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Tuesday, October 2, 2018

मानवाधिकार आयोग की शिकायत पर पीएचई अमला पहुचा जांच करने (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले ग्राम भमरिया, नेवरिया, बड़ोखर एवं कैथा का जिनमे नलकूप न होने अथवा खराब होने की स्थिति में उत्पन्न हुआ भीषण जलसंकट, जब मामला मानवाधिकार आयोग पहुचा तो जांच करने पहुचे एसडीओ, उपयंत्री टीम)

दिनांक 03 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  कृत्रिम जलसंकट उत्पन्न होना मानवाधिकार हनन की समस्या है. क्या पीएचई विभाग और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी नही है की ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब तबके के लिए पानी की उपलब्धता बनाएं? क्या आज जितने भी नलकूप उत्खनन के कार्य विधायक एवं सांसद निधि आदि से हो रहे हैं उनमे से कोई भी सही और उपयुक्त स्थान पर कराए जा रहे हैं? आज किसी भी ग्राम में जाया जाय तो पाया जाएगा की रसूखदारों, नेताओं के चमचों के घर आंगन में बोरवेल हैं और उनमे उनके निजी मोटर पंप तो पड़े हुए हैं लेकिन जिन गरीबों को वास्तव में इन नलकूपों की आवश्यकता है उनके लिए आज 21 वीं सदी में भी पिछली 18 वीं सदी जैसी ही समस्या बनी हुई है. इन गरीबों की समस्या को देखने सुनने वाला कोई भी नही है. कागजों पर तो दुनियाभर की योजनाएं संचालित हो रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कोई रता पता नही है.

मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुचा जलसंकट का मामला

   बता दें की जब निचले एवं जिलास्तर से जलसंकट की भीषण स्थिति का कोई सार्थक समाधान निकलता नही दिखा तब सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा मामले को तत्काल अध्यक्ष मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल के समक्ष रख दिया गया जिंसमे कॉपी सीएम, सीएस,  अन्य पीएचई विभाग एवं ज़िला रीवा कलेक्टर एवं कमिश्नर को भी भेजी गई. इसी बात पर तत्काल संज्ञान भी हुआ और पिछले दिनों 1 अक्टूबर 2018 को पीएचई विभाग द्वारा जानकारी चाही गई की कहां कहां नलकूप नही हैं और कहां इनकी आवश्यकता है. इस पर समस्त जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधितों को उपलब्ध कराई गई.

गांधी जयंती 2 अक्टूबर को पीएचई विभाग का बना मुहूर्त, हुआ सर्वे

   इस प्रकार समस्त जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद पीएचई विभाग के गंगेव उपयंत्री अखिलेश उइके, हुज़ूर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी पीएचई एसके श्रीवास्तव, सिरमौर पीएचई डिवीज़न के अनुविभागीय अधिकारी श्री काम्बले, कैथा क्षेत्र के नलकूप मिस्त्री अश्वनी पटेल सहित अन्य जांच सर्वे टीम क्रमशः गंगेव  ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले हिनौती, कैथा, एवं सेदहा पंचायत के नेवरिया, भमरिया, नेवरिया, कैथा, एवं बड़ोखर ग्राम में हरिजन आदिवाशियों की बस्ती में उपस्थित हुए और सर्वे किया. जो जानकारी पेपर पत्रिकाओं के मॉध्यम से उपलब्ध कराई गई थी और आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी वह सब मौके पर सत्य पायी गई.

    कैथा पंचायत अन्तर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने एकमात्र नलकूप का पानी भी पीने योग्य नही था जिसके सैंपल लेकर लेबोरेटरी जांच के लिए भेजा गया है. इसी प्रकार प्राचीन देवी मंदिर कैथा के पास आवाद लगभग 50 की आवादी के लोगों के लिए भी पानी की समस्या थी जिसका की सर्वे करके तत्काल निराकरण किये जाने के आश्वासन अधिकारियों द्वारा उपस्थित जनसामान्य को दिए गए.

यहाँ यहाँ हुआ सर्वे, अब लगेंगे नए नलकूप

   गंगेव ब्लॉक के जिन ग्राम पंचायतों एवं ग्रामों में पीएचई विभाग के उच्चधिकारियों द्वारा सर्वे कार्य किया गया और नए नलकूप उत्खनन के प्रपोजल सरकार को भेजे गए उनमे से सेदहा पंचायत के नेवरिया ग्राम में लगभग 50 की आवादी वाले हरिजनों के लिए एक नलकूप, सेदहा/हिनौती पंचायत बॉर्डर से लगे लगभग 100 की आवादी वाले हरिजन आदिवाशियों की भमरिया बस्ती के लिए एक नलकूप, हिनौती पंचायत के बड़ोखर ग्राम की हरिजन बस्ती की लगभग 250 से अधिक की आवादी वाली बस्ती के लिए, जहाँ के नलकूप खराब थे उनके लिए एक नया नलकूप, कैथा पंचायत में शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने पुराने नलकूप के कार्य न करने के कारण एक अन्य नलकूप, एवं कैथा पंचायत में ही प्राचीन देवी मंदिर प्राँगण के पास निवासरत लगभग 50 की आवादी वाले शुक्ला-पटेल-हरिजन परिवार एवं साथ ही धार्मिक आस्था के केंद्र देवी मंदिर में जल चढ़ाने के लिए भी एक नलकूप के उत्खनन का सर्वे किया गया एवं उपस्थित हुज़ूर एवं सिरमौर एसडीओ, गंगेव उपयंत्री द्वारा बताया गया की प्रस्ताव बनाकर कार्ययोजना में सम्मिलित कराया जाएगा जिससे जल्द से जल्द पानी सम्बन्धी मानवाधिकार की समस्या का समाधान हो सके और आम जनता जल संकट से निजात पा सके.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें, सर्वे एवं जांच के दौरान उपस्थित एसडीओ, उपयंत्री, नलकूप मैकेनिक आदि की टीम एवं जानकारी प्रदान करते आमजनमानस और पीड़ित लोग.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139 

Wednesday, September 26, 2018

नेवरिया हरिजन बस्ती में आवागमन अवरुद्ध, पानी का भीषण संकट, नही है कोई नलकूप, 2 किमी दूर से हरिजन ढोते हैं पानी, बरसात में खेत तैर कर आते हैं बाहर ( मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले सेदहा पंचायत के नेवरिया ग्राम का जिंसमे 50 की आवादी के बीच नही है कोई नलकूप, हरिजन 2 किमी दूर से पानी लाने मजबूर, सरपंच बोलता है जिसे वोट दिए हो उसी से ले लो पानी)

दिनांक 27 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  आज आजादी के 70 साल बाद भी यदि आम भारतीय नागरिकों को पीने का स्वच्छ जल नही मिले तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है. देश में विकाश के नाम पर नित नए दावे किये जा रहे हैं, हरिजन आदिवाशियों की सुरक्षा और विकाश के नाम पर एससी एसटी एक्ट और आरक्षण की बातें तो की जाती हैं लेकिन वास्तव में इन सबका लाभ आज देश का गरीब तबका नही ले पा रहा है. सभी योजनाओं का लाभ वही हरिजन आदिवाशी ले रहे हैं जो पहले से सक्षम हैं जिसे क्रीमी लेयर के नाम से जाना जाता है. एक कलेक्टर हरिजन आदिवाशी का बच्चा जरूर कम योग्यता में ही कलेक्टर बन जाएगा लेकिन एक गरीब हरिजन आदिवाशी कुछ नही बन सकता, उसका जीवन मजदूरी करने और अंधेरे में ही व्यतीत होने वाला है.

    और वास्तव में यही सच्चाई भी है. क्योंकि यदि किसी को विश्वास न हो तो वह स्वयं भी ग्रामों में आकर देख ले की आज 70 वर्षों की आजादी के बाद भी गांव का गरीब हरिजन आदिवाशी परिवार गरीब ही बना हुआ है उसे किसी भी सरकारी योजना का लाभ मिलना समझ नही आता. यहां तक की ऐसे भी हरिजन आदिवाशी परिवार अभी भी हैं जिन्हें मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजनान्तर्गत दिया जाने वाला अनाज भी नही मिल रहा है. 

   नेवरिया ग्राम के 50 हरिजनों के बीच नही है कोई नलकूप

    जनपद पंचायत गंगेव अन्तर्गत आने वाले नेवरिया ग्राम के 50 हरिजन परिवारों के बीच में आज तक पानी की कोई सुविधा उपलब्ध नही है. रामदुलारे साकेत, रामलोचन साकेत बाबूलाल साकेत आदि के रहने वाले परिवारों के लिए न तो पंचायत विभाग और न ही किसी विधायक अथवा सांसद निधि से ही कोई नलकूप उत्खनन नही हुआ जबकि देखा जाए तो हरिजनों का समूह कई बार जाकर मनगवां विधायक के समक्ष अपनी बातें रख चुका है. जहां तक सवाल सरपंच से आवेदन का है तो उसके लिए लोग लगभग हर महीने ही जाकर नलकूप उत्खनन की माग करते हैं. लेकिन दुर्भाग्य इस देश में व्याप्त भस्ट्राचार का की जहां आवश्यकता है वहां नलकूप नही हुआ परंतु ऐसे घरों के आंगन में नलकूप हो गए जिन्हें न तो नलकूप की जरूरत थी और न ही वह इतने अक्षम थे की नलकूप न करवा सकें. आज यह भलीभांति स्पष्ट है की जितने भी सरकारी नलकूप हो रहे हैं उनका वास्तविक तौर पर अच्छा खासा दुरुपयोग किया जा रहा है. घर आंगन और खेतों के बीच कराए जा रहे इन नलकूपों में स्वयं के मोटर पंप डाले जा रहे हैं और गांव के गरीब लोगों को पानी पीने से रोंका जा रहा है.

  आम नागरिक को पानी से वंचित रखना मानवाधिकार का घोर उल्लंघन

    जिस प्रकार से गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सेदहा पंचायत नेवरिया ग्राम के 50 की आवादी वाले हरिजन परिवारों को नलकूप की व्यवस्था सरकार एवं पंचायत द्वारा नही की गई है जबकि इसकी गुहार के मर्तबा लगाई जा चुकी है इससे स्पष्ट है की सेदहा पंचायत और पीएचई विभाग मानवाधिकार के घोर उल्लंघन के लिए सीधे जिम्मेदार है. पीएचई विभाग में कार्यरत नलकूप मैकेनिक एवं अन्य इंजीनियर वगैरह का दायित्व बनता है की वह समय समय पर ग्रामों बस्तियों का दौरा कर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करते रहें और सरकार को भेजते रहें जिससे अगली कार्ययोजनाओं में सरकार अथवा विभाग नवीन नलकूप उत्खनन करवाता रहे. जिस प्रकार से नेवरिया हरिजन बस्ती का मामला सामने आया है उससे स्पष्ट है गरीबों की मूलभूत मनवाधिकरों की समस्याओं जैसे पानी, बिजली अथवा सड़क की फिक्र न तो पंचायत को है और न ही लोकल प्रशासन को वरना कैसे हो सकता है की जब आज घर आंगन में रसूखदारों के पट्टे में विधायक एवं सांसद निधि से सरकारी नलकूप उत्खनन करवाकर उनके मोटर पंप डाल लिए जा रहे हैं तो भला ऐसे वंचित हरिजनों के लिए पीने के पानी की सुविधा क्यों मुहैय्या न कराई जाती. इस सबसे से स्पष्ट है की राजनीति एवं अकर्मण्यता के चलते ही ऐसे 50 की आवादी  वाले हरिजनों को पीने के पानी से वंचित रखा गया है. सही मायनों में मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में लाकर ऐसे मानवाधिकार के घोर उल्लंघन की मामलों पर दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान होना चाहिए.

  इन हरिजनों को चलने के लिए रास्ता तक नही

   सेदहा पंचायत के नेवरिया हरिजन बस्ती में रहने वाले लगभग 50 हरिजनों के परिवारों को चलने के लिए रास्ता तक नही है. जो परिवार नेवरिया हरिजन बस्ती में निवासरत है उनमे से कुछ की प्राप्त जानकारी में बताया गया की बाबूलाल साकेत के घर में 4 सदस्य, रामदुलारे साकेत के घर में 2 सदस्य, पुष्पराज साकेत के घर में 5 सदस्य, रजनीश साकेत के घर में 8 सदस्य, रंजीत साकेत के घर में 5 सदस्य अभी भी वहां मौके पर निवासरत हैं जबकि लगभग इतने ही परिवार अभी कामकाज के सिलसिले में बाहर गए हैं जो समय समय पर पलायन करते रहते हैं. क्योंकि ग्राम पंचायत में मनरेगा का कोई भी कार्य इन मजदूरों को नही मिलता एवं जेसीबी एवं मसीनों सके करवाया जा रहा है जिसकी वजह से इन्हें कार्य के सिलसिले में बाहर शहरों की तरफ पलायन करते रहना पड़ता है. 

हरिजनों ने पानी और सड़क की लगाई गुहार 

   इन सभी हरिजन परिवारों ने एक स्वर में बताया की इन्हें न तो पीने के लिए पानी है और न ही इनको चलने के लिए आवागमन मार्ग. यह सभी परिवार जमीदारों के खेतों के बीच में फंसे हुए हैं जिससे आवागमन में असुविधा के साथ अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. सभी ने सरकार प्रशासन से पानी और सड़क की माग की है.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें नेवरिया हरिजन बस्ती में निवासरत कुछ हरिजन परिवार जिन्हें न तो पीने का पानी है और न ही चलने के लिए सड़क मार्ग.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Tuesday, April 17, 2018

भोपाल कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव की अगुआई में पी एच ई टीम ने रीवा ज़िले का किया दौरा (गंगेव की बांस पानी टंकी, हिरुडीह सहित टंकियों की राशि जारी काम का चल रहा इन्तेज़ार, त्योंथर की डाढ़, कलवारी और जमुई पंचायत का भी लिया व्योरा, ग्रामीणों को कार्य पूर्ण करने का आश्वासन )

दिनाँक 17 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव/त्योंथर रीवा मप्र।

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानंद द्विवेदी)

    पिछले कुछ सप्ताह पहले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा प्रदेश पी एच ई विभाग और मानवाधिकार आयोग तक उठाये गए जल संकट के विषय मे कार्यवाही के तौर पर प्रदेश स्तरीय अधिकारी भोपाल इंजीनियर इन चीफ द्वारा गठित बहु सदस्यीय टीम दिनाँक 17 अप्रैल 2018 को गंगेव और त्योंथर ब्लॉक पहुची जिसके सदस्यों में भोपाल से कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव, रीवा जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह, गंगेव उपयंत्री अखिलेश उइके, मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला, एस डी ओ इन चार्ज त्योंथर आनंद तिवारी सहित अन्य कर्मचारी थे।

    अपने आगमन के पूर्व इन अधिकारियों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को फ़ोन में सूचित किया गया जिनकी उपस्थिति में कैथा, हिनौती, डाढ़, बांस,  हिरुडीह पंचायतों में जाकर बन्द पड़ी नलजल योजना और काम न कर रहे नलकूपों की जानकारी ली गई। लोगों से संपर्क कर उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण का आश्वासन दिया। 

    जानकारी के तौर पर अधिकारियो द्वारा बताया गया कि हिनौती की नलजल योजना को प्रारम्भ करने की कार्ययोजना चल रही है। सरपंच के खाते में पिछले साल कुछ 46 हज़ार रुपये भेजे गए हैं लेकिन अब तक क्यों कार्य नही हुआ, क्यो मोटर पंप नही डाला गया इस पर अधिकारियों ने सरपंच को अल्टीमेटम दिया है। बांस के दौरे में रीवा कार्यपालन यंत्री शरद कुमार द्वारा बताया गया कि बांस पानी की टंकी से पाइप लाइन जोड़ने का काम उनके कार्यालय के पास है जिस पर कार्य चल रहा है। जल्द ही पूरा होगा। हिरुडीह पंचायत के विषय मे रीवा कार्यपालन यंत्री सिंह द्वारा बताया गया कि 2 लाख रुपये के आसपास पंचायत के खाते में भेजे जा चुके हैं और सरपंच के काम का इनतजार चल रहा है। काम पूरा नही होने पर सभी सरपंचों के ऊपर कार्यवाही की प्रक्रिया और धारा 40 की कार्यवाही हेतु अनुविभागीय एवं दंडाधिकारी के पास प्रस्ताव भेजा जाएगा।

    हिनौती के बड़ोखर ग्राम में हरिजनों की पानी के समस्या के विषय मे बताया गया कि करहिया ग्राम में मोटर पंप लगे हुए बोरवेल के पास एक सिंटेक्स पानी की टंकी रखकर पानी की सप्लाई की जाएगी जिसके लिए विभाग ने पंचायत से प्रस्ताव की माग की है। जितना जल्दी प्रस्ताव बन जायेगा उतना जल्दी नलकूप पानी की टंकी रख दी जाएगी।

    करहिया लोनियान टोला के पास प्रजापति बस्ती के पास स्थित बोरवेल में हैंडपम्प नही डाले जाने के पीछे जानकारी लेने पर बताया गया कि यह नलकूप पंचायत विभाग द्वारा कराया गया है अतः हैंडपम्प भी पंचायत ही डाले। इसमे पी एच ई का कोई रोल नही है। 

    इस विषय मे भी त्योंथर जनपद सीईओ महावीर जाटव और सीईओ जिला पंचायत मयंक अग्रवाल को भी सूचित किया जा चुका है और कार्यवाही का आश्वासन मिला है।

   भोपाल से आये कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव द्वारा जानकारी दी गयी कि अगले दौर में हनुमना जाएंगे जहां पानी की समस्या और जमीनी हकीकत का जायज़ा लेंगे।

संलग्न - अपने गंगेव दौरे के दौरान हिनौती, बांस और बड़ोखर आदि ग्रामों में नलजल योजना की हकीकत की जानकारी लेते अधिकारी। 

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139

Friday, April 13, 2018

15 वर्ष से पानी की टंकियों में भरा है हवा (मामला गंगेव जनपद की कई पंचायतों में 80 फीसदी से अधिक बंद हैं हैंडपम्प, नलजल योजनाएं भष्ट्रचार की भेंट चढ़ी, वहीं बांस पंचायत की 50 हज़ार लीटर क्षमता की बंद पड़ी पानी की टंकी, और हिरुडीह पंचायत में बन्द पड़े नलजल योजना और 90 फीसदी बन्द पड़े हैंडपम्प की)

दिनांक 14 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव जनपद, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा, शिवानन्द द्विवेदी

   आज भारतीय लोकतंत्र 70 वर्ष से अधिक का हो रहा है. हर वर्ष भारतीय लोकतंत्र की वर्षगांठ मनाई जाती है. याद दिलाया जाता है की हमे इतने सदियों की गुलामी के बाद आजाज़ी मिली. इस आजादी को प्राप्त करने में हमारे देश के वीर शहीदों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बलि वेदी में आहुति दी. 

    यह सब तो ठीक है पर क्या यह भी कभी गंभीरता से विचार किया गया की आज इतने दसकों के बाद भी आखिर मूलभूत मानवाधिकारों की समस्याओं को हल क्यों नही किया गया? क्या मूलभूत अधिकारों की समस्या से स्वतंत्रता प्राप्त हुई है? प्रकाश के लिए बिजली, पीने के लिए स्वच्छ जल, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु, रहने के लिए उचित आवास, जीवित रहने के लिए भोजन यह प्रत्येक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए देश की आम जनमानस को हर हाल में उपलब्ध करवाना उस देश के संवैधानिक कर्तव्य होते हैं. 

     आज जब 21 वीं सदी का दौर चल रहा है और मानव अपने विकास गाथा का वर्चस्व धरती से लेकर अम्बर तक स्थापित करना चाह रहा है. वर्चस्व की लड़ाई के लिए महायुध्य हो रहे हैं. वैज्ञानिक अविष्कारों ने पुरानी सभी परिभाषाएं और मान्यताओं को बदल दिया हैं. भौतिक विज्ञान नित नए आयाम तलास रहा है. व्यक्ति धरती पर जीवन से थक हारकर अन्यत्र ग्रहों में जीवन पानी हवा की तलाश कर रहा है, ऐसे में यह सोचना पड़ेगा की यदि मॉनव इस धरती रूपी माता के गोद जिसमे पला बढ़ा और खेला खाया उसमे यदि जीवन सुचारू रूप से नही चला पाया तो बड़ी सर्मिन्दगी की बात होगी की दूसरे अजनबी ग्रहों जिनके की जीवन के पैमाने भी नही तय हुए हैं उनमे कैसे शांति और जीवन तलाश पायेगा. यह सब देखकर बड़ा ही अजीब लगता है की मृगतृष्ना के पीछे दौड़ने वाला यह मानव आज अपना ही अंत करने में तुला है. आज दुनिया कई मायनों में विनाश की कगार पर खड़ी है. अगले महायुध्य की ध्वनियां स्पष्ट सुनाई दे रही हैं.

धरती का पानी बर्वाद कर ढूँढ़ने चले मंगल और चंद्रमा पर 

   बड़ी अजीब दास्तान है की आज धरती पर जल प्रबंधन कर पाने में असफल सरकारें अपनी प्यासी मानवता के लिए मानवाधिकारों में से एक स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध करवा पाने में असफल हैं और अन्यत्र ग्रहों चंद्रमा, मंगल, आदि में पानी और जीवन की तलास के लिए अरबों खरबों बर्वाद कर रही हैं. यह किसी एक देश के हाल नही हैं बल्कि आज ज्यादातर विश्व के देशों में फैशन बन चुका है की चाहे उस देश में खाने के लिए दाने न हो लेकिन अपना वर्चस्व बताने के लिए न्यूक्लिअर और एटॉमिक प्रोग्राम में पानी की तरह पैसे और ह्यूमन रिसोर्स बहाने के लिए पर्याप्त समय और पैसा है. चाहे उस देश में भुखमरी चल रही हो, सब मर रहे हों लेकिन देश और विदेश से आयातित हथियार अवस्य होने चाहिए. विश्व के समस्त देशों के पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर को जोड़ दिया जाए तो ये ऐसी ताकतें बन चुकी हैं की चाहें तो यह पूंजीपति एक एक देश को गोद लेकर सालों साल उनकी आम जनमानस को खिला पिला सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नही करेंगे जो भी करेंगे वह मात्र कुछ ऐसा करेंगे कि उस पैसे और संपदा एवं मैन पावर का ऐसा उपयोग करेंगे जिससे ज्यादातर ऐसे पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर का वर्चस्व स्थापित हो. बिल गेट्स, ज़ुकेरबर्ग, टाटा और अजीम प्रेमजी जैसे कम ही लोग होंगे जो अपना पैसा चैरिटी और मॉनव की सेवा में लगाना चाहेंगे.

पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड को मानवाधिकार संरक्षण में आगे आना चाहिए

     यद्यपि यह कहने और सुनने में बड़ा अटपटा सा लग सकता है लेकिन यदि विश्व के पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लोग अपना थोड़ा थोड़ा भी योगदान चैरिटी के लिए देने लगे तो काफी हद तक विश्व की मूलभूत समस्याओं से निजात मिल जाएगा. सभी गरीब कमज़ोर और नीडी लोग अपनी मूलभूत अवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में सफल होंगे जिससे वह अपने जीवन को रोज़ की रोटी, कपड़ा, पानी, खाना, स्वास्थ की जद्दोजहद को छोड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाने में लगा पाएंगे और इस जीवन को समझ पाएंगे. आज पूरे विश्व की 75 प्रतिसत से अधिक की आवादी अपने रोज़ की जीवन की जद्दोजहद में ही पड़ी हुई है, उसे अपने मॉनव होने का एहसास भी नही है. इन ज्यादातर लोगों के लिए अपने रोजमर्रा की अवश्यकताओं की पूर्ति ही इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है.

   देश दुनिया की बातों को विराम देते हैं और आते हैं मप्र के रीवा में और देखते हैं की एक जिले के ग्रामों की समस्या कैसे इस पूरे देश और यहां तक की पूरे विश्व के लिए एक प्रोटोटाइप है.

    भारत में भष्ट्रचार का कोई अंत नही है. यहां तक कि लोग आज यह भी कहने लगे हैं की भारत की आबोहवा में भी अब भष्ट्रचार फैल चुका है. जो भी हो पर इसमे कोई दो राय वाली बात नही की मानवीय अवश्यकताओं के साथ ही समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं.

बांस पंचायत में 15 वर्ष से बनी पानी की टंकी में भरा है हवा, हैंडपम्प उगल रहे आग

     अभी पिछले दिनों पर्यावरण एवं मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत कई पंचायतों में भ्रमण किया गया और पानी संबंधी जमीनी हकीकत का व्योरा लिया गया. जो सच्चाई सामने आयी वह भारतीय परिवेश के हिसाब से ज्यादा चौकाने वाली नही थी. 

    ग्राम बांस के रोहित कुमार मिश्रा, शिवम मिश्रा, राजू तिवारी, अरुणेंद्र गौतम, सुमित्री सेन, जोधाबाई सेन, रविराज साकेत, अनुराग मिश्रा, आदि रहवाशियों ने बताया की ग्राम में 50 हज़ार क्षमता की पानी टंकी आज से 15 वर्ष पहले बनाई गई थी जिसमे मात्र 10 दिन के लिए ही पानी भरा गया था और उसके बाद कभी इस टंकी में पानी देखने को नही मिला. रोहित मिश्रा ने बताया की इस विशाल पानी टंकी को हमारे ग्राम में बनवाने के पीछे शासन प्रशासन की क्या मंशा रही होगी उन्हें आज तक समझ नही आया क्योंकि जब से पानी की टंकी बनाई गई है तब से लेकर आज तक न कहीं पाइप लाइन का पता है और न ही किसी रखरखाब करने वाले कर्मचारी का. शिवम मिश्रा और सुमित्री सेन द्वारा बताया गया की इस पानी की टंकी में जब एकबार पानी भरा गया था तब इसमे लीकेज था और पूरा पानी बह गया था. आज जब देखा गया तो लोगों ने पानी के टंकी के नीचे अपने अपने माल मवेशी बांध दिए थे. 

     रोहित और शिवम द्वारा जानकारी दी गई की उनके ग्राम में सैकड़ों नलकूप पंचायत, विधायक, और सांसद आदि निधियों से बनाये गए हैं लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक हैंडपम्प आज हवा और आग उगल रहे हैं. हैंडपम्प मैकेनिक से लेकर पंचायत कर्मियों और सरपंच को जानकारी दी गई लेकिन समस्या का समाधान नही किया गया.

   सभी रहवाशियों द्वारा एक स्वर में बताया गया की लोग बहुत परेशान हैं और बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और कोई सुनवाई नही हो रही है.

    शिवम और रोहित ने आगे बताया की उन्होंने यह जानकारी यहां से चुने गए जिला पंचायत सदस्य को भी दी थी लेकिन जिस दिन से चुनाव सम्पन्न हुआ है उस दिन से आज तक वोट और पद प्राप्त करने के बाद कोई भी जन प्रतिनिधि नही दिखा है जब वोट लेना होगा तो फिर मुह उठाये दौड़े चले आएंगे और बोलेंगे की हमे वोट की भीख के दो.

बांस ग्राम में ताला खुला पड़ा हुआ है पंप हाउस, स्टार्टर और इलेक्ट्रिक समान में लग गया जंग

    ग्राम बांस के राजू तिवारी, शिवम मिश्रा और रोहित मिश्रा ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया जिसमे कोई ताला नही लगा हुआ था. एक खुला हुआ ताला वहीं पर लटक रहा था. रहवाशियों ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया तो वहां का नजारा देखते ही बनता था जिसमे मोटर स्टार्टर, केबल, टूटे फूटे इलेक्ट्रिक के सामान आदि बिखरे पड़े थे जो स्पष्ट रूप से पंप हाउस के काम न करने और वहां की अव्यवस्था को दिखा रहे थे.

   बांस पानी की टंकी से संबंधित पंप हाउस के पीछे एक हैंडपम्प भी लगा हुआ मिला जो बनने के बाद कभी चला ही नही. हैंडपम्प चलाकर दिखाया तो उसका हैंडल जम्प कर रहा था.

रीवा पी एच ई कार्यपालन यंत्री शरद सिंह को जानकारी नही

  जब बांस की पानी की टंकी की दुर्दशा के विषय में ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद सिंह से बात की गई तो उनका कहना था की इस पानी की टंकी के विषय में उन्हें कोई जानकारी नही है. कार्यपालन यंत्री द्वारा कहा गया की चूंकि जानकारी दी जा रही है तो अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को भेजकर दिखवाएंगे. 

    50 हज़ार से अधिक क्षमता वाली पानी की टंकी की जानकारी ज़िले के कार्यपालन यंत्री को न होना एक अचंभा ही है. हाँ यह माना जा सकता है कि छोटी नलजल योजना संबंधी पानी की टंकी और सामान्य नलकूप की जानकारी का न होना समझ आता है पर आज जब पिछले कई सप्ताह से ज़िले में निरंतर पानी की भीषण समस्या को अखबार और विभिन्न मीडिया स्रोतों और कंप्लेन के द्वारा बताया जा रहा है ऐसे में इन अधिकारियों को चाहिए की पूरे ज़िले के डेटा को इकठ्ठा कर उसमे युध्यस्तर पर कार्यवाही कराएं.

  हिरुडीह पंचायत में भी भीषण जल संकट, नलजल योजना में पानी के स्थान पर आम जनता को मिल रही है हवा और आग

    गंगेव ब्लॉक की हिरुडीह पंचायत का किस्सा भी बांस पंचायत से कुछ ज्यादा अलग नही. दिनाँक 13 मार्च को शुबह लगभग 9 बजे के आसपास सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा हिरुडीह पंचायत की समस्याओं के सिलसिले में दौरा किया गया तो वहां को स्थिति दिखी वह भी आज पंचायती राज व्यवस्था की दुर्दशा को ही बया करती है. 

   हिरुडीह के दो टोलों का दौरा किया गया और वहां से जानकारी प्राप्त की गई जिसमे हिरुडीह निवासी रामगोपाल पांडेय, रामायण प्रसाद पटेल, राजेश पटेल, भगवानदीन पटेल, रामनिवास दुबे, रामलाल विश्वकर्मा, राजमणि पांडेय, विष्णुकांत शुक्ला आदि द्वारा बताया गया की लगभग तीन सरपंची पहले अर्थात लगभग 10-12 साल पूर्व उनकी पंचायत में नलजल योजना के लिए चार पानी की कम और मध्यम क्षमता वाली पानी की टंकियां बनाई गईं थी और कुछ पाइप लाइन भी बिछाई गई थी लेकिन कभी कोई पानी सप्लाई नही की गई है. सभी चारों पानी की टंकियां मात्र शोपीस बनकर खड़ी हुई हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. 

   इन रहवाशियों द्वारा बताया गया की इन्होंने कई बार सरपंच, सचिव, विधायक, सांसद, ज़िला एवं जनपद सदस्यों और अधिकारी कर्मचारियों सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी सूचित किया गुहार लगाई लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई, हाँ जब भी बात की जाती है तो अधिकारियों द्वारा बताया जाता है की काम हो जाएगा. पर आज दसक भर बीत रहे हैं लेकिन कुछ हुआ नही है. रहवाशियों द्वारा बताया गया की उनके गांव में सभी हैंडपम्प खराब पड़े हैं, ज्यादातर में पाइप ही नही पर कोई सुनने देखने वाला नही. बताया गया की कुछ हैंडपम्प में जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है.

   बताया गया की गंगेव जनपद अंतर्गत हिरुडीह पंचायत में 6 ग्राम आते हैं जिनमे हिरुडीह, जरहा, कोठार उन्मूलन, मड़फा, कोती, बगहिया सामिल हैं. इन सभी ग्रामों सहित पूरे पंचायती क्षेत्र की कुल आवादी लगभग 8 हज़ार से ऊपर है. और पूरे पंचायती क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक नलकूप खराब पड़े हैं. 

हरिजन बस्ती हिरुडीह के लोग पानी के लिए परेशान, दोनो नलकूप खराब और नलजल योजना की टंकी में कभी नही पहुचा पानी, पाइप और र खरखाब का पैसा भी खा गए भष्ट्राचारी

   हिरुडीह ग्राम में आगे चलने पर पुरवा वाली सड़क मार्ग से जुड़ी हिरुडीह की हरिजन बस्ती आती है जहां पर लगभग 50 घर हरिजन निवास करते हैं जिनकी आवादी लगभग 200 के आसपास है. इनके घर के पास दो नलकूप खोदे गए थे जो बिल्कुल कार्य नही कर रहे हैं. दोनो नलकूप पानी नही दे रहे. एक नलकूप अभी पिछले वर्ष 2017 में ही बनाया गया है लेकिन उसका प्लेटफॉर्म भी उखड़ा मिला और जब से बनाया गया है तब से उसमे बूंद में पानी नही निकला. सभी हरिजन महिलाओं और पुरुषों ने सरपंच और पंचायत विभाग पर आरोप लगाया की उनकी समस्या की कोई सुनवाई नही की जा रही है. 

     वहीं पास स्थित बगीचे के पास 50 मीटर दूरी पर एक छोटी किश्म की पानी की टंकी भी दिखी जिसमे कभी पानी नही आया. हरिजनों ने बताया की इस पानी की टंकी में पाइप लाइन भी सप्लाई नही की गई. हरिजनों ने बगीचे के पास स्थित मेढ़ की तरफ इशारा करते हुए बताया की टंकी से 50 मीटर दूर तक कभी पाइप लाइन डाली गई थी लेकिन उनके पानी की टंकी में पाइप नही जोड़ी गई. हरिजनों ने आगे जानकारी दी की बाद में लगाई गई पाइप भी खोदकर बेंच ली गई है.

     हिरुडीह के हरिजनों ने आरोप लगाया की उनकी समस्याओं की कोई सुनवाई नही हो रही है. जब वोट माँगना होता है तो प्रत्यासी उनके घर में आएंगे और खाट के नीचे बैठ जाएंगे और उनका पैर दबाकर कहेंगे की हमे बस आप लोग एक बार मौका दे दो हम आपके जीवन को बदल देंगे. अब हाल यह हैं की हर पंचवर्षीय व्यतीत हो रही है लेकिन ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन करने वाले हरिजन आदिवशियों के जीवन में आज तक कोई विशेष बदलाव देखने को नही मिले है.

     सभी लोगों ने एक स्वर में माग की है कि उनकी मूलभूत समस्याओं का और विशेष तौर पर गर्मी में पानी कि समस्या का समाधान किया जाए. उनकी पानी की टंकी को प्रारम्भ कर उसमे पाइप लाइन डाली जाए और घर घर नलजल योजना के माध्यम से पानी दिया जाए।

हिरुडीह हरिजन बस्ती में बिजली, आवास जैसी मानवाधिकार की भी हैं समस्याएं

    अमृत लाल साकेत एवं उनके आसपास बसे सैकड़ों हरिजन परिवारों ने बताया की उन्हें प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया गया था लेकिन सहायक सचिव और सरपंच द्वारा उन्हें पीएम आवास् की पूरी राशि नही दी गई है और मात्र 1 लाख 15 हज़ार ही दी गई है. उनकी मनरेगा की मजदूरी की राशि और शौचालय की राशि नही दी गई है.

    सभी हरिजनों ने बताया की उनके घरों में बिना बल्ब जलाए ही बिजली के अनियंत्रित बिल भेजे जा रहे हैं. हरिजनों ने बताया की उनके कुछ घरों में तो मीटर लगा है परंतु सभी के घर मीटर भी नही है. बताया गया की बिना मीटर रीडिंग ही बिजली के मनमुताबिक बिल भेजे जा रहे हैं. जिसकी की कई बार शिकायत भी मौखिक एवं सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई है पर औसत और ज्यादा बिलिंग में कोई परिवर्तन नही हुआ है. सभी ने बताया की उनके घरों में उजाला योजना के 9 या 10 वाट के एक या दो तक बल्ब जलते हैं और कोई दूसरे इलेक्ट्रिक सामान नही हैं फिर भी इतना अधिक बिल क्यों भेजा जा रहा है.

   इन समस्याओं पर सभी ने एक स्वर में कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - बांस और हिरुडीह पंचायत की बन्द पड़ी नलजल योजना की टंकियां, खराब पड़े पाइप की कमी के कारण पड़े हैंडपम्प और साथ ही बांस और हिरुडीह पंचायत के रहवासी और लोग जिनकी की समस्याओं का कोई समाधान नही किया जा रहा है. मामला गंगेव जनपद की पंचायतों का. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587,

Tuesday, March 27, 2018

भोपाल से पी एच ई की टीम जल्द ही करेगी रीवा संभाग का दौरा, लेगी पेयजल स्थिति का जायज़ा, इंजीनियर इन चीफ़ के कार्यालय भोपाल से जारी हुये आदेश Dysfunctional Handpumps and water problems in Rewa MP


दिनांक 27 मार्च 2018, स्थान – रीवा मप्र

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      गर्मी बढ्ने के साथ ही जिले मे जल संकट बढ़ गया है। कई स्थानो पर तो जलस्तर अभी भी ठीक है पर राइजर पाइप के अभाव और रखरखाव की समस्या के चलते नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। इस संदर्भ मे जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा संबन्धित त्योंथर,गंगेव, हनुमना, जवा, रायपुर करचुलियान आदि के उपयंत्री, अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी और कार्यपालन अभियंता शरद कुमार, और पी एस बुंदेला सहित मुख्य अभियंता भोपाल के निज सचिव, मुख्य अभियंता जबलपुर श्री गौड़, और पी एच ई विभाग के अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव आदि से बात की गई तो हर एक व्यक्ति का अपना अलग वक्तव्य सामने आया। हर किसी ने समस्या के समाधान पर तो कम परंतु जनता के ऊपर कुछ ज्यादा ही दोष मढ़ा। अधिकारियों ने अपने विभाग और सरकार की कमी को बिलकुल स्वीकार नहीं किया परंतु जनता ही उनकी नज़र मे सबसे ज्यादा दोषी दिखी। सभी अधिकारियों की बातचीत के अंश भी यहाँ पर औडियो फ़ाइल मे संलग्न हैं कृपया देखें।

  देखिये जब इन संबन्धित अधिकारियों से बात की गई तो इनका क्या जबाब था –

1)    “अभी हमारे पास हनुमना, जवा,त्योंथर, आदि ब्लॉक का प्रभार है। मैं हर स्थान पर नहीं पहुच सकता, सरकार को इस बात को सोचना चाहिए, आप त्योंथर के सहायक यंत्री एमके यादव से बात कर लें। वैसे हम आपको बता दें की हमारी माग के वावजूद भी हमे पर्याप्त पाइप नहीं दी गई है। मात्र हमारे पास त्योंथर के 95 के आसपास पंचायतों के लिए अभी 100 पाइप हैं। अब बताइये हर पंचायत मे औसतन 40 से 50 नलकूपों के लिए कैसे इतनी पाइप मे काम चल पाएगा।” – आनंद तिवारी, प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी, हनुमना, त्योंथर, जवा,पी, एच, ई विभाग रीवा मप्र। मोब –9589135484,  

2)   “हमने सरकार से 1500 पाइप की डिमांड की थी लेकिन हमे मात्र 100 पाइप एक बार मे दी गई हैं। गाँव वाले चाहते हैं की उनके नलकूप मे हम 10-12 पाइप डालें तो कैसे संभव है। सरकार हमे पर्याप्त माग की हुई पाइप नहीं दे रही है। आप सरकार के उच्चस्तर मे शिकायत करें जिससे हमारे लिए पाइप मिले तो हम काम करें। हमने नलकूप मैकेनिक को बताया है की आपके द्वारा बताई गई डाढ़,जमुई, बरहट, आदि पंचायतों को दिखवाता हूँ। पर आप भोपाल और जबलपुर मे उच्चस्तर मे बात करें। नलजल योजना के विषय मे जो बात आपने बताई है तो उसमे हमारे विभाग से जो किया जाना था किया जा चुका है अब आगे का काम पंचायत का है की वह उसकी व्यवस्था कराये। नलजल के लिए जमुई पंचायत त्योंथर ब्लॉक के लिए सवा लाख रुपए से अधिक उनके खाते मे भेजा जा चुका है। अब यदि पंचायतें काम नहीं करवा रही हैं तो हम क्या कर सकते हैं।”– एम के यादव, सहायक यंत्री त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र। मोब –7000310187,

3)   “आप हमे सारी जानकारी के साथ ईमेल कर दें और उसे हम संबंधितों को प्रेषित कर देंगे। इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल से आज बात नहीं हो पाएगी मैं उनका पीए बोल रहा हूँ, आप सब बाते ईमेल कर दें हम कार्यवाही करवा देंगे। वैसे आप के सूचना पर हमने रीवा और सतना के लिए एक टीम गठित कर दिया है जिसमे आपके रीवा के ही अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव भी हैं और जल्द ही पानी संबंधी समस्या का सर्वेक्षण कर अपनी जानकारी वह टीम हमे देगी। मैं आपको उनका मोबाइल नंबर बता देता हूँ आप उनसे संपर्क कर लें जब वह आपके क्षेत्र मे आयें। वैसे हमारे यहाँ से पाइप संबंधी कोई कमी नहीं है पर्याप्त मात्रा मे पाइप भेजी जा रही हैं। यह जिले स्तर के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है। फिर भी हम दिखवाएंगे। ” – निज सचिव,इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल, मप्र शासन लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग। लैंड्लाइन नंबर इंजीनियर इन चीफ़ – 07552779411,   

4)   “देखिये नलकूप संधारण और रख रखाव के लिए हमे सरकार से एक निश्चित सीमा मे ही बजट मिल पाता है,और उसी मे हमे काम करना पड़ता है। जनता की सोच बिलकुल गलत है की हमारे पास पाइप का भंडार है और हम जितना चाहें उतना पाइप उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसा नहीं है, हमारे पास प्रति वर्ष के हिसाब से प्रत्येक नलकूप के रखरखाव के लिए 16 सौ रुपये दिये जाते हैं जिसमे 60 प्रतिशत सामाग्री का खर्च होता है जिसमे पाइप, नट, बोल्ट, वासर आदि रहता है और उसमे 40 प्रतिशत लेबर चार्ज होता है। अब इसी मे हमे सब कुछ देखना पड़ता है तो ऐसे मे तो देखा जाय तो वर्ष मे एक नलकूप के लिए मात्र एक ही पाइप आ सकती है। हम चाहे कितना भी यहाँ से डिमांड देंगे लेकिन सरकार बजट मे पर्याप्त नहीं देती जिससे यह सब समस्याएँ बनी रहती हैं। चाहे भले ही इस वर्ष विशेष अकाल सूखे की स्थिति है परंतु सरकार नहीं सुनती उनका बजट पहले से तय रहता है, सरकार का कोई विशेष आवंटन नहीं होता है। फिर भी हमारे द्वारा आपके पूरे रीवा संभाग के लिए पर्याप्त पाइप भेजी जा चुकी है और डिमांड पर भेजी जा रही है मै आपको पूरा हिसाब बता सकता हूँ। कहीं कोई पाइप की कमी नहीं है।” – मिस्टर गौड़, चीफ़ इंजीनियर जबलपुर क्षेत्र (जिसके परिक्षेत्र मे रीवा संभाग आता है) । मोब – 9907065750 

5)   “रीवा सतना के हमारे दौरे के विषय मे आप बता रहे हैं परंतु अभी मुझे कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है। पर यदि ऐसा है तो जब भी मुझे लिखित आदेश मिलेगा तो मैं आता हूँ और आपको सूचित करूंगा। देखिये हम भी रीवा के ही हैं और 20 वर्ष से अधिक हमने रीवा संभाग मे रहकर नौकरी किया है हम वहाँ की भौगोलिक स्थिति के विषय मे वाकिफ हैं। परंतु लोगों को एट्टीट्यूड प्रॉब्लेम्स है जिसके कारण समस्या होती हैं। लोग यह चाहते हैं की सभी पाइप उनही के नलकूप मे डाल दी जाएँ पर ऐसा नहीं होता है। हमे सभी को देखना पड़ता है। परंतु जब हम आएंगे तो जो भी वास्तविक स्थिति होगी उससे शासन को अवगत कराएंगे। वैसे हम मई-जून मे एक बार दौरा करते हैं।” –अनुराग श्रीवास्तव, अधिकारी पी एच ई, भोपाल, जिनहे रीवा और सतना के लिए दौरा के लिए कई सदस्यों के साथ भेजा जा रहा है। मोब- 9827239912

संलग्न – कृपया उक्त सभी अधिकारियों कर्मचारियों से सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई बातचीत के अंश यहाँ पर संलग्न औडियो फ़ाइल मे हैं, देखने का कष्ट करें। साथ ही पिछले कई दिनों से जल की समस्या को लेकर मीडिया मे खबर का भी अंश यहाँ प्रस्तुत है जिसे इंजीनियर इन चीफ़ को भी उनके ईमेल एड्रैस मे भेजा जा चुका है।

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 शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। मोब – 7869992139,

Sunday, March 25, 2018

गंगेव पीएचई उपयंत्री अखिलेश ऊईके नहीं उठाता फोन, जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसी, सभी हैंडपम्प पाइप और रखरखाव के अभाव मात्र मे खराब, बताया जाता है की जलस्तर नीचे चला गया जबकि जलस्तर एकदम दुरुस्त, 90 फीसदी नलकूप मात्र 10 पाइप डालने से काम करना चालू कर देंगे

दिनांक 26 मार्च 2018, गढ़/गंगेव मप्र

      (कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

       ज़िले मे जल संकट बढ़ता जा रहा परंतु इस जल संकट के पीछे काफी हद तक प्रसाशनिक उदाशीनता और पीएचई विभाग का भष्ट्राचार जिम्मेदार है। ज़्यादातर नलकूपों का रखरखाब सही तरीके से न हो पाने के कारण यह नलकूप खराब बता दिये जाते हैं। यद्यपि अभी भी कई ग्रामों मे जलस्तर ठीक है फिर भी इसका सहारा लेकर लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के कर्मचारी अधिकारी जलस्तर नीचे बताकर पल्ला झाड लेते हैं। ज़िले भर मे सही सही सर्वे किया जाय तो पाया जाएगा की औसतन नलकूपों मे 5 से 6 तक ही पाइप लगाई हुई हैं, जबकि गलत जानकारी देकर बताया जाता है सभी नलकूपों मे 10 से अधिक पाइप डाली हुई हैं। बहुत कम नलकूप ऐसे हैं जिनमे 10 अथवा इससे अधिक पाइप लगाई हुई हैं। परंतु गलत जानकारी देकर सरकार को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है और नई पाइप को ज़िला से लेकर जनपद तक बैठे अधिकारियों और दलालों ठेकेदारों की सह से बेंच लिया जाता है। जब कभी पुरानी टूटी पाइप को निकालकर नवीन पाइप डाली जाती है पुरानी पाइप का कोई हिसाब नहीं रहता। पुरानी पाइप को भी विभाग के कर्मचारी काला बाजारी कर लेते हैं।

मात्र रखरखाव के अभाव मे गंगेव त्योंथर मे बंद हैं 80 फीसदी नलकूप

      उदाहरण के लिए गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा, अगडाल, सेदहा, बांस, मदरी,पनगड़ी, लौरी, गढ़, पंडुआ, रक्सा-माजन एवं त्योंथर अंतर्गत आने वाली डाढ़, जमुई, बरहट,कलवारी, कटरा सोहागी आदि पंचायतों मे देखा जाए तो 80 फीसदी से अधिक नलकूप मात्र सही रख रखाव के अभाव मे बंद हैं जबकि सरकार द्वारा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग  को हर वर्ष करोड़ों रुपया मात्र जिला भर के सभी नलकूप के रख रखाव के लिए दिये जाते हैं।

अखिलेश ऊईके नहीं उठाते फोन, जनता परेशान, सीएम हेल्पलाइन भी कारगर नहीं

   जब कभी भी गंगेव उपयंत्री अखिलेश ऊईके को कॉल कर खराब नलकूपों की जानकारी दी जाती है तो उनके द्वारा काल नहीं उठाया जाता। फिर जब इसी बात को लेकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायत की जाती है तो लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी के कर्मचारियों का हांथ पैर जोड़ने का सिलसिला चालू हो जाता है। कहा जाता है की सीएम हेल्पलाइन मे शिकायतें क्यों की गईं आप हमे बता देते तो हम समस्या का समाधान करवा देते, मुख्यमंत्री तक बात पाहुच जाती है तो हमारी नौकरी मे परेशानी होगी,जबकि उल्टा जब बार बार बताए जाने पर भी इनके द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो फोन कॉल नहीं उठाए जाते तब जाकर जनता मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज़ करवाती है।

चुनाव आते ही फिर मुह उठाए दौड़े आएंगे जनता के पास

– हमे वोट की भीख दे दो -

      गंगेव लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के उपयंत्री का रवैय्या जनता के विपरीत है। गर्मी की स्थिति को देखते हुये वास्तव मे चाहिए यह की जितने भी लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के जनपदों मे पदस्थ कर्मचारी अधिकारी और नलकूप मैकेनिक हैं इन्हे अपने क्षेत्र मे जाकर हर एक नलकूप का रेकॉर्ड उठाकर सही सही डाटा सरकार को प्रेषित करना चाहिए और वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए। परंतु जिस प्रकार स्थिति बनी हुई है इससे यह नहीं समझ आता की जिम्मेदार विभाग है की सरकार? आखिर सरकार मे भी बैठे जन सेवकों को भी तो पेपर पत्रिकाओं के माध्यम से रोज यह खबर लगती ही होगी की हर एक गाँव मे क्या वास्तविक स्थिति है। पर वोट लेने के बाद कहाँ किसे सुध है। जब एक बार फिर चुनाव आ जाएगा तो हांथ मे भीख का कटोरा लिए फिर जनता के पैरों तले पड़ जाएंगे पैर चाटने के लिए और इस देश की जनता तो पहले ही भगवान भरोशे है। सब कुछ भूलकर सब दुख क्लेश भूलकर फिर अपने वोट का दुरुपयोग कर लेगी। फिर किसी भष्ट्राचारी को बैठा देगी गद्दी पर और पूरे पाँच वर्ष तक लुटती रहेगी चिल्लाती रहेगी।

  संलग्न – क्षेत्र के बंद पड़े नलकूप और परेशान लोग, जिनकी आवाज़ न तो भगवान सुन रहा है और न ही सरकार।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र।7869992139


Tuesday, March 20, 2018

क्षेत्र मे बढ़ रहा जल आतंकवाद का खतरा, आम जनमानस बूंद बूंद पानी के लिए तरसा, प्रसासन ने साधी चुप्पी – सरल पर पानी की तलाश मे व्यस्त

दिनांक 19 मार्च 2018,

स्थान – गढ़, गंगेव, रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

       क्षेत्र मे जल संकट गहराता जा रहा है। पूरे क्षेत्र मे हैंडपम्प हवा और आग उगल रहे हैं। दिनांक 19 मार्च 2018 को हिनौती ग्राम पंचायत के हिनौती ग्राम की हरिजन आदिवशियों की बस्ती मे दौरा किया गया तो देखा गया की लोग अत्यधिक परेशान हैं। बस्ती के सभी नलकूप सूख चुके हैं। हरिजन आदिवाशी सहित विभिन्न वर्ग के लोग हांथ मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश मे लगे दिखे। बता दें की हिनौती,सेदहा, पंडुआ, डाढ़, बरहट, मदरी, पनगडी,कांकर सहित आसपास की दर्जनों पंचायतों मे भीषण जेएल संकट उत्पन्न हो चुका है। गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली इन दर्जनों पंचायतों मे लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी एवं पंचायत विभाग ध्यान नहीं दे रहा। जबकि देखा जाये तो अभी भीषण गर्मी की शुरुआत मात्र है मार्च का आधा समय भी नहीं बीता है और पानी के लिए इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है जो शासन प्रसासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

 हिनौती पंचायत मे हितग्राहियों की जुबानी –

1)  “मैं हिनौती ग्राम पंचायत का का उपसरपंच हूँ परंतु उपसरपंच होते हुये भी मैं अपने लोगों की पीड़ा देखता रहता हूँ और इसके लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। सरपंच ने हुमारे हांथ मे कोई शक्ति नहीं दी है, साथ ही यहाँ पर कौन से मद मे कितना पैसा आता है इसकी भी हमे कोई जानकारी नहीं मिलती। यहाँ हिनौती पंचायत मे दो नलजल योजना हमारी जानकारी मे मे कागजों पर काम कर रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है। जैसा की आप देख सकते हैं की उपाध्याय टोला और शुक्ला टोला के पास दोनों नलजल योजना बंद पड़ी हुई हैं। कागजों मे यहाँ पर पाइप लाइन बिछा कर नल द्वारा पानी सप्लाइ बताई गई है लेकिन सब पैसा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग और पंचायत विभाग द्वारा हजम कर लिया गया है हमारे लिए तो पीने का पानी तक नहीं है।” – राम मिलन साकेत उपसरपंच हिनौती पंचायत, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

2)  “हम बूंद बूंद पानी के लिए मारे मारे फिर रहे हैं कोई देखने सुनने वाला नहीं है। हमारे सभी नलकूप सूख चुके हैं अथवा जलस्तर बहुत नीचे चला गया है। हमने कई मर्तबा अपने समस्या सीएम हेल्पलाइन आदि के माध्यम से दर्ज कारवाई है परंतु कोई सुनवाई नहीं की जा रही है मात्र गलत सलत निराकरन देकर फुर्सत कर दिया जाता है।”-जगन्नाथ कोल, निवासी हिनौती, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

3)   “हम अपने बच्चों को घर के अंदर रोते बिलखते छोंडकर पानी की तलाश मे सेदहा पंचायत अंतर्गत आने वाली हिनौती स्कूल के पास एकमात्र स्थित नलकूप से पानी लाते हैं। हमारे छोटे छोटे बच्चे हैं जिन्हे काफी परेशानी होती है। हम पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं। हमारा पूरा हरिजन आदिवशियों का टोला ही पानी की समस्या से जूझ रहा है।” – ज्योति साकेत पति रमेश साकेत निवासी हरिजन बस्ती हिनौती,ब्लॉक गंगेव रीवा मप्र

      संलग्न- ग्राम पंचायत हिनौती जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत हिनौती पंचायत के परेशान रहवासी अपने अपने हाथों मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश करते हुये। साथ ही कई खराब पड़े नलकूप के पास खड़े हुये।

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शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

मोब – 7869992139

Monday, February 26, 2018

होली के बाद प्रारम्भ होगा बन्द पड़े हिनौती नलजल योजना का कार्य, 46 हज़ार आये पंचायत के खाते में, 1000 फ़ीट बिछेगी पाइपलाइन (गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का मामला ज़िले भर की मीडिया में छपी थी खबर), जनता को मिला अस्वासन

दिनाँक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

       अभी अभी दिनांक 25 फरवरी को ज़िले की मीडिया एवं साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से हिनौती नलजल योजना की निष्क्रियता सम्बन्धी समाचार प्रकाशित हुई थी जिस पर ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित पंचायत विभाग की नीद उड़ गई है। जिस पर संज्ञान लेते हुए ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं एस डी ओ श्रीवास्तव द्वारा फ़ोन के माध्यम से सूचित किया गया कि जल्द ही हिनौती पंचायत की नलजल योजना का बन्द पड़ा कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। बन्द पड़ी नलजल योजना के लिए पहले ही पंचायत के खाते में 40 हज़ार से अधिक की राशि डाली जा चुकी है साथ ही 1000 फ़ीट पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा।

    निश्चित तौर पर यह हिनौती पंचायत के रहवाशियों के लिए एक अत्यंत खुसी की बात हो सकती है कि यदि समय पर कार्य चालू हो गया तो इस वर्ष भीषण गर्मी में पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल पाएगी। बता दें कि हिनौती सहित घाट के ऊपरी क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में इस वर्ष एक बार फिर कम बारिश की वजह से भीषण जल संकट उत्पन्न हो चुका है ऐसे में नलजल योजना के माध्यम से जन जन तक पानी पहुचाने का विकल्प ही बचता है जिसमे प्रत्येक गांव में एक बोरवेल मात्र में मोटर पंप डालकर पाइप लाइन के माध्यम से घर घर पानी पहुचाया जा सकता है। ऐसे में घर घर नलकूप उत्खनन की खर्चीली परंपरा से निजात भी मिलेगी और साथ ही उसी खर्च से बेहतर पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

            अब देखना यह होगा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की नींद हमेशा के लिए ही खुली रहेगी और बढ़ रहे जल संकट की स्थिति में बिना शिकायतों के ही जिम्मेदारी समझ कर निराकरण करते रहेंगे अथवा इन्हें बार बार पिंच करके जगाते रहना पड़ेगा और इनकी अकर्मण्यता और अनियमितता को मीडिया के माध्यम से निरंतर बताते रहना पड़ेगा। 

    वहरहाल जो अनुभव बताता है उससे तो यही पता चलता है कि बिना हल्ला गुल्ला किये कुछ होने वाला नही है। जब चिल्लाने से ही सरकार और इनके कर्मचारियों को सुनाई नही देता तो भला शांत बैठने से तो ये सुनने वाले नहीं।

  संलग्न - स्थिति का मुआयना करने पहुचा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी दस्ता।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

गदही में नए हैंडपम्प सर्वे के लिए पहुचे गंगेव पी एच ई उपयंत्री अखिलेश उइके (पिछले दिनों समाचार आयी थी मीडिया में)

दिनांक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

  पानी की समस्या को लेकर अभी हाल ही में पिछले दिनों ज़िले से प्रकाशित होने वाले कई अग्रणी समाचार पत्रों में गदही ग्राम के हरिजन आदिवासियों द्वारा शिर पर डिब्बे बाल्टी रखकर प्रदर्शन करते हुए फ़ोटो प्रकाशित हुए थे। जिसके संदर्भ में  जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं संबंधित एस डी ओ हुजूर श्रीवास्तव को सूचित किया गया था।

      इसी तारतम्य में आज दिनांक 26 फरवरी को कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह के निर्देश पर शाम 4 बजे गंगेव ब्लॉक उपयंत्री अखिलेश उइके को जांच के लिए भेजा गया। जांच एवं सर्वे के दौरान पाया कि गदही ग्राम में 50 से अधिक घर बने हुए हैं जिनमे 200 से अधिक आबादी के लिए कोई शासकीय नलकूप उपलब्ध नही है। गदही ग्राम की बस्तियां कुछ इस प्रकार की बसी हुई हैं कि सभी घर आसपास न होकर काफी दूर दूर हैं और लगभग 4 किमी के दायरे में बसे हुए हैं और सभी घरों को पानी उपलब्ध करने के लिए 3 से 4 तक हैंडपम्प करने पड़ेंगे। उपयंत्री द्वारा बताया गया कि अभी वर्तमान में मात्र एक हैंडपम्प की व्यवस्था के लिए प्रयास किये जायेंगे जो दोनो तरफ की बस्तियों के मध्य में लगाया जाएगा।

    पी एच ई  उपयंत्री अखिलेश उइके ने बताया कि सर्वे और जांच रिपोर्ट कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को प्रेषित कर दी जाएगी जिस पर अग्रिम कार्यवाही विभाग द्वारा निर्धारित होगी।

  संलग्न - गदही ग्राम जांच करने पहुचे गंगेव लोक स्वास्थ्य विभाग के उपयंत्री अखिलेश उइके एवं क्षेत्रीय हैंडपम्प मैकेनिक अश्वनी पटेल एवं रामसिया द्विवेदी।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Sunday, February 25, 2018

नलजल योजना के "नल" में भरपूर है "जल" पर गांव की जनता को नही रहा "मिल" - भ्रष्ट्राचार का कुछ नही "उपचार" (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का)

दिनाँक 25 फरवरी 20018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

               पूरे ज़िले में पानी की जद्दोजहद चल रही है इसी बीच हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव में एक और नलजल योजना में भ्रष्ट्राचार का मामला सामने आया है। हिनौती निवासी अखिलेश उपाध्याय द्वारा बताया गया कि उनके घर के पास नलजल योजना का पंप हाउस पिछले एक दशक पूर्व बनाया गया था जो पूरे हिनौती ग्राम के लिए पाइप द्वारा पानी सप्लाई करने के लिए बनाया गया था लेकिन न तो पाइप लगाई गईं और न ही उसका सही तरीके से रख रखाब किया गया नतीजा यह हुआ कि उत्कृष्ट पंचायत का तमगा प्राप्त हिनौती पंचायत में नलजल योजना मात्र कागजों में है उसका कोई संचालन नही हो रहा है। 

     उपाध्याय परिवार के लगभग सैकड़ा भर से ऊपर सदस्य वहीं पंप हाउस के पास निवास करते हैं और भारी तकलीफ से गुजर रहे हैं। पंचायत में कोई हैंडपम्प भी सही तरीके से कार्य नही कर रहे हैं। पंप हाउस के पास ही पंचायत भवन एवं हरिजन आदिवशियों की बस्ती भी है जिसमे 500 से अधिक परिवार निवासरत हैं जिन्हें साल के 12 महीने पानी की भीषण समस्या से गुजरना पड़ रहा है। बस्ती निवासी पार्वती साकेत एवं उनके पति भैयालाल साकेत सहित धर्मेंद्र आदिवासी आदि ने बताया कि हमारी पंचायत में नलजल योजना है जिसके रखरखाब के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी भी पेमेंट ले रहे हैं, साथ ही 46 हज़ार रुपये के आसपास की राशि भी रखरखाब के लिए अभी आई हुई है परंतु उसका क्या किया जाएगा किसी को कोई पता नही। पंप हाउस के पास निवासरत अखिलेश उपाध्याय और उनके परिवार द्वारा बताया गया कि इस विषय मे उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में कई शिकायतें की हुई हैं और रोज वहां से कॉल आता है और बताया जाता है कि आपकी समस्या का निराकरण कर दिया गया है परंतु भौतिक धरातल पर न तो किसी प्रकार का कोई निरीक्षण किया गया और न ही समस्या का समाधान हुआ है, सीएम हेल्पलाइन में मात्र झूंठे निराकरण दिए जाते हैं।

   इस प्रकार हिनौती ग्राम पंचायत के रहवाशियों की आपबीती से समझा जा सकता है कि पानी को लेकर हर जगह बस एक ही स्थिति बनी हुई है। हैंडपम्प काम नही कर रहे हैं जिनमे या तो पाइप नही हैं और उनका सही तरीके से रखरखाब नही हो पाया है अथवा गर्मी में जलस्तर नीचे जाने से बंद हो गए हैं। गर्मियों में विकल्प के तौर पर नलजल प्रदाय योजना एक बहुत ही बेहतर समाधान के तौर पर सामने आई है परंतु ग्रामीण स्तर पर जन जागरूकता के अभाव एवं बढ़ते पंचायती भ्रष्ट्राचार के कारण आगे नही बढ़ पा रही है। जहां कहीं पंचायतों में नलजल योजना लगायी भी गयी है वहां भ्रष्ट्राचार के कारण काम नही कर रही है। मेंटेनेंस और व्यवस्था के लिए सरकारी खजाने से आने वाली राशि पंचायत एवं पीएचई विभाग की सह से हजम हो रही है जिसकी जानकारी सभी अधिकारियों को है परंतु सही कार्यवाही न करवा कर भ्रष्ट्राचार में अपनी भरपूर भूमिका अदा कर रहे हैं। 

    ऐसे में अकेले प्रधानमंत्री मोदी का भाषण और उनकी मन की बात मात्र भाषण और मन मे ही रह जायेगी क्योंकि दिल्ली में बैठकर अकेले एक मोदी कुछ नही कर पायेगा। यहां तो हर गांव कस्बे में एक मोदी की जरूरत है।

  संलग्न - 

        1-  हिनौती नलजल या स्थलजल प्रदाय योजना अंतर्गत बनाया गया पंप हाउस और पास स्थित बोरवेल जहां से पूरे गांव में नल की पाइप द्वारा पानी दिए जाने का प्रावधान बनाया गया था।

       2 - दूसरी तस्वीर में शिकायतकर्ता अखिलेश उपाध्याय निवासी हिनौती पंप हाउस के पाश खड़े हुए नलजल की दुर्दशा दिखाते हुए। 

        3- अगली तस्वीर में हिनौती ग्राम की हरिजन बस्ती के लोग डिब्बे बाल्टी लिए हुए पानी का नंबर लगाए बैठे हैं। इसी एक स्थान से पूरे बस्ती में पैनी ढोते हैं।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।

      78699992139

Wednesday, February 21, 2018

साहब हमे पानी दे दो तो बहुत बड़ा एहसान होगा! गदही ग्राम के हरिजन आदिवासी आज भी भरते हैं 5 किमी दूर जंगल के झरने से पानी, आवादी 200 से ऊपर, गर्मी में कर जाते हैं अपने घरों से पलायन (देखें तस्वीरें)

दिनाँक 22 फरवरी 2018, स्थान - सिरमौर तहसील गदही ग्राम से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

         बिना ज्यादा भूमिका बनाये सीधे मुद्दे में आ जाते हैं। मूलभूत मानवाधिकारों में से अति महत्वपूर्ण पानी पीने के अधिकार की कितनी सुरक्षा ये सरकारें कर पा रही हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज 21 वीं सदी में भी लोग 5 किमी दूर जंगल मे जाकर झरने से पानी ला रहे हैं और उसी से जीवन यापन कर रहे हैं। कहने को तो यह क्षेत्र मनगवां विधानसभा का है जहां पर एक मोहतरमा प्रतिनिधित्व की कमान संभाले हुए हैं जो इन तथाकथित पिछड़े समूहों की तारणहार भी बताई जाती हैं। लेकिन जब इन हरिजन आदिवाशी रहवाशियों से पूंछा गया तो पता चला कि कई मर्तबा हम समूहों में एकत्रित होकर अपनी समस्याएं इन  जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखे लेकिन कोई सुनवाई नही हुई है। आज जबकि पूरा देश जानता है कि सांसद और विधायक निधि के नलकूपों की क्या स्थितियां हैं। इनमे ज्यादातर व्यक्तिगत उपयोग में लाये जा रहे हैं जिनमे या की पंप डाले होते हैं अथवा किसी के घर आंगन में व्यक्तिगत उपयोग के लिए लगे होते हैं। ऐसे में क्या सार्वजनिक उपयोग के लिए इन सांसदों, पंचायतों और विधायकों अथवा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास कोई नलकूप नही हैं? 

   संलग्न तस्वीरों में जो लोग अपने सिर हाँथ में डिब्बे लिए प्रदर्शन कर रहे हैं यह वाकया गंगेव ब्लॉक सिरमौर तहसील अंतर्गत आने वाली हिनौती पंचायत के कुख्यात (भमरिया गदही क्षेत्र अवैध पशु बाड़ों के लिए इस क्षेत्र में कुख्यात है जहां गौहत्याएं हुई हैं)  गदही नामक ग्राम का है जहां सरकारी राजस्व के भूभाग में भूमिहीन हरिजन आदिवाशी बसे हुए हैं और आज कई सालों से पीने के पानी के लिए गुहार लगा रहे हैं।

   - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Tuesday, February 20, 2018

विंध्य किसान परिषद ने ज़िले में पानी बिजली मनरेगा को लेकर एस डीएम त्योंथर को सौंपा ज्ञापन, 7 दिन में कार्यवाही न होने पर होगा अनसन आंदोलन

दिनांक 21 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    रीवा जिले में गर्मी के साथ ही बढ़ रहे जलसंकट, मनरेगा में मजदूरों के अधिकारों के निरंतर हो रहे हनन एवं मस्टर रोल भरने में हो रहे फर्जीवाड़े, बिजली विभाग की बिना मीटर लगाए और मनमाने ढंग से औसत बिलिंग, राजस्व विभाग की मनमानी, पंचायती कार्यों में हो रही मनमानी और फर्ज़ीवाड़ा एवं अन्य कई सार्वजनिक हित की समस्याओं को लेकर विंध्य किसान परिषद ने त्योंथर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी को मुख्यमंत्री एवं कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है जिसमे 7 दिवश के भीतर सभी समस्याओं पर कार्यवाही की माग की है। कार्यवाही न होने की स्थिति में विंध्य किसान परिषद के कार्यकर्ताओं मजदूरों एवं किसानों द्वारा आमरण अनसन किया जाएगा जिसकी जबावदेही शासन प्रशासन की होगी।

     इस बीच एस डी एम त्योंथर श्री पांडेय को ज्ञापन सौंपते समय परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिषद के जिला अध्यक्ष शिवानंद द्विवेदी एवं कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी सहित सैकड़ों अन्य मजदूर, किसान कार्यकर्ता मौजूद रहे।

संलग्न - अनुविभागीय अधिकारी त्योंथर को ज्ञापन सौंपते समय उपस्थित परिषद के कार्यकर्ता।

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शिवानंद द्विवेदी 

सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Monday, February 19, 2018

(Rewa, MP) ज़िले के पहाड़ी इलाकों में बढ़ गया जलसंकट, पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बना अनजान (मामला डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक रीवा का, पानी पीने के मानवाधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां)

दिनांक 20 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   अभी पिछले दिनों हरिजन बस्ती नेवरिया का मामला प्रकाश में आया था जिसमे कुछ 10 साल तक के  स्कूली बच्चे साईकल में डिब्बे बाल्टी लिए हुए सेदहा स्कूल मोड़ हिनौती-लालगांव सड़क मार्ग के पास 5 किमी दूर से पानी भरकर ला रहे थे। आज सरकारें गरीबों के उत्थान की दुहाई देती नही थक रही और यूनिसेफ से लेकर चाइल्ड चैरिटी फण्ड के लिए अरबों खरबों डॉलर का पैसा देशी विदेशी संस्थाओं से उठा रही हैं लेकिन निश्चित तौर पर बच्चों का इस प्रकार 5 किमी दूर से पानी भरकर साईकल में लाना सरकार के सारे दावों को पूरी तरह से नग्न कर देने वाला वाकया था। 

      अब चूंकि जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि आज किसी भी ग्राम पंचायत में जाएं तो हमे लोग साईकल में डिब्बे लिए हुए पानी ढोते नज़र आ ही जायेंगे। लगभग रोज ही इस प्रकार की खबरें हमे मीडिया में छपी मिल ही जाएंगी।

       दिनांक 20 फरवरी की शुबह ग्राम पंचायत डाढ़ में ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को मोबाइल में इसी जलसंकट की भीषण समस्या के विषय मे बताया गया जिस पर मौके पर उपस्थित होकर देखा गया कि डाढ़ पंचायत जनपद पंचायत त्योंथर के 50 से ऊपर हैंडपम्प पाइप की कमी और अन्य खराबी के कारण बन्द पड़े हैं। कुछ तो हैंडपम्प जलस्तर नीचे जाने की वजह से बंद हैं। लेकिन ज्यादातर हैंडपम्प कर विषय मे डाढ़ के ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सही रखरखाव न होने की वजह से बंद पड़े हैं। जबकि देखा जाए तो इस विषय मे त्योंथर क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री पी एस बुन्देला एवं ज़िले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को कई मर्तबा बताया जा चुका है। इन सबका एक ही घिसा पिटा जबाब रहता है कि दिखवा रहे हैं लेकिन कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

     त्योंथर क्षेत्र की जिम्मेदारी लिए हुए कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का कहना था कि ठेके प्रथा के चलते सीधे ठेकेदार से बात करें पर जब ठेकेदार से बात की जाती है तो ठेकेदार का कहना होता है कि पी एच ई हमे कोई सामग्री उपलब्ध नही करवा रहा है अतः हम कुछ नही कर सकते।

     आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मानवाधिकारों में से एक पानी पीने के अधिकार का क्या होगा? क्या मानवाधिकार और मूलभूत संवैधानिक अधिकार मात्र किताबों की और पढ़ने पढ़ाने की बातें हैं। आखिर यदि सहरी क्षेत्र के लिए घर घर मे पाइप कनेक्शन से पानी सप्लाई किया जाता है और जल संकट उत्पन्न होने पर टैंकर से पानी पहुचाया जाता है तो पिछड़े ग्रामों के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नही की जाती? क्या अधिकारियों, कमर्चारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों नागरिकों के लिए विशेष संवैधानिक अधिकार हैं और पिछड़े बना दिये गए ग्रामो  के लिए ये पैमाने बिल्कुल अलग हैं? आखिर ऐसे में कोई ग्रामीण इन नियम कायदों संवैधानिक नियमों पर क्यों विश्वास करेगा? 

    आज सूखे अकाल की इस भीषण स्थिति में पानी को लेकर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं इससे साफ जाहिर है कि अप्रैल प्रारम्भ होते होते स्थितियां और भी अधिक भयावह हो जाएंगी। ऐसे में तमाम मानवाधिकार की सुरक्षा की दुहाई देने वाली इन सरकारों के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है कि कम बोलने वाले और कम विकशित इन ग्रामीणों के मानवाधिकारों की रक्षा सुरक्षा यह कैसे करेंगे? क्या मात्र दिखावा ही चलता रहेगा और मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर देशी विदेशी संस्थाओं से माल ऐंठने का काम चलता रहेगा अथवा कहीं कुछ वास्तविक धरातल पर भी होगा।

संलग्न - कई किमी दूर से साईकल पर पानी ढोने पर मजबूर ग्रामवशी। त्योंथर ब्लॉक पहाड़ी क्षेत्र। रीवा मप्र।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Thursday, January 12, 2017

(Rewa, MP) जनहित के प्रयास को मिली सफलता - रीवा के सैकड़ों ग्रामों के लिए नहर परियोजना स्वीकृत, मानवाधिकार आयोग भोपाल एवं जल संसाधन विभाग रीवा का पत्र


Dated 13/01/2017,
Rewa Madhya Pradesh, INDIA.
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जनहित के प्रयास को मिली सफलता - रीवा के सैकड़ों ग्रामों के लिए नहर परियोजना स्वीकृत: मानवाधिकार आयोग भोपाल एवं जल संसाधन विभाग रीवा का पत्र


(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) वर्ष 2014-15 के दौरान जब देश में भीषण सूखा-अकाल की स्थिति बनी तो मानव से लेकर जीव जंतु तक त्राहि-त्राहि करने लगे. पेंड-पौधे खड़े-खड़े सूखने लगे. ऐसा लगा जैसे महाकाल इस कलयुग में जल्दी ही प्रलय लाना चाह रहे हैं. पर स्थिति सुधरी और अगले वर्ष ही 2016 में खरीफ के दौरान अच्छी बारिश हुई और यहाँ तक की कई जगहों में बारिश से तो पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड भी टूट गए.
वहरहाल जब अकाल पड़ा तो मात्र एक ही शब्द हर दिशा में गूंजमान था और वह था पानी-पानी. अब यह पानी कहाँ से आता क्योंकि जलवृष्टि तो नहीं ही हुई साथ ही नदी, नाले, हैंडपंप, बोरेवेल, तालाब, पोखार कूप सब सूखने लगे. ऐसे में रहीम दास जी का बस वह एक दोहा बहुत याद आ रहा होगा जिसमे कहते हैं – “रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून, पानी गए न ऊबरे मोती मानुष चून”. जी हाँ यदि पानी नहीं है तो कुछ नहीं है. चाहे वह मनुष्य का पानी (मान-सम्मान) हो, चाहे मोती की चमक बरक़रार रखने वाला पानी हो अथवा चूना में डाल कर उसे जगाने वाला पानी हो अथवा फिर जीवन रक्षक पानी हो. शब्द जलवायु में दो शब्द आते हैं एक जल और दूसरा वायु. यह वातावरण अर्थात जलवायु जल और वायु से ही मिलकर बना है. और यही जल और वायु सभी जीव जंतुओं, मानव, पेंड़-पौधों के जीवन के लिए आवश्यक है. आज जिस तरह से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसका खामियाजा ही है की कहीं ज्यादा गर्मी कहीं ज्यादा ठंडी और कहीं सूखा तो कहीं अकाल. यह सब जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की वजह से ही हो रहा है पर आह! यह मानव है की समझने का नाम नहीं ले रहा है.

सामाजिक कार्यकर्ता का जनहित की दृष्टि से प्रयाश सैकड़ों ग्रामों को मिली नहर

सबसे पहले तो धन्यवाद के पात्र हैं मप्र मानवाधिकार आयोग भोपाल जिनके समक्ष रखे जनहित के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सतत रूप से जल संसाधन विभाग मप्र को नोटिस जारी की जिसके फलस्वरूप नहर परियोजना के कार्य में तेजी आई और अंततः अधीक्षण यंत्री श्री आर.एस. शर्मा के कार्यालय अधीक्षण यंत्री बाणसागर नहर मण्डल रीवा (मप्र ) का पत्र पृष्ठ क्र. 7493, एल.सी.सी./430/2016-17रीवा दिनांक 09/12/2016 प्राप्त हुआ जिसमे माननीय मानवाधिकार आयोग मप्र भोपाल के पत्र क्र. 30151/मा.आ.अ./रीवा-4199/16/2211/भोपाल दिनांक 16.11.2016 एवं पत्र क्र. 31441/मा.आ.अ./रीवा-4199/16/2012/भोपाल दिनांक 28.11.2016 का सन्दर्भ दिया गया और बताया गया की मनगवां तहसील के इटहा हल्का नं. 2, त्योंथर तहसील के जमुई हल्का नं. 31 और सिरमौर तहसील के हिनौती हल्का नं. 39 और इन हलकों के आसपास के अन्य कई हलकों के वास्ते आसपास के सैकड़ों ग्रामों के लिए वर्ष 2017-18तक उद्वहन या दबाब पद्धति द्वारा नहर पंहुच जाएगी और सरकार द्वारा इसकी स्वीकृति हो चुकी है (कृपया देखें संलग्न प्रपत्र की फोटो).

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा मप्र मावाधिकार आयोग सहित जल संसाधन विभाग भोपाल, पीएमओ नई दिल्ली समेत कई फोरम में लगाई गई थी याचिका 

वर्ष 2014-15 का भीषण सूखा-अकाल देखते हुए पानी की भीषण समस्या को कई सरकारी फोरम/विभाग में रखा गया था जिसमे मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल, श्री राधेश्याम जुलानिया जल संसाधन विभाग भोपाल, पीएमओ नई दिल्ली, समेत सीजी नेट स्वर मुख्य थे. अन्य विभागों द्वारा क्या संज्ञान लिया गया यह तो स्पष्ट नहीं हो पाया क्योंकि याचिकाकर्ता  को अन्य विभागों द्वारा कोई जानकारी लिखित में उपलब्ध नहीं कराई गयी पर अभी हाल ही में पिछले वर्ष 2016 के दिसम्बर में एक संलग्न-प्रपत्र जल संसाधन विभाग के संभागीय कार्यालय रीवा से प्राप्त हुआ जिसमे मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल के समक्ष प्रेषित की गयी याचिका को आधार बनाकर श्रीमान अध्यक्ष महोदय मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल के कई पत्र जो की दिनांक 16.11.2016 एवं 28.11.2016को मानवाधिकार आयोग द्वारा जल संसाधन विभाग रीवा को संलग्न-पत्र में भेजा बताया गया है द्वारा सतत प्रयास किया गया जिसके फलस्वरूप व्यापक जनहित से सम्बंधित और मानवाधिकारों में से एक पानी की समस्या का निराकरण सैकड़ों ग्रामों के लिए कर दिया गया है. निश्चित रूप से इस कार्य के लिए बंधाई के पात्र तो सभी सम्बंधित विभाग हैं पर सबसे ज्यादा यदि कोई है तो वह हैं मप्र. राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल जिन्होंने इस प्रकरण की गंभीरता को लेते हुए सतत रूप से जल संसाधन विभाग को नोटिसें जारी कीं जिसके फलस्वरूप कार्य में अत्यधिक तेज़ी आयी.
इस प्रकार इस उद्वहन पद्धति की सिंचाई परियोजना से कैथा, पडुआ, इटहा, अमिलिया अकलसी, अगडाल, लौरी, बांस, करहिया, मिसिरा, हिनौती, सेदहा, बम्हनी, बड़ीयोर, डाढ, जमुई, दुवगमा, कांकर, नेवरिया, सर्रा, लोटनी, कठमना, मदरी, हीरूडीह, बरहट, देउर, कटरा, कलवारी, चियार, क्योटा, भठवा, पनगड़ी, पताई, सहित सैकड़ों ग्रामों को इससे लाभ मिलेगा. इस सिचाई परियोजना से निश्चित रूप से क्षेत्र में हरित क्रांति आ जायेगी और मानव से लेकर जीव-जंतु पेंड़-पौधे सभी को राहत मिलेगी और क्षेत्र का जलस्तर में भी सुधार होगा जिससे कम वृष्टि अथवा सूखा की स्थिति में जमीन का जलस्तर बना रखने में काफी मदद मिलेगी.                 

संलग्न – 1) अधीक्षण यंत्री श्री आर.एस. शर्मा के कार्यालय अधीक्षण यंत्री बाणसागर नहर मण्डल रीवा (मप्र ) का पत्र पृष्ठ क्र. 7493, एल.सी.सी./430/2016-17रीवा दिनांक 09/12/2016. 2) मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा श्रीमान अध्यक्ष महोदय समेत कई विभागों को भेजे गए पत्र की प्रतिलिपि भी संलग्न है.


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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
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