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Friday, August 17, 2018

कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ होगी भागवत कथा (श्रीहनुमान मंदिर कैथा में श्रावण के पवित्र महीने में आयोजित हो रही श्रीमद भगवद कथा)

दिनांक 17 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा श्री हनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)

  पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दिनांक 18 अगस्त से कलश यात्रा के साथ श्रीमद भगवद भक्ति ज्ञान महायज्ञ का शुभारंभ होगा जो अगले आठ दिनों तक चलेगा. दिनांक 25 अगस्त को हवन एवं भण्डारे के साथ सम्पूर्ण कार्यक्रम का विसर्जन होगा.

 आचार्य दिलीप जी के मुखारविंद से प्रवाहित होगी कथा

   कौशाम्बी से संबंध रखने वाले एवं प्रयाग में अपने अमृतमयी कथा का अविरल प्रवाह करने वाले आचार्य श्री दिलीप जी के मुखारविंद से अमृतमयी पापविनाशक मोक्षप्रदायक श्रीमद भगवद कथा का अविरल रसास्वादन रीवा क्षेत्र की भी जनता करेगी. यह कथा निरन्तर 25 अगस्त 2018 तक चलती रहेगी. आचार्य श्री दिलीप जी अब तक सैकड़ों भागवत कथा पर प्रवचन कार्य कर चुके हैं और वर्तमान आधुनिक वक्ताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं. इसके पूर्व भी रीवा जिले में आचार्य जी ने कई स्थानों पर सुंदर प्रवचन कार्य किया है. उनके प्रवचन में आध्यात्मिक गहराइयों के साथ साथ पौराणिक कथानकों का सुंदर सम्पुट रहता है. लोग आचार्य के कथा प्रसंगों को सुनकर भावविभोर हो जाते हैं. कैथा में वर्ष 2014 के आसपास अंगद पटेल के घर में आयोजित भागवत कथा में भी इन्ही के द्वारा प्रवचन कार्य किया गया था. श्रीमद भगवद कथा के दौरान पूजा पाठ और वेदीपूजा आदि में आचार्य शिवशंकर शुक्ला आचार्य श्री दिलीप जी का सहयोग करेंगे. दिनांक 18 अगस्त को शाम 3 बजे से कलश यात्रा का कार्यक्रम रखा गया है एवं दिनांक 19 अगस्त को वेदीपूजा के साथ शुबह बैठकी का कार्यक्रम होगा. कार्यक्रम में परायण का कार्य शिबह 9 बजे से 12 बजे तक होगा एवं प्रवचन का कार्यक्रम शाम ढाई बजे से 6:30 बजे तक होगा.

  भागवत कथा श्रवण से मिटते हैं पाप, मिलता है मोक्ष

   श्रीमद भगवद कथा के निरंतर श्रवणपान से सभी पाप मिटते हैं और जीव जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति पाकर मोक्ष की प्राप्ति करता है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जीवात्मा अमर, शाश्वत सनातन, अजर, ईश्वर अंश है. लेकिन अज्ञानतावश यह मोह जाल फसे हुए जन्म मृत्यु के चक्र में फसी रहती है. अपने कर्मो के अनुसार जीव फल प्राप्त करता हुआ कर्म बंधन को नही तोड़ पाता है. जब मॉनव को ज्ञान पाप्त होता है तो वह इस संसार सागर से मुक्ति की दिशा में अग्रसर होता है, अच्छे शुभ और सात्विक कर्म करता है, दान करता है, पुण्य के कार्य करता हुआ ईश्वर को प्राप्त करता है और फिर इस संसार सागर में वापस नही आता है.

    श्रीमद भागवत कथा वास्तव में यही बताता है की किस तरह से व्यक्ति अपने जीवन को धन्य बनाते हुए मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है. 

    श्रीमद भगवद कथा के निरंतर श्रवण पान से सभी पाप नष्ट होते हैं और साथ में व्यक्ति ईश्वर के चिंतन करते हुए प्रभु शरण को प्राप्त करता है. जिस प्रकार से महाराज परीक्षित श्रीमद भगवद कथा के श्रवन पान से मुक्ति को प्राप्त हुए ठीक उसी प्रकार से आज कलयुगी मॉनव भी प्रभु श्रीकृष्ण की शरण में आकर उनका शरणागत होकर मुक्ति को प्राप्त कर सकता है.

संलग्न - संलग्न कथा प्रवाचक आचार्य श्री दिलीप जी की फ़ोटो एवं साथ में श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139



Thursday, August 16, 2018

कैथा में भागवत महायज्ञ का होगा साप्ताहिक आयोजन (ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत कैथा ग्राम के श्रीहनुमान मंदिर में दिनांक 18 से 25 अगस्त तक आयोजित होगी श्रीमद भगवद कथा, हवन एवं भंडारा 25 अगस्त को)

दिनाँक 16 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण से, शिवानन्द द्विवेदी)

  श्रावण का पवित्र महीना और जगह जगह धार्मिक आयोजन. जी हाँ, समय है कैथा की पवित्र पावन भूमि पर आयोजित होने वाले परंपरागत और पचासों वर्षों से आयोजित होने वाले श्रीमद भगवद कथा के कार्यक्रम का.

   श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में आयोजित होने वाले श्रीमद भगवद भक्ति ज्ञान महायज्ञ का आयोजन दिनांक 18 अगस्त को कलश यात्रा के साथ प्रारम्भ होगा जो दिनांक 25 अगस्त दिन शनिवार तक चलता रहेगा. दिनांक 25 अगस्त को हवन एवं विशाल भंडारा के साथ सम्पूर्ण कार्यक्रम का विसर्जन होगा.

    इस विशेष कार्यक्रम में कथा प्रवाचक का कार्य आचार्य श्री किसन जी के मुखारविंद से किया जाएगा. आचार्य श्री को आचार्य दिलीप जी के नाम से भी जाना जाता है. आचार्य दिलीप जी यूपी इलाहाबाद से तलूक रखते हैं और अब तक सैकड़ों कथा भागवत में प्रवचन का कार्य कर चुके हैं. 

कैथा मन्दिर प्राँगण में हुआ पुताई कार्य

    इस बीच भागवत कथा कार्यक्रम के पूर्व कैथा श्री हनुमान मंदिर प्राँगण के आसपास सफाई कार्य किया जा रहा है साथ ही मंदिर पुताई लिपाई भी की गई. पुताई और साफ सफाई कार्य में सहभागिता निभाने वाले धर्मार्थ समिति भारत के युवा कार्यकर्ता सम्मिलित रहे जिनमे सज्जन केवट, इंद्रलाल साकेत, हेमराज साकेत, शिवभान केवट, कैलाश केवट, राजकुमार केवट, हरिश्चन्द्र केवट, राम गोपाल साकेत, रोहिणी देवी पटेल, संपूर्णानंद द्विवेदी सहित अन्य कार्यकर्ता सम्मिलित हुए.

   इस विशेष कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी कर रहे हैं साथ ही कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम कलयुग के देवता, पवन पुत्र, अंजनी के लाल श्री बजरंगबली जी के संरक्षण में सम्पन्न होते हैं. विश्व शांति एवं जीव कल्याणार्थ आयोजित होने वाले यह सभी कार्यक्रम सार्वजनिक कार्यक्रम हैं जो आम जनमानस के सहयोग से होते आये हैं जिनमे सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है.

संलग्न- कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें धर्मार्थ समिति भारत के युवा कार्यकर्तागण मंदिर की पुताई एवं साफ सफाई कार्य में सहभागिता निभाते हुए.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

प्रचारक, संयोजक एवं प्रवसक्ता श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Thursday, May 24, 2018

भागवत के सतत श्रवण पान से मिटता है अज्ञान, मिलती है मुक्ति ( ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत हिनौती-बड़ोखर ग्राम में आयोजित हो रही श्रीमद भगवद कथा, मुख्य यजमान सुरसरी सिंह परिहार, 27 को हवन एवं पुर्णाहुति जबकि भण्डारा 28 मई को)

दिनांक 25 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    हिन्दू पंचांग के पवित्र मलमास अथवा पुरुषोत्तम मास में जगह जगह धार्मिक अनुष्ठानों और आयोजनों का सिलसिला निरंतर चल रहा है. इस बीच पावन पुनीत यज्ञस्थली कैथा से सटे हुए ग्राम हिनौती-बड़ोखर में भी पिछले दिनों 20 मई से भागवत सप्ताह महायज्ञ का प्रारम्भ हुआ जो सतत चल रहा है. 

 पुर्णाहुति और हवन 27 को

   मुख्य यजमान के रूप में भागवत कथा का श्रवनपान कर रहे सुरसरी सिंह परिहार और शिवकुमारी परिहार ने ज्यादा से ज्यादा भक्तों की उपास्थिति की अपील की है. कार्यक्रम में कथा प्रवचन और परायण का कार्य आचार्य राशिरामण तिवारी एवं अनिल तिवारी के मुखारबिंद से हो रहा है. दोनो आचार्यगण परिहार परिवार के कुलगुरु हैं.

   कार्यक्रम में पुर्णाहुति और हवन का कार्यक्रम दिनांक 27 मई को रखा गया है जबकि सार्वजनिक भंडारे एवं ब्राह्मण भोज का कार्यक्रम 28 मई को होगा.

  भागवत श्रवण है मोक्ष का द्वार 

    आचार्य श्री राशिरमण तिवारी जी ने बताया की कलयुग के प्रभाव और नियति के अधीन महाराज परीक्षित को ब्राह्मण पुत्र का श्राप लगता है तो वह मृत्यु के भय से घबरा जाते हैं. उनकी मृत्यु 7 दिन में बतायी जाती है. ऐसे में अपने पुरोहितों के समक्ष उपास्थित होकर परीक्षित जी अपनी गलती और पूरी व्यथा बताते हैं. उनके कुलगुरु और पुरोहितगण उन्हें व्यासपुत्र शुकदेव जी के पास भेजते हैं. तब शुकदेव जी कहते हैं की है राजन आपका मृत्यु से भय आपका अज्ञान है. अतः आप 7 दिवश तक भागवत कथा का श्रवण पान करें जिससे आपका अज्ञान नष्ट होकर आप मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेंगे.

7 दिवश में ही प्राण त्याग होते हैं

   7  दिवश तक निरंतर भागवत कथा का श्रवण पान करने के पश्चात जब ब्राह्मण पुत्र के द्वारा दिए गए श्राप की बात आती है और महाराज परीक्षित पुनः विचलित होते हैं तब शुकदेव जी कहते हैं की है राजन अभी तक आपका अज्ञान लगता है नष्ट नही हुआ. याद करिये की भगवान श्रीकृष्ण जी ने गीता के उपदेश में क्या कहा था. मरता तो मात्र हमारा यह शरीर है न की आत्मा. आत्मा अजर अमर शाश्वत सनातन और ईश्वर अंश है अतः शरीर नष्ट होने के उपरांत भी यह आत्मा नष्ट नही होती है. और आज नही तो कल इस शरीर का नष्ट होना तय है तो फिर आप शोक क्यों कर रहे हैं. 

   आचार्य जी ने बताया की परीक्षित की मृत्यु 7 दिवश में होनी बतायी गई थी इसका तात्पर्य यह है की हम सभी की मृत्यु 7 दिवश में ही होनी है. सप्ताह में मात्र 7 दिन ही होते हैं अतः आठवां दिन किसी की मृत्यु नही होती. इस प्रकार परीक्षित जी को तत्काल ब्रह्मज्ञान हो जाता है और तक्षक नाग रूपी काल आकर परीक्षित जी को डसता है और ईश कृपा से परीक्षित जी की आत्मा परमात्मा में विलीन होकर परम पद को प्राप्त करती है. समस्या मृत्यु से नही है बल्कि समस्या है मृत्यु के भय से है, जैसे ही भय से मुक्ति मिल गयी मानो मृत्यु पर विजय मिल गयी. आचार्य जी ने बताया की व्यक्ति अज्ञानवश यह समझ बैठता है की वह इस धरती पर आया है तो सदैव ही बना रहेगा जबकि वह स्वयं रोज देखता है की किस प्रकार इस नश्वर संसार में आने वाला हर जीव दिन प्रतिदिन यहां से पलायन कर रहा है. परंतु अज्ञान के अंधकार में जकड़ा हुआ मॉनव मोह माया के चंगुल में इस प्रकार पड़ा रहता है की वह इस नश्वर संसार को छोंड़ना नही चाहता. 

   महाराज जनक थे जीवनमुक्त

        अतः श्रीमद भगवद कथा के निरन्तर श्रवण पान करते रहने से  जीव का मोह नष्ट होकर आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है और आत्मज्ञान से ही व्यक्ति को वास्तविक मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. मुक्ति शास्त्रों में दो प्रकार की बतायी गई है. एक शरीर त्याग के बाद की मुक्ति जबकि दूसरी जीवन रहते ही मुक्ति की प्राप्ति. आचार्य जी ने बताया की राजा जनक जीवन्मुक्त के उदाहरण हैं जिन्होंने आत्मज्ञान से जीते जी ही मुक्ति प्राप्त कर ली थी इसीलिए उन्हें विदेह भी कहा जाता था. विदेह का तात्पर्य है इस शरीर में आत्मा रहते हुए भी शरीर के भाव का एहसास न होना बल्कि आत्मा में अवस्थित होना ही जीवन मुक्ति है.

   संलग्न - रीवा ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले हिनौती-बड़ोखर ग्राम में आयोजित श्रीमद भगवद भक्ति ज्ञान यज्ञ का दृश्य.

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शिवानन्द द्विवेदी, राष्ट्रीय संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,  मोबाइल 07869992139, 09589152587 

मिसिरा ग्राम में बह रही भागवत की बयार (थाना गढ़ अंतर्गत पावन यज्ञस्थली कैथा के नजदीकी ग्राम मिसिरा में 18 से 25 मई तक आयोजित हो रही भागवत कथा, 26 को हवन एवं भंडारे के साथ विसर्जन)


दिनांक 24 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

 हिन्दू पंचांग के पवित्र मलमास या अधिमास में जगह जगह धार्मिक आयोजनों और अनुष्ठानों का सिलसिला चल रहा है. इसी बीच थाना गढ़ अंतर्गत पावन पुनीत श्रीहनुमान जी की स्थली कैथा के अत्यंत नजदीक ही स्थित मिसिरा ग्राम में भी श्रीमद भगवद कथा का कार्यक्रम चल रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री बंसपती सिंह अपने निज निवास में दिनाँक 18 से 25 मई तक भागवत कथा का श्रवण कर रहे हैं एवं 26 मई को हवन एवं भंडारे के साथ कार्यक्रम का विसर्जन होगा. इस बीच सभी भक्त श्रद्धालुगणों को कथा श्रवण करने एवं भंडारे का प्रसाद ग्रहण करने के लिए सादर आमंत्रित किया गया है.

  श्रीमद भगवद कथा में परायण का कार्य श्री श्री 108 श्री महेश प्रसाद शास्त्री जी महाराज एवं प्रवचन का कार्य आचार्य श्री जय प्रकाश शास्त्री जी महाराज के मुखारबिंद से किया जा रहा है.

   कार्यक्रम शुबह 8 बजे से 12 बजे तक एवं शायं 4 बजे से शाम सात बजे तक चलता है.

कथा में अब तक

मिसिरा ग्राम में आयोजित श्रीमद भगवद कथा के कार्यक्रम में अब तक सृष्टि उत्पत्ति, भगवान कृष्ण जी का जन्मोत्सव और बॉलीलायें, पूतना वध, कंस प्रसंग, मथुरा में प्रवेश, गुरुकुल में प्रवेश, विद्याध्ययन, और पुनः मथुरा वापसी, एवं जरासंध वध, द्वारिका पूरी निर्माण, समस्त मथुरा वासियों का द्वारिका पुरी में निवास, सहित अन्य कथा प्रसंग सम्मिलित हैं.

 श्रीमद भगवद में उद्वव प्रसंग

  

    जब भगवान श्रीकृष्ण जी उद्धव जी को गोपियों को तत्व ज्ञान देने के लिए भेजते हैं तो उद्धव जी को अपने वेदांत ज्ञान पर काफी अभिमान आ जाता है. उद्धव जी मन में सोचते हैं की कहां उनका यह वेदांत ज्ञान ब्राह्म ज्ञान और कहां अशिक्षित अनपढ़ गांव की गोपियाँ. वह उन अनपढ़ गोपियों को कैसे यह ब्राह्म ज्ञान दे पाएँगे.

  इसी उहापोह में उद्वव जी गोकुल के लिए प्रश्थान करते हैं. श्रीकृष्ण जी के वेश में उद्वव गोकुल पहुचते हैं तो वहां उपस्थित नन्द बाबा और अन्य लोग आश्चर्य चकित हो जाते हैं. उन्हें लगता है की यह हमारा कृष्ण ही है. मिलने में ज्ञात होता है की यह कृष्ण नही उनके मित्र उद्वव जी है. इस प्रकार उनको बड़े प्यार के साथ उन्हें घर में ले जाते हैं और उनका सत्कार करते हैं.

  जब उद्धव जी गोपियों से मिलते हैं तो विभिन्न प्रकार से उन्हें समझाते हैं की यह मोह माया में पड़ना उचित नही है और ईश्वर के प्रेम में ही जीवन समर्पित करना उचित है. उद्वव जी विभिन्न प्रकार से एकेश्वरवाद और वेदांत की बात करने लगते हैं परंतु गोपियों के हृदय में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नही होता, गोपिकाएं कहती हैं की हमारे लिए तो ब्राह्म श्रीकृष्ण ही हैं और वही हमारे मन और रोम रोम में बसे हुए हैं. इस प्रकार गोपियों का अगाध प्रेम देखकर उद्वव जी स्वयं अपने ज्ञान और वैराग्य से विचलित हो जाते हैं. उन्हें अपने जीवन में पहली बार पता चलता है की इस प्रेमाभक्ति के समक्ष उनका ज्ञान और वैराग्य बौना साबित हुआ है.

  इस प्रकार इस कथानक के माध्यम से श्रीमद भगवद कथा में भक्ति और प्रेम को ज्ञान और वैराग्य से भी श्रेष्ठ बताया गया है.

  कथा प्रसंग में अब आगे

    भगवद कथा प्रसंग में आगे के प्रवचन में आचार्य श्री जय प्रकाश शास्त्री के मुखारबिंद से जरासंध प्रसंग बताते हुए रुक्मिणी हरण का प्रसंग बताते हुए जरासंध आदि का वध करते हुए शिशुपाल वध एवं कृष्ण-सुदामा चरित्र का प्रसंग आएगा.

    आयोजन समिति द्वारा सभी भक्त श्रद्धालुगणों को सादर आमंत्रित किया गया है।

  संलग्न - रीवा ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत मिसिरा ग्राम में चल रही श्रीमद भगवद कथा कार्यक्रम के छयाचित्र संलग्न हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,

मोबाइल - 07869992139, 0958915258

Friday, March 23, 2018

कैथा के प्राचीन देवी मंदिर मे भागवत कथा का समापन दिनांक 24 मार्च को, भंडारा और हवन के साथ होगा विसर्जन

दिनांक 23 मार्च 2018, स्थान – गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

  पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन शारदा देवी मंदिर प्रांगण मे दिनांक 18 मार्च से प्रारम्भ हुई श्रीमद भगवद कथा का समापन दिनांक 24 मार्च को हवन और भंडारे के साथ किया जाएगा।

  बता दें की देवी मंदिर के कार्यक्रम परंपरागत रूप से प्रत्येक चैत्र नवरात्रि मे होते आए हैं और इस वर्ष भी परंपरानुरूप कार्यक्रम चल रहा है। क्षेत्र के 12 मौज़ा हिनौती के भक्त श्रद्धालुगण माता मंदिर मे चैत्र नवरात्रि के  प्रत्येक दिन नवमी तक जल चढ़ाने और पूजा अर्चना करने आते हैं। कैथा स्थित यह देवी मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है जिसे इसी कैथा ग्राम की इलाकेदार गौटिन पटेल द्वारा बनवाया गया था जो उनकी पूज्य कुल देवी थीं। बाद मे गौटिन के मरने के बाद देवी मंदिर की रौनक भी लगभग मर गई। क्योंकि गौटिन के परिवार के सदस्यों और उनके पुत्र पौत्रों द्वारा देवी मंदिर का रख रखाव सही तरीके से न हो पाने और मंदिर का जीर्णोद्धार भी न होने की वजह से अब मंदिर पूरी तरह से खंडहर मे तब्दील हो चुका है जिसकी फोटो भी यहाँ पर संलग्न है।

   बीच मे कुछ श्रद्धालु भक्तों ने मंदिर के जीर्णोद्धार की चर्चना की तो बताया गया की अति प्राचीन देवी मंदिर की जमीन अभी भी कुछ पटेल परिवारों के पट्टे मे आने के कारण उसमे आपत्ति है अतः सार्वजनिक तौर पर प्रयास कर इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाना कानूनी मुद्दा बन सकता है। इस प्रकार आज इस कलयुग मे देवी देवता भी आदमी के ही सहारे हो चुके हैं कि कोई तो इनका उद्धार करे। कभी तो यह कहा जाता था की देवी देवताओं के पूजा अर्चना से मानव का कल्याण होता है और मानुषी तन को मोक्ष मिलता है परंतु देवी मंदिर और अन्य हिन्दू धर्मस्थलों की आज इस कलयुग के समय स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानों देवी देवता ही आज मानव से अपना उद्धार चाह रहे हैं।

   वहरहाल कुछ अत्यधिक धर्मावलम्बी और ओर्थोड़ोक्स धार्मिक व्यक्ति अभी भी श्रीमद शारदा देवी माता रानी पर पूर्ण श्रद्धा भक्ति रखते हैं जिससे औपचारिक तौर पर भागवत कथा आदि का कार्यक्रम समय समय पर करवाते रहते हैं। चूंकि देवी जी इस पूरे 12 मौज़ा हिनौती क्षेत्र की पूज्य कुल मानी गई हैं अतः यहाँ वर्ष के दोनों शारदेय  और चैत्र नवरात्रि मे भक्तों श्रद्धालुओं का तांता जरूर लगा रहता है।

कार्यक्रम में श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत का विशेष योगदान –
 

      इस कार्यक्रम के विशेष सहयोगियों मे धर्मार्थ समिति से सम्पूर्णानन्द द्विवेदी, मतिगेंद पटेल,भैयालाल द्विवेदी, संतोष केवट, विशेषर केवट,ब्रिज बल्लभ पटेल, राम यतन शुक्ल, संतोष शुक्ला, शिव शंकर शुक्ला, भूपेंद्र शुक्ला, बीएस पटेल, उपेंद्र शुक्ला, सिद्धमुनी द्विवेदी, आचार्य अनिल तिवारी, आचार्य राशिरमन तिवारी, राजेंद्र तिवारी, अचचू द्विवेदी आदि हैं।

  संलग्न – अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता श्रीमद शारदा देवी माताजी का मंदिर जो अब लगभग पूरी तरह से खंधर मे बादल चुका है,साथ ही औपचारिक रूप से व्यास गद्दी पर बैठे हुये परंपरागत आचार्या श्री राशि रमन तिवारी जी के सुपुत्र आचार्य अनिल तिवारी जी।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र 7869992139

Sunday, February 19, 2017

(Rewa, MP) कैथा में गो भागवत का चौथा दिवश- मातरः सर्वभूतानांगावः अर्थात गाय समस्त प्राणियों की माता है


दिनांक – 19/02/2017
स्थान –  (रीवा, मप्र)


कैथा में गो भागवत का चौथा दिवश- मातरः सर्वभूतानांगावः
अर्थात गाय समस्त प्राणियों की माता है

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) दिनांक 17 फरवरी से गो भागवत कथा का जो पावन प्रवचन प्रारंभ हुआ वह सतत चल रहा है. दिनांक 20 फरवरी दिन सोमवार के प्रवचन में आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज के मुखारविंद से अविरल प्रवाहित हो रहे प्रवचन में गाय को समस्त प्राणियों की माता बताया गया अर्थात मातरः सर्वभूतानांगावः यानि गाय समस्त प्राणियों की माता है. इसीलिए भारतीय संस्कृति में उत्पन्न हुए और पनपे सभी साधक जैसे शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, जैन, बौद्ध, शिख, आदि सभी भारतीय धर्म-सम्प्रदायों में थोड़ी बहुत पूजा भिन्नता होते हुए भी उनके मूल में गोमाता के प्रति आदर भाव और सम्मान भरा हुआ है.

भारतीय संस्कृति में गाय को माता कहकर इसीलिए संबोधित किया गया है क्योंकि गाय सभी दिव्य गुणों की स्वामिनी है, खान है, और पृथ्वी पर साक्षात् देवी के समान है इसीलिए इसे कामधेनु भी अर्थात सभी धर्म विहित कामनाओं की पूर्ति करने वाली है ऐसा कहकर संबोधित किया गया है. सनातन धर्म ग्रंथों में कहा गया है की सर्वेदेवाःस्थितादेहेसर्वदेवमयीहिगौ: अर्थात गाय की देह में सभी देवी देवताओं का वास हुआ चित्रण किया गया है इसीलिए संस्कृत भाषा में इसे सर्वदेवमयीहि कहा गया है. संसार के अति प्राचीनतम ग्रंथों वेदों में गाय की महत्वा और विशेषता का वर्णन कई शूक्तियों में मिलता है. 
गो महिमा के वर्णन में आगे आया की इनके गोबर में साक्षात् लक्ष्मी, गोमूत्र में भवानी, चरणों के अग्रभाग में आकाश में विचरण करने वाले देवता, गोमाता के रंभाने की आवाज़ में प्रजापति और इनके थनों में समुद्र प्रतिष्ठित है. ऐसी मान्यता है की जो व्यक्ति प्रातः स्नान करके गो स्पर्श करता है, वह पापों से मुक्त हो जाता है. भविष्यपुराण, स्कन्दपुराण, ब्रह्माण्डपुराण, महाभारत आदि ग्रंथों में गोमाता के अंग प्रत्यंग की विशेषताओं और देवी देवताओं की स्थिति का विस्तृत वर्णन आया है.

कामधेनु नंदिनी, गुरु वशिष्ठ एवं विश्वामित्र कथानक

इसी प्रवचन में आगे वसिष्ठ गुरु की कामधेनु नंदिनी का किस्सा चल रहा है जिसमे एक बार महोदया के राजा एवं गाधी पुत्र विश्वरथ जब युध्य क्षेत्र से लौट रहे थे तो गुरु वशिष्ठ जी के आश्रम रुकते हैं. गुरु वशिष्ठ जी की धर्मपत्नी ने बड़े ही आदर सत्कार के साथ विश्वरथ एवं उनकी थकी भूखी सेना का स्वागत किया. यह सब देख कर विश्वरथ आश्चर्य चकित होकर गुरु वशिष्ठ से पूंछते हैं की हमारी इतनी बड़ी सेना का सत्कार अकेले आपने कैसे कर लिया? आखिर आपके इस छोटे से आश्रम में इतनी बड़ी सेना के लिए व्यवस्था कैसे बन पाई. इस पर गुरु वशिष्ठ और उनकी धर्मपत्नी कामधेनु नंदिनी का पूरा किस्सा महोदया के राजा विश्वरथ को बता देते हैं. इस पर विश्वरथ मन में नंदिनी को प्राप्त करने की लालसा लिए वहां से चले जाते हैं. कुछ समय पश्चात जब देश में घोर अकाल पड़ता है तो अन्न दाने के लिए तरसती महोदया राज्य की जनता के लिए कहीं से कोई व्यवस्था न बन पाने से परेशान होकर राजा विश्वरथ अपने मंत्रियों को गुरु वशिस्ठ के आश्रम भेजकर कामधेनु नंदिनी को लाने के लिए भेजते हैं. इस पर गुरु वशिष्ठ मंत्रियों को आश्रम की गाय नंदिनी पर किसी व्यक्ति विशेष का अधिकार नहीं है  इस प्रकार बताकर वापस कर देते हैं. गुरु वशिष्ठ जी का कहना ठीक था की देश में घोर अकाल महोदया के राजा विश्वरथ की अति महत्वकांक्षी प्रवृत्ति और अनायास कुसमय युध्य छेड़ने से पड़ा है इसके लिए महोदय के राजा ही जिम्मेदार हैं. हिंसात्मक प्रवृत्ति से अधर्म प्रवृत्ति बढ़ने से अकाल सूखा की स्थिति निर्मित हुई है. यदि नंदिनी विश्वरथ को दे दी जाती है तो वह आश्रम की संपत्ति का अपमान होगा जिससे आश्रम में निवासरत हजारों छात्र और ऋषि-मुनि की व्यवस्था कैसे से हो पायेगी. क्योंकि नंदिनी कामधेनु गाय थी जो सभी धर्मविहित मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली थी जिसके फलस्वरूप आश्रम में कभी कोई वस्तु की कमी नहीं पड़ती थी. आगे चलकर गुरु वशिष्ठ एवं राजा विश्वरथ में तकरार बढती है और विश्वरथ स्वयं तपोवल हासिल कर माता गायत्री के वरदान से विश्वरथ से महर्षि विश्वामित्र कहलाये. यह कहानी आगे चल रही थी.

!!! सादर धन्यवाद !!!

संलग्न – प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा की कुछ तस्वीरें. धर्मार्थ समिति कैथा का लोगो.
             

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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 












Sunday, June 26, 2016

श्री हनुमान जयंती के पवन अवसर पर श्री तुलाधर जी महाराज के मुखारबिंद से अप्रैल २०१४ में मानस प्रवचन












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15 vizSy 2014 Jh guqeku t;arh ds ikou miy{k ij Jh guqeku pfj= ij fo'ks"k&
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