आखिर आज 21 वीं सदी में जब की मॉनव चंद्रमा और मंगल एवं अंतरिक्ष में घर बनाने, पानी खोजने, रास्ता बनाने की सोच रहा है ऐसे में क्या इस धरती में इन मूलभूत मानवाधिकारों के लिए कोई जगह नही है? इससे बेहतर तो कह सकते हैं की स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व की स्थिति रही होगी जब जगह जगह ट्रांसपोर्टेशन के लिए रेल की पटरियों का ईजाद कर लिया गया था. आखिर स्वतंत्रता प्राप्ति के 7 दशकों के बाद भी यदि आमजन और ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की चलने योग्य सड़कें न बन पाएं तो भला इस लोकतंत्र के लिए उससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
"One who is unattached to the fruits of his work and who works as he is obligated is in the renounced order of life, and he is the true mystic: not he who lights no fire and performs no work". - |||श्रीमद भगवद गीता, अध्याय 6, Verse 1|||
Saturday, December 14, 2019
मुझसे मिलिए मैं हूँ टिकुरी-खरहना पीडब्ल्यूडी सड़क (मामला जिले की बहुचर्चित दो जनपदों के बीच फंसी टिकुरी 37 नईगढ़ी एवं खरहना गंगेव ब्लॉक पीडब्ल्यूडी सड़क का, डेढ़ करोड़ के आसपास राशि स्वीकृत होने के बाद भी नही हुआ कोई निर्माण कार्य, पीडब्ल्यूडी विभाग एकबार पुनः कटघरे में)
आखिर आज 21 वीं सदी में जब की मॉनव चंद्रमा और मंगल एवं अंतरिक्ष में घर बनाने, पानी खोजने, रास्ता बनाने की सोच रहा है ऐसे में क्या इस धरती में इन मूलभूत मानवाधिकारों के लिए कोई जगह नही है? इससे बेहतर तो कह सकते हैं की स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व की स्थिति रही होगी जब जगह जगह ट्रांसपोर्टेशन के लिए रेल की पटरियों का ईजाद कर लिया गया था. आखिर स्वतंत्रता प्राप्ति के 7 दशकों के बाद भी यदि आमजन और ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की चलने योग्य सड़कें न बन पाएं तो भला इस लोकतंत्र के लिए उससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है।
Thursday, August 2, 2018
सरई पंचायत की 1.5 किमी सड़क गड्ढों कीचड़ में तब्दील (मामला ज़िला रीवा अन्तर्गत गंगेव ब्लॉक एवं सरई ग्राम पंचायत का जहां आज पैसा सैंक्शन होने के बाद भी सड़क पर नही किया गया काम, आम जनता गद्दों और कीचड़ में मरने को मजबूर)
दिनांक 02 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत ग्राम पंचायत सरई कला के रामराज सिंह के घर से तालाब के पास बजरंगबली मन्दिर तक की सड़क जिसकी लंबाई 1.5 किलोमीटर है उसके निर्माण में हीलाहवाली एवं भष्ट्राचार का मामला प्रकाश में आया है.
ग्राम पंचायत सरई कला के आनंद द्विवेदी द्वारा सूचना दी गई है की ग्राम पंचायत सरई कला के रामराज सिंह के घर से तालाब के पास बजरँगबली तक की रोड का ठेका हो चूका है फिर भी आज तक ठेकेदार या विभाग द्वारा किसी प्रकार की देखभाल नही की गई एक बार विभाग के चपरासी टाइम कीपर द्वारा नाप किया जा चूका है 1200 ग्रामीण वासियों को आये दिन मौत का सामना करना पड़ता है रास्ते में 3 फिट के गड्ढे हैं कोई भी विभागीय कर्मचारी नही आए.
इस प्रकार देखा जा सकता है विभागीय उदाशीनता एवं पंचायती भष्ट्राचार के चलते हर एक गांव का आम नागरिक कीचड़ और गड्ढों से सनी हुई सड़क पर चलने को मजबूर हो चुका है.
सरकारें तो बड़े बड़े दावे कर रही हैं गांव गांव को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़े जाने की बातें कर रही हैं लेकिन वास्तविकता में कहीं कुछ होता हुआ नही दिख रहा है. इसका जीता जागता प्रत्यक्ष उदाहरण है सरई ग्राम पंचायत की सड़क जहां आम जनता मरने पर मजबूर है, बरसात के इन दिनों में कोई न तो मेडिकल फैसिलिटी प्राप्त की जा सकती है और न ही कोई एम्बुलेंस अथवा जननी एक्सप्रेस ही आ सकती है ऐसे में स्पष्ट है की यदि किसी गर्भवती महिला को कोई समस्या पैदा हो जाए अथवा कोई बीमार पड़ जाए तो ऐसे मौसम और इस प्रकार की सड़क में उसका मरना तय है.
संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें किस तरह से 1.5 किमी की सरई ग्राम पंचायत की सड़क गड्ढों और कीचड़ में तब्दील हो चुकी है जिसे देखने वाला कोई नही.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587
Sunday, April 15, 2018
चलिए नही बेधड़क, क्योंकि मैं हूँ बांस से हिरुडीह पी डब्लू डी सड़क (मामला गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली बांस से हिरुडीह वाया पुरवा 4 दशक पुरानी पी डब्लू डी सड़क का जिसमे मोरम तक नही पड़ी)
दिनांक 15 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)
आज स्वतंत्रता के 70 वर्ष बाद भी भारत के ग्राम के नागरिकों का जीवन स्तर सुधरने का नाम नही ले रहा है और इसके पीछे मुख्य कारण हैं उन्हें मूलभूत मानवाधिकारों का उपलब्ध न हो पाना और मानवाधिकारों से आम जन मानस को वंचित किया जाना।
बिजली, पानी, सड़क, आवास, स्वास्थ्य एवं अच्छी शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक सरकार द्वारा उसके सभी नागरिकों को उपलब्ध करवाना उस देश की सरकार के संवैधानिक कर्तव्य होते हैं परंतु भारत में व्यापक भष्ट्रचार और प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज आम जनमानस इन मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित हैं. यद्यपि कुछ ग्रामों को जोड़ने के लिए पीएम सड़क के प्रावधान चल रहे हैं जिसमे ग्रामों के मुख्य मार्ग को जोड़ने का काम तो किया जा रहा है परन्तु समय के हिसाब से नाकाफी है।
4 दशक पुरानी बांस से हिरुडीह वाया पुरवा पी डब्लू डी सड़क आज भी बनी है कच्ची, नही है कोई सुध लेने वाला, आम जनता हैरान परेशान
मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा अभी पिछले दिनों सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक कार्यों का भौतिक सत्यापन करने और अवलोकन करने के उद्देश्य से बांस से हिरुडीह एवं पुरवा की तरफ रुख किया गया जिसमे आम जन से संपर्क स्थापित किया गया तो ग्राम पुरवा निवासी दिव्यांग रामायण सिंह, निरंजन सिंह, किसान अरुण सिंह एवं देवेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता बसंत प्रताप सिंह, छात्र आदित्य सिंह सहित कुछ माताओं बहनों के द्वारा जो जानकारी प्राप्त हुई वह भारतीय लोकतंत्र के बहुत पीछे होने या यूं कहें कि एक तरह से नाकाम होने की ही दास्तान बयां करती है.
पुरवा निवासी दिव्यांग रामायण सिंह के द्वारा बताया गया की उनकी यह सड़क वर्ष 1981 में पी डब्लू डी के द्वारा बनाई गई थी जिसमे थोड़ा सा मोरम का काम किया गया था लेकिन तब से इस सड़क मार्ग में न कोई मिट्टी और न ही मोरम का काम किया गया है. रामायण सिंह ने बताया की आज यदि थोड़ी भी बारिस हो जाए तो इस सड़क में स्थित गड्ढों में पानी भर जाता है जिससे आम जन को निकलना बड़ा ही मुश्किल पड़ जाता है. यदि किसी को इमरजेंसी मेडिकल फैसिलिटी की आवश्यकता पड़ जाए अथवा कोई महिला का डिलीवरी का केस आ जाए तो उसे खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता है. पुरवा निवासी किसान निरंजन सिंह और अरुण प्रताप सिंह द्वारा बताया गया की आज 4 दशक के आसपास हो रहा है तो कैसे सम्भव है की पी डब्लू डी सड़क की यह स्थिति बनी हुई है? क्या पी डब्लू डी सड़क के लिए इतने दशकों में कोई बजट नही आया होगा? वहीं छात्र आदित्य प्रताप सिंह द्वारा बताया गया की बरसात के मौसम में हमे स्कूल जाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. सड़क में 100 मीटर आगे इशारा करते हुए बताया की सड़क में अब मोरम भी नही है अतः कीचड़ होने से साईकल से लेकर सभी वाहन फस जाते हैं जिससे बरसात में पैदल तक चलना मुश्किल होता है.
बांस से हिरुडीह वाया पुरवा सड़क को पीएम सड़क बनाये जाने की माग
ग्राम बांस, पुरवा और हिरुडीह की महिलाओं ने जानकारी दी की उन्हें विशेष तौर पर भारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है अतः सभी चाहते हैं की आज जैसे सभी प्रधानमंत्री सड़कें बनाई जा रही हैं उसी प्रकार इसे भी पीएम सड़क कर दिया जाए जिससे इसका जल्द ही निर्माण हो जाए. सभी ने कहा की पी डब्लू डी की सड़कों में व्यापक अनियमितता होने के कारण ही उनकी यह सड़क आज 4 दशक बाद भी नही बन पायी है.
नईगढ़ी माइक्रो इरीगेशन नहर परियोजना का कार्य भी प्रगति पर
दौरे के दौरान पाया गया शासकीय माध्यमिक शाला बांस के आगे और पुरवा ग्राम के बीच में नहर का कार्य भी प्रगति पर है जिसमे खुदाई का काम प्रारम्भ किया गया है. जानकारी बाणसागर नहर मंडल संभाग रीवा के अधीक्षण यंत्री श्री शर्मा से जानकारी प्राप्त हुई की यह नहर आसपास के के पटवारी हल्कों जिसमे मनगवां का इटहा, सिरमौर का हिनौती और त्योंथर का जमुई एवं कटरा हल्का आदि सामिल है वर्ष 2020 तक नहर से जोड़ दिया जाएगा. पानी की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण उद्वहन और दबाब पद्धति से पानी की सप्लाई किये जाने का प्रावधान है जिसमे माइक्रो इरीगेशन तकनीक द्वारा जमीन के अंदर से पाइप डालकर गांव गांव में पानी सप्लाई किये जाने का प्रावधान है. यह प्रयाश भी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा पिछले वर्षों किया गया था जिसमे मानवाधिकार आयोग मप्र भोपाल के संज्ञान के चलते आज कार्य में तेजी आई है और किसान खुशहाल होगा.
संलग्न - बांस के हिरुडीह वाया पुरवा पी डब्लू डी सड़क की स्थिति एवं इसकी दुर्दशा दिखाते ग्राम के नागरिकगण. मामला गंगेव ब्लॉक, रीवा मप्र का.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,
मोबाइल - 7869992139, 9589152587



