"One who is unattached to the fruits of his work and who works as he is obligated is in the renounced order of life, and he is the true mystic: not he who lights no fire and performs no work". - |||श्रीमद भगवद गीता, अध्याय 6, Verse 1|||
Thursday, September 12, 2019
कैथा में भंडारे के साथ श्रीगणेशोत्सव संपन्न, कैथा श्रीहनुमान मन्दिर में चला 11 दिवशीय कार्यक्रम, लोगों ने संगीत संध्या का जमकर लिया आनंद (जिले के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हुआ श्रीगणेशोत्सव, अनंत चतुर्दशी के दिन हुआ विसर्जन)
Tuesday, September 25, 2018
कैथा पंचायत में एक और पुलिया निर्माण में एक लाख की धांधली ( मामला ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत आने वाले कैथा पंचायत का जिंसमे पंचायती पुलिया निर्माण में निरन्तर हो रही धांधली, भस्ट्राचार की हदें पार, मुरलीधर पटेल के खेत के पास मिसिरा रोड में पुलिया निर्माण में एक और भस्ट्राचार उजागर, सीईओ और उपयंत्री की सह से हो रहा भस्ट्राचार)
दिनांक 25 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
ग्राम पंचायत कैथा जनपद पंचायत गंगेव पंचायती भस्ट्राचार की पनाहगार बना हुआ है. यहां पर एक के बाद एक निरन्तर हो रहे भस्ट्राचार की परतें खुलती जा रही हैं. विशेष तौर पर अब मनरेगा के बाद पंच परमेश्वर योजनाओं में भस्ट्राचार हो रहा है. पंचायती राज संचालनालय के मॉध्यम से कलवर्ट पुलिया निर्माण और भवनों के निर्माण के लिए प्राप्त हुई राशि एक एक करके भस्ट्राचार की बलि चढ़ती जा रही है जिसे देखने वाला कोई पंचायत विभाग नही है.
मुरलीधर पटेल के खेत से मिसिरा तरफ पुलिया निर्माण में एक लाख का भस्ट्राचार
पंचायतराज संचालनालय मप्र भोपाल द्वारा कल्वर्ट पुलिया निर्माण के नाम से निकाली गई राशि एक लाख रुपये के कार्य में भारी अनियमितता प्रकाश में आई है. इसके पहले भी संपत्ति पटेल के खेत तरफ, बुद्धसेन पटेल के घर के पास एवं उग्रसेन पटेल के घर के पास, शेषमणि पटेल के घर के पास, बृजबल्लभ पटेल के घर के पास आदि नामों से प्रत्येक के लिए सैंक्शन हुई एक लाख रुपये की लॉगत से बनाये जा रही पुलों ने निर्माण में गुणवत्ताविहीन सामग्री का प्रयोग और पुरानी घटिया किश्म की पुलिया लगाकर निर्माण होने के मामले प्रकाश में आये हैं.
अभी हाल ही में एक अन्य पुलिया निर्माण में भस्ट्राचार प्रकाश में आया है जिसका निर्माण मुरलीधर पटेल के खेत के पास एवं मिसिरा ग्राम की तरफ जाने वाली सड़क की तरफ होना है. इस पुल के लिए वही पुराने ग्राम पंचायत भवन से निकाले गाये नींव के पत्थरों का प्रयोग स्टोन क्रशर से प्राप्त डस्ट एवं घटिया किश्म की सीमेंट से किया जा रहा है.
कुछ इस प्रकार बनाया है गया फ़र्ज़ी एस्टीमेट
मुरलीधर पटेल के खेत से मिसिरा ग्राम की तरफ नाम में पंचायतराज संचालनालय विभाग द्वारा पंच परमेश्वर योजनान्तर्गत जारी की गई राशि रुपये एक लाख स्वीकृति दिनांक 02/10/2016 में निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है. प्राप्त बिल बाउचर के अनुसार इस पुलिया निर्माण में राजवीर ट्रेडर्स नामक विक्रेता से बिल क्रमांक 251 दिनांक 06/05/2018 को कुल 89 हज़ार एक सौ रुपये की सामग्री का क्रय किया जाना बताया गया है जिंसमे मुख्य रूप से बालू 24 हज़ार 500 रुपये प्रति हाइवा के हिसाब से एक हाइवा, सीमेंट 310 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से कुल 60 बोरी जिसकी कुल लॉगत 18 हज़ार 600 रुपये, 40 एमएम की गिट्टी प्रति हाइवा 18 हज़ार 500 के हिसाब से दो हाइवा कुल 37 हज़ार रुपये, एवं 3 नग ह्यूम पाइप 3 हज़ार रुपये प्रति नग के हिसाब से 9 हज़ार रुपये की क्रय होनी बतायी गई है. बिल क्रमांक 251 में वर्णित समस्त क्रय की गई सामग्री की कीमत 89 हज़ार एक सौ रुपये बतायी गई है.
फ़र्ज़ी बिल बाउचर लगाकर घटिया सामग्री से हो रहा पुल निर्माण
इस प्रकार उपरोक्त बिल क्रमांक 251 तो मात्र दिखाबा और पैसा निकालने एवं फ़र्ज़ी भुगतान प्राप्त करने का एक जरिया मात्र है. वास्तव में राजवीर ट्रेड्स द्वारा सरपंच कैथा पंचायत के नाम से जारी किये गए बिल क्रमांक 251 द्वारा जो भुगतान होना बताया गया है वह पूरी तरह से फ़र्ज़ी है. वास्तविक धरातल पर जो कार्य हो रहा है उसमे पुराने पंचायत भवन से नींव के पत्थरों को खोदकर उसी पत्थर से पुलिया का निर्माण हो रहा है. इसमे मात्र 5 से 7 बोरी तक घटिया सीमेंट मिलाई जा रही है एवं स्टोन क्रशर की घटिया डस्ट से पुलों की जुड़ाई की जा रही है जिंसमे बेस भाग में कोई भी प्लेट नही डाली जा रही है. इस प्रकार मुश्किल से 10 हज़ार रुपये की लॉगत से एक लाख की पुलों का निर्माण कार्य किया जा रहा है.
घटिया पुल निर्माण के जांच की पंचों एवं ग्रामीणों ने की माग
दिनाँक 25 सितंबर 2018 को लोहार बस्ती के पास उपस्थित आम जनता शैलेन्द्र पटेल, राजेश पटेल, नंदकिशोर विश्वकर्मा और साथ ही पंचों यज्ञभाव पटेल, रामानुज केवट ने इस भस्ट्राचार के जांच की माग की है और जनता के पैसे की हो रही बर्बादी की रिकवरी की माग की है साथ ही पंचायतीराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 के तहत कार्यवाही करते हुए ऐसे भस्ट्राचारी सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल को पद से भी पृथक करने की माग की है.
संलग्न - कृपया संलग्न दस्तावेजों में देखने का कष्ट करें जिंसमे राजवीर ट्रेडर्स नामक विक्रेता द्वारा जारी बिल क्रमांक 251 दिनाँक 06/05/2018 संलग्न किया गया है साथ ही पुल निर्माण के लिए पुराने पंचायत भवन से लाये जा रहे पुराने पत्थर भी डंप पड़े हुए हैं. साथ ही निर्माण स्थल पर उपस्थित ग्रामीण जन.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139
Tuesday, September 11, 2018
तीजा के दिन श्रीहनुमान मन्दिर कैथा में भरेगा मेला और झूला (100 वर्ष से अधिक पुरानी परंपरा के अन्तर्गत कैथा श्रीहनुमान मन्दिर प्राँगण में होता आया है तीजे के दिन मेले का आयोजन, दूर दूर से दुकानदार आते हैं और 18 मौजा क्षेत्र के लोग लेते हैं मेले का आनंद)
दिनाँक 11 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)
यज्ञों की पावन पुनीत स्थली कैथा के अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में पिछले 100 से अधिक वर्षों से परंपरागत और हरितालिका तीज अर्थात बघेली में तीजा के दिन आयोजित होने वाले मेला भरेगा. इस बीच कैथा और उसके आसपास के दर्जनों ग्रामों के लोग जिनमे बहुतायत में माताएं, बहने और युवक युवतियां सम्मिलित रहते हैं मेले और झूले का लुफ्त उठाने के लिए श्रीहनुमान मन्दिर कैथा पधारते हैं. गढ़, हिनौती, लालगांव, कटरा, भठवा, और अन्य स्थानों से दूर दूर के दुकानदार अपनी विभिन्न प्रकार की सामग्रियों को बेचने के लिए दुकान लेकर आते हैं.
बुजुर्गों ने बताया सैकड़ों वर्ष पुराना मेला
गांव के 80 वर्ष की उम्र छूने वाले कई बुजुर्गों से जब कैथा श्रीहनुमान मंदिर में भरने वाले मेले के विषय में चर्चा हुई तो बताया गया की यह मेला बहुत पुराना है. सभी ने बताया की वह सभी लोग अपने भी पूर्वजों से इस मेले के विषय में सुनते आ रहे हैं.
कैथा ग्राम के रामसुंदर केवट जो की इस समय 90 के ऊपर पहुचने वाले हैं उनका कहना था की उनके बचपन से यह मेला भर रहा है. कैथा के ही जगदीश पटेल उर्फ जिमीदार ने बताया की उनके बाबा दादा इस मेले के विषय में बताते थे और हम तो बचपन से देख रहे हैं इसी प्रकार कैथा के ही दिवंगत लोकनाथ द्विवेदी द्वारा बताया गया था की उनकी जानकारी से यह मेला लग रहा है. उनके पूर्वजों ने भी इस मेले के बारे में बताया था. इस प्रकार सहज ही समझा जा सकता है की सैकड़ों वर्ष प्राचीन यह मेला निरंतर अपनी परंपराओं के अनुरूप भरता आया है.
श्रीहनुमान जी की हज़ारों वर्ष प्राचीन प्रतिमा
ज्ञातव्य है की कैथा श्रीहनुमान मन्दिर में उपस्थित अति प्राचीन श्री हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है जिसके विषय में भी इसी प्रकार की किंबदंतियाँ है जिनके अनुसार यह प्रतिमा इसी विस्तारित हिनौता तालाब से हज़ारों वर्ष पहले प्रकट हुई थी. कुछ लोगों का मानना है की श्रीहनुमान जी विशाल प्रतिमा आसपास के लोगों की पीड़ा व्यथा और दुख कष्ट को दूर करने के लिए प्रकट हुई थी.
चाहे जो भी हो लेकिन एक बात तो तय है की ईश्वर के उद्भव को कोई जान नही सकता क्योंकि वह सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी होते हुए सभी के लिए उनके कर्मो के अनुसार फल देने वाला होता है. वह अपनी इक्षा मात्र से प्रकट होता है और मूर्ति रूप में पूजे जाने का तात्पर्य है की हम ईश्वर को जी भाव में जाने और माने उसे साकार समझ कर उसकी आराधना उपासना करें.
कैथा और उसके आसपास के लोगों ने बताया की पहले दशकों पूर्व यहां मंदिर प्राँगण हिनौता तालाब में तीजे के मेले के दिन कुश्ती, कबड्डी और बादी का आयोजन होता था. कबड्डी कुश्ती को तो सभी जानते हैं लेकिन बादी भी एक खेल है जिंसमे 6 लोग एक गोलाई में में होते थे जिंसमे एक खिलाड़ी मात्र एक को गोलाई में घूमकर छूता था जिंसमे खेल में हुडी हुडी कहकर खेल खेला जाता था. पुराने बुजुर्गों ने बताया की उनके समय में बादी का खेल खूब खेला जाता था लेकिन अब वर्तमान में यह खेल पूरी तरह से विलुप्त हो चुका है.
हरितालिका तीज का महत्व
जिस हरितालिका तीज के मेले की चर्चा हो रही है वह बघेली में तीजा के नाम से जाना जाता है. तीजा का काफी महत्व है. यह त्योहार मुख्य रूप से हिन्दू महिलाओं का निर्जला व्रत के लिए जाना जाता है. पौराणिक कथा प्रसंगों में बताया जाता है माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्ति के लिए हज़ारों वर्षों तक बिना अन्न जल ग्रहण किये हुए कठिनतम व्रत रखा था जिसके फलस्वरूप उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था और अंत में मात्र पेड़ के पत्ते खाकर जीवित रहीं थी जिसके बाद उनका नाम अपर्णा पड़ा था जिसके फलस्वरूप भगवान शिव प्रसन्न हुए और माता शती को वरदान दिया और उन्हें पति रूप में मिले.
आज कलयुग में सभी महिलाएं उसी परंपरा के अनुरूप अपने पति देव की लंबी उम्र और शुख शांति के लिए मात्र 24 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं. उसके बाद तीज की रात के बाद आने वाली शुबह में स्नान करती हैं और मात्र अगले दिन ही भोजन करती हैं. बताया गया की बघेली में तीजे के व्रत में खीरे का काफी महत्व है. पूजन के दौरान खीरे का उपयोग किया जाता है और इष्टदेव को चढ़ाया जाता है.
दिनाँक 12 सितंबर को हरितालिका तीज के दिन भरने वाले इस मेले एवं झूले का आनंद लेने के लिए आसपास के लोग काफी उत्साहित हैं.
संलग्न - संलग्न फ़ोटो में देखें उपस्थित भक्त श्रद्धालुगण.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139
Thursday, August 16, 2018
कैथा में भागवत महायज्ञ का होगा साप्ताहिक आयोजन (ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम के श्रीहनुमान मंदिर में दिनांक 18 से 25 अगस्त तक आयोजित होगी श्रीमद भगवद कथा, हवन एवं भंडारा 25 अगस्त को)
दिनाँक 16 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण से, शिवानन्द द्विवेदी)
श्रावण का पवित्र महीना और जगह जगह धार्मिक आयोजन. जी हाँ, समय है कैथा की पवित्र पावन भूमि पर आयोजित होने वाले परंपरागत और पचासों वर्षों से आयोजित होने वाले श्रीमद भगवद कथा के कार्यक्रम का.
श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में आयोजित होने वाले श्रीमद भगवद भक्ति ज्ञान महायज्ञ का आयोजन दिनांक 18 अगस्त को कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ होगा जो दिनांक 25 अगस्त दिन शनिवार तक चलता रहेगा. दिनांक 25 अगस्त को हवन एवं विशाल भंडारा के साथ सम्पूर्ण कार्यक्रम का विसर्जन होगा.
इस विशेष कार्यक्रम में कथा प्रवाचक का कार्य आचार्य श्री किसन जी के मुखारविंद से किया जाएगा. आचार्य श्री को आचार्य दिलीप जी के नाम से भी जाना जाता है. आचार्य दिलीप जी यूपी इलाहाबाद से तलूक रखते हैं और अब तक सैकड़ों कथा भागवत में प्रवचन का कार्य कर चुके हैं.
कैथा मन्दिर प्राँगण में हुआ पुताई कार्य
इस बीच भागवत कथा कार्यक्रम के पूर्व कैथा श्री हनुमान मंदिर प्राँगण के आसपास सफाई कार्य किया जा रहा है साथ ही मंदिर पुताई लिपाई भी की गई. पुताई और साफ सफाई कार्य में सहभागिता निभाने वाले धर्मार्थ समिति भारत के युवा कार्यकर्ता सम्मिलित रहे जिनमे सज्जन केवट, इंद्रलाल साकेत, हेमराज साकेत, शिवभान केवट, कैलाश केवट, राजकुमार केवट, हरिश्चन्द्र केवट, राम गोपाल साकेत, रोहिणी देवी पटेल, संपूर्णानंद द्विवेदी सहित अन्य कार्यकर्ता सम्मिलित हुए.
इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी कर रहे हैं साथ ही कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम कलयुग के देवता, पवन पुत्र, अंजनी के लाल श्री बजरंगबली जी के संरक्षण में सम्पन्न होते हैं. विश्व शांति एवं जीव कल्याणार्थ आयोजित होने वाले यह सभी कार्यक्रम सार्वजनिक कार्यक्रम हैं जो आम जनमानस के सहयोग से होते आये हैं जिनमे सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है.
संलग्न- कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें धर्मार्थ समिति भारत के युवा कार्यकर्तागण मंदिर की पुताई एवं साफ सफाई कार्य में सहभागिता निभाते हुए.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
प्रचारक, संयोजक एवं प्रवसक्ता श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,
ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139
Friday, August 10, 2018
करायत सर्प पकड़ कर जंगल में छोड़ा गया (ज़िला रीवा के थाना गढ़ अन्तर्गत करहिया ग्राम में नंदलाल सिंह के घर से पकड़ कर गदही के जंगल में छोड़ा गया)
दिनांक 10 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
अपने आप में एक नए घटनाक्रम में दिनाँक 10 अगस्त 2018 को थाना गढ़ अन्तर्गत करहिया ग्राम में नंदलाल सिंह के घर में बनाये जा रहे नए मकान के पिलर में एक सर्प के गिरे होने की खबर मिली. रोहित सिंह नामक युवक द्वारा जानकारी दी गई की उनके घर में एक जहरीला किश्म का काला सांप घुसा हुआ है. इस पर लगभग डेढ़ बजे के आसपास पहुचा गया और मौके पर पिलर के गड्ढे में फंसे हुए सर्प को सांप पकड़ने वाले क्लिप से सर्प को बाहर खींचा गया. देखने पर पता चला की सांप की लंबाई लगभग ढाई से तीन फिट के बीच में थी. जानकारों द्वारा बताया गया की यह सांप अत्यंत जहरीला किश्म का होता है जिसके डसने पर व्यक्ति की आधे घंटे के अंदर ही मौत हो सकती है.
लोकल भाषा में इस सर्प को करायत बोला जाता है. इस सर्प की पीठ चमकीली काली रंग की होती है जिंसमे सफेद धारियां होती हैं.
सर्प को सुरक्षित पकड़ कर गांव से सटे हुए गदही रवार के जंगल में छोंड़ दिया गया. जहां से वह पत्थर की चट्टान के नीचे घुस गया.
इसके पूर्व भी जंगल में सुरक्षित छोंडे गए हैं कई जहरीले नाग
कैथा, सोरहवा, बड़ोखर, करहिया, जमुई एवं आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक दो सालों में लगभग एक दर्ज़न भर जहरीले किश्म के नाग पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोंडे गए हैं. इसे पकड़ने में मुख्य रूप से सोरहवा निवासी हरीबन्स पटेल जो की कोतमा अनूपपुर में दैनिक वेतन भोगी कर्मी के रूप में कार्य कर रहे हैं उनका योगदान था. उन्ही के सहयोग और ट्रेनिंग से आज गांव के अन्य लोग भी सांपों के प्रति भय दूर कर इन्हें पकड़कर सुरक्षित जंगल में छोंड़ने का कार्य कर देते हैं.
संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें श्री नंदलाल सिंह करहिया के घर में पकड़े गए करायत सांप को पकड़कर छोड़ा गया.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139.
Thursday, August 9, 2018
ट्रेक्टर से दबे मृत युवक के परिजनों ने लास जलाने से किया मना, पुलिश की जांच और आश्वासन के बाद ही मामला सुलझा (मामला ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम का जहां पर दिनांक 8 अगस्त को ट्रेक्टर पलटने से मौत हुई थी, लेकिन परिजनों ने पुलिश पर हीलाहवाली का लगाया आरोप, बताया सही धारा नही लगाया, मामले को दबाब बस दबाने का प्रयाश का लगाया आरोप)
दिनांक 09 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
दिनाँक 8 अगस्त को थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम के मजदूर युवक शांति कुमार साकेत का ट्रेक्टर पलटने से घटना स्थल पर ही दबकर मृत्यु होने का मामला प्रकाश में आया था. जिंसमे डायल 100 की गाड़ी में गंगेव सीएचसी ले जाया गया था जहां उसे डॉक्टरों द्वारा मृत घोषित कर दिया गया था.
बाद में गढ़ पुलिश ने बताया था की बड़े निवेदन के बाद 8 अगस्त को ही डॉक्टर ने उसका पोस्टमॉर्टम किया और तब जाकर युवक की लास परिजनों के हवाले किया गया.
परिजनों ने मामले में लीपापोती और गलत धारा में केस दर्ज करने का लगाया आरोप
दिनाँक 9 अगस्त की शुबह जानकारी प्राप्त हुई की परिजनों ने एफआईआर दर्ज करने में बयान बदलने और दबाब का आरोप लगाया है और पुलिश पर गलत धारा पर मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाया है. मृत युवक के माता पिता द्वारा बताया गया की उन्हें घटना के बाद कोई होशोहवाश नही था और जब वह अपना बयान दे रहे थे तब पुलिश ने सही तरीके से रिपोर्ट नही लिखा और आई पी सी की धारा 304 लगाने के स्थान पर धारा 304क लगाया है. परिजनों को यह जानकारी उनके वकील ने बतायी थी.
मृत के माता पिता का कहना था की जब ट्रेक्टर कीचड़ में फंसा हुआ था तब गांव के ही ट्रेक्टर मालिक के लड़के द्वारा तीन चार ड्राइवर को ट्रेक्टर निकालने के लिए बुलाया गया था. जब किसी ड्राइवर द्वारा ट्रेक्टर नही निकल पाया तो ट्रेक्टर मालिक का पुत्र युवक शांति कुमार साकेत को उसके घर बुलाने आया था और बोला की चलो खेत में रोपा लायन लगाने चलना है लेकिन उग्रभान पटेल के खेत में कीचड़ में फसे ट्रेक्टर के पास ले जाया गया और शांति कुमार को ट्रेक्टर निकालने के काम में लगा दिया गया. ट्रेक्टर इतना बुरी तरह से फसा हुआ था की बड़े वाले टायर के नीचे लकड़ी के मोटे लठ्ठे लगाने पड़े थे लेकिन फिर भी ट्रेक्टर नही निकल रहा था. इस कार्य को देखने के लिए कुछ गांव के ही अन्य लड़के खड़े हुए बताए गए हैं जो ट्रेक्टर पलटने के बाद घटनास्थल से भाग खड़े हुए थे.
घटना होने के बाद गांव में हो हल्ला हुआ तो सारे गांव के लोग इकठ्ठा हुए. सभी ने मृत को बाहर निकालने में सहयोग दिया. निकालने वालों में ज्यादातर साकेत एवं केवट समुदाय के लोग थे. बताया गया की जिनकी ज्यादा जिम्मेदारी थी वह घटनास्थल से भाग खड़े हुए.
रातोंरात ट्रेक्टर को कीचड़ से निकाल किया गायब
दिनांक 8 अगस्त की रात से ही कैथा ग्राम में चर्चा होने लगी थी की कैथा, इटहा, एवं अकलसी ग्राम के काफी लोग ट्रेक्टर को निकालने में व्यस्त थे. मोटी रस्सी लाई गई थी जिसकी मदद से दर्ज़नो लोगों द्वारा गांव के ही दिलीप पटेल नामक व्यक्ति के एक अन्य ट्रेक्टर की मदद से घटनास्थल में कीचड़ में फसे ट्रेक्टर को निकाला गया. जबकि मृतक के पिता उग्रसेन साकेत और उनके परिजनों द्वारा बताया गया की पुलिश ने घटना का मुआयना नही किया था और न ही पंचनामा बनाया था तब कैसे ट्रेक्टर निकाल लिया गया. इससे साफ पता चलता है की सबूत मिटाने के प्रयास किये गए थे जिससे ट्रेक्टर को रातोंरात गायब कर दिया जाए जिससे पता न चल पाये की ट्रेक्टर था भी नही. परंतु शायद लोगों को यह पता नही था की पूरा गांव ही घटना देखने को इकठ्ठा था अतः सभी को जानकारी थी की ट्रेक्टर किस जगह पर फसा था. साथ ही इकठ्ठे हुए दर्जनों ग्रामीणों के साथ मृत युवक शांति कुमार साकेत एवं फसे हुए ट्रेक्टर की तस्वीर भी ले ली गई थी अतः इस मामले को दबाया नही जा सकता था.
परिजनों ने लास न जलाने की दी चेतावनी
दिनांक 9 अगस्त की शुबह मृत युवक के माता पिता एवं परिजनों ने बताया की जब तक पुलिश आकर सही तरीके से घटनास्थल का मुआयना पंचनामा नही करती है साथ ही पूरे लोगों के बयान नही लेती है और सही धाराओं में केस दर्ज नही करती है तब तक वह लास को नही जलाएंगे. इस प्रकार इस बात की जानकारी संबंधित गढ़ थाना प्रभारी आशीष मिश्रा के समक्ष तक पहुचायी गई और साथ ही आई जी रीवा जोन जोगा को भी दी गई जिस पर शुबह लगभग साढ़े नौ बजे के आसपास गढ़ थाना प्रभारी आशीष मिश्रा घटनास्थल पर अन्य सिपाहियों के साथ पहुचे.
मृतक युवक के पीड़ित माता पिता के घर पहुच कर गढ़ थाना प्रभारी और साथ ही बीट प्रभारी सत्यभान सिंह द्वारा एक एक करके उपस्थित लोगों के बयान लिए गए जिंसमे मृतक के माता पिता के बयान, अन्य परिजनों के बयान एवं साथ ही मौके पर मृतक को बचाने का प्रयाश करने वालों रामलाल साकेत, बंसपती साकेत, एवं छोग्गी साकेत एवं रामलाल साकेत की पत्नी, दिलीप केवट सहित अन्य के बयान सम्मिलित हैं.
इस पर बाद में गढ़ थाना प्रभारी आशीष मिश्रा एवं बीट प्रभारी सत्यभान सिंह द्वारा बताया गया की यदि लोगों के एक जैसे मिलते जुलते बयान हैं तो सभी के बयान लेने की जरूरी नही हैं.
जांच के दौरान मृतक की माता हुई बेहोश
इस बीच मृतक शांति कुमार साकेत की माता बीच में ही बेहोश हो गई. जिस पर गढ़ थाना प्रभारी को सूचित किया गया और वहां पहुच कर थाना प्रभारी ने मृतक की माता सहित अन्य परिजनों को धैर्य रखने और हिम्मत बांधने की बात कही. बताया की मृतक को वापस तो नही लाया जा सकता है लेकिन पुलिश सत्य की दिशा में हर संभव प्रयाश करेगी और पीड़ित को न्याय दिलवाने का पूरा प्रयाश करेगी. साथ ही पुलिश जाकर घटनास्थल का भी मुआयना करेगी एवं साथ ही पंचनामा भी बनाएगी.
पुलिश पहुची घटनास्थल पर, बनाया पंचनामा
इस बीच पुलिश आरोपी के घर भी पहुची जहां पर आरोपी को पुलिश ने अपनी गाड़ी में बैठाया साथ ही बाद में खेत में घटनास्थल पर भी पहुची जहां पर ट्रेक्टर नही था. ग्रामीणों और बयान देने वालों के माध्यम से बताया गया की ट्रेक्टर दिनांक 8 अगस्त की शाम तक यहीं पर फंसा हुआ था बाद में जिनके खेत में ट्रेक्टर फसा हुआ था उनके द्वारा और साथ ही ट्रेक्टर मालिक द्वारा ट्रेक्टर को रातोंरात ही बाहर निकाल लिया गया. बयान देने वालों ने कहा की इसमे यदि ट्रेक्टर मालिक की कोई गलती नही थी तो ट्रेक्टर को खेत में ही पुलिश जांच तक पड़े रहने देना था उसे रातोंरात गायब करने के पीछे सबूत नष्ट करने का ही प्रयोजन हो सकता था. इस प्रकार गांव में उपस्थित लोगों ने इस घटना को शर्मनाक भी बताया और कहा की घटना तो होतई रहती हैं लेकिन सामाजिक तौर पर घटना होने के बाद ट्रेक्टर मालिकों को पीड़ित से मिलकर उसकी मदद करनी चाहिए थी. उल्टा पीड़ित के विरुद्ध बयानबाजी करने और सबूत मिटाने के पीछे साथ ही पुलिश प्रशासन पर अनायास ही अनैतिक दबाब के पीछे की मन्सा बिल्कुल ही गलत है. इसकी सभी उपस्थित ग्रामीणों ने काफी निंदा की. ज्यादातर का कहना था की पीड़ित उग्रसेन साकेत का शांति कुमार एकमात्र एकलौता पुत्र था लेकिन इस घटना से पीड़ित का परिवार पूरी तरह से टूट बिखर गया है ऐसे में सामाजिक सहयोग के स्थान पर ट्रेक्टर मालिकों द्वारा अनैतिक दबाब बनाया जाना और साथ ही गलत बयानवाजी करना लोगों की गलत मानशिकता को दर्शाता है जिसे कोई भी पढ़ा लिखा समाज बर्दास्त नही कर सकता.
दोपहर बाद हुआ अंतिम संस्कार
मृतक शांति कुमार साकेत का अंतिम संस्कार की तैयारी पुलिश के बयान लेने और मौका मुआयाना करके चले जाने के बाद ही शुरू हो गई. परिजनों और उपस्थित रिश्तेदारों ने लकड़ी कुकुड़ी इकठ्ठा कर दोपहर बाद जाकर मृतक को मुखाग्नि दी. जहां तक प्रश्न मान्यताओं का है उसमे गांव में हिन्दू धर्म के जानकारों ने बताया की दिनांक 8 अगस्त को हिन्दू महीने की एकादसी थी जो बहुत ही पुण्य दिन माना जाता है और मृतक इस संसार के एकादशी को विदा हुआ प्रयाण किया ऐसे में उसकी आत्मा को अच्छी गति मिलेगी ऐसी आत्मा इस मृत्यु लोक में कभी वापिस नही आती ऐसा श्रीमद भगवद गीता का भी कथन है अतः जो होना था हुआ अब माता पिता और परिजनों को धैर्य रखना चाहिए और इस मृत्युलोक की वास्तविकता को समझना चाहिए जो यहां आया है उसे किसी न न किसी कारण बस यहां से प्रयाण करना ही होता है यही इस जगत की सच्चाई है.
संलग्न - घटनास्थल पर मुआयना करने पहुची गढ़ पुलिश और थाना प्रभारी आशीष मिश्रा, साथ ही घटनास्थल की कुछ फ़ोटो...
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139,
Saturday, August 4, 2018
अवैध कब्जा कर घर में घुसकर जान से मारने के धमकी (मामला ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा पंचायत का जहां लोहार बस्ती में मुरलीधर नामक व्यक्ति द्वारा अनायास ही दशकों से बशे हुए पुस्तैनी बाशिन्दों दिनेश विश्वकर्मा वगैरह के परिवार को परेशान किया जा रहा, पीड़ितों ने एसपी, आईजी और थाने में लगाई गुहार)
दिनांक 04 अगस्त 2018, स्थान - गढ़, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
जमीनी मामलों को लेकर और राजस्व विभाग की कमियों के चलते विबाद बढ़ते जा रहे हैं. मामला तहसीलदार, एसडीएम आदि से निर्देश के बाद भी सुलझने का नाम नही ले रहा है. न्यायालयीन आदेश का तामील न हो पाने से समस्या और भी गंभीर होती जा रही है.
इसी प्रकार का एक मामला थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम पंचायत अन्तर्गत ग्राम कैथा का है जहां पर पुराने पंचायत भवन के पास पुस्तैनी निवासी लोहार परिवार रहता है. आज 50 वर्षों से अधिक समय से हल्का पटवारी इटहा नंबर 2 तहसील मनगवां की आराज़ी नंबर 69 के अंस भाग 71 डिसमिल में कुल 25 लोगों का परिवार निवास कर रहा है. लेकिन वहीं पर पड़ोस में स्थित मुरलीधर पटेल नामक व्यक्ति पिछले कई वर्षों से पीड़ितों को परेशान कर रहा है. पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा, नंदिका विश्वकर्मा, पिंटू विश्वकर्मा आदि द्वारा बताया गया की इटहा हल्का पटवारी रावेंद्र त्रिपाठी ने सीमांकन कर पथरगड़ी किया था और साथ ही 10 डिसमिल के आसपास जमीन बारी, आम सब पटवारी के कहने पर लोहारों ने छोंड़ दिया था लेकिन अब समझौता के बाद भी जबरन पुनः आरोपी मुरलीधर पटेल लोहारों को परेशान कर रहा है, उनकी बारी काट रहा है, रोकने पर दाई माई की गाली देकर घर में घुसकर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा है. इस कृत्य में मुरलीधर पटेल का लड़का मिथिलेश पटेल भी समिलित है. इस बाबत पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा ने गढ़ थाना जाकर दिनांक 03 अगस्त 2018 को लिखित रिपोर्ट भी दर्ज करवाई है और जान माल की रक्षा की गुहार लगाई है.
लेकिन अब तक इस विषय में पुलिश ने कोई ध्यान नही दिया है और मात्र जमीनी मामला बोलकर पल्ला झाड़ रही है. पीड़ित ने बताया है की यदि पुलिश हस्तक्षेप कर उसके जान माल की रक्षा नही करती है तो उसको जान से मारने का खतरा बना हुआ है साथ ही विबाद की भी स्थिति बनी हुई है.
संलग्न - संलग्न तस्वीर में पीड़ित दिनेश विश्वकर्मा थाना गढ़ में दिए गए आवेदन/शिकायत के साथ.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल नंबर 7869992139, 9589152587
Saturday, July 7, 2018
बारिस में बिलम्ब से किसान मायूस, कब बरसेंगे मेघा कब लगेगी लेउ (रीवा में अब तक बारिश की कमी से किसान मात्र झुरिया फसल बो पाये, उड़द, मूग, अरहर के अतिरिक्त थोड़ी बहुत सोयाबीन की हुई बोवाई, लेउ और रोपा धान की नही हो सकी बुवाई, असिंचित क्षेत्र के किसान मात्र ईश्वर पर निर्भर)
दिनाँक 07 जुलाई 2018, स्थान - गढ़/ गंगेव, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)
देश प्रदेश के कुछ हिस्सों में चाहे भले ही अब तक औसत और औसत से अधिक बारिश हुई हो लेकिन प्रदेश के रीवा ज़िले में बारिश की स्थिति अब तक चिंताजनक बनी हुई है. सबसे अधिक चिंता अन्नदाता के लिए है.
किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए हुए हैं की कब बारिश हो और वह लेउ तथा रोपा लगाएं. कुछ किसान तो मायूस होकर झुरिया की ही खेती कर रहे है. पिछले दो तीन दिनों से काफी किसान 80 से 90 दिवश में पकने वाली धान जैसे आई आर 50, 64, 1010, लोचई, नीलम, ॐ थ्री आदि धानों की बुवाई करने लगे हैं. यह धान के बीज परंपरागत तरीके से बोए जा रहे हैं. धान का शूखे खेतों में छिटाव करने के बाद ट्रेक्टर से जुताई की जा रही है. खेतों में दूर दूर तक कहीं पानी के नामोनिशान नही है.
झुरिया खेती ही बच रहा एकमात्र विकल्प
तेरा कातिक तीन आषाढ़ की पुरानी कहावत है. क्षेत्रीय किसानी परंपरा के अनुसार कार्तिक मास के 13 दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं जब गेहूं रवी सीजन की खेती की जाती है इसी प्रकार आषाढ़ महीने के तीन दिन बहुत मत्वपूर्ण माने जाते हैं. कहने का तात्पर्य यह हुआ की आषाढ़ महीने में तोरा बहुत महत्वपूर्ण होता है. यदि तोरा आर्थात समय बीत गया तो किसानी का उतना लाभ नही मिल पाता जितनी उम्मीद की जाती है.
अब जब इस वर्ष 2018 खरीफ में 7 जुलाई तक ज़िले में बारिश नही हुई है अथवा जहां हुई भी है वहां बहुत हल्की फुल्की हुई है ऐसे में किसानों के लिए जो विकल्प बचा हुआ है वह मात्र झुरिया की खेती का ही है. झुरिया अर्थात शूखे खेत में बीज डालकर हल चलाना झुरिया खेती कहलाता है. झुरिया खेती के लिए पानी की कम मात्रा भी ठीक रहती है.
कैथा और आसपास के किसानों ने बोया झुरिया धान
कैथा और आसपास के बहुतायत किसान जो असिंचित क्षेत्र अंतर्गत आते हैं और अधिक पानी का इंतज़ार नही कर पा रहे हैं. यहां बता दें की कैथा और उसके आसपास के ग्रामों से संबंधित भौगोलिक परिस्थितयों में मनगवां तहसील के हल्का इटहा नंबर 2, बांस, लौरी गढ़, सिरमौर तहसील के हिनौती हल्का नंबर 39, सर्किल लाल गांव, त्योंथर तहसील के पटवारी हल्का जमुई नंबर 31 सहित अन्य आसपास के पचासों ग्रामों में अब तक नईगढ़ी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की नहर सुविधा उपलब्ध नही हो पायी है जिससे अभी भी यह क्षेत्र सूखा ही है. यहां पर जमीन के नीचे का जलस्तर भी काफी नीचे पहुच चुका है. जिन किसानों के पास बोरवेल अथवा ट्यूबवेल हैं उनका भी जलस्तर काफी नीचे होने की वजह से पर्याप्त पानी नही मिल पा रहा है. साथ ही दूसरी समस्या बिजली की बनी हुई है जिंसमे कटरा डीसी अंतर्गत एक 5 एमवीए का बड़ा और मुख्य ट्रांसफार्मर फैल हो जाने की वजह से वाधित बिजली आपूर्ति हो रही है. हर आधे घंटे में बिजली ट्रिप कर रहीं है.
झुरिया धान में ज्यादा लॉगत, पैदावार कम
इस क्षेत्र में बोई जाने वाली झुरिया धान में लॉगत ज्यादा होती है पर उपज कम. सबसे बड़ी बात यह है की धान जैसी फसल मात्र पानी की ही फसल है. जितना पानी मिले धान उतनी ही उपज देती है. हाँ यह बात जरूर है की धान में इतना पानी न भरा रहे की धान डूब में आ जाए ऐसे में धान सड़ जाती है.
झुरिया धान में चूंकि पानी का अभाव रहता है इसलिए इसमे खर पतवार और चारा घास बहुत उत्पन्न होता है. ऐसे में या की चारा घास नष्ट करने वाली दवा का प्रयोग किया जाए जो धान के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छी नही मानी जाती और साथ ही हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी नही है. दूसरा विकल्प परंपरागत रूप से खेतों में की जाने वाली निरवायी है. निरवायी से बोई गई धान के अतिरिक्त अन्य चारा घास और लमेरा झरगा फसही, गोंदिला आदि किश्म के चारा घास मजदूरों द्वारा उखाड़ फेंके जाते हैं.
झरगा, फसही, गोंदिला, लमेरा चारा घास निरवायी का बढ़ जाता है खर्च
देखा जाए तो झुरिया की खेती आज बहुत कम किसान करना पसंद कर रहे हैं. इसका मुख्य कारण जैसा की ऊपर बताया गया इसकी लॉगत है. लॉगत की वजह से झुरिया की खेती काफी महँगी पड़ रही है और उपज पैदावार भी कुछ विशेष नही होती. झरगा, फसही, गोंदिला, लमेरा और अन्य चारा घास को साफ करने में मजदूरों को दी जाने वाली निरवायी की मजदूरी किसानों को और अधिक महँगी पड़ जाती है. ऐसा भी नही की एक बार निरवायी करवाने से सब चारा घास साफ हो जाता है. इसे समय समय पर कई बार निरवायी करवाना पड़ता है. जिससे लॉगत बढ़ती जाती है. निरवायी न भी हो तो घास फूस नष्ट करने की दवा डालने से भी खर्चा अधिक आता है तथा साथ ही स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.
झुरिया धान की खेती में पानी का भराव भी है हानिकारक
यदि देखा जाए तो झुरिया धान की खेती में पानी का अधिक भराव भी हानिकारक होता है. लेउ तथा नर्सरी द्वारा रोपा पद्धति से लगाई गई धान की तुलना में चूंकि खेतों को झुरिया फसल हेतु बनाया जाता है अतः पानी का ज्यादा भराव भी हानिकारक होता है जिससे धान सड़ जाती है. सबसे बड़ी बात यह होती है की झुरिया धान में जुताई के बाद धान का बीज काफी नीचे गड़ जाता है जिससे उसकी जड़ें काफी नीचे चली जाती हैं अतः यदि पानी का भराव ज्यादा समय तक हुआ तो यह धान सड़ने लगती है. जबकि लेउ और रोपा में बिल्कुल इसके विपरीत होता है. एक कहावत भी है जिसे जैसे संस्कार मिलते हैं उसकी वैसी ही प्रवृति निर्मित होती है. झुरिया धान के संस्कार पानी विहीन अथवा कम पानी की खेती के होते हैं अतः इसे कम पानी ही चाहिए जबकि लेउ और रोपा पद्धति के द्वारा लगाई गई धान को प्रारम्भ से ही पानी चाहिए य यूं कहें की पानी से ही उत्पन्न ही होती हैं इसलिए लेउ रोपा धान पानी की अधिकता के वावजूद भी आसानी से नही सड़तीं.
लेउ धान के लिए बुवाई हो रही लेट
7 जुलाई तक आवश्यक बारिश न हो पाने से लेउ धान की बोवाई संभव नही हो पा रही है. लेउ धान की बोवाई के लिए काफी पानी की आवश्यकता होती है. जब बारिश का पानी खेतों में पूरी तरह से भर जाता है और पूरी खेत की जमीन पानी से लबालब हो जाती है ऐसे में एक दो बाह जुताई किया हुआ खेत को ट्रेक्टर में चैन लगाकर जोत दिया जाता है जिससे खेत में उपस्थित खरपतवार और घासफूस उसी कीचड़ में गड़ जाती है. इसके बाद खेत बनने के बाद उसी में पहले से ही अंकुरित अथवा भींगे हुए बीज को बीजोपचार के पश्चात बो दिया जाता है. चूंकि खेतों को लेउ पद्धति से बुवाई के बाद चारा घास गड़ जाता है अतः यह अतिरिक्त खर्चा किसानों का बच जाता है जिंसमे या की निरवायी करवानी ही नही पड़ती अथवा यदि करवानी पड़ती है तो काफी कम निरवायी करनी होती है.
रोपा पद्धति एवं मेडागास्कर पद्धति से धान की रोपाई के लिए चाहिए पर्याप्त पानी
सबसे ज्यादा आज रोपा पद्धति से धान की खेती प्रचलित हो रही है. यदि देखा जाए तो यह रोपा पद्धति काफी बेहतर प्रक्रिया है. इसमे सबसे पहले धान की नर्सरी डाली जाती है. जिसके तहत धान के बीज को घने रूप में किसी खेत में लेउ पद्धति से बोवाई कर दी जाती है. वैसे यह धान जब दो सप्ताह की हो जाए तभी इसे उखाड़कर खेतों में रोप दिया जाता है. सामान्यतया रोपा पद्धति की धान की किस्म के अनुसार अलग अलग प्रक्रिया होती है परंतु बहुतायत में जो धान रोपा पद्धति द्वारा लगाई जाती है उसकी दूरी कम से कम आठ अंगुल के बीच में होनी चाहिए. हाइब्रिड धान की रोपा पद्धति से की जाने वाली खेती ज्यादा पैदावार देने वाली होती है. 140 दिन में उत्पन्न होने वाली कावेरी 199 धान की नर्सरी डालकर की जाने वाली रोपाई में फायदे काफी बताए गए हैं. जिन किसानों ने कावेरी 199 की रोपा पद्धति से खेती की है उनका कहना है की धान को कम के कम 8 से 12 अंगुल की दूरी पर रोपना चाहिए जिससे जब इसमे नीचे से शाखाएं फूटें तो जगह की कमी न पड़े. किसानों द्वारा बताया गया की उनकी पिछले वर्षों बोई गई कावेरी रोपा धान में 70 से लेकर 80 तक शाखाएं नीचे से फूटी थीं जो काफी अच्छा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कावेरी 199 धान की सही तरीके से खेती करने पर प्रति एकड़ 50 क्विंटल तक की उपज प्राप्त की जा सकती है. जबकि धरातल पर किसानी करने वाले किसानों का कहना है की अब तक उन्हें अधिकतम इसके आधे अर्थात 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक की ही पैदावार हुई है. यद्यपि कृषि विशेषज्ञों ने इसके पीछे पानी, खाद, मौसम को जिम्मेदार ठहराया.
खरीफ 2018 किसानों के लिए चिंताजनक
अब वर्तमान में जो स्थित बनी हुई है उसमे काफी किसान झुरिया की ही खेती कर रहे हैं. यह खरीफ वर्ष किसानों के लिए कुछ चिंताजनक है क्योंकि गई गुजरी हालात में जुलाई प्रारम्भ होते ही पर्याप्त पानी गिर देता था ऐसे में देखा जाए तो 7 जुलाई तक पानी कम से कम एक सप्ताह लेट है ऐसे में असिंचित किसानों के लिए चिंतित होना स्वाभाविक है.
कैथा के किसानों ने बोया झुरिया धान
कैथा ग्राम एवं उसके आसपास के किसान बहुतायत में झुरिया धान की खेती कर रहे हैं. दिवाकर केवट, दिलीप केवट, गोकुल केवट, राम खेलावन साकेत, बैद्यनाथ केवट, शिव मूर्ति केवट, शेषमणि पटेल, मुन्नालाल केवट, यज्ञनारायण केवट, दासरथ केवट, प्रसन्नलाल केवट, सहित रामविलाश लोनिय आदि कई लघु कृषकों ने झुरिया धान की ही बुवाई की है. जब उनसे पूंछा गया तो ज्यादातर एक से दो हेक्टेयर के छोटे किसानों का कहना था की यदि बारिश के पानी का और अधिक इंतज़ार करते हैं तो उनकी बुवाई लेट हो जाएगी जिससे आगे के रवी सीजन में बोवनी में भी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा.
कुछ किसानों ने डाला नर्सरी बीज, लगाएंगे रोपा
कैथा और उसके आसपास के कई किसान ऐसे भी हैं जिनके पास ट्यूबवेल और मोटर पंप कनेक्शन उपलब्ध है उन ज्यादातर किसानों ने पहली दूसरी बारिश के बाद ही धान की नर्सरी डाल दिए जिसको बड़ी होने पर और पानी बरसने पर रोपा पद्धति से लगा दिया जाएगा. रोपा पद्धति से किसानी करने वाले किसानों में कैथा से सिद्धमुनि द्विवेदी, भद्रिका प्रसाद द्विवेदी, शिवशंकर द्विवेदी, भैयालाल पांडेय, भैयालाल द्विवेदी, बुद्धसेन पटेल, शम्भू पटेल, अंगद पटेल, शैलेन्द्र पटेल, राजेश पटेल, सत्यभान पटेल, जिमीदार, नरेंद्र पटेल, संपत्ति पटेल, गोपी पटेल, सोरहवा से हरीबन्स पटेल, राम नरेश पटेल, राजबहोर पटेल, सुरेश पटेल, रामाश्रय पटेल, चंद्रिका पटेल, ग्राम बड़ोखर से मुनेंद्र सिंह परिहार, शिवेंद्र सिंह परिहार, बृजराज सिंह परिहार, ग्राम करहिया से दिनेश लोनिया, नेता लोनिया, सुरेश लोनिया, अजय तिवारी, रामचंद्र लोनिया सहित अन्य किसान सम्मिलित हैं.
संलग्न - कैथा, बड़ोखर, सोरहवा आदि आसपास क्षेत्र के झुरिया की बोवाई करते किसान.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मनवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोब 7869992139, 9589152587
Wednesday, July 4, 2018
कैथा में लगा मुख्यमंत्री संबल योजना एवं सरल बिजली बिल एवं बिजली बिल माफी स्कीम का कैम्प (ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत आने वाले कैथा ग्राम पंचायत में सरल बिजली बिल स्कीम एवं बिजली बिल माफी योजना का कैम्प, उपभोक्ताओं ने लिया योजना का लाभ)
दिनांक 04 जुलाई 2018, स्थान - कटरा डीसी, त्योंथर संभाग, रीवा मप्र
(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)
ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वाले कई ग्रामों में पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री मप्र शासन की महत्वाकांक्षी योजना संबल योजना एवं सरल बिजली बिल स्कीम का कैम्प लगाया जा रहा है. जिनके अंतर्गत जन कल्याण संबल योजना में श्रमिकों एवं बीपीएल कार्डधारियों के पुराने बिजली के बिल माफ किये जाने के लिए आवेदन प्राप्त किये गए. इसी प्रकार जिन ग्रामों में सरल बिजली बिल योजना के अंतर्गत असंगठित श्रमिकों का पंजीयन हो चुका है उनके 200 रुपये प्रति माह के हिसाब से बिजली बिल के लिए भी आवेदन प्राप्त किये गए हैं. जिन श्रमिकों का पंजीयन क्रमांक उपलब्ध नही था उन्हें बाद में कटरा विद्युत वितरण केंद्र में आकर फॉर्म जमा करने की सलाह दी गई है. कैथा श्री हनुमान मंदिर में कैम्प में उपस्थित कटरा विद्युत वितरण के कनिष्ठ यंत्री अभिषेक गौरव सोनी एवं लाइनमैन भारत पटेल सहित अन्य कर्मचारियों द्वारा बताया गया की जो हितग्राही किसी कारण बस आज कैम्प में उपस्थित नही हो पाये हैं वह बाद में भी कटरा एवं गढ़ में आकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं और मुख्यमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ ले सकते हैं. अभी यह स्कीम कई दिनों तक चलेगी.
सैकड़ों आवेदकों ने लिया स्कीम का लाभ
कैथा श्री हनुमान मंदिर में आयोजित बिजली बिल माफी की संबल योजना एवं 200 रुपये प्रतिमाह सरल बिजली बिल स्कीम योजना का लाभ लेने के लिए कैथा एवं आसपास सोरहवा, मिसिरा, बड़ोखर आदि ग्राम के लोगों ने इस योजना का लाभ लिया.
मुख्यमंत्री की संबल योजना एवं सरल बिजली बिल स्कीम से मिली है भारी राहत
उपस्थित उपभोक्ताओं एवं श्रमिकों ने बताया की मुख्यमंत्री की इस योजना से लोगों को काफी राहत मिली है. कैथा हरिजन बस्ती के विहारीलाल साकेत एवं बतसिया साकेत ने बताया की उनका बिल पिछले तीन साल से नही आ रहा था. कनिष्ठ यंत्री श्री सोनी ने अपने डेटाबेस में जाकर देखा तो जानकारी मिली की विहारीलाल साकेत के नाम से 20 हज़ार से ऊपर तक बिजली बिल हो चुका था. इसी प्रकार सिद्धमुनि द्विवेदी निवासी कैथा ने बताया की उनका बिजली बिल प्रतिमाह 8 सौ से अधिक आ रहा है जिसे करेक्ट किया जाना चाहिए क्योंकि बिजली का लोड काफी कम है.
इसी प्रकार सुखमंती केवट, बृजभान केवट, राजेश पटेल, राम सजीवन केवट, अमृतलाल जायसवाल, मोतीलाल साकेत, रामसजीवन कोल, सत्यभान पटेल, संपत्ति पटेल, राजबहोर पटेल, बृज वाशी पटेल, छोटेलाल पटेल, दंगल सिंह, संत कुमार सिंह सहित अन्य कई उपस्थित उपभोक्ताओं ने बताया की मप्र शासन की इस योजना से गरीब जनता को काफी लाभ मिला है. सभी लोगों ने सरकार की इस योजना को लेकर काफी प्रसन्नता जाहिर की.
कैम्प शुबह 11 बजे से प्रारम्भ होकर दोपहर 2 बजे तक चला.
संलग्न - कैथा श्रीहनुमान मंदिर सार्वजनिक स्थल पर उपस्थित कई ग्रामों कैथा, सोरहवा, बड़ोखर, मिसिरा आदि ग्रामों के हितग्राही एवं साथ ही कटरा डीसी के अधिकारी कर्मचारी जिंसमे कनिष्ठ यंत्री अभिषेक गौरव सोनी भी सम्मिलित रहे.
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शिवानन्द द्विवेदी. सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल - 7869992139, 9589152587
Tuesday, June 19, 2018
मनरेगा सड़क निर्माण में कैथा पंचायत में बिन कार्य ही जारी हो रहे फ़र्ज़ी मस्टर रोल (मामला ग्राम पंचायत कैथा के ग्राम अकलसी का है जहाँ पर मई और जून 2018 में फ़र्ज़ी मजदूरों के मस्टर रोल जारी किये गए जबकि कार्य कहीं कुछ नही हुआ, पंचायती भष्ट्राचार अपने चरम पर)
दिनांक 19 जून 2018, स्थान - गगेव, रीवा मप्र
(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)
ज़िले के गगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा ग्राम पंचायत के अकलसी ग्राम में सुदूर सड़क संपर्क रामदरस के घर से प्रधानमंत्री सड़क तक के कार्य में भारी अनियमितता प्रकाश में आयी है जिसकी की जांच के लिए पिछले वर्ष जनपद से लेकर ज़िला कलेक्टर एवं कमिश्नर तक लिखा गया था लेकिन कोई सार्थक कार्यवाही नही हुई है.
अभी इस वर्ष पुनः उसी परियोजना में मई एवं जून 2018 में चार नए मस्टर रोल फ़र्ज़ी तरीके से जारी किये गए हैं जिसमे 20 मजदूरों के ऐसे नाम दर्शाए गए हैं जो कभी उस सड़क कार्य में नही आये. इस बात के सबूत पूरे अकलसी ग्राम के लोग हैं जिन्होंने उस सड़क मार्ग में मात्र जेसीबी एवं मसीने चलती हुई देखी हैं मजदूर तो दूर दूर तक कहीं नहीं दिखे.
वर्ष 2018 में 4 मस्टर रोल में 20880 रुपये प्रति मस्टर रोल में निकाले गए 83 हज़ार 520 रुपये
ग्राम पंचायत कैथा के अकलसी ग्राम की रामदरस के घर से प्रधानमंत्री सड़क तक परियोजना में वर्ष 2018 के मई एवं जून महीने में कुल 4 मस्टर रोल फ़र्ज़ी तरीके से जारी किये गए जिसमे प्रति मस्टर रोल 20 मजदूरों को काम करता दिखाया गया. साथ ही प्रति मस्टर रोल 20 मजदूरों की मजदूरी 20 हज़ार 880 रुपये प्रति सप्ताह बतायी गई है. इस प्रकार मात्र मजदूरी के नाम पर ही 83 हज़ार 520 रुपये एक बार फिर निकाल लिए गए जबकि सामग्री में खर्च अलग से बताया गया है. इस सड़क परियोजना की लंबाई 500 मीटर बतायी गई है जिसमे 5.5 लाख रुपये खर्च बताया गया है. पिछले वर्ष 2017 में कुल 8 मस्टर रोल जारी हुए थे जो अब तक मिलाकर 12 हो गए हैं। जबकि भूतपूर्व सरपंच कैथा मिथिला प्रसाद पटेल द्वारा अवगत कराया गया है की इसी 500 मीटर सड़क के लिए उन्होंने इसके ठीक पिछली पंचवर्षीय में अपने कार्यकाल में मिट्टी मोरम का कार्य करवाया था अतः नियमानुसार पांच वर्ष के भीतर उसी सड़क के लिए पुनः मिटी मोरम का कार्य होना संभव नही है. इसमे मात्र रिपेयरिंग का काम होता है न की नवनिर्माण का. इस प्रकार देखा जा सकता है की 5.5 लाख रुपये की राशि इतनी छोटी सड़क परियोजना के लिए बहुत अधिक भी है जिसकी जांच बाबत पिछले वर्ष 2017 में जनपद पंचायत गंगेव से लेकर ज़िला पंचायत रीवा, कलेक्टर रीवा एवं कमिश्नर रीवा को लिखित दिया जा चुका है जिसमे पचासों ग्रामवशियों के अपने हस्ताक्षर उर अंगूठा निशानी भी लगाया है.
कैथा पंचायत के घोटालों का अम्बार
कैथा पंचायत में मात्र यही सड़क मात्र में भष्ट्राचार नही हुआ है बल्कि यहां लगभग सभी मनरेगा एवं पंच परमेश्वर योजना कार्यों में हीलाहवाली हुई है जिसकी की दर्जनों सीएम हेल्पलाइन में शिकायतें दर्ज हैं एवं लिखित तौर पर पूरे प्रमाण के साथ मंत्रालय प्रमुख सचिव बल्लभ भवन एवं नई दिल्ली प्रधानमंत्री कार्यालय तक रखा जा चुका है.
इन सबके वावजूद भी विभागीय स्तर पर कहीं कोई कार्यवाही नही हुई है और मात्र लीपापोती ही हुई है.
संलग्न - 5.5 लाख रुपये की बनाई गई 5 सौ मीटर की सड़क जिसमे मात्र कुछ हज़ार रुपये की मोरम डालकर फुरसत कर दिया है. वर्ष 2017 एवं 2018 दोनो में इस सड़क के नाम पर पैसा की अंधाधुंध निकशी हुई है. सबूत के तौर पर सड़क की फ़ोटो भी संलग्न है साथ ही फ़र्ज़ी तरीके से जारी हुए मस्टर रोल का स्नैपशॉट भी संलग्न है जिसे मनरेगा की वेबसाइट में जाकर आसानी से देखा जा सकता है.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता
Wednesday, June 13, 2018
संकरी कुएं में गिरी गाय मरी (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी कला ग्राम का जहां दिनांक 13 जून की शाम को गिरी गाय रात 12 बजे मर गई, बचाने के प्रयाश के बीच गाय ने प्राण त्यागा, कुएं में गैस लीक की जताई गई असंका, तकनीकी व्यवस्था के अभाव में किसी ने कुएं में उतरने की नही की हिम्मत)
दिनांक 14 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र
(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)
ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी कला ग्राम में एक और गाय के सूखे कुएं में गिरकर मरने की खबर है. अभी पिछले दिनों पनगड़ी ग्राम में ही एक बछिया एक सूखे कुएं में गिर गई थी जिसे ग्राम के लोगो के सहयोग और साथ ही वन विभाग के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत के सहयोग से निकाल लिया गया था. लेकिन शायद दिनांक 13 जून की शाम को बृजवासी विश्वकर्मा के घर के पास स्थित पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा की पट्टे की जमीन में बनाई हुई पुरानी 3 फ़ीट व्यास की कुआं में गिरी एक बड़ी गाय की किस्मत अच्छी नही थी जिसे वेटेरिनरी, पुलिश, जंगल विभाग सहित अन्य लोगो की उपस्थिति भी बचाया न जा सका.
हादसा काफी दुःखद था जिसमे गाय अपने पिछले हिस्से के बल पर गिरी थी जो सीधे 35 फ़ीट गहरी सूखी कुआं में जा गिरी. गिरते ही शायद गाय की गर्दन टूट जाने के कारण जिस स्थिति में गिरी थी उसी स्थिति में मरते दम तक बनी रही. घटना की जानकारी पनगड़ी कला ग्राम पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दी जिसके बाद गिरी गाय को बचाने की जद्दोजहद प्रारम्भ हुई. तत्काल ही जानकारी पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में दी गई जिस पर बताया गया की रीवा ज़िले में ऐसी कोई व्यवस्था अभी नही है जिससे कुएं में गिरी हुई गाय को जीवित निकाला जा सके. इसके बाद संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गंगेव ब्लॉक में पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को की गई. साथ ही जंगल विभाग पनगड़ी के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत को दी गई जो तत्काल ही घटनास्थल पर पहुचे. डायल 100 में सूचना देने के बाद लालगांव चौकी के सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया भी अपनी डायल 100 टीम के साथ घटनास्थल पर पहुचे. लेकिन कोई टेक्निकल व्यवस्था न होने के कारण सभी के प्रयाश असफल रहे. सबसे बड़ी कठिनाई तो इस बात की थी की कुआं अत्यंत संकरी थी जिसमे नीचे उतर पाना काफी कठिन कार्य था. मानसेवी वनकर्मी पनगड़ी राघवेंद्र पांडेय की पीठ पर रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया लेकिन आधे कुएं में पहुचने के बाद उनकी सांस फूलने लगी. उन्होंने बताया की दम घुट रहा था. शायद जहरीली गैस लीक होने की शिकायत रही होगी. इस बात की पुष्टि के लिए बाद में एक लालटेन जलाकर नीचे उतारा गया जो दो तीन बार बुझ गई जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की भले ही जहरीली गैस लीक न हो रही हो लेकिन ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम थी. इसके बाद किसी की हिम्मत नही हुई की वह व्यक्ति गाय को बचाने के लिए कुएं में उतर सके.
गाय को बचाने रात 1 बजे तक चलती रही जद्दोजहद
संकरी कुएं में गिरी श्याम वर्ण गाय को बचाने के प्रयाश पूरी रात भर चलते रहे. देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक गाय की अंतिम सांस तक लोगों ने जुगुत लगाने के प्रयास किये लेकिन तकनीक के अभाव से सफलता प्राप्त नही हुई. यदि ऑक्सीजन मास्क होती तो भी किसी व्यक्ति को नीचे उतारा जा सकता था। इस बीच गाय के शरीर में हलचल बन्द होने और आंख बाहर निकल आने के बाद अंदाजा लगाया गया की गाय मर चुकी है.
पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा परिवार की सूखी कुएं में गिरी थी गाय
गाय की मृत्यु तक पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर उपस्थित नही हुआ. लालगांव पुलिश के बार बार बुलाये जाने के बाद भी कुशवाहा द्वारा बताया गया की उसकी पीठ में दर्द है इसलिए उपस्थित नही हो सकता. इसके बाद जैसे ही गाय मर गई तो घटनास्थल से लालगांव सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया सहित अन्य पुलिश कर्मी एवं ग्राम पनगड़ी के गणमान्य लोग नर्मदा कुशवाहा के घर के पास और दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने को कहा परंतु उसने बार बार संदेश भेजा की वह बाहर नही आएगा. इसके बाद पुलिश द्वारा कहा गया की आपकी पट्टे की कुआं में आपकी गलती की वजह से एक गाय गिरकर मर चुकी है इसलिए प्रथम दृष्ट्या आपकी जिम्मेदारी बनती है. इसलिए शिकायत के आधार पर आप लालगांव चौकी चलें और गौहत्या का प्रकरण दर्ज होगा. लेकिन कुशवाहा द्वारा विभिन्न प्रकार से बहाने बनाने का प्रयाश किया गया. जब लालगांव पुलिश द्वारा नर्मदा कुशवाहा से पूंछा गया की क्या तुम इस मरी हुई गाय की जिम्मेदारी लोगे तो कुशवाहा द्वारा जिम्मेदारी लेने से मना किया गया इस पर पुलिश द्वारा कहा गया की कल शुबह तक इस मरी हुई गाय को बाहर निकालकर इस खतरे की जगह पर स्थित कुआं को बन्द करो. इस प्रकार हिदायत देकर पुलिश घटनास्थल से प्रस्थान कर दी. पूरा वाकया होते होते रात के 1 बज चुके थे जहां पर घटनास्थल पर उपसरपंच पनगड़ी शिवेंद्रमणि शुक्ला, मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय, रामसिया साकेत, पशु चिकित्सा विभाग के साहू सहित अन्य पुलिश एवं वनकर्मी उपस्थित थे.
मदरी-भठवा ग्राम में भी खुली सूखी कुआं में गिरकर मरा था बंदर
अभी हाल ही में पिछले सप्ताह मदरी-भठवा ग्राम में किसी सूखी पुरानी खुली कुआं में एक बंदर के भी गिरने की खबर आई थी जिस पर संबंधित वन विभाग को सूचित किया गया था. तब पनगड़ी ग्राम वन समिति के मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत घटनास्थल पर उपस्थित होकर बंदर को बाहर निकाले थे. लेकिन घटना समय 24 घण्टे से ऊपर होने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ बंदर बाहर निकालते ही मर चुका था. यह कोई अकेले की घटना नही है जैसा की बताया गया की ऐसी बारदतें आज आये दिन घटित हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए.
लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण प्रशासन को अभियान चलाकर खतरे वाली सूखी कुओं को बन्द करवाया जाना चाहिए
जिस प्रकार पिछले कुछ महीनों में लगातार सूखी और पुरानी गहरी कुओं में जंगली, आवारा और घरेलू मवेशियों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे साफ पता चलता है की जब तक प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्यवाही नही की जाती तब तक ऐसी वारदाते बन्द होने वाली नही हैं. प्रशासन को चाहिए हर ग्राम पंचायत में डेटा इकठ्ठा करके पता लगाए की किस किस ग्राम पंचायत में ऐसे कितने पुराने अनुपयोगी और सूखे कुएं हैं. यदि प्रशासन जल संसाधन के हिसाब के यह मानता है की ऐसे अनुपयोगी कुएं भाठे नही जाने चाहिए तो इन्हें ढंकने का कार्य किया जाना चाहिए. सभी कुओं में लोहे की जाली लगाकर ऊपर से ढंकी जानी चाहिए जिससे न तो किस जन की हानि हो और न ही पशुओं की. जो भूमिस्वामी अपनी जमीन पर बनाई गई कुओं को न ढंके उनके ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए.
संलग्न - दिनांक 13 जून की शाम को पनगड़ी कला ग्राम में किसी कुशवाहा की सूखी कुएं में गिरी गाय की तस्वीर.
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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587

