*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: पुलिस अधीक्षक की जांच रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल, आदिवासियों के आवासों की अनदेखी का आरोप//*
*रीवा के रोझौही में न्यूक्लियर प्लांट विवाद: पुलिस रिपोर्ट को बताया गया भ्रामक, स्थानीय निवासियों ने खड़े किए बड़े सवाल//*
*टाटा पावर के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट पर घमासान: बिना जमीनी जांच के रिपोर्ट तैयार करने का आरोप, विस्थापन का मंडराया संकट//*
*रोझौही न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट: प्रशासन की जांच रिपोर्ट जमीनी हकीकत से परे, आदिवासियों के पक्के आवासों को किया गया नजरअंदाज//*
*रीवा ब्रेकिंग: रोझौही न्यूक्लियर प्लांट के निरीक्षण में बड़ा खुलासा, पुलिस रिपोर्ट पर भड़के ग्रामीण और आदिवासी//*
दिनांक 1 नवंबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के रोझौही गांव में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (TPCL) द्वारा प्रस्तावित भारत स्मॉल रिएक्टर (BSR) न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (NPP) के लिए जिओ-टेक (geotech) बोर लॉगिंग स्टडी कराने की प्रक्रिया चल रही है। इस संबंध में कार्यालय पुलिस अधीक्षक जिला रीवा द्वारा जिला दंडाधिकारी को 18 अगस्त 2026 को पत्र (क्रमांक/पुअ/रीवा/एससी-2/डीएम-M-113319/26) के माध्यम से एक जांच प्रतिवेदन सौंपा गया है।
*पुलिस की रिपोर्ट में क्या है?*
पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में थाना प्रभारी गढ़ और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस मनगवां के हवाले से कहा गया है कि प्रस्तावित स्थल (अक्षांश 24^\circ52'32''\text{N}, देशान्तर 81^\circ29'55''\text{E}) का मौके पर ग्रामीणों के साथ निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रस्तावित स्थल के आसपास रिकॉर्ड अनुसार कोई अन्य आवासीय परिसर या मकान नहीं है तथा पूर्व, पश्चिम और दक्षिण दिशा पूरी तरह खाली है, जबकि उत्तर दिशा में लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर आवासीय मकान हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भूमि विवादित नहीं है और किसी प्रकार का स्थायी निर्माण या कब्जा नहीं पाया गया है।
*स्थानीय निवासियों और जमीनी हकीकत का बड़ा खुलासा*
हालांकि, पुलिस अधीक्षक की इस रिपोर्ट को स्थानीय स्तर पर भ्रामक और जमीनी सच्चाई से परे बताया जा रहा है। स्थानीय निवासियों और तथ्यों के अनुसार:
*आवासों की अनदेखी:* रोझौही में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए चिह्नित स्थल और उसके आसपास आदिवासियों के प्रधानमंत्री आवास (PM Awas) तथा उनके अपने निजी रिहाइशी मकान बने हुए हैं जिनमें कई आदिवासी रहते हैं। जांच और निरीक्षण के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा इन मकानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
*ग्रामीणों से संपर्क नहीं:* निरीक्षण के दौरान क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय निवासियों और आदिवासियों से कोई संपर्क या बातचीत नहीं की गई।
*मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार करने का आरोप:* बिना जमीनी जांच और प्रभावित लोगों से संवाद किए बिना ही टेबल पर बैठकर मनमुताबिक रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को भेज दी गई है।
सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने कहा है की टाटा कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक ने भी गलत जांच रिपोर्ट जारी की है जिसके आधार पर टाटा कंपनी को 8 बोरहोल करने के लिए अनुमति प्रदान की गई है। लोगों में रिपोर्ट को लेकर भारी असंतोष है, क्योंकि यदि आदिवासियों के आवासों और भूमि की अनदेखी कर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाता है, तो इससे बड़े पैमाने पर विस्थापन और आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*
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