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Tuesday, August 28, 2018

स्वयं के बनाये कीचड़ में फंसा शिवराज का विकाश रथ (मामला ज़िले के विभिन्न ब्लॉकों में मप्र सरकार द्वारा भेजे गए ठेके के विकाश रथ की दुर्दशा का जो की गांव में घुसने के पहले ही कीचड़ से सराबोर सड़कों में फंस रहा, लोगों की गालियां खाकर कार्यकर्ता हो रहे वापस)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   सरकारी पैसे में वर्तमान मप्र सरकार द्वारा ठेके में दिया गया विकाश रथ अपने ही द्वारा समाज में फैलाये गए कीचड़ में फंसता जा रहा है. बात करें मप्र की शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा गांव गांव भेजे गए विकाश रथ की तो दिनांक 27 अगस्त को यह ठेके का विकाश रथ मनगवां विधानसभा एवं गंगेव जनपद की लोटनी, हिनौती, बांस एवं कैथा, पडुआ पंचायत में भेजा जाना था लेकिन हिनौती पंचायत से होते हुए जैसे ही करहिया वाया बड़ोखर ग्राम में घुसा तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के आगे सुरसरी सिंह परिहार के घर से बृजराज सिंह के घर के आगे तक लगभग ढाई सौ मीटर की पंचायती सड़क में कीचड़ के बीच बुरी तरह से फंस गया. इस बीच विकाश रथ में उपस्थित कटनी एवं सीहोर के दो कार्यकर्ता जिनको पेमेंट देकर सरकार ने ठेके में हायर किया हुआ था वह पैदल चलते हुए आदमी ढूंढते हुए कैथा श्रीहनुमान मंदिर तक पहुचे जहां पर उपस्थित मीडिया ग्रुप खुलासा लाइव न्यूज़ के आनंद द्विवेदी एवं सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी मौके पर पहुच कर कीचड़ में फंसी हुई विकास रूपी सरकार की गाड़ी को निकालने में मदद किये. यह अपने आप में अजीबोगरीब वाकया ही कहा जाएगा की सरकार के विकाश की कीचड़ में फंसी गाड़ी को आम जनता निकाल रही है. अब सरकार को अपने विकाश रथ को स्वयं निकाल पाने की कूबत नही बची. पर जिस प्रकार की स्थिति अब बनी हुई है इससे साफ जाहिर है अब शायद आम जनता के बलबूते नही बचा की सरकार की फंसी हुई गाड़ी को निकाल पाए.

बड़ोखर ग्राम की सड़क को खा गया सरपंच सचिव

   बड़ोखर ग्राम की सड़क को हिनौती पंचायत के सरपंच और सचिव ने मिलकर समाप्त कर दिया. आज से पांच वर्ष पहले भूतपूर्व सरपंच श्रीधर द्विवेदी द्वारा बनाई गई इस पंचायती सड़क को वर्तमान सरपंच ने कुछ नही किया. आम जनता की माने तो मुनेंद्र सिंह परिहार, सुरसरी सिंह परिहार, शिवेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, दंगल सिंह, संते सिंह, बृजराज सिंह राजमणि पटेल, छोटेलाल पटेल, बृजबासी पटेल आदि के अनुसार वर्तमान सरपंच ने एक मुट्ठी मोरम तक इस सड़क में नही डाला.

हिनौती पंचायत में जमकर हुआ भष्ट्राचार 

  यदि वास्तव में देखा जाए तो शान्तिधाम से लेकर अन्य ग्रेवल सड़क निर्माण, मनरेगा एवं पंच परमेश्वर के कई कार्यों में वर्तमान सरपंच और सचिव द्वारा खूब जमकर खाया पिया गया है. यहां तक की कैथा पंचायत के मजदूरों संतोष केवट, तेजेस्वरी केवट, रामखेलावन केवट आदि द्वारा हिनौती पंचायत में कार्य तो करवाया गया लेकिन इनका पेमेंट आज तक नही दिया गया. जबकि देखा जाए तो दूसरी पंचायत के श्रमिक मजदूरों द्वारा किसी अन्य पंचायत में कार्य करवाने का प्रावधान तब तक नही है जब तक उस पंचायत में मजदूर उपलब्ध हों. हिनौती पंचायत में ऐसे कई मजदूर हैं जिनकी मजदूरी आज तक नही मिली है.

  मप्र की सड़कें अमेरिका से हैं बेहतर

    बड़ोखर जैसे कई ग्रामों की बातें सामने आईं तो याद आया की एक बार मप्र के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने अमेरिका दौरे में कहा था की मप्र की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं. शायद यह कथन मानवीय इतिहास का अब तक सबसे बड़ा जोक बन चुका है. पर यह सरकारें तो इतनी बेशर्म हो चुकी हैं जिन्हें हंसी का पात्र बनने पर भी कोई शर्म नही.

   ग्रामों की सड़कें तो खैर है नमूना हैं हीं, यहां तो हाईवे सड़कों की हालात देख लें तो शर्म आती है की क्या यही मानवाधिकार है, क्या यही 70 वर्ष का भारतीय लोकतंन्त्र है. क्या यही 70 वर्ष की स्वतंत्रता बाद कि उपलब्धि है. सवाल यह उठता है किस मुँह से यह राजनेता जनता के समक्ष वोट मांगने आते हैं. 


    इस विकाश यात्रा में सम्मिलित ठेके के कार्यकर्ताओं ने बताया की उनकी सबसे अधिक दुर्दशा हो रही है क्योंकि ग्रामों में कहीं भी सड़क अच्छी नही है और जिस ग्राम में वह जाते हैं वहीं उनके जान पर बन आती है.

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा रिकॉर्ड फेसबुक लाइव वीडियो को एक दिन में 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा

   जब मप्र सरकार के कीचड़ में फंसे हुए विकाश रथ को निकालने के लिए आम जनता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं खुलासा मीडिया न्यूज़ डिस्ट्रिक्ट ब्यूरो आनंद द्विवेदी पंहुचे तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के पास फेसबुक में लाइव वीडियो भी शेयर किया गया था जिसे मात्र 24 घंटे के भीतर ही 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा है और विभिन्न प्रकार के मजेदार कमेंट किये जा रहे हैं जिसकी लिंक भी यहां पर नीचे दी जा रही है. इस वीडियो में वह सभी बातें सामने आई हैं जो वर्तमान सरकार के हवा हवाई वादों की पोल को स्पष्ट बयां कर रही है.

फेसबुक वीडियो लाइव लिंक- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2122566207985583&id=100006966720612

संलग्न - कृपया गंगेव जनपद के हिनौती ग्राम पंचायत के बड़ोखर ग्राम में कीचड़ से वापस लौटती विकाश रथ की फ़ोटो साथ ही बड़ोखर ग्राम की खस्ताहाल कीचड़ से सनी हुई सड़क. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Sunday, August 26, 2018

कैथा पंचायती पुलिया निर्माण में भष्ट्राचार - लाख की पुलिया निर्माण में सरपंच सचिव सब खा गया (मामला ज़िला रीवा अन्तर्गत गंगेव जनपद का जिंसमे कैथा पंचायत सरपंच संत कुमार ने लाखों की पुलिया निर्माण में किया भष्ट्रचार, कंक्रीट के स्थान पर पंचायत भवन के पत्थर और डस्ट से बन रही बृजबल्लभ पटेल के घर के पास की पुलिया, पाइप भी पुरानी डाली)

दिनांक 27 अगस्त 2018, स्थान - गंगेव/गढ़ रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  गंगेव जनपद में भष्ट्राचार अपने चरम पर चल रहा है. गंगेव जनपद पंचायत अन्तर्गत आने वाली लगभग ज्यादातर पंचायतों में शेयर का खेल चल रहा है. जनपद सीईओ एवं राजेश सोनी नामक बाबू के करामात निरंतर जारी हैं. चाहे कोई भी सीईओ आये गंगेव जनपद में मात्र राजेश सोनी की चल रही है. सोनी बाबू ने पूरी जनपद की ऐसी तैसी करके रखी हुई है जिस पर कलेक्टर कमिश्नर तक की कार्यवाही की हिम्मत नही. अभी पिछले कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत गरीब परिवारों की शादियाँ करवाई गई थी जिंसमे जमकर फर्ज़ीवाड़ा हुआ था जिसकी खबर प्रदेश के काफी समाचार पत्रों में छपी थी. ऐसे फ़र्ज़ी जोड़ों की शादियाँ हुईं जिनके कई बच्चे भी थे.

   कैथा पंचायत में सभी पुलिया निर्माण में हुई लीपापोती

   जनपदों के लगभग सभी पंचायतों में पञ्च परमेश्वर योजनान्तर्गत पुलिया एवं नाली साथ ही पीसीसी सड़क निर्माण का कार्य करवाया जा रहा है. इस बीच कैथा पंचायत में भी कई पुलिया निर्माण एवं पीसीसी निर्माण का कार्य किया जा रहा है.

    कैथा पंचायत की पुलिया निर्माण में कंक्रीट के स्थान पर पत्थर और डस्ट का प्रयोग हो रहा है. जबकि देखा जाए तो पुलिया निर्माण के लिए 89 हज़ार रुपये के बिल में अच्छी गुणवत्ता के बालू, गिट्टी एवं 55 बोरी सीमेंट की बात आई है. संलग्न रसीद से साफ स्पष्ट है जिस 89 हज़ार रुपये का फ़र्ज़ी बिल बाउचर बनाया हुआ बताया गया है उसमे किसी भी सामग्री का प्रयोग वास्तविक धरातल पर पुलिया निर्माण में नही हो रहा है.

बृजबल्लभ पटेल के घर के पास पुलिया निर्माण में भष्ट्राचार

  बृजबल्लभ पटेल के घर के पास नामक पुलिया निर्माण की राशि एक लाख रुपये सैंक्शन हुई बतायी गई थी जिंसमे किसी राजवीर ट्रेडर्स के द्वारा 89 हज़ार रुपये सामग्री का बिल बाउचर दिनाँक 04/05/2018 को पास किया गया है. पुलिया निर्माण के लिए राशि पंचायतीराज संचालनालय द्वारा पंच परमेश्वर योजनान्तर्गत दिनांक 02/10/2016 को सैंक्शन हुई. 

   राजवीर ट्रेडर्स द्वारा जारी किये गए बिल बाउचर में इस पुलिया निर्माण हेतु एक हाइवा बालू 24 हज़ार 500 रुपये के हिसाब से, 310 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से 55 बोरी सीमेंट कुल 17 हज़ार पचास रुपये, दो हाइवा 20 एमएम गिट्टी लागत 39 हज़ार रुपये, एवं ह्यूम पाइप 3 नग लागत 9 हज़ार रुपये की बतायी गई है. इस प्रकार कुल मटेरियल की कीमत 89 हज़ार रुपये बताया गया है जिंसमे यदि वास्तविक धरातल पर देखा जाए तो 8 से 10 बोरी तक घटिया क्वालिटी की राखड़ मिली सीमेंट, पुरानी कैथा पंचायत से निकाले हुए पत्थर, और थर्ड ग्रेड की डस्ट मिलाकर मात्र 10 से 15 हज़ार रुपये के खर्च में पुल बनाई जा रही है जिसकी की फ़ोटो भी संलग्न है. इस पुलिया निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी ही नही हो रही बल्कि सीधे सीधे आंखों में धूल झोंक दिया जा रहा है जिसमे सरकार प्रशासन अंधा हो चुका है. या यूं कहें की सीईओ, इंजीनियर और अन्य अधिकारियों को इतना माल मिल चुका है की सुपरवाईज़िंग  एजेंसी अपने आप आंख बन्द कर ली है.

जनपद और ज़िला स्तर से चलाया जा रहा भष्ट्राचार का धंधा

    जिन ग्राम पंचायतों में हो रहे कार्यों में अनियमितता और भष्ट्राचार की शिकायत जनपद और जिला स्तर पर की जा रही है आखिर उसमे कलेक्टर, कमिश्नर और सीईओ कार्यवाही क्यों नही कर रहे है. क्या वजह है? बात बहुत ही स्पष्ट है की चूंकि इसमे भष्ट्राचार की राशि उच्चस्तर तक जा रही है इसलिए पंचायती कार्यों में अनियमितता की शिकायत पर कोई भी उच्चाधिकारी कोई कार्यवाही नही करता. टीएस होने से लेकर कार्य तक सभी का शेयर फिक्स होने से शिकायतो पर मात्र लीपापोती की जाती है. यदि शिकायतें की जाती हैं तो मात्र उनमे फ़र्ज़ी पंचनामा और फ़र्ज़ी प्रतिवेदन बनाकर ऊपर प्रेषित कर दिया जाता है. इसी बात को पुख्ता करते हुए बता दें की सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा वर्ष 2016 के आसपास भोपाल मंत्रालय बल्लभ भवन से लेकर पीएमओ तक दर्जनों पुख्ता शिकायतें पूरे प्रूफ के साथ भेजी गईं थीं लेकिन जब दो साल बाद उनके निराकरण का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ तो आश्चर्य हुआ क्योंकि पीएमओ में भेजी गई शिकायत के निराकरण में जिंसमे की उच्चधिकारियों और प्रतिस्पर्धी सक्षम टीम द्वारा जांच की माग की गई थी उसकी जांच प्रतिवेदन में जनपद स्तर के बाबू द्वारा उपलब्ध करवाये गए जांच प्रतिवेदन को ही आधार बनाकर सीईओ जनपद एवं ज़िला एवं कलेक्टर रीवा तक के हस्ताक्षर तो थे ही साथ ही प्रादेशिक स्तर पर बल्लभ भवन मंत्रालय के अधिकारियों के भी वही प्रतिवेदन थे. अर्थात मामला साफ स्पष्ट था की जिस जांच और हीलाहवाली से थककर आवेदक द्वारा मामला बल्लभ भवन मंत्रालय एवं पीएमओ को इस आशय के साथ भेजा गया था की इसमे कोई सार्थक कार्यवाही होगी और साथ ही जांच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी द्वारा करवाई जाकर सही निराकरण होगा उसमे पीएमओ लेवल तक कहीं कुछ नही हुआ. 

   अब प्रश्न यह उठता है की कार्यपालिका में पीएमओ से बड़ा कौन सा विभाग हो सकता है. आवेदक शिकायतकर्ता जब ज़िला स्तर की हीलाहवाली से थकता है तो सीएमओ और पीएमओ को शिकायत भेजता है लेकिन वहां भी उसे गंभीरता से लेने की बजाय मात्र औपचारिकता पूर्वक निचले स्तर पर फॉरवर्ड कर दिया जाता है नतीज़ा वही मिलता है जो पहले मिल रहा था. जांच प्रतिवेदन मात्र बाबू लेवल के कर्मचारी का ही जाएगा जो पहले ही खा पीकर बैठा हुआ है. 

    भगवान मालिक है ऐसे सरकार प्रशासन का और ऐसे लोकतंन्त्र का.

संलग्न - रीवा ज़िले के गंगेेेे जनपद अन्तर्गत वघटितहै पंचायत केेई घााटीया तरीके से निर्माण की जा रही गुणवत्ताविहीन पुलिया की फ़ोटो साथ ही पञ्च परमेश्वर योजनान्तर्गत बनाई जा रही इस पुलिया के विषय में राजवीर ट्रेडर्स नामक दुकान से जारी किये गए फ़र्ज़ी बिल बाउचर की फ़ोटो भ संलग्न भी.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139