"One who is unattached to the fruits of his work and who works as he is obligated is in the renounced order of life, and he is the true mystic: not he who lights no fire and performs no work". - |||श्रीमद भगवद गीता, अध्याय 6, Verse 1|||
Friday, August 23, 2019
धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों की ठोकर से घायल हुई गाय, स्थिति गंभीर (मामला जिले के थाना गढ़ अन्तर्गत भठवा मार्केट के पास का, पशु संजीवनी 1962 को किया गया सूचित, डॉक्टर और सर्जनों की टीम ने किया इलाज)
Monday, June 25, 2018
हिन्दू बाहुल्य समाज में गाय के साथ क्रूरता, जिम्मेदार मात्र हिन्दू (मामला ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी एवं देउर ग्राम का जहां पर गायों को दो अलग अलग घटनाओं में धारदार हथियार से मारा)
दिनांक 26 जून 2018, स्थान - गढ़, रीवा-मप्र
(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)
हे भगवान क्या तूने इस कलयुग में ऐसे ही दिन देखने के लिए मॉनव को पैदा किया था की भारतीय संस्कृति में पूज्य माता और देव स्वरूप उपमा प्राप्त गोमाता को आज अपने ही हिंदुओं से बर्बरता और क्रूरता का शिकार होना पड़ेगा.
मानाकि यदि कोई दूसरा सम्प्रदाय वर्ग होता जहां पर गाय को मात्र उपभोग की पशु समझा जाता है वहां गोवंशों के मांस भक्षण की परंपरा तक है परंतु क्या हिन्दू बाहुल्य समाज जहां पर आज से कुछ वर्षों पहले इन्ही गोवंशों को खेत खलिहान से लेकर हरछठ में पूजने तक की परंपरा थी आज अपने ही लोगों से इन बेजुबान मूक पशुओं की जान में बन आई है.
आये दिन हो रही पशु क्रूरता
आज रीवा संभाग में जहां पर कभी राजशाही हुआ करती थी और हिन्दू धर्म के गो-ब्राह्मण को सुरक्षा मिलनी थी आज उसी रीवा राज्य में आये दिन पशु क्रूरता बढ़ती जा रही है. पिछले 5 वर्षों का अनुभव यह बताता है की ज्यादातर फसल नुकसानी के नाम पर शासन प्रशासन की अनदेखी और अव्यवस्था की वजह से अवैध बाड़ों में गोवंशों को कैद कर बिना चारा पानी और भूषा के छोंड़ दिया जा रहा जिससे घुट घुट कर उनकी जान जा रही है. इसके पीछे का तर्क आवारा पशुओं की वजह से किसान की फसल नुकसानी बताया जाता है लेकिन यह नही बताया जाता की आखिर किसान की इस समस्या का मानवीय समाधान क्या है और साथ ही यह भी नही बताया जाता की आखिर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का क्या हुआ? चलिए गाय को माता न भी माना जाए, हिन्दू संस्कृति का हवाला न भी दिया जाए तो यह कोई बताए की क्या इस संविधान की किताब और आई पी सी के सेक्शन में पशुओं का कोई अधिकार नही है?
पनगड़ी में कुएं में गिरकर गायों की हुई मौत
थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी ग्राम के आसपास अक्सर ही गोवंशों से साथ क्रूरता की वारदातें सामने आती रहती है. अभी पिछले दिनों ही निकटतम ग्राम कठमना में पैर में चोट लगी गाय मिली थी जिसके इलाज के लिए रीवा से डॉक्टर आये थे. फिर पनगड़ी में ही दो अलग अलग घटनाओं में कुएं में गाय गिरने से एक को जीवित निकाल लिया गया था जबकि एक अन्य संकरी कुआं होने की वजह से मर गई थी.
पनगड़ी भलघटी में सैकड़ों गायों को उतारा था मौत के घाट
पनगड़ी से ही लगे भलघटी नामक जंगली पहाड़ी और गहरी खाईं में सैकड़ों गायों को पहाड़ के ऊपर से फेंकने का मामला सामने आया था जिंसमे पिछले वर्ष ठंड के मौसम में दिल्ली से पीपल फ़ॉर एनिमल्स, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, एनिमल हसबेंडरी विभाग सहित एन जी ओ ध्यान फाउंडेशन तक के लोग आये थे और घटना का संज्ञान लेकर जांच पड़ताल हुई थी. जिले की थाना गढ़ और लाल गांव चौकी की पुलिश, वेटेरिनरी विभाग, फारेस्ट विभाग और राजस्व अमला सहित घटनास्थल का निरीक्षण किया था. अज्ञात के ऊपर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दये गए थे. इसके बाद क्या हुआ इसका किसी को रता पता नही है.
पनगड़ी और देउर में फिर मारा गायों को
अभी फिर दो अलग अलग घटनाओं में दो गायों के साथ क्रूरता होने का मामला प्रकाश में आया है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना गढ़ एवं तहसील त्योंथर अंतर्गत देउर ग्राम में समाजसेवी दिलीप सिंह ने जानकारी दी की उन्हें कहीं रास्ते में एक गाय घायल एवं लावारिश अवस्था में मिली है जिसके पीछे के पैर में खुर के पास चोट लगी है साथ ही ऊपर कूल्हा बुरी तरफ टूटा हुआ है जिससे गाय चलने में असमर्थ थी. इस जानकारी के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा संबंधित गढ़ वेटेरिनरी सर्जन विवेक मिश्रा को जानकारी दी गई जिसके बाद कटरा अंतर्गत आने वाले कम्पाउण्डर जायसवाल को घायल गाय का इलाज करने के लिए कहा गया. तब डॉक्टर के आने के बाद सामान्य तौर पर घाव की मलहम पट्टी और इलाज हुआ.
इसी प्रकार एक अन्य घटनाक्रम में पनगड़ी पनगड़ी निवाशी लाला शुक्ला और दिनेश त्रिपाठी द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट द्विवेदी को फ़ोन करके जानकारी प्रदान की गई की सुदामा यादव निवासी पनगड़ी की गाय को किसी हत्यारे ने पेट में कुल्हाड़ी से हमला करके बुरी तरह से घायल कर दिया है. जानकारी मिलने के बाद हिनौती पशु औसधालय में कार्यरत समयलाल साहू को बताया गया जिस पर साहू घटनास्थल पर पहुच कर घायल गाय का दवा इलाज किये. यद्यपि देउर और पनगड़ी दोनो ही घटनाओं में घायल गायों को मात्र दवा और मलहम पट्टी की नही बल्कि पूरे सर्जरी की आवश्यकता है जिसके लिए पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 को भी सूचित कर दिया गया है. यद्यपि अभी तक कोई सर्जन उपस्थित नही हुए हैं.
सरकार और प्रशासन को संज्ञान लेकर गोवंश प्रताड़ना बन्द करवानी चाहिए
जिस प्रकार से रीवा ज़िले में पशुओं के साथ क्रूरता दिनो दिन बढ़ रही है सरकार को चाहिए ऐसे मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा कर कानूनी कार्यवाही करे. दुर्भाग्य तो यह है की सरकार से ऐसी क्या उम्मीद की जाए. यहां तो रीवा ज़िले में हो रही पशु क्रूरता की वारदातों पर एफआईआर तक दर्ज नही होती. भलघटी पनगड़ी का मामला अभी ज्यादा पुराना नही हुआ है जहां पर सैकड़ों गायों को क्रूरता पूर्वक घाट के नीचे मौत के घाट उतार दिया गया था लेकिन दो चार दिन उथल पुथल के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया. इसी प्रकार अवैध बाड़ों में होरही गोवंशों की मौत पर भी लिखित शिकायतों के वावजूद भी आज तक किसी मामले में एफआईआर दर्ज नही हुई है। शायद गोवंश और पशु न बोल सकते और नही वोट दे सकते इसलिए नेताओं और इस सरकार के लिए किसी काम के नही।
संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत देउर और पनगड़ी ग्राम की दो अलग अलग घटनाओं में किस प्रकार से गायों के आठ क्रूरता की गई है जिंसमे एक गाय का पैर और कूल्हा टूटा हुआ है और दूसरी के पेट में कुल्हाड़ी मार दी गई है.
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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,
ज़िला रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587
Friday, January 26, 2018
Rewa, MP - (पशु क्रूरता) त्योंथर तहसील एवं ब्लॉक के झोटिया एवं मनिका पंचायत में अवैध कैद किया गोवंशों को, सैकड़ों की संख्या में चारे पानी भूषा बिना मरीं, स्थानीय प्रशासन की सहायता से किया गया आज़ाद, तोड़ा गया अवैध बाड़ा
दिनांक 26 जनवरी 2018, स्थान - त्योंथर रीवा मप्र।
(शिवानंद द्विवेदी रीवा मप्र) देश मे मनाया जाने वाला गणतंत्र दिवश शायद सभी के लिए उतना शुभ नही रहा है, विशेष तौर पर हमारी गौमाताओं के लिए न ही यह नया वर्ष ही मंगलमय रहा और न ही यह गणतंत्र दिवश।
ज़िले में पशु क्रूरता थमने का नाम नही ले रही है। हाल ही में सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पनगड़ी बीट के भलघटी में सैकड़ों मवेशियों को घाट के नीचे जीवित फेंकने का मामला ज्यादा पुराना नही हुआ है एक बार पुनः जगह जगह पशु क्रूरता देखने को मिलने लगी है।
कहीं पशुओं के मुह पैर तार से बांधकर मरने के लिए छोड़ दिया जाता है तो कहीं अवैध बाड़ों में बिना किसी समुचित चारे पानी और छाया की व्यवस्था के मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
अभी हाल ही में त्योंथर ब्लॉक और त्योंथर तहसील पहुचा गया तो पचामा पुल के आगे झोटिया एवं मनिका ग्राम के मध्य किसी विजय बहादुर सिंह, शैलेन्द्र सिंह, झोटिया सरपंच धिरंजन सिंह, भुआल सिंह, उमेश सिंह आदि के सहयोग से बबूल से भरी जमीन में लगभग 5 एकड़ के क्षेत्र में अवैध तरीक़े से कटीले तार लगाकर बाड़ा बनाया गया था जिसमें किसी भी प्रकार की पानी चारे अथवा भूषा पैरा की कोई व्यवस्था नही की गई थी। दिनांक 26 जनवरी को दोपहर 2 बजे झोटिया जाते समय देखा गया कि वहीं रोड में कार्य करने वाले मिक्सर प्लांट के पास मनिका और झोटिया ग्राम के दबंगों ने यह गैर कानूनी कदम उठाकर गायों के लिए मौत का कैदखाना बनाया हुआ था। जब सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने यह पूरा वाकया देखा तो दिल दहला देने वाला था और बर्दास्त से बाहर भी था। सभी गायें भूंख प्यास से तड़प रही रंभा रही थीं और वहीं पर बाड़े के अंदर तीन बछिया मृत सी दिखीं। जब करीब जाकर देखा गया तो वहीं पर कुछ कुत्ते उनको नोच नोच कर खा रहे थे। उनमे से एक बछिया पूरी तरह से मर चुकी थी जिसकी जीवित में ही आंख की चील कौवों ने खा लिया था और दो बछिया अभी जीवित थीं जिनमे हल्की हल्की सांस चल रही थी और इनकी भी आंखों को चील कौवों ने नोच कर खा लिया था। जो कुत्ते पास में बैठे थे वह इसी ताक में दिख रहे थे कि उनको मौका मिले और वह जीवित ही इन बछियों को खा जाएं।
सारा वाकया सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रताप गोशाला झोटिया के संचालक एवं विंध्य किसान परिषद के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी को भी बताया गया जिस पर संबंधित एस डी एम त्योंथर को सामाजिक कार्यकर्ता एवं परिषद के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अवगत कराया गया जिस पर एस डी एम त्योंथर ने तहसीलदार त्योंथर एवं जनेह थाना प्रभारी को तत्काल भेजने का अस्वासन दिया। इतने में ही एस डी ओ पी त्योंथर को भी सूचित किया गया जिस पर अगले एक घंटे में एस डी ओ पी पुलिस अनुभाग त्योंथर, तहसीलदार त्योंथर एवं संबंधित पटवारी, वेटेरिनरी सर्जन आदि पहुचे एवं त्वरित कार्यवाही करते हुए मौका पंचनामा बनाया और जे सी बी से कटीले तार हटाकर बाड़ा हटाया गया और संवंधित दोषियों के ऊपर एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश भी दिए।
पूरे रेस्क्यू आपरेशन एवं बाड़े को हटाने की प्रक्रिया में प्रताप गोशाला झोटिया के संचालक एवं विंध्य किसान परिषद के अध्यक्ष रोहित तिवारी का अच्छा सहयोग रहा साथ ही विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजकुमार जी सहित अन्य लोग भी मौके पर उपस्थित हुए।
इस प्रकार पुलिश प्रशासन, तहसील प्रशासन एवं वेटेरिनरी विभाग सहित क्षेत्रीय लोगों की उपस्थिति मद जेसीबी लगाकर कटीले तारों को पूरी तरह से हटाया गया। साथ ही ऐसे कृत्य करने वालों को स्पष्ट बताया गया कि अवैध बाड़ों को न बनाएं अन्यथा सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
वहरहाल, पूरे मामले की जांच चल रही है और उपस्थित प्रशासनिक अमले द्वारा कहा गया कि जो भी दोषी हैं उन्हें बख्सा नही जाएगा।
संलग्न - झोटिया एवं मनिका ग्राम में बनायी गयी अवैध बाड़े की फ़ोटो एवं कार्यवाही करवाता त्योंथर अनुभाग के प्रसाशनिक अमला।
- शिवानंद द्विवेदी सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139
Thursday, January 18, 2018
Rewa, MP - (पशु क्रूरता) पनगड़ी ग्राम में फिर दिखी पशु क्रूरता, मवेशियों के तार से मुह पैर बांध कर छोड़ा।
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दिनांक 19 जनवरी 2018, स्थान भठवा, गढ़ रीवा मप्र।
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) ज़िले के सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत आने वाले पनगड़ी बीट के भलघटी पहाड़ मे सैकड़ों मवेशियों को जीवित घाट के नीचे धकेले फेंके जाने का मामला अभी ज्यादा पुराना नही हुआ है, इसी पनगड़ी क्षेत्र में गोहत्यारों द्वारा फिर बेजुबान पशुओं के साथ अमानवीय और पाशविक क्रूरता का मामला प्रकाश में आया है।
पनगड़ी क्षेत्र से मिली जानकारी अनुसार भठवा निवासी पत्रकार प्रमोद सिंह द्वारा अपने फेसबुक और व्हाट्सएप्प के जरिये मुह पैर बुरी तरह बधे हुए मवेशियों के फोटो और वीडियो शेयर किए गए हैं जिसमे उनके द्वारा ग्रामीणों के सहयोग से मुह पैर खोलकर मवेशियों को आज़ाद किया गया
वास्तव में देखा जाय तो इस प्रकार की घटना कोई नई नही है। पूरे रीवा जिले से जगह जगह गोवंशों के साथ निरंतर क्रूरता के प्रकरण सामने आ रहे हैं जिसके संदर्भ में देश भर में पशु अधिकारों के लिए कार्य करने वाली विभिन्न संस्थाओं जैसे श्रीमती मेनका गांधी का पीपल फ़ॉर एनिमल्, ध्यान फाउंडेशन, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया सहित अन्य संस्थान इस प्रकार की पशु क्रूरता बंद किये जाने और दोषियों के ऊपर वैधानिक कार्यवाही किये जाने के लिए निरंतर प्रयाशरत हैं। सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा ज़िले के समय समय पर पशु क्रूरता के प्रकरण उक्त सभी संस्थानों को सूचित किये जाते रहे हैं।
सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि पिछले कई वर्षों से पशुओं के साथ क्रूरता बढ़ती जा रही है लेकिन ज़िला एवं प्रदेश के शासन प्रशासन द्वारा अब तक कोई सार्थक कार्यवाही नही की गई है।
ज़िला प्रशासन पशु क्रूरता रोक पाने और दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही करवा पाने में पूरी तरह अक्षम साबित हुआ है। प्रदेश और ज़िले में बने गोसंवर्धन बोर्ड मात्र औपचारिक बोर्ड हैं जिसमे पशुओं की देखभाल और सुरक्षा के लिए आने वाले करोड़ों का बन्दरवाट कर लिया जाता है और कोई भी कार्य नही किये जा रहे हैं।
प्रश्न यह भी उठता है कि प्रदेश सरकार द्वारा गोवंशों की रक्षा सुरक्षा के लिए बनाये गए इतने अधिनियमों के वावजूद भी आज मवेशियों की इतनी अधिक दुर्दशा क्यों है?
संलग्न - कृपया संलग्न फ़ोटो में देखें किस प्रकार सिरमौर वन परिक्षेत्र और तहसील अंतर्गत आने वाले पनगड़ी ग्राम में गोवंशों का मुँह पैर बांध कर छोड़ दिया जाता है।
- शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139।
"(पशु क्रूरता) चरनोई तो ख़त्म ही हो गयी, पशुओं को पैरा एवं भूषा से भी किया जा रहा वंचित, गहाई-मिजाई के बाद किसान मार देता है माचिस, पूरा पैरा धू धू करके जाता है जल"
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(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र) चलिए आज किसान और गोवंशों की दुर्दशा पर थोडा आगे प्रकाश डालते हैं और शोध करते हैं की इस समस्या की जड़ कहाँ है.
चाहे मानव कितनी भी लच्छेदार बातें करे. चाहे मानव कितना भी मशीनी उपकरण का अविष्कार अपने विलासिता के लिए कर ले, फसल और उपज की सुरक्षा की बात करे, और अपनी भूंख का कितना भी रोना रोये शायद आज क्या कभी भी मानव की भूंख को न तो इंसान और और न ही भगवान् शांत कर सकता है. इतिहास, शास्त्र, ग्रन्थ इस बात के गवाह हैं की मानव का पेट और भूंख जब दोनों बढ़ने लगी तो मानव मानव न रहकर हैवान और राक्षस बन गया. रावण, कुम्भकर्ण, कंस, हिरनकश्यप, और पता नहीं कितने राक्षसों की कहानियां मानव से राक्षस बनने की हैं और अंततः उनके अंत की हैं. और आज फिर वही इतिहास दोहराए जाने की स्थिति में खड़ा है. किसी ने बिलकुल ठीक ही कहा है की इतिहास हमेशा अपने आप को दोहराता है. चाहे इतिहास में बुरा से बुरा हुआ रहा हो वह भी और चाहे अच्छा से अच्छा हुआ रहा हो वह भी दोनों ही दोहराए जाते हैं.
अच्छा तो जो होना था वह भारत वर्ष में हो चूका अब तो शायद बुरे का ही समय आ चुका है. तभी तो शास्त्रीय ढंग से अच्छा और धार्मिक काम करने वाला हर वह शख्स दुनिया की नजर में मूर्ख, ढोंगी, दिखावटी कहलाता है और तथाकथिक गोमांस, मांसाहार, शराब नशा करने वाला समाज या व्यक्ति एडवांस्ड पढ़ा लिखा और मॉडर्न कहलाता है तो भला आज जब ज्यादातर समाज बीफ ईटर हो चूका है गोवंशों की सुरक्षा के लिए लड़ने वाला और उनके अधिकार की बात करने वाला व्यक्ति वेवकूफ मूर्ख नहीं कहलायेगा तो भला और क्या कहलायेगा?
मानव के अतिक्रमण ने समाप्त कर दिया चरनोई की भूमि, पशुओं के लिए नहीं है धरती में अब कोई स्थान शेष -
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जी हाँ हकीकत आज यही है की जो कभी गोचर और चरनोई की भूमि हुआ करती थी वह शासकीय माफिया एवं प्राइवेट माफिया ने मिलकर पूरी तरह से समाप्त कर दिया. कहीं कुछ नहीं बचा है. यदि बचा है तो मात्र पथरीला स्थान और वह भी आज माइनिंग के नाम बुरी तरह से दोहन किया जा रहा है. किसान के लिए कभी पशु पशुधन की श्रेणी में आते थे लेकिन आज कितना बड़ा दुर्भाग्य है की यही पशु चूँकि किसान के लिए दूध के अतिरिक्त खेती किसानी के लिए उपयोगी नहीं रहे तो सबके लिये बोझ बन गए. मानाकि मशीन का अविष्कार मानव जीवन के लिए वरदान साबित हुआ है और उसकी ज्यादातर भौतिक शुख सुविधाओं विलासिता की पूर्ती करने में सहायक सिद्ध हुआ है पर क्या यह मशीन सब कुछ कर पाएंगी? क्या वास्तव में गोवंशों अथवा पशुओं के बिना मानव धरती पर अकेले रह पायेगा? क्या गोवंशों के बिना भारतीय संस्कृति का वजूद रह पायेगा? बहुत सारे अनुत्तरित प्रश्न है जो आज भारतीय मानव से जबाब तलास रहे हैं.
खर पतवार के नाम पर किसान पैरा भूषा में खेत में ही लगा देता है आग, जल जाता है सब धू धू करके -
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पशुओं का पूरा अधिकार छीन लिया गया है. पहले उनको अनुपयोगी बताकर घर से खदेड़ दिया गया अब वह मारे मारे फिर रहे हैं. मानव को मात्र दूध, दही घी, पनीर, मक्खन ही बस पसंद है बांकी पशु उसे पसंद नहीं. जिस प्रकार से आज के वर्तमान विकसित समाज में बूढ़े हो चले माँ बाप हमे पसंद नहीं आते और भार लगते हैं वैसे ही गोवंश भी हमारे लिए अब पूरी तरह से भार बन चुके हैं. पहले मानव ने उनकी चरनोई और गोचर भूमि को समाप्त किया और अब उनके लिए शेष बचे पैरा भूषा को भी अपने लिए अनुपयोगी समझ कर माचिस मार रहा है. आज कहीं भी किसी भी गाँव में चले जाएँ तो देखने को मिलता है की आज जो स्वार्थी किसान अपनी फसल की दुहाई दे रहा है वह बिना विचार किये हुए जैसे ही फसल की मिजाई गहाई पूरी होती है बचे हुए भूषे एवं पैरा में माचिस मारकर जला देता है. आज कहीं कोई हरियाली नहीं है क्योंकि गोचर भूमि ही नहीं बची हुई है तो भला हरियाली कहाँ बचेगी. यदि हरियाली है भी तो वह है फसल की खेतों में हरियाली जिस पर किसान का पहरा है, और पहरा होना भी चाहिए. अब यदि वही किसान गहाई के बाद बचे हुए पैरे एवं भूषे में माचिस मार देगा तो भला मवेशिओं के लिए क्या ख़ाक बचेगा खाने के लिए? मवेशी दर दर की ठोकर मारे फिर रहे हैं. उन्हें खाने पीने के लिए कहीं कुछ नहीं बचा है. इस स्वार्थी मानव द्वारा दूध पीकर घी, दही मट्ठा खाकर आवारा छोड़ दिए गए इन गोवंशों के लिए न तो इस धरती में कोइ जगह है न ही कहीं अन्यत्र. आखिर यह बेचारे बेजुबान पशु जांए तो जाएँ कहाँ? कौन है इनका मालिक? क्या अहिंसा और सभी जीवों में एक ही ईश्वर का पाठ पढ़ाने वाली भारतीय संस्कृति का यही हाल होगा? क्या कभी भारतीय संस्कृति में माता की उपमा प्राप्त गौ माता की इसी भारतीय समाज मे इससे भी अधिक और दुर्दशा देखने को मिलेगी? क्या भगवान् शिव के वाहक नंदी के लिए भगवान् भोलेनाथ के बानाये इस संसार में और और जगह नहीं बची है? अपने स्वार्थ और पेट की दुहाई देने वाले इस कलयुगी मानव के लिए यह सब प्रश्न है जिनका जबाब इसे देना पड़ेगा अन्यथा वह समय दूर नहीं जब भारतीय संस्कृति विलुप्त प्राय संस्कृतियों में शामिल हो जाएगी. क्योंकि जब गोवंश ही नहीं रहे तो भारतीय संस्कृति कहलाने का ही क्या औचित्य होगा.
- शिवानंद द्विवेदी 7869992139
Saturday, February 25, 2017
(Rewa, MP) श्रीमती मेनका गाँधी जी का कलेक्टर रीवा को अल्टीमेटम – तत्काल जांच कर करो कार्यवाही
दिनांक – 26/02/2017






















