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Sunday, March 4, 2018

गोवंश की रक्षा मानवता की सुरक्षा

नमस्कार।
   देखिए भाजपा सरकार के कार्यकाल में गौमाताओं की कितनी बड़ी दुर्दशा हो रही है। खुलेआम गायों की प्रताड़ना का शिलशिला निरंतर चलता हुआ।
    Unauthorized बाड़ों में जिनमे की किसी की कोई जिम्मेदारी तय नही है, इन बेजुबानों को कैद कर दिया जाता है जिसमे समुचित व्यवस्था के अभाव में भूंख प्यास से यह बेजुबान दम तोड़ रहे हैं जिन्हें देखने वाला न तो भाजपा और न ही कोई हिंदूवादी संगठन समझ आ रहे हैं। सभी हिंदूवादी संगठन यह बात जानते हैं फिर भी भाजपा पर दबाब बनाने में असफल सिद्ध हुए हैं इससे साफ जाहिर है कि सत्ता पर आने के बाद सभी पार्टियों के एक ही आदर्श होते हैं और वह है पैसा, कुर्सी और सत्ता। आखिर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, आर एस एस सहित अन्य गोरक्षा दलों के होते हुए भाजपा इस बात को गंभीरता से क्यों नही लेती? ,जब भाजपा की सरकार बनी थी तो इसने हिंदुओं को वेवकूफ बनाकर हिंदुओं के संवेदनशील मुद्दों के नाम पर ही तो वोट और सत्ता हथियाई थी तो अब भाजपा हिंदुओं को जबाब क्यों नही देती की गायों की दुर्दशा के पीछे क्या कारण हैं?
    यदि प्रदेश में हो रहे अरबों खरबों के घोटालों में इन नेताओं और उनके चमचों के हाँथ साफ हो रहे हैं तो आखिर इन घोटालों का 5 प्रतिशत भी यदि गोरक्षा के लिए लगा दिया जाए तो पर्याप्त गोशालाएं और गो अभयारण्य बनाये जा सकते हैं और प्रदेश में गायों और जनके वंशों की समुचित सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है।
     धन्य है उमा भारती जिन्होंने मप्र में गायों को कटने के लिए अदिनियम पास कर इनकी सुरक्षा की अन्यथा कोई माई का लाल नही था जो इनकी सुरक्षा कर पाता। अब आखिर मप्र में गोरक्षा के लिए यदि इतने नियम बने हैं तो भी उनका पालन यह प्रदेश सरकार क्यों नही करवा पॉय रही है?
   
     किसानों का खून पी रही है प्रदेश भाजपा सरकार
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    जहां एक तरफ भारतीय संस्कृति की माता गोमाता की इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के किसानोंकी भी दुर्दशा बढ़ती जा रही है। आवारा छोड़ दिये गए पशु किसानों के लिए समस्या बन हुए हैं जिससे कुछ समाज के निर्दयी लोग इन गोवंशों को अवैध बाड़ों में कैद कर देते हैं और चारे पानी छाया एवं समुचित व्यवस्था बिना छोड़ देते हैं जिससे यह बेजुबान धीरे धीरे करके घुट घुट कर कमजोर होकर मर जाते हैं। इनकी देखभाल करने वाला कोई मई बाप नही होता। अब कृष्ण राम तो जन्म नही लेंगे। यह हिन्दू समाज आज स्वयं ही इनका भारी दुश्मन बन चुका है।

सूखा अकाल और महामारी फैलने का मूल कारण गोहत्या होना -
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   आज जो पूरे देश मे सूखा अकाल अशांति, आतंकवाद और महामारी फैल रही है उसके पीछे मात्र गोहत्या का होना ही कारण है।
     जिस प्रकार यह समाज आज गायों की उपेक्षा कर रहा है और इतने शांत प्राणी को मौत के घाट उतार रहा है, गो प्रताड़ना बढ़ती जा रही है, मांसाहार बढ़ता जा रहा है उसी का परिणाम है कि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ कर महामारी, युद्ध, अशांति, आतंकवाद, सूखा, अकाल, बाढ़, अतिवृष्टि, भूकंप, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक विपदाएँ बढ़ती जा रही हैं लेकिन मॉनव की आंख नही खुल रही है जिसका परिणाम भयानक मानवीय क्लेश, और दुखद स्थितियों के रूप में सामने आएगा।
     यदि मॉनव समय रहते नही चेता तो अंत मे सोचने के लिए और गलती सुधारने के लिए भी और प्रायश्चित करने के लिए भी समय नही बचेगा।

   - शिवानंद द्विवेदी, गोरक्षक, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।
      7869992139

 

Monday, February 26, 2018

गदही में नए हैंडपम्प सर्वे के लिए पहुचे गंगेव पी एच ई उपयंत्री अखिलेश उइके (पिछले दिनों समाचार आयी थी मीडिया में)

दिनांक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

  पानी की समस्या को लेकर अभी हाल ही में पिछले दिनों ज़िले से प्रकाशित होने वाले कई अग्रणी समाचार पत्रों में गदही ग्राम के हरिजन आदिवासियों द्वारा शिर पर डिब्बे बाल्टी रखकर प्रदर्शन करते हुए फ़ोटो प्रकाशित हुए थे। जिसके संदर्भ में  जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं संबंधित एस डी ओ हुजूर श्रीवास्तव को सूचित किया गया था।

      इसी तारतम्य में आज दिनांक 26 फरवरी को कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह के निर्देश पर शाम 4 बजे गंगेव ब्लॉक उपयंत्री अखिलेश उइके को जांच के लिए भेजा गया। जांच एवं सर्वे के दौरान पाया कि गदही ग्राम में 50 से अधिक घर बने हुए हैं जिनमे 200 से अधिक आबादी के लिए कोई शासकीय नलकूप उपलब्ध नही है। गदही ग्राम की बस्तियां कुछ इस प्रकार की बसी हुई हैं कि सभी घर आसपास न होकर काफी दूर दूर हैं और लगभग 4 किमी के दायरे में बसे हुए हैं और सभी घरों को पानी उपलब्ध करने के लिए 3 से 4 तक हैंडपम्प करने पड़ेंगे। उपयंत्री द्वारा बताया गया कि अभी वर्तमान में मात्र एक हैंडपम्प की व्यवस्था के लिए प्रयास किये जायेंगे जो दोनो तरफ की बस्तियों के मध्य में लगाया जाएगा।

    पी एच ई  उपयंत्री अखिलेश उइके ने बताया कि सर्वे और जांच रिपोर्ट कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को प्रेषित कर दी जाएगी जिस पर अग्रिम कार्यवाही विभाग द्वारा निर्धारित होगी।

  संलग्न - गदही ग्राम जांच करने पहुचे गंगेव लोक स्वास्थ्य विभाग के उपयंत्री अखिलेश उइके एवं क्षेत्रीय हैंडपम्प मैकेनिक अश्वनी पटेल एवं रामसिया द्विवेदी।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Monday, July 4, 2016

भारतीय संस्कृति और जीवात्मा: प्रथम

भारतीय संस्कृति और जीवात्मा: प्रथम



हरिः ॐ!!! भारतीय एवं वैदिक संस्कृति में वेदों एवं वेदान्तों का वैसे ही महत्व है जैसे की जीव में आत्मा का. जैसे बिना आत्मा के जीव मृत है वैसे ही बिना वेदों और वेदान्तों के भारतीय संस्कृति भी मृत तुल्य ही है. वेदों को अपौरुषेय कहा गया है अर्थात जो किसी व्यक्ति अथवा पुरुष द्वारा नही लिखा गया हो वह अपौरुषीय कहलाता है. वेदों में संहिता भाग अर्थात जिन्हें हम चारों वेदों के रूप में समझते हैं वह मानव संस्कृति में सबसे प्राचीन ग्रन्थ माने जाते हैं. क्योंकि संसार के सभी ज्ञात और लिखे गए ग्रंथों में भी वेद मानव इतिहास के सबसे प्राचीन और लिखित प्राप्त ग्रन्थ हैं. इन तथ्यों के अतिरिक्त प्रत्येक हिन्दू अथवा वैदिक संस्कृति को मानने वाला व्यक्ति वेदों को श्रुति ग्रन्थ मानता है अर्थात जो किसी अन्य श्रोत अथवा शक्ति से सुना गया हो न की किसी व्यक्ति के द्वारा लिखा गया हो. प्रत्येक हिन्दू वैदिक मतावलंबी वेदों को ईश्वर की वाणी मानता है. हिन्दू वैदिक मतों के अनुसार वैदिक मन्त्र ऋषि मुनियों द्वारा समाधिस्थ अवस्था में ईश्वर से प्राप्त किये गए थे और तदोपरांत ऋषि मुनियों ने इन मंत्रो को लिपिबद्ध किये और इसीलिए आज हम इन वैदिक मन्त्रों को कही भी हिन्दू धर्म की पुस्तकों में लिखा हुआ पाते हैं. वैदिक ज्ञान में जीव मात्र के सभी अवस्था के विषय में वर्णन मिलता है. इन वैदिक मन्त्रों में मानव के विभिन्न पड़ाव के विषय में उनके रहन सहन के विषय में और षोडशोपचार के विषय में पूर्ण ज्ञान मिलता है. इसीलिए जब से बच्चा गर्भ में रहता है तब से लेकर मृत्युपरांत तक सोलह संस्कार कहलाते हैं और इन सभी संस्कारों में मानव को क्या कुछ करना चाहिए इन सबका वर्णन इसमें मिलता है. इसीलिए हम देख सकते हैं की जब भी शादी व्याह होता है अथवा यज्ञोपवीत या फिर मुंडन आदि संस्कार होता है तो इन वैदिक मंत्रो का उच्चारण वैदिक पुरोहितों द्वारा किया जाता है. (क्रमशः)