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Saturday, December 14, 2019

मुझसे मिलिए मैं हूँ टिकुरी-खरहना पीडब्ल्यूडी सड़क (मामला जिले की बहुचर्चित दो जनपदों के बीच फंसी टिकुरी 37 नईगढ़ी एवं खरहना गंगेव ब्लॉक पीडब्ल्यूडी सड़क का, डेढ़ करोड़ के आसपास राशि स्वीकृत होने के बाद भी नही हुआ कोई निर्माण कार्य, पीडब्ल्यूडी विभाग एकबार पुनः कटघरे में)

दिनांक 14 दिसंबर 2019, स्थान गंगेव/नईगढ़ी, रीवा MP
   आज स्वतंत्रता प्राप्ति के समय से लेकर सात दशक बीत जाएं और आपके गांव में चलने लायक सड़क न हो तो आप इसे क्या कहेंगे? विकास कहेंगे, लोकतंत्र कहेंगे या कुछ और? जी हां कुछ ऐसा ही हाल है नईगढ़ी ब्लॉक में टिकुरी 37 में प्रणामी मंदिर ट्रस्ट के पास से होते हुए सथनी प्रधानमंत्री सड़क की तरफ न मुड़कर वहां से बाएं हाँथ मुड़ने पर आपको टिकुरी नंबर 37 की ग्राम बस्तियों जिनमे से कुसवाहा बस्ती, दुबे बस्ती, यादव बस्ती, कंहार बस्ती, गौतमान बस्ती, यादव बस्ती, प्राथमिक पाठशाला कहरान टोला (टिकुरी नंबर 37) से होते हुए पकड़ियार नदी, बाणसागर नहर पुल से होते हुए खरहना ग्राम के पहले पुल क्रासिंग से होते हुए पुनः बाणसागर के पास खरहना में रामनिहोर गौतम, रामसजीवन गौतम के घर से होते हुए श्यामलाल जगदीश, तीर्थ प्रसाद, सच्चीदानंद पांडेय, रमेश गौतम से होते हुए प्राथमिक एवं माध्यमिक पाठशाला ग्राम खरहना (मढ़ी खुर्द पंचायत) से होते हुए झिरिया नाला, हरिजन बस्ती से आते हुए दिवाकर सिंह ग्राम नीबी तहसील नईगढ़ी की पट्टे की लगभग 650 मीटर की अराजी जिसमे मेढ़ से होकर रास्ता गुजरता है इस प्रकार लगभग 7.2 किमी लंबा यह मार्ग है जिसमे दिवाकर सिंह की जामीन मेढ़ को छोंड़कर सब शासकीय है और वर्ष 2008 से पीडब्ल्यूडी के शिकंजे में है जिसके निर्माण बाबत करोड़ों रुपये निकल भी चुके हैं लेकिन अब तक इस रास्ते का कोई विधिवत जीएसबी और डामर डालकर निर्माण नही कराया गया है.
 क्या कहना है ग्रामवासियों का 
    जब इस विषय में ग्रामवासियों से संपर्क किया गया और उनसे कीचड़ से सनी हुई सड़क के विषय में जायज़ा लिया गया तो यह कहना था ग्रामीणों का-
  1-”आज जब से हमारा जन्म हुआ है हमारे ग्राम में पक्की सड़क नसीब नही हुई है. हमारा पूरा जीवन इसी कीचड़ में सनते हुए निकल रहा है. पता नही टिकुरी नंबर 37 से लेकर खरहना तक की यह सड़क कब तक बनेगी.”- ददन कुसवाहा, कुसवाहा बस्ती टिकुरी नं 37 नईगढ़ी.
  2-”मैं पेशे से लाइनमैन हूँ. चाहे बरसात के 4 महीने हों अथवा बीच में असमय बारिश यहां टिकुरी नंबर 37 से लेकर खरहना और उधर प्रणामी मंदिर तक घर से निकलना दूभर हो जाता है. पूरी पगडंडी कीचड़ से सराबोर हो जाती है. यदि कोई बीमार हो जाए अथवा कोई डिलीवरी केस आ जाए तो सिर पर उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है.”- अमृतलाल दुबे, दुबे बस्ती टिकुरी नंबर 37 नईगढ़ी.
 3-”हमारा जॉब सहकारी बैंक में है और हमे कार्य के सिलसिले में हर मौसम में आना जाना पड़ता है. शुबह 9 बजे खरहना से निकलते हैं और शाम को 7 या 8 बजे आते हैं. अब गौर करिए की बरसात के चार महीनों में हमारी सबकी क्या दुर्दशा होती होगी. हम कीचड़ में सनकर बाहर निकलते हैं. यह हालात बचपन से है. लगभग साढ़े सात किमी सड़क निर्माण का जिम्मा पीडब्ल्यूडी को वर्ष 2008 में मिला था लेकिन इस सड़क पर एक मुठ्ठी गिट्टी तक नही पड़ी है. पता नही करोड़ों रुपये कहां चले गए.’ -गौतम जी, ग्राम खरहना ब्लॉक गंगेव.
4-”हम अब उम्मीद छोड़ चुके हैं की इस रोड को कोई बनाएगा. कई बार सीएम हेल्पलाइन में लोगों द्वारा शिकायत भी की गयी है लेकिन पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा भ्रामक और गलत निराकरण करके छोड़ दिया जाता है. सीएम हेल्पलाइन से ही पता चला था की इस सड़क का टेंडर और राशि 2008 में स्वीकृत की गई थी लेकिन साढ़े सात किमी के आसपास सड़क पर कोई कार्य नही हुआ और करोड़ों के प्रोजेक्ट का क्या हुआ आपके सामने है. हम आज भी कीचड़ पर चलने को मजबूर हैं.”- राघव शरण गौतम, भूतपूर्व सरपंच.
5-”हमारी यही माग है की सरकार हमारी टिकुरी 37 से लेकर खरहना तक की सड़क को जल्दी बनवाये जिससे हमे राहत मिल सके. हमारे छोटे छोटे बच्चे कीचड़ में सनकर स्कूल जाते हैं. एम्बुलेंस और जननी की गाड़ियां यहां घुस नही सकतीं. कोई बीमार हो जाए तो सिर में उठाकर अस्पताल ले जाना पड़ता है. यह सब अच्छा नही है. हमे तो अब लगता है जैसे शासन प्रशासन सब मर चुके हैं कोई देखने सुनने वाला नही है. हमारी समस्या का कोई तो समाधान करवा दे. हमे पक्की सड़क बनवा दे.”- शिवबालक यादव, टिकुरी 37.
  सीएम हेल्पलाइन में ऐसे शुरू हुआ खोज का सिलसिला 
   चूंकि टिकुरी 37 ग्राम पंचायत नईगढ़ी ब्लॉक में आती है और खरहना ग्राम गंगेव ब्लॉक में आता है इसलिए यह किसी को पता नही चल रहा था की आखिर इस सड़क को बना कौन रहा है और अंतरब्लोकीय सड़क का जिम्मेदार है कौन. इस बाबत एक शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दिनांक 22/05/2019 को खरहना पंचायत मढ़ी खुर्द निवासी प्रमोद गौतम द्वारा क्रमांक 8387450 से दर्ज कराई गई. इस शिकायत में सभी बातों को स्पष्टतः रखा गया लेकिन सड़क कौन बना रहा था इसकी जानकारी किसी को नही थी. 
   सीएम हेल्पलाइन में चालू हुआ स्थानांतरण का खेल
     इस शिकायत क्रमांक 8387450 को दर्ज होने के बाद पहले इसे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को भेजा गया. वहां से जबाब आया की यह सड़क आरईएस द्वारा नही बनाई जा रही है. अतः यह दूसरे विभाग को भेजी जाए. इसके बाद शिकायत को पीएम सड़क विभाग को भेजा गया जिसमे इसे बताया गया की पीएमजीएसवाई यूनिट 2 मऊगंज द्वारा बनाई जा रही होगी अतः वहां स्थानांतरित किया जाय. वहां से भी जबाब मिला की यह सड़क पीएमजीएसवाई द्वारा नही बनायी जा रही है.
  इस प्रकार यह शिकायत के स्थानांतरण का खेल पूरे 27 नवंबर तक अर्थात 6 माह तक चलता रहा लेकिन यह पता नही कर पाया प्रशासन की आखिर इस सड़क का मालिक कौन था जो अपने आप में सीएम हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली को दर्शाता है.
  27 मई को पीडब्ल्यूडी का आया जबाब
   अंततः पूरे 6 माह अंदर ही अंदर विभागीय चक्कर लगाने के बाद पीडब्ल्यूडी को जब शिकायत पहुची तो उनका जबाब आया जो अक्षरसः नीचे है - “ कार्यपालन यंत्री से प्राप्त जानकारी अनुसार शिकायतकर्ता से दिनांक 28.11.2019 को दोपहर 1.10 बजे दूरभाष पर संपर्क किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा वर्णित गंगेव टिकुरी मार्ग लंबाई 7.20 किमी. लागत 136.85 लाख की स्वीकृति प्रमुख अभियन्ता लो.नि.वि. भोपाल के पत्र क्रमांक 1454-55/842/19/यो./2008 भोपाल दिनांक 06.3.2008 के द्वारा नावार्ड योजना के तहत प्राप्त हुई थी। उपरोक्त मार्ग में 650 मीटर पर निजी आराजी होने तथा भू-अर्जन की स्वीकृति न होने के कारण एवं मान्नीय न्यायालय द्वारा स्टे दिये जाने से 650 मीटर में तत्कालीन मार्ग निर्माण नहीं हो सका था। वर्तमान में अब शिकायतकर्ता के द्वारा मार्ग निर्माण की मांग की जा रही है। वर्तमान में उक्त मार्ग निर्माण की कोई स्वीकृति विभाग को प्राप्त नहीं है। मार्ग निर्माण की स्वीकृति शासन स्तर से संबंधित है। शिकायतकर्ता को जानकारी दे दी गई है। अतः शिकायत विलोपन योग्य है।
एक करोड़ 36 लाख 85 हज़ार कहाँ गए?
   जिस प्रकार से उपरोक्त शिकायत में देखा जा सकता है की पीडब्ल्यूडी के कर्यपालन यंत्री द्वारा निराकरण में यह स्वीकार किया गया की 1 करोड़ 36 लाख और 85 हज़ार रुपये की स्वीकृत हुई थी लेकिन विवादित 650 मीटर दिवाकर सिंह ग्राम नीबी की जमीन का भूअर्जन न हो पाने के चलते सड़क निर्माण पूरा नही हो पाया.
    यह बात तो ठीक है की 650 मीटर भूमि का भूअर्जन नही हो पाया पर क्या प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग यह बताएगा की 7 किमी और 200 मीटर स्वीकृत मार्ग में से यदि 650 मीटर विवादित मार्ग को हटा दिया जाए तो शेष उसका निर्माण क्यों नही किया गया? और मात्र इस सड़क के कुछ ही भाग में मात्र कुछ गिट्टी मोरम डालकर ही क्यों पीडब्ल्यूडी विभाग फुरसत हो गया।
  सच्चाई यह की पीडब्ल्यूडी विभाग सब खा गए
     खरहना और टिकुरी 37 ग्राम के ग्रामीण बताते हैं की सच्चाई यह है की यह राशि 2008 में मप्र शासन द्वारा स्वीकृत हुई थी जिसमे विवादित 650 मीटर के अतिरिक्त पीडब्ल्यूडी विभाग ने सड़क बनी हुई है इस प्रकार दर्शा कर अन्य सड़कों की भांति पूरी राशि हजम कर ली. और शायद यह भी जानकारी नही मिलती पर चूंकि ग्रामीण निरंतर परेशान होते रहे और आवाजें उठाई, सरकार भी इस बीच बदल गयी तो पीडब्ल्यूडी विभाग को जबाब देना पड़ा.
    अब ग्रामीण चाहते हैं की पीडब्ल्यूडी बताये की आखिर 1 करोड़ 36 लाख और 85 हज़ार की स्वीकृत राशि आखिर गई तो गई कहाँ?
   सड़क की जांच नही हुई तो ग्रामीण बैठेंगे आमरण अनशन पर, करेंगे कलेक्टर बंगले का घेराव
    इस बीच दोनो ब्लॉकों गंगेव एवं जुड़े हुए नईगढ़ी ब्लॉक से मढ़ी खुर्द स्थित खरहना और टिकुरी 37 नईगढ़ी के ग्रामीणों ददन कुसवाहा, प्रमोद गौतम , अमृतलाल दुबे, शिवबालक यादव, लोकनाथ गौतम, भूतपूर्व सरपंच राघवशरण गौतम, रामनिहोर गौतम, तीरथ प्रसाद गौतम, सच्चीदानंद, जगदीश, रमेश गौतम आदि ने बताया की यदि इस सड़क घोटाले की विधिवत कमेटी बनाकर जांच कर पीडब्ल्यूडी से जुड़े भ्रष्टाचारी अधिकारियों और इंजीनियर के ऊपर रिकवरी की कार्यवाही नही होती तो सभी ग्रामीण कलेक्टर के बंगले का घेराव करेंगे और वहीं पर आमरण अनशन करेंगे।
   सड़क है समाज का मानवाधिकार
   वास्तव में यूएनएचआरसी, एनएचआरसी, एमपीएचआरसी के परिपेक्ष्य में देखा जाय तो बिजली पानी सड़क स्वास्थ्य और शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक देश की सिविल सोसाइटी की जनता के मूलभूत मानव अधिकारों में से एक हैं. अतः इन मानवाधिकारों की सुरक्षा करना किसी भी देश और प्रदेश की लोकतांत्रिक चुनी हुई सरकार का संवैधानिक दायित्व है।
   आज भारत और इसके विभिन्न राज्यों में जिस प्रकार से आम और ग्रामीण जनता को इन सभी मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित किया जा रहा है यह काफी विचारणीय मुद्दा है जिसे हरहाल में शासन सत्ता पर बैठी सरकारों को देखना पड़ेगा. आखिर उस माँ का क्या दोष जिसे बरसात में डिलीवरी हो जाए, कैसे जाएगी वह अस्पताल? आखिर उन बुजुर्गों का क्या दोष जिन्हें बरसात के समय बीमार होने पर एम्बुलेंस गांव तक नही पहुच सकती? आखिर उन स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों का क्या दोष जो कीचड़ में सनकर स्कूल जाते हैं?
  आखिर आज 21 वीं सदी में जब की मॉनव चंद्रमा और मंगल एवं अंतरिक्ष में घर बनाने, पानी खोजने, रास्ता बनाने की सोच रहा है ऐसे में क्या इस धरती में इन मूलभूत मानवाधिकारों के लिए कोई जगह नही है? इससे बेहतर तो कह सकते हैं की स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व की स्थिति रही होगी जब जगह जगह ट्रांसपोर्टेशन के लिए रेल की पटरियों का ईजाद कर लिया गया था. आखिर स्वतंत्रता प्राप्ति के 7 दशकों के बाद भी यदि आमजन और ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की चलने योग्य सड़कें न बन पाएं तो भला इस लोकतंत्र के लिए उससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
   उम्मीद है शासन प्रशासन जल्द ही पक्की सड़क बनवायेगा
    यद्यपि मायूसी और लाचारी के बीच अभी भी खरहना और टिकुरी 37 के ग्रामीणों का मन टूटा नही है और उन्हें उम्मीद है की सरकार बदलने के साथ ही मप्र में शायद सड़क बनाने की प्रक्रिया में तेजी आये और उनके ग्राम में भी पक्की सड़क बन पाए. लोगों का मानना है की ग्रामीणों ने दिवाकर सिंह निवासी नीबी से भी निवेदन किया है और वह भी अब चाहते हैं की जो 650 मीटर रुकी हुई सड़क का भूअर्जन नही हुआ है वह अब हो जाए क्योंकि दिवाकर सिंह के परिवार के सदस्यों से बात करने पर यह पता चला की यह रास्ता दसकों से चल रहा है और इस सड़क के अधूरे पड़े रहने से उनकी फसल का भी नुकसान हो रहा है जिससे अब वह भी चाहते हैं की यह छूटी हुई 650 मीटर जमीन का भूअर्जन होकर पक्की सड़क बन जाए जिससे वह भी अपनी जमीन का सदुपयोग कर पाएं. क्योंकि कहीं न कहीं पक्की सड़क से जुड़ने के बाद उसी जमीन की कीमत भी कई गुना बढ़ जाती है.
  संलग्न - दिनांक 14 दिसंबर 2019 दिन शनिवार की स्थिति में ओला और बारिश होने के बाद सड़क की कीचड़ से सनी हुई स्थिति.
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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587





Sunday, September 9, 2018

गंगेव अस्पताल भवन की हालात जर्जर, कभी भी हो सकता है धराशायी, मरीजों के जीवन को उत्पन्न हुआ संकट (मामला रीवा ज़िले के गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जिंसमे 5 साल पूर्व आई 35 लाख के लगभग राशि मरम्मत में नही हो पायी उपयोग, ठेकेदार का पता नही, पीडब्ल्यूडी ने छोड़ा बीच मझधार में)

दिनांक 09 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति निरंतर दयनीय बनी हुई है. गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की मरम्मत के लिए आई 35 लाख रुपये के आसपास की राशि आज तक उपयोग नही हो पायी है. गंगेव अस्पताल की संलग्न तस्वीर से स्पष्ट है की यहां मॉनव का नही बल्कि कुत्ते बिल्लियों का राज है और संभवतः पशुओं के लिए ही यह अस्पताल है. गंगेव अस्पताल की अंदरूनी स्थिति देखकर विश्वास ही नही होता की यह मानवों के लिए बनाया गया अस्पताल है की जानवरों के लिए. शायद आज वेटेरिनरी औषधालय की गई गुजरी बिल्डिंग भी इतनी जर्जर और घटिया स्थिति में नही होगी जितनी की गंगेव का मानवों के लिए बनाया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है.

बीएमओ ने बताया राशि सैंक्शन के वावजूद भी निर्माण नही हुआ

  गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक लंबे अरसे के पदस्थ खंड चिकित्सा अधिकारी श्री देवव्रत पांडेय ने बताया की पिछले पांच वर्ष पूर्व ही 35 लाख के आसपास की भारी भरकम राशि मात्र गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रखरखाव और मेंटेनेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग भोपाल द्वारा दी गई थी जिस पर टेंडर प्रक्रिया के तहत पीडब्ल्यूडी एवं ठेकेदार द्वारा कुछ कार्य भी 2 वर्ष पहले प्रारम्भ हुआ लेकिन फिर उस कार्य का जो हाल है वह सामने है. ठेकेदार ने कुछ समय बाद काम छोड़ दिया और अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदार ठहराया वहीं दूसरी तरफ जब बीएमओ एवं अस्पताल प्रबंधन से बात हुई तो उनके द्वारा बताया गया की यह सब पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार की कारगुजारी है जिसके कारण पूरा गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कबाड़खाना बन चुका है.

जगह जगह उखड़े फर्स, टूटी छतें दे रही मौत को आमंत्रण

  अस्पताल के अंदर घुसने पर डर सा महसूस होता है क्योंकि पूरा अस्पताल की बिल्डिंग बुरी तरह से क्षतिग्रस्त समझ आती है. फर्स और टाइल्स बुरी तरह से उखड़ी हुई है. जगह जगह कुत्ते बिल्ली यहां वहां बैठे नजर आते हैं जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीक होता है मानो यही कुत्ते ही अब इस गंगेव अस्पताल की जिम्मेदारी लिए हुए हैं.

   मुख्य वृहद कक्ष के स्थान पर नर्स आफिस की गैलरी में कुछ दो चार बिस्तर लगाए गए हैं जिनमे कुछ मरीज देखे जा सकते हैं. उस गैलरी की फर्स और उसकी टाइल्स भी बुरी तरह से उखड़ी हुई है.

अस्पताल भवन के बाहर नही हुई कभी पुताई

   भवन की बाहर की दीवाल भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी जिसे मरम्मत कार्य करवाया गया है लेकिन वह भी उसमे कोई पेंट पोलिश नही कराया गया. कुलमिलाकर सम्पूर्ण अस्पताल भवन देखकर इसका कतई अंदाजा नही लगाया जा सकता की यह अस्पताल ही है. ऐसा प्रतीत होता है जैसे 19 वीं सताब्दी के भुतहे किसी खंडहर में घुस चुके हैं जिंसमे से फिल्मी स्टाइल में मृत आत्माओं की आवाज़ जैसे महसूस होता है. 

   बहुत बड़ा दुर्भाग्य है की 35 लाख रुपये आने के बाद भी आज अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग गंगेव अस्पताल को ठीक नही करवा पाया इससे बड़े दुख की बात और क्या हो सकती है जहां पर मरीजों का इलाज करके उन्हें स्वास्थ्य लाभ देकर वापस घर भेजा जाता है आज वही गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्वयं ही बीमार पड़ा है जो अपने स्वयं के लिए किसी उचित शासन प्रशासन रूपी डॉक्टर की तलास में है की कहीं से कोई तो ध्यान दे दे जिसमे यह गंगेव का बीमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुरुस्त हो जाए.

बीएमओ पांडेय ने बताया ठेकेदार उठा ले गया पुरानी टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल

  गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत ब्लॉक मेडिकल अफसर श्री देवव्रत पांडेय ने आगे जानकारी दी की पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिस हिनौती पंचायत के ठेकेदार को मरम्मत का कार्य दिया गया था उसने हद ही कर दी. स्वास्थ्य केंद्र में पुराने लगाए हुए टाइल्स और बिल्डिंग मटेरियल को भी ठेकेदार ट्रेक्टर में भरकर लेजाकर बेंच लिया. एक बार की इसी प्रकार की घटना स्वयं बीएमओ श्री पांडेय के आंख के सामने घटित हुई जिस पर श्री पांडेय ने बताया की उन्होंने ठेकेदार को सख्त हिदायत दी की यदि एक भी पत्थर यहां से उठाया तो सीधे एफआईआर दर्ज करवा दूंगा. यहां तक की बीएमओ ने लिखित रूप से शिकायत भी ठेकेदार के खिलाफ कर दिया था लेकिन बाद में जब ठेकेदार कुछ सामग्री वापस कर दिया तो मामला जाकर शांत हुआ और फिर ठेकेदार काम छोड़कर चला गया.

   इस प्रकार बीएमओ के खुलासे से एक बात तो समझ आती है की निश्चित रूप से कहीं न कहीं स्वास्थ्य विभाग, ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी विभाग में तालमेल न बैठ पाने की वजह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भारी दुर्दशा हो चुकी है जिस पर तत्काल एक्शन लिया जाना अनिवार्य है अन्यथा ब्लॉक में एकलौते गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीमार बने रहने से यहां के लोगों को रीवा इलाहाबाद भागने के अतिरिक्त और प्राइवेट झोलाछाप डॉक्टरों को अच्छी मोटी रकम खिलाने के अलावा कोई दूसरा तरीका शेष नही बचेगा क्योंकि बदलते पर्यावरण और बढ़ते प्रदूषण के चलते विभिन्न प्रकार की साध्य अथवा असाध्य बीमारियों को फैलने से कोई रोंक न पायेगा और ऐसे में बीमार व्यक्ति डॉक्टरों की तरफ ही दौड़ेगा चाहे वह झोलाछाप हों अथवा सरकारी डिग्री धारक.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें किस तरह से गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है जिंसमे मॉनव नही कुत्ते बिल्लियां रहते हैं. उखड़ी टाइल्स, टूटी छतें, उखड़ी फर्स गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली की दुर्दशा की बखान कर रही हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Monday, August 6, 2018

पीडब्ल्यूडी एवं स्वास्थ्य विभाग ने गंगेव अस्पताल का कर दिया सत्यानाश (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बनाये गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जिंसमे 6 वर्ष पूर्व 38 लाख स्वीकृत होने के बाद भी आज तक नही हो सका मरम्मत कार्य , राशि भस्ट्राचार की बलि चढ़ी)


दिनांक 06 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी) 

   ज़िले में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति गंभीर बनी हुई है. यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का मेंटेनेंस न हो पाने एवं मरम्मत के अभाव में भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं जिनमे मरीजों को रखना तक खतरे से खाली नही है. पूरा भवन बरसात के मौसम में रिसाव ले लेता है. जहां दवाएं रखी हुई हैं वहां पर नदियां जैसे बहती हैं. 

   अभी पिछले वर्षों इसी मामले को लेकर क्षेत्रीय अखबारों में अस्पताल की दुर्दशा के बारे में सामाजिक एवं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा लिखा गया था और खबर निकली हुई थी जिंसमे दवा स्टोर रूम पूरी तरह से पानी से सराबोर था और दवाएं पानी में डूबी हुई थीं. तब उसी समय अस्पताल का मरम्मत कार्य प्रारम्भ हुआ था जिंसमे की किसी ठेकेदार द्वारा कार्य किया जा रहा था. 

   अधूरा छोंड़कर भाग गया ठेकेदार

     गंगेव ब्लॉक मेडिकल अधिकारी श्री देवव्रत पांडेय से प्राप्त जानकारी से बताया गया की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मरम्मत कार्य को किसी हिनौती के ठेकेदार द्वारा किया जा रहा था जिसे अभी पिछले कई महीने पूर्व बीच में ही अधुरा छोड़ दिया गया है. इसके विषय में बीएमओ देवव्रत पांडेय द्वारा कई बार रिमाइंडर और नोटिस भी जारी की गई हैं लेकिन उनकी स्वयं की आवाज़ को नही सुना जा रहा है ऐसा उनका कहना है. देवव्रत पांडेय ने आगे बताया की पीडब्ल्यूडी में मनमानी चल रही है.

6 साल पहले सैंक्शन हुआ था 38 लाख रुपये

    बीएमओ देवव्रत पांडेय ने जानकारी दी की 6 वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग के मद से कुल 38 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी जिंसमे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव का सम्पूर्ण मरम्मत कार्य होना था लेकिन पहले तो टेंडर प्रक्रिया में ही बहुत देरी हुई जिससे पिछले वर्ष 2016-17 में स्वास्थ्य केंद्र के मरम्मत का कार्य प्रारम्भ किया गया. अब पता नही क्या हुआ की ठेकेदार बीच में ही कार्य छोड़कर चला गया और पीडब्ल्यूडी विभाग रिमाइंडर के वाबजूद भी कोई एक्शन नही ले रहा है.

ठेकेदार ने पूरा अस्पताल खोद दिया, बिना बिस्तर का हो गया अस्पताल

   बीएमओ ने जानाकरी दी की बांकी जो भी टूटा फूटा फर्श बचा हुआ था ठेकेदारों ने उसे भी पूरी तरह से उखाड़ दिया है और अब तो मुख्य निकाशी वाले कक्ष में बिस्तर भी रखने योग्य नही बचा है. वहीं गैलरी पर पड़े कबाड़ में कुत्ते बिल्ली बैठे रहते हैं और वहीं पर हगते मूतते रहते हैं.

जनपद सदस्यों ने जाहिर की नाराजगी

   वहीं पर उपस्थित गंगेव जनपद सदस्य मिथिलेश सिंह एवं विनोद विश्वकर्मा ने बताया की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति दयनीय बनी हुई है. सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र का भवन काफी जर्जर भी हो चुका है. जनपद सदस्यों ने बताया की इस बाबत उन्होंने भी मौखिक रूप से बात को संबंधितों के समक्ष रखी है लेकिन कोई सुनवाई नही हुई है. विनोद विश्वकर्मा ने बताया की यहां पर दीनदयाल योजनान्तर्गत बांटे जाने वाले कार्ड भी नही हैं जिससे गरीबों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. मिथिलेश सिंह ने बताया की हमारा कार्यालय यहीं पर नजदीक ही है अतः लगभग रोज ही आना जाना रहता है और हम देखते हैं की मरीजों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यहां पर बिस्तर पर्याप्त न होने से मरीज जमीन पर ही पड़े रहते हैं. यहां ठेकेदारों की मनमानी और विभागीय उदासीनता के चलते वर्षों से मरम्मत कार्य बन्द पड़ा हुआ है. जनपद सदस्यों ने बताया की यद्यपि हम जनप्रतिनिधि हैं लेकिन हमारी भी कोई सुनवाई नही हो रही है.

तत्काल प्रभाव से पूरा होना चाहिए अस्पताल का मरम्मत कार्य

   यदि सही मायनों में देखा जाए तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जिस प्रकार जीर्णशीर्ण स्थिति में है और उसके मरम्मत कार्य में हीलाहवाली की जा रही है यह मरीजों के मूलभूत स्वास्थ्य के मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है और इस विषय में अस्पताल प्रबंधन सहित पीडब्ल्यूडी एवं संबंधित ठेकेदार पर कंनूनी कार्यवाही की जानी चाहिए. आज वर्षों से अधूरे पड़े मरम्मत कार्य के कारण क्षेत्र के हज़ारों मरीजों के लिए मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या पैदा हो गई है. इसी दयनीय स्थिति के चलते मरीज गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाना ही नही चाह रहे हैं. गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का अस्पताल प्रबंधन इतना खत्म हो चुका है की समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है. ज़िला कलेक्टर भी पूरी तरह से निष्क्रिय होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल करने वाला कोई नही है. वर्तमान समय से बेहतर स्थिति अभी कुछ वर्ष पहले थी जब जिले में कलेक्टर राहुल जैन हुआ करते थे जिनके खौफ से आज जैसे मनमानी नही चल पाती थी. इस समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे रीवा ज़िला बिना किसी दमदार प्रसाशनिक आधिकारी के चल रहा है.

   आखिर प्रश्न यह है की मॉनव की मूलभूत मानवाधिकारों में से एक अच्छे स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा सुरक्षा करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या हर बात के लिए कंप्लेंट करना जरूरी होता है. आखिर ज़िला और प्रदेश शासन प्रशासन इस बात की निगरानी क्यों नही करवा सकता की स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, सड़क, पानी और बिजली जैसे मानवाधिकारों की सुरक्षा हो पा रही है की नही. यदि मानवाधिकारों और मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है तो शासन प्रशासन को स्वयं भी चाहिए की बिना किसी कंप्लेंट के ही स्वतः ही संज्ञान ले. लेकिन यहाँ तो सब उल्टा चल रहा है लगता है की स्वास्थ्य सुविधाओं की भी दलाली चल रही है और यहां भी लोगों के शेयर फिक्स हो चुके हैं जिससे आम आदमी मरे चाहे जिये इससे किसी को कोई लेना देना नही है. सबसे बड़ी बात तो यह है की इस विषय में ईमानदारी और जिम्मेदारी की अपेक्षा मात्र अस्पताल प्रबंधन से ही की जा सकती है क्योंकि मरम्मत कार्य करवाना अस्पताल की जिम्मेदारी है. जहां तक सवाल निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी का है इनके कार्य में तो कोई जिम्मेदारी हो ही नही सकती क्योंकि पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग ने पूरे देश के लोक निर्माण कार्यों में कितना बड़ा भष्ट्राचार किया है यह आज किसी से भी छुपा नही है. पीडब्ल्यूडी ने पूरे देश को खोंखला कर दिया है, परंतु दुर्भाग्य है की न तो इस कार्य को मॉनिटर करने वाला स्वास्थ्य विभाग है, और न ही ज़िला कलेक्टर. 

संलग्न - 1) संलग्न देखें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव की दुर्दशा जिंसमे आज 6 वर्षों के इसके मरम्मत कार्य और रखरखाव के लिए आई हुई राशि के वावजूद भी इसमे कुछ नही हो सका है. पूरा कार्य अधूरा पड़ा हुआ है साथ ही अस्पताल आम आदमी का न लगकर ऐसा लगता है की पशुओं का है.


2) बीएमओ देवव्रत पांडेय से बातचीत के अंश एवं साथ ही रीवा संभाग के पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर गरीब राव गुजरे से जानकारी के अंश मोबाइल रिकॉर्डिंग.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Tuesday, June 28, 2016

The Letter to the Chairperson of Madhya Pradesh Pollution Control Board - Dillip Buildcon Pvt. Ltd. Violating the Laws while road construction work was undertaking

Dated: 30/05/2016, Place: REWA (MP)
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To,
The Chairperson, Madhya Pradesh Pollution Control Board,
BHOPAL, Madhya Pradesh, INDIA

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Subject – The Road Construction Work by Dilip Buildcon Pvt. Ltd. Company is  CAUSING POLLUTION PROBLEM on and near the residence areas of construction sites of KALWARI TURN <---> KEOTI SIRMAUR ROAD via LALGAON  and MANGAWAN-CHAKGHAT via GANGEV SOHAGI at REWA (MP).


Sir/Madam,                

         I would like to bring into your kind notice a Road development work carried out presently by the DILIP BUILDCON COMPANY PVT. LTD. in REWA district of Madhya Pradesh State. The contract of the road development work is from location: KALWARI TURN <--> KEOTI-SIRMAUR ROAD via LALGAON and MANGAWAN-CHAKGHAT via GANGEV SOHAGI in Rewa MP. 

    The problem is as the following:

1) The Crasher work carried out by the Dilip Buildcon Pvt. Ltd. at the PANGADI area near BHATHAWA (MADARI), HINAUTI, DADH, LALGAON etc station is causing pollution problem for the nearby innocent public when the explosion are carried out by the crasher machines and mining.

2) As the road are being constructed, NO water is used by the Dilip Buildcon Pvt. Ltd to suppress the dust of the road which again causes a huge amount of dust to pollute the nearby villages and thus there are dangerous breath related and lungs related diseases are seen among the public community nearby the construction sites.

3) The other problem includes the dust destroying the crops near the farmland of the road sides which resulting the less productivity of the crops and thus the farmers are suffering the loss in their crop farming.

    Thus there are mainly three above mentioned problems due to the road construction work at the mentioned sites which need to be corrected for the good health of the public.

   I would like to request Minister of Environment Forest and Climate Change New Delhi to kindly make in your cognizance immediately above matter of public importance. Thanks.


Address:-
SHIVANAND DWIVEDI (Social & RTI Activist)
Village KAITHA, POST AMILIYA, Police Station GARH,
TEHSIL Mangawan, BLOCK - GANGEV, District REWA.

PIN CODE - 486117. MP. Mob. +917869992139