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Monday, August 6, 2018

14 लाख 48 हज़ार के कैथा पंचायत भवन निर्माण में भष्ट्राचार (मामला ज़िला रीवा ब्लॉक गंगेव अन्तर्गत कैथा पंचायत का जिंसमे क्षतिग्रस्त पंचायत भवन निर्माण में 14 लाख 48 हज़ार रुपये के कार्य में लीपापोती साथ ही पुराने लगे लाखों का गार्डर, सरिया, पत्थर पटिया को बिना नीलामी ही बेंच दिया)


दिनांक 07 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   रीवा ज़िले की कई पंचायतों में भष्ट्राचार रुकने का नाम नही ले रहा है. पञ्च परमेश्वर एवं मनरेगा पंचायती कार्यों से लेकर विधायक एवं संसद निधि से भी प्राप्त राशियों में जमकर धांधली की जा रही है. फ़र्ज़ी बिल बाउचर बनवाकर राशि का बन्दरवाट चल रहा है. अवैध निर्माण कराए जा रहे हैं साथ ही सड़क एवं अन्य निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की भारी अनदेखी चल रही है. यद्यपि जनपद एवं जिला पंचायतों से लेकर कलेक्टर रीवा, एवं भोपाल मंत्रालय तक में इसकी जमकर शिकायतें की जा रही हैं लेकिन इसका कोई प्रभाव नही हो रहा है क्योंकि यह स्पष्ट होता नजर आ रहा है की जांचकर्ता एजेंसी ही मुख्य रूप से भष्ट्राचार करवा रही है. सब कुछ खुलेआम जनपद एवं जिला अधिकारियों की सह से चल रहा है. जांच के नाम पर मात्र कोरामपूर्ती हो रही है. जांच पीसीओ, सचिवों, एवं चपरासी ग्रेड के कर्मियों से करवाई जा रही हैं और वही प्रतिवेदन उच्चस्तर तक भेजे जा रहे हैं.

कैथा पंचायत भवन में लगी लाखों की पुरानी सामग्री हुई गायब

   इसी वर्ष मई-जून माह में कैथा पंचायत के पुराने बताए गए क्षतिग्रस्त भवन को तोड़ा जा रहा था तो मौके पर जाकर देखा गया तो उसमे पचासों गार्डर, सैकड़ों पटिया और हज़ारों पत्थर-ढोके लगाए हुए मिले थे. लेकिन बिना ग्राम पंचायत की ग्राम सभा और बिना नीलामी प्रक्रिया के ही लाखों रुपये की पुरानी लगाई हुई निर्माण सामग्री सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल द्वारा गायब कर दी गई और उसे बेंच दिया गया और कुछ अपने कब्जे में ले लिया गया. कुछ पत्थरों को संपति पटेल के घर के पास 89 हज़ार रुपये की लॉगत से बनाई जा रही पंचायती पुलिया के लिए लगा दिया गया जबकि इस 89 हज़ार लॉगत की पुलिया में नई और अच्छी निर्माण सामग्री उपयोग की जानी थी. जबकि कैथा सरपंच ने इसमे पुरानी टूटीफूटी पाइप ही डाल रखी है साथ ही पुराने पत्थर और घटिया डस्ट लगाकर पुलिया निर्माण किया जा रहा है.

   इस प्रकार लगभग 3 से 4 लाख रुपये की पुरानी सामग्री का क्या हुआ इसका कोई पता नही है. ऑफिशियली कोई नीलामी प्रक्रिया न होने से स्पष्ट है की पूरे मटेरियल को सरपंच ने बेंच लिया अथवा अपने कब्जे में कर लिया.

14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि हुई स्वीकृत, अब गबन की तैयारी 

    पंच परमेश्वर की वेबसाइट एवं एप्प से प्राप्त सम्पूर्ण जानकारी के अनुसार कैथा पंचायत के क्षतिग्रस्त पंचायत भवन के पुनर्निर्माण के लिए स्टाम्प शुल्क राज्यस्तरीय योजनांतर्गत दिनाँक 02/10/2017 को पंचायतराज संचालनालय द्वारा भारत निर्माण सेवा केंद्र पंचायत भवन के नाम से 14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि स्वीकृत हुई है. यह राशि कैथा पंचायत पंच परमेश्वर खाते के यूनियन बैंक खाता क्रमांक 611602010006926 में भेजी गई है. इसके बाबत अभी दिनांक 24/07/2018 को एक लाख 12 हज़ार रुपये जायसवाल ट्रेडर्स विक्रेता आई डी क्रमांक 7727 के नाम पर निकाले गए हैं जिंसमे बिल क्रमांक 463 में 20 क्विंटल लोहा के लिए यह राशि निकाली गई है. यह बिल दिनांक 15/07/2018 को जारी हुआ है. लेकिन अब तक न तो लोहा का रता पता है और न ही कार्य का. समस्त बिल, पंचायत खाता, राशि की जानकारी भी यहां पर संलग्न की हुई है. 

जायसवाल ट्रेडर्स विक्रेता ने पंचायतों को जारी किये करोड़ों के कुल 318 बिल बाउचर 

        साथ ही बता दें की आजकल पंचायतों के नाम पर फ़र्ज़ी बिल बाउचर जारी करने की प्रथा चल रही है और ज्यादातर ऐसे विक्रेता अपनी फ़र्ज़ी कंपनी बनाकर बिना किसी स्पष्ट प्रक्रिया के बिल बाउचर जारी कर पंचायती भष्ट्राचार में जमकर योगदान दे रहे हैं. क्या यह विक्रेता/ट्रेडर्स जीएसटी के दायरे में आते हैं? क्या ये इनकम टैक्स अदा कर रहे हैं? यह सब ही अपने आप में एक अलग जांच का विषय है. बता दें की जायसवाल ट्रेडर्स नामक विक्रेता एजेंसी अब तक पंचायतों को लगभग 318 कुल बिल बाउचर जारी कर चुकी है जिंसमे करोड़ों रुपये की सामग्री पंचायतों को बेंची गई बतायी जा रही है. इसकी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही होनी चाहिए ऐसा ग्रामीणों की माग है.


कैथा पंचायत के ग्रामीणों ने उठाई आवाज़ 

   कैथा ग्राम पंचायत के रहवाशियों ने इस विषय में आवाज़ उठाई है और साथ ही सही जांच कर कार्यवाही की माग की है. कैथा ग्राम पंचायत के भूतपूर्व सरपंच मिथिला पटेल एवं जगदीश पटेल, सरपंच प्रत्यासी डॉक्टर चंद्रभूषण पटेल, वर्तमान पंच यज्ञभान पटेल, दिनेश विश्वकर्मा, शैलेन्द्र पटेल, राजेश पटेल, नरेंद्र पटेल, जिमीदार पटेल, उग्रभान पटेल, श्यामलाल शुक्ला, राजबहोर शुक्ला, राजेन्द्र शुक्ला, लालबहादुर पटेल, बुद्धसेन पटेल उर्फ ददुआ, बृजभान केवट, उग्रभान केवट, रामावतार केवट, जगदीश पांडेय, दिलीप केवट, संतोष केवट, कैलाश केवट, रामयतन शुक्ला, मुद्रिका पटेल, उपेंद्र शुक्ला, इटहा से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता राजकुमारी पटेल, सुग्रीव पटेल, रामनेवाज पटेल, मुनिराज पटेल, श्यामसुंदर पटेल, एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने सम्पूर्ण पंचायती भष्ट्राचार की उच्चस्तरीय ईओडब्लू एवं लोकायुक्त से जांच कर पंचायतीराज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 एवं आई पी सी की धारा 420 के तहत कार्यवाही की माग की है.

 संलग्न 

1) कैथा पंचायत भवन का पुराना क्षतिग्रस्त भवन के तोड़े जाने के समय की तस्वीर.

2) कैथा पंचायत का पंच परमेश्वर खाता की जानकारी, निकली राशि की फ़ोटो, पंचायतराज संचालनाय की स्वीकृत 14 लाख 48 हज़ार रुपये की राशि की जानकारी. 

3) पुराने पंचायत भवन में लगाए गए लाखों की निर्माण सामग्री को 420 करके सरपंच द्वारा बेंचा गया, गार्डर वगैरह की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Monday, January 29, 2018

त्योंथर ब्लॉक - सूचना के अधिकार की उड़ाई जा रही धज्जियां, मांगा कुछ और जाता है जबाब कुछ और मिलता है

रीवा मप्र, दिनांक 30 जनवरी 2018, स्थान - त्योंथर ब्लॉक, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
भारत सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू करके देश की जनता को सशक्त बनाने का अच्छा अवसर प्रदान किया था लेकिन आज पूरे देश मे सूचना के अधिकार की सरकारी विभागों द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही है।
    अभी हाल ही में आवेदक पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ पंचायत ब्लॉक त्योंथर रीवा द्वारा ब्लॉक में आर टी आई लगाकर मनरेगा के जॉब कार्ड सहित मनरेगा सम्बंधित जानकारी चाही गई थी जिस पर आवेदक को अब आवेदक से पीड़ित बना दिया गया है। जी हां! अब पीड़ित जनपद त्योंथर से प्राप्त और सीईओ का हस्ताक्षरित प्रपत्र लेकर घूम रहा है जिसमे सूचना देने के एवज में 85626 रुपये की फीस की माग की गई है। जबकि पीड़ित का कहना है कि उसने जो जनकारी माँगी थी वह मुश्किल से हज़ार रुपये के अंदर राशि जमा करके दी जा सकती थी। अतः सीईओ त्योंथर के प्रपत्र दिनांक 19 जनवरी 2018 से स्पष्ट है कि वांछित जानकारी उपलब्ध न करवाने और भ्रमित करने के उद्देश्य से पीड़ित आवेदक को 85626 रुपये जमा किये जाने हेतु कहा गया है।

     आज दिनांक 30 जनवरी को जब पूरा देश महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाने में जुटा हुआ है, ऐसे में देखना यह होगा कि गरीबों मजदूरों के हित और उनके अधिकार के लिए प्रारम्भ की गई महात्मा गांधी ग्रामीण राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम के नाम पर मजदूरों को वेवकूफ बनाने और उनके शोषण का जो जरिया पंचायतों ने खोज निकाला है इस पर क्या कुछ किया जाएगा? क्या गरीबों मजदूरों को रोजगार की गारंटी के नाम पर फ़र्ज़ी मस्टर रोल और फ़र्ज़ी बैंक खाते बनाकर राशि की अंधाधुंध निकासी इसी प्रकार जारी रहेगी?
    जितना काम उतना दाम जैसे वैधानिक जुमलों का क्या होगा? क्या 167 रुपये की दिन भर की मजदूरी ही बस मजदूरों को दी जाती रहेगी? जब आज दिन भर का लेबर चार्ज 300 सौ रुपये के आसपास है ऐसे में इतने कम 167 रुपये सरकारी रेट पर कौन मजदूर दिन भर पंचायती कार्यों में झक मरायेगा और काम करने के बाद पूरे छः माह अथवा साल भर इंतज़ार करेगा?

       आज सरकारें कॉर्पोरेट के लिए बिक चुकीं हैं। सभी सरकारी योजनाओं में मात्र स्मार्ट सिटी, स्मार्ट शहर, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, नौकरी पेशे वालों के लिए नए नए पैकेज, नए वेतन आयोग और बहुत कुछ लेकिन किसानों और मजदूरों के लिए कहीं दूर दूर तक कुछ नही। जो भी योजनाएं आती भी हैं तो मनरेगा की तरह भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ रही हैं। सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि किसानों और मजदूरों का कोई सशक्त संगठन भी नही है जो इनकी गांव गांव आवाज उठाये जिससे इनको न्याय मिल पाए। ग्रामीणों मजदूरों और किसानों की आवाज सुनने वाला कोई नही है।
      और कब तक किसान मजदूर का शोषण होता रहेगा?

संलग्न - आवेदक पीड़ित पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ पंचायत एवं मनरेगा मजदूर इंद्रलाल साकेत की फ़ोटो तथा आवेदकों द्वारा लगाया गया सूचना अधिकार आवेदन।

  - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक मानवाधिकार कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

Wednesday, January 17, 2018

Rewa, MP - नेवरिया ग्राम विकास से वंचित, ग्रामीणों ने लगाया पंचायत पर आरोप, बताया सभी सरपंचों ने उनके ग्राम के साथ द्वेष भावना से किया काम

दिनांक 18 जनवरी 2018, स्थान - गंगेव ब्लॉक, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत आने वाली सेदहा पंचायत के ग्राम नेवरिया की जनता ने सरपंच और पंचायत विभाग पर साइड लाइन करने का आरोप लगाया है।

          दिनांक 17 जनवरी 2018 को सामाजिक कार्यकर्ता के समक्ष दिए गए अपने साक्षात्कार में ग्राम नेवरिया के दर्ज़न भर हितग्राहियों ने पंचायत पर आरोप लगाते हुए बताया कि जब से सरपंची नेवरिया ग्राम से दूसरे ग्रामों में गई है तब से सभी सरपंचों ने नेवरिया के साथ सौतेला व्यवहार किया है जो कि पंचायतीराज और इस लोकतंत्र के लिए भी बुरा है क्योंकि जहां सरकार सब के विकास और सबका साथ जैसी जुमलेवजी कर रही हैं वहीं ग्राउंड लेवल पर कहीं कुछ होता नजर नही आ रहा है। 

       उपस्थित ग्रामीणों जय प्रकाश त्रिपाठी, जमुना प्रसाद त्रिपाठी, रोहिणी प्रसाद गौतम, रामविलाश गौतम, वेदमणि त्रिपाठी, श्रीनिवास त्रिपाठी, राजेश्वर त्रिपाठी, कैलाश त्रिपाठी, शुभ करण त्रिपाठी, कृष्ण कुमार त्रिपाठी सहित अन्य कई गणमान्य ग्रामीणों ने बताया कि उनके घर में बनाये गए शौचालय की 12000 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी उन्हें अबतक नही मिली है।

       जय प्रकाश त्रिपाठी के घर के पास पिछले वर्ष पंचायत द्वारा बनाई गयी नाली की तरफ सभी ने एक स्वर में इशारा करते हुए बताया कि यह नाली छः माह में ही उखड़ चुकी है। इसी प्रकार नेवरिया ग्राम का पहुच मार्ग पिछले दश वर्ष से मरम्मत के अभाव में चलने लायक तक नही बचा है। सभी का कहना था कि जहां घर घर पीसीसी और आरसीसी सड़कें बनाई जा रही हैं उनके ग्राम के साथ सरपंचों द्वारा राजनीति की जा रही है।

     उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि सेदहा पंचायत में मनरेगा एवं पंच परमेश्वर की राशि का गलत उपयोग किया जा रहा है। सेदहा पंचायत में बने शान्तिधाम, ग्रेवल सड़क और अन्य कार्यों की गुणवत्ता आवंटित राशि के हिसाब से नही है अतः सभी ने समस्त कार्यों की जांच की भी माग की है।

      ज्ञातव्य हो कि सेदहा और हिनौती दोनो ही पंचायतों में मनरेगा और पंच परमेश्वर के कार्यों में व्यापक अनियमितता प्रकाश में आई थी जिस पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा भी आरटीआई पिछले वर्ष दायर की गई थी जिसका समय पर जबाब न मिलने से प्रथम अपील सीईओ जनपद गंगेव एवं द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग भोपाल में की गई थी। परंतु आज पूरा वर्ष व्यतीत होने के बाद भी उस आरटीआई का जबाब नही दिया गया है। सूचना के अधिकार के अंतर्गत चाही गई जानकारी छुपाने के पीछे मात्र एक ही उद्देश्य हो सकता है कि जानकारी सार्वजनिक होने से कहीं पंचायतों के काले चिठ्ठे न खुल जाए।

  वहारहाल, नेवरिया ग्राम के ग्रामीणजनों ने एक स्वर में बताया कि उनके पंचायत सेदहा में ग्राम सभा भी कभी नही लगती और साथ ही पंचायत का कार्य वहां का सरपंच नही बल्कि सरपंच के दलाल करते हैं।

     संलग्न - ग्राम पंचायत सेदहा अंतर्गत आने वाले ग्राम नेवरिया के ग्रामीणजनों की फ़ोटो जहां पर बीच सड़क पर खड़ा होकर सभी पंचायती कार्यों में भररेशाही की शिकायत कर रहे हैं। साथ ही यूट्यूब का अपलोड किया गया वीडियो का लिंक भी यहां पर दिया जा रहा है।

     - शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

[1/18, 8:43 AM] Shivanand Dwivedi: https://youtu.be/yXjSeUyrMcA

[1/18, 8:43 AM] Shivanand Dwivedi: https://youtu.be/343D9yLk5Os

[1/18, 8:43 AM] Shivanand Dwivedi: https://youtu.be/GG3tazJ3okU

Thursday, March 9, 2017

(Rewa, MP) त्योंथर ब्लाक में कांकर, कलवारी सहित दर्ज़नों पंचायतों में मनरेगा में मजदूरों के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाडा


दिनांक - 09/03/2017, स्थान - त्योंथर/कांकर/गढ़/तेंदुआ/गंगेव, रीवा मप्र

   ( त्योंथर/कांकर/गढ़/तेंदुआ/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी/संजय पाण्डेय) मनरेगा के कार्यों में सरकारी खजाने को चूना लगाने का कार्य सतत जारी है. यह मामला है त्योंथर ब्लाक का जहाँ दर्ज़नों पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत हो रहे कार्यों में फर्जी मजदूरों के नाम से पैसे की निकासी जारी है और पूरा कार्य सरपंचों एवं सचिवों द्वारा जेसीबी एवं मशीनों द्वारा करवाया जा रहा है. 
         अभी हाल ही में जब कांकर-बरहट पंचायती क्षेत्र में अवैध उत्खनन का प्रकरण मीडिया सहित सबन्धित खनिज, पुलिश एवं राजस्व विभाग में भेजा गया तो पता लगाया गया की आखिर इतनी अधिक मात्रा में उत्खनन कर खनिज सम्पदा जैसे मोरम आदि कहाँ पर ले जाया जा रहा है. जानकारी एकत्रित करने पर पता चला की पंचायत सड़क निर्माण एवं मनरेगा के कार्यों के नाम पर अच्छा खासा गोरख धंधा चलाया जा रहा है जहाँ पर जगह-जगह सरकारी एवं जंगली भूभाग को खोदकर वहां से खनन माफियाओं द्वारा अवैध तरीके से बिना लीज लिए हुए मोरम एवं खनिज सम्पदा कांकर, कलवारी, डाढ़, कटरा, गंतीरा, बरहट आदि पंचायतों में मनरेगा के नाम पर चल रहे सड़क निर्माण के कार्यों में पहुचाया जा रहा है. जब सम्बंधित सभी उक्त पंचायतों के कार्यों का अवलोकन मनरेगा की वेबसाइट से किया गया तो पाया गया सभी कार्य मात्र कागजों पर हो रहे हैं. जिन जिन मजदूरों के नाम सभी उक्त पंचायतों के मस्टर रोल में दर्ज थे उन मजदूरों का वास्तविक धरातल पर कहीं नामोंनिशान नहीं था. और जं मजदूरों को वास्तव में कार्य की तलाश थी उन मजदूरों के नाम तक मस्टर रोल में दर्ज नहीं हैं.
                          मनरेगा की वेबसाइट से भी फर्जीवाड़े का हुआ खुलासा
             इस प्रकार नरेगा की वेबसाइट में जाकर पता लगाया गया तो पाया गया की अभी तक तो सभी ग्राम सड़क . खेत सड़क, सुदूर ग्राम सड़क आदि सम्बन्धी कार्यों का मुस्किल से दस प्रतिशत भी राशि नहीं निकली है परन्तु कार्य लगभग पूर्ण हो चुके हैं. यह कैसे संभव हुआ मात्र दस प्रतिशत राशि निकाशी में पचहत्तर प्रतिशत से अधिक मनरेगा के कार्य हो चुके हैं जबकि मजदूर कहीं दूर दूर तक कार्यस्थल में उपलब्ध नहीं हैं. 
                पंचायती भ्रष्ट्राचार में मजदूर सचिव सरपंच सहित सीईओ तक का हाँथ 
            पंचायतों, सचिवों, सीईओ, सहित माफियाओं का ऐसा मकद जाल बुना गया है की इसे समझ पाना काफी मुस्किल हो रहा है. उधर पंचायती कार्यों का ठेका सरपंच सचिवों द्वारा जनपद सीईओ एवं अन्य अधिकारियों की सहमति से खनन माफियाओं को दे दिया जाता है और खनन माफिया मात्र कुछ ही दिनों में जेसीबी मशीनों को लगाकर कई किमी रोड बनाकर दे देता है. बाद में कुछ अपने पक्ष के तथाकथित मजदूर जिनका की काम से कोई सरोकार नहीं होता उन्ही के नाम पर सम्बंधित सरपंच सचिव मस्टर रोल जारी कर मजे से घर बैठे पैसे की अंधाधुंध निकासी करते रहते हैं. इस गोरख धंधे में सरपंच सचिव काफी फूंक फूंक कर कदम रखते हैं. सम्बंधित सरपंच सचिव कभी भी ऐसे मजदूर का नाम मस्टर रोल में नहीं जोड़ते जो उनके पक्ष का न हो. क्योंकि यदि ऐसे ही कभी शिकायतें हों गयीं तो वह तथाकथित मजदूर सीधे सीधे झूंठ बोल दे की नहीं मई कार्य कर रहा था और मेरे ही अकाउंट में मनरेगा के पैसे आ रहे थे. ऐसे में यदि मजदूर कहीं विपक्ष का हुआ और उसने सही सही बोल दिया की नहीं मैंने काम वाम नहीं किया है सरपंच सचिव ने हमसे शेयर बांधा हुआ था की जो पैसा आएगा इसमें अपना  अपना भाग तय कर लेंगे तो सरपंच सचिव मुस्किल में पद जाएगा. और बिलकुल ऐसा ही हर एक पंचायत में निरंतर होता आ रहा है. इसीलिए मनरेगा के फर्जीवाड़े पर लगाम भी नहीं लग पा रही है. क्योंकि पंचायत अथवा राजस्व विभाग तो कार्यवाही करने से रहा क्योंकि इनका भी अपना शेयर बंधा होता है तो भला यह क्यों अपने घर आने वाली लक्ष्मी के लिए दरवाज़ा बंद करेंगे. अब मात्र मीडिया, जनता, अथवा हमारे जैसे कुछ सरफिरे समाज सेवी ही हो सकते हैं जो इनके काले कारनामों की धज्जियाँ उड़ाते फिरें.

 सीईओ जनपद त्योंथर को विन्ध्य किसान परिषद् की तरफ से सौंपा ज्ञापन    
           मनरेगा के उक्त भ्रष्ट्राचार को लेकर अभी हाल ही में दिनांक 06 मार्च 2017 को सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर को विन्ध्य किसान परिषद् के जिलाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता शिवानन्द द्विवेदी एवं परिषद्  के युवा कार्यकर्त्ता पुष्पराज तिवारी द्वारा एक ज्ञापन सौपा गया है जिसमे सात दिवस के अन्दर उक्त सभी अनियमितता एवं मनरेगा एवं पंचायती भ्रष्ट्राचार में जांच कर कार्यवाही करने की माग की गयी है. ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है की यदि नियत समय में जाँच कर कार्यवाही नही की गयी तो सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर के समक्ष धरना प्रदर्शन एवं अनसन किया जायेगा.
           मांग में यह भी सम्मिल्लित है की जिन गरीब मजदूरों को कार्य नही दिया गया है उन्हें काम उपलब्ध करवाया जाए जबकि फर्जी रूप से मजदूरों के नाम पर निकासी करने वाले ऐसे लोग जो न टन मजदूर हैं और न ही किसान बल्कि इनके नाम पर मात्र मनरेगा का पैसा हज़म कर रहे हैं उनसे पैसे की वसूली की जाए. जो मजदूर अपना जॉब कार्ड बनवाए हुए हैं एवं नियमित मजदूरी करने में रूचि रखते है उन्हें पूरे सौ दिन की रोजगार गारंटी उपलब्ध करवाई जाए, मजदूर सुरक्षा कार्ड के अंतर्गत प्राप्त होने वाले सभी लाभों को दिया जाए.
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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE@ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI