Showing posts with label ce. Show all posts
Showing posts with label ce. Show all posts

Thursday, November 15, 2018

बिजली विभाग की कार्यवाही, शिफ्ट हुआ करहिया स्कूल परिसर एवं मतदान केंद्र क्रमांक 135 का खुला बिजली तार, मीडिया में आई थी बात, खबर और सामाजिक प्रयाशों का हुआ सार्थक असर (मामला ज़िले के कटरा विद्युत वितरण केंद्र का जहाँ पर खुले सिर की ऊंचाई से झूलते तारों की वजह से ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार की कही थी बात)

दिनाँक 15 नवंबर 2018, स्थान- कटरा रीवा मप्र

(शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

    त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र क्रमांक 135 में खुले खतरे के निशान से झूलते बिजली के तारों की बातें सामने आईं थी. मामला था शासकीय प्राथमिक पाठशाला करहिया के स्कूल परिसर में बनाये गए मतदान केंद्र क्रमांक 135 का जिंसमे खुले हुए बिजली के तार किसी भी समय अप्रिय घटना का आमंत्रण दे रहे थे. 

स्पार्किंग की वजह से फसल से लदा ट्रेक्टर हुआ था आग के हवाले

       इसके पूर्व भी पिछले जून मई-जून महीने में जब बिजली के खुले हुए तारों की वजह से डाढ़ पंचायत सरपंच सुरेंद्र मिश्रा का ट्रेक्टर देखते देखते स्पार्किंग की बजह से आग के हवाले हो गया था तब भी ग्रामों और स्कूल परिसर में खुले झूलते बिजली के तारों की बातें सामने आईं थी और लाइन को शिफ्ट करने की बात रखी गई थी लेकिन तब इस पर कोई  सार्थक कार्यवाही नही हुई थी. लेकिन अब जब शौभाग्य योजनान्तर्गत अरबों खरबों का बजट उपलब्ध है और चुनाव भी नजदीक है जब मामला सोशल मीडिया एवं प्रिंट मीडिया में रखा जाकर सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा संबंधित चीफ इंजीनियर के एल वर्मा एवं जबलपुर डिस्कोम सीएमडी को ट्विटर एकाउंट में सूचित किया गया तो कार्यवाही हुई. 

लाइन शिफ्ट न होने पर मतदान से करना था बहिष्कार

      सबसे बड़ी बात यह थी की ग्रामीणों ने लाइन शिफ्ट न करने पर मतदान से बहिष्कार की बात कही थी जिसका परिणाम यह हुआ की दिनाँक 15 नवंबर 2018 को तीन पोल खड़ा करके बिजली शिफ्ट कर दी गई. साथ ही ट्रांसफार्मर का टूटा हुआ पोल भी सपोर्ट लगाकर ठीक किये जाने का प्रयाश किया जा रहा है. उपस्थित ठेकेदार प्रतिनिधि बद्री प्रसाद पांडेय निवासी पनगड़ी-पताई द्वारा बताया गया की ट्रांसफार्मर में अतिरिक्त पोल लगाकर दो तीन दिनों में सही कर दिया जाएगा.

  स्कूली बच्चों और अभिभावकों में प्रसन्नता

    इस बीच करहिया प्राथमिक पाठशाला परिसर से खतरे के निशान से झूलते हुए बिजली के तारों को शिफ्ट किये जाने से आसपास के ग्रामों डाढ़, करहिया, बड़ोखर, हिनौती आदि ग्रामों के अभिभावकों और स्कूली बच्चों सहित शिक्षकों में प्रसन्नता है. सभी ने सामाजिक कार्यों की सराहना की और कहा की यह कार्य यहां के जन प्रतिनिधियों द्वारा कराए जाने चाहिए लेकिन जन प्रतिनिधि ग्रामीणों की समस्या पर ध्यान नही देते और चुनाव जीतकर फुरसत हो जाते हैं. इसके बाद आम जनता को पांच साल दर दर की ठोकर खाने को मजबूर होना पड़ता है. 

   लालगांव डीसी अन्तर्गत अतरैला स्कूल में भी झूल रही मौत

   बता दें की पिछले वर्षों से उठाये जा रहे एक अन्य मामले में भी हालात करहिया स्कूल जैसे ही हैं. गंगेव ब्लॉक के पताई पंचायत अन्तर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक पाठशाला अतरैला में भी इससे भी अधिक खतरनाक हाई टेंशन लाइन के तार सिर की ऊंचाई से झूल रहे हैं लेकिन कई मर्तबा स्कूल प्रशासन एवं ग्रामीणों द्वारा मामले को लगातार संबंधित जिम्मेदारों के समक्ष रखे जाने के बाबजूद भी आज तक हाई टेंशन लाइन शिफ्ट नही की जा सकी है. अपना रोष व्यक्त करते हुए पताई पंचायत गंगेव ब्लॉक के ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने बताया की यदि समस्या का समाधान किया जाकर स्कूल परिसर से हाई टेंशन लाइन शिफ्ट नही की गई तो वह भी चुनाव का बहिष्कार करेंगे क्योंकि बच्चों की जिंदगी उन्हें ज्यादा प्यारी है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें कटरा डीसी अन्तर्गत शासकीय प्राथमिक पाठशाला करहिया जिसे मतदान केंद्र क्रमांक 135 बनाया गया है वहां पर दिनांक 15 नवंबर 2018 को खतरनाक स्तर पर खुले झूलते हुए बिजली के तारों को शिफ्ट कर दिया गया. कार्य करते बिजली विभाग के वर्कर.

---------------

शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Monday, August 6, 2018

पीडब्ल्यूडी एवं स्वास्थ्य विभाग ने गंगेव अस्पताल का कर दिया सत्यानाश (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत बनाये गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जिंसमे 6 वर्ष पूर्व 38 लाख स्वीकृत होने के बाद भी आज तक नही हो सका मरम्मत कार्य , राशि भस्ट्राचार की बलि चढ़ी)


दिनांक 06 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी) 

   ज़िले में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति गंभीर बनी हुई है. यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का मेंटेनेंस न हो पाने एवं मरम्मत के अभाव में भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं जिनमे मरीजों को रखना तक खतरे से खाली नही है. पूरा भवन बरसात के मौसम में रिसाव ले लेता है. जहां दवाएं रखी हुई हैं वहां पर नदियां जैसे बहती हैं. 

   अभी पिछले वर्षों इसी मामले को लेकर क्षेत्रीय अखबारों में अस्पताल की दुर्दशा के बारे में सामाजिक एवं ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा लिखा गया था और खबर निकली हुई थी जिंसमे दवा स्टोर रूम पूरी तरह से पानी से सराबोर था और दवाएं पानी में डूबी हुई थीं. तब उसी समय अस्पताल का मरम्मत कार्य प्रारम्भ हुआ था जिंसमे की किसी ठेकेदार द्वारा कार्य किया जा रहा था. 

   अधूरा छोंड़कर भाग गया ठेकेदार

     गंगेव ब्लॉक मेडिकल अधिकारी श्री देवव्रत पांडेय से प्राप्त जानकारी से बताया गया की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मरम्मत कार्य को किसी हिनौती के ठेकेदार द्वारा किया जा रहा था जिसे अभी पिछले कई महीने पूर्व बीच में ही अधुरा छोड़ दिया गया है. इसके विषय में बीएमओ देवव्रत पांडेय द्वारा कई बार रिमाइंडर और नोटिस भी जारी की गई हैं लेकिन उनकी स्वयं की आवाज़ को नही सुना जा रहा है ऐसा उनका कहना है. देवव्रत पांडेय ने आगे बताया की पीडब्ल्यूडी में मनमानी चल रही है.

6 साल पहले सैंक्शन हुआ था 38 लाख रुपये

    बीएमओ देवव्रत पांडेय ने जानकारी दी की 6 वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग के मद से कुल 38 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी जिंसमे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव का सम्पूर्ण मरम्मत कार्य होना था लेकिन पहले तो टेंडर प्रक्रिया में ही बहुत देरी हुई जिससे पिछले वर्ष 2016-17 में स्वास्थ्य केंद्र के मरम्मत का कार्य प्रारम्भ किया गया. अब पता नही क्या हुआ की ठेकेदार बीच में ही कार्य छोड़कर चला गया और पीडब्ल्यूडी विभाग रिमाइंडर के वाबजूद भी कोई एक्शन नही ले रहा है.

ठेकेदार ने पूरा अस्पताल खोद दिया, बिना बिस्तर का हो गया अस्पताल

   बीएमओ ने जानाकरी दी की बांकी जो भी टूटा फूटा फर्श बचा हुआ था ठेकेदारों ने उसे भी पूरी तरह से उखाड़ दिया है और अब तो मुख्य निकाशी वाले कक्ष में बिस्तर भी रखने योग्य नही बचा है. वहीं गैलरी पर पड़े कबाड़ में कुत्ते बिल्ली बैठे रहते हैं और वहीं पर हगते मूतते रहते हैं.

जनपद सदस्यों ने जाहिर की नाराजगी

   वहीं पर उपस्थित गंगेव जनपद सदस्य मिथिलेश सिंह एवं विनोद विश्वकर्मा ने बताया की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति दयनीय बनी हुई है. सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र का भवन काफी जर्जर भी हो चुका है. जनपद सदस्यों ने बताया की इस बाबत उन्होंने भी मौखिक रूप से बात को संबंधितों के समक्ष रखी है लेकिन कोई सुनवाई नही हुई है. विनोद विश्वकर्मा ने बताया की यहां पर दीनदयाल योजनान्तर्गत बांटे जाने वाले कार्ड भी नही हैं जिससे गरीबों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. मिथिलेश सिंह ने बताया की हमारा कार्यालय यहीं पर नजदीक ही है अतः लगभग रोज ही आना जाना रहता है और हम देखते हैं की मरीजों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. यहां पर बिस्तर पर्याप्त न होने से मरीज जमीन पर ही पड़े रहते हैं. यहां ठेकेदारों की मनमानी और विभागीय उदासीनता के चलते वर्षों से मरम्मत कार्य बन्द पड़ा हुआ है. जनपद सदस्यों ने बताया की यद्यपि हम जनप्रतिनिधि हैं लेकिन हमारी भी कोई सुनवाई नही हो रही है.

तत्काल प्रभाव से पूरा होना चाहिए अस्पताल का मरम्मत कार्य

   यदि सही मायनों में देखा जाए तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जिस प्रकार जीर्णशीर्ण स्थिति में है और उसके मरम्मत कार्य में हीलाहवाली की जा रही है यह मरीजों के मूलभूत स्वास्थ्य के मानवाधिकार का घोर उल्लंघन है और इस विषय में अस्पताल प्रबंधन सहित पीडब्ल्यूडी एवं संबंधित ठेकेदार पर कंनूनी कार्यवाही की जानी चाहिए. आज वर्षों से अधूरे पड़े मरम्मत कार्य के कारण क्षेत्र के हज़ारों मरीजों के लिए मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की समस्या पैदा हो गई है. इसी दयनीय स्थिति के चलते मरीज गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जाना ही नही चाह रहे हैं. गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का अस्पताल प्रबंधन इतना खत्म हो चुका है की समस्या को नजरअंदाज किया जा रहा है. ज़िला कलेक्टर भी पूरी तरह से निष्क्रिय होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल करने वाला कोई नही है. वर्तमान समय से बेहतर स्थिति अभी कुछ वर्ष पहले थी जब जिले में कलेक्टर राहुल जैन हुआ करते थे जिनके खौफ से आज जैसे मनमानी नही चल पाती थी. इस समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे रीवा ज़िला बिना किसी दमदार प्रसाशनिक आधिकारी के चल रहा है.

   आखिर प्रश्न यह है की मॉनव की मूलभूत मानवाधिकारों में से एक अच्छे स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा सुरक्षा करने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या हर बात के लिए कंप्लेंट करना जरूरी होता है. आखिर ज़िला और प्रदेश शासन प्रशासन इस बात की निगरानी क्यों नही करवा सकता की स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, सड़क, पानी और बिजली जैसे मानवाधिकारों की सुरक्षा हो पा रही है की नही. यदि मानवाधिकारों और मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है तो शासन प्रशासन को स्वयं भी चाहिए की बिना किसी कंप्लेंट के ही स्वतः ही संज्ञान ले. लेकिन यहाँ तो सब उल्टा चल रहा है लगता है की स्वास्थ्य सुविधाओं की भी दलाली चल रही है और यहां भी लोगों के शेयर फिक्स हो चुके हैं जिससे आम आदमी मरे चाहे जिये इससे किसी को कोई लेना देना नही है. सबसे बड़ी बात तो यह है की इस विषय में ईमानदारी और जिम्मेदारी की अपेक्षा मात्र अस्पताल प्रबंधन से ही की जा सकती है क्योंकि मरम्मत कार्य करवाना अस्पताल की जिम्मेदारी है. जहां तक सवाल निर्माण एजेंसी और पीडब्ल्यूडी का है इनके कार्य में तो कोई जिम्मेदारी हो ही नही सकती क्योंकि पीडब्ल्यूडी जैसे विभाग ने पूरे देश के लोक निर्माण कार्यों में कितना बड़ा भष्ट्राचार किया है यह आज किसी से भी छुपा नही है. पीडब्ल्यूडी ने पूरे देश को खोंखला कर दिया है, परंतु दुर्भाग्य है की न तो इस कार्य को मॉनिटर करने वाला स्वास्थ्य विभाग है, और न ही ज़िला कलेक्टर. 

संलग्न - 1) संलग्न देखें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव की दुर्दशा जिंसमे आज 6 वर्षों के इसके मरम्मत कार्य और रखरखाव के लिए आई हुई राशि के वावजूद भी इसमे कुछ नही हो सका है. पूरा कार्य अधूरा पड़ा हुआ है साथ ही अस्पताल आम आदमी का न लगकर ऐसा लगता है की पशुओं का है.


2) बीएमओ देवव्रत पांडेय से बातचीत के अंश एवं साथ ही रीवा संभाग के पीडब्ल्यूडी चीफ इंजीनियर गरीब राव गुजरे से जानकारी के अंश मोबाइल रिकॉर्डिंग.

-------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139