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Thursday, July 7, 2016

(रीवा) रीवा की सैकड़ों पंचायतों में इंदिरा आवास योजना की गरीबों की राशि गलत अकाउंट बताकर हडपी जा रही, कलेक्टर मुख्यमंत्री तक शिकायतें पर कोई सुनवाई नहीं

              गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)



विषय – (रीवा) गंगेव ब्लाक के लोटनी पंचायत में इंदिरा आवास योजना में और भी फर्जीवाड़े. ऑडियो रिकॉर्डिंग कमिश्नर रीवा सहित एस.डी.एम. सिरमौर को भी भेजी गयी. मामला पहले से ही मानवाधिकार आयोग भोपाल में. 


(गंगेव जनपद, लोटनी पंचायत), जिला रीवा अंतर्गत गंगेव ब्लाक की लोटनी पंचायत में इंदिरा आवास योजना के हितग्राहियों की राशि निकासी के फर्जीवाड़े में कुछ और भी नाम सामने आये हैं. लोटनी निवासी रामलाल साकेत पिता कुमारे साकेत के अतिरिक्त लोटनी पंचायत के ग्राम कठमना निवासी बाबूलाल साकेत पिता धनपति साकेत एवं बुद्धसेन गौतम पिता भोला गौतम भी इस फर्जीवाड़े के शिकार हुए हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष २०१४-१५ में जनपद पंचायत गंगेव के कार्यालय में दर्ज नामों में उक्त दोनों हितग्राहियों के नाम भी दर्ज है जिनके नाम से जिला केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित शाखा लालगांव में गलत और फर्जी नाम से बैंक अकाउंट खोलकर इन हितग्राहियों की प्रथम किश्त की राशि पैतीस हज़ार रुपये हज़म कर ली गयी. इन हितग्राहियों को इसकी भनक तब लगी जब यह गंगेव कार्यालय में पुनः आवास योजना का आवेदन करने के लिए गए. जनपद कार्यालय में यह बताया गया की इन आवेदकों की इंदिरा आवास की प्रथम किश्त पहले ही निकाल ली गयी है. आवेदकों से प्राप्त जानकारी में यह भी बताया गया की उनके जिस नाम से पैसे की निकासी की गयी है उन नामों में किसी अन्य व्यक्ति की फोटो फीड की गयी है. और बैंक अकाउंट भी इनमे से किसी आवेदक का नही है. जब ये आवेदक जिला केंद्रीय सहकारी बैंक शाखा लालगांव इन बैंक अकाउंट की जानकारी लेने गए तो बैंक कर्मियों द्वारा अकाउंट की जानकारी देने से मना कर दिया गया.  
कैथा पंचायत के हितग्राही मुरलीधर पटेल की इंदिरा आवास की दूसरी किश्त मिली –
प्राप्त जानकारी के अनुसार मानवाधिकार आयोग सहित सी.एम. हेल्पलाइन आदि में शिकायत रखने तथा मीडिया के समक्ष मामला आने पर प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया और अभी हाल ही में दो दिन पूर्व कैथा पंचायत के इंदिरा आवास योजना के हितग्राही मुरलीधर पटेल को सूचना मिली की उसकी दूसरी किश्त पैतीस हज़ार रुपये उसके बैंक अकाउंट में डाल दी गयी है. इस प्रकार यदि ज्यादा बारिस नही हुई तो यह गरीब अब अपना अधूरा पड़ा टूटा फूटा मकान बनवा सकेगा.

रीवा जिले में आवास योजनायों को लेकर आर. टी. आई. दाखिल - 
अब देखना यह है की पूरे रीवा जिले में इंदिरा आवास योजना सहित अन्य आवास योजनायों में हुए इस फर्जीवाड़े में प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है. वैसे अभी हॉल ही में लगभग तीन सप्ताह पूर्व एक आर. टी. आई. आवेदन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा जिला पंचायत रीवा में लगाया गया है जिसमे समपूर्ण रीवा जिले में पिछले पांच वर्ष में इंदिरा आवास, मुख्यमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची ब्लाकवार एवं पंचायतवार मांगी गयी है. इसमें यह भी मांग की गयी है की इन आवास योजनायों की जानकारी किश्तवार भी देवें. इस प्रकार सूचना के अधिकार से प्राप्त होने वाली इस जानकारी से यह स्पष्ट हो जायेगा की सम्पूर्ण जिले में ऐसे कुल कितने और कहाँ कहाँ ऐसे हितग्राही हैं जिनके साथ आवास योजनायों को लेकर फर्जीवाडा किया गया है.

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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) गंगेव ब्लाक में भ्रष्ट्राचार का सिलसिला जारी, कैथा के कूप निर्माण में 7.58 लाख का घोटाला, जनपद से लेकर जिला पंचायत तक की मिली भगत

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)

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विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक रीवा) में कपिलधारा कूप निर्माण में घोटाला, (7.58 लाख) सात लाख अन्ठावन हज़ार रुपये की राशि हज़म. 


(गढ़, रीवा), थाना गढ़ जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत कैथा ग्राम पंचायत में कपिलधारा कूप निर्माण में भी भारी घोटाला प्रकाश में आया है. पंचायत में तीन कपिलधारा कूप निर्माण हेतु टी.एस. स्वीकृत किया गया था जिसमे अभी दो कूपों पर काम चल रहा था. दोनों कूपों की लागत सूचना के अधिकार एवं नरेगा की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी में क्रमशः 3.79 लाख और 3.79 लाख की बताई गयी थी.

कपिलधारा कूप निर्माण का कार्य मनरेगा के स्थान पर ठेके में

 मनरेगा अधिनियम २००५ के नियमावली अंतर्गत मनरेगा एवं मस्टरोल द्वारा होने वाले इस कार्य को ठेके में करवाया गया जिसकी प्रति कूप लागत ठेकेदार बंसपती साकेत निवासी कैथा ने 1.75  लाख बताई है. इस प्रकार दोनों कूप कुल साढ़े तीन लाख में बनकर बंधकर पूर्ण किये जाने थे. इस प्रकार सरपंच संत कुमार पटेल और सचिव अच्छेलाल पटेल को कुल चार लाख आठ हज़ार का इसमें फायदा होता.  परन्तु कुदरत ने भी इस कार्य को पूर्ण नहीं होने दिया और दोनों ही कूप अधूरे में ही धस गए. यह बात तब पता चली जब ठेकेदार बंसपति साकेत का पैसा फंस गया. इस सन्दर्भ में बंस पति को लेबर कोर्ट जाने की सलाह दी गयी. यह कपिलधारा कूप निर्माण “उपेन्‍द्र कुमार पटेल परियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661911, तथा दूसरा कपिलधारा कूप निर्माण “नीलेश कुमार / वंशपती पटेल” परियोजना क्र. 1713004031/WC/9993661916 टी.एस. नं. 1587 है. यह दोनों हितग्राही कैथा पंचायत अंतर्गत ग्राम इटहा निवासी हैं.

वर्तमान स्थिति यह है की दोनों ही कूप पूरी तरह से बीच में ही ध्वस्त हो चुके हैं और ठेके में काम करने वाले लेबरों के भी पैसे फंस गए है. दोनों ही कूप निर्माण के कार्य मनरेगा के बजे ठेके से करवाए जा रहे थे और प्राप्त जानकारी के अनुसार दो तिहाई से अधिक पैसे का गबन कर लिया गया है.
कैथा सरपंच सचिव, एवं सी.ई.ओ. जनपद पंचायत गंगेव की मिली भगत –

कैथा के कूप निर्माण घोटाले में वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल, सचिव अच्छेलाल पटेल सहित जनपद के भी अधिकारियों कर्मचारियों की मिली भगत है. कूप निर्माण में घोटाले की शिकायत जनपद गंगेव में सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल के समक्ष लिखित में एवं सी.एम्. हेल्पलाइन में भी की गयी थी परन्तु इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी.

३५४क (354A, 294, 506, एवं 34) के आरोपी एवं भ्रष्ट सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल हटाने की माग

महिला प्रताड़ना एवं महिला के इज्ज़त आबरू को तार-तार करने के प्रयाश का सह-आरोपी एवं वर्तमान कैथा पंचायत के सरपंच संत कुमार पटेल को तत्काल प्रभाव के साथ कैथा के सरपंच पद से हटाने की माग रीवा कलेक्टर राहुल जैन, आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद् भोपाल, अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्य प्रदेश शासन भोपाल सहित अध्यक्ष महोदय मानवाधिकार आयोग भोपाल तथा प्रधानमंत्री महोदय भारत सरकार से भी की गयी है. प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी कार्यवाही चल रही है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) कैथा सहित पूरे गंगेव ब्लाक में शौचालय के नाम पर फर्जीवाड़ा, सैकड़ों हितग्राहियों की 12000 रु. की राशि हज़म, कोई सुनवाई नहीं

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: कैथा पंचायत, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)
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विषय – कैथा पंचायत (गंगेव ब्लाक) में स्वच्छ भारत अभियान के तहत बन रहे शौचालय की सारी राशि सरपंच संत कुमार पटेल सचिव अच्छेलाल पटेल एवं सी.ई.ओ. गंगेव  प्रदीप पॉल द्वारा हज़म. शौचालयों के अधूरे निर्माण. पचासों हितग्राहियों की बारह हज़ार रुपये वाली प्रोत्साहन राशि लंबित. शौचालयों का घटिया निर्माण. गुणवत्ता निम्न दर्जे की.

भ्रष्ट्राचार की यात्रा का अगला पड़ाव – शौचालय निर्माण एवं स्वच्छ भारत अभियान -

(गढ़, रीवा), आईये आज हम आपको गंगेव ब्लाक एवं कैथा पंचायत में हो रहे असीमित भ्रष्ट्राचार की सैर कराने की दिशा में आगे का रुख करते है. पिछले प्रकरणों में आपने देखा की किस तरह महिला प्रताड़ना अंतर्गत “354क” का आरोपी कैथा सरपंच संत कुमार पटेल और उसके दो अन्य अपराधी साथी बड़े ही ठाट बाट के साथ थाना गढ़ क्षेत्र में मौज कर रहे है और पुलिस उनको फरार बता रही है. आपने यह भी देखा की “कैथा ग्राम पंचायत भवन से संपत्ति पटेल के घर तक” बन रही चौदह लाख बान्नवे हज़ार रुपये की खेत सड़क को अब तक मात्र खेत तक ही सीमित रखा गया है और सड़क कहीं दूर दूर तक नहीं दिखती. शायद इतना पैसा अकेले कैथा सरपंच सचिव तो न हज़म कर पाएंगे इसमें जनपद गंगेव के सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल का भी कुछ तो शेयर होना ही चाहिए. क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो भला इतनी लिखित शिकायतों एवं सूचनायों के बाद भी फर्जी मस्टररोल एवं जे.सी.बी. ट्रक पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई?
  
कैथा पंचायत में शौचालय निर्माण में भारी फर्जीवाडा –

मसलन आगे रुख करते हैं और कैथा के इन हितग्राहियों का जिक्र करते है. भद्रिका द्विवेदी पिता हरिहर द्विवेदी, सोमधर मिश्र पिता रामराज मिश्र, रामखेलावन द्विवेदी पिता लोकनाथ द्विवेदी, रामलल्लू पटेल, सम्पति पटेल, मुरलीधर पटेल आदि ऐसे कई नाम हैं जो मात्र कैथा पंचायत के कैथा ग्राम के ही बहुतों में से मात्र कुछ हैं. अभी दो अन्य गाँव इटहा एवं अकलसी भी कैथा पंचायत के अंतर्गत ही आते है जिनमे पचासों ऐसे नाम गिनाये जा सकते है जिनके घरों में या तो शौचालय बने ही नहीं, यदि बने हैं तो आधे अधूरे बने हैं और यदि पूरे भी हुए हैं तो वह बारह हज़ार रुपये की प्रोत्साहन राशि कैथा सरपंच सचिव एवं जनपद सी.ई.ओ. प्रदीप पॉल द्वारा हज़म कर ली गयी है.
      उक्त कई हितग्राहियों ने शौचालय निर्माण कर उसका फोटो लेकर नियत पप्रोफार्मा में साल भर पहले जनपद में भेज दिया है परन्तु आज तक उनके प्रोत्साहन राशि का कोई पता रता  नहीं है. शायद जनपद के कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि की ज्यादा जरूरत हो.

हरिजन आदिवासी बस्ती कैथा की दुर्दसाजब घर बनाने की जगह ही भू-अभिलेख में दर्ज नहीं तो भला शौचालय कहाँ बनेगा

वैसे हरिजन आदिवाशियों और गरीब तबके के किसानों की ग्रामों में क्या बात करना है. इनकी तो जिन्दगी जानवरों से भी बदतर होती है. भारत एवं मध्य प्रदेश सरकार की योजनायों का लाभ इनको मिलता नही दीख रहा. इनकी स्थिति आज से पचास साल पहले जैसी थी आज भी वैसी ही बनी हुई है. बस एफ.डी.एस एक्ट ने इनकी जिन्दगी को थोडा असं जरूर बना दिया है. यदि विश्वास न हो तो इनके घरों एवं बस्ती में जाकर देखा जा सकता है. इनमे इतना भी साहस नहीं रहता है कि यह बेचारे गरीब अपने अधिकारों को समझकर उसकी मांग कर सके, कहीं समूहों में एकता दिखा सके, कहीं यदि सरकारी विभागों में अपनी बातें रखना है तो एक साथ जाकर वहां पर अपनी बातें कह सकें, विभागों सरकारों पर दवाब बना सकें. यह एकता मात्र एक ही जगह पर दिखाते है कि यदि कहीं दारू मुर्गा की पार्टी हो तो सब बढिया एकत्रित होकर पीते पाते मिलेंगे. इनके अधिकारों के लिए पता नहीं क्यों हमारे जैसे पागल लोगों को ही हमेशा लड़ना पड़ता रहा है. इनके सामाजिक स्तर में सुधार मात्र इनकी जागरूकता एवं सिक्षा से ही संभव है. सरकारी विभाग तो सदैव से ही अशिक्षित एवं कमजोर का शोषण करते रहे हैं. कमजोर और शोषित वर्ग के लिए योजनायें मात्र कागजों तक ही सीमित होती हैं. बहरहाल हम चर्चा कर रहे थे इन गरीब हरिजन आदिवाशियों के अधिकारों की तो यह स्पष्ट है कि यदि कैथा ग्राम की नयी एवं पुरानी हरिजन आदिवासियों की बस्ती जो कि आज पचास साल से ऊपर से बसी है. अब तक न तो इनके रहने का कोई भू-स्वामित्व अधिकार बन पाया है, और जब पटवारी तहसीलदार ने आवादी ही सरकारी खसरे में नहीं दर्ज की तो भला शौचालय अथवा गृह निर्माण ये कहाँ करवाएंगे. इस प्रकार पंचायती रिकॉर्ड में तो भले ही इनके भी घरों में शौचालय दर्ज हो पर आज तक वास्तविक धरातल पर कहीं कुछ नहीं है जबकि कैथा पंचायत भी कलेक्टर रीवा द्वारा पहले ही खुले में शौच मुक्त बनाई जा चुकी होगी. क्यों न हो जितना जल्दी भारत खुले में शौच मुक्त होगा उतना ही पैसा भारत सरकार को बिल गेट्स, विश्व बैंक, एशियाई बैंक सहित सैकड़ों देसी विदेशी संगठनों से मिलेंगे. और भला यह पैसा हमारे किन नेताओं और अधिकारियों को तोड़ेगा? विरले ही होंगे जो मुफ्त की राशि न लेना चाहेंगे. 

टीप- हम आप सब को आमंत्रित करते हैं जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत कैथा ग्राम पंचायत में, आप आयें देखें कैसी है भारत के पंचायती राज की व्यवस्था. कैथा पंचायत भारत की पंचायती राज दुर्दशा का एक प्रोटोटाइप हो सकता है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) पूरे रीवा जिले में हरियाली प्रोजेक्ट वर्ष 2017-08 के नाम पर भारी घोटाला, न कोई पेंड़ न कोई हरियाली, सब कुछ मात्र कागजों में

दिनांक: 08/07/2016, स्थान: लोटनी पंचायत, गंगेव ब्लाक रीवा (म.प्र.)
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विषय – (रीवा) लोटनी पंचायत हरियाली प्रोजेक्ट को सरपंच द्वारा ही उजाड़ा जा रहा, पेंड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई - रक्षक ही बने भक्षक. आर टी आई के तहत सम्पूर्ण रीवा जिले में वाटरशेड के अंतर्गत पौधारोपण की माँगी गयी जानकारी.


(लोटनी पंचायत, गंगेव ब्लाक), वर्ष 2007-08 में उस समय म.प्र. के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा वाटरशेड परियोजना के अंतर्गत सम्पूर्ण रीवा जिले सहित पूरे प्रदेश में हरियाली प्रोजेक्ट अंतर्गत वृक्षारोपण का कार्य करवाया गया था. इसके लिए वाटरशेड समिति का गठन किया गया जिसके अंतर्गत कई उपयोगिता दल बनाये गए. सभी उपयोगिता दलों को हरियाली परियोजना अंतर्गत शासकीय अथवा निजी भूमि पर वृक्षारोपण का कार्य सौपा गया. इसी तारतम्य में गंगेव ब्लाक रीवा की लोटनी पंचायत में भी वाटरशेड समिति का गठन हुआ जिसका अध्यक्ष रामानंद पटेल को बनाया गया. रामानंद पटेल के वाटरशेड समिति के अंतर्गत छः उपयोगिता दलों का गठन हुआ जिसमे हरियाली प्रोजेक्ट अंतर्गत पौधारोपण का कार्य हुआ. वर्तमान में सम्पूर्ण लोटनी और सेदहा पंचायत में मात्र एक दिनेश सिंह का ही हरियाली प्रोजेक्ट देखने लायक है जिसमे दिनेश सिंह ने ख़ून पसीना लगाकर पाला पोसा और उसमे लगभग पांच सौ के ऊपर आमले के पेंड़ सहित सेधा, कहुआ, और जामुन के पेंड़  सैकड़ों एकड़ की शासकीय भूमि पर फैले हुए हैं. लेकिन वर्तमान लोटनी पंचायत के सरपंच राजराखन सिंह के द्वारा अवैध तरीके से इस हरियाली परियोजना के पेंड़ों को कटवाया जा कर नष्ट किया जा रहा है. इसकी शिकायत दिनेश सिंह के द्वारा एस.डी.एम .सिरमौर सहित वन मंडलाधिकारी जिला रीवा एवं कलेक्टर रीवा से की गयी है जिसमे अब तक मात्र कार्यवाही का आश्वासन भर मिल पाया है. अनुविभागीय अधिकारी सिरमौर श्री धर्मेन्द्र मिश्र द्वारा इस सम्बन्ध में अच्छा प्रयास किया गया और तत्काल उन्होंने संज्ञान लेते हुए तहसीलदार सिरमौर एवं सी.ई.ओ. गंगेव को भी लिखा जिसमे तत्काल जाँच कर प्रतिवेदन की मांग एस.डी.एम. द्वारा की गयी है. जिला पंचायत रीवा में वाटरशेड परियोजना के मुख्य श्री संजय सिंह ने जाँच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है जिसका की इंतज़ार किया जा रहा है.

सम्पूर्ण रीवा जिले में ही वाटरशेड प्रोजेक्ट के अंतर्गत हुए पौधारोपण में भारी घोटाला सामने आया है. जिले की लगभग कई पंचायतों में हुए पौधारोपण में ज्यादातर पैसा वाटरशेड समिति के पदाधिकारियों के द्वारा हज़म कर लिया गया, जो पौधे लगे भी थे वह भी सुरक्षा एवं देख रेख की कमी की वजह से उजड़ गए. और जो शेष बंचे और उपयोगिता दल के सदस्यों द्वारा पाले गए उनको लोटनी पंचायत जैसे रक्षक ही भक्षक बनकर उजाड़ रहे हैं. दिनेश सिंह लोटनी वाले प्रकरण में दिनेश सिंह के उपयोगिता दल को मात्र दस वर्षों में वाटरशेड समिति द्वारा पंद्रह हज़ार रुपये दिए गए थे जबकि प्रावधान इससे कई गुना ज्यादा का था.

सम्पूर्ण रीवा जिले में वाटरशेड परियोजना के अंतर्गत हुए वृक्षारोपण के सन्दर्भ में इसकी कुल लागत, कहाँ कहाँ वृक्षारोपण हुए, और इसकी वर्तमान अवस्था क्या है आदि विषयक एक सूचना का अधिकार भी सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा लगाया गया है जिसका की जवाब आना अभी बांकी है.

संलग्न - हरियाली प्रोजेक्ट के कटाई की फोटो. 
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

(रीवा) गंगेव ब्लाक की कैथा पंचायत में खेत-तालाब योजना में भ्रष्ट्राचार, ढाई लाख हज़म, कार्य मजदूरों के स्थान पर मशीनों एवं जे.सी.बी. द्वारा


दिनांक: 08/07/2016, स्थान - गंगेव ब्लाक, रीवा (म.प्र.)
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विषय:- (रीवा) कैथा पंचायत-गंगेव ब्लाक में खेत तालाब योजना में ढाई लाख रुपये की परियोजना में हीलाहवाली. कार्य मजदूरों के स्थान पर जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टर से. रीवा कलेक्टर, एस.डी.एम., सहित सी.ई.ओ. आदि से शिकायतों पर अब तक कोई सुनवाई नहीं.

  
      (गंगेव, कैथा पंचायत) गंगेव जनपद एवं रीवा जिला में भ्रष्ट्राचार यात्रा के अगले चरण में रुख करते है कैथा पंचायत के अंतर्गत बने खेत तालाब की तरफ. यहाँ पर दो खेत तालाब का प्रकरण सामने आया है जिसमे एक उम्मेद सिंह पिता चिंतामणि सिंह टी.एस. न. 706 एवं परियोजना क्रमांक 1713004031/WC/22012034295675 इस खेत तालाब योजना का तकनीकी स्वीकृति क्र. 706/31/2016 तथा वितीय स्वीकृति क्र. 01/31/2016 है. तकनीकी स्वीकृति दिनांक 29/05/2016 तथा कुल स्वीकृत राशि 1.25 लाख रुपये. इसी प्रकार एक अन्य खेत तालाब योजन्तार्गत कार्य मान सिंह पिता चिंतामणि सिंह के नाम पर हुआ है जिसका टी.एस. न. 705 एवं परियोजना क्र. 1713004031/WC/22012034295676 है तथा इस कार्य की तकनीकी स्वीकृत क्र. 705/31/2016 तथा वितीय स्वीकृति क्र. 02/31/2016 है. तकनीकी स्वीकृति दिनांक 29/05/2016 तथा कुल स्वीकृत राशि पहले दिए हुए खेत तालाब योजना के बराबर ही 1.25 लाख रुपये है. इस प्रकार दोनों टी. एस. न. 705 एवं 706 में कुल ढाई लाख रुपये की खपत बताई जा रही है. अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार इन दोनों कार्यों में चार फर्जी मस्टर रोल जारी हुए है जिनके क्रमांक. 1280, 1281, 1282, एवं 1283 है जिनमे प्रति मस्टर रोल में 61 के हिसाब से मजदूरों द्वारा कार्य हुआ बताया गया है. जबकि सच्चाई यह है की किसी भी मजदूर ने कार्य स्थल पर कोई काम नही किया है और फर्जी तरीके से मस्टररोल भरकर पैसे की निकासी की जा रही है. पूरा का पूरा कार्य जे.सी.बी. एवं ट्रेक्टर से हुआ है जिसके चस्मदीख गवाह मौजूद हैं, मशीनों की फोटो एवं विडियो भी मौजूद है.

पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत कलेक्टर रीवा, एस डी.एम. मनगवां से लेकर मुख्यमंत्री म.प्र. शासन भोपाल एवं प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली तक-

  इस पूरे प्रकरण को कई बार शिकायतों के माध्यम से लिखित, मोबाइल में एस.एम.एस., whatsapp, तथा ईमेल के भी माध्यम से रीवा के कलेक्टर एवं मनगवां तहसील के एस डी.एम. तथा से.ई.ओ. जिला पंचायत रीवा के पास भी रखा गया परन्तु आश्वासन के अतिरिक्त कोई कड़ी कार्यवाही अब तक नही हुई है. इस प्रकरण को सी.जी.नेट रेडियो में भी रिकॉर्ड करवाया गया है. साथ ही मजदूरों के हक़ को मारने सम्बन्धी शिकायत मानवाधिकार आयोग भोपाल से लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में मुख्या सचिव को भी बल्लभ भवन मंत्रालय भोपाल में राखी गयी है. अभी तक इन शिकायतों में मात्र कार्यवाही का ही आश्वासन मिला पाया है और दोषियों पर कोई भी दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गयी है. अभी कुछ दिनों पहले यह प्रकरण भारत सरकार के जन शिकायत निवारण विभाग के पी.जी. पोर्टल-पी.एम.ओ. के माध्यम से ऑनलाइन भी  दर्ज करके इसकी हार्ड कॉपी भी पी.एम.ओ. नई दिल्ली भेजी गयी है जिसमे पूरे गंगेव जनपद जिला रीवा में हो रहे मनरेगा में भ्रष्ट्राचार का बिन्दुवार हवाला देते हुए सभी तथ्यों के साथ भेजा गया जिसमे की दोषियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही की माग की गयी है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामजिक, एवं आर टी आई कार्यकर्ता)
ग्राम कैथा पोस्ट अमिलिया थाना गढ़
तहसील मनगवां जिला रीवा म. प्र.

मोबाइल – 7869992139

Sunday, June 26, 2016

मध्य प्रदेश शासन की सी.एम. हेल्पलाइन (Dial 181) की दुर्दशा - मुख्यमंत्री जी के नाम खुला पत्र

प्रति                                                दिनांक......................
श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय,                              स्थान ......................
मध्य प्रदेश शासन भोपाल ४६२००१

विषय- मध्य प्रदेश शासन द्वारा चलायी जा रही सी एम हेल्पलाइन की निष्क्रियता एवं असफलता के विषय में.

महोदय,

मैं शिवानन्द द्विवेदी पिता स्व. श्री बुद्धसेन द्विवेदी पता ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़, तहसील मनगवां जिला रीवा म०प्र० निवासी हूँ.

यह कि –

१)मेरे द्वारा मेरे मोबाइल नंबर ०७८६९९९२१३९ से सैकड़ों शिकायतें विभिन्न विभागों की निष्क्रियता, एवं जन समस्याओं को लेकर राखी गयीं जिसकी कि जानकारी विभाग वार अतिरिक्त संलग्न पृष्ठ में उपलब्ध करवाई जा रही है.
२) उक्त लगभग मात्र १०% सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों में ही संबंधितों का निराकरण किया गया और वह भी सतत रूप से कई महीनों तक शिकायतों के पीछे लगे रहने एवं चौथे लेवल तक पहुचने के बाद ही इन १०% शिकायतों का निराकरण विभागों द्वारा हो पाया. शेष लगभग ९०% सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों में कोई सार्थक एवं सही निराकरण नहीं दिया गया तथा इन शिकायतों को बड़े ही आसानी पूर्वक असत्य एवं निराधार साबित कर दिया गया. इस प्रकार इन शिकायतों को शिकायतकर्ता से बिना संपर्क किये उसकी बिना सहमती के ही उच्च स्तर से बंद कर दिया गया.
उच्च स्तर अथवा निम्न स्तर? यदि इस प्रकार से सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों को बिना सहमती बिना जांच के बंद कर दिया जाता है तो यह कैसा स्तर है ? यह उच्च स्तर नहीं बल्कि निम्न स्तर है. क्योंकि यह काम किसी देश अथवा प्रदेश की सरकार चलाने वाले स्तर का नहीं हो सकता बल्कि यह निम्न स्तर ही कहा जायेगा. यदि इसमें शिकायतकर्ता को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी फिर आखिर सी एम हेल्पलाइन की क्या विशेषता है और क्या आवश्यकता ही है?  
कृपया मेरे द्वारा मेरे मोबाइल नंबर ०७८६९९९२१३९ से दर्ज सभी सी एम हेल्पलाइन की शिकायतों का पुनः निरिक्षण तथा विश्लेषण किया जाय नहीं तो सी एम हेल्पलाइन को पूर्णतया बंद कर दिया जाय एवं उसके स्थान पर कोई अन्य सार्थक एवं जन सुलभ विकल्प पर विवहार किया जाये.
मेरे स्वयं के अनुभवों के आधार पर यह घोषणा करता हूँ की आपके द्वारा चलायी जा रही सी एम् हेल्पलाइन समय और पैसे की बर्वादी साबित हो रही है और शिकायतकर्ताओं के भी समय का अच्छा ख़ासा दुरूपयोग है. शिकायतकर्ता इस आशा में की उसकी समस्याओं का निराकरण किया जायेगा, इस आशय से सी एम् हेल्पलाइन में विश्वास करता है और प्रथम से लेकर चतुर्थ लेवल तक समय और ऊर्जा बर्वाद करता रहता है. अंत  में बिना किस जांच अथवा निराकरण के उसकी शिकायतों को बिना सहमती में बंद कर दिया जाता है. जो शिकायतें चौथे लेवल तक भी बंद नहीं होती उनमे फिर भी सही निराकरण नहीं दिया जाता और ना ही जाँच की जाती. क्योंकि ऐसी भी बहुत सी शिकायेतें हैं जो चौथे लेवल पर भी चल रही होती हैं और उनका सही निराकरण भी नहीं दिया जाता.
अतः या की मेरे मोबाइल नंबर से दर्ज सभी शिकायतों का शिकायातवार पुनः विश्लेषण करें और उनका सही निराकरण करवाएं अन्यथा मैं यही कहूँगा कि मध्य प्रदेश शासन की जन समस्या के निवारण के लिए चलायी जा रही तथाकथित सी एम् हेल्पलाइन मात्र एक असफलता शिद्ध हुई है. कृपया अन्य विकल्प पर विचार करने का कष्ट करें एवं मध्य प्रदेश शासन की सी एम हेल्पलाइन को अविलम्ब बंद करने पर विचार करें.

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शिवानन्द द्विवेदी