Showing posts with label Rewa DM. Show all posts
Showing posts with label Rewa DM. Show all posts

Sunday, August 26, 2018

कैथा पंचायती पुलिया निर्माण में भष्ट्राचार - लाख की पुलिया निर्माण में सरपंच सचिव सब खा गया (मामला ज़िला रीवा अन्तर्गत गंगेव जनपद का जिंसमे कैथा पंचायत सरपंच संत कुमार ने लाखों की पुलिया निर्माण में किया भष्ट्रचार, कंक्रीट के स्थान पर पंचायत भवन के पत्थर और डस्ट से बन रही बृजबल्लभ पटेल के घर के पास की पुलिया, पाइप भी पुरानी डाली)

दिनांक 27 अगस्त 2018, स्थान - गंगेव/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  गंगेव जनपद में भष्ट्राचार अपने चरम पर चल रहा है. गंगेव जनपद पंचायत अन्तर्गत आने वाली लगभग ज्यादातर पंचायतों में शेयर का खेल चल रहा है. जनपद सीईओ एवं राजेश सोनी नामक बाबू के करामात निरंतर जारी हैं. चाहे कोई भी सीईओ आये गंगेव जनपद में मात्र राजेश सोनी की चल रही है. सोनी बाबू ने पूरी जनपद की ऐसी तैसी करके रखी हुई है जिस पर कलेक्टर कमिश्नर तक की कार्यवाही की हिम्मत नही. अभी पिछले कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत गरीब परिवारों की शादियाँ करवाई गई थी जिंसमे जमकर फर्ज़ीवाड़ा हुआ था जिसकी खबर प्रदेश के काफी समाचार पत्रों में छपी थी. ऐसे फ़र्ज़ी जोड़ों की शादियाँ हुईं जिनके कई बच्चे भी थे.

   कैथा पंचायत में सभी पुलिया निर्माण में हुई लीपापोती

   जनपदों के लगभग सभी पंचायतों में पञ्च परमेश्वर योजनान्तर्गत पुलिया एवं नाली साथ ही पीसीसी सड़क निर्माण का कार्य करवाया जा रहा है. इस बीच कैथा पंचायत में भी कई पुलिया निर्माण एवं पीसीसी निर्माण का कार्य किया जा रहा है.

    कैथा पंचायत की पुलिया निर्माण में कंक्रीट के स्थान पर पत्थर और डस्ट का प्रयोग हो रहा है. जबकि देखा जाए तो पुलिया निर्माण के लिए 89 हज़ार रुपये के बिल में अच्छी गुणवत्ता के बालू, गिट्टी एवं 55 बोरी सीमेंट की बात आई है. संलग्न रसीद से साफ स्पष्ट है जिस 89 हज़ार रुपये का फ़र्ज़ी बिल बाउचर बनाया हुआ बताया गया है उसमे किसी भी सामग्री का प्रयोग वास्तविक धरातल पर पुलिया निर्माण में नही हो रहा है.

बृजबल्लभ पटेल के घर के पास पुलिया निर्माण में भष्ट्राचार

  बृजबल्लभ पटेल के घर के पास नामक पुलिया निर्माण की राशि एक लाख रुपये सैंक्शन हुई बतायी गई थी जिंसमे किसी राजवीर ट्रेडर्स के द्वारा 89 हज़ार रुपये सामग्री का बिल बाउचर दिनाँक 04/05/2018 को पास किया गया है. पुलिया निर्माण के लिए राशि पंचायतीराज संचालनालय द्वारा पंच परमेश्वर योजनान्तर्गत दिनांक 02/10/2016 को सैंक्शन हुई. 

   राजवीर ट्रेडर्स द्वारा जारी किये गए बिल बाउचर में इस पुलिया निर्माण हेतु एक हाइवा बालू 24 हज़ार 500 रुपये के हिसाब से, 310 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 55 बोरी सीमेंट कुल 17 हज़ार पचास रुपये, दो हाइवा 20 एमएम गिट्टी लागत 39 हज़ार रुपये, एवं ह्यूम पाइप 3 नग लागत 9 हज़ार रुपये की बतायी गई है. इस प्रकार कुल मटेरियल की कीमत 89 हज़ार रुपये बताया गया है जिंसमे यदि वास्तविक धरातल पर देखा जाए तो 8 से 10 बोरी तक घटिया क्वालिटी की राखड़ मिली सीमेंट, पुरानी कैथा पंचायत से निकाले हुए पत्थर, और थर्ड ग्रेड की डस्ट मिलाकर मात्र 10 से 15 हज़ार रुपये के खर्च में पुल बनाई जा रही है जिसकी की फ़ोटो भी संलग्न है. इस पुलिया निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी ही नही हो रही बल्कि सीधे सीधे आंखों में धूल झोंक दिया जा रहा है जिसमे सरकार प्रशासन अंधा हो चुका है. या यूं कहें की सीईओ, इंजीनियर और अन्य अधिकारियों को इतना माल मिल चुका है की सुपरवाईज़िंग  एजेंसी अपने आप आंख बन्द कर ली है.

जनपद और ज़िला स्तर से चलाया जा रहा भष्ट्राचार का धंधा

    जिन ग्राम पंचायतों में हो रहे कार्यों में अनियमितता और भष्ट्राचार की शिकायत जनपद और जिला स्तर पर की जा रही है आखिर उसमे कलेक्टर, कमिश्नर और सीईओ कार्यवाही क्यों नही कर रहे है. क्या वजह है? बात बहुत ही स्पष्ट है की चूंकि इसमे भष्ट्राचार की राशि उच्चस्तर तक जा रही है इसलिए पंचायती कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर कोई भी उच्चाधिकारी कोई कार्यवाही नही करता. टीएस होने से लेकर कार्य तक सभी का शेयर फिक्स होने से शिकायतो पर मात्र लीपापोती की जाती है. यदि शिकायतें की जाती हैं तो मात्र उनमे फ़र्ज़ी पंचनामा और फ़र्ज़ी प्रतिवेदन बनाकर ऊपर प्रेषित कर दिया जाता है. इसी बात को पुख्ता करते हुए बता दें की सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा वर्ष 2016 के आसपास भोपाल मंत्रालय बल्लभ भवन से लेकर पीएमओ तक दर्जनों पुख्ता शिकायतें पूरे प्रूफ के साथ भेजी गईं थीं लेकिन जब दो साल बाद उनके निराकरण का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ तो आश्चर्य हुआ क्योंकि पीएमओ में भेजी गई शिकायत के निराकरण में जिंसमे की उच्चधिकारियों और प्रतिस्पर्धी सक्षम टीम द्वारा जांच की माग की गई थी उसकी जांच प्रतिवेदन में जनपद स्तर के बाबू द्वारा उपलब्ध करवाये गए जांच प्रतिवेदन को ही आधार बनाकर सीईओ जनपद एवं ज़िला एवं कलेक्टर रीवा तक के हस्ताक्षर तो थे ही साथ ही प्रादेशिक स्तर पर बल्लभ भवन मंत्रालय के अधिकारियों के भी वही प्रतिवेदन थे. अर्थात मामला साफ स्पष्ट था की जिस जांच और हीलाहवाली से थककर आवेदक द्वारा मामला बल्लभ भवन मंत्रालय एवं पीएमओ को इस आशय के साथ भेजा गया था की इसमे कोई सार्थक कार्यवाही होगी और साथ ही जांच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी द्वारा करवाई जाकर सही निराकरण होगा उसमे पीएमओ लेवल तक कहीं कुछ नही हुआ. 

   अब प्रश्न यह उठता है की कार्यपालिका में पीएमओ से बड़ा कौन सा विभाग हो सकता है. आवेदक शिकायतकर्ता जब ज़िला स्तर की हीलाहवाली से थकता है तो सीएमओ और पीएमओ को शिकायत भेजता है लेकिन वहां भी उसे गंभीरता से लेने की बजाय मात्र औपचारिकता पूर्वक निचले स्तर पर फॉरवर्ड कर दिया जाता है नतीज़ा वही मिलता है जो पहले मिल रहा था. जांच प्रतिवेदन मात्र बाबू लेवल के कर्मचारी का ही जाएगा जो पहले ही खा पीकर बैठा हुआ है. 

    भगवान मालिक है ऐसे सरकार प्रशासन का और ऐसे लोकतंन्त्र का.

संलग्न - रीवा ज़िले के गंगेेेे जनपद अन्तर्गत वघटितहै पंचायत केेई घााटीया तरीके से निर्माण की जा रही गुणवत्ताविहीन पुलिया की फ़ोटो साथ ही पञ्च परमेश्वर योजनान्तर्गत बनाई जा रही इस पुलिया के विषय में राजवीर ट्रेडर्स नामक दुकान से जारी किये गए फ़र्ज़ी बिल बाउचर की फ़ोटो भ संलग्न भी.

-------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Saturday, March 17, 2018

अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की घटिया गुणवत्ता की शिकायत पर जांच करने पहुचे मऊगंज उपयंत्री अमित गुप्ता, ठेकेदार को पकड़ाया नोटिस, गुणवत्तापूर्ण सड़क नही बनी तो होगी रिकवरी और साथ ही होगा ठेका निरस्त

दिनांक 17 मार्च 2018, स्थान - गंगेव/गढ़ रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत अगडाल से कैथा तक बनायी जा रही 9.4 किमी सड़क की घटिया गुणवत्ता की शिकायत ज़िले से लेकर केंद्र तक की गयी है जिस पर कई मर्तबा जांचें हुईं लेकिन एस क्यू एम और एन क्यू एम से लेकर सभी जांच करने पहुचे हैं परंतु इस पर अब तक कोई सार्थक कार्यवाही नही हुई है। 

     पुलों के निर्माण में पहले ही गुणवत्ता की अनदेखी की गयी है जिससे कई पुलें समय से पहले मात्र 6 माह में ही टूट चुकी हैं। कैथा स्थित कैप्टेन आर डी पांडेय के घर के सामने पुल बीचों बीच दरार आने से टूट गयी है।

      इसी प्रकार कई पुलें ऐसी देखी जा सकती हैं जिनमे दरार आ जाने और घटिया गुणवत्ता के कारण खराब हो चुकी है। इन सब बातों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे ज़िले में प्रधानमंत्री सड़क के कार्यों में गुणवत्ता की कितनी अनदेखी हो रही है।

    अभी हाल ही में पिछले कुछ दिनों से लौरी मोड़ से लेकर अकलसी मोड़ तक मात्र तीन किमी सड़क पर डब्लू एम एम डालकर बिना पर्याप्त पानी डाले और बिना उचित मात्रा में प्राइमर डाले डामर युक्त गिट्टी डाली जा रही थी जिससे डामर की पकड़ नही बन पा रही थी जिसके कारण कई स्थानों पर सड़क में गड्ढे बन गए थे और सड़क टूटी हुई दिख रही थी। कई स्थलों पर यह भी देखा गया था कि 27 एम एम की डामर गिट्टी मिली हुई प्रथम लेयर भी सही तरीके से नही डाली गई थी जिस कारण से स्वतः ही गड्ढे बन गए थे। इस बात पर संबंधित ठेकेदार सोनभद्र कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के संदीप पांडेय और मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क के जीएम सुजीत कुमार निगम और उपयंत्री अमित गुप्ता को कई मर्तबा अवगत कराया गया था परंतु मात्र हवा में ही अस्वासन का खेल चल रहा था। अब जब लौरी नंबर 3 के निवासी योगेंद्र शर्मा ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को दिनांक 17 मार्च शुबह यह जानकारी पुनः दी कि सड़क की गुणवत्ता के साथ निरंतर खिलवाड़ चल रहा है और कोई सुनवाई नही हो रही है जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधित मऊगंज उपयंत्री को तत्काल निर्माण स्थल पर पहुचकर निरीक्षण करने की मांग की गयी जिस पर दोपहर लगभग 1 बजे उपयंत्री अमित गुप्ता लौरी नंबर 3 पहुचे और पाया कि शिकायत सही थी। प्राइमर का उचित अनुपात में प्रयोग नही होना पाया गया, सड़क में पानी का छिड़काव भी होना नही पाया गया साथ ही 27 एम एम परत भी कई स्थानों पर नही पायी गई। 

     इस पर उपयंत्री द्वारा लिखित तौर पर ठेकेदार संदीप पांडेय को नोटिस जारी करने की बात कही गयी साथ ही बताया गया कि यदि सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जाता रहा तो राशि रोककर ठेका निरस्त कर वशूली की कार्यवाही भी की जा सकती है। इस पर उपस्थित सभी ग्रामीण जनों ने प्रधानमंत्री सड़क के मजबूती पूर्ण निर्माण की माग की है।

    बता दें कि अगडाल से कैथा तक 9 किमी 4 सौ मीटर लंबाई की सड़क का पैकेज क्र. एम पी 32170 है जिसकी प्रारंभिक लागत 3 करोड़ 33 लाख 43 हज़ार रुपये बतायी गई है। औसतन देखा जाए तो प्रति किमी इस सड़क की लागत 33 लाख के आसपास आ रही है जो प्रधानमंत्री सड़क के हिसाब से उचित भी है परंतु इस पर भी सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता किया जाना विभाग और ठेकेदार की मिली भगत को दर्शाता है। एक बात और भी ध्यान देने योग्य है यह पूरी सड़क पहले से भी 12 मासी मुख्यमंत्री सड़क थी जिस पर पहले से भी पर्याप्त मिट्टी और मोरम डाला गया था जिससे सड़क की ऊंचाई काफी थी। ऐसे में सड़क की गुणवत्ता के साथ समझौता करना सम्पूर्ण सिस्टम पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

      अब देखना यह होगा कि दिनांक 17 मार्च को मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क उपयंत्री की जांच और की गई कार्यवाही भी मात्र औपचारिकता ही रहेगी कि कार्य की गुणवत्ता में कुछ सुधार होगा।

  संलग्न - अगडाल से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की जांच करने पहुचे उपयंत्री अमित गुप्ता एवं ठेकेदार के कर्मचारियों की फ़ोटो और साथ ही सड़क की घटिया गुणवत्ता की फ़ोटो।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Thursday, January 5, 2017

(Rewa, MP) गौ हत्याओं और पशु प्रताड़ना पर रीवा जिला प्रशासन नहीं लगा पा रहा रोक



गौ हत्याओं और पशु प्रताड़ना पर रीवा जिला प्रशासन नहीं लगा पा रहा रोक

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) कहने को तो पशुओं और गौवंशों की सुरक्षा के लिए इतने कानून बने हैं पर देखना होगा की उन नियमों का पालन क्या कहीं भी पूरे मप्र में सही तरीके से हो पा रहा है. मप्र में विशेष तौर पर गौवंश प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक वर्ष 2010/12 में पारित किया गया जिसमे गौवंशों के वध पर और प्रताड़ना पर पांच हज़ार तक का जुर्माना और अधिकतम सात साल के कैद का प्रावधान है और यह अपराध संज्ञेय भी है साथ ही आरोपी को अपने आप को दोषमुक्त सिद्ध करना पड़ेगा ऐसा प्रावधान है. इसी प्रकार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अंतर्गत भी कई प्रावधान हैं जिन्हें यदि कड़ाई से लगाया जाये तो पशुओं और गौवंशों के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता काफी हद तक बंद की जा सकती है. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत भी पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने का प्रावधान है.

लालगांव पंचायत में हर्दी-अटरिया के बीच बनाया गया है गौवंशों का अवैध बांड़ा

अवैध बांडे एक जो सबसे भयावह दृश्य था वह है लालगांव पंचायत में हर्दी-अटरिया के बीच बनाया गया अवैध बांड़ा जो की वहीँ आसपास के लोग जैसे विजय सिंह, मुन्ना राजा, काशी सिंह, रावेन्द्र मिश्रा द्वारा कानून को धता बताकर बनाया गया है. चश्मदीखों के अनुसार यहाँ पर पिछले कई महीनों से गौवंशों को कैद करके रखा गया है जिसमे न तो चारे, भूसे की व्यवस्था है और न ही किसी पशुशेड की. ठण्ड में पांच डिग्री के नीचे के तापमान पर आज गौवंश भूंख, प्यास, छाया बिना तड़प-तड़प कर जान दे रहे हैं जिन्हें देखने वाला न तो कोई कलेक्टर है और न ही कोई मंत्री मिनिस्टर. खैर गाँव वालों का क्या कहना यह बाड़े तो उन्ही के द्वारा बनाये गए हैं. हर्दी-अटरिया स्थित यह अवैध पशु-कैदखाना लालगांव के किसी गुप्ता की खाली पड़ी हुई जमीन में बनाया गया है. परन्तु चश्मदीखों के अनुसार यह अवैध बांड़ा बनवाया वहीँ हर्दी, बर्रेही, लालगांव और अटरिया के तथाकथित कृषकों द्वारा हैं.



भाजपा मंडल अध्यक्ष शंकर सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा बनवाया गया सोनवर्षा डांडी का अवैध बांड़ा

      इसी क्षेत्र में दूसरा अवैध बांड़ा लालगांव पंचायत के सोनवर्षा डांडी नामक स्थान पर बनाया गया है जो वहीँ के यादव समुदाय की जमीन पर बना हुआ है. दो जनवरी 2017 की रात गढ़ पुलिश के सहयोग से यह अवैध बांड़ा हटाये जाने के बाद अगले दिन इसी क्षेत्र के भाजपा मंडल अध्यक्ष शंकर सिंह स्वयं जिला पंचायत प्रत्यासी राकेश शर्मा उपाध्याय के साथ थाना गढ़ पहुचे और उन्होंने स्वीकार किया की सोनवर्षा का यादवों की जमीन पर बनाया गया बाड़ा उनके और सहयोगियों की माध्यम से बनाया गया था. यह हाल हैं गौवंश के लिए समर्पित और हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए कार्य कर रहे भाजपा के कार्यकर्ताओं के. यदि ऐसा है तो वह लोग ज्यादा बेहतर हैं जो गौवंशों को अपने आहार के लिए प्रयोग कर रहे हैं. कम से कम गौवंशों को प्रताड़ना देकर घुट-घुट कर अवैध बांडो में चारे, पानी, छाया बिना कड़ाके की ठण्ड में मारने से तो अच्छा है उन्हें एक बार में मौत के घाट उतार दिया जाना?

गौवंशों और बेजुबान पशुओं के साथ क्रूरता मानवीय संवेदनाओं के अंत का द्योतक

      यह भारतीय संस्कृति का दुर्भाग्य है की आज मात्र गौवंशों और पशुओं की सुरक्षा के लिए भी राजनीति की जा रही है. अब कम से कम आम जनता के समक्ष यह बात भली-भांति स्पष्ट हो जाएगी की क्या यह राजनीतिक पार्टियाँ मात्र मानवीय संवेदनायों को आधार बनाकर ही तो राजनीतिक लाभ ले रही हैं. न ही इन्हें गौवंशों की सुरक्षा से कोई लेना देना है और न ही आम किसान और आम जनता से.
      यह बात सत्य है की आवारा पशुओं से आज हर एक किसान और कास्तकार त्रस्त है परेशान है पर प्रश्न यह भी है की क्या आवारा पशुओं और गौवंशों को अवैध रूप से बनाये गए बिना किसी उचित व्यवस्था के बांडो में चारा, पानी, भूसा, छत बिना कड़ाके की ठण्ड में तड़पने मरने के लिए छोंड देने से किसानों की समस्या का समाधान हो जायेगा? किसान यह कैसे भूल सकता है की यही गौवंश हैं जिनके दूध, दही, घी, और दुग्ध उत्पाद खा पीकर वह पला बढ़ा है और उसके बाल बच्चे इन्ही गौवंशों के दुग्ध उत्पाद से पल बढ़ रहे हैं. क्या हर सुबह जब हम एक कप चाय पीते हैं तो इस बात का एहसास नहीं करते की इस चाय में डाला गया दूध किसी
 दुधारू पशु से ही प्राप्त हुआ होगा?
    
      आखिर इन गौधनों की इतनी बड़ी दुर्दशा क्यों? क्या यही हमारे ग्रामीण किसान भाई हर एक ग्राम पंचायत में स्वयमेव ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकते कि एक-दो पशु सभी लोग अपने घरों में बाँध लें और अन्य पशुओं की तरह ही इनकी भी व्यवस्था बना लें?

पशु और गौवंश न होने पर प्राकृतिक पर्यावरण पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
    
      आज अज्ञानता अथवा हेकड़ी बस भले ही किसानों और भारतीयों को यह बात समझ न आ रही हो पर यह बात तय है की यदि गौवंश और पशुधन न रहेंगे तो पूरी भूमि बंजर हो जाएगी. प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जायेगा. उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. शांस लेने के लिए हवा न मिलेगी और पीने के लिये पानी नहीं होगा. ऐसा समय आयेगा की मानवता एक-एक दाने के लिए तरस जाएगी. क्योंकि आज विज्ञान भी इस बात को मान रहा है की रासायनिक खादों के हो रहे निरंतर प्रयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर पड़ रही है जिससे हर वर्ष भूमि में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उर्वरक और रासायनिक तत्वों का प्रयोग करना पड़ रहा है. आज कृषि विज्ञान जो गोबर अथवा बायो-खाद और बायो-उत्पाद की निरंतर बात कर रहा है वह इसी वजह से कर रहा है कि लगातार बढ़ रही मानवीय आवादी के पालन-पोषण के लिए निरंतर बंजर हो रही भूमि की उर्वरा शक्ति कैसे बढ़ाई जाए.

     
प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर के संज्ञान में है पशुपालन एवं पशु संवर्धन समिति
     
      जिला स्तरीय समितियों की यदि बात किया जाए तो गौधन और पशुधन के पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर जिले में विशेष निगरानी समितियों का गठन होता है जो सदैव जिला कलेक्टर के संज्ञान में रहता है. जिला कलेक्टर यदि चाहे तो या की मनरेगा की उप योजना अंतर्गत अथवा पशुपालन विभाग द्वारा तीन-चार पंचायतों के बीच में आवारा गौवंशों की सुरक्षा और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बजट का आवंटन करवा कर इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान कर सकता है. परन्तु यह सब इच्छाशक्ति और योजनायों के सही क्रियान्वयन पर निर्भर करता है. आज यह जिले में भली भांति विदित है की पशु चिकित्सा विभाग की मदद से कई पंचायतों में गौ संवर्धन केंद्र बनाने बाबत बजट दिया गया था परन्तु वह सब भ्रष्ट्राचार की बलि चढ़ गया. क्या यह सब देखने वाला कोई नहीं है? आखिर क्या जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह बातें नहीं हैं? क्या किसानों की आवारा पशुओं सम्बन्धी समस्या जो किसी न किसी माध्यम से रोज ही मीडिया में छाई रहती है जिला प्रशासन अथवा प्रदेश स्तर पर ज्ञात नहीं है? सबको सब कुछ ज्ञात है, मात्र आवश्यकता है उसके सही क्रियान्वयन की और समस्या के उचित निराकरण की. 

पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर स्थानीय पुलिश द्वारा दर्ज किये जाने चाहिए अपराधिक प्रकरण

      अब यदि किसान कास्तकार यह चाहें की बेजुवां पशुओं को अवैध तरीके से बिना चारा, पानी, भूसा, और छत्रछाया के कड़ाके की ठण्ड में तड़प कर मरने के लिए छोंड दिया जायेगा और कोई कुछ नहीं करेगा तो यह बहुत बड़ी भ्रान्ति है. क्योंकि हर व्यक्ति आज यह जान ले की जितने कड़े कानून मानव की सुरक्षा के लिए बने हैं वैसे ही कानून घरेलु पशुओं और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भी बने हैं. समस्या यह है की शासन प्रशासन इन कानून को कड़ाई से नहीं लगा पा रहा है अन्यथा कम से कम छः माह की जेल और एक हज़ार रुपये का जुर्माना तो तय है, और दोषी पाए जाने पर यह सजा पांच हज़ार के जुर्माना के साथ यह सात साल तक हो सकती है.  

संलग्न – 1) नीचे अवैध बांडो में कैद पशुओं के देखें संलग्न यूट्यूब विडियो जो की पशुओं के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता को दर्शाते हैं. 2) इसी विषय में अवैध बांडो के लिए गए फोटोग्राफ जिनमे कुछ पशु मृत पड़े हैं तो कुछ मरने की कगार पर खड़े हैं.
  
























   -------------------
Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 

Thursday, July 7, 2016

(रीवा) रीवा में सक्षमों की लुटाई तो हो ही रही है, मानशिक और शारीरिक विकलांगों को भी नहीं छोड़ा प्रशासन ने

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)
------------------------------------------------------------------------

विषय – 70%  मानसिक विकलांग 16 वर्षीय सतीश पटेल पिता रामलल्लू पटेल निवासी ग्राम कैथा ब्लाक गंगेव रीवा  की पिछले 10 माह से निःशक्त पेंशन सामाजिक न्याय विभाग रीवा द्वारा लंबित. बताया अकाउंट में गड़बड़ी.

सन्दर्भ – म.प्र. शासन की सी.एम्. हेल्पलाइन की शिकायत क्र. 20159520. हितग्राही का बी.पी.एल. राशन कार्ड क्र. 84. हितग्राही का मध्यांचल बैंक शाखा गढ़ रीवा का बैंक अकाउंट नंबर 8009840706.

      (कैथा, गंगेव ब्लाक रीवा) शारीरिक एवं मानसिक विकलांगों के लिए तो सरकार अच्छे अच्छे शब्दों का सृजन कर रही है उन्हें दिव्यांग जैसे साहित्यिक सब्दों से नवाज़ा जा रहा है. परन्तु कास हमारी सरकार यह भी कभी खोजने का प्रयास करे की सरकार की जितनी भी योजनायें ग्रामीण अंचलों में इन दिव्यांग और अन्य हितग्राहियों के लिए चलायी जा रही है कौन कौन और किस तरह इसका लाभ प्राप्त कर रहे हैं. क्योंकि वास्तविकता देखने पर तो समझ में आ ही जायेगा की कागज़ी कार्य और वास्तविकता में तो बहुत बड़ी खायीं है. भला जब तक भारत की पूरी कार्यपालिका की मानशिकता में बदलाव नहीं होगा तो कहाँ से सुधार संभव है.

चाहे हम बात करें आवास योजनायों में अनियमितता की अथवा पंचायती कामों में भ्रष्ट्राचार की. बिडम्बना बस एक ही बात की है की जहां मात्र चंद मुठ्ठीभर लोग बदलाव की सोच रखते हैं तो लगभग 95%  से ऊपर भ्रष्ट्राचार की स्थिति को यथावत बनाये रखना चाहते हैं.

सत्तर प्रतिशत मानशिक विकलांग एवं नवालिग़ सतीश पटेल निवासी कैथा का प्रकरण –

अभी कुछ माह पूर्व  सत्तर प्रतिशत विकलांग हितग्राही सतीश पटेल के पिता रामलल्लू पटेल ने अपनी दर्द भरी दास्ताँ बताई. इस व्यक्ति ने लगभग आठ माह पूर्व दिनांक 30/10/2015 को गंगेव जनपद (रीवा) में अपने मानशिक विकलांग पुत्र के विकलांग पेंशन के लिए आवेदन डाला था जिसकी स्वीकृत क्र. 6305 है. परन्तु तब से लेकर आज तक इस गरीब के बच्चे का पेंशन उसके मध्यांचल बैंक शाखा गढ़ के अकाउंट में नही भेजा गया. कई बार जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया और कैथा पंचायत के सचिव अच्छेलाल पटेल, पी.सी.ओ. उपाध्याय सहित गंगेव के सोनी बाबू एवं सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल तक बात राखी गयी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. मात्र यह बता दिया जाता था की पेंशन भोपाल से ही नहीं आ रही है. अंत में जब यह बात सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी के पास आयी तो सी.एम . हेल्पलाइन की शिकायत क्र.20159520 के साथ ही यह प्रकरण राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल में भी रख दिया गया. पर चूंकि मामला मानवाधिकार आयोग भोपाल में पंहुचा अतः श्रीमान अध्यक्ष महोदय से यह भी अपील की गयी की इस सतीश पटेल वाले प्रकरण को आधार बनाकर अध्यक्ष महोदय म.प्र. शासन को यह भी निर्देश जारी करें की जितने भी इस प्रकार मानवाधिकार के उल्लंघन वाले मसले पूरे प्रदेश में हैं उस पर पूरे राज्य में तत्काल कार्यवाही कर सभी ऐसे हितग्राहियों के साथ न्याय किया जाये.  

मानसिक विकलांग एवं सोलह वर्षीय नाबालिग हितग्राही सतीश पटेल पिता रामलल्लू पटेल जन्म से ही मानशिक विकलांग है एवं उसके घर परिवार की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और परिवार बी.पी.एल. की श्रेणी में आता है. सतीश के पिता रामलल्लू पटेल के नाम गरीबी रेखा के नीचे का राशन कार्ड बना है जिसका कैथा ग्राम पंचायत में कार्ड क्र. ८४ है. हितग्राही सतीश का मध्यांचल बैंक शाखा गढ़ रीवा का बैंक अकाउंट नंबर 8009840706.

उपरोक्त निःशक्त पेंशन सम्बन्धी प्रकरण को सी.एम्. हेल्पलाइन पोर्टल में तो रखा गया जिसका की शिकायत क्र. 2059520 है परन्तु आज दिनांक तक इस मामले में कोई निराकरण नहीं दिया गया. जो निराकरण दिया गया वह झूंठा एवं असत्य निराकरण दिया गया. आज दिनांक तक कोई भी पेंशन राशि हितग्राही के बैंक खाते में नहीं डाली गयी है.

-----------------

SHIVANAND DWIVEDI
(Social, Scientific, and RTI activist)
Village KAITHA, Post  AMILIYA,
Police Station GARH, Tehsil  MANGAWAN,
District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117

Mob. +917869992139