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Monday, August 6, 2018

14 लाख 48 हज़ार के कैथा पंचायत भवन निर्माण में भष्ट्राचार (मामला ज़िला रीवा ब्लॉक गंगेव अन्तर्गत कैथा पंचायत का जिंसमे क्षतिग्रस्त पंचायत भवन निर्माण में 14 लाख 48 हज़ार रुपये के कार्य में लीपापोती साथ ही पुराने लगे लाखों का गार्डर, सरिया, पत्थर पटिया को बिना नीलामी ही बेंच दिया)


दिनांक 07 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   रीवा ज़िले की कई पंचायतों में भष्ट्राचार रुकने का नाम नही ले रहा है. पञ्च परमेश्वर एवं मनरेगा पंचायती कार्यों से लेकर विधायक एवं संसद निधि से भी प्राप्त राशियों में जमकर धांधली की जा रही है. फ़र्ज़ी बिल बाउचर बनवाकर राशि का बन्दरवाट चल रहा है. अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं साथ ही सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी चल रही है. यद्यपि जनपद एवं जिला पंचायतों से लेकर कलेक्टर रीवा, एवं भोपाल मंत्रालय तक में इसकी जमकर शिकायतें की जा रही हैं लेकिन इसका कोई प्रभाव नही हो रहा है क्योंकि यह स्पष्ट होता नजर आ रहा है की जांचकर्ता एजेंसी ही मुख्य रूप से भष्ट्राचार करवा रही है. सब कुछ खुलेआम जनपद एवं जिला अधिकारियों की सह से चल रहा है. जांच के नाम पर मात्र कोरामपूर्ती हो रही है. जांच पीसीओ, सचिवों, एवं चपरासी ग्रेड के कर्मियों से करवाई जा रही हैं और वही प्रतिवेदन उच्चस्तर तक भेजे जा रहे हैं.

कैथा पंचायत भवन में लगी लाखों की पुरानी सामग्री हुई गायब

   इसी वर्ष मई-जून माह में कैथा पंचायत के पुराने बताए गए क्षतिग्रस्त भवन को तोड़ा जा रहा था तो मौके पर जाकर देखा गया तो उसमे पचासों गार्डर, सैकड़ों पटिया और हज़ारों पत्थर-ढोके लगाए हुए मिले थे. लेकिन बिना ग्राम पंचायत की ग्राम सभा और बिना नीलामी प्रक्रिया के ही लाखों रुपये की पुरानी लगाई हुई निर्माण सामग्री सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल द्वारा गायब कर दी गई और उसे बेंच दिया गया और कुछ अपने कब्जे में ले लिया गया. कुछ पत्थरों को संपति पटेल के घर के पास 89 हज़ार रुपये की लॉगत से बनाई जा रही पंचायती पुलिया के लिए लगा दिया गया जबकि इस 89 हज़ार लॉगत की पुलिया में नई और अच्छी निर्माण सामग्री उपयोग की जानी थी. जबकि कैथा सरपंच ने इसमे पुरानी टूटीफूटी पाइप ही डाल रखी है साथ ही पुराने पत्थर और घटिया डस्ट लगाकर पुलिया निर्माण किया जा रहा है.

   इस प्रकार लगभग 3 से 4 लाख रुपये की पुरानी सामग्री का क्या हुआ इसका कोई पता नही है. ऑफिशियली कोई नीलामी प्रक्रिया न होने से स्पष्ट है की पूरे मटेरियल को सरपंच ने बेंच लिया अथवा अपने कब्जे में कर लिया.

14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि हुई स्वीकृत, अब गबन की तैयारी 

    पंच परमेश्वर की वेबसाइट एवं एप्प से प्राप्त सम्पूर्ण जानकारी के अनुसार कैथा पंचायत के क्षतिग्रस्त पंचायत भवन के पुनर्निर्माण के लिए स्टाम्प शुल्क राज्यस्तरीय योजनांतर्गत दिनाँक 02/10/2017 को पंचायतराज संचालनालय द्वारा भारत निर्माण सेवा केंद्र पंचायत भवन के नाम से 14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि स्वीकृत हुई है. यह राशि कैथा पंचायत पंच परमेश्वर खाते के यूनियन बैंक खाता क्रमांक 611602010006926 में भेजी गई है. इसके बाबत अभी दिनांक 24/07/2018 को एक लाख 12 हज़ार रुपये जायसवाल ट्रेडर्स विक्रेता आई डी क्रमांक 7727 के नाम पर निकाले गए हैं जिंसमे बिल क्रमांक 463 में 20 क्विंटल लोहा के लिए यह राशि निकाली गई है. यह बिल दिनांक 15/07/2018 को जारी हुआ है. लेकिन अब तक न तो लोहा का रता पता है और न ही कार्य का. समस्त बिल, पंचायत खाता, राशि की जानकारी भी यहां पर संलग्न की हुई है. 

जायसवाल ट्रेडर्स विक्रेता ने पंचायतों को जारी किये करोड़ों के कुल 318 बिल बाउचर 

        साथ ही बता दें की आजकल पंचायतों के नाम पर फ़र्ज़ी बिल बाउचर जारी करने की प्रथा चल रही है और ज्यादातर ऐसे विक्रेता अपनी फ़र्ज़ी कंपनी बनाकर बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के बिल बाउचर जारी कर पंचायती भष्ट्राचार में जमकर योगदान दे रहे हैं. क्या यह विक्रेता/ट्रेडर्स जीएसटी के दायरे में आते हैं? क्या ये इनकम टैक्स अदा कर रहे हैं? यह सब ही अपने आप में एक अलग जांच का विषय है. बता दें की जायसवाल ट्रेडर्स नामक विक्रेता एजेंसी अब तक पंचायतों को लगभग 318 कुल बिल बाउचर जारी कर चुकी है जिंसमे करोड़ों रुपये की सामग्री पंचायतों को बेंची गई बतायी जा रही है. इसकी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही होनी चाहिए ऐसा ग्रामीणों की माग है.


कैथा पंचायत के ग्रामीणों ने उठाई आवाज़ 

   कैथा ग्राम पंचायत के रहवाशियों ने इस विषय में आवाज़ उठाई है और साथ ही सही जांच कर कार्यवाही की माग की है. कैथा ग्राम पंचायत के भूतपूर्व सरपंच मिथिला पटेल एवं जगदीश पटेल, सरपंच प्रत्यासी डॉक्टर चंद्रभूषण पटेल, वर्तमान पंच यज्ञभान पटेल, दिनेश विश्वकर्मा, शैलेन्द्र पटेल, राजेश पटेल, नरेंद्र पटेल, जिमीदार पटेल, उग्रभान पटेल, श्यामलाल शुक्ला, राजबहोर शुक्ला, राजेन्द्र शुक्ला, लालबहादुर पटेल, बुद्धसेन पटेल उर्फ ददुआ, बृजभान केवट, उग्रभान केवट, रामावतार केवट, जगदीश पांडेय, दिलीप केवट, संतोष केवट, कैलाश केवट, रामयतन शुक्ला, मुद्रिका पटेल, उपेंद्र शुक्ला, इटहा से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी पटेल, सुग्रीव पटेल, रामनेवाज पटेल, मुनिराज पटेल, श्यामसुंदर पटेल, एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने सम्पूर्ण पंचायती भष्ट्राचार की उच्चस्तरीय ईओडब्लू एवं लोकायुक्त से जांच कर पंचायतीराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 एवं आई पी सी की धारा 420 के तहत कार्यवाही की माग की है.

 संलग्न 

1) कैथा पंचायत भवन का पुराना क्षतिग्रस्त भवन के तोड़े जाने के समय की तस्वीर.

2) कैथा पंचायत का पंच परमेश्वर खाता की जानकारी, निकली राशि की फ़ोटो, पंचायतराज संचालनाय की स्वीकृत 14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि की जानकारी. 

3) पुराने पंचायत भवन में लगाए गए लाखों की निर्माण सामग्री को 420 करके सरपंच द्वारा बेंचा गया, गार्डर वगैरह की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Sunday, February 5, 2017

(Rewa, MP) कैथा पंचायत में 14.92 लाख रुपये के खेत-सड़क प्रोजेक्ट में लीपापोती



कैथा पंचायत में 14.92 लाख रुपये के खेत-सड़क प्रोजेक्ट में लीपापोती

(थाना-गढ़, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) पंचायतों में किस हद तक भ्रष्ट्राचार व्याप्त है इसका पता इसी बात से चल जाता है की सीएम हेल्पलाइन, सीजी नेट स्वर में प्रकरण रखने के बाद जब श्री राधेश्याम जुलानिया पंचायत अपर मुख्य सचिव एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा कैथा पंचायत में जांच दल भेजा गया तो वहीँ से लीपापोती प्रारंभ हो गयी. रीवा से जो जांच दल आया उसके दो सदस्यों ने मात्र कुछ एक-दो आवेदकों का कथन लिया और सब कुछ लीपापोती करके चले गए.
जिन मनरेगा आवेदकों ने मनरेगा में काम न मिलने और जेसीबी अथवा मशीन से कार्य किये जाकर मजदूरों का हक़ मारे जाने की शिकायत सीजीनेट स्वरcgnetswara.org में सामाजिक कार्यकर्ता के माध्यम से रखी थी उन मजदूरों को आज जांच के लगभग तीन महीने उपरांत भी कोई कार्य नहीं दिया गया. सभी मजदूर पुनः काम की माग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
अभी हाल ही में पुनः लगभग दर्ज़नभर आवेदकों ने सीजीनेट में प्रकरण रखा है और रोजगार सहित कार्यवाही की माग की है.
जिन आवेदकों को मनरेगा अधिनियम 2005 के अंतर्गत काम के लिए आवेदन देने के वाबजूद भी कार्य नहीं दिया गया है उनके नाम हैं – विहारी लाल साकेत, बतसिया साकेत, बुद्धसेन साकेत, देवकली साकेत, भूअर साकेत, छाठीलाल साकेत, संतोष केवट, तेजेश्वरी केवट, रावेन्द्र केवट, कैलाश केवट, सतानंद केवट, बुद्धसेन केवट, उग्रभान केवट, राजेश केवट, दिनेश केवट, प्रसंनलाल केवट, नन्दलाल केवट, सुमित्री केवट, गायत्री चतुर्वेदी, वैजनाथ केवट आदि. परन्तु महीनों भर सम्बंधित पंचायत सचिव अच्छेलाल पटेल के पास आवेदन जमा किये जाने के उपरांत भी आज तक इन हितग्राहियों को पंचायत में मनरेगा के अंतर्गत कार्य नहीं दिए गए हैं.

मनरेगा में खेत-सड़क योजना अंतर्गत 14.92 लाख रुपये के कार्य को जेसीबी और मशीन से करवाया गया – गुणवत्ता निम्न दर्जे की: कार्य एक लाख से भी कम का परन्तु निकाले जा रहे पूरे लाखों-

कैथा पंचायत जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत संपत्ति पटेल के घर से पंचायत भवन तक का बंद पड़ा हुआ खेत सड़क योजना का निर्माण कार्य होना बताया जा रहा है. यह कार्य 14.92 लाख रुपये का स्वीकृत बताया गया है. सूचना के अधिकार से प्राप्त जानकारी में पता चला है की यह एक किमी लम्बा मार्ग उच्च गुणवत्ता पूर्ण बनाकर ग्रेवल रोड बनाई जानी थी परन्तु यहाँ भी लीपापोती का पूरा प्रयास चल रहा है और बिना काम के ही पैसे निकाले जा रहे हैं. अभी जून 2016 में निम्न गुणवत्ता और भ्रस्ट्राचार की शिकायत पर कार्य बंद करवा दिया गया था परन्तु अभी पुनः कार्य प्रारंभ हो चुका है और मजदूरों को कोई जानकारी नहीं दी गयी. मनरेगा के जो भी मजदूरों ने कार्य के लिए आवेदन दिया था उन्हें पूंछा तक नहीं गया और सभी मजदूर बेचारे काम की आस लगाये बैठे रह गए. जब पुनः मशीनों और जेसीबी से काम प्ररम्भ किया गया और रोड पर मशीनें और जेसीबी दिखीं तो मजदूरों के होस उड़ गए. जिस पर पुनः सभी मजदूरों ने एकत्र होकर सचिव, सीइओ और कलेक्टर को पुनः ज्ञापन सौंपा है अपने अधिकारों के हनन पर कार्यवाही की मांग की है.

संलग्न- (फोटोग्राफ) पंचायत भवन से संपत्ति पटेल के घर तरफ खेत सड़क योजना का14.92 लाख रुपये का कार्य जिसमे पुनः बिना मिटटी डाले ही निम्न गुणवत्ता की थोड़ी बहुत मोरम डाली जा रही है.

(Video- कैथा निवासी शैलेन्द्र पटेल द्वारा मोबाइल से बनाया गया विडियो जिसमे जेसीबी खेत सड़क प्रोजेक्ट में चल रही है.)





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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 


Monday, July 11, 2016

(फर्जी मस्टर रोल) प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के नाम PMO PG Portal में गंगेव ब्लाक रीवा में फर्जी मस्टर रोल के सन्दर्भ में दर्ज शिकायत

नमस्कार साथियों!

      यह शिकायती पत्र प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के नाम PMO PG Portal से दर्ज करवाया गया था जिसकी की जानकारी आपको यहाँ http://pgportal.gov.in/ViewStatusForm.aspx  से शिकायत नंबर फीड करके प्राप्त हो सकती है. यह पत्र भी लगभग रीवा जिले की सभी पंचायतों में (और विशेषकर गंगेव ब्लाक की पंचायतों में संभवतः मुख्य कार्यपालन अधिकारी की मदद से) फर्जी मस्टर रोल द्वारा मजदूरों के राशि की निकाशी के विषय में है....इस पर क्या कुछ हुआ आज तक कोई जानकारी उपलभ नहीं है. यद्यपि इसमें नीचे कुछ २० जून का दिनांक बताया जा रहा है जिसमे पंचायत विभाग मध्य प्रदेश शासन को दी गयी है... देखते हैं क्या होता है... कितना भारत बदला और कितना साईन हो रहा है वह सब Public Greivances Redressal System में प्रगति से ही समझ आ जायेगा.. बांकी तो कागजों में पिछले ६५ वर्ष के ऊपर से बहुत कुछ चल रहा है...

--शिवानन्द द्विवेदी (सामाजिक और वैज्ञानिक कार्यकर्ता)
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Status as on 11 Jul 2016
Registration Number:PMOPG/E/2016/0181821
Name Of Complainant:Shivanand Dwivedi
Date of Receipt:29 May 2016
Received by:Prime Ministers Office
Forwarded to:PS Panchayat Rural Dev
Officer name:us
Officer Designation:us
Contact Address:Mantralaya Bhopal
Grievance Description:To, Date: 29/05/2016 The Prime Minister of India, Place: REWA MP New Delhi, INDIA. Subject – Problems in the MGNREGA payments of the labor, in Gangev block of REWA district of Madhya Pradesh. The fraud muster rolls are created in the name of the job card holders and the money is withdrawn without the labor’s consent. Regional Banks of Rewa district, Janpad Panchayat CEOs, and Panchayat Sarpanch and secretary are all involved in these frauds. The MGNREGA labors are suffering. Sir/Madam, I would like to bring your kind attention to the problems of the MGNREGA payments in various panchayat in GANGEV block of the Rewa district MP. In KAITHA, HINAUTI, BANS, MADARI, PANGADI, LAURI, LOTANI, SEDAHA and other panchayats in GANGEV block the labor payment is not being given and fraud muster roll are created in the name of the MGNREGA job card holders. Most of the panchayat works are carried out using the JCB and machines. Several applications are given to the office of CEO Janpad Panchayat Gangev Mr. Pradeep Paul but no action has been taken. Applications/complaints has also been given to the CEO Jila Panchayat Rewa and collector Rewa but no action has been taken. IMPORTANT NOTES:- Until a comprehensive enquiry is made setting an independent team out side of the MP and preferably from New Delhi, all the MGNREGA fund must be frozen to the mentioned gram panchayats of the GANGEV block. ATTACHMENTS:- Please find the enclosed file in PDF format for the more detailed applications and information on the MGNREGA labor's payment problems and MGNREGA corruptions. Sincerely SHIVANAND DWIVEDI (Social, Scientific, and RTI activist) Village KAITHA, Post AMILIYA, Police Station GARH, Tehsil MANGAWAN, District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117 Mob. +917869992139
Date of Action:20 Jun 2016

Thursday, July 7, 2016

(रीवा) गंगेव ब्लाक में भ्रष्ट्राचार का सिलसिला जारी, कैथा के कूप निर्माण में 7.58 लाख का घोटाला, जनपद से लेकर जिला पंचायत तक की मिली भगत

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)

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विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक रीवा) में कपिलधारा कूप निर्माण में घोटाला, (7.58 लाख) सात लाख अन्ठावन हज़ार रुपये की राशि हज़म. 


(गढ़, रीवा), थाना गढ़ जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत कैथा ग्राम पंचायत में कपिलधारा कूप निर्माण में भी भारी घोटाला प्रकाश में आया है. पंचायत में तीन कपिलधारा कूप निर्माण हेतु टी.एस. स्वीकृत किया गया था जिसमे अभी दो कूपों पर काम चल रहा था. दोनों कूपों की लागत सूचना के अधिकार एवं नरेगा की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी में क्रमशः 3.79 लाख और 3.79 लाख की बताई गयी थी.

कपिलधारा कूप निर्माण का कार्य मनरेगा के स्थान पर ठेके में

 मनरेगा अधिनियम २००५ के नियमावली अंतर्गत मनरेगा एवं मस्टरोल द्वारा होने वाले इस कार्य को ठेके में करवाया गया जिसकी प्रति कूप लागत ठेकेदार बंसपती साकेत निवासी कैथा ने 1.75  लाख बताई है. इस प्रकार दोनों कूप कुल साढ़े तीन लाख में बनकर बंधकर पूर्ण किये जाने थे. इस प्रकार सरपंच संत कुमार पटेल और सचिव अच्छेलाल पटेल को कुल चार लाख आठ हज़ार का इसमें फायदा होता.  परन्तु कुदरत ने भी इस कार्य को पूर्ण नहीं होने दिया और दोनों ही कूप अधूरे में ही धस गए. यह बात तब पता चली जब ठेकेदार बंसपति साकेत का पैसा फंस गया. इस सन्दर्भ में बंस पति को लेबर कोर्ट जाने की सलाह दी गयी. यह कपिलधारा कूप निर्माण “उपेन्‍द्र कुमार पटेल परियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661911, तथा दूसरा कपिलधारा कूप निर्माण “नीलेश कुमार / वंशपती पटेल” परियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661916 टी.एस. नं. 1587 है. यह दोनों हितग्राही कैथा पंचायत अंतर्गत ग्राम इटहा निवासी हैं.

वर्तमान स्थिति यह है की दोनों ही कूप पूरी तरह से बीच में ही ध्वस्त हो चुके हैं और ठेके में काम करने वाले लेबरों के भी पैसे फंस गए है. दोनों ही कूप निर्माण के कार्य मनरेगा के बजे ठेके से करवाए जा रहे थे और प्राप्त जानकारी के अनुसार दो तिहाई से अधिक पैसे का गबन कर लिया गया है.
कैथा सरपंच सचिव, एवं सी.ई.ओ. जनपद पंचायत गंगेव की मिली भगत –

कैथा के कूप निर्माण घोटाले में वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल, सचिव अच्छेलाल पटेल सहित जनपद के भी अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत है. कूप निर्माण में घोटाले की शिकायत जनपद गंगेव में सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल के समक्ष लिखित में एवं सी.एम्. हेल्पलाइन में भी की गयी थी परन्तु इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी.

३५४क (354A, 294, 506, एवं 34) के आरोपी एवं भ्रष्ट सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल हटाने की माग

महिला प्रताड़ना एवं महिला के इज्ज़त आबरू को तार-तार करने के प्रयाश का सह-आरोपी एवं वर्तमान कैथा पंचायत के सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल प्रभाव के साथ कैथा के सरपंच पद से हटाने की माग रीवा कलेक्टर राहुल जैन, आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् भोपाल, अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल सहित अध्यक्ष महोदय मानवाधिकार आयोग भोपाल तथा प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार से भी की गयी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी कार्यवाही चल रही है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) कैथा सहित पूरे गंगेव ब्लाक में शौचालय के नाम पर फर्जीवाड़ा, सैकड़ों हितग्राहियों की 12000 रु. की राशि हज़म, कोई सुनवाई नहीं

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा पंचायत, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)
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विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक) में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बन रहे शौचालय की सारी राशि सरपंच संत कुमार पटेल सचिव अच्छेलाल पटेल एवं सी.ई.ओ. गंगेव  प्रदीप पॉल द्वारा हज़म. शौचालयों के अधूरे निर्माण. पचासों हितग्राहियों की बारह हज़ार रुपये वाली प्रोत्साहन राशि लंबित. शौचालयों का घटिया निर्माण. गुणवत्ता निम्न दर्जे की.

भ्रष्ट्राचार की यात्रा का अगला पड़ाव – शौचालय निर्माण एवं स्वच्छ भारत अभियान -

(गढ़, रीवा), आईये आज हम आपको गंगेव ब्लाक एवं कैथा पंचायत में हो रहे असीमित भ्रष्ट्राचार की सैर कराने की दिशा में आगे का रुख करते है. पिछले प्रकरणों में आपने देखा की किस तरह महिला प्रताड़ना अंतर्गत “354क” का आरोपी कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और उसके दो अन्य अपराधी साथी बड़े ही ठाट बाट के साथ थाना गढ़ क्षेत्र में मौज कर रहे है और पुलिस उनको फरार बता रही है. आपने यह भी देखा की “कैथा ग्राम पंचायत भवन से संपत्ति पटेल के घर तक” बन रही चौदह लाख बान्नवे हज़ार रुपये की खेत सड़क को अब तक मात्र खेत तक ही सीमित रखा गया है और सड़क कहीं दूर दूर तक नहीं दिखती. शायद इतना पैसा अकेले कैथा सरपंच सचिव तो न हज़म कर पाएंगे इसमें जनपद गंगेव के सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल का भी कुछ तो शेयर होना ही चाहिए. क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो भला इतनी लिखित शिकायतों एवं सूचनायों के बाद भी फर्जी मस्टररोल एवं जे.सी.बी. ट्रक पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
  
कैथा पंचायत में शौचालय निर्माण में भारी फर्जीवाडा –

मसलन आगे रुख करते हैं और कैथा के इन हितग्राहियों का जिक्र करते है. भद्रिका द्विवेदी पिता हरिहर द्विवेदी, सोमधर मिश्र पिता रामराज मिश्र, रामखेलावन द्विवेदी पिता लोकनाथ द्विवेदी, रामलल्लू पटेल, सम्पति पटेल, मुरलीधर पटेल आदि ऐसे कई नाम हैं जो मात्र कैथा पंचायत के कैथा ग्राम के ही बहुतों में से मात्र कुछ हैं. अभी दो अन्य गाँव इटहा एवं अकलसी भी कैथा पंचायत के अंतर्गत ही आते है जिनमे पचासों ऐसे नाम गिनाये जा सकते है जिनके घरों में या तो शौचालय बने ही नहीं, यदि बने हैं तो आधे अधूरे बने हैं और यदि पूरे भी हुए हैं तो वह बारह हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि कैथा सरपंच सचिव एवं जनपद सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल द्वारा हज़म कर ली गयी है.
      उक्त कई हितग्राहियों ने शौचालय निर्माण कर उसका फोटो लेकर नियत पप्रोफार्मा में साल भर पहले जनपद में भेज दिया है परन्तु आज तक उनके प्रोत्साहन राशि का कोई पता रता  नहीं है. शायद जनपद के कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि की ज्यादा जरूरत हो.

हरिजन आदिवासी बस्ती कैथा की दुर्दसाजब घर बनाने की जगह ही भू-अभिलेख में दर्ज नहीं तो भला शौचालय कहाँ बनेगा

वैसे हरिजन आदिवाशियों और गरीब तबके के किसानों की ग्रामों में क्या बात करना है. इनकी तो जिन्दगी जानवरों से भी बदतर होती है. भारत एवं मध्य प्रदेश सरकार की योजनायों का लाभ इनको मिलता नही दीख रहा. इनकी स्थिति आज से पचास साल पहले जैसी थी आज भी वैसी ही बनी हुई है. बस एफ.डी.एस एक्ट ने इनकी जिन्दगी को थोडा असं जरूर बना दिया है. यदि विश्वास न हो तो इनके घरों एवं बस्ती में जाकर देखा जा सकता है. इनमे इतना भी साहस नहीं रहता है कि यह बेचारे गरीब अपने अधिकारों को समझकर उसकी मांग कर सके, कहीं समूहों में एकता दिखा सके, कहीं यदि सरकारी विभागों में अपनी बातें रखना है तो एक साथ जाकर वहां पर अपनी बातें कह सकें, विभागों सरकारों पर दवाब बना सकें. यह एकता मात्र एक ही जगह पर दिखाते है कि यदि कहीं दारू मुर्गा की पार्टी हो तो सब बढिया एकत्रित होकर पीते पाते मिलेंगे. इनके अधिकारों के लिए पता नहीं क्यों हमारे जैसे पागल लोगों को ही हमेशा लड़ना पड़ता रहा है. इनके सामाजिक स्तर में सुधार मात्र इनकी जागरूकता एवं सिक्षा से ही संभव है. सरकारी विभाग तो सदैव से ही अशिक्षित एवं कमजोर का शोषण करते रहे हैं. कमजोर और शोषित वर्ग के लिए योजनायें मात्र कागजों तक ही सीमित होती हैं. बहरहाल हम चर्चा कर रहे थे इन गरीब हरिजन आदिवाशियों के अधिकारों की तो यह स्पष्ट है कि यदि कैथा ग्राम की नयी एवं पुरानी हरिजन आदिवासियों की बस्ती जो कि आज पचास साल से ऊपर से बसी है. अब तक न तो इनके रहने का कोई भू-स्वामित्व अधिकार बन पाया है, और जब पटवारी तहसीलदार ने आवादी ही सरकारी खसरे में नहीं दर्ज की तो भला शौचालय अथवा गृह निर्माण ये कहाँ करवाएंगे. इस प्रकार पंचायती रिकॉर्ड में तो भले ही इनके भी घरों में शौचालय दर्ज हो पर आज तक वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है जबकि कैथा पंचायत भी कलेक्टर रीवा द्वारा पहले ही खुले में शौच मुक्त बनाई जा चुकी होगी. क्यों न हो जितना जल्दी भारत खुले में शौच मुक्त होगा उतना ही पैसा भारत सरकार को बिल गेट्स, विश्व बैंक, एशियाई बैंक सहित सैकड़ों देसी विदेशी संगठनों से मिलेंगे. और भला यह पैसा हमारे किन नेताओं और अधिकारियों को तोड़ेगा? विरले ही होंगे जो मुफ्त की राशि न लेना चाहेंगे. 

टीप- हम आप सब को आमंत्रित करते हैं जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत कैथा ग्राम पंचायत में, आप आयें देखें कैसी है भारत के पंचायती राज की व्यवस्था. कैथा पंचायत भारत की पंचायती राज दुर्दशा का एक प्रोटोटाइप हो सकता है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) गंगेव ब्लाक की कैथा पंचायत में खेत-तालाब योजना में भ्रष्ट्राचार, ढाई लाख हज़म, कार्य मजदूरों के स्थान पर मशीनों एवं जे.सी.बी. द्वारा


दिनांक: 08/07/2016, स्थान - गंगेव ब्लाक, रीवा (म.प्र.)
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विषय:- (रीवा) कैथा पंचायत-गंगेव ब्लाक में खेत तालाब योजना में ढाई लाख रुपये की परियोजना में हीलाहवाली. कार्य मजदूरों के स्थान पर जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टर से. रीवा कलेक्टर, एस.डी.एम., सहित सी.ई.ओ. आदि से शिकायतों पर अब तक कोई सुनवाई नहीं.

  
      (गंगेव, कैथा पंचायत) गंगेव जनपद एवं रीवा जिला में भ्रष्ट्राचार यात्रा के अगले चरण में रुख करते है कैथा पंचायत के अंतर्गत बने खेत तालाब की तरफ. यहाँ पर दो खेत तालाब का प्रकरण सामने आया है जिसमे एक उम्मेद सिंह पिता चिंतामणि सिंह टी.एस. न. 706 एवं परियोजना क्रमांक 1713004031/WC/22012034295675 इस खेत तालाब योजना का तकनीकी स्वीकृति क्र. 706/31/2016 तथा वितीय स्वीकृति क्र. 01/31/2016 है. तकनीकी स्वीकृति दिनांक 29/05/2016 तथा कुल स्वीकृत राशि 1.25 लाख रुपये. इसी प्रकार एक अन्य खेत तालाब योजन्तार्गत कार्य मान सिंह पिता चिंतामणि सिंह के नाम पर हुआ है जिसका टी.एस. न. 705 एवं परियोजना क्र. 1713004031/WC/22012034295676 है तथा इस कार्य की तकनीकी स्वीकृत क्र. 705/31/2016 तथा वितीय स्वीकृति क्र. 02/31/2016 है. तकनीकी स्वीकृति दिनांक 29/05/2016 तथा कुल स्वीकृत राशि पहले दिए हुए खेत तालाब योजना के बराबर ही 1.25 लाख रुपये है. इस प्रकार दोनों टी. एस. न. 705 एवं 706 में कुल ढाई लाख रुपये की खपत बताई जा रही है. अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों कार्यों में चार फर्जी मस्टर रोल जारी हुए है जिनके क्रमांक. 1280, 1281, 1282, एवं 1283 है जिनमे प्रति मस्टर रोल में 61 के हिसाब से मजदूरों द्वारा कार्य हुआ बताया गया है. जबकि सच्चाई यह है की किसी भी मजदूर ने कार्य स्थल पर कोई काम नही किया है और फर्जी तरीके से मस्टररोल भरकर पैसे की निकासी की जा रही है. पूरा का पूरा कार्य जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टर से हुआ है जिसके चस्मदीख गवाह मौजूद हैं, मशीनों की फोटो एवं विडियो भी मौजूद है.

पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत कलेक्टर रीवा, एस डी.एम. मनगवां से लेकर मुख्यमंत्री म.प्र. शासन भोपाल एवं प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली तक-

  इस पूरे प्रकरण को कई बार शिकायतों के माध्यम से लिखित, मोबाइल में एस.एम.एस., whatsapp, तथा ईमेल के भी माध्यम से रीवा के कलेक्टर एवं मनगवां तहसील के एस डी.एम. तथा से.ई.ओ. जिला पंचायत रीवा के पास भी रखा गया परन्तु आश्वासन के अतिरिक्त कोई कड़ी कार्यवाही अब तक नही हुई है. इस प्रकरण को सी.जी.नेट रेडियो में भी रिकॉर्ड करवाया गया है. साथ ही मजदूरों के हक़ को मारने सम्बन्धी शिकायत मानवाधिकार आयोग भोपाल से लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में मुख्या सचिव को भी बल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल में राखी गयी है. अभी तक इन शिकायतों में मात्र कार्यवाही का ही आश्वासन मिला पाया है और दोषियों पर कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गयी है. अभी कुछ दिनों पहले यह प्रकरण भारत सरकार के जन शिकायत निवारण विभाग के पी.जी. पोर्टल-पी.एम.ओ. के माध्यम से ऑनलाइन भी  दर्ज करके इसकी हार्ड कॉपी भी पी.एम.ओ. नई दिल्ली भेजी गयी है जिसमे पूरे गंगेव जनपद जिला रीवा में हो रहे मनरेगा में भ्रष्ट्राचार का बिन्दुवार हवाला देते हुए सभी तथ्यों के साथ भेजा गया जिसमे की दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही की माग की गयी है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

Tuesday, July 5, 2016

रीवा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाडी केन्द्रों की दुर्दशा - केन्द्रों में लटकते हैं ताले , न कोई निगरानी न कोई योजना, सब कुछ बस कागजों में

दिनांक: 06/07/2016, रीवा (म.प्र.)
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रीवा जिले की ग्रामीण अंचल में संचालित आंगनवाडी केन्द्रों में नहीं दिया जाता कुपोषित बच्चों और महिलाओं का पोषण आहार, आंगनवाडी कार्यकर्ताओं के घरों में रख कर कर ली जाती है कालाबाजारी, और खिला दिया जाता है दुधारू पशुओं को. मंगल दिवस में अमंगल, और सबलाओं को बनाया जा रहा निर्बला.
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      (रीवा- हिनौती एवं गढ़ सेक्टर) राज्य और केंद्र सरकारों के अभी हाल ही में प्रसारित बजट में लगभग सभी शिक्षित वर्ग ने यह तो देखा होगा की किस तरह बजट आवंटन में महिला एवं बाल विकास या एकीकृत बाल विकास सेवा को लगभग सभी विभागों से ज्यादा बजट का आवंटन हुआ. यह आवंटन किसलिए हुआ? क्या इस आवंटन का लाभ उन बच्चों और कुपोषित बालिकाओं महिलाओं को मिल रहा है जिनके लिए सरकारें दावा करती हैं? इसकी निगरानी कौन करेगा? क्या बजट आवंटित कर देने मात्र से कार्य संपन्न हो गया? कौन कौन सी योजनायें है जो शहरी और ग्रामीण अंचल के बी.पी.एल, कुपोषित, असहाय, और ऐसे ही नीचे के आर्थिक और सामाजिक स्तर के समुदायों के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे हैं? इसी प्रकार के दर्जनों प्रश्नों के उत्तर आज आम जनता को सरकारों से चाहिए. क्या सरकार इन सबके उत्तर देने के लिए तैयार है? निश्चित रूप से सरकार तो हमेशा ही तैयार है क्योंकि उसने तो पूरा का पूरा बजट ही आवंटित कर दिया है पर प्रश्न फिर वही घूमकर खड़ा हो जायेगा की इन सब बजट और योजनायों का सही तरीके से क्रियान्वयन कहाँ हो रहा है और कैसे हो रहा है?
      आइये इन सभी बिन्दुओं को लेकर एक बहुत छोटे स्तर से प्रारंभ करते है. और रीवा के गंगेव ब्लाक अंतर्गत हिनौती और गढ़ सेक्टर के लगभग साठ  पैंसठ केन्द्रों को आधार बनाकर फिर यही विश्लेषण और वस्तुस्थिति को पूरे जिले, पूरे प्रदेश और संभवतः पूरे देश में ज़ूम करके देखने का प्रयाश करते है.

जिला रीवा अंतर्गत हिनौती और गढ़ सेक्टर के पचासों आंगनवाडी केंद्र – मात्र लटकता मिलता है ताला, न कोई पोषण आहार, न कोई मध्यान भोजन, न कोई योजना का लाभ, आंगनवाडी कार्यकर्ता और बच्चे मिलते हैं नदारद –
वैसे तो सम्पूर्ण रीवा जिले के ग्रामीण अंचल के आंगनवाडी केन्द्रों की स्थिति में कोई विशेष अंतर नहीं है. हम कहीं भी किसी भी आनागंवाडी केंद्र में जाएँ हमे तमाम ताले ही लटकते मिलेंगे पर जहाँ हमने लगभग अपनी आँखों से साल के तीन सौ पैसठ में से लगभग तीन सौ से अधिक दिनों में स्वयं भी देखा की गंगेव ब्लाक अंतर्गत आने वाली हिनौती एवं गढ़ सेक्टर की लगभग साठ (६०) से अधिक आंगनवाडी केन्द्रों में ज्यादातर ताला ही लटकता मिलता है, मात्र एक इटहा आंगनवाडी केंद्र को छोड़कर. ऐसे में क्या होगा महिलाओं का विकाश और क्या होगा बाल विकाश. शायद यह जानकारी कोई हमारे देश की महिला एवं बाल विकाश विभाग की केन्द्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गाँधी जी से भी साझा करले और उनके संज्ञान में रख दे तो अच्छा ही होगा. वैसे उनके कई कार्यों में से पशुओं के साथ क्रूरता को लेकर चलाये गए उनके अभियान और उनके योगदान के लिए वह बंधाई की पात्र हैं.
       जहाँ तक प्रश्न हैं आंगनवाडी सम्बन्धी इन अनियमितताओं की शिकायत का तो हम आपको बता दें की दर्जनों लिखित, दर्जनों सी.एम. हेल्पलाइन में और सैकड़ों बार मोबाइल और एस.एम.एस. से इन सभी जनहित वाले बिन्दुओं को लेकर आंगनवाडी सुपरवाइजर श्रीमती सावित्री सिंह (सेक्टर गढ़), श्रीमती निर्मला मिश्रा (सेक्टर हिनौती), गंगेव परियोजना अधिकारी, उस समय के रीवा जिला कार्यक्रम अधिकारी सौरभ सिंह, और अब के रीवा जिला कार्यक्रम अधिकारी अनिल जैन, रीवा महिला शसक्तीकरण के जिला आयुक्त नीलेश गुप्ता, कलेक्टर रीवा, सी.एम. हेल्पलाइन मध्य प्रदेश शासन, लिखित में श्रीमती पुष्पलता सिंह आयुक्त महिला एवं बाल विकास भोपाल म.प्र. शासन, श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार नई दिल्ली सहित मानवाधिकार आयोग भोपाल और पता नहीं कहाँ कहाँ इन सभी समस्याओं को लिखित और यहाँ तक की दस पांच रुपये का टिकेट/स्टाम्प भी लगा कर दिया गया लेकिन कुल टोटल परिणाम जीरो का जीरो. हमने अपनी ऊर्जा, समय, बुद्धि और पता नहीं क्या क्या बर्वाद किया पर समस्या जस की तस वहीँ पर बनी हुई है. जय हो शिनिंग इंडिया, जय हो देश बदल रहा है, जय हो उगता भारत, जय हो ग्रामोदय से भारतोदय.

भारत/राज्य सरकार की नौकरी ऊपरी कमाई का भी अच्छा जरिया:
      भारत में आप जुगाढ़ करके सरकारी नौकरी पा जाईये और फिर आप चैन आराम से बैठिये. कोई टेंशन नहीं. मासिक पगार तो पक्की है ही साथ में फर्जी टी.ए./डी.ए. बनाकर और बांकी की ऊपर की कमाई. चाहे वह महिला बाल विकास वाले केस में पोषण आहार बेंचकर, योजनायों में फर्जीवाड़ा करके, सबला योजना को निर्बला योजना में बदलकर, या फिर आंगनवाडी केन्द्रों को बंद रखने के एवज में पर्यवेक्षकों द्वारा आंगनवाडी कार्यकर्ताओं से पंद्रह सौ और दो हज़ार की घूस लेकर. सब चलता है. आप हज़ार दो हज़ार बस पर्यवेक्षकों को दे दो और वो अपने ऊपर बैठे आकाओं को भी शेयर पंहुचा देंगी बांकी  चाहे आप आंगनवाडी केन्द्रों को बंद रखो, खोल के रखो, केन्द्रों में माल-मवेशियों को बांधो, उसमे चारा भूसा रखो, या आपकी जो ईक्षा हो वो करो. कोई फर्क नही पड़ेगा. कुछ हमारे जैसे सरफिरे होंगे भी जिनको भ्रष्ट्राचार से लड़ने का भूत सवार होगा तो ज्यादा से ज्यादा दर्ज़न दो दर्ज़न शिकायतें करेंगे, हल्लागुल्ला करेंगें भी तो क्या फर्क पड़ता है. आखिर शिकायतों की जांच करने वाले तो ऊपर वाले ही अफसर न आयेंगे? ऐसे में जो पहले से ही उनको शेयर पंहुचा है उसका क्या? भारत में बस एक ही चीज़ तो कम से कम बहुत अच्छी है अधिकारी कर्मचारी कभी भी अपने विभाग के कर्मचारी अधिकारी से नमक हरामी नहीं करते. जिसका खाया है उसका अंत तक निर्वहन करते हैं. क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो भला कौन विकशित देश में ऐसा कानून होगा जहाँ सीधे सीधे आँख में पैर डालने (या आँख में धूल झोंकना) वाले काम होते होंगे? कम से भारत में तो यह संभव है? मेरा भारत महान! यहाँ पर पैसे के दम पर सब कुछ चल जाता है. बंद आंगनवाडी केंद्र कागजों में खुल जाते हैं. पंचायतों के जीरो स्तर के कार्य सौ प्रतिशन और पूर्ण गुणवत्तापूर्ण बन जाते हैं, यदि इरादतन किसी का मर्डर हुआ होगा तो वह एक्सीडेंटल बन जाता है. जहाँ एफ.आई.आर. लिखी जानी चाहिए वहां सादे कागज़ में भी रिपोर्ट नहीं ली जाती और जहाँ कुछ हुआ ही नहीं होता वहां कोर्ट केस बन जाता है, डॉक्टर बिना पढ़े और प्रेक्षा ट्रेनिंग के ही टॉप कर जाते हैं. पी.एस.सी. और आई ए एस मात्र गरीबों और मिदले क्लास वाले होनहार छात्रों के लिए हैं पैसे और पंहुच से सबल लोग तो बिना इन सबके ही प्रशासकीय अधिकारी बन जाते हैं.

आप कंप्यूटर गेम के शौक़ीन हैं तो 181 सी.एम. हेल्पलाइन में कॉल करें:-
यदि आप घर में अकेले पड़े पड़े अवसाद ग्रस्त महसूस कर रहे हैं और आपको लगता है की किसी से बात कर लेनी चाहिए तो एक शिकायत अपने गाँव, पंचायत या क़स्बा की ले लें और सी.एम. हेल्पलाइन में १८१ पर कॉल कर दें. आपका अच्छा एंटरटेनमेंट होगा. साथ ही आप कंप्यूटर गेम की तरह इसमें भी नंबर गेम खेल सकते हैं. जी हाँ क्या आपको पता नहीं है? आपकी सी.एम.हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत पहले से चौथे लेवल तक जा सकती है. अब देखना है की चौथे लेवल तक पंहुचते पंहुचते आपकी जीत होती है या हार. ध्यान रखियेगा सी.एम. हेल्पलाइन को गंभीरतापूर्वक कभी मत लीजियेगा बस यह एक गेम है जो आपको पहले से चौथे लेवल तक पंहुचाएगा. आप जीत जाएँ तो उन लोगों का भला होगा जिनके लिए आपने यह शिकायत दर्ज करवायी थी नहीं तो कंप्यूटर गेम समझ कर भूल जाईयेगा. वहारहाल मैं यह कह रहा था की खाली टाइम में डिप्रेशन कम करने का तरीका है सी.एम. हेल्पलाइन, पर यदि आप गंभीर किस्म के व्यक्ति हैं तो थोडा सावधान रहिएगा क्योंकि म.प्र. शासन की सी.एम. हेल्पलाइन आपका डिप्रेशन बढ़ा भी सकती है क्योंकि क्या पता की आप चौथे लेवल में पंहुचकर इस गेम में हारें तो डिप्रेशन तो बढ़ सकता है ना?

ग्रामीण अंचलों में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्य प्रणाली को सुधारना होगा, नहीं तो सब दावे खोखले हैं- सभी विभागों के कार्यों के गुणवत्ता की जांच के लिए गठित की जाएँ स्पेशल और स्वतंत्र  समितियां-
      तो आपने देखा की समस्या काफी व्यापक है, जिसका की समाधान अकेले किसी देश के प्रधानमन्त्री और मुख्यमंत्री के बस की बात नहीं हो सकती. और इतने भी इमानदार मुख्यमंत्री और प्रधानमन्त्री नहीं मिल सकते की किसी भी समस्या को उतनी गंभीरता से ले सकें. ऊपर स्तर की उनकी कार्य प्रणालियाँ तो जग जाहिर ही हैं. भला कौन नहीं जानता कौन कितना दूध का धुला है. पर फिर भी सरकार को यदि भारत में वास्तव में बदलाव लाना ही है तो सबसे पहले यह देखना पड़ेगा की सबसे नीचे के स्तर पर जो व्यक्ति/हितग्राही खड़ा है क्या उसको सरकार द्वारा प्रदत्त योजनायों का सही सही लाभ मिल पा रहा है? अब प्रश्न उठता है की यह ऑब्जरवेशन/पर्यवेक्षण करेगा कौन? तो यह पर्यवेक्षण सरकारी मुलाजिमों के तो बस की बात नहीं. क्योंकि वह तो अधिकतर इतने भ्रष्ट हो चुके हैं की किसी भी समस्या के उचित और सही निराकरण की जिम्मेदारी इनको देनी ही नहीं चाहिए. क्योंकि कुछ होने वाला नहीं है. मानाकि कुछ मुट्ठीभर कर्मचारी/अधिकारी अच्छी सोच वाले हो सकते हैं पर उनकी कोई वैल्यू भी नहीं है. क्योंकि मुट्ठीभर हर स्थान तक पंहुच भी नहीं सकते. जांच सम्बन्धी कार्य तो लोकपाल और स्वतंत्र निगरानी टीम का ही हो सकता है. जब तक लोकपाल की व्यवस्था नहीं है तब तक हर विभाग के जांच की कोई ऐसी टीम गठित की जानी चाहिए जिसमे उस विभाग से हटकर अन्य विभागों और अन्य प्रदेशों के कर्मचारी/अधिकारी सम्मिलित हों (और किसी भी प्रकार से रिश्ते नाते में न आते हों). ऐसी कोई भी टीम कम से आधा दर्ज़न कर्मियों की होनी चाहिए जिसमे अच्छे रिकॉर्ड वाले रिटायर्ड अधिकारी, अच्छे रेटेड एन.जी.ओ. सदस्य, वरिष्ठ रिटायर्ड जज, वरिष्ठ समाजसेवी, वरिष्ठ अच्छे रिकॉर्ड वाले पुलिस अधिकारी और इसी प्रकार से अच्छे चुने हुए सदस्य जांच दलों में हों और हम यह मानकर चलें की इस प्रकार से गठित जाँच दलों पर कोई प्रशासनिक दवाब अथवा नेतागिरी नहीं होगी तब जाकर काफी हद तक समस्या का सही सही आंकलन हो पायेगा. नहीं तो वर्तमान भारत की जो दुर्दशा है वह इतनी निराशावादी है की जितनी योजनायें पास हो रही हैं उसी हिसाब से दिन दूनी रात चौगुने भ्रष्ट्राचार भी हो रहे हैं. कम से कम मैं यह पूरे विश्वास और पूरे अनुभव के साथ कह रहा हूँ.
नोट/टीप – महिला एवं बाल विकास विभाग का यह प्रकरण पूर्णतया सत्य घटनाओं पर आधारित है और मेरे पास पर्याप्त सबूत भी हैं. यहाँ पर जैसा की पहले भी प्रारंभ में कहा गया है की रीवा जिले के गंगेव ब्लाक की समस्या तो मात्र एक प्रोटोटाइप समस्या है. इसी समस्या को यदि बड़े लेंस में रखकर फोकस करें तो पूरे रीवा जिले नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित आंगनवाडी केन्द्रों की दुर्दशा ठीक ऐसी ही है अथवा इससे भी निम्नस्तर की है. यदि वास्तव में उगता भारत, बढ़ता भारत और ग्रामोदय से भारतोदय जैसे मुहावरों को यथार्थ होते सच में देखना है तो सरकारों को गंभीर और सार्थक प्रयास करने पड़ेंगे नहीं तो “मेरा देश बदल रहा है” मात्र मोबाइल की रिंगटोन, गानों और कागजों तक ही सीमित रह जाएगा और वास्तव में कहीं कुछ नहीं बदला होगा सब कुछ यथावत ही रहेगा...हाँ सरकारें जरूर बदलती रहेंगी.

!!!जय हिन्द जय भारत!!!
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139