Karm Yoga of Shrimad Bhagavad Gita (श्रीकृष्ण जी का कर्मयोग)
"One who is unattached to the fruits of his work and who works as he is obligated is in the renounced order of life, and he is the true mystic: not he who lights no fire and performs no work". - |||श्रीमद भगवद गीता, अध्याय 6, Verse 1|||
Monday, October 12, 2026
Breaking:// कटरा से रोझौही तक बिछेगी 36.6 किमी लंबी बिजली लाइन, टाटा प्रोजेक्ट को मिलेगा 10 मेगावाट का नया कनेक्शन//
Sunday, October 11, 2026
08 बोरहोल के नाम पर मात्र भूमि परीक्षण बताकर लोगों को झांसे में रखकर Tata के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट की गतिविधि तेज// टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए बिजली विभाग से मांगी 10 मेगावाट की बिजली सप्लाई//
08 बोरहोल के नाम पर मात्र भूमि परीक्षण बताकर लोगों को झांसे में रखकर Tata के न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट की गतिविधि तेज// टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए बिजली विभाग से मांगी 10 मेगावाट की बिजली सप्लाई//
रीवा (मध्य प्रदेश): दिनांक 11 अक्टूबर 2026
भारत सरकार के 'परमाणु ऊर्जा मिशन' और 'शांति अधिनियम (SHANTI Act), 2025' के तहत मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक बड़े न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट की दिशा में काफी कदम बढ़ा दिए गए हैं। जहां कंपनी एक तरफ कह रही है कि वह सिर्फ मिट्टी परीक्षण करने के लिए आई है और न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं लगेगा वहीं गुपचुप तरीके से प्रशासनिक सहयोग से सभी एन ओ सी प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है और अपनी कथनी 5करनी स्पष्ट नहीं कर पा रही है। टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) ने रीवा जिले के रोझौही गांव के पास प्रस्तावित 2x220 मेगा वाट क्षमता वाले न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए शुरुआती तैयारियां शुरू कर दी हैं।
निर्माण कार्य के लिए 10 मेगावाट बिजली की मांग
टाटा पावर कंपनी लिमिटेड के बिजनेस डेवलपमेंट (बीडी), सर्विसेज एंड टेक्नोलॉजी प्रमुख सी. पी. तिवारी द्वारा मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड त्यौंथर संभाग के कार्यपालन अभियंता (ओ एंड एम) को 13 जुलाई 2026 को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में निर्माण चरण के दौरान आवश्यक लगभग 10 मेगा वाट की कंस्ट्रक्शन पावर सप्लाई की उपलब्धता और इसके सर्वेक्षण के संबंध में जानकारी मांगी गई है।
अंतर-विभागीय बैठक में हुई थी चर्चा
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 को रीवा संभागायुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में राजस्व, वन, जल निगम, जल संसाधन विभाग, एम पी आई डी सी और बिजली कंपनी जैसे प्रमुख विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे, जिसमें प्रोजेक्ट स्थल पर बिजली आपूर्ति को लेकर चर्चा की गई थी।
प्रोजेक्ट का प्रस्तावित स्थल और विवरण:
- कंपनी: टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL)
- प्रस्तावित क्षमता: 2x220 MWe न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट
- स्थान: रोजहौही गांव के पास, त्योंथर तहसील, जिला रीवा (म.प्र.)
- भौगोलिक निर्देशांक (Coordinates): 24°52'32.15"N, 81°29'55.01"E
- आवश्यकता: 10 MVA कंस्ट्रक्शन पावर सप्लाई
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी का कहना है कि प्रोजेक्ट की शुरुआती गतिविधियों को देखते हुए यह स्पष्ट हो चुका है टाटा कंपनी ग्राम वासियों से पूरा झूठ बोल रही है और सरकारी अधिकारी भी इस झूठ में सम्मिलित हैं। ग्राउंड में अधिकारी आकर जनता के सामने सिर्फ बोर होल किए जाने की बातें करते हैं वहीं कंपनी गुपचुप 10 मेगा वाट का पावर स्टेशन लगाकर आगे परियोजना का काम आगे बढ़ाना चाह रही है। इन सब क्रियाविधि से यह लगभग स्पष्ट है कि कंपनी और अधिकारी लोगों को झांसे में रखकर अपना पूरा काम कर रहे हैं और जनता को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।
*टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रोजेक्ट का जमकर चल रहा विरोध*
उधर जब से मामला ग्राम पंचायत में अनापत्ति प्रमाण प्राप्त करने का आया है और जिसमें ग्राम पंचायत सरपंच सरई कला के फर्जी लेटर हेड में एक पत्र क्रमांक 170 दिनांक 2026 जारी किया जाकर फर्जी एनओसी दिखाकर अधिकारियों के द्वारा 8 बोर होल किए जाने के लिए टाटा कंपनी को अनुमति प्रदान की गई है उसको लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बीच ग्राम पंचायत सरई कला की ग्राम सभा ने दो प्रस्ताव पारित कर ग्राम पंचायत परिसर में किसी भी प्रकार के न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाए जाने का विरोध किया है। जबकि इसके बावजूद भी सरकारी अधिकारी और कंपनी के लोग जबरदस्ती बोर होल किए जाने के लिए तैयारी बना रही है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*
Saturday, October 10, 2026
Breaking:// रीवा: सिरमौर एसडीएम को रोझौही के ग्रामीणों के तीखे विरोध का सामना, न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ अड़ी जनता//
Friday, October 9, 2026
Breaking:// रीवा में टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का एक बार पुनः भारी विरोध: ग्रामीणों ने रोका बोरहोल का काम, फर्जी एनओसी की जांच की मांग//
Thursday, October 8, 2026
Breaking:// रीवा में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना: टाटा पावर ने निर्माण कार्य के लिए मांगी बिजली की आपूर्ति//
Breaking:// रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट के लिए जाली सहमति पत्र बनाने का आरोप, सरपंच ने कमिश्नर और कलेक्टर से की जांच की मांग//
Tuesday, October 6, 2026
ब्रेकिंग:// "विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु प्लांट नहीं चाहिए": 28 हजार करोड़ के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में गरजे रोझौही के ग्रामीण//
*ब्रेकिंग:// "विनाश नहीं विकास चाहिए, परमाणु प्लांट नहीं चाहिए": 28 हजार करोड़ के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में गरजे रोझौही के ग्रामीण//*
*रीवा में गूंजा नारा — "परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ": रोझौही में टाटा न्यूक्लियर प्लांट का विरोध तेज!*
*सिरमौर में आर-पार की लड़ाई: 28 हजार करोड़ के पावर प्लांट के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का हुंकार!*
*28 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट और विस्थापन का खौफ: रीवा के रोझौही में क्यों भड़का परमाणु विरोधी आंदोलन?*
*रेडिएशन और बीमारी के भय से थर्राया रोझौही, ग्रामीणों ने नेताओं को बताया जनविरोधी*
*रीवा न्यूक्लियर प्लांट विवाद: जन-विरोध के बीच अब कोर्ट जाने की तैयारी में सामाजिक कार्यकर्ता*
*रोझौही का साफ संदेश: "जान देंगे, जमीन नहीं" — न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ सड़क पर उतरा जन-सैलाब*
*स्वच्छ हवा, साफ प्रकृति चाहिए, परमाणु नहीं: डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट के खिलाफ रीवा में महाआंदोलन*
*बोरिंग मशीनें खदेड़ने के बाद अब सरकार को चेतावनी: रीवा में नहीं बनने देंगे न्यूक्लियर पावर प्लांट*
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 07 अक्टूबर 2026
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले अंतर्गत सिरमौर तहसील का रोझौही गांव इन दिनों एक बड़े जन-आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। 06 अक्टूबर 2026 को रोझौही में आयोजित विशाल जन-प्रदर्शन में हजारों की संख्या में पहुंचे स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के गगनभेदी नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। "परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ", "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहिए" और "स्वच्छ प्रकृति, साफ हवा, परमाणु नहीं इसकी दवा" जैसे तीखे नारों के साथ ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे अपनी जान और जमीन की कीमत पर इस संयंत्र को कतई स्थापित नहीं होने देंगे।
*क्या है 28 हजार करोड़ का पूरा प्रोजेक्ट?*
मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) राजेंद्र शुक्ला द्वारा पूर्व में सिरमौर क्षेत्र में इस वृहद परियोजना को लगाए जाने की घोषणा की गई थी। इसकी कुल लागत लगभग ₹28,000 करोड़ है जबकि प्रस्तावित भूमि का रकबा रोझौही एवं आसपास का 169 हेक्टेयर का क्षेत्र है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट टाटा पावर द्वारा स्थापित किया जाना है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस विशालकाय प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्र के लगभग 100 से अधिक गांवों की शांति, सुरक्षा और अस्तित्व दांव पर लग जाएगा।
*बोरिंग मशीनों को खदेड़ चुका है जन-आक्रोश*
रोझौही और सरई कला क्षेत्र में पिछले कई महीनों से परमाणु ऊर्जा विरोधी आंदोलन सुलग रहा है। इस आंदोलन ने तब बड़ा मोड़ लिया जब पिछले दिनों एमएस फुग्रो कंपनी की बोर-होल (भूमि परीक्षण) मशीनें सर्वेक्षण के लिए गांव में दाखिल हुईं।
ग्राम सभा द्वारा पूर्व में ही कलेक्टर के पत्र (क्रमांक 117) के विरोध में प्रस्ताव पारित कर असहमति जताई जा चुकी थी। इसके बावजूद जब प्रशासन और कंपनी की गाड़ियां गांव पहुंचीं, तो आक्रोशित ग्रामीणों ने लामबंद होकर मशीनों को काम करने से रोक दिया और उन्हें उल्टे पांव खदेड़ दिया। इसके तुरंत बाद सरई कला ग्राम पंचायत द्वारा बुलाई गई विशेष ग्राम सभा में भी सर्वसम्मति से न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
*विस्थापन और रेडिएशन का मंडराता खौफ*
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल जमीन बचाने की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और अस्तित्व को बचाने की है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से भयंकर रेडिएशन का खतरा है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी विकिरण और उसके कचरे (न्यूक्लियर वेस्ट) से कैंसर, जल-प्रदूषण और गंभीर आनुवंशिक बीमारियों का स्थायी डर बना रहेगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन से बड़े पैमाने पर विस्थापन होना भी तय है। जिसमें 169 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित होने से हजारों परिवार बेघर और बेरोजगार हो जाएंगे। उपजाऊ कृषि भूमि छिन जाने से किसानों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।
*सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता का बयान*
आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा "सरकार पूरी तरह से जनविरोधी रवैया अख्तियार कर रही है। जब क्षेत्र की जनता अपनी भूमि, पर्यावरण और जीवन की रक्षा के लिए न्यूक्लियर पावर प्लांट नहीं चाहती, तो सरकार को तानाशाही रवैया छोड़कर इस प्रोजेक्ट को तत्काल रद्द करना चाहिए। यदि जन-भावनाओं की अनदेखी कर सरकार जबरन प्लांट थोपने का प्रयास करेगी, तो हमें इस मामले को लेकर न्यायालय (कोर्ट) का रुख करना पड़ेगा।"
— शिवानंद द्विवेदी (सामाजिक एवं RTI कार्यकर्ता)
*नेताओं को बताया जनविरोधी, कोर्ट जाने की तैयारी*
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और नेताओं के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त की। लोगों का कहना है कि उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और स्थानीय नेताओं ने क्षेत्र के विकास के नाम पर इस विनाशकारी परियोजना का समर्थन कर जनता के साथ धोखा किया है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते इस योजना को रोझौही से वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय रीवा का घेराव किया जाएगा और उग्र आंदोलन के साथ-साथ कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*