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Tuesday, October 2, 2018

मानवाधिकार आयोग की शिकायत पर पीएचई अमला पहुचा जांच करने (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले ग्राम भमरिया, नेवरिया, बड़ोखर एवं कैथा का जिनमे नलकूप न होने अथवा खराब होने की स्थिति में उत्पन्न हुआ भीषण जलसंकट, जब मामला मानवाधिकार आयोग पहुचा तो जांच करने पहुचे एसडीओ, उपयंत्री टीम)

दिनांक 03 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  कृत्रिम जलसंकट उत्पन्न होना मानवाधिकार हनन की समस्या है. क्या पीएचई विभाग और पंचायत विभाग की जिम्मेदारी नही है की ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब तबके के लिए पानी की उपलब्धता बनाएं? क्या आज जितने भी नलकूप उत्खनन के कार्य विधायक एवं सांसद निधि आदि से हो रहे हैं उनमे से कोई भी सही और उपयुक्त स्थान पर कराए जा रहे हैं? आज किसी भी ग्राम में जाया जाय तो पाया जाएगा की रसूखदारों, नेताओं के चमचों के घर आंगन में बोरवेल हैं और उनमे उनके निजी मोटर पंप तो पड़े हुए हैं लेकिन जिन गरीबों को वास्तव में इन नलकूपों की आवश्यकता है उनके लिए आज 21 वीं सदी में भी पिछली 18 वीं सदी जैसी ही समस्या बनी हुई है. इन गरीबों की समस्या को देखने सुनने वाला कोई भी नही है. कागजों पर तो दुनियाभर की योजनाएं संचालित हो रही हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर कहीं कोई रता पता नही है.

मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुचा जलसंकट का मामला

   बता दें की जब निचले एवं जिलास्तर से जलसंकट की भीषण स्थिति का कोई सार्थक समाधान निकलता नही दिखा तब सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा मामले को तत्काल अध्यक्ष मप्र राज्य मानवाधिकार आयोग भोपाल के समक्ष रख दिया गया जिंसमे कॉपी सीएम, सीएस,  अन्य पीएचई विभाग एवं ज़िला रीवा कलेक्टर एवं कमिश्नर को भी भेजी गई. इसी बात पर तत्काल संज्ञान भी हुआ और पिछले दिनों 1 अक्टूबर 2018 को पीएचई विभाग द्वारा जानकारी चाही गई की कहां कहां नलकूप नही हैं और कहां इनकी आवश्यकता है. इस पर समस्त जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधितों को उपलब्ध कराई गई.

गांधी जयंती 2 अक्टूबर को पीएचई विभाग का बना मुहूर्त, हुआ सर्वे

   इस प्रकार समस्त जानकारी उपलब्ध कराए जाने के बाद पीएचई विभाग के गंगेव उपयंत्री अखिलेश उइके, हुज़ूर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी पीएचई एसके श्रीवास्तव, सिरमौर पीएचई डिवीज़न के अनुविभागीय अधिकारी श्री काम्बले, कैथा क्षेत्र के नलकूप मिस्त्री अश्वनी पटेल सहित अन्य जांच सर्वे टीम क्रमशः गंगेव  ब्लॉक अन्तर्गत आने वाले हिनौती, कैथा, एवं सेदहा पंचायत के नेवरिया, भमरिया, नेवरिया, कैथा, एवं बड़ोखर ग्राम में हरिजन आदिवाशियों की बस्ती में उपस्थित हुए और सर्वे किया. जो जानकारी पेपर पत्रिकाओं के मॉध्यम से उपलब्ध कराई गई थी और आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई थी वह सब मौके पर सत्य पायी गई.

    कैथा पंचायत अन्तर्गत आने वाली शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने एकमात्र नलकूप का पानी भी पीने योग्य नही था जिसके सैंपल लेकर लेबोरेटरी जांच के लिए भेजा गया है. इसी प्रकार प्राचीन देवी मंदिर कैथा के पास आवाद लगभग 50 की आवादी के लोगों के लिए भी पानी की समस्या थी जिसका की सर्वे करके तत्काल निराकरण किये जाने के आश्वासन अधिकारियों द्वारा उपस्थित जनसामान्य को दिए गए.

यहाँ यहाँ हुआ सर्वे, अब लगेंगे नए नलकूप

   गंगेव ब्लॉक के जिन ग्राम पंचायतों एवं ग्रामों में पीएचई विभाग के उच्चधिकारियों द्वारा सर्वे कार्य किया गया और नए नलकूप उत्खनन के प्रपोजल सरकार को भेजे गए उनमे से सेदहा पंचायत के नेवरिया ग्राम में लगभग 50 की आवादी वाले हरिजनों के लिए एक नलकूप, सेदहा/हिनौती पंचायत बॉर्डर से लगे लगभग 100 की आवादी वाले हरिजन आदिवाशियों की भमरिया बस्ती के लिए एक नलकूप, हिनौती पंचायत के बड़ोखर ग्राम की हरिजन बस्ती की लगभग 250 से अधिक की आवादी वाली बस्ती के लिए, जहाँ के नलकूप खराब थे उनके लिए एक नया नलकूप, कैथा पंचायत में शासकीय प्राथमिक पाठशाला के सामने पुराने नलकूप के कार्य न करने के कारण एक अन्य नलकूप, एवं कैथा पंचायत में ही प्राचीन देवी मंदिर प्राँगण के पास निवासरत लगभग 50 की आवादी वाले शुक्ला-पटेल-हरिजन परिवार एवं साथ ही धार्मिक आस्था के केंद्र देवी मंदिर में जल चढ़ाने के लिए भी एक नलकूप के उत्खनन का सर्वे किया गया एवं उपस्थित हुज़ूर एवं सिरमौर एसडीओ, गंगेव उपयंत्री द्वारा बताया गया की प्रस्ताव बनाकर कार्ययोजना में सम्मिलित कराया जाएगा जिससे जल्द से जल्द पानी सम्बन्धी मानवाधिकार की समस्या का समाधान हो सके और आम जनता जल संकट से निजात पा सके.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें, सर्वे एवं जांच के दौरान उपस्थित एसडीओ, उपयंत्री, नलकूप मैकेनिक आदि की टीम एवं जानकारी प्रदान करते आमजनमानस और पीड़ित लोग.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139 

Monday, May 28, 2018

ट्रांसफार्मर जलने से अतरैला ग्राम में महीने से फैला घुप अंधेरा, नलकूप सूखे, ट्यूबवेल बन्द, आमजन में त्राहि त्राहि (मामला ज़िले के लालगांव डीसी अंतर्गत आने वाले अतरैला ग्राम का जहां बताया जा रहा है 17 लाख का बिल बकाया)

दिनांक 28 मई 2018, स्थान - भठवा/गढ़/गगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले में जगह जगह ट्रांसफार्मर जलने से गर्मियों में त्राहि त्राहि मची हुई है. एक तो ज्यादातर नलकूप सूखे पड़े हैं ऊपर से यदि ट्यूबवेल से पानी पीने की कोई भी संभावना शेष बची थी वह ट्रांसफार्मर जलने से समाप्त हो गई. अब लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं. ऐसा लगता है मानो 17 वीं सताब्दी में जीवन जिया जा रहा हो जब 5 किमी में भी बमुश्किल एक कुआं होती थी.

   लालगांव डीसी अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर महीने भर से जला

     ज़िले के लालगांव विद्युत वितरण केंद्र  अंतर्गत अतरैला ग्राम का ट्रांसफार्मर पिछले एक माह से ऊपर से जला पड़ा है लेकिन  शिकायतों के बावजूद भी बदला नही गया है. जब भी कंभी जेई लालगांव अथवा एई जवा से चर्चा की जाती है तो बताया जाता है की बिजली का बिल बकाया है अतः ट्रांसफार्मर बदला नही जाएगा.

  17 लाख बिजली बिल कैसे है बकाया?

    ट्रांसफार्मर बदले जाने की जब गुहार आमजन और उपभोक्तागण द्वारा विभाग में लगायी गई तो बताया गया की 17 लाख से अधिक का बिजली बिल अतरैला ग्राम का बकाया है अतः जब तक कम से कम 20 प्रतिशत नही भरा जाएगा तब तक ट्रांसफार्मर नही बदला जाएगा.

   सबसे बड़ी बात यह है की आखिर अतरैला ग्राम का बिजली बिल इतनी अधिक अमाउंट में बकाया था तो बिजली विभाग अब तक क्या सो रहा था? यदि किसी गरीब के हज़ार रुपये बकाया होता है तो उसको नोटिस पर नोटिस भेजी जाती हैं तो यह कैसे हुआ की एक ग्राम का अकेले 17 लाख से ऊपर बकाया हो गया? क्या अतरैला ग्राम में फैक्ट्री चलती है की इतनी बिजली खपत हो रही है? प्राप्त जानकारी में लगभग 180 रजिस्टर्ड बिजली उपभोक्ता बताए गए हैं जिनमे 35 के आसपास नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्ता है. बांकी के 100 से ऊपर हरिजन आदिवाशी समूह के उपभोक्ता है. जो लिस्ट एरिया इंजीनियर जवा द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को उपलब्ध करायी गई है उसमे हरिजन आदिवाशी और अन्य उपभोक्ताओं के सबसे अधिक बकाया है और इनकी प्रतिव्यक्ति ज्यादा राशि भी बकाया है. ऐसे में सवाल यह उठता है हरिजन आदिवशियों के बिजली बिल तो सरकारें वैसे भी समय समय पर माफ करती रही है तो 30 हज़ार या 25 हज़ार प्रतिव्यक्ति हरिजन के बिल कैसे शेष हैं. इसका मतलब तो यह हुआ की 300 रुपये के आसपास प्रतिमाह औसत लगाया जाय तो  3600 रुपये सालाना बनता है तब इसका मतलब यह हुआ की 7 से 8 साल से किसी भी हरिजन आदिवाशी ने कोई बिल नही भरा और बिल माफ भी हुए थे। तब इसमे मोटर कनेक्शन धारक और अन्य ग्रामीणों का क्या दोष है जो नियमित बिल भुगतान कर रहे हैं? क्या 180 में से उन 35 नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को बिजली कंपनी द्वारा अलग से बिजली सप्लाई नही दी जानी चाहिए? मानाकि 17 लाख बकाया वाले दोषी हो सकते हैं परंतु इसमे नियमित बिल देने वाले उपभोक्ताओं को इस भीषण गर्मी में क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है? बिजली कंपनी ऐसा अन्याय क्यो कर रही है? यह तो सीधे सीधे व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें की किस प्रकार इस भीषण गर्मी में नियमित बिजली बिल देने वाले उपभोक्तागण अतरैला ग्राम (डीसी लाल गांव, डी ई त्योंथर) के समक्ष खड़े होकर प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यक्रता,

रीवा मप्र, 7869992139, 9589152587.

Sunday, March 25, 2018

गंगेव पीएचई उपयंत्री अखिलेश ऊईके नहीं उठाता फोन, जनता बूंद बूंद पानी के लिए तरसी, सभी हैंडपम्प पाइप और रखरखाव के अभाव मात्र मे खराब, बताया जाता है की जलस्तर नीचे चला गया जबकि जलस्तर एकदम दुरुस्त, 90 फीसदी नलकूप मात्र 10 पाइप डालने से काम करना चालू कर देंगे

दिनांक 26 मार्च 2018, गढ़/गंगेव मप्र

      (कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

       ज़िले मे जल संकट बढ़ता जा रहा परंतु इस जल संकट के पीछे काफी हद तक प्रसाशनिक उदाशीनता और पीएचई विभाग का भष्ट्राचार जिम्मेदार है। ज़्यादातर नलकूपों का रखरखाब सही तरीके से न हो पाने के कारण यह नलकूप खराब बता दिये जाते हैं। यद्यपि अभी भी कई ग्रामों मे जलस्तर ठीक है फिर भी इसका सहारा लेकर लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के कर्मचारी अधिकारी जलस्तर नीचे बताकर पल्ला झाड लेते हैं। ज़िले भर मे सही सही सर्वे किया जाय तो पाया जाएगा की औसतन नलकूपों मे 5 से 6 तक ही पाइप लगाई हुई हैं, जबकि गलत जानकारी देकर बताया जाता है सभी नलकूपों मे 10 से अधिक पाइप डाली हुई हैं। बहुत कम नलकूप ऐसे हैं जिनमे 10 अथवा इससे अधिक पाइप लगाई हुई हैं। परंतु गलत जानकारी देकर सरकार को पूरी तरह से भ्रमित किया जाता है और नई पाइप को ज़िला से लेकर जनपद तक बैठे अधिकारियों और दलालों ठेकेदारों की सह से बेंच लिया जाता है। जब कभी पुरानी टूटी पाइप को निकालकर नवीन पाइप डाली जाती है पुरानी पाइप का कोई हिसाब नहीं रहता। पुरानी पाइप को भी विभाग के कर्मचारी काला बाजारी कर लेते हैं।

मात्र रखरखाव के अभाव मे गंगेव त्योंथर मे बंद हैं 80 फीसदी नलकूप

      उदाहरण के लिए गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली कैथा, अगडाल, सेदहा, बांस, मदरी,पनगड़ी, लौरी, गढ़, पंडुआ, रक्सा-माजन एवं त्योंथर अंतर्गत आने वाली डाढ़, जमुई, बरहट,कलवारी, कटरा सोहागी आदि पंचायतों मे देखा जाए तो 80 फीसदी से अधिक नलकूप मात्र सही रख रखाव के अभाव मे बंद हैं जबकि सरकार द्वारा लोक स्वस्थ्य यान्त्रिकी विभाग  को हर वर्ष करोड़ों रुपया मात्र जिला भर के सभी नलकूप के रख रखाव के लिए दिये जाते हैं।

अखिलेश ऊईके नहीं उठाते फोन, जनता परेशान, सीएम हेल्पलाइन भी कारगर नहीं

   जब कभी भी गंगेव उपयंत्री अखिलेश ऊईके को कॉल कर खराब नलकूपों की जानकारी दी जाती है तो उनके द्वारा काल नहीं उठाया जाता। फिर जब इसी बात को लेकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायत की जाती है तो लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी के कर्मचारियों का हांथ पैर जोड़ने का सिलसिला चालू हो जाता है। कहा जाता है की सीएम हेल्पलाइन मे शिकायतें क्यों की गईं आप हमे बता देते तो हम समस्या का समाधान करवा देते, मुख्यमंत्री तक बात पाहुच जाती है तो हमारी नौकरी मे परेशानी होगी,जबकि उल्टा जब बार बार बताए जाने पर भी इनके द्वारा समस्या का समाधान नहीं किया जाता तो फोन कॉल नहीं उठाए जाते तब जाकर जनता मजबूर होकर सीएम हेल्पलाइन और अन्य माध्यमों से शिकायतें दर्ज़ करवाती है।

चुनाव आते ही फिर मुह उठाए दौड़े आएंगे जनता के पास

– हमे वोट की भीख दे दो -

      गंगेव लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के उपयंत्री का रवैय्या जनता के विपरीत है। गर्मी की स्थिति को देखते हुये वास्तव मे चाहिए यह की जितने भी लोक स्वास्थ्य यान्त्रिकी विभाग के जनपदों मे पदस्थ कर्मचारी अधिकारी और नलकूप मैकेनिक हैं इन्हे अपने क्षेत्र मे जाकर हर एक नलकूप का रेकॉर्ड उठाकर सही सही डाटा सरकार को प्रेषित करना चाहिए और वस्तुस्थिति से अवगत कराना चाहिए। परंतु जिस प्रकार स्थिति बनी हुई है इससे यह नहीं समझ आता की जिम्मेदार विभाग है की सरकार? आखिर सरकार मे भी बैठे जन सेवकों को भी तो पेपर पत्रिकाओं के माध्यम से रोज यह खबर लगती ही होगी की हर एक गाँव मे क्या वास्तविक स्थिति है। पर वोट लेने के बाद कहाँ किसे सुध है। जब एक बार फिर चुनाव आ जाएगा तो हांथ मे भीख का कटोरा लिए फिर जनता के पैरों तले पड़ जाएंगे पैर चाटने के लिए और इस देश की जनता तो पहले ही भगवान भरोशे है। सब कुछ भूलकर सब दुख क्लेश भूलकर फिर अपने वोट का दुरुपयोग कर लेगी। फिर किसी भष्ट्राचारी को बैठा देगी गद्दी पर और पूरे पाँच वर्ष तक लुटती रहेगी चिल्लाती रहेगी।

  संलग्न – क्षेत्र के बंद पड़े नलकूप और परेशान लोग, जिनकी आवाज़ न तो भगवान सुन रहा है और न ही सरकार।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र।7869992139


Sunday, February 18, 2018

(Rewa, MP) 21 वीं सदी में भी 5 किमी दूर से बच्चे साईकल से लाते हैं पानी, हाल ए मानवाधिकार (रीवा मप्र के हाल, देखें तस्वीरें और यूट्यूब वीडियो)

दिनांक 18 फरवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक थाना गढ़, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      ज़िले में जल संकट गहराता जा रहा है लेकिन कई रिमाइंडर के बाबजूद भी शासन प्रशासन नही चेत पा रहा है।

       मानसून की बेरहमी के कारण प्रदेश में काफी कम मात्रा में पानी गिरने की वजह से ज़िले में भी जलस्तर घटता जा रहा है। जहां पहले 6 से 8 पाइप डालकर हैंडपम्प से पानी प्राप्त किया जा सकता था वहीं अब 10 से 12 पाइप में भी बड़ी मुश्किल से पानी मिल रहा है।

     कलवारी-लालगांव सड़क मार्ग में हिनौती के पास पांडेय ढाबा और कैथा मोड़ के पास करहिया ग्राम डाढ़ पंचायत में पिछले माह भर से अधिक समय से खराब हैंडपम्प आज तक नही बन पाया है। बताया गया कि इसमें तीन पाइप लगाई जानी हैं जो लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पास नही है। अब इस विषय मे जब संबंधित कार्यपालन यंत्री शरद कुमार एवं पी एस बुंदेला के समक्ष रखी गई तो मात्र आश्वासन ही मिल पाया। अब आश्वासन के बदले पिछले माह भर से हरिजन बस्ती के रहवासी जीवित हैं। अब देखना यह होगा कि 21 वीं सदी में मंगल एवं चंद्रमा पर पानी की तलाश करने वाली सरकारें अपनी धरती में प्यासी मानवता के लिए पानी उपलब्ध करवा पाती है कि नही।

  संलग्न - हरिजन बस्ती के छोटे बच्चे पानी से भरे डिब्बे अपनी अपनी साईकल में ढोते हुए।

https://youtu.be/I19n1CeUlII

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139