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Tuesday, January 14, 2020

(MP breaking) आरटीआई लाइव - लगातार जुर्मानों के बाद भी नही चेत रहे अधिकारी, मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा लगातार हो रही कार्यवाहियों से प्रदेश में मचा है हड़कम्प, लोग पूंछ रहे अबकी बार किसकी बारी

दिनांक 14 जनवरी 2020, स्थान - रीवा मप्र

  👉 डीएफओ सतना राजीव मिश्रा पर लगा 10 हज़ार रुपये का जुर्माना।

  👉 तत्कालीन त्योंथर तहसीलदार जितेंद्र तिवारी पर लगा 7 हज़ार 500 रुपये का जुर्माना।

  👉 तत्कालीन तहसीलदार त्योंथर एवं वर्तमान में टीकमगढ़ में पदस्थ महेंद्र गुप्ता को कारण बताओ नोटिस, 21 जनवरी को भोपाल में होगी पेशी।

  👉 सचिव पंचायत भोलगढ़ संजय मिश्रा पर लगा 10 हज़ार रुपये का जुर्माना।
     आरटीआई नियमों की अवहेलना करने के चलते मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह द्वारा कार्यवाहियां की जा रही हैं जिसमे लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों के ऊपर जुर्मानों के साथ अनुशासनात्मक कार्यवाहियां भी की जा रही हैं लेकिन संभाग के लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकिरियों की कार्यशैली अभी भी पूर्ववत ही बनी हुई है। 

   तीन अलग अलग प्रकरणों में लगाया गया जुर्माना
   
     अभी हाल ही में मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा तीन अलग अलग प्रकरणों में जुर्माना लगाया गया है। एक प्रकरण सतना जिले में वन विभाग से सम्बंधित है जिसमे अपीलार्थी रामस्वरूप पटेल बनाम लोक सूचना अधिकारी वन मंडल सतना के एक मामले ए-2352/सतना/2018 में दिनांक 09/01/2020 को फैसला देते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी एवं डीएफओ सतना राजीव मिश्रा द्वारा अपीलार्थी के आरटीआई प्रकरण दिनाँक 26/12/2017 में असद्भावनापूर्वक, असहयोग करते हुए बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कारण के जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया एवं सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रति घोर लापरवाही का रवैया अख्तियार किया गया जिसके चलते डीएफओ राजीव मिश्रा के ऊपर आरटीआई की धारा 20(1) के तहत 10 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया है।
   दूसरा प्रकरण: ददन तिवारी बनाम त्योंथर राजस्व विभाग त्योंथर

   ऐसे ही दूसरे अपीलीय मामले ए-4788/रीवा/2017 में भी सूचना आयुक्त द्वारा जुर्माने और शो कॉज नोटिस की कार्यवाही की गई है। यह मामला नक्सा तरमीन की राजस्व विभाग की सामान्य सी कार्यवाही का है जिसे पटवारी, आरआई और तहसीलदार कैसे अत्यधिक पेचीदा बनाकर अपीलार्थी और पीड़ितों की प्रताड़ित कर सकते हैं उसके विषय मे यह प्रकरण प्रकाश डालता है। 

    ददन तिवारी निवासी तहसील त्योंथर द्वारा राजस्व विभाग त्योंथर के समक्ष कुछ नक्सा तरमीन सम्बंधित जानकारी आरटीआई दाखिल कर चाही गयी थी जिसे तहसीलदार द्वारा छुपाने का प्रयास किया गया। इस पर कई सुनवाइयों के बाद और कई कारण बताओ नोटिसें जारी करने के बाद अभी हाल ही में 06/01/2020 को हुई सुनवाई में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार महेंद्र गुप्ता को दोषी पाया गया जिन्होंने 3/5/17 को त्योंथर में पदस्थ रहते हुए जानकारी समय सीमा पर नही दी और धारा 7(1) का उल्लंघन किया तथा अपने दायित्यों के प्रति घोर लापरवाही बरती। जिसके कारण वर्तमान टीकमगढ़ में पदस्थ तहसीलदार महेंद्र गुप्ता को धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 21/01/2020 को व्यक्तिगत तौर पर सूचना भवन भोपाल में उपस्थित होने के आदेश दिए हैं। 

     वहीं इसी मामले में तत्कालीन तहसीलदार और पीआईओ जितेंद्र तिवारी को अपीलार्थी के आरटीआई आवेदन दिनाँक 3/5/2017 पर जानकारी न देने, अपीलार्थी के साथ असद्भावपूर्वक, जानबूझकर और बिना किसी उचित और पर्याप्त कारण के जानकारी छुपाने के चलते एवं सूचना के अधिकार के प्रति घोर लापरवाही बरतने और पदीय दायित्यों का निर्वहन न करने सहित अन्य कारणों के चलते धारा 20(1) के तहत रुपये 7 हज़ार 500 का जुर्माना लगाया गया है।  
     
  तीसरा मामला : ज्ञानेंद्र गौतम बनाम भोलगढ़ पंचायत रीवा

    तीसरा प्रकरण भोलगढ़ पंचायत जनपद पंचायत रीवा से सम्बंधित है जिसमे भोलगढ़ निवासी ज्ञानेंद्र गौतम द्वारा 2014-15 से 2018 तक कि स्वच्छ भारत और शौचालय निर्माण सम्बन्धी जानकारी लोक सूचना कार्यालय ग्राम पंचायत भोलगढ़ में दिनांक 26/09/2018 को आरटीआई फ़ाइल करके चाही गयी थी तब जानकारी न मिलने पर अपीलकर्ता द्वारा प्रथम अपील 11/01/2019 एवं द्वितीय अपील दिनांक 25/05/2019 को की गई थी। मप्र राज्य सूचना आयुक्त की 28/08/2019 को रीवा में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में घोर लापरवाही बरतते हुए न तो लोक सूचना अधिकारी और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी मौजूद थे। इसके बाद कारण बताओ नोटिस की सुनवाई 23/12/2019 को सूचना आयोग भोपाल में रखी गयी थी जिसमे पीआईओ उपस्थित नहीं थे। 

     दिनाँक 23/12/2019 की सूचना भवन में हुई सुनवाई में मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी संजय मिश्रा सचिव ग्राम पंचायत भोलगढ़ जनपद पंचायत रीवा को अपीलार्थी के आरटीआई आवेदन दिनांक 26/09/2018 पर कार्यवाही न करने, असद्भावपूर्वक, जानबूझकर एवं बिना किसी पर्याप्त और उचित कारणों के जानकारी छुपाने के चलते आरटीआई के नियम प्रावधानों के विरुद्ध व्यवहार करने के चलते धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन के हिसाब से 250 रुपये का जुर्माना और अधिकतम 10 हज़ार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया। 
    सभी जुर्माना राशि समयसीमा में आयोग में जमा करो
    
     उक्त तीनों प्रकरणों में जुर्माने की राशि समयसीमा में डीडी अथवा अन्य उचित माध्यमो से सूचना आयोग के समक्ष भोपाल में जमा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। आगे आदेशित किया गया कि यदि जुर्माने की राशि समयसीमा में जमा नहीं की जाती तो आयोग द्वारा मप्र सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 (अपील एवं फीस) की धारा 8(6) के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
   
    जुर्माने रुक नहीं रहे, आदतें सुधर नहीं रहीं

     मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के उल्लंघन को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है जिसके चलते लोक सूचना अधिकारियों और सम्बंधित विभागों में हड़कम्प मचा हुआ है। जहां वर्तमान सूचना आयुक्त की पदस्थापना के पूर्व मप्र में आरटीआई की स्थिति काफी उदासीन थी वहीं वर्तमान में ऐसा प्रतीत होता है जैसे हर जगह सूचना के अधिकार की ही चर्चाएं हो रही हैं। इसके बाबजूद भी कर्मचारी और अधिकारी सूचना के अधिकार की अवहेलना में रत हैं। 

     अब देखना यह होगा कि क्या सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह की सख्ती मप्र में आरटीआई को मजबूत बना पाएगी।

  संलग्न - कृपया संलग्न पेज में देखें मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा ट्वीट कर दी गयी जानकारी एवं साथ ही आदेश की प्रतियां।

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शिवानन्द द्विवेदी
(सोशल एंड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट)
जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587

Friday, August 10, 2018

करहिया का 63 केवीए का जला ट्रांसफार्मर बदला गया, त्योंथर में अभी भी जले हैं दर्जनों ट्रांसफार्मर (मामला ज़िले के त्योंथर विद्युत संभाग का जहां पर पिछले एक माह से ट्रांसफार्मर जला हुआ था जो दिनांक 10 अगस्त को बदला गया, पूरे त्योंथर डिवीज़न में अभी भी जले हैं दर्जनों ट्रांसफार्मर)

दिनाँक 10 अगस्त 2018, स्थान - कटरा विद्युत वितरण केंद्र, रीवा मप्र 

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   प्रदेश सरकार द्वारा संबल योजनान्तर्गत बिजली बिल माफी एवं सरल बिजली बिल स्कीम के चलते किसानों और आम नागरिको को काफी राहत मिलने लगी है. जहां पिछले महीनों जले हुए ट्रांसफार्मर को न बदलने के पीछे विभाग द्वारा आउटस्टैंडिंग अर्थात बिजली बिल बकाया का हवाला दिया जाता था वहीं जब से सरल बिजली बिल स्कीम एवं संबल योजना आई है इसके चलते विभाग द्वारा बताया गया की ऐसी कोई बाध्यता न होने से प्राथमिकता और आवश्यकता अनुरूप सभी जले हुए ट्रांसफार्मर एक एक करके बदले जा रहे हैं.

त्योंथर डिवीज़न में करहिया का 63 केवीए का ट्रांसफार्मर बदला गया 

    पिछले लगभग एक माह से करहिया ग्राम का ट्रांसफार्मर जला हुआ बताया गया था. जिंसमे आम नागरिकों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही थी. लगभग हर जगह से सोर्स सिफारिश लगवाए गए थे. परंतु सबसे बड़ी समस्या स्वयं विभाग के पास सतना और सागर स्टोर में ट्रांसफार्मर की अनुपलब्धता बतायी गई थी. चूंकि एकसाथ पूरे संभाग एवं प्रदेश के फैल ट्रांसफार्मर बदले जाने थे तो वभाविक तौर पर विभाग इसके लिए पूरी तरह से तैयार नही था. इस बीच पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा रीवा संभाग के चीफ इंजीनियर श्री के एल वर्मा को ट्विटर के माध्यम से रिमाइंडर रिक्वेस्ट भेजा गया था जिंसमे दिनांक 31 जुलाई तक ट्रांसफार्मर बदलने की जो बात उनके द्वारा कही गई थी उसका हवाला दिया गया था. इस पर चीफ इंजीनियर द्वारा अपने ट्विटर एकाउंट से रिप्लाई कर पुनः संदेश भेजा गया था एवं बताया गया था की दिनाँक 10 अगस्त तक 63 केवीए का ट्रांसफार्मर बदल दिया जाएगा.

ट्रांसफार्मर बदले जाने में देरी से फसल बुवाई हुई प्रभावित

    करहिया ग्राम का जला हुआ ट्रांसफार्मर बदलने में देरी होने से धान का रोपा लगाने में दिक्कत हुई क्योंकि इस क्षेत्र में बारिश न हो पाने से किसान मात्र बोरवेल के पानी पर ही आश्रित थे. लेकिन ऐन वक्त पर ट्रांसफॉर्मर फैल हो जाने से जैसे किसानों के लिए भारी मुसीबत बन गई. यद्यपि ट्रंसफॉर्मेर बदला गया और इससे आम नागरिकगण प्रसन्न हैं लेकिन चूंकि फसल बुवाई प्रभावित हुई इससे यही कहा जा सकता है की का वर्षा जब कृषि सुखाने. इस बीच जिन जिन किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं उनमे से दिनेश लोनिया, संखधर लोनिया, रामलाल लोनिया, नेता लोनिया, सुरेश लोनिया, त्रिवेणी प्रसाद लोनिया, अजय तिवारी, संजय लोनिया, रामचंद्र लोनिया आदि हैं. 

त्योंथर डिवीज़न में अभी भी जले हैं दर्जनों ट्रांसफार्मर

   यद्यपि करहिया ग्राम का फैल ट्रांसफार्मर बदल दिया गया है लेकिन इसी तरह अभी भी त्योंथर डिवीज़न में दर्जनों ट्रांसफार्मर जले पड़े हुए हैं जिन्हें बदला जाना चाहिए. लोग काफी परेशान हैं और लगभग रोज ही अखबारों के माध्यम से शिकायतें आती रहती हैं लेकिन विभाग का कहना होता है की सतना स्टोर से नए ट्रांसफार्मर न मिल पाने से बदले नही जा रहे हैं. अभी पिछले सप्ताह की जानकारी में ट्विटर पर ही संदेश भेजकर चीफ इंजीनियर रीवा संभाग एवं प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्री इंद्र केशरी को सूचित किया गया था की अभी भी दर्जनों ऐसे ट्रांसफार्मर हैं जिन्हें बदला जाना चाहिए. इनमे कुछ 100, कुछ 63 और ज्यादातर 25 केवीए के ट्रांसफार्मर हैं. जानकारी अनुसार लालगांव डीसी में ही लगभग आधा दर्ज़न भर ट्रांसफार्मर जले हुए हैं जिंसमे पनगड़ी ग्राम में राजेन्द्र सिंह के घर के पास का भी समिलित हैं. साथ ही कटरा डीसी में जले हुए दर्ज़न भर ट्रंसफॉर्मेर में बाबूपुर पंचायत में भी बीडीसी विनोद विश्वकर्मा के घर के पास का ट्रांसफार्मर जला हुआ है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में करहिया ग्राम का 63 केवीए का जला हुआ ट्रांसफार्मर जिसे अब बदला जा चुका है. तस्वीर में गाड़ी में जले हुए ट्रांसफार्मर को रखा हुआ है साथ ही ट्रांसफार्मर स्टैंड में नए ट्रांसफार्मर को मैकेनिक द्वारा बदला जा रहा है, साथ ही करहिया ग्राम के लोग नीचे तस्वीरों में देखे जा सकते हैं. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, 

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Friday, February 23, 2018

डाढ़ करहिया प्रधानमंत्री सड़क 6 माह में उखड़ी, घटिया निर्माण की खुली पोल

दिनांक 23 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा, मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत आने वाली डाढ़ करहिया प्रधानमंत्री सड़क 6 माह में ही टूट चुकी है। जबकि सड़क निर्माण के वक्त इसकी घटिया गुणवत्ता की शिकायते सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा पहले ही की जा चुकी है। घटिया निर्माण की खबर भी कई मर्तबा रीवा संभाग से प्रकाशित होने वाले अखबारों में प्रकाशित हो चुकी है।

     संलग्न तस्वीरों में देखें करहिया निवासी सोमधर द्विवेदी के घर के निकट किस प्रकार मात्र 6 माह पहले ही बनी यह सड़क बीचों बीच फट चुकी है। इसके पहले भी बता दें कि इस बरसात में यही सड़क कई स्थानों से उखड़ गई थी।

    - शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र। 7869992139

Tuesday, February 20, 2018

विंध्य किसान परिषद ने ज़िले में पानी बिजली मनरेगा को लेकर एस डीएम त्योंथर को सौंपा ज्ञापन, 7 दिन में कार्यवाही न होने पर होगा अनसन आंदोलन

दिनांक 21 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    रीवा जिले में गर्मी के साथ ही बढ़ रहे जलसंकट, मनरेगा में मजदूरों के अधिकारों के निरंतर हो रहे हनन एवं मस्टर रोल भरने में हो रहे फर्जीवाड़े, बिजली विभाग की बिना मीटर लगाए और मनमाने ढंग से औसत बिलिंग, राजस्व विभाग की मनमानी, पंचायती कार्यों में हो रही मनमानी और फर्ज़ीवाड़ा एवं अन्य कई सार्वजनिक हित की समस्याओं को लेकर विंध्य किसान परिषद ने त्योंथर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी को मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है जिसमे 7 दिवश के भीतर सभी समस्याओं पर कार्यवाही की माग की है। कार्यवाही न होने की स्थिति में विंध्य किसान परिषद के कार्यकर्ताओं मजदूरों एवं किसानों द्वारा आमरण अनसन किया जाएगा जिसकी जबावदेही शासन प्रशासन की होगी।

     इस बीच एस डी एम त्योंथर श्री पांडेय को ज्ञापन सौंपते समय परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिषद के जिला अध्यक्ष शिवानंद द्विवेदी एवं कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी सहित सैकड़ों अन्य मजदूर, किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे।

संलग्न - अनुविभागीय अधिकारी त्योंथर को ज्ञापन सौंपते समय उपस्थित परिषद के कार्यकर्ता।

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शिवानंद द्विवेदी 

सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Monday, February 19, 2018

(Rewa, MP) ज़िले के पहाड़ी इलाकों में बढ़ गया जलसंकट, पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बना अनजान (मामला डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक रीवा का, पानी पीने के मानवाधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां)

दिनांक 20 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   अभी पिछले दिनों हरिजन बस्ती नेवरिया का मामला प्रकाश में आया था जिसमे कुछ 10 साल तक के  स्कूली बच्चे साईकल में डिब्बे बाल्टी लिए हुए सेदहा स्कूल मोड़ हिनौती-लालगांव सड़क मार्ग के पास 5 किमी दूर से पानी भरकर ला रहे थे। आज सरकारें गरीबों के उत्थान की दुहाई देती नही थक रही और यूनिसेफ से लेकर चाइल्ड चैरिटी फण्ड के लिए अरबों खरबों डॉलर का पैसा देशी विदेशी संस्थाओं से उठा रही हैं लेकिन निश्चित तौर पर बच्चों का इस प्रकार 5 किमी दूर से पानी भरकर साईकल में लाना सरकार के सारे दावों को पूरी तरह से नग्न कर देने वाला वाकया था। 

      अब चूंकि जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि आज किसी भी ग्राम पंचायत में जाएं तो हमे लोग साईकल में डिब्बे लिए हुए पानी ढोते नज़र आ ही जायेंगे। लगभग रोज ही इस प्रकार की खबरें हमे मीडिया में छपी मिल ही जाएंगी।

       दिनांक 20 फरवरी की शुबह ग्राम पंचायत डाढ़ में ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को मोबाइल में इसी जलसंकट की भीषण समस्या के विषय मे बताया गया जिस पर मौके पर उपस्थित होकर देखा गया कि डाढ़ पंचायत जनपद पंचायत त्योंथर के 50 से ऊपर हैंडपम्प पाइप की कमी और अन्य खराबी के कारण बन्द पड़े हैं। कुछ तो हैंडपम्प जलस्तर नीचे जाने की वजह से बंद हैं। लेकिन ज्यादातर हैंडपम्प कर विषय मे डाढ़ के ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सही रखरखाव न होने की वजह से बंद पड़े हैं। जबकि देखा जाए तो इस विषय मे त्योंथर क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री पी एस बुन्देला एवं ज़िले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को कई मर्तबा बताया जा चुका है। इन सबका एक ही घिसा पिटा जबाब रहता है कि दिखवा रहे हैं लेकिन कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

     त्योंथर क्षेत्र की जिम्मेदारी लिए हुए कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का कहना था कि ठेके प्रथा के चलते सीधे ठेकेदार से बात करें पर जब ठेकेदार से बात की जाती है तो ठेकेदार का कहना होता है कि पी एच ई हमे कोई सामग्री उपलब्ध नही करवा रहा है अतः हम कुछ नही कर सकते।

     आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मानवाधिकारों में से एक पानी पीने के अधिकार का क्या होगा? क्या मानवाधिकार और मूलभूत संवैधानिक अधिकार मात्र किताबों की और पढ़ने पढ़ाने की बातें हैं। आखिर यदि सहरी क्षेत्र के लिए घर घर मे पाइप कनेक्शन से पानी सप्लाई किया जाता है और जल संकट उत्पन्न होने पर टैंकर से पानी पहुचाया जाता है तो पिछड़े ग्रामों के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नही की जाती? क्या अधिकारियों, कमर्चारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों नागरिकों के लिए विशेष संवैधानिक अधिकार हैं और पिछड़े बना दिये गए ग्रामो  के लिए ये पैमाने बिल्कुल अलग हैं? आखिर ऐसे में कोई ग्रामीण इन नियम कायदों संवैधानिक नियमों पर क्यों विश्वास करेगा? 

    आज सूखे अकाल की इस भीषण स्थिति में पानी को लेकर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं इससे साफ जाहिर है कि अप्रैल प्रारम्भ होते होते स्थितियां और भी अधिक भयावह हो जाएंगी। ऐसे में तमाम मानवाधिकार की सुरक्षा की दुहाई देने वाली इन सरकारों के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है कि कम बोलने वाले और कम विकशित इन ग्रामीणों के मानवाधिकारों की रक्षा सुरक्षा यह कैसे करेंगे? क्या मात्र दिखावा ही चलता रहेगा और मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर देशी विदेशी संस्थाओं से माल ऐंठने का काम चलता रहेगा अथवा कहीं कुछ वास्तविक धरातल पर भी होगा।

संलग्न - कई किमी दूर से साईकल पर पानी ढोने पर मजबूर ग्रामवशी। त्योंथर ब्लॉक पहाड़ी क्षेत्र। रीवा मप्र।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Saturday, February 17, 2018

भ्रष्ट्राचार की वसूली की नोटिस पर डाढ़ सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा ने पुष्पराज तिवारी को मोबाइल पर दी जान से मारने की धमकी, दाई माई की गाली के साथ बोला कानून मेरी जेब मे, कोई कुछ नही बिगाड़ सकता (ध्यान से सुनें संलग्न ऑडियो रिकॉर्डिंग)

दिनांक 17 फरवरी 2018, स्थान - डाढ़ पंचायत त्योंथर रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

 अभी हाल ही में पिछले महीने डाढ़ पंचायत निवासी एवं विंध्य किसान परिषद के कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी एवं परिषद के जिलाध्यक्ष द्वारा डाढ़ पंचायत में निर्माण कार्यों में हो रहे व्यापक भ्रष्ट्राचार की शिकायत पर सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर महावीर जाटव द्वारा जांच कमेटी बैठा कर जांच कराई गई थी जिस पर सीईओ जाटव स्वयं भी जांच स्थल पर आकर लगभग 25 लाख के तीन पीसीसी सड़क निर्माण कार्य के गुणवत्ता की जांच की थी जिस पर उपयंत्री त्योंथर प्रजापति द्वारा जांच रिपोर्ट में तीनों पीसीसी सड़क मापदंड के अनुरूप होते नही पाए गए थे जिस सरपंच सचिव को नोटिस जारी की गई थी इसके बाद वर्तमान  में चल रही लोनियान बस्ती की सड़क को नए सिरे से बनाये जाने और साथ ही पहले से निर्मित हो चुकी द्विवेदी टोला करहिया एवं हरिजन बस्ती डाढ़ की सड़क पर पूरी बसूली की अनुसंशा की बात सीईओ जनपद त्योंथर के नाम अपने प्रतिवेदन में आयी थी।

     जब यह बात डाढ़ सरपंच पुत्र एवं सरपंच प्रतिनिधि सुरेंद्र मिश्रा के पास पहुची तो उसने परिषद के कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी के मोबाइल पर फोन करके उसे दाई माई की भद्दी गालियां दी और बोला कि मैं अपने लड़के को बुलाकर तेरे घर मे घुसकर हाँथ पैर तोड़ जान से समाप्त कर दूंगा अभी तू जानता नही मैंने इसके पहले भी कई लोगों को निपटाया है और मैं कोर्ट केस लड़ लूंगा कोई मेरा कुछ बिगाड़ नही सकता। 

     इस प्रकार संलग्न ऑडियो फ़ाइल में भ्रष्ट्राचार का विरोध करने वाले एक कार्यकर्ता को जिस प्रकार सरहंगई पूर्वक बेझिझक एक सरपंच प्रतिनिधि द्वारा माँ बहन की गालियां देकर धमकाया गया इससे यही साबित होता है कि वास्तव में इन भ्रष्ट्राचारी असामाजिक तत्वों को न तो समाज की कोई चिंता है और न ही नियम कानून का कोई भय। पर दूसरे पक्ष ने भी इस घटना की शिकायत गढ़ थाने में पूरी ऑडियो फ़ाइल के साथ कर दी है परंतु गढ़ थाने में अब तक जांच कर एफ आई आर तक दर्ज नही की गई है इससे साफ पता चलता है कि ऐसे असामाजिक तत्वों की राजनीतिक पकड़ ऊंचे तक है जिसका दुरुपयोग कर ऐसे शातिर जहां भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कानून को भी धता बता रहे हैं। 

      अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आज पूरे देश मे भ्रष्टाचार का जिस तरह से बोलबाला है उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले आम नागरिकों की रक्षा सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? पंचायत विभाग में सैकड़ों ऐसी शिकायतें धूल कहा रही हैं और उन फाइलों को राजनीतिक दबाब और पैसा हजम कर दबा दिया जाता है। कई ऐसे उदाहरण जीवंत हैं जिनमे पंचायती भ्रष्ट्राचारों के धारा 40 और धारा 92 के प्रकरण संबंधित एस डी एम एवं सीईओ कार्यालय में लंबित हैं लेकिन भ्रष्ट्राचार एवं राजनीतिक दबाब कर चलते उनमे कोई सार्थक निर्णय नही लिए जा रहे हैं।

संलग्न - धमकी दिए जाने की ऑडियो फ़ाइल और साथ मे अन्य वशूली संबंधी प्रतिवेदन एवं कार्यस्थल की फ़ोटो।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Thursday, February 15, 2018

ज़िले की डाढ़ पंचायत सहित संभवतः पूरे प्रदेश में जॉब कार्ड में मैनुअली अथवा प्रिंटिंग के माध्यम से नही होती एंट्री, मजदूरों के पास उनके किये गए कार्यों का कोई लिखित व्योरा नही होता मात्र ऑनलाइन एंट्री बताकर रखा जाता है अंधेरे में

दिनांक 16 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत डाढ़ पंचायत में मजदूरों के मनरेगा जॉब कार्ड वितरित नही किये गए हैं। बताया गया कि जो जॉब कार्ड आज से पांच वर्ष पहले दिए गए थे वही जब कार्ड आज भी मजदूरों के पास हैं और के जॉब कार्डों में कोई एंट्री नही हुई है। नियमानुसार हर पंचवर्षीय में नए जॉब कार्ड दिए जाने के प्रावधान हैं और साथ ही मजदूरों के प्रत्येक पंचायती कार्यों की मैन्युअल एंट्री सभी जॉब कार्ड में होनी चाहिए। जिस प्रकार बैंक पासबुक में जमा और निकासी की पूरी जानकारी प्रिंटर द्वारा प्रिंट की हुई होती है और प्रत्येक अंतरण के सामने संबंधित बैंक कर्मचारी के हस्ताक्षर होते हैं उसी प्रकार प्रत्येक जॉब कार्ड में मजदूरों के कार्य का दिनवार व्योरा प्रिंट होना चाहिए अथवा मैन्युअल एंट्री होनी चाहिए जिससे मजदूरों को यह जानकारी पता चले कि उन्होंने कब कब और किस किस योजना में कार्य किया हुआ है। परंतु यह मात्र डाढ़ पंचायत ही नही बल्कि लगभग ज़िले और संभवतः प्रदेश की बहुतायत पंचायत के हाल हैं कि मात्र ऑनलाइन मस्टर रोल तो फ़र्ज़ी तरीके से बनाकर दिखा दिए जाते हैं लेकिन फ़र्ज़ीवड़े में कार्यवाही होने के डर से पंचायत कर्मी जॉब कार्ड में कोई एंट्री नही करते। क्योंकि ज्यादातर जॉब कार्डधारकों के नाम से कार्डधारकों के साथ मिलकर फ़र्ज़ी निकासी की जाती है ऐसे में कोई भी जॉब कार्ड में एंट्री नही होती है। 


     डाढ़ पंचायत त्योंथर जनपद के परिपेक्ष्य में सामाजिक कार्यकर्ता एवं विंध्य किसान परिषद के जिला अध्यक्ष शिवानन्द द्विवेदी एवं कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी द्वारा लिखित दर्ज की गई शिकायत की जांच के बाद उपयंत्री त्योंथर जनपद द्वारा दिये गए प्रतिवेदन में बिंदु क्रमांक 2 की जांच में जो दलीलें दी गई हैं वह पूरी तरह से अपर्याप्त, झूंठी और भ्रामक हैं तथा मजदूरों के अधिकारों के विरुद्ध हैं। उपयंत्री द्वारा यह कहना कि सभी मनरेगा के कार्यो  की ऑनलाइन एंट्री ऑनलाइन मस्टर रोल में दर्ज होती है इसलिए जॉब कार्ड में मैन्युअल अथवा प्रिंटिंग के माध्यम से एंट्री करना आवश्यक नही है पूरी तरह से गलत और मजदूरों के पारदर्शिता के अधिकार का हनन है। 


    इस प्रकार सामाजिक कार्यकर्ता एवं आर टी आई एक्टिविस्ट जॉब कार्ड में एंट्री करने संबंधी सभी विन्दुओं पर पुनः जांच कर पुख्ता कार्यवाही की माग की है। 


      इस प्रकार यदि मनरेगा में हो रहे भ्रष्टाचार के विषय मे यदि सरकार नही जागती तो मजदूरों के हक को पंचायत एवं संबंधित दलालों द्वारा निरंतर मारा जाता रहेगा और जहां सरकारें मजदूरों को 100 दिन और 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने के दावें कर रही हैं यह सब मात्र हवा में ही चलता रहेगा और काम और काम के बदले उचित दाम न  मिलने के कारण मजदूर अपने गृह क्षेत्र से पलायन करने पर मजबूर होते रहेंगे साथ ही मजदूर और मनरेगा के नाम पर पंचायत विभाग और उससे जुड़े हुए दलालों की रोटी सेंकने का कार्य जारी रहेगा और ऐसे में न तो भ्रष्ट्राचार पर लगाम लग पाएगी और न ही कभी पारदर्शिता आ पाएगी।


    


   संलग्न - त्योंथर ब्लॉक के उपयंत्री प्रजापति द्वारा सीईओ महावीर जाटव के नाम जांच प्रतिवेदन की फ़ोटो यहां पर संलग्न है। देखें सभी  विन्दुओं को क्रमवार।

    - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक में बनाये गए पीसीसी रोड में किये गए निर्माण कार्य की सरपंच सचिव से होगी पूरी रिकवरी (देखें त्योंथर ब्लॉक के उपयंत्री, एस डी ओ प्रजापति का सीईओ महावीर जाटव के नाम जांच प्रतिवेदन)

दिनाँक 15 फरवरी 2018, स्थान - डाढ़ पंचायत, त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

         त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत डाढ़ पंचायत में हो रहे पंचायती कार्यों की जांच के बाद प्रतिवेदन सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर महावीर जाटव को सौंप दिया गया है जिसमे बिंदुवार जांच के नाम पर गलत और भ्रामक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। 

          मनरेगा के कार्यों और फ़र्ज़ी मस्टर रोल के विषय मे जांच वाले विन्दुओं मे जांचकर्ताओं द्वारा गलत और झूँठा प्रतिवेदन प्रस्तुत कर निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत को बरी कर दिया गया जबकि फ़र्ज़ी मस्टर रोल जारी कर मसीनों द्वारा ठेके से कार्य करवाये जाने के पूरे प्रमाण उपलब्ध हैं। कार्यस्थल पर मसीन का चलना पाया गया है एवं डाढ़ पंचायत निवासी पुष्पराज तिवारी द्वारा उसकी फोटो एवं वीडियो भी बनाया गया है।

      करहिया में वृजभूषण द्विवेदी एवं मोतीलाल आदि के घर के पास बनाई गई पीसीसी सड़क एवं साथ ही हरिजन बस्ती डाढ़ की पीसीसी सड़क के विषय मे जांच प्रतिवेदन में कार्य का सड़क में क्रैक एवं  गुणवत्ता विहीन कार्य होना पाया गया है और निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत डाढ़ से पूरी राशि की रिकवरी के लिए सीईओ से अनुसंशा की गई है।

     संलग्न - आवेदक शिकायतकर्ता पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक द्वारा अपने शिकायत के विषय मे लगाए गए आर टी आई से प्राप्त जांच प्रतिवेदन की फ़ोटो यहां पर संलग्न है।

   - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Monday, January 29, 2018

त्योंथर ब्लॉक - सूचना के अधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां, मांगा कुछ और जाता है जबाब कुछ और मिलता है

रीवा मप्र, दिनांक 30 जनवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
भारत सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू करके देश की जनता को सशक्त बनाने का अच्छा अवसर प्रदान किया था लेकिन आज पूरे देश मे सूचना के अधिकार की सरकारी विभागों द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही है।
    अभी हाल ही में आवेदक पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ पंचायत ब्लॉक त्योंथर रीवा द्वारा ब्लॉक में आर टी आई लगाकर मनरेगा के जॉब कार्ड सहित मनरेगा सम्बंधित जानकारी चाही गई थी जिस पर आवेदक को अब आवेदक से पीड़ित बना दिया गया है। जी हां! अब पीड़ित जनपद त्योंथर से प्राप्त और सीईओ का हस्ताक्षरित प्रपत्र लेकर घूम रहा है जिसमे सूचना देने के एवज में 85626 रुपये की फीस की माग की गई है। जबकि पीड़ित का कहना है कि उसने जो जनकारी माँगी थी वह मुश्किल से हज़ार रुपये के अंदर राशि जमा करके दी जा सकती थी। अतः सीईओ त्योंथर के प्रपत्र दिनांक 19 जनवरी 2018 से स्पष्ट है कि वांछित जानकारी उपलब्ध न करवाने और भ्रमित करने के उद्देश्य से पीड़ित आवेदक को 85626 रुपये जमा किये जाने हेतु कहा गया है।

     आज दिनांक 30 जनवरी को जब पूरा देश महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाने में जुटा हुआ है, ऐसे में देखना यह होगा कि गरीबों मजदूरों के हित और उनके अधिकार के लिए प्रारम्भ की गई महात्मा गांधी ग्रामीण राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के नाम पर मजदूरों को वेवकूफ बनाने और उनके शोषण का जो जरिया पंचायतों ने खोज निकाला है इस पर क्या कुछ किया जाएगा? क्या गरीबों मजदूरों को रोजगार की गारंटी के नाम पर फ़र्ज़ी मस्टर रोल और फ़र्ज़ी बैंक खाते बनाकर राशि की अंधाधुंध निकासी इसी प्रकार जारी रहेगी?
    जितना काम उतना दाम जैसे वैधानिक जुमलों का क्या होगा? क्या 167 रुपये की दिन भर की मजदूरी ही बस मजदूरों को दी जाती रहेगी? जब आज दिन भर का लेबर चार्ज 300 सौ रुपये के आसपास है ऐसे में इतने कम 167 रुपये सरकारी रेट पर कौन मजदूर दिन भर पंचायती कार्यों में झक मरायेगा और काम करने के बाद पूरे छः माह अथवा साल भर इंतज़ार करेगा?

       आज सरकारें कॉर्पोरेट के लिए बिक चुकीं हैं। सभी सरकारी योजनाओं में मात्र स्मार्ट सिटी, स्मार्ट शहर, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, नौकरी पेशे वालों के लिए नए नए पैकेज, नए वेतन आयोग और बहुत कुछ लेकिन किसानों और मजदूरों के लिए कहीं दूर दूर तक कुछ नही। जो भी योजनाएं आती भी हैं तो मनरेगा की तरह भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ रही हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि किसानों और मजदूरों का कोई सशक्त संगठन भी नही है जो इनकी गांव गांव आवाज उठाये जिससे इनको न्याय मिल पाए। ग्रामीणों मजदूरों और किसानों की आवाज सुनने वाला कोई नही है।
      और कब तक किसान मजदूर का शोषण होता रहेगा?

संलग्न - आवेदक पीड़ित पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ पंचायत एवं मनरेगा मजदूर इंद्रलाल साकेत की फ़ोटो तथा आवेदकों द्वारा लगाया गया सूचना अधिकार आवेदन।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139