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Tuesday, August 28, 2018

गंगेव बाजार सड़क की ठेकेदार ने कर दी तेरही, चल रही बरसी की तैयारी, तिथि के बाद सड़क पहुच जाएगी "गया" ( मामला ज़िले से गुजरने वाली मनगवां चाकघाट वाया गंगेव गढ़ हाईवे सड़क का जिसको एमएस कंस्ट्रक्शन नामक कंपनी ने बरसात के मौसम में खोद डाला, अब हो रही रोज दुर्घटनाएं, शासन प्रशासन विकाश रथ में व्यस्त)

दिनाँक 28 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले की मनगवां से चाकघाट से गुजरने वाली गंगेव गढ़ होते हुए हाईवे सड़क की स्थिति दयनीय बन चुकी है. गंगेव बाजार में ठेकेदार और निर्माण एजेंसी एमएस कंस्ट्रक्शन द्वारा सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया है जिससे आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. निरंतर इस बात को मीडिया के समक्ष रखे जाने के बाद भी शासन प्रशासन अपनी चिरनिद्रा से नही जाग पा रहा है.

  बंसल ग्रुप कंपनी ने बरसात आते ही खोद डाली हाईवे

   मनगवां से चाकघाट वाली हाईवे सड़क के निर्माण का कार्य दिलीप बिल्डकॉम के बाद कुछ भाग को एमएस कंस्ट्रक्शन को दिया गया है लेकिन कार्य को सही तरीके से सुपरवाइज़ न कर पाने की वजह से बरसात के मौसम में ही गंगेव की सड़क को एक तरफ से खोद दिया गया. अब जब बरसात आ गई तो काम को बन्द कर दिया गया जिससे सड़क के पश्चिम दिशा में एक तरफ सड़क गहरी खायीं में बदल चुकी है. जब कोई वहां सड़क पर चलता है तो मानो एक तरफ ऊंचा टीला रहता है तो दूसरी तरफ खायीं बनी रहती है ऐसे में मात्र एक तरफ से ही वहां निकल सकते हैं. यदि कोई वाहन अथवा बाइकर्स दूसरी तरफ से आ रहा है तो उसे खायीं की तरफ जबरन और मजबूरन घुसना पड़ता है जिससे फिसलन और ऊबड़ खाबड़ होने की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं. अभी कुछ दिन पहले दुर्घटना के कारण कई पशु भी अपनी जान दे चुके हैं. आम बाइकर्स और वाहनों का फिसलन और एक्सीडेंट तो आम बात है.

जल्दी बनाई जाए गंगेव बाजार की सड़क

   जब इस संदर्भ में आसपास के रहवाशियों से संपर्क किया गया तो विष्णु पटेल द्वारा बताया गया की उनके द्वारा इस मुद्दे को निरंतर उठाया जा रहा है लेकिन इसकी सुनवाई नही हो रही है. गंगेव में दुकान चला रहे बसौली के बबलू सिंह ने बताया की गंगेव से बसौली जाते समय ऐसा लगता है की कब कोई दुर्घटना हो जाए और कब जान पर बन आये. इसी तरह गंगेव जनपद और कृषि विभाग में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बताया गया कि उन्हें रोज ही बैतरणी पार करना पड़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर सभी ने एक स्वर में बताया की इस सड़क को जल्दी दुरुस्त किया जाय वरना हम सब मिलकर गंगेव बाजार के बीचोंबीच चक्का जाम करेंगे जिसकी जबाबदेही मात्र शासन प्रशासन की होगी. 

    इस बीच खुलासा न्यूज़ लाइव के ज़िला ब्यूरो चीफ आनंद द्विवेदी ने बताया की हम लगभग सप्ताह में दो दिन गंगेव आते हैं और पाते हैं की जिस दिन बारिश हुई होती है उस दिन इस लगभग दो किमी बंसल ग्रुप द्वारा उखाड़ी गई सड़क पर चलना काफी मुश्किल होता है. किसी प्रकार से इससे पार जाने पर ईश्वर को शुक्रिया अदा करते हैं की आज तो जान बचा लिया.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखें गंगेव से होते हुए गढ़ मार्ग की मनगवां के चाकघाट हाईवे सड़क को किस प्रकार से वर्तमान निर्माण एजेंसी ने खोदकर नष्ट कर दिया है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, ज़िला रीवा मप्र,

मोबाइल 7869992139, 9589152587

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2122633094645561&id=100006966720612

Wednesday, March 21, 2018

बंसल कंपनी ने तालाबों के आकार को ही बदल दिया, मनमानी खुदाई से तालाबों की उपयोगिता पर प्रश्नचिन्ह, किस आधार पर हो रहा उत्खनन, क्या बंसल कंपनी के पास है कोई लीज?

दिनांक 22 मार्च 2018, स्थान गढ़ गंगेव रीवा मप्र

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      ज़िले की मनगवा से चाकघाट तक बनाई जा रही बहचर्चित हाइ वे सड़क के लिए सरकारी तालाबों से मिट्टी लेने का सिलसिला चल रहा है। जहां तहां स्थित सरकारी तालाबों और शासकीय राजस्व की भूमि से मिट्टी खोदकर सड़क मे डाली जा रही है।

      अभी हाल ही मे गढ़ से गुजरते समय लोगों ने बताया की बंसल की जेसीबी और ट्रक गढ़ थाने के पास स्थित पितरी तालाब और इंडियन ऑइल पेट्रोल पम्प तेंदुआ के उत्तर दिशा मे स्थित तालाब से मिट्टी खोदने का कार्य चल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी द्वारा ग्रामीणों के साथ मौके पर जाकर देखा गया तो पाया गया की चैन वाली जेसीबी और बंसल ट्रडेमार्क वाले कई ट्रक मिट्टी खोदने और ले जाने मे लगे हुये पाये गए। वहाँ मौके पर कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति नहीं दिखा जिससे यह जानकारी प्राप्त की जा सकती की यह वैध कार्य था अथवा अवैध। तालाब की आकृति देखकर ऐसा समझ आया की गहरीकरण और भूमि सुधार के हिसाब से भी ज्यादा उचित कार्य होना नहीं पाया गया। सबसे तजुब्ब यह देखने मे हुआ की तालाब को बिना किसी सिविल इंजीन्यरिंग के ही खोदा जा रहा था और बनी हुयी कई खाई से यह अंदाजा लगा की तालाब और शासकीय भूभाग का गलत तरीके से दोहन किया जा रहा है।

तालाबों की ताबड़तोड़ खुदाई से कई प्रश्न उठने लाजमी हैं ?

1)  क्या बंसल कंपनी अथवा किसी भी संबन्धित कंपनी द्वारा शासकीय राजस्व की संपत्ति का दोहन करने के लिए आधिकारिक तौर पर लीज अथवा परमीशन ली गई है?

2)  क्या तालाब गहरीकरण का कोई निश्चित पैमाना नहीं है की तालाब की गहराई कितनी होनी चाहिए क्योंकि जिस तरह से तालाब गहरीकरण का काम चल रहा है उससे पता चलता है की तालाब खुदने के बाद तो खतरे के निशान के बाहर जा सकते हैं।

3)  नियमानुसार सभी निर्माण एजेंसियों को माइनिंग संबंधी सभी जानकारी नोटिस बोर्ड लगाकर सूचना पटल मे रखनी चाहिए जिससे यह पता आम जनता को भी चले की उसकी शासकीय संपत्ति का कौन और किस तरह दोहन कर रहा है जिससे कहीं खनिज अपराध होने की स्थिति मे आम जनमानस भी जानकारी संबंधितों तक पहुचा सके।

4)  आम तौर पर यह देखा जा रहा है की तालाब की खुदाई तो वैध अथवा अवैध तरीके से कर ली जाती है परंतु तालाब के भीटे को वैसे ही छोंड दिया जाता है, भीटे मे कोई भी मिट्टीकरण न हो पाने से तालाब जहां एक ओर देखने मे भद्दे दिखते हैं वहीं दूसरी तरफ भीटा भी अनुपयोगी ही बना रहता है।   
 
   संलग्न – गढ़ तेंदुआ स्थित दोनों तालाबों की बंसल कंपनी द्वारा हो रही खोदाई की तस्वीरें।

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  शिवानंद द्विवेदी, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र

  मोबाइल 78699992139