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Saturday, August 4, 2018

अवैध कब्जा कर घर में घुसकर जान से मारने के धमकी (मामला ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा पंचायत का जहां लोहार बस्ती में मुरलीधर नामक व्यक्ति द्वारा अनायास ही दशकों से बशे हुए पुस्तैनी बाशिन्दों दिनेश विश्वकर्मा वगैरह के परिवार को परेशान किया जा रहा, पीड़ितों ने एसपी, आईजी और थाने में लगाई गुहार)

दिनांक 04 अगस्त 2018, स्थान - गढ़, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   जमीनी मामलों को लेकर और राजस्व विभाग की कमियों के चलते विबाद बढ़ते जा रहे हैं. मामला तहसीलदार, एसडीएम आदि से निर्देश के बाद भी सुलझने का नाम नही ले रहा है. न्यायालयीन आदेश का तामील न हो पाने से समस्या और भी गंभीर होती जा रही है. 

    इसी प्रकार का एक मामला थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम पंचायत अन्तर्गत ग्राम कैथा का है जहां पर पुराने पंचायत भवन के पास पुस्तैनी निवासी लोहार परिवार रहता है. आज 50 वर्षों से अधिक समय से हल्का पटवारी इटहा नंबर 2 तहसील मनगवां की आराज़ी नंबर 69 के अंस भाग 71 डिसमिल में कुल 25 लोगों का परिवार निवास कर रहा है. लेकिन वहीं पर पड़ोस में स्थित मुरलीधर पटेल नामक व्यक्ति पिछले कई वर्षों से पीड़ितों को परेशान कर रहा है. पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा, नंदिका विश्वकर्मा, पिंटू विश्वकर्मा आदि द्वारा बताया गया की इटहा हल्का पटवारी रावेंद्र त्रिपाठी ने सीमांकन कर पथरगड़ी किया था और साथ ही 10 डिसमिल के आसपास जमीन बारी, आम सब पटवारी के कहने पर लोहारों ने छोंड़ दिया था लेकिन अब समझौता के बाद भी जबरन पुनः आरोपी मुरलीधर पटेल लोहारों को परेशान कर रहा है, उनकी बारी काट रहा है, रोकने पर दाई माई की गाली देकर घर में घुसकर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है. इस कृत्य में मुरलीधर पटेल का लड़का मिथिलेश पटेल भी समिलित है. इस बाबत पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा ने गढ़ थाना जाकर दिनांक 03 अगस्त 2018 को लिखित रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है और जान माल की रक्षा की गुहार लगाई है.

   लेकिन अब तक इस विषय में पुलिश ने कोई ध्यान नही दिया है और मात्र जमीनी मामला बोलकर पल्ला झाड़ रही है. पीड़ित ने बताया है की यदि पुलिश हस्तक्षेप कर उसके जान माल की रक्षा नही करती है तो उसको जान से मारने का खतरा बना हुआ है साथ ही विबाद की भी स्थिति बनी हुई है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा थाना गढ़ में दिए गए आवेदन/शिकायत के साथ.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल नंबर 7869992139, 9589152587

Saturday, July 7, 2018

लालगांव यूनियन बैंक एटीएम मशीन से 10 हज़ार गायब, पीड़ित भटक रहा दर दर (मामला ज़िले के बैंक एटीएम में हो रही चोरियों का, लालगांव यूनियन बैंक के एटीएम में ट्रांसक्शन पास होने के बाद भी पीड़ित को नही मिले उसके 10 हज़ार, अब दर दर चक्कर लगाने को मजबूर, न पुलिश सुन रही न बैंक)

दिनांक 08 जुलाई 2018, स्थान - गढ़/लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   तकनीक के अविष्कार के साथ ही समस्याएं भी बढ़ रही हैं. तकनीक मशीन पर निर्भर है अब यदि मशीन ही धोखा दे दे तो किसे दोष दिया जाए.

   आज कल मनी ट्रांसक्शन के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके ईजाद किये जा चुके हैं. कैश प्राप्ति और जमा के लिए एटीम मशीनें तो थीं ही अब आजकल ऑनलाइन और मोबाइल ट्रांसक्शन के लिए भी एप्प आ चुके हैं जिससे सेकंडों में कोई भी मोबाइल के माध्यम से ट्रांसक्शन कर सकता है. अब गौर करें की क्या हो यदि इस पूरे सिस्टम में कोई वायरस आ जाए अथवा ट्रांसक्शन फैल हो जाए अथवा कोई पासवर्ड हैक कर ले. इनमें से किसी भी स्थिति में समस्या बढ़ना स्वाभाविक है. क्योंकि यदि बैंक में कैशियर से कम पैसा मिला अथवा मानवीय भूल हो गई तो समस्या को लेकर सीधे बैंक पहुच जाएं और समस्या का समाधान हो जाएगा. लेकिन यदि मशीनी गड़बड़ी के चलते अथवा एटीएम फ्रॉड के चलते कुछ गड़बड़ हुआ तो उसे पकड़ने के लिए अभी भी भारतीय और प्रदेश की पुलिश और बैंक व्यवस्था उतनी मुस्तैद समझ नही आती. मानाकि तकनीकी विकास अच्छा है लेकिन उनके लिए तो बेकार ही है जिन्हें तकनीक का ज्यादा ज्ञान ही नही और उतने चलते पुर्जे के नही. इसलिए अभी भी भारत और विशेष तौर पर गांव के लोगों के लिए इस तकनीक का क्या मतलब है स्पष्ट नही हो पा रहा है. 

कीओस्क संचालकों की भी आ रही शिकायतें 

 आज बैंक के कीओस्क में गांव के लोगों को खड़े खड़े वेवकूफ बना दिया जा रहा है. कीओस्क केंद्रों के बहुत से मामले आज प्रकाश में आ रहे हैं. गांव के बुजुर्ग, कम पढ़े लिखे अथवा अनपढ़ लोग जब कीओस्क में पैसा निकालने अथवा जमा करने जाते हैं तो उन्हें कोई पर्ची अथवा रसीद नही दी जा रही है. तत्काल ही उनके पासबुक में एंट्री नही की जा रही. इससे कई बार कीओस्क संचालक अधिक पैसे की निकासी को कम बताकर कुछ अपने पास रख लेते हैं और जब हो हल्ला होता है तब जाकर कहीं पता चलता है. बैंकिंग सिस्टम में ही यदि विश्वसनीयता नही रही तो कैसे जनता का हित होगा, कैसे जनता का कल्याण होगा और कैसे जनता की समस्याओं का समाधान होगा.

यूनियन बैंक लालगांव का एटीएम फ्रॉड 

   दिनाँक 22 मई 2018 को कठमना निवासी संजय कुमार गौतम लगभग ढाई बजे के आसपास लालगांव एटीएम से पैसा निकालने गए. उन्होंने अपने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक खाते क्रमांक 580502010005679 से एटीएम के माध्यम से 10 हज़ार रुपये निकालने के लिए पिन और अमाउंट मशीन में डाला. लेकिन इसके वावजूद भी एटीएम से पैसा नही निकला. संजय गौतम द्वारा बताया गया की एटीएम मशीन हैंग कर गई और उसमे कोई प्रतिक्रिया ही नही हुई. प्रतिक्रिया न होने की स्थिति में संजय ने पुनः वही प्रक्रिया अपनाई लेकिन फिर से पैसा एटीएम से नही निकला. इस पर वहीं कुछ दो तीन लोग उनके पीछे खड़े थे. जिंसमे से एक व्यक्ति पूरा वाकया देख रहा है. उसने एटीएम मशीन की किसी बटन को दबाया और बोला की ट्रांसक्शन फैल हो गया है अब आप साइड हो जाएं हम पैसा निकालते हैं. इस पर उन लोगों ने कुछ किया और उनका रुपया निकल आया. पीड़ित संजय गौतम यह समझ कर की उनका ट्रांसक्शन फैल हो गया है वहां से  चले आये और बैंक में जानकारी लेने का प्रयाश किया. जब संजय ने पासबुक में एंट्री कराई तो पता चला की ट्रांसक्शन फैल नही हुआ है बल्कि क्लियर बताया जा रहा है और दिनांक 22 मई 2018 के दिन को 10 हज़ार रुपये उनके एकाउंट से उसी एटीएम द्वारा निकले हुए बताए जा रहे हैं.

बैंक प्रबंधन बना लापरवाह 

  पूरा वाकया संजय गौतम ने यूनियन बैंक मैनेजर को बताया. लेकिन बैंक से कोई मदद नही मिली. बैंक ने बताया की पैसा निकल चुका है अतः इसमे बैंक की कोई जिम्मेदारी नही. इस पर संजय गौतम थाना गढ़ और लालगांव चौकी जाकर दिनाँक 01 जून 2018 को रिपोर्ट दर्ज करवाई. जहां पर काफी समय बाद कोई सिपाही जांच के लिए यूनियन बैंक आया और बैंक मैनेजर से मिला. बैंक मैनेजर ने दिनांक 22 मई का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराया तो पता चला की लगभग ढाई बजे तीन लोग संजय गौतम के बाद एटीएम से पैसा निकालने का प्रयास कर रहे हैं जिनमे से एक व्यक्ति सीसीटीवी कैमरे की तरफ काफी संदिग्ध परिस्थिति में देख रहा है. पुलिश ने जानकारी ले ली लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नही की. सीसीटीवी फुटेज में आया फ़ोटो भी संजय गौतम ने बैंक मैनेजर यूनियन बैंक से ले लिया है. 

यूनियन बैंक प्रबंधन गैरजिम्मेदार

    दिनाँक 7 जुलाई 2018 को एकबार फिर पीड़ित संजय गौतम ने यूनियन बैंक जाकर बैंक मैनेजर को लिखित शिकायत दर्ज कराई है. लेकिन बैंक मैनेजर ने अपने जबाब में उसी शिकायत की पावती के पीछे अंग्रेज़ी भाषा में स्पष्ट रूप से लिख दिया है की एटीएम से पैसे निकल चुके हैं अतः बैंक की कोई जिम्मेदारी नही है. बैंक ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और संदिग्धों की  फ़ोटो उपलब्ध करवा दी है अतः अब आगे का कार्य मात्र पुलिश का है की वह जांच कर कार्यवाही करे यह कहना है बैंक प्रबंधन का।

एटीएम फ्रॉड लालगांव यूनियन बैंक में हुआ लेकिन बैंक प्रबंधन नही ले रहा कोई जिम्मेदारी

    यदि देखा जाए तो यदि एटीएम फ्रॉड अंदर हो रहा है तो कस्टमर सपोर्ट के लिए बैंक को स्वयं चाहिए की अपने उपभोक्ता हितग्राही की हर संभव मदद करे. जिस प्रकार के संजय गौतम के केस में बैंक मैनेजर लालगांव यूनियन बैंक ने पीड़ित के साथ ट्रीट किया है उससे पीड़ित संजय गौतम स्वयं भी काफी व्यथित है. पीड़ित का कहना है की न तो हमारा पुलिश सुन रही और न ही बैंक प्रबंधन, ऐसे में वह गरीब कहां जाए. बताया गया की संजय गौतम ने यह पैसा कहीं से उधार लिया हुआ था जिसको उसकी बच्ची के फीस के लिए देना था. अब उसके लिए बच्चों के फीस देने की समस्या भी उत्पन्न हो चुकी है जबकि विद्यालय प्रारम्भ हो चुके हैं. पीड़ित संजय गौतम ने इस बाबत यूनियन बैंक के कस्टमर केयर के टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत दर्ज करवाई है लेकिन वहां से भी अब तक कोई सार्थक निराकरण नही हुआ है. 

सीसीटीवी फुटेज में पीड़ित ने पैसा नही निकाला तब पैसा कहाँ गया?

  प्रश्न यह उठता है की जब सीसीटीवी फुटेज में पीड़ित ने स्वयं भी पैसा नही निकाला और एटीएम हैंग कर गया तो पैसा आखिर गया कहाँ? एटीएम ट्रांसक्शन क्लियर बता रहा है फिर पैसा गया कहाँ? स्वाभाविक है की इसके ठीक बाद जिस व्यक्ति ने उस एटीएम का प्रयोग किया उसी ने पैसा निकाला. तब आखिर बैंक प्रबंधन यह क्यों नही बता रहा की किस एकाउंट नंबर के किस व्यक्ति का अगला एटीएम कार्ड यूनियन बैंक लालगांव के उस एटीएम मशीन में डाला गया. जो भी बाद का एटीएम कार्ड डाला गया पैसा उसी व्यक्ति ने निकाला. अब यदि अगले व्यक्ति के खाते से पैसे कटे हैं तब कौन पैसा निकाला इसकी जांच हो अन्यथा यदि अगले व्यक्ति के एटीएम एकाउंट से पैसे कटे ही नही और पैसे 10 हज़ार निकल गए तो स्वाभाविक रूप के पैसा उसी अगले व्यक्ति ने ही निकाला.

संभव है सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा तीसरा व्यक्ति ने किया हो फ्रॉड

    अब जैसा की यूनियन बैंक लालगांव द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से दिख रहा है की वहां पर गेट के पास एक तीसरा संदिग्ध व्यक्ति भी मौजूद है जो वहीं आसपास घूम रहा है और फिर वही व्यक्ति एटीएम मशीन के पास आकर एटीएम मशीन के कुछ छेड़खानी कर रहा है. वह तीसरा व्यक्ति कौन है और क्या कर रहा है? जो अन्य दो व्यक्ति एटीएम से पैसे निकाल रहे हैं उनका इस तीसरे व्यक्ति से क्या संबंध है? क्यों यह तीसरा व्यक्ति उन अन्य दो व्यक्तियों की पैसे निकलने में मदद कर रहा है? आखिर क्या माजरा है? वास्तव में यह सब तत्काल ही स्पष्ट हो जाए लेकिन न तो पुलिश को हो कोई रुचि है और न ही यूनियन बैंक प्रबंधन को ही. 

   सामाजिक कार्यकर्ता का लिया अंतिम सहारा 

     इस बीच पीड़ित संजय कुमार गौतम निवासी कठमना दर दर की ठोकर खाने मजबूर है और इसी तारतम्य में दिनाँक 7 जुलाई 2018 को पीड़ित ने अंततः सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी से संपर्क किया. इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के हेड ब्रांच को भी लिखित रूप से ईमेल भेज दया गया है और जांच कर कार्यवाही की माग की गई है. मामला चाहे करोड़ों अरबों का हो अथवा सैकड़ों और हज़ार रुपये का. फ्रॉड तो फ्रॉड ही है. मानाकि की रसूखदार और अरबपतियों के लिए हज़ारों अथवा लाखों का कोई मायना न होगा परंतु एक गरीब व्यक्ति के लिए तो एक एक पैसे का काफी महत्व है. आखिर उधार लिए हुए पैसे से पीड़ित संजय गौतम अपने बच्चों के फीस की व्यवस्था करना चाह रहा था तो उसकी भरपाई कौन करेगा. बैंक ही अपने फण्ड से गरीब संजय गौतम को क्यों नही दे देता 10 हज़ार रुपये. और यदि नही देता तो वैधानिक जांच कर कार्यवाही करवाये बैंक स्वयं तह तक जाए। क्योंकि इस प्रकार के बैंक एटीएम फ्रॉड में बैंक प्रबंधन की ज्यादा गलती है उपभोक्ता की कम. फ्रॉड बैंक प्रेमिसेस एटीएम मशीन के भीतर से हुआ है न की एटीएम मशीन के बाहर से. यहाँ एटीएम मशीन की गड़बड़ी की वजह से पैसा नही निकला न की उपभोक्ता की गलती की वजह से. यदि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया लालगांव शाखा को ऐसा लगता है की उपभोक्ता की गलती थी तो यह सिद्ध करे की गलती उपभोक्ता की थी. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एटीएम मशीन ने अमाउंट और कोड डालने के बाद भी 10 हज़ार रुपये बाहर क्यों नही निकाले, क्योंकि यदि निकाले होते तो उपभोक्ता संजय गौतम सीसीटीवी फुटेज में पैसा लेकर बाहर निकला होता. इसलिए पूरे मामले में खामी बैंक प्रबंधन की है. बैंक प्रबंधन को एटीएम मशीन के अंदर एक सुरक्षा गॉर्ड सह हेल्पर बैठाना चाहिए जो कम पढ़े लिखे तकनीकी दृष्टि से कम शिक्षित ग्रामीण उपभोक्ताओं की मदद करें.

संलग्न - 1) संलग्न तस्वीरों में देखें ज़िला रीवा अंतर्गत लालगांव यूनियन बैंक के हितग्राही संजय कुमार गौतम पीड़ित की शिकायत के साथ तस्वीर. 2) पीड़ित संजय गौतम द्वारा संबंधित थाना गढ़ और लालगांव चौकी में दिनाँक 1 जून 2018 को दिए गए लिखित शिकायत की प्रति. 3) बैंक प्रबंधन लालगांव द्वारा पीड़ित संजय गौतम को सीसीटीवी फुटेज से उपलब्ध करायी गई संदिग्धों की तस्वीर. 4) पीड़ित द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बैंक प्रबंधक के नाम दिनांक 7 जुलाई 2018 को दिए गए शिकायत की प्रति. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला - रीवा मप्र, मोब 7869992139, 9589152587

Wednesday, May 23, 2018

वेद का हृदय है महामृत्युन्जय मन्त्र (रीवा में थाना गढ़ क्षेत्र के पनगड़ी महादेवन शिव मन्दिर में सवा लाख महामृत्युन्जय जप यज्ञ का चौथा दिवश, भारी तादाद में भक्तों का जमावड़ा)

दिनांक 23 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव/कैथा, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    हिन्दू पंचांग के पवित्र पुरुषोत्तम मास या मलमास या अधिमास में जगह जगह धार्मिक आयोजन और अनुष्ठान हो रहे हैं. पूरा देश अधिमास के रंग में रंग चुका है. गर्मी और तापमान की चिंता न करते हुए भक्त श्रद्धालुगण अपने अपने पूज्य इष्टदेव की पूजा अर्चना में ज्यादा से ज्यादा समय व्यतीत कर रहे हैं. कोई अपने घर गांव में तो कोई तीर्थस्थलों में जाकर प्रभु आराधना में लीन हैं. देश के विभिन्न कोनों में स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों में कोने कोने से लोग जाकर सफर कर रहे हैं और अमूल्य जीवन को धन्य बनाने में जुटे हुए हैं. 

    बाबा धाम, केदारनाथ, बद्रीनाथ, प्रयाग, काशी, मथुरा, रामेश्वरम, कामाख्या आदि के लिए बुक की गई बसों का तांता हर गांव शहर में लगा हुआ है. 

   पनगड़ी महादेवन में सवा लाख महामृत्युन्जय जप महायज्ञ का चौथा दिवश

    दिनांक 23 मई 2018 को ज़िले के थाना गढ़ स्थित पनगड़ी महादेवन शिव मंदिर में महामृत्युन्जय जप महायज्ञ का चौथा दिवश रहा. इस बीच भारी संख्या में भक्त श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. दर्शनाभिलाषी और सत्संगाभिलाषी श्रद्धालुओं में आम नागरिक से लेकर जनप्रतिनिधि तक सम्मिलित हुए. क्षेत्र के जनपद सदस्य, ज़िला पंचायत सदस्य, सरपंच, सचिव से लेकर हर तबके के भक्तगण इस विशेष धार्मिक अनुष्ठान में सहयोगी एवं इसके साक्षी बन रहे हैं. 

  सार्वजनिक सहयोग से हो रहा आयोजन 

   यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान सभी जनमानस के सार्वजनिक सहयोग से संचालित हो रहा है जिसमे हर  स्तर के भक्त श्रद्धालुगण अपना मनसा कर्मणा वाचा सहयोग प्रदान कर रहे हैं. जो भक्त आर्थिक दृष्टि से सक्षम हैं वह अपना आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं, जो शारीरिक दृष्टि से सक्षम हैं वह अपना शारीरिक श्रम से योगदान दे रहे हैं. इस प्रकार यह एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमे हिन्दू समाज के हर तबके के लोग बिना किसी भेदभाव के अपना यथासंभव सहयोग प्रदान कर रहे हैं.

  प्रकृति के गोद में खेलता हुआ महादेवन शिवधाम

     रीवा ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत आने वाला महादेवन शिवधाम ऐसे मनोरम स्थल पर है जहां एक तरफ लौंगा पहाड़ और जनकहाई की हरी भरी घाटियां हैं तो दूसरी तरफ प्राकृतिक जलस्रोतों से प्रवाहित होता हुआ शानदार झरना. इस स्थान पर आने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी पिकनिक स्पॉट पर आ गए हों. पनगड़ी बीट के जंगलों के बीचोंबीच बना हुआ भगवान शिव और माता शक्ति का यह छोटा सा धाम किसी फेमस तीर्थस्थल की ही याद दिलवाता है. 

    महादेवन शिवधाम में पहुचने के लिए रीवा में कलवारी-क्योटी रोड से भठवा नामक बस स्टैंड पर उतरकर पनगड़ी वाली रुट लेते हुए पनगड़ी क्रेशर का रास्ता पकड़ा जाता है. पनगड़ी क्रेशर प्लांट के रास्ते से लगा हुआ पनगड़ी का जंगल है जिसमे अंदर कच्चा मार्ग लगभग डेढ़ किमी का है. अमूमन इस स्थल पर बरसात में छोड़कर सभी अन्य मौसमो में आया जा सकता है.

वेदों का हृदय है महामृत्युन्जय मंत्र

     शुभा दुबे के द्वारा लिखित इस लेख में महामृत्युन्जय मंत्र की विशेषता बतायी गई है जिसमे इस विशेष मंत्र को वेदों का हृदयस्थली बताया गया है.

     बताया गया कि यदि आप बहुत बीमार हैं या फिर किसी दुर्घटना के शिकार हो गये हैं या मन आशंकित है तो महामृत्युंजय जप का जाप करना चाहिए। इस मंत्र के जाप से मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। महामृत्युंजय मंत्र "मृत्यु को जीतने वाला महान मंत्र" है जिसे त्रयम्बकम मंत्र भी कहा जाता है। इस मंत्र में शिव को 'मृत्यु को जीतने वाला' बताया गया है। यह गायत्री मंत्र के समकालीन हिंदू धर्म का सबसे व्यापक रूप से जाना जाने वाला मंत्र है। इस मंत्र के कई नाम और रूप हैं। इसे शिव के उग्र पहलू की ओर संकेत करते हुए रुद्र मंत्र कहा जाता है; शिव की तीन आँखों की ओर इशारा करते हुए त्रयम्बकम मंत्र और इसे कभी कभी मृत-संजीवनी मंत्र के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह कठोर तपस्या पूरी करने के बाद पुरातन ऋषि शुक्र को प्रदान की गई "जीवन बहाल" करने वाली विद्या का एक घटक माना गया है। ऋषि-मुनियों ने महा मृत्युंजय मंत्र को वेद का हृदय कहा है। चिंतन और ध्यान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अनेक मंत्रों में गायत्री मंत्र के साथ इस मंत्र का सर्वोच्च स्थान है।

ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम।

उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।

 

-यदि भय से छुटकारा पाना चाहते हैं तो 1100 बार इस मंत्र का जप करें।

 

-रोगों से यदि मुक्ति पाना चाहते हैं तो 11000 मंत्रों का जप करें।

 

-पुत्र की प्राप्ति और अकाल मृत्यु से बचने के लिए सवा लाख की संख्या में मंत्र जप किया जाता है। अकसर इसके लिए पंडितों को संकल्प दिलाकर सवा लाख मंत्रों का जाप कराया जाता है।

 

-जपकाल के दौरान पूर्ण रूप से सात्विक रहना चाहिए।

 

-मंत्र के दौरान साधक का मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

 

-मंत्र का जाप शिवमंदिर में रूद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए।

 

-मंत्र का उच्चारण बिल्कुल शुद्ध और सही होना चाहिए तथा मंत्र की आवाज मुंह से बाहर नहीं निकालें।

 

-इस मंत्र को करते समय धूप-दीप जलते रहना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें।

 

-महामृत्युमंजय मंत्र का जाप करते वक्त शिवलिंग में दूध मिले जल से अभिषक करते रहें।

 

-मंत्र का जाप कोई आसन या कुश का आसन बिछा कर करें।

 

-महामृत्युंजय मंत्र का जाप एक निर्धारित जगह में ही करें। रोज जगह नहीं बदलें।

 

-अमूमन व्यक्ति को सदैव ही शाकाहारी होना चाहिए पर फिर भी जितने भी दिन मंत्र का जाप करें उतने दिन मांसाहार से सर्वथा दूर रहें।

हवन एवं भण्डारा 27 मई को 

     विश्व शांति एवं जीव कल्याणार्थ आयोजित इस विशेष सवा लाख महामृत्युन्जय जप अनुष्ठान का हवन एवं विशाल भंडारे के साथ विसर्जन दिनांक 27 मई को किया जाएगा. यह एक सार्वजनिक धार्मिक अनुष्ठान है जो सभी लोगों के छोटे बड़े सार्वजनिक सहयोग से संचालित हो रहा है जिसमे सभी श्रद्धालुओं के सहयोग के साथ साथ सभी की उपस्थिति की आशा की जा रही है. हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के विसर्जन पर आयोजित होने वाला हवन और भंडारे का एक अति विशेष महत्व होता है अतः सभी भक्तों को नहा धोकर साफ सुथरे वस्त्र धारण कर हवन सामग्री के साथ हवन प्रक्रिया में अवश्य भाग लेना चाहिए और भंडारे के प्रसाद भी ग्रहण करना चाहिए. अनुष्ठान के प्रसाद में मुक्ति का मार्ग छुपा होता है जिससे तामसिक बुद्धि शुद्ध होकर सात्विक बनती है और हम अपने मुक्ति के लिये स्वयं ही तत्पर हो जाते हैं.

संलग्न - रीवा ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी से सटे हुए महादेवन शिवधाम में आयोजित सवा लाख महामृत्युन्जय जप महायज्ञ के चौथे दिवस चल रहे कार्यक्रम की तस्वीरें.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Tuesday, May 1, 2018

गढ़ सहकारी बैंक में अव्यवस्था का दौर जारी (मामला ज़िले के केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ का, जहां किसानों और उपभोक्ताओं की समस्या का नही हो रहा निराकरण)

दिनांक 01 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   सहकारी बैंकों की कार्यप्रणांली पर पहले ही बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो चुका है. ज़िले के डभौरा और पनवार सहकारी बैंकों और समितियों में पिछले वर्षों हुए घोटाले ने सबकी आंखें खोल दी है. 

   आज बैंकिंग सिस्टम घोटालों का सिस्टम बन गया है. आये दिन किसी न किसी बैंक का फ्रॉड सामने आ रहा है जिसमे कोई न कोई व्यक्ति अरबों खरबों का घोटाला करके देश छोड़ कर भाग रहा है. 

        घोटालों से इतर बात करें तो बैंकों में व्यवस्था को लेकर भी बहुत बड़ा प्रश्न है. चाहे शहरी हो या ग्रामीण हर बैंक में आज उपभोक्ताओं की लंबी लंबी कतार देखी जा सकती है और व्यवस्था के नाम पर कहीं कुछ नही, जबकि देखा जाए तो हर एक सेवा के लिए उपभोक्ताओं को शुल्क देना पड़ता है। आज यदि ईमानदारी से सर्वे किया जाय तो ज़िले क्या पूरे प्रदेश के बैंकों में बहुत ही कम स्थानों पर गर्मियों में पानी की समुचित व्यवस्था, बैठने का समुचित स्थान, पंखे, कूलर वगैरह पाए जाएंगे. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों की तो और भी आधिक दुर्दशा है. यहां तो सारी व्यवस्था भगवान भरोसे ही टिकी होती है.

  ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में नही है इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर 

    यदि अकस्मात बिजली चली जाए तो ज़िला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में बिना विद्युत के काम करने का कोई साधन मौजूद नही है. उपभोक्ता शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा मोबाइल फोन और व्हाट्सएप्प के माध्यम से जानकारी दी गई की अभी काफी लंबी छुट्टियों के बाद दिनांक 01 मई को खुले केंद्रीय ज़िला सहकारी बैंक गढ़ में शुबह से ही बिजली गुल हो गई और किसान और दूसरे उपभोक्ता परेशान हो गए. बताया गया की एक वृद्ध किसान उपभोक्ता को तो गर्मी के कारण चक्कर भी आ गया जिसे पास ही लोकल डॉक्टर की क्लिनिक में भर्ती कराया गया तब जाकर उसे होश आया.

   गढ़ सहकारी बैंक में बिजली गुल होना आम बात

   ज़िले के केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा गढ़ में रोज रोज बिजली गुल होना एक आम बात है. यहां कभी कभी तो पूरे दिन भी बिजली गुल रहती है. बिजली वितरण केंद्र कटरा डीसी में संपर्क करने पर बताया जाता है की मेंटेनेंस का काम चल रहा होता है. इनका मेंटेनेंस कभी खत्म ही नही होता जबकि लाइन की समस्या हमेशा ही बनी रहती है. देखा जाए तो मेंटेनेंस वगैरह तो कहीं वर्षों से नही हुए हैं क्योंकि टूटे झूलते तार और खंभे इसके जीवंत उदाहरण है पर मेंटेनेंस के नाम पर ये बिजली कंपनी लाइन कटौती जमकर कर रही है.

किसानों ने गिनाई दर्जनों समस्याएं

    दिनांक 01 मई श्रमिक दिवश के दिन बैंक की गढ़ शाखा में उपस्थित किसानों जिनमे मुख्य रूप से रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि मौजूद थे जिहोने बताया की वह लगभग हर दिन बैंक के चक्कर लगाते हैं लेकिन उन्हें अपने गेहूं धान के पैसे नही दिए जा रहे हैं. बैंक में आते हैं तो बताया जाता है की आज नही कल आईये हमारे पास कैश नही है. किसानों ने बताया की यदि वह 10 हज़ार रुपये का निकासी फॉर्म भरते हैं तो उन्हें मात्र 2 हज़ार रुपये दिए जाते हैं.

  पेयजल, पंखे और बैठने तक की नही कोई व्यवस्था 

   सभी किसानों ने एक स्वर में बताया की बैंक के अंदर न तो पेयजल की कोई व्यवस्था है और न ही उठने बैठने की, साथ ही यह भी बताया की बैंक में आज तक उनके बैंक पासबुक में प्रिंटिंग तक नही की गई है. जब कभी प्रिंटिंग की बात करते हैं तो बताया जाता है की प्रिंटर खराब है और रीवा बनने को भेजा है जिससे किसानों को उनके जमा निकासी की समुचित जानकारी नही मिल पाती.

समिति प्रबंधक कर रहे मनमानी 

    किसानों द्वारा बताया गया की समितियों के खरीदी केंद्रों में 15 दिन पहले गेहूं दिए थे लेकिन सहकारी बैंक में डीएमआर खाता होने के वावजूद भी उनके एकाउंट में गेंहूँ  के पैसे नही डाले गए हैं. किसानों रामशंकर मिश्रा और अमरनाथ मिश्रा ने बताया की उनके घर में कई कार्यक्रम हैं जिसमे पैसे की जरूरत थी और बैंक पऔर समिति प्रबंधकों की मिलीभगत से गेहूं का पैसा खातों में डालने में हीलाहवाली की जा रही है और आज से कल किया जा रहा है साथ ही जिनके खातों में पैसे डले हुए हैं उन्हें पैसा नही दिया जा रहा है जिससे उनके कार्यक्रम में नोटबन्दी जैसी स्थिति निर्मित हो गई है जैसे पिछले साल नोटबन्दी के समय पर पैसों की भारी किल्लत हो गई थी.

   किसानों के खातों में पैसे नही भेजे तो होगा आंदोलन 

   केंद्रीय जिला सहकारी बैंक शाखा गढ़ में उपस्थित किसानों ने बताया की यदि उनके खातों में गेंहूँ के पैसे अगले दिन तक नही भेजे गए और उनको अपने खातों की पूरी राशियां उनकी अवस्यक्तानुरूप नही मिली तो उपस्थित किसान रमाशंकर मिश्रा, अमरनाथ मिश्र, केशव प्रसाद गौतम,  रोहणी गौतम, विवेक सिंह, संजू सिंह, संजय सिंह, रामनगर तिवारी, रामराज पटेल, शिवेंद्र शुकला, राघवेंद्र पांडे, हरे राम मिश्र, अरुण गौतम आदि किसानों ने बताया की वह सब आंदोलन करने पर मजबूर होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी बैंक प्रबंधन की होगी।

किसानों ने की सहकारी बैंक गढ़ में इन्वर्टर-जनरेटर और प्रिंटर की माग

   उपस्थित सभी किसानों ने एक स्वर में माग की यदि रोज रोज़ बिजली की किल्लत बनी रहती है तो बैंक प्रबंधन को चाहिए की इन्वर्टर अथवा जनरेटर की व्यवस्था कराए. किसानों ने बताया की आखिर इतना बड़ा बैंक है जिसमे नौ सहकारी समितियों से संबंधित किसानों के खाते हैं और इतना अधिक लेनदेन हो रहा है, हज़ारों डीएमआर खाते खोले जा चुके हैं तो यह कैसे हुआ की इनके पर एक इन्वर्टर और जनरेटर लेने तक की व्यवस्था नही है. सभी किसानों ने बताया की बैंक कर्मचारियों का काम न करने का यह बहाना मात्र है जिसमे कभी लाइन, तो कभी प्रिंटर खराब तो कभी सर्वर की प्रॉब्लम बता कर अपनी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में ज़िला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा गढ़ में अव्यवस्था का दौर जारी।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587