"One who is unattached to the fruits of his work and who works as he is obligated is in the renounced order of life, and he is the true mystic: not he who lights no fire and performs no work". - |||श्रीमद भगवद गीता, अध्याय 6, Verse 1|||
Saturday, December 21, 2019
(Rewa, MP) धान खरीदी में घपला, किसानों से ले रहे 41 किलो से अधिक धान, पूंछने पर आर्द्रता का बता रहे कारण (मामला जिले के खरीदी केंद्रों का जहां किसानों का जमकर चल रहा शोषण, 40 किलो 600 ग्राम से अधिक की की जा रही खरीदी, किसान परेशान कोई नही सुन रहा किसानों की समस्या)
Saturday, November 17, 2018
MP - बच्चों की जिंदगी से बड़ा नही मतदान, हाई टेंशन लाइन हटी नही तो मतदान नही - कहना है पताई पंचायत के अभिभावकों का (मामला ज़िले के मनगवां विधानसभा निर्वाचन केंद्र क्रमांक 15 का, जहां पर कई वर्षों से स्कूल परिसर में सिर की ऊंचाई से गई हाई टेंशन लाइन बनी है टेंशन का सबब, ग्रामीणों ने कहा करेंगे मतदान का सामूहिक बहिष्कार, मामला पहुचा मप्र एवं भारत चुनाव आयोग)
दिनाँक 17 नवंबर 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र
(शिवानन्द द्विवेद, रीवा मप्र)
विकाश और भ्रष्टाचार तो एक ऐसा मुद्दा है ही जिनमे काफी लोग मतदान के बहिष्कार और नोटा दबाने की बातें करते रहते हैं, इसके अतिरिक्त भी कई ऐसे इशू हैं जिनके चलते मतदाता चुनाव बहिष्कार की बातें कर रहे हैं.
हाई टेंशन लाइन ने मतदाताओं की बढ़ाई टेंशन
मामला है ज़िले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 73 के मतदान केंद्र क्रमांक 15 का जहां पर पताई पंचायत अन्तर्गत अतरैला शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों के अभिभावकों ने हाई टेंशन लाइन न हटाये जाने की स्थिति में सामूहिक तौर पर मतदान से बाहिष्कार करने की बातें कही हैं.
दिनाँक 16 नवंबर 2018 को समाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी से चर्चा के दौरान यूट्यूब चैनल के लिए दिए गए अपने लगभग 12 मिनट के इंटरव्यू में उपस्थित दर्ज़नों अभिभावकों ने पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया की पिछले कई वर्षों से स्कूल परिसर के भीतर माध्यमिक भवन के ठीक ऊपर से छूती हुई गुजरी हाई टेंशन लाइन के खुले खतरनाक तारों की वजह से गांव वालों को काफी टेंशन है.
इस विषय में अभिभावकों ने कई मर्तबा स्कूल शिक्षा विभाग से लेकर बिजली विभाग के स्थानीय एवं ज़िले के अधिकारियों तक बातें पहुचाई है लेकिन अब तक मात्र कागज़ी कार्यवाही ही चलती रही है, जबकि धरातल पर स्थिति वैसे ही बनी हुई है.
हाई टेंशन लाइन हटाएं वरना करेंगे मतदान का बहिष्कार
उपस्थित अभिभावकों प्रमोद सिंह, सूर्यपाल सिंह, राजाराम कोरी, रामलाल विश्वकर्मा, रामबहोर कोरी, चंद्रिका कोरी आदि ने बताया की हमारे बच्चों के जीवन में बराबर संकट मंडरा रहा है और कभी भी कोई भीषण हादसा हो सकता है. कई बार स्कूल एवं विजली विभाग को अवगत कराए जाने के बाबजूद भी कार्यवाही न होना बच्चों के जीवन के प्रति प्रशासनिक निर्दयता को दर्शाता है. यदि ऐसा है तो हम भी वोट नही करेंगे चाहे जो जाए. सबसे पहले यहां स्कूल परिसर से हाई टेंशन लाइन हटाये तभी मतदान करेंगे वरना हम सब गांव वाले 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा के चुनाव का खुले तौर पर बहिष्कार करेंगे यह कहना था अभिभावकों का.
11 केवी लाइन की वजह से मतदान के दिन भी हो सकती है दुर्घटना
वास्तव में देखा जाए तो जिस प्रकार से हाई टेंशन लाइन के तार छत को छूते हुए निकले हुए हैं उससे मतदान के दिन भी भीड़भाड़ में कोई भी अप्रिय दुर्घटना हो सकती है. अमूमन बताया जाता है की यदि बारिश का मौसम है और शरीर गीला है ऐसे में लगभग ढाई से तीन मीटर दूरी से भी हाई टेंशन लाइन के तार शॉक दे देते हैं. इसके पूर्व भी हाई टेंशन लाइन की वजह से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं जिनमे पीड़ित का बचना मुश्किल हो जाता है.
जेई एवं डीई ने बताया एस्टीमेट जारी हुआ
इस बीच जब सामाजिक कार्यकर्ता ने संबंधित बिजली विभाग के अधिकारियों से जानकारी चाही तो त्योंथर डिविजनल इंजीनियर रामचरण पटेल एवं लालगांव कनिष्ठ यंत्री उमाशंकर द्विवेदी द्वारा बताया गया की स्कूल परिसर अथवा कहीं की भी लाइन शिफ्ट करवाने के लिए विभाग के पास कोई बजट नही होता. संबंधित पीड़ित पक्ष जब संबंधित एस्टिमटेड राशि को बिजली विभाग को प्रदान करता है तो लाइन शिफ्ट करने का कार्य विभाग द्वारा कराया जाता है. यह पूँछे जाने पर की जब स्कूल बनी हुई थी तो हाई टेंशन की लाइन परिसर के भीतर से क्यों खींची गई. इस पर जबाब मिला की लाइन पहले से थी और स्कूल भवन का निर्माण बाद में कराया गया अतः जिम्मेदारी और गलती बिजली विभाग की नही बल्कि स्कूल शिक्षा विभाग की है.
क्या कहा रीवा डीईओ अंजनी त्रिपाठी ने
जब इस विषय में रीवा जिला शिक्षा अधिकारी अंजनी कुमार त्रिपाठी से उनके मोबाइल फ़ोन में सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा जानकारी चाही गई तो पहले डीईओ रीवा ने जानकारी नही होने की बात कही. बाद में जैसे ही उन्हें बताया गया की अतरैला स्कूल एवं हिनौती शंकुल केंद्र के प्राचार्य द्वारा एस्टीमेट डीईओ कार्यालय रीवा भेज दिया गया है तब उनका कहना था की यह माध्यमिक शिक्षा विभाग का मामला होने से रमसा द्वारा नही बल्कि डीपीसी द्वारा सुलझाया जाएगा. इस प्रकार डीईओ रीवा ने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया.
बिजली एवं स्कूल शिक्षा विभाग में मामले को लेकर मचा है हड़कंप
इस बीच जानकारी मिली है की जिस प्रकार से पताई और उसके आसपास अतरैला आदि ग्रामों मतदाताओं और अभिभावकों ने 28 नवंबर के मतदान के बहिष्कार की बात की है उससे बिजली विभाग सहित स्कूल शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है. स्वयं अतरैला स्कूल माध्यमिक शाला एवं प्राथमिक शाला के हेड भी काफी चिंतित और परेशान नजर आये साथ ही डीईओ रीवा की भी बोलती बन्द दिखी. यद्यपि डीईओ ने डीपीसी पर मामला थोपने की कोशिश की लेकिन कहा की हम मामले को दिखवा रहे हैं.
हिनौती शंकुल केंद्र के प्राचार्य सबसे अधिक जिम्मेदार
वास्तव में देखा जाए तो स्थानीय स्तर पर दर्ज़नों शंकुल स्कूलों की जिम्मेदारी मात्र शंकुल केंद्र के प्राचार्य पर हुआ करती है. शंकुल केंद्र का प्राचार्य ही स्थानीय स्तर पर सर्वेसर्वा हुआ करता है. जो जानकारी शंकुल केंद्र के प्राचार्य द्वारा डीईओ एवं डीपीसी को भेजवाई जाती है और जिस तन्मयता के साथ लगकर कार्य करवाया जाता है कार्य उसी हिसाब से हो पाता है.
अतरैला शासकीय पूर्व माध्यमिक पाठशाला के मामले में शंकुल केंद्र हिनौती के प्रभारी प्राचार्य रमाकांत चतुर्वेदी को कई मर्तबा फ़ोन से लेकर व्यक्तिगत एवं आवेदनों के माध्यम से अभिभावकों एवं सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा भी सूचित किया गया है लेकिन स्कूली बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करते हुए हिनौती स्कूल शानुल प्राचार्य ने मामले को गम्भीरता से लिया ही नही जिसका की परिणाम है शंकुल के अंदर आने वाली स्कूलों में रमसा और डीपीसी के पास फण्ड होने के वाबजूद भी समय पर विद्युत लाइनें शिफ्ट न किया जाना. जिसका की परिणाम यह हुआ की व्यथित अभिभावकों ने लोकतंन्त्र के सबसे पड़े पर्व मतदान दिवस को भी मतदान से बहिष्कार करने का फैसला लिया है. जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग की बनती है.
देखना होगा चुनाव आयोग क्या एक्शन लेता है
अब देखना यह होगा की मतदान के बहिष्कार के इस मामले में केंद्रीय एवं मप्र चुनाव आयोग क्या एक्शन लेता है. इस बीच अतरैला स्कूल परिसर में हाई टेंशन लाइन के सम्पूर्ण मामले सहित अभिभावकों के यूट्यूब इंटरव्यू को मप्र राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त सहित भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओपी रावत को भी सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ट्विटर एवं ईमेल के मॉध्यम से भेज दी गई है और ग्रामीण अभिभावकों की पीड़ा व्यथा को समझते हुए मामले पर तत्काल संज्ञन लेते हुए हाई टेंशन लाइन तत्काल शिफ्ट करवाकर भय रहित वातावरण में मतदान कराए जाने की माग की गई है.
संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें किस तरह से अतरैला स्कूल परिसर में छत को छूते हुए हाई टेंशन लाइन 11 केवी के खुले तार झूल रहे हैं साथ ही स्कूल परिसर में उपस्थित छात्र, शिक्षक और अभिभावक. ट्विटर एवं ईमेल के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त भारत निर्वाचन आयोग सहित अन्य विभागों को भेजे गए ईमेल की प्रतियां के स्क्रीनशॉट.
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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139
Tuesday, October 2, 2018
मानवाधिकार आयोग की शिकायत पर पीएचई अमला पहुचा जांच करने (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले ग्राम भमरिया, नेवरिया, बड़ोखर एवं कैथा का जिनमे नलकूप न होने अथवा खराब होने की स्थिति में उत्पन्न हुआ भीषण जलसंकट, जब मामला मानवाधिकार आयोग पहुचा तो जांच करने पहुचे एसडीओ, उपयंत्री टीम)
दिनांक 03 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
कृत्रिम जलसंकट उत्पन्न होना मानवाधिकार हनन की समस्या है. क्या पीएचई विभाग और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी नही है की ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब तबके के लिए पानी की उपलब्धता बनाएं? क्या आज जितने भी नलकूप उत्खनन के कार्य विधायक एवं सांसद निधि आदि से हो रहे हैं उनमे से कोई भी सही और उपयुक्त स्थान पर कराए जा रहे हैं? आज किसी भी ग्राम में जाया जाय तो पाया जाएगा की रसूखदारों, नेताओं के चमचों के घर आंगन में बोरवेल हैं और उनमे उनके निजी मोटर पंप तो पड़े हुए हैं लेकिन जिन गरीबों को वास्तव में इन नलकूपों की आवश्यकता है उनके लिए आज 21 वीं सदी में भी पिछली 18 वीं सदी जैसी ही समस्या बनी हुई है. इन गरीबों की समस्या को देखने सुनने वाला कोई भी नही है. कागजों पर तो दुनियाभर की योजनाएं संचालित हो रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कोई रता पता नही है.
मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुचा जलसंकट का मामला
बता दें की जब निचले एवं जिलास्तर से जलसंकट की भीषण स्थिति का कोई सार्थक समाधान निकलता नही दिखा तब सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा मामले को तत्काल अध्यक्ष मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल के समक्ष रख दिया गया जिंसमे कॉपी सीएम, सीएस, अन्य पीएचई विभाग एवं ज़िला रीवा कलेक्टर एवं कमिश्नर को भी भेजी गई. इसी बात पर तत्काल संज्ञान भी हुआ और पिछले दिनों 1 अक्टूबर 2018 को पीएचई विभाग द्वारा जानकारी चाही गई की कहां कहां नलकूप नही हैं और कहां इनकी आवश्यकता है. इस पर समस्त जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधितों को उपलब्ध कराई गई.
गांधी जयंती 2 अक्टूबर को पीएचई विभाग का बना मुहूर्त, हुआ सर्वे
इस प्रकार समस्त जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद पीएचई विभाग के गंगेव उपयंत्री अखिलेश उइके, हुज़ूर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी पीएचई एसके श्रीवास्तव, सिरमौर पीएचई डिवीज़न के अनुविभागीय अधिकारी श्री काम्बले, कैथा क्षेत्र के नलकूप मिस्त्री अश्वनी पटेल सहित अन्य जांच सर्वे टीम क्रमशः गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले हिनौती, कैथा, एवं सेदहा पंचायत के नेवरिया, भमरिया, नेवरिया, कैथा, एवं बड़ोखर ग्राम में हरिजन आदिवाशियों की बस्ती में उपस्थित हुए और सर्वे किया. जो जानकारी पेपर पत्रिकाओं के मॉध्यम से उपलब्ध कराई गई थी और आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी वह सब मौके पर सत्य पायी गई.
कैथा पंचायत अन्तर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने एकमात्र नलकूप का पानी भी पीने योग्य नही था जिसके सैंपल लेकर लेबोरेटरी जांच के लिए भेजा गया है. इसी प्रकार प्राचीन देवी मंदिर कैथा के पास आवाद लगभग 50 की आवादी के लोगों के लिए भी पानी की समस्या थी जिसका की सर्वे करके तत्काल निराकरण किये जाने के आश्वासन अधिकारियों द्वारा उपस्थित जनसामान्य को दिए गए.
यहाँ यहाँ हुआ सर्वे, अब लगेंगे नए नलकूप
गंगेव ब्लॉक के जिन ग्राम पंचायतों एवं ग्रामों में पीएचई विभाग के उच्चधिकारियों द्वारा सर्वे कार्य किया गया और नए नलकूप उत्खनन के प्रपोजल सरकार को भेजे गए उनमे से सेदहा पंचायत के नेवरिया ग्राम में लगभग 50 की आवादी वाले हरिजनों के लिए एक नलकूप, सेदहा/हिनौती पंचायत बॉर्डर से लगे लगभग 100 की आवादी वाले हरिजन आदिवाशियों की भमरिया बस्ती के लिए एक नलकूप, हिनौती पंचायत के बड़ोखर ग्राम की हरिजन बस्ती की लगभग 250 से अधिक की आवादी वाली बस्ती के लिए, जहाँ के नलकूप खराब थे उनके लिए एक नया नलकूप, कैथा पंचायत में शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने पुराने नलकूप के कार्य न करने के कारण एक अन्य नलकूप, एवं कैथा पंचायत में ही प्राचीन देवी मंदिर प्राँगण के पास निवासरत लगभग 50 की आवादी वाले शुक्ला-पटेल-हरिजन परिवार एवं साथ ही धार्मिक आस्था के केंद्र देवी मंदिर में जल चढ़ाने के लिए भी एक नलकूप के उत्खनन का सर्वे किया गया एवं उपस्थित हुज़ूर एवं सिरमौर एसडीओ, गंगेव उपयंत्री द्वारा बताया गया की प्रस्ताव बनाकर कार्ययोजना में सम्मिलित कराया जाएगा जिससे जल्द से जल्द पानी सम्बन्धी मानवाधिकार की समस्या का समाधान हो सके और आम जनता जल संकट से निजात पा सके.
संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें, सर्वे एवं जांच के दौरान उपस्थित एसडीओ, उपयंत्री, नलकूप मैकेनिक आदि की टीम एवं जानकारी प्रदान करते आमजनमानस और पीड़ित लोग.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139
Sunday, September 9, 2018
गंगेव अस्पताल भवन की हालात जर्जर, कभी भी हो सकता है धराशायी, मरीजों के जीवन को उत्पन्न हुआ संकट (मामला रीवा ज़िले के गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जिंसमे 5 साल पूर्व आई 35 लाख के लगभग राशि मरम्मत में नही हो पायी उपयोग, ठेकेदार का पता नही, पीडब्ल्यूडी ने छोड़ा बीच मझधार में)
दिनांक 09 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
ज़िले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति निरंतर दयनीय बनी हुई है. गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मरम्मत के लिए आई 35 लाख रुपये के आसपास की राशि आज तक उपयोग नही हो पायी है. गंगेव अस्पताल की संलग्न तस्वीर से स्पष्ट है की यहां मॉनव का नही बल्कि कुत्ते बिल्लियों का राज है और संभवतः पशुओं के लिए ही यह अस्पताल है. गंगेव अस्पताल की अंदरूनी स्थिति देखकर विश्वास ही नही होता की यह मानवों के लिए बनाया गया अस्पताल है की जानवरों के लिए. शायद आज वेटेरिनरी औषधालय की गई गुजरी बिल्डिंग भी इतनी जर्जर और घटिया स्थिति में नही होगी जितनी की गंगेव का मानवों के लिए बनाया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है.
बीएमओ ने बताया राशि सैंक्शन के वावजूद भी निर्माण नही हुआ
गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक लंबे अरसे के पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी श्री देवव्रत पांडेय ने बताया की पिछले पांच वर्ष पूर्व ही 35 लाख के आसपास की भारी भरकम राशि मात्र गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रखरखाव और मेंटेनेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल द्वारा दी गई थी जिस पर टेंडर प्रक्रिया के तहत पीडब्ल्यूडी एवं ठेकेदार द्वारा कुछ कार्य भी 2 वर्ष पहले प्रारम्भ हुआ लेकिन फिर उस कार्य का जो हाल है वह सामने है. ठेकेदार ने कुछ समय बाद काम छोड़ दिया और अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया वहीं दूसरी तरफ जब बीएमओ एवं अस्पताल प्रबंधन से बात हुई तो उनके द्वारा बताया गया की यह सब पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार की कारगुजारी है जिसके कारण पूरा गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कबाड़खाना बन चुका है.
जगह जगह उखड़े फर्स, टूटी छतें दे रही मौत को आमंत्रण
अस्पताल के अंदर घुसने पर डर सा महसूस होता है क्योंकि पूरा अस्पताल की बिल्डिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त समझ आती है. फर्स और टाइल्स बुरी तरह से उखड़ी हुई है. जगह जगह कुत्ते बिल्ली यहां वहां बैठे नजर आते हैं जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीक होता है मानो यही कुत्ते ही अब इस गंगेव अस्पताल की जिम्मेदारी लिए हुए हैं.
मुख्य वृहद कक्ष के स्थान पर नर्स आफिस की गैलरी में कुछ दो चार बिस्तर लगाए गए हैं जिनमे कुछ मरीज देखे जा सकते हैं. उस गैलरी की फर्स और उसकी टाइल्स भी बुरी तरह से उखड़ी हुई है.
अस्पताल भवन के बाहर नही हुई कभी पुताई
भवन की बाहर की दीवाल भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसे मरम्मत कार्य करवाया गया है लेकिन वह भी उसमे कोई पेंट पोलिश नही कराया गया. कुलमिलाकर सम्पूर्ण अस्पताल भवन देखकर इसका कतई अंदाजा नही लगाया जा सकता की यह अस्पताल ही है. ऐसा प्रतीत होता है जैसे 19 वीं सताब्दी के भुतहे किसी खंडहर में घुस चुके हैं जिंसमे से फिल्मी स्टाइल में मृत आत्माओं की आवाज़ जैसे महसूस होता है.
बहुत बड़ा दुर्भाग्य है की 35 लाख रुपये आने के बाद भी आज अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग गंगेव अस्पताल को ठीक नही करवा पाया इससे बड़े दुख की बात और क्या हो सकती है जहां पर मरीजों का इलाज करके उन्हें स्वास्थ्य लाभ देकर वापस घर भेजा जाता है आज वही गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वयं ही बीमार पड़ा है जो अपने स्वयं के लिए किसी उचित शासन प्रशासन रूपी डॉक्टर की तलास में है की कहीं से कोई तो ध्यान दे दे जिसमे यह गंगेव का बीमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुरुस्त हो जाए.
बीएमओ पांडेय ने बताया ठेकेदार उठा ले गया पुरानी टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल
गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत ब्लॉक मेडिकल अफसर श्री देवव्रत पांडेय ने आगे जानकारी दी की पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिस हिनौती पंचायत के ठेकेदार को मरम्मत का कार्य दिया गया था उसने हद ही कर दी. स्वास्थ्य केंद्र में पुराने लगाए हुए टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल को भी ठेकेदार ट्रेक्टर में भरकर लेजाकर बेंच लिया. एक बार की इसी प्रकार की घटना स्वयं बीएमओ श्री पांडेय के आंख के सामने घटित हुई जिस पर श्री पांडेय ने बताया की उन्होंने ठेकेदार को सख्त हिदायत दी की यदि एक भी पत्थर यहां से उठाया तो सीधे एफआईआर दर्ज करवा दूंगा. यहां तक की बीएमओ ने लिखित रूप से शिकायत भी ठेकेदार के खिलाफ कर दिया था लेकिन बाद में जब ठेकेदार कुछ सामग्री वापस कर दिया तो मामला जाकर शांत हुआ और फिर ठेकेदार काम छोड़कर चला गया.
इस प्रकार बीएमओ के खुलासे से एक बात तो समझ आती है की निश्चित रूप से कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग, ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी विभाग में तालमेल न बैठ पाने की वजह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भारी दुर्दशा हो चुकी है जिस पर तत्काल एक्शन लिया जाना अनिवार्य है अन्यथा ब्लॉक में एकलौते गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीमार बने रहने से यहां के लोगों को रीवा इलाहाबाद भागने के अतिरिक्त और प्राइवेट झोलाछाप डॉक्टरों को अच्छी मोटी रकम खिलाने के अलावा कोई दूसरा तरीका शेष नही बचेगा क्योंकि बदलते पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण के चलते विभिन्न प्रकार की साध्य अथवा असाध्य बीमारियों को फैलने से कोई रोंक न पायेगा और ऐसे में बीमार व्यक्ति डॉक्टरों की तरफ ही दौड़ेगा चाहे वह झोलाछाप हों अथवा सरकारी डिग्री धारक.
संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें किस तरह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है जिंसमे मॉनव नही कुत्ते बिल्लियां रहते हैं. उखड़ी टाइल्स, टूटी छतें, उखड़ी फर्स गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली की दुर्दशा की बखान कर रही हैं.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139
Monday, August 27, 2018
कीचड़ से भरी सड़क में पैदल चलना मुश्किल (ज़िला रीवा, गंगेव जनपद अन्तर्गत हिनौती पंचायत की बड़ोखर ग्राम की सड़क की तस्वीर संलग्न) मानवाधिकार का हो रहा हनन
प्रति,
श्रीमान अध्यक्ष महोदय,
मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल,
अरेरा हिल्स, पर्यावास भवन, भोपाल. मप्र
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महोदय,
कृपया विषयान्तर्गत मामले पर संज्ञान लेने का कष्ट करें.
ज़िला रीवा मप्र के जनपद पंचायत गंगेव अन्तर्गत हिनौती ग्राम पंचायत के बड़ोखर नामक ग्राम की बदहाल सड़क की तस्वीर संलग्न है. थोड़े से ही बारिश में लगभग एक किमी लंबाई की इस सड़क पर इतना अधिक कीचड़ भर जाता है की इस पर पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है.
बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए भीषण संकट उत्पन्न हो गया है. यहां पर एम्बुलेंस तो सपनो में भी नही आ सकती क्योंकि पहले इसमे पैदल तक कोई चलकर बताए. हमारा लोकतंन्त्र और वर्तमान मप्र सरकार इसके लिए बंधाई की पात्र है.
अब मात्र आपसे ही उम्मीद बची हुई है की जितना जल्दी संभव हो कृपया इस ग्राम क्षेत्र और आसपास के लोगों के मानवाधिकार का संरक्षण करने का कष्ट करें. कृपया अपने संज्ञान में लेकर इस सड़क को चलने योग्य बनवाने का कष्ट करें. इसके लिए मप्र सरकार के साथ ज़िला प्रशासन और सीईओ जनपद और ज़िला पंचायत सीधे जिम्मेदार हैं. ऐसे अक्षम, अप्रतिस्पर्धी, और अयोग्य अधिकारियों को इनके पदों पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नही है. इन्हें अपने पद छोड़ देने चाहिए. जनता के टैक्स का पैसा खाकर भी इनके जमीर नही जाग रहे. कोई सुपरवाईज़िंग नही कोई निगरानी नही. आम जनता के शिकायतों का भी कोई असर नही. ऐसे विभागों पर कृपया दंडात्मक कार्यवाही की अनुशंसा करने का भी कष्ट करें.
कृपया मानवाधिकार के संरक्षण में आगे आएं और आम जनता के सड़क पर चलने के मानवाधिकार को संरक्षित करने का कष्ट करें.
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संलग्न - कृपया रीवा ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत आने वाली हिनौती पंचायत के बड़ोखर ग्राम की बदहाल सड़क की फ़ोटो देखने का कष्ट करें.
आमजन के मानवाधिकार के संरक्षण के लिए सदैव तत्पर मानवाधिकार कार्यकर्ता,
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़, ज़िला रीवा, मप्र
मोबाइल 9589152587, 7869992139
शैक्षणिक योग्यता - एमएससी मैथमेटिक्स - आई आई टी मुम्बई,
विदेशी शिक्षा (रिसर्च एवं टी ए) - वर्ष 2006 से 2012 तक जर्मनी, इटली, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल.
Thursday, July 12, 2018
क्योटी-कलवारी मार्ग की शुरू हुई शोल्डरिंग, सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाया गया था मामला (ज़िला रीवा के क्योटी से कलवारी एमपीआरडीसी सड़क का जिसे 2 वर्ष पहले बनाया गया था, किनारों से उखड़ रही है रोड, विभाग द्वारा की जा रही थी देरी)
दिनांक 13 जुलाई 2018, स्थान - भठवा/लालगांव रीवा मप्र
(कैथा से शिवानन्द द्विवेदी)
मीडिया और सोशल वर्क का ही प्रभाव है की जिन छोटी छोटी बातों को समाज और प्रशासन कभी ध्यान नही देता उन बातों को मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता बड़े ही गहराई से पकड़ लेते हैं. नतीज़ा यह होता है कि जिन कार्यों को समाज असंभव समझता है वह जनहित के कार्य होने लगते हैं.
समस्या सरकार अथवा प्रशासन की कम कही जा सकती है, समस्या है समाज की. समाज आज इतना नकारात्मक हो चुका है की हर व्यक्ति मात्र अपने व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक हित के आगे सोच ही नही पा रहा है. लेकिन जब भी लीक से हटकर सामाजिक मुद्दों पर बात उठाई जाती है तो सरकार प्रशासन को सुनना ही पड़ता है.
आवश्यकता है जनहित के मुद्दों को उठाने की और लगे रहने की. हाँ संभव है की एक या दो बार मुद्दे रखने से शायद समस्या का समाधान न हो लेकिन समाज को जनहित के कार्यों में लगे रहने की आवश्यकता है सुनवाई जरूर होती है. 100 प्रतिशत न सही पर 75 प्रतिशत तो काम होगा ही.
क्योटी से कलवारी मार्ग की दुर्दशा का उठा था मुद्दा
अभी पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ज़िले एवं प्रदेश की मीडिया के सहयोग से जनहित का विशेष मुद्दा उठाया गया था जिंसमे क्योटी से कलवारी मार्ग पर हो रही ताबड़तोड़ ओवरलोडिंग वाहनों के यातायात की बात रखी गई थी जो बनकुइयाँ, सतना, मैहर, सेमरिया से होते हुए टोल टैक्स बचाने के उद्देश्य से क्योटी कलवारी मार्ग की तेरही करने में तुले थे. जिसकी वजह से यह मार्ग बुरी तरह से टूट रहा था. पिछले 2 वर्ष से मरम्मत कार्य न किये जाने के कारण मार्ग के साइड में शोल्डरिंग टूट रही थी, मोरम हट रही थी जिससे काफी मजबूत मार्ग भी समय से पहले ही टूटने लगा था. इस बात को जब रीवा संभाग एवं प्रदेश से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों सहित अन्य फेसबुक, ट्विटर, ईमेल आदि के माध्यम से संबंधितों के पास तक पहुचाया गया तो इस पर कार्यवाही होने लगी. परंतु कार्यवाही उपयुक्त तरीके से नही हो रही थी जिसके कारण भोपाल मप्र के एमपीआरडीसी विभाग के उच्चधिकारियों को सूचित किया गया उनसे ईमेल, मोबाइल व्हाट्सएप्प में कंप्लेंट की गई जिस पर कार्यवाही का आश्वाशन मिला. जिसके परिणाम स्वरूप अब जाकर जुलाई में थोड़ा बहुत कार्य प्रारम्भ हुआ है जिंसमे हिनौती के पास कुछ शोल्डरिंग कार्य का होना पाया गया है जिंसमे ग्रेडर की मदद से आसपास ही किनारों पर उपस्थित मोरम और जीएसबी को शोल्डर में डाला जा रहा है.
पर्याप्त नही है कार्य, जिम्मेदारी पूर्वक करने की है जरूरत
अभी जो कार्य होना पाया गया है वह पर्याप्त नही कहा जा सकता है क्योंकि ग्रेडर के माध्यम से वहीं आसपास किनारों की मोरम और जीएसबी को ही शोल्डर में डाला जा रहा है जिसके कारण साइड में उतार जैसी स्थिति निर्मित होने से किनारों पर वाहनों का ज्यादा झुकाव होने से एक्सीडेंट की संभावना बढ़ सकती है.
गारंटी पीरियड में दिलीप बिल्डकॉन को अलग से जीएसबी डालने की है जरूरत
चूंकि पूरा सड़क का कार्य अभी भी गारंटी पीरियड में है अतः सड़क निर्माता कंपनी दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को चाहिए पूरी सड़क की नए सिरे से मरम्मत करे और शोल्डर में बाहर से लाकर जीएसबी गिट्टी आदि डाली जाए और उसको लोडर और ग्रेडर चलाकर कायदे से बैठाया जाना चाहिए जिससे एक बार पुनः शोल्डर कुछ 2 से 3 साल के लिए मजबूत हो जाए.
संलग्न - क्योटी कलवारी मार्ग में हिनौती के पास किया जा रहा शोल्डरिंग के कार्य का दृश्य जिंसमे थोड़ा बहुत कार्य किया गया है, सड़क का तरीके से मरम्मत और शोल्डरिंग कार्य किया जाना चाहिए.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक केवाम मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587
Friday, June 15, 2018
रीवा से आये वेटेरिनरी सर्जन श्री त्रिपाठी ने घायल गाय का किया प्लास्टर (मामला ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत आने वाले कठमना ग्राम का जहां पिछले दिनों आगे पैर से टूटी लावारिश गाय मिली थी जिसके इलाज के प्रयाश किये जा रहे हैं)
दिनांक 15 जून 2018, स्थान - गढ़/लालगांव, रीवा मप्र
(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)
पिछले दिनों ज़िले के गढ़ थाना एवं सिरमौर तहसील अंतर्गत आने वाले कठमना ग्राम में एक घायल गाय लावारिश अवस्था में अधिवक्ता वंशगोपाल सिंह को मिली थी जिसके इलाज के लिए सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधित लालगांव पशु चिकित्सालय एवं हिनौती पशु औषधालय सहित गंगेव एवं रीवा के पशु चिकित्सा अधिकारियों को सूचित किया गया था साथ ही पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में भी समस्या को रखा गया था जिस पर दिनांक 15 जून को शाम 5 बजे रीवा से वेटेरिनरी सर्जन श्री त्रिपाठी की टीम घटनास्थल पर पहुची और ग्रामीणजनों की मदद से गाय के अगले चोट वाले पैर की सर्जरी किया गया.
कठमना निवासी वंशगोपाल सिंह एवं विजय सिंह सहित अन्य ग्रामीणजनों के सहयोग से गाय की सर्जरी की गई.
इस बीच वेटेरिनरी सर्जन डॉक्टर त्रिपाठी के साथ हिनौती वेटेरिनरी सहायक समयलाल साहू भी उपस्थित रहे.
डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया की गाय को पूरी तरह से स्वस्थ्य होने में अभी भी 3 सप्ताह से अधिक का समय लग सकता है. इस बीच श्री त्रिपाठी ने बताया की गाय को बांधकर रखा जाए और चलने न दिया जाए जिससे घाव जल्दी भर जाएगा. डॉक्टर त्रिपाठी ने बताया की आवश्यकता पड़ी तो वह पुनः विजिट करेंगे. वहरहाल उन्होंने लालगांव पशु चिकित्सक रामानुज कोल एवं हिनौती वेटेरिनरी सहायक समयलाल साहू को गाय के मलहम पट्टी का जिम्मा दिया है और कहा है की नियमित रूप से गाय की मलहम पट्टी करें. यह जानकारी डॉक्टर त्रिपाठी एवं बंशगोपाल सिंह ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को व्हाट्सएप्प एवं मोबाइल फ़ोन के माध्यम से बतायी.
संलग्न - संलग्न फ़ोटो में देखें रीवा से आये डॉक्टर त्रिपाठी एवं उनके सहयोगी कठमना में घायल गाय की सर्जरी करते हुए.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
रीवा मप्र, 07869992139, 09589152587
Thursday, January 25, 2018
Rewa, MP - ज़िले में मनगवां तहसील के इटहा हल्का 2, सिरमौर के हिनौती हल्का 39 एवं त्योंथर के जमुई हल्का 31 एवं अन्य पास के हल्कों के लिए एवं सैकड़ों ग्रामों के लिए नहर 2020 तक
दिनांक 25 जनवरी 2018, स्थान रीवा मप्र।
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
ज़िले के वंचित किसानों के लिए अब खुसी की बात है कि उनके भी खेतों में नहर का पानी जल्दी ही आएगा।
अधीक्षण यंत्री बाणसागर नहर मंडल रीवा संभाग के पत्र क्रमांक 495 दिनांक 25 जनवरी 2018 के द्वारा सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता को भेजे गए ईमेल के द्वारा सूचित किया गया कि जल संसाधन विभाग के पूर्व के पत्र क्रमांक पृ क्र. 7493/एल सी सी /430/2016-17 दिनांक 09/12/2016 में मनगवां तहसील से हल्का इटहा 2, त्योंथर तहसील के जमुई हल्का 31 एवं सिरमौर तहसील के हिनौती हल्का 39 एवं आसपास के अन्य कई हल्कों सहित सैकड़ों ग्रामों के लिए नहर के पानी लाये जाने का प्रावधान है जिसके लिए एजेंसी चिन्हित कर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस विषय मे सूचनार्थ प्रपत्र यहां पर संलग्न है।
- शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139
Friday, July 15, 2016
(रीवा/भोपाल) PMO - प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम PG Portal में सहकारिता विभाग, खाद्य विभाग रीवा के सन्दर्भ में दर्ज प्रकरण
रीवा जिले के सहकारिता विभाग के फर्जीवाड़े के विषय में पीएमओ PG Portal में दर्ज प्रकरण की कॉपी निचे दी जा रही है. इसमें सहकारिता विभाग से सम्बंधित समितियों, बैंकों की ऑडिट रिपोर्ट, समितियों में खाद बीज वितरण सम्बन्धी समस्याएं, सरकारी रासन की दुकानों में समस्याओं, के.सी.सी., फसल बीमा की राशि की जानकारी साझा करने आदि सम्बन्धी प्रकरण रखे गए हैं.
कृपया जानकारी नीचे देखें, अभी सी पर भी कोई जानकारी स्पष्ट नहीं हो पाई है...(शिवानन्द द्विवेदी)
| : | PMOPG/E/2016/0190612 | |
| Name Of Complainant | : | Shivanand Dwivedi |
| Date of Receipt | : | 03 Jun 2016 |
| Received by | : | Prime Ministers Office |
| Forwarded to | : | MULTI |
| Officer name | : | MULTI |
| Officer Designation | : | MULTI |
| Contact Address | : | MULTI |
| MULTI | ||
| 700053 | ||
| Contact Number | : | 24003925 |
| Grievance Description | : | Dated: 03/06/2016, REWA (MP). --------------------------------- To, The Prime Minister of India, Govt of India. New Delhi. India. ------------------------------- Subject – Regarding Audit Reports of All societies in REWA district. We demand to Comptroller and Auditor General (CAG) Audit report of all cooperative societies of Rewa district of Madhya Pradesh among other points given below. Huge corruptions are recorded in cooperative societies in Rewa. Sir/Madam, Please see the following points and arrange fast enquiry team to investigate all cooperative societies working in Rewa MP. 1) AUDIT REPORTS of all cooperative societies working under District Cooperative Bank Ltd REWA (Zila Sahakari Bank Maryadit Rewa) should be investigated properly. Chartered accountant usually makes the Audit report but the actual audits are NOT done in register and in written record. These problems could be seen in more than 75%of the cooperative societies in Rewa. Please set a proper enquiry team to investigate the actual audit register and actual audit reports of each financial year in all cooperative societies affiliated under District Cooperative Bank Ltd REWA MP. 2) WHAT is the borrowing limit of all Kisan Credit Card (KCC) Holders? How much amount one can take in his KCC? 3) CROP COMPENSATION and CROP INSURANCE- Why the lists of Crop insurance of all beneficiaries are not displayed in notice board in all concerned societies? Many farmers do not know what the crop insurance is and how it works. The reason behind this is that the society manager of the related cooperative banks does not reveal this information to the farmers. Crop insurance related information are kept in dark by the society manager and cooperative banks. 4) Many times a one acre farmer gets 1 lakh and 10 acre farmers also gets 1 lakhs in his KCC. This difference is not clear that why the society does that. Society manager’s role is biased. All KCC in Rewa division need to be verified and rechecked and all the borrowing limits of the KCC holders must be reviewed timely. The rules and laws should be equal for every caste and creeds. Law can’t distinguish between caste and religion or rich and poor. Under Java tehsil in Panwar society, the frauds had been reported earlier. However, so far no concrete action has been taken. Dabhaura society case is another example of fraudulent act inside the society system. We would ask to the Govt that why similar investigation are not conducted in other societies? Its complete lack of transparency in the societies and in cooperative banks. 5) DROUGHT SEASON 2015-16: during the year 2015-16 severe drought affected to the state’s farmer. Their productivity affected severely and they lost all they had in their home. There were drought compensation by the Govt of India and Govt of MP. Many farmers listed in the drought compensation. Firstly this drought compensation was to be given by the Tehsil level but when Tehsils failed to do the same compensation distribution was given in hands of cooperative societies. Its reaching about one year now and entire compensation has not been yet distributed to the beneficiaries. Why nearing about one year the crop drought compensation of the damaged crops has not yet been distributed? 6) KHAAD (Fertilizers) BEEJ (seeds) weight is lesser than the Prescribed: - The weight of the KHAAD (fertilizers) and BEEJ (Seeds) are usually five to ten kilogram lesser in weight when it is picked up from the society shops. One case of such was reported in Hinauti Society where Mr. Rajendra Singh is the society manager. ATTACHMENT - Please find the attached PDF file for detailed information of the cooperative societies malfunctioning in REWA district of Madhya Pradesh. ----------------- Sincerely SHIVANAND DWIVEDI (Social, Scientific, and RTI activist) Village KAITHA, Post AMILIYA, Police Station GARH, Tehsil MANGAWAN, District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117 Mob. +917869992139 |
| Date of Action | : | 20 Jun 2016 |
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Shivanand Dwivedi
(Social, Scientific, Environmental and RTI activists)
National Coordinator – Shrimad Bhagavad Katha Dharmarth Samiti
(an NGO). Work also as Human Rights Activist, Freelance
Reporter, Environmental and Animal Rights Activists.
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Educational Qualifications - M.Sc in Mathematics (IIT
Bombay), PhD Research & TA (Mathematics) – 1. TU-Darmstadt GERMANY, 2.
Ulm University GERMANY, 3. Milan University ITALY. Research visits in FRANCE,
SPAIN, and PORTUGAL.
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