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Monday, July 11, 2016

प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम खुला पत्र - रीवा के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, के.सी.सी. का सही लाभ मिले और फसलों को सही-सही फसलवार अधिसूचित किया जाये

Dated: 11/07/2016. Place: Rewa (MP)
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प्रति,             
श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय,
प्रधानमत्री कार्यालय, नई दिल्ली.
भारत सरकार, भारत.
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विषय – रीवा जिले की फसल बीमा के लाभ, किसान क्रेडिट कार्ड, एवं ओला-पाला-सूखा आदि मुआबजा वितारानार्थ अधिसूचित की जाने वाली फसलों का पुनर्सर्वेक्षण करने हेतु तथा यह सर्वेक्षण फसलवार छमाही आधारित करने हेतु.


सन्दर्भ १) अधिसूचित फसलों का छमाही आधारित फसलावर (रवी और खरीफ में अलग-अलग) सही सर्वे न होने से फसल बीमा एवं किसान क्रेडिट कार्ड का सही लाभ किसानों को नहीं मिलने सम्बन्धी २) ओला-पाला-सूखा आदि के मुआबजा वितरण में भी वास्तविक फसल अधिसूचित रिकॉर्ड में दर्ज न होने के कारण सही एवं न्यायपूर्ण मुआबजा कृषकों को न मिल पाने सम्बन्धी ३) सम्पूर्ण रीवा जिले में कौन सी फसल सिंचित है और कौन सी असिंचित इस विषय में भी पटवारी तहसीलदार द्वारा सही सूचना न लिखने के कारण के.सी.सी. एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सही लाभ कृषकों न मिलने सम्बन्धी.

महोदय,

     कृपया उपरोक्त विषयान्तर्गत एवं संदर्भित प्रकरणों का अवलोकन करने का कष्ट करें. उपरोक्त सभी बिन्दुओ में मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूँगा और मांग करूंगा की रीवा जिले के किसानों के हित में यहाँ की सभी तहसीलों में छमाही फसल आधारित फसलों को अधिसूचित किया जाये और वहां पर वास्तविक लोकेशन पर पटवारी, कानूनगो और तहसीलदार द्वारा जाकर देखा जाये की किस ग्राम में ज्यादातर कौन सी फसल की बुवाई हुई है और फिर वास्तविक परिश्थिति को देखकर ही फसलों को अधिसूचित किया जाये जिससे सभी कृषकों को उनकी बोई हुई फसलों का उचित फसल बीमा लाभ, ओला-पाला-सूखा मुआबजा तथा साथ ही साथ उनके के.सी.सी. में भी उचित और सही ऋण उपलब्ध करवाया जा सके.
       सम्पूर्ण रीवा जिले में कृषकों की फसल बीमा, ओला-पाला-सूखा और के.सी.सी. से सम्बंधित निम्नलिखित मूल समस्याएं देखी गयी हैं.

अधिसूचित फसलों का छमाही फसलावर (रवी और खरीफ में अलग अलग) सही सर्वे न होने से फसल बीमा एवं किसान क्रेडिट कार्ड (के.सी.सी.) का सही लाभ कृषकों को नहीं मिलने सम्बन्धी

 मनगवां तहसील में विशेषकर और सम्पूर्ण रीवा जिले में ज्यादातर ग्रामीण अंचल के किसानों को न तो किसान क्रेडिट कार्ड का ही सही लाभ मिल पा रहा है और न ही फसल बीमा का. जिला रीवा के मनगवां, गुढ़, त्योंथर, जवा, सिरमौर, मऊगंज आदि तहसीलों में लगभग प्रत्येक राजस्व क्षेत्र में किसानों की फसलों को पटवारियों, राजस्य निरीक्षकों, और तहसीलदारों द्वारा अपने तहसील कार्यालय में ही बैठ कर अधिसूचित कर लिया जाता है. अधिकतर पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने फील्ड में नहीं पंहुचते है. किसानों और ग्रामीणों को इन कर्मचारियों को दर-दर ढूँढना पड़ता है. उदहारण के लिए मनगवां तहसील, इटहा हल्का, और गढ़ सर्किल के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में पिछले वर्ष 2014-2016 के मध्य सूखा अकाल की स्थिति थी. इस दौरान पटवारियों द्वारा सही फसल सर्वे नहीं किया गया जिससे किसानों को फसल बीमा का भी लाभ नहीं मिला है. जो फसल बीमा आयी है वह औसत से बहुत नीचे है और कुछ ही किसानों को मिली है. क्योंकि फसल का वास्तविक धरातल पर जाकर कभी भी सही निरीक्षण और सर्वे नहीं किया जाता है इसलिए जो फसल रिकॉर्ड और कागजों में आज से दस साल से पहले से दर्ज है वही आज भी दर्ज है. जबकि वास्तविकता यह है की प्रति वर्ष आज का किसान मौसम के हिसाब से अपने फसल का चयन करता है. जब ज्यादा बारिस की गुंजाईश होती है तो धान की खरीफ में ज्यादा बोवाई और जब कम बारिश या सूखे जैसी स्थिति रही है तो फसल का चुनाव किसान उस हिसाब से करते हैं और फसलों में सोयाबीन, अरहर, मूग, उरद आदि फसलें चुनते हैं जबकि गर्मियों में रवी के मौसम में ज्यादातर रीवा के किसान प्याज की फसल का उत्पादन करते हैं. जैसे उदहारण के तौर पर इसी वर्ष पूरे रीवा जिले में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मध्य भारत में सूखा-अकाल को देखते हुए किसानों ने प्याज की फसल की बहुतायत में खेती की. अब क्योंकि प्याज बहुतायत में हो गयी इस कारण प्याज़ को खरीदने वाला कोई ग्राहक नहीं मिला जिससे किसानों की टनों प्याज नष्ट हो गयी और उसे फ़ेंक दिया गया. यह एक सामान्य प्रश्न हो सकता है कि क्या भोपाल और दिल्ली में बैठी हुई सरकारें मात्र तमाशा देखने के लिए है? जब किसानों की ऐसी दुर्दशा हो रही है तो सरकार किस लिए बैठी है? क्या सरकारी राजस्व के कर्मचारी और अन्य कृषि और अन्य विभागों के क्षेत्रीय कर्मचारी/अधिकारी और विभिन्न अन्य संस्थान सो रहे होते हैं? सरकारों को तो यह भली भांति पता होना चाहिए की किस ग्राम में, किस तहसील में और किस जिले में किस समय कौन सी फसल किसानों मने बो रखी है, और उसकी क्या स्थिति है? मानाकि यदि किसानों ने बहुतायत में प्याज़ की बोवनी की है तो इस स्थिति में सरकारों को तो चाहिए की अपने तंत्र की मदद से पहले से ही यह आंकलन कर लें की जब यह प्याज अथवा कोई भी अन्य फसल का उत्पादन होगा तो किसानों का खरीददार कौन बनेगा? क्या साहूकार, व्यापारी वर्ग पहले से तैयार है इतनी प्याज़ अथवा कोई भी फसल को उचित और सही मूल्य पर लेने के लिए? व्यापारी इन फसलों का क्या मूल्य देगा? यदि व्यापारी कम मूल्य देगा तो सरकार को किसानों गरीबों और इन रात दिन ग्रामों में मेहनत करने वालों के लिए क्या तरीके ढूंढें जाने चाहिए जिससे किसानों के हितों की रक्षा हो सके? यदि इन प्रश्नों को गंभीरता से लिया जाये तो आम गरीब किसानों के हितों की रक्षा करने वाली कोई भी सरकार के लिए उत्तर ढूँढने में ज्यादा कठिनाई नहीं होनी चाहिए.
  समस्या इस बात की है कागजों में जो नतीजे और विवरण सरकारी कर्मचारियों एजेंसियों और विभागों द्वारा दिए जा रहे हैं वह असत्य और निराधार हैं. उनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता है. यदि सम्पूर्ण रीवा जिले में रिकॉर्ड प्याज का उत्पादन हुआ तो इससे साफ़ जाहिर है की अकाल और सूखा में भी किसानों के पास सिंचाई की सुविधा तो थी तब ऐसा हुआ? यदि घर में सिंचाई न होती तो कैसे प्याज जैसी फसल जो की पानी की इतनी अधिक मांग करती है बची रहती, सब नष्ट हो न हो जाती? पर दुर्भाग्य देखिये देश का कि सम्पूर्ण रीवा जिले में आज के दिनांक में आप स्वतंत्र सर्वेक्षण करवा लें और आप पाएंगे की रिकॉर्ड और कागजों में दर्ज सिंचाई सम्बन्धी जानकारी आज से दश वस्ढ़ से भी अधिक पुरानी है. ऐसा क्यों है? ऐसा मात्र तहसीलदार, राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों की निष्क्रियता और भ्रष्ट होने की वजह से है. सामान्य तौर पर यदि सरकारें चाहें तो बड़ी आसानी से पता लगा सकती हैं की विजली विभाग द्वारा किन किन कृषकों को सिंचाई के लिए दो हार्स पॉवर या उससे अधिक का कनेक्शन प्रत्येक वितरण केंद्र में दिया गया है. इस सूचना के आधार पर और तहसील कार्यालय से जानकारी लेकर यह बड़ी आसानी से अपडेट किया जा सकता है कि कौन कौन किसानों के कितने रकबे सिंचित है. कभी कभी ऐसा भी होता है की ग्रामों में एक किसान के पास यदि सिच्न्हाई सुविधा है तो अन्य भी कुछ आसपास के किसान इसका कुछ किराया देकर लाभ ले लिया करते हैं. पर यह सिंचित अथवा असिंचित होने का आधार नहीं बनाया जा सकता है. क्योंकि वही फसल और रकबे सिंचित की श्रेणी में आने चाहिए जीने पास या तो तालाब की सुविधा है, सिच्न्हाई के लिए मोटर पंप का कनेक्शन है अथवा आसपास ग्रामों में नहर की सुविधा है. ऐसे ही कृषकों को सिंचित की श्रेणी में रखा जाना चाहिए. और यह काम ज्यादा कठिन नहीं है. मात्र पंचायती क्षेत्र के पटवारी, ग्राम सेवक, समिति सेवक, और पंचायत सचिव के माध्यम से यह जानकारी पूर्ण कर फीड की जा सकती है. पर रीवा जिले के किसों का दुर्भाग्य ही है की उनके खून पसीने की कमाई मौज से खाने वाले यह सरकारी कर्मचारी किसानों, मजदूरों और गरीबों के हित में कोई कार्य नहीं कर सकते. पर प्रश्न यह भी उठता है की क्या एस.डी.एम., कलेक्टर, और अन्य सम्बंधित जिला और प्रदेश स्तर के अधिकारी सो रहे होते हैं की इतनी सी.एफ.टी, ग्राम संसद, ग्रामोदय से भारतोदय, आदि पता नहीं कितने कार्यक्रम हुए पर हुआ कहीं कुछ नहीं. किसानों ग्रामीणों की स्थितियां यथावत बरक़रार हैं.

सम्पूर्ण मनगवां तहसील में मात्र 15 प्रतिशत से भी कम सिंचित की श्रेणी में –

यदि हम बात करें अपने क्षेत्र की मनगवां तहसील की तो पाएंगे की यहाँ अधिकतम पंद्रह प्रतिशत भी किसानों को सिंचित की श्रेणी में नहीं रखा गया है. सूखा क्षेत्रों की बात तो अलग है मनगवां और गंगेव के मध्य से जो बाणसागर नहर निकली है उसके भी किनारों के कृषकों को अशिंचित दर्शाया गया है. यह कैसे हो सकता है की जहाँ से नहर गुजरे वह भूमि असिंचित हो? क्या नहर में पिछले ४-५ सालों से पानी नहीं छोड़ा गया? अथवा बाँध ही सूखा था? इसी प्रकार अन्य भी क्षेत्र जहाँ नहर नहीं भी है जैसे की गढ़, लालगांव सर्किल और इसी प्रकार चकघाट सर्किल अंतर्गत जमुई कला हल्का तथा आसपास के अन्य पटवारी हल्कों में भी यही स्थिति है. हमारी यही मांग है की तत्काल ऐसे सभी कृषकों को सिंचित की श्रेणी में रखा जाये जिनके पास मोटर कनेक्शन, तालाब, आसपास नहर आदि की सिंचाई सुविधाएँ है. इससे सबसे बड़ा फायदा तो के.सी.सी. में होगा जहाँ इनके ऋण लेने की सीमा में बढ़ोत्तरी होगी और साथ ही सही जानकारी सरकार के पास तक पंहुचेगी जिससे योजनायें बनाने और उनके क्रियान्वयन में भी मदद मिल सके. शायद एक स्थान हो सकता है जहाँ किसानों को नुक्सान होगा और वह है फसल बीमा की राशि मिलने में. क्योंकि यदि कमतर सिंचित क्षेत्र भी पूर्ण सिंचित चिन्हित हो गए तब किसानो को फसल बीमा का शायद उतना अधिक लाभ न मिल पाए. पर यह भी एक गलत ही धरना है. क्योंकि आज जो भी सर्वे होगा और जो भी फसल बीमा सम्बंधित जानकारी संप्रेषित की जाएगी वह जी.पी.एस. रीडिंग और फोटोग्राफ्स आदि लेकर की जाएगी. अतः ऐसी स्थति में यदि योजनायों का क्रियान्वयन सही तरीके से हुआ तो संदेह की कम स्थति रहेगी. 

जब वास्तविक कृषकों के नाम ही शूखा सर्वे सूची में नहीं जोड़े गए तब फसलों को छमाही और रवी-खरीफ के आधार पर ग्रामवार/कृषकवार अधिसूचित कैसे किया जायेगा?

आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है की फसलों को अधिसूचित किस प्रकार किया जा रहा है? क्या तहसील कार्यालय में बैठकर फसलों को अधिसूचित किया जा सकता है? कम से कम रीवा में तो ऐसा ही चल रहा है. आप प्रत्येक हल्के में जाएँ और देखें कि उस हल्के में किसानों ने पिछले दो सालों में कौन-कौन सी फसलों की बुवाई की है. यह आंकड़ा मिलने पर आप आश्चर्य चकित रह जायेंगे कि फिर तहसील कार्यालय और पटवारी कानूनगो के रिकॉर्ड में अधिसूचित फसलें पिछले दशक की क्यों दर्शाई जा रही हैं? अभी हाल ही में पिछले वर्ष २०१४-१६ में पड़े भीषण सूखे में हमने तीनों तहसीलों मनगवां, त्योथर और सिरमौर का वाकया देखा. मैं स्वयं प्रत्यक्ष उदहारण हूँ की दर्ज़नों सी.एम. हेल्पलाइन में शिकायतें की गंयीं (शिकायत क्र. 1403875, 1404035, 1404296, 1405821, 1405974, 1409259, 1409286, 1409324, 1409692, 1471423, 1450846, 1516382, 1516433, 1579576, 1597835, 1625395 आदि) और तहसीलदार एस.डी.एम. को लिखित भी दिया गया कि हिनौती हल्का 39, जमुई कला हल्का 31 के जिन किसानों का सूखा सर्वे में नाम छूट गया है उन किसानों के नाम जोड़े जांयें. परन्तु पटवारी, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एस.डी.एम, से लेकर कलेक्टर रीवा तक बात रखी गयी पर कोई समाधान न निकला. कलेक्टर रीवा श्री राहुल जैन का कहना था की जब प्रथम सर्वे सूची वनकर आ जाएगी और पंचायतों में नोटिस बोर्ड में चस्पा होगी तो दावा आपत्ति के अंतर्गत नाम जोड़ने के लिए आवेदन दें. सबसे बड़ी बात तो यह की सूची कब आयी और कब नोटिस बोर्ड में लगी इसकी भी कोई जानकारी कृषकों को नहीं हुई, और जिनको जानकारी हुई उन्होंने जब दावा आपत्ति के अंतर्गत आवेदन दिया तो उनके नाम भी पटवारी तहसीलदार द्वारा यह कहकर नहीं जोड़े गए की अब जो होना था वह हो गया, सरकार के पास फण्ड नहीं है और अब और अधिक नाम नहीं जोड़े जांयेंगे. सबसे बड़ी बात तो यह है की नाम ही कब जोड़े गए थे तो और अधिक नाम नहीं जोड़े जायेंगे? कब सर्वे हुआ और किन कृषकों को सर्वे के दौरान उनके खेत में बुलाया गया क्या इसकी जानकारी पटवारी तहसीलदार दे सकते हैं? क्या उन कृषकों के हस्ताक्षर, फोटोग्राफ्स या विडियो तहसीलदार कलेक्टर के पास उपलब्ध हैं जब सर्वे हो रहा था? सबसे दुर्भाग्य पूर्ण रवैया सिरमौर तहसीलदार मुनीन्द्र तिवारी और त्योंथर तहसीलदार देवांगन का था. सैकड़ो में से मात्र दश-बीस के नाम जोड़े गए शेष के नाम छोंड दिए गए. वास्तव में हुआ यह की इन हलकों में पटवारी ग्रामसेवक सर्वे करने ही नहीं आये. हिनौती हल्का 39 लालगांव सर्किल एवं सिरमौर तहसील के अंतर्गत आता है वहां का पटवारी प्रमोद पाण्डेय है. यह व्यक्ति प्रमोद पाण्डेय चौबीस घंटों में अठारह घंटे बराबर शराब के नशे में धुत्त रहता है. यह कभी भी हल्का में नहीं रहता. कई बार इसकी शिकायतें दर्ज़नों लोगों ने की पर कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं हुई. सिरमौर का तहसीलदार मुनीन्द्र तिवारी कई बार स्वयं भी इसका पक्ष लिया. मुनिद्र तिवारी के समक्ष ही पटवारी प्रमोद पाण्डेय ने चार-पांच अन्य हिनौती के हितग्राही ब्रिजेश उपाध्याय, अखिलेश उपाध्याय, और दिनेश सिंह निवासी लोटनी और मेरी उपस्थिति में सभी से बदतमीजी सिरमौर तहसील कार्यालय के अन्दर किया. परन्तु इस तहसीलदार मुनीन्द्र तिवारी ने न ही कोई इस पटवारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की और न ही कोई दंडात्मक कार्यवाही की अनुशंसा. इस बात को बाद में मध्य प्रदेश शासन की पूरी तरह से फ्लॉप हो चुकी सी.एम. हेल्पलाइन (डायल 181) में भी रखा गया था. और उसमे भी मात्र प्रथम लेवल से चौथे लेवल तक का ही खेल चलता रहा और कुछ नहीं हुआ.   
 इसी प्रकार त्योंथर तहसील जिला रीवा अंतर्गत चाकघाट सर्किल में आने वाले जमुई कला 31 के पटवारी कमलेश पाण्डेय का भी यही हाल रहा. कमलेश पाण्डेय ने जमुई हल्का 31 में सही सर्वे नहीं किया. प्रमोद पाण्डेय की तरह कमलेश पाण्डेय ने भी हितग्राहियों से पैसे रुपये लेकर बिना नुकसानी और बिना कृषि योग्य जमीन का ही मुआबजा बना दिया और जिन हितग्राहियों जैसे करहिया के दर्ज़नों लोनिया लोगों का जिनका की वास्तविक नुक्सान हुआ था और इसी प्रकार कैथा निवासी कुछ केवट समुदाय और चौबे, पाण्डेय, द्विवेदी लोगों की जो जमीन करहिया ग्राम अंतर्गत थी उनमे से भारी नुकसान के वावजूद भी कोई मुआबजा नहीं बनाया गया. सभी लिखित शिकायतों की पावती और सी.एम. हेल्पलाइन की शिकायतें इस बात को प्रत्यक्ष बयां करती हैं की किस तरह से तहसील कार्यालयों में पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदार फर्जीवाडा कर रहे हैं काले धंधे में संलिप्त हैं और इसको सुनने देखने वाला कोई मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री नहीं है. ऐसे पटवारी, तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव के साथ निलंबित कर देना चाहिए और जुर्माने के तौर पर पांच-पांच साल की इनकी तनख्वाह काट लेनी चाहिए और इस कटी तनख्वाह को उस तहसील और पटवारी हल्के क्षेत्र के गरीब किसानों को बरावर-बराबर वांट देना चाहिए. तब जाकर सही न्याय कहलायेगा.

हम चर्चा कर रहे थे किसानों की फसलवार होने वाले सर्वे की. तो हम देख सकते हैं की कभी-कभी पड़ने वाले सूखे-अकाल जैसी स्थति में यदि पटवारी तहसीलदारों के यह रवैये हैं कि किसानों की फसलों का सही मुआबजा तक नहीं बनाया जा रहा है तो भला ऐसे पटवारी तहसीलदार क्या ख़ाक फसलवार फसलों को अधिसूचित करेंगे? यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है. और जब तक फसलों को सही तरीके से अधिसूचित नहीं किया जाता और कौन सी भूमि सिंचित है और कौन सी असिंचित इसकी सही-सही जानकारी नहीं भरी जाती तब तक चाहे प्रधानमंत्री फसल बीमा हो या राष्ट्रपति फसल बीमा इनमे से किसी भी बीमा योजना अथवा के.सी.सी. का कोई सही लाभ वास्तविक हितग्राही किसानों को भारतीय भ्रष्ट्राचार युक्त अव्यवस्था में नहीं मिल सकता. यह बात अब लगभग निश्चित हो चुकी है. सब कुछ मात्र कागजों पर ही रह जायेगा. हाँ जिन किसानों या हितग्राहियों के पास पहले से घूस-रिश्वत के रूप में इन चोरों को खिलाने के लिए पैसे हैं तो जरूर ऐसे लोगों के नाम बिना किसी जमीन जायदाद के ही मुआबजा भी बन जायेगा और उनके मन मुताबिक के.सी.सी और अन्य लाभ भी प्राप्त हो जायेंगे जैसा की हर जगह चल रहा है. अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर क्या इस पूरे सिस्टम में सीधे-सीधे दिखने वाले इस घोटाले को देखने वाला कोई नहीं बचा? कलेक्टर, कमिश्नर यह सब अधिकारी जिले और संभाग में क्या करते हैं? क्यों ये सीधे-सीधे दिखने वाली इन समस्याओं को ध्यान नहीं देते? कलेक्टर, एस.डी.एम आदि अपने सी.एफ.टी. और ग्रामोदय से भारतोदय, ग्राम संसद आदि यात्राओं और मीटिंग में क्या करने जाते हैं? क्या यह ग्रामीण और कृषकों की समस्याएँ देखने सुनने नहीं जाते? क्या उस पंचायत और ग्राम में जाकर यह अधिकारी सीधे ग्राम बस्ती के लोगों के बीच में जाकर संवाद स्थापित नहीं कर सकते, उनकी समस्याओं से रूबरू नहीं होते?
सम्पूर्ण मनगवां तहसील जिला रीवा के ग्रामीण क्षेत्रों की सिंचित असिंचित भूमि की जानकारी में पिछले दश वर्षों में कोई अपडेट नहीं –

 किसानों की कौन सी भूमि सिंचित है और कौन सी असिंचित इसका फसल बीमा और के.सी.सी. के लाभ में सीधा सीधा प्रभाव पड़ता है. क्योंकि जैसा पहले भी चर्चा मेंन आया कि कृषकों के के.सी.सी. के थ्रेशहोल्ड में सिंचित भूमि का सीधे प्रभाव पड़ता है. जिन कृषकों की भूमि सिंचित है उनको असिंचित वाले कृषकों की तुलना में ज्यादा ऋण उपलब्ध हो पाता है. साथ ही यदि उस भूमि पर सही-सही फसलों को अधिसूचित किया गया है अर्थात यदि महगी फसलें बोई गयी ऐसा पटवारी द्वारा बताया जाता है तो उन कृषकों को तीन-चार गुना ज्यादा ऋण मिल सकता है. जैसे उदहारण के लिए किसी कृषक ने मात्र धान की फसल एक एकड़ के रकबे में बोई है और उतने ही रकबे में किसी अन्य कृषक ने सोयाबीन अथवा मसाले की फसल बोई है तो सोयाबीन अथवा मसाले की फसल वाले कृषक को मात्र धान बोने वाले कृषक की तुलना में के.सी.सी. में ज्यादा ऋण मिलता है. परन्तु पटवारी और तहसीलदार यह सब जानकारी अपडेट नहीं करते जिससे किसानों को वास्तविक और सही लाभ नहीं मिल पा रहा है.

समस्याओं के समाधान की दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे, ईमानदार और लोकहित चिन्तक कर्मचारियों अधिकारियों की आवश्यकता –

       शासन प्रशासन को उपरोक्त सभी समस्याओं का समाधान निकालना होगा. और यदि ये सरकारें वास्तव में गरीब, किसान और मज्दूरों का भला चाहती हैं तो बड़े कठोर कदम उठाने होंगे. बिना दंड दिए प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार नहीं हो सकता, यह भी एक अकाट्य सत्य है. जो दोषी है उसे दंड मिलना ही चाहिए. जब ऐसा होगा तो सभी अधिकारियों कर्मचारियों की आँखें खुल जाएँगी. तब जाकर इनको समझ में आयेगा की जनता के एक-एक पैसे जो टैक्स के रूप में तनख्वाह में इन्हें दिए जा रहे हैं वह कुर्सी तोड़ने के लिए नहीं है. उसके एवज़ में इन निकम्मों को काम करना पड़ेगा नहीं तो नौकरी छोंड दें. कोई भी लोकतान्त्रिक सरकारें जनता की बनाई जनता के लिए हैं और यह सभी सरकारी कर्मचारी जनता के नौकर हैं जनता के अधिकारी नहीं. यह जनता का पैसा खा रहे हैं तो इनको जनता के लिए कार्य करना पड़ेगा.
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SHIVANAND DWIVEDI
(Social, Scientific, and RTI activist)
Village KAITHA, Post  AMILIYA,
Police Station GARH, Tehsil  MANGAWAN,
District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117
Mob. +917869992139

(फर्जी मस्टर रोल) प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के नाम PMO PG Portal में गंगेव ब्लाक रीवा में फर्जी मस्टर रोल के सन्दर्भ में दर्ज शिकायत

नमस्कार साथियों!

      यह शिकायती पत्र प्रधानमंत्री जी भारत सरकार के नाम PMO PG Portal से दर्ज करवाया गया था जिसकी की जानकारी आपको यहाँ http://pgportal.gov.in/ViewStatusForm.aspx  से शिकायत नंबर फीड करके प्राप्त हो सकती है. यह पत्र भी लगभग रीवा जिले की सभी पंचायतों में (और विशेषकर गंगेव ब्लाक की पंचायतों में संभवतः मुख्य कार्यपालन अधिकारी की मदद से) फर्जी मस्टर रोल द्वारा मजदूरों के राशि की निकाशी के विषय में है....इस पर क्या कुछ हुआ आज तक कोई जानकारी उपलभ नहीं है. यद्यपि इसमें नीचे कुछ २० जून का दिनांक बताया जा रहा है जिसमे पंचायत विभाग मध्य प्रदेश शासन को दी गयी है... देखते हैं क्या होता है... कितना भारत बदला और कितना साईन हो रहा है वह सब Public Greivances Redressal System में प्रगति से ही समझ आ जायेगा.. बांकी तो कागजों में पिछले ६५ वर्ष के ऊपर से बहुत कुछ चल रहा है...

--शिवानन्द द्विवेदी (सामाजिक और वैज्ञानिक कार्यकर्ता)
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Status as on 11 Jul 2016
Registration Number:PMOPG/E/2016/0181821
Name Of Complainant:Shivanand Dwivedi
Date of Receipt:29 May 2016
Received by:Prime Ministers Office
Forwarded to:PS Panchayat Rural Dev
Officer name:us
Officer Designation:us
Contact Address:Mantralaya Bhopal
Grievance Description:To, Date: 29/05/2016 The Prime Minister of India, Place: REWA MP New Delhi, INDIA. Subject – Problems in the MGNREGA payments of the labor, in Gangev block of REWA district of Madhya Pradesh. The fraud muster rolls are created in the name of the job card holders and the money is withdrawn without the labor’s consent. Regional Banks of Rewa district, Janpad Panchayat CEOs, and Panchayat Sarpanch and secretary are all involved in these frauds. The MGNREGA labors are suffering. Sir/Madam, I would like to bring your kind attention to the problems of the MGNREGA payments in various panchayat in GANGEV block of the Rewa district MP. In KAITHA, HINAUTI, BANS, MADARI, PANGADI, LAURI, LOTANI, SEDAHA and other panchayats in GANGEV block the labor payment is not being given and fraud muster roll are created in the name of the MGNREGA job card holders. Most of the panchayat works are carried out using the JCB and machines. Several applications are given to the office of CEO Janpad Panchayat Gangev Mr. Pradeep Paul but no action has been taken. Applications/complaints has also been given to the CEO Jila Panchayat Rewa and collector Rewa but no action has been taken. IMPORTANT NOTES:- Until a comprehensive enquiry is made setting an independent team out side of the MP and preferably from New Delhi, all the MGNREGA fund must be frozen to the mentioned gram panchayats of the GANGEV block. ATTACHMENTS:- Please find the enclosed file in PDF format for the more detailed applications and information on the MGNREGA labor's payment problems and MGNREGA corruptions. Sincerely SHIVANAND DWIVEDI (Social, Scientific, and RTI activist) Village KAITHA, Post AMILIYA, Police Station GARH, Tehsil MANGAWAN, District REWA, Madhya Pradesh. PIN – 486117 Mob. +917869992139
Date of Action:20 Jun 2016

(MGNREGA) प्रधानमंत्री भारत सरकार के नाम PG Portal में रीवा जिले की मनरेगा भ्रष्ट्राचार के सन्दर्भ में दर्ज पत्र

नमस्कार साथियों!
    यह शिकायती पत्र जिला रीवा की मनरेगा के समस्यायों के विषय में और उसमे व्याप्त भ्रष्ट्राचार के सन्दर्भ में दिनांक 27 मई सन 2016 को दर्ज किया गया था. इसमें क्या कुछ हुआ कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. आप यह जानकारी यहाँ से प् सकते हैं : http://pgportal.gov.in/ViewStatusForm.aspx

-शिवानन्द द्विवेदी (सामाजिक कार्यकर्ता)


Status as on 11 Jul 2016
Registration Number:PMOPG/E/2016/0178207
Name Of Complainant:Shivanand Dwivedi
Date of Receipt:27 May 2016
Received by:Prime Ministers Office
Forwarded to:DoRD MP Govt.
Officer name:Principal Secretary
Officer Designation:Principal Secretary
Contact Address:Principal Secretary
Rural Development Department
Madhya Pradesh, Bhopal462001
Grievance Description:To, The Prime Minister of India New Delhi, INDIA. ----------------------- Subject – Corruptions in GANGEV block of Rewa district Madhya Pradesh Janpad CEO Mr. Pradeep paul doesn’t answer the public grievances and most of the time unavailable from his working place. MGNREGA corruptions in on high rising in Gangev Block. ----------------------- Sir, Please be notified that there are huge corruptions in MGNREGA in Gangev block in Rewa district. Please take immediate action in this regard and punish the guilty. Please find the enclosed file in PDF format herewith. --------------------------- SHIVANAND DWIVEDI (Social and RTI Activist) Village Kaitha Post AMiliya, PS Garh, Tehsil Mangawan, District REWA, Madhya Pradesh, PIN 486117
Date of Action:06 Jun 2016

Saturday, July 9, 2016

रीवा जिले के मनरेगा और अन्य पंचायती कार्यों में भ्रष्ट्राचार की लगेगी जनहित याचिका हाई कोर्ट जबलपुर में

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)
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नमस्कार साथियों! (कृपया मेरे ब्लॉग:
 http://igeist.blogspot.in/2016/07/758.html पर विजिट करें)

विषय कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक रीवा) में कपिलधारा कूप निर्माण में घोटाला, (7.58 लाख) सात लाख अन्ठावन हज़ार रुपये की राशि हज़म. 

(गंगेव ब्लाक, रीवा), थाना गढ़ जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत कैथा ग्राम पंचायत में कपिलधारा कूप निर्माण में भी भारी घोटाला प्रकाश में आया है. पंचायत में तीन कपिलधारा कूप निर्माण हेतु टी.एस. स्वीकृत किया गया था जिसमे अभी दो कूपों पर काम चल रहा था. दोनों कूपों की लागत सूचना के अधिकार एवं नरेगा की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी में क्रमशः 3.79 लाख और 3.79 लाख की बताई गयी थी.

कपिलधारा कूप निर्माण का कार्य मनरेगा के स्थान पर ठेके में 

 मनरेगा अधिनियम 2005 की नियमावली अंतर्गत मनरेगा एवं मस्टररोल द्वारा होने वाले इस कार्य को इसके विपरीत ठेके में करवाया गया जिसकी प्रति कूप ठेके की लागत ठेकेदार बंसपती साकेत निवासी कैथा ने 1.75  लाख बताई है. इस प्रकार दोनों कूप कुल साढ़े तीन लाख में बनकर बंधकर पूर्ण किये जाने थे. इस प्रकार सरपंच संत कुमार पटेल और सचिव अच्छेलाल पटेल को कुल चार लाख आठ हज़ार का इसमें फायदा होता.  परन्तु कुदरत ने भी इस कार्य को पूर्ण नहीं होने दिया और दोनों ही कूप अधूरे में ही धस गए. यह बात तब पता चली जब ठेकेदार बंसपति साकेत का पैसा फंस गया. इस सन्दर्भ में बंस पति को लेबर कोर्ट जाने की सलाह दी गयी. यह कपिलधारा कूप निर्माण उपेन्‍द्र कुमार पटेल परियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661911, तथा दूसरा कपिलधारा कूप निर्माण नीलेश कुमार / वंशपती पटेलपरियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661916 टी.एस. नं1587 है. यह दोनों हितग्राही कैथा पंचायत अंतर्गत ग्राम इटहा निवासी हैं.

वर्तमान स्थिति यह है की दोनों ही कूप पूरी तरह से बीच में ही ध्वस्त हो चुके हैं और ठेके में काम करने वाले लेबरों के भी पैसे फंस गए है. दोनों ही कूप निर्माण के कार्य मनरेगा के बजे ठेके से करवाए जा रहे थे और प्राप्त जानकारी के अनुसार दो तिहाई से अधिक पैसे का गबन कर लिया गया है.
कैथा सरपंच सचिव, एवं सी.ई.ओ. जनपद पंचायत गंगेव की मिली भगत

कैथा के कूप निर्माण घोटाले में वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल, सचिव अच्छेलाल पटेल सहित जनपद के भी अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत है. कूप निर्माण में घोटाले की शिकायत जनपद गंगेव में सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल के समक्ष लिखित में एवं सी.एम्. हेल्पलाइन में भी की गयी थी परन्तु इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी.

पूरे रीवा जिले के मनरेगा और अन्य पंचायती कार्यों का मामला जायेगा हाई कोर्ट जबलपुर –
        कार्यपालिका की हीलाहवाली से बात से साफ़ जाहिर है की मामले में लीपापोती कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास चल रहा है, परन्तु अब याचिकाकर्ताओं ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय जबलपुर जाने का विकल्प चुन लिया है और साथ में जनपद पंचायत गंगेव सहित पूरे रीवा जिले के मनरेगा की अनियमितताओं सहित अन्य पंचायती कार्यों में हुए फर्जीवाड़े जिनमे कि पंच-परमेश्वर के भी कार्य सामिल हैं सभी को जनहित याचिका के माध्यम से हाई कोर्ट में रखा जायेगा. यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी के प्रतिनिधित्व में अन्य सोशल एवं आर टी आई एक्टिविस्ट के साथ मिलकर लगाई जाएगी. जनहित याचिकायों में शामिल होने वाले अन्य सदस्यों में प्रत्येक जनपद से एक सामाजिक एवं आर टी आई कार्यकर्ता होगा जिससे उस ब्लाक की सभी समस्याओं को गंभीरता पूर्वक और पूरे साक्ष्य के साथ विडियो, फोटोग्राफ, अन्य जरूरी कागजातों सहित रखी जा सके. इस सन्दर्भ में रीवा जिले के किसी भी पंचायत या ब्लाक से किसी साथी को कोई भ्रष्ट्राचार और अनियमितता सम्बन्धी कोई भी स्टिंग, विडियो, फोटोग्राफ या कोई भी जानकारी साझा करनी है वह दिए गए मोबाइल नंबर – 07869992139 में संपर्क कर सकते हैं.

354A (354A, 294, 506, एवं 34) के आरोपी एवं भ्रष्ट सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल हटाने की माग 

महिला प्रताड़ना एवं महिला के इज्ज़त आबरू को तार-तार करने के प्रयाश का सह-आरोपी एवं वर्तमान कैथा पंचायत के सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल प्रभाव के साथ कैथा के सरपंच पद से हटाने की माग रीवा कलेक्टर राहुल जैन, आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् भोपाल, अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल सहित अध्यक्ष महोदय मानवाधिकार आयोग भोपाल तथा प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार से भी की गयी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी कार्यवाही चल रही है. ज्ञातव्य हो की कैथा पंचायत में मनरेगा, शौचालय, खेत-सड़क, खेत-तालाब, आदि  कार्यों में हो रहे पंचायती फर्जीवाड़े में अब तक कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गयी है जबकि कई जांचे हुई बताई जा रही हैं. यह भी बाते गया है की इन पंचायती कार्यों की अनियमितता सम्बन्धी फोटोग्राफ्स, विडियो, और अन्य जरूरी कागजात सबूत के तौर पर मौजूद हैं जिससे अपराध स्वयं सिद्ध हो जाता है.

कैथा की खेत-सड़क योजना “पंचायत भवन से सम्पति पटेल के घर तरफ” में भी फर्जीवाडा –

कैथा पंचायत अंतर्गत “सम्पति के घर से पंचायत भवन तक” बनने वाली खेत सड़क जिसमे की चौदह लाख बान्नवे हज़ार रूपये का टी.एस. होना बताया गया है, इस परियोजना में  मात्र चालीस-पैतालीस डम्फर मोरम ही मात्र डाली गयी है. इस कार्य में मशीनों और जे.सी.बी. का उपयोग किया गया था जो की मनरेगा के अधिनियम के विरुद्ध था. पंचायत के मजदूरों के नाम पर मस्टररोल बनाया गया जो की कभी कार्य में उपस्थित नहीं थे. इस प्रकार फर्जी जानकारी देकर मध्यांचल ग्रामीण बैंक शाखा गढ़ एवं जिला सहकारी बैंक मर्यादित शखा लालगांव में बैंक अकाउंट खुलवाकर राशि का फर्जी अंगूठे और हाश्ताक्षर से आहरण आकर लिया गया. यह सब जानकारी शिकायत के रूप में जिला कलेक्टर रीवा श्री राहुल जैन को दिनांक 24-05-2016 को आवेदन क्र. 1360 एवं 1361 में डी जा चुकी है परन्तु इस सबमे क्या हुआ अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. कैथा ग्राम पंचायत सहित सम्पूर्ण गंगेव ब्लाक की जनता अपने मौलिक और पंचायती अधिकारों की मांग और भ्रष्ट्राचार के आरोपियों पर कार्यवाही के लिए इंतज़ार में है.  

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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

Thursday, July 7, 2016

(रीवा, पंचायत) जिले की खेत-सड़क योजनायों में भारी घोटाला, मात्र खेत ही खेत सड़क कहीं नहीं, 25% राशि का भी कार्य नहीं, सब पंचायत से लेकर जिले तक में हज़म

दिनांक: 07/07/2016, स्थान: कैथा पंचायत, गंगेव ब्लाक, रीवा, म.प्र.
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विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक) में खेत सड़क योजना क्र. 1713004031/RC/22012034292432 जो की कुल १४ लाख ९२ हज़ार की लागत से बनाई जानी थी में मशीन एवं जे. सी. बी. से काम कराकर राशि हज़म. मनरेगा के मजदूरों के अधिकारों का हनन.

      (गढ़, रीवा), कैथा पंचायत में भ्रस्ट्राचार को उजागर करने की दिशा में हम आपको बता दें की एक और प्रकरण जिला रीवा के कलेक्टर श्री राहुल जैन को दिनांक 24-06-2016 को आवेदन क्र. 1361/24-06-2016 के माध्यम से दिया गया है जिस पर आज दिनांक तक कोई आर्यावाही नहीं हुई है.

      मामला कुछ इस प्रकार का है कि दिनांक 23  एवं 24 जून  2016 को कैथा पंचायत मे स्वीकृत खेत सड़क योजना क्र. 1713004031/RC/22012034292432 जिसका की स्वीकृत क्र. 1184/31/24, स्वीकृत दिनांक: 30/11/2015 है, एवं स्वीकृत राशि 14 लाख 92 हज़ार है, और जो कि पंचायत भवन से संपत्ति पटेल के घर तक लगभग एक किलोमीटर के आसपास की है, इस खेत सड़क का कार्य कैथा सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल द्वारा लगवाया गया था. उसी रात पहले छः चक्का वाले डम्फर क्र. MP17 G1461 से सड़क पर अवैध तरीके से घटिया गुणवत्ता की मोरम डाली गयी गयी और बाद में अगले दिन चौबीस तारीख की सुबह को ही जे.सी.बी. क्र. MP17 BA0135 लगाकर उस मोरम को पलसाया जा रहा था और जो भी कार्य इस खेत सड़क योजना में करवाया गया उसमे कुल लागत एक लाख रुपये से ज्यादा की नहीं हो सकती. इसी दरमयान कैथा गाँव के ही एक अन्य सामाजिक कार्यकर्ता शैलेन्द्र पटेल पिता श्री जगदीश पटेल से सूचना मिलते ही सामाजिक एवं आर.टी.आई. कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा डायल 100 में सूचना क्र. P16145002244 तथा P16145006840 दर्ज कराई गयी और पुलिस प्रशासन से माग की गयी की मनरेगा के कार्यों में प्रतिबंधित मशीनों को तत्काल जब्त किया जाए. यह सूचना डायल 100 के अतिरिक्त एस.डी.एम्.मनगवां तहसील श्री के.पी. पाण्डेय, तहसीलदार मनगवां श्री ए. के. सिंह, सहित से.ई.ओ. जिला पंचायत श्री नीलेश पारेख, एस.पी. रीवा श्री संजय कुमार एवं कलेक्टर जिला रीवा श्री राहुल जैन को भी दी गयी. एस.एम्.एस. भी संबंधितों को भेजा गया तथा मोबाइल फ़ोन पर भी कई बार सूचित किया गया. परन्तु किसी भी विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नही की गयी. उक्त ट्रक एवं जे.सी.बी. का नंबर तो नोट किया ही गया साथ ही विडियो भी बना लिया गया है और आवश्यकता पड़ने पर पेश कर दिया जाएगा.

जनपद एवं जिला पंचायत रीवा सहित सभी उच्चाधिकारियों की मिली भगत का संदेह -
      इस प्रकार आज लगभग तीन सप्ताह हो जाने पर भी दिनांक २४ जून २०१६ को कलेक्टर रीवा राहुल जैन सहित सभी पंचायती विभागों को दिए गए इस आवेदन में कोई कार्यवाही न होना तथा “३५४क” के आरोपी सरपंच संत कुमार पटेल के ऊपर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के वावजूद भी कार्यवाही न होना पंचायत एवं कलेक्ट्रेट की मिली भगत होने के संदेह को पैदा करता है. आखिर जब सब सबूतों सहित जानकारी संबधित विभागों को दे दी गयी तब अब तक मनरेगा के अनियमितता की शिकायत पर कार्यवाही क्यों नहीं की गयी? क्यों बार बार बताये जाने पर भी कलेक्टर, सी.ई.ओ. एवं एस.डी.एम. द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही और तत्काल मध्य प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 के तहत वर्तमान कैथा सरपंच एवं ३५४क के आरोपी संत कुमार पटेल को तत्काल उसके सरपंच पद से नहीं हटाया जा रहा है? क्यों रीवा पुलिस द्वारा तत्काल ३५४क के सह-आरोपी संत कुमार पटेल को हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश नहीं किया जा रहा है? और सबसे बड़ी बात तो यह है कि ३५४क के एक अन्य सह-आरोपी रुक्मणी पटेल पिता ददई पटेल निवासी इटहा को पुलिस द्वारा गिरिफ्तार कर सिरमौर न्यायालय में पेश किये जाने के बाद मजिस्ट्रेट ने गैर-जमानती धारा पर कैसे उसे इतने आसानी से जमानत पर रिहा कर दिया गया?
      इन सबसे तो यही जाहिर होता है की पूरे के पूरे प्रशासन की मिली भगत हो सकती है, और कार्यवाही में देरी मात्र इसी शक को और आगे बढाता है, और सरकारी कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है. यदि ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब आम जनता का विश्वास पूरी तरह से शासन-प्रशासन से उठ जाएगा और वह दिन दूर नहीं जब आम जनता क्रोध के आवेग मे आकर सरकारी न्याय प्रक्रिया को छोंड़कर कानून को अपने ही हाँथ में लेना प्रारम्भ कर देगी, और वह दिन हमारे इस लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण दिन होगा जब भारत के आम नागरिकों का विश्वास इस वर्तमान सरकारी व्यवस्था से पूरी तरह से उठेगा. सरकार प्रशासन से पूरी उम्मीद है कि वह इस मामले सहित अन्य सभी मामले में पूरी मुश्तैदी दिखाते हुए सभी आरोपियों के ऊपर न्याय संगत कार्यवाही करवाए और तत्काल मनरेगा की अनियमितताओं की उच्चस्तरीय टीम गठित कर जांच करवाए और हज़म किये गए जनता के एक-एक पैसे की रिकवरी कराये और दोषियों को सख्त से सख्त दंड दे.
            टीप – उपरोक्त सभी अधिकारियों को इस प्रकरण के विषय में बहुत पहले से जानकारी दी जा चुकी है लिखित, मौखिक, मोबाइल, whatsapp  तथा एस एम् एस से भी. लेकिन सभी अज्ञान बने बैठे हैं. भारत का दुर्भाग्य है. एवं भ्रष्ट्राचार की हदें पार की जा रही हैं.

 
Truck No. MP17 G1461 using Moram without Lease


बिना मिटटी डाले हुए रोड पर मोरम दाल दी गयी  

यहाँ भी जो ट्रक मोरम लाने के लिए उपयोग किया गया था
उसका ट्रक नंबर- MP 17, G 1461

बिना लीज की मोरम लता हुआ ट्रक 

बिना लीज की मोरम डालता हुआ ट्रक - कैथा पंचायत गंगेव ब्लाक रीवा म.प्र.

यदा कदा सड़क में डाली गयी मोरम - मोरम भी घटिया क्वालिटी की 

तस्वीर में कैथा गाँव के एक अन्य सामाजिक कार्यकर्त्ता शैलेन्द्र पटेल 



   
शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.
मोबाइल – 7869992139