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Tuesday, July 31, 2018

रघुनाथगंज-मड़ना पीएम सड़क की मरम्मत में हो रही लीपापोती (मामला ज़िले के मऊगंज अनुभाग अन्तर्गत बनाई जा रही पीएम सड़कों की दुर्दशा का, एक करोड़ 78 लाख की लॉगत से की जा रही मरम्मत पर अभी से दिखने लगा घटिया कार्य, जे के एस इंफोवर्ड रीवा का कारनामा)

दिनांक 01 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में बनाई जा रही प्रधानमंत्री सड़कों के नवनिर्माण और मरम्मत दोनो प्रकार के कार्यों में ठेकेदारों और पीएम सड़क विभाग की मिलीभगत के चलते पलीता लग रहा है. आमतौर पर किसी भी ठेकेदारी प्रथा में किये जा रहे कार्य का पर्यवेक्षण का जिम्मा संबंधित विभाग का होता है. यह तो स्वाभाविक है की कोई ठेकेदार आज इतना ईमानदार नही है की राष्ट्रहित की भावना से प्रेरित होकर समाजहित में काम करेगा. तो प्रश्न यह है की ठेकेदारों की मनमानी पर नियंत्रण का जिम्मा किसके सिर पर होना चाहिए. यह कार्य होता है संबंधित विभाग का जिसके पर्यवेक्षक सतत कार्य की गुणवत्ता की निगरानी करें और देखें की जहां भी ठेकेदार मनमानी करे, कार्य की गुणवत्ता के साथ समझौता करें वहां तत्काल कार्य को रिजेक्ट किया जाय, पैसा रोक दिया जाय, साथ ही रेकवरी की जाय. लेकिन यहां तो सब उल्टा है क्योंकि बारी ही खेत खा रही हैं. आज प्रत्येक सिविल कंस्ट्रक्शन के कार्यों में विभागों की संलिप्तता और इनके कमीशन फिक्स होने के चलते ये विभाग ठेकेदारों पर कठोर कार्यवाही नही करते. नतीज़ा आज जितनी भी पीएम सड़कें और सिविल कंस्ट्रक्शन के कार्य हो रहे हैं सभी गुणवत्ताविहीन होते हैं साथ ही बनने के एक या दो साल के भीतर ही खत्म हो जाते हैं.

रघुनाथगंज से मड़ना पीएम सड़क में घटिया मरम्मत कार्य

   अभी हाल ही में मऊगंज की तरफ रुख करने पर गढ़ से होते हुए तेंदुआ मोड़ रघुनाथगंज-मड़ना सड़क का रुख किया गया. तेंदुआ मोड़ पर ही पीएम सड़क विभाग का लगा एक बोर्ड दिखा जिंसमे बताया गया था की लगभग 13 किमी लंबी इस पीएम सड़क का मरम्मत कार्य किया जा रहा है जिसकी कुल लॉगत 1 करोड़ 78 लाख के आसपास है. पैकेज क्रमांक एमटीएन 032 नाम से मरम्मत की जा रही इस सड़क को किसी रीवा के ही जे के एस इंफोवर्ड नामक कंपनी द्वारा बनाया जा रहा है. इसके कार्य प्रारम्भ होने की तिथि 2 दिसंबर 2016 बताया गया है. इतने समय से प्रारम्भ किया गया यह कार्य आज तक पूर्ण क्यों नही हुआ यह भी एक बहुत बड़ा प्रश्न है.

  प्रधानमंत्री सड़क मरम्मत में मापदंडों की अनदेखी

    टेक्निकल डिटेल को छोड़ दें तो इसकी गुणवत्ता मापदंडों के अनुरूप तो बिल्कुल ही नही है. अमूमन क्या पीएम सड़क की मरम्मत के समय सड़कों के बीच जो गड्ढे बने हुए होते हैं उन्हें नही भरा जाना चाहिए? यहां पर तो यह देखा गया की बिना सड़क की उचित सफाई किये ही बिना गड्ढों को भरे ही इमल्शन और लिक्विड डाल दिया गया था और उसके ऊपर मोबीओइल मिली हुई डामर गिट्टी की पतली परत चढ़ाई जा रही थी. कई स्थानों से तो यह सड़क पहले ही उखड़ने लगी थी. इसके अतिरिक्त पहले से चढ़ी हुई परत को भी यथावत रखा गया था जिसे नियमानुसार हटाकर नए सिरे से परत चढ़ाई जानी चाहिए जिससे मरम्मत की हुई सड़क की पकड़ मजबूत बनी रहे और साथ ही कुछ समय तक चल पाए. लेकिन इनमे से किसी मापदंड का खयाल न रखा जा कर मात्र ठेकेदारों द्वारा मनमानी पूर्वक गुणवत्ताविहीन कार्य किये जा रहे हैं जिससे स्थिति दुर्दशापूर्ण बनी हुई है.

पीएम सड़क के किनारों पर नही हो रही शौल्डरिंग, मात्र चार अंगुल चौड़ी मोरम डाल रहे  

   इस पीएम सड़क की मरम्मत के विषय में कई बातें दिखीं जिनको गौर से देखा जाए तो खामियां दिखती नज़र आईं. मसलन किसी भी सड़क की मजबूती उसके दोनो तरफ बनाये जा रहे बॉर्डर से भी देखी जाती है. बॉर्डरिंग अथवा शोल्डरिंग का कार्य सही तरीके से नही हो रहा है. शोल्डरिंग में नए सिरे के मोरम डाली जानी चाहिए जिससे किनारों पर सड़क का कटाव रुके एवं सड़क में जो वर्षों से मोरम का कटाव हुआ है उसकी भरपाई भी हो सके और आखिर यही तो मरम्मत कार्य भी है वरना फिर काहे का करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है.

इन लोगों ने बतायी समस्याएं 

    तेंदुआ मोड़ में जब वहां पहुचा गया और आसपास निवास करने वाले ग्रामीणों और दुकानदारों से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया की हम इस सड़क कार्य से बिल्कुल संतुष्ट नही है और हमने भी कई बार कार्य में लगे हुए कर्मचारियों को सड़क की मरम्मत गुणवत्तापूर्वक करने के लिए कहा है लेकिन कोई सुन नही रहा है.

   तेंदुआ मोड़ के पास उपस्थित रंगलाल कोल, नीलेश मिश्रा, विनय मिश्रा, सुजीत सोंधिया, दुर्गा प्रसाद, सुनील पटेल, दयानंद मिश्रा, लाला सिंह, रजनीश पटेल, रमा प्रताप सिंह आदि ने बताया की सड़क कार्य गुणवत्तापूर्ण नही है और इसकी सख्त जांच कर ठेकेदार से पूरे पैसे की वशूली की जानी चाहिए.

संलग्न - ज़िले के मऊगंज अनुभाग अन्तर्गत तेंदुआ मोड़ के पास रगुनाथगंज से मड़ना पीएम सड़क के मरम्मत कार्य का दृश्य तथा उपस्थित ग्रामीणजन. साथ ही पीएम सड़क के मरम्मत कार्य का लगाया गया बोर्ड जिंसमे समस्त जानकारी लिखी हुई है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Monday, April 23, 2018

कैथा अगडाल पीएम सड़क की हुई एस क्यू एम जांच, बताया सब ठीक है, बोला जाकर पी डब्लू डी सड़कें देख लें (मामला मऊगंज पीएमजीएसवाई अंतर्गत आने वाली अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क का जिसकी गुणवत्ता को लेकर प्रश्न उठाये जा रहे थे)

दिनांक 23 अप्रैल 2018, गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क विभाग अंतर्गत आने वाले गंगेव ब्लॉक की स्टेट क्वालिटी मॉनिटर एवं नेशनल क्वालिटी मॉनिटर के द्वारा समय समय पर जांच होती रहती हैं लेकिन यह जांचें ज्यादातर कागजों पर ही होती हैं. इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नही होता. क्योंकि यदि वास्तविकता से कोई लेना देना होता तो इस योजना के अंतर्गत बनाई जाने वाली सड़कों की गुणवत्ता में कोई तो परिवर्तन दिखता. यहां तो जांच में सब कुछ पहले से ही ठीक बताया जा रहा है. अर्थात मैच फिक्स्ड है, बॉलिंग करते रहने से कोई लाभ नही है. बैट्समैन नॉटआउट ही रहेगा और ओवर पूरे होने के पहले ही ठेकेदारों द्वारा पीएमजीएसवाई का मैच जीत लिया जाएगा.

तीन जगहों पर सड़क खोदा और हो गया काम पूरा

   भोपाल से आये एस क्यू एम आर पी शर्मा ने अगडाल से कैथा पीएम सड़क को तीन स्थानों पर खुदवाया जिसकी तस्वीर भी सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ली गई है. इन तीनों स्थानों पर जो देखने को मिला वह बड़ा ही अजीब था. यह बात समझ के परे थी की खोदे गए मटेरियल के अनुपात के विपरीत कहीं उससे कई गुना ज्यादा मटेरियल का ढेर क्यों लगाया गया था इसी से काफी हद तक संदेह जाहिर हुआ. आखिर जब एक तगाड़ी डब्लू एम एम की खुदाई हुई थी तो दस तगाड़ी का ढेर क्यों लगाया गया था? लगे ढेरों को गौर के देखने पर पता चला की कहीं बाहर से या यूं कहें की अपने साथ गाड़ी में लाये गए 40 एमएम, 20 एमएम, गिट्टी और बालू को एकत्रित करके उनके अलग अलग अनुपात में फ़र्ज़ी तरीके से ढेर लगाकर फ़ोटो ले लिए गए थे. वास्तव में ढेर लगा हुआ मटेरियल उस सड़क के खोदे गए भाग का था ही नही जिसका की पुख्ता प्रमाण इसी से लग गया की जितनी सड़क की खोदाई से मटेरियल निकला था वह वहां अलग ढेर लगाए गए मटेरियल से 10 गुना कम था. तब इतना मटेरियल कहाँ से आया? वहां तो साइड में मोरम डाली हुई थी तो इसका मतलब यह हुआ की चलाई के नाम पर इन्होंने अलग से लाया हुआ अच्छा मटेरियल फ़ोटो खींचने के लिए और ऊपर तक भेजने के लिए बाहर से ही लाया था. तो ऐसा है यह पूरा फर्जीवाड़ा. सबसे बड़ी बात तो यही है की जब एस क्यू एम आर पी शर्मा स्वयं यह बोल ररहे हैं की आप प्रधानमंत्री सड़क के ही पीछे पड़े हो जाकर पी डब्लू डी की सड़क देखो तो पता चले की पीएम सड़क कितनी अच्छी बन रही है. इसी बात से समझ आता है की इनको क्वालिटी की नही पड़ी है मात्र यह तुलनात्मक काम देख रहे हैं की यदि पी डब्लू डी सड़क में भष्ट्राचार है तो उसे देखा जाए न की इनके स्वयं  के भष्ट्राचार को. मतलब ध्यान बांटने का प्रयाश है की इनके काम को कोई ध्यान न दे. ऐसे स्टेट क्वालिटी मॉनिटर टीम का क्या औचित्य बनता है जो जनता के सवालों का जबाब भी न दे जबकि जनता के लिए बनाई गयी सड़क को चेक करने के लिए आये हैं. इनको रिटायरमेंट के वावजूद भी सरकार काम में लगाकर पैसा दे रही है और यह भस्ट्राचारी जनता को उल्टा पुलटा जबाब देकर फुर्सत होना चाह रहे हैं.

    एस क्यू एम आर पी शर्मा ने  बताया सब कुछ एक नंबर का है, आप जाके पी डब्लू डी की सड़कें देखिए

     जांच दल में आये कोई आर पी शर्मा ने बताया की हमने पीएम सड़क को खोदकर देख लिया है सड़क बिल्कुल एक नंबर की है जिसमे किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नही है. हमने पूरे स्टेट की सड़कों को देखा है और सब सड़कें सही हैं, विशेष कर रीवा की पीएम सड़कें बिल्कुल दुरुस्त हैं. और आपकी कैथा से अगडाल पीएम सड़क में तो कोई खराबी है ही नही.

     ऐसा लगा सब पहले से ही फिट था. जबकि देखा जाए तो लौरी नंबर 3 के निवासी योगेंद्र शर्मा के घर के पास ट्रांसफार्मर के पास की रोड बनने के 21 दिन के भीतर ही उखड़ गई थी जिसकी की शिकायतें तो हुईं ही साथ ही न्यूज़पेपर में भी मामले को रखा गया था. इसी प्रकार बिना 8 टन का ही वाहन चले ही साइड से इस सड़क में जगह जगह दरारें आ चुकी है।

देखिए स्टेट क्वालिटी मॉनिटर की तरफ से आये अधिकारियों ने क्या कुछ कहा

1) "आपके प्रश्नों का कोई अंत नही है अतः सबका जबाब तो हम नहीं दे पाएंगे पर आपको बता दें की अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क बहुत ही अच्छी बनायी गई है. हमने अपने लेवल पर इसकी जांच की है जो हमे सही मिली. सैंपल और डेटा इकट्ठा कर लिया है आगे भेज दूंगा. मैं स्टेट क्वालिटी मॉनिटर टीम से हूँ जो पूरे देश के रिटायर्ड अधिकारियों की बनाई जाती है. रीवा में जांच करने के लिए मुझे भेजा गया है. आपको इस सड़क की प्रसंसा करनी चाहिए की इतनी सुंदर सड़क बनाकर दी जा रही है." - आर पी शर्मा, स्टेट क्वालिटी मॉनिटर प्रमुख, भोपाल, मप्र

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2) " देखिए द्विवेदीजी हम तो आप के बीच के ही हैं. हमारी तो आपसे हर दूसरे तीसरे दिन बात होती रहती है. हम कल आकर मामले को समझ लेंगे. आज आप जांच कर लेने दीजिये, यह टीम एस क्यू एम की है जो सीधे भोपाल से आई हुई है. यह रूटीन जांच है. इसके बाद हम कल आते हैं और आगे सड़क में क्या गड़बड़ी है उसको देखते हैं. वैसे हमारी तरफ से पूरे प्रयास किये जा रहे हैं की ठेकेदार मनमानी न करने पाएं." - उपयंत्री अमित गुप्ता, पीएमजीएसवाई, मऊगंज, रीवा मप्र

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3) "हम एक टीम लीडर की हैसियत से आये हैं. हम सड़क की जांच करने समय समय पर आते हैं. हमे सूचना थी की स्टेट क्वालिटी मॉनिटर की टीम आ रही है अतः उसके सदस्यों के साथ हम आये हैं. डामरीकृत सड़क की विभिन्न परतों को खोदकर हम उसमे हर एक की मात्रा देखते हैं की उसमे कितना 40 एमएम, कितना 20 एमएम की गिट्टी है और उसमे कितना बालू या जीएसबी मिला होता है. साथ ही एक विशेष मसीन में हम डामर की परत को घोल बनाकर डालते हैं और देखते हैं की डामर वगैरह का सही अनुपात है की नही. इस मसीन में यही किया जा रहा है" - महेंद्र सिंह, टीम लीडर (टीएल) पीएमजीएसवाई, मऊगंज, रीवा मप्र

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4) "कुल मिलाकर रोड में लीपापोती करके मामले को रफा दफा किया जा रहा है. जैसा की आपको भी पता है की कई बार कंप्लेन होने से ठेकेदार का पैसा रोक दिया गया होगा जिससे अब ये अधिकारी जांच करने के लिए आये हैं और लीप पोत करके चले जाएँगे. पूरे देश में तो यही चल रहा है. आखिर स्टेट क्वालिटी मॉनिटर हमारे बताए हुए स्थान पर चलकर जांच करें जहां हम दिखाते हैं कितनी घटिया रोड बनाई गई थी. अब देखिए अभी पिछले दौरे में उपयंत्री और जीएम द्वारा बताया गया था की अप्रैल अंत तक का टारगेट दिया हुआ है 7 किमी सड़क बनाने के लिए, अब आज 23 अप्रैल हो चुका है और जीएसबी भी अच्छे से नही डाली गई है. क्या ऐसे ही काम चलेगा. जल्दी जल्दी में फिर घटिया काम करके फुरसत कर देंगे. ठेकेदार बोलते हैं की हमारे बइब्रो और जेसीबी लेबर बारात चले गए हैं. कभी बोलेंगे की जेसीबी खराब है तो कभी बइब्रो खराब है तो कभी डम्पर ही नही है. जब इन ठेकेदारों के पास कुछ नही रहता तो इनको एकसाथ इतने बड़े बड़े ठेके कैसे मिल जाते हैं. चलिए एक ठेका की बात हो तो अलग, इन्हें आधा दर्जन सड़कों को बनाने के ठेके मिले हुए हैं. कैसे और किस आधार पर इनको इनकी क्षमता से अधिक का ठेका मिला. तमाम यही फर्जीवाड़ा चल रहा है और इस पीएमजीएसवाई विभाग की मिलीभगत से होता है चाहे यह सब रीवा से हो रहा या भोपाल या दिल्ली से तमाम यही फर्जीवाड़ा है. पनगड़ी के रहवासी परेशान हैं और उनकी पीएम सड़क आज 6 साल से नही बनी है. कहां गए थे तब यह स्टेट क़्वालिटी मॉनिटर और नेशनल कॉलिटी मॉनिटर? क्या इन्हें तब नही दिख रहा था की काम अधूरा पड़ा हुआ है." - योगेंद्र शर्मा, निवासी लौरी नंबर 3, गंगेव, रीवा मप्र.

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संलग्न - कृपया संलग्न देखें अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की जांच करने आये एस क्यू एम आर एस शर्मा की टीम साथ ही तीन जगह खोदे गए गड्ढे और फ़र्ज़ी तरीके से फ़ोटो खींचने के लिए फैलाया गया मटेरियल।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Friday, April 13, 2018

अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क में धांधली का दौर जारी, मात्र 21 दिन के भीतर बनी सड़क ने दे दिया जबाब, सड़क कई स्थानों से हुई छतिग्रस्त (मामला गंगेव ब्लॉक अंतर्गत आने वाली 9.4 किमी अगडाल-लौरी से कैथा प्रधानमंत्री सड़क का)

दिनांक 12 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी) 

     ज़िले के गंगेव ब्लॉक और मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क अंतर्गत आने वाली बहुचर्चित अगडाल-लौरी से कैथा 9.4 किमी पीएम सड़क जिसकी की कुल लॉगत 3 करोड़ 33 लाख 43 हज़ार रुपये के आसपास बतायी जा रही है में विभाग की उदासीनता और नकारात्मक रवैय्या के चलते मात्र 21 दिन के भीतर बनी 3 किमी सड़क के परखच्चे उड़ने सुरू हो चुके हैं. अभी तो इस सड़क पर 8 टन तक के भी कोई वाहन नही निकले होंगे और अब सड़क की दुर्दशा देखते ही बन रही है. 

    लौरी नंबर 3 के स्थानीय निवासी योगेंद्र शर्मा के घर के पास शिव जी के मंदिर के सामने और ट्रांसफार्मर के बीच में यह पीएम सड़क पूरी तरह से उखड़ चुकी है जिसकी जानकारी योगेंद्र शर्मा ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को दी जिस पर पहुचकर सड़क का जायज़ा लिया गया और संबंधित ठेकेदार संदीप पांडेय सोनभद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं मऊगंज जीएम नरवरिया, उपयंत्री अमित गुप्ता को बताया गया. इस पर संबंधितों ने सड़क को ठीक किये जाने का पुराने स्टाइल में आश्वासन मात्र दिया. 

   सवाल यह है की यदि बिना भारी वाहन चले ही इन करोड़ों की बनने वाली पीएम सड़कों की यह स्थितियां है कि मात्र  कुछ सप्ताह के भीतर ही यह सड़कें  हवा हवाई हो रही हैं तो कुछ महीने और एकाध साल में इनकी कितनी दुर्दशा होगी यह बात विचारणीय है.

ज़िले की सभी प्रधानमंत्री सड़कों के हाल बेहाल -

   ऐसा नही है की मात्र अगडाल-लौरी से कैथा पीएम सड़क भर के यह हालात हैं. जबकि देखा जाए तो प्रधानमंत्री सड़क विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते पूरे ज़िले की पीएम सड़कों की दुर्दशा हो चुकी हैं. कई परियोजनाएं आज कई साल पहले सम्पन्न हो जानी चाहिए थी जिनमे आज आधा भी कार्य नही हुआ है. पनगड़ी से भठवा इनमे से एक ऐसी ही परियोजना है जिसे आज से पांच साल पहले सम्पन्न होना था परंतु आज इस सड़क में आधा भी कार्य नही हुआ है. इसी प्रकार गुणवत्ता और समय की दृष्टि से देखा जाए तो बांस से माल और रक्सा माजन एवं क्योटी और गढ़ के असपास बनने वाली प्रधानमंत्री सड़कों में भी यही मनमानी चल रही है. ऐसे किसे दोषी ठहराया जाए?विभाग को अथवा ठेकेदार को? यदि कहें की ठेकेदार मनमानी पर उतारू है तो फिर विभाग किस लिए बैठा हुआ है? अतः यही बात समझ आती है की विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से पूरे सड़कों का सत्यानाश कर पूरा माल हजम कर जाने की स्थिति है.

संलग्न - अगडाल-लौरी से कैथा प्रधानमंत्री सड़क 9.4 किमी में लौरी नंबर 3 में योगेंद्र शर्मा के घर के पास मात्र बनाने के 21 दिन के भीतर बुरी तरह से उखड़ी हुई पीएम सड़क की तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587,

Friday, March 30, 2018

हिनौती-कैथा मोड से नेवरिया तक जल्द बनेगी प्रधानमंत्री सड़क, टेंडर प्रक्रिया मे, अप्रैल से ही कार्य प्रारम्भ हो सकता है (मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क उपयंत्री शिवपाल सिंह से प्राप्त हुई जानकारी), मेरी सड़क एप्प के माध्यम से दर्ज कराई गई थी शिकायत

दिनांक 30 मार्च 2018, स्थान - गंगेव रीवा मप्र। 

(रीवा मप्र, शिवानंद द्विवेदी)

        जैसा की आजकल चुनाव भी आने वाले हैं अतः कुछ ठंडे बस्ते मे भी पड़े कार्यों को पूरा किया जा रहा है। पूर्व मे वर्ष 2013-14 मे एक अति विशेष सामाजिक पहल के अंतर्गत  कैथा, हिनौती, सेदहा, लोटनी, डाढ़, जमुई, बांस, लौरी सहित आसपास की दर्जनों पंचायती क्षेत्रों के हजारों लोगों का समूहिक रूप से हस्ताक्षरित एक आवेदन प्रधानमंत्री महोदय से लेकर प्रधानमंत्री सड़क बनाने के जिम्मेदार ग्रामीण सड़क विभाग के अतिरिक्त चीफ़ सेक्रेटरी राधेश्याम जुलनिया सहित मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल मे भी मूलभूत मानवाधिकारों मे से एक आम जनता के सड़क पर चलने के अधिकार के हनन संबंधी मामले को सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता  द्वारा व्यक्तिगत उपस्थित होकर दिया गया था जिस पर सज्ञान लेते हुये ग्रामीण सड़क विभाग एवं प्रधानमंत्री सड़क के अधिकारियों ने आसपास की कई पंचायती सड़कों को प्रधानमंत्री सड़क से जोड़ने का सर्वेक्षण किया था।  जिसमे सर्वे करके जानकारी विभाग एवं मंत्रालय को प्रेषित कर बजट आवंटन के लिए अप्लाई किया था, नतीजतन इस पर कार्यवाही हुई और कैथा से अगडाल-लौरी सड़क 9.4 किमी और हिनौती-कैथा मोड से नेवरिया तक की प्रधानमंत्री सड़क पर टेंडर हुआ है। जहां लौरी-अगडाल से कैथा 9.4 किमी प्रधानमंत्री सड़क पर पहले ही काम चल रहा है वहीं हिनौती-कैथा मोड से नेवरिया प्रधानमंत्री सड़क परियोजना क्रमांक एल066 पर कोई सुगबुगाहट नहीं हो रही थी। इस परभि पिछले दिनों मेरी सड़क एप्प के माध्यम से प्रधानमंत्री सड़क संबंधी शिकायत प्रणाली मे सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा। दिनांक 23 मार्च 2018 को  एक शिकायत दर्ज कारवाई गई थी जिस पर जानकारी चाहिए गई थी आखिर सर्वे होने के बाद आज तक इस सड़क पर कार्य क्यों नहीं प्रारम्भ नहीं हुआ। इस पर दिनांक 30 मार्च को मऊगंज क्षेत्र के उपयंत्री शिवपाल सिंह द्वारा जानकारी देकर बताया गया की नेवरिया वाली प्रधानमंत्री सड़क पर कार्य अप्रैल मे प्रारम्भ हो जाएगा।

     अब देखना यह है की जिस कार्य की अभी तक कोई सुगबुगाहट तक नहीं हो रही थी और यहाँ तक की हिनौती और नेवरिया क्षेत्र के लोगों को यह तक जानकारी नहीं थी की उनके गाँव के लिए प्रधानमंत्री सड़क बनेगी भी की नहीं जिस पर शिकायत के बाद सज्ञान लिया गया है, उसे जून के अंदर पूरा किया जाता है अथवा नहीं। 

संलग्न - नेवरिया क्षेत्र की कच्ची सड़क का दृश्य एवं साथ ही मेरी सड़क नागरिक प्रतिकृया प्रणाली पर दर्ज शिकायत की फोटो भी यहाँ पर संलग्न है। 

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 

7869992139, 9589152587   

Saturday, March 17, 2018

अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की घटिया गुणवत्ता की शिकायत पर जांच करने पहुचे मऊगंज उपयंत्री अमित गुप्ता, ठेकेदार को पकड़ाया नोटिस, गुणवत्तापूर्ण सड़क नही बनी तो होगी रिकवरी और साथ ही होगा ठेका निरस्त

दिनांक 17 मार्च 2018, स्थान - गंगेव/गढ़ रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत अगडाल से कैथा तक बनायी जा रही 9.4 किमी सड़क की घटिया गुणवत्ता की शिकायत ज़िले से लेकर केंद्र तक की गयी है जिस पर कई मर्तबा जांचें हुईं लेकिन एस क्यू एम और एन क्यू एम से लेकर सभी जांच करने पहुचे हैं परंतु इस पर अब तक कोई सार्थक कार्यवाही नही हुई है। 

     पुलों के निर्माण में पहले ही गुणवत्ता की अनदेखी की गयी है जिससे कई पुलें समय से पहले मात्र 6 माह में ही टूट चुकी हैं। कैथा स्थित कैप्टेन आर डी पांडेय के घर के सामने पुल बीचों बीच दरार आने से टूट गयी है।

      इसी प्रकार कई पुलें ऐसी देखी जा सकती हैं जिनमे दरार आ जाने और घटिया गुणवत्ता के कारण खराब हो चुकी है। इन सब बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे ज़िले में प्रधानमंत्री सड़क के कार्यों में गुणवत्ता की कितनी अनदेखी हो रही है।

    अभी हाल ही में पिछले कुछ दिनों से लौरी मोड़ से लेकर अकलसी मोड़ तक मात्र तीन किमी सड़क पर डब्लू एम एम डालकर बिना पर्याप्त पानी डाले और बिना उचित मात्रा में प्राइमर डाले डामर युक्त गिट्टी डाली जा रही थी जिससे डामर की पकड़ नही बन पा रही थी जिसके कारण कई स्थानों पर सड़क में गड्ढे बन गए थे और सड़क टूटी हुई दिख रही थी। कई स्थलों पर यह भी देखा गया था कि 27 एम एम की डामर गिट्टी मिली हुई प्रथम लेयर भी सही तरीके से नही डाली गई थी जिस कारण से स्वतः ही गड्ढे बन गए थे। इस बात पर संबंधित ठेकेदार सोनभद्र कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के संदीप पांडेय और मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क के जीएम सुजीत कुमार निगम और उपयंत्री अमित गुप्ता को कई मर्तबा अवगत कराया गया था परंतु मात्र हवा में ही अस्वासन का खेल चल रहा था। अब जब लौरी नंबर 3 के निवासी योगेंद्र शर्मा ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को दिनांक 17 मार्च शुबह यह जानकारी पुनः दी कि सड़क की गुणवत्ता के साथ निरंतर खिलवाड़ चल रहा है और कोई सुनवाई नही हो रही है जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधित मऊगंज उपयंत्री को तत्काल निर्माण स्थल पर पहुचकर निरीक्षण करने की मांग की गयी जिस पर दोपहर लगभग 1 बजे उपयंत्री अमित गुप्ता लौरी नंबर 3 पहुचे और पाया कि शिकायत सही थी। प्राइमर का उचित अनुपात में प्रयोग नही होना पाया गया, सड़क में पानी का छिड़काव भी होना नही पाया गया साथ ही 27 एम एम परत भी कई स्थानों पर नही पायी गई। 

     इस पर उपयंत्री द्वारा लिखित तौर पर ठेकेदार संदीप पांडेय को नोटिस जारी करने की बात कही गयी साथ ही बताया गया कि यदि सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जाता रहा तो राशि रोककर ठेका निरस्त कर वशूली की कार्यवाही भी की जा सकती है। इस पर उपस्थित सभी ग्रामीण जनों ने प्रधानमंत्री सड़क के मजबूती पूर्ण निर्माण की माग की है।

    बता दें कि अगडाल से कैथा तक 9 किमी 4 सौ मीटर लंबाई की सड़क का पैकेज क्र. एम पी 32170 है जिसकी प्रारंभिक लागत 3 करोड़ 33 लाख 43 हज़ार रुपये बतायी गई है। औसतन देखा जाए तो प्रति किमी इस सड़क की लागत 33 लाख के आसपास आ रही है जो प्रधानमंत्री सड़क के हिसाब से उचित भी है परंतु इस पर भी सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जाना विभाग और ठेकेदार की मिली भगत को दर्शाता है। एक बात और भी ध्यान देने योग्य है यह पूरी सड़क पहले से भी 12 मासी मुख्यमंत्री सड़क थी जिस पर पहले से भी पर्याप्त मिट्टी और मोरम डाला गया था जिससे सड़क की ऊंचाई काफी थी। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता करना सम्पूर्ण सिस्टम पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

      अब देखना यह होगा कि दिनांक 17 मार्च को मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क उपयंत्री की जांच और की गई कार्यवाही भी मात्र औपचारिकता ही रहेगी कि कार्य की गुणवत्ता में कुछ सुधार होगा।

  संलग्न - अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की जांच करने पहुचे उपयंत्री अमित गुप्ता एवं ठेकेदार के कर्मचारियों की फ़ोटो और साथ ही सड़क की घटिया गुणवत्ता की फ़ोटो।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139