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Monday, October 22, 2018

वर्षों से बन्द नलकूप सुधारे, लोगों को मिली राहत, पीएचई टीम की कार्यवाही (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बांस ग्राम का जहां पर महीनों से बिगड़े हुए दर्ज़नों नलकूपों में से कुछ सुधारे गए, लोगों को मिली राहत, कई नलकूपों में जलस्तर गम्भीर स्थिति में, लोगों ने मोटर पंप लगाने की माग की)

दिनांक 23 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(रीवा, शिवानन्द द्विवेदी)

    अल्पवृष्टि की वजह से सम्पूर्ण रीवा संभाग में पीने के पानी को लेकर जद्दोजहद प्रारम्भ हो चुकी है. कभी पानी समस्या फरवरी मार्च से प्रारम्भ हुआ करती थी लेकिन इस वर्ष अभी से जलसंकट मंडराने लगा है. 

    जैसा की विदित है की पूरे ज़िले एवं संभाग में कम बारिस की वजह से किसानों की खड़ी फसलें सूखने की कगार पर है. पहले भी अल्पवृष्टि की वजह से बुवाई में देरी हुई और आधे से अधिक भूमि बुवाई बिना रह गई. जहां किसी प्रकार से बुवाई शुरू भी हुई वहां बाद में पानी की कमी से फसलें सूखने लगी हैं.

रखरखाव के अभाव में नलकूपों की ददुर्दशा

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा नलकूपों का रखरखाव महीनों और वर्षों से सही तरीके से न किये जाने के कारण राइज़र पाइप नही लगे होने से स्थिति भयावह हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ता के हस्तक्षेप के कारण दिनांक 22 अक्टूबर को गंगेव पीएचई टीम ने बांस ग्राम का दौरा किया जहां पर दर्ज़नों नलकूपों के काम न करने और राइज़र पाइप की कमी बतायी गई थी. जिस पर सप्ताह बाद पीएचई के ठेकेदारों द्वारा पुरानी पाइप लेकर बदलने का कार्य किया गया. लगभग 7 पाइप बदली गईं जिनमे से ज्यादातर पुरानी पाइप लगाई गईं.

  इन नलकूपों की बदली गईं सामग्री

    गंगेव पीएचई के ठेकेदार द्वारा जिन जिन नलकूपों में सुधार कार्य कराया गया उनमे से निम्नलिखित हैं - 1) बांस सहकारी समिति एवं शासकीय प्राथमिक स्कूल के पास स्थित नलकूप 2) बांस शासकीय हाई स्कूल के पास स्थित नलकूप 3) मुस्लिम समुदाय के मस्जिद के पास 4) छोटेलाल प्रजापति के घर के पास 5) उमेश सेन के घर के पास. इन सभी नलकूपों में जलस्तर 35 से 40 फीट के अंदर नोट किया गया जो इस क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी बात थी. बताया गया की बांस ग्राम में स्थित स्कूल के पास तालाब की वजह से सभी नलकूपों में जलस्तर ठीक बना रहता है.

      इस प्रकार मात्र पांच नलकूपों का सुधार कार्य कराया गया जबकि दो अन्य नलकूपों में जल का अभाव पाया गया. देवी मंदिर बांस के पास स्थित नलकूप भठा हुआ पाया गया वहीं कल्लू पटेल के घर के पास स्थित नलकूप  में जलस्तर 130 फीट के नीचे मिला जिसे चालू किया जाना मुश्किल कार्य था क्योंकि 14 राइज़र पाइप डालने पर पाइप लाइन टूटने का डर था. अमूमन अधिकतम 12 से 13 राइज़र पाइप डाले जाने का प्रावधान रहता है।

अभी भी बंद हैं दर्ज़न भर नलकूप

     लोगों द्वारा बताया गया की बांस ग्राम के सरकारी नलकूप मैकेनिक जेपी गर्ग की अकर्मण्यता के चलते अभी भी बांस ग्राम के दर्ज़न भर नलकूप बन्द पड़े हुए हैं. ग्रामीणों द्वारा जानकारी दी गई की शिसवा ग्राम के पूर्व नलकूप मैकेनिक लोलर मिश्रा द्वारा कार्य कराया जाता था लेकिन जब से लोलर का स्थानांतरण हुआ तब से जेपी गर्ग ने चार्ज लिया है लेकिन जेपी गर्ग कभी भी मौके पर नही आया जिसकी वजह से वर्षों से बन्द नलकूपों में कोई सुधार कार्य नही हुआ. 22 अक्टूबर को दो गाड़ी आये ठेकेदार के मैकेनिक द्वारा जब नलकूपों को खोला गया तो सभी पाइपों में जंग लगी हुई थी और घूर कचड़ा भरा हुआ था इससे साफ पता चल रहा था की इन नलकूपों को वर्षों से नही खोला गया था. 

  पताई एवं पनगड़ी पंचायत के भी बन्द हैं दर्ज़नों नलकूप

    इस दौरान आसपास के ग्राम क्षेत्रों के उपस्थित ग्राम पताई एवं पनगड़ी के निवासियों प्रमोद सिंह एवं विजय पांडेय आदि द्वारा जानकारी दी गई की जिस प्रकार बांस ग्राम के नलकूप बन्द पड़े हैं उसी प्रकार उनके भी ग्राम पंचायतों में दर्ज़नों नलकूप वर्षों से बन्द पड़े हुए हैं जिन्हें देखने वाला कोई नही है. सभी ने अपने अपने ग्राम के नलकूपों का तत्काल सुधार कार्य कराए जाने की माग की है.

  संलग्न - संलग्न तस्वीर में दिनाँक 23 अक्टूबर 2018 को गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बांस ग्राम में पीएचई टीम द्वारा नलकूप सुधार कार्य किया गया. मौके पर लिया गया फोटोग्राफ.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 78699992139

Friday, July 13, 2018

सरई ग्राम के बन्द हैं दर्जनों हैंडपम्प, जनता बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज़ (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम का जहां महीनों से बन्द पड़े हैं दर्जनों नलकूप जिसे देखने वाला कोई नही है)

दिनांक 13 जुलाई 2018, स्थान - लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    आज जब मानसून आ चुका है और प्रदेश में जगह जगह बारिश प्रारम्भ हो चुकी है जिले के कई ग्रामों में गर्मियों के पहले से खराब नलकूप पीएचई विभाग नही सुधार पाया है जबकि देखा जाए तो पिछले 2018 के मई एवं जून महीने में भोपाल तक की टीम संभाग की पेयजल व्यवस्था का मुआयना करने आई थी जिंसमे मुख्य रूप से भोपाल से कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव सम्मिलित थे. अनुराग श्रीवास्तव के साथ में स्वयं जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं अन्य उपयंत्री एवं एसडीओ आदि थे लेकिन इन सबने किस बात का मुआयना किया, उस पर क्या कार्यवाही की इसका पता इसी से चलता है की अभी भी कई ग्रामों में बल्क में नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे न तो पर्याप्त राइजर पाइप डाली गई हैं और न ही अन्य मैकेनिकल सुधार कार्य किया गया है जिसकी वजह के आम और ग्रामीण जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. अभी कुछ ही दिनों में मानसूनी बारिस प्रारम्भ होने से यह सभी मरम्मत कार्य बाधित होंगे जिससे समस्या आगे भी खिंच जाएगी.

सरई ग्राम गंगेव ब्लॉक में बन्द हैं दर्जनों नलकूप

    सरई ग्राम पंचायत निवासी आनंद द्विवेदी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम में दर्ज़नों नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे य तो राइजर पाइप की कमी बतायी जा रही है अथवा मैकेनिकल फाल्ट की वजह के नही चल रहे हैं. इस बाबत ग्रामीणों ने कई बार अपने सरपंच और अन्य विभागीय अधिकारियों के समक्ष समस्या रखी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. 

सरपंच रामलखन यादव ने कहा पैसा लाओ तो पाइप लगाएंगे

    सरई ग्राम पंचायत के सरपंच रामलखन यादव के पास जब ग्रामीण पीड़ित लोग गए और नलकूप सुधरवाने की बात कही तो उसने कहा की हमारे पास कोई मद नही आता है और नलकूप सुधरवाना पीएचई विभाग का कार्य है. हमारे पास पैसा नही है तुम लोग पैसा चंदा से इकठ्ठा करके लाओ तो हम हैंडपम्प सुधारवाएँगे. 

हर पंचायतों में नलकूप रखरभाव का आता है मद

    जबकि देखा जाए तो सभी पंचायतों में पीएचई विभाग, ज़िला पंचायत एवं अन्य पंचपरमेश्वर मद से हर पंचायत में नलकूप रखरखाव का मद आता है जिससे सभी नलकूप व्यवस्थित कराए जा सकते हैं लेकिन सरपंच सचिव मिलकर राशि का बंदरबाट कर लेते हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसती रहती है जिसे न तो पीएचई विभाग सुन रहा है और न ही कोई सांसद विधायक.

इन लोगों के घर के पास खराब हैं नलकूप

   सरई ग्राम पंचायत में जिन जिन लोगों के घर के पास के नलकूप पिछले कई महीनों से खराब पड़े हैं उनके नाम - सत्येंद्र तिवारी, शंभूनाथ तिवारी, श्रवण कोल, लल्लू कोल, बालेंद्र शेखर पांडेय, शखिया कोल, बब्बू साकेत, पप्पू साकेत, रामगरीब कोल, भोगले यादव, लालमणि पांडेय, बृजकिशोर शास्त्री, बांकेलाल साकेत आदि हैं. इन सबने बताया की यदि हमारा नलकूप नही सुधारा जाएगा तो कलेक्टर कार्यालय के समक्ष उपस्थित होकर सामूहिक धरना प्रदर्शन करेंगे.

संलग्न- ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले सरई कला ग्राम पंचायत के जिन हितग्राहियों के नलकूप खराब पड़े हैं उनके सामूहिक फ़ोटो संलग्न है. 

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शिवानन्द द्विवेदी, समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Tuesday, March 20, 2018

क्षेत्र मे बढ़ रहा जल आतंकवाद का खतरा, आम जनमानस बूंद बूंद पानी के लिए तरसा, प्रसासन ने साधी चुप्पी – सरल पर पानी की तलाश मे व्यस्त

दिनांक 19 मार्च 2018,

स्थान – गढ़, गंगेव, रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

       क्षेत्र मे जल संकट गहराता जा रहा है। पूरे क्षेत्र मे हैंडपम्प हवा और आग उगल रहे हैं। दिनांक 19 मार्च 2018 को हिनौती ग्राम पंचायत के हिनौती ग्राम की हरिजन आदिवशियों की बस्ती मे दौरा किया गया तो देखा गया की लोग अत्यधिक परेशान हैं। बस्ती के सभी नलकूप सूख चुके हैं। हरिजन आदिवाशी सहित विभिन्न वर्ग के लोग हांथ मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश मे लगे दिखे। बता दें की हिनौती,सेदहा, पंडुआ, डाढ़, बरहट, मदरी, पनगडी,कांकर सहित आसपास की दर्जनों पंचायतों मे भीषण जेएल संकट उत्पन्न हो चुका है। गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली इन दर्जनों पंचायतों मे लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी एवं पंचायत विभाग ध्यान नहीं दे रहा। जबकि देखा जाये तो अभी भीषण गर्मी की शुरुआत मात्र है मार्च का आधा समय भी नहीं बीता है और पानी के लिए इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है जो शासन प्रसासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

 हिनौती पंचायत मे हितग्राहियों की जुबानी –

1)  “मैं हिनौती ग्राम पंचायत का का उपसरपंच हूँ परंतु उपसरपंच होते हुये भी मैं अपने लोगों की पीड़ा देखता रहता हूँ और इसके लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। सरपंच ने हुमारे हांथ मे कोई शक्ति नहीं दी है, साथ ही यहाँ पर कौन से मद मे कितना पैसा आता है इसकी भी हमे कोई जानकारी नहीं मिलती। यहाँ हिनौती पंचायत मे दो नलजल योजना हमारी जानकारी मे मे कागजों पर काम कर रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है। जैसा की आप देख सकते हैं की उपाध्याय टोला और शुक्ला टोला के पास दोनों नलजल योजना बंद पड़ी हुई हैं। कागजों मे यहाँ पर पाइप लाइन बिछा कर नल द्वारा पानी सप्लाइ बताई गई है लेकिन सब पैसा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग और पंचायत विभाग द्वारा हजम कर लिया गया है हमारे लिए तो पीने का पानी तक नहीं है।” – राम मिलन साकेत उपसरपंच हिनौती पंचायत, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

2)  “हम बूंद बूंद पानी के लिए मारे मारे फिर रहे हैं कोई देखने सुनने वाला नहीं है। हमारे सभी नलकूप सूख चुके हैं अथवा जलस्तर बहुत नीचे चला गया है। हमने कई मर्तबा अपने समस्या सीएम हेल्पलाइन आदि के माध्यम से दर्ज कारवाई है परंतु कोई सुनवाई नहीं की जा रही है मात्र गलत सलत निराकरन देकर फुर्सत कर दिया जाता है।”-जगन्नाथ कोल, निवासी हिनौती, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

3)   “हम अपने बच्चों को घर के अंदर रोते बिलखते छोंडकर पानी की तलाश मे सेदहा पंचायत अंतर्गत आने वाली हिनौती स्कूल के पास एकमात्र स्थित नलकूप से पानी लाते हैं। हमारे छोटे छोटे बच्चे हैं जिन्हे काफी परेशानी होती है। हम पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं। हमारा पूरा हरिजन आदिवशियों का टोला ही पानी की समस्या से जूझ रहा है।” – ज्योति साकेत पति रमेश साकेत निवासी हरिजन बस्ती हिनौती,ब्लॉक गंगेव रीवा मप्र

      संलग्न- ग्राम पंचायत हिनौती जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत हिनौती पंचायत के परेशान रहवासी अपने अपने हाथों मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश करते हुये। साथ ही कई खराब पड़े नलकूप के पास खड़े हुये।

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शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

मोब – 7869992139

Monday, February 19, 2018

(Rewa, MP) ज़िले के पहाड़ी इलाकों में बढ़ गया जलसंकट, पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग बना अनजान (मामला डाढ़ पंचायत त्योंथर ब्लॉक रीवा का, पानी पीने के मानवाधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां)

दिनांक 20 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक रीवा मप्र

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   अभी पिछले दिनों हरिजन बस्ती नेवरिया का मामला प्रकाश में आया था जिसमे कुछ 10 साल तक के  स्कूली बच्चे साईकल में डिब्बे बाल्टी लिए हुए सेदहा स्कूल मोड़ हिनौती-लालगांव सड़क मार्ग के पास 5 किमी दूर से पानी भरकर ला रहे थे। आज सरकारें गरीबों के उत्थान की दुहाई देती नही थक रही और यूनिसेफ से लेकर चाइल्ड चैरिटी फण्ड के लिए अरबों खरबों डॉलर का पैसा देशी विदेशी संस्थाओं से उठा रही हैं लेकिन निश्चित तौर पर बच्चों का इस प्रकार 5 किमी दूर से पानी भरकर साईकल में लाना सरकार के सारे दावों को पूरी तरह से नग्न कर देने वाला वाकया था। 

      अब चूंकि जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि आज किसी भी ग्राम पंचायत में जाएं तो हमे लोग साईकल में डिब्बे लिए हुए पानी ढोते नज़र आ ही जायेंगे। लगभग रोज ही इस प्रकार की खबरें हमे मीडिया में छपी मिल ही जाएंगी।

       दिनांक 20 फरवरी की शुबह ग्राम पंचायत डाढ़ में ग्रामीणों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को मोबाइल में इसी जलसंकट की भीषण समस्या के विषय मे बताया गया जिस पर मौके पर उपस्थित होकर देखा गया कि डाढ़ पंचायत जनपद पंचायत त्योंथर के 50 से ऊपर हैंडपम्प पाइप की कमी और अन्य खराबी के कारण बन्द पड़े हैं। कुछ तो हैंडपम्प जलस्तर नीचे जाने की वजह से बंद हैं। लेकिन ज्यादातर हैंडपम्प कर विषय मे डाढ़ के ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि पंचायत एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सही रखरखाव न होने की वजह से बंद पड़े हैं। जबकि देखा जाए तो इस विषय मे त्योंथर क्षेत्र के कार्यपालन यंत्री पी एस बुन्देला एवं ज़िले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह को कई मर्तबा बताया जा चुका है। इन सबका एक ही घिसा पिटा जबाब रहता है कि दिखवा रहे हैं लेकिन कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

     त्योंथर क्षेत्र की जिम्मेदारी लिए हुए कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का कहना था कि ठेके प्रथा के चलते सीधे ठेकेदार से बात करें पर जब ठेकेदार से बात की जाती है तो ठेकेदार का कहना होता है कि पी एच ई हमे कोई सामग्री उपलब्ध नही करवा रहा है अतः हम कुछ नही कर सकते।

     आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मानवाधिकारों में से एक पानी पीने के अधिकार का क्या होगा? क्या मानवाधिकार और मूलभूत संवैधानिक अधिकार मात्र किताबों की और पढ़ने पढ़ाने की बातें हैं। आखिर यदि सहरी क्षेत्र के लिए घर घर मे पाइप कनेक्शन से पानी सप्लाई किया जाता है और जल संकट उत्पन्न होने पर टैंकर से पानी पहुचाया जाता है तो पिछड़े ग्रामों के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नही की जाती? क्या अधिकारियों, कमर्चारियों और शहरी क्षेत्र के लोगों नागरिकों के लिए विशेष संवैधानिक अधिकार हैं और पिछड़े बना दिये गए ग्रामो  के लिए ये पैमाने बिल्कुल अलग हैं? आखिर ऐसे में कोई ग्रामीण इन नियम कायदों संवैधानिक नियमों पर क्यों विश्वास करेगा? 

    आज सूखे अकाल की इस भीषण स्थिति में पानी को लेकर जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं इससे साफ जाहिर है कि अप्रैल प्रारम्भ होते होते स्थितियां और भी अधिक भयावह हो जाएंगी। ऐसे में तमाम मानवाधिकार की सुरक्षा की दुहाई देने वाली इन सरकारों के लिए बहुत बड़ा प्रश्न है कि कम बोलने वाले और कम विकशित इन ग्रामीणों के मानवाधिकारों की रक्षा सुरक्षा यह कैसे करेंगे? क्या मात्र दिखावा ही चलता रहेगा और मानवाधिकार की रक्षा के नाम पर देशी विदेशी संस्थाओं से माल ऐंठने का काम चलता रहेगा अथवा कहीं कुछ वास्तविक धरातल पर भी होगा।

संलग्न - कई किमी दूर से साईकल पर पानी ढोने पर मजबूर ग्रामवशी। त्योंथर ब्लॉक पहाड़ी क्षेत्र। रीवा मप्र।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139


Sunday, February 18, 2018

(Rewa, MP) 21 वीं सदी में भी 5 किमी दूर से बच्चे साईकल से लाते हैं पानी, हाल ए मानवाधिकार (रीवा मप्र के हाल, देखें तस्वीरें और यूट्यूब वीडियो)

दिनांक 18 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक थाना गढ़, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      ज़िले में जल संकट गहराता जा रहा है लेकिन कई रिमाइंडर के बाबजूद भी शासन प्रशासन नही चेत पा रहा है।

       मानसून की बेरहमी के कारण प्रदेश में काफी कम मात्रा में पानी गिरने की वजह से ज़िले में भी जलस्तर घटता जा रहा है। जहां पहले 6 से 8 पाइप डालकर हैंडपम्प से पानी प्राप्त किया जा सकता था वहीं अब 10 से 12 पाइप में भी बड़ी मुश्किल से पानी मिल रहा है।

     कलवारी-लालगांव सड़क मार्ग में हिनौती के पास पांडेय ढाबा और कैथा मोड़ के पास करहिया ग्राम डाढ़ पंचायत में पिछले माह भर से अधिक समय से खराब हैंडपम्प आज तक नही बन पाया है। बताया गया कि इसमें तीन पाइप लगाई जानी हैं जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास नही है। अब इस विषय मे जब संबंधित कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं पी एस बुंदेला के समक्ष रखी गई तो मात्र आश्वासन ही मिल पाया। अब आश्वासन के बदले पिछले माह भर से हरिजन बस्ती के रहवासी जीवित हैं। अब देखना यह होगा कि 21 वीं सदी में मंगल एवं चंद्रमा पर पानी की तलाश करने वाली सरकारें अपनी धरती में प्यासी मानवता के लिए पानी उपलब्ध करवा पाती है कि नही।

  संलग्न - हरिजन बस्ती के छोटे बच्चे पानी से भरे डिब्बे अपनी अपनी साईकल में ढोते हुए।

https://youtu.be/I19n1CeUlII

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139