नहीं ले लेती, तब तक कांग्रेस का तंबू यहीं गड़ा रहेगा और आंदोलन जारी रहेगा। इसी कड़ी में 27 अक्टूबर को भी कांग्रेस का धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन पूरी मजबूती के साथ चलता रहा।
*आंदोलनकारियों एवं समाजसेवियों की मौजूदगी*

क्योटी पंचायत भवन के सामने चल रहे इस जन आंदोलन को विभिन्न संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इस दौरान 'बिरसा मुंडा विचार क्रांति मंच' के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विष्णुकांत कुशवाहा, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, नागरिक आनंद कोल और समाजसेवी बृजेश गौतम सहित सैकड़ों ग्रामीण व स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
*(विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा, मध्य प्रदेश — 27 अक्टूबर 2026)*

Monday, October 26, 2026

Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबीयत बिगड़ी, अन्न के बाद जल भी त्यागा//

*Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबीयत बिगड़ी, अन्न के बाद जल भी त्यागा//*

*"प्लांट रद्द नहीं हुआ तो दे देंगे जान": रोझौही में आमरण अनशन कर रहे AAP नेता प्रमोद शर्मा की बिगड़ी तबीयत//*

*रोझौही न्यूक्लियर प्लांट विरोध: 6 दिन के अनशन और जल त्याग के बाद प्रमोद शर्मा की स्थिति नाजुक//*

*रीवा: रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में अनशनरत AAP नेता प्रमोद शर्मा की तबियत बिगड़ी//*

*अन्न-जल त्यागकर अनशन पर बैठे AAP नेता प्रमोद शर्मा, डॉक्टरों ने जताई चिंता*

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश) | 26 अक्टूबर 2026

रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में पिछले 6 दिनों से आमरण अनशन कर रहे आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रमोद शर्मा की स्थिति गंभीर बनी हुई है। जल सत्याग्रह के बाद भोजन का त्याग कर अनशन पर बैठे प्रमोद शर्मा ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 से जल ग्रहण करना भी पूरी तरह से बंद कर दिया है, जिससे उनका स्वास्थ्य तेजी से गिर रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मदरी के डॉक्टर रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा और उनके सहयोगियों के स्वास्थ्य की जांच के बाद बताया कि अनशनकारियों के हेल्थ पैरामीटर (स्वास्थ्य मानक) सामान्य नहीं हैं। कई के वजन और रक्तचाप में सामान्य से हटकर पैरामीटर दर्ज किए गए हैं। डॉक्टर साकेत के अनुसार, बिगड़ती हालत को देखते हुए प्रमोद शर्मा और उनके साथियों को तुरंत मेडिकल निगरानी में स्थानांतरित किया जाना बेहद जरूरी है।

*बबली कोल और एक दर्जन महिलाओं का भी कड़ा रुख*

प्रमोद शर्मा के साथ आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रहे बबली कोल का स्वास्थ्य भी चिंताजनक बना हुआ है। पूर्व में जल सत्याग्रह का हिस्सा रहे बबली कोल पिछले 3 दिनों से आमरण अनशन पर हैं और उन्होंने अन्न का पूरी तरह से त्याग कर रखा है।

इस आंदोलन में उनके साथ लगभग एक दर्जन महिलाएं भी जल सत्याग्रह पर बैठी हुई हैं। प्रदर्शन स्थल पर उपस्थित महिलाओं ने अपना कड़ा रुख व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्णय को निरस्त नहीं किया गया, तो वे प्रमोद शर्मा के साथ यहीं अपने प्राण त्याग देंगी। जल सत्याग्रह कर रही महिलाओं ने बताया कि उनकी एक बहन विमला कोल की मौत हो चुकी है जिस पर सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंगी है और अब इसी तरह से वह भी अपनी जान दे देंगी।

स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए है, वहीं आंदोलनकारियों की मांग है कि जब तक न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को रद्द नहीं किया जाता, उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, October 25, 2026

Beeaking://"विनाश नहीं विकास चाहिए": रोझौही प्लांट के विरोध में उतरा बांस और भदौंहा टोला//

*Breaking: रीवा में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ आंदोलन तेज: बांस और भदौंहा टोला के ग्रामीणों ने भरी हुंकार, सरकार से परियोजना रद्द करने की मांग//*
*रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ बांस ग्राम पंचायत के ग्रामीणों का भी अब फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*

*"विनाश नहीं विकास चाहिए": रोझौही प्लांट के विरोध में उतरा बांस और भदौंहा टोला//*

*परमाणु विकिरण के खतरे से सहमे बांस और भदौंहा टोला ग्रामीण, रीवा में उग्र हुआ न्यूक्लियर प्लांट का विरोध//*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में बढ़ता जनसैलाब, बांस और भदौंहा टोला के ग्रामीण भी जुड़े आंदोलन से, सरकार से प्रोजेक्ट रद्द करने की मांग//*

*रीवा में गरमाया रोझौही प्लांट का मुद्दा, बांस और भदौंहा टोला  की महिलाओं ने भी किया प्रदर्शन//*

रीवा, मध्य प्रदेश | 26 अक्टूबर 2026

  जिले के रोझौही गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश लगातार उग्र रूप लेता जा रहा है। परियोजना के विरोध का दायरा अब आसपास के टोलों और गांवों तक फैल गया है। इसी कड़ी में रविवार को ग्राम पंचायत बांस और भदौंहा टोला के सैकड़ों ग्रामीणों ने सीएफटी भवन के पास एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार की जनविरोधी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने "विनाश 5नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" के गगनभेदी नारे लगाकर पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया।
*भारी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल*

विरोध प्रदर्शन में भारी संख्या में ग्रामीणजन सम्मिलित हुए, जिसमें महिलाओं और बच्चों की भी खासी मौजूदगी रही। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे बांस ग्राम पंचायत के सरपंच कमलेश पटेल के साथ-साथ देवेंद्र तिवारी, रविकांत अग्निहोत्री, रामकिशोर मिश्रा, ददन प्रसाद साकेत और सियानंद गौतम समेत कई गणमान्य ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि इस विनाशकारी परियोजना को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाए।

*विकिरण और रेडिएशन के खतरे से सहमें हैं ग्रामीण*

रोझौही में प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर क्षेत्र में पिछले लंबे समय से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। केवल रोझौही और सरई कला ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इस बात को लेकर बेहद आक्रोशित हैं।

ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि प्लांट के संचालन के बाद उससे निकलने वाले परमाणु विकिरण (रेडिएशन) से स्वास्थ्य, पर्यावरण, वायु, शुद्ध जल, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों पर बेहद घातक दुष्प्रभाव पड़ेगा। लोगों में इस बात का डर है कि इससे क्षेत्र में कैंसर जैसी असाध्य बीमारियां और नवजात शिशुओं में जन्मजात विकलांगता जैसी समस्याएं पनप सकती हैं। इसी गंभीर आशंका के चलते ग्रामीण शासन-प्रशासन से इस प्लांट को अन्यत्र स्थानांतरित करने या पूरी तरह रद्द करने की मांग कर रहे हैं। प्लांट के विरोध में क्षेत्र में पहले से ही जल सत्याग्रह और आमरण अनशन जैसे गांधीवादी आंदोलन भी सुलग रहे हैं।
*राजनीतिक सरगर्मी और नेता प्रतिपक्ष का दौरा*

इस संवेदनशील मामले पर राजनीतिक हलचल भी तेज है। दिनांक 26 अक्टूबर को मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने रोझौही गांव का दौरा किया। दौरे के दौरान उन्होंने मृतिका विमला कोल के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की थी और एक लाख रुपये की सांत्वना राशि देने की घोषणा की थी। साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया था कि इस क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगने दिया जाएगा। यदि जरूरत पड़ी तो मामला विधानसभा में भी उठाया जाएगा।

*दिन-प्रतिदिन व्यापक हो रहा विरोध का कारवां*
रोझौही और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह विरोध प्रदर्शन अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। प्रतिदिन आसपास के अन्य गांवों के प्रभावित लोग भी इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। ग्रामीणों की दो टूक चेतावनी है कि जब तक सरकार इस जनविरोधी और खतरनाक प्रोजेक्ट को रद्द करने का आधिकारिक फैसला नहीं लेती, तब तक उनका यह संघर्ष और विरोध इसी तरह जारी रहेगा।
*(विशेष ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा, मध्य प्रदेश)*

Thursday, October 22, 2026

Breaking:// रीवा: 'परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ' के नारों से गूंजा लालगांव का महूहा टोला, टाटा पावर प्लांट हटाने की मांग पर अड़े ग्रामीण//

*Breaking:// रीवा में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जन आंदोलन तेज: लालगांव, महूहा टोला और आसपास के ग्रामीणों ने खोला मोर्चा//*
*"विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" — रीवा में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ गूंजे जोरदार नारे//*

*"हमें नहीं चाहिए कैंसर प्लांट" — रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट को रद्द करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का हल्लाबोल//*

*रीवा: 'परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ' के नारों से गूंजा महूहा टोला, टाटा पावर प्लांट हटाने की मांग पर अड़े ग्रामीण//*

दिनांक 23 अक्टूबर 2026, रीवा (मध्य प्रदेश):

   रोझौही में प्रस्तावित टाटा पावर के न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन अब व्यापक रूप लेता जा रहा है। सरई कला और रोझौही के बाद अब लालगांव के महूहा टोला और वार्ड 2 व 3 के ग्रामीणों ने भी इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्लांट को रद्द करने की मांग उठाई।

*नारेबाजी और आक्रोश*

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों की जुबान पर मुख्य रूप से "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए", "विनाश नहीं विकास चाहिए, कैंसर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" जैसे नारे गूंजते रहे। ग्रामीणों का कहना है कि यह प्लांट उनके जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा है।

*सामाजिक कार्यकर्ता का जनसंपर्क*

   सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे जनसंपर्क अभियान के दौरान सैकड़ों लोगों ने अपनी पीड़ा साझा की। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा कि उन्हें किसी भी कीमत पर यह न्यूक्लियर पावर प्लांट मंजूर नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन में अब लालगांव पंचायत के वार्ड 2, 3 और महूहा टोला के आम नागरिकों के साथ-साथ समाजसेवी शेखर केवट, शिवानंद पांडेय, रामकली केवट, रानी, प्रदीप पटेल, रमाकांत शुक्ला, मिठाईलाल प्रजापति, सौखीलाल केवट और राजकली कोल सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
*प्रशासन की अनदेखी पर रोष*

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट को लेकर न केवल रोझौही एवं सरई बल्कि आसपास के सैकड़ों गांवों में भारी आक्रोश है। कुछ दिनों पूर्व जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल नामक एक आदिवासी महिला की मृत्यु हो जाने से पूरे क्षेत्र में प्रशासन के प्रति और अधिक गुस्सा व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दुर्घटना के बाद भी शासन-प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा सुधि लेने नहीं पहुंचा।
आंदोलित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि रोझौही में प्रस्तावित टाटा पावर के न्यूक्लियर प्लांट को रद्द कर यहां से नहीं हटाया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking:// 'न्याय या मौत': न्यूक्लियर प्लांट विरोध के बीच महिला आंदोलनकारी ने तोड़ा दम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश//

*Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट विरोध: जल सत्याग्रह कर रही महिला आंदोलनकारी की ठंड से मौत, प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप//*

*रीवा में न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ जल सत्याग्रह के दौरान महिला आंदोलनकारी की मौत//*

*सत्याग्रह की ठंड में गई जान: रोझौही प्लांट विरोध में डटी महिला की मौत, अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा आंदोलन//*

*जल सत्याग्रह के बीच सरई कला में हादसा: ठंड से महिला की मौत, प्रशासन की बेरुखी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा//*

*रोझौही प्लांट का विरोध: जल सत्याग्रह के दौरान महिला की ठंड से मौत, प्रशासन बेखबर//*

*रीवा में आंदोलन की कीमत: जल सत्याग्रह में बैठी महिला की मौत, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान//*

*'न्याय या मौत': न्यूक्लियर प्लांट विरोध के बीच महिला आंदोलनकारी ने तोड़ा दम, ग्रामीणों में भारी आक्रोश//*

*सरई कला में मातम: जल सत्याग्रह के छठे दिन महिला की ठंड से गई जान, अधिकारियों ने नहीं ली सुध//*

रीवा (मध्य प्रदेश) | स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट
दिनांक 22 अक्टूबर 2026 

  रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में पिछले 6 दिनों से जारी जल सत्याग्रह के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। सरई कला पंचायत में सत्याग्रह पर बैठी महिला आंदोलनकारी विमला कोल की 22 अक्टूबर 2026 की सुबह तड़के ठंड की वजह से मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पावर प्लांट के विरोध में कई ग्रामीणों के साथ विमला कोल भी लगातार जल सत्याग्रह में हिस्सा ले रही थीं। घटना की सूचना मिलते ही सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। मृतिका के पति जमुना कोल से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि विमला की मौत जल सत्याग्रह और लगातार जारी आंदोलन के कठिन हालात के कारण हुई है।

*शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप*

परिजनों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के रवैये पर कड़ा रोष जताया है। परिजनों का आरोप है कि इतने दिनों से चल रहे प्रदर्शन और इस दुखद घटना के बावजूद शासन या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खबर लेने तक नहीं पहुंचा। उन्होंने प्रशासनिक उपेक्षा और जन-मानस की आवाज को अनसुना करने का गंभीर आरोप लगाया है।

*मौत के बाद भी नहीं थमेगा आंदोलन*

एक साथी आंदोलनकारी की मौत के बावजूद ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि सत्याग्रह रुकेगा नहीं और आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। इस प्रदर्शन में भारी संख्या में आमजन के साथ लालगांव उपसरपंच प्रतिनिधि लवकुश तिवारी आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा तथा समाजसेवी विष्णुकांत कुशवाहा एवं दुलहरा ग्राम से समाजसेविका नीलू दहिया एवं अन्य सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हो चुके हैं।

*क्योटी में सजा नया पंडाल, अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान*

आंदोलन का दायरा अब बढ़ता जा रहा है। 22 अक्टूबर 2026 से नजदीकी ग्राम पंचायत क्योटी में क्योटी-कलवारी मुख्य मार्ग के समीप ग्रामीणों ने नया पंडाल सजा लिया है। सत्याग्रहियों ने हुंकार भरते हुए कहा है कि यह आंदोलन अब अनिश्चितकाल के लिए जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक शासन प्रशासन न्यूक्लियर पावर प्लांट को वापस लेने का निर्णय नहीं लेता तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Tuesday, October 20, 2026

Breakin:// "कैंसर की फैक्ट्री नहीं चाहिए": पनगड़ी में भी ग्रामीणों ने न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में किया जोरदार प्रदर्शन//

Breaking:// पनगड़ी में भी प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, प्रदर्शन कर परियोजना रद्द करने की मांग//
"कैंसर की फैक्ट्री नहीं चाहिए": पनगड़ी के ग्रामीणों ने न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में किया जोरदार प्रदर्शन//

रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में मुखर हुए पनगड़ी के ग्रामीण, कहा— "विकास चाहिए, विनाश नहीं"//

रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में सड़क पर उतरे ग्रामीण, कहा— 'लाखों लोगों की जिंदगी खतरे में न डाले सरकार'//

पनगड़ी में गूंजा "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" का नारा, टाटा न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध//

'विकास चाहिए, विनाश नहीं': रोझौही परमाणु संयंत्र के विरोध में मुखर हुए पनगड़ी के लोग, सौर-पवन ऊर्जा अपनाने की अपील//

कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर सहमे ग्रामीण: पनगड़ी में न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ फूटा जनसैलाब//

दिनांक 20 अक्टूबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश।

प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध अब व्यापक रूप लेने लगा है। यह अब मात्र प्रस्तावित स्थल रोझौही अथवा सरई तक ही सीमित न रहते हुए आपस के सैकड़ों ग्रामों तक अब आंदोलन की लपटें पहुंच रही हैं। लोग अपने जीवन और स्वास्थ्य को लेकर काफी जागरूक हैं और वह अपने आसपास किसी भी प्रकार से कैंसर की फैक्ट्री नहीं चाहते। इसी कड़ी में पनगड़ी ग्राम पंचायत में भी ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस परियोजना के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" के गगनभेदी नारे लगाकर स्वास्थ्य, पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा की गुहार लगाई।

यह प्रदर्शन पनगड़ी ग्राम पंचायत के अग्रणी सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व सरपंच प्रत्याशी अमित शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें गांव के बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों सहित लवकुश पांडेय, सुरेश सोंधिया और यज्ञभान कुशवाहा जैसे स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
 *लाखों जिंदगियों को खतरे में न डाले सरकार*

   ग्रामीणों ने सरकार के समक्ष मांग रखी है कि महज मुआवजे के इच्छुक कुछ लोगों के लिए लाखों लोगों का जीवन संकट में न डाला जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल रोझौही या सरई ही नहीं, बल्कि आसपास के सैकड़ों और हजारों गांवों की जनता इस प्लांट का विरोध कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए पवन और सौर ऊर्जा जैसे कई हरित एवं सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं, जिन्हें सरकार को प्राथमिकता देनी चाहिए।
*2024 के रिसर्च का हवाला: न्यूक्लियर प्लांट से बढ़ रहा कैंसर का खतरा*

आंदोलन के दौरान 'करेंट एनवायरनमेंट मैगजीन' के वर्ष 2024 के एक शोध का भी हवाला दिया गया। जिसमें 17 देशों के 175 न्यूक्लियर पावर प्लांटों के 30 किलोमीटर रेडियस और 60 किमी व्यास के दायरे में किए गए इस अध्ययन के अनुसार, ऐसे संयंत्रों के आसपास कुल कैंसर के मामलों में 5% से 10% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, सामान्य क्षेत्रों की तुलना में ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) में 9% और थायराइड कैंसर में 17% तक की अधिक वृद्धि देखी गई है। चूंकि पनगड़ी गांव इस प्रस्तावित प्लांट से महज 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए यहां के निवासियों पर इसका सीधा और गंभीर असर पड़ेगा।

*पीड़ित परिवारों ने बयां किया अपना दर्द*

प्रदर्शन के दौरान कैंसर की विभीषिका झेल चुके पीड़ितों ने अपना दर्द साझा करते हुए प्लांट का कड़ा विरोध किया जिसमें याज्ञभान कुशवाहा (निवासी, पनगड़ी) ने बताया कि वह गरीब व्यक्ति हैं और उनकी पत्नी कैंसर से पीड़ित थीं। लगभग 5 से 6 महीने तक चले इलाज और 10 लाख रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद वह उन्हें बचा नहीं सके। उन्होंने भावुक होकर कहा कि इस क्षेत्र में "कैंसर की फैक्ट्री" कहे जाने वाले इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को किसी भी कीमत पर न लगाया जाए। वहीं गांव के सुरेश कुमार सोंधिया (निवासी, पनगड़ी) ने भी अत्यंत दुखी मन से बताया कि उनके 30 वर्षीय बेटे को अंतिम स्टेज में कैंसर का पता चला, जिसके बाद उसकी मृत्यु हो गई। एक पीड़ित पिता के रूप में उन्होंने संदेश दिया कि इस घातक बीमारी के खतरे को देखते हुए इस परियोजना को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जनहित और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना को हर हाल में निरस्त किया जाना चाहिए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Monday, October 19, 2026

Breaking:// सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र पर घमासान: विरसा मुण्डा विचार मंच ने भी राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन//

*Breaking:// सिरमौर (रीवा) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध: राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन//*

*सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र पर घमासान: विरसा मुण्डा विचार मंच ने भी राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन//*
  
*रीवा: रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने जताया कैंसर और पर्यावरण क्षति का खतरा//*
  
*क्योटी जल प्रपात और कृषि बचाने की गुहार: सिरमौर में परमाणु संयंत्र निरस्त करने की मांग//
 
*परमाणु ऊर्जा की जगह सौर और पवन ऊर्जा अपनाने की मांग, SDM सिरमौर को ज्ञापन सौंपा //*

*भूमि पट्टा विवाद सुलझाए बिना प्रोजेक्ट न लाने की चेतावनी, सिरमौर में लामबंद हुए नागरिक//*  

स्थान: सिरमौर, रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 19 अक्टूबर 2026  

सिरमौर (रीवा): रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र स्थित रोझौही-क्योटी में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विरोध में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में विरसा मुण्डा विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विष्णुकांत कुशवाहा तथा विंध्य क्षेत्र के समस्त नागरिकों एवं संगठनों द्वारा राष्ट्रपति महोदया के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिरमौर को एक ज्ञापन सौंपा गया है।  
ज्ञापन में पर्यावरण, जन सुरक्षा और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण का हवाला देते हुए इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही इसके स्थान पर सौर और पवन ऊर्जा जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने की अपील की गई है।  
*ज्ञापन में उठाई गई मुख्य आपत्तियां एवं मुद्दे:*

*घनी आबादी और सुरक्षा जोखिम:* चेरनोबिल (1986) और फुकुशिमा (2011) जैसी वैश्विक परमाणु आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र की स्थापना अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है।  

*जल संकट व कृषि पर प्रभाव:* रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय कृषि, पेयजल और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह प्रभावित होगा।  

*क्योटी जल प्रपात और पर्यावरण क्षति:* प्रसिद्ध पर्यटन स्थल 'क्योटी जल प्रपात' और आसपास की जैव विविधता को थर्मल डिस्चार्ज एवं विकिरण से अपूरणीय क्षति पहुँचने की आशंका जताई गई है।  

*स्वास्थ्य संबंधी खतरे:* ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि संयंत्र के आसपास रहने वाली जनता को रेडिएशन के कारण लंग्स कैंसर, ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और आनुवंशिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।  

*जनता का विरोध:* दावों के अनुसार, आसपास के 5 से 35 किलोमीटर क्षेत्र की जनता इस न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध कर रही है और इसे किसी आबादी रहित स्थान पर ले जाने की मांग कर रही है।  

*भूमि पट्टा विवाद:* ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम रोझौही में वर्ष 2002-2003 में 200 से 250 लोगों को दिए गए पट्टे बाद में निरस्त कर दिए गए थे। वर्तमान में वहाँ सैकड़ों भूमिहीन लोग काबिज हैं। मांग की गई है कि जब तक पट्टे के इस मुद्दे का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक उक्त भूमि पर कोई भी प्रोजेक्ट न लाया जाए।  

विरोध जताने वालों का कहना है कि प्रशासन एक प्राइवेट कंपनी के पक्ष में पैरवी कर रहा है, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग एकजुट हैं। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया गया है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*