Showing posts with label Vedanta. Show all posts
Showing posts with label Vedanta. Show all posts

Friday, March 23, 2018

कैथा के प्राचीन देवी मंदिर मे भागवत कथा का समापन दिनांक 24 मार्च को, भंडारा और हवन के साथ होगा विसर्जन

दिनांक 23 मार्च 2018, स्थान – गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

  पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन शारदा देवी मंदिर प्रांगण मे दिनांक 18 मार्च से प्रारम्भ हुई श्रीमद भगवद कथा का समापन दिनांक 24 मार्च को हवन और भंडारे के साथ किया जाएगा।

  बता दें की देवी मंदिर के कार्यक्रम परंपरागत रूप से प्रत्येक चैत्र नवरात्रि मे होते आए हैं और इस वर्ष भी परंपरानुरूप कार्यक्रम चल रहा है। क्षेत्र के 12 मौज़ा हिनौती के भक्त श्रद्धालुगण माता मंदिर मे चैत्र नवरात्रि के  प्रत्येक दिन नवमी तक जल चढ़ाने और पूजा अर्चना करने आते हैं। कैथा स्थित यह देवी मंदिर काफी प्राचीन बताया जाता है जिसे इसी कैथा ग्राम की इलाकेदार गौटिन पटेल द्वारा बनवाया गया था जो उनकी पूज्य कुल देवी थीं। बाद मे गौटिन के मरने के बाद देवी मंदिर की रौनक भी लगभग मर गई। क्योंकि गौटिन के परिवार के सदस्यों और उनके पुत्र पौत्रों द्वारा देवी मंदिर का रख रखाव सही तरीके से न हो पाने और मंदिर का जीर्णोद्धार भी न होने की वजह से अब मंदिर पूरी तरह से खंडहर मे तब्दील हो चुका है जिसकी फोटो भी यहाँ पर संलग्न है।

   बीच मे कुछ श्रद्धालु भक्तों ने मंदिर के जीर्णोद्धार की चर्चना की तो बताया गया की अति प्राचीन देवी मंदिर की जमीन अभी भी कुछ पटेल परिवारों के पट्टे मे आने के कारण उसमे आपत्ति है अतः सार्वजनिक तौर पर प्रयास कर इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाना कानूनी मुद्दा बन सकता है। इस प्रकार आज इस कलयुग मे देवी देवता भी आदमी के ही सहारे हो चुके हैं कि कोई तो इनका उद्धार करे। कभी तो यह कहा जाता था की देवी देवताओं के पूजा अर्चना से मानव का कल्याण होता है और मानुषी तन को मोक्ष मिलता है परंतु देवी मंदिर और अन्य हिन्दू धर्मस्थलों की आज इस कलयुग के समय स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानों देवी देवता ही आज मानव से अपना उद्धार चाह रहे हैं।

   वहरहाल कुछ अत्यधिक धर्मावलम्बी और ओर्थोड़ोक्स धार्मिक व्यक्ति अभी भी श्रीमद शारदा देवी माता रानी पर पूर्ण श्रद्धा भक्ति रखते हैं जिससे औपचारिक तौर पर भागवत कथा आदि का कार्यक्रम समय समय पर करवाते रहते हैं। चूंकि देवी जी इस पूरे 12 मौज़ा हिनौती क्षेत्र की पूज्य कुल मानी गई हैं अतः यहाँ वर्ष के दोनों शारदेय  और चैत्र नवरात्रि मे भक्तों श्रद्धालुओं का तांता जरूर लगा रहता है।

कार्यक्रम में श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत का विशेष योगदान –
 

      इस कार्यक्रम के विशेष सहयोगियों मे धर्मार्थ समिति से सम्पूर्णानन्द द्विवेदी, मतिगेंद पटेल,भैयालाल द्विवेदी, संतोष केवट, विशेषर केवट,ब्रिज बल्लभ पटेल, राम यतन शुक्ल, संतोष शुक्ला, शिव शंकर शुक्ला, भूपेंद्र शुक्ला, बीएस पटेल, उपेंद्र शुक्ला, सिद्धमुनी द्विवेदी, आचार्य अनिल तिवारी, आचार्य राशिरमन तिवारी, राजेंद्र तिवारी, अचचू द्विवेदी आदि हैं।

  संलग्न – अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ता श्रीमद शारदा देवी माताजी का मंदिर जो अब लगभग पूरी तरह से खंधर मे बादल चुका है,साथ ही औपचारिक रूप से व्यास गद्दी पर बैठे हुये परंपरागत आचार्या श्री राशि रमन तिवारी जी के सुपुत्र आचार्य अनिल तिवारी जी।

-----

शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र 7869992139

Sunday, March 4, 2018

गोवंश की रक्षा मानवता की सुरक्षा

नमस्कार।
   देखिए भाजपा सरकार के कार्यकाल में गौमाताओं की कितनी बड़ी दुर्दशा हो रही है। खुलेआम गायों की प्रताड़ना का शिलशिला निरंतर चलता हुआ।
    Unauthorized बाड़ों में जिनमे की किसी की कोई जिम्मेदारी तय नही है, इन बेजुबानों को कैद कर दिया जाता है जिसमे समुचित व्यवस्था के अभाव में भूंख प्यास से यह बेजुबान दम तोड़ रहे हैं जिन्हें देखने वाला न तो भाजपा और न ही कोई हिंदूवादी संगठन समझ आ रहे हैं। सभी हिंदूवादी संगठन यह बात जानते हैं फिर भी भाजपा पर दबाब बनाने में असफल सिद्ध हुए हैं इससे साफ जाहिर है कि सत्ता पर आने के बाद सभी पार्टियों के एक ही आदर्श होते हैं और वह है पैसा, कुर्सी और सत्ता। आखिर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, आर एस एस सहित अन्य गोरक्षा दलों के होते हुए भाजपा इस बात को गंभीरता से क्यों नही लेती? ,जब भाजपा की सरकार बनी थी तो इसने हिंदुओं को वेवकूफ बनाकर हिंदुओं के संवेदनशील मुद्दों के नाम पर ही तो वोट और सत्ता हथियाई थी तो अब भाजपा हिंदुओं को जबाब क्यों नही देती की गायों की दुर्दशा के पीछे क्या कारण हैं?
    यदि प्रदेश में हो रहे अरबों खरबों के घोटालों में इन नेताओं और उनके चमचों के हाँथ साफ हो रहे हैं तो आखिर इन घोटालों का 5 प्रतिशत भी यदि गोरक्षा के लिए लगा दिया जाए तो पर्याप्त गोशालाएं और गो अभयारण्य बनाये जा सकते हैं और प्रदेश में गायों और जनके वंशों की समुचित सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है।
     धन्य है उमा भारती जिन्होंने मप्र में गायों को कटने के लिए अदिनियम पास कर इनकी सुरक्षा की अन्यथा कोई माई का लाल नही था जो इनकी सुरक्षा कर पाता। अब आखिर मप्र में गोरक्षा के लिए यदि इतने नियम बने हैं तो भी उनका पालन यह प्रदेश सरकार क्यों नही करवा पॉय रही है?
   
     किसानों का खून पी रही है प्रदेश भाजपा सरकार
------------------------

    जहां एक तरफ भारतीय संस्कृति की माता गोमाता की इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के किसानोंकी भी दुर्दशा बढ़ती जा रही है। आवारा छोड़ दिये गए पशु किसानों के लिए समस्या बन हुए हैं जिससे कुछ समाज के निर्दयी लोग इन गोवंशों को अवैध बाड़ों में कैद कर देते हैं और चारे पानी छाया एवं समुचित व्यवस्था बिना छोड़ देते हैं जिससे यह बेजुबान धीरे धीरे करके घुट घुट कर कमजोर होकर मर जाते हैं। इनकी देखभाल करने वाला कोई मई बाप नही होता। अब कृष्ण राम तो जन्म नही लेंगे। यह हिन्दू समाज आज स्वयं ही इनका भारी दुश्मन बन चुका है।

सूखा अकाल और महामारी फैलने का मूल कारण गोहत्या होना -
----------------------

   आज जो पूरे देश मे सूखा अकाल अशांति, आतंकवाद और महामारी फैल रही है उसके पीछे मात्र गोहत्या का होना ही कारण है।
     जिस प्रकार यह समाज आज गायों की उपेक्षा कर रहा है और इतने शांत प्राणी को मौत के घाट उतार रहा है, गो प्रताड़ना बढ़ती जा रही है, मांसाहार बढ़ता जा रहा है उसी का परिणाम है कि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ कर महामारी, युद्ध, अशांति, आतंकवाद, सूखा, अकाल, बाढ़, अतिवृष्टि, भूकंप, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक विपदाएँ बढ़ती जा रही हैं लेकिन मॉनव की आंख नही खुल रही है जिसका परिणाम भयानक मानवीय क्लेश, और दुखद स्थितियों के रूप में सामने आएगा।
     यदि मॉनव समय रहते नही चेता तो अंत मे सोचने के लिए और गलती सुधारने के लिए भी और प्रायश्चित करने के लिए भी समय नही बचेगा।

   - शिवानंद द्विवेदी, गोरक्षक, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।
      7869992139

 

Monday, July 4, 2016

भारतीय संस्कृति और जीवात्मा: प्रथम

भारतीय संस्कृति और जीवात्मा: प्रथम



हरिः ॐ!!! भारतीय एवं वैदिक संस्कृति में वेदों एवं वेदान्तों का वैसे ही महत्व है जैसे की जीव में आत्मा का. जैसे बिना आत्मा के जीव मृत है वैसे ही बिना वेदों और वेदान्तों के भारतीय संस्कृति भी मृत तुल्य ही है. वेदों को अपौरुषेय कहा गया है अर्थात जो किसी व्यक्ति अथवा पुरुष द्वारा नही लिखा गया हो वह अपौरुषीय कहलाता है. वेदों में संहिता भाग अर्थात जिन्हें हम चारों वेदों के रूप में समझते हैं वह मानव संस्कृति में सबसे प्राचीन ग्रन्थ माने जाते हैं. क्योंकि संसार के सभी ज्ञात और लिखे गए ग्रंथों में भी वेद मानव इतिहास के सबसे प्राचीन और लिखित प्राप्त ग्रन्थ हैं. इन तथ्यों के अतिरिक्त प्रत्येक हिन्दू अथवा वैदिक संस्कृति को मानने वाला व्यक्ति वेदों को श्रुति ग्रन्थ मानता है अर्थात जो किसी अन्य श्रोत अथवा शक्ति से सुना गया हो न की किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया हो. प्रत्येक हिन्दू वैदिक मतावलंबी वेदों को ईश्वर की वाणी मानता है. हिन्दू वैदिक मतों के अनुसार वैदिक मन्त्र ऋषि मुनियों द्वारा समाधिस्थ अवस्था में ईश्वर से प्राप्त किये गए थे और तदोपरांत ऋषि मुनियों ने इन मंत्रो को लिपिबद्ध किये और इसीलिए आज हम इन वैदिक मन्त्रों को कही भी हिन्दू धर्म की पुस्तकों में लिखा हुआ पाते हैं. वैदिक ज्ञान में जीव मात्र के सभी अवस्था के विषय में वर्णन मिलता है. इन वैदिक मन्त्रों में मानव के विभिन्न पड़ाव के विषय में उनके रहन सहन के विषय में और षोडशोपचार के विषय में पूर्ण ज्ञान मिलता है. इसीलिए जब से बच्चा गर्भ में रहता है तब से लेकर मृत्युपरांत तक सोलह संस्कार कहलाते हैं और इन सभी संस्कारों में मानव को क्या कुछ करना चाहिए इन सबका वर्णन इसमें मिलता है. इसीलिए हम देख सकते हैं की जब भी शादी व्याह होता है अथवा यज्ञोपवीत या फिर मुंडन आदि संस्कार होता है तो इन वैदिक मंत्रो का उच्चारण वैदिक पुरोहितों द्वारा किया जाता है. (क्रमशः)