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Tuesday, January 23, 2018

Rewa, MP -लौरी अगडाल कैथा प्रधानमंत्री सड़क में की जा रही गुणवत्ता की अनदेखी, घटिया पुल निर्माण के बाद अब सड़क पर अमानक सामग्री का हो रहा प्रयोग

दिनांक 23 जनवरी 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र
    (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) 
         ज़िले के मऊगंज प्रधानमंत्री सड़कों पर ध्यान नही दिया जा रहा है।  निर्माण की जा चुकी सड़कें पहले से ही उखड़ रही हैं और जो निर्माणाधीन हैं उनकी गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है।
          पुलों के निर्माण से लेकर सड़क में निर्माण सामग्री बिछाने तक के कार्य मे मापदंडों की निरंतर अनदेखी हो रही है।
          प्रधानमंत्री सड़क के जिम्मेदारों के समक्ष इस बात को रखा गया है लेकिन कोई सार्थक कार्यवाही नही हुई है। अभी हाल ही में प्रदेश में इस बात को उठाया गया और पीएम सड़क के प्रभारी जे एस सिकरवार को अवगत कराया गया है। सिकरवार का कहना था कि जीएम मऊगंज से संपर्क कर जानकारी चाही गयी है। दिनांक 21 एवं 22 जनवरी को "मेरी सड़क" नामक ऐप्प की मदद से प्रतिक्रिया प्रेषित की गई थी जिस पर कार्यवाही होना शेष है।
         मऊगंज प्रधानमंत्री सड़कों की स्थितियां सबसे खराब है, जिनमे से कई सड़कें जो पिछले वर्षों बनाई गई थीं वह उखड़ चुकी हैं। जो सड़कें वर्तमान में बनाई जा रही हैं उनमे मापदंडों की अनदेखी चल रही है जबकि देखा जाय तो समस्या को विभाग के संज्ञान में निरंतर रखा जाता रहा है। अब सवाल यह उठता है कि विभाग और संबंधित ठेकेदार को निरंतर सूचित किये जाने के वावजूद भी यदि कोई सार्थक कार्यवाही नही हो रही है तो संदेह विभाग की संलिप्तता पर ही जाता है।
   देखिए जब जीएम प्रधानमंत्री सड़क श्री निगम से इस संदर्भ में बात की गई तो जनका क्या कहना था।
    "जी हम स्वयं ही इस विषय मे आपसे बात करना चाह रहे थे, अच्छा हुआ आपका काल आ गया, देखिए मैं लौरी-गढ़ से कैथा वाली पीएम सड़क देखने गया था और ठेकेदार को अनियमितता में रिमाइंडर दिया है और साथ ही सही सामग्री उपयोग किये जाने के लिए कहा गया है । मैं आपके क्षेत्र में आऊंगा और फिर देखूंगा की कैसा काम चल रहा है। हैमर और कोर कटिंग टेस्ट के लिए कुछ पुलों का सैंपल भेजा है लेकिन आपके क्षेत्र की सड़क इसमे अभी शामिल नही है।" - जीएम, मऊगंज प्रधानमंत्री सड़क श्री निगम।
 संलग्न - कृपया लौरी-गढ़ से कैथा प्रधानमंत्री सड़क की वर्तमान तस्वीरें देखें जिनमे अमानक निर्माण सामग्री गलत अनुपात में उपयोग की जा रही है। इसी प्रकार कार्यवाही की डर से पुलों के ऊपर सफेद छुही चढ़ाई जा रही है।
    - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक आर टी आई कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139





Monday, January 9, 2017

(Rewa, MP) थाना गढ़ अंतर्गत भमरिया में गौ-हत्यारों द्वारा ठण्ड भूंख प्यास से तड़पा कर एक और गाय का हुआ अंत

 दिनांक – 09/01/2017
 स्थान –  (रीवा, मप्र)



थाना गढ़ अंतर्गत भमरिया में गौ-हत्यारों द्वारा ठण्ड भूंख प्यास से तड़पा कर एक और गाय का हुआ अंत

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) यदि आप हिनौती धान खरीदी केंद्र में अपनी धान बेचने जा रहे हैं तो थोडा सावधान होकर जाएँ. जी हाँ हम बात कर रहे हैं जनपद गंगेव अंतर्गत हिनौती धान खरीदी केंद्र और हिनौती समिति की. हिनौती धान खरीदी केंद्र दारुबाजों और गांजाखोरों का अड्डा बन चुका है जिसमे पूरी रात दारुबाजों और गांजाखोरों का जमावड़ा रहता है, और इसी के पास आपको मिलेगा दिल दहलाने वाला नज़ारा जहाँ वहीँ पर भमरिया नामक स्थान पर धान खरीदी केंद्र से पचास मीटर के दायरे में लगभग 500 गौवंशों के लिए बनाया गया अवैध कैदखाना जिसमे न तो पानी, न ही चारा-भूसे और न ही किसी छाया की व्यवस्था है.



दिनांक 08 जनवरी 2017 को रात ठण्ड भूंख प्यास से मर गयी एक और गाय

भमरिया में अभी प्राप्त हुई जानकारी के अनुसार घटनास्थल पर जाया गया और एक और गाय मृत पाई गयी. पता चला की यह गाय ठण्ड भूंख प्यास की वजह से तड़प कर मर गयी जिसके चास्म्दीख गवाह वहां पर हिनौती धान खरीदी केंद्र में इकठ्ठा दर्ज़नों लोग थे जिहोने पूरा वाकया सुनाया. इस प्रकार रोज़ ही कोई न कोई मवेशी खुले आसमान में ठण्ड भूंख प्यास से तड़प तड़प कर मर रहे हैं जिसके विषय में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा कई विडियो और फोटो मीडिया और साथ ही संवंधित विभागों को कार्यवाही के लिए भेजे जा चुके हैं और समय समय पर लगातार भेजे भी जा रहे हैं.
अब सवाल यह उठता है की पूरे रीवा जिले में जो भी अवैध बांडे बनाये गए हैं उनकी संख्या सैकड़ों में है पर अब तक शासन-प्रशासन मौन क्यों है? यदि गौवंश बिना किसी उचित व्यवस्था के अवैध बने बांडो में भूंख प्यास ठंढ से तड़प-तड़प कर जान दे रहे हैं तो उनके लिए सरकार प्रशासन द्वारा कोई उचित व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है जबकि देखा जाय तो लगभग रोज़ गौवंशों के ऊपर हो रहे अत्याचार का मामला पूरे जिले और प्रदेश की मीडिया में छाया हुआ है. 

-देश प्रदेश के किसानों से गौवंशों के प्रति दया और मानवीयता की अपील-

      गौवंशों के ऊपर निरन्तर हो रहे अत्याचार को लेकर एनजीओ श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत) द्वारा देश-प्रदेश के किसानों और अन्य नागरिकों से अपील की जाती है की भारतीय संस्कृति में विशेष दर्ज़ा प्राप्त गौवंशों के ऊपर अत्याचार न किये जाएँ. उन्हें चारा, पानी भूसा, बिना अवैध बांडो में कैद करके तड़पा-तड़पा कर न मारा जाए. उन्हें मुक्त किया जाए और उसके स्थान पर अपने-अपने खेतों की रखवाली किया जाए. अवैध बांडो के स्थान पर शासन-प्रशासन पर दबाब डालकर वैध तरीके से पंचायती गौशालाएं संचालित की जाएँ जिससे उनकी गोबर की जो खाद, दुधारू पशु से प्राप्त दूध और साथ ही आज वैज्ञानिक तरीके से गौमूत्र, गोबर से अगरवत्ती आयुर्वेदिक दवाईयां आदि का निर्माण सीखकर लोगों को तो रोजगार में लगाया ही जाए साथ ही गौवंशों की उपयोगिता भी बनी रहे और उनकी सुरक्षा भी हो सके.
      गौवंशों के प्रति अमानवीय और हिंसात्मक रास्ता अपनाने से कोई लाभ नहीं बल्कि पशु क्रूरता अधिनियम, मप्र गौवंश वध प्रतिषेध (अमेंडमेंट) बिल 2010/12, आईपीसी की धारा 428/429  आदि द्वारा दंडात्मक कार्यवाही हो सकती है और उल्टा जेल जाने की नौवत आ सकती है. इस कारण आज किसानों और अन्य नागरिकों को अपनी सोच बदलकर वैज्ञानिक दृष्टिकोंड़ अपनाने की आवश्यकता है और गौवंशों और अन्य पशुओं से वैज्ञानिक तरीके से लाभ लेकर उनके भी जीवन रक्षा के विषय में सोचकर उनकी भी उपयोगिता बढ़ाने की आवश्यकता है.

समाज और सरकारें गौवंशों की उपयोगिता पर विचार कर उनकी रक्षा करें

यदि आज गौवंशों और नाकाम हो चुके पशुओं की यह वर्तमान दुर्दशा है तो कहीं न कहीं कारण इनकी उपयोगिता का भी कम होना है. आज सरकार और विभिन्न सरकारी/गैर-सरकारी संगठनों को जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है. मानाकि आज वैज्ञानिक उपकरणों और कृषि यंत्रों से किसान और आम नागरिक का जीवन ज्यादा विलाशी और सुलभ हो गया है पर इसका तात्पर्य यह बिलकुल भी नहीं की इस जीवन का सारा कार्य विज्ञान और मशीनें ही कर लेंगी उसमे किसी पशु की कोई आवश्यकता नहीं पड़ेगी. सच्चाई बिलकुल उसके विपरीत है और भले ही आज तात्कालिक रूप से किसानों और नागरिकों को यह लग रहा है गौवंश और पशु उनके लिए बोझ बन गए हैं पर यदि दूरदृष्टि लगाईं जाए तो समझ आएगा यदि पशु, मवेशी, जीव जंतु नहीं होंगे तो यह प्राकृतिक संतुलन पूरी तरह से विगड़ जायेगा. आज विज्ञान बार-बार इस बात को कह रहा है की गोबर की खाद, बायो-खाद, बायो-उत्पाद की बेहद आवश्यकता है. आज जो हमारी दिनचर्या में इतनी अधिक बीमारियाँ और स्वास्थ्य सम्बन्धी तकलीफें बढ़ रही हैं तो उसका कारण आज का वातावरण ही है जो कहीं न कहीं पूरी तरह से केमिकल उत्पादों, केमिकल खादों, जहरीली दवाओं आदि पर निर्भर होता जा रहा है.

      आज आवश्यकता है एकबार पुनः सोचने की और अपनी पूर्व की जीवनचर्या अपनाने की. प्रकृति के नजदीक ही पंहुच कर हमे शांति भी मेलेगी, सुख भी और स्वास्थ भी. मात्र आवश्यकता है परम्पराओं में थोड़ी सी वैज्ञानिक सोच की जो की दाल में नमक का कार्य करेगा और हमारे जीवन के सस्वाद को अत्यधिक बढ़ा देगा.


पशुओं के विरुद्ध क्रूरता पर स्थानीय पुलिश द्वारा दर्ज किये जाने चाहिए अपराधिक प्रकरण

      अब यदि किसान कास्तकार यह चाहें की बेजुवां पशुओं को अवैध तरीके से बिना चारा, पानी, भूसा, और छत्रछाया के कड़ाके की ठण्ड में तड़प कर मरने के लिए छोंड दिया जायेगा और कोई कुछ नहीं करेगा तो यह बहुत बड़ी भ्रान्ति है. क्योंकि हर व्यक्ति आज यह जान ले की जितने कड़े कानून मानव की सुरक्षा के लिए बने हैं वैसे ही कानून घरेलु पशुओं और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भी बने हैं. समस्या यह है की शासन प्रशासन इन कानून को कड़ाई से नहीं लगा पा रहा है अन्यथा कम से कम छः माह की जेल और एक हज़ार रुपये का जुर्माना तो तय है, और दोषी पाए जाने पर यह सजा पांच हज़ार के जुर्माना के साथ यह सात साल तक हो सकती है.  

संलग्न – 1) नीचे अवैध बांडो में कैद पशुओं के देखें संलग्न यूट्यूब विडियो जो की पशुओं के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता को दर्शाते हैं. 2) इसी विषय में अवैध बांडो के लिए गए फोटोग्राफ जिनमे कुछ पशु मृत पड़े हैं तो कुछ मरने की कगार पर खड़े हैं.














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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587

TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 

Wednesday, January 4, 2017

(Rewa, MP) गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश

दिनांक 04/01/2017
गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में
छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश





(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) तथाकथित यह नया वर्ष शायद सबके लिए उतना मंगलमय नहीं है और विशेष तौर पर बेजुबान गौवंशों के लिए तो बिलकुल नहीं. इस नए ईस्वी सन 2017 में भी गौवंश और विशेषकर गौमाताएं भूंख, प्यास, ठण्ड से बिना किसी छत और छाया के खुले आसमान के नीचे तड़प तड़प कर जान दे रही हैं और शायद इसे देखने वाला कोई न तो शासन प्रशासन है और न ही यह संस्कार विहीन हो चुका भारतीय समाज. कभी भारतीय संस्कृति में गायों की उपमा माता से की गयी थी परन्तु आज अपने माता पिता की ही तरह यह समाज इन गौ माताओं को भी भूल चुका है. जगह जगह अवैध बांडों को संचालित किया गया है जिसमे बेजुबान पशु चारे, पानी, और छाया बिना तड़प रहे हैं और अपनी जाने दे रहे हैं.


भमरिया में सेदहा पंचायत में दिवाकर सिंह की जमीन पर बना है अवैध बांड़ा
   पहला बांड़ा भमरिया नामक स्थान पर दिवाकर सिंह की जमीन पर बनाया गया है. मंत्री उर्फ़ पुष्पेन्द्र सिंह पिता दिवाकर सिंह की जमीन पर अवैध बांड़ा अपराधिक किस्म के लोगों द्वारा बनाया गया है. यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कई वर्षों से भमरिया नामक स्थान पर अवैध बांड़ा बनाया जाता रहा है. प्रारंभ में इन गौवंशों की सैकड़ों की जो संख्या रहती है अंततः वह मरकर सिमट कर मुश्किल से एकाध दर्जन में आ जाती है. भमरिया का बांड़ा इसके पहले वहीँ स्थित सरकारी जमीन पर बनाया जाता था. इस वर्ष यह सेदहा पंचायत में सुर्यपाल उपाध्याय, पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ़ मंत्री, राजेंद्र उरमलिया निवासी करहिया, रामसिया उरमलिया निवासी करहिया, कुशलेंद्र सिंह पिता समर बहादुर सिंह निवासी सेदहा, प्रदीप सिंह उर्फ़ दीपू सिंह पिता राजेश्वरी सिंह निवासी सेदहा, ब्रिजेन्द्र सिंह निवासी हिनौती-बडोखर, दिनेश सिंह पिता कौशल सिंह निवासी सेदहा पंचायत आदि के सहयोग से लगभग 500 गौवंशों के लिए बड़े जगह में यह अवैध बांड़ा बनाया गया है.

भमरिया स्थित इस बांडे को नहीं हटा पायी गढ़ पुलिश
सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रेषित सूचना पर पुलिश दो बार बांडे पर गयी परन्तु बांड़ा हटाने में समझाईश के अतिरिक्त कोई प्रयाश नहीं किया. लगभग रोज़ ही इस बांडे में दो चार गौवंश भूख, ठण्ड, और प्यास से तड़प कर मर रहे हैं. अभी हाल ही में दिनांक 2 जनवरी 2017 को गायों के मरे होने की सूचना पर सामाजिक कार्यकर्ता गढ़ पुलिश के साथ स्थल पर पंहुचा परन्तु वहां पर मौजूद भीड़ में उपस्थित गौ हत्यारों ने बांड़ा हटाने का विरोध किया. जिसके परिणाम स्वरुप पुलिश कुछ नहीं कर पाई. इस दरमयान वाद-विवाद की भी स्थिति निर्मित हुई.      
   वहरहाल, समाज भले ही इस विषय को गंभीरता से न ले परन्तु आज यह देखना होगा की बेजुबान गौवंशों के साथ हो रहा यह अत्याचार भारतीय दंड संहिता की पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत आता है और गौ हत्या निवारण अधिनियम जो की शुश्री उमाभारती जी के कार्यकाल में मप्र शासन में बिल पास किया गया था उसके अंतर्गत भी आता है साथ ही भारतीय समाज में एक काला अध्याय भी लिखता है जिसमे आज यह समाज नहीं जान रहा ही की जो भारतीय गौवंश और हमारी गायें व्यक्ति के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक में सोलह संस्कारों, गया, तर्पण, कर्म, आदि में गौदान दिए जाते हैं उनकी आज यह दुर्दशा चिंतनीय है. 



पुलिश महानिदेशक मप्र शासन श्री ऋषि कुमार शुक्ल के आदेश पर एसपी रीवा द्वारा गढ़ थाना प्रभारी को गौ बचाओ अभियान में भेजा जाना
    जब कई दिन से स्थानीय पुलिश और अन्य जिला प्रशासन द्वारा गायों के विरुद्ध हो रहे अत्याचार को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था तो मप्र पुलिश महानिदेशक भोपाल श्री ऋषिकुमार शुक्ला के समक्ष यह अवैध बांडो का प्रकरण रखा गया और ऊपर भोपाल से आदेश पर रीवा एसपी और गढ़ थाना प्रभारी द्वारा कार्यवाही की गयी जिसमे गढ़ थाने अंतर्गत आने वाले कई अवैध बांडे जिसमे सेदहा पंचायत स्थित भमरिया बांड़ा, लोटनी पंचायत स्थित अवैध बांड़ा, लालगांव पंचायत स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के दो बांडे और गंतीरा स्थित अवैध बांडो में दविश दी गयी. जिसमे तात्कालिक तौर पर लालगांव स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के बांडो को तोड़ दिया गया परन्तु प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी बांडे पुनः संचालित हो चुके हैं और स्थिति यथावत पहले जैसी ही बन गयी है.    
       
पशु क्रूरता अधिनियम आदि के अंतर्गत दोषियों के ऊपर दर्ज हो प्रकरण
इस विषय में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा लिखित तौर पर गढ़ थाना में आवेदन दिया गया है की जहाँ जहाँ बिना गौवंशों की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान दिए बांड़ा बनाया गया है उन सबके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने चाहिए. क्योंकि यह पंचायत अथवा सरकार की व्यवस्था है की वह हर पंचायत में सार्वजनिक पशु शेड बनवाए और पशुओं के चारे पानी की भी व्यवस्था करे. निश्चित तौर पर बिना छाया, पानी चारा, भूषा के पशुओं को खुले आसमान के नीचे मरने के लिए छोंड देना तो मानवता के घोर खिलाफ है साथ ही कानूनी तौर पर भी अपराध है. ऐसे अपराधियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की माग लिखित तौर पर की गयी है.
    वर्तमान लेख लिखे जाने तक सभी बाड़ों में पशु और गौवंश पुनः कैद कर दिए गए हैं और चारा पानी भूषा छाया बिना वैसे ही तड़प रहे हैं.
संलग्न – 1) अवैध रूप से संचालित बाड़ों में कैद गौवंशों के फोटो. 2) रीवा जिला मप्र के गढ़ थाना अंतर्गत अवैध रूप से संचालित लगभग दर्ज़न भर बाड़ों में से कुछ छः बाड़ों के वीडियो जो की यूट्यूब में अपलोड किये गए हैं उनका लिंक भी दिया गया है –
































































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शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता, एवं राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139, 09589152587