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Friday, August 23, 2019

धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों की ठोकर से घायल हुई गाय, स्थिति गंभीर (मामला जिले के थाना गढ़ अन्तर्गत भठवा मार्केट के पास का, पशु संजीवनी 1962 को किया गया सूचित, डॉक्टर और सर्जनों की टीम ने किया इलाज)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान गढ़/गंगेव/भठवा, रीवा मप्र
  घोषणा वीरों की घोषणाओं के बाद भी धरातल स्तर पर गौशाला निर्माण कार्य जीरो
 स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद से धड़ल्ले से दौड़ रहे ओव्हर लोड वाहन
  शिवानन्द द्विवेदी एवं स्वतंत्र शुक्ला (रीवा मप्र)

      प्रदेश सरकार के द्वारा गौशाला निर्माण कार्य की घोषणा करने के बाद भी अब तक धरातल स्तर में कार्य किसी प्रकार से आरंभ होने का नाम नहीं ले रहा है। आपको बता दें कि आज दिनांक 23 अगस्त 2019 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की गोमाता भठवा मार्केट के बस स्टैंड में अज्ञात वाहन से दुर्घटना ग्रस्त होकर अपनी अंतिम सांस गिन रही है। घटना की जानकारी शहर वाशियों द्वारा गौरक्षक शिवानंद द्विवेदी को दी गई जिससे हाल ही में घटना स्थल पर पहुंच कर प्राथमिक उपचार कराया गया, साथ ही पशु संजीवनी एम्बुलेंस 1962 को सूचना प्रेषित की गई, लेकिन अब तक 3 घन्टे बाद भी संजीवनी उपस्थित नहीं हो पाई। अंत मे शाम 4 बजे पशु संजीवनी को लेकर गंगेव वेटेरिनरी एक्सटेंशन अधिकारी उपस्थित हुए जिनके साथ आये सर्जनों ने गाय का इलाज किया।
   सुबह लगभग 11 बजे यद्यपि कम्पाउण्डर और ड्रेसर संतलाल साहू एवं रामानुज कोल के द्वारा प्राथमिक उपचार तो किया गया है लेकिन सर्जन के आने के बाद ही प्लास्टर हो पाया, वहीं घटना स्थल पर  उपस्थित लोगों का कहना था कि, गाय के पेट में लगभग 5 माह के गर्भ में बच्चा था जो ठोकर लगने से सम्भवतः मर चुका था लेकिन जिस प्रकार गाय जीवित बची हुई थी इससे डॉक्टरों का कहना था कि गाय के पेट मे बच्चा तब तक मरा नही था।
क्या कहना है इनका
गौरव शुक्ला निवासी भठवा - "गौरक्षक श्री शिवानंद द्विवेदी जी के द्वारा हमें गाय एक्सीडेंट होने की  सूचना मिली तो हमनें संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर अवगत कराया, साथ ही प्राथमिक उपचार करा के ट्रेक्टर ट्राली  के माध्यम से गाय को परिजनों के घर पहुंचा दिया "
 गिरीश पटेल निवासी बांस-  "जब से यह रोड हाइवे बनी है तब से ओव्हर लोड बहनों की निकशी के चलते लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।"
ओम शुक्ला निवासी भठवा - "पशुओं की तो गिनती नहीं की एक दिन में कितने दुर्घटना के शिकार होते हैं आए दिन लोगों के साथ भी यही होता है। स्थानीय पुलिस प्रशासन की सह से ओव्हर लोड बहनों की धड़ल्ले से निकासी होती है। इसका विरोध भी किया गया लेकिन कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है।"
 शिवानंद द्विवेदी, गौरक्षक सामाजिक कार्यकर्ता - "यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी बड़े बड़े ट्रक घरों में घुस चुके हैं। पता नहीं कितने व्यक्ति व मवेशी दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। इसलिए साशन प्रशासन संदर्भित विषय को संज्ञान में ले ओव्हर लोडेड व भारी वाहनों के निकासी में प्रतिबंध लगाएं। साथ ही क्षेत्र में बनाएं जाने वाली गौशाला के निर्माण कार्य में भी तीव्रता आए जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।"
   गोशालाएं न बनने से बेसहारा मवेशियों की हालत खराब
     मप्र में वर्तमान सरकार द्वारा 1000 गोशालाओं को बनाये जाने हेतु प्रस्ताव लाया गया है जिनमे से काफी गोशालाओं को बनाये जाने हेतु जगह भी चिन्हित कर ली गयी हैं। जिला रीवा में ही अकेले 33 गोशालाएं खोली जानी हैं जिनमे से 30 गोशालाओं के निर्माण  हेतु टीएस भी जारी किए जा चुके हैं लेकिन ग्राउंड वर्क न होने से स्थिति दयनीय बनी हुई है।
  हिनौती और बांस ग्राम पंचायत में मात्र खोदे गए गड्ढे
    बता दें कि गंगेव ब्लॉक के हिनौती एवं बांस ग्राम पंचायत में गोशाला निर्माण के नाम पर अब तक मात्र गड्ढे ही खोदे गए हैं। कुछ गड्ढे खोदे जाने के बबाद बाहर के मजदूरों द्वारा कार्य अधूरा छोंड़कर भाग जाने के कारण मनरेगा का कार्य पूर्णतया बन्द हो चुका है। ज्ञात हो कि मनरेगा के कार्य बाहरी मजदूरों नही बल्कि पंचायत और आसपास के मजदूरों के द्वारा करवाये जाते हैं। जबकि उक्त पंचायतों में गोशाला निर्माण के प्रारम्भ से ही धांधली प्रारम्भ होगयी है जिसकी निगरानी शासन प्रशासन को करना अत्यंत आवश्यक है।
  वाहनों की स्पीड पर लगे रोक, ऐरा प्रथा पर भी लगे लगाम
    आज सबसे ज्यादा मवेशी वैष्णो6 और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।सतना से बेला, क्योटी से कलवारी, मनगवां से चाकघाट एवं मनगवां से हनुमना अथवा शहरी रोड कोई भी सड़कें हो, इनमे बेतरतीब और रेलमपेल दौड़ने वाले ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों की वजह से रोज सैकड़ों ऐरा मवेशी इसका शिकार हो रहे हैं। सामान्य तौर पर फसल नुकसानी बचाने के लिए होने वाली पशु क्रूरता तो है ही लेकिन उससे कहीं भयावह स्थिति सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले मवेशियों की है। इस कारण जब तक ऐरा प्रथा में रोक नही लगती और ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों पर नियत्रण और कार्यवाही नही होती तब तक कुछ भी कह पाना मुश्किल है। भठवा मार्केट के पास की घटना उसका एक पहलू मात्र है।
संलग्न - कृपया दुर्घटना से बुरी तरह घायल गाय की स्थिति एवं तत्पश्चात सर्जनों एवं डॉक्टर द्वारा किया गया इलाज की फ़ोटो।
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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587





Thursday, August 22, 2019

1000 गोशालाओं के इंतज़ार में मप्र के बेसहारा गोवंश (मामला प्रदेश के बेसहारा गोवंशों का जिनका खरीफ सीजन आने से एकबार फिर जीवन संकट में दिख रहा है, रीवा में बननी हैं 33 गोशालाएं, 30 के टीएस जारी प्रत्येक की 27 लाख 62 हज़ार है लागत, पर धरातल पर नही बनी एक भी गोशाला)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र
   (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)
    प्रदेश में बनाई जाने वाली 1000 गोशालाओं की कहीं भी भौतिक धरातल में कोई रता पता नही है जिससे एकबार फिर प्रदेश के लाखों बेसहारा मवेशियों का जीवन संकट में दिख रहा है।

    वर्ष 2012 से एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी एवं अन्य गोवंश प्रेमियों के सामाजिक प्रयाशों एवं मुद्दे को सतत मीडिया और समाज के समक्ष उठाये जाते रहने से बेसहारा गोवंशों के अधिकारों को लेकर एवं असामाजिक तत्वों द्वारा गोवंशों की प्रताड़ना किये जाने, अवैध बाड़ों में बिना समुचित व्यवस्था के कैद किये जाने, इनकी ट्रैफिकिंग, चल-पशु तस्करी किये जाने, चचाई क्योटी बहुती भलघटी अष्टभुजी भैंसहटी आदि जलप्रपातों में धकेले जाने, बकिया वराज नहर सहित अन्य नहरों में धकेले जाने आदि मामले केंद्रीय मंत्रालय श्रीमती मेनका गांधी पीएफए अध्यक्षा सहित मप्र एवं भारत शासन प्रशासन के समक्ष निरंतर उठाये गए हैं जिसका नतीजा ही है सत्ताधारी और विपक्षी दलों, समाज के हर वर्ग, प्रदेश एवं देश के मीडिआ के एक बहुत बड़े हिस्से में यह बात सतत बनी रही।
   किसानों और पशुओं दोनो की समस्या को आखिर समझा गया और जो कार्य तथाकथित हिंदूवादी पार्टी बीजेपी नही कर पाई उसे विपक्ष में बैठी कॉंग्रेस पार्टी ने कर डाला। आख़िरकार अपने आपको सत्ता में लाने के उद्देश्य से ही सही लेकिन प्रदेश में 1000 गोशालाओं को खोले जाने हेतु घोषणा किया। घोषणा तो किया लेकिन आज वर्ष भर का समय व्यतीत होने वाला है पर इनका प्रशासनिक अमला गोशालाओं के निर्माण में हीलाहवाली कर रहा है।
   जिले में बनाई जानी थी 33 गोशालाएं
   मध्य प्रदेश में तो अभी तक 900 गोशालाएं बनाये जाने हेतु जगह चिन्हित हुआ है लेकिन रीवा में ही अकेले 33 गोशालाएं खोले जाने हेतु टीएस हुआ है। रीवा की उन सभी 33 ग्राम पंचायतों को भी चिन्हित कर लिया गया है जिनमे से 30 गोशालाएं सामान्य प्रकृति की रहेंगी जबकि शेष तीन गोशालाएं वृहद किश्म की रहेंगी।

    जिन तीन ग्राम पंचायतों में वृहद गोशालाएं बनाई जानी थीं उनमे रीवा ब्लॉक की टीकर में 26 एकड़, गंगेव ब्लॉक की पनगड़ी कला पंचायत में 59 एकड़, एवं जवा ब्लॉक की कोनी कला पंचायत में 39 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है।
  टीएस जारी, प्रत्येक गोशाला 27 लाख 62 हज़ार में बनेगी
   प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले की वर्तमान समय मे बनाई जा रही 30 गोशालाओं के लिए टीएस जारी हो चुका है जिंसमे इन सभी 30 गोशालाओं की लागत राशि 27 लाख 62 हज़ार रुपये बतायी गयी है।
     टीएस जारी होने के साथ ही उन चिन्हित 30 ग्राम पंचायतों में जगह का ले आउट भी कर लिया गया है जिसमे आर ई एस के सहायक यंत्री, ब्लॉक के सीईओ और राजस्व एवं वेटेरिनरी अमले के साथ स्थानों को चिन्हित कर नींव डालने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
  कई पंचायतों में मात्र खोदे गए गड्ढे
   हिनौती पंचायत के गदही ग्राम में बनाई जा रही लगभग 20 एकड़ भूभाग में गोशाला की स्थिति यह है यहां मात्र गड्ढे खोदे जाने तक ही कार्य सीमित होकर रह गया है। गैर पंचायती मजदूरों द्वारा कार्य कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यहाँ स्थिति यह है कि नौ दिन चले अढ़ाई कोश।

    यही स्थिति पास ही स्थित बांस पंचायत की भी है। यहाँ गोशाला बनाये जाने के पहले ही गोशाला कार्य रोक दिया गया है। यह समाज कल तक पशुओं को आवारा छोड़ दिया करता था फिर उनका रोना रोता था। अब जब सरकार इनके लिए गोशालाओं की व्यवस्था कर रही है तो यह समाज ही इसमे रोड़ा बन रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि गोशाला तालाब में बनाई जा रही थी जिसका कुछ ग्रामीणों द्वारा विरोध किया गया लेकिन राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि ग्रामीणों द्वारा शासकीय भूमि पर बेजा कब्जा किया गया था जो अतिक्रमण हटाकर अब गोशाला बनाई जा रही है तो कुछ ग्रामीन उसका विरोध कर रहे हैं जबकि गोशालाओं के निर्माण में बाधा उत्पन्न करना सर्वथा गलत है।
  यदि गोशालाएं नही बनी तो होगी फजीहत
   सवाल यह है कि सिर्फ घोषणाएं भर कर देने से कुछ नही होने वाला। घोषणाएं करके उनमे कार्य परिणीति तक अमल करना ज्यादा आवश्यक है। आज जिस प्रकार पंचायती और मनरेगा के क्रियाकलाप चल रहे हैं उसके तौर पर देखा जाय तो यदि पंचायतों पर नकेल नही कसी गयी तो आवंटित 27 लाख 62 हज़ार रुपये हवा में उड़ जाएंगे और सीईओ सरपंच सचिव सब हजम कर लेंगे और किसी को भनक तक नही लगेगी। इसलिए कार्य और उसकी गुणवत्ता पर निगरानी अत्यंत आवश्यक है। यह कार्य जितना आवश्यक प्रशासनिक दृष्टि से है उससे कहीं अधिक सामाजिक दृष्टि से भी है।

    अब अगला सवाल यह है कि घोषणाओं के बाद आखिर यह गोशालाएं बनकर कब पूरी होंगी? क्या इस खरीफ वर्ष 2019 के लिए यह गोशालाएं बनकर पूरी हो जाएंगी? अथवा फिर वही हालात निर्मित होंगे जब इन्हें लाठी डंडे, टांगे कुल्हाड़ी से ही स्वागत होने वाला है क्योंकि इस क्रूर समाज से जहाँकी गोवंश समाज से पूरी तरह से वहिष्कृत हो चुके हैं कोई मानवता की अपेक्षा करना बेमतलब है।
संलग्न - कृपया संलग्न देखें जिले में बनने वाली 30 वर्तमान गोशालाओं का जारी हुआ टीएस। साथ मे गोशालाओं और आसरे का इंतज़ार करते हुए आवारा गोवंश।
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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587



Sunday, November 11, 2018

रीवा मप्र - कशियारी स्कूल के पीछे थाना अतरैला में अवैध बाड़े में दर्ज़नों गायों की खौफनाक मौत (मामला ज़िला रीवा अन्तर्गत जवा ब्लॉक एवं अतरैला थाना का जहां पर कशियारी शासकीय प्राथमिक पाठशाला हरिजन बस्ती में मर रही बेजुबान गायें, सरपंच पति अखिलेश तिवारी एवं पंचायत द्वारा बनाया गया अवैध बाड़ा, न चारा न पानी और न ही किसी छाया की व्यवस्था, प्रशासन बना अनजान)


दिनाँक 12 नवंबर 2018, स्थान - अतरैला थाना, ब्लॉक जवा, रीवा मप्र

(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र) 

    ज़िले में ठंड बढ़ते ही एक बार फिर पशु प्रताड़ना बढ़ने लगी है. आवारा पशुओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर ज़िले में बनाये जाने वाले अवैध बाड़ों में बिना किसी समुचित व्यवस्था के चलते एक बार फिर गोवंश मौत के घाट उतारे जा रहे हैं. जाहिर है इनमे दोषी वही हैं जिन्होंने मवेशियों को आवारा छोड़ा और वह जिन्होंने यह अवैध बाड़ा बनाये जाने में सहयोग दिया है. 

   जवा ब्लॉक अतरैला थाने का है मामला 

   यह मामला अतरैला थाना अन्तर्गत कशियारी ग्राम पंचायत का है जहां पर शासकीय प्राथमिक पाठशाला हरिजन बस्ती कशियारी के पीछे स्कूल की दीवाल से सटाकर यह अवैध बाड़ा बनाया गया है. ग्रामीणों और अन्य गोवंश प्रेमियों द्वारा बताया गया की इस बाड़े के निर्माण में ग्राम पंचायत कशियारी के सरपंच पति, सचिव, एवं उनके सहयोगियों का हाँथ है. बताया गया की स्कूल परिसर में मीटिंग बुलाकर सरपंच पति अखिलेश तिवारी द्वारा यह अवैध बाड़ा बनवाया गया था जिंसमे न तो चारा, न पानी और न ही किसी प्रकार के पशुसेड की व्यवस्था थी. आसपास के चश्मदीखों द्वारा बताया गया की कई दिनों तक पशु बाड़े में कैद रहते थे जिन्हें न तो चारा पानी मिलता था और न ही बीमार होने पर इलाज इसलिए भूंख प्यास से तड़प कर मर जाते थे.

11 नवंबर को मिलीं 5 मृत गायें

   जब यह जानकारी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमो से सामने आई तो सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं पीएफए इंदौर यूनिट के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रयास किये गए जिंसमे दिनांक 11 नवंबर को सीधे जवा ब्लॉक अन्तर्गत थाना अतरैला में ग्राम पंचायत कशियारी पहुचा गया और फिर जो खौफनाक वाकया देखा गया वह किसी भी कमजोर दिल को दहला देने वाला था.

   11 नवंबर को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं डाढ़ निवासी गोवंश प्रेमी पुष्पराज तिवारी ने पूरे वाकये का वीडियो बनाया और साथ में फ़ोटो प्रूफ भी इकट्ठा किये. उसी दौरान गांव के कुछ लोग भी इकठ्ठा हुए जिन्होंने अवैध बाड़े का समर्थन किया और बताया की फसल नुकसानी बचाने के लिए बाड़ा सभी के सहयोग से बनाया गया है. नाम पूंछने पर कोई व्यक्तिगत नाम नही बताया और कहा की 100 से 150 लोगों की सहमति से बाड़ा बनाया गया है.

मतलब गायों को बाड़े में बन्द कर मारने में पूरा गांव ही सहमत

   जिस प्रकार से कुछ व्यक्तियों द्वारा जानकारी दी गई उससे यही पता चला की आज गोवंश अथवा गाय की समाज में उपयोगिता पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है. आज भारतीय समाज का वह हिस्सा जो अपनी माँ को माँ कहने को तैयार नही और अपने बूढ़े मां बाप की रखवाली एवं देखभाल नही कर सकता वह भला पशुओं की क्या कद्र करेगा. मसीनों ट्रेक्टर आदि के ईजाद के पहले वह तो मानव का स्वार्थ था जिसके कारण वह गाय बैल पालता था जिससे हल में चलने, दूध घी खाने एवं गोबर का खाद कंडे आदि के रूप में इस्तेमाल करने में मदद मिले वरना गाय की क्या कद्र इस भारतीय समाज में. जबकि यदि देखा जाए तो जहां पर पशु प्रताड़ना बढ़ी है यह कोई मुस्लिम अथवा इशाई बाहुल्य क्षेत्र नही जबकि हिन्दू और वह भी उच्चवर्गीय हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र है. तो कहना यही पड़ेगा की गाय बड़ी न मैया सबसे बड़ा रुपैया.

 सरपंच पति अखिलेश तिवारी को दी गई जानकारी

   इस बीच समय निकालकर कशियारी ग्राम के सरपंच पति अखिलेश तिवारी को भी सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा अवगत कराया गया और जानकारी चाही गई की यह कार्य किसने किया. इस पर सरपंच ने कुछ जिम्मेदारी ली और पहले पहल बांकी ग्रामवासियों पर थोप दी. बता दें की कशियारी ग्राम पंचायत की सरपंच विमला तिवारी हैं. सरपंच का पति अखिलेश तिवारी पंचायत का पूरा काम धाम देखता है. बताया गया की अखिलेश तिवारी किसी कुष्ठ रोग विभाग में शासकीय कर्मचारी भी है लेकिन काम धाम छोड़कर मात्र नेतागिरी में ही लगा रहता है. अवैध बाड़ा इसी के द्वारा पंचायत के अन्य सदस्यों पर दबाब देकर बनवाया गया है. अखिलेश तिवारी द्वारा स्वयं भी बताया गया की उसके पास 200 एकड़ से अधिक की काश्त योग्य जमीन है साथ ही उसका पूरा परिवार वहां का जिमीदार परिवार है.

थाना अतरैला को भी लिखित की शिकायत

   इस बीच जब ग्राम पंचायत कशियारी में बनाये गए अवैध बाड़े में मरे हुए गायों के सबूत और प्रूफ इकठ्ठा कर लिए गए तब जाकर थाना अतरैला में लिखित तौर पर सूचित किया गया और दंडात्मक कार्यवाही की माग की गई. 

   शिवानंद द्विवेदी एवं पुष्पराज तिवारी द्वारा की गई लिखित शिकायत में पूरे वाकये को लिखा गया और भारतीय दंड संहिता की धारा 429 सहित पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1860 की धारा 11 एवं मप्र गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम अमेंडमेंट के अन्तर्गत कार्यवाही की माग की गई.

  थाना प्रभारी अतरैला द्वारा मामले पर लीपापोती

    इस बीच जब मोबाइल फ़ोन से अतरैला थाना प्रभारी को गोवंश प्रताड़ना के बारे में अवगत कराया गया तो थाना प्रभारी द्वारा बताया गया की डीएम कलेक्टर, एसडीएम एवं अन्य अधिकारियों को बता दें। ऐसी कोई बारदात नही है और कोई अवैध बाड़ा नही मिला है. जबकि थाना प्रभारी को पूरे मामले की फ़ोटो, लिखित शिकायत की प्रति, एवं बनाया गया वीडियो भी व्हाट्सएप्प के माध्यम से भी भेज दिया गया है.

दुर्गंध का रोजगार सहायक के विरोध करने पर जान से मारने और नौकरी से निकालने की धमकी

   ग्रामीणों द्वारा जो जानकारी सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमो से शेयर की गई थी उसमे कशियारी ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक पर संदेह करते हुए सरपंच पति और उसके परिवार द्वारा रोजगार सहायक अंकित तिवारी को नौकरी से निकाले जाने एवं उनकी माँ को आंगनवाड़ी से निकाले जाने की धमकी दी गई है. स्वयं सरपंच पति अखिलेश तिवारी ने कहा की रोजगार सहायक अंकित तिवारी एवं उसकी माँ की आंगनवाड़ी की नौकरी मेरे हाँथ में है जब चाहूं तब निकाल सकता हूँ.

सरपंच पति ने कहा हम बाड़ा नही हटाएँगे

   इस बीच चर्चा के दौरान कशियारी सरपंच पति एवं कुष्ठरोग विभाग में कार्य करने वाले अखिलेश तिवारी ने कहा की बाड़ा हम नही हटाएँगे चाहे कुछ भी हो जाए. उसने आगे कहा की इन आवारा पशुओं से हमारी फसलों को नुकसान होता है इसलिए हमने बाड़ा बनवाया है. यदि स्कूल के पास से हटवा भी दिया गया तो अन्य जगहों पर बनाया जाएगा.

    अखिलेश तिवारी द्वारा यह भी कहा गया की अंकित तिवारी रोजगार सहायक का घर स्कूल और बाड़े के पास है अतः हमने जानबूझकर बाड़ा वहीं पर बनवाया है जिससे जब मवेशी मरें तो उसकी दुर्गंध से यह परेशान हों क्योंकि इन्होंने अपनी मा को हमारे विरुद्ध चुनाव में खड़ा किया था और हमारे विरोधी है. वहरहाल सरपंच पति और अन्य गोवंश प्रताड़ना में संलिप्त लोगों की वॉइस रिकॉर्डिंग सबूत के तौर पर मौजूद हैं.

यदि बाड़ा नही हटा तो मरेंगे सभी गोवंश

   अब देखना यह है की यदि अगले कुछ दिनों में स्कूल के पीछे से बाड़ा नही हटाया गया तो शेष बचे हुए गोवंश भी ठंड और भूंख प्यास से काल के गाल में समाहित हो जायँगे. अतः प्रशासन के लिए यह अति आवश्यक है की या की विधिवत पशुओं के सुरक्षा और रहने के इंतज़ामात किये जाएं नही तो वहां से इस अवैध बाड़े को जितना जल्दी संभव  हो हटवाया जाए.

प्रशासन निष्क्रिय मात्र एक्टिविस्टों के दम पर है गोवंशों की सुरक्षा

   निश्चित तौर पर पुलिश प्रशासन और जिला प्रशासन का नजरिया तो पशुओं के लिए बिल्कुल पशु जैसा ही है लेकिन पशु आधिकारों के लिए लड़ने और कार्य करने वाले संगठनों के लिए आगामी ठंड ऋतु एक बार फिर चुनौतियां लेकर आ रही है जिंसमे जगह जगह गांव गांव अवैध अनाधिकृत पशु बाड़े बनाये जाएंगे और पिछले वर्षों की ही भांति एकबार फिर गोवंश जिनमे बहुतायत में गायें होंगी भूंख प्यास और ठंड से तड़प तड़प कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर देंगी.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें रीवा जिला एवं थाना अतरैला स्थित ग्राम पंचायत कशियारी शासकीय प्राथमिक पाठशाला एवं हरिजन बस्ती के पीछे बनाये गए अवैध बाड़े में मृत पड़ी गायें एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं सहयोगियों दवारा थाना अतरैला को लिखित दी गई शिकायत की प्रति.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 786992139

Wednesday, July 11, 2018

गोहत्यारों ने 8 माह की बछिया का तोड़ा पैर, घटना गढ़ थाना अंतर्गत मदरी ग्राम की (जिला रीवा मप्र)

रीवा मप्र,दिनाँक 11 जुलाई 2018 

   💥 थाना गढ़ अंतर्गत मदरी ग्राम में लगभग 8 माह की बछिया का पैर तोड़ दिया गया। मदरी पनगड़ी क्षेत्र में इस प्रकार की वारदात आज आम हो चुकी है जहां पर पशुक्रूरता निरंतर बढ़ती जा रही है। 

   💥 मदरी भठवा निवासी डॉक्टर अम्बिका द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता को जानकारी दी गई जिस पर हिनौती पशु औसधालय में कार्यरत समय लाल साहू को सूचित करने पर उन्होंने जाकर बछिया का इलाज किया। प्लास्टर पट्टी वगैरह किया। गाय का इलाज किया जा रहा है।

संलग्न - घटना की फ़ोटो संलग्न है।

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   *- शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता, रीवा मप्र 7869992139, 9589152587*

Thursday, June 14, 2018

कठमना में घायल अवस्था में मिली गाय (मामला ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले कठमना ग्राम का जहां कठमना निवासी वंशगोपाल सिंह को मिली लावारिस गाय जिसका पैर टूटा हुआ था, पशु चिकित्सक की मदद से मलहम पट्टी लगाया गया साथ ही डिप्टी डायरेक्टर से सर्जरी के लिए एम्बुलेंस की माग की गई, वेटेरिनरी एम्बुलेंस भेजे जाने का मिला आश्वासन)

दिनांक 14 जून 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले कठमना ग्राम में एक अज्ञात बछिया मिली है जिसके पैर में गहरी चोट मिली है. यह जानकारी कठमना निवासी अधिवक्ता वंशगोपाल सिंह ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दिनांक 13 जून की शाम को दी जिस पर संबंधित गंगेव ब्लॉक के पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को दी गई साथ ही पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में जानकारी दर्ज करवाई गई. जिस पर संबंधित डिप्टी डायरेक्टर रीवा को सूचित किया गया और अगले दिन हिनौती स्थित पशु डिसपेंसरी में कार्यरत समयलाल साहू को घायल गाय का इलाज करने के लिए कठमना भेजा गया. 

गाय का अगला पैर खुर के ऊपर से था फ्रैक्चर 

     प्राप्त जानकारी और ली गयी फ़ोटो के अनुसार बछिया लगभग एक वर्ष के आसपास की थी जिसकी किसी कारण बस खुर के ऊपर से फ्रैक्चर हो गया था. फ्रैक्चर होने का कारण स्पष्ट नही है परंतु इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से जिस प्रकार के गोप्रताड़ना के किस्से हुए हैं उससे यह समझ आता है की शायद किसी असमाजिक तत्व द्वारा गाय के पैर में चोटकर तोड़ दिया गया होगा. एक संभावना यह भी जताई गई की शायद पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण गाय का पैर कहीं पथ्थर के बीच में फंस कर भी टूट गया हो. 

       वहरहाल चाहे जो भी कारण हो वहां पर इलाज करने आये हिनौती क्षेत्र के पशु औसाधालय के कर्मचारी समयलाल साहू द्वारा प्रारंभिक चिकित्सा के तौर पर मलहम पट्टी की गई. साहू द्वारा जानकारी दी गई की मलहम पट्टी और इंजेक्शन से कुछ विशेष लाभ नही होगा क्योंकि घटना काफी पुरानी है अतः घाव के बाहर हड्डियां बाहर निकल आई हैं जिसे सर्जरी से ही ठीक किया जा सकता है और साथ ही प्लास्टर भी लगाना पड़ेगा जो रीवा स्थित मुख्य पशु चिकित्सालय के पहले संभव न हो पायेगा क्योंकि आसपास सर्जरी की कोई व्यवस्था नही है. इस प्रकार मात्र मलहम पट्टी करके साहू रवाना हो गए.

रीवा डिप्टी डायरेक्टर वेटेरिनरी श्री चौहान ने एम्बुलेंस भेजने की दी जानकारी  

   इस बीच जब सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा घटना के विषय में रीवा ज़िले के वेटेरिनरी विभाग के उप संचालक श्री चौहान से बात की गई तो उन्होंने बताया की हमारे पास रीवा में एम्बुलेंस उपलब्ध है जिसमे डॉक्टर विजिट करके सर्जरी का काम करेंगे. यह पूंछे जाने पर की क्या रीवा में घायल मवेशियों को रीवा के मुख्य पशु चिकित्सालय में ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था है तब जानकारी मिली की अभी तक रीवा में यह व्यवस्था उपलब्ध नही है. इस प्रकार वेटेरिनरी एम्बुलेंस आकर स्वयं ही घायल गाय के टूटे हुए अंग की सर्जरी करेगी जिसमे प्रशिक्षित सर्जन भी रहेंगे.

  संलग्न - संलग्न तस्वीर में कठमना निवासी वंशगोपाल सिंह अधिवक्ता द्वारा ली गई घायल गाय की तस्वीर जिसमे स्पष्ट रूप के गाय का पैर टूटा हुआ है और उसके काफी भाग में हड्डी बाहर भी निकल आई है जिससे इस बात का स्वयं ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है की घाव काफी पुराना है. 

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र

 मोबाइल नंबर - 07869992139, 09589152587

Wednesday, June 13, 2018

संकरी कुएं में गिरी गाय मरी (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी कला ग्राम का जहां दिनांक 13 जून की शाम को गिरी गाय रात 12 बजे मर गई, बचाने के प्रयाश के बीच गाय ने प्राण त्यागा, कुएं में गैस लीक की जताई गई असंका, तकनीकी व्यवस्था के अभाव में किसी ने कुएं में उतरने की नही की हिम्मत)

दिनांक 14 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी कला ग्राम में एक और गाय के सूखे कुएं में गिरकर मरने की खबर है. अभी पिछले दिनों पनगड़ी ग्राम में ही एक बछिया एक सूखे कुएं में गिर गई थी जिसे ग्राम के लोगो के सहयोग और साथ ही वन विभाग के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत के सहयोग से निकाल लिया गया था. लेकिन  शायद दिनांक 13 जून की शाम को बृजवासी विश्वकर्मा के घर के पास स्थित पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा की पट्टे की जमीन में बनाई हुई पुरानी 3 फ़ीट व्यास की कुआं में गिरी एक बड़ी गाय की किस्मत अच्छी नही थी जिसे वेटेरिनरी, पुलिश, जंगल विभाग सहित अन्य लोगो की उपस्थिति भी बचाया न जा सका. 

     हादसा काफी दुःखद था जिसमे गाय अपने पिछले हिस्से के बल पर गिरी थी जो सीधे 35 फ़ीट गहरी सूखी कुआं में जा गिरी. गिरते ही शायद गाय की गर्दन टूट जाने के कारण जिस स्थिति में गिरी थी उसी स्थिति में मरते दम तक बनी रही. घटना की जानकारी पनगड़ी कला ग्राम पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दी जिसके बाद गिरी गाय को बचाने की जद्दोजहद प्रारम्भ हुई. तत्काल ही जानकारी पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में दी गई जिस पर बताया गया की रीवा ज़िले में ऐसी कोई व्यवस्था अभी नही है जिससे कुएं में गिरी हुई गाय को जीवित निकाला जा सके. इसके बाद संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गंगेव ब्लॉक में पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को की गई. साथ ही जंगल विभाग पनगड़ी के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत को दी गई जो तत्काल ही घटनास्थल पर पहुचे. डायल 100 में सूचना देने के बाद लालगांव चौकी के सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया भी अपनी डायल 100 टीम के साथ घटनास्थल पर पहुचे. लेकिन कोई टेक्निकल व्यवस्था न होने के कारण सभी के प्रयाश असफल रहे. सबसे बड़ी कठिनाई तो इस बात की थी की कुआं अत्यंत संकरी थी जिसमे नीचे उतर पाना काफी कठिन कार्य था. मानसेवी वनकर्मी पनगड़ी राघवेंद्र पांडेय की पीठ पर रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया लेकिन आधे कुएं में पहुचने के बाद उनकी सांस फूलने लगी. उन्होंने बताया की दम घुट रहा था. शायद जहरीली गैस लीक होने की शिकायत रही होगी. इस बात की पुष्टि के लिए बाद में एक लालटेन जलाकर नीचे उतारा गया जो दो तीन बार बुझ गई जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की भले ही जहरीली गैस लीक न हो रही हो लेकिन ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम थी. इसके बाद किसी की हिम्मत नही हुई की वह व्यक्ति गाय को बचाने के लिए कुएं में उतर सके. 

   गाय को बचाने रात 1 बजे तक चलती रही जद्दोजहद

    संकरी कुएं में गिरी श्याम वर्ण गाय को बचाने के प्रयाश पूरी रात भर चलते रहे. देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक गाय की अंतिम सांस तक लोगों ने जुगुत लगाने के प्रयास किये लेकिन तकनीक के अभाव से सफलता प्राप्त नही हुई. यदि ऑक्सीजन मास्क होती तो भी किसी व्यक्ति को नीचे उतारा जा सकता था। इस बीच गाय के शरीर में हलचल बन्द होने और आंख बाहर निकल आने के बाद अंदाजा लगाया गया की गाय मर चुकी है. 

   पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा परिवार की सूखी कुएं में गिरी थी गाय

  गाय की मृत्यु तक पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर उपस्थित नही हुआ. लालगांव पुलिश के बार बार बुलाये जाने के बाद भी कुशवाहा द्वारा बताया गया की उसकी पीठ में दर्द है इसलिए उपस्थित नही हो सकता. इसके बाद जैसे ही गाय मर गई तो घटनास्थल से लालगांव सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया सहित अन्य पुलिश कर्मी एवं ग्राम पनगड़ी के गणमान्य लोग नर्मदा कुशवाहा के घर के पास और दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने को कहा परंतु उसने बार बार संदेश भेजा की वह बाहर नही आएगा. इसके बाद पुलिश द्वारा कहा गया की आपकी पट्टे की कुआं में आपकी गलती की वजह से एक गाय गिरकर मर चुकी है इसलिए प्रथम दृष्ट्या आपकी जिम्मेदारी बनती है. इसलिए शिकायत के आधार पर आप लालगांव चौकी चलें और गौहत्या का प्रकरण दर्ज होगा. लेकिन कुशवाहा द्वारा विभिन्न प्रकार से बहाने बनाने का प्रयाश किया गया. जब लालगांव पुलिश द्वारा नर्मदा कुशवाहा से पूंछा गया की क्या तुम इस मरी हुई गाय की जिम्मेदारी लोगे तो कुशवाहा द्वारा जिम्मेदारी लेने से मना किया गया इस पर पुलिश द्वारा कहा गया की कल शुबह तक इस मरी हुई गाय को बाहर निकालकर इस खतरे की जगह पर स्थित कुआं को बन्द करो. इस प्रकार हिदायत देकर पुलिश घटनास्थल से प्रस्थान कर दी. पूरा वाकया होते होते रात के 1 बज चुके थे जहां पर घटनास्थल पर उपसरपंच पनगड़ी शिवेंद्रमणि शुक्ला, मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय, रामसिया साकेत, पशु चिकित्सा विभाग के साहू सहित अन्य पुलिश एवं वनकर्मी उपस्थित थे.

  मदरी-भठवा ग्राम में भी खुली सूखी कुआं में गिरकर मरा था बंदर 

   अभी हाल ही में पिछले सप्ताह मदरी-भठवा ग्राम में किसी सूखी पुरानी खुली कुआं में एक बंदर के भी गिरने की खबर आई थी जिस पर संबंधित वन विभाग को सूचित किया गया था. तब पनगड़ी ग्राम वन समिति के मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत घटनास्थल पर उपस्थित होकर बंदर को बाहर निकाले थे. लेकिन घटना समय 24 घण्टे से ऊपर होने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ बंदर बाहर निकालते ही मर चुका था. यह कोई अकेले की घटना नही है जैसा की बताया गया की ऐसी बारदतें आज आये दिन घटित हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए.

लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण प्रशासन को अभियान चलाकर खतरे वाली सूखी कुओं को बन्द करवाया जाना चाहिए 

   जिस  प्रकार पिछले कुछ महीनों में लगातार सूखी और पुरानी गहरी कुओं में जंगली, आवारा और घरेलू मवेशियों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे साफ पता चलता है की जब तक प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्यवाही नही की जाती तब तक ऐसी वारदाते बन्द होने वाली नही हैं. प्रशासन को चाहिए हर  ग्राम पंचायत में डेटा इकठ्ठा करके पता लगाए की किस किस ग्राम पंचायत में ऐसे कितने पुराने अनुपयोगी और सूखे कुएं हैं. यदि प्रशासन जल संसाधन के हिसाब के यह मानता है की ऐसे अनुपयोगी कुएं भाठे नही जाने चाहिए तो इन्हें ढंकने का कार्य किया जाना चाहिए. सभी कुओं में लोहे की जाली लगाकर ऊपर से ढंकी जानी चाहिए जिससे न तो किस जन की हानि हो और न ही पशुओं की. जो भूमिस्वामी अपनी जमीन पर बनाई गई कुओं को न ढंके उनके ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए.

संलग्न - दिनांक 13 जून की शाम को पनगड़ी कला ग्राम में किसी कुशवाहा की सूखी कुएं में गिरी गाय की तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587  

संकरी कुएं में गिरी गाय मरी (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी कला ग्राम का जहां दिनांक 13 जून की शाम को गिरी गाय रात 12 बजे मर गई, बचाने के प्रयाश के बीच गाय ने प्राण त्यागा, कुएं में गैस लीक की जताई गई असंका, तकनीकी व्यवस्था के अभाव में किसी ने कुएं में उतरने की नही की हिम्मत)

दिनांक 14 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी कला ग्राम में एक और गाय के सूखे कुएं में गिरकर मरने की खबर है. अभी पिछले दिनों पनगड़ी ग्राम में ही एक बछिया एक सूखे कुएं में गिर गई थी जिसे ग्राम के लोगो के सहयोग और साथ ही वन विभाग के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत के सहयोग से निकाल लिया गया था. लेकिन  शायद दिनांक 13 जून की शाम को बृजवासी विश्वकर्मा के घर के पास स्थित पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा की पट्टे की जमीन में बनाई हुई पुरानी 3 फ़ीट व्यास की कुआं में गिरी एक बड़ी गाय की किस्मत अच्छी नही थी जिसे वेटेरिनरी, पुलिश, जंगल विभाग सहित अन्य लोगो की उपस्थिति भी बचाया न जा सका. 

     हादसा काफी दुःखद था जिसमे गाय अपने पिछले हिस्से के बल पर गिरी थी जो सीधे 35 फ़ीट गहरी सूखी कुआं में जा गिरी. गिरते ही शायद गाय की गर्दन टूट जाने के कारण जिस स्थिति में गिरी थी उसी स्थिति में मरते दम तक बनी रही. घटना की जानकारी पनगड़ी कला ग्राम पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दी जिसके बाद गिरी गाय को बचाने की जद्दोजहद प्रारम्भ हुई. तत्काल ही जानकारी पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में दी गई जिस पर बताया गया की रीवा ज़िले में ऐसी कोई व्यवस्था अभी नही है जिससे कुएं में गिरी हुई गाय को जीवित निकाला जा सके. इसके बाद संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गंगेव ब्लॉक में पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को की गई. साथ ही जंगल विभाग पनगड़ी के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत को दी गई जो तत्काल ही घटनास्थल पर पहुचे. डायल 100 में सूचना देने के बाद लालगांव चौकी के सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया भी अपनी डायल 100 टीम के साथ घटनास्थल पर पहुचे. लेकिन कोई टेक्निकल व्यवस्था न होने के कारण सभी के प्रयाश असफल रहे. सबसे बड़ी कठिनाई तो इस बात की थी की कुआं अत्यंत संकरी थी जिसमे नीचे उतर पाना काफी कठिन कार्य था. मानसेवी वनकर्मी पनगड़ी राघवेंद्र पांडेय की पीठ पर रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया लेकिन आधे कुएं में पहुचने के बाद उनकी सांस फूलने लगी. उन्होंने बताया की दम घुट रहा था. शायद जहरीली गैस लीक होने की शिकायत रही होगी. इस बात की पुष्टि के लिए बाद में एक लालटेन जलाकर नीचे उतारा गया जो दो तीन बार बुझ गई जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की भले ही जहरीली गैस लीक न हो रही हो लेकिन ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम थी. इसके बाद किसी की हिम्मत नही हुई की वह व्यक्ति गाय को बचाने के लिए कुएं में उतर सके. 

   गाय को बचाने रात 1 बजे तक चलती रही जद्दोजहद

    संकरी कुएं में गिरी श्याम वर्ण गाय को बचाने के प्रयाश पूरी रात भर चलते रहे. देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक गाय की अंतिम सांस तक लोगों ने जुगुत लगाने के प्रयास किये लेकिन तकनीक के अभाव से सफलता प्राप्त नही हुई. यदि ऑक्सीजन मास्क होती तो भी किसी व्यक्ति को नीचे उतारा जा सकता था। इस बीच गाय के शरीर में हलचल बन्द होने और आंख बाहर निकल आने के बाद अंदाजा लगाया गया की गाय मर चुकी है. 

   पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा परिवार की सूखी कुएं में गिरी थी गाय

  गाय की मृत्यु तक पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर उपस्थित नही हुआ. लालगांव पुलिश के बार बार बुलाये जाने के बाद भी कुशवाहा द्वारा बताया गया की उसकी पीठ में दर्द है इसलिए उपस्थित नही हो सकता. इसके बाद जैसे ही गाय मर गई तो घटनास्थल से लालगांव सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया सहित अन्य पुलिश कर्मी एवं ग्राम पनगड़ी के गणमान्य लोग नर्मदा कुशवाहा के घर के पास और दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने को कहा परंतु उसने बार बार संदेश भेजा की वह बाहर नही आएगा. इसके बाद पुलिश द्वारा कहा गया की आपकी पट्टे की कुआं में आपकी गलती की वजह से एक गाय गिरकर मर चुकी है इसलिए प्रथम दृष्ट्या आपकी जिम्मेदारी बनती है. इसलिए शिकायत के आधार पर आप लालगांव चौकी चलें और गौहत्या का प्रकरण दर्ज होगा. लेकिन कुशवाहा द्वारा विभिन्न प्रकार से बहाने बनाने का प्रयाश किया गया. जब लालगांव पुलिश द्वारा नर्मदा कुशवाहा से पूंछा गया की क्या तुम इस मरी हुई गाय की जिम्मेदारी लोगे तो कुशवाहा द्वारा जिम्मेदारी लेने से मना किया गया इस पर पुलिश द्वारा कहा गया की कल शुबह तक इस मरी हुई गाय को बाहर निकालकर इस खतरे की जगह पर स्थित कुआं को बन्द करो. इस प्रकार हिदायत देकर पुलिश घटनास्थल से प्रस्थान कर दी. पूरा वाकया होते होते रात के 1 बज चुके थे जहां पर घटनास्थल पर उपसरपंच पनगड़ी शिवेंद्रमणि शुक्ला, मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय, रामसिया साकेत, पशु चिकित्सा विभाग के साहू सहित अन्य पुलिश एवं वनकर्मी उपस्थित थे.

  मदरी-भठवा ग्राम में भी खुली सूखी कुआं में गिरकर मरा था बंदर 


 


   अभी हाल ही में पिछले सप्ताह मदरी-भठवा ग्राम में किसी सूखी पुरानी खुली कुआं में एक बंदर के भी गिरने की खबर आई थी जिस पर संबंधित वन विभाग को सूचित किया गया था. तब पनगड़ी ग्राम वन समिति के मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत घटनास्थल पर उपस्थित होकर बंदर को बाहर निकाले थे. लेकिन घटना समय 24 घण्टे से ऊपर होने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ बंदर बाहर निकालते ही मर चुका था. यह कोई अकेले की घटना नही है जैसा की बताया गया की ऐसी बारदतें आज आये दिन घटित हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए.


लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण प्रशासन को अभियान चलाकर खतरे वाली सूखी कुओं को बन्द करवाया जाना चाहिए 

   जिस  प्रकार पिछले कुछ महीनों में लगातार सूखी और पुरानी गहरी कुओं में जंगली, आवारा और घरेलू मवेशियों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे साफ पता चलता है की जब तक प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्यवाही नही की जाती तब तक ऐसी वारदाते बन्द होने वाली नही हैं. प्रशासन को चाहिए हर  ग्राम पंचायत में डेटा इकठ्ठा करके पता लगाए की किस किस ग्राम पंचायत में ऐसे कितने पुराने अनुपयोगी और सूखे कुएं हैं. यदि प्रशासन जल संसाधन के हिसाब के यह मानता है की ऐसे अनुपयोगी कुएं भाठे नही जाने चाहिए तो इन्हें ढंकने का कार्य किया जाना चाहिए. सभी कुओं में लोहे की जाली लगाकर ऊपर से ढंकी जानी चाहिए जिससे न तो किस जन की हानि हो और न ही पशुओं की. जो भूमिस्वामी अपनी जमीन पर बनाई गई कुओं को न ढंके उनके ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए.

संलग्न - दिनांक 13 जून की शाम को पनगड़ी कला ग्राम में किसी कुशवाहा की सूखी कुएं में गिरी गाय की तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,


रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587  


Tuesday, May 15, 2018

मानवता हुई शर्मसार - गाय को बंधक बनाकर काटा सोंत/स्तन (मामला मप्र के रीवा ज़िला अंतर्गत त्योंथर ब्लॉक के करहिया ग्राम का, राजकुमार द्विवेदी की गाय को सुषमा द्विवेदी नामक महिला ने बांधकर काट लिया सोंत/स्तन, फोटी संलग्न, थाना गढ़ में डाली गई कंप्लेंट पर नही हुई कोई कार्यवाही)

दिनाँक 16 मई 2018, स्थान - गढ़/गगेव रीवा मप्र,

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेद्वी)

   ज़िले के त्योंथर ब्लॉक अन्तर्गत आने वाली डाढ़ पंचायत के करहिया ग्राम में उच्चवर्गीय हिन्दू परिवार के सदस्यों द्वारा गाय के साथ अत्याचार करने का राक्षसी मामला प्रकाश में आया है. इससे हिन्दू आस्था में भारी आघात तो लगता है है साथ ही मानवता भी शर्मसार होती है. यह समाज का वह वर्ग है जिसके सिर पर हिन्दू धर्म की नैया पार करने की जिम्मेदारी बतायी जाती रही है और आज हिन्दू समाज का वह वर्ग ही रक्षक से भक्षक बन रहा है। 

    मामला है दिनांक 13 मई 2018 का जिसमे राजकुमार द्विवेदी पिता देवधर द्विवेदी की गाय बाहर चरने गयी थी जिस पर उनके घर के पूर्व दिशा में स्थित द्विवेदी ब्राह्मण परिवार की सुषमा द्विवेदी नामक महिला पर आरोप लगाया है की उसने और उसकी पुत्री ने गाय को दुहने का प्रयास किया. गाय कूद जाने और लात मारने पर कथित महिला सुषमा द्विवेदी और उसकी बेटी ने मिलकर गाय का सोंत ही काट दिया. बता दें की गाय के सोंत चार होते हैं जिनसे दूध दुहने का काम किया जाता है. चार में से एक सोंत को पूरी तरह से काट दिया गया है जिसे संलग्न फ़ोटो में दिखाया गया है.

   पीड़ित राजकुमार द्विवेदी ने इस विषय में गढ़ थाना जाकर नामजद शिकायत दर्ज करवायी है जिसमे पीड़ित ने लिखित आवेदन में किसी सुषमा द्विवेदी एवं उसकी पुत्री पर सोंत काटने का आरोप लगाया है. जानकारी लिखे जाने तक गढ़ थाना में अब तक कोई जांच नही हुई है और न ही कोई कार्यवाही हुई है. अमूमन ऐसे मामलों में तत्काल जांच कर एफ आई आर दर्ज की जानी अनिवार्य होती है.

संलग्न - संलग्न शिकायत पत्र एवं फ़ोटो में देखें पूरा मामला स्पष्ट है. फ़ोटो में राजकुमार द्विवेदी निवासी करहिया अपने साथ शिकायत पत्र की प्रति लिए हुए गाय के पास खड़े हुए हैं. अन्य फ़ोटो में गाय के कटे हुए सोंत.

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शिवानन्द द्विवेद्वी, सामाजिक एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट,

रीवा मप्र, 786992139, 9589152587,

Sunday, April 8, 2018

हिनौती पशु औषधालय निर्माण में देरी, 5.6 लाख रुपये आये थे बजट (मामला गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती ग्राम पंचायत के चियार ग्राम का)


दिनांक 09 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    फसल कटाई के साथ ही एक बार फिर पशुओं की पीड़ा को भुला दिया जाएगा. अभी भी ज़िले में बनाये गए कई अवैध बाड़ों में गोवंश अपने जीवन की गुहार लगा रहे हैं. परंतु सरकार एवं प्रशासन के लिए यह कोई विशेष बात नही है और रोज की आई गई बात हो गई है.

    पिछले दिनों हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव के पास स्थित चियार ग्राम से गुजरा गया तो पाया गया की वहां पर निर्माणाधीन पशु चिकित्सालय में काम बंद पड़ा हुआ है. जब पास जाकर देखा गया तो पता चला की नवीन निर्माणाधीन पशु औषधालय के पीछे एक पुराना खंडहरनुमा ढांचा भी है जो संभवतः पुराना पशु औषधालय भवन था. 

    साथ में गोंदरी 27 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनिल उपकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने जाकर नवीन निर्माणाधीन औषधालय की बाहरी स्थिति का जायज़ा लिया और उसकी कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली. 

हिनौती पशु औषधालय निर्माण का बजट है 5.6 लाख रुपये

   हिनौती पशु औषधालय के बजट के विषय में और साथ ही इस शासकीय भवन के निर्माण के विषय में कोई जानकारी वहां नोटिस बोर्ड में उपलब्ध नही मिली. जबकि अमूमन चाहिए यह की किसी भी प्रकार के शासकीय भवन के निर्माण संबंधी बजट, भवन सिविल इंजीनियरिंग और प्रकार आदि की जानकारी सामने एक नोटिस बोर्ड में चस्पा कर दी जानी चाहिए. यह वास्तव में देखा जाए तो आम जान मानस को सूचना के अधिकार के अंतर्गत बिना आवेदन लगाए ही मुफ्त में और जरूरी सूचनाओं की श्रेणी में आता है. 

   जब हिनौती पशु औषधालय के विषय में जानकारी चाही गई तो जिम्मेदारों का यह कहना था 

  1) "पशु औषधालय का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह पूरी तरह से ठेका पद्धति में होता है. यह सीधे ठेकेदार और वेटरनरी अधिकारी गंगेव के बीच में रहता है साथ ही लोक यांत्रिकी विभाग से संबंध है. आपको इस विषय में ज्यादा जानकारी गंगेव के पशु चिकित्सा अधिकारी से ही मिल पाएगी." - विवेक मिश्रा, सहायक पशु चिकित्सा सर्जन, गढ़ पशु चिकित्सा कार्यालय. मोब - 9425569495

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 2) "हिनौती में बनने वाले पशु औषधालय में कुल 5 लाख 60 हजार का बजट ठेकेदार द्वारा बताया गया है जिसका की काम चल रहा है और समय समय पर हमने हिनौती में कार्यरत साहू को बोला है की काम देखते रहें. अभी ठेकेदार ने बात की थी तो हमने कहा है की जल्दी काम समाप्त करके हमारे विभाग को सौंप दें. कुछ पैसा बचा हुआ है जिसमे हमने कहा है की एक शौचालय आउर एक भवन की बाउंड्री वाल बना दें. काम जल्दी सम्पन्न होगा और हमारे विभाग के साहू ही काम देखेंगे. वैसे वहां पर वेटेरिनरी सर्जन बैठना चाहिए लेकिन यह हमारे बस की बात नही मात्र शासन स्तर से ही संभव है. और शासन का यह हाल है की हम कुछ भी नही कह सकते. हमारे गंगेव ब्लॉक में 30 असिस्टेन्ट वेटेरिनरी फील्ड ऑफिसर होना चाहिए परंतु यहां मात्र तीन ए वी एफ ओ हैं जिनमे मनगवां, लाल गांव, और एक अन्य स्थान पर पदस्थ हैं. हम किसी प्रकार से काम चला रहे हैं." - एस के पांडेय, वेटेरिनरी ऑफिसर, गंगेव ब्लॉक रीवा, मप्र. 

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3) "देखिए हम भी यहां से गुजरते रहते हैं और हमने पिछले कुछ एक वर्ष से यहां पर इस निर्माणाधीन भवन को देखा है और हमे भी जानकारी नही थी की यह किस विभाग का भवन है पर आपने बताया तो जानकारी प्राप्त हुई है. हमारी जनता की तरफ से शासन प्रसाशन से यही माग है की जिज़ प्रकार गोवंशों के साथ आज अत्याचार हो रहा है उसको बन्द किया जाए, गांव गांव में गोशाला स्थापित कर पंचायतों को सहयोग करना चाहिए. जो यह पशु औषधालय बन रहा है इसका भरपूर उपयोग होना चाहिए, पशुओं के प्रति आम जनमानस में जन जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए. 5 लाख 60 हज़ार का बजट काफी होता है अतः भवन निर्माण में ठेकेदार मनमानी न कर पाए विभाग को देखना चाहिए" - अनिल उपकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, निवासी गोंदरी पंचायत गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र. मोब 9009213370

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संलग्न - गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती पंचायत के चियार ग्राम में निर्माणाधीन पशु औषधालय की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, मोब 07869992139, 9589152587.

Sunday, March 4, 2018

गोवंश की रक्षा मानवता की सुरक्षा

नमस्कार।
   देखिए भाजपा सरकार के कार्यकाल में गौमाताओं की कितनी बड़ी दुर्दशा हो रही है। खुलेआम गायों की प्रताड़ना का शिलशिला निरंतर चलता हुआ।
    Unauthorized बाड़ों में जिनमे की किसी की कोई जिम्मेदारी तय नही है, इन बेजुबानों को कैद कर दिया जाता है जिसमे समुचित व्यवस्था के अभाव में भूंख प्यास से यह बेजुबान दम तोड़ रहे हैं जिन्हें देखने वाला न तो भाजपा और न ही कोई हिंदूवादी संगठन समझ आ रहे हैं। सभी हिंदूवादी संगठन यह बात जानते हैं फिर भी भाजपा पर दबाब बनाने में असफल सिद्ध हुए हैं इससे साफ जाहिर है कि सत्ता पर आने के बाद सभी पार्टियों के एक ही आदर्श होते हैं और वह है पैसा, कुर्सी और सत्ता। आखिर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, आर एस एस सहित अन्य गोरक्षा दलों के होते हुए भाजपा इस बात को गंभीरता से क्यों नही लेती? ,जब भाजपा की सरकार बनी थी तो इसने हिंदुओं को वेवकूफ बनाकर हिंदुओं के संवेदनशील मुद्दों के नाम पर ही तो वोट और सत्ता हथियाई थी तो अब भाजपा हिंदुओं को जबाब क्यों नही देती की गायों की दुर्दशा के पीछे क्या कारण हैं?
    यदि प्रदेश में हो रहे अरबों खरबों के घोटालों में इन नेताओं और उनके चमचों के हाँथ साफ हो रहे हैं तो आखिर इन घोटालों का 5 प्रतिशत भी यदि गोरक्षा के लिए लगा दिया जाए तो पर्याप्त गोशालाएं और गो अभयारण्य बनाये जा सकते हैं और प्रदेश में गायों और जनके वंशों की समुचित सुरक्षा व्यवस्था की जा सकती है।
     धन्य है उमा भारती जिन्होंने मप्र में गायों को कटने के लिए अदिनियम पास कर इनकी सुरक्षा की अन्यथा कोई माई का लाल नही था जो इनकी सुरक्षा कर पाता। अब आखिर मप्र में गोरक्षा के लिए यदि इतने नियम बने हैं तो भी उनका पालन यह प्रदेश सरकार क्यों नही करवा पॉय रही है?
   
     किसानों का खून पी रही है प्रदेश भाजपा सरकार
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    जहां एक तरफ भारतीय संस्कृति की माता गोमाता की इतनी बड़ी दुर्दशा हो रही है वहीं दूसरी तरफ प्रदेश के किसानोंकी भी दुर्दशा बढ़ती जा रही है। आवारा छोड़ दिये गए पशु किसानों के लिए समस्या बन हुए हैं जिससे कुछ समाज के निर्दयी लोग इन गोवंशों को अवैध बाड़ों में कैद कर देते हैं और चारे पानी छाया एवं समुचित व्यवस्था बिना छोड़ देते हैं जिससे यह बेजुबान धीरे धीरे करके घुट घुट कर कमजोर होकर मर जाते हैं। इनकी देखभाल करने वाला कोई मई बाप नही होता। अब कृष्ण राम तो जन्म नही लेंगे। यह हिन्दू समाज आज स्वयं ही इनका भारी दुश्मन बन चुका है।

सूखा अकाल और महामारी फैलने का मूल कारण गोहत्या होना -
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   आज जो पूरे देश मे सूखा अकाल अशांति, आतंकवाद और महामारी फैल रही है उसके पीछे मात्र गोहत्या का होना ही कारण है।
     जिस प्रकार यह समाज आज गायों की उपेक्षा कर रहा है और इतने शांत प्राणी को मौत के घाट उतार रहा है, गो प्रताड़ना बढ़ती जा रही है, मांसाहार बढ़ता जा रहा है उसी का परिणाम है कि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ कर महामारी, युद्ध, अशांति, आतंकवाद, सूखा, अकाल, बाढ़, अतिवृष्टि, भूकंप, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक विपदाएँ बढ़ती जा रही हैं लेकिन मॉनव की आंख नही खुल रही है जिसका परिणाम भयानक मानवीय क्लेश, और दुखद स्थितियों के रूप में सामने आएगा।
     यदि मॉनव समय रहते नही चेता तो अंत मे सोचने के लिए और गलती सुधारने के लिए भी और प्रायश्चित करने के लिए भी समय नही बचेगा।

   - शिवानंद द्विवेदी, गोरक्षक, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र।
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