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Thursday, January 16, 2020

(MP ब्रेकिंग) आरटीआई की धारा 4 की शक्तियों से होती है जानकारी सार्वजनिक (जानिए कैसे आरटीआई के एक मामले में मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने दिया सम्पूर्ण मप्र की 1148 पंचायतों में कराधान योजना के कार्यों को सार्वजनिक करने का आदेश)

दिनांक 16 जनवरी 2020, स्थान - रीवा/भोपाल मप्र

   सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 अब तक का सबसे सशक्त माध्यम रहा है जिसमे आम से आम नागरिक को वह सभी सरकारी अथवा चिन्हित जानकारी मिल सकती है जो इसके पहले खास लोगों अथवा सरकार या अधिकारियों तक ही सीमित रहती थी.

   लेकिन क्या यह आपको पता है की काफी कुछ जानकारियां आज जो आप इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के दौर पर वेबसाइटों और नेट के माध्यम से देख लेते हैं और जनसामान्य की एक क्लिक की पहुंच पर उपलब्ध है वह आपको कैसे इतनी आसानी से मिलती है? जी हां यदि नही जानते तो आपको बताते चलें की सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 और उसकी विभिन उपधाराओं के तहत स्वतः ही लोक प्राधिकारियों की यह बाध्यताएं होती हैं की वह जनहित की समस्त जानकारियां सार्वजनिक करें और समय समय पर उसे अद्यतन करते रहें जो गुप्त बात अधिनियंम के अन्तर्गत न आती हो.
    आर टी आई की धारा 4 - लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं

   सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 एवं इसकी विभिन्न उपधाराओं 4(1), 4(2),4(3),4(4) एवं 4(1)(क), 4(1)(ख), 4(1)(ग), 4(1)(घ)  एवं 4(1)(ख) की उपधाराओं की उपधाराओं (i) से (xvii) तक में जनहित से संबंधित सूचना साझा करने विषयक प्रत्येक लोक प्राधिकारी का अनिवार्य दायित्व बताया गया है जिसके तहत धारा 4(2) में प्रत्येक लोक प्राधिकारी का निरंतर यह प्रयाश रहेगा की वह उपधारा  4(1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार स्वप्रेरणा से जनता को नियमित अंतरालों पर संसूचना के विभिन्न साधनो के माध्यम से जिनके अन्तर्गत इंटरनेट भी है इतनी अधिक सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपाय करे जिससे की जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इस अधिनियम का कम से कम उपयोग करना पड़े. इसी प्रकार धारा 4 की उपधारा 4(3) कहती है की उपधारा 4(1) के प्रयोजन के लिए प्रत्येक सूचना को विस्तृत रूप से और ऐसे प्रारूप और रीति में प्रसारित किया जाएगा जो जनता के लिए सहज रूप से पहुंच योग्य हो. ऐसे ही उपधारा 4(1) के (ख) में कहा गया की इस आर टी आई अधिनियम के अधिनियमन के 120 दिन के भीतर उपधाराओं 4(1)(ख) की उपधाराओं (i) से (xvii) तक समस्त चिन्हित सूचना को प्रकाशित करेगा एवं इस सूचना को अद्यतन करेगा.
    अतः देखा जा सकता है की आर टी आई अधिनियम वास्तव में इतना शसक्त है की इसमे लगभग वह समस्त जानकारी मिल जाती है जो गुप्त बात अधिनियम के अन्तर्गत न आती हो और वह भी काफी सहज और सुलभ प्रारूप में लोक प्राधिकारियों को उपलब्ध कराए जाने की बात कही गयी है. 
    वास्तव में धारा 4 और उसकी उपधाराओं के तहत ज्यादातर जानकारी सार्वजनिक करने की बात आती है.
  शिवानन्द द्विवेदी बनाम मप्र शासन - कराधान मामला 

   अब आते हैं उस मामले में जिसने मप्र में वर्तमान में काफी हलचल मचा रखी है. यह मामला है करारोपण और कराधान का. गंगेव ब्लॉक रीवा से प्रारम्भ होकर पूरे मप्र की 1148 पंचायतों में लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक के इस घोटाले में काफी परतें खुलती नजर आ रही हैं.

  आइए नजर डालते हैं मप्र राज्य सूचना आयुक्त के दिनांक 23 दिसंबर 2019 की एक सुनवाई के मामले पर जिसमे कई लोक सूचना अधिकारियों की पेशी हुईं वहीं कुछ को जुर्माना भी लग चुका है.
  राज्य सूचना आयुक्त  श्री राहुल सिंह ने लगाया जुर्माना जारी किया एससीएन 

   मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने एक शिकायत नंबर सी-0820/आईसी-7/रीवा/2019 के निराकरण में शिवानन्द द्विवेदी बनाम लोक सूचना अधिकारी कलेक्टर रीवा, लोक सूचना अधिकारी सीईओ जिला पंचायत रीवा एवं लोक सूचना अधिकारी जनपद रीवा के केस में जहां पीआईओ गंगेव बालेन्द्र पांडेय को 5 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया वहीं तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी कलेक्टर रीवा श्रीमती माला त्रिपाठी, तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सीईओ जिला पंचायत रीवा राजेश शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
  
   
सूचना आयुक्त  श्री राहुल सिंह ने लिखा पंचायत एसीएस मनोज श्रीवास्तव को

    एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा उठाये गए प्रकरण जिसमे मप्र की 1148 पंचायतों की कराधान घोटाले की जांच की माग की गयी थी इस परिपेक्ष में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा की अपीलकर्ता द्वारा इस प्रकरण में मध्यप्रदेश स्तर पर समस्त पंचायतों में कराधान घोटाले की जांच की माग की गयी है. इस प्रकरण में कार्यवाई के लिए राज्य सूचना आयोग उपयुक्त फोरम नही है. सूचना आयुक्त द्वारा आगे कहा गया कि अपीलकर्ता उपयुक्त फोरम पर संपर्क करके भ्रष्टाचार के इस प्रकरण में कार्यवाई की माग कर सकते हैं जिसके बाबत सूचना आयुक्त ने पत्र को अग्रिम कार्यवाही की अनुसंशा के साथ पंचायत एवं ग्रामीण विकाश विभाग बल्लभ भवन मंत्रालय में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज श्रीवास्तव को कार्यवाही के लिए लिखा है.
  कराधान घोटाला में धारा 4 के तहत जानकारी करो सार्वजनिक

   इसी बीच पंचायत दर्पण एवं पंचायत विभाग की वेबसाइट में सूचना सार्वजनिक किये जाने की एक्टिविस्ट की माग को लेकर अपने कार्यक्षेत्र के अदेश में सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 की शक्तियों का प्रयोग करते हुए पंचायत विभाग को आरटीआई की धारा 4(1)(ख)(11) एवं 4(1)(ख)(14), 4(2), 4(4) के तहत कराधान एवं स्वकरारोपण की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए आदेशित किया है जिसके विषय में पंचायत विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज श्रीवास्तव को निर्देशित किया है एवं साथ ही संचालक पंचायतराज संचालनालय अरेरा हिल्स भोपाल की निदेशिका श्रीमती उर्मिला शुक्ला को भी पत्र की प्रतियां फारवर्ड किया गया है.
 
  इस प्रकार देखा जा सकता है की आरिटीआई आज आम जनता का सबसे शसक्त लोकतांत्रिक हथियार है जिसके तहत काफी महत्वपूर्ण जानकारी जनमानस तक आसानी से पहुचकर समस्त सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाई जा सकती है. आज आवश्यकता है इसके प्रति जागरूक रहने और इसके सही उपयोग की.
संलग्न - कृपया संलग्न राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का कराधान घोटाले के आदेश पीडीएफ फ़ाइल की प्रति देखने का कष्ट करें।

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587

Tuesday, January 14, 2020

(MP breaking) आरटीआई लाइव - लगातार जुर्मानों के बाद भी नही चेत रहे अधिकारी, मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा लगातार हो रही कार्यवाहियों से प्रदेश में मचा है हड़कम्प, लोग पूंछ रहे अबकी बार किसकी बारी

दिनांक 14 जनवरी 2020, स्थान - रीवा मप्र

  👉 डीएफओ सतना राजीव मिश्रा पर लगा 10 हज़ार रुपये का जुर्माना।

  👉 तत्कालीन त्योंथर तहसीलदार जितेंद्र तिवारी पर लगा 7 हज़ार 500 रुपये का जुर्माना।

  👉 तत्कालीन तहसीलदार त्योंथर एवं वर्तमान में टीकमगढ़ में पदस्थ महेंद्र गुप्ता को कारण बताओ नोटिस, 21 जनवरी को भोपाल में होगी पेशी।

  👉 सचिव पंचायत भोलगढ़ संजय मिश्रा पर लगा 10 हज़ार रुपये का जुर्माना।
     आरटीआई नियमों की अवहेलना करने के चलते मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह द्वारा कार्यवाहियां की जा रही हैं जिसमे लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के ऊपर जुर्मानों के साथ अनुशासनात्मक कार्यवाहियां भी की जा रही हैं लेकिन संभाग के लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकिरियों की कार्यशैली अभी भी पूर्ववत ही बनी हुई है। 

   तीन अलग अलग प्रकरणों में लगाया गया जुर्माना
   
     अभी हाल ही में मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा तीन अलग अलग प्रकरणों में जुर्माना लगाया गया है। एक प्रकरण सतना जिले में वन विभाग से सम्बंधित है जिसमे अपीलार्थी रामस्वरूप पटेल बनाम लोक सूचना अधिकारी वन मंडल सतना के एक मामले ए-2352/सतना/2018 में दिनांक 09/01/2020 को फैसला देते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी एवं डीएफओ सतना राजीव मिश्रा द्वारा अपीलार्थी के आरटीआई प्रकरण दिनाँक 26/12/2017 में असद्भावनापूर्वक, असहयोग करते हुए बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कारण के जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया एवं सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रति घोर लापरवाही का रवैया अख्तियार किया गया जिसके चलते डीएफओ राजीव मिश्रा के ऊपर आरटीआई की धारा 20(1) के तहत 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया है।
   दूसरा प्रकरण: ददन तिवारी बनाम त्योंथर राजस्व विभाग त्योंथर

   ऐसे ही दूसरे अपीलीय मामले ए-4788/रीवा/2017 में भी सूचना आयुक्त द्वारा जुर्माने और शो कॉज नोटिस की कार्यवाही की गई है। यह मामला नक्सा तरमीन की राजस्व विभाग की सामान्य सी कार्यवाही का है जिसे पटवारी, आरआई और तहसीलदार कैसे अत्यधिक पेचीदा बनाकर अपीलार्थी और पीड़ितों की प्रताड़ित कर सकते हैं उसके विषय मे यह प्रकरण प्रकाश डालता है। 

    ददन तिवारी निवासी तहसील त्योंथर द्वारा राजस्व विभाग त्योंथर के समक्ष कुछ नक्सा तरमीन सम्बंधित जानकारी आरटीआई दाखिल कर चाही गयी थी जिसे तहसीलदार द्वारा छुपाने का प्रयास किया गया। इस पर कई सुनवाइयों के बाद और कई कारण बताओ नोटिसें जारी करने के बाद अभी हाल ही में 06/01/2020 को हुई सुनवाई में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार महेंद्र गुप्ता को दोषी पाया गया जिन्होंने 3/5/17 को त्योंथर में पदस्थ रहते हुए जानकारी समय सीमा पर नही दी और धारा 7(1) का उल्लंघन किया तथा अपने दायित्यों के प्रति घोर लापरवाही बरती। जिसके कारण वर्तमान टीकमगढ़ में पदस्थ तहसीलदार महेंद्र गुप्ता को धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 21/01/2020 को व्यक्तिगत तौर पर सूचना भवन भोपाल में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। 

     वहीं इसी मामले में तत्कालीन तहसीलदार और पीआईओ जितेंद्र तिवारी को अपीलार्थी के आरटीआई आवेदन दिनाँक 3/5/2017 पर जानकारी न देने, अपीलार्थी के साथ असद्भावपूर्वक, जानबूझकर और बिना किसी उचित और पर्याप्त कारण के जानकारी छुपाने के चलते एवं सूचना के अधिकार के प्रति घोर लापरवाही बरतने और पदीय दायित्यों का निर्वहन न करने सहित अन्य कारणों के चलते धारा 20(1) के तहत रुपये 7 हज़ार 500 का जुर्माना लगाया गया है।  
     
  तीसरा मामला : ज्ञानेंद्र गौतम बनाम भोलगढ़ पंचायत रीवा

    तीसरा प्रकरण भोलगढ़ पंचायत जनपद पंचायत रीवा से सम्बंधित है जिसमे भोलगढ़ निवासी ज्ञानेंद्र गौतम द्वारा 2014-15 से 2018 तक कि स्वच्छ भारत और शौचालय निर्माण सम्बन्धी जानकारी लोक सूचना कार्यालय ग्राम पंचायत भोलगढ़ में दिनांक 26/09/2018 को आरटीआई फ़ाइल करके चाही गयी थी तब जानकारी न मिलने पर अपीलकर्ता द्वारा प्रथम अपील 11/01/2019 एवं द्वितीय अपील दिनांक 25/05/2019 को की गई थी। मप्र राज्य सूचना आयुक्त की 28/08/2019 को रीवा में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में घोर लापरवाही बरतते हुए न तो लोक सूचना अधिकारी और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी मौजूद थे। इसके बाद कारण बताओ नोटिस की सुनवाई 23/12/2019 को सूचना आयोग भोपाल में रखी गयी थी जिसमे पीआईओ उपस्थित नहीं थे। 

     दिनाँक 23/12/2019 की सूचना भवन में हुई सुनवाई में मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी संजय मिश्रा सचिव ग्राम पंचायत भोलगढ़ जनपद पंचायत रीवा को अपीलार्थी के आरटीआई आवेदन दिनांक 26/09/2018 पर कार्यवाही न करने, असद्भावपूर्वक, जानबूझकर एवं बिना किसी पर्याप्त और उचित कारणों के जानकारी छुपाने के चलते आरटीआई के नियम प्रावधानों के विरुद्ध व्यवहार करने के चलते धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन के हिसाब से 250 रुपये का जुर्माना और अधिकतम 10 हज़ार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया। 
    सभी जुर्माना राशि समयसीमा में आयोग में जमा करो
    
     उक्त तीनों प्रकरणों में जुर्माने की राशि समयसीमा में डीडी अथवा अन्य उचित माध्यमो से सूचना आयोग के समक्ष भोपाल में जमा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आगे आदेशित किया गया कि यदि जुर्माने की राशि समयसीमा में जमा नहीं की जाती तो आयोग द्वारा मप्र सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (अपील एवं फीस) की धारा 8(6) के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
   
    जुर्माने रुक नहीं रहे, आदतें सुधर नहीं रहीं

     मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के उल्लंघन को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है जिसके चलते लोक सूचना अधिकारियों और सम्बंधित विभागों में हड़कम्प मचा हुआ है। जहां वर्तमान सूचना आयुक्त की पदस्थापना के पूर्व मप्र में आरटीआई की स्थिति काफी उदासीन थी वहीं वर्तमान में ऐसा प्रतीत होता है जैसे हर जगह सूचना के अधिकार की ही चर्चाएं हो रही हैं। इसके बाबजूद भी कर्मचारी और अधिकारी सूचना के अधिकार की अवहेलना में रत हैं। 

     अब देखना यह होगा कि क्या सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह की सख्ती मप्र में आरटीआई को मजबूत बना पाएगी।

  संलग्न - कृपया संलग्न पेज में देखें मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा ट्वीट कर दी गयी जानकारी एवं साथ ही आदेश की प्रतियां।

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शिवानन्द द्विवेदी
(सोशल एंड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट)
जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587

Wednesday, December 18, 2019

आरटीआई की जानकारी समय पर नही दिया, मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लगा दिया 15 हज़ार का जुर्माना, पीआईओ ने कई नोटिसों के जबाब में आयोग के आदेशों की किया था अवहेलना, रीवा जिला शिक्षा केन्द्र का है मामला


मामला जिला रीवा का जिसमें #RTI अपील क्रमांक A 2610 में अपीलकर्ता को छात्रावासों में व्यय की गई राशि एवं अन्य जानकारी समय पर उपलब्ध नही कराने पर सुधीर कुमार बांडा, लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र रीवा के विरुद्ध मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने  लगाया ₹ 15000 का  जुर्माना

दिनांक 18 दिसंबर 2019, स्थान - रीवा मप्र

    आरटीआई - सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदकों द्वारा चाही गयी जानकारी लोक सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों द्वारा समय पर उपलब्ध नही कराए जाने के चलते मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा हैवी जुर्माना लगाए जा रहे हैं। पर इसके बाबजूद भी लोक सूचना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कोई परिवर्तन नही दिख रहा है।

   जिला शिक्षा केन्द्र रीवा का है मामला

   मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अभी हाल ही कि अपनी एक सुनवाई में दिनांक 10 दिसंबर को जारी किए गए संलग्न आदेश में द्वितीय अपील के प्रकरण क्रमांक ए- 2610 में लोक सूचना अधिकारी जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा सुधीर कुमार बांडा को कारण बताओ नोटिस कर वाबजूद भी सूचना आयोग में उपस्थित न होने एवं जानकारी उपलब्ध न कराए जाने के चलते 10 दिसंबर की पेशी में 15 हज़ार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है।

 आयोग ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

    मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने दिनांक 28/08/2019 को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला शिक्षा केन्द्र जिला समन्वयक अधिकारी को धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर आवेदक को जानकारी देने के निर्देश दिए थे लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने अवमानना की जिसके कारण दिनांक 10 दिसंबर के आदेश में 15 हज़ार की पेनाल्टी लगाई गयी। 

  साल भर पुराना है मामला, इन बिंदुओं पर माँगी थी जानकारी

   आरटीआई आवेदक विनोद कुमार मिश्र ने धारा 6(1) के तहत अपने पहले आरटीआई आवेदन में दिनांक 15 जनवरी 2019 लोक सूचना अधिकारी जिला समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा में आरटीआई फ़ाइल कर तीन बिंदुओं की जानकारी चाही थी जिसमे पहला बिंदु - रीवा जिले के समस्त शासकीय छात्रावासों में तीन वर्ष में व्यय की गयी राशि की मदवार जानकारी, दूसरा बिंदु - कार्यालय में पदस्थ वंशमलि प्रसाद मिश्र सहायक ग्रेड 3 की नियुक्ति आदेश, पदस्थापना आदेश एवं प्रतिनियुक्ति आदेश एवं 15-16 में पुनः प्रतिनियुक्ति आदेश समाप्त होने के आदेश, एवं तीसरे बिंदु में - वंशमलि प्रसाद मिश्र की विकलांग प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति चाही गयी थी। 

  जानकारी न मिलने पर अपीलकर्ता ने की थी अपील

   आवेदक को जब समय पर जानकारी उपलब्ध नही हो सकी तो आवेदक ने उसकी प्रथम एवं द्वितीय अपील की थी। प्रथम अपील दिनाँक 29 मार्च 2019 को प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर रीवा को की गई थी जिसको स्वयं पीआईओ ने अपने पास रख लिया।  जब जिला कलेक्टर रीवा द्वारा भी कोई सार्थक कार्यवाही समय पर नही की गई थी तब आवेदक अपीलार्थी विनोद कुमार मिश्र ने द्वितीय अपीलीय अधिकारी अर्थात मप्र राज्य सूचना आयुक्त को दिनांक 03 जून 2019 को की। 

   द्वितीय अपील आदेश की अवहेलना पर लगा जुर्माना 

     द्वितीय अपील के लिए पेशी दिनाँक 28 अगस्त 2019 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई जिसमें रीवा संभाग के प्रभारी मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसमें जानकारी समय पर उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए। लेकिन मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह के आदेश की अवहेलना होने अन्य धाराओं के उल्लंघन के चलते आयोग ने 250 रुपये प्रतिदिन एवं 15 हज़ार रुपये अधिकतम के हिसाब से पीआईओ पर जुर्माना लगा दिया।

  पीआईओ ने किया लोक सेवा अधिनियम के साथ आरटीआई का उल्लंघन 

    अपने आदेश दिनांक 10 दिसंबर 2019 को मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने लिखा कि लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने आपको कई धाराओं में दोषी पाते हैं।
    सबसे पहले यह कि लोक सूचना अधिकारी ने लोक सेवा अधिनियम के विरुद्ध चरित्र का परिचय दिया है जिसमे आवेदक को बार बार बुलाकर उससे जानकारी छुपाई, गलत जानकारी दिया, प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम और पता भी नही बताया और प्रथम अपीलीय अधिकारी का पत्र स्वयं लेकर अपने पास रख लिया जिसे प्रथम अपीलीय अधिकारी अर्थात जिला कलेक्टर को भी स्थानांतरित नहीं किया।
    
    इन इन धाराओं के तहत हुई कार्यवाही

   दिनांक 10 दिसंबर के अपने आदेश में मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि सर्वप्रथम लोक सूचना अधिकारी जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा द्वारा आवेदक विनोद कुमार मिश्र को आरटीआई अधिनियम के तहत 30 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध नही कराई गई अतः लोक सूचना अधिकारी धारा 7(1) के दोषी पाए गए। 
    इसके बाद लोक सूचना अधिकारी द्वारा यह भी नही बताया गया कि प्रथम अपीलीय अधिकारी कौन है और सूचना छिपाने का भी प्रयास किया गया एवं सूचना न देने का कोई युक्तियुक्त कारण नही बताया गया जिसके कारण लोक सूचना अधिकारी सूचना अधिकार कानून 2005 की धारा 7 की उपधारायें 8(1), (2), (3) का भी दोषी पाया गया।     
   अपीलकर्ता द्वारा लोक सूचना अधिकारी से कई मर्तबा संपर्क किया गया लेकिन हर बार लोक सूचना अधिकारी द्वारा अपीलकर्ता से असहयोग एवं असद्भाव पूर्वक बर्ताव किया जाकर घुमाया गया एवं भ्रमित किया गया जिसके चलते लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई कानून की धारा 5(3) का दोषी पाया गया।

  सूचना आयुक्त ने आगे कहा कि लोकसूचना अधिकारी सुधीर कुमार बांडा गैरजिम्मेदाराना रवैया अख्तियार करते हुए सूचना के अधिकार कानून को ताक में रखते हुए जानकारी छुपाना चाहते हैं। जिस प्रकार से मप्र राज्य सूचना आयोग को धता बताकर लोक सूचना अधिकारी ने कई बार सूचना आयुक्त के आदेश का मजाक बनाया एवं आदेश की अवहेलना की एवं सुनवाई में भी अनुपस्थित रहे इससे लोक सूचना अधिकारी के ऊपर आरटीआई की धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत कार्यवाही बनती है।

  सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दिए यह आदेश

    अंत मे मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने आदेश दिए दिए कि लोक सूचना अधिकारी सुधीर कुमार बांडा द्वारा सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना और आरटीआई कानून की विभिन्न धाराओं की अवहेलना की गई है जिसके चलते धारा 20(1) के तहत 15 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है एवं यह राशि आदेश के एक माह के भीतर आयोग के समक्ष उचित शासकीय विधि सम्मत माध्यमों से जमा की जाय। समयावधि में जुर्माना राशि नही जमा करने पर मप्र सूचना का अधिकार (फीस एवं अपील) नियम 2005 की धारा 8(6) के तहत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।  
    आगे आयोग ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी सुधीर बांडा द्वारा अपीलार्थी को समस्त जानकारी बिना किसी शुल्क के जल्दी से जल्दी दी जाए। साथ ही इस आदेश की एक प्रति आइरीन सिंथिया जेपी संचालक मप्र राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल एवं अशोक भार्गव संभागायुक्त रीवा को भेजी जाय जिससे लोक सूचना अधिकार 2005 को कड़ाई से लागू किया जा सके।

   संलग्न - संलग्न आदेश की प्रतियां। एवं मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह।

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587

Tuesday, August 28, 2018

स्वयं के बनाये कीचड़ में फंसा शिवराज का विकाश रथ (मामला ज़िले के विभिन्न ब्लॉकों में मप्र सरकार द्वारा भेजे गए ठेके के विकाश रथ की दुर्दशा का जो की गांव में घुसने के पहले ही कीचड़ से सराबोर सड़कों में फंस रहा, लोगों की गालियां खाकर कार्यकर्ता हो रहे वापस)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   सरकारी पैसे में वर्तमान मप्र सरकार द्वारा ठेके में दिया गया विकाश रथ अपने ही द्वारा समाज में फैलाये गए कीचड़ में फंसता जा रहा है. बात करें मप्र की शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा गांव गांव भेजे गए विकाश रथ की तो दिनांक 27 अगस्त को यह ठेके का विकाश रथ मनगवां विधानसभा एवं गंगेव जनपद की लोटनी, हिनौती, बांस एवं कैथा, पडुआ पंचायत में भेजा जाना था लेकिन हिनौती पंचायत से होते हुए जैसे ही करहिया वाया बड़ोखर ग्राम में घुसा तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के आगे सुरसरी सिंह परिहार के घर से बृजराज सिंह के घर के आगे तक लगभग ढाई सौ मीटर की पंचायती सड़क में कीचड़ के बीच बुरी तरह से फंस गया. इस बीच विकाश रथ में उपस्थित कटनी एवं सीहोर के दो कार्यकर्ता जिनको पेमेंट देकर सरकार ने ठेके में हायर किया हुआ था वह पैदल चलते हुए आदमी ढूंढते हुए कैथा श्रीहनुमान मंदिर तक पहुचे जहां पर उपस्थित मीडिया ग्रुप खुलासा लाइव न्यूज़ के आनंद द्विवेदी एवं सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी मौके पर पहुच कर कीचड़ में फंसी हुई विकास रूपी सरकार की गाड़ी को निकालने में मदद किये. यह अपने आप में अजीबोगरीब वाकया ही कहा जाएगा की सरकार के विकाश की कीचड़ में फंसी गाड़ी को आम जनता निकाल रही है. अब सरकार को अपने विकाश रथ को स्वयं निकाल पाने की कूबत नही बची. पर जिस प्रकार की स्थिति अब बनी हुई है इससे साफ जाहिर है अब शायद आम जनता के बलबूते नही बचा की सरकार की फंसी हुई गाड़ी को निकाल पाए.

बड़ोखर ग्राम की सड़क को खा गया सरपंच सचिव

   बड़ोखर ग्राम की सड़क को हिनौती पंचायत के सरपंच और सचिव ने मिलकर समाप्त कर दिया. आज से पांच वर्ष पहले भूतपूर्व सरपंच श्रीधर द्विवेदी द्वारा बनाई गई इस पंचायती सड़क को वर्तमान सरपंच ने कुछ नही किया. आम जनता की माने तो मुनेंद्र सिंह परिहार, सुरसरी सिंह परिहार, शिवेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, दंगल सिंह, संते सिंह, बृजराज सिंह राजमणि पटेल, छोटेलाल पटेल, बृजबासी पटेल आदि के अनुसार वर्तमान सरपंच ने एक मुट्ठी मोरम तक इस सड़क में नही डाला.

हिनौती पंचायत में जमकर हुआ भष्ट्राचार 

  यदि वास्तव में देखा जाए तो शान्तिधाम से लेकर अन्य ग्रेवल सड़क निर्माण, मनरेगा एवं पंच परमेश्वर के कई कार्यों में वर्तमान सरपंच और सचिव द्वारा खूब जमकर खाया पिया गया है. यहां तक की कैथा पंचायत के मजदूरों संतोष केवट, तेजेस्वरी केवट, रामखेलावन केवट आदि द्वारा हिनौती पंचायत में कार्य तो करवाया गया लेकिन इनका पेमेंट आज तक नही दिया गया. जबकि देखा जाए तो दूसरी पंचायत के श्रमिक मजदूरों द्वारा किसी अन्य पंचायत में कार्य करवाने का प्रावधान तब तक नही है जब तक उस पंचायत में मजदूर उपलब्ध हों. हिनौती पंचायत में ऐसे कई मजदूर हैं जिनकी मजदूरी आज तक नही मिली है.

  मप्र की सड़कें अमेरिका से हैं बेहतर

    बड़ोखर जैसे कई ग्रामों की बातें सामने आईं तो याद आया की एक बार मप्र के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने अमेरिका दौरे में कहा था की मप्र की सड़कें अमेरिका से बेहतर हैं. शायद यह कथन मानवीय इतिहास का अब तक सबसे बड़ा जोक बन चुका है. पर यह सरकारें तो इतनी बेशर्म हो चुकी हैं जिन्हें हंसी का पात्र बनने पर भी कोई शर्म नही.

   ग्रामों की सड़कें तो खैर है नमूना हैं हीं, यहां तो हाईवे सड़कों की हालात देख लें तो शर्म आती है की क्या यही मानवाधिकार है, क्या यही 70 वर्ष का भारतीय लोकतंन्त्र है. क्या यही 70 वर्ष की स्वतंत्रता बाद कि उपलब्धि है. सवाल यह उठता है किस मुँह से यह राजनेता जनता के समक्ष वोट मांगने आते हैं. 


    इस विकाश यात्रा में सम्मिलित ठेके के कार्यकर्ताओं ने बताया की उनकी सबसे अधिक दुर्दशा हो रही है क्योंकि ग्रामों में कहीं भी सड़क अच्छी नही है और जिस ग्राम में वह जाते हैं वहीं उनके जान पर बन आती है.

सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा रिकॉर्ड फेसबुक लाइव वीडियो को एक दिन में 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा

   जब मप्र सरकार के कीचड़ में फंसे हुए विकाश रथ को निकालने के लिए आम जनता के साथ सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं खुलासा मीडिया न्यूज़ डिस्ट्रिक्ट ब्यूरो आनंद द्विवेदी पंहुचे तो बड़ोखर ग्राम की शिक्षा गारंटी की स्कूल के पास फेसबुक में लाइव वीडियो भी शेयर किया गया था जिसे मात्र 24 घंटे के भीतर ही 10 हज़ार से अधिक लोगों ने देखा है और विभिन्न प्रकार के मजेदार कमेंट किये जा रहे हैं जिसकी लिंक भी यहां पर नीचे दी जा रही है. इस वीडियो में वह सभी बातें सामने आई हैं जो वर्तमान सरकार के हवा हवाई वादों की पोल को स्पष्ट बयां कर रही है.

फेसबुक वीडियो लाइव लिंक- https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2122566207985583&id=100006966720612

संलग्न - कृपया गंगेव जनपद के हिनौती ग्राम पंचायत के बड़ोखर ग्राम में कीचड़ से वापस लौटती विकाश रथ की फ़ोटो साथ ही बड़ोखर ग्राम की खस्ताहाल कीचड़ से सनी हुई सड़क. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Friday, August 10, 2018

करायत सर्प पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया (ज़िला रीवा के थाना गढ़ अन्तर्गत करहिया ग्राम में नंदलाल सिंह के घर से पकड़ कर गदही के जंगल में छोड़ा गया)

दिनांक 10 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  अपने आप में एक नए घटनाक्रम में दिनाँक 10 अगस्त 2018 को थाना गढ़ अन्तर्गत करहिया ग्राम में नंदलाल सिंह के घर में बनाये जा रहे नए मकान के पिलर में एक सर्प के गिरे होने की खबर मिली. रोहित सिंह नामक युवक द्वारा जानकारी दी गई की उनके घर में एक जहरीला किश्म का काला सांप घुसा हुआ है. इस पर लगभग डेढ़ बजे के आसपास पहुचा गया और मौके पर पिलर के गड्ढे में फंसे हुए सर्प को सांप पकड़ने वाले क्लिप से सर्प को बाहर खींचा गया. देखने पर पता चला की सांप की लंबाई लगभग ढाई से तीन फिट के बीच में थी. जानकारों द्वारा बताया गया की यह सांप अत्यंत जहरीला किश्म का होता है जिसके डसने पर व्यक्ति की आधे घंटे के अंदर ही मौत हो सकती है. 

   लोकल भाषा में इस सर्प को करायत बोला जाता है. इस सर्प की पीठ चमकीली काली रंग की होती है जिंसमे सफेद धारियां होती हैं. 

   सर्प को सुरक्षित पकड़ कर गांव से सटे हुए गदही रवार के जंगल में छोंड़ दिया गया. जहां से वह पत्थर की चट्टान के नीचे घुस गया.

  इसके पूर्व भी जंगल में सुरक्षित छोंडे गए हैं कई जहरीले नाग

   कैथा, सोरहवा, बड़ोखर, करहिया, जमुई एवं आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक दो सालों में लगभग एक दर्ज़न भर जहरीले किश्म के नाग पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोंडे गए हैं. इसे पकड़ने में मुख्य रूप से सोरहवा निवासी हरीबन्स पटेल जो की कोतमा अनूपपुर में दैनिक वेतन भोगी कर्मी के रूप में कार्य कर रहे हैं उनका योगदान था. उन्ही के सहयोग और ट्रेनिंग से आज गांव के अन्य लोग भी सांपों के प्रति भय दूर कर इन्हें पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोंड़ने का कार्य कर देते हैं. 

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें श्री नंदलाल सिंह करहिया के घर में पकड़े गए करायत सांप को पकड़कर छोड़ा गया.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139.