Showing posts with label Corruption. Show all posts
Showing posts with label Corruption. Show all posts

Tuesday, August 28, 2018

गंगेव बाजार सड़क की ठेकेदार ने कर दी तेरही, चल रही बरसी की तैयारी, तिथि के बाद सड़क पहुच जाएगी "गया" ( मामला ज़िले से गुजरने वाली मनगवां चाकघाट वाया गंगेव गढ़ हाईवे सड़क का जिसको एमएस कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी ने बरसात के मौसम में खोद डाला, अब हो रही रोज दुर्घटनाएं, शासन प्रशासन विकाश रथ में व्यस्त)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले की मनगवां से चाकघाट से गुजरने वाली गंगेव गढ़ होते हुए हाईवे सड़क की स्थिति दयनीय बन चुकी है. गंगेव बाजार में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी एमएस कंस्ट्रक्शन द्वारा सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया है जिससे आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. निरंतर इस बात को मीडिया के समक्ष रखे जाने के बाद भी शासन प्रशासन अपनी चिरनिद्रा से नही जाग पा रहा है.

  बंसल ग्रुप कंपनी ने बरसात आते ही खोद डाली हाईवे

   मनगवां से चाकघाट वाली हाईवे सड़क के निर्माण का कार्य दिलीप बिल्डकॉम के बाद कुछ भाग को एमएस कंस्ट्रक्शन को दिया गया है लेकिन कार्य को सही तरीके से सुपरवाइज़ न कर पाने की वजह से बरसात के मौसम में ही गंगेव की सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया. अब जब बरसात आ गई तो काम को बन्द कर दिया गया जिससे सड़क के पश्चिम दिशा में एक तरफ सड़क गहरी खायीं में बदल चुकी है. जब कोई वहां सड़क पर चलता है तो मानो एक तरफ ऊंचा टीला रहता है तो दूसरी तरफ खायीं बनी रहती है ऐसे में मात्र एक तरफ से ही वहां निकल सकते हैं. यदि कोई वाहन अथवा बाइकर्स दूसरी तरफ से आ रहा है तो उसे खायीं की तरफ जबरन और मजबूरन घुसना पड़ता है जिससे फिसलन और ऊबड़ खाबड़ होने की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं. अभी कुछ दिन पहले दुर्घटना के कारण कई पशु भी अपनी जान दे चुके हैं. आम बाइकर्स और वाहनों का फिसलन और एक्सीडेंट तो आम बात है.

जल्दी बनाई जाए गंगेव बाजार की सड़क

   जब इस संदर्भ में आसपास के रहवाशियों से संपर्क किया गया तो विष्णु पटेल द्वारा बताया गया की उनके द्वारा इस मुद्दे को निरंतर उठाया जा रहा है लेकिन इसकी सुनवाई नही हो रही है. गंगेव में दुकान चला रहे बसौली के बबलू सिंह ने बताया की गंगेव से बसौली जाते समय ऐसा लगता है की कब कोई दुर्घटना हो जाए और कब जान पर बन आये. इसी तरह गंगेव जनपद और कृषि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि उन्हें रोज ही बैतरणी पार करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर सभी ने एक स्वर में बताया की इस सड़क को जल्दी दुरुस्त किया जाय वरना हम सब मिलकर गंगेव बाजार के बीचोंबीच चक्का जाम करेंगे जिसकी जबाबदेही मात्र शासन प्रशासन की होगी. 

    इस बीच खुलासा न्यूज़ लाइव के ज़िला ब्यूरो चीफ आनंद द्विवेदी ने बताया की हम लगभग सप्ताह में दो दिन गंगेव आते हैं और पाते हैं की जिस दिन बारिश हुई होती है उस दिन इस लगभग दो किमी बंसल ग्रुप द्वारा उखाड़ी गई सड़क पर चलना काफी मुश्किल होता है. किसी प्रकार से इससे पार जाने पर ईश्वर को शुक्रिया अदा करते हैं की आज तो जान बचा लिया.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखें गंगेव से होते हुए गढ़ मार्ग की मनगवां के चाकघाट हाईवे सड़क को किस प्रकार से वर्तमान निर्माण एजेंसी ने खोदकर नष्ट कर दिया है.

----------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, ज़िला रीवा मप्र,

मोबाइल 7869992139, 9589152587

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2122633094645561&id=100006966720612

Wednesday, June 27, 2018

बिजली कर्मचारियों की ईपीएफ वेतन कटौती 6 वर्षों से नही पहुच रही खातों में (मामला ज़िले के त्योंथर संभाग मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के बिजली कर्मचारियों का)

दिनांक 28 जून 2018, स्थान - कटरा, रीवा-मप्र,

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा ,मप्र)

    ज़िले के बिजली कर्मचारियों की उनकी ईपीएफ के वास्ते काटी जाने वाली वेतन की राशि उनके ईपीएफ खातों में नही पहुच रही है ऐसा कहना है लगभग आधा दर्जन बिजली कर्मचारियों का. बता दें की प्राप्त जानकारी के अनुसार रीवा संभाग में पदस्थ रहे बिजली कर्मचारियों जिनमे सहायक ग्रेड 3 के कर्मचारी क्रमसः आशुतोष मिश्रा, इंद्रमणि सिंह, लक्ष्मी नारायण शर्मा, भूपेंद्र सिंह सेंगर, कनिष्ठ यंत्री लालगांव उमाशंकर द्विवेदी, एवं अन्य दो कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह कुशवाहा और कटरा में पदस्थ भूपेंद्र सिंह बघेल सम्मिलित हैं जिन्होंने बताया की उनकी वर्ष जुलाई 2012 से ईपीएफ की वेतन कटौती की राशि उनके खातों में नही पहुची है. सभी कर्मचारियों के लिए यह एक चिंता का विषय है क्योंकि इसके लिए उन्होंने संबंधित अधीक्षण यंत्री के नाम और कलेक्टर को भी लिखित शिकायत दे रखी है लेकिन अब तक जब सुनवाई नही हुई तो सभी ने सामूहिक रूप से इकठ्ठा होकर मामला मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से रखना उचित समझा. सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को अपनी व्यथा बताते हुए उपरोक्त कर्मचारियों ने बताया की हम सब कर्मचारी मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड त्योंथर संभाग के अधीनस्थ कार्यरत हैं जिन्हें ग्राम सेवा सहकारी समिति मर्यादित से मंडल कंपनी में सम्मिलियन किया गया है. बताया की आज दिनांक तक ईपीएफ की राशि की कटौती की जा रही है लेकिन राशि उनके खाते में नही आ रही है. कई बार लिखित एवं मौखिक रूप से कार्यपालन अभियंता, संभागीय लेखापाल से शिकायत की गई लेकिन आश्वासन के शिवाय कोई पुख्ता कार्यवाही अब तक नही हुई है. 

     इस प्रकार दिनांक 28/06/2017 को आवक क्रमांक 07 कार्यालय अधीक्षण यंत्री, दिनांक 04/07/2017 कार्यालय कार्यपालन अभियंता, दिनांक 13/07/2017 को एक अन्य संबंधित कार्यालय में इन उपरोक्त पीड़ित कर्मचारियों ने संलग्न शिकायती आवेदन लगाकर गुहार लगाई है की यदि अचानक इन कर्मचारियों की मृत्यु हो जाती है तब इन सबका परिवार इधर उधर भटक कर दाने दाने के लिए मोहताज़ होगा जिसकी तत्काल सुनवाई की जाए.

कर्मचारियों की ईपीएफ उनके खातों में न भेजना मानवाधिकार का हनन

    यदि देखा जाए तो हर एक नागरिक का अधिकार बनता है की सरकार द्वारा संवैधानिक रूप से प्रदत्त सभी लाभ नियमानुसार उसे मिले. इसके अतिरिक्त भी यदि समाज और किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का हनन हो रहा हो जिसकी जिम्मेदार स्वयं सरकार हो तो ऐसे मामलों में सरकार को तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता होती है. सामान्य तौर पर गैर सरकारी कर्मचारी अथवा बेरोजगार आम नागरिक के मानवाधिकार की रक्षा जिसका कोई आधार न हो सर्वोपरि होती है परंतु जहां  तक मानवाधिकार हनन की बात है वह सभी नागरिकों के लिये समान रूप से लागू होता है. चाहे वह किसी जाति वर्ग का हो सरकारी हो गैर सरकारी हो धनवान हो अथवा गरीब. यदि मानवाधिकारों का हनन हो रहा है तो उसकी सुरक्षा की जानी अनिवार्य है.

बिजली कर्मियों के मानवाधिकार की हो सुरक्षा

     बिजली कर्मचारियों को उनके ईपीएफ के फण्ड से वंचित रखा जाना मूलभूत मानवाधिकारों का हनन की संज्ञा में आता है. जुलाई वर्ष 2012 से बिजली कर्मियों के ईपीएफ खातों में वेतन कटौती की राशि क्यों नही पहुच रही और इसका क्या कारण है इस पर तत्काल कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है. यदि बिजली कर्मचारियों को उनकी ईपीएफ राशि व्याज सहित नही मिलती तो उनके बाल बच्चे परेशानी का सामना करेंगे. जिस प्रकार से बिजली कर्मियों द्वारा अपने आवेदन में भी उल्लेखित किया गया की यदि अकस्मात उनकी मौत हो जाती है तो उनके परिवार बाल बच्चों की बदहाली का जिम्मेदार कौन होगा. 

यदि सरकारी कर्मचारियों की यह हालात तो आम नागरिक का क्या

    सही मायने में प्रशासनिक व्यवस्था में आज जिस प्रकार की अव्यवस्था छाई हुई है इसको तो देखकर यही लगता है की आम नागरिक की दुर्दशा और अधिक बढ़ेगी. जब सरकारी कर्मचारी अपने अधिकार नही हाशिल कर पा रहे तो आम नागरिक जिसका की कोई आधार भी नही और कोई प्रशासनिक अधिकारी भी उनका सहयोगी नही ऐसे में वह अपने मानवाधिकारों की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे यह बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है.

    वहरहाल आज दिनांक तक त्योंथर संभाग बिजली कार्यालय के अधीनस्थ पदस्थ लगभग आधा दर्जन बिजली कर्मचारियों को उनका जुलाई वर्ष 2012 अर्थात 6 वर्ष के आसपास की ईपीएफ राशि उनके खातों में समायोजित नही हुई है और अभी कर्मचारी अपने अधिकारों को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं. अब देखना यह होगा बिजली विभाग स्वयं अपने ही कर्मचारियों के साथ कब तक न्याय कर पाता है.

संलग्न - संलग्न प्रपत्रों में देखें उपरोक्त शिकायती आवेदनों की फ़ोटो प्रतियां संलग्न है.

-----------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला - रीवा मप्र, मोब 07869992139, 09589152587

Tuesday, May 1, 2018

गढ़ सहकारी बैंक में अव्यवस्था का दौर जारी (मामला ज़िले के केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ का, जहां किसानों और उपभोक्ताओं की समस्या का नही हो रहा निराकरण)

दिनांक 01 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   सहकारी बैंकों की कार्यप्रणांली पर पहले ही बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो चुका है. ज़िले के डभौरा और पनवार सहकारी बैंकों और समितियों में पिछले वर्षों हुए घोटाले ने सबकी आंखें खोल दी है. 

   आज बैंकिंग सिस्टम घोटालों का सिस्टम बन गया है. आये दिन किसी न किसी बैंक का फ्रॉड सामने आ रहा है जिसमे कोई न कोई व्यक्ति अरबों खरबों का घोटाला करके देश छोड़ कर भाग रहा है. 

        घोटालों से इतर बात करें तो बैंकों में व्यवस्था को लेकर भी बहुत बड़ा प्रश्न है. चाहे शहरी हो या ग्रामीण हर बैंक में आज उपभोक्ताओं की लंबी लंबी कतार देखी जा सकती है और व्यवस्था के नाम पर कहीं कुछ नही, जबकि देखा जाए तो हर एक सेवा के लिए उपभोक्ताओं को शुल्क देना पड़ता है। आज यदि ईमानदारी से सर्वे किया जाय तो ज़िले क्या पूरे प्रदेश के बैंकों में बहुत ही कम स्थानों पर गर्मियों में पानी की समुचित व्यवस्था, बैठने का समुचित स्थान, पंखे, कूलर वगैरह पाए जाएंगे. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों की तो और भी आधिक दुर्दशा है. यहां तो सारी व्यवस्था भगवान भरोसे ही टिकी होती है.

  ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में नही है इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर 

    यदि अकस्मात बिजली चली जाए तो ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में बिना विद्युत के काम करने का कोई साधन मौजूद नही है. उपभोक्ता शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा मोबाइल फोन और व्हाट्सएप्प के माध्यम से जानकारी दी गई की अभी काफी लंबी छुट्टियों के बाद दिनांक 01 मई को खुले केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक गढ़ में शुबह से ही बिजली गुल हो गई और किसान और दूसरे उपभोक्ता परेशान हो गए. बताया गया की एक वृद्ध किसान उपभोक्ता को तो गर्मी के कारण चक्कर भी आ गया जिसे पास ही लोकल डॉक्टर की क्लिनिक में भर्ती कराया गया तब जाकर उसे होश आया.

   गढ़ सहकारी बैंक में बिजली गुल होना आम बात

   ज़िले के केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा गढ़ में रोज रोज बिजली गुल होना एक आम बात है. यहां कभी कभी तो पूरे दिन भी बिजली गुल रहती है. बिजली वितरण केंद्र कटरा डीसी में संपर्क करने पर बताया जाता है की मेंटेनेंस का काम चल रहा होता है. इनका मेंटेनेंस कभी खत्म ही नही होता जबकि लाइन की समस्या हमेशा ही बनी रहती है. देखा जाए तो मेंटेनेंस वगैरह तो कहीं वर्षों से नही हुए हैं क्योंकि टूटे झूलते तार और खंभे इसके जीवंत उदाहरण है पर मेंटेनेंस के नाम पर ये बिजली कंपनी लाइन कटौती जमकर कर रही है.

किसानों ने गिनाई दर्जनों समस्याएं

    दिनांक 01 मई श्रमिक दिवश के दिन बैंक की गढ़ शाखा में उपस्थित किसानों जिनमे मुख्य रूप से रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि मौजूद थे जिहोने बताया की वह लगभग हर दिन बैंक के चक्कर लगाते हैं लेकिन उन्हें अपने गेहूं धान के पैसे नही दिए जा रहे हैं. बैंक में आते हैं तो बताया जाता है की आज नही कल आईये हमारे पास कैश नही है. किसानों ने बताया की यदि वह 10 हज़ार रुपये का निकासी फॉर्म भरते हैं तो उन्हें मात्र 2 हज़ार रुपये दिए जाते हैं.

  पेयजल, पंखे और बैठने तक की नही कोई व्यवस्था 

   सभी किसानों ने एक स्वर में बताया की बैंक के अंदर न तो पेयजल की कोई व्यवस्था है और न ही उठने बैठने की, साथ ही यह भी बताया की बैंक में आज तक उनके बैंक पासबुक में प्रिंटिंग तक नही की गई है. जब कभी प्रिंटिंग की बात करते हैं तो बताया जाता है की प्रिंटर खराब है और रीवा बनने को भेजा है जिससे किसानों को उनके जमा निकासी की समुचित जानकारी नही मिल पाती.

समिति प्रबंधक कर रहे मनमानी 

    किसानों द्वारा बताया गया की समितियों के खरीदी केंद्रों में 15 दिन पहले गेहूं दिए थे लेकिन सहकारी बैंक में डीएमआर खाता होने के वावजूद भी उनके एकाउंट में गेंहूँ  के पैसे नही डाले गए हैं. किसानों रामशंकर मिश्रा और अमरनाथ मिश्रा ने बताया की उनके घर में कई कार्यक्रम हैं जिसमे पैसे की जरूरत थी और बैंक पऔर समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से गेहूं का पैसा खातों में डालने में हीलाहवाली की जा रही है और आज से कल किया जा रहा है साथ ही जिनके खातों में पैसे डले हुए हैं उन्हें पैसा नही दिया जा रहा है जिससे उनके कार्यक्रम में नोटबन्दी जैसी स्थिति निर्मित हो गई है जैसे पिछले साल नोटबन्दी के समय पर पैसों की भारी किल्लत हो गई थी.

   किसानों के खातों में पैसे नही भेजे तो होगा आंदोलन 

   केंद्रीय जिला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में उपस्थित किसानों ने बताया की यदि उनके खातों में गेंहूँ के पैसे अगले दिन तक नही भेजे गए और उनको अपने खातों की पूरी राशियां उनकी अवस्यक्तानुरूप नही मिली तो उपस्थित किसान रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि किसानों ने बताया की वह सब आंदोलन करने पर मजबूर होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी।

किसानों ने की सहकारी बैंक गढ़ में इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर की माग

   उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर में माग की यदि रोज रोज़ बिजली की किल्लत बनी रहती है तो बैंक प्रबंधन को चाहिए की इन्वर्टर अथवा जनरेटर की व्यवस्था कराए. किसानों ने बताया की आखिर इतना बड़ा बैंक है जिसमे नौ सहकारी समितियों से संबंधित किसानों के खाते हैं और इतना अधिक लेनदेन हो रहा है, हज़ारों डीएमआर खाते खोले जा चुके हैं तो यह कैसे हुआ की इनके पर एक इन्वर्टर और जनरेटर लेने तक की व्यवस्था नही है. सभी किसानों ने बताया की बैंक कर्मचारियों का काम न करने का यह बहाना मात्र है जिसमे कभी लाइन, तो कभी प्रिंटर खराब तो कभी सर्वर की प्रॉब्लम बता कर अपनी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में ज़िला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा गढ़ में अव्यवस्था का दौर जारी।

----------------------

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Monday, April 23, 2018

कैथा अगडाल पीएम सड़क की हुई एस क्यू एम जांच, बताया सब ठीक है, बोला जाकर पी डब्लू डी सड़कें देख लें (मामला मऊगंज पीएमजीएसवाई अंतर्गत आने वाली अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क का जिसकी गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठाये जा रहे थे)

दिनांक 23 अप्रैल 2018, गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क विभाग अंतर्गत आने वाले गंगेव ब्लॉक की स्टेट क्वालिटी मॉनिटर एवं नेशनल क्वालिटी मॉनिटर के द्वारा समय समय पर जांच होती रहती हैं लेकिन यह जांचें ज्यादातर कागजों पर ही होती हैं. इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता. क्योंकि यदि वास्तविकता से कोई लेना देना होता तो इस योजना के अंतर्गत बनाई जाने वाली सड़कों की गुणवत्ता में कोई तो परिवर्तन दिखता. यहां तो जांच में सब कुछ पहले से ही ठीक बताया जा रहा है. अर्थात मैच फिक्स्ड है, बॉलिंग करते रहने से कोई लाभ नही है. बैट्समैन नॉटआउट ही रहेगा और ओवर पूरे होने के पहले ही ठेकेदारों द्वारा पीएमजीएसवाई का मैच जीत लिया जाएगा.

तीन जगहों पर सड़क खोदा और हो गया काम पूरा

   भोपाल से आये एस क्यू एम आर पी शर्मा ने अगडाल से कैथा पीएम सड़क को तीन स्थानों पर खुदवाया जिसकी तस्वीर भी सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ली गई है. इन तीनों स्थानों पर जो देखने को मिला वह बड़ा ही अजीब था. यह बात समझ के परे थी की खोदे गए मटेरियल के अनुपात के विपरीत कहीं उससे कई गुना ज्यादा मटेरियल का ढेर क्यों लगाया गया था इसी से काफी हद तक संदेह जाहिर हुआ. आखिर जब एक तगाड़ी डब्लू एम एम की खुदाई हुई थी तो दस तगाड़ी का ढेर क्यों लगाया गया था? लगे ढेरों को गौर के देखने पर पता चला की कहीं बाहर से या यूं कहें की अपने साथ गाड़ी में लाये गए 40 एमएम, 20 एमएम, गिट्टी और बालू को एकत्रित करके उनके अलग अलग अनुपात में फ़र्ज़ी तरीके से ढेर लगाकर फ़ोटो ले लिए गए थे. वास्तव में ढेर लगा हुआ मटेरियल उस सड़क के खोदे गए भाग का था ही नही जिसका की पुख्ता प्रमाण इसी से लग गया की जितनी सड़क की खोदाई से मटेरियल निकला था वह वहां अलग ढेर लगाए गए मटेरियल से 10 गुना कम था. तब इतना मटेरियल कहाँ से आया? वहां तो साइड में मोरम डाली हुई थी तो इसका मतलब यह हुआ की चलाई के नाम पर इन्होंने अलग से लाया हुआ अच्छा मटेरियल फ़ोटो खींचने के लिए और ऊपर तक भेजने के लिए बाहर से ही लाया था. तो ऐसा है यह पूरा फर्जीवाड़ा. सबसे बड़ी बात तो यही है की जब एस क्यू एम आर पी शर्मा स्वयं यह बोल ररहे हैं की आप प्रधानमंत्री सड़क के ही पीछे पड़े हो जाकर पी डब्लू डी की सड़क देखो तो पता चले की पीएम सड़क कितनी अच्छी बन रही है. इसी बात से समझ आता है की इनको क्वालिटी की नही पड़ी है मात्र यह तुलनात्मक काम देख रहे हैं की यदि पी डब्लू डी सड़क में भष्ट्राचार है तो उसे देखा जाए न की इनके स्वयं  के भष्ट्राचार को. मतलब ध्यान बांटने का प्रयाश है की इनके काम को कोई ध्यान न दे. ऐसे स्टेट क्वालिटी मॉनिटर टीम का क्या औचित्य बनता है जो जनता के सवालों का जबाब भी न दे जबकि जनता के लिए बनाई गयी सड़क को चेक करने के लिए आये हैं. इनको रिटायरमेंट के वावजूद भी सरकार काम में लगाकर पैसा दे रही है और यह भस्ट्राचारी जनता को उल्टा पुलटा जबाब देकर फुर्सत होना चाह रहे हैं.

    एस क्यू एम आर पी शर्मा ने  बताया सब कुछ एक नंबर का है, आप जाके पी डब्लू डी की सड़कें देखिए

     जांच दल में आये कोई आर पी शर्मा ने बताया की हमने पीएम सड़क को खोदकर देख लिया है सड़क बिल्कुल एक नंबर की है जिसमे किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नही है. हमने पूरे स्टेट की सड़कों को देखा है और सब सड़कें सही हैं, विशेष कर रीवा की पीएम सड़कें बिल्कुल दुरुस्त हैं. और आपकी कैथा से अगडाल पीएम सड़क में तो कोई खराबी है ही नही.

     ऐसा लगा सब पहले से ही फिट था. जबकि देखा जाए तो लौरी नंबर 3 के निवासी योगेंद्र शर्मा के घर के पास ट्रांसफार्मर के पास की रोड बनने के 21 दिन के भीतर ही उखड़ गई थी जिसकी की शिकायतें तो हुईं ही साथ ही न्यूज़पेपर में भी मामले को रखा गया था. इसी प्रकार बिना 8 टन का ही वाहन चले ही साइड से इस सड़क में जगह जगह दरारें आ चुकी है।

देखिए स्टेट क्वालिटी मॉनिटर की तरफ से आये अधिकारियों ने क्या कुछ कहा

1) "आपके प्रश्नों का कोई अंत नही है अतः सबका जबाब तो हम नहीं दे पाएंगे पर आपको बता दें की अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क बहुत ही अच्छी बनायी गई है. हमने अपने लेवल पर इसकी जांच की है जो हमे सही मिली. सैंपल और डेटा इकट्ठा कर लिया है आगे भेज दूंगा. मैं स्टेट क्वालिटी मॉनिटर टीम से हूँ जो पूरे देश के रिटायर्ड अधिकारियों की बनाई जाती है. रीवा में जांच करने के लिए मुझे भेजा गया है. आपको इस सड़क की प्रसंसा करनी चाहिए की इतनी सुंदर सड़क बनाकर दी जा रही है." - आर पी शर्मा, स्टेट क्वालिटी मॉनिटर प्रमुख, भोपाल, मप्र

-----------------------------------------

2) " देखिए द्विवेदीजी हम तो आप के बीच के ही हैं. हमारी तो आपसे हर दूसरे तीसरे दिन बात होती रहती है. हम कल आकर मामले को समझ लेंगे. आज आप जांच कर लेने दीजिये, यह टीम एस क्यू एम की है जो सीधे भोपाल से आई हुई है. यह रूटीन जांच है. इसके बाद हम कल आते हैं और आगे सड़क में क्या गड़बड़ी है उसको देखते हैं. वैसे हमारी तरफ से पूरे प्रयास किये जा रहे हैं की ठेकेदार मनमानी न करने पाएं." - उपयंत्री अमित गुप्ता, पीएमजीएसवाई, मऊगंज, रीवा मप्र

------------------------------------------------

3) "हम एक टीम लीडर की हैसियत से आये हैं. हम सड़क की जांच करने समय समय पर आते हैं. हमे सूचना थी की स्टेट क्वालिटी मॉनिटर की टीम आ रही है अतः उसके सदस्यों के साथ हम आये हैं. डामरीकृत सड़क की विभिन्न परतों को खोदकर हम उसमे हर एक की मात्रा देखते हैं की उसमे कितना 40 एमएम, कितना 20 एमएम की गिट्टी है और उसमे कितना बालू या जीएसबी मिला होता है. साथ ही एक विशेष मसीन में हम डामर की परत को घोल बनाकर डालते हैं और देखते हैं की डामर वगैरह का सही अनुपात है की नही. इस मसीन में यही किया जा रहा है" - महेंद्र सिंह, टीम लीडर (टीएल) पीएमजीएसवाई, मऊगंज, रीवा मप्र

--------------------------------------------------

4) "कुल मिलाकर रोड में लीपापोती करके मामले को रफा दफा किया जा रहा है. जैसा की आपको भी पता है की कई बार कंप्लेन होने से ठेकेदार का पैसा रोक दिया गया होगा जिससे अब ये अधिकारी जांच करने के लिए आये हैं और लीप पोत करके चले जाएँगे. पूरे देश में तो यही चल रहा है. आखिर स्टेट क्वालिटी मॉनिटर हमारे बताए हुए स्थान पर चलकर जांच करें जहां हम दिखाते हैं कितनी घटिया रोड बनाई गई थी. अब देखिए अभी पिछले दौरे में उपयंत्री और जीएम द्वारा बताया गया था की अप्रैल अंत तक का टारगेट दिया हुआ है 7 किमी सड़क बनाने के लिए, अब आज 23 अप्रैल हो चुका है और जीएसबी भी अच्छे से नही डाली गई है. क्या ऐसे ही काम चलेगा. जल्दी जल्दी में फिर घटिया काम करके फुरसत कर देंगे. ठेकेदार बोलते हैं की हमारे बइब्रो और जेसीबी लेबर बारात चले गए हैं. कभी बोलेंगे की जेसीबी खराब है तो कभी बइब्रो खराब है तो कभी डम्पर ही नही है. जब इन ठेकेदारों के पास कुछ नही रहता तो इनको एकसाथ इतने बड़े बड़े ठेके कैसे मिल जाते हैं. चलिए एक ठेका की बात हो तो अलग, इन्हें आधा दर्जन सड़कों को बनाने के ठेके मिले हुए हैं. कैसे और किस आधार पर इनको इनकी क्षमता से अधिक का ठेका मिला. तमाम यही फर्जीवाड़ा चल रहा है और इस पीएमजीएसवाई विभाग की मिलीभगत से होता है चाहे यह सब रीवा से हो रहा या भोपाल या दिल्ली से तमाम यही फर्जीवाड़ा है. पनगड़ी के रहवासी परेशान हैं और उनकी पीएम सड़क आज 6 साल से नही बनी है. कहां गए थे तब यह स्टेट क़्वालिटी मॉनिटर और नेशनल कॉलिटी मॉनिटर? क्या इन्हें तब नही दिख रहा था की काम अधूरा पड़ा हुआ है." - योगेंद्र शर्मा, निवासी लौरी नंबर 3, गंगेव, रीवा मप्र.

-------------------------------------------

संलग्न - कृपया संलग्न देखें अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की जांच करने आये एस क्यू एम आर एस शर्मा की टीम साथ ही तीन जगह खोदे गए गड्ढे और फ़र्ज़ी तरीके से फ़ोटो खींचने के लिए फैलाया गया मटेरियल।

------------------------------

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Monday, February 26, 2018

पनगड़ी प्रधानमंत्री सड़क की घटिया गुणवत्ता की जांच करने पहुचे उपयंत्री परिहार, आर सी सी सड़क उखड़ी मिली साथ ही दोयम दर्जे की उपयोग हो रही निर्माण सामग्री, जारी किया मौखिक वार्निंग (मऊगंज पीएम सड़क प्रोजेक्ट रीवा)

दिनांक 27 फरवरी 2018, स्थान - गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

           प्रधानमंत्री सड़क परियोजना का किस प्रकार मखौल बनाया जा रहा है इसका सीधा सीधा उदाहरण आप मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क के कार्यों में देख सकते हैं। ताज्जुब की बात है कि पनगड़ी पंचायत में दिसंबर 2012 से प्रारंभ की गई प्रधानमंत्री सड़क का कार्य आज दिनाँक तक पूर्ण नही हो पाया है जबकि देखा जाय तो यह कार्य 2013 तक पूर्ण होना था। 

    पनगड़ी पीएम सड़क परियोजना में हो रही हीलाहवाली का सीधा संबंध ठेकेदार और पी एम जी एस वाई के अधिकारियों से है। प्रश्न उठता है कि जब यह सड़क आज तक पूरी नही की गई तो ठेकेदार का ठेका निरस्त क्यों नही किया गया? ऊपर से ऐसे ठेकेदारों को नए नए ठेके देकर इनके मनोबल को बढ़ाया जा रहा है। पता चला कि पनगड़ी ग्राम पंचायत में बनाई जा रही पीएम सड़क का कार्य जिस ठेकेदार को सौंपा गया है वह उत्तर प्रदेश का है जिसके ऊपर कई आपराधिक प्रकारन हैं और कई मर्तबा जेल की हवा भी खाकर आया हुआ है।

   खैर यह तो किसी का व्यक्तिगत मामला है परंतु सबसे बड़ी बात जनता की समस्याओं को लेकर है कि ठेकेदार के जेल जाने के प्रति सहानुभूति रखने वाले प्रधानमंत्री सड़क के अधिकारियों के दिल मे क्या जनता के प्रति थोड़ी भी सहानुभूति नही है। काश यदि इतनी ही सहानुभूति जनता के प्रति होती तो आज यह स्थिति निर्मित नही होती की 10 साल पुराना प्रोजेक्ट आज तक पूरा नही हो पाता। शर्म आनी चाहिए ऐसे अधिकारियों पर की जनता को निरंतर मूर्ख बनाकर उसके पैसे की बर्बादी की जा रही है।

    पनगड़ी उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला की शिकायत पर जांच करने पहुचा प्रधानमंत्री सड़क का उपयंत्री -

      पिछले कुछ सप्ताह से पनगड़ी के उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी से निरंतर यह बात कही जा रही थी कि पनगड़ी प्रधानमंत्री सड़क का कार्य नही किया जा रहा है, गुणवत्ता विहीन और निम्न दर्जे का कार्य हो रहा है। जिस पर मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क के जीएम श्री निगम को कई बार अवगत कराया गया। परंतु निरंतर हो रही हीलाहवाली के चलते जांच में टालमटोल चल रही थी। दिनाँक 26 फरवरी को प्रधानमंत्री सड़क के अधिकारियों का मुहूर्त बना और उपयंत्री परिहार द्वारा मौके पर आकर जांच की गई जिस पर घटिया गुणवत्ता की शिकायत सही पाई गई, आर सी सी सड़क उखड़ी पाई गई। जिसकी पुनः तोड़कर मरम्मत करने को कहा गया। उपस्थित ठेकेदार को उपयंत्री द्वारा समझाइश मात्र दी गई, और किसी प्रकार का नोटिस प्रपत्र आदि कुछ जारी नही किया गया। मौके पर जिस प्रकार प्रधानमंत्री सड़क के अधिकारियों और ठेकेदार के बीच तालमेल देखने को मिला इससे साफ जाहिर था कि यह मैच पहले से फिक्स्ड था। और मात्र जांच के नाम पर कोरम पूर्ति की जानी थी जो हो गई।

    घटिया गुणवत्ता की जांच के दौरान पीएम सड़क उपयंत्री परिहार, ठेकेदार, अन्य कर्मचारियों के अतिरिक्त शिकायतकर्ता शिवेंद्रमणि शुक्ला, सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, रोशन तिवारी, न्यूज़ रिपोर्टर प्रमोद सिंह, श्रीपाल सिंह सहित अन्य कई लोग उपस्थित रहे।

     पनगड़ी उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने अनोखा विरोध प्रदर्शन कर करवाया मुण्डन -

      जांच में हो रही हीलाहवाली और ठेकेदार की मनमानी के चलते पनगड़ी उपसरपंच ने अपना विरोध दर्ज करवाया है और कहा है कि यदि कार्य सही मापदंडों पर और गुणवत्तापूर्ण नही कराया गया तो पनगड़ी पंचायत के लोगों द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। साथ ही अपना विरोध प्रदर्शन करते हुए शिवेंद्रमणि शुक्ला ने अपना सिर का मुण्डन करवा दिया है। लोगों ने यद्यपि इसे अनोखा विरोध बताया।

      संलग्न - पनगड़ी सड़क जाँचस्थल में उपस्थित पीएम सड़क मऊगंज के उपयंत्री परिहार, ठेकेदार, शिकायतकर्ता एवं अन्य लोग।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139

Wednesday, January 24, 2018

Rewa, MP - बिजली विभाग का बिल नही फतवा, जारी हुआ तो भरना ही पड़ेगा

दिनांक 25 जनवरी 2018, रीवा/कटरा मप्र
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) ज़िले में बिजली विभाग का कहर निरंतर जारी है। कटरा डीसी सहित अन्य वितरण केंद्रों में बिना कनेक्शन और मीटर बैठाए ही औसत बिलिंग की जा रही है। हफ्ते की तरह उपभोक्ताओं से उगाही की जा रही है।
    अभी हाल ही में सूचना मिलने पर त्योंथर तहसील एवं ब्लॉक के जमुई पंचायत में पहुचा गया तो पाया गया कि जमुई ग्राम के हरिजन आदिवासी बिजली विभाग के औसत बिलिंग से परेशान थे। सभी ने अपना बिजली का बिल दिखाया और बताया कि राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन के तहत उनके घरों में बकायदे मीटर लगाकर बिजली कनेक्शन दिया जाना था लेकिन बिजली ठेकेदार द्वारा उल्टा सभी से 100 रुपये प्रत्येक के हिसाब से लिये गए और केवल कुछ घरों में खराब मीटर का डिब्बा तो बिठा दिया गया लेकिन उन्हें कोई कनेक्शन नही दिया गया।
     आज 6 माह से ऊपर हो रहे हैं और औसत बिलिंग की जा रही है लेकिन किसी भी घर मे मीटर से लाइन सप्लाई नही हो रही है।
     अब यदि देखा जाए तो यह किस्सा मात्र कटरा डीसी अथवा जमुई ग्राम का ही नही है बल्कि रीवा के बिजली विभाग में आम व्यक्ति का निरंतर शोषण चल रहा है। लगभग सभी ग्रामों में निवासरत गरीबों के यहां मुश्किल से 1 य 2 एल ई डी बल्ब और वह भी रात में जलते हैं, साथ ही ग्रामों में बड़े ही मुश्किल से 6 से 8 घंटे भी लाइन नही दी जाती ऐसे में लाइन लॉस और औसत बिलिंग के नाम पर गरीबों के नाम हज़ारों का फतवा जारी करना कहां तक उचित है।
     कटरा डीसी में पूरे जिले के ग्रामों की ही तरह 90 प्रतिशत से अधिक घरों में मीटर नही लगाए गए हैं और मात्र औसत बिलिंग की जा रही है। केबलिकरन, फीडर सेपरेशन और मीटर बैठाने की पूरी राशि हजम कर ली गई है।
     जहां तक जमुई ग्राम के हरिजन अदिवशिओं का मामला था उनका कहना था कि उन्होंने तो अब तक कोई बिजली ही नही जलाई है फिर भी उनके नाम पर कैसे बिजली बिल भेजे जा रहे हैं
    हरिजन  बस्ती के लालमणि, रामसखा, रमेश, उमेश, दिलराज, सूर्यभान, रामावतार, रामकरण आदि ने बताया कि वह सभी बिना मीटर रीडिंग के औसत बिलिंग से पीड़ित है  और सभी ने यह बात कटरा डीसी में उठाई है लेकिन कोई नही सुन रहा और बस मनमाना बिल भेजे जा रहे है। सभी ने एक स्वर में सभी घरों में मीटर लगाकर रीडिंग के आधार पर बिलिंग की माग की है।
संलग्न - हरिजन बस्ती जमुई के हरिजनों की सामूहिक फ़ोटो जो बिजली बिल से प्रताड़ित है।
    - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक आर टी आई कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139








Wednesday, January 17, 2018

Rewa, MP - मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले वृद्ध, दिव्यांग, एवं विधवाओं को किया जा रहा परेशान, सिर्फ मंगलवार को 3 घंटे दी जाती है पेंशन, कीओस्क सेंटर वाले लेते हैं एक्स्ट्रा पैसे

दिनांक 17 जनवरी 2018, गढ़ रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

      ज़िले के मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ में  महज 300 से 500 रुपये प्रतिमाह  सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाले हितग्राहियों को बेतहासा परेशान किया जा रहा है। कई बैंक हितग्राहियों ने कीओस्क संचालकों पर भी मनमानी करने एवं पैसे निकासी पर अतिरिक्त चार्ज लगाने की भी शिकायतें की हैं। वहीं इस विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा मध्यांचल ग्रामीण बैंक के जिला प्रबंधक से बात करने पर ज्ञात हुआ कि सभी कीओस्क संचालकों को बैंक द्वारा बेतन दिया जाता है अतः अतिरिक्त चार्ज लगाने का प्रश्न नही उठता। वहीं कैथा ग्राम से बैंक पहुची एक हितग्राही शुखमंती केवट पति स्व. साधूलाल केवट का कहना था कि वह वृद्ध विधवा महिला पिछले 4 माह से अधिक समय से बैंक के चक्कर लगा रही है परंतु उसके मृतक पति के बैंक खाते में जमा राशि पति के मरणोपरांत पीड़ित महिला को नही दी जा रही जबकि उसने सभी कागजात नोटरी से बनाकर मृत्यु प्रमाण पत्र सहित लिए हुए है लेकिन बैंक मैनेजर द्वारा उसे घुमाया जा रहा है।

     दिनांक 16 जनवरी 2018 को दोपहर 2 बजे के आसपास मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ के प्रांगण में उपस्थित हितग्राहियों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को अपने साक्षात्कार में बैंक संबंधी कई समस्याओं का जिक्र किया गया जिनमे से बैंक प्रांगण में वृद्धों, विधवाओं दिव्यांगों के लिए बैंक परिसर में कोई उचित व्यवस्था का न होना, मात्र सप्ताह के मंगलवार को ही पेंशन दिया जाना, पास ही संचालित कीओस्क केंद्रों द्वारा स्वयं की भी राशि निकासी पर अतिरिक्त 10 रुपये से लेकर ज्यादा तक राशि लिया जाना और साथ ही पहुच वाले लोगों का काम फटाफट कर गरीब विकलांग और वृद्ध हितग्राहियों को शुबह से शाम तक कतार में खड़े रहकर इन्तज़ार करवाना और दोपहर दो बजे के बाद उन्हें वापस भेज देना आदि समस्याएं प्रकाश में आईं।

    इन पीड़ित हितग्राहियों द्वारा माग की गई कि बैंक प्रबंधन सहित सरकार इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर वृद्धों, दिव्यांगों और विधवाओं के लिए बैंक में अलग से व्यवस्था करे जिससे उन्हें परेशान नही होना पड़े और साथ ही पेंशन सप्ताह के सभी दिनों वितरित किये जाने की भी माग की गई है। सभी ने एक स्वर में बैंक प्रबंधन के सप्ताह में मात्र एक दिन मात्र 3 घंटे के लिए पेंशन वितरित किये जाने संबंधी तुगलकी फरमान की निंदा की और इसे बदले जाने की माग रखी।

 संलग्न - मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ के बाहर परेशान दिव्यांगों, वृद्धों एवं विधवाओं के फोटो ग्राफ। साथ मे यूट्यूब वीडियो का भी लिंक।

- शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Sunday, July 10, 2016

प्रधानमत्री कार्यालय भारत सरकार की स्थिति - यहाँ पर हमने ऑनलाइन और हाँथ से ऐसे दर्ज करवाई शिकायतें - देखिये इनमे होता है क्या?

नमस्कार भारत !

       (म.प्र.) हमने रीवा जिले के विभिन्न सामाजिक हितों वाले मुद्दों को लेकर के कई और लगभग २६ (छबीस) शिकायतें/प्रकरण प्रधानमत्री कार्यालय नई दिल्ली में दर्ज करवाए हैं. इनमे से तेरह मुद्दे पीएमओ पीजी पोर्टल के माध्यम से दर्ज करवाई गयी हैं (http://pgportal.gov.in/pmocitizen/Grievancepmo.aspx) और तेरह अन्य भी हाँथ से लिखित ले जाकर प्रधानमंत्री कार्यालय नई दिल्ली में  दर्ज किये गए हैं जिनकी वकायदे पावती भी हमारे पास उपलब्ध है. देखिये भारत के जन शिकायत निवारण विभाग में क्या तब्दीली पिछले कुछ सालों में आयी  है और क्या कुछ इन प्रकरणों में भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा किया जाता है. इसका हमें इंतज़ार करना है.

नोट/टीप- आप रीडर  कृपया ध्यान देंगे कि हमने निम्न लिखित पीजी पोर्टल से कॉपी किये गए प्रकरण में सभी पूर्व में दर्ज शिकायतों का रेफरेंस दिया हुआ है. इन शिकायतों को पीजी पोर्टल (http://pgportal.gov.in/ViewStatus.aspx) में रखकर आप स्वयं भी देख सकते हैं की इनमे क्या कुछ कार्यवाही हुई है अब तक./
--------------------

Status as on 10 Jul 2016
Registration Number:PMOPG/E/2016/0242687
Name Of Complainant:Shivanand Dwivedi
Date of Receipt:10 Jul 2016
Received by:Prime Ministers Office
Officer name:Shri Ambuj Sharma
Officer Designation:Under Secretary (Public)
Contact Address:Public Wing
5th Floor, Rail Bhawan
New Delhi110011
Contact Number:011-23386447
e-mail:ambuj.sharma38@nic.in
Grievance Description:Dated: 10/07/2016. Place: REWA/BHOPAL (MP) ------------------------------- To, The Prime Minister of India, Prime Minister Office, New Delhi, India. ---------------------------------------------- Subject - Regarding the complaints registered via personal handover as well as via PMO-PG Portal at the office of PMO New Delhi. We request for an immediate and concrete action. Ref. - Please see and refer to the PMOPG complaints addressed below. ------------- Sir/Madam, I have registered the following complaints at the Prime Minister Office at New Delhi by hand. These complaints are as the following: (A1) PMOPG/D/2016/0155045 - Dated: 08/06/2016 (A2) PMOPG/D/2016/0155079 - Dated: 08/06/2016 (A3) PMOPG/D/2016/0155034 - Dated: 08/06/2016 (A4) PMOPG/D/2016/0155072 - Dated: 08/06/2016 (A5) PMOPG/D/2016/0155135 - Dated: 08/06/2016 (A6) PMOPG/D/2016/0155032 - Dated: 08/06/2016 (A7) PMOPG/D/2016/0155058 - Dated: 08/06/2016 (A8) PMOPG/D/2016/0155128 - Dated: 08/06/2016 (A9) PMOPG/D/2016/0155020 - Dated: 08/06/2016 (A10) PMOPG/D/2016/0155121 - Dated: 08/06/2016 (A11) PMOPG/D/2016/0155114 - Dated: 08/06/2016 (A12) PMOPG/D/2016/0155100 - Dated: 08/06/2016 (A13) PMOPG/D/2016/0154958 - Dated: 08/06/2016 And also the following complaints were registered using the PMO-PGPORTAL webpage of Prime Minister of India. WE have so far not received any outcome on these complaints and there is no information about action taken on these issues: The complaints registered via http://pgportal.gov.in/pmocitizen/Grievancepmo.aspx are as the following: (1) PMOPG/E/2016/0181821 - Dated: 29/05/2016 (2) PMOPG/E/2016/0181312 - Dated: 29/05/2016 (3) PMOPG/E/2016/0181146 - Dated: 29/05/2016 (4) PMOPG/E/2016/0178207 - Dated: 27/05/2016 (5) PMOPG/E/2016/0183555 - Dated: 30/05/2016 (6) PMOPG/E/2016/0185179 - Dated: 31/05/2016 (7) PMOPG/E/2016/0190612 - Dated: 03/06/2016 (8) GOVMP/E/2016/00871 - Dated: 02/06/2016 (9) PMOPG/E/2016/0188936 - Dated: 02/06/2016 (10) PMOPG/E/2016/0188875 - Dated: 02/06/2016 (11) PMOPG/E/2016/0202814 - Dated: 11/06/2016 (12) PMOPG/E/2016/0202933 - Dated: 11/06/2016 (13) PMOPG/E/2016/0231325 - Dated: 01/07/2016 These all issues which were registered by hand as well as via PMO-PGPORTAL webpage for Public Grievances Redressal system were all serious and burning issues. There is an urgent need to take punitive actions against those of guilty officials of Rewa division/district. We expect to see a fast and concrete action from the Govt of India in this regard. We would again mention that the most of these complaints were very important issues of public importance and related with corruption in entire Rewa division/district's governing systems ranging from Village/Panchayat up to the District level. ---------- Sincerely, Shivanand Dwivedi (Social, Scientific, RTI, and Environmental Activist)
Current Status:RECEIVED THE GRIEVANCE

Thursday, July 7, 2016

(रीवा) सडकों पर बने मकान, बांधे जा रहे माल-मवेशी, तहसीलदार, एस.डी.एम. कलेक्टर तक शिकायतें पर प्रशासन अपनी पुरानी अजगरी चाल मे

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा पंचायत, गंगेव ब्लाक, रीवा (म.प्र.)

-------------------------------------------------------

विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक रीवा) में सरकारी जमीन पर दबंगों का कब्ज़ा. रोड के किनारे की जमीन पर बनाया घर, रास्ता किया जाम. तहसीलदार, एस डी एम से शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं. सी.एम् हेल्पलाइन एवं आर टी आई भी  हुई नदारद. कैथा पंचायत का वर्तमान एवं भूतपूर्व सरपंच ही अतिक्रमणकर्ता.   

------------------------------------------------------------

(कैथा पंचायत, रीवा), जिला रीवा अंतर्गत गंगेव ब्लाक की कैथा पंचायत में सरकारी जमीनों का कोई रता पता नहीं है. रोड के किनारे कैथा, इटहा सहित अकलसी ग्रामों में सरकारी जमीनों पर घर बना दिए गए हैं और बाउंड्री वाल खड़ी कर दी गयी हैं. रोड के बीचों बीच माल-मवेशी बाँध दिए जाते है जिससे आये दिन वाहन चालकों को दिक्कतें होती रहती हैं और दुर्घटनाएं होती रहती हैं. स्वयं कैथा पंचायत का वर्तमान सरपंच और आई.पी.सी. की धारा ३५४क, २९४, ५०६ एवं ३४ का सह-आरोपी संत कुमार पटेल ही इटहा की लगभग दो जरीब जमीन पर कब्जा कर अपना घर और बाउंड्रीवाल बनवा लिया है. यही हाल पूरी पंचायत में है. कई बार पटवारी, कानून गो, नायब तहसीलदार एवं एस डी. एम. को भी इसकी जानकारी दी गयी और आर टी आई कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा लिखित एवं आर टी आई के माध्यम से जानकारी लेकर माग की गयी की पंचायत की सारी सरकारी जमीन को नापकर उसका नक्सा तरमीन और सीमांकन किया जाए. आर टी आई के माध्यम से प्राप्त जानकारी में लगभग पंचायत की एक तिहाई से अधिक शासकीय जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है. अवैध अतिक्रमण करने वालों की लिस्ट में - कैथा पंचायत का भूतपूर्व सरपंच मिथिला प्रसाद पटेल भी है जिसने ग्राम अकलसी की रोड के बीचों बीच ही अपना अवैध घर बनवा लिया है, मात्र पैदल चलने लायक रोड छोड़ी है.
इस सन्दर्भ में सी एम. हेल्पलाइन में भी प्रकरण रखा गया परन्तु बिना किसी उचित निराकरण के सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों को फ़ोर्स क्लोज्ड कर दिया जाता है. म.प्र. शासन की सी.एम. हेल्पलाइन मात्र समय और सरकारी पैसे की बर्वादी है. आर टी आई से प्राप्त जानकारी में जो भी शासकीय जमीनें बताई गयी हैं लगभग उन सभी में थोडा बहुत अतिक्रमण हुआ है. सभी नंबरों को जब गहराई से देखा गया तो नक्सा तर्मीन और सरकारी जमीन का परिसीमन न होने की वजह से हर स्थान पर अतिक्रमण हुआ है ऐसा दिखा. इस सन्दर्भ में जब तहसीलदार एवं एस.डी.एम मनगवां से लिखित माग की गयी की शासकीय जमीन का तत्काल नक्सा तरमीन किया एवं सीमांकन किया जाये और जो भी शासकीय भवन जैसे पंचायत भवन, शासकीय विद्यालय, आंगनवाडी केंद्र आदि बने हैं उन्हें भी सरकारी खसरे में नामांकित किया जाये तो कार्यवाही करेंगे ऐसा कहकर टाल दिया गया.      
यदि यही स्थिति रही और इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब कैथा पंचायत में पैदल चलने के लिए रोड भी नहीं बचेगी.
----------------------------
शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139