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Friday, March 24, 2017

(Rewa, MP) गंगेव कृषि विभाग में कृषि उपकरणों एवं खाद बीज की होती है कालाबाजारी, किसानों को बनाया जाता है भोंदू, अधिकारियों द्वारा बता दिया जाता है हमारे पास कुछ नहीं आता


दिनांक - 24/03/2017, रीवा मप्र,

  (गढ़/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी) रीवा के ब्लाक गंगेव स्थित कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में भार्रेसाही निरंतर जारी है. जितना माल लाओ उतना अधिक पाओ का फंडा ही मात्र यहाँ काम करता है बांकी कोई नियम कायदा यहाँ काम नहीं करता. यहाँ तक की लिए गए सामानों की कोई पक्की रसीद तक किसानों हितग्राहियों को नहीं दी जाती.
   कृषि उपकरणों, बीज, खाद, फ़र्टिलाइज़र, एवं छिड़काव करने वाली दवाओं एवं पोषक तत्वों की कालाबाजारी निरंतर जारी है. किसानों को बताया जाता है की कृषि समग्री उपलब्ध नहीं है और बंद कमरे में बिचौलियों के माध्यम से पूरा का पूरा माल पिछले दरवाज़ों से बेंच दिया जाता है.
    अभी हाल ही में कृषि विभाग गंगेव जाया गया और वहां पर पाया गया की बाहर चारा काटने की मशीन का इंतज़ार कर रहे किसानों को बता दिया गया की मशीन आयी ही नहीं है और अन्दर से मशीनों की कला बाजारी करने का विधान बनाया जा रहा था. कई किसानों जैसे कमलेश पटेल निवासी लोटनी पंचायत, बम्हनी निवासी प्रजापति पिता लाला प्रजापति एवं राजमणि सिंह पिता दशमति सिंह सहित दर्ज़नों किसान मिले जिन्हें चारा काटने की मशीन नहीं आई है और आप लोगों के लिये नही है ऐसा बताकर उन्हें घर का रास्ता दिखाया जा रहा था. इतने में सामाजिक कार्यकर्त्ता का हस्तक्षेप हुआ और जब अच्छी खासी साहित्यिक भाषा में कर्मचारियों को नियम कायदे बताये गए तो जाकर आर ए ई ओ एक्शन में आये. कमलेश पटेल निवासी ग्राम पंचायत लोटनी से पूंछने पर पता चला की वह पिछले दो साल से चारा काटने की मशीन के लिए चक्कर लगा रहा है और हर बार ही उसे बताया जा रहा है की मशीन तुम्हे नहीं मिलेगी. इसी प्रकार अन्य दर्ज़नों किसानों को जब किसी तरह से दूसरे किसानों से सूचना मिली तो मशीन लेने गंगेव पहुचे. 
    सभी किसानों से चर्चा की गयी तो उनके द्वारा बताया गया की आरएईओ एवं एसएडीओ के द्वारा कोई भी जानकारी उन्हें प्राप्त नहीं हुई है. पारदर्शिता का अभाव है एवं सब कुछ बंद कमरों और अँधेरे में कर दिया जाता है. कोई भी कृषि उपकरण कब आता है, पोषक तत्त्व, खाद बीज कब आते हैं यह उपस्थित किसानों को नहीं पता है. 
   निश्चित रूप से यह बात कृषि विभाग के समक्ष  कई मर्तबा सामाजिक एवं आर टी आई कार्यकर्ता द्वारा सम्बंधित एसडीओ मनीष मिश्रा, एवं  एसएडीओ शेंगर एवं स्टोर कीपर बसंत गौतम के समक्ष रखी गयी. कई बार तो मप्र शासन की अब पूर्णतया फ्लॉप हो चुकी सीएम हेल्पलाइन 181 में भी रखी गयी जिसकी की प्रतियाँ यहाँ भी संलग्न हैं परन्तु इन विभागों की कार्यप्रणाली में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ.
   अब देखना यह होगा की ग्रीष्मकालीन बोवाई हेतु आने वाली मूंग एवं खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं बीज ग्राम योजना अंतर्गत आने वाले सब्सिडी के बीजों का क्या होता है? क्या यह बीज और पोषक तत्त्व आदि सम्बंधित किसान हितग्राहियों को मिल पाते हैं अथवा इनकी भी कालाबाजारी कर ली जाती है. क्योंकि अब तक तो मात्र सब बेंच कर खा-पी लिया गया और गरीब और अन्य सम्बंधित लाभार्थियों को मात्र ठेंगा दिखा दिया गया. अभी हाल ही में आर टी आई कार्यकर्त्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा कृषि कल्याण विभाग गंगेव के  एसएडीओ शेंगर को आर टी आई आवेदन देकर बीज खाद, पोषण तत्वों, किसानों के हितो में सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं आदि सम्बन्धी जानकारी चाही गयी थी परन्तु उस आर टी आई की जानकारी आवेदक को आज दिनांक तक उपलब्ध नहीं कराई गयी है जबकि पूरे साल व्यतीत होने को है. 
   चूंकि पूरे कृषि विभाग में भ्रष्ट्राचार व्याप्त है चाहे वह गंगेव का कार्यालय हो अथवा त्योंथर कृषि विभाग का एसडीओ कार्यालय अथवा फिर उप-संचालक कार्यालय रीवा जहाँ रामेन्द्र सिंह बैठते हैं सब के सब मामले को दबाने में लगे हुए हैं की कहीं उन सबके काले कारनामे उजागर हो गए तो लेने के देने पड़ सकते हैं. जबकि गंगेव कृषि की अनियमितता और भ्रष्ट्राचार को रीवा कृषि विभाग के उप संचालक के समक्ष कई मर्तबा रखा जा चूका है. आखिर प्रश्न यह उठता है की जब आर टी आई अधिनियम  2005 के प्रावधानों में तीस दिवश के भीतर सभी जनहित सम्बंधित सूचना आवेदकों को उपलब्ध करवाना प्रावधान में आता है तो भला क्यों इन सरकारी विभागों द्वारा जानकारी दबाने का प्रयाश किया जाता रहा है. इससे इन विभागों के ऊपर शक और ज्यादा ही बढ़ता है की कहीं न कहीं इनके काले कारनामों का चिठ्ठा यदि खुला तो भरे बाजार में यह सब नंगे (नंगे होना यहाँ पर एक मुहावरा है जिसका तात्पर्य है वास्तविक छुपी हुई सच्चाई सामने आना) हो जायेंगे.
   अब प्रश्न यह उठता है की क्या अभी भी कुछ पारदर्शिता इन विभागों के कार्यों में दिखेगी? क्या किसानों को उनका हक़ और सही जानकारी मिल पायेगी, अथवा अभी भी पिछले दशकों से चली आ रही भर्रेसाही और भ्रष्ट्राचार चलता रहेगा? 

 गंगेव कृषि विभाग सहित रीवा जिले के अन्य कृषि विभाग के अल अधिकारियों के मोबाइल संपर्क -
1) शेंगर एस ए डी ओ गंगेव - 9993790232 
2) मनीष मिश्रा एसडीओ कृषि त्योंथर - 7471120123,
3) उप संचालक रीव कृषि विभाग, रामेन्द्र सिंह - 9755400009,
4) कलेक्टर रीवा, - 9425903973,

संलग्न -  1) कृषि विभाग गंगेव के सन्दर्भ में कुछ फोटोग्राफ जो वहां पर भरे पड़े पोषक तत्त्व, खाद , ग्रोमोर, फास्फोरस, छिडकाव हेतु दवा, एवं चारा काटने की लाई हुई मशीनें भरी पड़ी हैं परन्तु किसानों को कुछ नहीं दिया जा रहा है.
2) कृषि विभाग गंगेव में व्याप्त अनियमितता सम्बन्धी दर्ज सीएम हेल्पलाइन की शिकायत की pdf प्रति भी संलग्न है...
    
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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 















Sunday, February 5, 2017

(Rewa, MP) कैथा पंचायत में 14.92 लाख रुपये के खेत-सड़क प्रोजेक्ट में लीपापोती



कैथा पंचायत में 14.92 लाख रुपये के खेत-सड़क प्रोजेक्ट में लीपापोती

(थाना-गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) पंचायतों में किस हद तक भ्रष्ट्राचार व्याप्त है इसका पता इसी बात से चल जाता है की सीएम हेल्पलाइन, सीजी नेट स्वर में प्रकरण रखने के बाद जब श्री राधेश्याम जुलानिया पंचायत अपर मुख्य सचिव एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कैथा पंचायत में जांच दल भेजा गया तो वहीँ से लीपापोती प्रारंभ हो गयी. रीवा से जो जांच दल आया उसके दो सदस्यों ने मात्र कुछ एक-दो आवेदकों का कथन लिया और सब कुछ लीपापोती करके चले गए.
जिन मनरेगा आवेदकों ने मनरेगा में काम न मिलने और जेसीबी अथवा मशीन से कार्य किये जाकर मजदूरों का हक़ मारे जाने की शिकायत सीजीनेट स्वरcgnetswara.org में सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से रखी थी उन मजदूरों को आज जांच के लगभग तीन महीने उपरांत भी कोई कार्य नहीं दिया गया. सभी मजदूर पुनः काम की माग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
अभी हाल ही में पुनः लगभग दर्ज़नभर आवेदकों ने सीजीनेट में प्रकरण रखा है और रोजगार सहित कार्यवाही की माग की है.
जिन आवेदकों को मनरेगा अधिनियम 2005 के अंतर्गत काम के लिए आवेदन देने के वाबजूद भी कार्य नहीं दिया गया है उनके नाम हैं – विहारी लाल साकेत, बतसिया साकेत, बुद्धसेन साकेत, देवकली साकेत, भूअर साकेत, छाठीलाल साकेत, संतोष केवट, तेजेश्वरी केवट, रावेन्द्र केवट, कैलाश केवट, सतानंद केवट, बुद्धसेन केवट, उग्रभान केवट, राजेश केवट, दिनेश केवट, प्रसंनलाल केवट, नन्दलाल केवट, सुमित्री केवट, गायत्री चतुर्वेदी, वैजनाथ केवट आदि. परन्तु महीनों भर सम्बंधित पंचायत सचिव अच्छेलाल पटेल के पास आवेदन जमा किये जाने के उपरांत भी आज तक इन हितग्राहियों को पंचायत में मनरेगा के अंतर्गत कार्य नहीं दिए गए हैं.

मनरेगा में खेत-सड़क योजना अंतर्गत 14.92 लाख रुपये के कार्य को जेसीबी और मशीन से करवाया गया – गुणवत्ता निम्न दर्जे की: कार्य एक लाख से भी कम का परन्तु निकाले जा रहे पूरे लाखों-

कैथा पंचायत जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत संपत्ति पटेल के घर से पंचायत भवन तक का बंद पड़ा हुआ खेत सड़क योजना का निर्माण कार्य होना बताया जा रहा है. यह कार्य 14.92 लाख रुपये का स्वीकृत बताया गया है. सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी में पता चला है की यह एक किमी लम्बा मार्ग उच्च गुणवत्ता पूर्ण बनाकर ग्रेवल रोड बनाई जानी थी परन्तु यहाँ भी लीपापोती का पूरा प्रयास चल रहा है और बिना काम के ही पैसे निकाले जा रहे हैं. अभी जून 2016 में निम्न गुणवत्ता और भ्रस्ट्राचार की शिकायत पर कार्य बंद करवा दिया गया था परन्तु अभी पुनः कार्य प्रारंभ हो चुका है और मजदूरों को कोई जानकारी नहीं दी गयी. मनरेगा के जो भी मजदूरों ने कार्य के लिए आवेदन दिया था उन्हें पूंछा तक नहीं गया और सभी मजदूर बेचारे काम की आस लगाये बैठे रह गए. जब पुनः मशीनों और जेसीबी से काम प्ररम्भ किया गया और रोड पर मशीनें और जेसीबी दिखीं तो मजदूरों के होस उड़ गए. जिस पर पुनः सभी मजदूरों ने एकत्र होकर सचिव, सीइओ और कलेक्टर को पुनः ज्ञापन सौंपा है अपने अधिकारों के हनन पर कार्यवाही की मांग की है.

संलग्न- (फोटोग्राफ) पंचायत भवन से संपत्ति पटेल के घर तरफ खेत सड़क योजना का14.92 लाख रुपये का कार्य जिसमे पुनः बिना मिटटी डाले ही निम्न गुणवत्ता की थोड़ी बहुत मोरम डाली जा रही है.

(Video- कैथा निवासी शैलेन्द्र पटेल द्वारा मोबाइल से बनाया गया विडियो जिसमे जेसीबी खेत सड़क प्रोजेक्ट में चल रही है.)





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Tuesday, January 10, 2017

(Rewa, MP) “गायों की सुरक्षा मानवता की आवश्यकता - भारतीय स्वदेशी गाय का वैज्ञानिक महत्त्व”


Date: 10/01/2017,
Place: - Rewa (MP)

“गायों की सुरक्षा मानवता की आवश्यकता - भारतीय स्वदेशी गाय का वैज्ञानिक महत्त्व”

(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) भारतीय गाय की सुरक्षा मानवता के लिए तो आवश्यक है ही साथ ही प्राकृतिक संतुलन हेतु भी जरुरी है. आज कई स्वदेशी गायों की नस्लें या तो समाप्त हो चुकी हैं अथवा समाप्त होने की कगार पर हैं. शायद कम लोगों को ही जानकारी होगी जी जर्सी नस्ल की गायें मूलतः गाय और सूअर के जेनेटिक कॉम्बिनेशन द्वारा उत्पन्न हुई हैं. यूरोपियन ठन्डे प्रदेशों और पश्चिमी सभ्यता के हिसाब से वहां के वातावरण अनुकूल जर्सी गायों की जरुरत है उन्ही सभ्यताओं मात्र को है. भारत जैसे गरम भौगोलिक क्षेत्र में स्वदेशी नश्ल की गायें ही उपयुक्त हैं.

स्वदेशी नश्ल के गौवंश भारतीय संस्कृति की पहचान

जहाँ तक प्रश्न भारतीय सभ्यता का है वहां पर यह कहना होगा की देशी नस्ल की गायें ही हमारी भारतीय सभ्यता की पहचान रही हैं. चाहे वह बालक श्रीकृष्ण जी के बचपन के दिनों में अपनी लीलाओं को लेकर हो अथवा हिन्दू संस्कृति में गोदान, तर्पण आदि से सम्बंधित रहा हो. हर एक भारतीय संस्कारों में गायों का अभूतपूर्व धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. बिना गौवंश के भारतीय मानव वंश की कोई पहचान नहीं है. हाँ यदि गौवंश नहीं रहेगा तो भारतीय संस्कृति किसी पश्चिमी संस्कृति में समाहित हो जाएगी और अपना स्वयं का वजूद खो देगी. और निश्चित तौर पर जहाँ तक सवाल अस्तित्व का है तो किसी भी लहजे से यह भारतीय मानव के लिए कोई उपलब्धि नहीं होगी बल्कि उसके अंत का सूचक जरूर हो सकता है. और ये कहें की भारतीय मानव ही नहीं सम्पूर्ण मानवीय सभ्यता के अंत का सूचक हो सकता है.

गायें ऑक्सीजन लेकर अपेक्षाकृत ज्यादा ऑक्सीजन ही छोड़ती है

शायद यह बात सब को ज्ञात न होगी पर यह सच्चाई वैज्ञानिक अभिलेखों से प्राप्त हुई है की गाय और गौवंश ही धरती के कुछ विरले प्राणी हैं जो स्वयं भी ऑक्सीजन अर्थात प्राणवायु लेता है और अपेक्षाकृत प्राणवायु ही अपनी सांसों से छोड़ता भी है. वैज्ञानिक कारण यह है कि गायों/गौवंशों के फेंफडे प्राकृतिक तौर से ऐसे बने होते हैं वह खींची गयी ज्यादा ऑक्सीजन को डाइजेस्ट नहीं कर पाते अतः काफी ऑक्सीजन श्वांस प्रक्रिया द्वारा बाहर निकाल दी जाती है. आज जब वातावरण में अत्यधिक जहरीली गैसों और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा घुलती जा रही है ऐसे में स्वार्थी किस्म के मानव के लिए ऐसे जीवों का महत्व तो और अधिक होना चाहिए जो स्वयं दूध, घी, दही, दुग्ध उत्पाद तो दे ही रहा है साथ ही अपने गोबर-मूत्र से भी औषधीय तत्त्व देकर अपनी हर एक साँस से भी जीवनदायनी प्राणवायु दे रहा है. क्या ऐसे में गौवंशों की महत्वा और अधिक नहीं होनी चाहिए? चलिए मानाकि आज अत्यधिक स्वार्थी हो चुके मानव के लिए हर वस्तु में फायदे नुकसान दीखते हैं तो भी क्या गौवंशों की सुरक्षा मानव के हित में नहीं है?

आयुर्वेद में गौमूत्र अमृत तुल्य – देता है सभी बीमारियों से निजात

गाय का मूत्र इस पृथ्वी में अमृत समान है. गाय के मूत्र में मिनिरल्स जैसे पोटैशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, कॉपर, क्लोराइड एवं यूरिक एसिड आदि अत्यधिक संतुलित मात्र में होते हैं जिन्हें सेवन से मानव शरीर में कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता बल्कि सभी बीमारियो से मुक्ति मिलती है. गायों का वखान भारतीय संस्कृति के मूल ग्रन्थ वेदों से लेकर शास्त्रों और पुराणों तक मिल जायेगा. गाय को भारतीय संस्कृति में माता की उपमा देना कोई सामान्य बात नहीं है. जैसे माता अपने पुत्रों को दूध पिलाने से लेकर उसके बड़े होने तक उसका सब प्रकार से ख्याल रखती है वैसे यदि देखा जाए तो गौमाता भी मानव के लिए हर प्रकार से लाभकारी है. यदि दूध और दुग्ध उत्पाद के तौर पर लिया जाए तो भी गाय का दूध अन्य पशुओं की अपेक्षा प्रोटीन, विटामिन्स, मिनिरल्स और जीवनदायनी शक्ति से भरपूर तो हैं ही साथ ही गाय का गोबर और मूत्र भी कहीं दुग्ध उत्पाद से कम लाभकारी नहीं है. आयुर्वेद में हजारों वर्षों से गौमूत्र और गोबर से विभिन्न प्रकार की असाध्य और जानलेवा बीमारियों से लड़ने के लिए औषधियां बनाई जाती रही हैं. गाय का मूत्र आवश्यक मिनिरल्स का खज़ाना है, इसमें मुख्या रूप से पोटैशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फास्फेट, यूरिया, कॉपर, क्लोराइड एवं यूरिक एसिड होता है. आज हम गायत्री शक्तिपीठ द्वारा संचालित हरिद्वार फार्मेसी अथवा बाबा रामदेव आदि के द्वारा दिव्या फार्मेसी में गौ मूत्रों से बनाये जाने वाले उत्पाद और दवाइयां कहीं भी आयुर्वेदिक स्टोर में खरीद सकते हैं जिसमे सामान्य सर्दी-बुखार से लेकर टीबी, स्थमा, पेट की बीमारियाँ से लेकर कैंसर, एड्स, आदि भयानक जानलेवा बीमारियों का उपचार संयम और खानपान में नियंत्रण से किया जा सकता है. वैसे सामान्य तौर पर गौमूत्र से लगभग 108 बेमरियाओं का इलाज़ होना बताया गया है. गौमूत्र दर्द निवारक, चर्म रोग, पेट के रोग, आंत्रशोथ, पीलिया, मुख रोग, नेत्र रोग, अतिसार, मूत्राघात, कृमिरोग, मधुमेह, मिर्गी, माइग्रेन आदि बीमारियों में लाभप्रद है. गाय के मूत्र में त्रिफला चूर्ण, गाय का दूध मिक्स करके पीने से अनीमिया रोग दूर होकर खून साफ़ होता है. गाय के मूत्र से जिगर मजबूत होकर रक्त सुद्ध होता है. आयुर्वेद के अनुसार गाय के मूत्र के नियमित सेवन से त्रिदोष नष्ट होते हैं. त्रिदोष का तात्पर्य वाट, पित्त और कफ जनक बीमारियाँ हैं जो शरीर के विभिन्न बीमारियों का कारण बनती हैं. गाय के मूत्र के सेवन से मानशिक तनाव और अनिद्रा की बीमारी से निजात मिलती है. गौमूत्र के सेवन से दिल मजबूत होता है और मानव शतायु अर्थात सौ वर्षों तक बिना किसी बीमारी के जीवन जी सकता है. शास्त्रों के अनुसार गौमूत्र के सेवन से अधिदैविक, अध्यात्मिक और अधिभौतिक तापों अर्थात कष्टों से मुक्ति मिलती है और सभी प्रकार की बीमारियों से निजात मिलती है.
क्या आज के वर्तमान समय में जबकि मेडिकल साइंस इतना महगा हो चुका है लगभग बिना कुछ खर्च किये यदि गौ के मूत्र से इतने लाभ प्राप्त हों तो क्या यह इस स्वार्थी मानव के लिए कम है?  

सवाल है मात्र मानशिकता बदलने का. आज जो पश्चिमी सभ्यता की अंधी दौड़ में व्यक्ति अपनी मूल संस्कृति और जड़ें भूलता जा रहा है यह मानवता के लिए घातक सिद्ध होने वाली हैं. ऐसा नहीं है की गौवंशों की सुरक्षा करने से गौमाताओं पर मानव बहुत बड़ा उपकार कर देगा? वास्तव में देखा जाए तो यह उपकार मानव गौवंशों पर नहीं अपने ऊपर कर रहा है. क्योंकि यदि इस श्रृष्टि को चलते रहना है तो सभी जीव जंतुओं का इसमें अपना एक विशेष महत्त्व है और बारम्बार वही महत्व किसी न किसी माध्यम से इन लेखों द्वारा बताया जा रहा है.

दिनांक 09 जनवरी 2017 की रात भमरिया के अवैध बांडे में भूंख प्यास ठण्ड से कुछ और गायों का हुआ दुखद अंत

      दिनांक 09 जनवरी की रात थाना गढ़ अंतर्गत सेदहा पंचायत के भमरिया में बने अवैध बांडे में कुछ और गायों का दुखद अंत हो गया. दिनांक 09 जनवरी की रात क्षेत्र में कुछ बारिश भी हुई जिसकी वजह से बढ़ी ठण्ड में खुले आसमान के नीचे भूंखे प्यासे गौवंशों से ठंडी वर्दास्त नहीं हुई जिससे कुछ गायों का अंत हो गया. बहरहाल यह कोई नयी घटना नहीं है और थाना गढ़ अंतर्गत आने वाले कई अवैध बांडो में भूंख, प्यास, कड़ाके की ठण्ड में गौवंश रोज़ ही मृत्यु के घाट उतर रहे हैं. इन बेजुवान पशुओं के दुःख-दर्द को सुनने वाला कोई नहीं. सब के सब मूक दर्शक बने बैठे हैं और मात्र तमासा देख रहे हैं. सूत्रों से प्राप्त जानकारी से पता चला है की इसी प्रक्रार पिछले रातों कटरा के पास गंतीरा, लालगांव के पास सोनवर्षा और हरदी के बांडो में भी दर्ज़नों गौवंश फिर मृत पाए गए हैं जिन्हें वहां से न हटा पाने के कारण रात में कुत्ते और सियार आदि मांसाहारी जानवर नोच कर खा गए. कई ऐसे भी घटनाक्रम प्रकाश में आये हैं जिनमे बांडो के अन्दर कमज़ोर हो गए गौवंशों को जीवित अवस्था में ही कुत्ते-सियार शिकार कर खा गए जो अत्यधिक दुखद और दर्दनाक है.

घटना की जानकारी रीवा कलेक्टर से लेकर केंद्रीय मंत्रालय तक

रीवा जिले में गौवंशों के अवैध बांडे के विषय में मूक-बेजुबान पशुओं के भूंख, प्यास, ठण्ड से रोज घुट-घुट कर मरने की जानकारी मीडिया में तो छाई हुई है साथ ही कलेक्टर, एसपी, डीजीपी मप्र भोपाल से लेकर पशुपालन विभाग, पशु संवर्धन बोर्ड, एनिमल राइट्स ग्रुप्स से लेकर श्रीमती मेनका गाँधी जी के कार्यालय तक संप्रेषित की जा चुकी है. पर अब तक इन पशुओं की सुरक्षा के कोई भी सार्थक इंतज़ाम नहीं हुए हैं. मात्र अब तक जानकारियां ही एकत्रित की गयीं हैं. बल्कि अभी हाल ही में खतरा उठाकर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा दबाब बनाकर पुलिश प्रशासन के सहयोग से एक-दो मर्तबा अवैध बांडो में रेड डलवाकर बांड़ा तोडवाया गया परन्तु पुनः स्थानीय सरहंगों द्वारा यथावत बनवा लिया गया है.     
      अब प्रश्न यह उठता है की पूरे देश भर में एनिमल राइट्स के नाम पर सरकार और जनता का पैसा हज़म करने वाले इतने विभाग बने हैं तो क्या किसी में इतनी कूबत नहीं की सरकार प्रशासन पर दबाब बनाकर इन पशुओं गौवंशों की जिंदगी को बचाया जा सके? आज यह बहुत बड़ा प्रश्न है जिसका उत्तर उन भूंख, प्यास, ठण्ड से तड़पती हुई गौवंशों की आत्माएं भी पूंछ रही हैं.
शायद कोई तो सुनने वाला हो?

संलग्न – 1) नीचे अवैध बांडो में कैद पशुओं के देखें संलग्न यूट्यूब विडियो जो की पशुओं के विरुद्ध अत्याचार और क्रूरता को दर्शाते हैं. 2) इसी विषय में अवैध बांडो के लिए गए फोटोग्राफ जिनमे कुछ पशु मृत पड़े हैं तो कुछ मरने की कगार पर खड़े हैं.














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Wednesday, January 4, 2017

(Rewa, MP) गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश

दिनांक 04/01/2017
गढ़ थाना अंतर्गत दर्जन भर ग्रामों में अवैध बाड़ों में
छाया, भूषा, पानी बिना मर रहे कैद बेजुबान गौवंश





(गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) तथाकथित यह नया वर्ष शायद सबके लिए उतना मंगलमय नहीं है और विशेष तौर पर बेजुबान गौवंशों के लिए तो बिलकुल नहीं. इस नए ईस्वी सन 2017 में भी गौवंश और विशेषकर गौमाताएं भूंख, प्यास, ठण्ड से बिना किसी छत और छाया के खुले आसमान के नीचे तड़प तड़प कर जान दे रही हैं और शायद इसे देखने वाला कोई न तो शासन प्रशासन है और न ही यह संस्कार विहीन हो चुका भारतीय समाज. कभी भारतीय संस्कृति में गायों की उपमा माता से की गयी थी परन्तु आज अपने माता पिता की ही तरह यह समाज इन गौ माताओं को भी भूल चुका है. जगह जगह अवैध बांडों को संचालित किया गया है जिसमे बेजुबान पशु चारे, पानी, और छाया बिना तड़प रहे हैं और अपनी जाने दे रहे हैं.


भमरिया में सेदहा पंचायत में दिवाकर सिंह की जमीन पर बना है अवैध बांड़ा
   पहला बांड़ा भमरिया नामक स्थान पर दिवाकर सिंह की जमीन पर बनाया गया है. मंत्री उर्फ़ पुष्पेन्द्र सिंह पिता दिवाकर सिंह की जमीन पर अवैध बांड़ा अपराधिक किस्म के लोगों द्वारा बनाया गया है. यह कोई पहली मर्तबा नहीं है कई वर्षों से भमरिया नामक स्थान पर अवैध बांड़ा बनाया जाता रहा है. प्रारंभ में इन गौवंशों की सैकड़ों की जो संख्या रहती है अंततः वह मरकर सिमट कर मुश्किल से एकाध दर्जन में आ जाती है. भमरिया का बांड़ा इसके पहले वहीँ स्थित सरकारी जमीन पर बनाया जाता था. इस वर्ष यह सेदहा पंचायत में सुर्यपाल उपाध्याय, पुष्पेन्द्र सिंह उर्फ़ मंत्री, राजेंद्र उरमलिया निवासी करहिया, रामसिया उरमलिया निवासी करहिया, कुशलेंद्र सिंह पिता समर बहादुर सिंह निवासी सेदहा, प्रदीप सिंह उर्फ़ दीपू सिंह पिता राजेश्वरी सिंह निवासी सेदहा, ब्रिजेन्द्र सिंह निवासी हिनौती-बडोखर, दिनेश सिंह पिता कौशल सिंह निवासी सेदहा पंचायत आदि के सहयोग से लगभग 500 गौवंशों के लिए बड़े जगह में यह अवैध बांड़ा बनाया गया है.

भमरिया स्थित इस बांडे को नहीं हटा पायी गढ़ पुलिश
सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा प्रेषित सूचना पर पुलिश दो बार बांडे पर गयी परन्तु बांड़ा हटाने में समझाईश के अतिरिक्त कोई प्रयाश नहीं किया. लगभग रोज़ ही इस बांडे में दो चार गौवंश भूख, ठण्ड, और प्यास से तड़प कर मर रहे हैं. अभी हाल ही में दिनांक 2 जनवरी 2017 को गायों के मरे होने की सूचना पर सामाजिक कार्यकर्ता गढ़ पुलिश के साथ स्थल पर पंहुचा परन्तु वहां पर मौजूद भीड़ में उपस्थित गौ हत्यारों ने बांड़ा हटाने का विरोध किया. जिसके परिणाम स्वरुप पुलिश कुछ नहीं कर पाई. इस दरमयान वाद-विवाद की भी स्थिति निर्मित हुई.      
   वहरहाल, समाज भले ही इस विषय को गंभीरता से न ले परन्तु आज यह देखना होगा की बेजुबान गौवंशों के साथ हो रहा यह अत्याचार भारतीय दंड संहिता की पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 428 एवं 429 के अंतर्गत आता है और गौ हत्या निवारण अधिनियम जो की शुश्री उमाभारती जी के कार्यकाल में मप्र शासन में बिल पास किया गया था उसके अंतर्गत भी आता है साथ ही भारतीय समाज में एक काला अध्याय भी लिखता है जिसमे आज यह समाज नहीं जान रहा ही की जो भारतीय गौवंश और हमारी गायें व्यक्ति के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु तक में सोलह संस्कारों, गया, तर्पण, कर्म, आदि में गौदान दिए जाते हैं उनकी आज यह दुर्दशा चिंतनीय है. 



पुलिश महानिदेशक मप्र शासन श्री ऋषि कुमार शुक्ल के आदेश पर एसपी रीवा द्वारा गढ़ थाना प्रभारी को गौ बचाओ अभियान में भेजा जाना
    जब कई दिन से स्थानीय पुलिश और अन्य जिला प्रशासन द्वारा गायों के विरुद्ध हो रहे अत्याचार को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था तो मप्र पुलिश महानिदेशक भोपाल श्री ऋषिकुमार शुक्ला के समक्ष यह अवैध बांडो का प्रकरण रखा गया और ऊपर भोपाल से आदेश पर रीवा एसपी और गढ़ थाना प्रभारी द्वारा कार्यवाही की गयी जिसमे गढ़ थाने अंतर्गत आने वाले कई अवैध बांडे जिसमे सेदहा पंचायत स्थित भमरिया बांड़ा, लोटनी पंचायत स्थित अवैध बांड़ा, लालगांव पंचायत स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के दो बांडे और गंतीरा स्थित अवैध बांडो में दविश दी गयी. जिसमे तात्कालिक तौर पर लालगांव स्थित सोनवर्षा एवं हरदी के बांडो को तोड़ दिया गया परन्तु प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी बांडे पुनः संचालित हो चुके हैं और स्थिति यथावत पहले जैसी ही बन गयी है.    
       
पशु क्रूरता अधिनियम आदि के अंतर्गत दोषियों के ऊपर दर्ज हो प्रकरण
इस विषय में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा लिखित तौर पर गढ़ थाना में आवेदन दिया गया है की जहाँ जहाँ बिना गौवंशों की सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान दिए बांड़ा बनाया गया है उन सबके खिलाफ प्रकरण दर्ज होने चाहिए. क्योंकि यह पंचायत अथवा सरकार की व्यवस्था है की वह हर पंचायत में सार्वजनिक पशु शेड बनवाए और पशुओं के चारे पानी की भी व्यवस्था करे. निश्चित तौर पर बिना छाया, पानी चारा, भूषा के पशुओं को खुले आसमान के नीचे मरने के लिए छोंड देना तो मानवता के घोर खिलाफ है साथ ही कानूनी तौर पर भी अपराध है. ऐसे अपराधियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की माग लिखित तौर पर की गयी है.
    वर्तमान लेख लिखे जाने तक सभी बाड़ों में पशु और गौवंश पुनः कैद कर दिए गए हैं और चारा पानी भूषा छाया बिना वैसे ही तड़प रहे हैं.
संलग्न – 1) अवैध रूप से संचालित बाड़ों में कैद गौवंशों के फोटो. 2) रीवा जिला मप्र के गढ़ थाना अंतर्गत अवैध रूप से संचालित लगभग दर्ज़न भर बाड़ों में से कुछ छः बाड़ों के वीडियो जो की यूट्यूब में अपलोड किये गए हैं उनका लिंक भी दिया गया है –
































































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शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता, एवं राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा  (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139, 09589152587