Showing posts with label illegal detention of cows. Show all posts
Showing posts with label illegal detention of cows. Show all posts

Friday, August 23, 2019

धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोड वाहनों की ठोकर से घायल हुई गाय, स्थिति गंभीर (मामला जिले के थाना गढ़ अन्तर्गत भठवा मार्केट के पास का, पशु संजीवनी 1962 को किया गया सूचित, डॉक्टर और सर्जनों की टीम ने किया इलाज)

दिनांक 23 अगस्त 2019, स्थान गढ़/गंगेव/भठवा, रीवा मप्र
  घोषणा वीरों की घोषणाओं के बाद भी धरातल स्तर पर गौशाला निर्माण कार्य जीरो
 स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद से धड़ल्ले से दौड़ रहे ओव्हर लोड वाहन
  शिवानन्द द्विवेदी एवं स्वतंत्र शुक्ला (रीवा मप्र)

      प्रदेश सरकार के द्वारा गौशाला निर्माण कार्य की घोषणा करने के बाद भी अब तक धरातल स्तर में कार्य किसी प्रकार से आरंभ होने का नाम नहीं ले रहा है। आपको बता दें कि आज दिनांक 23 अगस्त 2019 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण की गोमाता भठवा मार्केट के बस स्टैंड में अज्ञात वाहन से दुर्घटना ग्रस्त होकर अपनी अंतिम सांस गिन रही है। घटना की जानकारी शहर वाशियों द्वारा गौरक्षक शिवानंद द्विवेदी को दी गई जिससे हाल ही में घटना स्थल पर पहुंच कर प्राथमिक उपचार कराया गया, साथ ही पशु संजीवनी एम्बुलेंस 1962 को सूचना प्रेषित की गई, लेकिन अब तक 3 घन्टे बाद भी संजीवनी उपस्थित नहीं हो पाई। अंत मे शाम 4 बजे पशु संजीवनी को लेकर गंगेव वेटेरिनरी एक्सटेंशन अधिकारी उपस्थित हुए जिनके साथ आये सर्जनों ने गाय का इलाज किया।
   सुबह लगभग 11 बजे यद्यपि कम्पाउण्डर और ड्रेसर संतलाल साहू एवं रामानुज कोल के द्वारा प्राथमिक उपचार तो किया गया है लेकिन सर्जन के आने के बाद ही प्लास्टर हो पाया, वहीं घटना स्थल पर  उपस्थित लोगों का कहना था कि, गाय के पेट में लगभग 5 माह के गर्भ में बच्चा था जो ठोकर लगने से सम्भवतः मर चुका था लेकिन जिस प्रकार गाय जीवित बची हुई थी इससे डॉक्टरों का कहना था कि गाय के पेट मे बच्चा तब तक मरा नही था।
क्या कहना है इनका
गौरव शुक्ला निवासी भठवा - "गौरक्षक श्री शिवानंद द्विवेदी जी के द्वारा हमें गाय एक्सीडेंट होने की  सूचना मिली तो हमनें संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर अवगत कराया, साथ ही प्राथमिक उपचार करा के ट्रेक्टर ट्राली  के माध्यम से गाय को परिजनों के घर पहुंचा दिया "
 गिरीश पटेल निवासी बांस-  "जब से यह रोड हाइवे बनी है तब से ओव्हर लोड बहनों की निकशी के चलते लगातार इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं।"
ओम शुक्ला निवासी भठवा - "पशुओं की तो गिनती नहीं की एक दिन में कितने दुर्घटना के शिकार होते हैं आए दिन लोगों के साथ भी यही होता है। स्थानीय पुलिस प्रशासन की सह से ओव्हर लोड बहनों की धड़ल्ले से निकासी होती है। इसका विरोध भी किया गया लेकिन कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा है।"
 शिवानंद द्विवेदी, गौरक्षक सामाजिक कार्यकर्ता - "यह पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी बड़े बड़े ट्रक घरों में घुस चुके हैं। पता नहीं कितने व्यक्ति व मवेशी दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं। इसलिए साशन प्रशासन संदर्भित विषय को संज्ञान में ले ओव्हर लोडेड व भारी वाहनों के निकासी में प्रतिबंध लगाएं। साथ ही क्षेत्र में बनाएं जाने वाली गौशाला के निर्माण कार्य में भी तीव्रता आए जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।"
   गोशालाएं न बनने से बेसहारा मवेशियों की हालत खराब
     मप्र में वर्तमान सरकार द्वारा 1000 गोशालाओं को बनाये जाने हेतु प्रस्ताव लाया गया है जिनमे से काफी गोशालाओं को बनाये जाने हेतु जगह भी चिन्हित कर ली गयी हैं। जिला रीवा में ही अकेले 33 गोशालाएं खोली जानी हैं जिनमे से 30 गोशालाओं के निर्माण  हेतु टीएस भी जारी किए जा चुके हैं लेकिन ग्राउंड वर्क न होने से स्थिति दयनीय बनी हुई है।
  हिनौती और बांस ग्राम पंचायत में मात्र खोदे गए गड्ढे
    बता दें कि गंगेव ब्लॉक के हिनौती एवं बांस ग्राम पंचायत में गोशाला निर्माण के नाम पर अब तक मात्र गड्ढे ही खोदे गए हैं। कुछ गड्ढे खोदे जाने के बबाद बाहर के मजदूरों द्वारा कार्य अधूरा छोंड़कर भाग जाने के कारण मनरेगा का कार्य पूर्णतया बन्द हो चुका है। ज्ञात हो कि मनरेगा के कार्य बाहरी मजदूरों नही बल्कि पंचायत और आसपास के मजदूरों के द्वारा करवाये जाते हैं। जबकि उक्त पंचायतों में गोशाला निर्माण के प्रारम्भ से ही धांधली प्रारम्भ होगयी है जिसकी निगरानी शासन प्रशासन को करना अत्यंत आवश्यक है।
  वाहनों की स्पीड पर लगे रोक, ऐरा प्रथा पर भी लगे लगाम
    आज सबसे ज्यादा मवेशी वैष्णो6 और सड़क दुर्घटनाओं के शिकार हो रहे हैं।सतना से बेला, क्योटी से कलवारी, मनगवां से चाकघाट एवं मनगवां से हनुमना अथवा शहरी रोड कोई भी सड़कें हो, इनमे बेतरतीब और रेलमपेल दौड़ने वाले ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों की वजह से रोज सैकड़ों ऐरा मवेशी इसका शिकार हो रहे हैं। सामान्य तौर पर फसल नुकसानी बचाने के लिए होने वाली पशु क्रूरता तो है ही लेकिन उससे कहीं भयावह स्थिति सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले मवेशियों की है। इस कारण जब तक ऐरा प्रथा में रोक नही लगती और ओवरस्पीड और ओवरलोड वाहनों पर नियत्रण और कार्यवाही नही होती तब तक कुछ भी कह पाना मुश्किल है। भठवा मार्केट के पास की घटना उसका एक पहलू मात्र है।
संलग्न - कृपया दुर्घटना से बुरी तरह घायल गाय की स्थिति एवं तत्पश्चात सर्जनों एवं डॉक्टर द्वारा किया गया इलाज की फ़ोटो।
------------------

शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

जिला रीवा मप्र मोबाइल 9589152587





Thursday, January 18, 2018

"(पशु क्रूरता) चरनोई तो ख़त्म ही हो गयी, पशुओं को पैरा एवं भूषा से भी किया जा रहा वंचित, गहाई-मिजाई के बाद किसान मार देता है माचिस, पूरा पैरा धू धू करके जाता है जल"

-----------------------------------
(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र) चलिए आज  किसान और गोवंशों की दुर्दशा पर थोडा आगे प्रकाश डालते हैं और शोध करते हैं की इस समस्या की जड़ कहाँ है.
     चाहे मानव कितनी भी लच्छेदार बातें करे. चाहे मानव कितना भी मशीनी उपकरण का अविष्कार अपने विलासिता के लिए कर ले, फसल और उपज की सुरक्षा की बात करे, और अपनी भूंख का कितना भी रोना रोये शायद आज क्या कभी भी मानव की भूंख को न तो इंसान और और न ही भगवान् शांत कर सकता है. इतिहास, शास्त्र, ग्रन्थ इस बात के गवाह हैं की मानव का पेट और भूंख जब दोनों बढ़ने लगी तो मानव मानव न रहकर हैवान और राक्षस बन गया. रावण, कुम्भकर्ण, कंस, हिरनकश्यप, और पता नहीं कितने राक्षसों की कहानियां मानव से राक्षस बनने की हैं और अंततः उनके अंत की हैं. और आज फिर वही इतिहास दोहराए जाने की स्थिति में खड़ा है. किसी ने बिलकुल ठीक ही कहा है की इतिहास हमेशा अपने आप को दोहराता है. चाहे इतिहास में बुरा से बुरा हुआ रहा हो वह भी और चाहे अच्छा से अच्छा हुआ रहा हो वह भी दोनों ही दोहराए जाते हैं.
     अच्छा तो जो होना था वह भारत वर्ष में हो चूका अब तो शायद बुरे का ही समय आ चुका है. तभी तो शास्त्रीय ढंग से अच्छा और धार्मिक काम करने वाला हर वह शख्स दुनिया की नजर में मूर्ख, ढोंगी, दिखावटी कहलाता है और तथाकथिक गोमांस, मांसाहार, शराब नशा करने वाला समाज या व्यक्ति एडवांस्ड पढ़ा लिखा और मॉडर्न कहलाता है तो भला आज जब ज्यादातर समाज बीफ ईटर हो चूका है गोवंशों की सुरक्षा के लिए लड़ने वाला और उनके अधिकार की बात करने वाला व्यक्ति वेवकूफ मूर्ख नहीं कहलायेगा तो भला और क्या कहलायेगा?
   
मानव के अतिक्रमण ने समाप्त कर दिया चरनोई की भूमि, पशुओं के लिए नहीं है धरती में अब कोई स्थान शेष -
------------------------------------------

  जी हाँ हकीकत आज यही है की जो कभी गोचर और चरनोई की भूमि हुआ करती थी वह शासकीय माफिया एवं प्राइवेट माफिया ने मिलकर पूरी तरह से समाप्त कर दिया. कहीं कुछ नहीं बचा है. यदि बचा है तो मात्र पथरीला स्थान और वह भी आज माइनिंग के नाम बुरी तरह से दोहन किया जा रहा है. किसान के लिए कभी पशु पशुधन की श्रेणी में आते थे लेकिन आज कितना बड़ा दुर्भाग्य है की यही पशु चूँकि किसान के लिए दूध के अतिरिक्त खेती किसानी के लिए उपयोगी नहीं रहे तो सबके लिये बोझ बन गए. मानाकि मशीन का अविष्कार मानव जीवन के लिए वरदान साबित हुआ है और उसकी ज्यादातर भौतिक शुख सुविधाओं विलासिता की पूर्ती करने में सहायक सिद्ध हुआ है पर क्या यह मशीन सब कुछ कर पाएंगी? क्या वास्तव में गोवंशों अथवा पशुओं के बिना मानव धरती पर अकेले रह पायेगा? क्या गोवंशों के बिना भारतीय संस्कृति का वजूद रह पायेगा? बहुत सारे अनुत्तरित प्रश्न है जो आज भारतीय मानव से जबाब तलास रहे हैं.
  
  खर पतवार के नाम पर किसान पैरा भूषा में खेत में ही लगा देता है आग, जल जाता है सब धू धू करके -
----------------------------------------------

पशुओं का पूरा अधिकार छीन लिया गया है. पहले उनको अनुपयोगी बताकर घर से खदेड़ दिया गया अब वह मारे मारे फिर रहे हैं. मानव को मात्र दूध, दही घी, पनीर, मक्खन ही बस पसंद है बांकी पशु उसे पसंद नहीं. जिस प्रकार से आज के वर्तमान विकसित समाज में बूढ़े हो चले माँ बाप हमे पसंद नहीं आते और भार लगते हैं वैसे ही गोवंश भी हमारे लिए अब पूरी तरह से भार बन चुके हैं. पहले मानव ने उनकी चरनोई और गोचर भूमि को समाप्त किया और अब उनके लिए शेष बचे पैरा भूषा को भी अपने लिए अनुपयोगी समझ कर माचिस मार रहा है. आज कहीं भी किसी भी गाँव में चले जाएँ तो देखने को मिलता है की आज जो स्वार्थी किसान अपनी फसल की दुहाई दे रहा है वह बिना विचार किये हुए जैसे ही फसल की मिजाई गहाई पूरी होती है बचे हुए भूषे एवं पैरा में माचिस मारकर जला देता है. आज कहीं कोई हरियाली नहीं है क्योंकि गोचर भूमि ही नहीं बची हुई है तो भला हरियाली कहाँ बचेगी. यदि हरियाली है भी तो वह है फसल की खेतों में हरियाली जिस पर किसान का पहरा है, और पहरा होना भी चाहिए. अब यदि वही किसान गहाई के बाद बचे हुए पैरे एवं भूषे में माचिस मार देगा तो भला मवेशिओं के लिए क्या ख़ाक बचेगा खाने के लिए? मवेशी दर दर की ठोकर मारे फिर रहे हैं. उन्हें खाने पीने के लिए कहीं कुछ नहीं बचा है. इस स्वार्थी मानव द्वारा दूध पीकर घी, दही मट्ठा खाकर आवारा छोड़ दिए गए इन गोवंशों के लिए न तो इस धरती में कोइ जगह है न ही कहीं अन्यत्र. आखिर यह बेचारे बेजुबान पशु जांए तो जाएँ कहाँ? कौन है इनका मालिक? क्या अहिंसा और सभी जीवों में एक ही ईश्वर का पाठ पढ़ाने वाली भारतीय संस्कृति का यही हाल होगा? क्या कभी भारतीय संस्कृति में माता की उपमा प्राप्त गौ माता की इसी भारतीय समाज मे इससे भी अधिक और दुर्दशा देखने को मिलेगी? क्या भगवान् शिव के वाहक नंदी के लिए भगवान् भोलेनाथ के बानाये इस संसार में और और जगह नहीं बची है? अपने स्वार्थ और पेट की दुहाई देने वाले इस कलयुगी मानव के लिए  यह सब प्रश्न है जिनका जबाब इसे देना पड़ेगा अन्यथा वह समय दूर नहीं जब भारतीय संस्कृति विलुप्त प्राय संस्कृतियों में शामिल हो जाएगी. क्योंकि जब गोवंश ही नहीं रहे तो भारतीय संस्कृति कहलाने का ही क्या औचित्य होगा.

  - शिवानंद द्विवेदी 7869992139

Thursday, February 16, 2017

(Rewa, MP) जिले भर के अवैध बाड़ों में गौवंशों के मौत का खेल बदस्तूर जारी - शासन-प्रशासन सोया चिरनिद्रा


दिनांक: 16/02/2017, स्थान: रीवा मप्र


दिनांक 15 फरवरी को हिनौती पंचायत के पाण्डेय ढाबा के पास बने अवैध बाड़े में भूंख प्यास से हुई कुछ और गौवंश की मौत

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) गौवंशों के लिए जिले में बनाए गए अवैध बाड़ों में स्थितियां सुधरने की कगार पर बिलकुल ही नहीं दिखतीं. कारण स्पष्ट है की जब तक इन अवैध बाड़ों को नष्ट ध्वस्त का हटाया नहीं जाएगा तो भला स्थितियां क्या अपने आप ही सुधर जाएँगी?
आये दिन रोज़ जिले के सभी अवैध बाड़ों में बिना चारा पानी, भूषा, और छाया के बेजुबान गौवंशों की तड़प-तड़प कर मौत का शिलसिला निरन्तर जारी है जिसे देखने वाला न तो कोई शासन प्रशासन है और न ही कोई समाज और उसके ठेकेदार. आज स्थिति यह हो चुकी है की गौवंशों के लिए तथाकथित फसल सुरक्षा के नाम पर बनाए गए यह अवैध बाड़े किसी बूचड़ खाने से ज्यादा भयावह स्थिति में नज़र में आते हैं. जिस प्रकार विश्व युध्य के दौरान यूरोप में नाजियों और उनके समर्थकों के द्वारा यहूदियों को प्रताड़ित करने और मारने के उद्येश्य से घेटो और गैस-कैंप बनाये गए थे जहाँ यहूदियों को मरने के लिए छोंड दिया जाता था, ठीक उसी तरह पूरे रीवा जिले और यहाँ तक की प्रदेश में जगह-जगह पर अवैध तरीके से कानून को ताक पर रखकर अवैध बाड़े बनाए गए हैं जिनमे किसी भी प्रकार की कोई व्यवस्था न तो इस समाज और न ही शासन-प्रशासन द्वारा की गयी है लिहाज़ा रोज़ ही गौवंश भूंख प्याश से तड़प-तड़प कर मर रहे हैं और इस आस ए हैं की शायद कोई तो आकर इन्हें बचाए. पर भला इस कलयुग में अब कृष्ण कहाँ जो आततायियों को अपने चक्र सुदर्शन से छड़ों में नष्ट कर देते और धर्म की पुनः स्थापना करते. पर भले ही कृष्ण सदेंह न हों पर भारत का संविधान तो है जिसमे इन पशुओं को भी कुछ तो अधिकार प्राप्त हैं जो कानूनी तौर पर लागू होने चाहिए. अब प्रश्न यह उठता है की इन अधिकारों को इन कानूनों को लागू तो शासन प्रशासन को ही करवाना है न?

यह कोई पहली बार नहीं है की मीडिया में गौवंशों की प्रताड़ना की बाते आ रही हैं. पिछले कई महीनों से ठण्ड प्रारंभ होते ही नवम्बर माह से लगातार अवैध बाड़ों में मरने वाले मवेशियों की खबरें मीडिया में निरन्तर आती रही हैं और कई बार ईमेल, लिखित, मोबाइल, दूसरे कम्युनिकेशन के माध्यम से शासन-प्रशासन के समक्ष रखी गयीं थी परन्तु मजाल क्या है की सिर्फ कागज़ी घोड़ों के अतिरिक्त इस देश-प्रदेश के शासन-प्रशासन के कान तक जूं भी रेंग पाई हो.
दुर्भाग्य है इस देश और समाज का की जिन गौवंशों का सरोकार सीधे भारतीय संस्कृति से हैं आज भारतीय जनता पार्टी जैसे अपने आपको हिन्दूवादी पार्टी बताने वाली पार्टी और अन्य दुनिया भर के हिंदूवादी संगठन और यह सरकार गौवंशों के लिए क्या कुछ कर रही है आज यह पूरे समाज में विदित हो चुका है. श्री शिवराज सिंह चौहान और श्री नरेंद्र मोदी जी कृपया देखने का कष्ट करें की क्या आपकी पार्टी के शासन काल में गौवंशों की यही दुर्दशा होगी? देखना यह भी होगा की कहीं इन बेजुबान गौवंशों पर हो रही राजनीति से यह तथाकथित हिंदूवादी संगठन और पार्टियाँ गौवंशों के श्राप से भस्मीभूत होकर सदैव के लिए ही न विलुप्त हो जाएँ. क्योंकि यदि ह्रदय और इमानदारी से गौवंशों की सुरक्षा के लिए प्रयास न किये गए तो ईश्वर भी इन्हें माफ़ न कर पायेगा.      


संलग्न – हिनौती के पास बनाए गए अवैध बाड़े के पास कल दिनांक 15 फरवरी को मृत पड़े कुछ मवेशी और साथ में बिना किसी चारा पानी के कमज़ोर और मरने की कगार पर अन्य गौवंश के छायाचित्र.


-------------------
Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 














Thursday, January 5, 2017

(Rewa, MP) गौ हत्याओं और पशु प्रताड़ना पर रीवा जिला प्रशासन नहीं लगा पा रहा रोक



गौ हत्याओं और पशु प्रताड़ना पर रीवा जिला प्रशासन नहीं लगा पा रहा रोक

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) कहने को तो पशुओं और गौवंशों की सुरक्षा के लिए इतने कानून बने हैं पर देखना होगा की उन नियमों का पालन क्या कहीं भी पूरे मप्र में सही तरीके से हो पा रहा है. मप्र में विशेष तौर पर गौवंश प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक वर्ष 2010/12 में पारित किया गया जिसमे गौवंशों के वध पर और प्रताड़ना पर पांच हज़ार तक का जुर्माना और अधिकतम सात साल के कैद का प्रावधान है और यह अपराध संज्ञेय भी है साथ ही आरोपी को अपने आप को दोषमुक्त सिद्ध करना पड़ेगा ऐसा प्रावधान है. इसी प्रकार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के अंतर्गत भी कई प्रावधान हैं जिन्हें यदि कड़ाई से लगाया जाये तो पशुओं और गौवंशों के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता काफी हद तक बंद की जा सकती है. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत भी पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर एफ आई आर दर्ज कर कार्यवाही करने का प्रावधान है.

लालगांव पंचायत में हर्दी-अटरिया के बीच बनाया गया है गौवंशों का अवैध बांड़ा

अवैध बांडे एक जो सबसे भयावह दृश्य था वह है लालगांव पंचायत में हर्दी-अटरिया के बीच बनाया गया अवैध बांड़ा जो की वहीँ आसपास के लोग जैसे विजय सिंह, मुन्ना राजा, काशी सिंह, रावेन्द्र मिश्रा द्वारा कानून को धता बताकर बनाया गया है. चश्मदीखों के अनुसार यहाँ पर पिछले कई महीनों से गौवंशों को कैद करके रखा गया है जिसमे न तो चारे, भूसे की व्यवस्था है और न ही किसी पशुशेड की. ठण्ड में पांच डिग्री के नीचे के तापमान पर आज गौवंश भूंख, प्यास, छाया बिना तड़प-तड़प कर जान दे रहे हैं जिन्हें देखने वाला न तो कोई कलेक्टर है और न ही कोई मंत्री मिनिस्टर. खैर गाँव वालों का क्या कहना यह बाड़े तो उन्ही के द्वारा बनाये गए हैं. हर्दी-अटरिया स्थित यह अवैध पशु-कैदखाना लालगांव के किसी गुप्ता की खाली पड़ी हुई जमीन में बनाया गया है. परन्तु चश्मदीखों के अनुसार यह अवैध बांड़ा बनवाया वहीँ हर्दी, बर्रेही, लालगांव और अटरिया के तथाकथित कृषकों द्वारा हैं.



भाजपा मंडल अध्यक्ष शंकर सिंह और उनके सहयोगियों द्वारा बनवाया गया सोनवर्षा डांडी का अवैध बांड़ा

      इसी क्षेत्र में दूसरा अवैध बांड़ा लालगांव पंचायत के सोनवर्षा डांडी नामक स्थान पर बनाया गया है जो वहीँ के यादव समुदाय की जमीन पर बना हुआ है. दो जनवरी 2017 की रात गढ़ पुलिश के सहयोग से यह अवैध बांड़ा हटाये जाने के बाद अगले दिन इसी क्षेत्र के भाजपा मंडल अध्यक्ष शंकर सिंह स्वयं जिला पंचायत प्रत्यासी राकेश शर्मा उपाध्याय के साथ थाना गढ़ पहुचे और उन्होंने स्वीकार किया की सोनवर्षा का यादवों की जमीन पर बनाया गया बाड़ा उनके और सहयोगियों की माध्यम से बनाया गया था. यह हाल हैं गौवंश के लिए समर्पित और हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए कार्य कर रहे भाजपा के कार्यकर्ताओं के. यदि ऐसा है तो वह लोग ज्यादा बेहतर हैं जो गौवंशों को अपने आहार के लिए प्रयोग कर रहे हैं. कम से कम गौवंशों को प्रताड़ना देकर घुट-घुट कर अवैध बांडो में चारे, पानी, छाया बिना कड़ाके की ठण्ड में मारने से तो अच्छा है उन्हें एक बार में मौत के घाट उतार दिया जाना?

गौवंशों और बेजुबान पशुओं के साथ क्रूरता मानवीय संवेदनाओं के अंत का द्योतक

      यह भारतीय संस्कृति का दुर्भाग्य है की आज मात्र गौवंशों और पशुओं की सुरक्षा के लिए भी राजनीति की जा रही है. अब कम से कम आम जनता के समक्ष यह बात भली-भांति स्पष्ट हो जाएगी की क्या यह राजनीतिक पार्टियाँ मात्र मानवीय संवेदनायों को आधार बनाकर ही तो राजनीतिक लाभ ले रही हैं. न ही इन्हें गौवंशों की सुरक्षा से कोई लेना देना है और न ही आम किसान और आम जनता से.
      यह बात सत्य है की आवारा पशुओं से आज हर एक किसान और कास्तकार त्रस्त है परेशान है पर प्रश्न यह भी है की क्या आवारा पशुओं और गौवंशों को अवैध रूप से बनाये गए बिना किसी उचित व्यवस्था के बांडो में चारा, पानी, भूसा, छत बिना कड़ाके की ठण्ड में तड़पने मरने के लिए छोंड देने से किसानों की समस्या का समाधान हो जायेगा? किसान यह कैसे भूल सकता है की यही गौवंश हैं जिनके दूध, दही, घी, और दुग्ध उत्पाद खा पीकर वह पला बढ़ा है और उसके बाल बच्चे इन्ही गौवंशों के दुग्ध उत्पाद से पल बढ़ रहे हैं. क्या हर सुबह जब हम एक कप चाय पीते हैं तो इस बात का एहसास नहीं करते की इस चाय में डाला गया दूध किसी
 दुधारू पशु से ही प्राप्त हुआ होगा?
    
      आखिर इन गौधनों की इतनी बड़ी दुर्दशा क्यों? क्या यही हमारे ग्रामीण किसान भाई हर एक ग्राम पंचायत में स्वयमेव ऐसी व्यवस्था नहीं बना सकते कि एक-दो पशु सभी लोग अपने घरों में बाँध लें और अन्य पशुओं की तरह ही इनकी भी व्यवस्था बना लें?

पशु और गौवंश न होने पर प्राकृतिक पर्यावरण पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
    
      आज अज्ञानता अथवा हेकड़ी बस भले ही किसानों और भारतीयों को यह बात समझ न आ रही हो पर यह बात तय है की यदि गौवंश और पशुधन न रहेंगे तो पूरी भूमि बंजर हो जाएगी. प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जायेगा. उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. शांस लेने के लिए हवा न मिलेगी और पीने के लिये पानी नहीं होगा. ऐसा समय आयेगा की मानवता एक-एक दाने के लिए तरस जाएगी. क्योंकि आज विज्ञान भी इस बात को मान रहा है की रासायनिक खादों के हो रहे निरंतर प्रयोग से भूमि की उपजाऊ शक्ति कमजोर पड़ रही है जिससे हर वर्ष भूमि में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उर्वरक और रासायनिक तत्वों का प्रयोग करना पड़ रहा है. आज कृषि विज्ञान जो गोबर अथवा बायो-खाद और बायो-उत्पाद की निरंतर बात कर रहा है वह इसी वजह से कर रहा है कि लगातार बढ़ रही मानवीय आवादी के पालन-पोषण के लिए निरंतर बंजर हो रही भूमि की उर्वरा शक्ति कैसे बढ़ाई जाए.

     
प्रदेश के हर जिले में कलेक्टर के संज्ञान में है पशुपालन एवं पशु संवर्धन समिति
     
      जिला स्तरीय समितियों की यदि बात किया जाए तो गौधन और पशुधन के पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के हर जिले में विशेष निगरानी समितियों का गठन होता है जो सदैव जिला कलेक्टर के संज्ञान में रहता है. जिला कलेक्टर यदि चाहे तो या की मनरेगा की उप योजना अंतर्गत अथवा पशुपालन विभाग द्वारा तीन-चार पंचायतों के बीच में आवारा गौवंशों की सुरक्षा और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए बजट का आवंटन करवा कर इस समस्या का दीर्घकालीन समाधान कर सकता है. परन्तु यह सब इच्छाशक्ति और योजनायों के सही क्रियान्वयन पर निर्भर करता है. आज यह जिले में भली भांति विदित है की पशु चिकित्सा विभाग की मदद से कई पंचायतों में गौ संवर्धन केंद्र बनाने बाबत बजट दिया गया था परन्तु वह सब भ्रष्ट्राचार की बलि चढ़ गया. क्या यह सब देखने वाला कोई नहीं है? आखिर क्या जिला कलेक्टर के संज्ञान में यह बातें नहीं हैं? क्या किसानों की आवारा पशुओं सम्बन्धी समस्या जो किसी न किसी माध्यम से रोज ही मीडिया में छाई रहती है जिला प्रशासन अथवा प्रदेश स्तर पर ज्ञात नहीं है? सबको सब कुछ ज्ञात है, मात्र आवश्यकता है उसके सही क्रियान्वयन की और समस्या के उचित निराकरण की. 

पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर स्थानीय पुलिश द्वारा दर्ज किये जाने चाहिए अपराधिक प्रकरण

      अब यदि किसान कास्तकार यह चाहें की बेजुवां पशुओं को अवैध तरीके से बिना चारा, पानी, भूसा, और छत्रछाया के कड़ाके की ठण्ड में तड़प कर मरने के लिए छोंड दिया जायेगा और कोई कुछ नहीं करेगा तो यह बहुत बड़ी भ्रान्ति है. क्योंकि हर व्यक्ति आज यह जान ले की जितने कड़े कानून मानव की सुरक्षा के लिए बने हैं वैसे ही कानून घरेलु पशुओं और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भी बने हैं. समस्या यह है की शासन प्रशासन इन कानून को कड़ाई से नहीं लगा पा रहा है अन्यथा कम से कम छः माह की जेल और एक हज़ार रुपये का जुर्माना तो तय है, और दोषी पाए जाने पर यह सजा पांच हज़ार के जुर्माना के साथ यह सात साल तक हो सकती है.  

संलग्न – 1) नीचे अवैध बांडो में कैद पशुओं के देखें संलग्न यूट्यूब विडियो जो की पशुओं के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता को दर्शाते हैं. 2) इसी विषय में अवैध बांडो के लिए गए फोटोग्राफ जिनमे कुछ पशु मृत पड़े हैं तो कुछ मरने की कगार पर खड़े हैं.
  
























   -------------------
Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 

Wednesday, January 4, 2017

(Rewa, MP) गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश

दिनांक 04/01/2017
गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में
छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश





(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) तथाकथित यह नया वर्ष शायद सबके लिए उतना मंगलमय नहीं है और विशेष तौर पर बेजुबान गौवंशों के लिए तो बिलकुल नहीं. इस नए ईस्वी सन 2017 में भी गौवंश और विशेषकर गौमाताएं भूंख, प्यास, ठण्ड से बिना किसी छत और छाया के खुले आसमान के नीचे तड़प तड़प कर जान दे रही हैं और शायद इसे देखने वाला कोई न तो शासन प्रशासन है और न ही यह संस्कार विहीन हो चुका भारतीय समाज. कभी भारतीय संस्कृति में गायों की उपमा माता से की गयी थी परन्तु आज अपने माता पिता की ही तरह यह समाज इन गौ माताओं को भी भूल चुका है. जगह जगह अवैध बांडों को संचालित किया गया है जिसमे बेजुबान पशु चारे, पानी, और छाया बिना तड़प रहे हैं और अपनी जाने दे रहे हैं.


भमरिया में सेदहा पंचायत में दिवाकर सिंह की जमीन पर बना है अवैध बांड़ा
   पहला बांड़ा भमरिया नामक स्थान पर दिवाकर सिंह की जमीन पर बनाया गया है. मंत्री उर्फ़ पुष्पेन्द्र सिंह पिता दिवाकर सिंह की जमीन पर अवैध बांड़ा अपराधिक किस्म के लोगों द्वारा बनाया गया है. यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कई वर्षों से भमरिया नामक स्थान पर अवैध बांड़ा बनाया जाता रहा है. प्रारंभ में इन गौवंशों की सैकड़ों की जो संख्या रहती है अंततः वह मरकर सिमट कर मुश्किल से एकाध दर्जन में आ जाती है. भमरिया का बांड़ा इसके पहले वहीँ स्थित सरकारी जमीन पर बनाया जाता था. इस वर्ष यह सेदहा पंचायत में सुर्यपाल उपाध्याय, पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ़ मंत्री, राजेंद्र उरमलिया निवासी करहिया, रामसिया उरमलिया निवासी करहिया, कुशलेंद्र सिंह पिता समर बहादुर सिंह निवासी सेदहा, प्रदीप सिंह उर्फ़ दीपू सिंह पिता राजेश्वरी सिंह निवासी सेदहा, ब्रिजेन्द्र सिंह निवासी हिनौती-बडोखर, दिनेश सिंह पिता कौशल सिंह निवासी सेदहा पंचायत आदि के सहयोग से लगभग 500 गौवंशों के लिए बड़े जगह में यह अवैध बांड़ा बनाया गया है.

भमरिया स्थित इस बांडे को नहीं हटा पायी गढ़ पुलिश
सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रेषित सूचना पर पुलिश दो बार बांडे पर गयी परन्तु बांड़ा हटाने में समझाईश के अतिरिक्त कोई प्रयाश नहीं किया. लगभग रोज़ ही इस बांडे में दो चार गौवंश भूख, ठण्ड, और प्यास से तड़प कर मर रहे हैं. अभी हाल ही में दिनांक 2 जनवरी 2017 को गायों के मरे होने की सूचना पर सामाजिक कार्यकर्ता गढ़ पुलिश के साथ स्थल पर पंहुचा परन्तु वहां पर मौजूद भीड़ में उपस्थित गौ हत्यारों ने बांड़ा हटाने का विरोध किया. जिसके परिणाम स्वरुप पुलिश कुछ नहीं कर पाई. इस दरमयान वाद-विवाद की भी स्थिति निर्मित हुई.      
   वहरहाल, समाज भले ही इस विषय को गंभीरता से न ले परन्तु आज यह देखना होगा की बेजुबान गौवंशों के साथ हो रहा यह अत्याचार भारतीय दंड संहिता की पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत आता है और गौ हत्या निवारण अधिनियम जो की शुश्री उमाभारती जी के कार्यकाल में मप्र शासन में बिल पास किया गया था उसके अंतर्गत भी आता है साथ ही भारतीय समाज में एक काला अध्याय भी लिखता है जिसमे आज यह समाज नहीं जान रहा ही की जो भारतीय गौवंश और हमारी गायें व्यक्ति के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक में सोलह संस्कारों, गया, तर्पण, कर्म, आदि में गौदान दिए जाते हैं उनकी आज यह दुर्दशा चिंतनीय है. 



पुलिश महानिदेशक मप्र शासन श्री ऋषि कुमार शुक्ल के आदेश पर एसपी रीवा द्वारा गढ़ थाना प्रभारी को गौ बचाओ अभियान में भेजा जाना
    जब कई दिन से स्थानीय पुलिश और अन्य जिला प्रशासन द्वारा गायों के विरुद्ध हो रहे अत्याचार को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था तो मप्र पुलिश महानिदेशक भोपाल श्री ऋषिकुमार शुक्ला के समक्ष यह अवैध बांडो का प्रकरण रखा गया और ऊपर भोपाल से आदेश पर रीवा एसपी और गढ़ थाना प्रभारी द्वारा कार्यवाही की गयी जिसमे गढ़ थाने अंतर्गत आने वाले कई अवैध बांडे जिसमे सेदहा पंचायत स्थित भमरिया बांड़ा, लोटनी पंचायत स्थित अवैध बांड़ा, लालगांव पंचायत स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के दो बांडे और गंतीरा स्थित अवैध बांडो में दविश दी गयी. जिसमे तात्कालिक तौर पर लालगांव स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के बांडो को तोड़ दिया गया परन्तु प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी बांडे पुनः संचालित हो चुके हैं और स्थिति यथावत पहले जैसी ही बन गयी है.    
       
पशु क्रूरता अधिनियम आदि के अंतर्गत दोषियों के ऊपर दर्ज हो प्रकरण
इस विषय में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा लिखित तौर पर गढ़ थाना में आवेदन दिया गया है की जहाँ जहाँ बिना गौवंशों की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान दिए बांड़ा बनाया गया है उन सबके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने चाहिए. क्योंकि यह पंचायत अथवा सरकार की व्यवस्था है की वह हर पंचायत में सार्वजनिक पशु शेड बनवाए और पशुओं के चारे पानी की भी व्यवस्था करे. निश्चित तौर पर बिना छाया, पानी चारा, भूषा के पशुओं को खुले आसमान के नीचे मरने के लिए छोंड देना तो मानवता के घोर खिलाफ है साथ ही कानूनी तौर पर भी अपराध है. ऐसे अपराधियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की माग लिखित तौर पर की गयी है.
    वर्तमान लेख लिखे जाने तक सभी बाड़ों में पशु और गौवंश पुनः कैद कर दिए गए हैं और चारा पानी भूषा छाया बिना वैसे ही तड़प रहे हैं.
संलग्न – 1) अवैध रूप से संचालित बाड़ों में कैद गौवंशों के फोटो. 2) रीवा जिला मप्र के गढ़ थाना अंतर्गत अवैध रूप से संचालित लगभग दर्ज़न भर बाड़ों में से कुछ छः बाड़ों के वीडियो जो की यूट्यूब में अपलोड किये गए हैं उनका लिंक भी दिया गया है –
































































-----------------
शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता, एवं राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139, 09589152587