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Tuesday, September 25, 2018

कैथा पंचायत में एक और पुलिया निर्माण में एक लाख की धांधली ( मामला ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत आने वाले कैथा पंचायत का जिंसमे पंचायती पुलिया निर्माण में निरन्तर हो रही धांधली, भस्ट्राचार की हदें पार, मुरलीधर पटेल के खेत के पास मिसिरा रोड में पुलिया निर्माण में एक और भस्ट्राचार उजागर, सीईओ और उपयंत्री की सह से हो रहा भस्ट्राचार)

दिनांक 25 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ग्राम पंचायत कैथा जनपद पंचायत गंगेव पंचायती भस्ट्राचार की पनाहगार बना हुआ है. यहां पर एक के बाद एक निरन्तर हो रहे भस्ट्राचार की परतें खुलती जा रही हैं. विशेष तौर पर अब मनरेगा के बाद पंच परमेश्वर योजनाओं में भस्ट्राचार हो रहा है. पंचायती राज संचालनालय के मॉध्यम से कलवर्ट पुलिया निर्माण और भवनों के निर्माण के लिए प्राप्त हुई राशि एक एक करके भस्ट्राचार की बलि चढ़ती जा रही है जिसे देखने वाला कोई पंचायत विभाग नही है. 

मुरलीधर पटेल के खेत से मिसिरा तरफ पुलिया निर्माण में एक लाख का भस्ट्राचार

    पंचायतराज संचालनालय मप्र भोपाल द्वारा कल्वर्ट पुलिया निर्माण के नाम से निकाली गई राशि एक लाख रुपये के कार्य में भारी अनियमितता प्रकाश में आई है. इसके पहले भी संपत्ति पटेल के खेत तरफ, बुद्धसेन पटेल के घर के पास एवं उग्रसेन पटेल के घर के पास, शेषमणि पटेल के घर के पास, बृजबल्लभ पटेल के घर के पास आदि नामों से प्रत्येक के लिए सैंक्शन हुई एक लाख रुपये की लॉगत से बनाये जा रही पुलों ने निर्माण में गुणवत्ताविहीन सामग्री का प्रयोग और पुरानी घटिया किश्म की पुलिया लगाकर निर्माण होने के मामले प्रकाश में आये हैं.

   अभी हाल ही में एक अन्य पुलिया निर्माण में भस्ट्राचार प्रकाश में आया है जिसका निर्माण मुरलीधर पटेल के खेत के पास एवं मिसिरा ग्राम की तरफ जाने वाली सड़क की तरफ होना है. इस पुल के लिए वही पुराने ग्राम पंचायत भवन से निकाले गाये नींव के पत्थरों का प्रयोग स्टोन क्रशर से प्राप्त डस्ट एवं घटिया किश्म की सीमेंट से किया जा रहा है.

कुछ इस प्रकार बनाया है गया फ़र्ज़ी एस्टीमेट

    मुरलीधर पटेल के खेत से मिसिरा ग्राम की तरफ नाम में पंचायतराज संचालनालय विभाग द्वारा पंच परमेश्वर योजनान्तर्गत जारी की गई राशि रुपये एक लाख स्वीकृति दिनांक 02/10/2016 में निर्माण कार्य प्रारम्भ हो चुका है. प्राप्त बिल बाउचर के अनुसार इस पुलिया निर्माण में राजवीर ट्रेडर्स नामक विक्रेता से बिल क्रमांक 251 दिनांक 06/05/2018 को कुल 89 हज़ार एक सौ रुपये की सामग्री का क्रय किया जाना बताया गया है जिंसमे मुख्य रूप से बालू 24 हज़ार 500 रुपये प्रति हाइवा के हिसाब से एक हाइवा, सीमेंट 310 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से कुल 60 बोरी जिसकी कुल लॉगत 18 हज़ार 600 रुपये, 40 एमएम की गिट्टी प्रति हाइवा 18 हज़ार 500 के हिसाब से दो हाइवा कुल 37 हज़ार रुपये, एवं 3 नग ह्यूम पाइप 3 हज़ार रुपये प्रति नग के हिसाब से 9 हज़ार रुपये की क्रय होनी बतायी गई है. बिल क्रमांक 251 में वर्णित समस्त क्रय की गई सामग्री की कीमत 89 हज़ार एक सौ रुपये बतायी गई है. 

फ़र्ज़ी बिल बाउचर लगाकर घटिया सामग्री से हो रहा पुल निर्माण

  इस प्रकार उपरोक्त बिल क्रमांक 251 तो मात्र दिखाबा और पैसा निकालने एवं फ़र्ज़ी भुगतान प्राप्त करने का एक जरिया मात्र है. वास्तव में राजवीर ट्रेड्स द्वारा सरपंच कैथा पंचायत के नाम से जारी किये गए बिल क्रमांक 251 द्वारा जो भुगतान होना बताया गया है वह पूरी तरह से फ़र्ज़ी है. वास्तविक धरातल पर जो कार्य हो रहा है उसमे पुराने पंचायत भवन से नींव के पत्थरों को खोदकर उसी पत्थर से पुलिया का निर्माण हो रहा है. इसमे मात्र 5 से 7 बोरी तक घटिया सीमेंट मिलाई जा रही है एवं स्टोन क्रशर की घटिया डस्ट से पुलों की जुड़ाई की जा रही है जिंसमे बेस भाग में कोई भी प्लेट नही डाली जा रही है. इस प्रकार मुश्किल से 10 हज़ार रुपये की लॉगत से एक लाख की पुलों का निर्माण कार्य किया जा रहा है. 

घटिया पुल निर्माण के जांच की पंचों एवं ग्रामीणों ने की माग

   दिनाँक 25 सितंबर 2018 को लोहार बस्ती के पास उपस्थित आम जनता शैलेन्द्र पटेल, राजेश पटेल, नंदकिशोर विश्वकर्मा और साथ ही पंचों यज्ञभाव पटेल, रामानुज केवट ने इस भस्ट्राचार के जांच की माग की है और जनता के पैसे की हो रही बर्बादी की रिकवरी की माग की है साथ ही पंचायतीराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 के तहत कार्यवाही करते हुए ऐसे भस्ट्राचारी सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल को पद से भी पृथक करने की माग की है.

संलग्न - कृपया संलग्न दस्तावेजों में देखने का कष्ट करें जिंसमे राजवीर ट्रेडर्स नामक विक्रेता द्वारा जारी बिल क्रमांक 251 दिनाँक 06/05/2018 संलग्न किया गया है साथ ही पुल निर्माण के लिए पुराने पंचायत भवन से लाये जा रहे पुराने पत्थर भी डंप पड़े हुए हैं. साथ ही निर्माण स्थल पर उपस्थित ग्रामीण जन.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Wednesday, September 5, 2018

गंगेव जनपद है कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले (मामला ज़िले के गंगेव जनपद कार्यालय का जिंसमे कलेक्टर रेट के बाबुओं ने पूरा जनपद कार्यालय हाईजैक किया हुआ है, हर कार्य के लिए रॉयल्टी और चढ़ोत्तरी देना अनिवार्य, नही दिया तो नही होता कोई काम, सरकारी बाबू राजेश सोनी बना भष्ट्राचार का केंद्रबिंदु)

दिनांक 05 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत जनपद कार्यालय में जमकर लुटाई चल रही है. जनपद कार्यालय में सीईओ की नही बल्कि बाबुओं की चलती है. इन सबका हेड राजेश सोनी नामक बाबू है जो पिछले कई वर्षों से जनपद कार्यालय गंगेव में टिका हुआ है. 

कलेक्टर रेट के बाबुओं ने गंगेव जनपद को किया हाईजैक

   यदि सही मायनों में देखा जाए तो समग्र परिवार आई डी सुधरवाने से लेकर कोई भी श्रमिक पंजीयन अथवा किसी भी प्रकार के कंप्यूटर फीडिंग के कार्य मात्र इन्ही कलेक्टर रेट के बाबुओं के हवाले है जिनका शेयर भी बंधा हुआ है इस शेयर में बड़े बाबुओं से लेकर उच्चाधिकारी तक सम्मिलित हैं.

   यदि कोई ग्रामीण हितग्राही अपने पंचायत का कोई भी छोटा से छोटा कार्य अथवा फीडिंग करवाने के लिए ब्लॉक जाता है तो उसे बिना चढ़ोत्तरी चढ़ाए कार्य करवा पाना असंभव है. हर कार्य के लिए 100 रुपये से लेकर आगे हज़ार तक फिक्स होते हैं. यह राशि कार्य की इंटेंसिटी के हिसाब से तय होती है. छोटे कार्य के लिए 100 से 200 रुपये और बड़े कार्यों के लिए हज़ारों तक देना पड़ता है. यदि हितग्राही आवेदक ने माल नही दिया तो उसके कार्य होने की कोई गारंटी नही है.

सरकारी बाबुओं का विभागीय समय 12 से 2 बजे तक

  सबसे बड़ी विडंबना तो यह है की जनपद कार्यालय में सरकारी बाबू अनुपस्थित रहते हैं. इनका समय दोपहर 12 बजे से प्रारम्भ होकर 2 बजे तक चलता है. इनका बहाना होता है की इन्हें दूर से कहीं रीवा अथवा दूसरे जगह से आना होता है इसलिए बस की वजह से लेट हो जाते हैं. इसके बाद मुश्किल से 2 घंटे काम करते हैं और 2 बजे के बाद इन्हें कार्यालय में ढूंढ पाना टेढ़ी खीर है. इस पर भी आधा समय गंगेव ब्लॉक जनपद कार्यालय के सामने बने हुए चाय और समोसे की दुकानों और होटल में ही इन्हें पाया जा सकता है. 

कार्यालय में पावती तक पाना है मुश्किल

   जनपद कार्यालय में सामान्य आवेदक को पावती तक ले पाना मुश्किल है, यदि कोई सामान्य आवेदक आवेदन लेकर जाता है और अपने आवेदन की पावती चाहता है तो उसे पावती तक नही मिलती. इन बाबुओं द्वारा कहा जाता है की पहले जाकर सीईओ से हस्ताक्षर करवाकर लाएं. सीईओ यदि अपनी कुर्सी में बैठा है तो ठीक है वरना फिर घर वापसी ही हो सकती है काम नही.

बाबू राजेश सोनी के इशारे पर चल रहा काला कारोबार

    गंगेव जनपद के फाइनेंसियल सेक्शन की ज्यादातर जबाबदेही सरकारी बाबू राजेश सोनी की है उसी के द्वारा काफी कुछ कार्य किये जाते हैं. इन सबमे कमीशन का जमकर खेल चल रहा है. राजेश सोनी द्वारा पंचायत के सरपंचों, सचिवों से माल ऐंठकर परसेंटेज फिक्स किया हुआ होता है. इसमे पंचायत इंस्पेक्टर, उपयंत्री, सीईओ और अन्य उच्चधिकारियों का शेयर बना हुआ है. 

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हुआ जमकर फर्जीवाड़ा 

     वर्ष 2018 में अभी हाल ही में मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत सामूहिक विवाह सम्मेलन रखा गया था जिंसमे मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित थे और देखा गया की मंडप पर ऐसे महिला पुरुष दिखे जिनके विवाह पहले से तो हुए ही थे साथ ही उनके बच्चे भी पैदा हो चुके थे. कई महिलाएं अपने बच्चों को गोद में लिए हुए घूम रही थीं जिनकी की सामाजिक कार्यकर्ता ने फ़ोटो भी ली है. बाद में इनमे से कई महिलाएं मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में बनाये गए मंडप में बैठीं दिखी. इस बाबत सामाजिक कार्यकर्ता ने ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल को भी सूचित किया गया था.

कलेक्टर रेट के इन बाबुओं की चल रही धांधली

 कंप्यूटर में कार्य करने वाले जिन कलेक्टर रेट के बाबुओं की इस समय जमकर धांधली चल रही है उनमे से पुष्पेंद्र सिंह, ऋषिकेश वर्मा, सूरज सोनी मुख्य हैं. इनमे से कोई भी ऐसा नही जिनमे मानवता शेष बची हुई हो. सबसे बड़ा दलाल इस समय सूरज सोनी है जो राजेश सोनी नामक सरकारी बाबू का चहेता है. इन दोनो सोनी ने गंगेव ब्लॉक जनपद पंचायत कार्यालय को सुनार की दुकान बना डाली है जहां सोने के भाव पर सामान्य डेटा फीडिंग, रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन के कार्य हो रहे हैं. इस समय गंगेव जनपद में इन बाबुओं की दलाली और हीलाहवाली अपने चरम पर है.

कलेक्टर रीवा द्वारा इन्हें तत्काल हटाए जाए 

  अब ऐसे में इन डेटा ऑपरेटरों को कलेक्टर रीवा तकाल प्रभाव के साथ हटाएं. इनकी जांच किया जाए और घूस लेने के लिए इनके ऊपर कंनूनी कार्यवाही किया जाए. सबसे पहले राजेश सोनी को गंगेव जनपद से हटाया जाय क्योंकि राजेश सोनी ने गंगेव जनपद में सबसे ज्यादा गंदगी फैला करके रखी है. बिना किसी मेहनत के किसी भी व्यक्ति को जब अनुकंपा नियुक्ति से कोई पद दे दिया जाता है उसका परिणाम यही होता है जो राजेश सोनी के केस में दिख रहा है. राजेश सोनी ने गंगेव जनपद की सभी पंचायतों में इस कदर भष्ट्राचार फैलाया हुआ है की पूरा जनपद भष्ट्रचार की गंध से प्रदूषित हो चुका है. आश्चर्य की बात तो यह है यह जानकारी जनपद से लेकर ज़िला लेवल तक होते हुए भी इस पर कोई कार्यवाही नही हो रही है. आखिर क्या कारण है की इतनी शिकायतों इतनी कमियों के वावजूद भी न तो कोई प्रशासनिक कार्यवाही हो रही है और न ही इसे यहां से हटाया जा रहा है. 

ईओडब्लू करे जांच, सामने आएगी वित्तीय आनियमितता

   वास्तव में देखा जाए तो जनपद पंचायत गंगेव सहित समस्त पंचायतों में पिछले पांच वर्षों में हुए व्यापक भष्ट्राचार की ईओडब्लू की जांच होनी चाहिए साथ ही सभी कार्यों की कैग रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए. यदि कंपट्रोलर एवं ऑडिटर जनरल से ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाई जाए तो सभी कुछ स्पष्ट हो जाएगा की जनपद के विकाश कार्य कागजों में तो कुछ और हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर पंच परमेश्वर, मनरेगा से लेकर विधायक एवं संसद निधि के कार्यों में भी जमकर भ्रष्ट्राचार हुआ है. सरकार यदि वास्तव में समाज एवं देश को भष्ट्राचार मुक्त करना चाह रही है तो शासन स्तर से कैग और अन्य माध्यमो से एजेंसी तैयार कर सही तरीके की जांच कराए जाकर कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए.

संलग्न - ज़िले के गंगेव जनपद में कार्यरत कलेक्टर रेट के बाबुओं की फ़ोटो, जनपद कार्यालय की फ़ोटो, कुछ सरकारी बाबुओं की फ़ोटो और साथ ही सीईओ जनपद प्रमोद ओझा की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Wednesday, July 11, 2018

मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में माताओं की भी हो गई शादियां? बन गया जांच का विषय (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का जहां पर शादीशुदा महिलाएं और पुरुष भी दिखे मंडप में, मंत्रोंचार तो मात्र दिखाबा था, ब्लॉक में जमकर हुई धांधली, विदाई में दी गई सामग्री की कीमत में भी हुआ फर्जीवाड़ा, बफेट सिस्टम में ज्यादातर बांटा गया चावल दाल, कैमरा देख मंगवाया पूड़ी सब्जी

दिनांक 11 जुलाई 2018, स्थान - गंगेव ब्लॉक रीवा MP,

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    मलमास उतरा नही की ज़िले में इस समय विवाह का मानसूनी मुहूर्त बना हुआ है. भले ही प्राइवेट शादियां कम ही हो रही हों लेकिन सरकारी सदियों का तो ऐसा लग रहा है जैसे माहौल बना हुआ है. 

   मुख्यमंत्री कन्यादान योजना 2018 अन्तर्गत गरीब परिवार के सदस्यों के लिए जिनमे बहुतायत में हरिजन आदिवाशी सम्मिलित हैं ब्लॉक लेवल पर शादी समारोह का आयोजन किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार पता चला की गंगेव ब्लॉक में लगभग 90 जोड़ों की शादियाँ करवाई गईं हैं. 

    मानसून वेडिंग के इस दौर में कोई भी सरकारी योजना के लाभ से वंचित नही होना चाह रहे थे. बहुतायत में हरिजन आदिवाशी जोड़े दिखे. जानकारी पर बताया गया की काफी लोगों को लेट जानकारी मिली फिर भी योजना का लाभ लेने के लिए ब्लॉक पहुचे हुए थे. 

हज़ारों की भीड़ में दिखे कुछ शादीसुदा जोड़े 

    गंगेव ब्लॉक कार्यालय में उपस्थित हज़ारों जोड़ों में आधे से अधिक ऐसे दिखे जिनके पास एक या दो बच्चे भी थे जो बच्चों को लटकाए बाहर घूम रहे थे. यद्यपि यह जानकारी कईयों ने छुपाने का भी प्रयाश किया. लेकिन उपस्थित समूह के हाव भाव से अच्छी तरह से समझ आ रहा था इनमे से ज्यादातर की शादी हो चुकी है और योजना के लाभ लेने के लिए आये हुए हैं.

मंडप में बैठे जोड़ों के भी चेहरे उम्र बयां कर रहे थे

   आम तौर पर यह देखा जाता है की ग्रामीण अंचलों में हरिजन आदिवाशी वर्ग के बच्चों की शादियाँ सामान्य वर्ग के बालिगों की शादियों से पहले कर दी जाती हैं. ग्रामीण स्तर की परंपरा ही कहें की यहाँ काफी शादियां अंडर एज हो जाती हैं लेकिन उन्हें छुपाने का प्रयाश किया जाता है. यदि किसी खुफिया एजेंसी से गुपचुप यह सर्वे कराया जाय तो स्वयं ही सारी सच्चाई का पता चल  जाएगा. इस प्रकार पाएंगे कि ग्रामों में आज भी कम पढ़े लिखे वर्ग में नाबालिग शादियाँ हो रही हैं।

   इस प्रकार मंडप में बैठे जोड़ों को स्वयं ही देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता था की कुछ की शादियां पहले ही हो चुकी थीं. ब्लॉक स्तर से जो जानकारी दी गई थी उसमे बताया गया था की जिनकी शादियां वर्ष 2018 में ही हुई हैं और उनके बच्चे पैदा न हुए हों उन्हें ही लाया जाय और दूसरे वह लोग जिनकी अभी तक शादियां न हुई हों वह लोग तो सम्मिलित हो ही सकते हैं।

  परंतु जिस प्रकार से देखा गया उससे साफ लग रहा था की कई जोड़े तो ऐसे रहे जिनकी शादियां वर्षों पहले हो चुकीं थीं फिर भी 20 हज़ार की मुख्यमंत्री द्वारा दी जाने वाली एफडी और कुछ विदाई सामग्री को लेने की होड़ में अच्छा खासा जमावड़ा लगा हुआ था. ऐसा लग रहा था बस किसी तरह से एक एक एलजी का कुकर और कुछ अन्य सामग्री मिल जाए और बस काम बन जाए.

  विदाई में दिया एलजी कुकर और साड़ी और 100 रुपये तक के बर्तन 

    इस कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जोड़ों को जो सामग्री वितरित की गई उसमे एक साड़ी, कुछ 100 रुपये की कीमत के बर्तन जिंसमे एक दो गिलास और एक थाली समिलित थी. सभी जोड़ों को मौर के अतिरिक्त एक 3 लीटर का एलजी कुकर दिया गया. जब कुछ जोड़ों से इसके बारे में जानकारी चाही गई तो नाम न उजागर किये जाने की शर्त में बताया की हमने अपने सरपंच और सचिव की मदद से पंजीयन कराया था जिसके एवज में हमने उनको पैसे भी दिए थे. कुछ हितग्राहियों को 2 चार सौ रुपये के चांदी के पायल भी मिले ऐसा उनके द्वारा बताया गया.

बफेट का भोजन रहा स्कूलों के मध्यान भोजन जैसा

    आजकल ग्रामीण अंचल की स्कूलों में जिस प्रकार बहुतायत मे चावल दाल अथवा खिचड़ी वितरित की जा रही है और स्कूल के मीनू का कोई खयाल नही रखा जाता उसी प्रकार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना 2018 के इस कार्यक्रम में भी आयोजित बफेट सिस्टम में भी ज्यादातर हितग्राही और उपस्थित उनके परिजन बस चावल दाल ही खाते मिले. कुछ लोगों ने बाद में पूड़ी शब्जी का भी शायद स्वाद लिया लेकिन बहुतायत में जब प्लेटों का मुआयना किया गया तो उसमे प्लेन चावल और दाल ही दिखा.

    कुल मिलाकर सम्मेलन में आयोजित बफेट का स्टैण्डर्ड बहुत घटिया कहा जा सकता है और इसके बजट को लेकर भी प्रश्न खड़ा होना भी स्वाभाविक है. प्रश्न उठता है की बफेट के मीनू में क्या क्या भोजन रखा गया था? इसका कितना बजट था? क्या वास्तविक बजट यही था जो खिलाया गया की बजट कुछ और था और खिलाया कुछ और गया.

भोजन की हुई अच्छी खासी बर्वादी

   एक चीज और भी इस कार्यक्रम के दौरान देखने को मिली जो की सामाजिक कार्यकर्ता के मोबाइल कैमरे में कैद होने से नही बच सकी. वह थी भोजन की बर्वादी. लगाए गए बफेट के बाजू में ही न्यायालय नायाब तहसीलदार गंगेव के कार्यालय के सामने ही टैंकर के पास कई क्विंटल छोड़ा गया भोजन बर्वाद होता दिखा जिसे आदमी से लेकर माल मवेशी तक कचर रहे थे. यह स्थिति थोड़ा दुखद थी क्योंकि अन्न देवता की इस प्रकार की बर्वादी बिल्कुल ही उचित नही कही जा सकती और वह भी पैरों तले कुचलना तो बिल्कुल ही अनुचित है. इस बाबत वहां उपस्थित कर्मचारियों से पूंछा भी गया की क्या उनके पास इस वेस्ट फ़ूड को मैनेज करने के लिए डस्ट बिन नही है. इस पर उनके द्वारा कहा गया की हमे डस्ट बिन उपलब्ध नही कराया गया. इस बात से यह बात सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है की सरकारी स्तर पर भी इतने अधिक बजट आवंटन के बावजूद किस प्रकार भ्रष्ट्राचार व्याप्त होने के साथ साथ मिस मैनेजमेंट भी व्याप्त है.

काफी जोड़े लौटे खाली हाँथ, राजेश सोनी ने संभाला था रजिस्ट्रेशन काउंटर

    वहां भीड़ में उपस्थित कई जोड़ों से जानकारी लेने का प्रयाश किया तो पता चला की जितनी वहां भीड़ दिख रही थी उतने जोड़ों को तो योजना का लाभ नही मिल पाया था. रजिस्ट्रेशन काउंटर पर उपस्थित गंगेव ब्लॉक का बहुचर्चित बाबू राजेश सोनी था. जिसके ऊपर कई जोड़ों ने अनियमितता का भी आरोप लगाया. जोड़ों ने बताया की उनके फॉर्म काफी समय से जमा थे लेकिन उनके नामों को नही बुलाया गया. जिनका मामला पहले से फिक्स था उन्हें ही बस योजना का लाभ मिला. इस बीच कैथा और हिनौती पंचायत से भी कुछ जोड़े पहुचे थे जो बाद में मायूस होकर लौटे. 

पंचायत सचिवों ने समय पर नही कराया पंजीयन 

   उपस्थित कई जोड़ों ने बताया की उनका पहले से पंजीयन नही हुआ था और जानकारी मिलने पर वह सभी सीधे गंगेव ब्लॉक कार्यालय में विवाह सम्मेलन पर पहुचे थे. उनके पास सभी कागज़ात जैसे जन्म प्रमाण पत्र, अंकसूची, आधार कार्ड, बीपीएल राशन कार्ड, समग्र आईडी, दोनो पक्षों की फ़ोटो और वर बधू और अन्य जरूरी दस्तावेज भी मौजूद थे लेकिन इसके वावजूद भी उनका फॉर्म जमा नही किया गया. उन्हें कहा गया की अब बहुत लेट हो चुका है अब यहां आने से कोई फायदा नही है. फॉर्म पहले भरवाकर रजिस्ट्रेशन कराया जाना था अतः अब रजिस्ट्रेशन नही हो पायेगा. इस प्रकार बिना पहुच और जुगाड़ वाले जोड़े खाली हाँथ ही लौट आये.

 मुख्यमंत्री कन्यादान योजना एक औपचारिकता, जमकर हुई धांधली 

   वास्तव में जो स्थिति रीवा के गंगेव ब्लॉक कार्यालय में आयोजित मुख्यमंत्री कन्यादान योजना 2018 में दिखी उससे यह बात समझ आई की यह सब दिखावा मात्र था क्योंकि इसमे ज्यादातर तो फ़र्ज़ी शादियां हुईं हैं और जो वास्तविक हितग्राही थे उनके फॉर्म तक नही लिए गए. इस पूरे कार्यक्रम में जमकर धांधली होती है. यह मात्र इस वर्ष के कार्यक्रम की बात नही है बल्कि हर वर्ष यही होता है. थर्ड क्वालिटी का उपहार देकर ज्यादा बिल बनाकर सरकार के ख़ज़ाने में चुना लगाया जा रहा है. जो वास्तविक बजट इस कार्यक्रम के लिए आवंटित हो रहा है उसका मात्र कुछ प्रतिशत ही उपयोग हो रहा है बांकी का फ़र्ज़ी बिल बाउचर बना कर राशि का बन्दरवाट कर लिया जाता है.

सामाजिक कार्यकर्ता ने दायर की थी आरटीआई

    गंगेव ब्लॉक में हो रहे लार्ज स्केल फर्जीवाड़ों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा पहले भी सीईओ जनपद गंगेव के नाम आर टी आई दायर की जा चुकी है जिसका जबाब आज तक लंबित है. इसी प्रकार के पिछले 4 या 5 वर्ष के हो रहे मुख्यमंत्री योजना के अन्तर्गत विवाहों, छात्रवृत्ति, कर्मकार, मजदूर सुरक्षा आदि के कार्यक्रम को लेकर हुए खर्चे, हितग्राहियों की सूची आदि के विषय में आर टी आई दाखिल किया गया है जिसकी की अपील राज्य सूचना आयोग भोपाल में भी की गई है. 

संलग्न - मुख्यमंत्री कन्यादान योजना वर्ष 2018 में आयोजित जनपद स्तर के सामूहिक विवाह कार्यक्रम का दृश्य. कई जोड़े शादीसुदा बाल बच्चे वाले दिख रहे हैं. बफेट सिस्टम में चावल दाल परोषा जा रहा है. ज्यादातर भोज्य पदार्थ की बर्वादी हो रही है. पैरों तालों कचरा जा रहा है. पंजीयन काउंटर में भारी भीड़ उर अव्यवस्था.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोब 7869992139, 9589152587