Tuesday, November 3, 2026

Breaking:// रीवा: सिरमौर के रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट मामला: कार्रवाई के अभाव में बढ़ा विरोध: 12 अक्टूबर के बाद अब 3 नवंबर को फिर ज्ञापन सौंपकर न्यूक्लियर प्लांट निरस्त करने की मांग//

*Breaking:// रीवा: सिरमौर के रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में पूर्व ज्ञापन पर कार्यवाही न होने पर एक बार दिनांक 03 नवंबर को पुनः कमिश्नर को सौंपा गया ज्ञापनl//*

*ग्राम सभाओं के सर्वसम्मति प्रस्तावों की अनदेखी और फर्जी अनापत्ति का मामला गर्माया//*

*पूर्व में 12 अक्टूबर को दिए गए ज्ञापन पर कार्रवाई न होने पर, 3 नवंबर को पुनः सौंपा गया ज्ञापन//*

*डिप्टी कमिश्नर राजस्व लोचन लाल अहिरवार को आयुक्त के नाम दी गई तीखी शिकायत//*

*एक महीने में दूसरी बार ज्ञापन: रोझौही न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ कमिश्नर कार्यालय में फिर गूंजी ग्रामीणों की आवाज//*
 
*प्रशासन की चुप्पी पर फूटा गुस्सा: पहली बार के ज्ञापन पर कार्रवाई न होने पर नागरिकों ने पुनः सौंपा मांग-पत्र//*
 
*अनदेखी से आक्रोशित ग्रामीण: रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में दोबारा कमिश्नर को सौंपा गया विस्तृत ज्ञापन//*
  
*कार्रवाई के अभाव में बढ़ा विरोध: 12 अक्टूबर के बाद अब 3 नवंबर को फिर ज्ञापन सौंपकर प्रक्रिया निरस्त करने की मांग//*
 
*बार-बार गुहार के बावजूद सुस्त प्रशासन: रोझौही न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के विरोध में आर-पार के मूड में प्रबुद्ध नागरिक//*  

रीवा (म.प्र.) | विशेष संवाददाता दिनांक 03 नवंबर 2026 

  जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत रोझौही ग्राम में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) का विरोध अब और अधिक उग्र हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर जनभावनाओं की लगातार हो रही अनदेखी के खिलाफ मंगलवार, 03 नवंबर 2026 को सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने संभागायुक्त कार्यालय पहुंचकर आयुक्त के नाम एक विस्तृत ज्ञापन डिप्टी कमिश्नर राजस्व लोचन लाल अहिरवार को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि जनता के विरोध के बावजूद जबरन प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।  

*12 अक्टूबर के ज्ञापन पर नहीं हुई थी कोई कार्रवाई*

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसके पूर्व गत 12/10/2026 को भी कमिश्नर कार्यालय में एक व्यापक ज्ञापन सौंपा गया था। परंतु, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पर कोई ठोस कार्रवाई या जनहित में संज्ञान न लेने के कारण, नागरिकों को आज 03 नवंबर 2026 को पुनः कमिश्नर के समक्ष गुहार लगानी पड़ी है।  

*ग्राम सभाओं ने सर्वसम्मति से नकारा है न्यूक्लियर प्रोजेक्ट*

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायत सरई कला (जनपद पंचायत गंगेव, तहसील सिरमौर) के अंतर्गत आने वाले ग्राम रोझौही में इस प्लांट को लेकर भारी रोष है और स्थानीय स्तर पर कड़े प्रस्ताव पारित किए जा चुके हैं:
  
*03 सितंबर 2026 की विशेष ग्राम सभा:* बैठक में उपस्थित समस्त नागरिकों ने एकमत से निर्णय लिया कि न्यूक्लियर ऊर्जा संयंत्र से फैलने वाले खतरनाक रेडिएशन (विकिरण), जल-वायु-भूमि प्रदूषण, कैंसर व ल्यूकेमिया जैसी गंभीर बीमारियों और आसन्न विस्थापन के खतरे को देखते हुए किसी भी भू-तकनीकी जांच या बोर होल की अनुमति नहीं दी जाएगी।  

*06 अक्टूबर 2026 की ग्राम सभा:* औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पक्ष में लगभग 57 किता (कुल रकबा 210.8900 हेक्टेयर) भूमि आवंटन के संबंध में बुलाई गई बैठक में ग्रामीणों ने भूमि आवंटन का पुरजोर विरोध किया और अनापत्ति देने से दो टूक इंकार कर दिया।  

*फर्जी अनापत्ति पत्र क्रमांक 170/2026 जारी करने का सनसनीखेज मामला*

ज्ञापन के माध्यम से एक बड़े फर्जीवाड़े का भी पर्दाफाश किया गया है। आरोप है कि सरपंच, ग्राम पंचायत सरई कला के नाम से एक कूटचित्त और फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (पत्र क्रमांक 170/2026) तैयार कर यह दर्शाया गया कि बोर होल किए जाने की अनुमति दे दी गई है। इस संबंध में सरपंच श्रीमती कोमल संजय सिंह द्वारा पत्र क्रमांक 56/2026 (दिनांक 08/10/2026) के जरिए इस फर्जीवाड़े को पूरी तरह खारिज किया जा चुका है, जो कि एक गंभीर आपराधिक व जांच का विषय है।  

*50 किलोमीटर के दायरे पर मंडरा रहा रेडिएशन का खतरा*

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इस तकनीकी और प्रशासनिक विरोध के अतिरिक्त, प्लांट के लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सैकड़ों ग्राम पंचायतों के नागरिक इसके दुष्परिणामों और विकिरण की चपेट में आएंगे। यह केवल एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे संभाग के जीवन-मरण का गंभीर प्रश्न है।  

*कमिश्नर को ज्ञापन देने में यह रहे मौजूद:* दिनांक 03 नवंबर को ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख शिष्टमंडल में सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता सुरेंद्र पांडेय, समाजसेवी अनिल सिंह उपकारी सहित अन्य स्थानीय नागरिक प्रमुख रूप से शामिल रहे। नागरिकों ने मांग की है कि जनहित, पर्यावरण सुरक्षा और ग्राम सभा के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करते हुए रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट हेतु भूमि आवंटन व बोर लागिंग की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से निरस्त की जाए।  
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, November 1, 2026

Breaking: एमपी हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलों पर मांगा जवाब, कोर्ट पर बढ़ रहे बोझ पर जताई चिंता//

*Breaking: एमपी हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलों पर मांगा जवाब, कोर्ट पर बढ़ रहे बोझ पर जताई चिंता//*
*मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलों पर मांगा जवाब //*

*आरटीआई अपीलों के भारी बैकलॉग पर हाईकोर्ट सख्त, सूचना आयोग से मांगा स्पष्टीकरण//*
 
*मध्य प्रदेश में सूचना आयोग की पेंडिंग अपीलें बनीं सिरदर्द, हाईकोर्ट ने एडवोकेट जनरल से मांगी जानकारी//*

*हाईकोर्ट की सख्ती: सूचना आयोग बताए क्यों पेंडिंग हैं अपीलें? //*

*पेंडिंग अपीलों के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट सख्त, मांगा जवाब //*

*आरटीआई अपीलों के निपटारे में देरी पर हाईकोर्ट नाराज, एजी से मांगी रिपोर्ट//*

*सूचना आयोग की लापरवाही से हाईकोर्ट पर बढ़ रहा मुकदमों का बोझ, कोर्ट ने जताई चिंता//*

*"पेंडिंग अपीलें और क्यों नहीं हो रहा निपटारा?": हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को किया तलब//*


जबलपुर मप्र।
दिनांक 02 नवंबर 2026 

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court of Madhya Pradesh) ने राज्य सूचना आयोग (Madhya Pradesh State Information Commission) में लंबित अपीलों के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण और सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए respondent (प्रतिवादी) सूचना आयोग से जवाब तलब किया है कि आयोग के पास वर्तमान में कुल कितनी अपीलें पेंडिंग हैं और उनका समय पर निपटारा क्यों नहीं किया जा रहा है।  

*हाईकोर्ट में बढ़ रहा मुकदमों का बोझ*

मामले की सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में आरटीआई (RTI) से जुड़ी अपीलें भारी संख्या में लंबित पड़ी हैं। इन अपीलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा न होने के कारण मजबूरन याचिकाकर्ताओं को न्याय के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर का रुख करना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप हाईकोर्ट पर मुकदमों का अनावश्यक बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिसे लेकर अदालत ने अपनी चिंता और नाराजगी जाहिर की है।  

*डिप्टी एडवोकेट जनरल को दिए निर्देश*

हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता (प्रशांत त्रिपाठी) की ओर से एडवोकेट उत्तम मिश्रा पैरवी कर रहे हैं। वहीं, राज्य शासन/प्रतिवादी की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल (Deputy Advocate General) श्री स्वप्निल गांगुली उपस्थित हुए।  
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल को निर्देश दिए हैं कि वे आगामी सप्ताह में कोर्ट को इस बात से अवगत कराएं कि राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपीलें (Second Appeals) कितनी संख्या में लंबित हैं।  

*अगले सप्ताह होगी अगली सुनवाई*

30 अक्टूबर 2026 को दिए गए इस आदेश में अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि याचिका की एक प्रति सभी एनेक्चर्स (संलग्नकों) के साथ आज ही डिप्टी एडवोकेट जनरल को उपलब्ध कराई जाए। इस मामले की अगली सुनवाई अब अगले सप्ताह निर्धारित की गई है, जिसमें सूचना आयोग की ओर से पेंडिंग अपीलों का पूरा ब्योरा पेश किए जाने की उम्मीद है।  

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking: भूमि विवाद के साये में रीवा का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: स्वतः निरस्तीकरण की ओर एनओसी?//

*Breaking: रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट की राह मुश्किल: अनापत्ति प्रमाण पत्र पर उठे सवाल, वन अधिकार पट्टों ने खड़े किए गंभीर मुद्दे//*

*रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर पावर प्लांट की राह मुश्किल: अनापत्ति प्रमाण पत्र पर उठे सवाल, वन अधिकार पट्टों ने खड़े किए गंभीर मुद्दे//*

*टाटा पावर प्रोजेक्ट पर संकट: रोझौही में एक तरफ प्रशासन की एनओसी, तो दूसरी तरफ आदिवासियों के वन अधिकार पट्टों ने उलझाया मामला//*

*एनओसी की शर्त और ज़मीनी हकीकत: क्या रोझौही भूमि विवाद के चलते स्वतः निरस्त हो जाएगी न्यूक्लियर प्लांट की अनुमति?//*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: पट्टों और एनओसी के बीच फंसा प्रोजेक्ट//*

*रीवा: प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट साइट पर वन अधिकार पट्टों का पेंच, मचा घमासान//*

*'जब पट्टे पहले से बंटे हैं, तो प्लांट कैसे बनेगा?'- रोझौही में खड़े हुए बड़े सवाल//*

*भूमि विवाद के साये में रीवा का न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: स्वतः निरस्तीकरण की ओर एनओसी?//*

विशेष ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा (म.प्र.), 02 नवंबर 2026

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही गांव में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट (NPP) को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और ज़मीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास सामने आया है। इस मामले में एक ओर जहां कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय रीवा द्वारा बोर लॉगिंग स्टडी के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी गई है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय आदिवासियों द्वारा पूर्व में बांटे गए वन अधिकार पट्टों को लेकर खड़े किए गए सवालों ने इस परियोजना पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।  

*क्या है कार्यालयीन पत्र और शर्तें?*

कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय रीवा म.प्र. द्वारा पत्र क्रमांक I/523664/2026/ नग्रानि/ तक/ 2026 (दिनांक 21-09-2026) जिला दंडाधिकारी, रीवा को प्रेषित किया गया है। यह पत्र कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रीवा के पत्र क्रमांक 139/आमर्स.लाय./2026 (दिनांक 18.09.2026) के संदर्भ में जारी किया गया है।  इस पत्र के अनुसार, रोझौही गांव (साइट कोऑर्डिनेट 24^\circ52'32.15''\text{N}, 81^\circ29'55.01''\text{E}) में टीपीसीएल (TPCL) के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट हेतु बोर लॉगिंग स्टडी (BSR प्रोजेक्ट के तहत) के लिए विभाग का अभिमत चाहा गया था। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रश्नाधीन भूमि म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 13 की उपधारा (1) के अधीन गठित किसी भी निवेश क्षेत्र के अंतर्गत स्थित नहीं है, इसलिए भू-वैज्ञानिक और जियो-टेक्निकल डेटा संग्रह हेतु स्टडी पर कोई आपत्ति नहीं है।  

हालांकि, इस अनापत्ति पत्र में कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी जोड़ी गई हैं:  
बोर लॉगिंग स्टडी का कार्य निर्धारित मापदंडों और संबंधित विभाग के मार्गदर्शन में करना अनिवार्य होगा।  स्थानीय संस्थाओं और संबंधित विभागों से अग्नि सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा व अन्य मापदंडों की अनापत्ति प्राप्त करनी होगी।  परियोजना से प्रभावित व्यक्तियों की सहमति आवश्यक होगी।  
सबसे अहम शर्त (शर्त क्रमांक 6): पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि "भूमि के संबंध में विवाद/अन्य किसी भी प्रकार की विसंगति होने की स्थिति में यह अभिमत/अनापत्ति स्वयंमेव निरस्त मानी जावेगी।" 
 
*रोझौही के आदिवासियों के सवाल और भूमि विवाद*

एक तरफ जहां प्रशासन ने स्टडी के लिए एनओसी दी है, वहीं रोझौही गांव के आदिवासियों ने वन अधिकार पट्टों को लेकर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासियों का कहना है कि वन विभाग और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से ठीक उसी न्यूक्लियर पावर प्लांट की प्रस्तावित साइट और उसके आसपास वर्ष 2020-21 में उन्हें वन अधिकार पट्टे वितरित किए गए थे। इस बात को लेकर आदिवासियों द्वारा पूर्व में भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं, जो विभिन्न समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित भी हो चुकी हैं।

*क्या स्वतः निरस्त हो जाती है एनओसी?*

अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि जब उसी न्यूक्लियर पावर प्लांट की प्रस्तावित साइट और उसके आसपास वर्ष 2020-21 में आदिवासियों को कानूनी रूप से वन अधिकार पट्टे बांटे जा चुके हैं, तो फिर वहां न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण कैसे संभव है? सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, अन्य जानकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार इन वैध वन अधिकार पट्टों और आपत्तियों के चलते रोझौही में भूमि का स्पष्ट विवाद सतह पर आ चुका है। चूंकि कार्यालय संयुक्त संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश के पत्र की शर्त क्रमांक 6 में यह प्रावधान है कि भूमि विवाद या विसंगति होने पर अनापत्ति स्वतः निरस्त मानी जाएगी, इसलिए इस जमीनी विवाद के सामने आने के बाद यह अनापत्ति प्रमाण पत्र स्वतः ही निष्प्रभावी और निरस्त माना जा रहा है।  

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शासन इस भूमि विवाद एवं आदिवासियों के अधिकारों के बीच न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट को लेकर क्या रुख अपनाता है। जबकि रोझौही और सरई सहित आसपास के सैकड़ो ग्रामों के लोग इस प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट को निरस्त किए जाने की निरंतर माग पर अड़े हुए हैं। गौरतलब है कि इसको लेकर जल सत्याग्रह एवं आमरण अनशन भी हो चुके हैं जिसमें एक आदिवासी महिला विमला कोल की मौत भी सामने आई है। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, निरीक्षण में आदिवासियों के आवासों की अनदेखी का आरोप//

*Breaking:// रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल, निरीक्षण में आदिवासियों के आवासों की अनदेखी का आरोप//*
*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, आदिवासियों के आवासों की अनदेखी का आरोप//*

*रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट विवाद: पुलिस रिपोर्ट को बताया गया भ्रामक, स्थानीय निवासियों ने खड़े किए बड़े सवाल//*

*टाटा पावर के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर घमासान: बिना जमीनी जांच के रिपोर्ट तैयार करने का आरोप, विस्थापन का मंडराया संकट//*

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: प्रशासन की जांच रिपोर्ट जमीनी हकीकत से परे, आदिवासियों के पक्के आवासों को किया गया नजरअंदाज//*

*रीवा ब्रेकिंग: रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के निरीक्षण में बड़ा खुलासा, पुलिस रिपोर्ट पर भड़के ग्रामीण और आदिवासी//*

दिनांक 1 नवंबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही गांव में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR) न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) के लिए जिओ-टेक (geotech) बोर लॉगिंग स्टडी कराने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला रीवा द्वारा जिला दंडाधिकारी को 18 अगस्त 2026 को पत्र (क्रमांक/पुअ/रीवा/एससी-2/डीएम-M-113319/26) के माध्यम से एक जांच प्रतिवेदन सौंपा गया है।  

*पुलिस की रिपोर्ट में क्या है?*

पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में थाना प्रभारी गढ़ और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस मनगवां के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित स्थल (अक्षांश 24^\circ52'32''\text{N}, देशान्तर 81^\circ29'55''\text{E}) का मौके पर ग्रामीणों के साथ निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास रिकॉर्ड अनुसार कोई अन्य आवासीय परिसर या मकान नहीं है तथा पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा पूरी तरह खाली है, जबकि उत्तर दिशा में लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर आवासीय मकान हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि विवादित नहीं है और किसी प्रकार का स्थायी निर्माण या कब्जा नहीं पाया गया है।  

*स्थानीय निवासियों और जमीनी हकीकत का बड़ा खुलासा*

हालांकि, पुलिस अधीक्षक की इस रिपोर्ट को स्थानीय स्तर पर भ्रामक और जमीनी सच्चाई से परे बताया जा रहा है। स्थानीय निवासियों और तथ्यों के अनुसार:

*आवासों की अनदेखी:* रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए चिह्नित स्थल और उसके आसपास आदिवासियों के प्रधानमंत्री आवास (PM Awas) तथा उनके अपने निजी रिहाइशी मकान बने हुए हैं जिनमें कई आदिवासी रहते हैं। जांच और निरीक्षण के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा इन मकानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

*ग्रामीणों से संपर्क नहीं:* निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय निवासियों और आदिवासियों से कोई संपर्क या बातचीत नहीं की गई।

*मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप:* बिना जमीनी जांच और प्रभावित लोगों से संवाद किए बिना ही टेबल पर बैठकर मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को भेज दी गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कहा है की टाटा कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक ने भी गलत जांच रिपोर्ट जारी की है जिसके आधार पर टाटा कंपनी को 8 बोरहोल करने के लिए अनुमति प्रदान की गई है। लोगों में रिपोर्ट को लेकर भारी असंतोष है, क्योंकि यदि आदिवासियों के आवासों और भूमि की अनदेखी कर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Friday, October 30, 2026

Breaking: कैंसर और जन्मजात विकलांगता के डर से सहमे पताई के ग्रामीण, रोझौही पावर प्लांट को हटाने की मांग//

*Breaking: रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ पताई में भी हल्ला बोल, 'विनाश नहीं विकास चाहिए' के नारों से गूंजी पताई पंचायत//*
*रोझौही परमाणु संयंत्र विवाद: पताई के लोगों ने कहा - 'घरों से 2-3 किमी दूर प्लांट नहीं बनने देंगे' - ग्रामीण//*

*पताई पंचायत में गूंजे विरोध के स्वर, रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन//*

*चेर्नोबिल और फुकुशिमा का खौफ: रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट के प्रस्तावित निर्माण पर पताई के ग्रामीणों की गहरी चिंता//*

*कैंसर और जन्मजात विकलांगता के डर से सहमे पताई के ग्रामीण, रोझौही पावर प्लांट को हटाने की मांग//*

*आबादी के बीच परमाणु संयंत्र खतरनाक: रोझौही प्लांट के खिलाफ पताई के भी ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन और चेतावनी//*

*INES स्तर की पूर्व घटनाओं का हवाला देकर रोझौही न्यूक्लियर प्लांट का विरोध तेज//*

*पताई पंचायत में भी अब न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का हल्ला बोल//*

*रोझौही में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र के खिलाफ सड़कों पर उतरे पताई के भी लोग//*

संवाददाता / विशेष रिपोर्ट
दिनांक 31 अक्टूबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश। 

   रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत स्थानीय क्षेत्र में प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में अब ग्राम पंचायत पताई के ग्रामीणों का भी आक्रोश अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। पताई पंचायत के गोशाला बस्ती के पास सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए स्थानीय ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" और "परमाणु हटाओ जीवन बचाओ" के गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।

ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अपने घरों से महज 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर रोझौही में किसी भी कीमत पर यह परमाणु संयंत्र नहीं बनने देंगे।

*स्वास्थ्य और जीवन पर मंडराते खतरे को लेकर गहरी चिंता*

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के इतिहास और इसके दुष्प्रभावों को देखते हुए वे अत्यधिक भयभीत हैं। उनका मानना है कि इस संयंत्र से निकलने वाले विकिरण और कचरे से गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।

ग्रामीणों ने आशंका जताई कि इससे क्षेत्र में
ल्यूकेमिया और ब्लड कैंसर, फेफड़ों, आंतों और थायराइड का कैंसर, नवजातों में जन्मजात विकलांगता जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।

*वैश्विक और राष्ट्रीय परमाणु आपदाओं का दिया हवाला*

प्रदर्शनकारियों ने दुनिया भर में हुई भयानक परमाणु दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार और प्रशासन को आगाह किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल्स आइलैंड, एसएल-1 और टोकाईमुरा जैसी वीभत्स त्रासदियों का उदाहरण दिया। इसके साथ ही देश के भीतर तारापुर, काकरापार, नरौरा, कलपक्कम, कुडनकुलम और रावतभाटा आदि संयंत्रों में हुई आईएनईएस (INES) लेवल 01 से 03 तक की घटनाओं का हवाला देते हुए आबादी वाले क्षेत्रों के पास ऐसी परियोजनाओं के खतरे को रेखांकित किया।

*सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी और कड़ी मांग*

इस विरोध प्रदर्शन में गांव के तमाम गणमान्य लोग और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं। प्रमुख रूप से सुनील मिश्रा, संजय कुमार, सुनीता साकेत, सविता यादव, राम स्वराज प्रजापति, कलावती, गुड़िया, लक्ष्मण यादव, और बृजेंद्र मिश्रा आदि ने नेतृत्व करते हुए सरकार से मांग की है कि परमाणु ऊर्जा के खतरनाक इतिहास को देखते हुए इसके उपयोग और स्थापना पर पूरी पाबंदी लगाई जाए। साथ ही रोझौही के इस प्रस्तावित प्लांट को तत्काल प्रभाव से इस घनी आबादी बाहुल्य क्षेत्र से अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए।

*इसके पहले भी कई नजदीकी ग्रामों में हो चुके प्रदर्शन*

गौरतलब है कि इसके पूर्व भी रोझौही गांव के नजदीक और कई आसपास के ग्रामों जैसे अतरैला, बांस, पनगड़ी आदि में भी लोग प्रदर्शन कर चुके हैं और इसके संभावित नुकसान को लेकर रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित किए जाने की माग कर चुके हैं। स्पष्ट है कि अब यह आंदोलन सिर्फ रोझौही या सरई कला तक ही सीमित नहीं है बल्कि आसपास के सैकड़ो ग्राम पंचायत में भी फैल चुका है।

ग्रामीणों के इस उग्र प्रदर्शन ने प्रशासन और नीति निर्माताओं के समक्ष बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए इस आंदोलन को और तेज करने की बात कह रहे हैं।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Thursday, October 29, 2026

Breaking: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट: रीवा के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर प्लांट — विकास की उम्मीद या तबाही का आसन्न खतरा?//

*Breaking: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट: रीवा के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर प्लांट — विकास की उम्मीद या तबाही का आसन्न खतरा?//*
*रीवा में टाटा का न्यूक्लियर प्लांट: विकास की आस या नरोरा-काकरापार जैसी आपदाओं का आसन्न खतरा?//*

*स्पेशल रिपोर्ट: रोझौही में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र से मंडराया बड़ा खतरा, देश के पुराने हादसों से सहमे ग्रामीण!//*

*क्या रीवा बनेगा अगला परमाणु त्रासदी का शिकार? रोझौही प्रोजेक्ट के विरोध और डरावने इतिहास की पूरी सच्चाई।//*

*टाटा का न्यूक्लियर प्रोजेक्ट बनाम स्थानीय सुरक्षा: इतिहास के पन्नों में दबी परमाणु दुर्घटनाएं दे रहीं गंभीर चेतावनी।//*

*रीवा के रोझौही में परमाणु ऊर्जा संयंत्र: 28,000 करोड़ के निवेश के बीच सुरक्षा मानकों पर उठते बड़े सवाल।//*

*विकास बनाम विनाश: नरोरा और कैगा के हादसों से क्या सबक लेगा रीवा का प्रस्तावित टाटा प्लांट?//*

*रोझौही न्यूक्लियर प्लांट: विकास की उम्मीद या तबाही का खतरा?//*

*रीवा में टाटा का परमाणु संयंत्र: कितना सुरक्षित, कितना खतरनाक?//*

*परमाणु हादसों का काला इतिहास और रोझौही का सुलगता सवाल!//*
विशेष ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा, मध्य प्रदेश
दिनांक: 30 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में ऊर्जा के मोर्चे पर एक नया अध्याय लिखने की तैयारी चल रही है, वहीं दूसरी ओर देश के इतिहास में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा और दुर्घटनाओं के डरावने आंकड़े स्थानीय आबादी की रातों की नींद उड़ाए हुए हैं। रीवा जिले की सिरमौर तहसील के अंतर्गत क्योंटी के पास रोझौही गांव में टाटा एनर्जी द्वारा देश के पहले निजी न्यूक्लियर पावर प्लांट (28,000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश) की स्थापना का प्रस्ताव है। हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को औद्योगिक और आर्थिक विकास का मील का पत्थर बताया जा रहा है, लेकिन यदि वैश्विक स्तर पर बात करें तो चेर्नोबिल, फुकुशिमा, थ्री माइल्स आयलैंड, एसएल-1 एवं टोकाईमुरा जैसी परमाणु संयंत्रों की भयावह दुर्घटनाएं तो हैं ही वहीं भारत के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के अब तक के सुरक्षा इतिहास और दुर्घटनाओं के दस्तावेजों ने भी बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

*भारत के परमाणु इतिहास के वे सबक, जो रोझौही के लिए चेतावनी हैं*

प्रस्तुत आधिकारिक सुरक्षा रिपोर्ट्स और एईआरबी (AERB) तथा एनपीसीआईएल (NPCIL) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न परमाणु संयंत्रों में तकनीकी विफलताएं, आग लगने की घटनाएं, भारी पानी का रिसाव और रेडिएशन एक्सपोजर आम बात रहे हैं। यदि रोझौही में टाटा का यह न्यूक्लियर प्लांट स्थापित होता है, तो क्षेत्रवासियों को निम्नलिखित ऐतिहासिक त्रासदियों से सबक लेने की आवश्यकता है: 
 
*1993 नरोरा परमाणु दुर्घटना (INES स्तर 3):* भारत के इतिहास की सबसे भयावह दुर्घटना उत्तर प्रदेश के नरोरा में हुई थी, जहां स्टीम टरबाइन के ब्लेड टूटने से भीषण आग लग गई थी और पूरा स्टेशन ब्लैकआउट हो गया था। कूलिंग पंप बंद होने से कोर पिघलने (Core Meltdown) यानी चेरनोबिल जैसी महाआपदा का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। ऐसे में रोझौही जैसे ग्रामीण और संभाग क्षेत्र में इस स्तर के संयंत्र का आना कितनी बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, यह सोचने का विषय है।  

*2016 काकरापार संयंत्र दुर्घटना (INES स्तर 2):* गुजरात के काकरापार में कूलेंट पाइप क्रैकिंग और भारी पानी के भारी रिसाव के कारण रिएक्टर का दबाव तेजी से गिर गया था। इस तकनीकी चूक के कारण संयंत्र महीनों तक बंद रहा था।  

*2009 कैगा का साबाटोज और पेयजल संदूषण:* कर्नाटक के कैगा परमाणु संयंत्र में अंदरूनी अपसधिक शरारत (Sabotage) के चलते अज्ञात व्यक्ति द्वारा भारी पानी में रेडियोधर्मी ट्रिटियम मिला दिया गया था, जिससे दर्जनों कर्मचारी और ऑपरेटर रेडियोधर्मी विषमता से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे बाद में बीमारी के चलते कई की मृत्यु भी हो गई थी।  

*रावतभाटा (राजस्थान) और कल्पक्कम (तमिलनाडु) के हादसे:* राजस्थान (RAPS) और मद्रास (MAPS) परमाणु संयंत्रों में समय-समय पर आग लगने, भारी पानी लीक होने (जैसे 1999 में 42 टन भारी पानी का रिसाव) और रखरखाव के दौरान कर्मचारियों के ट्रिटियम विकिरण की चपेट में आने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।  
*रोझौही के ग्रामीणों में खौफ और विरोध के स्वर*

इन ऐतिहासिक आपदाओं और सुरक्षा चूकों के दस्तावेजों के सामने आने के बाद रीवा के रोझौही गांव के स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी रोष और डर का माहौल है। पिछले दिनों साइट पर सर्वे और ड्रिलिंग का काम शुरू होते ही हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और काम को रोक दिया था। बाद में जल सत्याग्रह और आमरण अनशन जिसमें एक महिला आदिवासी विमला कोल की मृत्यु भी हुई थी। ग्रामीणों का तर्क है कि यदि किसी भी तकनीकी खराबी के चलते रेडियोधर्मी रिसाव या ट्रिटियम संदूषण जैसी घटना रीवा जैसी उपजाऊ और घनी आबादी वाले क्षेत्र में होती है, तो यहाँ का जनजीवन, जल स्रोत और कृषि भूमि हमेशा के लिए तबाह हो जाएगी।

*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट निरस्त करने की माग* 

   टाटा एनर्जी का यह प्रोजेक्ट भले ही क्षेत्र को ऊर्जा हब बनाने और हजारों रोजगार के दावे कर रहा हो, परंतु सुरक्षा मानकों, न्यूक्लियर वेस्ट मैनेजमेंट और ऐतिहासिक दुर्घटनाओं (जैसे नरोरा और काकरापार) के तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और कंपनी को पहले स्थानीय जनता को विश्वास में लेना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि रोझौही की जनता की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ न हो, अन्यथा यह विकास रीवा के लिए अभिशाप साबित हो सकता है। लेकिन दूसरी तरफ इस आंदोलन को शुरू से दिशा देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया कि न केवल रोझौही सरई के लोग बल्कि आसपास के सैकड़ो ग्रामों के रहवासी टाटा के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट को रोझौही से वापस लेने एवं निरस्त करने को लेकर अड़े हुए हैं और निरंतर आंदोलनरत हैं। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Wednesday, October 28, 2026

Breaking: ​'पट्टा हमारा, प्लांट आपका?' रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों का उग्र आंदोलन

*Breaking: रीवा: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट पर विवाद गहराया, वन अधिकार पट्टे की जमीन पर प्लांट आवंटन का आदिवासियों द्वारा विरोध//*

*'पट्टा हमारा, प्लांट आपका?' रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों का उग्र आंदोलन//*

*रीवा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट विवाद: 2020-21 के वन अधिकार पट्टों के बीच टाटा प्लांट के प्रस्ताव पर मचा बवाल*//

*सुरक्षा मानकों के घेरे में रोझौही न्यूक्लियर साइट: 5 किमी के दायरे में 30 हजार आबादी, ग्रामीणों ने मांगी परियोजना वापसी*//

*वन अधिकार बनाम न्यूक्लियर पावर प्लांट: रीवा में गरमाया भूमि विवाद, प्रशासन और टाटा की एनओसी पर सवाल*//

विशेष ब्यूरो रिपोर्ट
रीवा, मध्य प्रदेश | 28 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित साइट को लेकर गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। वन अधिकार पट्टे की भूमि पर ही परमाणु संयंत्र के लिए जमीन प्रस्तावित किए जाने और सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन के खिलाफ स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों का उग्र विरोध प्रदर्शन आज (28 अक्टूबर 2026) भी लगातार जारी है।

*क्या है पूरा मामला?*

ग्रामीणों और आदिवासियों का आरोप है कि शासन के वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पंचायत विभाग के आपसी समन्वय से वर्ष 2020-21 में ही उन्हें उसी स्थान पर वन अधिकार पट्टे (Forest Rights Patta) वितरित किए गए थे, जहां अब टाटा कंपनी द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब सरकार की कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें पट्टे दिए जा चुके हैं, तो फिर वन और राजस्व विभागों द्वारा टाटा कंपनी को किस आधार पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया।

*सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आरोप*

प्रस्तावित न्यूक्लियर साइट के चयन को लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी मापदंडों पर भी बड़े सवाल खड़े किए जा रहे हैं। तय मानक अनुसार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के नियमों के मुताबिक, प्रस्तावित साइट के 5 किलोमीटर के दायरे में 20,000 से कम आबादी होनी चाहिए, और 10 किलोमीटर के दायरे में 10,000 से अधिक आबादी वाला कोई बड़ा जनसंख्या केंद्र (Population Center) नहीं होना चाहिए। जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत है और रोझौही न्यूक्लियर प्लांट की प्रस्तावित साइट के 5 किलोमीटर के दायरे में ही लगभग 30,000 की आबादी निवास करती है। इसके अलावा, 10 किलोमीटर के दायरे में लालगांव पंचायत का कस्बाई क्षेत्र है जिसकी अकेले की ही आबादी करीब 15,000 है। साथ ही, जिस ग्राम पंचायत 'सरई कला' में यह पावर प्लांट लगाया जाना है, अकेले वहां की आबादी भी लगभग 5,000 के आसपास है।
जानकारों और आदिवासियों का कहना है कि यह साइट चयन इन सभी सुरक्षा और जनसांख्यिकीय मापदंडों पर खरा नहीं उतरता है और घनी आबादी के बीच इस तरह का प्रोजेक्ट लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

*आदिवासियों की मुख्य मांगें*

   रोझौही और सरई कला के ग्रामीण इस पूरी परियोजना के खिलाफ लामबंद हैं और उन्होंने मांग की है कि इस न्यूक्लियर परियोजना को तत्काल प्रभाव से इस क्षेत्र से वापस लिया जाए। उनके वैध वन अधिकार पट्टों को यथावत रखा जाए और उनकी भूमि सुरक्षित की जाए।

*सामाजिक कार्यकर्ता ने भी उठाए सवाल*

भू-अधिकार और वन अधिकार के मुद्दों पर मुखर रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने भी इस चयन प्रक्रिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार कई तय मापदंडों पर खरी नहीं उतरती है और यह न्यूक्लियर पावर प्लांट जबरन गांव के आदिवासियों और आम नागरिकों पर थोपा जा रहा है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो उनका यह आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*