Showing posts with label electric problem in rewa. Show all posts
Showing posts with label electric problem in rewa. Show all posts

Monday, May 28, 2018

ट्रांसफार्मर जलने से अतरैला ग्राम में महीने से फैला घुप अंधेरा, नलकूप सूखे, ट्यूबवेल बन्द, आमजन में त्राहि त्राहि (मामला ज़िले के लालगांव डीसी अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां बताया जा रहा है 17 लाख का बिल बकाया)

दिनांक 28 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में जगह जगह ट्रांसफार्मर जलने से गर्मियों में त्राहि त्राहि मची हुई है. एक तो ज्यादातर नलकूप सूखे पड़े हैं ऊपर से यदि ट्यूबवेल से पानी पीने की कोई भी संभावना शेष बची थी वह ट्रांसफार्मर जलने से समाप्त हो गई. अब लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं. ऐसा लगता है मानो 17 वीं सताब्दी में जीवन जिया जा रहा हो जब 5 किमी में भी बमुश्किल एक कुआं होती थी.

   लालगांव डीसी अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर महीने भर से जला

     ज़िले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र  अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से ऊपर से जला पड़ा है लेकिन  शिकायतों के बावजूद भी बदला नही गया है. जब भी कंभी जेई लालगांव अथवा एई जवा से चर्चा की जाती है तो बताया जाता है की बिजली का बिल बकाया है अतः ट्रांसफार्मर बदला नही जाएगा.

  17 लाख बिजली बिल कैसे है बकाया?

    ट्रांसफार्मर बदले जाने की जब गुहार आमजन और उपभोक्तागण द्वारा विभाग में लगायी गई तो बताया गया की 17 लाख से अधिक का बिजली बिल अतरैला ग्राम का बकाया है अतः जब तक कम से कम 20 प्रतिशत नही भरा जाएगा तब तक ट्रांसफार्मर नही बदला जाएगा.

   सबसे बड़ी बात यह है की आखिर अतरैला ग्राम का बिजली बिल इतनी अधिक अमाउंट में बकाया था तो बिजली विभाग अब तक क्या सो रहा था? यदि किसी गरीब के हज़ार रुपये बकाया होता है तो उसको नोटिस पर नोटिस भेजी जाती हैं तो यह कैसे हुआ की एक ग्राम का अकेले 17 लाख से ऊपर बकाया हो गया? क्या अतरैला ग्राम में फैक्ट्री चलती है की इतनी बिजली खपत हो रही है? प्राप्त जानकारी में लगभग 180 रजिस्टर्ड बिजली उपभोक्ता बताए गए हैं जिनमे 35 के आसपास नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्ता है. बांकी के 100 से ऊपर हरिजन आदिवाशी समूह के उपभोक्ता है. जो लिस्ट एरिया इंजीनियर जवा द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को उपलब्ध करायी गई है उसमे हरिजन आदिवाशी और अन्य उपभोक्ताओं के सबसे अधिक बकाया है और इनकी प्रतिव्यक्ति ज्यादा राशि भी बकाया है. ऐसे में सवाल यह उठता है हरिजन आदिवशियों के बिजली बिल तो सरकारें वैसे भी समय समय पर माफ करती रही है तो 30 हज़ार या 25 हज़ार प्रतिव्यक्ति हरिजन के बिल कैसे शेष हैं. इसका मतलब तो यह हुआ की 300 रुपये के आसपास प्रतिमाह औसत लगाया जाय तो  3600 रुपये सालाना बनता है तब इसका मतलब यह हुआ की 7 से 8 साल से किसी भी हरिजन आदिवाशी ने कोई बिल नही भरा और बिल माफ भी हुए थे। तब इसमे मोटर कनेक्शन धारक और अन्य ग्रामीणों का क्या दोष है जो नियमित बिल भुगतान कर रहे हैं? क्या 180 में से उन 35 नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी द्वारा अलग से बिजली सप्लाई नही दी जानी चाहिए? मानाकि 17 लाख बकाया वाले दोषी हो सकते हैं परंतु इसमे नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? बिजली कंपनी ऐसा अन्याय क्यो कर रही है? यह तो सीधे सीधे व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें की किस प्रकार इस भीषण गर्मी में नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्तागण अतरैला ग्राम (डीसी लाल गांव, डी ई त्योंथर) के समक्ष खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

--------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यक्रता,

रीवा मप्र, 7869992139, 9589152587.

Friday, May 18, 2018

लालगांव डीसी - अतरैला ग्राम का ट्रांसफॉर्मर जला, लोग पानी बिजली बिना त्रस्त (मामला ज़िला रीवा अंतर्गत लालगांव विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां पिछले एक माह से 100 केवीए का ट्रांसफार्मर जला है लेकिन कहीं सुनवाई नही, बिजली बिल 40 प्रतिशत से अधिक जमा)

दिनांक 18 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव रीवा मप्र,

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में ट्रांसफार्मर जलने के कारण जगह जगह जद्दोजहद शुरू है. पिछले दिनों कटरा विद्युत वितरण केंद्र में अमिलिया ग्राम का मामला ज्यादा पुराना नही हुआ है जहां दो जले हुए ट्रांसफार्मर बदलने के लिए ग्रामीणों को 6 माह के अधिक समय लग चुका था जब यह मामला मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता की नजर में आया तो ग्रामीण उपभोक्ताओं को जाकर राहत मिली। 

लालगांव डीसी के अतरैला ग्राम में 100 केवीए का जला ट्रांसफॉर्मर 

     सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को दी गई जानकारी के आधार पर दिनांक 18 मई 2018 को अतरैला ग्राम में दौरा किया गया तो वहां पर ग्रामीणों का हुजूम जमा हो गया और सभी ने एक एक करके अपनी समस्या गिनाई जिनमे बिजली पानी से लेकर पंचायत के विकाश कार्य में अनियमितता तक सम्मिलित थे. 

   मूल रूप से जिस प्रयोजन के लिए पहुचा गया था वह था अतरैला ग्राम का महीने भर से जला हुआ ट्रांसफार्मर जिसकी वजह से न तो लोग बिजली जला पा रहे हैं और न ही उनके मोटर पंप चल रहे हैं. जहां एक तरफ नलकूप हवा और आग उगल रहे हैं ऐसे में मात्र मोटर पंप बोरवेल ही लोगों के एकमात्र सहारा हैं और यदि इस समय ट्रांसफार्मर ही जल जाए तो लोगोँ की कितनी बड़ी दुर्दशा हो सकती है यह सोचने वाली बात है.

  

   अतरैला ग्राम के लोगों ने जाहिर किया आक्रोश

  सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में अतरैला ग्राम के रहवासी चिलचिलाती धूप में घरों के बाहर आ गए और एक स्वर में जले हुए ट्रांसफार्मर को बदलने की माग की. सभी का कहना था उनकी फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं जिससे लोग त्रस्त हैं अब यदि उनका ट्रांसफार्मर नही बदला गया तो उनकी गर्मी की प्याज, मूग और सब्जियों की खेती भी चौपट हो जाएगी. लोगों द्वारा बताया गया की वह सभी नियमित बिल देने वाले उपभोक्ता हैं और मात्र कुछ ही ऐसे डिफाल्टर लोग हैं जिन्होंने बिजली बिल समय पर नही दिया है जिनकी वजह से परेशानी हो रही होगी. सभी ने बताया की इस भीषण सूखा अकाल की स्थिति में भी उनका सामूहिक रूप से 50 प्रतिशत से अधिक बिजली बिल भरा जा चुका है परंतु फिर भी विभाग समय पर ट्रांसफार्मर नही बदल रहा है जो कि ग्रामीणों के साथ ज्यादती है.

   स्थानीय ग्राम निवासी  प्रमोद सिंह, श्यामलाल शुक्ला, रोहिणी प्रसाद द्विवेदी, अजीत सिंह, अनुराग सिंह, बालेंद्र द्विवेदी, शुभम सिंह, निशांत सिंह, बृजेश विश्वकर्मा, पुष्पराज विश्वकर्मा, भगवानदीन साहू, संदीप कोरी, परमेश्वर कोरी, रामपाल कोरी, अगनु साहू, रजनीश साहू, राकेश कोरी, बृजलाल साकेत, अशोक साकेत, छोटे साकेत, आदि अतरैला ग्राम के  उपभोक्ताओं ने बताया की यदि उनका जला हुआ ट्रांसफार्मर 2 से 3 दिन के अंदर नही लगता तो सभी लोग आंदोलन करेंगे जिसकी जबावदेही बिजली विभाग और प्रशासन की होगी.

कनिष्ठ यंत्री विद्युत वितरण केंद्र लालगांव ने क्या कहा

   जब इस संदर्भ में लालगांव  विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री से सामाजिक कार्यकर्ता की बात हुई तो जेई का कहना था की प्रपोजल बनाकर त्योंथर डीई को भेजा जा चुका है और जल्द ही नया ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा. अभी प्रोसेस में दो तीन दिन का समय लग सकता है.

  संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें अतरैला ग्राम का जला हुआ ट्रांसफार्मर और ट्रांसफार्मर के पास एकत्रित अतरैला ग्राम और लाल गांव डीसी के उपभोक्ता जिन्होंने माग की हुई है जल्द से जल्द पुराना जला हुआ ट्रांसफार्मर बदल कर नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए.

--------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

  मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Sunday, April 29, 2018

14 हज़ार लेनदेन की शिकायत आते ही बिजली अधिकारियों को लगा 440 वोल्ट का करंट - अमिलिया ग्राम के 6 महीने से जले 2 ट्रांसफॉर्मर बदले गए (मामला ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत अमिलिया ग्राम के दो जले हुए ट्रांसफॉर्मर का)

दिनाँक 29 अप्रैल 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानंद द्विवेदी)

  जब गरीब किसानों की आवाज़ कहीं न सुनी गई तो उन्होंने अपना सारा दुख दर्द सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के समक्ष आकर रो दिया. उनकी आवाज़ में इतनी पीड़ा थी की उस आवाज़ की गूंज मीडिया के माध्यम से भोपाल और दिल्ली तक सुनी गई. आखिर ऐसा कौन सा नियम है जो गरीब किसानों को बिजली जलाने से रोकता है? जब एक तरफ सरकारें इंडस्ट्री और औद्योगिक जगत को भरपूर बिजली सप्लाई दे रही हैं और बेरोकटोक सब्सिडी दिए जा रही हैं तो आखिर देश का अन्नदाता जो दिन रात खेतों में गर्मी सर्दी वर्षा के वावजूद भी कड़ी मेहनत करके अन्न उगाए जा रहा है उसको बिजली और ट्रांसफार्मर से क्यों वंचित रखा जाय? मप्र सरकार ने किसानों के हित में कई अच्छे निर्णय लिए हैं जिसका नतीज़ा है उन्हें आसान किस्तों में कम राशि पर मोटर पंप का कनेक्शन, अटल बिजली योजना, राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन, और अब शौभाग्य योजनांतर्गत घर घर बिजली. फिर भी यूं कहें की विभागीय लापरवाही अथवा कुछ अन्य कारण. फिर भी कहीं न कहीं ये बात महत्वपूर्ण है की योजनायों का सही तरीके से और समयावधि में क्रियान्वयन किया जाए. क्रियान्वयन में समस्याओं और लेटलतीफी की वजह से आम जनता को परेशानी से गुजरना पड़ता है. 

   शूखे अकाल में मात्र 20 प्रतिशत बिजली बिल जमा पर ही किसानों के बदले जाते हैं जले ट्रांसफार्मर 

    ग्रामीण इलाकों में किसानों की सिंचाई से जुड़े हुए ट्रांसफार्मर बदलने संबंधी नित नए नियम समय समय पर निकलते रहते हैं. अभी पिछले साल के शूखे के पहले तक यह 60 प्रतिशत रखा गया था इसके बाद यह घटकर 40 प्रतिशत हुआ और जब सरकार ने देखा की किसान सूखा अकाल में मारा गया है और उसके पास कुछ बचा नही है तो इस स्थिति में सरकार ने इसे घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया था. अर्थात जिस ट्रांसफार्मर से संबंधित कुल लोड का बिजली बिल यदि 20 प्रतिशत तक भर दिया गया है तो वहां ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा.

पर बिजली कंपनी नही मानती सरकार के फरमान

    अब यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है की काफी कुछ पहुच पर निर्भर करता है. यदि किसी गांव में कोई बहुत पहुच वाला है किसी नेता से संपर्क में है, मंत्री से संपर्क है तो उस स्थिति में ट्रांसफार्मर लगाने संबंधी विशेष नियम कायदों को फॉलो नही किया जाता. परंतु यदि बेचारे गांव वालों की कोई पहचान नही है तो उनके लिए जले हुए ट्रांसफार्मर बदलवाना टेढ़ी खीर हो जाता है. फिर उनकी कोई सुनवाई नही होती.

आम नागरिक और किसानों का मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता ही बनते हैं सहारा 

   ऐसे में मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता अथवा गांव का कोई चलता फिरता व्यक्ति जब इन गरीबों की आवाज़ उठाये तभी कुछ हो सकता है. जैसा की कटरा डीसी अन्तर्गत अमिलिया गांव के किसानों के साथ हुआ, जब अमिलिया के किसानों की 6 माह से कोई सुनवाई नही हुई तो वह थक हारकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के पास आये और अपनी पीड़ा व्यथा बतायी. गनीमत तो यह थी मामला जोरदार तरीके से मीडिया में रखा गया जिसमे पूरे गांव भर के इकठ्ठा हुए दर्जनों लोगों ने पहली बार कैमरे के सामने आकर दिल खोलकर पीड़ा व्यथा रखी जो यूट्यूब में वायरल हुआ और साथ ही रीवा ज़िले से प्रकाशित होने वाले लगभग कई महत्वपूर्ण अखबारों में आया तो कटरा डीसी और त्योंथर डी ई के अधिकारियों की नीद हराम हो गई. 

  मामला यहीं आकर नही रुका बल्कि पुनः आज से कल होता देख मामले को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ऊर्जा मंत्री पारस जैन के निज सचिव पुराणिक मंदर और संभागीय बिजली अधिकारियों के पास तक पहुचा दिया गया तब और भी उथल पुथल मच गई.

   आनन फानन में कटरा डीसी के जे ई अभिषेक सोनी और त्योंथर डी ई पटेल सहित बजाज कंपनी के एरिया इंजीनियर अनिल द्विवेदी एवं राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना के कार्यभार लिए हुए ओ पी द्विवेदी ने भी हाँथ पैर मरना प्रारम्भ कर दिया. बताया गया की आरजीवी योजना में गड़बड़ी की वजह से जेई और डीई को उलझना पड़ा वरना यह कार्य मात्र आरजीवी वालों का ही था.

  अमिलिया के दोनो जले ट्रांसफार्मर बदल दिए गए

     आज जहां कई ग्रामों में सालों से जले हुए ट्रांसफार्मर आज तक नही बदल पाए हैं वहीं मीडिया के प्रभाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सीधे जनहित के मुद्दे को लेकर एकजुट प्रहार से अमिलिया ग्राम के दोनो ही ट्रांसफार्मर बदल दिए गए. दिनांक 29 अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को त्योंथर डी ई द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार अब अमिलिया ग्राम खुशहाल स्थिति में है और 29 अप्रैल को ही दोनो ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं. 

पिछले 2 सप्ताह से हुए अथक प्रयास का नतीज़ा है दोनो ट्रांसफार्मर का बदलना

   पिछले दो सप्ताह से लगातार प्रतिदिन इस विषय पर जेई, डीई, आरजीवी, बजाज कंपनी, एसई, और ऊर्जा मंत्री तक के निरंतर संज्ञान में लाया गया तब जाकर आज यह दोनो ट्रांसफार्मर एक साथ बदले हैं. इसके साथ ही अमिलिया ग्रामवासियों का अधिकारियों द्वारा पैसा लेकर ट्रांसफार्मर बदलने का आरोप भी काफी महत्वपूर्ण था जिस पर संबंधित अधिकारियों की नीद हराम हो चुकी थी.

पूरे जिले में सैकड़ों अमिलिया जैसे उदाहरण फिर भी किसानों की कोई सुनवाई नही

    आज लगभग रोज ही मीडिया में यह खबर आम है की अमुक ग्राम में ट्रांसफार्मर जला हुआ है लेकिन बदला नही गया है. पर इन खबरों का कोई विशेष प्रभाव नही हो रहा है. आखिर क्यों? इसका सबसे बड़ा कारण यह है की खबर तो चल जाती है लेकिन उस ग्राम क्षेत्र के आसपास और साथ ही जनप्रतिनिधि इस पर कोई संज्ञान नही लेते हैं. आज जो काम सरपंचों, विधायकों, सांसदों, और अन्य जन प्रतिनिधियों का होना चाहिए वह मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं. आखिर सबसे बड़ा प्रश्न यही है की जिस ग्राम का ट्रांसफार्मर जला हुआ है उस गांव का सरपंच क्या सो रहा है? उस क्षेत्र का जनपद और ज़िला पंचायत सदस्य कहां गया? वहां का विधायक और सांसद कहां गया? इन प्रश्नों से स्पष्ट है कि भारत का लोकतंत्र आज मात्र दिखावा बन कर रह गया है. सभी जनप्रतिनिधि अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए हैं और आम जनता और किसान मरने के लिए मजबूर है.

  किसान सम्मान यात्राओं के ढोंग की खुलती पोल

     इसका अंदाजा इसी बात के लगाया जा सकता है की ये नेता और समाज के ठेकेदार कितना बड़ा ढोंग और प्रोपोगंडा करते हैं. अभी अभी पूरे प्रदेश में किसानो के नाम पर किसान सम्मान यात्रा निकाली गई. किसानों की रैली निकाल दिखावे के तौर पर किसानों को सम्मानित किया गया. जब किसान मर रहा है उसकी कोई सुनवाई नही हो रही तो काहे की किसान सम्मान रैली? किसान को उसकी फसल के उचित दाम नही मिल रहे. किसान द्वारा फसल में लगाए गयी पूंजी तक वसूल नही हो पा रही है, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है, किसान के पिछले 6 माह और साल भर से जले हुए ट्रांसफार्मर तक नही बदले गए हैं तो फिर काहे की किसान सम्मान रैली? क्या पार्टियों के कार्य कर रहे नुमाइंदे ग्राम में भ्रमण के दौरान किसानों की इन मूलभूत समस्याओं के विषय में नही पूंछते? क्या किसान इन ठेकेदारों को यह नही बताते की उनको क्या तकलीफ है? सच्चाई तो यह है सब को सब कुछ पता है लेकिन समस्या के उन्मूलन के लिए कोई प्रयास नही करना चाहता मात्रा दिखावा और ढोंग करना चाहता है जिसका परिणाम है की आज किसान और आम नागरिक विभिन्न प्रकार की मानवाधिकार संबंधी समस्याओं से ग्रस्त है और उसकी कहीं कोई सुनवाई नही हो रही है.

संलग्न - त्योंथर डीई द्वारा ग्रामीणों से बनवाया गया पंचनामा जिसमे शिकायतकर्ताओं से हस्ताक्षर करवाया गया है कि दोनों जले हुए ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं। साथ ही इस विषय मे शिकायतकर्ता शैलेन्द्र पटेल से चर्चा के कुछ अंश जिसमे पूरे प्रकरण को वह बता रहा है। साथ ही अन्य संलग्न फ़ाइल।

-------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

  मोबाइल 7869992139, 9589152587

Tuesday, April 10, 2018

शिक्षा के मंदिर में हादसों का भय, पानी के मानवाधिकार की जद्दोजहद में शिक्षा का अधिकार पड़ा बौना ( मामला सिरमौर तहसील अंतर्गत पनगड़ी एवं पताई पंचायत में शासकीय माध्यमिक शाला का, साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप जबकि खुली हाई टेंशन लाइन दे रही मौत को आमंत्रण)

दिनांक 11 अप्रैल 2018, स्थान - भठवा/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    राइट टू एजुकेशन अर्थात शिक्षा का अधिकार अधिनियम तो प्रारम्भ हो गया लेकिन विद्यार्थी इस शिक्षा के अधिकार का कितना लाभ ले पा रहे हैं इसका पता किसी भी ग्रामीण स्तर पर संचालित स्कूल में जाकर देखा जा सकता है.

   ग्रामीण स्तर पर संचालित सरकारी स्कूलों में न कोई सुविधा होती है और न ही शिक्षा का कोई स्तर. ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र बमुश्किल प्रमाण पत्र तो ले लेते हैं पर इसके अतिरिक्त कुछ सीख नही पाते. 100 में से कुछ दो चार विरले ही ऐसे छात्र होंगे जिन्हें उनके क्लास के स्तर का कुछ विशेष  ज्ञान हो. आज शिक्षा की दुर्दशा हो चुकी है. जिस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों की शासकीय विद्यालयों की शिक्षा बद से बदतर होती जा रही है भविष्य में युवाओं का नाकाम होकर बेरोजगार घूमना लगभग तय है. 

   ग्रामीण क्षेत्र की शासकीय स्कूलों में ज्यादातर ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो गरीब परिवार से आते हैं जैसे किसान अथवा मजदूर वर्ग. ऐसे छात्रों के लिए किसी अच्छी स्कूल में और खासकर प्राइवेट अंग्रेज़ी माध्यमों की स्कूलों में शिक्षा प्राप्त कर पाना एक सपना ही होता है. विरले ही गरीब छात्र होते हैं जो अच्छी शिक्षा दीक्षा प्राप्त कर पाते हैं.

कैसे पढ़ेंगे जब स्कूल के समय भरेंगे पानी  - पनगड़ी शासकीय स्कूल में साल भर से बन्द पड़ा है नलकूप

   शिक्षा की बात चल रही थी तो ग्रामीण स्तर पर इसको भी बता दिया जाए की मूलभूत फैसिलिटी की कमी के चलते भी शिक्षक और छात्र ज्यादातर उनकी पूर्ति करने में परेशान रहते हैं तो ऐसे में छात्र कब पढ़ पायेगा और शिक्षक कब पढ़ा पाएंगे.

    सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित पत्रकार प्रमोद सिंह और पनगड़ी निवासी सोनू सुक्ला द्वारा विजिट के दौरान स्कूल में उपस्थित प्रधानाध्यापक और शिक्षकों और छात्रों से संपर्क किया गया तो जो जानकारी प्राप्त हुई वह किसी भी ग्रामीण स्तर में संचालित शासकीय शिक्षा केंद्रों की स्थिति को भलीभांति बया करती है. बताया गया की स्कूल परिसर में जो नलकूप पंचायत विभाग अथवा पी एक ई द्वारा लगाया गया था वह काम लायक नही बचा है, उसकी सभी पाइप काम लायक नही बची है. बताया गया की यहीं 500 मीटर की दूरी पर स्थित किसी ग्रामवासी के व्यक्तिगत बोरवेल से छात्र पानी भरकर लाते हैं. पूरा समय मात्र पानी भरने में ही व्यतीत हो जाया करता है. ऐसे में छात्र क्या पढ़ पाएँगे. प्रधानाध्यापक द्वारा आगे बताया गया की हमने इसकी शिकायत कई बार की है लेकिन न तो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सुध ले रहा है और  न ही पंचायत विभाग लिहाज़ा हमारे स्कूल में मध्यान भोजन से लेकर बर्तन धोने तक सभी में तकलीफ होती है. कभी कभी इसी कारण मध्यान भोजन भी नही बन पाता है.

 पानी की समस्या तो है ही यहां बीच प्राँगण में लगा दिया ट्रांसफार्मर भी, किसी भी वक्त हो सकता है कोई भीषण हादसा 

  पानी की समस्या तो अपने स्थान पर है ही साथ ही स्कूल के बाहर बाउंड्री के बीचोंबीच एक ट्रांसफार्मर भी लगा हुआ है जो एकदम खुले में है. अमूमन यदि किसी कारण बस ट्रांसफार्मर लगाया हुआ है तो भी ट्रांसफार्मर को चारों तरफ से बन्द किया जा सकता है और एंगल गाड़कर तार की जाली लगायी जानी चाहिए जिससे प्राइमरी कक्षा के छोटे बच्चे खेलते समय सीधे ट्रांसफार्मर और खुले तारों के संपर्क में न आ पाएं लेकिन इसकी किसी को फिकर ही नही. न इस संबंध में स्कूल प्रबंधन ने ही कुछ किया और न ही पंचायत अथवा बिजली विभाग ने. आलम यह है की हर ग्राम की स्कूलों में इसी प्रकार या की बिजली के खुले तार झूल रहे हैं अथवा ट्रांसफार्मर लगा दिया गया है. सब की नीद तब खुलेगी जब कोई भीषण हदशा हो जाएगा और कोई बच्चा फसकर झुलस जाएगा.

  ज़िले की सभी सकूलों का सर्वे किया जाकर अभियान चलाकर खुले बिजली के तार खंभे और ट्रांसफार्मर स्कूल परिसर से तत्काल हटाये जाने चाहिए

    जब इस संदर्भ में ग्रामीण लोगों और बच्चों के अभिभावकों सहित शिक्षकों समाजसेवियों से चर्चा की गई तो सभी का एक स्वर में कहना था की मात्र पनगड़ी स्कूल ही नही बल्कि जिले की सभी स्कूलों में अभियान चलाकर स्कूल परिसर के अंदर से बिजली सप्लाई को हटाया जाना चाहिए. बिजली के खंभे और खुले बिजली के तार स्कूल परिसर के अंदर रखे जाने का कोई औचित्य ही नही है. स्कूल परिसर में बच्चे मध्याह्न छुट्टी होने पर खेलते कूदते रहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर खुले तारों और ट्रांसफार्मर के संपर्क में आ सकते हैं ऐसे में किसी भी समय कोई भी दुखद हादसा हो सकता है.

  लालगांव विद्युत वितरण केंद्र के अतरैला शासकीय स्कूल में भी खतरे के निशान के ऊपर है हाई टेंशन लाइन के खुले तार

   भठवा निवासी और पत्रकारिता के साथ जुड़े प्रमोद सिंह ने बताया की उन्होंने ग्रामीण जनों के सहयोग के साथ पिछले कई वर्षों से उनके क्षेत्र अतरैला में शासकीय स्कूल परिसर में हाई टेंशन लाइन के खुले झूलते तारों को हटाने के लिए जद्दोजहद की है लेकिन अब तक उसका कोई स्थायी समाधान नही निकल पाया है. जब इस संबंध में कटरा विद्युत केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी से बात की गई तो उनका यह कहना था की हमारे पास कोई विशेष प्रावधान नही होता जिससे इन तारों को पोल सहित शिफ्ट किया जा सके. उन्होंने आगे बताया की स्कूल शिक्षा विभाग और संबंधित स्कूल प्रसाशन से लिखित तौर पर विद्युत विभाग के नाम पत्र जारी कर हमारे पास पहुचाया जाना चाहिए. आगे की प्रक्रिया में विद्युत विभाग लाइन शिफ्टिंग के लिए जरूरी खर्च का एस्टीमेट बनाकर संबंधित स्कूल प्रसाशन को भेज देता है और आगे स्कूल प्रसाशन जब रमसा के माध्यम से वह राशि विजली विभाग के खाते में ट्रांसफर कर देगा तो हम अपने कर्मचारी भेज कर लाइन शिफ्टिंग करवा देते हैं. कटरा जे ई सोनी ने बताया की इसके पहले जब वह गोविंदगढ़ क्षेत्र में पदस्थ थे तब भी इस प्रकार के कई घटनाक्रम आये थे जिनमे स्कूल शिक्षा विभाग के फण्ड से स्कूलों के अंदर से लाइन शिफ्टिंग की गई थी. इसके अतिरिक्त कोई अन्य प्रक्रिया नही है जिससे इस लाइन को स्कूल परिसर के बाहर शिफ्ट किया जाय.

    उक्त प्रक्रिया को फॉलो भी किया गया और प्रमोद सिंह द्वारा अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक से कहकर लाइन शिफ्टिंग के बाबत आवेदन लालगांव कनिष्ठ यंत्री को भेजा जा चुका है. अब देखना यह होगा इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है. क्योंकि यदि सही समय पर कार्य नही हुआ तो किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है. इस बीच अतरैला स्कूल के प्रधानाध्यापक द्वारा बताया गया की स्कूल परिसर स्थित झूलते हाई टेंशन लाइन के तारों की वजह से कई बार हादसे हो चुके हैं जिससे आग का लुकाड़ा जमीन पर स्पार्किंग की वजह के गिरा था लेकिन शौभाग्य से बच्चे लाइन के नीचे नही थे अतः कोई अप्रिय दुर्घटना नही हुई है. नवीन स्कूल भवन हाई टेंशन लाइन के बिल्कुल 2 फ़ीट ऊंचाई से गया है जिससे यदि कोई बच्चा कभी धोखे से छत पर चढ़ जाता है तो उसकी जान जा सकती है. इस पर प्रधानाध्यापक का कहना था की उन्होंने बच्चों को शख्त हिदायत दे रखी है की कोई भी छात्र भूलकर भी नवीन स्कूल भवन की छत पर न जाए.

संलग्न - सिरमौर तहसील एवं गंगेव जनपद अंतर्गत पनगड़ी पंचायत की पनगड़ी स्कूल एवं पताई पंचायत अंतर्गत अतरैला स्कूल परिसर में खतरनाक स्तर पर हाई टेंशन लाइन के तार और ट्रांसफॉमर, साथ ही पनगड़ी स्कूल में सालों से बन्द पड़ा नलकूप.

-------------

शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र.

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

करहिया स्कूल के झूलते बिजली के तार दे रहे दर्दनाक हदशा को आमंत्रण (मामला ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले करहिया शासकीय स्कूल का)

दिनांक 10 अप्रैल 2018, स्थान - कटरा रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से पूरे ज़िले में बिजली के झूलते तारों और अनियंत्रित लाइन की वजह से रोज हो रहे आगजनी के हादसों में कोई कमी नही दिख रही है. अभी पिछले दिनों जब कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में वहां के निवासी सुरेंद्र मिश्रा के ट्रेक्टर सहित पूरी फसल में इसी बिजली के अनियंत्रित और झूलते हुए तारों में स्पार्किंग की वजह के आग लगी थी तो वहां कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री दूसरे दिन घटनास्थल पर जांच करने पहुचे थे. जांच के दौरान कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी को वह सभी कुछ दिखाया गया जिसकी वजह से किसी भी समय खतरनाक हादसा हो सकता है. इसी बीच जब करहिया स्कूल में देखा गया तो पाया गया की स्कूल की बाउंड्री वाल के भीतर खींची गई बिजली की लाइन में कोई केबलीकरण का कार्य नही किया गया है और बिजली के तार ग्राउंड लेवल सके मात्र 8 से 10 फ़ीट की ऊंचाई पर थे. साथ ही ट्रांसफार्मर के पास से जो लाइन सप्लाई स्कूल के लिए ली गई थी उसमे कोई अतिरिक्त खम्भा नही लगाया गया था, मात्र डीपी से ही तार खींचकर सीधे सप्लाई दे दी गई थी. यह लाइन सप्लाई पूरे चार फेज में थी जिसमे हवा की वजह के स्पार्किंग और फाल्ट आम बात है. इस समस्या के बारे में भी संबंधित कटरा जे ई अभिषेक सोनी को अवगत कराया गया और तत्काल लाइन को स्कूल परिषर के भीतर से हटाने की माग की गई. इस बीच उपस्थित ग्रामीणों में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी, सुरेंद्र मिश्रा, मनबहादुर सिंह, राजा तिवारी, ज्ञानदत्त दुबे, कुछ बढई समूह के लोग, लाइनमैन सुधाकर मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद थे.

संलग्न - संलग्न फोटोग्राफ में शासकीय करहिया स्कूल परिसर के भीतर खतरनाक स्तर में झूलते बिजली के तार जिनके कारण कभी भी कोई भी हदशा हो सकता है. साथ ही कटरा विद्युत वितरण केंद्र के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक सोनी और अन्य लोग.

-------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, 

मोबाइल - 7869992139, 9589152587

Sunday, April 8, 2018

बिजली कंपनी की आग ने खाक कर दिया किसान की खड़ी फसल (मामला गंगेव ब्लॉक रीवा के पनगड़ी खुर्द पंचायत अंतर्गत कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ की फसल और कृषि उपकरणों का)

दिनाँक 09 अप्रैल 2018, स्थान - लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी) 

   बिजली कंपनी की लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैय्या एक बार फिर उजागर हुआ है. मामला है ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत पनगड़ी खुर्द पंचायत का जहां पर कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ फसल में बिजली के झूलते हुए तारों में स्पार्किंग की वजह के आग लग गई और देखते ही देखते डेढ़ एकड़ की फसल सहित लाखों का घरेलू समान और कृषि उपकरण जिसमे 700 फ़ीट पाइप भी समिल्लित है खाक हो गई. गनीमत यह थी की हो-हल्ला के बाद पूरा हुजूम इकट्ठा हुआ और गांव वालों ने मिलकर मोटर पंप चालू करके पानी की बौछार किये जिससे कुछ हद तक आग में नियंत्रण हो पाया. बताया गया की पूरे गांव में हाई टेंशन लाइन और साथ ही घरेलू लाइन खतरे के निशान के ऊपर हैं और कभी भी मेंटेनेंस का काम नही होने से तार झूल गए हैं और आपस में टच होकर स्पार्क करते रहते हैं जिससे आये दिन इस प्रकार की आगजनी की वारदाते देखी गई हैं. चूंकि गर्मी के मौसम में गर्मी की वजह से आग का ज्यादा प्रकोप बढ़ जाता है इसलिए नुकसानी के तौर पर देखा जाय तो सबसे अधिक समस्या मात्र गर्मियों में ही होती है. ऐसा नही की दूसरे समय आग नही लगती, बल्कि आग लगती रहती है परंतु फसल की वजह से नुकसानी गर्मियों में ज्यादा होती है. 

बिजली विभाग में मेंटेनेंस न हो पाने से झूलते और टूटे तारों की वजह से होती है आगजनी की बारदतें, जिम्मेदारी बिजली कंपनी की अतः भरपाई भी वही करें

 अभी हाल ही में पिछले दिनों कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत डाढ़ पंचायत निवासी सुरेंद्र मिश्रा के फसल से लदे हुए ट्रेक्टर एवं गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी तालाब के नीचे हाई टेंशन लाइन में स्पार्किंग की वजह से आज लग गई थी जिसमे दोनो ही जगहों में गरीब किसानों का भारी नुकसान हुआ है. अब यह पनगड़ी खुर्द का एक और नया मामला आ गया जिसमे किसान कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की डेढ़ एकड़ के आसपास फसल सहित लाखों का कृषि उपकरण जलकर खाक हो गया. 

    पनगड़ी पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा जानकारी दी गई की पीड़ित किसान ने लालगांव विद्युत वितरण केंद्र एवं थाने में जानकारी दे दी है और साथ ही बिजली विभाग को भी पार्टी बनाकर क्लेम की माग की है. अभी जांच चल रही है और आगे की मुआबजा संबंधी प्रक्रिया प्रगति पर है.

पुलिश और फायर ब्रिगेड पहुचा घटना के बाद , समस्या की गंभीरता को देखते हुए गर्मी के चार महीनों में हर पंचायत स्तर पर होने चाहिए अग्निशमन वाहन

   जैसा की ज्यादातर मामलों में होता आया है की भीषण आगजनी की घटनाओं में ग्रामीण स्तर में अग्निशमन विभाग समय पर नही पहुच पाता है इसका कारण पहले भी बताया गया है की मात्र आसपास बैकुंठपुर, मऊगंज, एवं मनगवां में काफ़ी दूर अग्निशमन की गाड़ियां होने से कम से कम 1 से 3 अथवा अधिक तक का समय लग जाता है और इतने समय में सब कुछ साफ हो जाता है. इसलिए आज यह अति आवश्यक है की सभी थानों और चौकियों में अग्निशमन यंत्रों से सुसज्जित अग्निशमन वाहन अनिवार्य होना चाहिए जिससे इस प्रकार की आपदा में और विशेष तौर पर गर्मियों में आपदा प्रबंधन के काम में तेजी आ सके. कहना यहां तक पड़ेगा की प्रत्येक पंचायत में गर्मियों के विशेष सीजन में आग से बचने के विशेष उपाय किये जाने चाहिए जिसके लिए शासन स्तर से बजट का प्रावधान होना चाहिए. मार्च से जून महीने तक चार महीने पकी हुई फसल का सीजन होता है और इसी मौसम में सबसे ज्यादा आगजनी की वारदातें रिपोर्ट की जाती हैं अतः सरकार को चाहिए की गर्मियों में हर पंचायत स्तर पर आगजनी से निपटने के विशेष प्रावधान किये जाएं. अग्निशमन संबंधी वाहनों को किराए से लेकर हर चार से पांच पंचायत के मध्य गर्मियों के चार महीनों के लिए स्थापित किये जाने चाहिए और इस प्रकार की विशेष परिस्थितयों में तत्काल सहायता उपलब्ध करवाई जानी चाहिए.

   पुलिस के विषय में बताया गया की डायल 100 में कॉल किया गया था और पुलिश भी घटनास्थल पर काफी दर से पहुची थी. इतने में उपस्थित ग्रामीणों ने मोटर पंप आदि के माध्यम से आग पर नियंत्रण पाने और फैलने से रोकने में सफलता पाई थी. फिर भी आनन फानन में हवा की वजह से आग लगभग डेढ़ एकड़ के खेत में फैल गई और सब कुछ देखते ही  देखते साफ हो गया.

संलग्न - पनगड़ी किसान कमलेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की आग से ध्वस्त फसल का फ़ोटो.

----------

शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587

रीवा विद्युत विभाग की धांधली - न कोई मेंटेनेंस न कोई केबलीकरण, हर स्थान पर बिजली के तार खतरे के निशान में, अगडाल/गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी में भी हाई टेंशन लाइन के झूलते हुए तारों से किसान की फसल में लगी आग, सब जलकर खाक


दिनाँक 08 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

    ज़िले में बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार के चलते बिजली के तारों से आगजनी की वारदाते रुकने का नाम नही ले रही हैं. अभी पिछले दिनों अकलसी ग्राम में अकलसी तालाब के पश्चिम दिशा में भूतपूर्व सरपंच मिथिला प्रसाद पटेल के घर की तरफ जाने वाले रास्ते के पास स्थित खेत में स्पार्किंग और झूलते हुए तारों की वजह सेके आग लग गई थी जिसमे पूरे खेत भर में लगी फसल आग के हवाले हो गई. किसी प्रकार ग्रामीणों ने बड़े मुश्किल से आग पर काबू पाया नही तो आसपास के खेत भी साफ हो जाते. यह आग पास ही खेत के बीचों बीच स्थित हाई टेंशन लाइन के मात्र 10 फ़ीट से भी काम ऊंचाई पर झूलते हुए तारों से स्पार्किंग और गुल्ल गिरने की वजह सेके लगी थी. इसमे किसी भी किसान का कोई दोष नही था और मात्र बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार की वजह सेके ऐसे हादसे आये दिन रिपोर्ट किये जा रहे हैं. 

    मेंटेनेंस और केबलीकरण न होने के कारण बनी है समस्याएं 

   यदि गहराई से देखा जाए तो पता चलेगा की यहाँ कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वआले ज्यादातर ग्रामों में ऑन रिकॉर्ड मेंटेनेंस और केबलीकरण के काम हो चुके हैं परंतु वास्तविक धरातल पर कहीं कोई काम पिछले दशकों से नही हुआ जिसकी वजह के मेंटेनेंस के अभाव में होम लाइन और साथ ही हाई टेंशन लाइन के ज्यादातर खंभे टेढ़े हो गए हैं कहीं जरूरत से ज्यादा झुक गए हैं और इसी प्रकार विद्युत तार भी कमज़ोर होकर खतरे के निशान के बहुत बाहर हो चुकले हैं जिसकी वजह से तार आपस में लड़ते रहते हैं और स्पार्किंग की वजह से आग लगने के चान्सेस बढ़ जाते हैं. दूसरे मौसम में भी आग लगती रहती है परंतु नुकसानी सबसे ज्यादा फसली सीजन में ही होती है जिसमे किसानों की पकी फसल देखते देखते स्वाहा हो जाती है. 

    अभी दिनाँक 06 अप्रैल की शाम 7 बजे के आसपास इसी प्रकार की एक घटना में त्योंथर ब्लॉक एवं डाढ़ पंचायत के सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा की ट्रेक्टर से लदी हुई गेंहूँ की फसल में आग लगने से पूरी फसल सहित ट्रेक्टर भी जल गया था.

    मेंटेनेंस एवं केबलीकरण का मुद्दा इसके पहले भी कई मर्तबा उठाया जा चुका है लेकिन कटरा विद्युत वितरण केंद्र सहित पूरे रीवा के बिजली विभाग के कानों में जूं तक नही रेंग रही है जिसका खामियाजा आम नागरिक और किसान उठा रहे हैं और बिजली की आग से अपनी खड़ी फसल खाक होतई देख रहे हैं. 

  यदि यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले कुछ सप्ताह में ऐसे कई बारदतें और भी सामने आ सकती हैं. बिजली विभाग को मेंटेनेंस की राशि का सही और समुचित उपयोग कर हर ग्राम क्षेत्र में बिजली के तारों और खंभों को दुरुस्त किया जाना चाहिए और साथ ही केबलीकरण के नाम पर जो धांधली विद्युत वितरण कंपनी और साथ ही ठेकेदारों द्वारा की गई है उसकी सही जांच कर पूरी रिकवरी होनी चाहिए.

संलग्न - कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत अगडाल/गढ़ फीडर में आने वाले अकलसी ग्राम के किसान के खेत में हाई टेंशन लाइन की वजह से लगी आग का दृश्य.

----------

शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र.

मोब 07869992139

Wednesday, January 24, 2018

Rewa, MP - बिजली विभाग का बिल नही फतवा, जारी हुआ तो भरना ही पड़ेगा

दिनांक 25 जनवरी 2018, रीवा/कटरा मप्र
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) ज़िले में बिजली विभाग का कहर निरंतर जारी है। कटरा डीसी सहित अन्य वितरण केंद्रों में बिना कनेक्शन और मीटर बैठाए ही औसत बिलिंग की जा रही है। हफ्ते की तरह उपभोक्ताओं से उगाही की जा रही है।
    अभी हाल ही में सूचना मिलने पर त्योंथर तहसील एवं ब्लॉक के जमुई पंचायत में पहुचा गया तो पाया गया कि जमुई ग्राम के हरिजन आदिवासी बिजली विभाग के औसत बिलिंग से परेशान थे। सभी ने अपना बिजली का बिल दिखाया और बताया कि राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन के तहत उनके घरों में बकायदे मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन दिया जाना था लेकिन बिजली ठेकेदार द्वारा उल्टा सभी से 100 रुपये प्रत्येक के हिसाब से लिये गए और केवल कुछ घरों में खराब मीटर का डिब्बा तो बिठा दिया गया लेकिन उन्हें कोई कनेक्शन नही दिया गया।
     आज 6 माह से ऊपर हो रहे हैं और औसत बिलिंग की जा रही है लेकिन किसी भी घर मे मीटर से लाइन सप्लाई नही हो रही है।
     अब यदि देखा जाए तो यह किस्सा मात्र कटरा डीसी अथवा जमुई ग्राम का ही नही है बल्कि रीवा के बिजली विभाग में आम व्यक्ति का निरंतर शोषण चल रहा है। लगभग सभी ग्रामों में निवासरत गरीबों के यहां मुश्किल से 1 य 2 एल ई डी बल्ब और वह भी रात में जलते हैं, साथ ही ग्रामों में बड़े ही मुश्किल से 6 से 8 घंटे भी लाइन नही दी जाती ऐसे में लाइन लॉस और औसत बिलिंग के नाम पर गरीबों के नाम हज़ारों का फतवा जारी करना कहां तक उचित है।
     कटरा डीसी में पूरे जिले के ग्रामों की ही तरह 90 प्रतिशत से अधिक घरों में मीटर नही लगाए गए हैं और मात्र औसत बिलिंग की जा रही है। केबलिकरन, फीडर सेपरेशन और मीटर बैठाने की पूरी राशि हजम कर ली गई है।
     जहां तक जमुई ग्राम के हरिजन अदिवशिओं का मामला था उनका कहना था कि उन्होंने तो अब तक कोई बिजली ही नही जलाई है फिर भी उनके नाम पर कैसे बिजली बिल भेजे जा रहे हैं
    हरिजन  बस्ती के लालमणि, रामसखा, रमेश, उमेश, दिलराज, सूर्यभान, रामावतार, रामकरण आदि ने बताया कि वह सभी बिना मीटर रीडिंग के औसत बिलिंग से पीड़ित है  और सभी ने यह बात कटरा डीसी में उठाई है लेकिन कोई नही सुन रहा और बस मनमाना बिल भेजे जा रहे है। सभी ने एक स्वर में सभी घरों में मीटर लगाकर रीडिंग के आधार पर बिलिंग की माग की है।
संलग्न - हरिजन बस्ती जमुई के हरिजनों की सामूहिक फ़ोटो जो बिजली बिल से प्रताड़ित है।
    - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक आर टी आई कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139