Showing posts with label mprdc road project. Show all posts
Showing posts with label mprdc road project. Show all posts

Thursday, November 15, 2018

MP - मप्र की विकाश गाथा का प्रतीक - मनगवां चाकघाट हाईवे में सोहागी पहाड़

दिनांक 15 नवंबर 2018, स्थान - सोहागी पहाड़, रीवा मप्र

( शिवानन्द द्विवेदी, रीवा मप्र)

    पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से बनाई जा रही रीवा ज़िले की बहुचर्चित मनगवां-चाकघाट हाईवे सड़क आज तक नही बन पायी है जबकि इसमे अब तक देश दुनिया की नामी गिरामी कंपनियों ने काम किया है. टॉपबर्थ, दिलीप बिल्डकॉम और बंसल जैसी कंपनियों ने इस सड़क कार्य में हाँथ आजमाया है और अब वर्तमान में बंसल कंपनी द्वारा ही कार्य किया जा रहा है. टॉपबर्थ कंपनी द्वारा कार्य का टेंडर लिया जाकर दिलीप बिल्डकॉम कंपनी को पेटी कॉन्ट्रैक्ट में दिया गया था जिंसमे बताया गया कि लेनदेन को लेकर आपसी विवाद और समय पर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा न कर पाने के कारण ठेका निरस्त हुआ. इसके बाद पुनर्निविदा के चलते बंसल कंपनी को कार्य सौंपा गया. बंसल द्वारा आज तक कार्य पूरा नही किया गया जिसका परिणाम है पिछले पांच से अधिक वर्षों से मनगवां और चाकघाट के बीच रहने वाले और यहां इस सड़क मार्ग से प्रतिदिन आवागमन करने वाले आम जन मानस से लेकर वीआईपी तक की फजीहत.

  सोहागी पहाड़ में स्थिति सबसे खतरनाक

    मनगवां से चाकघाट सड़क मार्ग में सोहागी नामक पहाड़ आता है जो किसी भी रोड निर्माण करने वाली कंपनियों के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. पिछले पांच से अधिक वर्षों से हो रहा यह सड़क निर्माण का कार्य आज मात्र सोहागी पहाड़ में ही आकर रुका हुआ है. टेढ़ा मेढ़ा और ऊंचाई गहराई से भरा यह पहाड़ काफी मुश्किल है. अब जो भी कपंनियां कार्य कर रही हैं उन सबका अंतिम और सबसे मुश्किल कार्य इसी पहाड़ को तोड़कर यहां से सड़क मार्ग निकलना है।

  ऐसा क्या है इस सड़क में की पांच साल से अधिक का समय लग गया

   अब प्रश्न यह है की आज भी क्या मॉनव 17 वीं सताब्दी में जीवन यापन कर रहा है जबकी मसीनी उपकरणों का अभाव रहता था और मॉनव ज्यादातर कार्य हाँथ से करता था. आज तो 21 वीं सदी का दौर है जबकि ऐसी मसीनों का ईजाद हो चुका है जहाँ पर कोई मुश्किल से मुश्किल कार्य भी कुछ दिनों अथवा महीनों में पूरा किया जा सकता है. तब प्रश्न यह उठता है की आखिर यह सरकारें क्या कर रही हैं. क्या सरकारों में बैठे सिविल कंस्ट्रक्शन के इंजीनियर और इनके नीति निर्धारक इन बातों का ध्यान नही रखते की जिस कंपनी को यह टेंडर देकर कार्य सौंप रहे हैं वह कार्य करने योग्य भी हैं की नही. आखिर टेंडर देते समय कोई तो समय निर्धारण हुआ होगा की इतने वर्षों में कार्य को पूरा किया जाकर सरकार के हवाले किया जाना है. वास्तव में बात यह है की कमीशन के खेल में पूरी सरकार और इनके सिपहसालार ही लिप्त हैं तो भला कार्यवाहि फिर कौन करेगा. कार्यवाही करने के लिए पाक साफ और मजबूत होना पड़ता है. कमीशन खोर थोड़े ही कार्यवाही करते हैं. 

  सोहागी पहाड़ में वर्षों से मानक स्तर से कई गुना अधिक प्रदूषण 

    सोहागी पहाड़ की स्थिति आज इतनी भयावह हो चुकी है की यहां पर दुर्घटनाएं तो बहुत आम बातें हैं और लगभग रोज ही कोई न कोई अप्रिय दुर्घटना हो रही है. मनगवां से चाकघाट वाया सोहागी पहाड़ से गुजरने वाले हर एक सख्स की हालात यह है की यदि उसका मेडिकल चेकअप कराया जाये तो खतरनाक बीमारियां मिलेंगी जिंसमे फेंफड़ों और सांस की बीमारियां जैसे सिलकोसिस, टीबी, और अन्य बीमारियां सम्मिलित हैं. 

    प्रदूषण चेक करने वाली संस्थाएं और उस पर कार्यवाही करने वाली संस्थाएं जैसे पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड आदि तो ऐसा लगता है जैसे अस्तित्व में हैं ही नही. रीवा संभाग और संभवतः पूरे मप्र में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी संस्थाएं नाकाम और अक्षम साबित हुई हैं. क्रशर प्लांट से निकलने वाला डस्ट और फैलने वाला प्रदूषण, वाहनों से निकलने वाले धुंए और धूल का प्रदूषण, निर्माणाधीन सड़कों में अमानक स्तर पर उड़ने वाल धूल डस्ट का प्रदूषण, आखिर इन सब प्रदूषण की समस्याओं का समाधान कौन करेगा? कहां है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य ऐसी संस्थाएं? कहां गई जनता के हित की बात करने वाली सरकारें?

   सिलिकोसिस एक जानलेवा बीमारी

          सिलिकोसिस फेंफड़ों से संबंधित एक ऐसी बीमारी है जो महीन धूल के कणों से उत्पन्न होती है. सिलिका की धूल सांस के साथ खिंचकर फेंफड़ों के अंदर जाने से फेंफड़ों में छोटे छोटे नोड्यूल बन जाते हैं. सिलिका एक यौगिक है जो सिलिका व ऑक्सीजन के योग से बनता है जो खनिजों में पाया जाता है. इसे पीसने पर उस पत्थर के अत्यंत बारीक कण धूल के रूप में सांस के साथ जाकर फेंफड़ों में जम जाते हैं व फेंफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर देते हैं. ये धूल के कण फेंफड़ों के ऊपर परत बना देते हैं जिस कारण ऑक्सीजन फेंफड़ों में शोषित नही हो पाती है और बाद में यह सिलिकोसिस नामक बीमारी के रूप में बदल जाती है. 

  सिलिकोसिस और प्रदूषण की समस्याओं का कानूनी प्रावधान 

    वास्तव में देखा जाए तो व्यक्ति को जानबूझकर प्रदूषण में धकेल देना और खतरनाक बीमारियों का तोहफा देना व्यक्ति के मानवाधिकार का उल्लंघन है. 

   फैक्ट्री मजदूरों के हित में शासन द्वारा कारखाना अधिनियम 1948, खनन अधिनियम 1952, अंतरराज्यीय पलायन मजदूर कानून 1979, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम, असंगठित कामगार व सामाजिक सुरक्षा कानून आदि के अन्तर्गत यह कंनूनी अपराध हैं. इसके अतिरिक्त भी मध्य प्रदेश असंगठित कामगार कल्याण अधिनियम 2003, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि अधिनियम 1982, मध्य प्रदेश स्लेट पेंसिल कर्मकार कल्याण मॉडल, मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल जैसे कानूनों के दिशा निर्देश भी लागू हैं.

   मानव अधिकार संरक्षण कानून के अन्तर्गत है मुआबजे पुनर्वाश का प्रावधान 

      मॉनव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अन्तर्गत राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी यह अनुसंसा की हुई है की यदि सिलकोसिस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति की मृत्यु होती है तो यह माना जाएगा की उसके जीवन के अधिकार की अवहेलना हुई है जिसके लिए वह पीड़ित मुआबजा और पुनर्वाश का अधिकारी होगा. 

    नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल का हो हस्तक्षेप 

   प्रदूषण के अमानक स्तर और निरंतर पर्यावरण की हो रही अपूरणीय क्षति के चलते पूरे मामले में नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल का हस्तक्षेप होना चाहिए. सबसे बड़ी बिडम्बना यह है की राष्ट्रीय हरित ट्राइब्यूनल एक हज़ार के स्टाम्प और फीस के साथ ही प्रकरण पर कार्यवाही करता है और दुनिया भर के टेक्निकल प्रोब्लम्स रहते हैं. जबकि जनहित याचिका के कांसेप्ट की तरह ही नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल में भी मात्र सीधे प्रकरण की एक दो फ़ोटो के साथ समस्या को लिखित रूप से भेजे जाने अथवा ईमेल कर दिए जाने के साथ ही स्वतः संज्ञान ले लेना चाहिए.

    इसलिए जनता के व्यापक हित से जुड़े हुए मामलों पर स्वतः संज्ञान और सीधे हस्तक्षेप का प्रावधान होना चाहिए इसमे यह नही देखा जाना चाहिए कि कोई शिकायतकर्ता बने और जब शिकायत आये तभी कार्यवाही हो। आखिर त्योंथर से मनगवां वाया सोहागी से गुजरने वालों में क्या कलेक्टर, डीएम, जस्टिस, सीएम, और प्रिंसिपल सेक्रेटरी नही होते होंगे? क्या वर्ष भर में ऐसे उच्चाधिकारी इस सड़क मार्ग से नही गुजरते होंगे? मानाकि यह बन्द एसी गाड़ियों में गुजरते होंगे लेकिन क्या आम जनता के दुख दर्द और तकलीफों को नही समझ सकते? समस्या तो यह है कि जब कुछ करना ही नही चाहते और इक्षाशक्ति ही नही है तो कहां से कुछ होगा? 

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा धूल डस्ट और प्रदूषण से भरे सोहागी सड़क मार्ग में घंटे भर खड़ा होकर वीडियो क्लिपिंग बनाई गई और साथ ही फ़ोटोग्राफ लिए गए जिसको समाज और मीडिया के समक्ष रखा जा सके और इस पर कार्यवाही हो सके.

------------------

शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Thursday, July 12, 2018

क्योटी-कलवारी मार्ग की शुरू हुई शोल्डरिंग, सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उठाया गया था मामला (ज़िला रीवा के क्योटी से कलवारी एमपीआरडीसी सड़क का जिसे 2 वर्ष पहले बनाया गया था, किनारों से उखड़ रही है रोड, विभाग द्वारा की जा रही थी देरी)

दिनांक 13 जुलाई 2018, स्थान - भठवा/लालगांव रीवा मप्र

(कैथा से शिवानन्द द्विवेदी)

   मीडिया और सोशल वर्क का ही प्रभाव है की जिन छोटी छोटी बातों को समाज और प्रशासन कभी ध्यान नही देता उन बातों को मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता बड़े ही गहराई से पकड़ लेते हैं. नतीज़ा यह होता है कि जिन कार्यों को समाज असंभव समझता है वह जनहित के कार्य होने लगते हैं. 

   समस्या सरकार अथवा प्रशासन की कम कही जा सकती है, समस्या है समाज की. समाज आज इतना नकारात्मक हो चुका है की हर व्यक्ति मात्र अपने व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक हित के आगे सोच ही नही पा रहा है. लेकिन जब भी लीक से हटकर सामाजिक मुद्दों पर बात उठाई जाती है तो सरकार प्रशासन को सुनना ही पड़ता है. 

   आवश्यकता है जनहित के मुद्दों को उठाने की और लगे रहने की. हाँ संभव है की एक या दो बार मुद्दे रखने से शायद समस्या का समाधान न हो लेकिन समाज को जनहित के कार्यों में लगे रहने की आवश्यकता है सुनवाई जरूर होती है. 100 प्रतिशत न सही पर 75 प्रतिशत तो काम होगा ही.

क्योटी से कलवारी मार्ग की दुर्दशा का उठा था मुद्दा

   अभी पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ज़िले एवं प्रदेश की मीडिया के सहयोग से जनहित का विशेष मुद्दा उठाया गया था जिंसमे क्योटी से कलवारी मार्ग पर हो रही ताबड़तोड़ ओवरलोडिंग वाहनों के यातायात की बात रखी गई थी जो बनकुइयाँ, सतना, मैहर, सेमरिया से होते हुए टोल टैक्स बचाने के उद्देश्य से क्योटी कलवारी मार्ग की तेरही करने में तुले थे. जिसकी वजह से यह मार्ग बुरी तरह से टूट रहा था. पिछले 2 वर्ष से मरम्मत कार्य न किये जाने के कारण मार्ग के साइड में शोल्डरिंग टूट रही थी, मोरम हट रही थी जिससे काफी मजबूत मार्ग भी समय से पहले ही टूटने लगा था. इस बात को जब रीवा संभाग एवं प्रदेश से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों सहित अन्य फेसबुक, ट्विटर, ईमेल आदि के माध्यम से संबंधितों के पास तक पहुचाया गया तो इस पर कार्यवाही होने लगी. परंतु कार्यवाही उपयुक्त तरीके से नही हो रही थी जिसके कारण भोपाल मप्र के एमपीआरडीसी विभाग के उच्चधिकारियों को सूचित किया गया उनसे ईमेल, मोबाइल व्हाट्सएप्प में कंप्लेंट की गई जिस पर कार्यवाही का आश्वाशन मिला. जिसके परिणाम स्वरूप अब जाकर जुलाई में थोड़ा बहुत कार्य प्रारम्भ हुआ है जिंसमे हिनौती के पास कुछ शोल्डरिंग कार्य का होना पाया गया है जिंसमे ग्रेडर की मदद से आसपास ही किनारों पर उपस्थित मोरम और जीएसबी को शोल्डर में डाला जा रहा है. 

पर्याप्त नही है कार्य, जिम्मेदारी पूर्वक करने की है जरूरत

   अभी जो कार्य होना पाया गया है वह पर्याप्त नही कहा जा सकता है क्योंकि ग्रेडर के माध्यम से वहीं आसपास किनारों की मोरम और जीएसबी को ही शोल्डर में डाला जा रहा है जिसके कारण साइड में उतार जैसी स्थिति निर्मित होने से किनारों पर वाहनों का ज्यादा झुकाव होने से एक्सीडेंट की संभावना बढ़ सकती है.

गारंटी पीरियड में दिलीप बिल्डकॉन को अलग से जीएसबी डालने की है जरूरत

  चूंकि पूरा सड़क का कार्य अभी भी गारंटी पीरियड में है अतः सड़क निर्माता कंपनी दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को चाहिए पूरी सड़क की नए सिरे से मरम्मत करे और शोल्डर में बाहर से लाकर जीएसबी गिट्टी आदि डाली जाए और उसको लोडर और ग्रेडर चलाकर कायदे से बैठाया जाना चाहिए जिससे एक बार पुनः शोल्डर कुछ 2 से 3 साल के लिए मजबूत हो जाए.

संलग्न - क्योटी कलवारी मार्ग में हिनौती के पास किया जा रहा शोल्डरिंग के कार्य का दृश्य जिंसमे थोड़ा बहुत कार्य किया गया है, सड़क का तरीके से मरम्मत और शोल्डरिंग कार्य किया जाना चाहिए.

----------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक केवाम मानवाधिकार कार्यकर्ता, 

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Wednesday, June 20, 2018

कलवारी-क्योटी सड़क की नही हुई मरम्मत, धड़ल्ले से दौड़ रहे ओवरलोडेड वाहन (मामला ज़िले के क्योटी से कलवारी तक एमपीआरडीसी सड़क का जिसमे ओवरलोडेड वाहनों ने सड़क की दुर्दशा की, साथ ही अब तक सड़क का नही हुआ मरम्मत कार्य)

दिनांक 20 जून 2018, स्थान - लालगांव/भठवा रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के महत्वपूर्ण टू लेन सड़क क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-भठवा सड़क की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है. एक तो सड़क के किनारों पर कटाव के कारण पानी में बही हुई जीएसबी की बजह से गड्ढे और दूसरे पूरे रूट में दिन रात बराबर चलने वाले अवैध परिवहन. दोनो ही वजहें ऐसी हैं जो इस मजबूत सड़क को नष्ट ध्वस्त करने में तुले हैं. 

सड़क के किनारों में जीएसबी कटाव का उठा था मामला

    ज्ञातव्य है की पिछले महीने बरसात आने के पूर्व ही सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा इस सड़क मार्ग के किनारों पर हो रहे गड्ढों के विषय में मामला उठाया गया था जो की ज़िले और प्रदेश भर की मीडिया में तो था ही साथ ही मामले को भोपाल स्थित मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कारपोरेशन के एम डी तक बात रखी गई थी.

अब तक हुई मात्र आंशिक कार्यवाही

   जब मामला मीडिया के माध्यम से तूल पकड़ा और उखड़ी हुई सड़क की फ़ोटो सोशल मीडिया से लेकर मीडिया में छपी थी तो भोपाल से शिकायत के आधार पर कुछ आंशिक कार्यवाही भी की गई थी जिसमे कुछ गड्ढों को लेबरों के द्वारा मोरम डालकर भरने का काम किया गया था जिसकी की फ़ोटो भी यहां पर संलग्न हैं परंतु इस कार्यवाही को मात्र 5 परसेंट ही कहा जा सकता है. अभी भी किनारों पर काफी मोरम और जीएसबी का बहाब हुआ है जिससे गड्ढे स्पष्ट नजर आते हैं ऐसे में बरसात के बाद स्थिति और भी दयनीय हो जाने की संभावना है जिसमे भारी ट्रकों के टायरों का किनारों से गुजरने की वजह से किनारे टूटेंगे जिसकी वजह से दायरा सड़क के अंदर तक आएगा और पूरी सड़क को खतरा बन जाएगा.

ओवरलोडेड वाहनों में नही हुई कोई कमी

    थाना बैकुंठपुर, सिरमौर, थाना गढ़ क्षेत्र एवं लालगांव चौकी के अंतर्गत आने वाली इस क्योटी से कलवारी सड़क में ओवरलोडेड वाहनों में कोई कमी नही आ रही है जबकि कारण एकदम स्पष्ट है. चूंकि पुलिश और आर टी ओ की मिली भगत से अवैध परिवहन से वशूली का काला धंधा जोरों पर है अतः अवैध और ओवरलोडेड परिवहन पर कार्यवाही की हिम्मत किसी को नही पड़ रही है.

दलालों के माध्यम से होती है वशूली

    यदि स्वयं ट्रक ड्राइवर की मानें तो इस काले धंधे का खेल काफी गहरा है जिसमे सीधे पुलिश वाले और आर टी ओ वाले तो मिले ही हुए हैं साथ ही साथ इस धंधे में दलाल भी पाल कर रखे हुए हैं. दलाल सतना और वनकुइयाँ से चलने वाले ओवरलोडेड वाहनों से पहले ही सब फिक्स करके रखते हैं और काफी उगाही इन्ही दलालों के माध्यम से ही हो जाती है. बाद में यह दलाल हर थाने और चौकियों में माल पहुचा देते हैं जिससे किसी भी प्रकार का लोकायुक्त संबंधी खतरा भी नही रहता. ट्रक ड्राइवर ने बताया की कभी कभी दिन में ओवरलोडेड ट्रक को पकड़ लिया जाता है जिससे बचने के लिए ट्रक वाले अपने ट्रकों को कहीं सड़क के किनारे लगा देते हैं और फिर रात में परिवहन करते हैं जिसकी जानकारी पुलिश को पहले से ही होती है. चूंकि रात में फसने का खतरा कम रहता है और साथ ही आवागमन भी कम रहता है इसलिए रात में अवैध परिवहन करना ज्यादा फायदे का सौदा होता है. 

रायपुर कर्चुलियान के पास टोल टैक्स बचाने के लिए क्योटी कलवारी मार्ग मे होता है अवैध परिवहन

    यह अवैध परिवहन रायपुर कर्चुलियान के पास स्थित जोगिनहाई टोल प्लाजा में टोल टैक्स बचाने के उद्देश्य से करते हैं. बनकुइयाँ से ज्यादातर आने वाले यह ट्रक गिट्टी और डस्ट लेकर यूपी की तरफ जाते हैं लेकिन ओवरलोडेड होने के कारण टैक्स ज्यादा लगता है जिसे बचाने के लिए रायपुर मनगवां की तरफ से न जाकर बैकुंठपुर से क्योटी कलवारी रास्ता निकलते हैं. ज्ञातव्य है की क्योटी कलवारी टू लेन सड़क मार्ग में कहीं भी टोल प्लाजा नही है.

अवैध परिवहन नही रोका तो सड़क के उड़ेंगे परखच्चे, फिर आमजन गड्ढों में चलने को होगा मजबूर

   इस प्रकार यदि क्योटी से कलवारी मार्ग में अवैध परिवहन नही रोका गया तो इस सड़क की स्थिति भी आज के 3 साल पहले जैसी ही हो जाएगी जिसमे पैदल चलना तक मुश्किल था वाहनों की बात कौन करे. 


    अभी भी इस अवैध ओवरलोडेड परिवहन की वजह से किनारों में सड़क को हुए नुकसान के अलावा भी सड़क के बीचोंबीच भी काफी नुकसान हुआ है जहाँ डाढ़, भठवा और कलवारी सहित इनके बीच में सड़क क्षतिग्रस्त हुई है.

संलग्न - 1) रीवा ज़िले के क्योटी से कलवारी सड़क मार्ग में ओवरलोडेड परिवहन की स्थिति 


2) सड़क के किनारों पर अभी हाल ही हुए मरम्मत में मोरम डाला गया है उसका दृश्य.


3) सड़क के किनारों पर हुए कटाव की वजह से सड़क के क्षतिग्रस्त होने की संभावना है, कई स्थलों पर अभी भी स्थिति पहले जैसी है उसका दृश्य.

---------------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा, मप्र

मोबाइल - 07869992139, 09589152587

Thursday, April 26, 2018

मेंटेनेंस के अभाव में दिलीप बिल्डकॉन सड़क के उड़ने लगे परखच्चे (मामला ज़िले के क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-भठवा-हिनौती सड़क मार्ग का)

दिनांक 26 अप्रैल 2018, स्थान - लालगांव/भठवा, रीवा मप्र 

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानन्द द्विवेदी)

   अभी पिछले दो वर्ष पहले ही दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट कंपनी लिमिटेड द्वारा बनाई गई क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-भठवा टू लेन एमपीआरडीसी सड़क के परखच्चे उड़ने लगे हैं. इस सड़क में डैमेज तो काफी समय से बताए जा रहे हैं लेकिन ज्यादातर ओवरलोडेड वाहनों की वजह से समस्या का होना बताया गया था. ओवरआल सड़क की स्थिति अब तक ठीक ठाक थी।

    एक लंबे अरसे से यह देखा जा रहा है की इस टू लेन सड़क के किनारों पर डाली हुई मोरम वाहनों की ट्रैफिक और साथ ही पानी के वहाब की वजह से कट गई है जिससे हर स्थान पर किनारों पर गड्ढेनुमा आकृतियां बन रही हैं. जिस प्रकार से किसी भी नई सड़क में किनारों में मोरम और गिट्टी का सपोर्ट होता है उस प्रकार इस सड़क में नही बचा है. पहले पहल तो किनारों पर मोरम डाली हुई थी लेकिन अब बहाब की वजह से कट चुकी है जिसके कारण क्योटी से लेकर कलवारी तक हर स्थान पर सड़क के किनारे यह समस्या देखी जा रही है.

    अभी दिनांक 26 अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शिसवा, भठवा, हिनौती, कलवारी, लालगांव, डाढ़, भलुहई और अन्य स्थानों का सर्वे किया गया और पाया गया की यदि समय रहते इस पर ध्यान नही दिया गया तो वर्ष 2018 की बरसात और मानसून का सीजन आते आते यह कटाव का दायरा आगे बढ़कर सड़क को बीचोंबीच से नुकसान पहुचा देगा. 

एमपीआरडीसी दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को जल्दी जारी करे नोटिस 

    इस विषय को गंभीरता से लेते हुए एमपीआरडीसी अर्थात मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेन्ट कारपोरेशन द्वारा तत्काल सड़क निर्माता कंपनी दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट कंपनी लिमिटेड को नोटिस जारी किया जाना चाहिए और उनको याद दिलाया जाना चाहिए की इस सड़क की गारंटी 10 वर्ष की बतायी गई थी अतः इसको दुरुस्त किया जाना चाहिए. अमूमन देखा जाए तो यह सड़क रीवा ज़िले में पिछले कुछ वर्षों में किसी भी कंपनी द्वारा बनाई गयी टू लेन सड़कों में सबसे मजबूत है क्योंकि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है की आज दो वर्ष का समय व्यतीत होने पर भी क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-भठवा सड़क मार्ग रिमार्केबल तरीके से तो छतिग्रस्त नही हुआ है. इसमे अब तक ज्यादातर किनारों में कटाव ही देखा गया है. डाढ़ आदि ग्रामों में निश्चित ही यह सड़क बीचोंबीच फट रही है अतः यह भी ध्यान दिया जाना आवश्यक हो जाता है. इस सड़क के बनते ही ओवरलोडेड ट्रैफिक का आवागमन प्रारम्भ हो गया था जिसकी समय समय पर शिकायतें भी कीं गई थी. परंतु ओवरलोडेड ट्रैफिक कभी बन्द नही हुआ है. अभी भी दिन और विशेषतौर पर रात में सतना से इलाहाबाद की तरफ जाने वाले ज्यादातर ओवरलोडेड ट्रक इसी रास्ते से गुजरते हैं. जानकारों से पता चला की मनगवां और रायपुर कर्चुलियान के बीच टोलप्लाजा में टैक्स बचाने के लिए भी भारी वाहन वाले इस रास्ते से गुजरते हैं.

    यदि तुलनात्मक तौर पर देखा जाए तो जहां टू लेन क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-हिनौती सड़क अभी भी बेहतर स्थिति में है वहीं फोर लेन सड़क मनगवां से चाकघाट जहां जहां बन कर कम्पलीट हुई है वहां वहां साल भर पहले ही बुरी तरह से उखड़ चुकी है जबकि बजट के हिसाब से भी देखा जाए तो फोर लेन सड़क का वजट टू लेन से ज्यादा होता है. वैसे यह भी भलीभांति विदित है की दोनो ही मार्गों को बनाने का कार्य दिलीप बिल्डकॉन प्राइवेट कंपनी लिमिटेड को ही मिला था तो जहां मनगवां से चाकघाट मार्ग टॉपबर्थ कंपनी द्वारा दिलीप बिल्डकॉन को पेट्टी कॉन्ट्रैक्ट में मिला था वहीं क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-हिनौती सड़क मार्ग सीधे दिलीप बिल्डकॉन कम्पनी ने अपने कॉन्ट्रैक्ट में लिया था.

बरसात के पहले मेंटेनेंस नही हुआ तो पूरी सड़क होगी छतिग्रस्त

    यदि क्योटी से कलवारी वाया लालगांव-हिनौती सड़क मार्ग का मेंटेनेंस इस बरसात के पहले नही किया गया और विशेषतौर पर किनारों में हो रहे कटाव को रोकने के लिए पर्याप्त मोरम और गिट्टी नही डाला गया तो इस मानसून सीजन 2018 तक इस गड़क मार्ग में भारी छति हो सकती है और आज बेरोकटोक होने वाला आवागमन प्रभावित होने लगेगा साथ ही पूरी सड़क बदहाल होने के आम जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद होगा. और यदि अभी समय रहते इस सड़क मार्ग को दिलीप बिल्डकॉन द्वारा मेंटेनेंस कर दिया गया तो जहां एक तरफ सड़क की मजबूती बढ़ जाएगी वहीं दूसरी तरफ़ आम जनता को भी काफी राहत मिलेगी. आखिर अच्छी सड़क, मकान, स्वक्छ पेयजल, और बिजली की उपलब्धता होना आज हर एक भारतीय नागरिक का मानवाधिकार जो है और इस मानवाधिकार की रक्षा करना हर एक देश की लोकतांत्रिक सरकार का वैधानिक दायित्व है.

जब इस संदर्भ में बड़े मुश्किल से जिम्मेदारों के नंबर नेट से ढूंढकर इनसे बात की गयी तो देखिए इनके क्या जबाब थे।

  मैं आपको मोबाइल फ़ोन पर इनसे बात की ऑडियो फ़ाइल ही भेजे दे रहा हूँ।
   
1) पीए मैनेजिंग डायरेक्टर एम पी आर डी सी के बोल - "आप एम डी साहब से बात नही कर सकते मैं आपको एक अन्य नंबर बताती हूँ जिस पर सम्पर्क करें और मेंटेनेंस संबंधी बात बता दें। मेंटेनेंस का कार्य चीफ इंजीनियर आलोक चतुर्वेदी देखते हैं" 
संपर्क 0755 276 5217

2) आलोक चतुर्वेदी, चीफ इंजीनियर और मेन्टेनेन्स इन चार्ज एम पी आर डी सी भोपाल -"आपको हमारा नंबर किसने दिया, ठीक है यदि आपको हमारा नंबर नेट से मिला है तो वहीं पर नीचे एक अन्य नंबर ललित कुमार दुबे का देखिए। ए डी बी का काम मेंटेनेंस का काम एल के दुबे ही देखते हैं। मैं नही देख रहा हूँ।" मोबाइल 9425111725

3) ललित कुमार दुबे, इन चार्ज चीफ इंजीनियर, ए डी बी भोपाल एम पी आर डी सी -" मेंटेनेंस का काम आलोक चतुर्वेदी ही देखते हैं। वही इसके इन चार्ज हैं। मैं अभी नया नया आया हूँ। लेकिन फिर भी मैं मंगलवार तक आफिस में आता हूँ तो दिखवाता हूँ। आप सारी जानकारी फ़ोटो सहित हमारे व्हाट्सएप्प नंबर में भेज दें। हम कार्यवाही करवाएंगे।" मोबाइल 9981050208

संलग्न - ज़िला रीवा के क्योटी से कलवारी वाया लालगांव - भठवा-हिनौती सड़क मार्ग के विभिन्न स्थलों शिसवा, लालगांव, भठवा, हिनौती, भलुहई, डाढ़, जमुई और कलवारी पर सड़क के किनारे उखड़ी हुई पट्टियां जो आगे बढ़कर पूरे सड़क को नुकसान पहुचाने की स्थिति में हैं.

--------------

शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,रीवा मप्र,

  मोबाइल - 7869992139, 9589152587

Wednesday, March 21, 2018

बंसल कंपनी ने तालाबों के आकार को ही बदल दिया, मनमानी खुदाई से तालाबों की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह, किस आधार पर हो रहा उत्खनन, क्या बंसल कंपनी के पास है कोई लीज?

दिनांक 22 मार्च 2018, स्थान गढ़ गंगेव रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      ज़िले की मनगवा से चाकघाट तक बनाई जा रही बहचर्चित हाइ वे सड़क के लिए सरकारी तालाबों से मिट्टी लेने का सिलसिला चल रहा है। जहां तहां स्थित सरकारी तालाबों और शासकीय राजस्व की भूमि से मिट्टी खोदकर सड़क मे डाली जा रही है।

      अभी हाल ही मे गढ़ से गुजरते समय लोगों ने बताया की बंसल की जेसीबी और ट्रक गढ़ थाने के पास स्थित पितरी तालाब और इंडियन ऑइल पेट्रोल पम्प तेंदुआ के उत्तर दिशा मे स्थित तालाब से मिट्टी खोदने का कार्य चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा ग्रामीणों के साथ मौके पर जाकर देखा गया तो पाया गया की चैन वाली जेसीबी और बंसल ट्रडेमार्क वाले कई ट्रक मिट्टी खोदने और ले जाने मे लगे हुये पाये गए। वहाँ मौके पर कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं दिखा जिससे यह जानकारी प्राप्त की जा सकती की यह वैध कार्य था अथवा अवैध। तालाब की आकृति देखकर ऐसा समझ आया की गहरीकरण और भूमि सुधार के हिसाब से भी ज्यादा उचित कार्य होना नहीं पाया गया। सबसे तजुब्ब यह देखने मे हुआ की तालाब को बिना किसी सिविल इंजीन्यरिंग के ही खोदा जा रहा था और बनी हुयी कई खाई से यह अंदाजा लगा की तालाब और शासकीय भूभाग का गलत तरीके से दोहन किया जा रहा है।

तालाबों की ताबड़तोड़ खुदाई से कई प्रश्न उठने लाजमी हैं ?

1)  क्या बंसल कंपनी अथवा किसी भी संबन्धित कंपनी द्वारा शासकीय राजस्व की संपत्ति का दोहन करने के लिए आधिकारिक तौर पर लीज अथवा परमीशन ली गई है?

2)  क्या तालाब गहरीकरण का कोई निश्चित पैमाना नहीं है की तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए क्योंकि जिस तरह से तालाब गहरीकरण का काम चल रहा है उससे पता चलता है की तालाब खुदने के बाद तो खतरे के निशान के बाहर जा सकते हैं।

3)  नियमानुसार सभी निर्माण एजेंसियों को माइनिंग संबंधी सभी जानकारी नोटिस बोर्ड लगाकर सूचना पटल मे रखनी चाहिए जिससे यह पता आम जनता को भी चले की उसकी शासकीय संपत्ति का कौन और किस तरह दोहन कर रहा है जिससे कहीं खनिज अपराध होने की स्थिति मे आम जनमानस भी जानकारी संबंधितों तक पहुचा सके।

4)  आम तौर पर यह देखा जा रहा है की तालाब की खुदाई तो वैध अथवा अवैध तरीके से कर ली जाती है परंतु तालाब के भीटे को वैसे ही छोंड दिया जाता है, भीटे मे कोई भी मिट्टीकरण न हो पाने से तालाब जहां एक ओर देखने मे भद्दे दिखते हैं वहीं दूसरी तरफ भीटा भी अनुपयोगी ही बना रहता है।   
 
   संलग्न – गढ़ तेंदुआ स्थित दोनों तालाबों की बंसल कंपनी द्वारा हो रही खोदाई की तस्वीरें।

----------

  शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

  मोबाइल 78699992139