दिनांक 07 जून 2026 रीवा मप्र।
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर इस रविवार राष्ट्रीय स्तर पर विशेष वेबीनार का आयोजन किया गया। आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री बाबूलाल दहिया, गुजरात से पर्यावरणविद महेश पंड्या, जाने-माने कार्यकर्ता एवं आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, ग्वालियर से राज तिवारी, बुरहानपुर से हरीश सोलंकी सहित सैकड़ों एक्टिविस्ट एवं पार्टिसिपेंट्स सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का सफल संचालन हमेशा को भांति सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया।
*जीवन के किए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक*
उत्तराखंड से जाने-माने आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं टिहरी गढ़वाल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस एवं तकनीक के विशेषज्ञ वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने अपने स्लाइड प्रेजेंटेशन में वैश्विक पर्यावरण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जिसमें उनके द्वारा स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार से पिछले कई दशकों में प्रदूषण का स्तर निरंतर बड़ा है जिसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग एवं जल नभ थल में प्रदूषण के आंकड़े बढ़े हैं। वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने वर्तमान तापमान में वृद्धि को भी प्रदूषण से ही जोड़ा और बताया कि कैसे यह विशेष तौर पर भारत को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।
आज के औद्योगिक युग में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से पर्यावरण को खतरा बना हुआ है। जमीन के अंदर खनिज को लेकर जंगली क्षेत्रों का सफाया किया जा रहा है। खेती योग्य जमीन को भी अधिग्रहित कर औद्योगीकरण के लिए लिया जा रहा है जिससे कृषि योग्य भूमि का दायरा भी कम होता जा रहा है जबकि देखा जाए तो जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था भी किया जाना मुश्किल पड़ेगा। आए दिन नई-नई गंभीर बीमारियां बढ़ रही है जो कि प्रदूषण के ही कारण है ऐसे में पर्यावरण को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है और यह चिंता का विषय है। इस विषय पर एक्शन प्लान बनाया जाकर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
*प्रदूषण की शिकायत करने और आरटीआई लगाने पर एक्टिविस्ट को पहुंचाया जेल की गई मारपीट*
बुरहानपुर से हरीश सोलंकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने नदियों में प्रदूषण को लेकर आवाज उठाई थी और साथ में कुछ आरटीआई भी लगाई थी। नदियों नालों में बढ़ते जल प्रदूषण की शिकायतें की थी जिसके लिए न्यायपालिका के कुछ जजों के द्वारा उनके ऊपर कार्यवाही करवाई गई और उनके साथ मारपीट किया जाकर फर्जी मुकदमे गढ़े गए और जेल में भी रखा गया जिसकी की उन्होंने शिकायत मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में की थी जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच की गई और तब जाकर उन्हें एक लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया गया और आगे की कार्यवाही प्रचलन में है।
छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल एवं ग्वालियर से राज तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किया और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन सदैव की भांति सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*