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Sunday, November 18, 2018

पैकन गांव, मैरहा, तिवरिगवां-मनबोदसिंह सहित देवतालाब क्षेत्र में मात्र 3 दिनों में बदले गए आधा दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर (मामला ज़िले के मऊगंज बिजली डिवीजन अन्तर्गत देवतालाब डीसी में पैकन गांव एवं तिवरिगवां-मनबोदसिंह ग्राम का जहां पर 25 केवी एवं 63 केवी के कई जले ट्रांसफार्मर बदले गए, उच्चस्तर तक रखी गई थी बात, मीडिया में आने से भी बना था दबाब, एई ने फ़ोन पर दी जानकारी)

दिनाँक 18 नवंबर 2018, स्थान - मऊगंज रीवा मप्र

   (शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

     ज़िले के मऊगंज बिजली डिवीजन में सैकड़ों फैल ट्रांसफार्मर की समाचार अभी पिछले दिनों मीडिया में छाई हुई थी. ज़िले एवं प्रदेश की मीडिया ने जनता के हित की इस समाचार को काफी ढंग से छापा था साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा बिजली विभाग के चीफ इंजीनियर के एल वर्मा, जबलपुर डिस्कोम सीएमडी, एवं प्रिंसिपल सेक्रेटरी इंद्र केशरी के पास भी बात पहुचा दी गई थी.

   मात्र दो दिन के भीतर बदले 4 ट्रांसफार्मर

   इस बीच देवतालाब सहायक अभियंता दिनेश पॉल द्वारा अपने नए मोबाइल नंबर से जानकारी दी गई है की मैरहा 875 में रामटहल पटेल एवं भूपति पटेल के घर के पास 25 केवीए के जले हुए ट्रांसफार्मर बदले जाने के साथ ही पिछले दो दिन में  तिवरीगवां-मनबोदसिंह में रामाश्रय पटेल के घर के पास वाला 25 केवीए एवं साथ ही पैकन गांव में ठाकुरान बस्ती में जला 63 केवीए का ट्रांसफार्मर भी बदला दिया गया है.

ग्रामीणों ने ट्रांसफार्मर बदले जाने की पुष्टि की

   इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा जब ग्रामीणों से जानकारी चाही गई तो रामटहल, भूपति, भाग्योदय सिंह एवं रामाश्रय पटेल द्वारा बताया गया की उनका 25 केवीए एवं 63 केवीए के चारों ट्रांसफ़ॉर्मर बदल दिए गए हैं और बिजली की कोई समस्या नही है. सभी कृषकों ने प्रसन्नता जाहिर की है. साथ ही मीडिया एवं सामाजिक प्रयाशों की प्रसंसा की है. बताया की आज जब हमारे जन प्रतिनिधि समस्याओं का समाधान नही करवा रहे और वोट लेकर ओट में छिप जाते हैं और पांच साल दिखाई नही देते ऐसे में मीडिया और सामाजिक प्रयाश हमारे लिए वरदान बन कर आते हैं.

  पैकन गांव, खर्रा, नौढिया 4 ग्रामों के बदले आधा दर्जन से अधिक फेल ट्रांसफार्मर

   देवतालाब के सहायक बिजली अभियंता दिनेश पॉल द्वारा जानकारी दी गई की पैकन गांव में 63 केवीए के ट्रांसफार्मर सहित खर्रा, नौढिया 4, मैरहा 875 आदि ग्रामों के 6 ट्रांसफार्मर पिछले एक सप्ताह के भीतर बदल दिए गए हैं. सहायक अभियंता दिनेश पॉल का ऑफिसियल मोबाइल गुम हो जाने के कारण संपर्क नही हो पाया था जिसकी वजह से किसानों और उपभोक्ताओं में काफी रोष उत्पन्न हुआ था. अब नया मोबाइल नंबर मिल जाने से सहायक अभियंता से संपर्क हो पा रहा है और किसानों की समस्या सुनी जा रही हैं. इस बीच सहायक बिजली अभियंता देवतालाब दिनेश पॉल से चर्चा में उनके द्वारा जानकारी दी गई की विभाग में इस समय ट्रांसफार्मर उपलब्ध हैं और सभी जले ट्रांसफार्मर बदलने के कार्य प्रगति पर हैं. 

  देबतालब एई क्षेत्र में अभी भी फेल हैं दर्जन भर अन्य ट्रांसफार्मर 

     देवतालाब एई द्वारा बताया गया की पुराने जो भी जले हुए ट्रांसफार्मर थे संबल योजना आने के बाद लगभग बदल दिए गए हैं जबकि अभी पिछले कुछ सप्ताह में लगभग 15 तक ट्रांसफार्मर पुनः जलने की खबर आ रही थी जिन्हें उपलब्धता के आधार पर बदला  जा रहा है. बताया गया की देवतालाब सहायक अभियंता कार्यालय में मात्र एक ही गाड़ी है जो सतना स्टोर ट्रांसफार्मर लेने जाती है जिंसमे सभी ट्रांसफार्मर एक साथ नही आ पाते. कभी कभी ऐसा भी होता है की जिस क्षमता का ट्रांसफार्मर चाहिए होता है स्टोर में उपलब्ध भी नही होता अतः इंतज़ार करना पड़ता है. 

  पैकन गांव में जल्द लगेगी 10 खंभों की जली केबल 

      देवतालाब एई द्वारा बताया गया कि  पैकन गांव में लगभग 10 खंभों के बीच की जली हुई केबल बदलने के लिए ठेकेदार को पिछले हफ्ते ही भेजा गया था लेकिन ग्रामीणों द्वारा खंभों के बीचोंबीच रखे हुए पेड़ों को न काटने की वजह से केबल नही लगाई जा सकी थी. 

संलग्न - संलग्न पैकन गांव में ट्रांसफार्मर बदले जाने की प्रक्रिया का दृश्य है कृपया अवलोकन करें.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Friday, November 16, 2018

मऊगंज बिजली डिवीज़न में फैल हैं सैकड़ों ट्रांसफार्मर, उपभोक्ता परेशान (मामला ज़िले के मऊगंज बिजली डिवीज़न का जिंसमे संबल योजना के बाद भी फैल पड़े हैं सैकड़ों ट्रांसफार्मर, मऊगंज डिविज़नल इंजीनियर परस्ते एवं देवतालाब एई दिनेश पॉल की चल रही मनमानी, आम जनता परेशान फ़ोन तक रिसीव नही करते)

दिनाँक 16 नवंबर 2018, स्थान - मऊगंज रीवा मप्र

(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

   यद्यपि मप्र सरकार की संबल योजना एवं बिजली बिल माफी स्कीम के तहत प्रदेश सरकार ने काफी हद तक आम जनता और उपभोक्ताओं को राहत देने का प्रयास किया लेकिन कई जगहों पर इन योनाओं को लेकर बिजली विभाग गंभीर नही है. 

मऊगंज डिवीज़न में फैल हैं सैकड़ों ट्रांसफार्मर

  सूत्रों से प्राप्त विभागीय जानकारी के अनुसार ज़िले के मऊगंज बिजली डिवीज़न में अभी भी सैकड़ों ट्रांसफार्मर ऐसे हैं जो महीनों से फैल हैं जिन्हें बदला नही जा सका है. देवतालाब विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत ही अभी दर्ज़नों ट्रांसफार्मर फैल जले पड़े हैं जिन्हें बदलना अनिवार्य है लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अब तक बदले नही गए जिससे आम जनता और उपभोक्ताओं सहित किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

अकाल में अन्नदाता की सबसे बड़ी दुर्दशा

   आम उपभोक्ताओं के साथ साथ सबसे अधिक समस्या किसानों को हो रही है. खरीफ वर्ष 2018 में धान की कटाई के बाद परती पड़ चुके खेतों को उठाने के लिए सिंचाई के लिए बिजली की आवश्यकता है, साथ ही जोत दिए गए खेतों में भी पलेवा लगाने वास्ते बिजली की जरूरत है लेकिन जले हुए ट्रांसफार्मर के कारण कुछ नही हो पा रहा जिससे एकबार फिर किसान के पास आत्महत्या के अतिरिक्त कोई दूसरा चारा नही बचेगा.

किसानों के वाहन खर्च में बुलाते हैं अधिकारी

   देवतालाब सहायक अभियंता अन्तर्गत मैरहा 875, तिवारीगवां-मनबोदसिंह  एवं पैकन गांव आदि ग्रामों के किसानों भूपति पटेल, रामस्वरूप पटेल, भाग्योदय सिंह आदि किसानों ने बताया की असिस्टेंट इंजीनियर देवतालाब दिनेश पॉल द्वारा कहा गया की ट्रांसफार्मर ले जाने के लिए वाहन नही है अतः अपने अपने ट्रेक्टर लेकर आओ तब ट्रांसफार्मर दिया जाएगा. जब कुछ किसान ट्रेक्टर लेकर बिजली कार्यालय गए तो सहायक अभियंता दिनेश पॉल अपना आधिकारिक मोबाइल स्विच ऑफ करके भाग गया. इसके बाद किसानों ने मऊगंज डिविजनल इंजीनियर परस्ते से भी संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन परस्ते ने मोबाइल कॉल ही रिसीव नही किया जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है. किसानों का कहना था की हज़ारों रुपये का तेल खर्चा करके ट्रेक्टर लेकर बिजली कार्यालय ट्रांसफार्मर देने के लिए बुलाया लेकिन ट्रांसफार्मर नही दिया.

  मऊगंज बिजली विभाग के अधिकारी कर रहे मनमानी

   राष्ट्रीय किसान संगठन मऊगंज के पदाधिकारी भाग्योदय सिंह एवं अन्य ग्रामीणों द्वारा बताया गया की इसके पहले भी डिवीज़न में बिजली की समस्याओं को लेकर उनके संगठन द्वारा बिजली विभाग मऊगंज को ज्ञापन सौंपा गया था जिंसमे उन्होंने डिवीज़न में फैल पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने से लेकर केबल बदलने, बिजली बिल ठीक करने, 4 हॉर्स पावर के कनेक्शन को तीन हॉर्स पावर कर ठीक करने और अन्य कई मामलों को लेकर सौंपे गए ज्ञापन में मऊगंज डिविज़नल इंजीनियर परस्ते द्वारा लिखित आश्वासन देने के बाद भी कोई कार्यवाही अब तक नही की गई है.

मउगंज बिजली अधिकारी काम के बदले चाहते हैं पैसा

   किसानों और मऊगंज के उपभोक्ताओं का कहना था की यह बिजली अधिकारी चाहते हैं की उन्हें कुछ चढ़ोत्तरी दिया जाए और इसी अपेक्षा में आवश्यक कार्य को भी लटका कर रखते हैं. सभी ग्रामीणों सहित राष्ट्रीय किसान संगठन के कार्यकर्ताओं ने मऊगंज डीई परस्ते एवं देवतालाब एई दिनेश पॉल पर असहयोग एवं घूंसखोरी का आरोप लगाते हुए इन्हें हटाये जाने की माग की है.

संलग्न - मऊगंज बिजली डिवीज़न अन्तर्गत देवतालाब एई और अन्य जगहों में फैल सैकड़ों ट्रांसफार्मर में से पैकन गांव में 63 केवीए का जला ट्रांसफार्मर और 10 पोल की जली केबल के पास एकत्रित किसान और अन्य ग्रामीण उपभोक्ता.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Tuesday, August 14, 2018

केदारनाथ कॉलेज मऊगंज में कॉलेज प्रबंधन ने छात्र का बीए में एडमिशन रोंका (मामला ज़िले के मऊगंज अन्तर्गत केदारनाथ शासकीय कॉलेज का जिंसमे छात्र अरविंद तिवारी का कैरियर रंजिसन किया जा रहा बर्बाद, फॉर्म फीड न होने से छात्र दाखिले से हुआ वंचित)

दिनाँक 14 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के मऊगंज अन्तर्गत शासकीय केदारनाथ कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में दाखिले में धांधली का मामला प्रकाश में आया है।

   वहीं के एक छात्र अरविंद तिवारी द्वारा बताया गया कि उसने बीए प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए फॉर्म भरा था लेकिन रंजिसन कुछ लोगों के षड्यंत्र से उसका फॉर्म वहां के प्राचार्य प्रभारी एवं अन्य बाबुओ द्वारा दबा दिया गया जिससे 9 अगस्त की अंतिम एडमिशन लिस्ट में उसका नाम ही नही आ सका। यद्यपि छात्र द्वारा बताया गया है कि उसके मार्क्स 67% थे जो काफी ठीक थे और आर्ट्स में एडमिशन आसानी से मिल जाता लेकिन उसके परिवार से रंजिश रखने वाले कुछ लोगों ने कॉलेज प्रशासन से मिलकर षड्यंत्र किया और उसके फॉर्म भरे जाने के बाद भी उसका कागज़ात दबा दिया गया और 9 अगस्त को अंतिम ऑनलाइन फीडिंग के बाद ही उसका फॉर्म बाहर निकाला जिससे उसका नाम जोड़े जाने में अब दिक्कत आ रही है। यद्यपि छात्र ने जानकारी दी है कि कॉलेज के एडमिशन रजिस्टर में उसकी एंट्री 340 नंबर पर है।

 एडमिशन डिपार्टमेंट ने बताया प्रयास जारी हैं

  जब इस विषय मे छात्र थक हारकर सामाजिक कार्यकर्ता से संपर्क किया तो वहां के एडमिशन विभाग के आलोक कुमार राय से संपर्क कर जानकारी चाही गई तो उनके द्वारा किसी मैडम से बात कराई गई जिनके द्वारा अपने विभाग की गलती स्वीकार की गयी।उन्होंने बताया कि यह सब हमारे ही विभाग के कुछ कर्मचारियों की गलती की वजह से ऐसा हुआ है। कुछ कर्मचारियों का हवाला देते हुए मैडम द्वारा बताया गया कि छात्र अरविंद तिवारी का फॉर्म कहीं दबा दिया गया था और उसे दिनाँक 9 अगस्त को अंतिम डेट के बाद उन्हें सौंपा गया है जिसको भोपाल केंद्र से ही ऑनलाइन डेट पूरी हो जाने के बाद फीड नही किया जा सका अतः उन्होंने निक आईटी सेंटर भोपाल से संपर्क किया है और उनके द्वारा छात्र का फॉर्म ऑनलाइन फीड करने के प्रयास किये जा रहे हैं जिससे छात्र का यह वर्ष बर्बाद न हो।

     इसी प्रकार एक और भी केस का भी उस मैडम द्वारा हवाला दिया गया और बताया गया कि उनके केदारनाथ कॉलेज मऊगंज में कोई कंप्यूटर ऑपरेटर न होने से स्थिति काफी संकटपूर्ण बनी रहती है। किसी ऑपरेटर द्वारा एक अन्य भी छोटी गलती कर दी गई है जिंसमे उसके द्वारा फीस भरते समय 1200 रुपये के स्थान पर 12 हज़ार रुपये भर देने के कारण पूरा कॉलेज और साथ ही वह छात्र भी परेशान है।

छात्र के शिक्षा प्राप्ति के मूलभूत मानवाधिकार का है हनन 

    यद्यपि चाहे जो भी स्थिति हो परंतु जिन कारणों से छात्र अरविंद तिवारी का बीए प्रथम वर्ष में एडमिशन नही हो पा रहा है और उसका फॉर्म ऑनलाइन नही फीड हो पाया है उसके लिए केदारनाथ कॉलेज प्रबंधन मऊगंज सीधे जिम्मेदार है और हर हाल में कॉलेज प्रबंधन को अपनी गलती सुधारकर उस छात्र को एडमिशन दिया जाना चाहिए जिससे इसके कैरियर को बचाया जा सके साथ ही अरविंद तिवारी का यह वर्ष भी जाया न हो। 

    निश्चित ही यह मानवाधिकार हनन की समस्या है जिसके लिए कॉलेज प्रबंधन सीधे कटघरे पर खड़ा होगा।

संलग्न - संलग्न तस्वीर में देखें छात्र अरविंद तिवारी की फ़ोटो एवं उसके एडमिशन सम्बन्धी अन्य कागज़ात।

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Wednesday, July 18, 2018

न्यायालय के आदेश के बाद भी सरहंगई पूर्वक पैतृक संपत्ति को कब्जाने का प्रयाश (मामला ज़िले के मऊगंज तहसील अन्तर्गत ग्राम खुजवा सुअरहा का जहाँ भूषण सिंह भुवनेश्वर सिंह वगैरह के द्वारा सरहंगई पूर्वक पीड़ित की पैतृक जमीन को अवैध कब्जा करने का प्रयाश किया जा रहा)

दिनांक 18 जुलाई 2018, स्थान - लौर थाना, मऊगंज, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

        ज़िले के मऊगंज तहसील एवं लौर थाना अन्तर्गत खुजवा सुअरहा ग्राम में आवेदक पीड़ित रमाप्रताप सिंह पिता मुनेंद्र सिंह भूमिस्वामी 13 किता 9 एकड़ 14 डिसमिल को वहीं के निवासी भूषण सिंह भुवनेश्वर सिंह वगैरह द्वारा जबरन पैतृक संपत्ति को कब्जाने, धमकी देने, अवैध अतिक्रमण करने का मामला प्रकाश में आया है.

        रमाप्रताप सिंह पिता मुनेंद्र सिंह द्वारा जानकारी दी गई की उनकी माता स्व. गौरी देवी अपने पिता श्रीमहादेव सिंह की इकलौती संतान थीं. महादेव सिंह 4 भाई थे जिंसमे उनके नाम एक चौथाई हिस्सा आया था. महादेव सिंह की मृत्यु उपरांत उनकी सारी जायदाद उनकी इकलौती बेटी गौरी देवी के नाम नामान्तरित हुई जिसके बारिस गौरी देवी के एकमात्र सुपुत्र रमा प्रताप सिंह बने. अब वर्तमान में सम्पूर्ण 13 किता जमीन जिसका रकबा 9 एकड़ 14 डिसमिल है इसके बारिस एवं हकदार रमा प्रताप सिंह हैं जिनके नाम पर राजस्व विभाग की ऋण पुस्तिका, बी वन और अन्य समस्त दस्तावेज मौजूद हैं. लेकिन पीड़ित रमा प्रताप एवं मुनेंद्र सिंह द्वारा बताया गया की विरोधी भूषण सिंह भुवनेश्वर वहैरह द्वारा तहसीलदार तहसील मऊगंज, सिविल न्यायालय से जमीनी मुकदमा हारने के बाद भी जबरन सरहंगई पूर्वक पीड़ित रमा प्रताप की उक्त 13 किता जमीन रकबा 9 एकड़ 14 डिसमिल कब्जाने का प्रयाश किया जा रहा है. इस विषय में पीड़ित द्वारा जानकारी दी गई की वर्तमान समय पर स्वत्व एवं अधिपत्य भी पीड़ित के नाम पर ही है जिसका सिविल कोर्ट मऊगंज द्वारा एक बार पुनः स्थायी निषेधाज्ञा रमा प्रताप सिंह पिता मुनेंद्र सिंह के पक्ष में ही दिया गया है जिस पर मऊगंज सिविल कोर्ट ने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में लेख किया है की भूषण सिंह वगैरह द्वारा किसी प्रकार से पीड़ित की ग्राम खुजवा सुअरहा जनरल नंबर 201 के स्वत्व एवं अधिपत्य की जमीन खसरा क्र. 40/1, 42/2, 69, 79, 111, 156, 166, 167, 169, 214, 220, 271, 269 हल्का पटवारी घोरहा 5, सर्किल देवतालाब मऊगंज में कब्जा करने का प्रयाश न किया जाए अन्यथा कानूनी कार्यवाही की जाएगी. भूषण सिंह वगैरह ने भी मामला अपने तरफ से एक फ़र्ज़ी वसीयत के आधार पर मामला तहसीलदार न्यायालय से लेकर सिविल न्यायालय मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी तक रखा था जिस पर क्रमवार भूषण सिंह भुवनेश्वर सिंह वगैरह मुकदमा हार चुके हैं और फैसला रमा प्रताप सिंह पिता मुनेंद्र सिंह के पक्ष में आ चुका है. कोर्ट ने भूषण सिंह वगैरह की मनगढंत वसीयत को ही फ़र्ज़ी घोषित कर दिया और इस प्रकार हर न्यायालय से भूषण सिंह वगैरह मात खा चुके हैं लेकिन फिर भी पीड़ित रमा प्रताप सिंह को बेबजह परेशान करते रहते हैं. 

पीड़ित रमा प्रताप सिंह को सिविल कोर्ट से भी मिल चुकी है दीवानी स्थायी निषेधाज्ञा 

    सिविल कोर्ट में हारने के बाद भी जब भूषण सिंह वगैरह जबरन पुनः रमा प्रताप सिंह की स्वत्व एवं अधिपत्य की उक्त जमीन पर दखलंदाजी करने लगे तो पीड़ित रमा प्रताप एवं उनके परिवार द्वारा एकबार पुनः सिविल कोर्ट की शरण ली गई जिंसमे स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दीवानी दावा दायर किया गया. जिस पर दिनांक 18/04/2016 को पीड़ित रमा प्रताप सिंह के नाम पर स्थायी निषेधाज्ञा सिविल न्यायालय द्वारा पीड़ित के पक्ष में देते हुए आदेश जारी किया गया की पीड़ित के नाम पर जो कुल 13 किता जमीन जिसका रकबा 9 एकड़ 14 डिसमिल ग्राम खुजवा सुअरहा जनरल नंबर 201, हल्का पटवारी घोरहा क्र. 5  ज़िला रीवा में स्थित है इस प्रकरण के निराकरण तक प्रतिवादी भूषण सिंह भुवनेश्वर सिंह वगैरह न तो स्वयं एवं न ही किसी अन्य के माध्यम से किसी भी प्रकार से हस्तक्षेप न करें.

   परंतु लगातार सरहंगई पूर्वक जिस प्रकार से भूषण सिंह भुवनेश्वर सिंह वगैरह द्वारा पीड़ित रमा प्रताप सिंह एवं उनके परिवार को परेशान कर पीड़ित के स्वत्व एवं अधिपत्य की जमीन को सरहंगई पूर्वक हड़पने का प्रयाश किया जा रहा है इसके विषय में पीड़ित द्वारा उसके पक्ष में न्यायालय के आदेश संबंधित जानकारी थाना प्रभारी लौर को दिनांक 9/7/16, दिनांक 18/7/2017 शिकायत क्रमांक 2654 के माध्यम से ज़िला कलेक्टर रीवा एवं पुलिश अधीक्षक रीवा, दिनांक 27/01/2018 को न्यायालय नायाब तहसीलदार देवतालाब को भी सूचित किया गया है. जिस पर दिनांक 27/01/2018 को न्यायालय नायाब तहसीलदार द्वारा आदेशित किया गया की सिविल कोर्ट का पीड़ित के पक्ष में दीवानी स्थायी निषेधाज्ञा का निर्णय ही सर्वमान्य है.

   फिर भी उपरोक्त आदेशों एवं न्यायालयीन निर्देशों के वावजूद भी सरहंगों द्वारा निरन्तर पीड़ित रमा प्रताप सिंह एवं उनके परिवार को धमकी दी जा रही है और साथ ही उनके स्वत्व एवं आधिपत्य की जमीन को कब्जाने का प्रयास किया जाता रहा है. जिस पर पीड़ित ने मौके पर पुलिश सहायता की माग की है.

संलग्न - संलग्न दस्तावेजों में सिविल न्यायालय मऊगंज से दीवानी स्थायी निषेधाज्ञा की प्रति, न्यायालय नायाब तहसीलदार की स्थायी निषेधाज्ञा को मान्य करने वाली टीप, लौर थाना प्रभारी, कलेक्टर रीवा, एसपी रीवा को पीड़ित द्वारा दिए शिकायत की प्रति सहित पीड़ित के पिता मुनेंद्र सिंह की फ़ोटो भी संलग्न है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Saturday, June 9, 2018

5 साल से अधूरी पड़ी पनगड़ी पीएम सड़क पर एक और जांच (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अंतर्गत आने वाले भठवा से पनगड़ी 3 किमी प्रधानमंत्री सड़क का जिसे आज 5 साल में भी पूर्ण नही किया जा सका, न तो ठेकेदार का ठेका निरस्त हुआ और न ही इन्हें ब्लैक लिस्टेड किया गया, पीएम सड़क विभाग की मर्जी से चल रही मात्र धांधलेबाजी)

दिनांक 09 जून 2018, स्थान - पनगड़ी/भठवा/गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र शिवानन्द द्विवेदी)

       ज़िले में पीएम सड़कों में अनियमितता का दौर निरंतर जारी है. अभी हाल ही पीएम सड़क विभाग संबंधी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मीडिया में छाई रहीं. पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी की मेरी सड़क एप्प और एनआरआरडीए और एमपीआरआरडीए के माध्यम से इस विषय में कई शिकायतें दर्ज कराईं गईं थी जिनका विषय था रीवा और विशेषकर मऊगंज पीएम सड़क अनुभाग में बनाई जा रही पीएम सड़कों के घटिया गुणवत्ता की जांच, लेटलतीफी का कारण और साथ ही पीएम सड़क विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता. 

   उक्त विषय पर जांच के लिए एसक्यूएम रिटायर्ड चीफ इंजीनियर जबलपुर श्री के एम जैन की स्पेशल टीम को मऊगंज अंतर्गत आने वाले अगडाल (लौरी) से कैथा 9.4 किमी सड़क सहित पनगड़ी भठवा पीएम सड़क की भी जांच के लिए रीवा भेजा गया. इस विषय में अच्छी जांच भी हुई और जबलपुर से आये चीफ इंजीनियर केएम जैन ने एक अच्छे जांचकर्ता का परिचय देते हुए सभी बनाई गई पुलो को रिजेक्ट किया साथ ही जिन जगहों पर सड़क में गुणवत्ता के साथ समझौता किया गया था वहां वहां विशेष ध्यान देकर दुरूस्त करने की हिदायत दिया था जिसका नतीजा यह हुआ की काफी हद तक ठेकेदारों के होश ठिकाने आये हैं परंतु एकबार पुनः पीएम सड़क के रीवा डिवीज़न और इसके सब डिवीज़न के अधिकारियों की पुरानी स्टाइल वाली सांठ गांठ से ठेकेदार पुनः अपने पुराने भष्ट्राचार वाले ढर्रे पर निकल पड़े हैं. जहां तक सवाल 3 करोड़ 33 लाख 43 हज़ार की लॉगत से बनाई जा रही कैथा से अगडाल 9.4 किमी पीएम सड़क का प्रश्न है तो लगता है इसे किसी भी हाल में 30 जून 2018 तक पूरा नही किया जा सकता जबकि सोनभद्र कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड के ठेकेदार संदीप पांडेय ने 30 जून तक समय एक्सटेंशन लिया था. साथ ही जिन पुलो को तोड़कर नया बनाया जाना था वहां भी अब तक कोई कार्य प्रारम्भ नही हुआ है.

पनगड़ी भठवा पीएम सड़क की हुई एक और जांच 

   दिनांक 08 जून को मऊगंज पीएम सड़क अनुविभाग के सहायक महाप्रबंधक सुजीत कुमार निगम से प्राप्त जानकारी से पता चला है की जबलपुर से आयी हुई किसी प्राइवेट एनजीओ टीम के द्वारा पनगड़ी से भठवा सड़क मार्ग की एक और जांच की गई है जिसे एक विशेष प्रकार की ड्रिलिंग मशीन द्वारा ड्रिल करके किया गया है. 

    जांच स्थल पर उपयंत्री और टीएल महेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे हैं. साथ ही पनगड़ी खुर्द ग्राम के निवासी एवं पनगड़ी कला पंचायत के उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला भी जांच स्थल पर मौजूद थे जिन्होंने जाँचस्थल की कुछ फोटग्राफ भी भेजी हैं. 

  इस प्रकार देखा जा सकता है की 08 जून की भठवा पनगड़ी सड़क की की गई जांच भी पिछली जांच का ही एक हिस्सा थी जिसमे इस सड़क को जांचने के लिए पर्याप्त मशीनरी उपलब्ध न हो पाने के कारण एनजीओ और किसी प्राइवेट एजेंसी को भेजकर जांच करवाई जा रही थी. 

पनगड़ी उपसरपंच शिवेंद्रमणि शुक्ला ने लगाया विभागीय सांठगांठ का रूप 

  इस बीच पनगड़ी उपसरपंच शिवेंद्र शुक्ला द्वारा आरोप लगाया गया की जब ठेकेदार पिछले पांच साल के अधिक समय से इस छोटी सी 3 किमी की सड़क को पूर्ण कर पाने में अक्षम रहा है तो पीएम सड़क विभाग द्वारा ऐसे ठेकेदारों को क्यों एंटरटेन किया जा रहा है इनका ठेका निरस्त कर इनसे भरपाई की जाकर इन्हें ब्लैक लिस्टेड क्यों नही किया जा रहा है. उपसरपंच द्वारा बताया गया की पहले से ही हमारे क्षेत्र की जनता पांच साल से परेशान हो रही है तो एक दो साल और सही परंतु हमे ऐसे ठेकेदारों से काम नही चाहिए जो छोटे से काम को करने में 5 साल से अधिक समय लगाएं.

   वहरहाल दिनांक 08 जून की पनगड़ी सड़क की जांच को भी रूटीन बताकर विभाग द्वारा पल्ला झाड़ लिया गया है और उपसरपंच द्वारा आरोप लगाया गया है की यह जांच भी उस स्थान पर जानबूझकर कराई गई है जहां सड़क कुछ मोटी बनाई गई थी फिर भी सड़क की मोटाई मात्र 5 इंच आई है जबकि सड़क की मोटाई 7 इंच होनी चाहिए थी.

  संलग्न - दिनांक 08 जून को पनगड़ी से भठवा पीएम सड़क की जांच करती जबलपुर से आयी टीम और साथ में उपास्थिति पीएम सड़क ठेकेदार प्रधान और पीएम सड़क अनुभाग मऊगंज के अधिकारी कर्मचारी.

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शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,


रीवा मप्र, मोबाइल 07869992139, 09589152587.


Sunday, April 15, 2018

चलिए नही बेधड़क, क्योंकि मैं हूँ बांस से हिरुडीह पी डब्लू डी सड़क (मामला गंगेव जनपद अंतर्गत आने वाली बांस से हिरुडीह वाया पुरवा 4 दशक पुरानी पी डब्लू डी सड़क का जिसमे मोरम तक नही पड़ी)

दिनांक 15 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा, रीवा मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

     आज स्वतंत्रता के 70 वर्ष बाद भी भारत के ग्राम के नागरिकों का जीवन स्तर सुधरने का नाम नही ले रहा है और इसके पीछे मुख्य कारण हैं उन्हें मूलभूत मानवाधिकारों का उपलब्ध न हो पाना और मानवाधिकारों से आम जन मानस को वंचित किया जाना।

    बिजली, पानी, सड़क, आवास, स्वास्थ्य एवं अच्छी शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक सरकार द्वारा उसके सभी नागरिकों को उपलब्ध करवाना उस देश की सरकार के संवैधानिक कर्तव्य होते हैं परंतु भारत में व्यापक भष्ट्रचार और प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज आम जनमानस इन मूलभूत मानवाधिकारों से वंचित हैं. यद्यपि कुछ ग्रामों को जोड़ने के लिए पीएम सड़क के प्रावधान चल रहे हैं जिसमे ग्रामों के मुख्य मार्ग को जोड़ने का काम तो किया जा रहा है परन्तु समय के हिसाब से नाकाफी है।

  4 दशक पुरानी बांस से हिरुडीह वाया पुरवा पी डब्लू डी सड़क आज भी बनी है कच्ची, नही है कोई सुध लेने वाला, आम जनता हैरान परेशान

    मानवाधिकार के संरक्षण के लिए कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा अभी पिछले दिनों सामाजिक समस्याओं और प्रशासनिक कार्यों का भौतिक सत्यापन करने और अवलोकन करने के उद्देश्य से बांस से हिरुडीह एवं पुरवा की तरफ रुख किया गया जिसमे आम जन से संपर्क स्थापित किया गया तो ग्राम पुरवा निवासी दिव्यांग रामायण सिंह, निरंजन सिंह, किसान अरुण सिंह एवं देवेंद्र प्रताप सिंह, अधिवक्ता बसंत प्रताप सिंह, छात्र आदित्य सिंह सहित कुछ माताओं बहनों के द्वारा जो जानकारी प्राप्त हुई वह भारतीय लोकतंत्र के बहुत पीछे होने या यूं कहें कि एक तरह से नाकाम होने की ही दास्तान बयां करती है. 

      पुरवा निवासी दिव्यांग रामायण सिंह के द्वारा बताया गया की उनकी यह सड़क वर्ष 1981 में पी डब्लू डी के द्वारा बनाई गई थी जिसमे थोड़ा सा मोरम का काम किया गया था लेकिन तब से इस सड़क मार्ग में न कोई मिट्टी और न ही मोरम का काम किया गया है. रामायण सिंह ने बताया की आज यदि थोड़ी भी बारिस हो जाए तो इस सड़क में स्थित गड्ढों में पानी भर जाता है जिससे आम जन को निकलना बड़ा ही मुश्किल पड़ जाता है. यदि किसी को इमरजेंसी मेडिकल फैसिलिटी की आवश्यकता पड़ जाए अथवा कोई महिला का डिलीवरी का केस आ जाए तो उसे खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता है. पुरवा निवासी किसान निरंजन सिंह और अरुण प्रताप सिंह द्वारा बताया गया की आज 4 दशक के आसपास हो रहा है तो कैसे सम्भव है की पी डब्लू डी सड़क की यह स्थिति  बनी हुई है? क्या पी डब्लू डी सड़क के लिए इतने दशकों में कोई बजट नही आया होगा? वहीं छात्र आदित्य प्रताप सिंह द्वारा बताया गया की बरसात के मौसम में हमे स्कूल जाने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है. सड़क में 100 मीटर आगे इशारा करते हुए बताया की सड़क में अब मोरम भी नही है अतः कीचड़ होने से साईकल से लेकर सभी वाहन फस जाते हैं जिससे बरसात में पैदल तक चलना मुश्किल होता है.

    बांस से हिरुडीह वाया पुरवा सड़क को पीएम सड़क बनाये जाने की माग 

   ग्राम बांस, पुरवा और हिरुडीह की महिलाओं ने जानकारी दी की उन्हें विशेष तौर पर भारी तकलीफों का सामना करना पड़ता है अतः सभी चाहते हैं की आज जैसे सभी प्रधानमंत्री सड़कें बनाई जा रही हैं उसी प्रकार इसे भी पीएम सड़क कर दिया जाए जिससे इसका जल्द ही निर्माण हो जाए. सभी ने कहा की पी डब्लू डी की सड़कों में व्यापक अनियमितता होने के कारण ही उनकी यह सड़क आज 4 दशक बाद भी नही बन पायी है. 

   नईगढ़ी माइक्रो इरीगेशन नहर परियोजना का कार्य भी प्रगति पर 

    दौरे के दौरान पाया गया शासकीय माध्यमिक शाला बांस के आगे और पुरवा ग्राम के बीच में नहर का कार्य भी प्रगति पर है जिसमे खुदाई का काम प्रारम्भ किया गया है. जानकारी बाणसागर नहर मंडल संभाग रीवा के अधीक्षण यंत्री श्री शर्मा से जानकारी प्राप्त हुई की यह नहर आसपास के के पटवारी हल्कों जिसमे मनगवां का इटहा, सिरमौर का हिनौती और त्योंथर का जमुई एवं कटरा हल्का आदि सामिल है वर्ष 2020 तक नहर से जोड़ दिया जाएगा. पानी की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण उद्वहन और दबाब पद्धति से पानी की सप्लाई किये जाने का प्रावधान है जिसमे माइक्रो इरीगेशन तकनीक द्वारा जमीन के अंदर से पाइप डालकर गांव गांव में पानी सप्लाई किये जाने का प्रावधान है. यह प्रयाश भी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा पिछले वर्षों किया गया था जिसमे मानवाधिकार आयोग मप्र भोपाल के संज्ञान के चलते आज कार्य में तेजी आई है और किसान खुशहाल होगा. 

संलग्न - बांस के हिरुडीह वाया पुरवा पी डब्लू डी सड़क की स्थिति एवं इसकी दुर्दशा दिखाते ग्राम के नागरिकगण. मामला गंगेव ब्लॉक, रीवा मप्र का.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

मोबाइल - 7869992139, 9589152587