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Monday, December 30, 2019

(MP News) काल बनकर आई ठंड ले रही गोवंशों की जान (मामला जिले और प्रदेश में गोवंशों की स्थिति पर जहाँ भीषण ठंड में अवैध बाड़ो में कैद मवेशी मर रहे बेमौत, किसान और गोवंश दोनो की स्थिति हुई दयनीय, 1000 गोशालाओं का सपना अभी भी अधूरा)

दिनांक 30 दिसंबर 2019, स्थान - रीवा मप्र

   प्रदेश में निर्माणाधीन 900 सरकारी गोशालाओं का कार्य पूरा न होने से गोवंशों की स्थिति दयनीय बनी हुई है.
   जगह जगह बेसहारा मवेशी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, अवैध बाड़ो में चारा पानी, छाया बिना दम तोड़ रहे हैं तो कहीं नहरों घाटियों और जलप्रपातों में जीवित ही झुंडों में फेंके जा रहे हैं. ऐसा लगता है जैसे घोर कलयुग आ चुका है जब गोवंशों को पूरी तरह से समाज से बहिष्कृत किया जा चुका है. 

  खा रहे लाठी डंडे, कुल्हाड़ी से हो रहा स्वागत

   गोवंशों को यत्रतत्र क्रूरता का शिकार होना पड़ रहा है. अवैध बांडे तो आज आम बात हो चुके हैं, इसके साथ साथ गोवंशों को धारदार हथियारों से नुकसान पहुचाया जा रहा है. उनके पैरों और मुह जीभ को भी निर्दयी लोग तार से बांध देते हैं जिससे खानापानी न ले पाने के चलते मर जाते हैं. घाव में कीड़े पड़ जाते हैं जिससे उनकी मौत हो जाती है. लाठी डंडे कुल्हाड़ी से पैर और शरीर में घाव कर दिया जाता है. यह वाकया आजकल आम हो चला है. ऐसा लगता है जैसे मानवता समाप्त हो चुकी है.

 जगह जगह हो रहे दुर्घटना का शिकार 

  मवेशी सड़कों में भी झुंड लगाकर बैठ जाते हैं जिससे आने जाने वाले वाहनों से टकराकर भी दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं. यह एक बड़ी समस्या है. अमूमन वाहनों की गर्मी और प्रकाश के चलते मवेशी सड़कों पर आ जाते हैं जिससे दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.

  अवैध बाड़ो का लग गया अंबार

   फसल नुकसानी को बचाने के लिए किसान अवैध तरीके से बाड़ो का निर्माण करते हैं जहां न तो समुचित छाया की व्यवस्था होती है और न ही पानी भूषा की व्यवस्था, जिसके चलते मवेशी अवैध बाड़ो में मरने लगते हैं. यह एक बड़ी समस्या है जिसको देखने वाला कोई नही है. इन बाड़ो में ठंड के मौसम में सबसे अधिक तकलीफ का सामना करना पड़ता है क्योंकि न तो इनके खाने के लिए कुछ होता है और न ही छाया होती है.

  नहरों में फेंक रहे जीवित गोवंशों को

   बकिया बराज नहर और उसके आसपास के ग्रामों से लगे क्षेत्र में निर्दयी तत्व मवेशियों को लाकर नहरों में धकेल देते हैं जिसके कारण 40 से 50 फीट गहरी नहर से बाहर न आ पाने के कारण यह मवेशी झुंड में वहीं नहर के बीचोंबीच ठंड और भूंख से तड़प कर मर जाते हैं. रीवा के टीएचपी और चचाई पावर प्लांट में लगे छन्ने में प्रतिदिन ऐसे दर्जनों मृत मवेशियों को देखा जा सकता है.
  सरकार तो बस वादा करती है

   जहां तक गोवंशों के प्रति दया की बात है तो सरकार से दया की अपेक्षा करना ही बेमानी है क्योंकि आज दया होती तो शायद भारत विश्व के सबसे अग्रणी बीफ या गोमांश उत्पादक देशों की श्रेणी में नही होता. पर फिर भी यदि सरकार के वादे की बात करें तो कम से कम मप्र सरकार को तो 1000 गोशालाओं को पूर्ण कर ही देना चाहिए था मगर अब तक गोशालाओं का निर्माण कार्य अधर में लटके रहने के कारण हालात यह हैं की न तो किसान खुश है और न ही गोवंशों को राहत है. दोनो का ही जीवन संकट बरकरार है.
  गांव गांव बने गोशालाएं

   वास्तव में देखा जाए तो आज एक ब्लॉक में मात्र 3 या 4 गोशालाएं बनाने से कुछ खास नही होने वाला है क्योंकि जिस तरह से गोवंशों का झुंड बेसहारा गांव गांव घूम रहा है इससे साफ जाहिर है की यहाँ गांव गांव गोशालाएं बनाये जाने की आवश्यकता है.
  हर ब्लॉक में 12 अन्य गोशालाएं बनेगी

  अभी हाल ही में मप्र सरकार द्वारा पुनः एकबार हर एक ब्लॉक में 12 अन्य गोशालाएं खोले जाने सम्बन्धी प्रपोजल लांच किया गया है जिसमे संबंधित पंचायतों से जानकारी माँगी जा रही है. जिसके तहत हर एक ऐसी पंचायतों से ग्राम सभा का प्रस्ताव मंगवाया गया है और साथ में उन सभी पंचायतों से जमीन के कागजात भी चाहे गए हैं. बताया गया है की जिन पंचायतों को गोशालाएं चाहिए उन्हें कम से से 6 एकड़ जमीन देनी पड़ेगी.
  हिनौती गोशाला का काम अधूरा

   गंगेव ब्लॉक की हिनौती ग्राम पंचायत अन्तर्गत आने वाली गदही ग्राम की निर्माणाधीन 27 लाख और 62 हजार की लागत से बनाई जा रही गोशाला का कार्य अभी भी अधूरा है. दिनांक 30 दिसंबर 2019 की स्थिति में हिनौती गोशाला मात्र दीवाल स्तर तक ही पूर्ण हो पायी है. वहां पर उपस्थित रोजगार सहायक प्रकाश उपाध्याय ने बताया की 5 जनवरी 2020 को गोशाला का लोकार्पण किया जाना है इसके संबंध में अभी हाल ही में जिला पंचायत सीईओ अर्पित वर्मा द्वारा नईगढ़ी ब्लॉक में विजिट के दौरान सभी जनपद सीईओ को कारण बताओं नोटिस भी जारी की जा चुकी है. अब देखना यह होगा की कारण बताओ नोटिस का कोई प्रभाव पड़ता है की नही. ज्ञातव्य है कि पूरे जिले में प्रथम फेज में 33 गोशालाए बनाई जानी हैं जबकि पूरे प्रदेश में इनकी संख्या 900 के पार जानी है।
  संलग्न -  सड़कों और बाड़ो में अपनी मौत की बारी का इंतजार करते गोवंश.

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587

Saturday, December 21, 2019

(Rewa, MP) धान खरीदी में घपला, किसानों से ले रहे 41 किलो से अधिक धान, पूंछने पर आर्द्रता का बता रहे कारण (मामला जिले के खरीदी केंद्रों का जहां किसानों का जमकर चल रहा शोषण, 40 किलो 600 ग्राम से अधिक की की जा रही खरीदी, किसान परेशान कोई नही सुन रहा किसानों की समस्या)

दिनाँक 21 दिसंबर 2019, स्थान - गढ़/कोट/भठवा, रीवा मप्र

     खरीफ धान की खरीदी के साथ ही खरीदी केंद्रों में धांधली और अव्यवस्था भी फैल चुकी है. आर्द्रता और कंडों रोग के नाम पर किसानों को जमकर लूटा जा रहा है. किसान आवाज उठा रहे हैं लेकिन कोई अधिकारी सुनने को तैयार नही है.

  आर्द्रता बताकर ले रहे ज्यादा धान

    जब किसान खरीदी केंद्रों पर जाते हैं तो उन्हें बताया जाता की है की आपकी धान अभी गीली है अतः आपको ज्यादा देनी पड़ेगी. किसानों का कहना है की हमारी धान 15 से 18 के बीच में आर्द्रता टेस्ट में रहती है. 95 प्रतिशत धान 17 पॉइंट आर्द्रता के भीतर रहती है फिर भी उनसे बोरी और बारदाना की वजन के नाम पर ज्यादा धान ली जा रही है. बताया गया की एक बोरी में मात्र 40 किलो और 600 ग्राम भरे जाने का प्रावधान है जबकि इसका भराव ज्यादा किया जा रहा है. कई किसानों ने बताया की उनसे 41 से 42 किलो के बीच में धान ली जा रही है.

  सैंपल के नाम पर हिनौती समिति में चल रही लुटाई

   गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले हिनौती ए और बी दोनो ही खरीदी केंद्रों में सैंपल लिए जा रहे हैं. खरीदी केंद्र प्रबंधक राजेन्द्र सिंह एवं वर्कर कोटेदारों द्वारा बताया गया की यह सैंपल तीन भागों में में रखा जाता है. जबकि खाद्य विभाग में फ़ूड कंट्रोलर राजेन्द्र सिंह ठाकुर और गंगेव फ़ूड इंस्पेक्टर गौरी मिश्रा से पूंछने पर पता चला की सैंपल जैसी कोई बात नही है. सैंपल लेकर उसकी आर्द्रता देखी जाती है और इसके बाद उसे किसान को वापस कर दिया जाता है. जबकि हिनौती खरीदी केंद्रों में पॉलीथिन में प्रति किसान तीन किलो धान लेकर पता नही कहां रखा जाता है. कुछ लोगों ने बताया की सैंपल वैम्पल कुछ नही रहता है रात के अंधेरे में एकत्रित की गई धान को बोरी में भरकर किसी चमचे वाले किसान के खाते में डाल दिया जाता है जिससे किसानों को पता भी नही चल पाता कि क्या घालमेल है. वैसे यह कोई नई प्रथा नही है और पुराना पैसा कमाने का जरिया है सब.

  कोटेदार यहां भी किसानों को नही बख्शते

  बताया गया की जिले के ज्यादातर खरीदी केंद्र कोटेदारों के हवाले रहता है. यही कोटेदार खरीदी में समिति प्रबंधकों की मदद करते हैं. सामान्यतया नपाई तुलाई में जो सिस्टम इनका कोटों में रहता है वही खरीदी केंद्रों में भी रहता है. यहां भी कांटों के माध्यम से भी किसानों की लूट हो रही है. किसान यदि बोलते हैं तो उनकी धान को वापस कर देने और पैसे रोकने की धमकी दी जाती है. किसानों ने इसकी सख्त जांच की माग की है.

  प्रासंगिक व्यय के नाम पर भी लूट

   मात्र नपाई तुलाई तक ही बात नही रह जाती. यदि देखा जाय तो लुटाई काफी आगे तक है. बता दें की प्रत्येक खरीदी केंद्रों को बारदाने की सिलाई, ढुलाई, एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने लेबर चार्ज, किसानों को छाया उपलब्ध कराने, जनरेटर, शेड, बिजली पानी की व्यवस्था करने, उचित रेट पर भोजन चाय की व्यवस्था करने आदि के लिए प्रासंगिक व्यय के नाम से राशि प्रत्येक समिति के खरीदी केंद्रों में सरकार द्वारा भेजी जाती है जो लाखों में होती है लेकिन उसका कोई उपयोग नही किया जाता सब समिति प्रबंधक और खरीदी केंद्र प्रबंधक अपने पास रखकर हजम कर लेता है जिसकी जांच की माग भी किसानों ने की है.

  किसानों से प्रति बोरी 5 से 10 रुपये एक्स्ट्रा

   बात यहीं आकर नही रुकती बताया गया की जब किसान ट्रेक्टर में धान लेकर खरीदी केंद्रों पर जाते हैं तो उनको बताया जाता है की या की खुद तौल कराओ नही तो एक्स्ट्रा 5 से लेकर 10 रुपये प्रति बोरी तक चार्ज दो. किसान यदि यह राशि देने से मना करता है तब उसकी धान वापस कर दी जाती है. जबकि इस विषय में जब खाद्य विभाग से जानकारी चाही गई तो खाद्य नियंत्रक राजेन्द्र सिंह ठाकुर द्वारा बताया गया की ऐसी कोई राशि किसानों को देने की जरूरत नही है. क्योंकि किसान से कोई राशि वसूली नही जाएगी और जहां भी ऐसा हो रहा है वह गलत है. तुलावटी और नापतोल करने वाले लेबरों को पहले से ही खरीदी केंद्रों द्वारा सरकार के व्यय से राशि दी जाती है. 

 खरीदी केंद्रों पर डंप पड़ी है धान, उठाव नही

   बता दें कुछ खरीदी केंद्रों में अभी भी दर्जनों ट्रक धान डंप पड़ी हुई है जिसकी खरीदी के बाद उठाव नही हो पाया है. वैसे भी मौसम काफी खराब चल रहा है ऐसे में पता नही कब इंद्र देव का मूड बिगड़ जाए और किसानों से 17 की आर्द्रता की कहकर खरीदी गई धान 50 पॉइंट की आर्द्रता हो जाए.

   धान सड़ाने और भींगाने से प्रबंधकों को होता है लाभ

   बता दें की धान सड़ाने का भी एक फंडा होता है. जानकार सूत्रों ने बताया की जब धान खरीदी 17 और उसके नीचे की आर्द्रता में की जाती है तब उसमे ज्यादा मात्रा चढ़ती है पर जैसे ही शीत अथवा पानी गिरने से धान भीग जाएगी तो स्वाभाविक रूप से उसकी आर्द्रता बढ़ने से धान कम मात्रा में तौल होगी जिससे समिति प्रबंधक बोरियों से धान निकाल लेंगे और उनको उसी धान का भी फायदा हो जाएगा.

   पूरा सिस्टम लगा है काले धंधे में

    यदि सूत्रों की माने तो इस धंधे में नीचे से लेकर ऊपर तक के लोग लगे हुए हैं. यह कार्य मात्र समिति प्रबंधक अथवा खरीदी केंद्रों का मुखिया बस नही करता है बल्कि इसमे फ़ूड और नागरिक आपूर्ति निगम से लेकर सहकारिता विभाग तक के कर्मचारी अधिकारी मिले हुए रहते हैं.

   जब इसकी शिकायत की जाती है तो जांच के नाम पर मात्र खानापूर्ति होती है. नियमतः जब धान खरीदी हो तो उसी रात इसका उठाव भी सुनिश्चित हो जाए. यदि किसी कारण बस उठाव नही भी हो पाया तो उस रात धान को ढकने और शीत पानी से बचाने के उचित प्रबंध करने चाहिए लेकिन ऐसा कुछ होता नही है और किसानों से उच्च गुणवत्ता बताकर खरीदी गई धान निम्न गुणवत्ता में नॉन को भेजी जाती है. 

   संलग्न - कृपया संलग्न खरीदी केंद्रों की फ़ोटो देखें जहां पर धान खरीदी के नाम पर धांधली चल रही है. किसान परेशान हैं लेकिन कोई सुनने वाला नही.

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शिवानन्द द्विवेदी
समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587

Wednesday, December 18, 2019

आरटीआई की जानकारी समय पर नही दिया, मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लगा दिया 15 हज़ार का जुर्माना, पीआईओ ने कई नोटिसों के जबाब में आयोग के आदेशों की किया था अवहेलना, रीवा जिला शिक्षा केन्द्र का है मामला


मामला जिला रीवा का जिसमें #RTI अपील क्रमांक A 2610 में अपीलकर्ता को छात्रावासों में व्यय की गई राशि एवं अन्य जानकारी समय पर उपलब्ध नही कराने पर सुधीर कुमार बांडा, लोक सूचना अधिकारी कार्यालय जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र रीवा के विरुद्ध मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने  लगाया ₹ 15000 का  जुर्माना

दिनांक 18 दिसंबर 2019, स्थान - रीवा मप्र

    आरटीआई - सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदकों द्वारा चाही गयी जानकारी लोक सूचना अधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय अधिकारियों द्वारा समय पर उपलब्ध नही कराए जाने के चलते मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा हैवी जुर्माना लगाए जा रहे हैं। पर इसके बाबजूद भी लोक सूचना अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कोई परिवर्तन नही दिख रहा है।

   जिला शिक्षा केन्द्र रीवा का है मामला

   मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अभी हाल ही कि अपनी एक सुनवाई में दिनांक 10 दिसंबर को जारी किए गए संलग्न आदेश में द्वितीय अपील के प्रकरण क्रमांक ए- 2610 में लोक सूचना अधिकारी जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा सुधीर कुमार बांडा को कारण बताओ नोटिस कर वाबजूद भी सूचना आयोग में उपस्थित न होने एवं जानकारी उपलब्ध न कराए जाने के चलते 10 दिसंबर की पेशी में 15 हज़ार रुपये का जुर्माना ठोंक दिया है।

 आयोग ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

    मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने दिनांक 28/08/2019 को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से सम्बंधित लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला शिक्षा केन्द्र जिला समन्वयक अधिकारी को धारा 20(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर आवेदक को जानकारी देने के निर्देश दिए थे लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने अवमानना की जिसके कारण दिनांक 10 दिसंबर के आदेश में 15 हज़ार की पेनाल्टी लगाई गयी। 

  साल भर पुराना है मामला, इन बिंदुओं पर माँगी थी जानकारी

   आरटीआई आवेदक विनोद कुमार मिश्र ने धारा 6(1) के तहत अपने पहले आरटीआई आवेदन में दिनांक 15 जनवरी 2019 लोक सूचना अधिकारी जिला समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा में आरटीआई फ़ाइल कर तीन बिंदुओं की जानकारी चाही थी जिसमे पहला बिंदु - रीवा जिले के समस्त शासकीय छात्रावासों में तीन वर्ष में व्यय की गयी राशि की मदवार जानकारी, दूसरा बिंदु - कार्यालय में पदस्थ वंशमलि प्रसाद मिश्र सहायक ग्रेड 3 की नियुक्ति आदेश, पदस्थापना आदेश एवं प्रतिनियुक्ति आदेश एवं 15-16 में पुनः प्रतिनियुक्ति आदेश समाप्त होने के आदेश, एवं तीसरे बिंदु में - वंशमलि प्रसाद मिश्र की विकलांग प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति चाही गयी थी। 

  जानकारी न मिलने पर अपीलकर्ता ने की थी अपील

   आवेदक को जब समय पर जानकारी उपलब्ध नही हो सकी तो आवेदक ने उसकी प्रथम एवं द्वितीय अपील की थी। प्रथम अपील दिनाँक 29 मार्च 2019 को प्रथम अपीलीय अधिकारी जिला कलेक्टर रीवा को की गई थी जिसको स्वयं पीआईओ ने अपने पास रख लिया।  जब जिला कलेक्टर रीवा द्वारा भी कोई सार्थक कार्यवाही समय पर नही की गई थी तब आवेदक अपीलार्थी विनोद कुमार मिश्र ने द्वितीय अपीलीय अधिकारी अर्थात मप्र राज्य सूचना आयुक्त को दिनांक 03 जून 2019 को की। 

   द्वितीय अपील आदेश की अवहेलना पर लगा जुर्माना 

     द्वितीय अपील के लिए पेशी दिनाँक 28 अगस्त 2019 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई जिसमें रीवा संभाग के प्रभारी मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जिसमें जानकारी समय पर उपलब्ध कराए जाने के आदेश दिए। लेकिन मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह के आदेश की अवहेलना होने अन्य धाराओं के उल्लंघन के चलते आयोग ने 250 रुपये प्रतिदिन एवं 15 हज़ार रुपये अधिकतम के हिसाब से पीआईओ पर जुर्माना लगा दिया।

  पीआईओ ने किया लोक सेवा अधिनियम के साथ आरटीआई का उल्लंघन 

    अपने आदेश दिनांक 10 दिसंबर 2019 को मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने लिखा कि लोक सूचना अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने आपको कई धाराओं में दोषी पाते हैं।
    सबसे पहले यह कि लोक सूचना अधिकारी ने लोक सेवा अधिनियम के विरुद्ध चरित्र का परिचय दिया है जिसमे आवेदक को बार बार बुलाकर उससे जानकारी छुपाई, गलत जानकारी दिया, प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम और पता भी नही बताया और प्रथम अपीलीय अधिकारी का पत्र स्वयं लेकर अपने पास रख लिया जिसे प्रथम अपीलीय अधिकारी अर्थात जिला कलेक्टर को भी स्थानांतरित नहीं किया।
    
    इन इन धाराओं के तहत हुई कार्यवाही

   दिनांक 10 दिसंबर के अपने आदेश में मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि सर्वप्रथम लोक सूचना अधिकारी जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र रीवा द्वारा आवेदक विनोद कुमार मिश्र को आरटीआई अधिनियम के तहत 30 दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध नही कराई गई अतः लोक सूचना अधिकारी धारा 7(1) के दोषी पाए गए। 
    इसके बाद लोक सूचना अधिकारी द्वारा यह भी नही बताया गया कि प्रथम अपीलीय अधिकारी कौन है और सूचना छिपाने का भी प्रयास किया गया एवं सूचना न देने का कोई युक्तियुक्त कारण नही बताया गया जिसके कारण लोक सूचना अधिकारी सूचना अधिकार कानून 2005 की धारा 7 की उपधारायें 8(1), (2), (3) का भी दोषी पाया गया।     
   अपीलकर्ता द्वारा लोक सूचना अधिकारी से कई मर्तबा संपर्क किया गया लेकिन हर बार लोक सूचना अधिकारी द्वारा अपीलकर्ता से असहयोग एवं असद्भाव पूर्वक बर्ताव किया जाकर घुमाया गया एवं भ्रमित किया गया जिसके चलते लोक सूचना अधिकारी को आरटीआई कानून की धारा 5(3) का दोषी पाया गया।

  सूचना आयुक्त ने आगे कहा कि लोकसूचना अधिकारी सुधीर कुमार बांडा गैरजिम्मेदाराना रवैया अख्तियार करते हुए सूचना के अधिकार कानून को ताक में रखते हुए जानकारी छुपाना चाहते हैं। जिस प्रकार से मप्र राज्य सूचना आयोग को धता बताकर लोक सूचना अधिकारी ने कई बार सूचना आयुक्त के आदेश का मजाक बनाया एवं आदेश की अवहेलना की एवं सुनवाई में भी अनुपस्थित रहे इससे लोक सूचना अधिकारी के ऊपर आरटीआई की धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत कार्यवाही बनती है।

  सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दिए यह आदेश

    अंत मे मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने आदेश दिए दिए कि लोक सूचना अधिकारी सुधीर कुमार बांडा द्वारा सूचना आयोग के आदेश की अवहेलना और आरटीआई कानून की विभिन्न धाराओं की अवहेलना की गई है जिसके चलते धारा 20(1) के तहत 15 हज़ार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है एवं यह राशि आदेश के एक माह के भीतर आयोग के समक्ष उचित शासकीय विधि सम्मत माध्यमों से जमा की जाय। समयावधि में जुर्माना राशि नही जमा करने पर मप्र सूचना का अधिकार (फीस एवं अपील) नियम 2005 की धारा 8(6) के तहत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।  
    आगे आयोग ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी सुधीर बांडा द्वारा अपीलार्थी को समस्त जानकारी बिना किसी शुल्क के जल्दी से जल्दी दी जाए। साथ ही इस आदेश की एक प्रति आइरीन सिंथिया जेपी संचालक मप्र राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल एवं अशोक भार्गव संभागायुक्त रीवा को भेजी जाय जिससे लोक सूचना अधिकार 2005 को कड़ाई से लागू किया जा सके।

   संलग्न - संलग्न आदेश की प्रतियां। एवं मप्र राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह।

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587

एक्टिविज्म पेशा या जुनून? समस्या है सरकारी पारदर्शिता की || यदि सरकार होगी पारदर्शी और जबाबदेह तो एक्टिविस्टों का कार्य भी होगा सीमित

दिनांक 18 दिसंबर 2019, स्थान - रीवा मप्र

   लोकतांत्रिक परंपरा में वैचारिक अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आवश्यक अंग होता है जिसके चलते हम अपनी बातों को समाज और शासन प्रशासन के समक्ष रखकर उसके विषय मे निष्कर्ष निकालते हैं। 

आरटीआई एक्टिविस्ट कौन हैं? प्रश्न खड़ा करके देश की अपेक्स कोर्ट के माननीय न्यायाधीशों ने यद्यपि इस विषय पर नयी चर्चा प्रारम्भ कर दिया है लेकिन इसके बाबजूद भी सही मायनों में आरटीआई एक्टिविस्ट अथवा सिविल एक्टिविस्ट होना अपने आप मे काफी चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण कार्य है। माननीय जजों ने यद्यपि प्रश्न किया कि क्या यह कोई पेशा हो सकता है? निश्चित ही यह पेमेंट प्राप्त करने वाला पेशा भले ही न हो जिसमें की सरकार अथवा कोई कंपनी/संस्था  किसी को काम के बदले पैसा पे करे लेकिन समाज के उद्धार, भ्रष्टाचार के निरोधन, पारदर्शिता लाने में मदद करने वाले जुनूनी लोगों के लिए यह किसी बिना पेमेंट वाले पेशे से बिल्कुल ही कम नहीं।

  एक्टिविस्ट जुनूनी होते हैं

    एक्टिविस्ट चाहे जो भी हों ज्यादातर जुनूनी होते हैं। एक्टिविस्टों को उस कार्य को पूरा करने का जुनून होता है। शायद माननीय लोग इसे न समझ पाएं क्योंकि उनकी कानून की किताबों में जुनून की परिभाषा हो अथवा न हो। 
     एक्टिविस्ट का कार्य असंभव को संभव करने जैसा होता है। जिसे कल तक समाज यह कहता है कि अरे छोड़ो यह तो हो ही नही सकता, समाज की नजरों में उसी कभी न हो सकने वाले कार्य को ही एक्टिविस्ट और जुनूनी सम्भव कर दिखाते हैं और फिर आने वाले भविष्य में वही असंभव सम्भव होकर नया नियम अथवा समाज का आधार बन जाता है। ऐसा ज्यादातर देखा गया है।

   आरटीआई एक्टिविस्ट होना चुनौतीपूर्ण

   सभी प्रकार के एक्टिविस्ट की तरह आरटीआई एक्टिविस्ट होना भी काफी चुनौतीपूर्ण है। अपने जेब और मेहनत के पैसे से आरटीआई फ़ाइल करना, जबाब न मिलने पर उसकी प्रथम और द्वितीय अपील करना, शासन प्रशासन के साथ माफियाओं और समाज से लड़ना यह सब चुनौतीपूर्ण कार्य आरटीआई एक्टिविस्ट ही करते हैं।
   माननीयों ने तो कह दिया कि आरटीआई एक्टिविस्ट ब्लैकमेलिंग के माध्यम हैं अथवा आरटीआई एक्टिविस्ट लिखना आपराधिक धमकी जैसा है पर आरटीआई एक्टिविस्ट माननीयों से अनुरोध करेंगे कि आप थोड़ा आरटीआई के लिए कार्य करने वाले एक्टिविस्टों की स्थिति और उनकी स्थिति पर भी गौर करें कि उन्हें कौन सी सुरक्षा और कौन सी तनख्वाह मिलती है। 

   एक्टिविस्टों का पारदर्शिता लाने में अभूतपूर्व सहयोग

    शायद सरकार अथवा न्यायपालिका यदि अकेले ही देश, तंत्र और समाज मे पारदर्शिता ला पाती तो चौथे स्तंभ मीडिया की जरूरत ही न पड़ती। ठीक वैसे ही एक्टिविस्ट भी वही रोल आज समाज मे अदा कर रहे हैं। मीडिया की ही तरह अपनी जान जोखिम में डालकर समाज के उत्थान के लिए सतत प्रयत्नशील हैं। सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता, सिविल राइट्स एक्टिविस्ट, एनिमल राइट्स वर्कर सभी का कहीं न कहीं एक ही उद्देश्य होता है कि कैसे वह अपने दायित्यों को पूर्ण करते हुए समाज के बेहतरी सासन प्रशासन में जबाबदेही और पारदर्शिता के लिए कार्य करते रहें।

   उच्चशिक्षित होते हैं बहुतायत एक्टिविस्ट 

   ज्यादातर एक्टिविस्ट अंगूठा और झोलाछाप न होकर काफी शिक्षित और अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने वाले होते हैं। कुछ तो हाई लेवल की शिक्षा दीक्षा प्राप्तकर जब सरकारी कामकाज और सामाजिक ढांचों में व्याप्त बुराइयों को देखते हैं तो वह समाज के लिए कुछ न कुछ अच्छा ठानकर कार्य करते हैं। कोई सामाजिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार देखकर सामाजिक कार्यकर्ता बन जाता है तो कोई बेजुबानों की दुर्दशा देख एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट बन जाता है। तो कोई प्रशासनिक और सरकारी क्षेत्रों में व्याप्त भ्रष्टाचार को देख आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर समाज के समक्ष भ्रष्टाचार उजागर करने में मदद करता है। 

   ऐसे महत्वपूर्ण और त्याग वाले कार्य करने के लिए कोई दमदार त्यागी व्यक्ति ही चाहिए होता है। यह न तो सबके बलबूते की बात है और न ही इसे हर कोई समझ ही सकता है। क्योंकि यदि कोई समझ पाता तो उच्चतम न्यायिक पदों पर बैठे हुए माननीय कभी भी एक जनरलाइज़्ड टिप्पणी नहीं करते। काश माननीय समझ पाते कि कितना मुश्किल है एक्टिविस्ट होना। कभी एक्टिविस्टों की जिंदगी में भी झांकने का प्रयाश होता तो शायद एक्टिविस्टों को धमकी देने वाला न समझा जाता।

   एक्टिविस्ट के नाम का दुरुपयोग संभव
 
    फिर ऐसा भी नही की सभी एक्टिविस्ट सामाजिक चिंतन वाले और अपनी जिम्मेदारियों को समझने वाले ही हों। यह बिल्कुल माना जा सकता है कि कई लोग आरटीआई एक्टिविस्टों का चोला पहनकर कुछ अनैतिक भी कर रहे हों पर उसके लिए शासन प्रशासन को देखने की जरूरत है। यदि ऐसे लोग हों तो उन विशेष लोगों के ऊपर यथोचित कार्यवाही की जा सकती है लेकिन इसके बदले में यह कह देना की सभी आरटीआई एक्टिविस्ट यदि अपने नाम के आगे टाइटल लगाएं वह अपराध है तो यह बात इस लोकतंत्र के लिए काफी दुःखद होगी। 

   सरकार पारदर्शिता लाएं, एक्टिविस्ट अपना काम छोड़ देंगे

    शासन प्रशासन से एक ही माग है की वह अपने सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाये। पारदर्शिता इतनी की स्वच्छ जल जैसे जिसमे कुछ भी देखना हो, एक गिरा हुआ तिनका अथवा पत्थर का छोटा टुकड़ा तो वह स्पष्ट और दूर से ही दिख जाए तब मानेंगे की अब समाज मे एक्टिविस्टों की जरूरत नही है और फिर माननीयों की मंशा के अनुरूप एक्टिविस्ट लोग अपने कार्य से सन्यास ले सकेंगे।
    पर जब तक समाज और सरकार के कार्यों में स्वयं ही प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है और सरकार का कार्य पानी जितना स्वच्छ नहीं होता तब तक अपनी संस्कृति, अपने अधिकारों, अपने आपको अस्तित्व में रखने के लिए, हमारे स्वयं के समाज मे जुड़े हुए अपने लोगों के साथ उनके दुःखों में साथ साथ खड़ा रहने के लिए उस समाज के कुछ अग्रणी लोगों की जरूरत पड़ती ही रहेगी अतः यह इस तंत्र की महती आवश्यकता ही है कि हम न चाहते हुए भी मजबूरन हमे एक्टिविस्ट बनना पड़ रहा है वरना किसे पड़ी थी एक्टिविस्ट बनने की। क्योंकि किसे नही अच्छी लगती शांतिप्रिय और बिना चकल्लस की जिंदगी।
   
    एक्टिविस्टों की समस्या पर भी गौर करें माननीय कोर्ट

    यह बात तो स्वयं माननीयों ने ही कह दिया है कि एक्टिविस्ट होना कोई पेशा नही है। पर क्या गैरसरकारी एक्टिविस्टों को सामान्य नागरिक के बराबर तो अधिकार कम से कम मिलें ही। आज इतने बड़े सिस्टम से, सरकार से, दंड से नौकरशाहों को कोई भय नहीं लग रहा है तो भला बिना विशेष अधिकार प्राप्त आरटीआई एक्टिविस्टों से आज शासन प्रशासन भला क्यों इतना भयभीत होने लगे? भय उसे लगता है जिसमे कोई कमी हो, गलती हो। अतः बेहतर यह होगा कि पूरे सिस्टम और सरकार को कई मोर्चों पर ज्यादा बेहतर और पारदर्शी बनाया जाए जिससे ऐसी कम स्थिति निर्मित हो जिसमें आरटीआई लगाकर जानकारी निकालना पड़े। सरकारों की स्वयं ही ज्यादा से ज्यादा ऐसी व्यवस्था हो जाएं कि अधिकतर कार्य पारदर्शी रहें जिससे न तो आम जनता परेशान हो और न ही शासन प्रशासन पर बैठे अधिकारी कर्मचारी।

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शिवानन्द द्विवेदी
सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587

Sunday, May 20, 2018

पनगड़ी महादेवन शिवमंदिर में कलश यात्रा के साथ सार्वजनिक 7 दिवशीय सवा लाख महामृत्युंजय जप अनुष्ठान प्रारम्भ (मामला रीवा ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र में आने वाले पनगड़ी बीट जंगली क्षेत्र में महादेवन शिवमंदिर में विश्व शांति एवं जीव कल्याणार्थ हो रहे महामृत्युंज सवा लाख जप अनुष्ठान का जिसमे कार्यक्रम का समापन रुद्राभिषेक हवन एवं विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा)

दिनांक 20 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी) 

   रीवा के थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी ग्राम के पावन पुनीत स्थली महादेवन शिव मंदिर में विश्व शांति, सर्वजन कल्याणार्थ एवं सर्वजीव हितार्थ सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों के साथ जप अनुष्ठान का कार्यक्रम दिनांक 20 मई को सुबह 8 बजे कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ हुआ जिसमे पनगड़ी, अतरैला, भठवा, कैथा, मदरी, भौखरी, पताई, बांस, कठमना, लोटनी, हिनौती, सेदहा, नेवरिया, डाढ़, करहिया आदि आसपास के ग्राम क्षेत्र के श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए. 


   कलश यात्रा का कार्यक्रम महादेवन शिव मंदिर में बनाये गए यज्ञशाला से प्रारम्भ होकर पनगड़ी महादेवन जंगल में स्थित प्राकृतिक जलस्रोत तक पहुचा. झरने के पास बैठकर गंगा पूजा का औपचारिक कार्यक्रम कराया गया और इसके साथ ही वहीं झरने से सभी कलशों को पानी के भरकर वापस यज्ञस्थली पावन महादेवन शिव मंदिर के पास लेकर स्थापना की गई.

   इस बीच कलश यात्रा के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण अपने अपने ग्राम क्षेत्र से चलकर जंगली क्षेत्र में स्थित महादेवन शिव मंदिर में पधारे. इस बीच कलश यात्रा में महिलाओं और बालिकाओं ने अपने अपने सिर पर कलश लेकर पैदल यात्रा की. 

   कार्यक्रम के मुख्य यजमान के रूप में पनगड़ी निवासी राम अनंत मिश्रा एवं राजेन्द्र सिंह ने सपत्नीक पूजा अर्चना के कार्यक्रम में भाग लिया. इस बीच पूरे क्षेत्र से उपस्थित भक्त श्रद्धालुओं में रघुराई दास, बद्री पांडेय, शिव शंकर द्विवेदी, सुरेंद्र सिंह, शिवेंद्रमणि शुक्ला, संतोष शुक्ला, अम्बिका पटेल, गौरव शुक्ला, स्वतंत्र शुक्ला, प्रमोद सिंह एवं गैर-सरकारी संस्था श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के राष्ट्रीय संयोजक एवं प्रचारक सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी सहित काफी लोग मौजूद रहे.

   कार्यक्रम में प्रमुख आचार्य श्री गौरीशंकर शुक्ला जी होंगे जो प्रयागराज से दुर्वाशा आश्रम से सेवानिवृत्त संस्कृत के आचार्य हैं साथ ही उनका सहयोग कुल 7 अन्य पंडितगण करेंगे जिनमे हिनौती से आचार्य वरुण शुक्ला और अन्य हैं. कार्यक्रम में सवा लाख महामृत्युंजय जप अनुष्ठान 26 मई तक चलेगा जबकि 27 मई को सम्पूर्ण कार्यक्रम का समापन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा. इस विशेष सार्वजनिक अनुष्ठान में सभी भक्तों एवं श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है. 

संलग्न - दिनांक 20 मई को प्रारम्भ में कलश यात्रा की तस्वीरें यहां पर संलग्न हैं. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

 मोबाइल 07869992139, 09589152587,

Monday, May 14, 2018

पीएम सड़क की एसक्यूएम जांच - हथौड़ा मारा नही की पुलें भरभरा गईं, हथौड़े के हल्के प्रहार ने खोल दी पीएम सड़क पर बनी घटिया पुलों की पोल (मामला ज़िले के गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली 333.43 लाख लागत से बनने वाली अगडाल (लौरी) से कैथा 9.4 किमी एवं भठवा से पनगड़ी पीएम सड़क की गुणवत्ता की जांच का, कैथा एवं पनगड़ी पीएम सड़क की एक बार पुनः हुई एस क्यू एम जांच)

दिनांक 14 मई 2018, स्थान - गढ़ गंगेव रीवा मप्र,

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

  सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी की एनआरआरडीए एवं एमपीआरआरडीए को की गई शिकायत के आधार पर एक बार पुनः जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम का गठन कर जांच के लिए रीवा भेजा गया जिसमे मुख्य रूप से एसक्यूएम रिटायर्ड चीफ इंजीनियर श्री जैन एवं रीवा से सीजीएम यू वी सिंह, मऊगंज जीएम नरवरिया, उपयंत्री गंगेव अमित गुप्ता, उपयंत्री शिवपाल सिंह परिहार, टीएल महेंद्र सिंह, एजीएम सुजीत निगम समेत अन्य पीएम सड़क विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे. जांच के दौरान सोनभद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के कांट्रेक्टर प्रतिनिधि संदीप पांडेय भी उपस्थित रहे.

  अगडाल से कैथा पीएम सड़क की गुणवत्ता प्रश्न के दायरे में

   पहली बार ऐसा हुआ है की इस अगडाल से कैथा 9.4 किमी जो की 3 करोड़ 33 लाख 43 हज़ार की लॉगत से बन रही पीएम सड़क की कुछ हद तक सही मायने में जांच हुई है. चीफ इंजीनियर एवं जांच अधिकारी के तौर पर आये श्री जैन ने सभी आधिकारियों की हवा खिसका दी. जीएम, उपयंत्री, टीएल और ठेकेदार सभी को आड़े हांथों लिया और जांच में सभी बिंदुओं को गहराई से देखा गया. हाफ क्यूबिक मीटर का गड्ढा खोदकर सड़क के बीचोंबीच से मटेरियल निकालकर पूरी तरह से जांच की गई और सभी बिंदुओं को विधिवत मॉनिटर किया गया. सभी जानकारी ली गई. 

पुलो में हथौड़ा मारकर तोड़ा तो भरभरा कर गिर गई

     पुल की जांच के विषय में बात आई तो स्वयं जांच अधिकारी श्री जैन द्वारा पुलों को हथौड़ा मारकर टेस्ट किया गया जिसमे पुलों को ठोंकने पर पुलें भरभरा कर टूट रहीं थी जिससे साफ पता चल रहा था की पुलों में सही मटेरियल का उपयोग न किया जाकर निम्नस्तर का कार्य किया गया है. इस बाबत जांच अधिकारी चीफ इंजीनियर श्री जैन ने उपस्थित टीएल, जीएम, उपयंत्री और ठेकेदार की जम कर खिंचाई की और कहा की आओ आप लोग स्वयं भी थोड़ा हथौड़ा मारकर देखो की कितना घटिया काम किया है. इस बाबत सभी जांच की फ़ोटो और वीडियो भी बनाई गई है.

सामाजिक कार्यकर्ता को सही कार्यवाही का दिया आश्वासन

   इस बीच जांच अधिकारी श्री जैन ने सामाजिक कार्यकर्ता को बताया की आप निश्चिन्त रहिये इसमे बिल्कुल सही और निष्पक्ष कार्यवाही की जाएगी और किसी को भी नही बक्सा जाएगा. श्री जैन ने जीएम नरवरिया, उपयंत्री, टीएल और ठेकेदार सभी को खींचा और कहा की आप सबके कार्यकाल में ऐसा कार्य कैसे हो गया. आप सब किस बात की जांच करने आते थे और क्या मॉनिटरिंग करते थे. विशेषतौर पर मऊगंज पीएम सड़क के अधिकारियों की तो जांच आधिकारी ने जम कर क्लास ली.

भठवा से पनगड़ी पीएम सड़क की भी हुई एस क्यू एम जांच 

  इस बीच अगडाल से कैथा पीएम सड़क की जांच के उपरांत श्री जैन भठवा से पनगड़ी पीएम सड़क की जांच करने पहुचे जहां पर उपस्थित रायबरेली के ठेकेदार की भी जमकर खिंचाई की तथा यह भी कहा की कहीं न कहीं इसके लिए विभाग भी जिम्मेदार है की आखिर दिसंबर वर्ष 2012 का पीएम सड़क का प्रोजेक्ट आज 6 साल तक कैसे पूरा नही किया जा सका. जांच आधिकारी ने सीसी सड़क की जांच करने पर पाया की सीसी सड़क आज से 5 वर्ष पहले बनते ही उखड़ गई थी जिस पर ठेकेदार को कहा की इस पर ऊपर से मोटी परत चढ़ाएं नही तो जाने की तैयारी करलें क्योंकि ठेका तो निरस्त होगा ही साथ ही बड़ी रिकवरी भी होगी.

 जांच के बाद आये होश ठिकाने, ठेकेदार बने रहे भीगी बिल्ली

    कुल मिलाकर बॉडी लैंग्वेज के तौर पर देखा जाए तो यह पहली जांच थी जिसमे लग रहा था की किसी ईमानदार जांच आधिकारी द्वारा जांच की जा रही है जिसे जनता के हित और उसकी भावनाओं की कदर है. अब देखना यह होगा की दिनांक 14 मई 2018 की एसक्यूएम जांच के बाद गंगेव और रीवा के ठेकेदारों के दिमाग ठिकाने आते हैं और साथ ही ज़िले में कार्यरत पीएम सड़क विभाग के अधिकारियों के भी कान में जू रेंगती है की सब कुछ एक बार पुनः पहले जैसे ही चलना शुरू हो जाएगा।

ग्रामीणों ने भी जांच अधिकारी की प्रशंसा की

    यद्यपि इस जांच के दौरान उपस्थित अन्य ग्रामीणजनों ने भी जांच अधिकारी की काफी प्रसंसा की. विशेष तौर पर जांच अधिकारी श्री जैन ने संबंधित ठेकेदारों और पीएम सड़क रीवा के अधिकारियों को उनके कर्तव्य याद दिलाये तो लोगो ने जमकर प्रसंशा की की चलो अच्छा तो है की कोई ऐसा जांच अधिकारी आया है जो चिकनी चुपड़ी बातें कम कर रहा है और काम की बातें ज्यादा कर रहा है.

संलग्न - रीवा ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत बनाई जा रही अगडाल से कैथा पीएम सड़क की जांच करने आये जांच अधिकारी श्री जैन, सीजीएम यू वी सिंह, जीएम नरवरिया, ए जी एम सुजीत निगम आदि की जांच के दौरान तस्वीरें.

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,


मोबाइल - 078699912139,09589152587


Friday, May 4, 2018

पीएम सड़क के किनारे नाली निर्माण न होने से खोद डाली सड़क (मामला ज़िले के मऊगंज पीएम सड़क अंतर्गत कैथा से अगडाल 9.4 किमी पीएम सड़क की बदहाली का, ठेकेदार ने नही डाली पाइप और नही बनाई नाली तो इस बारिस में भर गया पानी, ग्रामीणों ने खोद डाली सड़क)

दिनाँक 05 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में बनाई जा रही पीएम सड़कों के परखच्चे बनते ही उड़ने लगे हैं. घटिया निर्माण की शिकायत तो आम बात है उधर पर्याप्त सामग्री और सही यांत्रिकी न होने की वजह से सड़कों को दूसरे अंदाज़ में भी नुकसान पहुचाया जाता है.

ठेकेदार ने नही बनायी नाली न ही डाला पाइप

  हरिजन बस्ती लौरी के लोगों ने बताया की जब कैथा से अगडाल वाया अकलसी इटहा पीएम सड़क मार्ग का काम चल रहा था तो ग्रामीणों ने पाइप डाले जाने अथवा नाली निर्माण की माग की थी लेकिन ठेकेदार ने गंभीरता से नही लिया और रोड बना दिया. ग्रामीणों ने बताया की रोड भी घटिया बनी है साथ ही नाली न बनने से पानी उनके घरों में घुस गया था जिससे उन्हें मजबूरन सड़क को बीचोबीच से काटना पड़ा नही तो उनके घरों में पानी घुस सकता था.

बस्तियों में नाली निर्माण आवश्यक नही तो पीएम सड़क का होगा सत्यानाश 

    कैथा से अगडाल 9.4 किमी पीएम सड़क के किनारे बसी हुई बस्तियों में नाली निर्माण नही किया गया तो बरसात का पानी ग्रामीणों के घरों में घुसेगा जिससे मजबूरन उन्हें सड़क को काटना पड़ेगा. 


       यह मात्र ठेकेदार और पीएम सड़क के अधिकारियों की मनमानी के चलते ऐसा हो रहा है जिससे ठेकेदार पर कोई लगाम नही है. लोगों ने बताया की यदि उनके घरों के पास नाली नही बनी तो उन्हें हर स्थान से सड़क काटना पड़ेगा जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

अकस्मात खोदी गई सड़क में मात्र दिखा राख और डस्ट का ढेर

   लौरी हरिजन बस्ती के पास रहवाशियों द्वारा पानी भरने की वजह से खोद दी गई पीएम सड़क में  इसकी घटिया गुणवत्ता भी उजागर हुई है. सड़क बीच खोदी नाली के अंदर स्पष्ट रूप से मात्र राख, मिट्टी और डस्ट का ही ढेर दिखा जिसमे 40 और 20 एमएम की गिट्टी तो कहीं दूर दूर तक नामोनिशान नही था. इससे भी स्पष्ट होता है की पिछले दिनों दिखावे के लिए की गई एसक्यूएम जांच भी फ़र्ज़ी ही थी जिसमे अलग अलग कई घेरों में काफी मात्रा में 40 एमएम और 20 एमएम की बाहर से लाई गई गिट्टी का ढेर दिखाया गया था.


संलग्न - थाना गढ़ अन्तर्गत लौरी ग्राम की हरिजन बस्ती के पास इस बरसात का पानी घुसने से काटी गई सड़क किस स्थिति संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,


मोबाइल 7869992139, 9589152587


बांस सहकारी समिति में किसानों पर अत्याचार (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत बांस सहकारी समिति के समिति प्रबंधक की मनमानी का)

दिनांक 05 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

     ज़िले में एक बार फिर सहकारी समितियों में मनमानी हावी हो रही है. समिति प्रबंधकों ने किसानों के साथ लूट मचा कर रखी है. दिए गए खाद बीज से कहीं अधिक कीमत वशूली जा रही है जबकि प्रदेश का मुखिया किसानों के व्याज अनुदान की बात कर रहा है. किसान मारे मारे फिर रहे हैं सबको पर्ची दिखा रहे हैं लेकिन कोई समाधान नही किया जा रहा है.

  बांस समिति प्रबंधक महेंद्र त्रिपाठी डटे हैं 20 वर्ष से

   ज़िले के गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित बैंक अंतर्गत 9 समितियां आती हैं जिनमे एक बांस सेवा सहकारी समिति भी सम्मिलित है. बांस सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक का कार्यभार स्थानीय निवासी महेंद्र त्रिपाठी देखते हैं. बताया गया है की महेंद्र त्रिपाठी बांस समिति में पिछले 20 से अधिक वर्षों से काबिज़ हैं जबकि नियमानुसार सभी समितियों के प्रबंधक एक स्थान पर मात्र 3 वर्ष तक रह सकते हैं. 3 वर्ष के बाद स्थानांतरण होना नियमावली में आता है. परंतु जोर जुगुत लगाकर महेंद्र त्रिपाठी बांस में निरंतर जमे हुए हैं और साथ ही रीवा सहकारिता विभाग की कृपा से इन्हें 6 अन्य समितियों का भी प्रभार दिया गया है जो समझ के परे है.

पडुआ ग्राम के किसान ने लगाया अधिक वशूली का आरोप

  बांस समिति अंतर्गत आने वाले पडुआ ग्राम के पुस्तैनी निवासी रामसिया पटेल पिता प्रह्लाद पटेल ने बताया की उसने 3 अक्टूबर 2017 को 2 बोरी डी ए पी रुपये 2174 में बांस समिति से लिया था जिसे 4 मई 2018 को भरने गया तो समिति प्रबंधक बांस महेंद्र त्रिपाठी ने 2841 रुपये वसूल लिए. 

   पीड़ित रामसिया पटेल ने बताया की इससे बेहतर तो यही था की वह बाजार से ही खाद ले लेता तो इतना लंबा चूना नही लगता. रामसिया पटेल ने आगे बताया की हमारी फसल पूरी इस शूखे में नष्ट हो चुकी है और कोई उपज भी नही हुई साथ ही जबरदस्त घाटा भी लगा है ऐसे में समितियों की लूटाई से किसान और त्रस्त हो जाएगा और आत्महत्या करने पर मजबूर होगा. किसानों ने बताया की एक तरफ मुख्यमंत्री कर्ज़ में व्याज माफी की बात कर रहे हैं और साथ ही मात्र 50 प्रतिशत भरने की बात कर रहे हैं लेकिन समितियां हमसे अधिक वशूली कर रही हैं. पीड़ित रामसिया ने इस पर समिति प्रबंधक के ऊपर कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें पीड़ित किसान रामसिया पटेल पिता प्रह्लाद पटेल निवासी ग्राम पडुआ के 2 बोरी डी ए पी की 2174 की रशीद साथ ही ज्यादा वशूली गयी राशि 2841 रुपये की रशीद दिनांक 4 मई 2018. पीड़ित रामसिया पटेल की फ़ोटो भी संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

7869992139, 9589152587

Tuesday, May 1, 2018

गढ़ सहकारी बैंक में अव्यवस्था का दौर जारी (मामला ज़िले के केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ का, जहां किसानों और उपभोक्ताओं की समस्या का नही हो रहा निराकरण)

दिनांक 01 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   सहकारी बैंकों की कार्यप्रणांली पर पहले ही बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो चुका है. ज़िले के डभौरा और पनवार सहकारी बैंकों और समितियों में पिछले वर्षों हुए घोटाले ने सबकी आंखें खोल दी है. 

   आज बैंकिंग सिस्टम घोटालों का सिस्टम बन गया है. आये दिन किसी न किसी बैंक का फ्रॉड सामने आ रहा है जिसमे कोई न कोई व्यक्ति अरबों खरबों का घोटाला करके देश छोड़ कर भाग रहा है. 

        घोटालों से इतर बात करें तो बैंकों में व्यवस्था को लेकर भी बहुत बड़ा प्रश्न है. चाहे शहरी हो या ग्रामीण हर बैंक में आज उपभोक्ताओं की लंबी लंबी कतार देखी जा सकती है और व्यवस्था के नाम पर कहीं कुछ नही, जबकि देखा जाए तो हर एक सेवा के लिए उपभोक्ताओं को शुल्क देना पड़ता है। आज यदि ईमानदारी से सर्वे किया जाय तो ज़िले क्या पूरे प्रदेश के बैंकों में बहुत ही कम स्थानों पर गर्मियों में पानी की समुचित व्यवस्था, बैठने का समुचित स्थान, पंखे, कूलर वगैरह पाए जाएंगे. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों की तो और भी आधिक दुर्दशा है. यहां तो सारी व्यवस्था भगवान भरोसे ही टिकी होती है.

  ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में नही है इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर 

    यदि अकस्मात बिजली चली जाए तो ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में बिना विद्युत के काम करने का कोई साधन मौजूद नही है. उपभोक्ता शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा मोबाइल फोन और व्हाट्सएप्प के माध्यम से जानकारी दी गई की अभी काफी लंबी छुट्टियों के बाद दिनांक 01 मई को खुले केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक गढ़ में शुबह से ही बिजली गुल हो गई और किसान और दूसरे उपभोक्ता परेशान हो गए. बताया गया की एक वृद्ध किसान उपभोक्ता को तो गर्मी के कारण चक्कर भी आ गया जिसे पास ही लोकल डॉक्टर की क्लिनिक में भर्ती कराया गया तब जाकर उसे होश आया.

   गढ़ सहकारी बैंक में बिजली गुल होना आम बात

   ज़िले के केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा गढ़ में रोज रोज बिजली गुल होना एक आम बात है. यहां कभी कभी तो पूरे दिन भी बिजली गुल रहती है. बिजली वितरण केंद्र कटरा डीसी में संपर्क करने पर बताया जाता है की मेंटेनेंस का काम चल रहा होता है. इनका मेंटेनेंस कभी खत्म ही नही होता जबकि लाइन की समस्या हमेशा ही बनी रहती है. देखा जाए तो मेंटेनेंस वगैरह तो कहीं वर्षों से नही हुए हैं क्योंकि टूटे झूलते तार और खंभे इसके जीवंत उदाहरण है पर मेंटेनेंस के नाम पर ये बिजली कंपनी लाइन कटौती जमकर कर रही है.

किसानों ने गिनाई दर्जनों समस्याएं

    दिनांक 01 मई श्रमिक दिवश के दिन बैंक की गढ़ शाखा में उपस्थित किसानों जिनमे मुख्य रूप से रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि मौजूद थे जिहोने बताया की वह लगभग हर दिन बैंक के चक्कर लगाते हैं लेकिन उन्हें अपने गेहूं धान के पैसे नही दिए जा रहे हैं. बैंक में आते हैं तो बताया जाता है की आज नही कल आईये हमारे पास कैश नही है. किसानों ने बताया की यदि वह 10 हज़ार रुपये का निकासी फॉर्म भरते हैं तो उन्हें मात्र 2 हज़ार रुपये दिए जाते हैं.

  पेयजल, पंखे और बैठने तक की नही कोई व्यवस्था 

   सभी किसानों ने एक स्वर में बताया की बैंक के अंदर न तो पेयजल की कोई व्यवस्था है और न ही उठने बैठने की, साथ ही यह भी बताया की बैंक में आज तक उनके बैंक पासबुक में प्रिंटिंग तक नही की गई है. जब कभी प्रिंटिंग की बात करते हैं तो बताया जाता है की प्रिंटर खराब है और रीवा बनने को भेजा है जिससे किसानों को उनके जमा निकासी की समुचित जानकारी नही मिल पाती.

समिति प्रबंधक कर रहे मनमानी 

    किसानों द्वारा बताया गया की समितियों के खरीदी केंद्रों में 15 दिन पहले गेहूं दिए थे लेकिन सहकारी बैंक में डीएमआर खाता होने के वावजूद भी उनके एकाउंट में गेंहूँ  के पैसे नही डाले गए हैं. किसानों रामशंकर मिश्रा और अमरनाथ मिश्रा ने बताया की उनके घर में कई कार्यक्रम हैं जिसमे पैसे की जरूरत थी और बैंक पऔर समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से गेहूं का पैसा खातों में डालने में हीलाहवाली की जा रही है और आज से कल किया जा रहा है साथ ही जिनके खातों में पैसे डले हुए हैं उन्हें पैसा नही दिया जा रहा है जिससे उनके कार्यक्रम में नोटबन्दी जैसी स्थिति निर्मित हो गई है जैसे पिछले साल नोटबन्दी के समय पर पैसों की भारी किल्लत हो गई थी.

   किसानों के खातों में पैसे नही भेजे तो होगा आंदोलन 

   केंद्रीय जिला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में उपस्थित किसानों ने बताया की यदि उनके खातों में गेंहूँ के पैसे अगले दिन तक नही भेजे गए और उनको अपने खातों की पूरी राशियां उनकी अवस्यक्तानुरूप नही मिली तो उपस्थित किसान रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि किसानों ने बताया की वह सब आंदोलन करने पर मजबूर होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी।

किसानों ने की सहकारी बैंक गढ़ में इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर की माग

   उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर में माग की यदि रोज रोज़ बिजली की किल्लत बनी रहती है तो बैंक प्रबंधन को चाहिए की इन्वर्टर अथवा जनरेटर की व्यवस्था कराए. किसानों ने बताया की आखिर इतना बड़ा बैंक है जिसमे नौ सहकारी समितियों से संबंधित किसानों के खाते हैं और इतना अधिक लेनदेन हो रहा है, हज़ारों डीएमआर खाते खोले जा चुके हैं तो यह कैसे हुआ की इनके पर एक इन्वर्टर और जनरेटर लेने तक की व्यवस्था नही है. सभी किसानों ने बताया की बैंक कर्मचारियों का काम न करने का यह बहाना मात्र है जिसमे कभी लाइन, तो कभी प्रिंटर खराब तो कभी सर्वर की प्रॉब्लम बता कर अपनी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में ज़िला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा गढ़ में अव्यवस्था का दौर जारी।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587