Sunday, June 28, 2026

Breaking: डेमोक्रेसी और संविधान पर आयोजित हुआ 314 वाँ राष्ट्रीय वेबिनार// कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पुस्तक “भारत में लोकतंत्र का उद्भव जैसा कि हमारे चारों तरफ हो रहा है पर केंद्रित रहा”// यूनाइटेड नेशंस में भारत के पूर्व राजनयिक रवींद्र पाल सिंह सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा//

*Breaking: डेमोक्रेसी और संविधान पर आयोजित हुआ 314 वाँ राष्ट्रीय वेबिनार// कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पुस्तक “भारत में लोकतंत्र का उद्भव जैसा कि हमारे चारों तरफ हो रहा है पर केंद्रित रहा”// यूनाइटेड नेशंस में भारत के पूर्व राजनयिक रवींद्र पाल सिंह सहित कई विशिष्ट वक्ताओं ने कार्यक्रम में लिया हिस्सा//*
दिनांक 28 जून 2026 रीवा मप्र।

   यह बैठक भारत में लोकतंत्र पर चर्चा करने के लिए एक वेबिनार थी, जिसमें लेखक सचिन पेथकर और अन्य द्वारा लिखित पुस्तक 'द इवोल्यूशन ऑफ डेमोक्रेसी ऐज हैपनिंग इन इंडिया' पर ध्यान केंद्रित किया गया था। चर्चा में पूर्ण यूएन रिप्रेजेंटेटिव रविंदर पाल सिंह सहित कई वक्ताओं ने नागरिक संप्रभुता, संवैधानिक सर्वोच्चता, कानून के शासन, शक्तियों के पृथक्करण और नियंत्रण और संतुलन सहित लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के बारे में बात की। रविंदर ने जोर देकर कहा कि बहुसंख्यकवाद और संस्थागत स्वतंत्रता की कमी के कारण भारत के लोकतांत्रिक संस्थान कमजोर हो रहे हैं। शिक्षाविद जगमोहन सिंह, आरटीआई एक्टिविस्ट संतोष सिंह और लेखक अशोक भाई पटेल सहित अन्य वक्ताओं ने राजनीतिक दलों की भूमिका, चुनाव सुधार, प्रतिनिधियों की जवाबदेही और केवल प्रसारण के बजाय वास्तविक लोकतांत्रिक भागीदारी की आवश्यकता सहित विभिन्न लोकतांत्रिक चुनौतियों पर चर्चा की। बातचीत में यह पता लगाया गया कि राजनीतिक दलबदल, प्रतिनिधि जवाबदेही की कमी और संस्थागत स्वतंत्रता के क्षरण जैसे मुद्दों के माध्यम से लोकतांत्रिक मूल्यों से कैसे समझौता किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों ने भारत में लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने के लिए सार्थक सुधारों का आह्वान किया।

*भारत में लोकतंत्र पर चर्चा*

    ऑनलाइन बैठक भारत में लोकतंत्र और इस विषय पर लेखकों की पुस्तक पर चर्चा करने पर केंद्रित थी। रविंदर पाल ने नागरिकों की संप्रभुता, संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन सहित लोकतंत्र के सिद्धांतों पर चर्चा की। उन्होंने स्वतंत्र संस्थानों और नियंत्रण और संतुलन के महत्व पर जोर दिया। सचिन पेथकर और अशोक भाई पटेल ने अपनी पुस्तक प्रस्तुत की, जो चुनावी प्रक्रियाओं, राजनीतिक दलों की भूमिका और संसद के कामकाज जैसे मुद्दों की जांच करती है। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक दलों ने लोकतंत्र का अपहरण कर लिया है और प्रतिनिधि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सुधारों का सुझाव दिया है। चर्चा में भारत में लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति और सार्थक राजनीतिक भागीदारी और संस्थागत स्वतंत्रता की आवश्यकता के बारे में चिंताओं पर प्रकाश डाला गया।

*भारतीय लोकतंत्र संवैधानिक सुधारों पर चर्चा*

   ऑनलाइन बैठक में संवैधानिक परिवर्तनों और भारत में लोकतंत्र की स्थिति के बारे में चर्चा की गई। संतोष सिंह ने नीट परीक्षा के पेपर लीक और न्याय वितरण में देरी जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार में जवाबदेही के बारे में चिंता जताई और सवाल किया कि क्या निर्वाचित प्रतिनिधि वास्तव में लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। पालनपुर लॉ कॉलेज के प्रोफेसर अश्विन कारिया ने चुनाव सुधार की आवश्यकता पर सहमति जताते हुए सुझाव दिया कि मंत्रियों और विधायकों को दोहरे पद पर नहीं रहना चाहिए और निर्वाचित सरकारों को दलबदल के जरिए अपदस्थ किए बिना अपना कार्यकाल पूरा करना चाहिए। चर्चा में वर्तमान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बारे में चिंताओं और सही प्रतिनिधित्व और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रणालीगत बदलावों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
*लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक चिंताएं*

    प्रोफेसर अश्विन कारिया ने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक मुद्दों के बारे में चिंताओं पर चर्चा की, सवाल किया कि क्या राजनीतिक दलबदल पर प्रतिबंध होना चाहिए और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की प्रभावशीलता के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने अदालतों में भाषा की बाधाओं का उदाहरण दिया और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच अधिक से अधिक जन जागरूकता और जवाबदेही की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रवीण पटेल ने सुझाव दिया कि वीरेंद्र ठक्कर को डॉ. सचिन पेडकर की पुस्तक और चर्चा किए गए मुद्दों को संबोधित करने के लिए इसके संभावित समाधान।

*भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की चुनौतियां*

आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने भारत के संवैधानिक ढांचे, चुनावी प्रणाली और लोकतांत्रिक चुनौतियों पर एक व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1950 के बाद से संविधान के विकास पर चर्चा की, जिसमें संशोधन, चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक दल के वित्त पोषण और आंतरिक पार्टी लोकतंत्र के मुद्दों पर चर्चा की। वीरेंद्र कुमार ने लोकतांत्रिक सूचकांकों में भारत की घटती वैश्विक रैंकिंग को ध्यान में रखते हुए प्रेस की स्वतंत्रता, आरटीआई कार्यान्वयन और चुनाव सुधारों की आवश्यकता के बारे में चिंताओं पर प्रकाश डाला। चर्चा का समापन प्रवीण पटेल ने अशोक पटेल को अपने विचारों को साझा करने और वीरेंद्र कुमार ठक्कर की प्रस्तुति के आधार पर संभावित कार्यों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित करने के साथ किया।

*भारत में लोकतंत्र वेबिनार*

सोशल एक्टिविस्ट एवं लेखक अशोक भाई पटेल ने देश में लोकतांत्रिक चुनौतियों पर चर्चा करने वाले एक वेबिनार में अपनी पुस्तक ‘द इवोल्यूशन ऑफ डेमोक्रेसी इन इंडिया* पेश की। उन्होंने बूथ, राज्य और शहर स्तर पर स्वायत्त चुनाव आयोग बनाने सहित समाधानों का प्रस्ताव दिया, जिसमें प्रत्येक बूथ से 4 स्वयंसेवक चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों के रूप में काम करते हैं। चर्चा में राजनीतिक दलों के प्रभुत्व, न्यायिक स्वतंत्रता और शासन में पारदर्शिता की आवश्यकता के बारे में चिंताएं शामिल थीं। पूर्व यूएन रिप्रेजेंटेटिव रविंदर पाल सिंह और अन्य सहित प्रतिभागियों ने संवैधानिक सिद्धांतों पर बहस की, जिसमें रविंदर पाल सिंह ने कार्यपालिका, विधायीका और न्यायपालिका शाखाओं के बीच नियंत्रण और संतुलन के महत्व पर जोर दिया। बातचीत विशिष्ट कानूनी और लोकतांत्रिक शासन विषयों पर भविष्य के वेबिनार की योजनाओं के साथ समाप्त हुई।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि प्रतिभागियों में देवेंद्र अग्रवाल, जयपाल सिंह खींची, नरेश कुमार सैनी, रामदास सहित सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

Sunday, June 21, 2026

Breaking: सुप्रीम कोर्ट के RTI एक्टिविज्म एक नया बिजनेस वाले विवादित मौखिक कमेंट को लेकर आयोजित हुआ 313 वाँ RTI वेबिनार// सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ ने खारिज की थी RTI लगाने वाले दो लोगों की अग्रिम जमानत याचिका// हाई कोर्ट इलाहाबाद के 3 जजों के पैनल ने मामले पर रखे अपने विचार // जस्टिस कमलेश्वरनाथ, जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल एवं जस्टिस सुधीर सक्सेना ने वेबिनार में रखे अपने विचार// फोरम फॉर फास्ट जस्टिस से प्रवीण पटेल एवं RTI रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र ठक्कर ने भी इसे बताया दुर्भाग्यपूर्ण// हरियाणा के एक मामले सड़क निर्माण कार्य के मामले में अवरोध उत्पन्न करने एवं गालीगलौज करने के आरोप में मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट//

*Breaking: सुप्रीम कोर्ट के RTI एक्टिविज्म एक नया बिजनेस वाले विवादित मौखिक कमेंट को लेकर आयोजित हुआ 313 वाँ RTI वेबिनार// सुप्रीम कोर्ट की युगल पीठ ने खारिज की थी RTI लगाने वाले दो लोगों की अग्रिम जमानत याचिका// हाई कोर्ट इलाहाबाद के 3 जजों के पैनल ने मामले पर रखे अपने विचार // जस्टिस कमलेश्वरनाथ, जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल एवं जस्टिस सुधीर सक्सेना ने वेबिनार में रखे अपने विचार// फोरम फॉर फास्ट जस्टिस से प्रवीण पटेल एवं RTI रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र ठक्कर ने भी इसे बताया दुर्भाग्यपूर्ण// हरियाणा के एक मामले सड़क निर्माण कार्य के मामले में अवरोध उत्पन्न करने एवं गालीगलौज करने के आरोप में मामला पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट//*
दिनांक 21 जून 2026 रीवा मप्र।

  पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय पूरे देश में चर्चा का केंद्र बना जहां हरियाणा के एक मामले में RTI लगाने वाले आवेदकों के एक अग्रिम जमानत याचिका मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए RTI कानून को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए। जजों ने कुछ इस प्रकार कहा कि आरटीआई एक्टिविज्म एक किस्म का नया बिजनेस बन गया है और उन आवेदकों को यह भी कहा कि सड़क निर्माण की निगरानी करने वाले वह कौन होते हैं? हालांकि सामान्य तौर पर जिस प्रकार सुनवाई के दौरान अक्सर जजों द्वारा या कि अधिकारियों को हड़का दिया जाता है अथवा वकीलों के भी विषय में टिप्पणी कर दी जाती है अथवा फिर अन्य मामलों जैसे कई बार टिप्पणियां प्रकाश में आती रहती हैं ठीक यह टिप्पणी भी वैसे ही है न कि यह उनके ऑर्डर में कहीं लिखा गया है। अतः कई विश्लेषकों का यह मानना है कि इन टिप्पणियों के कानूनी पक्ष को ज्यादा गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जिस प्रकार कुछ समय से एपेक्स कोर्ट के निर्णयों अथवा सुनवाई के दौरान बयानबाजी हो रही हैं उससे कहीं न कहीं कोर्ट की गरिमा और गंभीरता पर भी सवालिया निशान उठने लगे हैं और चर्चा का बाजार गरम हो रहा है। गौरतलब है कि अभी कुछ सप्ताह पहले ही वकीलों, आरटीआई एक्टिविस्ट और बेरोजगार युवाओं को लेकर भी इसी प्रकार के कमेंट किए गए थे जिसको लेकर कॉकरोच जनता पार्टी अथवा अन्य संगठनों के प्रदर्शन आज भी हो रहे हैं। 

*कोर्ट के कमेंट प्रकरण आधारित और इसका सामान्यीकरण किया जाना उचित नहीं - जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल*

 कार्यक्रम में पधारे इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आदित्य नाथ मित्तल ने बताया कि वह राकेश बहल मामले में यह नहीं जानते कि बहल ने कौन से आरटीआई के सवाल पूछें थे अथवा किस मामले में उनके द्वारा सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण किया जा रहा था अतः उसके अभाव में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन कई बार आरटीआई और पीआईएल के नाम पर दुरुपयोग होता है जिसके कारण कोर्ट को ऐसा कमेंट करना पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान कई बार ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर दी जाती हैं जहां आरटीआई अथवा अपने सामाजिक स्टेटस का दबाव बनाकर कोर्ट में बाते रखीं जाती हैं जिस पर कई बार कोर्ट यह सवाल कर देते हैं लेकिन इस मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील द्वारा ऐसा क्या कहा गया जिससे कोर्ट पर नकारात्मक कमेंट करने के लिए मजबूर होना पड़ा होगा यह अलग विषय है जिसकी जानकारी होना जरूरी है। श्री जस्टिस मित्तल ने बताया कि पीआईएल एवं आरटीआई दोनों का दुरुपयोग बंद होना चाहिए। राकेश बहल के मामले में कार्य ने कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है जबकि मात्र अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई है इसलिए इसे इतना गंभीरता से भी लेने की आवश्यकता नहीं है। अग्रिम जमानत देना कोर्ट के स्वयं के विवेकाधिकार पर निर्भर करता है अतः कई बार अग्रिम जमानत दे दी जाती है तो कई बार खारिज कर दी जाती है। 
*जजों को मामले में सुनवाई के दौरान किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचना चाहिए, कलम की ताकत पर दिया जाय ध्यान- जस्टिस कमलेश्वरनाथ* 

   वहीं मामले पर अपना पक्ष रखते हुए इलाहाबाद के वरिष्ठ रिटायर्ड जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने बताया कि आज कल कोर्ट में सुनवाई के दौरान बयानबाजी हो रही हैं जिससे मीडिया में बातें आ जाती हैं। यह चर्चा का विषय बन जाता है। उन्होंने दो बातों पर जोर दिया। पहला बताया गया कि जजों को बयानबाजी से बचना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिका को स्वीकार करना है अथवा खारिज करना है कर दें लेकिन बयानबाजी न करें यह उचित नहीं है। साथ ही कोर्ट की गरिमा भी प्रभावित होती है। दूसरा जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने बताया कि सड़क निर्माण में गड़बड़ियां हैं। जैसे बरसात होती है वैसे ही सड़कें खराब हो जाती है उनमें गड्ढे हो जाते हैं। ग्रामों में कोई निगरानी नहीं होती उससे भी स्थितियां खराब रहती हैं इसलिए संविधान की कंडिका 19 एवं आरटीआई कानून में आम जनता को इसकी शक्ति मिली है कि वह सवाल करें। साथ ही उन्होंने बताया जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों का भी दायित्व है कि वह इस प्रकार के विकास कार्यों की निगरानी करें और सवाल उठाये लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे इसलिए आमजनता यदि सवाल कर रही है तो सवाल करना उसका संवैधानिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर जस्टिस कमलेश्वरनाथ ने सड़क निर्माण और मूलभूत संरचनाओं में भ्रष्टाचार को स्वीकार किया और जनता के सवाल और जानने के अधिकार का पक्ष रखा। 
*आरटीआई भ्रष्टाचार उजागर करने का टूल है लेकिन भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग रही यह चिंता का विषय - जस्टिस सुधीर सक्सेना* 

  आरटीआई एक्टिविज्म है अथवा बिजनेस एवं सुप्रीम कोर्ट के अभी हालिया फैसले एवं सुनवाई कर रहे जजों के कमेंट पर अपना पक्ष रखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सुधीर सक्सेना ने कहा कि आरटीआई कानून आम जनता का एक सशक्त अधिकार है। इस कानून के आने के बाद भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं लेकिन ऐसे कई मामलों में कोई बड़ी कार्यवाही देखने को नहीं मिल रही है। इसलिए भ्रष्टाचार पर कार्यवाही हो इस विषय पर मंथन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार अच्छे और निर्दोष अधिकारी भी प्रताड़ित हो जाते हैं जिसमें यूपी के आईएएस अधिकारी श्रीवास्तव का उदाहरण दिया गया। उन्होंने वेबिनार के टॉपिक पर कहा कि यह भ्रष्टाचार और आरटीआई जैसे टॉपिक पर भी आयोजित किया जाना चाहिए। जस्टिस सक्सेना ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता आरटीआई लगाकर कई बार जानकारी प्राप्त करते हैं और उसमें भ्रष्टाचार सामने आता है इसलिए आरटीआई कार्यकर्ता समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के हालिया विवादित कमेंट मामले पर उन्होंने भी कहा कि यह व्यक्तिगत मामले हैं जिसका जनरलाइजेशन नहीं किया जाना चाहिए। कई बार जज सुनवाई के दौरान ऐसे कमेंट पास कर देते हैं जो उतने गंभीरता से नहीं लिए जा सकतें यह उस केस और परिस्थिति पर निर्भर करता है जिसका ऑर्डर में उल्लेख नहीं होता। उन्होंने कहा कि कानून के दुरुपयोग भी होते हैं लेकिन काफी कम हैं इसलिए आरटीआई एक्टिविस्ट को ब्लैक मेलर कहना भी उचित नहीं। वह इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि आरटीआई एक्टिविस्ट ब्लेकमेल करते हैं। आरटीआई एक्टिविस्टों ने शासन प्रशासन के बड़े मामले उजागर किए हीं इसलिए योगदान महत्वपूर्ण है।

*आरटीआई एक्टिविस्टों के लिए धरातल चुनौतियों से भरा हुआ - संतोष सिंह राठौर* 

  गुजरात में MDM और राशन आदि मामलों से लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य करने वाले एक्टिविस्ट संतोष कुमार राठौर ने बताया कि वास्तविक धरातल पर आरटीआई लगाने वाले लोगों के लिए जिंदगी चुनौतियों से भरी हुई होती हैं। यह सब इतना आसान नहीं होता है। कई बार आरटीआई लगाने के बाद आवेदनों को बार बार इस कार्यालय से उस कार्यालय में घुमाया जाता है। जानकारी न मिलने पर अपील शिकायत और रिट याचिकाएं लगानी पड़ती है फिर भी जानकारियां नहीं मिलती हैं। आरटीआई एक्टिविज्म कोई बिजनेस नहीं है और कोर्ट को ऐसे बयान नहीं देने चाहिए इससे आरटीआई के लिए काम करने वाले लोगों का मनोबल घटता है एवं जानकारी रोकने वाले लोगों का बढ़ता है। उन्होंने बताया कि आरटीआई ब्लैकमेल करने का नहीं बल्कि भ्रष्टाचार उजागर करने एवं पारदर्शिता जवाबदेही लाने का बढ़िया साधन है।
*आरटीआई में ब्लैकमेल नहीं होते बल्कि भ्रष्टाचार दबाने के प्रयास किए जाते हैं इसलिए जानकारी रोकते हैं - वीरेंद्र ठक्कर*

  उत्तराखंड के प्रोफेसर एवं आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने पूरे मामले को लेकर अपना पीपीटी प्रेजेंटेशन तैयार कर प्रस्तुत किया जिसमें सभी पहलुओं पर चर्चा की। प्रस्तुति के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का भी हवाला दिया। बताया गया कि आरटीआई कानून से दर्जनों देश स्तर के भ्रष्टाचार उजागर हुए हैं और इसी प्रकार लोकल स्तर में भी अनगिनत भ्रष्टाचार सामने आये और यह सब आरटीआई कानून के माध्यम से ही हुआ है। श्री ठक्कर ने कहा कि आज तक के किसी भी कोर्ट ऑर्डर में यह बात सिद्ध नहीं हो पाई है कि आरटीआई कानून का दुरुपयोग कर किसी को ब्लैक मेल किया गया है। यह सिर्फ एक धारणा हो सकती है और पूर्वाग्रह हो सकता है लेकिन किसी कोर्ट ने आरटीआई से बैकमेल होना सिद्ध नहीं किया है। 

मामले को लेकर फोरम फॉर फास्ट जस्टिस एवं सोसाइटी फॉर फेडरेशन ऑफ फास्ट जस्टिस के संयोजक प्रवीण पटेल ने भी आरटीआई से उजागर हुए भ्रष्टाचार को लेकर अपने विचार रखे और अपेक्स कोर्ट ने बयानबाजी को लेकर चिंता जाहिर किम श्री पटेल ने कहा कि कोर्ट को और जिम्मेदार और संयमित होने की आवश्यकता है। नेता और अधिकारी क्या कहते हैं वह इतना मायने नहीं रखता लेकिन जब माननीय जस्टिस कोई बात कहते हैं तो उसे पूरा देश बड़े ध्यान से सुनता है।। इसलिए कोर्ट के आदेश हमेशा रेफर किए जाते हैं।

वेबिनार कार्यक्रम का संचालन सोशल एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, बुरहानपुर से हरीश सोलंकी, मप्र से सत्येंद्र सिंह चौहान एवं जयपाल सिंह खींची सहित कई कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे और आरटीआई से जुड़े सवाल जवाब किए।

*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट मप्र*

Sunday, June 7, 2026

Breaking: विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित हुआ वेबीनार// जाने माने वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया प्रस्तुति// सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए कार्यक्रम में सम्मिलित// बुरहानपुर से हरीश प्रसाद सोलंकी ने भी साझा किए जल प्रदूषण से संबंधित डेटा// छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल और ग्वालियर से राज तिवारी ने भी बताए अपने अनुभव// सर्वसम्मति से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक्शन प्लान की बनी सहमति//

*Breaking: विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित हुआ वेबीनार// जाने माने वक्ता वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने दिया प्रस्तुति// सैकड़ों पार्टिसिपेंट हुए कार्यक्रम में सम्मिलित// बुरहानपुर से हरीश प्रसाद सोलंकी ने भी साझा किए जल प्रदूषण से संबंधित डेटा// छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल और ग्वालियर से राज तिवारी ने भी बताए अपने अनुभव// सर्वसम्मति से पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक्शन प्लान की बनी सहमति//* 
दिनांक 07 जून 2026 रीवा मप्र।

   5 जून विश्व पर्यावरण दिवस को लेकर इस रविवार राष्ट्रीय स्तर पर विशेष वेबीनार का आयोजन किया गया। आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री बाबूलाल दहिया, गुजरात से पर्यावरणविद महेश पंड्या, जाने-माने कार्यकर्ता एवं आरटीआई रिसोर्स पर्सन वीरेंद्र कुमार ठक्कर, छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह, ग्वालियर से राज तिवारी, बुरहानपुर से हरीश सोलंकी सहित सैकड़ों एक्टिविस्ट एवं पार्टिसिपेंट्स सम्मिलित हुए। 

    कार्यक्रम का सफल संचालन हमेशा को भांति सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया। 
*जीवन के किए पर्यावरण संरक्षण अत्यंत आवश्यक*

  उत्तराखंड से जाने-माने आरटीआई रिसोर्स पर्सन एवं टिहरी गढ़वाल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस एवं तकनीक के विशेषज्ञ वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने अपने स्लाइड प्रेजेंटेशन में वैश्विक पर्यावरण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जिसमें उनके द्वारा स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया गया कि किस प्रकार से पिछले कई दशकों में प्रदूषण का स्तर निरंतर बड़ा है जिसकी वजह से ग्लोबल वार्मिंग एवं जल नभ थल में प्रदूषण के आंकड़े बढ़े हैं। वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने वर्तमान तापमान में वृद्धि को भी प्रदूषण से ही जोड़ा और बताया कि कैसे यह विशेष तौर पर भारत को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है। 
    आज के औद्योगिक युग में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से पर्यावरण को खतरा बना हुआ है। जमीन के अंदर खनिज को लेकर जंगली क्षेत्रों का सफाया किया जा रहा है। खेती योग्य जमीन को भी अधिग्रहित कर औद्योगीकरण के लिए लिया जा रहा है जिससे कृषि योग्य भूमि का दायरा भी कम होता जा रहा है जबकि देखा जाए तो जनसंख्या निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आबादी के लिए भोजन की व्यवस्था भी किया जाना मुश्किल पड़ेगा। आए दिन नई-नई गंभीर बीमारियां बढ़ रही है जो कि प्रदूषण के ही कारण है ऐसे में पर्यावरण को भारी क्षति का सामना करना पड़ रहा है और यह चिंता का विषय है। इस विषय पर एक्शन प्लान बनाया जाकर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
   *प्रदूषण की शिकायत करने और आरटीआई लगाने पर एक्टिविस्ट को पहुंचाया जेल की गई मारपीट*

     बुरहानपुर से हरीश सोलंकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने नदियों में प्रदूषण को लेकर आवाज उठाई थी और साथ में कुछ आरटीआई भी लगाई थी। नदियों नालों में बढ़ते जल प्रदूषण की शिकायतें की थी जिसके लिए न्यायपालिका के कुछ जजों के द्वारा उनके ऊपर कार्यवाही करवाई गई और उनके साथ मारपीट किया जाकर फर्जी मुकदमे गढ़े गए और जेल में भी रखा गया जिसकी की उन्होंने शिकायत मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में की थी जिसमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच की गई और तब जाकर उन्हें एक लाख रुपए का मुआवजा दिलवाया गया और आगे की कार्यवाही प्रचलन में है। 

छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल एवं ग्वालियर से राज तिवारी सहित अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किया और पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया।

कार्यक्रम का संचालन सदैव की भांति सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*