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Monday, October 22, 2018

वर्षों से बन्द नलकूप सुधारे, लोगों को मिली राहत, पीएचई टीम की कार्यवाही (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बांस ग्राम का जहां पर महीनों से बिगड़े हुए दर्ज़नों नलकूपों में से कुछ सुधारे गए, लोगों को मिली राहत, कई नलकूपों में जलस्तर गम्भीर स्थिति में, लोगों ने मोटर पंप लगाने की माग की)

दिनांक 23 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(रीवा, शिवानन्द द्विवेदी)

    अल्पवृष्टि की वजह से सम्पूर्ण रीवा संभाग में पीने के पानी को लेकर जद्दोजहद प्रारम्भ हो चुकी है. कभी पानी समस्या फरवरी मार्च से प्रारम्भ हुआ करती थी लेकिन इस वर्ष अभी से जलसंकट मंडराने लगा है. 

    जैसा की विदित है की पूरे ज़िले एवं संभाग में कम बारिस की वजह से किसानों की खड़ी फसलें सूखने की कगार पर है. पहले भी अल्पवृष्टि की वजह से बुवाई में देरी हुई और आधे से अधिक भूमि बुवाई बिना रह गई. जहां किसी प्रकार से बुवाई शुरू भी हुई वहां बाद में पानी की कमी से फसलें सूखने लगी हैं.

रखरखाव के अभाव में नलकूपों की ददुर्दशा

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा नलकूपों का रखरखाव महीनों और वर्षों से सही तरीके से न किये जाने के कारण राइज़र पाइप नही लगे होने से स्थिति भयावह हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ता के हस्तक्षेप के कारण दिनांक 22 अक्टूबर को गंगेव पीएचई टीम ने बांस ग्राम का दौरा किया जहां पर दर्ज़नों नलकूपों के काम न करने और राइज़र पाइप की कमी बतायी गई थी. जिस पर सप्ताह बाद पीएचई के ठेकेदारों द्वारा पुरानी पाइप लेकर बदलने का कार्य किया गया. लगभग 7 पाइप बदली गईं जिनमे से ज्यादातर पुरानी पाइप लगाई गईं.

  इन नलकूपों की बदली गईं सामग्री

    गंगेव पीएचई के ठेकेदार द्वारा जिन जिन नलकूपों में सुधार कार्य कराया गया उनमे से निम्नलिखित हैं - 1) बांस सहकारी समिति एवं शासकीय प्राथमिक स्कूल के पास स्थित नलकूप 2) बांस शासकीय हाई स्कूल के पास स्थित नलकूप 3) मुस्लिम समुदाय के मस्जिद के पास 4) छोटेलाल प्रजापति के घर के पास 5) उमेश सेन के घर के पास. इन सभी नलकूपों में जलस्तर 35 से 40 फीट के अंदर नोट किया गया जो इस क्षेत्र के लोगों के लिए अच्छी बात थी. बताया गया की बांस ग्राम में स्थित स्कूल के पास तालाब की वजह से सभी नलकूपों में जलस्तर ठीक बना रहता है.

      इस प्रकार मात्र पांच नलकूपों का सुधार कार्य कराया गया जबकि दो अन्य नलकूपों में जल का अभाव पाया गया. देवी मंदिर बांस के पास स्थित नलकूप भठा हुआ पाया गया वहीं कल्लू पटेल के घर के पास स्थित नलकूप  में जलस्तर 130 फीट के नीचे मिला जिसे चालू किया जाना मुश्किल कार्य था क्योंकि 14 राइज़र पाइप डालने पर पाइप लाइन टूटने का डर था. अमूमन अधिकतम 12 से 13 राइज़र पाइप डाले जाने का प्रावधान रहता है।

अभी भी बंद हैं दर्ज़न भर नलकूप

     लोगों द्वारा बताया गया की बांस ग्राम के सरकारी नलकूप मैकेनिक जेपी गर्ग की अकर्मण्यता के चलते अभी भी बांस ग्राम के दर्ज़न भर नलकूप बन्द पड़े हुए हैं. ग्रामीणों द्वारा जानकारी दी गई की शिसवा ग्राम के पूर्व नलकूप मैकेनिक लोलर मिश्रा द्वारा कार्य कराया जाता था लेकिन जब से लोलर का स्थानांतरण हुआ तब से जेपी गर्ग ने चार्ज लिया है लेकिन जेपी गर्ग कभी भी मौके पर नही आया जिसकी वजह से वर्षों से बन्द नलकूपों में कोई सुधार कार्य नही हुआ. 22 अक्टूबर को दो गाड़ी आये ठेकेदार के मैकेनिक द्वारा जब नलकूपों को खोला गया तो सभी पाइपों में जंग लगी हुई थी और घूर कचड़ा भरा हुआ था इससे साफ पता चल रहा था की इन नलकूपों को वर्षों से नही खोला गया था. 

  पताई एवं पनगड़ी पंचायत के भी बन्द हैं दर्ज़नों नलकूप

    इस दौरान आसपास के ग्राम क्षेत्रों के उपस्थित ग्राम पताई एवं पनगड़ी के निवासियों प्रमोद सिंह एवं विजय पांडेय आदि द्वारा जानकारी दी गई की जिस प्रकार बांस ग्राम के नलकूप बन्द पड़े हैं उसी प्रकार उनके भी ग्राम पंचायतों में दर्ज़नों नलकूप वर्षों से बन्द पड़े हुए हैं जिन्हें देखने वाला कोई नही है. सभी ने अपने अपने ग्राम के नलकूपों का तत्काल सुधार कार्य कराए जाने की माग की है.

  संलग्न - संलग्न तस्वीर में दिनाँक 23 अक्टूबर 2018 को गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बांस ग्राम में पीएचई टीम द्वारा नलकूप सुधार कार्य किया गया. मौके पर लिया गया फोटोग्राफ.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 78699992139

Friday, July 13, 2018

सरई ग्राम के बन्द हैं दर्जनों हैंडपम्प, जनता बूंद बूंद पानी के लिए मोहताज़ (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम का जहां महीनों से बन्द पड़े हैं दर्जनों नलकूप जिसे देखने वाला कोई नही है)

दिनांक 13 जुलाई 2018, स्थान - लालगांव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

    आज जब मानसून आ चुका है और प्रदेश में जगह जगह बारिश प्रारम्भ हो चुकी है जिले के कई ग्रामों में गर्मियों के पहले से खराब नलकूप पीएचई विभाग नही सुधार पाया है जबकि देखा जाए तो पिछले 2018 के मई एवं जून महीने में भोपाल तक की टीम संभाग की पेयजल व्यवस्था का मुआयना करने आई थी जिंसमे मुख्य रूप से भोपाल से कार्यपालन यंत्री अनुराग श्रीवास्तव सम्मिलित थे. अनुराग श्रीवास्तव के साथ में स्वयं जिले के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं अन्य उपयंत्री एवं एसडीओ आदि थे लेकिन इन सबने किस बात का मुआयना किया, उस पर क्या कार्यवाही की इसका पता इसी से चलता है की अभी भी कई ग्रामों में बल्क में नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे न तो पर्याप्त राइजर पाइप डाली गई हैं और न ही अन्य मैकेनिकल सुधार कार्य किया गया है जिसकी वजह के आम और ग्रामीण जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. अभी कुछ ही दिनों में मानसूनी बारिस प्रारम्भ होने से यह सभी मरम्मत कार्य बाधित होंगे जिससे समस्या आगे भी खिंच जाएगी.

सरई ग्राम गंगेव ब्लॉक में बन्द हैं दर्जनों नलकूप

    सरई ग्राम पंचायत निवासी आनंद द्विवेदी से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया गया की ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत सरई कला पंचायत के सरई ग्राम में दर्ज़नों नलकूप बन्द पड़े हैं जिनमे य तो राइजर पाइप की कमी बतायी जा रही है अथवा मैकेनिकल फाल्ट की वजह के नही चल रहे हैं. इस बाबत ग्रामीणों ने कई बार अपने सरपंच और अन्य विभागीय अधिकारियों के समक्ष समस्या रखी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. 

सरपंच रामलखन यादव ने कहा पैसा लाओ तो पाइप लगाएंगे

    सरई ग्राम पंचायत के सरपंच रामलखन यादव के पास जब ग्रामीण पीड़ित लोग गए और नलकूप सुधरवाने की बात कही तो उसने कहा की हमारे पास कोई मद नही आता है और नलकूप सुधरवाना पीएचई विभाग का कार्य है. हमारे पास पैसा नही है तुम लोग पैसा चंदा से इकठ्ठा करके लाओ तो हम हैंडपम्प सुधारवाएँगे. 

हर पंचायतों में नलकूप रखरभाव का आता है मद

    जबकि देखा जाए तो सभी पंचायतों में पीएचई विभाग, ज़िला पंचायत एवं अन्य पंचपरमेश्वर मद से हर पंचायत में नलकूप रखरखाव का मद आता है जिससे सभी नलकूप व्यवस्थित कराए जा सकते हैं लेकिन सरपंच सचिव मिलकर राशि का बंदरबाट कर लेते हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसती रहती है जिसे न तो पीएचई विभाग सुन रहा है और न ही कोई सांसद विधायक.

इन लोगों के घर के पास खराब हैं नलकूप

   सरई ग्राम पंचायत में जिन जिन लोगों के घर के पास के नलकूप पिछले कई महीनों से खराब पड़े हैं उनके नाम - सत्येंद्र तिवारी, शंभूनाथ तिवारी, श्रवण कोल, लल्लू कोल, बालेंद्र शेखर पांडेय, शखिया कोल, बब्बू साकेत, पप्पू साकेत, रामगरीब कोल, भोगले यादव, लालमणि पांडेय, बृजकिशोर शास्त्री, बांकेलाल साकेत आदि हैं. इन सबने बताया की यदि हमारा नलकूप नही सुधारा जाएगा तो कलेक्टर कार्यालय के समक्ष उपस्थित होकर सामूहिक धरना प्रदर्शन करेंगे.

संलग्न- ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले सरई कला ग्राम पंचायत के जिन हितग्राहियों के नलकूप खराब पड़े हैं उनके सामूहिक फ़ोटो संलग्न है. 

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शिवानन्द द्विवेदी, समाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Tuesday, April 17, 2018

पानी की कहानी प्यासों की जुबानी - त्योंथर की 17 पंचायतों को पानी के लिए दिए 25 लाख रुपये, अब तक काम शून्य (मामला ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अंतर्गत 17 पंचायतों का जिसमे 12 को दिए लगभग 1 लाख और 5 को ज़िला पंचायत से मिले लगभग 2 लाख, फिर भी कोई काम नही, पूरी राशि हजम करने की कर ली तैयारी, ज़िला और जनपद पंचायत बना अनजान)

दिनांक 17 अप्रैल 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

  ज़िले में जल संकट दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और आम जनता का पानी के लिए जद्दोजहद रोज बढ़ती जा रही है पर यहां के ज़िला प्रसाशन की चाल ढाल में कोई परिवर्तन नही दिख रहा है. ज़िले भर में प्रतिदिन हज़ारों शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, मोबाइल फोन और लिखित मौखिक तौर पर आम जनता प्रेषित कर रही है लेकिन जुजबी ही कुछ शिकायतों को निपटाकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है.

  आम जनता की आवाज को सुनने वाला कोई नही मात्र मीडिया ही सहारा बना है जो पानी की भीषण समस्या को रोज़ अखबारों के माध्यम से उठा रहा है.

  त्योंथर पी एच ई कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने डाढ़ जमुई पंचायत का किया दौरा

  दिनांक 16 अप्रैल को दोपहर त्योंथर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कोऑर्डिनेटर अमित मिश्रा ने नजदीकी ग्राम पंचायतों डाढ़ और जमुई का दौरा कर नलजल योजनाओं और नलकूप की स्थिति का जायज़ा लिया. बताया गया की न ही डाढ़ और न ही जमुई में सही तरीके से नलजल योजना संचालित हो रही है. डाढ़ में थोड़ी स्थित कंट्रोल में है पर जमुई पंचायत में लगभग 1 लाख 30 हज़ार के आसपास ज़िला पंचायत के खाते से पंचायत के खाते में पिछले साल भेजे जाने के वावजूद भी अब तक नलजल योजनायों की पानी की टंकी में कोई पानी नही आया है और कोई पाइप लाइन भी अब तक नही बिछ पायी हैं.

     अमित मिश्रा ने आगे करहिया का रुख किया और लोनियान टोला प्रजापति बस्ती के पास पंचायत द्वारा कराए गए नलकूप को देखा जिसमे आज साल भर से कोई हैंडपम्प नही पड़ा है. अमित मिश्रा ने आगे बताया की त्योंथर के विधायक कोटे और पंचायतों के कई नलकूपों के यही हाल हैं. यह सब ठेकेदारों की मिलीभगत का परिणाम है.

   बिन्नू पाठक द्वारा करवाये गए नलकूप उत्खनन में काफी है शिकायतें

    बताया गया की करहिया के प्रजापति बस्ती में पिछले वर्ष हुए नलकूप उत्खनन सहित दर्जनों विधायक निधि वाले नलकूप उत्खनन का काम बरहट निवासी बिन्नू पाठक बोरवेल कंपनी द्वारा करवाया गया है और इनके द्वारा कराए गए ज्यादातर बोरवेल में धंस जाने से लेकर घटिया सामग्री डालना और यहां तक की करहिया प्रजापति लोनियान बस्ती जैसे बोर में हैंडपम्प तक न डालना जैसी शिकायतों का अम्बार है जिससे पी एच ई विभाग स्वयं परेशान है. पी एच ई अधिकारियों द्वारा नाम न बताए जाने की शर्त पर बताया गया की किसी एक सरपंच ने तो यहां तक कहा की जितने पैसे में पी एच ई विभाग एक नलकूप का उत्खनन करवाता है पंचायत उतने में तीन नलकूप उत्खनन करवा सकती है. तब ऐसे में गुणवत्ता से लेकर अधिक राशि तक की प्रति नलकूप उत्खनन जैसे कई गंभीर प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं.

  त्योंथर की 17 पंचायतों को लगभग 22 लाख से अधिक राशि ग्रीष्मकालीन जल संकट से निपटने मात्र के लिए जिला पंचायत से दी गई

    लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों  द्वारा बताया गया की जो जानकारी उन्हें है उसके मुताबिक मात्र ज़िला पंचायत के द्वारा ही नलजल योजनायों के क्रियान्वयन के लिए त्योंथर ब्लॉक की 17 पंचायतों को 25 लाख के आसपास की राशि दी गई है जिसका की भौतिक धरातल पर कोई रता पता नही है. इन 17 पंचायतों में 12 पंचायत ऐसी हैं जिनको प्रति पंचायत कुछ कम अर्थात लगभग 1 लाख के आसपास की राशि दी गई है जबकि 5 पंचायतें ऐसी हैं जिन्हें लगभग 2 लाख की राशि दी गई है. लेकिन आज पिछले वर्ष से पंचायतों के खातों में इस राशि के समायोजन के बाद भी पंचायती भष्ट्रचार के कारण कोई भी काम नही हो पा रहा है. पंचायत के सरपंचों की हिटलरशाही के चलते जनता बूंद बूंद पानी के लिए तड़प नही है. मनरेगा में धांधली तो बहुत आम बात थी अब पानी के नाम पर जनता के खून चूसने का भी दौर चल पड़ा है।

त्योंथर सीईओ महावीर जाटव ने कार्यवाही का दिया मात्र आश्वासन

   दिनाँक 17 अप्रैल की सुबह जनपद त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द विवेदी की बात हुई जिसमे जाटव द्वारा बताया गया की उन्हें इसकी जानकारी नही थी और इसे दिखवा कर कार्यवाही करवाएंगे. डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में लोनियान टोला की प्रजापति बस्ती के विषय में बताए जाने पर की पंचायत द्वारा करवाये गए नलकूप में हैंडपम्प नही पड़ा है, इस पर मात्र कार्यवाही का आश्वाशन मिला. अब देखना यह है की यह पंचायत विभाग वाले आगे क्या गुल खिलाते हैं.

सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल द्वारा जानकारी लेकर कार्यवाही का आश्वासन

   इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता की ज़िला पंचायत सीईओ मयंक अग्रवाल से भी बात हुई जिस पर मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा व्हाट्सएप्प पर ज़िला पंचायत सीईओ को ब्लॉक गंगेव और त्योंथर की बन्द पड़ी नलजल योजनाओं और दुर्दशापूर्ण नलकूपों की स्थिति बताई गई. साथ ही रोज़ अखबारों में प्रकाशित मानवाधिकार का हनन सम्बंधी भीषण जल संकट की स्थिति की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां भी भेजीं गईं.

   ज़िला पंचायत रीवा सीईओ द्वारा बताया गया की वह इसे गंभीरता से लेंगे. पानी की समस्या एक महत्वपूर्ण इशू है और सॉल्व किया जाएगा. वहरहाल अभी तक मात्र हर स्थान के आश्वासन ही मिल पाया है. 

   बता दें की गंगेव जनपद अंर्तगत हिनौती पंचायत, बांस पंचायत और हिरुडीह पंचायत की बुरी तरह से ठप्प पड़ी नलजल योजनाओं का स्वयं भौतिक सत्यापन कर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह मुद्दा मीडिया के माध्यम से उठाया गया था. जिस पर सभी विभागों के होश उड़े हुए हैं.

  जल संकट का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी गया

    बात यहीं तक नही रुकी है, मॉनव के मूलभूत अधिकारों में से एक पीने का स्वच्छ पानी की समस्या ज़िले से लेकर प्रदेश स्तर और यहां तक की राष्ट्रीय स्तर तक पहुचाई जा चुकी है. भोपाल में बैठे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के इंजीनियर इन चीफ, जबलपुर जोन पी एच ई के चीफ इंजीनियर गौड़ से लेकर अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली तक मामला उनके संज्ञान में लाया जा चुका है और कार्यवाही भी प्रारम्भ हो चुकी है.

   भोपाल से पी एच ई के विशेष दल की रीवा संभाग विजिट, मामला जिले में जल संकट की जांच का और उस पर कार्यवाही का

    जैसा की पहले भी बताया गया था की जब ज़िले में जल संकट का मामला भोपाल इंजीनियर इन चीफ के समक्ष रखा गया था तो वहां से कई सदस्यीय टीम का गठन कर जांच करने के उद्देश्य से भेजे जाने की बात आई थी. उसी सिलसिले में कार्यपालन यंत्री रीवा शरद कुमार सिंह द्वारा जानकारी दी गई की श्री श्रीवास्तव की अगुआई में टीम रीवा पहुच चुकी है जो दिनाँक 17 अप्रैल को गंगेव ब्लॉक में दौरा कर जल संकट की वास्तविक स्थिति का जायज़ा लेंगे.

  त्योंथर ब्लॉक में मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला का भी होगा दौरा

     पिछले दिनों मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को बताया गया की त्योंथर ब्लॉक की घाट के ऊपर की पंचायतों का जल्द ही दौरा किया जाकर पानी की स्थिति का जायज़ा लिया जाएगा. मऊगंज कार्यपालन यंत्री को ब्लॉक के जलसंकट के विषय में मौखिक, मोबाइल फ़ोन और व्हाट्सएप्प आदि के जरिये कई बार सूचित किया जा चुका है.

 जांचों और सरकारी दौरों के नाम पर होगी कोरम पूर्ति अथवा होगी कोई सार्थक कार्यवाही?

    अब देखना यह होगा की सरकारी अधिकारियों के इन दौरों और जांचों का आम जन जीवन में व्याप्त भीषण जल संकट का क्या असर पड़ता है? क्या पहले जैसे ही यह भी मात्र कोरम पूर्ति बनकर रह जाएंगी की इनकी आधिकारिक विजिट और दौरों का कुछ असर भी पड़ेगा? क्योंकि हर वर्ष ही गर्मियों में जब पानी को लेकर हाहाकार मचता है तो सभी की नींदें उड़ जाती हैं और हाँथ पैर हिलाना चालू कर देतें हैं. आश्वासन और जांचों का दौर प्रारम्भ हो जाता है, दौरे होते हैं, बजट पास होता है, राशि और सामग्री का कागजों पर खूब आवंटन किया जाता है. कागजों में हर पंचायतों में मोटर पंप की स्वीकृति की जाती है और वह राशि संबंधित विभागों के खातों में भी भेज दी जाती है पर वास्तविक तौर पर देखा जाए तो आने वाले हर वर्ष में स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है. आख़िर इतनी जांचें और इतनी राशि का क्या होता है? क्यों भौतिक धरातल पर कोई कार्यवाही नही होती? क्या आम जनता मात्र कागजों पर और आश्वासन का पानी पीकर अपनी प्यास तृप्त कर सकती है? यह सभी अनुत्तरित प्रश्न इस देश के जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों से पूँछ रहे हैं की क्या इसी प्रकार से जनता और देश की सेवा के लिए इन अधिकारी कर्मचारियों ने नौकरी की थी? क्या यही आशय लेकर सरकारी नौकरी में आये थे? यदि हमारे देश के यह अधिकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति और इस जनता के टैक्स से प्राप्त होने वाले पैसे जिसमे की इन्हें पेमेंट दी जाती है उसके प्रति जिम्मेदार हो जाएं तो फिर किस आसमाजिक तत्व और किस दो कौड़ी के नेता में इतनी दम है की देश के विकास को रोक पाए. आज आवश्यकता है ऐसे सभी अधिकारियों को अपने जमीर में झांकने की और वो दिन याद करने की जब वह स्कूल कॉलेज में थे और देश की  दुर्दशा को देखकर उनके मन में देश सेवा की जो ललक उठती थी उसे याद करने का समय है. 

संलग्न - 1) त्योंथर सीईओ महावीर जाटव से बातचीत के अंश

    2) सीईओ ज़िला पंचायत मयंक अग्रवाल के बातचीत के अंश.

    3) मऊगंज कार्यपालन यंत्री पी एस बुंदेला से बातचीत के अंश,

   4) बदहाल पानी की स्थिति और परेशान लोग.

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  -शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139, 9589152587

Friday, April 13, 2018

15 वर्ष से पानी की टंकियों में भरा है हवा (मामला गंगेव जनपद की कई पंचायतों में 80 फीसदी से अधिक बंद हैं हैंडपम्प, नलजल योजनाएं भष्ट्रचार की भेंट चढ़ी, वहीं बांस पंचायत की 50 हज़ार लीटर क्षमता की बंद पड़ी पानी की टंकी, और हिरुडीह पंचायत में बन्द पड़े नलजल योजना और 90 फीसदी बन्द पड़े हैंडपम्प की)

दिनांक 14 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव जनपद, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा, शिवानन्द द्विवेदी

   आज भारतीय लोकतंत्र 70 वर्ष से अधिक का हो रहा है. हर वर्ष भारतीय लोकतंत्र की वर्षगांठ मनाई जाती है. याद दिलाया जाता है की हमे इतने सदियों की गुलामी के बाद आजाज़ी मिली. इस आजादी को प्राप्त करने में हमारे देश के वीर शहीदों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की बलि वेदी में आहुति दी. 

    यह सब तो ठीक है पर क्या यह भी कभी गंभीरता से विचार किया गया की आज इतने दसकों के बाद भी आखिर मूलभूत मानवाधिकारों की समस्याओं को हल क्यों नही किया गया? क्या मूलभूत अधिकारों की समस्या से स्वतंत्रता प्राप्त हुई है? प्रकाश के लिए बिजली, पीने के लिए स्वच्छ जल, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु, रहने के लिए उचित आवास, जीवित रहने के लिए भोजन यह प्रत्येक लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए देश की आम जनमानस को हर हाल में उपलब्ध करवाना उस देश के संवैधानिक कर्तव्य होते हैं. 

     आज जब 21 वीं सदी का दौर चल रहा है और मानव अपने विकास गाथा का वर्चस्व धरती से लेकर अम्बर तक स्थापित करना चाह रहा है. वर्चस्व की लड़ाई के लिए महायुध्य हो रहे हैं. वैज्ञानिक अविष्कारों ने पुरानी सभी परिभाषाएं और मान्यताओं को बदल दिया हैं. भौतिक विज्ञान नित नए आयाम तलास रहा है. व्यक्ति धरती पर जीवन से थक हारकर अन्यत्र ग्रहों में जीवन पानी हवा की तलाश कर रहा है, ऐसे में यह सोचना पड़ेगा की यदि मॉनव इस धरती रूपी माता के गोद जिसमे पला बढ़ा और खेला खाया उसमे यदि जीवन सुचारू रूप से नही चला पाया तो बड़ी सर्मिन्दगी की बात होगी की दूसरे अजनबी ग्रहों जिनके की जीवन के पैमाने भी नही तय हुए हैं उनमे कैसे शांति और जीवन तलाश पायेगा. यह सब देखकर बड़ा ही अजीब लगता है की मृगतृष्ना के पीछे दौड़ने वाला यह मानव आज अपना ही अंत करने में तुला है. आज दुनिया कई मायनों में विनाश की कगार पर खड़ी है. अगले महायुध्य की ध्वनियां स्पष्ट सुनाई दे रही हैं.

धरती का पानी बर्वाद कर ढूँढ़ने चले मंगल और चंद्रमा पर 

   बड़ी अजीब दास्तान है की आज धरती पर जल प्रबंधन कर पाने में असफल सरकारें अपनी प्यासी मानवता के लिए मानवाधिकारों में से एक स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध करवा पाने में असफल हैं और अन्यत्र ग्रहों चंद्रमा, मंगल, आदि में पानी और जीवन की तलास के लिए अरबों खरबों बर्वाद कर रही हैं. यह किसी एक देश के हाल नही हैं बल्कि आज ज्यादातर विश्व के देशों में फैशन बन चुका है की चाहे उस देश में खाने के लिए दाने न हो लेकिन अपना वर्चस्व बताने के लिए न्यूक्लिअर और एटॉमिक प्रोग्राम में पानी की तरह पैसे और ह्यूमन रिसोर्स बहाने के लिए पर्याप्त समय और पैसा है. चाहे उस देश में भुखमरी चल रही हो, सब मर रहे हों लेकिन देश और विदेश से आयातित हथियार अवस्य होने चाहिए. विश्व के समस्त देशों के पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर को जोड़ दिया जाए तो ये ऐसी ताकतें बन चुकी हैं की चाहें तो यह पूंजीपति एक एक देश को गोद लेकर सालों साल उनकी आम जनमानस को खिला पिला सकते हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नही करेंगे जो भी करेंगे वह मात्र कुछ ऐसा करेंगे कि उस पैसे और संपदा एवं मैन पावर का ऐसा उपयोग करेंगे जिससे ज्यादातर ऐसे पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट पावर का वर्चस्व स्थापित हो. बिल गेट्स, ज़ुकेरबर्ग, टाटा और अजीम प्रेमजी जैसे कम ही लोग होंगे जो अपना पैसा चैरिटी और मॉनव की सेवा में लगाना चाहेंगे.

पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड को मानवाधिकार संरक्षण में आगे आना चाहिए

     यद्यपि यह कहने और सुनने में बड़ा अटपटा सा लग सकता है लेकिन यदि विश्व के पूंजीपति और कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लोग अपना थोड़ा थोड़ा भी योगदान चैरिटी के लिए देने लगे तो काफी हद तक विश्व की मूलभूत समस्याओं से निजात मिल जाएगा. सभी गरीब कमज़ोर और नीडी लोग अपनी मूलभूत अवश्यकताओं की पूर्ति कर पाने में सफल होंगे जिससे वह अपने जीवन को रोज़ की रोटी, कपड़ा, पानी, खाना, स्वास्थ की जद्दोजहद को छोड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाने में लगा पाएंगे और इस जीवन को समझ पाएंगे. आज पूरे विश्व की 75 प्रतिसत से अधिक की आवादी अपने रोज़ की जीवन की जद्दोजहद में ही पड़ी हुई है, उसे अपने मॉनव होने का एहसास भी नही है. इन ज्यादातर लोगों के लिए अपने रोजमर्रा की अवश्यकताओं की पूर्ति ही इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है.

   देश दुनिया की बातों को विराम देते हैं और आते हैं मप्र के रीवा में और देखते हैं की एक जिले के ग्रामों की समस्या कैसे इस पूरे देश और यहां तक की पूरे विश्व के लिए एक प्रोटोटाइप है.

    भारत में भष्ट्रचार का कोई अंत नही है. यहां तक कि लोग आज यह भी कहने लगे हैं की भारत की आबोहवा में भी अब भष्ट्रचार फैल चुका है. जो भी हो पर इसमे कोई दो राय वाली बात नही की मानवीय अवश्यकताओं के साथ ही समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं.

बांस पंचायत में 15 वर्ष से बनी पानी की टंकी में भरा है हवा, हैंडपम्प उगल रहे आग

     अभी पिछले दिनों पर्यावरण एवं मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत कई पंचायतों में भ्रमण किया गया और पानी संबंधी जमीनी हकीकत का व्योरा लिया गया. जो सच्चाई सामने आयी वह भारतीय परिवेश के हिसाब से ज्यादा चौकाने वाली नही थी. 

    ग्राम बांस के रोहित कुमार मिश्रा, शिवम मिश्रा, राजू तिवारी, अरुणेंद्र गौतम, सुमित्री सेन, जोधाबाई सेन, रविराज साकेत, अनुराग मिश्रा, आदि रहवाशियों ने बताया की ग्राम में 50 हज़ार क्षमता की पानी टंकी आज से 15 वर्ष पहले बनाई गई थी जिसमे मात्र 10 दिन के लिए ही पानी भरा गया था और उसके बाद कभी इस टंकी में पानी देखने को नही मिला. रोहित मिश्रा ने बताया की इस विशाल पानी टंकी को हमारे ग्राम में बनवाने के पीछे शासन प्रशासन की क्या मंशा रही होगी उन्हें आज तक समझ नही आया क्योंकि जब से पानी की टंकी बनाई गई है तब से लेकर आज तक न कहीं पाइप लाइन का पता है और न ही किसी रखरखाब करने वाले कर्मचारी का. शिवम मिश्रा और सुमित्री सेन द्वारा बताया गया की इस पानी की टंकी में जब एकबार पानी भरा गया था तब इसमे लीकेज था और पूरा पानी बह गया था. आज जब देखा गया तो लोगों ने पानी के टंकी के नीचे अपने अपने माल मवेशी बांध दिए थे. 

     रोहित और शिवम द्वारा जानकारी दी गई की उनके ग्राम में सैकड़ों नलकूप पंचायत, विधायक, और सांसद आदि निधियों से बनाये गए हैं लेकिन 90 प्रतिशत से अधिक हैंडपम्प आज हवा और आग उगल रहे हैं. हैंडपम्प मैकेनिक से लेकर पंचायत कर्मियों और सरपंच को जानकारी दी गई लेकिन समस्या का समाधान नही किया गया.

   सभी रहवाशियों द्वारा एक स्वर में बताया गया की लोग बहुत परेशान हैं और बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और कोई सुनवाई नही हो रही है.

    शिवम और रोहित ने आगे बताया की उन्होंने यह जानकारी यहां से चुने गए जिला पंचायत सदस्य को भी दी थी लेकिन जिस दिन से चुनाव सम्पन्न हुआ है उस दिन से आज तक वोट और पद प्राप्त करने के बाद कोई भी जन प्रतिनिधि नही दिखा है जब वोट लेना होगा तो फिर मुह उठाये दौड़े चले आएंगे और बोलेंगे की हमे वोट की भीख के दो.

बांस ग्राम में ताला खुला पड़ा हुआ है पंप हाउस, स्टार्टर और इलेक्ट्रिक समान में लग गया जंग

    ग्राम बांस के राजू तिवारी, शिवम मिश्रा और रोहित मिश्रा ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया जिसमे कोई ताला नही लगा हुआ था. एक खुला हुआ ताला वहीं पर लटक रहा था. रहवाशियों ने पंप हाउस के अंदर घुसकर दिखाया तो वहां का नजारा देखते ही बनता था जिसमे मोटर स्टार्टर, केबल, टूटे फूटे इलेक्ट्रिक के सामान आदि बिखरे पड़े थे जो स्पष्ट रूप से पंप हाउस के काम न करने और वहां की अव्यवस्था को दिखा रहे थे.

   बांस पानी की टंकी से संबंधित पंप हाउस के पीछे एक हैंडपम्प भी लगा हुआ मिला जो बनने के बाद कभी चला ही नही. हैंडपम्प चलाकर दिखाया तो उसका हैंडल जम्प कर रहा था.

रीवा पी एच ई कार्यपालन यंत्री शरद सिंह को जानकारी नही

  जब बांस की पानी की टंकी की दुर्दशा के विषय में ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद सिंह से बात की गई तो उनका कहना था की इस पानी की टंकी के विषय में उन्हें कोई जानकारी नही है. कार्यपालन यंत्री द्वारा कहा गया की चूंकि जानकारी दी जा रही है तो अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को भेजकर दिखवाएंगे. 

    50 हज़ार से अधिक क्षमता वाली पानी की टंकी की जानकारी ज़िले के कार्यपालन यंत्री को न होना एक अचंभा ही है. हाँ यह माना जा सकता है कि छोटी नलजल योजना संबंधी पानी की टंकी और सामान्य नलकूप की जानकारी का न होना समझ आता है पर आज जब पिछले कई सप्ताह से ज़िले में निरंतर पानी की भीषण समस्या को अखबार और विभिन्न मीडिया स्रोतों और कंप्लेन के द्वारा बताया जा रहा है ऐसे में इन अधिकारियों को चाहिए की पूरे ज़िले के डेटा को इकठ्ठा कर उसमे युध्यस्तर पर कार्यवाही कराएं.

  हिरुडीह पंचायत में भी भीषण जल संकट, नलजल योजना में पानी के स्थान पर आम जनता को मिल रही है हवा और आग

    गंगेव ब्लॉक की हिरुडीह पंचायत का किस्सा भी बांस पंचायत से कुछ ज्यादा अलग नही. दिनाँक 13 मार्च को शुबह लगभग 9 बजे के आसपास सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा हिरुडीह पंचायत की समस्याओं के सिलसिले में दौरा किया गया तो वहां को स्थिति दिखी वह भी आज पंचायती राज व्यवस्था की दुर्दशा को ही बया करती है. 

   हिरुडीह के दो टोलों का दौरा किया गया और वहां से जानकारी प्राप्त की गई जिसमे हिरुडीह निवासी रामगोपाल पांडेय, रामायण प्रसाद पटेल, राजेश पटेल, भगवानदीन पटेल, रामनिवास दुबे, रामलाल विश्वकर्मा, राजमणि पांडेय, विष्णुकांत शुक्ला आदि द्वारा बताया गया की लगभग तीन सरपंची पहले अर्थात लगभग 10-12 साल पूर्व उनकी पंचायत में नलजल योजना के लिए चार पानी की कम और मध्यम क्षमता वाली पानी की टंकियां बनाई गईं थी और कुछ पाइप लाइन भी बिछाई गई थी लेकिन कभी कोई पानी सप्लाई नही की गई है. सभी चारों पानी की टंकियां मात्र शोपीस बनकर खड़ी हुई हैं और आम जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरस रही है. 

   इन रहवाशियों द्वारा बताया गया की इन्होंने कई बार सरपंच, सचिव, विधायक, सांसद, ज़िला एवं जनपद सदस्यों और अधिकारी कर्मचारियों सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को भी सूचित किया गुहार लगाई लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई, हाँ जब भी बात की जाती है तो अधिकारियों द्वारा बताया जाता है की काम हो जाएगा. पर आज दसक भर बीत रहे हैं लेकिन कुछ हुआ नही है. रहवाशियों द्वारा बताया गया की उनके गांव में सभी हैंडपम्प खराब पड़े हैं, ज्यादातर में पाइप ही नही पर कोई सुनने देखने वाला नही. बताया गया की कुछ हैंडपम्प में जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है.

   बताया गया की गंगेव जनपद अंतर्गत हिरुडीह पंचायत में 6 ग्राम आते हैं जिनमे हिरुडीह, जरहा, कोठार उन्मूलन, मड़फा, कोती, बगहिया सामिल हैं. इन सभी ग्रामों सहित पूरे पंचायती क्षेत्र की कुल आवादी लगभग 8 हज़ार से ऊपर है. और पूरे पंचायती क्षेत्र के 80 प्रतिशत से अधिक नलकूप खराब पड़े हैं. 

हरिजन बस्ती हिरुडीह के लोग पानी के लिए परेशान, दोनो नलकूप खराब और नलजल योजना की टंकी में कभी नही पहुचा पानी, पाइप और र खरखाब का पैसा भी खा गए भष्ट्राचारी

   हिरुडीह ग्राम में आगे चलने पर पुरवा वाली सड़क मार्ग से जुड़ी हिरुडीह की हरिजन बस्ती आती है जहां पर लगभग 50 घर हरिजन निवास करते हैं जिनकी आवादी लगभग 200 के आसपास है. इनके घर के पास दो नलकूप खोदे गए थे जो बिल्कुल कार्य नही कर रहे हैं. दोनो नलकूप पानी नही दे रहे. एक नलकूप अभी पिछले वर्ष 2017 में ही बनाया गया है लेकिन उसका प्लेटफॉर्म भी उखड़ा मिला और जब से बनाया गया है तब से उसमे बूंद में पानी नही निकला. सभी हरिजन महिलाओं और पुरुषों ने सरपंच और पंचायत विभाग पर आरोप लगाया की उनकी समस्या की कोई सुनवाई नही की जा रही है. 

     वहीं पास स्थित बगीचे के पास 50 मीटर दूरी पर एक छोटी किश्म की पानी की टंकी भी दिखी जिसमे कभी पानी नही आया. हरिजनों ने बताया की इस पानी की टंकी में पाइप लाइन भी सप्लाई नही की गई. हरिजनों ने बगीचे के पास स्थित मेढ़ की तरफ इशारा करते हुए बताया की टंकी से 50 मीटर दूर तक कभी पाइप लाइन डाली गई थी लेकिन उनके पानी की टंकी में पाइप नही जोड़ी गई. हरिजनों ने आगे जानकारी दी की बाद में लगाई गई पाइप भी खोदकर बेंच ली गई है.

     हिरुडीह के हरिजनों ने आरोप लगाया की उनकी समस्याओं की कोई सुनवाई नही हो रही है. जब वोट माँगना होता है तो प्रत्यासी उनके घर में आएंगे और खाट के नीचे बैठ जाएंगे और उनका पैर दबाकर कहेंगे की हमे बस आप लोग एक बार मौका दे दो हम आपके जीवन को बदल देंगे. अब हाल यह हैं की हर पंचवर्षीय व्यतीत हो रही है लेकिन ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन करने वाले हरिजन आदिवशियों के जीवन में आज तक कोई विशेष बदलाव देखने को नही मिले है.

     सभी लोगों ने एक स्वर में माग की है कि उनकी मूलभूत समस्याओं का और विशेष तौर पर गर्मी में पानी कि समस्या का समाधान किया जाए. उनकी पानी की टंकी को प्रारम्भ कर उसमे पाइप लाइन डाली जाए और घर घर नलजल योजना के माध्यम से पानी दिया जाए।

हिरुडीह हरिजन बस्ती में बिजली, आवास जैसी मानवाधिकार की भी हैं समस्याएं

    अमृत लाल साकेत एवं उनके आसपास बसे सैकड़ों हरिजन परिवारों ने बताया की उन्हें प्रधानमंत्री आवास का लाभ दिया गया था लेकिन सहायक सचिव और सरपंच द्वारा उन्हें पीएम आवास् की पूरी राशि नही दी गई है और मात्र 1 लाख 15 हज़ार ही दी गई है. उनकी मनरेगा की मजदूरी की राशि और शौचालय की राशि नही दी गई है.

    सभी हरिजनों ने बताया की उनके घरों में बिना बल्ब जलाए ही बिजली के अनियंत्रित बिल भेजे जा रहे हैं. हरिजनों ने बताया की उनके कुछ घरों में तो मीटर लगा है परंतु सभी के घर मीटर भी नही है. बताया गया की बिना मीटर रीडिंग ही बिजली के मनमुताबिक बिल भेजे जा रहे हैं. जिसकी की कई बार शिकायत भी मौखिक एवं सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से की गई है पर औसत और ज्यादा बिलिंग में कोई परिवर्तन नही हुआ है. सभी ने बताया की उनके घरों में उजाला योजना के 9 या 10 वाट के एक या दो तक बल्ब जलते हैं और कोई दूसरे इलेक्ट्रिक सामान नही हैं फिर भी इतना अधिक बिल क्यों भेजा जा रहा है.

   इन समस्याओं पर सभी ने एक स्वर में कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - बांस और हिरुडीह पंचायत की बन्द पड़ी नलजल योजना की टंकियां, खराब पड़े पाइप की कमी के कारण पड़े हैंडपम्प और साथ ही बांस और हिरुडीह पंचायत के रहवासी और लोग जिनकी की समस्याओं का कोई समाधान नही किया जा रहा है. मामला गंगेव जनपद की पंचायतों का. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587,

Tuesday, March 27, 2018

भोपाल से पी एच ई की टीम जल्द ही करेगी रीवा संभाग का दौरा, लेगी पेयजल स्थिति का जायज़ा, इंजीनियर इन चीफ़ के कार्यालय भोपाल से जारी हुये आदेश Dysfunctional Handpumps and water problems in Rewa MP


दिनांक 27 मार्च 2018, स्थान – रीवा मप्र

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      गर्मी बढ्ने के साथ ही जिले मे जल संकट बढ़ गया है। कई स्थानो पर तो जलस्तर अभी भी ठीक है पर राइजर पाइप के अभाव और रखरखाव की समस्या के चलते नलकूपों से पानी नहीं निकल रहा है। इस संदर्भ मे जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा संबन्धित त्योंथर,गंगेव, हनुमना, जवा, रायपुर करचुलियान आदि के उपयंत्री, अनुविभागीय अधिकारी लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी और कार्यपालन अभियंता शरद कुमार, और पी एस बुंदेला सहित मुख्य अभियंता भोपाल के निज सचिव, मुख्य अभियंता जबलपुर श्री गौड़, और पी एच ई विभाग के अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव आदि से बात की गई तो हर एक व्यक्ति का अपना अलग वक्तव्य सामने आया। हर किसी ने समस्या के समाधान पर तो कम परंतु जनता के ऊपर कुछ ज्यादा ही दोष मढ़ा। अधिकारियों ने अपने विभाग और सरकार की कमी को बिलकुल स्वीकार नहीं किया परंतु जनता ही उनकी नज़र मे सबसे ज्यादा दोषी दिखी। सभी अधिकारियों की बातचीत के अंश भी यहाँ पर औडियो फ़ाइल मे संलग्न हैं कृपया देखें।

  देखिये जब इन संबन्धित अधिकारियों से बात की गई तो इनका क्या जबाब था –

1)    “अभी हमारे पास हनुमना, जवा,त्योंथर, आदि ब्लॉक का प्रभार है। मैं हर स्थान पर नहीं पहुच सकता, सरकार को इस बात को सोचना चाहिए, आप त्योंथर के सहायक यंत्री एमके यादव से बात कर लें। वैसे हम आपको बता दें की हमारी माग के वावजूद भी हमे पर्याप्त पाइप नहीं दी गई है। मात्र हमारे पास त्योंथर के 95 के आसपास पंचायतों के लिए अभी 100 पाइप हैं। अब बताइये हर पंचायत मे औसतन 40 से 50 नलकूपों के लिए कैसे इतनी पाइप मे काम चल पाएगा।” – आनंद तिवारी, प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी, हनुमना, त्योंथर, जवा,पी, एच, ई विभाग रीवा मप्र। मोब –9589135484,  

2)   “हमने सरकार से 1500 पाइप की डिमांड की थी लेकिन हमे मात्र 100 पाइप एक बार मे दी गई हैं। गाँव वाले चाहते हैं की उनके नलकूप मे हम 10-12 पाइप डालें तो कैसे संभव है। सरकार हमे पर्याप्त माग की हुई पाइप नहीं दे रही है। आप सरकार के उच्चस्तर मे शिकायत करें जिससे हमारे लिए पाइप मिले तो हम काम करें। हमने नलकूप मैकेनिक को बताया है की आपके द्वारा बताई गई डाढ़,जमुई, बरहट, आदि पंचायतों को दिखवाता हूँ। पर आप भोपाल और जबलपुर मे उच्चस्तर मे बात करें। नलजल योजना के विषय मे जो बात आपने बताई है तो उसमे हमारे विभाग से जो किया जाना था किया जा चुका है अब आगे का काम पंचायत का है की वह उसकी व्यवस्था कराये। नलजल के लिए जमुई पंचायत त्योंथर ब्लॉक के लिए सवा लाख रुपए से अधिक उनके खाते मे भेजा जा चुका है। अब यदि पंचायतें काम नहीं करवा रही हैं तो हम क्या कर सकते हैं।”– एम के यादव, सहायक यंत्री त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र। मोब –7000310187,

3)   “आप हमे सारी जानकारी के साथ ईमेल कर दें और उसे हम संबंधितों को प्रेषित कर देंगे। इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल से आज बात नहीं हो पाएगी मैं उनका पीए बोल रहा हूँ, आप सब बाते ईमेल कर दें हम कार्यवाही करवा देंगे। वैसे आप के सूचना पर हमने रीवा और सतना के लिए एक टीम गठित कर दिया है जिसमे आपके रीवा के ही अधिकारी अनुराग श्रीवास्तव भी हैं और जल्द ही पानी संबंधी समस्या का सर्वेक्षण कर अपनी जानकारी वह टीम हमे देगी। मैं आपको उनका मोबाइल नंबर बता देता हूँ आप उनसे संपर्क कर लें जब वह आपके क्षेत्र मे आयें। वैसे हमारे यहाँ से पाइप संबंधी कोई कमी नहीं है पर्याप्त मात्रा मे पाइप भेजी जा रही हैं। यह जिले स्तर के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है। फिर भी हम दिखवाएंगे। ” – निज सचिव,इंजीनियर इन चीफ़ भोपाल, मप्र शासन लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग। लैंड्लाइन नंबर इंजीनियर इन चीफ़ – 07552779411,   

4)   “देखिये नलकूप संधारण और रख रखाव के लिए हमे सरकार से एक निश्चित सीमा मे ही बजट मिल पाता है,और उसी मे हमे काम करना पड़ता है। जनता की सोच बिलकुल गलत है की हमारे पास पाइप का भंडार है और हम जितना चाहें उतना पाइप उपलब्ध करवा सकते हैं। ऐसा नहीं है, हमारे पास प्रति वर्ष के हिसाब से प्रत्येक नलकूप के रखरखाव के लिए 16 सौ रुपये दिये जाते हैं जिसमे 60 प्रतिशत सामाग्री का खर्च होता है जिसमे पाइप, नट, बोल्ट, वासर आदि रहता है और उसमे 40 प्रतिशत लेबर चार्ज होता है। अब इसी मे हमे सब कुछ देखना पड़ता है तो ऐसे मे तो देखा जाय तो वर्ष मे एक नलकूप के लिए मात्र एक ही पाइप आ सकती है। हम चाहे कितना भी यहाँ से डिमांड देंगे लेकिन सरकार बजट मे पर्याप्त नहीं देती जिससे यह सब समस्याएँ बनी रहती हैं। चाहे भले ही इस वर्ष विशेष अकाल सूखे की स्थिति है परंतु सरकार नहीं सुनती उनका बजट पहले से तय रहता है, सरकार का कोई विशेष आवंटन नहीं होता है। फिर भी हमारे द्वारा आपके पूरे रीवा संभाग के लिए पर्याप्त पाइप भेजी जा चुकी है और डिमांड पर भेजी जा रही है मै आपको पूरा हिसाब बता सकता हूँ। कहीं कोई पाइप की कमी नहीं है।” – मिस्टर गौड़, चीफ़ इंजीनियर जबलपुर क्षेत्र (जिसके परिक्षेत्र मे रीवा संभाग आता है) । मोब – 9907065750 

5)   “रीवा सतना के हमारे दौरे के विषय मे आप बता रहे हैं परंतु अभी मुझे कोई लिखित जानकारी नहीं मिली है। पर यदि ऐसा है तो जब भी मुझे लिखित आदेश मिलेगा तो मैं आता हूँ और आपको सूचित करूंगा। देखिये हम भी रीवा के ही हैं और 20 वर्ष से अधिक हमने रीवा संभाग मे रहकर नौकरी किया है हम वहाँ की भौगोलिक स्थिति के विषय मे वाकिफ हैं। परंतु लोगों को एट्टीट्यूड प्रॉब्लेम्स है जिसके कारण समस्या होती हैं। लोग यह चाहते हैं की सभी पाइप उनही के नलकूप मे डाल दी जाएँ पर ऐसा नहीं होता है। हमे सभी को देखना पड़ता है। परंतु जब हम आएंगे तो जो भी वास्तविक स्थिति होगी उससे शासन को अवगत कराएंगे। वैसे हम मई-जून मे एक बार दौरा करते हैं।” –अनुराग श्रीवास्तव, अधिकारी पी एच ई, भोपाल, जिनहे रीवा और सतना के लिए दौरा के लिए कई सदस्यों के साथ भेजा जा रहा है। मोब- 9827239912

संलग्न – कृपया उक्त सभी अधिकारियों कर्मचारियों से सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा की गई बातचीत के अंश यहाँ पर संलग्न औडियो फ़ाइल मे हैं, देखने का कष्ट करें। साथ ही पिछले कई दिनों से जल की समस्या को लेकर मीडिया मे खबर का भी अंश यहाँ प्रस्तुत है जिसे इंजीनियर इन चीफ़ को भी उनके ईमेल एड्रैस मे भेजा जा चुका है।

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 शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र। मोब – 7869992139,

Sunday, March 25, 2018

गंगेव पीएचई उपयंत्री अखिलेश ऊईके नहीं उठाता फोन, जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसी, सभी हैंडपम्प पाइप और रखरखाव के अभाव मात्र मे खराब, बताया जाता है की जलस्तर नीचे चला गया जबकि जलस्तर एकदम दुरुस्त, 90 फीसदी नलकूप मात्र 10 पाइप डालने से काम करना चालू कर देंगे

दिनांक 26 मार्च 2018, गढ़/गंगेव मप्र

      (कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

       ज़िले मे जल संकट बढ़ता जा रहा परंतु इस जल संकट के पीछे काफी हद तक प्रसाशनिक उदाशीनता और पीएचई विभाग का भष्ट्राचार जिम्मेदार है। ज़्यादातर नलकूपों का रखरखाब सही तरीके से न हो पाने के कारण यह नलकूप खराब बता दिये जाते हैं। यद्यपि अभी भी कई ग्रामों मे जलस्तर ठीक है फिर भी इसका सहारा लेकर लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के कर्मचारी अधिकारी जलस्तर नीचे बताकर पल्ला झाड लेते हैं। ज़िले भर मे सही सही सर्वे किया जाय तो पाया जाएगा की औसतन नलकूपों मे 5 से 6 तक ही पाइप लगाई हुई हैं, जबकि गलत जानकारी देकर बताया जाता है सभी नलकूपों मे 10 से अधिक पाइप डाली हुई हैं। बहुत कम नलकूप ऐसे हैं जिनमे 10 अथवा इससे अधिक पाइप लगाई हुई हैं। परंतु गलत जानकारी देकर सरकार को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है और नई पाइप को ज़िला से लेकर जनपद तक बैठे अधिकारियों और दलालों ठेकेदारों की सह से बेंच लिया जाता है। जब कभी पुरानी टूटी पाइप को निकालकर नवीन पाइप डाली जाती है पुरानी पाइप का कोई हिसाब नहीं रहता। पुरानी पाइप को भी विभाग के कर्मचारी काला बाजारी कर लेते हैं।

मात्र रखरखाव के अभाव मे गंगेव त्योंथर मे बंद हैं 80 फीसदी नलकूप

      उदाहरण के लिए गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा, अगडाल, सेदहा, बांस, मदरी,पनगड़ी, लौरी, गढ़, पंडुआ, रक्सा-माजन एवं त्योंथर अंतर्गत आने वाली डाढ़, जमुई, बरहट,कलवारी, कटरा सोहागी आदि पंचायतों मे देखा जाए तो 80 फीसदी से अधिक नलकूप मात्र सही रख रखाव के अभाव मे बंद हैं जबकि सरकार द्वारा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग  को हर वर्ष करोड़ों रुपया मात्र जिला भर के सभी नलकूप के रख रखाव के लिए दिये जाते हैं।

अखिलेश ऊईके नहीं उठाते फोन, जनता परेशान, सीएम हेल्पलाइन भी कारगर नहीं

   जब कभी भी गंगेव उपयंत्री अखिलेश ऊईके को कॉल कर खराब नलकूपों की जानकारी दी जाती है तो उनके द्वारा काल नहीं उठाया जाता। फिर जब इसी बात को लेकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायत की जाती है तो लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी के कर्मचारियों का हांथ पैर जोड़ने का सिलसिला चालू हो जाता है। कहा जाता है की सीएम हेल्पलाइन मे शिकायतें क्यों की गईं आप हमे बता देते तो हम समस्या का समाधान करवा देते, मुख्यमंत्री तक बात पाहुच जाती है तो हमारी नौकरी मे परेशानी होगी,जबकि उल्टा जब बार बार बताए जाने पर भी इनके द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो फोन कॉल नहीं उठाए जाते तब जाकर जनता मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज़ करवाती है।

चुनाव आते ही फिर मुह उठाए दौड़े आएंगे जनता के पास

– हमे वोट की भीख दे दो -

      गंगेव लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के उपयंत्री का रवैय्या जनता के विपरीत है। गर्मी की स्थिति को देखते हुये वास्तव मे चाहिए यह की जितने भी लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के जनपदों मे पदस्थ कर्मचारी अधिकारी और नलकूप मैकेनिक हैं इन्हे अपने क्षेत्र मे जाकर हर एक नलकूप का रेकॉर्ड उठाकर सही सही डाटा सरकार को प्रेषित करना चाहिए और वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए। परंतु जिस प्रकार स्थिति बनी हुई है इससे यह नहीं समझ आता की जिम्मेदार विभाग है की सरकार? आखिर सरकार मे भी बैठे जन सेवकों को भी तो पेपर पत्रिकाओं के माध्यम से रोज यह खबर लगती ही होगी की हर एक गाँव मे क्या वास्तविक स्थिति है। पर वोट लेने के बाद कहाँ किसे सुध है। जब एक बार फिर चुनाव आ जाएगा तो हांथ मे भीख का कटोरा लिए फिर जनता के पैरों तले पड़ जाएंगे पैर चाटने के लिए और इस देश की जनता तो पहले ही भगवान भरोशे है। सब कुछ भूलकर सब दुख क्लेश भूलकर फिर अपने वोट का दुरुपयोग कर लेगी। फिर किसी भष्ट्राचारी को बैठा देगी गद्दी पर और पूरे पाँच वर्ष तक लुटती रहेगी चिल्लाती रहेगी।

  संलग्न – क्षेत्र के बंद पड़े नलकूप और परेशान लोग, जिनकी आवाज़ न तो भगवान सुन रहा है और न ही सरकार।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र।7869992139


Tuesday, March 20, 2018

क्षेत्र मे बढ़ रहा जल आतंकवाद का खतरा, आम जनमानस बूंद बूंद पानी के लिए तरसा, प्रसासन ने साधी चुप्पी – सरल पर पानी की तलाश मे व्यस्त

दिनांक 19 मार्च 2018,

स्थान – गढ़, गंगेव, रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

       क्षेत्र मे जल संकट गहराता जा रहा है। पूरे क्षेत्र मे हैंडपम्प हवा और आग उगल रहे हैं। दिनांक 19 मार्च 2018 को हिनौती ग्राम पंचायत के हिनौती ग्राम की हरिजन आदिवशियों की बस्ती मे दौरा किया गया तो देखा गया की लोग अत्यधिक परेशान हैं। बस्ती के सभी नलकूप सूख चुके हैं। हरिजन आदिवाशी सहित विभिन्न वर्ग के लोग हांथ मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश मे लगे दिखे। बता दें की हिनौती,सेदहा, पंडुआ, डाढ़, बरहट, मदरी, पनगडी,कांकर सहित आसपास की दर्जनों पंचायतों मे भीषण जेएल संकट उत्पन्न हो चुका है। गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली इन दर्जनों पंचायतों मे लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी एवं पंचायत विभाग ध्यान नहीं दे रहा। जबकि देखा जाये तो अभी भीषण गर्मी की शुरुआत मात्र है मार्च का आधा समय भी नहीं बीता है और पानी के लिए इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है जो शासन प्रसासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।

 हिनौती पंचायत मे हितग्राहियों की जुबानी –

1)  “मैं हिनौती ग्राम पंचायत का का उपसरपंच हूँ परंतु उपसरपंच होते हुये भी मैं अपने लोगों की पीड़ा देखता रहता हूँ और इसके लिए कुछ नहीं कर पा रहा हूँ। सरपंच ने हुमारे हांथ मे कोई शक्ति नहीं दी है, साथ ही यहाँ पर कौन से मद मे कितना पैसा आता है इसकी भी हमे कोई जानकारी नहीं मिलती। यहाँ हिनौती पंचायत मे दो नलजल योजना हमारी जानकारी मे मे कागजों पर काम कर रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है। जैसा की आप देख सकते हैं की उपाध्याय टोला और शुक्ला टोला के पास दोनों नलजल योजना बंद पड़ी हुई हैं। कागजों मे यहाँ पर पाइप लाइन बिछा कर नल द्वारा पानी सप्लाइ बताई गई है लेकिन सब पैसा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग और पंचायत विभाग द्वारा हजम कर लिया गया है हमारे लिए तो पीने का पानी तक नहीं है।” – राम मिलन साकेत उपसरपंच हिनौती पंचायत, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

2)  “हम बूंद बूंद पानी के लिए मारे मारे फिर रहे हैं कोई देखने सुनने वाला नहीं है। हमारे सभी नलकूप सूख चुके हैं अथवा जलस्तर बहुत नीचे चला गया है। हमने कई मर्तबा अपने समस्या सीएम हेल्पलाइन आदि के माध्यम से दर्ज कारवाई है परंतु कोई सुनवाई नहीं की जा रही है मात्र गलत सलत निराकरन देकर फुर्सत कर दिया जाता है।”-जगन्नाथ कोल, निवासी हिनौती, गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र

3)   “हम अपने बच्चों को घर के अंदर रोते बिलखते छोंडकर पानी की तलाश मे सेदहा पंचायत अंतर्गत आने वाली हिनौती स्कूल के पास एकमात्र स्थित नलकूप से पानी लाते हैं। हमारे छोटे छोटे बच्चे हैं जिन्हे काफी परेशानी होती है। हम पानी की समस्या से बहुत परेशान हैं। हमारा पूरा हरिजन आदिवशियों का टोला ही पानी की समस्या से जूझ रहा है।” – ज्योति साकेत पति रमेश साकेत निवासी हरिजन बस्ती हिनौती,ब्लॉक गंगेव रीवा मप्र

      संलग्न- ग्राम पंचायत हिनौती जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत हिनौती पंचायत के परेशान रहवासी अपने अपने हाथों मे डिब्बे बाल्टी लिए हुये पानी की तलाश करते हुये। साथ ही कई खराब पड़े नलकूप के पास खड़े हुये।

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शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

मोब – 7869992139

Monday, February 26, 2018

होली के बाद प्रारम्भ होगा बन्द पड़े हिनौती नलजल योजना का कार्य, 46 हज़ार आये पंचायत के खाते में, 1000 फ़ीट बिछेगी पाइपलाइन (गंगेव ब्लॉक हिनौती पंचायत का मामला ज़िले भर की मीडिया में छपी थी खबर), जनता को मिला अस्वासन

दिनाँक 26 फरवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र)

       अभी अभी दिनांक 25 फरवरी को ज़िले की मीडिया एवं साथ ही सोशल मीडिया के माध्यम से हिनौती नलजल योजना की निष्क्रियता सम्बन्धी समाचार प्रकाशित हुई थी जिस पर ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित पंचायत विभाग की नीद उड़ गई है। जिस पर संज्ञान लेते हुए ज़िले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री शरद कुमार सिंह एवं एस डी ओ श्रीवास्तव द्वारा फ़ोन के माध्यम से सूचित किया गया कि जल्द ही हिनौती पंचायत की नलजल योजना का बन्द पड़ा कार्य प्रारम्भ हो जाएगा। बन्द पड़ी नलजल योजना के लिए पहले ही पंचायत के खाते में 40 हज़ार से अधिक की राशि डाली जा चुकी है साथ ही 1000 फ़ीट पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया जाएगा।

    निश्चित तौर पर यह हिनौती पंचायत के रहवाशियों के लिए एक अत्यंत खुसी की बात हो सकती है कि यदि समय पर कार्य चालू हो गया तो इस वर्ष भीषण गर्मी में पानी की समस्या से काफी हद तक निजात मिल पाएगी। बता दें कि हिनौती सहित घाट के ऊपरी क्षेत्र की दर्जनों पंचायतों में इस वर्ष एक बार फिर कम बारिश की वजह से भीषण जल संकट उत्पन्न हो चुका है ऐसे में नलजल योजना के माध्यम से जन जन तक पानी पहुचाने का विकल्प ही बचता है जिसमे प्रत्येक गांव में एक बोरवेल मात्र में मोटर पंप डालकर पाइप लाइन के माध्यम से घर घर पानी पहुचाया जा सकता है। ऐसे में घर घर नलकूप उत्खनन की खर्चीली परंपरा से निजात भी मिलेगी और साथ ही उसी खर्च से बेहतर पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

            अब देखना यह होगा कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की नींद हमेशा के लिए ही खुली रहेगी और बढ़ रहे जल संकट की स्थिति में बिना शिकायतों के ही जिम्मेदारी समझ कर निराकरण करते रहेंगे अथवा इन्हें बार बार पिंच करके जगाते रहना पड़ेगा और इनकी अकर्मण्यता और अनियमितता को मीडिया के माध्यम से निरंतर बताते रहना पड़ेगा। 

    वहरहाल जो अनुभव बताता है उससे तो यही पता चलता है कि बिना हल्ला गुल्ला किये कुछ होने वाला नही है। जब चिल्लाने से ही सरकार और इनके कर्मचारियों को सुनाई नही देता तो भला शांत बैठने से तो ये सुनने वाले नहीं।

  संलग्न - स्थिति का मुआयना करने पहुचा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी दस्ता।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139