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Friday, July 13, 2018

सरई ग्राम के बन्द हैं दर्जनों हैंडपम्प, जनता बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज़ (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम का जहां महीनों से बन्द पड़े हैं दर्जनों नलकूप जिसे देखने वाला कोई नही है)

दिनांक 13 जुलाई 2018, स्थान - लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    आज जब मानसून आ चुका है और प्रदेश में जगह जगह बारिश प्रारम्भ हो चुकी है जिले के कई ग्रामों में गर्मियों के पहले से खराब नलकूप पीएचई विभाग नही सुधार पाया है जबकि देखा जाए तो पिछले 2018 के मई एवं जून महीने में भोपाल तक की टीम संभाग की पेयजल व्यवस्था का मुआयना करने आई थी जिंसमे मुख्य रूप से भोपाल से कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव सम्मिलित थे. अनुराग श्रीवास्तव के साथ में स्वयं जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं अन्य उपयंत्री एवं एसडीओ आदि थे लेकिन इन सबने किस बात का मुआयना किया, उस पर क्या कार्यवाही की इसका पता इसी से चलता है की अभी भी कई ग्रामों में बल्क में नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे न तो पर्याप्त राइजर पाइप डाली गई हैं और न ही अन्य मैकेनिकल सुधार कार्य किया गया है जिसकी वजह के आम और ग्रामीण जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. अभी कुछ ही दिनों में मानसूनी बारिस प्रारम्भ होने से यह सभी मरम्मत कार्य बाधित होंगे जिससे समस्या आगे भी खिंच जाएगी.

सरई ग्राम गंगेव ब्लॉक में बन्द हैं दर्जनों नलकूप

    सरई ग्राम पंचायत निवासी आनंद द्विवेदी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम में दर्ज़नों नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे य तो राइजर पाइप की कमी बतायी जा रही है अथवा मैकेनिकल फाल्ट की वजह के नही चल रहे हैं. इस बाबत ग्रामीणों ने कई बार अपने सरपंच और अन्य विभागीय अधिकारियों के समक्ष समस्या रखी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. 

सरपंच रामलखन यादव ने कहा पैसा लाओ तो पाइप लगाएंगे

    सरई ग्राम पंचायत के सरपंच रामलखन यादव के पास जब ग्रामीण पीड़ित लोग गए और नलकूप सुधरवाने की बात कही तो उसने कहा की हमारे पास कोई मद नही आता है और नलकूप सुधरवाना पीएचई विभाग का कार्य है. हमारे पास पैसा नही है तुम लोग पैसा चंदा से इकठ्ठा करके लाओ तो हम हैंडपम्प सुधारवाएँगे. 

हर पंचायतों में नलकूप रखरभाव का आता है मद

    जबकि देखा जाए तो सभी पंचायतों में पीएचई विभाग, ज़िला पंचायत एवं अन्य पंचपरमेश्वर मद से हर पंचायत में नलकूप रखरखाव का मद आता है जिससे सभी नलकूप व्यवस्थित कराए जा सकते हैं लेकिन सरपंच सचिव मिलकर राशि का बंदरबाट कर लेते हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसती रहती है जिसे न तो पीएचई विभाग सुन रहा है और न ही कोई सांसद विधायक.

इन लोगों के घर के पास खराब हैं नलकूप

   सरई ग्राम पंचायत में जिन जिन लोगों के घर के पास के नलकूप पिछले कई महीनों से खराब पड़े हैं उनके नाम - सत्येंद्र तिवारी, शंभूनाथ तिवारी, श्रवण कोल, लल्लू कोल, बालेंद्र शेखर पांडेय, शखिया कोल, बब्बू साकेत, पप्पू साकेत, रामगरीब कोल, भोगले यादव, लालमणि पांडेय, बृजकिशोर शास्त्री, बांकेलाल साकेत आदि हैं. इन सबने बताया की यदि हमारा नलकूप नही सुधारा जाएगा तो कलेक्टर कार्यालय के समक्ष उपस्थित होकर सामूहिक धरना प्रदर्शन करेंगे.

संलग्न- ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले सरई कला ग्राम पंचायत के जिन हितग्राहियों के नलकूप खराब पड़े हैं उनके सामूहिक फ़ोटो संलग्न है. 

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शिवानन्द द्विवेदी, समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Tuesday, April 17, 2018

पानी की कहानी प्यासों की जुबानी - त्योंथर की 17 पंचायतों को पानी के लिए दिए 25 लाख रुपये, अब तक काम शून्य (मामला ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत 17 पंचायतों का जिसमे 12 को दिए लगभग 1 लाख और 5 को ज़िला पंचायत से मिले लगभग 2 लाख, फिर भी कोई काम नही, पूरी राशि हजम करने की कर ली तैयारी, ज़िला और जनपद पंचायत बना अनजान)

दिनांक 17 अप्रैल 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले में जल संकट दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और आम जनता का पानी के लिए जद्दोजहद रोज बढ़ती जा रही है पर यहां के ज़िला प्रसाशन की चाल ढाल में कोई परिवर्तन नही दिख रहा है. ज़िले भर में प्रतिदिन हज़ारों शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, मोबाइल फोन और लिखित मौखिक तौर पर आम जनता प्रेषित कर रही है लेकिन जुजबी ही कुछ शिकायतों को निपटाकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है.

  आम जनता की आवाज को सुनने वाला कोई नही मात्र मीडिया ही सहारा बना है जो पानी की भीषण समस्या को रोज़ अखबारों के माध्यम से उठा रहा है.

  त्योंथर पी एच ई कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने डाढ़ जमुई पंचायत का किया दौरा

  दिनांक 16 अप्रैल को दोपहर त्योंथर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने नजदीकी ग्राम पंचायतों डाढ़ और जमुई का दौरा कर नलजल योजनाओं और नलकूप की स्थिति का जायज़ा लिया. बताया गया की न ही डाढ़ और न ही जमुई में सही तरीके से नलजल योजना संचालित हो रही है. डाढ़ में थोड़ी स्थित कंट्रोल में है पर जमुई पंचायत में लगभग 1 लाख 30 हज़ार के आसपास ज़िला पंचायत के खाते से पंचायत के खाते में पिछले साल भेजे जाने के वावजूद भी अब तक नलजल योजनायों की पानी की टंकी में कोई पानी नही आया है और कोई पाइप लाइन भी अब तक नही बिछ पायी हैं.

     अमित मिश्रा ने आगे करहिया का रुख किया और लोनियान टोला प्रजापति बस्ती के पास पंचायत द्वारा कराए गए नलकूप को देखा जिसमे आज साल भर से कोई हैंडपम्प नही पड़ा है. अमित मिश्रा ने आगे बताया की त्योंथर के विधायक कोटे और पंचायतों के कई नलकूपों के यही हाल हैं. यह सब ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है.

   बिन्नू पाठक द्वारा करवाये गए नलकूप उत्खनन में काफी है शिकायतें

    बताया गया की करहिया के प्रजापति बस्ती में पिछले वर्ष हुए नलकूप उत्खनन सहित दर्जनों विधायक निधि वाले नलकूप उत्खनन का काम बरहट निवासी बिन्नू पाठक बोरवेल कंपनी द्वारा करवाया गया है और इनके द्वारा कराए गए ज्यादातर बोरवेल में धंस जाने से लेकर घटिया सामग्री डालना और यहां तक की करहिया प्रजापति लोनियान बस्ती जैसे बोर में हैंडपम्प तक न डालना जैसी शिकायतों का अम्बार है जिससे पी एच ई विभाग स्वयं परेशान है. पी एच ई अधिकारियों द्वारा नाम न बताए जाने की शर्त पर बताया गया की किसी एक सरपंच ने तो यहां तक कहा की जितने पैसे में पी एच ई विभाग एक नलकूप का उत्खनन करवाता है पंचायत उतने में तीन नलकूप उत्खनन करवा सकती है. तब ऐसे में गुणवत्ता से लेकर अधिक राशि तक की प्रति नलकूप उत्खनन जैसे कई गंभीर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं.

  त्योंथर की 17 पंचायतों को लगभग 22 लाख से अधिक राशि ग्रीष्मकालीन जल संकट से निपटने मात्र के लिए जिला पंचायत से दी गई

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों  द्वारा बताया गया की जो जानकारी उन्हें है उसके मुताबिक मात्र ज़िला पंचायत के द्वारा ही नलजल योजनायों के क्रियान्वयन के लिए त्योंथर ब्लॉक की 17 पंचायतों को 25 लाख के आसपास की राशि दी गई है जिसका की भौतिक धरातल पर कोई रता पता नही है. इन 17 पंचायतों में 12 पंचायत ऐसी हैं जिनको प्रति पंचायत कुछ कम अर्थात लगभग 1 लाख के आसपास की राशि दी गई है जबकि 5 पंचायतें ऐसी हैं जिन्हें लगभग 2 लाख की राशि दी गई है. लेकिन आज पिछले वर्ष से पंचायतों के खातों में इस राशि के समायोजन के बाद भी पंचायती भष्ट्रचार के कारण कोई भी काम नही हो पा रहा है. पंचायत के सरपंचों की हिटलरशाही के चलते जनता बूंद बूंद पानी के लिए तड़प नही है. मनरेगा में धांधली तो बहुत आम बात थी अब पानी के नाम पर जनता के खून चूसने का भी दौर चल पड़ा है।

त्योंथर सीईओ महावीर जाटव ने कार्यवाही का दिया मात्र आश्वासन

   दिनाँक 17 अप्रैल की सुबह जनपद त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द विवेदी की बात हुई जिसमे जाटव द्वारा बताया गया की उन्हें इसकी जानकारी नही थी और इसे दिखवा कर कार्यवाही करवाएंगे. डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में लोनियान टोला की प्रजापति बस्ती के विषय में बताए जाने पर की पंचायत द्वारा करवाये गए नलकूप में हैंडपम्प नही पड़ा है, इस पर मात्र कार्यवाही का आश्वाशन मिला. अब देखना यह है की यह पंचायत विभाग वाले आगे क्या गुल खिलाते हैं.

सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल द्वारा जानकारी लेकर कार्यवाही का आश्वासन

   इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता की ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल से भी बात हुई जिस पर मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा व्हाट्सएप्प पर ज़िला पंचायत सीईओ को ब्लॉक गंगेव और त्योंथर की बन्द पड़ी नलजल योजनाओं और दुर्दशापूर्ण नलकूपों की स्थिति बताई गई. साथ ही रोज़ अखबारों में प्रकाशित मानवाधिकार का हनन सम्बंधी भीषण जल संकट की स्थिति की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां भी भेजीं गईं.

   ज़िला पंचायत रीवा सीईओ द्वारा बताया गया की वह इसे गंभीरता से लेंगे. पानी की समस्या एक महत्वपूर्ण इशू है और सॉल्व किया जाएगा. वहरहाल अभी तक मात्र हर स्थान के आश्वासन ही मिल पाया है. 

   बता दें की गंगेव जनपद अंर्तगत हिनौती पंचायत, बांस पंचायत और हिरुडीह पंचायत की बुरी तरह से ठप्प पड़ी नलजल योजनाओं का स्वयं भौतिक सत्यापन कर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह मुद्दा मीडिया के माध्यम से उठाया गया था. जिस पर सभी विभागों के होश उड़े हुए हैं.

  जल संकट का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी गया

    बात यहीं तक नही रुकी है, मॉनव के मूलभूत अधिकारों में से एक पीने का स्वच्छ पानी की समस्या ज़िले से लेकर प्रदेश स्तर और यहां तक की राष्ट्रीय स्तर तक पहुचाई जा चुकी है. भोपाल में बैठे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के इंजीनियर इन चीफ, जबलपुर जोन पी एच ई के चीफ इंजीनियर गौड़ से लेकर अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली तक मामला उनके संज्ञान में लाया जा चुका है और कार्यवाही भी प्रारम्भ हो चुकी है.

   भोपाल से पी एच ई के विशेष दल की रीवा संभाग विजिट, मामला जिले में जल संकट की जांच का और उस पर कार्यवाही का

    जैसा की पहले भी बताया गया था की जब ज़िले में जल संकट का मामला भोपाल इंजीनियर इन चीफ के समक्ष रखा गया था तो वहां से कई सदस्यीय टीम का गठन कर जांच करने के उद्देश्य से भेजे जाने की बात आई थी. उसी सिलसिले में कार्यपालन यंत्री रीवा शरद कुमार सिंह द्वारा जानकारी दी गई की श्री श्रीवास्तव की अगुआई में टीम रीवा पहुच चुकी है जो दिनाँक 17 अप्रैल को गंगेव ब्लॉक में दौरा कर जल संकट की वास्तविक स्थिति का जायज़ा लेंगे.

  त्योंथर ब्लॉक में मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का भी होगा दौरा

     पिछले दिनों मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को बताया गया की त्योंथर ब्लॉक की घाट के ऊपर की पंचायतों का जल्द ही दौरा किया जाकर पानी की स्थिति का जायज़ा लिया जाएगा. मऊगंज कार्यपालन यंत्री को ब्लॉक के जलसंकट के विषय में मौखिक, मोबाइल फ़ोन और व्हाट्सएप्प आदि के जरिये कई बार सूचित किया जा चुका है.

 जांचों और सरकारी दौरों के नाम पर होगी कोरम पूर्ति अथवा होगी कोई सार्थक कार्यवाही?

    अब देखना यह होगा की सरकारी अधिकारियों के इन दौरों और जांचों का आम जन जीवन में व्याप्त भीषण जल संकट का क्या असर पड़ता है? क्या पहले जैसे ही यह भी मात्र कोरम पूर्ति बनकर रह जाएंगी की इनकी आधिकारिक विजिट और दौरों का कुछ असर भी पड़ेगा? क्योंकि हर वर्ष ही गर्मियों में जब पानी को लेकर हाहाकार मचता है तो सभी की नींदें उड़ जाती हैं और हाँथ पैर हिलाना चालू कर देतें हैं. आश्वासन और जांचों का दौर प्रारम्भ हो जाता है, दौरे होते हैं, बजट पास होता है, राशि और सामग्री का कागजों पर खूब आवंटन किया जाता है. कागजों में हर पंचायतों में मोटर पंप की स्वीकृति की जाती है और वह राशि संबंधित विभागों के खातों में भी भेज दी जाती है पर वास्तविक तौर पर देखा जाए तो आने वाले हर वर्ष में स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है. आख़िर इतनी जांचें और इतनी राशि का क्या होता है? क्यों भौतिक धरातल पर कोई कार्यवाही नही होती? क्या आम जनता मात्र कागजों पर और आश्वासन का पानी पीकर अपनी प्यास तृप्त कर सकती है? यह सभी अनुत्तरित प्रश्न इस देश के जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों से पूँछ रहे हैं की क्या इसी प्रकार से जनता और देश की सेवा के लिए इन अधिकारी कर्मचारियों ने नौकरी की थी? क्या यही आशय लेकर सरकारी नौकरी में आये थे? यदि हमारे देश के यह अधिकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति और इस जनता के टैक्स से प्राप्त होने वाले पैसे जिसमे की इन्हें पेमेंट दी जाती है उसके प्रति जिम्मेदार हो जाएं तो फिर किस आसमाजिक तत्व और किस दो कौड़ी के नेता में इतनी दम है की देश के विकास को रोक पाए. आज आवश्यकता है ऐसे सभी अधिकारियों को अपने जमीर में झांकने की और वो दिन याद करने की जब वह स्कूल कॉलेज में थे और देश की  दुर्दशा को देखकर उनके मन में देश सेवा की जो ललक उठती थी उसे याद करने का समय है. 

संलग्न - 1) त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से बातचीत के अंश

    2) सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल के बातचीत के अंश.

    3) मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला से बातचीत के अंश,

   4) बदहाल पानी की स्थिति और परेशान लोग.

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  -शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Tuesday, March 27, 2018

भोपाल से पी एच ई की टीम जल्द ही करेगी रीवा संभाग का दौरा, लेगी पेयजल स्थिति का जायज़ा, इंजीनियर इन चीफ़ के कार्यालय भोपाल से जारी हुये आदेश Dysfunctional Handpumps and water problems in Rewa MP


दिनांक 27 मार्च 2018, स्थान – रीवा मप्र

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      गर्मी बढ्ने के साथ ही जिले मे जल संकट बढ़ गया है। कई स्थानो पर तो जलस्तर अभी भी ठीक है पर राइजर पाइप के अभाव और रखरखाव की समस्या के चलते नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। इस संदर्भ मे जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा संबन्धित त्योंथर,गंगेव, हनुमना, जवा, रायपुर करचुलियान आदि के उपयंत्री, अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी और कार्यपालन अभियंता शरद कुमार, और पी एस बुंदेला सहित मुख्य अभियंता भोपाल के निज सचिव, मुख्य अभियंता जबलपुर श्री गौड़, और पी एच ई विभाग के अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव आदि से बात की गई तो हर एक व्यक्ति का अपना अलग वक्तव्य सामने आया। हर किसी ने समस्या के समाधान पर तो कम परंतु जनता के ऊपर कुछ ज्यादा ही दोष मढ़ा। अधिकारियों ने अपने विभाग और सरकार की कमी को बिलकुल स्वीकार नहीं किया परंतु जनता ही उनकी नज़र मे सबसे ज्यादा दोषी दिखी। सभी अधिकारियों की बातचीत के अंश भी यहाँ पर औडियो फ़ाइल मे संलग्न हैं कृपया देखें।

  देखिये जब इन संबन्धित अधिकारियों से बात की गई तो इनका क्या जबाब था –

1)    “अभी हमारे पास हनुमना, जवा,त्योंथर, आदि ब्लॉक का प्रभार है। मैं हर स्थान पर नहीं पहुच सकता, सरकार को इस बात को सोचना चाहिए, आप त्योंथर के सहायक यंत्री एमके यादव से बात कर लें। वैसे हम आपको बता दें की हमारी माग के वावजूद भी हमे पर्याप्त पाइप नहीं दी गई है। मात्र हमारे पास त्योंथर के 95 के आसपास पंचायतों के लिए अभी 100 पाइप हैं। अब बताइये हर पंचायत मे औसतन 40 से 50 नलकूपों के लिए कैसे इतनी पाइप मे काम चल पाएगा।” – आनंद तिवारी, प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी, हनुमना, त्योंथर, जवा,पी, एच, ई विभाग रीवा मप्र। मोब –9589135484,  

2)   “हमने सरकार से 1500 पाइप की डिमांड की थी लेकिन हमे मात्र 100 पाइप एक बार मे दी गई हैं। गाँव वाले चाहते हैं की उनके नलकूप मे हम 10-12 पाइप डालें तो कैसे संभव है। सरकार हमे पर्याप्त माग की हुई पाइप नहीं दे रही है। आप सरकार के उच्चस्तर मे शिकायत करें जिससे हमारे लिए पाइप मिले तो हम काम करें। हमने नलकूप मैकेनिक को बताया है की आपके द्वारा बताई गई डाढ़,जमुई, बरहट, आदि पंचायतों को दिखवाता हूँ। पर आप भोपाल और जबलपुर मे उच्चस्तर मे बात करें। नलजल योजना के विषय मे जो बात आपने बताई है तो उसमे हमारे विभाग से जो किया जाना था किया जा चुका है अब आगे का काम पंचायत का है की वह उसकी व्यवस्था कराये। नलजल के लिए जमुई पंचायत त्योंथर ब्लॉक के लिए सवा लाख रुपए से अधिक उनके खाते मे भेजा जा चुका है। अब यदि पंचायतें काम नहीं करवा रही हैं तो हम क्या कर सकते हैं।”– एम के यादव, सहायक यंत्री त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र। मोब –7000310187,

3)   “आप हमे सारी जानकारी के साथ ईमेल कर दें और उसे हम संबंधितों को प्रेषित कर देंगे। इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल से आज बात नहीं हो पाएगी मैं उनका पीए बोल रहा हूँ, आप सब बाते ईमेल कर दें हम कार्यवाही करवा देंगे। वैसे आप के सूचना पर हमने रीवा और सतना के लिए एक टीम गठित कर दिया है जिसमे आपके रीवा के ही अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव भी हैं और जल्द ही पानी संबंधी समस्या का सर्वेक्षण कर अपनी जानकारी वह टीम हमे देगी। मैं आपको उनका मोबाइल नंबर बता देता हूँ आप उनसे संपर्क कर लें जब वह आपके क्षेत्र मे आयें। वैसे हमारे यहाँ से पाइप संबंधी कोई कमी नहीं है पर्याप्त मात्रा मे पाइप भेजी जा रही हैं। यह जिले स्तर के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है। फिर भी हम दिखवाएंगे। ” – निज सचिव,इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल, मप्र शासन लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग। लैंड्लाइन नंबर इंजीनियर इन चीफ़ – 07552779411,   

4)   “देखिये नलकूप संधारण और रख रखाव के लिए हमे सरकार से एक निश्चित सीमा मे ही बजट मिल पाता है,और उसी मे हमे काम करना पड़ता है। जनता की सोच बिलकुल गलत है की हमारे पास पाइप का भंडार है और हम जितना चाहें उतना पाइप उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसा नहीं है, हमारे पास प्रति वर्ष के हिसाब से प्रत्येक नलकूप के रखरखाव के लिए 16 सौ रुपये दिये जाते हैं जिसमे 60 प्रतिशत सामाग्री का खर्च होता है जिसमे पाइप, नट, बोल्ट, वासर आदि रहता है और उसमे 40 प्रतिशत लेबर चार्ज होता है। अब इसी मे हमे सब कुछ देखना पड़ता है तो ऐसे मे तो देखा जाय तो वर्ष मे एक नलकूप के लिए मात्र एक ही पाइप आ सकती है। हम चाहे कितना भी यहाँ से डिमांड देंगे लेकिन सरकार बजट मे पर्याप्त नहीं देती जिससे यह सब समस्याएँ बनी रहती हैं। चाहे भले ही इस वर्ष विशेष अकाल सूखे की स्थिति है परंतु सरकार नहीं सुनती उनका बजट पहले से तय रहता है, सरकार का कोई विशेष आवंटन नहीं होता है। फिर भी हमारे द्वारा आपके पूरे रीवा संभाग के लिए पर्याप्त पाइप भेजी जा चुकी है और डिमांड पर भेजी जा रही है मै आपको पूरा हिसाब बता सकता हूँ। कहीं कोई पाइप की कमी नहीं है।” – मिस्टर गौड़, चीफ़ इंजीनियर जबलपुर क्षेत्र (जिसके परिक्षेत्र मे रीवा संभाग आता है) । मोब – 9907065750 

5)   “रीवा सतना के हमारे दौरे के विषय मे आप बता रहे हैं परंतु अभी मुझे कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है। पर यदि ऐसा है तो जब भी मुझे लिखित आदेश मिलेगा तो मैं आता हूँ और आपको सूचित करूंगा। देखिये हम भी रीवा के ही हैं और 20 वर्ष से अधिक हमने रीवा संभाग मे रहकर नौकरी किया है हम वहाँ की भौगोलिक स्थिति के विषय मे वाकिफ हैं। परंतु लोगों को एट्टीट्यूड प्रॉब्लेम्स है जिसके कारण समस्या होती हैं। लोग यह चाहते हैं की सभी पाइप उनही के नलकूप मे डाल दी जाएँ पर ऐसा नहीं होता है। हमे सभी को देखना पड़ता है। परंतु जब हम आएंगे तो जो भी वास्तविक स्थिति होगी उससे शासन को अवगत कराएंगे। वैसे हम मई-जून मे एक बार दौरा करते हैं।” –अनुराग श्रीवास्तव, अधिकारी पी एच ई, भोपाल, जिनहे रीवा और सतना के लिए दौरा के लिए कई सदस्यों के साथ भेजा जा रहा है। मोब- 9827239912

संलग्न – कृपया उक्त सभी अधिकारियों कर्मचारियों से सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई बातचीत के अंश यहाँ पर संलग्न औडियो फ़ाइल मे हैं, देखने का कष्ट करें। साथ ही पिछले कई दिनों से जल की समस्या को लेकर मीडिया मे खबर का भी अंश यहाँ प्रस्तुत है जिसे इंजीनियर इन चीफ़ को भी उनके ईमेल एड्रैस मे भेजा जा चुका है।

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 शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। मोब – 7869992139,

Sunday, March 25, 2018

गंगेव पीएचई उपयंत्री अखिलेश ऊईके नहीं उठाता फोन, जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसी, सभी हैंडपम्प पाइप और रखरखाव के अभाव मात्र मे खराब, बताया जाता है की जलस्तर नीचे चला गया जबकि जलस्तर एकदम दुरुस्त, 90 फीसदी नलकूप मात्र 10 पाइप डालने से काम करना चालू कर देंगे

दिनांक 26 मार्च 2018, गढ़/गंगेव मप्र

      (कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

       ज़िले मे जल संकट बढ़ता जा रहा परंतु इस जल संकट के पीछे काफी हद तक प्रसाशनिक उदाशीनता और पीएचई विभाग का भष्ट्राचार जिम्मेदार है। ज़्यादातर नलकूपों का रखरखाब सही तरीके से न हो पाने के कारण यह नलकूप खराब बता दिये जाते हैं। यद्यपि अभी भी कई ग्रामों मे जलस्तर ठीक है फिर भी इसका सहारा लेकर लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के कर्मचारी अधिकारी जलस्तर नीचे बताकर पल्ला झाड लेते हैं। ज़िले भर मे सही सही सर्वे किया जाय तो पाया जाएगा की औसतन नलकूपों मे 5 से 6 तक ही पाइप लगाई हुई हैं, जबकि गलत जानकारी देकर बताया जाता है सभी नलकूपों मे 10 से अधिक पाइप डाली हुई हैं। बहुत कम नलकूप ऐसे हैं जिनमे 10 अथवा इससे अधिक पाइप लगाई हुई हैं। परंतु गलत जानकारी देकर सरकार को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है और नई पाइप को ज़िला से लेकर जनपद तक बैठे अधिकारियों और दलालों ठेकेदारों की सह से बेंच लिया जाता है। जब कभी पुरानी टूटी पाइप को निकालकर नवीन पाइप डाली जाती है पुरानी पाइप का कोई हिसाब नहीं रहता। पुरानी पाइप को भी विभाग के कर्मचारी काला बाजारी कर लेते हैं।

मात्र रखरखाव के अभाव मे गंगेव त्योंथर मे बंद हैं 80 फीसदी नलकूप

      उदाहरण के लिए गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा, अगडाल, सेदहा, बांस, मदरी,पनगड़ी, लौरी, गढ़, पंडुआ, रक्सा-माजन एवं त्योंथर अंतर्गत आने वाली डाढ़, जमुई, बरहट,कलवारी, कटरा सोहागी आदि पंचायतों मे देखा जाए तो 80 फीसदी से अधिक नलकूप मात्र सही रख रखाव के अभाव मे बंद हैं जबकि सरकार द्वारा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग  को हर वर्ष करोड़ों रुपया मात्र जिला भर के सभी नलकूप के रख रखाव के लिए दिये जाते हैं।

अखिलेश ऊईके नहीं उठाते फोन, जनता परेशान, सीएम हेल्पलाइन भी कारगर नहीं

   जब कभी भी गंगेव उपयंत्री अखिलेश ऊईके को कॉल कर खराब नलकूपों की जानकारी दी जाती है तो उनके द्वारा काल नहीं उठाया जाता। फिर जब इसी बात को लेकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायत की जाती है तो लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी के कर्मचारियों का हांथ पैर जोड़ने का सिलसिला चालू हो जाता है। कहा जाता है की सीएम हेल्पलाइन मे शिकायतें क्यों की गईं आप हमे बता देते तो हम समस्या का समाधान करवा देते, मुख्यमंत्री तक बात पाहुच जाती है तो हमारी नौकरी मे परेशानी होगी,जबकि उल्टा जब बार बार बताए जाने पर भी इनके द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो फोन कॉल नहीं उठाए जाते तब जाकर जनता मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज़ करवाती है।

चुनाव आते ही फिर मुह उठाए दौड़े आएंगे जनता के पास

– हमे वोट की भीख दे दो -

      गंगेव लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के उपयंत्री का रवैय्या जनता के विपरीत है। गर्मी की स्थिति को देखते हुये वास्तव मे चाहिए यह की जितने भी लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के जनपदों मे पदस्थ कर्मचारी अधिकारी और नलकूप मैकेनिक हैं इन्हे अपने क्षेत्र मे जाकर हर एक नलकूप का रेकॉर्ड उठाकर सही सही डाटा सरकार को प्रेषित करना चाहिए और वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए। परंतु जिस प्रकार स्थिति बनी हुई है इससे यह नहीं समझ आता की जिम्मेदार विभाग है की सरकार? आखिर सरकार मे भी बैठे जन सेवकों को भी तो पेपर पत्रिकाओं के माध्यम से रोज यह खबर लगती ही होगी की हर एक गाँव मे क्या वास्तविक स्थिति है। पर वोट लेने के बाद कहाँ किसे सुध है। जब एक बार फिर चुनाव आ जाएगा तो हांथ मे भीख का कटोरा लिए फिर जनता के पैरों तले पड़ जाएंगे पैर चाटने के लिए और इस देश की जनता तो पहले ही भगवान भरोशे है। सब कुछ भूलकर सब दुख क्लेश भूलकर फिर अपने वोट का दुरुपयोग कर लेगी। फिर किसी भष्ट्राचारी को बैठा देगी गद्दी पर और पूरे पाँच वर्ष तक लुटती रहेगी चिल्लाती रहेगी।

  संलग्न – क्षेत्र के बंद पड़े नलकूप और परेशान लोग, जिनकी आवाज़ न तो भगवान सुन रहा है और न ही सरकार।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र।7869992139


Tuesday, March 20, 2018

क्षेत्र मे बढ़ रहा जल आतंकवाद का खतरा, आम जनमानस बूंद बूंद पानी के लिए तरसा, प्रसासन ने साधी चुप्पी – सरल पर पानी की तलाश मे व्यस्त

दिनांक 19 मार्च 2018,

स्थान – गढ़, गंगेव, रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

       क्षेत्र मे जल संकट गहराता जा रहा है। पूरे क्षेत्र मे हैंडपम्प हवा और आग उगल रहे हैं। दिनांक 19 मार्च 2018 को हिनौती ग्राम पंचायत के हिनौती ग्राम की हरिजन आदिवशियों की बस्ती मे दौरा किया गया तो देखा गया की लोग अत्यधिक परेशान हैं। बस्ती के सभी नलकूप सूख चुके हैं। हरिजन आदिवाशी सहित विभिन्न वर्ग के लोग हांथ मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश मे लगे दिखे। बता दें की हिनौती,सेदहा, पंडुआ, डाढ़, बरहट, मदरी, पनगडी,कांकर सहित आसपास की दर्जनों पंचायतों मे भीषण जेएल संकट उत्पन्न हो चुका है। गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली इन दर्जनों पंचायतों मे लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी एवं पंचायत विभाग ध्यान नहीं दे रहा। जबकि देखा जाये तो अभी भीषण गर्मी की शुरुआत मात्र है मार्च का आधा समय भी नहीं बीता है और पानी के लिए इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है जो शासन प्रसासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

 हिनौती पंचायत मे हितग्राहियों की जुबानी –

1)  “मैं हिनौती ग्राम पंचायत का का उपसरपंच हूँ परंतु उपसरपंच होते हुये भी मैं अपने लोगों की पीड़ा देखता रहता हूँ और इसके लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। सरपंच ने हुमारे हांथ मे कोई शक्ति नहीं दी है, साथ ही यहाँ पर कौन से मद मे कितना पैसा आता है इसकी भी हमे कोई जानकारी नहीं मिलती। यहाँ हिनौती पंचायत मे दो नलजल योजना हमारी जानकारी मे मे कागजों पर काम कर रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है। जैसा की आप देख सकते हैं की उपाध्याय टोला और शुक्ला टोला के पास दोनों नलजल योजना बंद पड़ी हुई हैं। कागजों मे यहाँ पर पाइप लाइन बिछा कर नल द्वारा पानी सप्लाइ बताई गई है लेकिन सब पैसा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग और पंचायत विभाग द्वारा हजम कर लिया गया है हमारे लिए तो पीने का पानी तक नहीं है।” – राम मिलन साकेत उपसरपंच हिनौती पंचायत, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

2)  “हम बूंद बूंद पानी के लिए मारे मारे फिर रहे हैं कोई देखने सुनने वाला नहीं है। हमारे सभी नलकूप सूख चुके हैं अथवा जलस्तर बहुत नीचे चला गया है। हमने कई मर्तबा अपने समस्या सीएम हेल्पलाइन आदि के माध्यम से दर्ज कारवाई है परंतु कोई सुनवाई नहीं की जा रही है मात्र गलत सलत निराकरन देकर फुर्सत कर दिया जाता है।”-जगन्नाथ कोल, निवासी हिनौती, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

3)   “हम अपने बच्चों को घर के अंदर रोते बिलखते छोंडकर पानी की तलाश मे सेदहा पंचायत अंतर्गत आने वाली हिनौती स्कूल के पास एकमात्र स्थित नलकूप से पानी लाते हैं। हमारे छोटे छोटे बच्चे हैं जिन्हे काफी परेशानी होती है। हम पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं। हमारा पूरा हरिजन आदिवशियों का टोला ही पानी की समस्या से जूझ रहा है।” – ज्योति साकेत पति रमेश साकेत निवासी हरिजन बस्ती हिनौती,ब्लॉक गंगेव रीवा मप्र

      संलग्न- ग्राम पंचायत हिनौती जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत हिनौती पंचायत के परेशान रहवासी अपने अपने हाथों मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश करते हुये। साथ ही कई खराब पड़े नलकूप के पास खड़े हुये।

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शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

मोब – 7869992139

Monday, February 26, 2018

होली के बाद प्रारम्भ होगा बन्द पड़े हिनौती नलजल योजना का कार्य, 46 हज़ार आये पंचायत के खाते में, 1000 फ़ीट बिछेगी पाइपलाइन (गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का मामला ज़िले भर की मीडिया में छपी थी खबर), जनता को मिला अस्वासन

दिनाँक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

       अभी अभी दिनांक 25 फरवरी को ज़िले की मीडिया एवं साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से हिनौती नलजल योजना की निष्क्रियता सम्बन्धी समाचार प्रकाशित हुई थी जिस पर ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित पंचायत विभाग की नीद उड़ गई है। जिस पर संज्ञान लेते हुए ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं एस डी ओ श्रीवास्तव द्वारा फ़ोन के माध्यम से सूचित किया गया कि जल्द ही हिनौती पंचायत की नलजल योजना का बन्द पड़ा कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। बन्द पड़ी नलजल योजना के लिए पहले ही पंचायत के खाते में 40 हज़ार से अधिक की राशि डाली जा चुकी है साथ ही 1000 फ़ीट पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा।

    निश्चित तौर पर यह हिनौती पंचायत के रहवाशियों के लिए एक अत्यंत खुसी की बात हो सकती है कि यदि समय पर कार्य चालू हो गया तो इस वर्ष भीषण गर्मी में पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल पाएगी। बता दें कि हिनौती सहित घाट के ऊपरी क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में इस वर्ष एक बार फिर कम बारिश की वजह से भीषण जल संकट उत्पन्न हो चुका है ऐसे में नलजल योजना के माध्यम से जन जन तक पानी पहुचाने का विकल्प ही बचता है जिसमे प्रत्येक गांव में एक बोरवेल मात्र में मोटर पंप डालकर पाइप लाइन के माध्यम से घर घर पानी पहुचाया जा सकता है। ऐसे में घर घर नलकूप उत्खनन की खर्चीली परंपरा से निजात भी मिलेगी और साथ ही उसी खर्च से बेहतर पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

            अब देखना यह होगा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की नींद हमेशा के लिए ही खुली रहेगी और बढ़ रहे जल संकट की स्थिति में बिना शिकायतों के ही जिम्मेदारी समझ कर निराकरण करते रहेंगे अथवा इन्हें बार बार पिंच करके जगाते रहना पड़ेगा और इनकी अकर्मण्यता और अनियमितता को मीडिया के माध्यम से निरंतर बताते रहना पड़ेगा। 

    वहरहाल जो अनुभव बताता है उससे तो यही पता चलता है कि बिना हल्ला गुल्ला किये कुछ होने वाला नही है। जब चिल्लाने से ही सरकार और इनके कर्मचारियों को सुनाई नही देता तो भला शांत बैठने से तो ये सुनने वाले नहीं।

  संलग्न - स्थिति का मुआयना करने पहुचा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी दस्ता।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

गदही में नए हैंडपम्प सर्वे के लिए पहुचे गंगेव पी एच ई उपयंत्री अखिलेश उइके (पिछले दिनों समाचार आयी थी मीडिया में)

दिनांक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

  पानी की समस्या को लेकर अभी हाल ही में पिछले दिनों ज़िले से प्रकाशित होने वाले कई अग्रणी समाचार पत्रों में गदही ग्राम के हरिजन आदिवासियों द्वारा शिर पर डिब्बे बाल्टी रखकर प्रदर्शन करते हुए फ़ोटो प्रकाशित हुए थे। जिसके संदर्भ में  जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं संबंधित एस डी ओ हुजूर श्रीवास्तव को सूचित किया गया था।

      इसी तारतम्य में आज दिनांक 26 फरवरी को कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह के निर्देश पर शाम 4 बजे गंगेव ब्लॉक उपयंत्री अखिलेश उइके को जांच के लिए भेजा गया। जांच एवं सर्वे के दौरान पाया कि गदही ग्राम में 50 से अधिक घर बने हुए हैं जिनमे 200 से अधिक आबादी के लिए कोई शासकीय नलकूप उपलब्ध नही है। गदही ग्राम की बस्तियां कुछ इस प्रकार की बसी हुई हैं कि सभी घर आसपास न होकर काफी दूर दूर हैं और लगभग 4 किमी के दायरे में बसे हुए हैं और सभी घरों को पानी उपलब्ध करने के लिए 3 से 4 तक हैंडपम्प करने पड़ेंगे। उपयंत्री द्वारा बताया गया कि अभी वर्तमान में मात्र एक हैंडपम्प की व्यवस्था के लिए प्रयास किये जायेंगे जो दोनो तरफ की बस्तियों के मध्य में लगाया जाएगा।

    पी एच ई  उपयंत्री अखिलेश उइके ने बताया कि सर्वे और जांच रिपोर्ट कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को प्रेषित कर दी जाएगी जिस पर अग्रिम कार्यवाही विभाग द्वारा निर्धारित होगी।

  संलग्न - गदही ग्राम जांच करने पहुचे गंगेव लोक स्वास्थ्य विभाग के उपयंत्री अखिलेश उइके एवं क्षेत्रीय हैंडपम्प मैकेनिक अश्वनी पटेल एवं रामसिया द्विवेदी।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Sunday, February 25, 2018

नलजल योजना के "नल" में भरपूर है "जल" पर गांव की जनता को नही रहा "मिल" - भ्रष्ट्राचार का कुछ नही "उपचार" (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का)

दिनाँक 25 फरवरी 20018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

               पूरे ज़िले में पानी की जद्दोजहद चल रही है इसी बीच हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव में एक और नलजल योजना में भ्रष्ट्राचार का मामला सामने आया है। हिनौती निवासी अखिलेश उपाध्याय द्वारा बताया गया कि उनके घर के पास नलजल योजना का पंप हाउस पिछले एक दशक पूर्व बनाया गया था जो पूरे हिनौती ग्राम के लिए पाइप द्वारा पानी सप्लाई करने के लिए बनाया गया था लेकिन न तो पाइप लगाई गईं और न ही उसका सही तरीके से रख रखाब किया गया नतीजा यह हुआ कि उत्कृष्ट पंचायत का तमगा प्राप्त हिनौती पंचायत में नलजल योजना मात्र कागजों में है उसका कोई संचालन नही हो रहा है। 

     उपाध्याय परिवार के लगभग सैकड़ा भर से ऊपर सदस्य वहीं पंप हाउस के पास निवास करते हैं और भारी तकलीफ से गुजर रहे हैं। पंचायत में कोई हैंडपम्प भी सही तरीके से कार्य नही कर रहे हैं। पंप हाउस के पास ही पंचायत भवन एवं हरिजन आदिवशियों की बस्ती भी है जिसमे 500 से अधिक परिवार निवासरत हैं जिन्हें साल के 12 महीने पानी की भीषण समस्या से गुजरना पड़ रहा है। बस्ती निवासी पार्वती साकेत एवं उनके पति भैयालाल साकेत सहित धर्मेंद्र आदिवासी आदि ने बताया कि हमारी पंचायत में नलजल योजना है जिसके रखरखाब के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी भी पेमेंट ले रहे हैं, साथ ही 46 हज़ार रुपये के आसपास की राशि भी रखरखाब के लिए अभी आई हुई है परंतु उसका क्या किया जाएगा किसी को कोई पता नही। पंप हाउस के पास निवासरत अखिलेश उपाध्याय और उनके परिवार द्वारा बताया गया कि इस विषय मे उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में कई शिकायतें की हुई हैं और रोज वहां से कॉल आता है और बताया जाता है कि आपकी समस्या का निराकरण कर दिया गया है परंतु भौतिक धरातल पर न तो किसी प्रकार का कोई निरीक्षण किया गया और न ही समस्या का समाधान हुआ है, सीएम हेल्पलाइन में मात्र झूंठे निराकरण दिए जाते हैं।

   इस प्रकार हिनौती ग्राम पंचायत के रहवाशियों की आपबीती से समझा जा सकता है कि पानी को लेकर हर जगह बस एक ही स्थिति बनी हुई है। हैंडपम्प काम नही कर रहे हैं जिनमे या तो पाइप नही हैं और उनका सही तरीके से रखरखाब नही हो पाया है अथवा गर्मी में जलस्तर नीचे जाने से बंद हो गए हैं। गर्मियों में विकल्प के तौर पर नलजल प्रदाय योजना एक बहुत ही बेहतर समाधान के तौर पर सामने आई है परंतु ग्रामीण स्तर पर जन जागरूकता के अभाव एवं बढ़ते पंचायती भ्रष्ट्राचार के कारण आगे नही बढ़ पा रही है। जहां कहीं पंचायतों में नलजल योजना लगायी भी गयी है वहां भ्रष्ट्राचार के कारण काम नही कर रही है। मेंटेनेंस और व्यवस्था के लिए सरकारी खजाने से आने वाली राशि पंचायत एवं पीएचई विभाग की सह से हजम हो रही है जिसकी जानकारी सभी अधिकारियों को है परंतु सही कार्यवाही न करवा कर भ्रष्ट्राचार में अपनी भरपूर भूमिका अदा कर रहे हैं। 

    ऐसे में अकेले प्रधानमंत्री मोदी का भाषण और उनकी मन की बात मात्र भाषण और मन मे ही रह जायेगी क्योंकि दिल्ली में बैठकर अकेले एक मोदी कुछ नही कर पायेगा। यहां तो हर गांव कस्बे में एक मोदी की जरूरत है।

  संलग्न - 

        1-  हिनौती नलजल या स्थलजल प्रदाय योजना अंतर्गत बनाया गया पंप हाउस और पास स्थित बोरवेल जहां से पूरे गांव में नल की पाइप द्वारा पानी दिए जाने का प्रावधान बनाया गया था।

       2 - दूसरी तस्वीर में शिकायतकर्ता अखिलेश उपाध्याय निवासी हिनौती पंप हाउस के पाश खड़े हुए नलजल की दुर्दशा दिखाते हुए। 

        3- अगली तस्वीर में हिनौती ग्राम की हरिजन बस्ती के लोग डिब्बे बाल्टी लिए हुए पानी का नंबर लगाए बैठे हैं। इसी एक स्थान से पूरे बस्ती में पैनी ढोते हैं।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।

      78699992139

Monday, February 19, 2018

(Rewa, MP) ज़िले के पहाड़ी इलाकों में बढ़ गया जलसंकट, पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बना अनजान (मामला डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक रीवा का, पानी पीने के मानवाधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां)

दिनांक 20 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   अभी पिछले दिनों हरिजन बस्ती नेवरिया का मामला प्रकाश में आया था जिसमे कुछ 10 साल तक के  स्कूली बच्चे साईकल में डिब्बे बाल्टी लिए हुए सेदहा स्कूल मोड़ हिनौती-लालगांव सड़क मार्ग के पास 5 किमी दूर से पानी भरकर ला रहे थे। आज सरकारें गरीबों के उत्थान की दुहाई देती नही थक रही और यूनिसेफ से लेकर चाइल्ड चैरिटी फण्ड के लिए अरबों खरबों डॉलर का पैसा देशी विदेशी संस्थाओं से उठा रही हैं लेकिन निश्चित तौर पर बच्चों का इस प्रकार 5 किमी दूर से पानी भरकर साईकल में लाना सरकार के सारे दावों को पूरी तरह से नग्न कर देने वाला वाकया था। 

      अब चूंकि जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि आज किसी भी ग्राम पंचायत में जाएं तो हमे लोग साईकल में डिब्बे लिए हुए पानी ढोते नज़र आ ही जायेंगे। लगभग रोज ही इस प्रकार की खबरें हमे मीडिया में छपी मिल ही जाएंगी।

       दिनांक 20 फरवरी की शुबह ग्राम पंचायत डाढ़ में ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को मोबाइल में इसी जलसंकट की भीषण समस्या के विषय मे बताया गया जिस पर मौके पर उपस्थित होकर देखा गया कि डाढ़ पंचायत जनपद पंचायत त्योंथर के 50 से ऊपर हैंडपम्प पाइप की कमी और अन्य खराबी के कारण बन्द पड़े हैं। कुछ तो हैंडपम्प जलस्तर नीचे जाने की वजह से बंद हैं। लेकिन ज्यादातर हैंडपम्प कर विषय मे डाढ़ के ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सही रखरखाव न होने की वजह से बंद पड़े हैं। जबकि देखा जाए तो इस विषय मे त्योंथर क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री पी एस बुन्देला एवं ज़िले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को कई मर्तबा बताया जा चुका है। इन सबका एक ही घिसा पिटा जबाब रहता है कि दिखवा रहे हैं लेकिन कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

     त्योंथर क्षेत्र की जिम्मेदारी लिए हुए कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का कहना था कि ठेके प्रथा के चलते सीधे ठेकेदार से बात करें पर जब ठेकेदार से बात की जाती है तो ठेकेदार का कहना होता है कि पी एच ई हमे कोई सामग्री उपलब्ध नही करवा रहा है अतः हम कुछ नही कर सकते।

     आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मानवाधिकारों में से एक पानी पीने के अधिकार का क्या होगा? क्या मानवाधिकार और मूलभूत संवैधानिक अधिकार मात्र किताबों की और पढ़ने पढ़ाने की बातें हैं। आखिर यदि सहरी क्षेत्र के लिए घर घर मे पाइप कनेक्शन से पानी सप्लाई किया जाता है और जल संकट उत्पन्न होने पर टैंकर से पानी पहुचाया जाता है तो पिछड़े ग्रामों के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नही की जाती? क्या अधिकारियों, कमर्चारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों नागरिकों के लिए विशेष संवैधानिक अधिकार हैं और पिछड़े बना दिये गए ग्रामो  के लिए ये पैमाने बिल्कुल अलग हैं? आखिर ऐसे में कोई ग्रामीण इन नियम कायदों संवैधानिक नियमों पर क्यों विश्वास करेगा? 

    आज सूखे अकाल की इस भीषण स्थिति में पानी को लेकर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं इससे साफ जाहिर है कि अप्रैल प्रारम्भ होते होते स्थितियां और भी अधिक भयावह हो जाएंगी। ऐसे में तमाम मानवाधिकार की सुरक्षा की दुहाई देने वाली इन सरकारों के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है कि कम बोलने वाले और कम विकशित इन ग्रामीणों के मानवाधिकारों की रक्षा सुरक्षा यह कैसे करेंगे? क्या मात्र दिखावा ही चलता रहेगा और मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर देशी विदेशी संस्थाओं से माल ऐंठने का काम चलता रहेगा अथवा कहीं कुछ वास्तविक धरातल पर भी होगा।

संलग्न - कई किमी दूर से साईकल पर पानी ढोने पर मजबूर ग्रामवशी। त्योंथर ब्लॉक पहाड़ी क्षेत्र। रीवा मप्र।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Sunday, February 18, 2018

(Rewa, MP) 21 वीं सदी में भी 5 किमी दूर से बच्चे साईकल से लाते हैं पानी, हाल ए मानवाधिकार (रीवा मप्र के हाल, देखें तस्वीरें और यूट्यूब वीडियो)

दिनांक 18 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक थाना गढ़, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      ज़िले में जल संकट गहराता जा रहा है लेकिन कई रिमाइंडर के बाबजूद भी शासन प्रशासन नही चेत पा रहा है।

       मानसून की बेरहमी के कारण प्रदेश में काफी कम मात्रा में पानी गिरने की वजह से ज़िले में भी जलस्तर घटता जा रहा है। जहां पहले 6 से 8 पाइप डालकर हैंडपम्प से पानी प्राप्त किया जा सकता था वहीं अब 10 से 12 पाइप में भी बड़ी मुश्किल से पानी मिल रहा है।

     कलवारी-लालगांव सड़क मार्ग में हिनौती के पास पांडेय ढाबा और कैथा मोड़ के पास करहिया ग्राम डाढ़ पंचायत में पिछले माह भर से अधिक समय से खराब हैंडपम्प आज तक नही बन पाया है। बताया गया कि इसमें तीन पाइप लगाई जानी हैं जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास नही है। अब इस विषय मे जब संबंधित कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं पी एस बुंदेला के समक्ष रखी गई तो मात्र आश्वासन ही मिल पाया। अब आश्वासन के बदले पिछले माह भर से हरिजन बस्ती के रहवासी जीवित हैं। अब देखना यह होगा कि 21 वीं सदी में मंगल एवं चंद्रमा पर पानी की तलाश करने वाली सरकारें अपनी धरती में प्यासी मानवता के लिए पानी उपलब्ध करवा पाती है कि नही।

  संलग्न - हरिजन बस्ती के छोटे बच्चे पानी से भरे डिब्बे अपनी अपनी साईकल में ढोते हुए।

https://youtu.be/I19n1CeUlII

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139