विशेष ब्यूरो रिपोर्ट | रीवा (मध्य प्रदेश)
रीवा: रीवा जिले की पावन स्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। आचार्य डॉ गौरी शंकर शुक्ला के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही कथा धारा में छठे से नौवें स्कंध तक के मुख्य प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है।
*अजामिल के पतन और उद्धार की मार्मिक कथा*
कथा के दौरान छठे स्कंध से प्रसिद्ध अजामिल प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। आचार्य जी ने बताया कि अजामिल एक वेद-शास्त्रों का ज्ञाता और संस्कारी ब्राह्मण था, जो कुसंगत और काम के आवेग के कारण धर्म मार्ग से भटक कर पतित हो गया।
परंतु, उसके पूर्व जन्मों के सात्विक और धार्मिक कर्म निष्फल नहीं गए। संतों की कृपा से उसने अपने दसवें पुत्र का नाम 'नारायण' रखा। जीवन के अंतिम क्षणों में यमदूतों को देखकर जब अजामिल ने भयभीत होकर अपने पुत्र 'नारायण' को पुकारा, तो केवल 'नारायण' नाम के उच्चारण मात्र से भगवान के पार्षद (गण) प्रकट हो गए और यमदूतों से उसकी रक्षा की। इस प्रकार अजामिल को परमधाम और मोक्ष की प्राप्ति हुई।
*जीवन प्रबंधन और कर्म-फल का सिद्धांत*
कथा व्यास ने इस प्रसंग की आध्यात्मिक विवेचना करते हुए कहा कि ईश्वर की कृपा और नाम की महिमा पूर्व जन्मों के संचित शुभ कर्मों का परिणाम होती है। भागवत महापुराण कलिकाल में पतित से पतित मानव के उद्धार का मार्ग दिखाती है। जो भी व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर की शरण में आता है, वह न केवल स्वयं का बल्कि अपने कुल की सात पीढ़ियों का उद्धार कर देता है।
*समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम और मोहिनी अवतार*
कथा के आठवें स्कंध में समुद्र मंथन, देवासुर संग्राम, महर्षि दधीचि का अस्थिदान, भगवान विष्णु के कूर्म (कछुआ), वामन और मोहिनी अवतार का विस्तृत वर्णन किया गया। समुद्र मंथन से निकले घोर 'हलाहल' विष से जब तीनों लोकों में हाहाकार मचा, तब भगवान शिव ने जगत् कल्याण के लिए उसे अपने कंठ में धारण किया, जिससे वे 'नीलकंठ' कहलाए। इसके बाद मोहिनी रूप धारण कर भगवान विष्णु ने असुरों से अमृत कलश लेकर देवताओं को पान कराया।
आचार्य जी ने बताया कि अमृत कलश की छीना-झपटी के दौरान जहाँ-जहाँ अमृत की बूंदें छलकीं—प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक—उन चारों स्थानों पर आज भी कुंभ मेले का पावन आयोजन होता है।
*समुद्र मंथन का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक दर्शन*
कथा में समुद्र मंथन के मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक पहलू को रेखांकित करते हुए बताया गया कि हमारा मस्तिष्क ही 'समुद्र' है। जब हम चिंतन रूपी मंथन करते हैं, तो अच्छे और बुरे दोनों विचार (अमृत और विष) उत्पन्न होते हैं। देवासुर संग्राम हमारे भीतर चलने वाला द्वंद्व है। मानव का मूल उद्देश्य शिव रूपी धैर्य से नकारात्मक विचारों को समाप्त कर अमृत रूपी सद्विचारों और सत्कर्मों को अपनाना होना चाहिए। भारतीय शास्त्र ग्रंथ केवल धार्मिक कथाएं नहीं, बल्कि मानव जीवन के सटीक प्रबंधन का वैज्ञानिक आधार हैं।
*7 सितंबर दिन सोमवार तक चलेगा आयोजन*
कैथा के ऐतिहासिक हनुमान जी स्वामी मंदिर परिसर में 31 अगस्त से शुरू हुआ यह पापविनाशक श्रीमद्भागवत कथा आयोजन 07 सितंबर 2026 दिन सोमवार तक चलेगा। आयोजकों और धर्मप्रेमी बंधुओं ने समस्त क्षेत्रवासियों से इस अमृतमयी कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
*स्पेशल ब्यूरो रिपोर्ट रीवा मध्य प्रदेश*
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