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Tuesday, April 17, 2018

पानी की कहानी प्यासों की जुबानी - त्योंथर की 17 पंचायतों को पानी के लिए दिए 25 लाख रुपये, अब तक काम शून्य (मामला ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत 17 पंचायतों का जिसमे 12 को दिए लगभग 1 लाख और 5 को ज़िला पंचायत से मिले लगभग 2 लाख, फिर भी कोई काम नही, पूरी राशि हजम करने की कर ली तैयारी, ज़िला और जनपद पंचायत बना अनजान)

दिनांक 17 अप्रैल 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले में जल संकट दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और आम जनता का पानी के लिए जद्दोजहद रोज बढ़ती जा रही है पर यहां के ज़िला प्रसाशन की चाल ढाल में कोई परिवर्तन नही दिख रहा है. ज़िले भर में प्रतिदिन हज़ारों शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, मोबाइल फोन और लिखित मौखिक तौर पर आम जनता प्रेषित कर रही है लेकिन जुजबी ही कुछ शिकायतों को निपटाकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है.

  आम जनता की आवाज को सुनने वाला कोई नही मात्र मीडिया ही सहारा बना है जो पानी की भीषण समस्या को रोज़ अखबारों के माध्यम से उठा रहा है.

  त्योंथर पी एच ई कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने डाढ़ जमुई पंचायत का किया दौरा

  दिनांक 16 अप्रैल को दोपहर त्योंथर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने नजदीकी ग्राम पंचायतों डाढ़ और जमुई का दौरा कर नलजल योजनाओं और नलकूप की स्थिति का जायज़ा लिया. बताया गया की न ही डाढ़ और न ही जमुई में सही तरीके से नलजल योजना संचालित हो रही है. डाढ़ में थोड़ी स्थित कंट्रोल में है पर जमुई पंचायत में लगभग 1 लाख 30 हज़ार के आसपास ज़िला पंचायत के खाते से पंचायत के खाते में पिछले साल भेजे जाने के वावजूद भी अब तक नलजल योजनायों की पानी की टंकी में कोई पानी नही आया है और कोई पाइप लाइन भी अब तक नही बिछ पायी हैं.

     अमित मिश्रा ने आगे करहिया का रुख किया और लोनियान टोला प्रजापति बस्ती के पास पंचायत द्वारा कराए गए नलकूप को देखा जिसमे आज साल भर से कोई हैंडपम्प नही पड़ा है. अमित मिश्रा ने आगे बताया की त्योंथर के विधायक कोटे और पंचायतों के कई नलकूपों के यही हाल हैं. यह सब ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है.

   बिन्नू पाठक द्वारा करवाये गए नलकूप उत्खनन में काफी है शिकायतें

    बताया गया की करहिया के प्रजापति बस्ती में पिछले वर्ष हुए नलकूप उत्खनन सहित दर्जनों विधायक निधि वाले नलकूप उत्खनन का काम बरहट निवासी बिन्नू पाठक बोरवेल कंपनी द्वारा करवाया गया है और इनके द्वारा कराए गए ज्यादातर बोरवेल में धंस जाने से लेकर घटिया सामग्री डालना और यहां तक की करहिया प्रजापति लोनियान बस्ती जैसे बोर में हैंडपम्प तक न डालना जैसी शिकायतों का अम्बार है जिससे पी एच ई विभाग स्वयं परेशान है. पी एच ई अधिकारियों द्वारा नाम न बताए जाने की शर्त पर बताया गया की किसी एक सरपंच ने तो यहां तक कहा की जितने पैसे में पी एच ई विभाग एक नलकूप का उत्खनन करवाता है पंचायत उतने में तीन नलकूप उत्खनन करवा सकती है. तब ऐसे में गुणवत्ता से लेकर अधिक राशि तक की प्रति नलकूप उत्खनन जैसे कई गंभीर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं.

  त्योंथर की 17 पंचायतों को लगभग 22 लाख से अधिक राशि ग्रीष्मकालीन जल संकट से निपटने मात्र के लिए जिला पंचायत से दी गई

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों  द्वारा बताया गया की जो जानकारी उन्हें है उसके मुताबिक मात्र ज़िला पंचायत के द्वारा ही नलजल योजनायों के क्रियान्वयन के लिए त्योंथर ब्लॉक की 17 पंचायतों को 25 लाख के आसपास की राशि दी गई है जिसका की भौतिक धरातल पर कोई रता पता नही है. इन 17 पंचायतों में 12 पंचायत ऐसी हैं जिनको प्रति पंचायत कुछ कम अर्थात लगभग 1 लाख के आसपास की राशि दी गई है जबकि 5 पंचायतें ऐसी हैं जिन्हें लगभग 2 लाख की राशि दी गई है. लेकिन आज पिछले वर्ष से पंचायतों के खातों में इस राशि के समायोजन के बाद भी पंचायती भष्ट्रचार के कारण कोई भी काम नही हो पा रहा है. पंचायत के सरपंचों की हिटलरशाही के चलते जनता बूंद बूंद पानी के लिए तड़प नही है. मनरेगा में धांधली तो बहुत आम बात थी अब पानी के नाम पर जनता के खून चूसने का भी दौर चल पड़ा है।

त्योंथर सीईओ महावीर जाटव ने कार्यवाही का दिया मात्र आश्वासन

   दिनाँक 17 अप्रैल की सुबह जनपद त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द विवेदी की बात हुई जिसमे जाटव द्वारा बताया गया की उन्हें इसकी जानकारी नही थी और इसे दिखवा कर कार्यवाही करवाएंगे. डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में लोनियान टोला की प्रजापति बस्ती के विषय में बताए जाने पर की पंचायत द्वारा करवाये गए नलकूप में हैंडपम्प नही पड़ा है, इस पर मात्र कार्यवाही का आश्वाशन मिला. अब देखना यह है की यह पंचायत विभाग वाले आगे क्या गुल खिलाते हैं.

सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल द्वारा जानकारी लेकर कार्यवाही का आश्वासन

   इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता की ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल से भी बात हुई जिस पर मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा व्हाट्सएप्प पर ज़िला पंचायत सीईओ को ब्लॉक गंगेव और त्योंथर की बन्द पड़ी नलजल योजनाओं और दुर्दशापूर्ण नलकूपों की स्थिति बताई गई. साथ ही रोज़ अखबारों में प्रकाशित मानवाधिकार का हनन सम्बंधी भीषण जल संकट की स्थिति की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां भी भेजीं गईं.

   ज़िला पंचायत रीवा सीईओ द्वारा बताया गया की वह इसे गंभीरता से लेंगे. पानी की समस्या एक महत्वपूर्ण इशू है और सॉल्व किया जाएगा. वहरहाल अभी तक मात्र हर स्थान के आश्वासन ही मिल पाया है. 

   बता दें की गंगेव जनपद अंर्तगत हिनौती पंचायत, बांस पंचायत और हिरुडीह पंचायत की बुरी तरह से ठप्प पड़ी नलजल योजनाओं का स्वयं भौतिक सत्यापन कर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह मुद्दा मीडिया के माध्यम से उठाया गया था. जिस पर सभी विभागों के होश उड़े हुए हैं.

  जल संकट का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी गया

    बात यहीं तक नही रुकी है, मॉनव के मूलभूत अधिकारों में से एक पीने का स्वच्छ पानी की समस्या ज़िले से लेकर प्रदेश स्तर और यहां तक की राष्ट्रीय स्तर तक पहुचाई जा चुकी है. भोपाल में बैठे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के इंजीनियर इन चीफ, जबलपुर जोन पी एच ई के चीफ इंजीनियर गौड़ से लेकर अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली तक मामला उनके संज्ञान में लाया जा चुका है और कार्यवाही भी प्रारम्भ हो चुकी है.

   भोपाल से पी एच ई के विशेष दल की रीवा संभाग विजिट, मामला जिले में जल संकट की जांच का और उस पर कार्यवाही का

    जैसा की पहले भी बताया गया था की जब ज़िले में जल संकट का मामला भोपाल इंजीनियर इन चीफ के समक्ष रखा गया था तो वहां से कई सदस्यीय टीम का गठन कर जांच करने के उद्देश्य से भेजे जाने की बात आई थी. उसी सिलसिले में कार्यपालन यंत्री रीवा शरद कुमार सिंह द्वारा जानकारी दी गई की श्री श्रीवास्तव की अगुआई में टीम रीवा पहुच चुकी है जो दिनाँक 17 अप्रैल को गंगेव ब्लॉक में दौरा कर जल संकट की वास्तविक स्थिति का जायज़ा लेंगे.

  त्योंथर ब्लॉक में मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का भी होगा दौरा

     पिछले दिनों मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को बताया गया की त्योंथर ब्लॉक की घाट के ऊपर की पंचायतों का जल्द ही दौरा किया जाकर पानी की स्थिति का जायज़ा लिया जाएगा. मऊगंज कार्यपालन यंत्री को ब्लॉक के जलसंकट के विषय में मौखिक, मोबाइल फ़ोन और व्हाट्सएप्प आदि के जरिये कई बार सूचित किया जा चुका है.

 जांचों और सरकारी दौरों के नाम पर होगी कोरम पूर्ति अथवा होगी कोई सार्थक कार्यवाही?

    अब देखना यह होगा की सरकारी अधिकारियों के इन दौरों और जांचों का आम जन जीवन में व्याप्त भीषण जल संकट का क्या असर पड़ता है? क्या पहले जैसे ही यह भी मात्र कोरम पूर्ति बनकर रह जाएंगी की इनकी आधिकारिक विजिट और दौरों का कुछ असर भी पड़ेगा? क्योंकि हर वर्ष ही गर्मियों में जब पानी को लेकर हाहाकार मचता है तो सभी की नींदें उड़ जाती हैं और हाँथ पैर हिलाना चालू कर देतें हैं. आश्वासन और जांचों का दौर प्रारम्भ हो जाता है, दौरे होते हैं, बजट पास होता है, राशि और सामग्री का कागजों पर खूब आवंटन किया जाता है. कागजों में हर पंचायतों में मोटर पंप की स्वीकृति की जाती है और वह राशि संबंधित विभागों के खातों में भी भेज दी जाती है पर वास्तविक तौर पर देखा जाए तो आने वाले हर वर्ष में स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है. आख़िर इतनी जांचें और इतनी राशि का क्या होता है? क्यों भौतिक धरातल पर कोई कार्यवाही नही होती? क्या आम जनता मात्र कागजों पर और आश्वासन का पानी पीकर अपनी प्यास तृप्त कर सकती है? यह सभी अनुत्तरित प्रश्न इस देश के जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों से पूँछ रहे हैं की क्या इसी प्रकार से जनता और देश की सेवा के लिए इन अधिकारी कर्मचारियों ने नौकरी की थी? क्या यही आशय लेकर सरकारी नौकरी में आये थे? यदि हमारे देश के यह अधिकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति और इस जनता के टैक्स से प्राप्त होने वाले पैसे जिसमे की इन्हें पेमेंट दी जाती है उसके प्रति जिम्मेदार हो जाएं तो फिर किस आसमाजिक तत्व और किस दो कौड़ी के नेता में इतनी दम है की देश के विकास को रोक पाए. आज आवश्यकता है ऐसे सभी अधिकारियों को अपने जमीर में झांकने की और वो दिन याद करने की जब वह स्कूल कॉलेज में थे और देश की  दुर्दशा को देखकर उनके मन में देश सेवा की जो ललक उठती थी उसे याद करने का समय है. 

संलग्न - 1) त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से बातचीत के अंश

    2) सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल के बातचीत के अंश.

    3) मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला से बातचीत के अंश,

   4) बदहाल पानी की स्थिति और परेशान लोग.

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  -शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Friday, April 13, 2018

15 वर्ष से पानी की टंकियों में भरा है हवा (मामला गंगेव जनपद की कई पंचायतों में 80 फीसदी से अधिक बंद हैं हैंडपम्प, नलजल योजनाएं भष्ट्रचार की भेंट चढ़ी, वहीं बांस पंचायत की 50 हज़ार लीटर क्षमता की बंद पड़ी पानी की टंकी, और हिरुडीह पंचायत में बन्द पड़े नलजल योजना और 90 फीसदी बन्द पड़े हैंडपम्प की)

दिनांक 14 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव जनपद, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा, शिवानन्द द्विवेदी

   आज भारतीय लोकतंत्र 70 वर्ष से अधिक का हो रहा है. हर वर्ष भारतीय लोकतंत्र की वर्षगांठ मनाई जाती है. याद दिलाया जाता है की हमे इतने सदियों की गुलामी के बाद आजाज़ी मिली. इस आजादी को प्राप्त करने में हमारे देश के वीर शहीदों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बलि वेदी में आहुति दी. 

    यह सब तो ठीक है पर क्या यह भी कभी गंभीरता से विचार किया गया की आज इतने दसकों के बाद भी आखिर मूलभूत मानवाधिकारों की समस्याओं को हल क्यों नही किया गया? क्या मूलभूत अधिकारों की समस्या से स्वतंत्रता प्राप्त हुई है? प्रकाश के लिए बिजली, पीने के लिए स्वच्छ जल, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु, रहने के लिए उचित आवास, जीवित रहने के लिए भोजन यह प्रत्येक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए देश की आम जनमानस को हर हाल में उपलब्ध करवाना उस देश के संवैधानिक कर्तव्य होते हैं. 

     आज जब 21 वीं सदी का दौर चल रहा है और मानव अपने विकास गाथा का वर्चस्व धरती से लेकर अम्बर तक स्थापित करना चाह रहा है. वर्चस्व की लड़ाई के लिए महायुध्य हो रहे हैं. वैज्ञानिक अविष्कारों ने पुरानी सभी परिभाषाएं और मान्यताओं को बदल दिया हैं. भौतिक विज्ञान नित नए आयाम तलास रहा है. व्यक्ति धरती पर जीवन से थक हारकर अन्यत्र ग्रहों में जीवन पानी हवा की तलाश कर रहा है, ऐसे में यह सोचना पड़ेगा की यदि मॉनव इस धरती रूपी माता के गोद जिसमे पला बढ़ा और खेला खाया उसमे यदि जीवन सुचारू रूप से नही चला पाया तो बड़ी सर्मिन्दगी की बात होगी की दूसरे अजनबी ग्रहों जिनके की जीवन के पैमाने भी नही तय हुए हैं उनमे कैसे शांति और जीवन तलाश पायेगा. यह सब देखकर बड़ा ही अजीब लगता है की मृगतृष्ना के पीछे दौड़ने वाला यह मानव आज अपना ही अंत करने में तुला है. आज दुनिया कई मायनों में विनाश की कगार पर खड़ी है. अगले महायुध्य की ध्वनियां स्पष्ट सुनाई दे रही हैं.

धरती का पानी बर्वाद कर ढूँढ़ने चले मंगल और चंद्रमा पर 

   बड़ी अजीब दास्तान है की आज धरती पर जल प्रबंधन कर पाने में असफल सरकारें अपनी प्यासी मानवता के लिए मानवाधिकारों में से एक स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध करवा पाने में असफल हैं और अन्यत्र ग्रहों चंद्रमा, मंगल, आदि में पानी और जीवन की तलास के लिए अरबों खरबों बर्वाद कर रही हैं. यह किसी एक देश के हाल नही हैं बल्कि आज ज्यादातर विश्व के देशों में फैशन बन चुका है की चाहे उस देश में खाने के लिए दाने न हो लेकिन अपना वर्चस्व बताने के लिए न्यूक्लिअर और एटॉमिक प्रोग्राम में पानी की तरह पैसे और ह्यूमन रिसोर्स बहाने के लिए पर्याप्त समय और पैसा है. चाहे उस देश में भुखमरी चल रही हो, सब मर रहे हों लेकिन देश और विदेश से आयातित हथियार अवस्य होने चाहिए. विश्व के समस्त देशों के पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर को जोड़ दिया जाए तो ये ऐसी ताकतें बन चुकी हैं की चाहें तो यह पूंजीपति एक एक देश को गोद लेकर सालों साल उनकी आम जनमानस को खिला पिला सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नही करेंगे जो भी करेंगे वह मात्र कुछ ऐसा करेंगे कि उस पैसे और संपदा एवं मैन पावर का ऐसा उपयोग करेंगे जिससे ज्यादातर ऐसे पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर का वर्चस्व स्थापित हो. बिल गेट्स, ज़ुकेरबर्ग, टाटा और अजीम प्रेमजी जैसे कम ही लोग होंगे जो अपना पैसा चैरिटी और मॉनव की सेवा में लगाना चाहेंगे.

पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड को मानवाधिकार संरक्षण में आगे आना चाहिए

     यद्यपि यह कहने और सुनने में बड़ा अटपटा सा लग सकता है लेकिन यदि विश्व के पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लोग अपना थोड़ा थोड़ा भी योगदान चैरिटी के लिए देने लगे तो काफी हद तक विश्व की मूलभूत समस्याओं से निजात मिल जाएगा. सभी गरीब कमज़ोर और नीडी लोग अपनी मूलभूत अवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में सफल होंगे जिससे वह अपने जीवन को रोज़ की रोटी, कपड़ा, पानी, खाना, स्वास्थ की जद्दोजहद को छोड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाने में लगा पाएंगे और इस जीवन को समझ पाएंगे. आज पूरे विश्व की 75 प्रतिसत से अधिक की आवादी अपने रोज़ की जीवन की जद्दोजहद में ही पड़ी हुई है, उसे अपने मॉनव होने का एहसास भी नही है. इन ज्यादातर लोगों के लिए अपने रोजमर्रा की अवश्यकताओं की पूर्ति ही इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है.

   देश दुनिया की बातों को विराम देते हैं और आते हैं मप्र के रीवा में और देखते हैं की एक जिले के ग्रामों की समस्या कैसे इस पूरे देश और यहां तक की पूरे विश्व के लिए एक प्रोटोटाइप है.

    भारत में भष्ट्रचार का कोई अंत नही है. यहां तक कि लोग आज यह भी कहने लगे हैं की भारत की आबोहवा में भी अब भष्ट्रचार फैल चुका है. जो भी हो पर इसमे कोई दो राय वाली बात नही की मानवीय अवश्यकताओं के साथ ही समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं.

बांस पंचायत में 15 वर्ष से बनी पानी की टंकी में भरा है हवा, हैंडपम्प उगल रहे आग

     अभी पिछले दिनों पर्यावरण एवं मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत कई पंचायतों में भ्रमण किया गया और पानी संबंधी जमीनी हकीकत का व्योरा लिया गया. जो सच्चाई सामने आयी वह भारतीय परिवेश के हिसाब से ज्यादा चौकाने वाली नही थी. 

    ग्राम बांस के रोहित कुमार मिश्रा, शिवम मिश्रा, राजू तिवारी, अरुणेंद्र गौतम, सुमित्री सेन, जोधाबाई सेन, रविराज साकेत, अनुराग मिश्रा, आदि रहवाशियों ने बताया की ग्राम में 50 हज़ार क्षमता की पानी टंकी आज से 15 वर्ष पहले बनाई गई थी जिसमे मात्र 10 दिन के लिए ही पानी भरा गया था और उसके बाद कभी इस टंकी में पानी देखने को नही मिला. रोहित मिश्रा ने बताया की इस विशाल पानी टंकी को हमारे ग्राम में बनवाने के पीछे शासन प्रशासन की क्या मंशा रही होगी उन्हें आज तक समझ नही आया क्योंकि जब से पानी की टंकी बनाई गई है तब से लेकर आज तक न कहीं पाइप लाइन का पता है और न ही किसी रखरखाब करने वाले कर्मचारी का. शिवम मिश्रा और सुमित्री सेन द्वारा बताया गया की इस पानी की टंकी में जब एकबार पानी भरा गया था तब इसमे लीकेज था और पूरा पानी बह गया था. आज जब देखा गया तो लोगों ने पानी के टंकी के नीचे अपने अपने माल मवेशी बांध दिए थे. 

     रोहित और शिवम द्वारा जानकारी दी गई की उनके ग्राम में सैकड़ों नलकूप पंचायत, विधायक, और सांसद आदि निधियों से बनाये गए हैं लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक हैंडपम्प आज हवा और आग उगल रहे हैं. हैंडपम्प मैकेनिक से लेकर पंचायत कर्मियों और सरपंच को जानकारी दी गई लेकिन समस्या का समाधान नही किया गया.

   सभी रहवाशियों द्वारा एक स्वर में बताया गया की लोग बहुत परेशान हैं और बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और कोई सुनवाई नही हो रही है.

    शिवम और रोहित ने आगे बताया की उन्होंने यह जानकारी यहां से चुने गए जिला पंचायत सदस्य को भी दी थी लेकिन जिस दिन से चुनाव सम्पन्न हुआ है उस दिन से आज तक वोट और पद प्राप्त करने के बाद कोई भी जन प्रतिनिधि नही दिखा है जब वोट लेना होगा तो फिर मुह उठाये दौड़े चले आएंगे और बोलेंगे की हमे वोट की भीख के दो.

बांस ग्राम में ताला खुला पड़ा हुआ है पंप हाउस, स्टार्टर और इलेक्ट्रिक समान में लग गया जंग

    ग्राम बांस के राजू तिवारी, शिवम मिश्रा और रोहित मिश्रा ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया जिसमे कोई ताला नही लगा हुआ था. एक खुला हुआ ताला वहीं पर लटक रहा था. रहवाशियों ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया तो वहां का नजारा देखते ही बनता था जिसमे मोटर स्टार्टर, केबल, टूटे फूटे इलेक्ट्रिक के सामान आदि बिखरे पड़े थे जो स्पष्ट रूप से पंप हाउस के काम न करने और वहां की अव्यवस्था को दिखा रहे थे.

   बांस पानी की टंकी से संबंधित पंप हाउस के पीछे एक हैंडपम्प भी लगा हुआ मिला जो बनने के बाद कभी चला ही नही. हैंडपम्प चलाकर दिखाया तो उसका हैंडल जम्प कर रहा था.

रीवा पी एच ई कार्यपालन यंत्री शरद सिंह को जानकारी नही

  जब बांस की पानी की टंकी की दुर्दशा के विषय में ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद सिंह से बात की गई तो उनका कहना था की इस पानी की टंकी के विषय में उन्हें कोई जानकारी नही है. कार्यपालन यंत्री द्वारा कहा गया की चूंकि जानकारी दी जा रही है तो अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को भेजकर दिखवाएंगे. 

    50 हज़ार से अधिक क्षमता वाली पानी की टंकी की जानकारी ज़िले के कार्यपालन यंत्री को न होना एक अचंभा ही है. हाँ यह माना जा सकता है कि छोटी नलजल योजना संबंधी पानी की टंकी और सामान्य नलकूप की जानकारी का न होना समझ आता है पर आज जब पिछले कई सप्ताह से ज़िले में निरंतर पानी की भीषण समस्या को अखबार और विभिन्न मीडिया स्रोतों और कंप्लेन के द्वारा बताया जा रहा है ऐसे में इन अधिकारियों को चाहिए की पूरे ज़िले के डेटा को इकठ्ठा कर उसमे युध्यस्तर पर कार्यवाही कराएं.

  हिरुडीह पंचायत में भी भीषण जल संकट, नलजल योजना में पानी के स्थान पर आम जनता को मिल रही है हवा और आग

    गंगेव ब्लॉक की हिरुडीह पंचायत का किस्सा भी बांस पंचायत से कुछ ज्यादा अलग नही. दिनाँक 13 मार्च को शुबह लगभग 9 बजे के आसपास सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा हिरुडीह पंचायत की समस्याओं के सिलसिले में दौरा किया गया तो वहां को स्थिति दिखी वह भी आज पंचायती राज व्यवस्था की दुर्दशा को ही बया करती है. 

   हिरुडीह के दो टोलों का दौरा किया गया और वहां से जानकारी प्राप्त की गई जिसमे हिरुडीह निवासी रामगोपाल पांडेय, रामायण प्रसाद पटेल, राजेश पटेल, भगवानदीन पटेल, रामनिवास दुबे, रामलाल विश्वकर्मा, राजमणि पांडेय, विष्णुकांत शुक्ला आदि द्वारा बताया गया की लगभग तीन सरपंची पहले अर्थात लगभग 10-12 साल पूर्व उनकी पंचायत में नलजल योजना के लिए चार पानी की कम और मध्यम क्षमता वाली पानी की टंकियां बनाई गईं थी और कुछ पाइप लाइन भी बिछाई गई थी लेकिन कभी कोई पानी सप्लाई नही की गई है. सभी चारों पानी की टंकियां मात्र शोपीस बनकर खड़ी हुई हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. 

   इन रहवाशियों द्वारा बताया गया की इन्होंने कई बार सरपंच, सचिव, विधायक, सांसद, ज़िला एवं जनपद सदस्यों और अधिकारी कर्मचारियों सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी सूचित किया गुहार लगाई लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई, हाँ जब भी बात की जाती है तो अधिकारियों द्वारा बताया जाता है की काम हो जाएगा. पर आज दसक भर बीत रहे हैं लेकिन कुछ हुआ नही है. रहवाशियों द्वारा बताया गया की उनके गांव में सभी हैंडपम्प खराब पड़े हैं, ज्यादातर में पाइप ही नही पर कोई सुनने देखने वाला नही. बताया गया की कुछ हैंडपम्प में जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है.

   बताया गया की गंगेव जनपद अंतर्गत हिरुडीह पंचायत में 6 ग्राम आते हैं जिनमे हिरुडीह, जरहा, कोठार उन्मूलन, मड़फा, कोती, बगहिया सामिल हैं. इन सभी ग्रामों सहित पूरे पंचायती क्षेत्र की कुल आवादी लगभग 8 हज़ार से ऊपर है. और पूरे पंचायती क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक नलकूप खराब पड़े हैं. 

हरिजन बस्ती हिरुडीह के लोग पानी के लिए परेशान, दोनो नलकूप खराब और नलजल योजना की टंकी में कभी नही पहुचा पानी, पाइप और र खरखाब का पैसा भी खा गए भष्ट्राचारी

   हिरुडीह ग्राम में आगे चलने पर पुरवा वाली सड़क मार्ग से जुड़ी हिरुडीह की हरिजन बस्ती आती है जहां पर लगभग 50 घर हरिजन निवास करते हैं जिनकी आवादी लगभग 200 के आसपास है. इनके घर के पास दो नलकूप खोदे गए थे जो बिल्कुल कार्य नही कर रहे हैं. दोनो नलकूप पानी नही दे रहे. एक नलकूप अभी पिछले वर्ष 2017 में ही बनाया गया है लेकिन उसका प्लेटफॉर्म भी उखड़ा मिला और जब से बनाया गया है तब से उसमे बूंद में पानी नही निकला. सभी हरिजन महिलाओं और पुरुषों ने सरपंच और पंचायत विभाग पर आरोप लगाया की उनकी समस्या की कोई सुनवाई नही की जा रही है. 

     वहीं पास स्थित बगीचे के पास 50 मीटर दूरी पर एक छोटी किश्म की पानी की टंकी भी दिखी जिसमे कभी पानी नही आया. हरिजनों ने बताया की इस पानी की टंकी में पाइप लाइन भी सप्लाई नही की गई. हरिजनों ने बगीचे के पास स्थित मेढ़ की तरफ इशारा करते हुए बताया की टंकी से 50 मीटर दूर तक कभी पाइप लाइन डाली गई थी लेकिन उनके पानी की टंकी में पाइप नही जोड़ी गई. हरिजनों ने आगे जानकारी दी की बाद में लगाई गई पाइप भी खोदकर बेंच ली गई है.

     हिरुडीह के हरिजनों ने आरोप लगाया की उनकी समस्याओं की कोई सुनवाई नही हो रही है. जब वोट माँगना होता है तो प्रत्यासी उनके घर में आएंगे और खाट के नीचे बैठ जाएंगे और उनका पैर दबाकर कहेंगे की हमे बस आप लोग एक बार मौका दे दो हम आपके जीवन को बदल देंगे. अब हाल यह हैं की हर पंचवर्षीय व्यतीत हो रही है लेकिन ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन करने वाले हरिजन आदिवशियों के जीवन में आज तक कोई विशेष बदलाव देखने को नही मिले है.

     सभी लोगों ने एक स्वर में माग की है कि उनकी मूलभूत समस्याओं का और विशेष तौर पर गर्मी में पानी कि समस्या का समाधान किया जाए. उनकी पानी की टंकी को प्रारम्भ कर उसमे पाइप लाइन डाली जाए और घर घर नलजल योजना के माध्यम से पानी दिया जाए।

हिरुडीह हरिजन बस्ती में बिजली, आवास जैसी मानवाधिकार की भी हैं समस्याएं

    अमृत लाल साकेत एवं उनके आसपास बसे सैकड़ों हरिजन परिवारों ने बताया की उन्हें प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया गया था लेकिन सहायक सचिव और सरपंच द्वारा उन्हें पीएम आवास् की पूरी राशि नही दी गई है और मात्र 1 लाख 15 हज़ार ही दी गई है. उनकी मनरेगा की मजदूरी की राशि और शौचालय की राशि नही दी गई है.

    सभी हरिजनों ने बताया की उनके घरों में बिना बल्ब जलाए ही बिजली के अनियंत्रित बिल भेजे जा रहे हैं. हरिजनों ने बताया की उनके कुछ घरों में तो मीटर लगा है परंतु सभी के घर मीटर भी नही है. बताया गया की बिना मीटर रीडिंग ही बिजली के मनमुताबिक बिल भेजे जा रहे हैं. जिसकी की कई बार शिकायत भी मौखिक एवं सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई है पर औसत और ज्यादा बिलिंग में कोई परिवर्तन नही हुआ है. सभी ने बताया की उनके घरों में उजाला योजना के 9 या 10 वाट के एक या दो तक बल्ब जलते हैं और कोई दूसरे इलेक्ट्रिक सामान नही हैं फिर भी इतना अधिक बिल क्यों भेजा जा रहा है.

   इन समस्याओं पर सभी ने एक स्वर में कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - बांस और हिरुडीह पंचायत की बन्द पड़ी नलजल योजना की टंकियां, खराब पड़े पाइप की कमी के कारण पड़े हैंडपम्प और साथ ही बांस और हिरुडीह पंचायत के रहवासी और लोग जिनकी की समस्याओं का कोई समाधान नही किया जा रहा है. मामला गंगेव जनपद की पंचायतों का. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587,

Tuesday, March 27, 2018

भोपाल से पी एच ई की टीम जल्द ही करेगी रीवा संभाग का दौरा, लेगी पेयजल स्थिति का जायज़ा, इंजीनियर इन चीफ़ के कार्यालय भोपाल से जारी हुये आदेश Dysfunctional Handpumps and water problems in Rewa MP


दिनांक 27 मार्च 2018, स्थान – रीवा मप्र

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      गर्मी बढ्ने के साथ ही जिले मे जल संकट बढ़ गया है। कई स्थानो पर तो जलस्तर अभी भी ठीक है पर राइजर पाइप के अभाव और रखरखाव की समस्या के चलते नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। इस संदर्भ मे जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा संबन्धित त्योंथर,गंगेव, हनुमना, जवा, रायपुर करचुलियान आदि के उपयंत्री, अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी और कार्यपालन अभियंता शरद कुमार, और पी एस बुंदेला सहित मुख्य अभियंता भोपाल के निज सचिव, मुख्य अभियंता जबलपुर श्री गौड़, और पी एच ई विभाग के अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव आदि से बात की गई तो हर एक व्यक्ति का अपना अलग वक्तव्य सामने आया। हर किसी ने समस्या के समाधान पर तो कम परंतु जनता के ऊपर कुछ ज्यादा ही दोष मढ़ा। अधिकारियों ने अपने विभाग और सरकार की कमी को बिलकुल स्वीकार नहीं किया परंतु जनता ही उनकी नज़र मे सबसे ज्यादा दोषी दिखी। सभी अधिकारियों की बातचीत के अंश भी यहाँ पर औडियो फ़ाइल मे संलग्न हैं कृपया देखें।

  देखिये जब इन संबन्धित अधिकारियों से बात की गई तो इनका क्या जबाब था –

1)    “अभी हमारे पास हनुमना, जवा,त्योंथर, आदि ब्लॉक का प्रभार है। मैं हर स्थान पर नहीं पहुच सकता, सरकार को इस बात को सोचना चाहिए, आप त्योंथर के सहायक यंत्री एमके यादव से बात कर लें। वैसे हम आपको बता दें की हमारी माग के वावजूद भी हमे पर्याप्त पाइप नहीं दी गई है। मात्र हमारे पास त्योंथर के 95 के आसपास पंचायतों के लिए अभी 100 पाइप हैं। अब बताइये हर पंचायत मे औसतन 40 से 50 नलकूपों के लिए कैसे इतनी पाइप मे काम चल पाएगा।” – आनंद तिवारी, प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी, हनुमना, त्योंथर, जवा,पी, एच, ई विभाग रीवा मप्र। मोब –9589135484,  

2)   “हमने सरकार से 1500 पाइप की डिमांड की थी लेकिन हमे मात्र 100 पाइप एक बार मे दी गई हैं। गाँव वाले चाहते हैं की उनके नलकूप मे हम 10-12 पाइप डालें तो कैसे संभव है। सरकार हमे पर्याप्त माग की हुई पाइप नहीं दे रही है। आप सरकार के उच्चस्तर मे शिकायत करें जिससे हमारे लिए पाइप मिले तो हम काम करें। हमने नलकूप मैकेनिक को बताया है की आपके द्वारा बताई गई डाढ़,जमुई, बरहट, आदि पंचायतों को दिखवाता हूँ। पर आप भोपाल और जबलपुर मे उच्चस्तर मे बात करें। नलजल योजना के विषय मे जो बात आपने बताई है तो उसमे हमारे विभाग से जो किया जाना था किया जा चुका है अब आगे का काम पंचायत का है की वह उसकी व्यवस्था कराये। नलजल के लिए जमुई पंचायत त्योंथर ब्लॉक के लिए सवा लाख रुपए से अधिक उनके खाते मे भेजा जा चुका है। अब यदि पंचायतें काम नहीं करवा रही हैं तो हम क्या कर सकते हैं।”– एम के यादव, सहायक यंत्री त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र। मोब –7000310187,

3)   “आप हमे सारी जानकारी के साथ ईमेल कर दें और उसे हम संबंधितों को प्रेषित कर देंगे। इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल से आज बात नहीं हो पाएगी मैं उनका पीए बोल रहा हूँ, आप सब बाते ईमेल कर दें हम कार्यवाही करवा देंगे। वैसे आप के सूचना पर हमने रीवा और सतना के लिए एक टीम गठित कर दिया है जिसमे आपके रीवा के ही अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव भी हैं और जल्द ही पानी संबंधी समस्या का सर्वेक्षण कर अपनी जानकारी वह टीम हमे देगी। मैं आपको उनका मोबाइल नंबर बता देता हूँ आप उनसे संपर्क कर लें जब वह आपके क्षेत्र मे आयें। वैसे हमारे यहाँ से पाइप संबंधी कोई कमी नहीं है पर्याप्त मात्रा मे पाइप भेजी जा रही हैं। यह जिले स्तर के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है। फिर भी हम दिखवाएंगे। ” – निज सचिव,इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल, मप्र शासन लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग। लैंड्लाइन नंबर इंजीनियर इन चीफ़ – 07552779411,   

4)   “देखिये नलकूप संधारण और रख रखाव के लिए हमे सरकार से एक निश्चित सीमा मे ही बजट मिल पाता है,और उसी मे हमे काम करना पड़ता है। जनता की सोच बिलकुल गलत है की हमारे पास पाइप का भंडार है और हम जितना चाहें उतना पाइप उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसा नहीं है, हमारे पास प्रति वर्ष के हिसाब से प्रत्येक नलकूप के रखरखाव के लिए 16 सौ रुपये दिये जाते हैं जिसमे 60 प्रतिशत सामाग्री का खर्च होता है जिसमे पाइप, नट, बोल्ट, वासर आदि रहता है और उसमे 40 प्रतिशत लेबर चार्ज होता है। अब इसी मे हमे सब कुछ देखना पड़ता है तो ऐसे मे तो देखा जाय तो वर्ष मे एक नलकूप के लिए मात्र एक ही पाइप आ सकती है। हम चाहे कितना भी यहाँ से डिमांड देंगे लेकिन सरकार बजट मे पर्याप्त नहीं देती जिससे यह सब समस्याएँ बनी रहती हैं। चाहे भले ही इस वर्ष विशेष अकाल सूखे की स्थिति है परंतु सरकार नहीं सुनती उनका बजट पहले से तय रहता है, सरकार का कोई विशेष आवंटन नहीं होता है। फिर भी हमारे द्वारा आपके पूरे रीवा संभाग के लिए पर्याप्त पाइप भेजी जा चुकी है और डिमांड पर भेजी जा रही है मै आपको पूरा हिसाब बता सकता हूँ। कहीं कोई पाइप की कमी नहीं है।” – मिस्टर गौड़, चीफ़ इंजीनियर जबलपुर क्षेत्र (जिसके परिक्षेत्र मे रीवा संभाग आता है) । मोब – 9907065750 

5)   “रीवा सतना के हमारे दौरे के विषय मे आप बता रहे हैं परंतु अभी मुझे कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है। पर यदि ऐसा है तो जब भी मुझे लिखित आदेश मिलेगा तो मैं आता हूँ और आपको सूचित करूंगा। देखिये हम भी रीवा के ही हैं और 20 वर्ष से अधिक हमने रीवा संभाग मे रहकर नौकरी किया है हम वहाँ की भौगोलिक स्थिति के विषय मे वाकिफ हैं। परंतु लोगों को एट्टीट्यूड प्रॉब्लेम्स है जिसके कारण समस्या होती हैं। लोग यह चाहते हैं की सभी पाइप उनही के नलकूप मे डाल दी जाएँ पर ऐसा नहीं होता है। हमे सभी को देखना पड़ता है। परंतु जब हम आएंगे तो जो भी वास्तविक स्थिति होगी उससे शासन को अवगत कराएंगे। वैसे हम मई-जून मे एक बार दौरा करते हैं।” –अनुराग श्रीवास्तव, अधिकारी पी एच ई, भोपाल, जिनहे रीवा और सतना के लिए दौरा के लिए कई सदस्यों के साथ भेजा जा रहा है। मोब- 9827239912

संलग्न – कृपया उक्त सभी अधिकारियों कर्मचारियों से सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई बातचीत के अंश यहाँ पर संलग्न औडियो फ़ाइल मे हैं, देखने का कष्ट करें। साथ ही पिछले कई दिनों से जल की समस्या को लेकर मीडिया मे खबर का भी अंश यहाँ प्रस्तुत है जिसे इंजीनियर इन चीफ़ को भी उनके ईमेल एड्रैस मे भेजा जा चुका है।

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 शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। मोब – 7869992139,

Sunday, March 25, 2018

गंगेव पीएचई उपयंत्री अखिलेश ऊईके नहीं उठाता फोन, जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसी, सभी हैंडपम्प पाइप और रखरखाव के अभाव मात्र मे खराब, बताया जाता है की जलस्तर नीचे चला गया जबकि जलस्तर एकदम दुरुस्त, 90 फीसदी नलकूप मात्र 10 पाइप डालने से काम करना चालू कर देंगे

दिनांक 26 मार्च 2018, गढ़/गंगेव मप्र

      (कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

       ज़िले मे जल संकट बढ़ता जा रहा परंतु इस जल संकट के पीछे काफी हद तक प्रसाशनिक उदाशीनता और पीएचई विभाग का भष्ट्राचार जिम्मेदार है। ज़्यादातर नलकूपों का रखरखाब सही तरीके से न हो पाने के कारण यह नलकूप खराब बता दिये जाते हैं। यद्यपि अभी भी कई ग्रामों मे जलस्तर ठीक है फिर भी इसका सहारा लेकर लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के कर्मचारी अधिकारी जलस्तर नीचे बताकर पल्ला झाड लेते हैं। ज़िले भर मे सही सही सर्वे किया जाय तो पाया जाएगा की औसतन नलकूपों मे 5 से 6 तक ही पाइप लगाई हुई हैं, जबकि गलत जानकारी देकर बताया जाता है सभी नलकूपों मे 10 से अधिक पाइप डाली हुई हैं। बहुत कम नलकूप ऐसे हैं जिनमे 10 अथवा इससे अधिक पाइप लगाई हुई हैं। परंतु गलत जानकारी देकर सरकार को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है और नई पाइप को ज़िला से लेकर जनपद तक बैठे अधिकारियों और दलालों ठेकेदारों की सह से बेंच लिया जाता है। जब कभी पुरानी टूटी पाइप को निकालकर नवीन पाइप डाली जाती है पुरानी पाइप का कोई हिसाब नहीं रहता। पुरानी पाइप को भी विभाग के कर्मचारी काला बाजारी कर लेते हैं।

मात्र रखरखाव के अभाव मे गंगेव त्योंथर मे बंद हैं 80 फीसदी नलकूप

      उदाहरण के लिए गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा, अगडाल, सेदहा, बांस, मदरी,पनगड़ी, लौरी, गढ़, पंडुआ, रक्सा-माजन एवं त्योंथर अंतर्गत आने वाली डाढ़, जमुई, बरहट,कलवारी, कटरा सोहागी आदि पंचायतों मे देखा जाए तो 80 फीसदी से अधिक नलकूप मात्र सही रख रखाव के अभाव मे बंद हैं जबकि सरकार द्वारा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग  को हर वर्ष करोड़ों रुपया मात्र जिला भर के सभी नलकूप के रख रखाव के लिए दिये जाते हैं।

अखिलेश ऊईके नहीं उठाते फोन, जनता परेशान, सीएम हेल्पलाइन भी कारगर नहीं

   जब कभी भी गंगेव उपयंत्री अखिलेश ऊईके को कॉल कर खराब नलकूपों की जानकारी दी जाती है तो उनके द्वारा काल नहीं उठाया जाता। फिर जब इसी बात को लेकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायत की जाती है तो लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी के कर्मचारियों का हांथ पैर जोड़ने का सिलसिला चालू हो जाता है। कहा जाता है की सीएम हेल्पलाइन मे शिकायतें क्यों की गईं आप हमे बता देते तो हम समस्या का समाधान करवा देते, मुख्यमंत्री तक बात पाहुच जाती है तो हमारी नौकरी मे परेशानी होगी,जबकि उल्टा जब बार बार बताए जाने पर भी इनके द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो फोन कॉल नहीं उठाए जाते तब जाकर जनता मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज़ करवाती है।

चुनाव आते ही फिर मुह उठाए दौड़े आएंगे जनता के पास

– हमे वोट की भीख दे दो -

      गंगेव लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के उपयंत्री का रवैय्या जनता के विपरीत है। गर्मी की स्थिति को देखते हुये वास्तव मे चाहिए यह की जितने भी लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के जनपदों मे पदस्थ कर्मचारी अधिकारी और नलकूप मैकेनिक हैं इन्हे अपने क्षेत्र मे जाकर हर एक नलकूप का रेकॉर्ड उठाकर सही सही डाटा सरकार को प्रेषित करना चाहिए और वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए। परंतु जिस प्रकार स्थिति बनी हुई है इससे यह नहीं समझ आता की जिम्मेदार विभाग है की सरकार? आखिर सरकार मे भी बैठे जन सेवकों को भी तो पेपर पत्रिकाओं के माध्यम से रोज यह खबर लगती ही होगी की हर एक गाँव मे क्या वास्तविक स्थिति है। पर वोट लेने के बाद कहाँ किसे सुध है। जब एक बार फिर चुनाव आ जाएगा तो हांथ मे भीख का कटोरा लिए फिर जनता के पैरों तले पड़ जाएंगे पैर चाटने के लिए और इस देश की जनता तो पहले ही भगवान भरोशे है। सब कुछ भूलकर सब दुख क्लेश भूलकर फिर अपने वोट का दुरुपयोग कर लेगी। फिर किसी भष्ट्राचारी को बैठा देगी गद्दी पर और पूरे पाँच वर्ष तक लुटती रहेगी चिल्लाती रहेगी।

  संलग्न – क्षेत्र के बंद पड़े नलकूप और परेशान लोग, जिनकी आवाज़ न तो भगवान सुन रहा है और न ही सरकार।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र।7869992139


Monday, February 26, 2018

गदही में नए हैंडपम्प सर्वे के लिए पहुचे गंगेव पी एच ई उपयंत्री अखिलेश उइके (पिछले दिनों समाचार आयी थी मीडिया में)

दिनांक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

  पानी की समस्या को लेकर अभी हाल ही में पिछले दिनों ज़िले से प्रकाशित होने वाले कई अग्रणी समाचार पत्रों में गदही ग्राम के हरिजन आदिवासियों द्वारा शिर पर डिब्बे बाल्टी रखकर प्रदर्शन करते हुए फ़ोटो प्रकाशित हुए थे। जिसके संदर्भ में  जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं संबंधित एस डी ओ हुजूर श्रीवास्तव को सूचित किया गया था।

      इसी तारतम्य में आज दिनांक 26 फरवरी को कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह के निर्देश पर शाम 4 बजे गंगेव ब्लॉक उपयंत्री अखिलेश उइके को जांच के लिए भेजा गया। जांच एवं सर्वे के दौरान पाया कि गदही ग्राम में 50 से अधिक घर बने हुए हैं जिनमे 200 से अधिक आबादी के लिए कोई शासकीय नलकूप उपलब्ध नही है। गदही ग्राम की बस्तियां कुछ इस प्रकार की बसी हुई हैं कि सभी घर आसपास न होकर काफी दूर दूर हैं और लगभग 4 किमी के दायरे में बसे हुए हैं और सभी घरों को पानी उपलब्ध करने के लिए 3 से 4 तक हैंडपम्प करने पड़ेंगे। उपयंत्री द्वारा बताया गया कि अभी वर्तमान में मात्र एक हैंडपम्प की व्यवस्था के लिए प्रयास किये जायेंगे जो दोनो तरफ की बस्तियों के मध्य में लगाया जाएगा।

    पी एच ई  उपयंत्री अखिलेश उइके ने बताया कि सर्वे और जांच रिपोर्ट कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को प्रेषित कर दी जाएगी जिस पर अग्रिम कार्यवाही विभाग द्वारा निर्धारित होगी।

  संलग्न - गदही ग्राम जांच करने पहुचे गंगेव लोक स्वास्थ्य विभाग के उपयंत्री अखिलेश उइके एवं क्षेत्रीय हैंडपम्प मैकेनिक अश्वनी पटेल एवं रामसिया द्विवेदी।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Sunday, February 25, 2018

नलजल योजना के "नल" में भरपूर है "जल" पर गांव की जनता को नही रहा "मिल" - भ्रष्ट्राचार का कुछ नही "उपचार" (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का)

दिनाँक 25 फरवरी 20018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

               पूरे ज़िले में पानी की जद्दोजहद चल रही है इसी बीच हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव में एक और नलजल योजना में भ्रष्ट्राचार का मामला सामने आया है। हिनौती निवासी अखिलेश उपाध्याय द्वारा बताया गया कि उनके घर के पास नलजल योजना का पंप हाउस पिछले एक दशक पूर्व बनाया गया था जो पूरे हिनौती ग्राम के लिए पाइप द्वारा पानी सप्लाई करने के लिए बनाया गया था लेकिन न तो पाइप लगाई गईं और न ही उसका सही तरीके से रख रखाब किया गया नतीजा यह हुआ कि उत्कृष्ट पंचायत का तमगा प्राप्त हिनौती पंचायत में नलजल योजना मात्र कागजों में है उसका कोई संचालन नही हो रहा है। 

     उपाध्याय परिवार के लगभग सैकड़ा भर से ऊपर सदस्य वहीं पंप हाउस के पास निवास करते हैं और भारी तकलीफ से गुजर रहे हैं। पंचायत में कोई हैंडपम्प भी सही तरीके से कार्य नही कर रहे हैं। पंप हाउस के पास ही पंचायत भवन एवं हरिजन आदिवशियों की बस्ती भी है जिसमे 500 से अधिक परिवार निवासरत हैं जिन्हें साल के 12 महीने पानी की भीषण समस्या से गुजरना पड़ रहा है। बस्ती निवासी पार्वती साकेत एवं उनके पति भैयालाल साकेत सहित धर्मेंद्र आदिवासी आदि ने बताया कि हमारी पंचायत में नलजल योजना है जिसके रखरखाब के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी भी पेमेंट ले रहे हैं, साथ ही 46 हज़ार रुपये के आसपास की राशि भी रखरखाब के लिए अभी आई हुई है परंतु उसका क्या किया जाएगा किसी को कोई पता नही। पंप हाउस के पास निवासरत अखिलेश उपाध्याय और उनके परिवार द्वारा बताया गया कि इस विषय मे उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में कई शिकायतें की हुई हैं और रोज वहां से कॉल आता है और बताया जाता है कि आपकी समस्या का निराकरण कर दिया गया है परंतु भौतिक धरातल पर न तो किसी प्रकार का कोई निरीक्षण किया गया और न ही समस्या का समाधान हुआ है, सीएम हेल्पलाइन में मात्र झूंठे निराकरण दिए जाते हैं।

   इस प्रकार हिनौती ग्राम पंचायत के रहवाशियों की आपबीती से समझा जा सकता है कि पानी को लेकर हर जगह बस एक ही स्थिति बनी हुई है। हैंडपम्प काम नही कर रहे हैं जिनमे या तो पाइप नही हैं और उनका सही तरीके से रखरखाब नही हो पाया है अथवा गर्मी में जलस्तर नीचे जाने से बंद हो गए हैं। गर्मियों में विकल्प के तौर पर नलजल प्रदाय योजना एक बहुत ही बेहतर समाधान के तौर पर सामने आई है परंतु ग्रामीण स्तर पर जन जागरूकता के अभाव एवं बढ़ते पंचायती भ्रष्ट्राचार के कारण आगे नही बढ़ पा रही है। जहां कहीं पंचायतों में नलजल योजना लगायी भी गयी है वहां भ्रष्ट्राचार के कारण काम नही कर रही है। मेंटेनेंस और व्यवस्था के लिए सरकारी खजाने से आने वाली राशि पंचायत एवं पीएचई विभाग की सह से हजम हो रही है जिसकी जानकारी सभी अधिकारियों को है परंतु सही कार्यवाही न करवा कर भ्रष्ट्राचार में अपनी भरपूर भूमिका अदा कर रहे हैं। 

    ऐसे में अकेले प्रधानमंत्री मोदी का भाषण और उनकी मन की बात मात्र भाषण और मन मे ही रह जायेगी क्योंकि दिल्ली में बैठकर अकेले एक मोदी कुछ नही कर पायेगा। यहां तो हर गांव कस्बे में एक मोदी की जरूरत है।

  संलग्न - 

        1-  हिनौती नलजल या स्थलजल प्रदाय योजना अंतर्गत बनाया गया पंप हाउस और पास स्थित बोरवेल जहां से पूरे गांव में नल की पाइप द्वारा पानी दिए जाने का प्रावधान बनाया गया था।

       2 - दूसरी तस्वीर में शिकायतकर्ता अखिलेश उपाध्याय निवासी हिनौती पंप हाउस के पाश खड़े हुए नलजल की दुर्दशा दिखाते हुए। 

        3- अगली तस्वीर में हिनौती ग्राम की हरिजन बस्ती के लोग डिब्बे बाल्टी लिए हुए पानी का नंबर लगाए बैठे हैं। इसी एक स्थान से पूरे बस्ती में पैनी ढोते हैं।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।

      78699992139

Wednesday, February 21, 2018

साहब हमे पानी दे दो तो बहुत बड़ा एहसान होगा! गदही ग्राम के हरिजन आदिवासी आज भी भरते हैं 5 किमी दूर जंगल के झरने से पानी, आवादी 200 से ऊपर, गर्मी में कर जाते हैं अपने घरों से पलायन (देखें तस्वीरें)

दिनाँक 22 फरवरी 2018, स्थान - सिरमौर तहसील गदही ग्राम से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

         बिना ज्यादा भूमिका बनाये सीधे मुद्दे में आ जाते हैं। मूलभूत मानवाधिकारों में से अति महत्वपूर्ण पानी पीने के अधिकार की कितनी सुरक्षा ये सरकारें कर पा रही हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज 21 वीं सदी में भी लोग 5 किमी दूर जंगल मे जाकर झरने से पानी ला रहे हैं और उसी से जीवन यापन कर रहे हैं। कहने को तो यह क्षेत्र मनगवां विधानसभा का है जहां पर एक मोहतरमा प्रतिनिधित्व की कमान संभाले हुए हैं जो इन तथाकथित पिछड़े समूहों की तारणहार भी बताई जाती हैं। लेकिन जब इन हरिजन आदिवाशी रहवाशियों से पूंछा गया तो पता चला कि कई मर्तबा हम समूहों में एकत्रित होकर अपनी समस्याएं इन  जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखे लेकिन कोई सुनवाई नही हुई है। आज जबकि पूरा देश जानता है कि सांसद और विधायक निधि के नलकूपों की क्या स्थितियां हैं। इनमे ज्यादातर व्यक्तिगत उपयोग में लाये जा रहे हैं जिनमे या की पंप डाले होते हैं अथवा किसी के घर आंगन में व्यक्तिगत उपयोग के लिए लगे होते हैं। ऐसे में क्या सार्वजनिक उपयोग के लिए इन सांसदों, पंचायतों और विधायकों अथवा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास कोई नलकूप नही हैं? 

   संलग्न तस्वीरों में जो लोग अपने सिर हाँथ में डिब्बे लिए प्रदर्शन कर रहे हैं यह वाकया गंगेव ब्लॉक सिरमौर तहसील अंतर्गत आने वाली हिनौती पंचायत के कुख्यात (भमरिया गदही क्षेत्र अवैध पशु बाड़ों के लिए इस क्षेत्र में कुख्यात है जहां गौहत्याएं हुई हैं)  गदही नामक ग्राम का है जहां सरकारी राजस्व के भूभाग में भूमिहीन हरिजन आदिवाशी बसे हुए हैं और आज कई सालों से पीने के पानी के लिए गुहार लगा रहे हैं।

   - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Monday, February 19, 2018

(Rewa, MP) ज़िले के पहाड़ी इलाकों में बढ़ गया जलसंकट, पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बना अनजान (मामला डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक रीवा का, पानी पीने के मानवाधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां)

दिनांक 20 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   अभी पिछले दिनों हरिजन बस्ती नेवरिया का मामला प्रकाश में आया था जिसमे कुछ 10 साल तक के  स्कूली बच्चे साईकल में डिब्बे बाल्टी लिए हुए सेदहा स्कूल मोड़ हिनौती-लालगांव सड़क मार्ग के पास 5 किमी दूर से पानी भरकर ला रहे थे। आज सरकारें गरीबों के उत्थान की दुहाई देती नही थक रही और यूनिसेफ से लेकर चाइल्ड चैरिटी फण्ड के लिए अरबों खरबों डॉलर का पैसा देशी विदेशी संस्थाओं से उठा रही हैं लेकिन निश्चित तौर पर बच्चों का इस प्रकार 5 किमी दूर से पानी भरकर साईकल में लाना सरकार के सारे दावों को पूरी तरह से नग्न कर देने वाला वाकया था। 

      अब चूंकि जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि आज किसी भी ग्राम पंचायत में जाएं तो हमे लोग साईकल में डिब्बे लिए हुए पानी ढोते नज़र आ ही जायेंगे। लगभग रोज ही इस प्रकार की खबरें हमे मीडिया में छपी मिल ही जाएंगी।

       दिनांक 20 फरवरी की शुबह ग्राम पंचायत डाढ़ में ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को मोबाइल में इसी जलसंकट की भीषण समस्या के विषय मे बताया गया जिस पर मौके पर उपस्थित होकर देखा गया कि डाढ़ पंचायत जनपद पंचायत त्योंथर के 50 से ऊपर हैंडपम्प पाइप की कमी और अन्य खराबी के कारण बन्द पड़े हैं। कुछ तो हैंडपम्प जलस्तर नीचे जाने की वजह से बंद हैं। लेकिन ज्यादातर हैंडपम्प कर विषय मे डाढ़ के ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सही रखरखाव न होने की वजह से बंद पड़े हैं। जबकि देखा जाए तो इस विषय मे त्योंथर क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री पी एस बुन्देला एवं ज़िले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को कई मर्तबा बताया जा चुका है। इन सबका एक ही घिसा पिटा जबाब रहता है कि दिखवा रहे हैं लेकिन कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

     त्योंथर क्षेत्र की जिम्मेदारी लिए हुए कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का कहना था कि ठेके प्रथा के चलते सीधे ठेकेदार से बात करें पर जब ठेकेदार से बात की जाती है तो ठेकेदार का कहना होता है कि पी एच ई हमे कोई सामग्री उपलब्ध नही करवा रहा है अतः हम कुछ नही कर सकते।

     आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मानवाधिकारों में से एक पानी पीने के अधिकार का क्या होगा? क्या मानवाधिकार और मूलभूत संवैधानिक अधिकार मात्र किताबों की और पढ़ने पढ़ाने की बातें हैं। आखिर यदि सहरी क्षेत्र के लिए घर घर मे पाइप कनेक्शन से पानी सप्लाई किया जाता है और जल संकट उत्पन्न होने पर टैंकर से पानी पहुचाया जाता है तो पिछड़े ग्रामों के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नही की जाती? क्या अधिकारियों, कमर्चारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों नागरिकों के लिए विशेष संवैधानिक अधिकार हैं और पिछड़े बना दिये गए ग्रामो  के लिए ये पैमाने बिल्कुल अलग हैं? आखिर ऐसे में कोई ग्रामीण इन नियम कायदों संवैधानिक नियमों पर क्यों विश्वास करेगा? 

    आज सूखे अकाल की इस भीषण स्थिति में पानी को लेकर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं इससे साफ जाहिर है कि अप्रैल प्रारम्भ होते होते स्थितियां और भी अधिक भयावह हो जाएंगी। ऐसे में तमाम मानवाधिकार की सुरक्षा की दुहाई देने वाली इन सरकारों के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है कि कम बोलने वाले और कम विकशित इन ग्रामीणों के मानवाधिकारों की रक्षा सुरक्षा यह कैसे करेंगे? क्या मात्र दिखावा ही चलता रहेगा और मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर देशी विदेशी संस्थाओं से माल ऐंठने का काम चलता रहेगा अथवा कहीं कुछ वास्तविक धरातल पर भी होगा।

संलग्न - कई किमी दूर से साईकल पर पानी ढोने पर मजबूर ग्रामवशी। त्योंथर ब्लॉक पहाड़ी क्षेत्र। रीवा मप्र।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Monday, June 27, 2016

कैथा पंचायत गंगेव ब्लाक एवं उसके आसपास पचासों पंचायतों में सूखा अकाल में पानी की भारी समस्या - नहर का आभाव, प्रधानमंत्रीजी भारत सरकार के नाम खुला पत्र

हमारे भारत के प्रधानमंत्रीजी के नाम यह खुला पत्र जिसमे सूखे अकाल की स्थिति में पानी के लिए तरशते  जीवों के लिए एक नहर की अपील की गयी है. वैसे यह प्रपत्र/आवेदन मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग बल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल में भी दे दिया गया है और साथ ही मध्य प्रदेश शासन की सी. एम. हेल्पलाइन में भी रखा गया है. इस पत्र को PMO के ऑनलाइन PG Portal सहित पेपर आवेदन के रूप में भी प्रधानमत्री कार्यालय नई दिल्ली भेजा गया है. नहर के निर्माण से जहाँ क्षेत्र में किसानो के लिए सिचाई की सुविधा होगी वहीँ पर समस्त जीव जंतुओं के लिए सूखे अकाल की स्थिति अथवा कम वृष्टि की स्थिति में पानी मिलेगा. जमीनी जलस्तर में सुधार भी होगा जिससे कूप, नल, हैंडपंप, से लेकर ट्यूबवेल में भी जलस्तर में सुधार होगा. कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक, रीवा) और उसके आसपास लगभग पचासों पंचायतों में नहर न होने से गरमी में और कम वृष्टि, सूखे की स्थिति में जीवों को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ता है.


To,                                                                                        Date: 27/06/2016
The Prime Minister of India,                                            Place: Rewa (MP)
Govt. of India, New Delhi.  INDIA.

Subject :- Regarding irrigation canal in favor of poor and needy farmers of the region an irrigation canal need to be constructed as soon as possible to deal with the problems of drought in Halka Patwari - ITEHA 2 (Tehsil MANGAWAN), HINAUTI 39 (Tehsil SIRMAUR), JAMUI 31 (Tehsil TEOTHAR) and other nearby HALKA PATWARI of Rewa district of MP.

Sir/Madam,

I would like to bring into your kind notice a very severe problems of drought and falling underground water level of the villages and Halka Patwari in mentioned subject lines such as - ITEHA 2 (Tehsil MANGAWAN), HINAUTI 39 (Tehsil SIRMAUR), JAMUI 31 (Tehsil TEOTHAR) and other nearby HALKA PATWARI of Rewa district Madhya Pradesh.

In this last decade, due to the drought in two phase the underground water level have felt drastically and the farmers are suffering in their crop productivity. Also the level of the drinking water in handpumps also fell down quite deep and further due to this the many tube wells also have stopped functioning.

There are some water canal near the KEOTI area which passes between GANGEV and MANGAWAN of the REWA district but there are hundreds of the villages in centering the GARH Police station area where there is no canal and for that reason scarcity of the water in peak summer seasons and falling down of the underground level could be observed. Near gram panchayats – KAITHA, PANDUA, SEDAHA, LOTANI, MADARI, BANS, PANGADI, LAURI, GARH, KATARA, DARH, KANKAR, BHAUKHARI, HIROODEEH, KALWARI, TENDUA, and other nearby Panchayats in REWA district the problems of water level is seen quite  often in summer season. In year 2014-16 during this severe drought farmers are suffering too much. Their tube wells, handpumps, wells, ponds all dried out and they are suffering from the water scarcity.

Not only the people but also the animals, plants, and birds are even suffering due to the drought in this duration 2014-16 of drought in Madhya Pradesh.
Therefore in order to provide enough drinking and irrigation water to the farmers and people of the reason it is very important and URGENT NEED to set up as soon as possible an irrigation canal project in above mentioned region so that the general problems of irrigation and underground water level could be resolved.

PLEASE NOTE – This application is written by Shivanand Dwivedi (Social, Scientific, and RTI activists) in favor of public interest and to help them to get an irrigation canal in their region. Also is enclosed the signed copy of the extra pages with this application of the people of surrounding areas who want an irrigation canal to be constructed in their region.

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Sincerely
SHIVANAND DWIVEDI
(Social, Scientific, and RTI activist)
Village KAITHA, Post  AMILIYA,
Police Station GARH, Tehsil  MANGAWAN,
District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117

Mob. +917869992139