Wednesday, November 4, 2026

Breaking: सिरमौर में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ लामबंद हुए अधिवक्ता, SDM के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन//

*Breaking: सिरमौर में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट के खिलाफ लामबंद हुए अधिवक्ता, SDM के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन//*
*सिरमौर में न्यूक्लियर प्लांट की स्थापना के विरोध में लामबंद हुआ अधिवक्ता संघ//*

*परमाणु ऊर्जा संयंत्र से विंध्य की तबाही का खतरा: अधिवक्ताओं ने की परियोजना निरस्त करने की मांग//*

*रीवा के सिरमौर क्षेत्र में न्यूक्लियर प्लांट के विरोध में गरजा कानूनी व बुद्धिजीवी वर्ग//*

*परमाणु संयंत्र हटाओ, सौर ऊर्जा अपनाओ: सिरमौर के अधिवक्ताओं ने प्रशासन को दी चेतावनी//*

*चेरनोबिल और फुकुशिमा जैसे हादसों का हवाला देकर सिरमौर के अधिवक्ताओं ने जताया कड़ा विरोध//*

दिनांक 04 नवंबर 2026 रीवा मध्य प्रदेश 

रीवा (मध्य प्रदेश)। रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र (रोझौही-क्यौटी) में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र (न्यूक्लियर पावर प्लांट) के विरोध में अब कानूनविदों और अधिवक्ताओं ने भी मोर्चा संभाल लिया है। सिरमौर तहसील के अधिवक्तागण ने एकजुट होकर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सिरमौर के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन पत्र सौंपा। इस ज्ञापन में प्रस्तावित परमाणु संयंत्र से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों, जन-सुरक्षा, पर्यावरण क्षति और जल संकट को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है तथा परियोजना को तत्काल निरस्त करने अथवा अन्यत्र स्थानांतरित कर सौर एवं पवन ऊर्जा विकल्पों को अपनाने की पुरजोर मांग की गई है।  

ज्ञापन सौंपते समय अधिवक्ता सतीश मिश्रा, राजीव त्रिपाठी, शिवम सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, अनिल सिंह, आशुतोष विश्वकर्मा, अवधेश गर्ग एवं सौरभ शुक्ला सहित कई प्रबुद्ध अधिवक्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

*अधिवक्ताओं द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु एवं आपत्तियां*

ज्ञापन पत्र के माध्यम से अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित संयंत्र से संबंधित निम्नलिखित मुख्य तकनीकी व व्यावहारिक आपत्तियों को रेखांकित किया है:

*सघन रहवासी क्षेत्र एवं सुरक्षा का जोखिम:*
चेरनोबिल (1986), फुकुशिमा (2011) और थ्री माइल आइलैंड जैसी वैश्विक परमाणु आपदाओं के इतिहास का हवाला देते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि घनी आबादी वाले सिरमौर क्षेत्र में न्यूक्लियर प्लांट की स्थापना जनजीवन के लिए अत्यंत संवेदनशील और जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। 
 
*भीषण जल संकट एवं कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव:*
रीवा संभाग पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। न्यूक्लियर रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए अरबों लीटर पानी की खपत होगी, जिससे स्थानीय कृषि, पेयजल आपूर्ति और पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) बुरी तरह तबाह होने की आशंका है। 
 
*क्यौटी जलप्रपात एवं प्राकृतिक विविधता को क्षति:*
प्रसिद्ध 'क्यौटी जलप्रपात' और आसपास का पर्यटन क्षेत्र इससे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगा। संयंत्र से निकलने वाले 'थर्मल डिस्चार्ज' (गर्म पानी) और विकिरण से स्थानीय जैव-विविधता व ग्रामीणों की आजीविका को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।  

*अंतरराष्ट्रीय अनुभव एवं हरित विकल्प:*
जर्मनी, ताइवान, स्पेन और बेल्जियम जैसे विकसित राष्ट्रों द्वारा न्यूक्लियर फेज-आउट नीति अपनाने का उल्लेख करते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि जब रीवा पहले ही 'रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर' परियोजना के माध्यम से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित कर चुका है, तो फिर जोखिम भरे परमाणु संयंत्र की क्या आवश्यकता है।  

*स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव (वैश्विक शोध का संदर्भ):*
ज्ञापन में वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया गया कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के 30 किमी दायरे में रहने वाले लोगों में सामान्य परिस्थितियों की तुलना में 5% से 10% अधिक कैंसर, 9% अधिक ल्यूकेमिया और 17% अधिक थायराइड कैंसर के मामले देखे गए हैं।
  
*अधिवक्ताओं की ज्ञापन के माध्यम से प्रमुख मांगें*

अधिवक्ताओं ने जनहित और विंध्य क्षेत्र के संरक्षण हेतु ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:  

*परियोजना का निरस्तीकरण व स्थल परिवर्तन:* सिरमौर/मऊगंज के रहवासी क्षेत्र से इस परियोजना को तत्काल निरस्त किया जाए और सौर व पवन ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।  

*पारदर्शी जनसुनवाई एवं जनमत संग्रह:* प्रभावित गांवों के नागरिकों के बीच कानूनी नियमों के तहत निष्पक्ष जनसुनवाई आयोजित कर जनमत संग्रह कराया जाए।  

*स्वतंत्र पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA):* सुश्री मेधा पाटकर व अन्य विशेषज्ञों और स्वतंत्र सामाजिक/पर्यावरणीय संस्थाओं को शामिल कर निष्पक्ष EIA रिपोर्ट तैयार की जाए और उसे सार्वजनिक किया जाए। 
 
*अधिवक्ताओं का संकल्प*
ज्ञापन सौंपते हुए अधिवक्ता संघ ने स्पष्ट किया कि विंध्य की जनता और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन और सरकार ने रहवासी क्षेत्र में प्रस्तावित इस न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्णय को वापस नहीं लिया, तो अधिवक्ता समुदाय जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए इसे कानूनी व जन-आंदोलन का रूप देने से पीछे नहीं हटेगा। 
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मप्र*

No comments: