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Saturday, May 5, 2018

खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था, बारिश में सड़ गया गेंहूँ (मामला ज़िले के लौरी-गढ़, कोट, देवास आदि खरीदी केंद्रों का, तूफानी बारिश ने मचाई तबाही, बिना तैयारी के चलते सड़ गई अन्नदाता की कमाई)

दिनांक 06 मई 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी) 

   ज़िले के खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था और बिना पर्याप्त तैयारी के चलते पिछली तूफानी बारिस गेहूं के लिए कहर बनकर आई. जहां खरीदी केंद्रों में खुले में रखे हुए सैकड़ों टन गेहूं की बर्बादी हो गई. जानकारों द्वारा बताया गया की इतनी अधिक मात्रा में पानी खाया हुआ गेहूं अब कीड़ों मकोड़ों का ही आहार बनेगा. क्योंकि गेहूं बोरियों में भरा था इसलिए हवा और धूप भी न लग पाने से पूरा गेहूं कुछ ही महीनों में कीड़ों का आहार बनकर सड़ जाएगा.

 लौरी-गढ़ खरीदी केंद्र में नही थी समुचित व्यवस्था

   जाकर देखा गया तो पाया गया की गगेव ब्लॉक के लौरी-गढ़ खरीदी केंद्र में कोई भी समुचित व्यवस्था नही थी. पूरा का पूरा गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ था. उस रात हुई भीषण तूफानी बारिश ने पूरे गेहूं को बुरी तरह नुकसान पहुचाया जिसमे से आज भी आर्द्रता महसूस की जा सकती है. 

  कोट, देवास खरीदी केंद्र में भी गेहूं भींगा

    गढ़ सहकारी बैंक से संबंध खरीदी केंद्रों कोट और देवास में भी गेहूं खुले में पड़ा था और कोई समुचित व्यवस्था न हो पाने के कारण तूफानी बारिश में भीगा जिससे काफी नुकसान हुआ. ज्ञातव्य है की कोट और देवास खरीदी केंद्रों का जिम्मा बांस समिति के प्रबंधक के हाँथ है. 

  खरीदी केंद्रों की सुरक्षा राशि हज़म

     ऐसा नही है की गेहूं और धान की सुरक्षा के लिए खरीदी केंद्रों में कोई व्यवस्था ही नही होती, बल्कि सच्चाई तो यह है की इन खरीदी केंद्रों को दी जाने वाली सरकारी राशि को हज़म कर लिया जाता है. सभी खरीदी केंद्रों में नियमानुसार किसानों को बैठने की व्यवस्था से लेकर पानी, बिजली सभी के लिए राशि आवंटित होती है लेकिन समिति प्रबंधकों एवं खरीदी केंद्रों का जिम्मा लिए हुए कर्मचारियों द्वारा हजम कर लिया जाता है. खरीदी केंद्रों में टेंट, पन्नी, और तिरपाल आदि की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए जिसके लिए सरकार पहले से ही राशि आवंटित करती है लेकिन सारी राशि को हजम कर लिया जाता है. जिसका नतीज़ा यह होता है की जहां खरीदी केंद्रों पर आने आले किसान पानी तक के लिए मोहताज़ रहते हैं वहीं किसी प्राकृतिक विपदा की स्थिति में इन केंद्रों में गेहूं धान को ढकने के लिए पन्नी तक नही होती है तिरपाल तो दूर की बात है जिसका नतीजा पूरा धान गेहूं बाहर बारिश और मौसम की मार सहते हुए नष्ट हो जाता है.

    इस बात को लेकर ऊपरी अधिकारियों द्वारा कार्यवाही किया जाना चाहिए और संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित होनी चाहिए. गेहूं खरीद के पहले सभी तैयारियां पूर्ण की जानी चाहिए जिससे अन्नदाता के खून पसीने की कमाई नष्ट न हो पाए।

संलग्न - संलग्न तस्वीर में लौरी-गढ़, कोट और देवास आदि जगहों पर खुले में पड़ा हुआ गेहूं. मामला गढ़ सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बैंक अंतर्गत आने वाली सहकारी समितियों और खरीदी केंद्रों का.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा, मप्र

मोबाइल - 7869992139, 9589152587

Friday, May 4, 2018

बांस सहकारी समिति में किसानों पर अत्याचार (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत बांस सहकारी समिति के समिति प्रबंधक की मनमानी का)

दिनांक 05 मई 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

     ज़िले में एक बार फिर सहकारी समितियों में मनमानी हावी हो रही है. समिति प्रबंधकों ने किसानों के साथ लूट मचा कर रखी है. दिए गए खाद बीज से कहीं अधिक कीमत वशूली जा रही है जबकि प्रदेश का मुखिया किसानों के व्याज अनुदान की बात कर रहा है. किसान मारे मारे फिर रहे हैं सबको पर्ची दिखा रहे हैं लेकिन कोई समाधान नही किया जा रहा है.

  बांस समिति प्रबंधक महेंद्र त्रिपाठी डटे हैं 20 वर्ष से

   ज़िले के गढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक मर्यादित बैंक अंतर्गत 9 समितियां आती हैं जिनमे एक बांस सेवा सहकारी समिति भी सम्मिलित है. बांस सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक का कार्यभार स्थानीय निवासी महेंद्र त्रिपाठी देखते हैं. बताया गया है की महेंद्र त्रिपाठी बांस समिति में पिछले 20 से अधिक वर्षों से काबिज़ हैं जबकि नियमानुसार सभी समितियों के प्रबंधक एक स्थान पर मात्र 3 वर्ष तक रह सकते हैं. 3 वर्ष के बाद स्थानांतरण होना नियमावली में आता है. परंतु जोर जुगुत लगाकर महेंद्र त्रिपाठी बांस में निरंतर जमे हुए हैं और साथ ही रीवा सहकारिता विभाग की कृपा से इन्हें 6 अन्य समितियों का भी प्रभार दिया गया है जो समझ के परे है.

पडुआ ग्राम के किसान ने लगाया अधिक वशूली का आरोप

  बांस समिति अंतर्गत आने वाले पडुआ ग्राम के पुस्तैनी निवासी रामसिया पटेल पिता प्रह्लाद पटेल ने बताया की उसने 3 अक्टूबर 2017 को 2 बोरी डी ए पी रुपये 2174 में बांस समिति से लिया था जिसे 4 मई 2018 को भरने गया तो समिति प्रबंधक बांस महेंद्र त्रिपाठी ने 2841 रुपये वसूल लिए. 

   पीड़ित रामसिया पटेल ने बताया की इससे बेहतर तो यही था की वह बाजार से ही खाद ले लेता तो इतना लंबा चूना नही लगता. रामसिया पटेल ने आगे बताया की हमारी फसल पूरी इस शूखे में नष्ट हो चुकी है और कोई उपज भी नही हुई साथ ही जबरदस्त घाटा भी लगा है ऐसे में समितियों की लूटाई से किसान और त्रस्त हो जाएगा और आत्महत्या करने पर मजबूर होगा. किसानों ने बताया की एक तरफ मुख्यमंत्री कर्ज़ में व्याज माफी की बात कर रहे हैं और साथ ही मात्र 50 प्रतिशत भरने की बात कर रहे हैं लेकिन समितियां हमसे अधिक वशूली कर रही हैं. पीड़ित रामसिया ने इस पर समिति प्रबंधक के ऊपर कार्यवाही की माग की है.

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें पीड़ित किसान रामसिया पटेल पिता प्रह्लाद पटेल निवासी ग्राम पडुआ के 2 बोरी डी ए पी की 2174 की रशीद साथ ही ज्यादा वशूली गयी राशि 2841 रुपये की रशीद दिनांक 4 मई 2018. पीड़ित रामसिया पटेल की फ़ोटो भी संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

7869992139, 9589152587