Monday, October 19, 2026

Breaking:// सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र पर घमासान: विरसा मुण्डा विचार मंच ने भी राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन//

*Breaking:// सिरमौर (रीवा) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध: राष्ट्रपति के नाम अनुविभागीय अधिकारी को सौंपा ज्ञापन//*

*सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र पर घमासान: विरसा मुण्डा विचार मंच ने भी राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन//*
  
*रीवा: रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट का विरोध, ग्रामीणों ने जताया कैंसर और पर्यावरण क्षति का खतरा//*
  
*क्योटी जल प्रपात और कृषि बचाने की गुहार: सिरमौर में परमाणु संयंत्र निरस्त करने की मांग//
 
*परमाणु ऊर्जा की जगह सौर और पवन ऊर्जा अपनाने की मांग, SDM सिरमौर को ज्ञापन सौंपा //*

*भूमि पट्टा विवाद सुलझाए बिना प्रोजेक्ट न लाने की चेतावनी, सिरमौर में लामबंद हुए नागरिक//*  

स्थान: सिरमौर, रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 19 अक्टूबर 2026  

सिरमौर (रीवा): रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र स्थित रोझौही-क्योटी में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के विरोध में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में विरसा मुण्डा विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विष्णुकांत कुशवाहा तथा विंध्य क्षेत्र के समस्त नागरिकों एवं संगठनों द्वारा राष्ट्रपति महोदया के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिरमौर को एक ज्ञापन सौंपा गया है।  
ज्ञापन में पर्यावरण, जन सुरक्षा और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण का हवाला देते हुए इस परमाणु ऊर्जा संयंत्र को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही इसके स्थान पर सौर और पवन ऊर्जा जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने की अपील की गई है।  
*ज्ञापन में उठाई गई मुख्य आपत्तियां एवं मुद्दे:*

*घनी आबादी और सुरक्षा जोखिम:* चेरनोबिल (1986) और फुकुशिमा (2011) जैसी वैश्विक परमाणु आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र की स्थापना अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है।  

*जल संकट व कृषि पर प्रभाव:* रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। संयंत्र के रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की आवश्यकता होगी, जिससे स्थानीय कृषि, पेयजल और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह प्रभावित होगा।  

*क्योटी जल प्रपात और पर्यावरण क्षति:* प्रसिद्ध पर्यटन स्थल 'क्योटी जल प्रपात' और आसपास की जैव विविधता को थर्मल डिस्चार्ज एवं विकिरण से अपूरणीय क्षति पहुँचने की आशंका जताई गई है।  

*स्वास्थ्य संबंधी खतरे:* ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि संयंत्र के आसपास रहने वाली जनता को रेडिएशन के कारण लंग्स कैंसर, ब्लड कैंसर और लीवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और आनुवंशिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।  

*जनता का विरोध:* दावों के अनुसार, आसपास के 5 से 35 किलोमीटर क्षेत्र की जनता इस न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध कर रही है और इसे किसी आबादी रहित स्थान पर ले जाने की मांग कर रही है।  

*भूमि पट्टा विवाद:* ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम रोझौही में वर्ष 2002-2003 में 200 से 250 लोगों को दिए गए पट्टे बाद में निरस्त कर दिए गए थे। वर्तमान में वहाँ सैकड़ों भूमिहीन लोग काबिज हैं। मांग की गई है कि जब तक पट्टे के इस मुद्दे का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक उक्त भूमि पर कोई भी प्रोजेक्ट न लाया जाए।  

विरोध जताने वालों का कहना है कि प्रशासन एक प्राइवेट कंपनी के पक्ष में पैरवी कर रहा है, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग एकजुट हैं। जनहित को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया गया है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, October 18, 2026

Breaking:// रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अतरैला गांव में जोरदार विरोध प्रदर्शन//

*Breaking:// रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अतरैला गांव में जोरदार विरोध प्रदर्शन//*

दिनांक 19 अक्टूबर 2026 रीवा मप्र।

    रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी अब आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्राम पंचायत पताई के अंतर्गत आने वाले ग्राम अतरैला में युवाओं और नागरिकों ने एकजुट होकर इस परियोजना के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" एवं "परमाणु हटाओ, जीवन बचाओ" के जोरदार नारे लगाए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे ऐसा विकास नहीं चाहते जिसमें विनाश छिपा हो और जिससे उनकी आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराए।
*रेडिएशन और बीमारियों का है बड़ा खतरा*

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के ग्रामीण क्षेत्र में दौरे और जनसंपर्क के दौरान ग्रामीणों ने खुलकर अपनी चिंताएं साझा कीं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट से यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे रेडियोएक्टिव पदार्थों से निकलने वाला विकिरण (रेडिएशन) अत्यंत खतरनाक होता है। इससे क्षेत्र में कैंसर, जन्मजात विकलांगता और अन्य असाध्य बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा है, जिससे सैकड़ों गांवों की जीवन और आजीविका प्रभावित होगी।
*ग्रामीणों ने खुलकर रखी अपनी बात:*

अतरैला के महेश कोल बताया कि न्यूक्लियर पावर प्लांट उनके और आसपास के सैकड़ों गांवों के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा, जिससे कैंसर जैसी भयानक बीमारियां फैलेंगी। वहीं रमेश साकेत ने बताया कि इस परियोजना को एक विभीषिका करार देते हुए कहा कि यह लोगों की जिंदगी समाप्त कर देगी और सरकार से इसे न लगाने की पुरजोर अपील की। अंतरैला निवासी रावेंद्र पाल ने चेतावनी दी कि यह पावर प्लांट स्थानीय निवासियों के लिए पूरी तरह से असुरक्षित और विनाशकारी है। राजमणि प्रजापति और अभिमान कोल ने कहा कि वे एक प्रतिशत भी यह प्लांट नहीं चाहते, वहीं अभिमान कोल ने रोझौही में कई आदिवासियों के पट्टे निरस्त किए जाने और जोर-जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया। शिवकुमार यादव व तुलसी राम साकेत ने स्पष्ट किया कि पताई और अतरैला के लोग किसी भी कीमत पर इस प्लांट को अपने क्षेत्र के नजदीक नहीं लगने देंगे, क्योंकि इससे आने वाली पीढ़ियों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां फैलेंगी। उन्होंने कहा कि सरई और रोझौही के लोगों को तो विस्थापित कर दिया जाएगा लेकिन उनका क्या होगा जो प्लांट से 3 किमी दूर हैं। आखिर रेडिएशन और असाध्य बीमारियों का खामियाजा तो उन्हें ही भुगतना पड़ेगा। बृजेंद्र मिश्रा ने मुखर होकर चर्चा करते हुए कहा कि न्यूक्लियर पावर प्लांट का रेडिएशन केवल मौजूदा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए घातक है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस खतरनाक परियोजना को तुरंत रद्द किया जाए, अन्यथा सभी आसपास के ग्राम क्षेत्र के लोग इसके विरोध में और भी अधिक कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Saturday, October 17, 2026

Breaking:// रोझौही में टाटा पावर के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध: जल सत्याग्रह में उतरे ग्रामीण और 'आप' नेता प्रमोद शर्मा//

*Breaking:// रोझौही में टाटा पावर के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध: जल सत्याग्रह में उतरे ग्रामीण और 'आप' नेता प्रमोद शर्मा//*

रीवा: दिनांक 17 अक्टूबर 2026 

रोझौही में टाटा पावर के प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को रोझौही सरई ग्राम और आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने एकजुट होकर पानी में उतरकर 'जल सत्याग्रह' शुरू कर दिया है। ग्रामीण इस प्रोजेक्ट से होने वाले विस्थापन और पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर अपना विरोध जता रहे हैं।

इस जल सत्याग्रह में आम आदमी पार्टी (आप), रीवा के नेता प्रमोद शर्मा भी ग्रामीणों के साथ शामिल हुए। सत्याग्रह के दौरान प्रमोद शर्मा और ग्रामीणों ने मांग की कि जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा को नजरअंदाज कर जनता पर कोई भी प्रोजेक्ट जबरन न थोपा जाए।

जल सत्याग्रह में भाग ले रहे ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं सुनी जातीं और उनकी भूमि, पर्यावरण, स्वास्थ और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती तब तक वे अपना शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखेंगे। पानी में खड़े होकर नारेबाजी करते ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन और टाटा पावर के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया।

Breaking:// रीवा में रोझौही परमाणु संयंत्र का विरोध: ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जताई चिंता, कलेक्टर के दौरे के बाद गरमाया मामला//

*Breaking:// रीवा में रोझौही परमाणु संयंत्र का विरोध: ग्रामीणों ने स्वास्थ्य और पर्यावरण पर जताई चिंता, कलेक्टर के दौरे के बाद गरमाया मामला//*

​रीवा (मध्य प्रदेश): दिनांक 17 October 2026


रीवा जिले के रोझौही क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट का विरोध 16 अक्टूबर को भी देखने को मिला। इसी क्रम में गत 15 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर ने प्रस्तावित स्थल का दौरा किया था, जिसके बाद ग्रामीणों का आक्रोश और मुखर हो गया है। स्थानीय लोग किसी भी कीमत पर अपने क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगवाने के पक्ष में नहीं हैं। इस बात को लेकर ग्रामीणों द्वारा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।

​स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर गहरी चिंता

रोझौही सरई और आसपास के सैंकड़ों गांवों के ग्रामीण अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे क्षेत्र में अन्य रोजगारपरक उद्योगों के समर्थन में हैं, लेकिन न्यूक्लियर प्लांट जैसे घातक प्रोजेक्ट को वे अपने आशियाने और पर्यावरण के करीब बर्दाश्त नहीं करेंगे।


*​इन प्रमुख चेहरों ने भी किया विरोध*

स्थल निरीक्षण के दौरान और इसके बाद आयोजित बैठकों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की। विरोध प्रदर्शन और चर्चा में शामिल प्रमुख लोगों में युवा अखिल पांडेय, रामरती कोल, सावित्री, कोमल कोल, सुषमा कोल, समाजसेवी आनंद द्विवेदी और सरपंच प्रतिनिधि संजय सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने "विनाश नहीं विकास चाहिए, न्यूक्लियर प्लांट नहीं चाहिए" जैसे कई नारे लगाए और अपना विरोध प्रदर्शन दिखाया।


​*मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने की ग्रामीणों से मुलाकात*

मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी भी दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को करीब 4 बजे शाम मौके पर पहुंचे और गाँववालों से संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से सुनते हुए उनकी भावनाओं के अनुरूप शासन और प्रशासन से कार्य करने की अपील की। साथ ही, जनभावनाओं का सम्मान करते हुए रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रोजेक्ट को तत्काल निरस्त किए जाने की मांग उठाई है। गौरतलब है कि इस पूरे आंदोलन में शिवानंद द्विवेदी इस मुद्दे पर काफी प्रमुखता से मुखर रहे हैं और कई बार ज्ञापन देकर आन्दोलन में भी शामिल रहे हैं। उनका साफ कहना है कि यह लड़ाई रोझौही सरई के लोगों से ज्यादा इन ग्रामों से दूर निवासरत लोगों की भी है जो इस परियोजना के लगने के बाद बुरी तरह से प्रभावित होंगे और कैंसर, ल्यूकेमिया, थायराइड कैंसर और अन्य जन्मजात बीमारियों के शिकार बनेंगे। इसलिए उनकी यह लड़ाई सतत जारी रहेगी।

​— स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट, रीवा (मध्य प्रदेश)

Friday, October 16, 2026

Breaking:// सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ समाजसेवी और अधिवक्ताओं का विरोध: नागरिकों ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, परियोजना रद्द करने की मांग//

*Breaking:// सिरमौर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के खिलाफ समाजसेवी और अधिवक्ताओं का विरोध: नागरिकों ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, परियोजना रद्द करने की मांग//*

दिनांक 16 अक्टूबर 2026 रीवा (मध्य प्रदेश):

रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र (रौझोही-क्योटी) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र (तथा टाटा पावर से जुड़े प्रोजेक्ट) का कई अन्य स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। पर्यावरण, जन-सुरक्षा और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण को लेकर नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने संभागायुक्त रीवा के माध्यम से भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन पत्र प्रेषित किया है। 
 
*मुख्य आपत्तियां एवं चिंताएं:*
कमिश्नर को सौंपे ज्ञापन में परमाणु संयंत्र के संभावित खतरों और दुष्परिणामों को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए गए हैं:  
*सघन रहवासी क्षेत्र एवं सुरक्षा का जोखिम:* प्रस्तावित स्थल के निकट घनी आबादी वाली बस्ती है। चेरनोबिल (1986), फुकुशिमा (2011) और थ्री माइल आइलैंड जैसी वैश्विक आपदाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में परमाणु संयंत्र की स्थापना जनजीवन के लिए अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण है।  

*जल संकट व कृषि पर असर:* रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। संयंत्र के रिएक्टर्स को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की खपत से स्थानीय कृषि, पेयजल आपूर्ति और पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।  

*पर्यटन व पर्यावरण क्षति:* प्रसिद्ध क्योटी जलप्रपात और पर्यटन क्षेत्र इससे प्रभावित होंगे। संयंत्र से निकलने वाले 'थर्मल डिस्चार्ज' (गर्म पानी) और विकिरण से जैव-विविधता व आजीविका को भारी नुकसान पहुंचेगा।  

*अंतरराष्ट्रीय अनुभवों का हवाला:* ज्ञापन में जर्मनी, इटली, ताइवान, स्पेन और बेल्जियम जैसे देशों का उदाहरण देते हुए न्यूक्लियर फेज-आउट नीति अपनाने और सौर/पवन ऊर्जा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।  
*स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव:* विश्व के 175 न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मानक रेडिएशन और सामान्य परिस्थितियों में भी 30 किमी के दायरे में रहने वाले लोगों में कैंसर (5%-10%), ल्यूकेमिया (9%) और थायराइड कैंसर (17%) के मामलों में वृद्धि पाई गई है।  

*प्रमुख मांगें:*

*परियोजना का निरस्तीकरण या स्थल परिवर्तन:*  सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस परियोजना को रीवा/मऊगंज के रहवासी क्षेत्र से तत्काल निरस्त या स्थानांतरित कर सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।  

*पारदर्शी जनसुनवाई:* प्रभावित गांवों के नागरिकों के बीच वैधानिक नियमों के तहत जनसुनवाई आयोजित कर निष्पक्ष जनमत संग्रह कराया जाए।  

*पारदर्शी प्रभाव आकलन (EIA):* निष्पक्ष सामाजिक एवं पर्यावरणीय संस्थाओं (जैसे सुश्री मेधा पाटकर व अन्य विशेषज्ञों) को शामिल कर पारदर्शी पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।  

कमिश्नर को यह ज्ञापन सौंपते समय अनिल सिंह उपकारी (अध्यक्ष - समाधान जनकल्याण संस्थान, जिला रीवा) तथा विंध्य क्षेत्र के समस्त नागरिकों एवं संगठनों के साथ अधिवक्ता सुरेंद्र पांडेय, अधिवक्ता दिनेश कुमार रजक एवं पत्रकार अतीत गौतम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Thursday, October 15, 2026

Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: कलेक्टर की समझाइश बेअसर, ग्रामीणों का स्पष्ट ऐलान—किसी भी हालत में यह जहरीला न्यूक्लियर प्लांट नहीं लगने देंगे//

*Breaking: रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट: कलेक्टर की समझाइश बेअसर, ग्रामीणों का स्पष्ट ऐलान—किसी भी हालत में यह जहरीला न्यूक्लियर प्लांट नहीं लगने देंगे//*

*"आप फायदे गिनाने आए हैं या नुकसान?"—रोझौही में कलेक्टर सूर्यवंशी के सामने भड़के ग्रामीण//*

*'स्वास्थ्य और जनमत की अवहेलना मंजूर नहीं'—रीवा न्यूक्लियर पावर प्लांट साइट पर प्रशासन को ग्रामीणों का स्पष्ट जवाब//*

*रेडिएशन और विस्थापन का खौफ: रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट के खिलाफ आर-पार के मूड में सैकड़ों ग्रामीण//*

स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)
दिनांक: 16 अक्टूबर 2026

रीवा जिले के प्रस्तावित रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने रोझौही न्यूक्लियर पावर प्लांट साइट का अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के दौरा किया और स्थानीय निवासियों से सीधा संवाद स्थापित करने का प्रयास किया।

दौरे के दौरान कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने ग्रामीणों को न्यूक्लियर पावर प्लांट से होने वाले विकास और इसके विभिन्न फायदों के बारे में समझाने की कोशिश की। हालांकि, उपस्थित जनता ने उनकी बातों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ग्रामीणों ने कलेक्टर से सीधे सवाल करते हुए कहा कि "आप यहां केवल इसके फायदे गिनाने आए हैं या इसके नुकसान और खतरों से भी हमें अवगत कराएंगे?"

*रेडिएशन, स्वास्थ्य और विस्थापन को लेकर गहरी चिंता*

स्थल पर मौजूद रोझौही और आसपास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों निवासियों ने परमाणु संयंत्र से होने वाले संभावित रेडिएशन, उससे फैलने वाली गंभीर बीमारियों तथा अपने विस्थापन को लेकर गहरी आशंकाएं जताईं। कलेक्टर सूर्यवंशी द्वारा काफी देर तक दी गई समझाइश के बावजूद ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और प्रशासन के तर्कों से असहमत दिखे।

ग्रामीणों ने कलेक्टर को दोटुक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरण और विस्थापन से जुड़ी चिंताओं का ठोस निराकरण नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी कीमत पर यहां न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण नहीं होने देंगे।

*'जनमत और स्वास्थ्य की अवहेलना नहीं की जा सकती*

बातचीत के दौरान जब कलेक्टर ने यह तर्क दिया कि यह शासन का कार्य है और प्रशासन इसे पूरा करवाएगा, तो ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब दिया कि शासन या प्रशासन जनता के स्वास्थ्य, सुरक्षा और जनमत की अवहेलना करके कोई भी निर्णय जबरन नहीं थोप सकता।

*प्रशासनिक अमला रहा मौजूद*

इस दौरे के दौरान कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के साथ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिरमौर सृष्टि जायसवाल तथा तहसीलदार बिंदु तिवारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
*बोर होल स्टडी का भी निरन्तर चल रहा विरोध*

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो चुका है कि रोझौही और आसपास के सैकड़ों गांवों की जनता न केवल न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना के खिलाफ है, बल्कि वे इसके प्रारंभिक चरण के रूप में किए जाने वाले 'बोर होल स्टडी' (Borehole Study) की अनुमति देने के पक्ष में भी बिल्कुल नहीं हैं। ग्रामीणों ने बार बार प्रशासन के दबाब के बीच आगाह भी किया है प्रशासन ऐसा न करे और उनकी जनभावनाओं और आसपास के सैकड़ो ग्रामों के रहवासियों की भावनाओं की कदर करे और इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को रोझौही से तत्काल विस्थापित किया जाय।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*

Breaking:// अंतरराष्ट्रीय शोध में बड़ा खुलासा: न्यूक्लियर पावर प्लांट के आसपास रहने वाली आबादी में कैंसर और ल्यूकेमिया का खतरा 9% से 17% अधिक//

*Breaking:// अंतरराष्ट्रीय शोध में बड़ा खुलासा: न्यूक्लियर पावर प्लांट के आसपास रहने वाली आबादी में कैंसर और ल्यूकेमिया का खतरा अधिक//*

*रोझौही एवं क्षेत्रीय लोगों ने इस अंतर्राष्ट्रीय शोध का हवाला देकर एक बार फिर किया प्रदर्शन//*

*रोझौही के लोगों ने कहा अधिकारियों और कंपनी के लोगों के झांसे में नहीं आएंगे//*

वैश्विक शोध का दावा: न्यूक्लियर प्लांट के 30 किमी दायरे में रहने वालों को कैंसर और ल्यूकेमिया का बढ़ा खतरा //*

*अंतरराष्ट्रीय अध्ययन: परमाणु संयंत्रों के पास रहने वाले बच्चों में कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा//*

*'सुरक्षित' रेडिएशन सीमा के बावजूद न्यूक्लियर प्लांट के कर्मचारियों और आसपास के नागरिकों के स्वास्थ्य पर कैंसर का मंडरा रहा खतरा//*
दिनांक 15 अक्टूबर 2026
विशेष संवाददाता रीवा मप्र।

    विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक शोध पत्रिका 'करंट एनवायरनमेंटल हेल्थ रिपोर्ट्स' में प्रकाशित एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु ऊर्जा संयंत्रों) के आसपास रहने वाले नागरिकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। इस बात को लेकर रोझौही और आसपास के दर्जनों ग्राम के लोगों ने एकबार फिर न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में प्रदर्शन किया है। 
 
17 देशों के 175 परमाणु संयंत्रों, 4.8 लाख कर्मचारियों और 75 लाख से अधिक नागरिकों के डेटा विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन के अनुसार, मानक सुरक्षा सीमाओं (Regulatory Dose Limits) के भीतर रेडिएशन एक्सपोजर के बावजूद गंभीर स्वास्थ्य जोखिम देखे गए हैं।  

*अध्ययन मात्र 30 किलोमीटर दायरे में रहने वालों के ऊपर किए गए, लेकिन खतरा इससे आगे भी:*

*बच्चों में कैंसर का सबसे अधिक जोखिम:* इस अध्ययन के मुताबिक न्यूक्लियर पावर प्लांट के 30 किमी के दायरे में रहने वाले 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुल कैंसर (All-cancer) का जोखिम सबसे अधिक पाया गया है। 
 
*थायरॉयड कैंसर और ल्यूकेमिया:* प्लांट के पास रहने वाले आम नागरिकों में दूर रहने वाली आबादी की तुलना में थायरॉयड कैंसर का खतरा 17% और ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) का खतरा 9% अधिक दर्ज किया गया।  

*कुल कैंसर दर में वृद्धि:* संयंत्र के 30 किमी के भीतर रहने वाले लोगों में कुल कैंसर का जोखिम 5% से लेकर 10% तक अधिक पाया गया। और यह सब उन सामान्य परिस्थितियों में पाया गया जबकि रेगुलेटरी ऑथोरिटी कहती हैं कि रेडिएशन अपने मानक स्टैंडर्ड के अनुसार था।

*परमाणु संयंत्र कर्मचारियों पर प्रभाव:*

मेसोथेलियोमा (Mesothelioma):* परमाणु संयंत्रों में कार्यरत कर्मचारियों में सामान्य आबादी की तुलना में मेसोथेलियोमा (फेफड़े/पेट की झिल्ली का कैंसर) का खतरा 5.53 गुना अधिक दर्ज किया गया।  

*हृदय एवं रक्त वाहिका संबंधी रोग (Circulatory Disease):* शोध में रेडिएशन की संचयी खुराक (Cumulative dose) और कर्मचारियों में रक्त परिसंचरण संबंधी बीमारियों के बीच सीधा संबंध (Dose-response relationship) पाया गया।  
*मौजूदा सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल*

अंतरराष्ट्रीय संस्था आईसीआरपी (ICRP) द्वारा तय वर्तमान मानक सीमा (आम जनता के लिए 1 mSv/वर्ष) एवं सामान्य परिस्थितियों के बावजूद बीमारियों में यह वृद्धि पाई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले रेडियोधर्मी कण हवा और वायुमंडलीय दिशा के अनुसार 20 से 30 किमी के दायरे में धीरे-धीरे जमा होते हैं, जिससे आसपास की आबादी प्रभावित होती है।  

शोधकर्ताओं ने कहा है कि परमाणु संयंत्रों के आसपास रहने वाली संवेदनशील आबादी (विशेषकर बच्चों) के स्वास्थ्य जोखिमों का नया आकलन किया जाना चाहिए और रेडिएशन निगरानी को और सख्त बनाने की आवश्यकता है। 
*सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में यह हाल है तब भीषण हादसों पर क्या होगा?*

  न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में निरंतर जन जागरूकता फैलाने वाले और उसके दुष्परिणामों को लोगों तक पहुंचने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने बताया की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के द्वारा जो रिसर्च किया गया है वह सामान्य और संयमित विकिरण वाली स्थितियों में किया गया है और इसमें सरकारे और कंपनियां कहती है कि विकिरण की मात्रा तय मापदंड के अनुसार है अथवा इससे कम है और इसमें मात्र आसपास के 30 किलोमीटर के दायरे में ही यह शोध किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि कहीं किसी हादसे की वजह से अथवा मानवीय भूल या की मैकेनिकल भूल की वजह से विकिरण बढ़ गया अथवा कोई दुर्घटना हो गई ऐसे में न केवल 30 या 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए यह घातक होगा बल्कि आसपास के पूरे विंध्य क्षेत्र और पूरे प्रदेश या देश को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्होंने माग की है की रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को तत्काल निरस्त किया जाए और यहां की जनता की भावनाओं की कदर की जाए क्योंकि जनता भी नहीं चाहती कि किसी प्रकार से रीवा एवं मऊगंज या विंध्य क्षेत्र में यह रेडियोएक्टिव और जहरीला न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाया जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*