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Monday, June 25, 2018

हिन्दू बाहुल्य समाज में गाय के साथ क्रूरता, जिम्मेदार मात्र हिन्दू (मामला ज़िले के थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी एवं देउर ग्राम का जहां पर गायों को दो अलग अलग घटनाओं में धारदार हथियार से मारा)

दिनांक 26 जून 2018, स्थान - गढ़, रीवा-मप्र

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)

   हे भगवान क्या तूने इस कलयुग में ऐसे ही दिन देखने के लिए मॉनव को पैदा किया था की भारतीय संस्कृति में पूज्य माता और देव स्वरूप उपमा प्राप्त गोमाता को आज अपने ही हिंदुओं से बर्बरता और क्रूरता का शिकार होना पड़ेगा.

   मानाकि यदि कोई दूसरा सम्प्रदाय वर्ग होता जहां पर गाय को मात्र उपभोग की पशु समझा जाता है वहां गोवंशों के मांस भक्षण की परंपरा तक है परंतु क्या हिन्दू बाहुल्य समाज जहां पर आज से कुछ वर्षों पहले इन्ही गोवंशों को खेत खलिहान से लेकर हरछठ में पूजने तक की परंपरा थी आज अपने ही लोगों से इन बेजुबान मूक पशुओं की जान में बन आई है.

  आये दिन हो रही पशु क्रूरता

   आज रीवा संभाग में जहां पर कभी राजशाही हुआ करती थी और हिन्दू धर्म के गो-ब्राह्मण को सुरक्षा मिलनी थी आज उसी रीवा राज्य में आये दिन पशु क्रूरता बढ़ती जा रही है. पिछले 5 वर्षों का अनुभव यह बताता है की ज्यादातर फसल नुकसानी के नाम पर शासन प्रशासन की अनदेखी और अव्यवस्था की वजह से अवैध बाड़ों में गोवंशों को कैद कर बिना चारा पानी और भूषा के छोंड़ दिया जा रहा जिससे घुट घुट कर उनकी जान जा रही है. इसके पीछे का तर्क आवारा पशुओं की वजह से किसान की फसल नुकसानी बताया जाता है लेकिन यह नही बताया जाता की आखिर किसान की इस समस्या का मानवीय समाधान क्या है और साथ ही यह भी नही बताया जाता की आखिर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का क्या हुआ? चलिए गाय को माता न भी माना जाए, हिन्दू संस्कृति का हवाला न भी दिया जाए तो यह कोई बताए की क्या इस संविधान की किताब और आई पी सी के सेक्शन में पशुओं का कोई अधिकार नही है?

  पनगड़ी में कुएं में गिरकर गायों की हुई मौत 

   थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी ग्राम के आसपास अक्सर ही गोवंशों से साथ क्रूरता की वारदातें सामने आती रहती है. अभी पिछले दिनों ही निकटतम ग्राम कठमना में पैर में चोट लगी गाय मिली थी जिसके इलाज के लिए रीवा से डॉक्टर आये थे. फिर पनगड़ी में ही दो अलग अलग घटनाओं में कुएं में गाय गिरने से एक को जीवित निकाल लिया गया था जबकि एक अन्य संकरी कुआं होने की वजह से मर गई थी.

पनगड़ी भलघटी में सैकड़ों गायों को उतारा था मौत के घाट 

  पनगड़ी से ही लगे भलघटी नामक जंगली पहाड़ी और गहरी खाईं में सैकड़ों गायों को पहाड़ के ऊपर से फेंकने का मामला सामने आया था जिंसमे पिछले वर्ष ठंड के मौसम में दिल्ली से पीपल फ़ॉर एनिमल्स, एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, एनिमल हसबेंडरी विभाग सहित एन जी ओ ध्यान फाउंडेशन तक के लोग आये थे और घटना का संज्ञान लेकर जांच पड़ताल हुई थी. जिले की थाना गढ़ और लाल गांव चौकी की पुलिश, वेटेरिनरी विभाग, फारेस्ट विभाग और राजस्व अमला सहित घटनास्थल का निरीक्षण किया था. अज्ञात के ऊपर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दये गए थे. इसके बाद क्या हुआ इसका किसी को रता पता नही है.

पनगड़ी और देउर में फिर मारा गायों को

   अभी फिर दो अलग अलग घटनाओं में दो गायों के साथ क्रूरता होने का मामला प्रकाश में आया है.


    प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना गढ़ एवं तहसील त्योंथर अंतर्गत देउर ग्राम में समाजसेवी दिलीप सिंह ने जानकारी दी की उन्हें कहीं रास्ते में एक गाय घायल एवं लावारिश अवस्था में मिली है जिसके पीछे के पैर में खुर के पास चोट लगी है साथ ही ऊपर कूल्हा बुरी तरफ टूटा हुआ है जिससे गाय चलने में असमर्थ थी. इस जानकारी के आधार पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा संबंधित गढ़ वेटेरिनरी सर्जन विवेक मिश्रा को जानकारी दी गई जिसके बाद कटरा अंतर्गत आने वाले कम्पाउण्डर जायसवाल को घायल गाय का इलाज करने के लिए कहा गया. तब डॉक्टर के आने के बाद सामान्य तौर पर घाव की मलहम पट्टी और इलाज हुआ.

 इसी प्रकार एक अन्य घटनाक्रम में पनगड़ी पनगड़ी निवाशी लाला शुक्ला और दिनेश त्रिपाठी द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट द्विवेदी को फ़ोन करके जानकारी प्रदान की गई की सुदामा यादव निवासी पनगड़ी की गाय को किसी हत्यारे ने पेट में कुल्हाड़ी से हमला करके बुरी तरह से घायल कर दिया है. जानकारी मिलने के बाद हिनौती पशु औसधालय में कार्यरत समयलाल साहू को बताया गया जिस पर साहू घटनास्थल पर पहुच कर घायल गाय का दवा इलाज किये. यद्यपि देउर और पनगड़ी दोनो ही घटनाओं में घायल गायों को मात्र दवा और मलहम पट्टी की नही बल्कि पूरे सर्जरी की आवश्यकता है जिसके लिए पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 को भी सूचित कर दिया गया है. यद्यपि अभी तक कोई सर्जन उपस्थित नही हुए हैं.

सरकार और प्रशासन को संज्ञान लेकर गोवंश प्रताड़ना बन्द करवानी चाहिए

    जिस प्रकार से रीवा ज़िले में पशुओं के साथ क्रूरता दिनो दिन बढ़ रही है सरकार को चाहिए ऐसे मामलों पर तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा कर कानूनी कार्यवाही करे. दुर्भाग्य तो यह है की सरकार से ऐसी क्या उम्मीद की जाए. यहां तो रीवा ज़िले में हो रही पशु क्रूरता की वारदातों पर एफआईआर तक दर्ज नही होती. भलघटी पनगड़ी का  मामला अभी ज्यादा पुराना नही हुआ है जहां पर सैकड़ों गायों को क्रूरता पूर्वक घाट के नीचे मौत के घाट उतार दिया गया था लेकिन दो चार दिन उथल पुथल के बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला गया. इसी प्रकार अवैध बाड़ों में होरही गोवंशों की मौत पर भी लिखित शिकायतों के वावजूद भी आज तक किसी मामले में एफआईआर दर्ज नही हुई है। शायद गोवंश और पशु न बोल सकते और नही वोट दे सकते इसलिए नेताओं और इस सरकार के लिए किसी काम के नही।


  संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें ज़िले के थाना गढ़ अन्तर्गत देउर और पनगड़ी ग्राम की दो अलग अलग घटनाओं में किस प्रकार से गायों के आठ क्रूरता की गई है जिंसमे एक गाय का पैर और कूल्हा टूटा हुआ है और दूसरी के पेट में कुल्हाड़ी मार दी गई है.

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,


ज़िला रीवा मप्र, मोब - 7869992139, 9589152587


Wednesday, June 13, 2018

संकरी कुएं में गिरी गाय मरी (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी कला ग्राम का जहां दिनांक 13 जून की शाम को गिरी गाय रात 12 बजे मर गई, बचाने के प्रयाश के बीच गाय ने प्राण त्यागा, कुएं में गैस लीक की जताई गई असंका, तकनीकी व्यवस्था के अभाव में किसी ने कुएं में उतरने की नही की हिम्मत)

दिनांक 14 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी कला ग्राम में एक और गाय के सूखे कुएं में गिरकर मरने की खबर है. अभी पिछले दिनों पनगड़ी ग्राम में ही एक बछिया एक सूखे कुएं में गिर गई थी जिसे ग्राम के लोगो के सहयोग और साथ ही वन विभाग के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत के सहयोग से निकाल लिया गया था. लेकिन  शायद दिनांक 13 जून की शाम को बृजवासी विश्वकर्मा के घर के पास स्थित पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा की पट्टे की जमीन में बनाई हुई पुरानी 3 फ़ीट व्यास की कुआं में गिरी एक बड़ी गाय की किस्मत अच्छी नही थी जिसे वेटेरिनरी, पुलिश, जंगल विभाग सहित अन्य लोगो की उपस्थिति भी बचाया न जा सका. 

     हादसा काफी दुःखद था जिसमे गाय अपने पिछले हिस्से के बल पर गिरी थी जो सीधे 35 फ़ीट गहरी सूखी कुआं में जा गिरी. गिरते ही शायद गाय की गर्दन टूट जाने के कारण जिस स्थिति में गिरी थी उसी स्थिति में मरते दम तक बनी रही. घटना की जानकारी पनगड़ी कला ग्राम पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दी जिसके बाद गिरी गाय को बचाने की जद्दोजहद प्रारम्भ हुई. तत्काल ही जानकारी पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में दी गई जिस पर बताया गया की रीवा ज़िले में ऐसी कोई व्यवस्था अभी नही है जिससे कुएं में गिरी हुई गाय को जीवित निकाला जा सके. इसके बाद संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गंगेव ब्लॉक में पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को की गई. साथ ही जंगल विभाग पनगड़ी के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत को दी गई जो तत्काल ही घटनास्थल पर पहुचे. डायल 100 में सूचना देने के बाद लालगांव चौकी के सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया भी अपनी डायल 100 टीम के साथ घटनास्थल पर पहुचे. लेकिन कोई टेक्निकल व्यवस्था न होने के कारण सभी के प्रयाश असफल रहे. सबसे बड़ी कठिनाई तो इस बात की थी की कुआं अत्यंत संकरी थी जिसमे नीचे उतर पाना काफी कठिन कार्य था. मानसेवी वनकर्मी पनगड़ी राघवेंद्र पांडेय की पीठ पर रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया लेकिन आधे कुएं में पहुचने के बाद उनकी सांस फूलने लगी. उन्होंने बताया की दम घुट रहा था. शायद जहरीली गैस लीक होने की शिकायत रही होगी. इस बात की पुष्टि के लिए बाद में एक लालटेन जलाकर नीचे उतारा गया जो दो तीन बार बुझ गई जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की भले ही जहरीली गैस लीक न हो रही हो लेकिन ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम थी. इसके बाद किसी की हिम्मत नही हुई की वह व्यक्ति गाय को बचाने के लिए कुएं में उतर सके. 

   गाय को बचाने रात 1 बजे तक चलती रही जद्दोजहद

    संकरी कुएं में गिरी श्याम वर्ण गाय को बचाने के प्रयाश पूरी रात भर चलते रहे. देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक गाय की अंतिम सांस तक लोगों ने जुगुत लगाने के प्रयास किये लेकिन तकनीक के अभाव से सफलता प्राप्त नही हुई. यदि ऑक्सीजन मास्क होती तो भी किसी व्यक्ति को नीचे उतारा जा सकता था। इस बीच गाय के शरीर में हलचल बन्द होने और आंख बाहर निकल आने के बाद अंदाजा लगाया गया की गाय मर चुकी है. 

   पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा परिवार की सूखी कुएं में गिरी थी गाय

  गाय की मृत्यु तक पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर उपस्थित नही हुआ. लालगांव पुलिश के बार बार बुलाये जाने के बाद भी कुशवाहा द्वारा बताया गया की उसकी पीठ में दर्द है इसलिए उपस्थित नही हो सकता. इसके बाद जैसे ही गाय मर गई तो घटनास्थल से लालगांव सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया सहित अन्य पुलिश कर्मी एवं ग्राम पनगड़ी के गणमान्य लोग नर्मदा कुशवाहा के घर के पास और दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने को कहा परंतु उसने बार बार संदेश भेजा की वह बाहर नही आएगा. इसके बाद पुलिश द्वारा कहा गया की आपकी पट्टे की कुआं में आपकी गलती की वजह से एक गाय गिरकर मर चुकी है इसलिए प्रथम दृष्ट्या आपकी जिम्मेदारी बनती है. इसलिए शिकायत के आधार पर आप लालगांव चौकी चलें और गौहत्या का प्रकरण दर्ज होगा. लेकिन कुशवाहा द्वारा विभिन्न प्रकार से बहाने बनाने का प्रयाश किया गया. जब लालगांव पुलिश द्वारा नर्मदा कुशवाहा से पूंछा गया की क्या तुम इस मरी हुई गाय की जिम्मेदारी लोगे तो कुशवाहा द्वारा जिम्मेदारी लेने से मना किया गया इस पर पुलिश द्वारा कहा गया की कल शुबह तक इस मरी हुई गाय को बाहर निकालकर इस खतरे की जगह पर स्थित कुआं को बन्द करो. इस प्रकार हिदायत देकर पुलिश घटनास्थल से प्रस्थान कर दी. पूरा वाकया होते होते रात के 1 बज चुके थे जहां पर घटनास्थल पर उपसरपंच पनगड़ी शिवेंद्रमणि शुक्ला, मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय, रामसिया साकेत, पशु चिकित्सा विभाग के साहू सहित अन्य पुलिश एवं वनकर्मी उपस्थित थे.

  मदरी-भठवा ग्राम में भी खुली सूखी कुआं में गिरकर मरा था बंदर 

   अभी हाल ही में पिछले सप्ताह मदरी-भठवा ग्राम में किसी सूखी पुरानी खुली कुआं में एक बंदर के भी गिरने की खबर आई थी जिस पर संबंधित वन विभाग को सूचित किया गया था. तब पनगड़ी ग्राम वन समिति के मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत घटनास्थल पर उपस्थित होकर बंदर को बाहर निकाले थे. लेकिन घटना समय 24 घण्टे से ऊपर होने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ बंदर बाहर निकालते ही मर चुका था. यह कोई अकेले की घटना नही है जैसा की बताया गया की ऐसी बारदतें आज आये दिन घटित हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए.

लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण प्रशासन को अभियान चलाकर खतरे वाली सूखी कुओं को बन्द करवाया जाना चाहिए 

   जिस  प्रकार पिछले कुछ महीनों में लगातार सूखी और पुरानी गहरी कुओं में जंगली, आवारा और घरेलू मवेशियों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे साफ पता चलता है की जब तक प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्यवाही नही की जाती तब तक ऐसी वारदाते बन्द होने वाली नही हैं. प्रशासन को चाहिए हर  ग्राम पंचायत में डेटा इकठ्ठा करके पता लगाए की किस किस ग्राम पंचायत में ऐसे कितने पुराने अनुपयोगी और सूखे कुएं हैं. यदि प्रशासन जल संसाधन के हिसाब के यह मानता है की ऐसे अनुपयोगी कुएं भाठे नही जाने चाहिए तो इन्हें ढंकने का कार्य किया जाना चाहिए. सभी कुओं में लोहे की जाली लगाकर ऊपर से ढंकी जानी चाहिए जिससे न तो किस जन की हानि हो और न ही पशुओं की. जो भूमिस्वामी अपनी जमीन पर बनाई गई कुओं को न ढंके उनके ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए.

संलग्न - दिनांक 13 जून की शाम को पनगड़ी कला ग्राम में किसी कुशवाहा की सूखी कुएं में गिरी गाय की तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587  

संकरी कुएं में गिरी गाय मरी (मामला ज़िले के सिरमौर तहसील थाना गढ़ अंतर्गत पनगड़ी कला ग्राम का जहां दिनांक 13 जून की शाम को गिरी गाय रात 12 बजे मर गई, बचाने के प्रयाश के बीच गाय ने प्राण त्यागा, कुएं में गैस लीक की जताई गई असंका, तकनीकी व्यवस्था के अभाव में किसी ने कुएं में उतरने की नही की हिम्मत)

दिनांक 14 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के सिरमौर तहसील एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी कला ग्राम में एक और गाय के सूखे कुएं में गिरकर मरने की खबर है. अभी पिछले दिनों पनगड़ी ग्राम में ही एक बछिया एक सूखे कुएं में गिर गई थी जिसे ग्राम के लोगो के सहयोग और साथ ही वन विभाग के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत के सहयोग से निकाल लिया गया था. लेकिन  शायद दिनांक 13 जून की शाम को बृजवासी विश्वकर्मा के घर के पास स्थित पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा की पट्टे की जमीन में बनाई हुई पुरानी 3 फ़ीट व्यास की कुआं में गिरी एक बड़ी गाय की किस्मत अच्छी नही थी जिसे वेटेरिनरी, पुलिश, जंगल विभाग सहित अन्य लोगो की उपस्थिति भी बचाया न जा सका. 

     हादसा काफी दुःखद था जिसमे गाय अपने पिछले हिस्से के बल पर गिरी थी जो सीधे 35 फ़ीट गहरी सूखी कुआं में जा गिरी. गिरते ही शायद गाय की गर्दन टूट जाने के कारण जिस स्थिति में गिरी थी उसी स्थिति में मरते दम तक बनी रही. घटना की जानकारी पनगड़ी कला ग्राम पंचायत के उप सरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को दी जिसके बाद गिरी गाय को बचाने की जद्दोजहद प्रारम्भ हुई. तत्काल ही जानकारी पशु संजीवनी हेल्पलाइन 1962 में दी गई जिस पर बताया गया की रीवा ज़िले में ऐसी कोई व्यवस्था अभी नही है जिससे कुएं में गिरी हुई गाय को जीवित निकाला जा सके. इसके बाद संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गंगेव ब्लॉक में पशु चिकित्सा अधिकारी एस के पांडेय को की गई. साथ ही जंगल विभाग पनगड़ी के मानसेवी कर्मियों राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत को दी गई जो तत्काल ही घटनास्थल पर पहुचे. डायल 100 में सूचना देने के बाद लालगांव चौकी के सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया भी अपनी डायल 100 टीम के साथ घटनास्थल पर पहुचे. लेकिन कोई टेक्निकल व्यवस्था न होने के कारण सभी के प्रयाश असफल रहे. सबसे बड़ी कठिनाई तो इस बात की थी की कुआं अत्यंत संकरी थी जिसमे नीचे उतर पाना काफी कठिन कार्य था. मानसेवी वनकर्मी पनगड़ी राघवेंद्र पांडेय की पीठ पर रस्सी बांधकर नीचे उतारा गया लेकिन आधे कुएं में पहुचने के बाद उनकी सांस फूलने लगी. उन्होंने बताया की दम घुट रहा था. शायद जहरीली गैस लीक होने की शिकायत रही होगी. इस बात की पुष्टि के लिए बाद में एक लालटेन जलाकर नीचे उतारा गया जो दो तीन बार बुझ गई जिससे इस बात की पुष्टि हो गई की भले ही जहरीली गैस लीक न हो रही हो लेकिन ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम थी. इसके बाद किसी की हिम्मत नही हुई की वह व्यक्ति गाय को बचाने के लिए कुएं में उतर सके. 

   गाय को बचाने रात 1 बजे तक चलती रही जद्दोजहद

    संकरी कुएं में गिरी श्याम वर्ण गाय को बचाने के प्रयाश पूरी रात भर चलते रहे. देर रात्रि 12 बजकर 30 मिनट तक गाय की अंतिम सांस तक लोगों ने जुगुत लगाने के प्रयास किये लेकिन तकनीक के अभाव से सफलता प्राप्त नही हुई. यदि ऑक्सीजन मास्क होती तो भी किसी व्यक्ति को नीचे उतारा जा सकता था। इस बीच गाय के शरीर में हलचल बन्द होने और आंख बाहर निकल आने के बाद अंदाजा लगाया गया की गाय मर चुकी है. 

   पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा परिवार की सूखी कुएं में गिरी थी गाय

  गाय की मृत्यु तक पनगड़ी ग्राम के नर्मदा कुशवाहा पिता मिलापी कुशवाहा परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर उपस्थित नही हुआ. लालगांव पुलिश के बार बार बुलाये जाने के बाद भी कुशवाहा द्वारा बताया गया की उसकी पीठ में दर्द है इसलिए उपस्थित नही हो सकता. इसके बाद जैसे ही गाय मर गई तो घटनास्थल से लालगांव सहायक उप निरीक्षक शिवकुमार राठिया सहित अन्य पुलिश कर्मी एवं ग्राम पनगड़ी के गणमान्य लोग नर्मदा कुशवाहा के घर के पास और दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने को कहा परंतु उसने बार बार संदेश भेजा की वह बाहर नही आएगा. इसके बाद पुलिश द्वारा कहा गया की आपकी पट्टे की कुआं में आपकी गलती की वजह से एक गाय गिरकर मर चुकी है इसलिए प्रथम दृष्ट्या आपकी जिम्मेदारी बनती है. इसलिए शिकायत के आधार पर आप लालगांव चौकी चलें और गौहत्या का प्रकरण दर्ज होगा. लेकिन कुशवाहा द्वारा विभिन्न प्रकार से बहाने बनाने का प्रयाश किया गया. जब लालगांव पुलिश द्वारा नर्मदा कुशवाहा से पूंछा गया की क्या तुम इस मरी हुई गाय की जिम्मेदारी लोगे तो कुशवाहा द्वारा जिम्मेदारी लेने से मना किया गया इस पर पुलिश द्वारा कहा गया की कल शुबह तक इस मरी हुई गाय को बाहर निकालकर इस खतरे की जगह पर स्थित कुआं को बन्द करो. इस प्रकार हिदायत देकर पुलिश घटनास्थल से प्रस्थान कर दी. पूरा वाकया होते होते रात के 1 बज चुके थे जहां पर घटनास्थल पर उपसरपंच पनगड़ी शिवेंद्रमणि शुक्ला, मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय, रामसिया साकेत, पशु चिकित्सा विभाग के साहू सहित अन्य पुलिश एवं वनकर्मी उपस्थित थे.

  मदरी-भठवा ग्राम में भी खुली सूखी कुआं में गिरकर मरा था बंदर 


 


   अभी हाल ही में पिछले सप्ताह मदरी-भठवा ग्राम में किसी सूखी पुरानी खुली कुआं में एक बंदर के भी गिरने की खबर आई थी जिस पर संबंधित वन विभाग को सूचित किया गया था. तब पनगड़ी ग्राम वन समिति के मानसेवी वनकर्मी राघुवेन्द्र पांडेय एवं रामसिया साकेत घटनास्थल पर उपस्थित होकर बंदर को बाहर निकाले थे. लेकिन घटना समय 24 घण्टे से ऊपर होने के कारण बुरी तरह से घायल हुआ बंदर बाहर निकालते ही मर चुका था. यह कोई अकेले की घटना नही है जैसा की बताया गया की ऐसी बारदतें आज आये दिन घटित हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए.


लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण प्रशासन को अभियान चलाकर खतरे वाली सूखी कुओं को बन्द करवाया जाना चाहिए 

   जिस  प्रकार पिछले कुछ महीनों में लगातार सूखी और पुरानी गहरी कुओं में जंगली, आवारा और घरेलू मवेशियों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं उससे साफ पता चलता है की जब तक प्रशासनिक स्तर पर कठोर कार्यवाही नही की जाती तब तक ऐसी वारदाते बन्द होने वाली नही हैं. प्रशासन को चाहिए हर  ग्राम पंचायत में डेटा इकठ्ठा करके पता लगाए की किस किस ग्राम पंचायत में ऐसे कितने पुराने अनुपयोगी और सूखे कुएं हैं. यदि प्रशासन जल संसाधन के हिसाब के यह मानता है की ऐसे अनुपयोगी कुएं भाठे नही जाने चाहिए तो इन्हें ढंकने का कार्य किया जाना चाहिए. सभी कुओं में लोहे की जाली लगाकर ऊपर से ढंकी जानी चाहिए जिससे न तो किस जन की हानि हो और न ही पशुओं की. जो भूमिस्वामी अपनी जमीन पर बनाई गई कुओं को न ढंके उनके ऊपर तत्काल कड़ी से कड़ी प्रशासनिक कार्यवाही की जानी चाहिए.

संलग्न - दिनांक 13 जून की शाम को पनगड़ी कला ग्राम में किसी कुशवाहा की सूखी कुएं में गिरी गाय की तस्वीर.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,


रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587  


Sunday, June 3, 2018

जय गोमाता जय किसान - संकरी कुएं में गिरी बछिया को सुरक्षित निकाला ( मामला ज़िले में थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले पनगड़ी खुर्द गांव का जहां छोटेलाल जायसवाल की सकरी कुआं में 1 साल की बछिया गिर गई थी, जिसे मानसेवी वनकर्मी और ग्रामवाशियों के सहयोग से सुरक्षित बाहर निकाला, पशु चिकित्सा विभाग ने आने में की देरी)

दिनांक 03 जून 2018, स्थान - थाना गढ़/गगेव रीवा मप्र

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

  ज़िले के थाना गढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले पनगड़ी खुर्द ग्राम में दिनांक 02 जून की शाम को पनगड़ी कला पंचायत के उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला द्वारा गोवंश राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी को जानकारी दी गई की छोटेलाल जायसवाल की कुआं में एक साल उम्र की बछिया आंधी तूफान की वजह से गिर गई है जिस पर संबंधित पशु चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों वेटेरिनरी अधिकारी ब्लॉक गंगेव एस के पांडेय, गढ़ वेटेरिनरी कर्मचारी साहू, लाल गांव पशु चिकित्सा विभाग के रामानुज कोल, डिप्टी डिरेक्टर वेटेरिनरी विभाग रीवा चौहान को सूचित किया गया साथ ही जंगल विभाग के मानसेवी कर्मचारी राघवेंद्र प्रसाद पांडे एवं रामसिया साकेत को भी जानकारी दी गई जिस पर मानसेवी चौकीदारों ने ग्रामवाशियों के सहयोग से ग्रामीण बुद्धसेन प्रजापति के द्वारा कुएं में घुसकर बड़ी ही हिम्मत दिखाते हुए बछिया को रस्सी में बांधकर लक्ष्मण प्रजापति, सत्यवान कुशवाहा, जीतू प्रजापति, तीरथ प्रसाद गौतम एवं ग्राम पंचायत पनगड़ी कला के उपसरपंच शिवेंद्र शुक्ला द्वारा प्रयास कर निकलवाया गया जिससे बछिया सुरक्षित है. बताया गया की जब वन कर्मचारी पहुंचे तब बछिया को निकालने का सिलसिला शुरु हुआ कई लोग कुए के अंदर घुसे परंतु सबकी हिम्मत कुएं में नीचे तक उतरने में नही हुई कईयों की सांसें फूलने लगी जिससे दिक्कत समझ कर उन्हें वापस बाहर निकाला गया इस बीच ग्राम निवासी बुद्धसेन प्रजापति ने हिम्मत दिखाई एवं रस्सी में बांधकर बुद्धसेन को उतारा गया साथ ही उसकी पीठ में रस्सी भी बांध दी गई जिससे यदि कोई दिक्कत हो तो उसे वापस  खींचा जा सके. इस प्रकार बताया गया की बुद्धसेन प्रजापति की हिम्मत की वजह से 1 साल की बेजुबान बछिया की जान बच गई. इस पर पनगड़ी उपसरपंच द्वारा बताया गया की पंचायत की ग्राम सभा में किसी विशेष मौकों पर ऐसे बहादुर गोवंश प्रेमी ग्रामीणों को पुरस्कृत किया जाएगा. बताया गया की बछिया पूर्णतया सुरक्षित थी परंतु इधर उधर काफी मस्की चोट के साथ कुछ खरोच लगी थी. लोगों ने बताया की 35 फ़ीट गहरी सकरी कुआं में गिरने के बाद भी बछिया का सुरक्षित रहना दर्शाता है की जाको राखे साइयाँ मार सके न कोई.

पशु चिकित्सा विभाग करता रहा टालमटोल

  यद्यपि पनगड़ी खुर्द गांव में छोटेलाल जायसवाल के घर के पास सकरी कुआं में बछिया के गिरने की खबर बहुत पहले से ही वेटेरिनरी विभाग के संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों को दे दी गई थी परंतु जानकारी के बाद भी क्षेत्रीय पशु चिकित्सक काफी समय बाद उपास्थित हुए. इस बाबत भोपाल मप्र के संचालनालय में पदस्थ संयुक्त संचालक मेहिया को भी सूचित किया गया जिस पर मेहिया ने डिप्टी डायरेक्टर रीवा चौहान को भी कार्यवाही के लिए कहा.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें रीवा ज़िला मप्र अंतर्गत आने वाले गंगेव ब्लॉक और थाना गढ़ क्षेत्र में पनगड़ी खुर्द ग्राम में सुरक्षित निकालते ग्राम वन समिति के मानसेवी चौकीदार राघुवेन्द्र पांडेय और रामसिया साकेत और साथ में अन्य ग्रामीण लोग.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

रीवा मप्र, मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Sunday, April 8, 2018

हिनौती पशु औषधालय निर्माण में देरी, 5.6 लाख रुपये आये थे बजट (मामला गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती ग्राम पंचायत के चियार ग्राम का)


दिनांक 09 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

    फसल कटाई के साथ ही एक बार फिर पशुओं की पीड़ा को भुला दिया जाएगा. अभी भी ज़िले में बनाये गए कई अवैध बाड़ों में गोवंश अपने जीवन की गुहार लगा रहे हैं. परंतु सरकार एवं प्रशासन के लिए यह कोई विशेष बात नही है और रोज की आई गई बात हो गई है.

    पिछले दिनों हिनौती पंचायत जनपद पंचायत गंगेव के पास स्थित चियार ग्राम से गुजरा गया तो पाया गया की वहां पर निर्माणाधीन पशु चिकित्सालय में काम बंद पड़ा हुआ है. जब पास जाकर देखा गया तो पता चला की नवीन निर्माणाधीन पशु औषधालय के पीछे एक पुराना खंडहरनुमा ढांचा भी है जो संभवतः पुराना पशु औषधालय भवन था. 

    साथ में गोंदरी 27 निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अनिल उपकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने जाकर नवीन निर्माणाधीन औषधालय की बाहरी स्थिति का जायज़ा लिया और उसकी कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर ली. 

हिनौती पशु औषधालय निर्माण का बजट है 5.6 लाख रुपये

   हिनौती पशु औषधालय के बजट के विषय में और साथ ही इस शासकीय भवन के निर्माण के विषय में कोई जानकारी वहां नोटिस बोर्ड में उपलब्ध नही मिली. जबकि अमूमन चाहिए यह की किसी भी प्रकार के शासकीय भवन के निर्माण संबंधी बजट, भवन सिविल इंजीनियरिंग और प्रकार आदि की जानकारी सामने एक नोटिस बोर्ड में चस्पा कर दी जानी चाहिए. यह वास्तव में देखा जाए तो आम जान मानस को सूचना के अधिकार के अंतर्गत बिना आवेदन लगाए ही मुफ्त में और जरूरी सूचनाओं की श्रेणी में आता है. 

   जब हिनौती पशु औषधालय के विषय में जानकारी चाही गई तो जिम्मेदारों का यह कहना था 

  1) "पशु औषधालय का निर्माण कार्य किया जा रहा है. यह पूरी तरह से ठेका पद्धति में होता है. यह सीधे ठेकेदार और वेटरनरी अधिकारी गंगेव के बीच में रहता है साथ ही लोक यांत्रिकी विभाग से संबंध है. आपको इस विषय में ज्यादा जानकारी गंगेव के पशु चिकित्सा अधिकारी से ही मिल पाएगी." - विवेक मिश्रा, सहायक पशु चिकित्सा सर्जन, गढ़ पशु चिकित्सा कार्यालय. मोब - 9425569495

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 2) "हिनौती में बनने वाले पशु औषधालय में कुल 5 लाख 60 हजार का बजट ठेकेदार द्वारा बताया गया है जिसका की काम चल रहा है और समय समय पर हमने हिनौती में कार्यरत साहू को बोला है की काम देखते रहें. अभी ठेकेदार ने बात की थी तो हमने कहा है की जल्दी काम समाप्त करके हमारे विभाग को सौंप दें. कुछ पैसा बचा हुआ है जिसमे हमने कहा है की एक शौचालय आउर एक भवन की बाउंड्री वाल बना दें. काम जल्दी सम्पन्न होगा और हमारे विभाग के साहू ही काम देखेंगे. वैसे वहां पर वेटेरिनरी सर्जन बैठना चाहिए लेकिन यह हमारे बस की बात नही मात्र शासन स्तर से ही संभव है. और शासन का यह हाल है की हम कुछ भी नही कह सकते. हमारे गंगेव ब्लॉक में 30 असिस्टेन्ट वेटेरिनरी फील्ड ऑफिसर होना चाहिए परंतु यहां मात्र तीन ए वी एफ ओ हैं जिनमे मनगवां, लाल गांव, और एक अन्य स्थान पर पदस्थ हैं. हम किसी प्रकार से काम चला रहे हैं." - एस के पांडेय, वेटेरिनरी ऑफिसर, गंगेव ब्लॉक रीवा, मप्र. 

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3) "देखिए हम भी यहां से गुजरते रहते हैं और हमने पिछले कुछ एक वर्ष से यहां पर इस निर्माणाधीन भवन को देखा है और हमे भी जानकारी नही थी की यह किस विभाग का भवन है पर आपने बताया तो जानकारी प्राप्त हुई है. हमारी जनता की तरफ से शासन प्रसाशन से यही माग है की जिज़ प्रकार गोवंशों के साथ आज अत्याचार हो रहा है उसको बन्द किया जाए, गांव गांव में गोशाला स्थापित कर पंचायतों को सहयोग करना चाहिए. जो यह पशु औषधालय बन रहा है इसका भरपूर उपयोग होना चाहिए, पशुओं के प्रति आम जनमानस में जन जागरूकता बढ़ाई जानी चाहिए. 5 लाख 60 हज़ार का बजट काफी होता है अतः भवन निर्माण में ठेकेदार मनमानी न कर पाए विभाग को देखना चाहिए" - अनिल उपकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, निवासी गोंदरी पंचायत गंगेव ब्लॉक रीवा मप्र. मोब 9009213370

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संलग्न - गंगेव ब्लॉक अंतर्गत हिनौती पंचायत के चियार ग्राम में निर्माणाधीन पशु औषधालय की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, मोब 07869992139, 9589152587.

Friday, February 23, 2018

दिखायी मानवता, ग्रामीणों ने गोमाता को 12 घंटे बाद कुएं से निकाला (मामला मदरी गांव का, देखें संलग्न फ़ोटो)

दिनांक 24 फरवरी 2018, स्थान - रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

 देश मे हो रही निरंतर पशु प्रताड़ना के बीच ज़िले में कुछ मानवीयता की भी मिसालें मिल रही हैं। जहां लोग पशुओं को उपयोग के बाद तुरंत छोंड़ दे रहे हैं जिन्हें अवैध बाड़ों में कैद कर दिया जाता है, कई बार यही आवारा पशु कूपों, नदी नालियों में भी फिसल जाते हैं।

    वाकया है गंगेव ब्लॉक एवं थाना गढ़ अंतर्गत आने वाली मदरी पंचायत का जहां पर दिनांक 23 फरवरी की रात को कैलाश हायर सेकेंडरी स्कूल के पीछे संतोष शुक्ला के घर के पास एक पुरानी गहरी कुआं में एक काली रंग की गोमाता गिर गई थी। इस घटना की जानकारी संतोष शुक्ला द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को दी गई जिस पर संज्ञान लेते हुए तत्काल संबंधित पशु चिकित्सा विभाग गढ़ एवं लालगांव उप-वन परिक्षेत्र के वन अधिकारियों कर्मचारियों को भी दी गईं जिस पर सभी ने मिलकर संतोष शुक्ला निवासी मदरी, भठवा निवासी प्रमोद सिंह, श्रीपाल सिंह, एवं अन्य कई लोगों की सहायता से गाय को सुरक्षित बाहर निकाला।

 संलग्न - गोरक्षा करते लोगों की फ़ोटो और सुरक्षित निकाली गई गाय।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Wednesday, February 8, 2017

(Rewa, MP) हिनौती के पास बने अवैध बाड़े में एकसाथ फिर मरीं दर्ज़न भर गायें



हिनौती के पास बने अवैध बाड़े में एकसाथ फिर मरीं दर्ज़न भर गायें

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) सुबह यूँ तो सैर के लिए कई लोग जाते हैं पर कभी कुछ उद्येश्य लेकर चलने में दोनों कार्य सफल हो सकते हैं. एक तो सैर का आनन्द मिलता है दूसरा अन्य कार्य भी लगे हाथ हो जाता है. पर कुछ कार्य ऐसे होते हैं जहाँ आनंद तो कम और दुःख-दर्द ज्यादा महसूस होता है.

मामला है गंगेव ब्लाक अंतर्गत आने वाली हिनौती ग्राम पंचायत का जहाँ ग्राम हिनौती के पास कैथा मोड़ में पाण्डेय ढाबा के पास बनाये गए अवैध बाड़े में दिनांक 07 फरवरी की सुबह लगभग सात बजे बाड़े में एकसाथ दर्जन भर गौवंश मृत पाए गए जिसका की घटना स्थल पर पहुच कर विडियो और फोटो भी लिया गया जो की संलग्न है. मामला पूरा दिल दहला देने वाला था जिसमे चार छोटे बछड़े तो एकसाथ मौत के घाट उतर गए. यह स्पस्ट नहीं हो पाया की बछड़ों की मौत किस कारण से हुई. क्योंकि एकसाथ इतने अधिक गौवंशों का मरना स्वाभाविक रूप से संदेह प्रकट कर्ता है. कुछ लोगों का तो यहाँ तक कहना है की इन्हें यूरिया अथवा दूसरे पेस्टिसाइड देकर मारा जा रहा है.

घटना की जानकारी गढ़ थाना प्रभारी बी आर सिंह सहित डायल 100 को

 उक्त गौवंशों के मरने की जानकारी पुनः एक बार गढ़ थाना प्रभारी बी आर सिंह को दे दी गयी. साथ ही घटना को मध्य प्रदेश शासन की डायल 100 सेवा एवं आपातकाल पुलिश व्यवस्था को भी दे दी गयी परन्तु दोनों ही जगहों से आश्वाशन के अतिरिक्त कुछ नहीं हुआ. गौवंश प्रताड़ना सम्बन्धी घटना की डायल 100 में सूचना क्र. P17038001580 है जो की दिनांक 07 फरवरी को सुबह 07:32:30 बजे दर्ज कराई गयी है. थाने वालों के लिए तो यह आम बात हो गयी है. चाहे कोई कितना भी डायल 100 में कंप्लेंट करे कोई फर्क नहीं पड़ता साथ ही गढ़ थाना प्रभारी भी गौवंशों वाले मामले में अपना हाँथ सकेलते ही नज़र आये. क्योंकि अब तक जितने भी पशु क्रूरता के प्रकरण सामने आये हैं उन सबमे कोई विशेष कार्यवाही दोषिओं के ऊपर नहीं हो पाई है. जबकि देखा जाए तो आवेदक एवं सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा स्वयं ही इस प्रकरण में कई लिखित आवेदन प्रस्तुत किये जा चुके हैं. यद्यपि इनमे क्या कार्यवाही हुई इस पर आर टी आई लगाना बांकी है.   

मप्र एवं भारत के पशु सुरक्षा और पशु क्रूरता सम्बन्धी सभी अधिनियम धराशायी

कहने को तो पशुओं और गौवंशों की सुरक्षा के लिए इतने कानून बने हैं पर देखना होगा की उन नियमों का पालन क्या कहीं भी पूरे मप्र में सही तरीके से हो पा रहा है. मप्र में विशेष तौर पर गौवंश प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक वर्ष 2010/12 में पारित किया गया जिसमे गौवंशों के वध पर और प्रताड़ना पर पांच हज़ार तक का जुर्माना और अधिकतम सात साल के कैद का प्रावधान है और यह अपराध संज्ञेय भी है साथ ही आरोपी को अपने आप को दोषमुक्त सिद्ध करना पड़ेगा ऐसा प्रावधान है. इसी प्रकार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अंतर्गत भी कई प्रावधान हैं जिन्हें यदि कड़ाई से लगाया जाये तो पशुओं और गौवंशों के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता काफी हद तक बंद की जा सकती है. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत भी पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने का प्रावधान है.

गौवंशों और बेजुबान पशुओं के साथ क्रूरता मानवीय संवेदनाओं के अंत का द्योतक

      यह भारतीय संस्कृति का दुर्भाग्य है की आज मात्र गौवंशों और पशुओं की सुरक्षा के लिए भी राजनीति की जा रही है. अब कम से कम आम जनता के समक्ष यह बात भली-भांति स्पष्ट हो जाएगी की क्या यह राजनीतिक पार्टियाँ मात्र मानवीय संवेदनायों को आधार बनाकर ही तो राजनीतिक लाभ ले रही हैं. न ही इन्हें गौवंशों की सुरक्षा से कोई लेना देना है और न ही आम किसान और आम जनता से.
      यह बात सत्य है की आवारा पशुओं से आज हर एक किसान और कास्तकार त्रस्त है परेशान है पर प्रश्न यह भी है की क्या आवारा पशुओं और गौवंशों को अवैध रूप से बनाये गए बिना किसी उचित व्यवस्था के बांडो में चारा, पानी, भूसा, छत बिना कड़ाके की ठण्ड में तड़पने मरने के लिए छोंड देने से किसानों की समस्या का समाधान हो जायेगा? किसान यह कैसे भूल सकता है की यही गौवंश हैं जिनके दूध, दही, घी, और दुग्ध उत्पाद खा पीकर वह पला बढ़ा है और उसके बाल बच्चे इन्ही गौवंशों के दुग्ध उत्पाद से पल बढ़ रहे हैं. क्या हर सुबह जब हम एक कप चाय पीते हैं तो इस बात का एहसास नहीं करते की इस चाय में डाला गया दूध किसी
 दुधारू पशु से ही प्राप्त हुआ होगा?
    
      आखिर इन गौधनों की इतनी बड़ी दुर्दशा क्यों? क्या यही हमारे ग्रामीण किसान भाई हर एक ग्राम पंचायत में स्वयमेव ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकते कि एक-दो पशु सभी लोग अपने घरों में बाँध लें और अन्य पशुओं की तरह ही इनकी भी व्यवस्था बना लें?

पशु और गौवंश न होने पर प्राकृतिक पर्यावरण पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
    
      आज अज्ञानता अथवा हेकड़ी बस भले ही किसानों और भारतीयों को यह बात समझ न आ रही हो पर यह बात तय है की यदि गौवंश और पशुधन न रहेंगे तो पूरी भूमि बंजर हो जाएगी. प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जायेगा. उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. शांस लेने के लिए हवा न मिलेगी और पीने के लिये पानी नहीं होगा. ऐसा समय आयेगा की मानवता एक-एक दाने के लिए तरस जाएगी. क्योंकि आज विज्ञान भी इस बात को मान रहा है की रासायनिक खादों के हो रहे निरंतर प्रयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर पड़ रही है जिससे हर वर्ष भूमि में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उर्वरक और रासायनिक तत्वों का प्रयोग करना पड़ रहा है. आज कृषि विज्ञान जो गोबर अथवा बायो-खाद और बायो-उत्पाद की निरंतर बात कर रहा है वह इसी वजह से कर रहा है कि लगातार बढ़ रही मानवीय आवादी के पालन-पोषण के लिए निरंतर बंजर हो रही भूमि की उर्वरा शक्ति कैसे बढ़ाई जाए.
     
प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर के संज्ञान में है पशुपालन एवं पशु संवर्धन समिति
     
      जिला स्तरीय समितियों की यदि बात किया जाए तो गौधन और पशुधन के पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर जिले में विशेष निगरानी समितियों का गठन होता है जो सदैव जिला कलेक्टर के संज्ञान में रहता है. जिला कलेक्टर यदि चाहे तो या की मनरेगा की उप योजना अंतर्गत अथवा पशुपालन विभाग द्वारा तीन-चार पंचायतों के बीच में आवारा गौवंशों की सुरक्षा और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बजट का आवंटन करवा कर इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान कर सकता है. परन्तु यह सब इच्छाशक्ति और योजनायों के सही क्रियान्वयन पर निर्भर करता है. आज यह जिले में भली भांति विदित है की पशु चिकित्सा विभाग की मदद से कई पंचायतों में गौ संवर्धन केंद्र बनाने बाबत बजट दिया गया था परन्तु वह सब भ्रष्ट्राचार की बलि चढ़ गया. क्या यह सब देखने वाला कोई नहीं है? आखिर क्या जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह बातें नहीं हैं? क्या किसानों की आवारा पशुओं सम्बन्धी समस्या जो किसी न किसी माध्यम से रोज ही मीडिया में छाई रहती है जिला प्रशासन अथवा प्रदेश स्तर पर ज्ञात नहीं है? सबको सब कुछ ज्ञात है, मात्र आवश्यकता है उसके सही क्रियान्वयन की और समस्या के उचित निराकरण की. 


संलग्न – 1) नीचे अवैध बांडो में कैद पशुओं के देखें संलग्न यूट्यूब विडियो जो की पशुओं के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता को दर्शाते हैं. 2) इसी विषय में अवैध बांडो के लिए गए फोटोग्राफ जिनमे कुछ पशु मृत पड़े हैं तो कुछ मरने की कगार पर खड़े हैं.


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Shivanand Dwivedi,
Mob - 07869992139,
09589152587,
Rewa, madhya Pradesh,