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Friday, August 23, 2019

धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों की ठोकर से घायल हुई गाय, स्थिति गंभीर (मामला जिले के थाना गढ़ अन्तर्गत भठवा मार्केट के पास का, पशु संजीवनी 1962 को किया गया सूचित, डॉक्टर और सर्जनों की टीम ने किया इलाज)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान गढ़/गंगेव/भठवा, रीवा मप्र
  घोषणा वीरों की घोषणाओं के बाद भी धरातल स्तर पर गौशाला निर्माण कार्य जीरो
 स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद से धड़ल्ले से दौड़ रहे ओव्हर लोड वाहन
  शिवानन्द द्विवेदी एवं स्वतंत्र शुक्ला (रीवा मप्र)

      प्रदेश सरकार के द्वारा गौशाला निर्माण कार्य की घोषणा करने के बाद भी अब तक धरातल स्तर में कार्य किसी प्रकार से आरंभ होने का नाम नहीं ले रहा है। आपको बता दें कि आज दिनांक 23 अगस्त 2019 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की गोमाता भठवा मार्केट के बस स्टैंड में अज्ञात वाहन से दुर्घटना ग्रस्त होकर अपनी अंतिम सांस गिन रही है। घटना की जानकारी शहर वाशियों द्वारा गौरक्षक शिवानंद द्विवेदी को दी गई जिससे हाल ही में घटना स्थल पर पहुंच कर प्राथमिक उपचार कराया गया, साथ ही पशु संजीवनी एम्बुलेंस 1962 को सूचना प्रेषित की गई, लेकिन अब तक 3 घन्टे बाद भी संजीवनी उपस्थित नहीं हो पाई। अंत मे शाम 4 बजे पशु संजीवनी को लेकर गंगेव वेटेरिनरी एक्सटेंशन अधिकारी उपस्थित हुए जिनके साथ आये सर्जनों ने गाय का इलाज किया।
   सुबह लगभग 11 बजे यद्यपि कम्पाउण्डर और ड्रेसर संतलाल साहू एवं रामानुज कोल के द्वारा प्राथमिक उपचार तो किया गया है लेकिन सर्जन के आने के बाद ही प्लास्टर हो पाया, वहीं घटना स्थल पर  उपस्थित लोगों का कहना था कि, गाय के पेट में लगभग 5 माह के गर्भ में बच्चा था जो ठोकर लगने से सम्भवतः मर चुका था लेकिन जिस प्रकार गाय जीवित बची हुई थी इससे डॉक्टरों का कहना था कि गाय के पेट मे बच्चा तब तक मरा नही था।
क्या कहना है इनका
गौरव शुक्ला निवासी भठवा - "गौरक्षक श्री शिवानंद द्विवेदी जी के द्वारा हमें गाय एक्सीडेंट होने की  सूचना मिली तो हमनें संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर अवगत कराया, साथ ही प्राथमिक उपचार करा के ट्रेक्टर ट्राली  के माध्यम से गाय को परिजनों के घर पहुंचा दिया "
 गिरीश पटेल निवासी बांस-  "जब से यह रोड हाइवे बनी है तब से ओव्हर लोड बहनों की निकशी के चलते लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।"
ओम शुक्ला निवासी भठवा - "पशुओं की तो गिनती नहीं की एक दिन में कितने दुर्घटना के शिकार होते हैं आए दिन लोगों के साथ भी यही होता है। स्थानीय पुलिस प्रशासन की सह से ओव्हर लोड बहनों की धड़ल्ले से निकासी होती है। इसका विरोध भी किया गया लेकिन कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है।"
 शिवानंद द्विवेदी, गौरक्षक सामाजिक कार्यकर्ता - "यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी बड़े बड़े ट्रक घरों में घुस चुके हैं। पता नहीं कितने व्यक्ति व मवेशी दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। इसलिए साशन प्रशासन संदर्भित विषय को संज्ञान में ले ओव्हर लोडेड व भारी वाहनों के निकासी में प्रतिबंध लगाएं। साथ ही क्षेत्र में बनाएं जाने वाली गौशाला के निर्माण कार्य में भी तीव्रता आए जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।"
   गोशालाएं न बनने से बेसहारा मवेशियों की हालत खराब
     मप्र में वर्तमान सरकार द्वारा 1000 गोशालाओं को बनाये जाने हेतु प्रस्ताव लाया गया है जिनमे से काफी गोशालाओं को बनाये जाने हेतु जगह भी चिन्हित कर ली गयी हैं। जिला रीवा में ही अकेले 33 गोशालाएं खोली जानी हैं जिनमे से 30 गोशालाओं के निर्माण  हेतु टीएस भी जारी किए जा चुके हैं लेकिन ग्राउंड वर्क न होने से स्थिति दयनीय बनी हुई है।
  हिनौती और बांस ग्राम पंचायत में मात्र खोदे गए गड्ढे
    बता दें कि गंगेव ब्लॉक के हिनौती एवं बांस ग्राम पंचायत में गोशाला निर्माण के नाम पर अब तक मात्र गड्ढे ही खोदे गए हैं। कुछ गड्ढे खोदे जाने के बबाद बाहर के मजदूरों द्वारा कार्य अधूरा छोंड़कर भाग जाने के कारण मनरेगा का कार्य पूर्णतया बन्द हो चुका है। ज्ञात हो कि मनरेगा के कार्य बाहरी मजदूरों नही बल्कि पंचायत और आसपास के मजदूरों के द्वारा करवाये जाते हैं। जबकि उक्त पंचायतों में गोशाला निर्माण के प्रारम्भ से ही धांधली प्रारम्भ होगयी है जिसकी निगरानी शासन प्रशासन को करना अत्यंत आवश्यक है।
  वाहनों की स्पीड पर लगे रोक, ऐरा प्रथा पर भी लगे लगाम
    आज सबसे ज्यादा मवेशी वैष्णो6 और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।सतना से बेला, क्योटी से कलवारी, मनगवां से चाकघाट एवं मनगवां से हनुमना अथवा शहरी रोड कोई भी सड़कें हो, इनमे बेतरतीब और रेलमपेल दौड़ने वाले ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों की वजह से रोज सैकड़ों ऐरा मवेशी इसका शिकार हो रहे हैं। सामान्य तौर पर फसल नुकसानी बचाने के लिए होने वाली पशु क्रूरता तो है ही लेकिन उससे कहीं भयावह स्थिति सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले मवेशियों की है। इस कारण जब तक ऐरा प्रथा में रोक नही लगती और ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों पर नियत्रण और कार्यवाही नही होती तब तक कुछ भी कह पाना मुश्किल है। भठवा मार्केट के पास की घटना उसका एक पहलू मात्र है।
संलग्न - कृपया दुर्घटना से बुरी तरह घायल गाय की स्थिति एवं तत्पश्चात सर्जनों एवं डॉक्टर द्वारा किया गया इलाज की फ़ोटो।
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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587





Monday, June 25, 2018

हिन्दू बाहुल्य समाज में गाय के साथ क्रूरता, जिम्मेदार मात्र हिन्दू (मामला ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी एवं देउर ग्राम का जहां पर गायों को दो अलग अलग घटनाओं में धारदार हथियार से मारा)

दिनांक 26 जून 2018, स्थान - गढ़, रीवा-मप्र

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)

   हे भगवान क्या तूने इस कलयुग में ऐसे ही दिन देखने के लिए मॉनव को पैदा किया था की भारतीय संस्कृति में पूज्य माता और देव स्वरूप उपमा प्राप्त गोमाता को आज अपने ही हिंदुओं से बर्बरता और क्रूरता का शिकार होना पड़ेगा.

   मानाकि यदि कोई दूसरा सम्प्रदाय वर्ग होता जहां पर गाय को मात्र उपभोग की पशु समझा जाता है वहां गोवंशों के मांस भक्षण की परंपरा तक है परंतु क्या हिन्दू बाहुल्य समाज जहां पर आज से कुछ वर्षों पहले इन्ही गोवंशों को खेत खलिहान से लेकर हरछठ में पूजने तक की परंपरा थी आज अपने ही लोगों से इन बेजुबान मूक पशुओं की जान में बन आई है.

  आये दिन हो रही पशु क्रूरता

   आज रीवा संभाग में जहां पर कभी राजशाही हुआ करती थी और हिन्दू धर्म के गो-ब्राह्मण को सुरक्षा मिलनी थी आज उसी रीवा राज्य में आये दिन पशु क्रूरता बढ़ती जा रही है. पिछले 5 वर्षों का अनुभव यह बताता है की ज्यादातर फसल नुकसानी के नाम पर शासन प्रशासन की अनदेखी और अव्यवस्था की वजह से अवैध बाड़ों में गोवंशों को कैद कर बिना चारा पानी और भूषा के छोंड़ दिया जा रहा जिससे घुट घुट कर उनकी जान जा रही है. इसके पीछे का तर्क आवारा पशुओं की वजह से किसान की फसल नुकसानी बताया जाता है लेकिन यह नही बताया जाता की आखिर किसान की इस समस्या का मानवीय समाधान क्या है और साथ ही यह भी नही बताया जाता की आखिर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का क्या हुआ? चलिए गाय को माता न भी माना जाए, हिन्दू संस्कृति का हवाला न भी दिया जाए तो यह कोई बताए की क्या इस संविधान की किताब और आई पी सी के सेक्शन में पशुओं का कोई अधिकार नही है?

  पनगड़ी में कुएं में गिरकर गायों की हुई मौत 

   थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी ग्राम के आसपास अक्सर ही गोवंशों से साथ क्रूरता की वारदातें सामने आती रहती है. अभी पिछले दिनों ही निकटतम ग्राम कठमना में पैर में चोट लगी गाय मिली थी जिसके इलाज के लिए रीवा से डॉक्टर आये थे. फिर पनगड़ी में ही दो अलग अलग घटनाओं में कुएं में गाय गिरने से एक को जीवित निकाल लिया गया था जबकि एक अन्य संकरी कुआं होने की वजह से मर गई थी.

पनगड़ी भलघटी में सैकड़ों गायों को उतारा था मौत के घाट 

  पनगड़ी से ही लगे भलघटी नामक जंगली पहाड़ी और गहरी खाईं में सैकड़ों गायों को पहाड़ के ऊपर से फेंकने का मामला सामने आया था जिंसमे पिछले वर्ष ठंड के मौसम में दिल्ली से पीपल फ़ॉर एनिमल्स, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, एनिमल हसबेंडरी विभाग सहित एन जी ओ ध्यान फाउंडेशन तक के लोग आये थे और घटना का संज्ञान लेकर जांच पड़ताल हुई थी. जिले की थाना गढ़ और लाल गांव चौकी की पुलिश, वेटेरिनरी विभाग, फारेस्ट विभाग और राजस्व अमला सहित घटनास्थल का निरीक्षण किया था. अज्ञात के ऊपर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दये गए थे. इसके बाद क्या हुआ इसका किसी को रता पता नही है.

पनगड़ी और देउर में फिर मारा गायों को

   अभी फिर दो अलग अलग घटनाओं में दो गायों के साथ क्रूरता होने का मामला प्रकाश में आया है.


    प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना गढ़ एवं तहसील त्योंथर अंतर्गत देउर ग्राम में समाजसेवी दिलीप सिंह ने जानकारी दी की उन्हें कहीं रास्ते में एक गाय घायल एवं लावारिश अवस्था में मिली है जिसके पीछे के पैर में खुर के पास चोट लगी है साथ ही ऊपर कूल्हा बुरी तरफ टूटा हुआ है जिससे गाय चलने में असमर्थ थी. इस जानकारी के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा संबंधित गढ़ वेटेरिनरी सर्जन विवेक मिश्रा को जानकारी दी गई जिसके बाद कटरा अंतर्गत आने वाले कम्पाउण्डर जायसवाल को घायल गाय का इलाज करने के लिए कहा गया. तब डॉक्टर के आने के बाद सामान्य तौर पर घाव की मलहम पट्टी और इलाज हुआ.

 इसी प्रकार एक अन्य घटनाक्रम में पनगड़ी पनगड़ी निवाशी लाला शुक्ला और दिनेश त्रिपाठी द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट द्विवेदी को फ़ोन करके जानकारी प्रदान की गई की सुदामा यादव निवासी पनगड़ी की गाय को किसी हत्यारे ने पेट में कुल्हाड़ी से हमला करके बुरी तरह से घायल कर दिया है. जानकारी मिलने के बाद हिनौती पशु औसधालय में कार्यरत समयलाल साहू को बताया गया जिस पर साहू घटनास्थल पर पहुच कर घायल गाय का दवा इलाज किये. यद्यपि देउर और पनगड़ी दोनो ही घटनाओं में घायल गायों को मात्र दवा और मलहम पट्टी की नही बल्कि पूरे सर्जरी की आवश्यकता है जिसके लिए पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 को भी सूचित कर दिया गया है. यद्यपि अभी तक कोई सर्जन उपस्थित नही हुए हैं.

सरकार और प्रशासन को संज्ञान लेकर गोवंश प्रताड़ना बन्द करवानी चाहिए

    जिस प्रकार से रीवा ज़िले में पशुओं के साथ क्रूरता दिनो दिन बढ़ रही है सरकार को चाहिए ऐसे मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा कर कानूनी कार्यवाही करे. दुर्भाग्य तो यह है की सरकार से ऐसी क्या उम्मीद की जाए. यहां तो रीवा ज़िले में हो रही पशु क्रूरता की वारदातों पर एफआईआर तक दर्ज नही होती. भलघटी पनगड़ी का  मामला अभी ज्यादा पुराना नही हुआ है जहां पर सैकड़ों गायों को क्रूरता पूर्वक घाट के नीचे मौत के घाट उतार दिया गया था लेकिन दो चार दिन उथल पुथल के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया. इसी प्रकार अवैध बाड़ों में होरही गोवंशों की मौत पर भी लिखित शिकायतों के वावजूद भी आज तक किसी मामले में एफआईआर दर्ज नही हुई है। शायद गोवंश और पशु न बोल सकते और नही वोट दे सकते इसलिए नेताओं और इस सरकार के लिए किसी काम के नही।


  संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत देउर और पनगड़ी ग्राम की दो अलग अलग घटनाओं में किस प्रकार से गायों के आठ क्रूरता की गई है जिंसमे एक गाय का पैर और कूल्हा टूटा हुआ है और दूसरी के पेट में कुल्हाड़ी मार दी गई है.

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,


ज़िला रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587


Friday, January 26, 2018

Rewa, MP - (पशु क्रूरता) त्योंथर तहसील एवं ब्लॉक के झोटिया एवं मनिका पंचायत में अवैध कैद किया गोवंशों को, सैकड़ों की संख्या में चारे पानी भूषा बिना मरीं, स्थानीय प्रशासन की सहायता से किया गया आज़ाद, तोड़ा गया अवैध बाड़ा

दिनांक 26 जनवरी 2018, स्थान - त्योंथर रीवा मप्र।

   (शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र) देश मे मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवश शायद सभी के लिए उतना शुभ नही रहा है, विशेष तौर पर हमारी गौमाताओं के लिए न ही यह नया वर्ष ही मंगलमय रहा और न ही यह गणतंत्र दिवश।

        ज़िले में पशु क्रूरता थमने का नाम नही ले रही है। हाल ही में सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पनगड़ी बीट के भलघटी में सैकड़ों मवेशियों को घाट के नीचे जीवित फेंकने का मामला ज्यादा पुराना नही हुआ है एक बार पुनः जगह जगह पशु क्रूरता देखने को मिलने लगी है। 

   कहीं पशुओं के मुह पैर तार से बांधकर मरने के लिए  छोड़ दिया जाता है तो कहीं अवैध बाड़ों में बिना किसी समुचित चारे पानी और छाया की व्यवस्था के मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।

       अभी हाल ही में त्योंथर ब्लॉक और त्योंथर तहसील पहुचा गया तो पचामा पुल के आगे झोटिया एवं मनिका ग्राम के मध्य किसी विजय बहादुर सिंह, शैलेन्द्र सिंह, झोटिया सरपंच धिरंजन सिंह, भुआल सिंह, उमेश सिंह आदि के सहयोग से बबूल से भरी जमीन में लगभग 5 एकड़ के क्षेत्र में अवैध तरीक़े से कटीले तार लगाकर बाड़ा बनाया गया था जिसमें किसी भी प्रकार की पानी चारे अथवा भूषा पैरा की कोई व्यवस्था नही की गई थी। दिनांक 26 जनवरी को दोपहर 2 बजे झोटिया जाते समय देखा गया कि वहीं रोड में कार्य करने वाले  मिक्सर प्लांट के पास मनिका और झोटिया ग्राम के दबंगों ने यह गैर कानूनी कदम उठाकर गायों के लिए मौत का कैदखाना बनाया हुआ था। जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने यह पूरा वाकया देखा तो दिल दहला देने वाला था और बर्दास्त से बाहर भी था। सभी गायें भूंख प्यास से तड़प रही रंभा रही थीं और वहीं पर बाड़े के अंदर तीन बछिया मृत सी दिखीं। जब करीब जाकर देखा गया तो वहीं पर कुछ कुत्ते उनको नोच नोच कर खा रहे थे। उनमे से एक बछिया पूरी तरह से मर चुकी थी जिसकी जीवित में ही आंख की चील कौवों ने खा लिया था और दो बछिया अभी जीवित थीं जिनमे हल्की हल्की सांस चल रही थी और इनकी भी आंखों को चील कौवों ने नोच कर खा लिया था। जो कुत्ते पास में बैठे थे वह इसी ताक में दिख रहे थे कि उनको मौका मिले और वह जीवित ही इन बछियों को खा जाएं।

      सारा वाकया सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रताप गोशाला झोटिया के संचालक एवं विंध्य किसान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी को भी बताया गया जिस पर संबंधित एस डी एम त्योंथर को सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिषद के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अवगत कराया गया जिस पर एस डी एम त्योंथर ने तहसीलदार त्योंथर एवं जनेह थाना प्रभारी को तत्काल भेजने का अस्वासन दिया। इतने में ही एस डी ओ पी त्योंथर को भी सूचित किया गया जिस पर अगले एक घंटे में एस डी ओ पी पुलिस अनुभाग त्योंथर, तहसीलदार त्योंथर एवं संबंधित पटवारी, वेटेरिनरी सर्जन आदि पहुचे एवं त्वरित कार्यवाही करते हुए मौका पंचनामा बनाया और जे सी बी से कटीले तार हटाकर बाड़ा हटाया गया और संवंधित दोषियों के ऊपर एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश भी दिए। 

      पूरे रेस्क्यू आपरेशन एवं बाड़े को हटाने की प्रक्रिया  में प्रताप गोशाला झोटिया के संचालक एवं विंध्य किसान परिषद के अध्यक्ष रोहित तिवारी का अच्छा सहयोग रहा साथ ही विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजकुमार जी सहित अन्य लोग भी मौके पर उपस्थित हुए।

       इस प्रकार पुलिश प्रशासन, तहसील प्रशासन एवं वेटेरिनरी विभाग सहित क्षेत्रीय लोगों की उपस्थिति मद जेसीबी लगाकर कटीले तारों को पूरी तरह से हटाया गया। साथ ही ऐसे कृत्य करने वालों को स्पष्ट बताया गया कि अवैध बाड़ों को न बनाएं अन्यथा सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। 

     वहरहाल, पूरे मामले की जांच चल रही है और उपस्थित प्रशासनिक अमले द्वारा कहा गया कि जो भी दोषी हैं उन्हें बख्सा नही जाएगा।

    संलग्न - झोटिया एवं मनिका ग्राम में बनायी गयी अवैध बाड़े की फ़ोटो एवं कार्यवाही करवाता त्योंथर अनुभाग के प्रसाशनिक अमला।

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Thursday, January 18, 2018

Rewa, MP - (पशु क्रूरता) पनगड़ी ग्राम में फिर दिखी पशु क्रूरता, मवेशियों के तार से मुह पैर बांध कर छोड़ा।

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दिनांक 19 जनवरी 2018, स्थान भठवा, गढ़ रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले पनगड़ी बीट के भलघटी पहाड़  मे सैकड़ों मवेशियों को जीवित घाट के नीचे धकेले फेंके जाने का मामला अभी ज्यादा पुराना नही हुआ है, इसी पनगड़ी क्षेत्र में गोहत्यारों द्वारा फिर बेजुबान पशुओं के साथ अमानवीय और पाशविक क्रूरता का मामला प्रकाश में आया है। 

      पनगड़ी क्षेत्र से मिली जानकारी अनुसार भठवा निवासी पत्रकार प्रमोद सिंह द्वारा अपने फेसबुक और व्हाट्सएप्प के जरिये मुह पैर बुरी तरह बधे हुए मवेशियों के फोटो और वीडियो शेयर किए गए हैं जिसमे उनके द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से मुह पैर खोलकर मवेशियों को आज़ाद किया गया

       वास्तव में देखा जाय तो इस प्रकार की घटना कोई नई नही है। पूरे रीवा जिले से जगह जगह गोवंशों के साथ निरंतर क्रूरता के प्रकरण सामने आ रहे हैं जिसके संदर्भ में देश भर में पशु अधिकारों के लिए कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं जैसे श्रीमती मेनका गांधी का पीपल फ़ॉर एनिमल्, ध्यान फाउंडेशन, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया सहित अन्य संस्थान इस प्रकार की पशु क्रूरता बंद किये जाने और दोषियों के ऊपर वैधानिक कार्यवाही किये जाने के लिए निरंतर प्रयाशरत हैं। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ज़िले के समय समय पर पशु क्रूरता के प्रकरण उक्त सभी संस्थानों को सूचित किये जाते रहे हैं।

        सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि पिछले कई वर्षों से पशुओं के साथ क्रूरता बढ़ती जा रही है लेकिन ज़िला एवं प्रदेश के शासन प्रशासन द्वारा अब तक कोई सार्थक कार्यवाही नही की गई है।

      ज़िला प्रशासन पशु क्रूरता रोक पाने और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करवा पाने में पूरी तरह अक्षम साबित हुआ है। प्रदेश और ज़िले में बने गोसंवर्धन बोर्ड मात्र औपचारिक बोर्ड हैं जिसमे पशुओं की देखभाल और सुरक्षा के लिए आने वाले करोड़ों का बन्दरवाट कर लिया जाता है और कोई भी कार्य नही किये जा रहे हैं।

     प्रश्न यह भी उठता है कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंशों की रक्षा सुरक्षा के लिए बनाये गए इतने अधिनियमों के वावजूद भी आज मवेशियों की इतनी अधिक दुर्दशा क्यों है?

संलग्न - कृपया संलग्न फ़ोटो में देखें किस प्रकार सिरमौर वन परिक्षेत्र और तहसील अंतर्गत आने वाले पनगड़ी ग्राम में गोवंशों का मुँह पैर बांध कर छोड़ दिया जाता है।

   - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139।

"(पशु क्रूरता) चरनोई तो ख़त्म ही हो गयी, पशुओं को पैरा एवं भूषा से भी किया जा रहा वंचित, गहाई-मिजाई के बाद किसान मार देता है माचिस, पूरा पैरा धू धू करके जाता है जल"

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(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र) चलिए आज  किसान और गोवंशों की दुर्दशा पर थोडा आगे प्रकाश डालते हैं और शोध करते हैं की इस समस्या की जड़ कहाँ है.
     चाहे मानव कितनी भी लच्छेदार बातें करे. चाहे मानव कितना भी मशीनी उपकरण का अविष्कार अपने विलासिता के लिए कर ले, फसल और उपज की सुरक्षा की बात करे, और अपनी भूंख का कितना भी रोना रोये शायद आज क्या कभी भी मानव की भूंख को न तो इंसान और और न ही भगवान् शांत कर सकता है. इतिहास, शास्त्र, ग्रन्थ इस बात के गवाह हैं की मानव का पेट और भूंख जब दोनों बढ़ने लगी तो मानव मानव न रहकर हैवान और राक्षस बन गया. रावण, कुम्भकर्ण, कंस, हिरनकश्यप, और पता नहीं कितने राक्षसों की कहानियां मानव से राक्षस बनने की हैं और अंततः उनके अंत की हैं. और आज फिर वही इतिहास दोहराए जाने की स्थिति में खड़ा है. किसी ने बिलकुल ठीक ही कहा है की इतिहास हमेशा अपने आप को दोहराता है. चाहे इतिहास में बुरा से बुरा हुआ रहा हो वह भी और चाहे अच्छा से अच्छा हुआ रहा हो वह भी दोनों ही दोहराए जाते हैं.
     अच्छा तो जो होना था वह भारत वर्ष में हो चूका अब तो शायद बुरे का ही समय आ चुका है. तभी तो शास्त्रीय ढंग से अच्छा और धार्मिक काम करने वाला हर वह शख्स दुनिया की नजर में मूर्ख, ढोंगी, दिखावटी कहलाता है और तथाकथिक गोमांस, मांसाहार, शराब नशा करने वाला समाज या व्यक्ति एडवांस्ड पढ़ा लिखा और मॉडर्न कहलाता है तो भला आज जब ज्यादातर समाज बीफ ईटर हो चूका है गोवंशों की सुरक्षा के लिए लड़ने वाला और उनके अधिकार की बात करने वाला व्यक्ति वेवकूफ मूर्ख नहीं कहलायेगा तो भला और क्या कहलायेगा?
   
मानव के अतिक्रमण ने समाप्त कर दिया चरनोई की भूमि, पशुओं के लिए नहीं है धरती में अब कोई स्थान शेष -
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  जी हाँ हकीकत आज यही है की जो कभी गोचर और चरनोई की भूमि हुआ करती थी वह शासकीय माफिया एवं प्राइवेट माफिया ने मिलकर पूरी तरह से समाप्त कर दिया. कहीं कुछ नहीं बचा है. यदि बचा है तो मात्र पथरीला स्थान और वह भी आज माइनिंग के नाम बुरी तरह से दोहन किया जा रहा है. किसान के लिए कभी पशु पशुधन की श्रेणी में आते थे लेकिन आज कितना बड़ा दुर्भाग्य है की यही पशु चूँकि किसान के लिए दूध के अतिरिक्त खेती किसानी के लिए उपयोगी नहीं रहे तो सबके लिये बोझ बन गए. मानाकि मशीन का अविष्कार मानव जीवन के लिए वरदान साबित हुआ है और उसकी ज्यादातर भौतिक शुख सुविधाओं विलासिता की पूर्ती करने में सहायक सिद्ध हुआ है पर क्या यह मशीन सब कुछ कर पाएंगी? क्या वास्तव में गोवंशों अथवा पशुओं के बिना मानव धरती पर अकेले रह पायेगा? क्या गोवंशों के बिना भारतीय संस्कृति का वजूद रह पायेगा? बहुत सारे अनुत्तरित प्रश्न है जो आज भारतीय मानव से जबाब तलास रहे हैं.
  
  खर पतवार के नाम पर किसान पैरा भूषा में खेत में ही लगा देता है आग, जल जाता है सब धू धू करके -
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पशुओं का पूरा अधिकार छीन लिया गया है. पहले उनको अनुपयोगी बताकर घर से खदेड़ दिया गया अब वह मारे मारे फिर रहे हैं. मानव को मात्र दूध, दही घी, पनीर, मक्खन ही बस पसंद है बांकी पशु उसे पसंद नहीं. जिस प्रकार से आज के वर्तमान विकसित समाज में बूढ़े हो चले माँ बाप हमे पसंद नहीं आते और भार लगते हैं वैसे ही गोवंश भी हमारे लिए अब पूरी तरह से भार बन चुके हैं. पहले मानव ने उनकी चरनोई और गोचर भूमि को समाप्त किया और अब उनके लिए शेष बचे पैरा भूषा को भी अपने लिए अनुपयोगी समझ कर माचिस मार रहा है. आज कहीं भी किसी भी गाँव में चले जाएँ तो देखने को मिलता है की आज जो स्वार्थी किसान अपनी फसल की दुहाई दे रहा है वह बिना विचार किये हुए जैसे ही फसल की मिजाई गहाई पूरी होती है बचे हुए भूषे एवं पैरा में माचिस मारकर जला देता है. आज कहीं कोई हरियाली नहीं है क्योंकि गोचर भूमि ही नहीं बची हुई है तो भला हरियाली कहाँ बचेगी. यदि हरियाली है भी तो वह है फसल की खेतों में हरियाली जिस पर किसान का पहरा है, और पहरा होना भी चाहिए. अब यदि वही किसान गहाई के बाद बचे हुए पैरे एवं भूषे में माचिस मार देगा तो भला मवेशिओं के लिए क्या ख़ाक बचेगा खाने के लिए? मवेशी दर दर की ठोकर मारे फिर रहे हैं. उन्हें खाने पीने के लिए कहीं कुछ नहीं बचा है. इस स्वार्थी मानव द्वारा दूध पीकर घी, दही मट्ठा खाकर आवारा छोड़ दिए गए इन गोवंशों के लिए न तो इस धरती में कोइ जगह है न ही कहीं अन्यत्र. आखिर यह बेचारे बेजुबान पशु जांए तो जाएँ कहाँ? कौन है इनका मालिक? क्या अहिंसा और सभी जीवों में एक ही ईश्वर का पाठ पढ़ाने वाली भारतीय संस्कृति का यही हाल होगा? क्या कभी भारतीय संस्कृति में माता की उपमा प्राप्त गौ माता की इसी भारतीय समाज मे इससे भी अधिक और दुर्दशा देखने को मिलेगी? क्या भगवान् शिव के वाहक नंदी के लिए भगवान् भोलेनाथ के बानाये इस संसार में और और जगह नहीं बची है? अपने स्वार्थ और पेट की दुहाई देने वाले इस कलयुगी मानव के लिए  यह सब प्रश्न है जिनका जबाब इसे देना पड़ेगा अन्यथा वह समय दूर नहीं जब भारतीय संस्कृति विलुप्त प्राय संस्कृतियों में शामिल हो जाएगी. क्योंकि जब गोवंश ही नहीं रहे तो भारतीय संस्कृति कहलाने का ही क्या औचित्य होगा.

  - शिवानंद द्विवेदी 7869992139

Saturday, February 25, 2017

(Rewa, MP) श्रीमती मेनका गाँधी जी का कलेक्टर रीवा को अल्टीमेटम – तत्काल जांच कर करो कार्यवाही


दिनांक – 26/02/2017
स्थान –  (रीवा, मप्र)


अवैध बाड़ों में गौवंशों की करुण पुकार पहुची दिल्ली तक - श्रीमती मेनका गाँधी जी के आदेश पर कलेक्टर ने गठित की एसडीएम और डिप्टी डायरेक्टर पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) दिनांक 24 फरवरी महाशिरात्रि के दिन भगवान् शिव के वाहक नंदी की माता श्री गौमाता की अवैध बाड़ों में हो रही हत्याओं की करुण पुकार जब श्रीमती मेनका गाँधी जी के कार्यालय नई दिल्ली तक पहुची तो वहां से कलेक्टर रीवा को फ़ोन कर तत्काल पुनः एक जांच टीम का गठन कर संयुक्त टीम में एसडीएम मनगवां के पी पाण्डेय और डिप्टी डायरेक्टर पशु-चिकित्सा विभाग रीवा को सम्बंधित अमलों के साथ भेज दिया गया. जांच के दौरान आवेदक एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को भी मोबाइल फ़ोन के माध्यम से कॉल करके घटना स्थल पर हिनौती के पास पाण्डेय ढाबा में बुलवाया गया.

श्रीमती मेनका गाँधी जी का कलेक्टर रीवा को अल्टीमेटम – तत्काल जांच कर करो कार्यवाही

जाँच के दौरान एस डी एम के पी पाण्डेय द्वारा बताया गया की यह जांच टीम केन्द्रीय मंत्री एवं पशु कल्याण विभाग की अध्यक्ष श्रीमती मेनका गाँधी जी सहित दर्ज़नों विभागों को एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा भेजे गए दर्ज़नों ईमेल जिसमे की थाना गढ़ अंतर्गत हिनौती, सोनवर्षा, हर्दी-अटरिया, लौरी, गंतीरा-कटरा, एवं लोटनी के अवैध बाड़ों की फोटो विडियो सहित सबूत के तौर पर भेजे गए साक्ष्यों पर कार्यवाही के फलस्वरूप है. श्रीमती मेनका गाँधी जी सहित अन्य विभागों को भेजे गए साक्ष्यों फोटो, विडियो आदि में दिखाए गए इंटरव्यू आदि में कई दर्ज़नों गायें बाड़ों में भूंख प्यास से बिना किसी छत्र-छाया के मृत पाए गए थे.  
   इस जांच के विषय में आवेदक को भी श्रीमती मेनका गाँधी जी के कार्यालय से प्राप्त ईमेल में यह जानकारी भेजी गयी थी की गौवंशों के प्रति हो रही प्रताड़ना के विषय में कलेक्टर से भी मैडम की बात की गयी थी जिसके फलस्वरूप कलेक्टर ने दो सदस्यीय टीम का गठन किया था और तीन दिवश के अन्दर जांच प्रतिवेदन मागा था. 

गौ-अभयारण्य के लिए 1300 एकड़ से अधिक का शासकीय भूभाग उपलब्ध

    इस प्रकार दिनांक 24 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन जांच हुई और जांच के दौरान आवेदक को भी घटनास्थल पर बुलाया गया. जांच में आवेदक से गौवंशों के प्रताड़ना में किये गए कार्य के विषय में जानकारी चाही गयी. आवेदक एवं सामाजिक कार्यकर्ता ने गौवंशों की सुरक्षा के लिए देश के उच्चतम कार्यालयों तक भेजे गए अपनी मांग और आवेदन जिसमे की सिरमौर तहसील अंतर्गत हिनौती हल्का 39 के गदही नामक स्थान में 1300 एकड़ से अधिक के शासकीय भूभाग में गौ-अभयारण्य बनाए जाने की बात कही गयी है, इस बात से भी कलेक्टर रीवा द्वारा भेजे गए दो सदस्यीय जांच दल को अवगत कराया गया. इस बीच आवेदक द्वारा कलेक्टर रीवा, पशुपालन एवं पशुसंवर्धन विभाग भोपाल, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया चेन्नई, चीफ सेक्रेटरी मप्र शासन भोपाल, एवं डीजीपी भोपाल मप्र शासन को भी भेजे गए विभिन्न आवेदनों की प्रतिलियाँ सौंपीं.

हिनौती हल्का के गदही में गौ अभयारण्य बनाया जाना
गौवंशों के लिए साबित होगी एक नवनीत पहल

     इस प्रकार जांच लगभग दो घंटे के आसपास चली जिसमे आवेदक एवं सामाजिक कार्यकर्ता की भी बाड़ों के विषय में मंशा चाही गयी. इस पर सामाजिक कार्यकर्ता का स्पष्ट कहना था की ऐसे निराकरण निकाले जाने चाहिये जिसमे पशुओं के साथ क्रूरता भी न हो और साथ ही किसानों को भी नुकसान न हो. इस प्रकार तात्कालिक रूप से सभी अवैध बाड़ों में कैद पशुओं को सर्वप्रथम जिले एवं प्रदेश की गौशालाओं में पहुचाया जाना चाहिए जहाँ पर इनका इलाज़ एवं पोषण होना चाहिए जिससे अत्यंत कमज़ोर हो चुके गौवंशों की जाने बचाई जा सके और साथ ही भविष्य में गौवंशों की प्रताड़ना को रोकने और किसानों के हित की रक्षा के लिए हिनौती हल्का 39 के गदही नामक ग्राम/स्थान पर 1300 एकड़ से अधिक के शासकीय और अनुपयोगी भूभाग पर विशाल गौ अभयारण्य बनाया जाना चाहिए. ऐसा बनाया जाने वाला अभयारण्य न सिर्फ गौवंशों की सुरक्षा, पालन, पोषण एवं इलाज़ के लिए एक नवनीत पहल होगी बल्कि इस प्रकार बने गौ अभयारण्य से बायो-खाद उत्पादन, बायो-कीटनाशक, दुग्ध उत्पाद, एवं रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी जिससे लगातार रासायनिक खादों, एवं कीट नाशकों के हो रहे निरंतर प्रयोग से बंजर पड़ चुकी धरती से की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाई जा सकेगी.

सभी जांचें मात्र कागजों पर - यथार्थ में अब तक कहीं कुछ भी नहीं

वहरहाल जब तक इन पशुओं के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं की जाती तब तक यह सभी जांचें मात्र कागजों पर ही सीमित रह जाएँगी. यह कोई अकेली जांच नहीं है जो आवेदक एवं सामाजिक कार्यकर्ता के प्रयासों से हो रही है. इसके पहले भी लगभग हर माह उच्चस्तरीय दो तीन जांचें होती रही हैं परन्तु कोई भी जांच का अब तक सार्थक निष्कर्ष नहीं निकल पाया है. सभी अवैध बाड़े ज्यों के त्यों अपने स्थानों पर बने हुए हैं और उनमे कैद गौवंशों की निरंतर मौतें जारी हैं. मानकों की बात तो छोंड ही दें, इन मूक बेजुवान पशुओं के लिए न कोई चारा, न कोई भूषा, न ही किसी समुचित छाया की व्यवस्था बनाई गयी है. स्थिति इतनी दुखदायी है की आँखों से अंशु प्रवाहित हो चलें. शायद भगवान् के अतिरिक्त इस धरती पर इन मूक बेजुवानों की दुर्दशा को देखने सुनने वाला कोई नहीं बचा है. और जहाँ तक भगवान् का प्रश्न है तो शायद उसने तो इन पशुओं को इस पशुविक योनी में ही इसलिए कलयुग में भेजा है की के यह इसी तरह अपने पूर्व जन्मों के कर्म संस्कारों का बुरा फल भोगें. जहाँ तक मानव द्वारा इनकी निरंतर की जा रही प्रताड़ना का प्रश्न है तो कहना यह होगा की मानव अपने कुकर्मों और दुष्कर्मों से भारतीय संस्कृति के हिन्दू धर्म के अनुसार यह सब गौहत्या आदि घृणित कृत्या करके अपने जन्मों को और अधिक विगाड़ रहा है. जिस हिन्दू सनातन संस्कृति में गौवंशों की पूजा माता समझ कर की जाती रही है उसकी यदि आज यह दुर्दशा है तो यह सम्पूर्ण भारतीय इतिहास के स्वर्ण पन्नों पर घोर कालिख तो है ही इन मानव के रूप में राक्षसों की भी अंतिम स्थिति को ही दर्शाता है. संभवतः मानव का पतन इस कलयुग में इससे अधिक और कितना हो पायेगा यह देखना होगा. शास्त्रों में तो यह भी कहा गया है कि गौमांस भक्षण और जीव हत्या के साथ ऐसा भी समय आएगा जब यह पतित मानव स्वयं मानव की ही मांस भक्षण प्रारंभ कर देगा. कैनिबल अर्थात मानव-मांस भक्षी होकर व्यक्ति स्वयं शास्त्रों में वर्णित राक्षस हो जायेगा. फिर इस धरती पर दस मुख, बीस हाँथ आदि वाले राक्षस ढूँढने की जरूरत किम्व्दंतियों में न पड़ेगी सब कुछ साक्षात् ही दिखने लगेगा.

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Thursday, February 9, 2017

(Rewa, MP) कांकर-डाढ़ पंचायती क्षेत्र में तार से गायों का बाँध दिया जाता है मुह, चारा पानी बिना तड़प कर मरते गौवंश


कांकर-डाढ़ पंचायती क्षेत्र में तार से गायों का बाँध दिया जाता है मुह,
चारा पानी बिना तड़प कर मरते गौवंश


(गढ़/कांकर/गंगेव, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) गौवंशों के प्रति क्रूरता किसी भी हद तक कम होने का नाम नहीं ले रही है. दिनांक 07 फरवरी की सुबह लगभग नौ बजे एक और ह्रदय विदारक वाकया सामने आया जिसमे एक भूरे-लाल रंग की गाय के मुख में तार बांधकर उसे छोंड दिया गया था. स्वाभाविक है की इस स्थिति में गाय न तो कुछ खा सकती थी और न ही पी सकती थी. मामला था रीवा के त्योंथर तहसील अंतर्गत कांकर पंचायत और डाढ़ पंचायत के आसपास का. भमरिया में अवैध बाड़े में पशुओं के मरने और उनके ऊपर क्रूरता का प्रकरण रिकॉर्ड करने के बाद जैसे ही आगे जाया गया तो पाया गया की कांकर में वन चौकी के पास एक गाय का मुख बुरी तरह से तार से बाँध दिया गया है. वह इधर उधर घूम रही थी पर कुछ भी खाने पीने में असमर्थ थी.
 वन चौकी कांकर के पास उपस्थित चौकी गार्ड को मामला बताया गया तो चौकी गार्ड ने गाय का तार निकालने का प्रयास किया. परन्तु गाय अकेले पकड़ में नहीं आ पाई. इस प्रकार मामले को डाढ़ पंचायत के निवासी पुष्पराज तिवारी, इन्द्रलाल साकेत आदि को बताया गया. तब जाकर चार-पांच लोगों के सहयोग से गाय को किसी तरह पकड़कर उसके मुख में बांधा हुआ तार निकाला गया. सम्पूर्ण घटना की फोटो एवं विडियो रिकॉर्डिंग भी कर ली गयी है जो की यूट्यूब में भी अपलोड कर दी गयी है जिसे पूरी दुनिया देख सकती है
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घटना का स्थल पंचनामा बनाकर गढ़ पुलिश को सूचित किया गया
     
गाय के मुख में बंधे तार और उसे निकालने के सम्पूर्ण प्रकरण का स्थल पंचनामा भी बनाया गया. जिसमे वहां पर उपस्थित सभी लोगों ने अपना हस्ताक्षर किया जो की यहाँ पर संलग्न भी है. पूछताछ करने पर भी यह जानकारी नहीं हो पायी की वह कौन से असमाजिक क्रूर व्यक्ति थे जिन्होंने ऐसा घोर कृत्य किया. सम्पूर्ण घटना की जानकारी गढ़ थाना प्रभारी बी आर सिंह को भी मोबाइल फ़ोन के माध्यम से दे दी गयी. लेकिन दुर्भाग्य यह है की गौवंन्शों और पशुओ के साथ निरंतर हो रही क्रूरता और अत्याचार पर अब तक रीवा जिले में रोक नहीं लग पा रही है.

लालगांव के हर्दी-अटरिया में बने अवैध बाड़े में दिनांक 09 फरवरी
को कुछ और गायों का हुआ दुखद अंत

     इसी बीच दिनांक 09 फरवरी दिन वृहस्पतिवार को लालगांव पंचायत स्थित हर्दी-अटरिया नामक स्थान पर जाया गया तो वहां का नज़ारा देखकर होश उड़ गए. जिस हर्दी-अटरिया के अवैध बाड़े को पुलिश बंद बता रही थी वहां पर पुनः वही बाड़ा बना हुआ पाया गाय. इतना ही नहीं जाब बाड़े की व्यवस्था देखा गया तो पता चला की सी ई ओ जनपद पंचायत गंगेव के माध्यम से प्राप्त हुआ कटीला तार अभी भी बाड़मे लगाया हुआ है. इस बात से साफ़ जाहिर होता है की पूरे ब्लाक गंगेव में बने अवैध बाड़ों में कहीं न कहीं शासन प्रशासन की सः है अन्यथा आम आदमी में इतनी जुर्रत कहाँ की वह कानून को इतनी आसानी से हाँथ में ले सके.  
घटना स्थल पर कटीले तारों के अन्दर बनाये गए बाड़ों में तीन चार गायें दयनीय स्थिति में नज़र आयें जो बहुत जल्दी मरने वाली थीं और एक गाय तो मृत बाड़े में ही पड़ी हुई थी जिसके शरीर से बदबू भी आ रही थी जो की बाड़े में महामारी फ़ैलाने का साफ़ साफ़ इशारा कर रही थी. इस प्रकार देखा जा सकता था की जिन असामाजिक तत्वों और गौ हत्यारों ने अवैध तरीके से बाड़ा बनाया हुआ था उन्होंने न तो कोई उचित चारे पानी की व्यवस्था की हुई थी और न ही मृत पड़े सड़ांध लिए मवेशी को उठाने की ही कोई व्यवस्था थी. आज गौवंशों के प्रति क्रूरता दिन पर दिन बढती जा रही है. कहीं न कहीं यह स्वर्हती मानव आज गौवंशों की वश्यकता कम हो जाने के कारण बैलों को आवारा छोंड दे रहा है जिससे वह तथाकथित किसानों की फसलों को नुकसान पंहुचा रहे हैं और जिसके कारण लोग कानून को धता बताकर गौवंशों के ऊपर निरंतर अत्याचार कर रहे हैं.

बैलों और पशुओं की देशव्यापी सीमित नसबंदी समाधान का एक पहलू

   यद्यपि सुनने में तो थोडा अटपटा लग सकता है पर कहना पड़ेगा की यदि आज बैलों और गौवंशों की आवश्यकता इस समाज को कम है तो क्यों न पशुपालन और पशु चिकत्सा विभाग के सहयोग से सरकारें इन पशुओं की नसबंदी करवा दें. इससे कम से कम यह तो होगा की एक जनरेशन के बाद दूसरी जनरेशन सीमित हो जाएगी जिससे इन बेजुबान एवं मूक गौवंशों और पशुओं के ऊपर अत्याचार होने से बचाया जा सकता है. अब जहाँ तक सवाल है मानव की उपयोगिता का तो यदि आज इस कलयुगी मानव को गौवंश और गायें बूढ़े माँ बाप की तरह भार बन गयी हैं तो इस मानव को दुग्ध उत्पाद खाने पीने का भी कोई अधिकार नहीं होना चाहिए. राईट टू मिल्क प्रोडक्ट यानि दुग्ध उत्पाद काधिकार के अंतर्गत सरकारें ऐसा संवैधानिक नियम कानून लायें जिसमे हर वह व्यक्ति जो दुग्ध उत्पाद का सेवन करे उसे गौवंशों की सुरक्षा और एनिमल वेलफेयर के लिए एक निश्चित टैक्स देना पड़े तब जाकर गौवंसों की स्थिति में सुधार हो सकता है और उनके पालन और सुरक्षा के लिए देश व्यापी बजट का आवंटन कर कार्य किया जा पायेगा. शासन-प्रशासन के साथ समाज की भी जिम्मेदारी गौवंशों की सुरक्षा के लिए तय होनी चाहिए और जो भी जिम्मेदारी से भागे उसके ऊपर ऐसे बनाये गए राईट टू मिल्क प्रोडक्ट अधिनियम के तहत दुग्ध उत्पाद से वंचित किया जाना चाहिए.  

जिले में पशु सुरक्षा और पशु क्रूरता सम्बन्धी सभी अधिनियम निष्क्रिय

कहने को तो पशुओं और गौवंशों की सुरक्षा के लिए इतने कानून बने हैं पर देखना होगा की उन नियमों का पालन क्या कहीं भी पूरे मप्र में सही तरीके से हो पा रहा है. मप्र में विशेष तौर पर गौवंश प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक वर्ष 2010/12 में पारित किया गया जिसमे गौवंशों के वध पर और प्रताड़ना पर पांच हज़ार तक का जुर्माना और अधिकतम सात साल के कैद का प्रावधान है और यह अपराध संज्ञेय भी है साथ ही आरोपी को अपने आप को दोषमुक्त सिद्ध करना पड़ेगा ऐसा प्रावधान है. इसी प्रकार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अंतर्गत भी कई प्रावधान हैं जिन्हें यदि कड़ाई से लगाया जाये तो पशुओं और गौवंशों के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता काफी हद तक बंद की जा सकती है. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत भी पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने का प्रावधान है.

संलग्न – त्योंथर ब्लाक के कांकर पंचायत में वन चौकी कांकर के पास गौ के मुख में बंधे तार को निकलने का विडियो और कुछ फोटो.
https://www.youtube.com/watch?v=SgOqXzwNb38&t=4s

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