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Sunday, September 30, 2018

आर टी आई लगा इलाहाबाद बैंक से रुपे डेबिट कार्ड की माँगी जानकारी (मामला ज़िले के घूम कटरा इलाहाबाद बैंक का जहाँ पर आर टी आई आवेदक पुष्पराज तिवारी निवासी डाढ़ ने माँगी महत्वपूर्ण जानकारी, बता दें मनरेगा में रुपे डेबिट कार्ड का सरपंच सचिवों द्वारा किया जा रहा दुरुपयोग)

दिनांक 30 सितंबर 2018, स्थान - कटरा, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा पीएम जनधन योजना अन्तर्गत खोले गए जीरो बैलेंस खातों से जुड़े हुए रुपे डेबिट/एटीएम कार्ड के दुरुपयोग को देखते हुए त्योंथर ब्लॉक डाढ़ पंचायत निवासी पुष्पराज तिवारी नामक युवक आर टी आई  कार्यकर्ता ने इलाहाबाद बैंक घूम कटरा ब्रांच के बैंक मैनेजर से दिनांक 18 सितंबर 2018 को आर टी आई आवेदन दाखिल कर बैंक द्वारा पीएम जनधन खातों से संबंधित सभी रुपे डेबिट कार्ड की जानकारी माँगी है.

  जनपद पंचायतों में रुपे डेबिट कार्ड का हुआ है दुरुपयोग 

  बता दें कि त्योंथर जनपद पंचायत सहित संभवतः रीवा एवं प्रदेश की कई पंचायतों में मनरेगा की मजदूरी के आहरण में हो रही अनियमितता के चलते जारी किये जा रहे डेबिट कार्डों को सरपंच सचिव अथवा इनके दलाल अपने पास रख लेते हैं और जब जब मनरेगा की मजदूरी संबंधित मजदूर के बैंक खाते में आती है तो सरपंच के दलाल जाकर उसी रुपे कार्ड अथवा डेबिट/एटीएम कार्ड से बिना मजदूर की जानकारी के ही राशि का आहरण कर लिया करते हैं. कुछ मामलों में सौ दो सौ रुपये मजदूर को दे दिया जाता है. ऐसे मामले कई हो चुके हैं जिंसमे त्योंथर जनपद पंचायत की कुछ पंचायतों में मजदूरों की जानकारी के वगैर ही उनके खाते खुल गए और पैसे की निकासी भी बता दी गई. 

  कितने रुपे डेबिट कार्ड जारी हुए, कितने उपयोग हुए

 इसी बात को ध्यान में रखते हुए आर टी आई आवेदक पुष्पराज तिवारी ने इलाहाबाद बैंक घूम कटरा ब्रांच में आर टी आई दाखिल कर जानना चाहा है की बैंक में जितने भी पीएम जनधन खाते खोले गए हैं उनसे संबंधित कितने रुपे डेबिट/एटीएम कार्ड जारी किये हैं उसकी प्रमाणित सूची की माग की गई है. इसी प्रकार यह भी जानकारी चाही गई है की जो भी एटीएम कार्ड जारी किये गए हैं उनमे से कितने उपयोग किये जा रहे हैं अर्थात उपयोग हो रहे एटीएम कार्ड की भी प्रमाणित प्रति की माग की है.

  बैंक मैनेजर ने आर टी आई आवेदन हाँथ में लेने से किया इनकार 

  आर टी आई आवेदक पुष्पराज तिवारी द्वारा जानकारी दी गई की सबसे पहले आवेदक सीधे बैंक मैनेजर इलाहाबाद बैंक घूम कटरा के पास गया था और आर टी आई दाखिल करने की चाही तो बैंक मैनेजर ने आवेदन ही लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद आवेदक के पास आवेदन को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे जाने के अतिरिक्त कोई दूसरा तरीका नही था. इस प्रकार आवेदक पुष्पराज तिवारी ने दिनाँक 18 सितंबर को ही पोस्ट आफिस जाकर सीधे स्पीड पोस्ट किया जिसका पंजीयन क्रमांक  आरआई447112005आईएन है.

संलग्न - संलग्न आर टी आई आवेदन एवं आवेदक पुष्पराज तिवारी निवासी पंचायत डाढ़, ब्लॉक त्योंथर, ज़िला रीवा मप्र.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Sunday, August 5, 2018

कोर्ट स्थगन आदेश के बाद भी अवैध और घटिया पीसीसी निर्माण (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत कैथा पंचायत के कैथा ग्राम की पीसीसी सड़क का जहां कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद भी 7.5 लाख रुपये का पीसीसी सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा, लम्बाई 100 मीटर भी नही, गुणवत्ता अत्यंत निम्न दर्जे की, शासकीय राशि का हो रहा दुरुपयोग)

दिनांक 05 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी)

ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत आने वाली कैथा पंचायत में अनियमितताओं और भष्ट्राचार का दौर रुक नही रहा है. 

   कैथा पंचायत के मनरेगा एवं पंच परमेश्वर सहित अन्य पंचायती कार्यों में निरंतर भष्ट्राचार किया जा रहा है. मनरेगा में मजदूरों के नाम से फ़र्ज़ी निकासी की जा रही है जबकि कार्य मसीनों से करवाया जा रहा है. फ़र्ज़ी टीएस करवाकर लाखों की राशि का वारा न्यारा किया जा रहा है. 

मात्र 100 मीटर की पीसीसी सड़क पर निकाल लिए 7.5 लाख रुपये

    कैथा ग्राम में अंगद के खेत से उग्रसेन पटेल के घर तक पीसीसी सड़क बनाई जा रही है जिसकी लंबाई मुश्किल से 100 मीटर भी नही है लेकिन फ़र्ज़ी तरीके से टीएस करवाकर इंजीनियर द्वारा ज्यादा लंबाई की सड़क बताकर 5 लाख 35 हज़ार लगभग राशि पीसीसी सड़क के लिए निकाली गई है जबकि इसी बीच दो पुलों का भी निर्माण बताकर भी एक लाख रुपये प्रत्येक पुल के हिसाब से 2 लाख अतिरिक्त निकाल लिये गई हैं, इस प्रकार कुल लॉगत लगभग साढ़े सात लाख रुपये बतायी जा रही है. 

  जबकि यदि गुणवत्ता देखी जाए तो सड़क अत्यंत निम्न दर्ज़े की गुणवत्ता की बनाई जा रही है जिंसमे पनगड़ी के क्रशर से प्राप्त होने वाला घटिया डस्ट एवं गिट्टी डाली जा रही है. सीमेंट का रेश्यो भी सही नही है.

विवादित भूमि पर कोर्ट स्थगन के बाद भी बनाई जा रही पीसीसी सड़क 

   बता दें की इटहा हल्का नंबर 2 तहसील मनगवां के कैथा ग्राम की यह आराज़ी नंबर 11/2 की लगभग 30 डिसमिल की जमीन विवादित भी है जिंसमे ग्राम के ही राजबहोर श्यामलाल राजेन्द्र मेवालाल एवं गुजरतिया शुक्ला वगैरह का कब्जा एवं भूअधिकार बताया गया है जो पीड़ितों की पुस्तैनी जमीन का हिस्सा भी है. इस बाबत पीड़ित पक्ष ने भी न्यायालय तहसीलदार मनगवां से लेकर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ज़िला अदालत रीवा में भी प्रकरण लगाया हुआ है. साथ ही उक्त भूमि पर वर्ष 2008 में पीड़ित शुक्ला परिवार के पक्ष न्यायालय प्रथम वर्ग से चिरस्थाई निषेधाज्ञा भी मिल चुकी है. लेकिन पीड़ित शुक्ला परिवार द्वारा बताया गया की कोर्ट के आदेश की अवमानना करते हुए कैथा सरपंच संत कुमार पटेल एवं सचिव अच्छेलाल पटेल द्वारा फ़र्ज़ी ग्राम सभा का प्रस्ताव बनाकर, फ़र्ज़ी तरीके से एएस एवं टीएस बनवाकर सरहंगई पूर्वक पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य करवाया जा रहा है.

धारा 40 की कार्यवाही बाबत भी की गई शिकायत

   पीड़ित राजबहोर शुक्ला ने बताया की उन्होंने अपने भूअधिकार की लड़ाई के साथ साथ ज़िला पंचायत सीईओ रीवा एवं तत्पश्चात कोर्ट में मप्र पंचायतीराज अधिनियम की धारा 40 के तहत भी कार्यवाही के लिए अर्जी लगाई हुई है जिस पर अब तक जांच नही की गई है. पीड़ित ने बताया की इस पीसीसी सड़क में अवैध निर्माण एवं भष्ट्राचार के अतिरिक्त भी कैथा पंचायत के कई कार्यों में भष्ट्राचार एवं अनियमितता की गई है जिस पर सख्त जांच कर कार्यवाही की जानी चाहिए.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें पीड़ित राजबहोर शुक्ला एवं साथ ही घटिया निर्माण कार्य की भी फ़ोटो. पीसीसी सड़क बनाने के लिए डंप की गई निर्माण सामग्री की फ़ोटो जो अत्यंत घटिया स्तर की भी है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक केवाम मनवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Thursday, August 2, 2018

कैथा प्राथमिक शाला शौचालय एवं पानी विहीन, सरपंच संत कुमार पटेल ने शौचालय जेसीबी से गिरवाया (मामला ज़िले के गंगेव ब्लॉक अन्तर्गत कैथा पंचायत का जहां पर शासकीय प्राथमिक पाठशाला का पुराना शौचालय भी वर्तमान कैथा सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी लगवाकर गिरा दिया, अब स्कूल में न तो शौचालय है और न ही पानी की व्यवस्था, छोटे स्कूली बच्चे भटक रहे दर दर , क्या यही हैं अच्छे दिन?)


दिनांक 02 अगस्त 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

     ज़िले के गंगेव जनपद अन्तर्गत ग्राम पंचायतों में भष्ट्राचार का सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है. शिकायतों के बाबजूद भी विभागीय मिलीभगत के चलते लीपापोती की जा रही है. ऐसे में स्पष्ट हो चुका है की पीड़ितों और जनहित में कार्य करने वालों के लिए न्यायालय से ही रिलीफ मिल सकती है जहां पर पीआईएल डालकर कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की जाए. आज वर्तमान भारतीय प्रशासनिक परिदृश्य में कार्यपालिका पूरी तरह से फैल नज़र आ रही है और इस पर भरोषा किये बैठे व्यक्ति को अंत में मयूषी ही हाथ लगने वाली है.

  सरपंच ने कैथा प्राथमिक शाला का शौचालय जेसीबी लगाकर गिराया 

   पिछले कई वर्षों से कैथा पंचायत के पंचायत भवन को विभाग द्वारा छतिग्रस्त बताया जा रहा था. वास्तव में पंचायत भवन इतना क्षतिग्रस्त तो नही था परंतु रखरखाव के अभाव में कमज़ोर अवश्य हो गया था जिससे इसका बहाना बनाकर पंचायत भवन कैथा पंचायत को ग्राम इटहा के पुराने स्कूल परिसर में लगाया जाता रहा है. वैसे साल भर में मात्र एक या दो बार ही बमुश्किल पंचायत भवन खोला गया होगा क्योंकि यहां ग्रामसभा मात्र कागजों पर ही चली हैं.  

   वहरहाल इस पंचायत भवन के पुनर्निर्माण को लेकर पंचायतराज संचालनालय से लगभग 15 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं जिसको तोड़कर बनाया जाना है.

   इसी पंचायत भवन से सटा हुआ कैथा प्राथमिक स्कूल का पुराना शौचालय बना हुआ था जिसे सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी लगवाकर तुड़वा दिया है और आज 3 महीने होने को हैं स्कूल के बच्चे शौचालय विहीन हो चुके हैं और कास्तकारों के खेतों में जाते हैं जिससे वहां से इनाम के रूप में उन्हें गाली मिल रही है.

   ऐसे में जब स्कूल प्रशासन से जानने का प्रयास किया गया तो वहां उपस्थित शिक्षक कन्हैयालाल केवट, मुमताज़ मोहम्मद एवं अन्य द्वारा जानकारी दी गई की हमने टॉयलेट तोड़ने के लिए मना किया था लेकिन सरपंच के जबरन शौचालय तोड़वा दिया और बोला की यहां पर शौचालय बनवा दिया जाएगा. लेकिन आज 3 माह से अधिक का समय व्यतीत हो चुका है और न तो शौचालय ही बनाया गया है और न ही इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही की गई है.

    कैथा गांव के उग्रभान पटेल पिता स्व. रामानंद पटेल एवं मुनेंद्र पटेल उर्फ कल्लू पटेल दवारा बताया गया की हमने इसका विरोध किया है क्योंकि हमारे बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं परंतु न तो स्कूल प्रशासन ने ही कोई कार्यवाही की है और न ही पंचायत विभाग ने. कल्लू पटेल ने तो यहां तक बताया की उसने शौचालय के मुद्दे को लेकर सीएम हेल्पलाइन में कंप्लेंट भी दर्ज की थी जिसकी जांच करने के लिए हिनौती उच्चतर माध्यमिक पाठशाला के सीएसी आये थे जिस पर लिखा पढ़ी करके ले गए हैं और मेरी इक्षा के विरुद्ध मुझसे भी सहमति पत्र लिखवा लिए हैं. सीएसी ने बताया है की यद्यपि प्रपोजल बनाकर आगे भेज दिया जा रहा है, अब आगे विभाग का काम है की शौचालय निर्माण होता है की नही.

   इस प्रकार देखा जा सकता है कैथा स्कूल शौचालय विहीन है और जो भी शेष बचा हुआ था उसको वर्तमान सरपंच संत कुमार पटेल ने जेसीबी से गिरवा दिया है.

कैथा प्राथमिक शाला में पीने के स्वच्छ पानी का भी है भीषण संकट 

     बता दें शौचालय का न होना तो एक बात है ही, कैथा की शासकीय प्राथमिक पाठशाला में पीने के स्वच्छ पानी का भी भीषण संकट है. कई वर्षों पहले एक नलकूप करवाया गया था लेकिन इसका पानी पीने योग्य नही होने से बच्चे पहले भी इस पानी को नही पीते थे. अभी पिछले वर्ष तक इस पानी का प्रयोग स्वसहायता समूह के कार्यकर्ता मध्यान्ह भोजन बनाते समय साफ सफाई एवं बर्तन माजने में किया करते थे लेकिन स्कूल शिक्षकों और स्वसहायता समूह के कार्यकर्ताओं द्वारा जानकारी दी गई की पिछले वर्ष से यह नलकूप भी कार्य करना बन्द कर दिया है. और अब बर्तन धोने के लिए भी पानी नही मिल पा रहा है पीने की तो बात ही दूर की है. 

   वहरहाल स्कूल परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक नलकूप लोहार बस्ती के पास लगाया हुआ है जहां से मध्यान्ह भोजन बनाने और पीने का काम चल रहा है.

    स्कूल प्रशासन ने जानकारी दी है की इस बाबत कई बार संबंधित पीएचई एवं स्कूल शिक्षा विभाग सहित पंचायत विभाग को भी अवगत कराया जा चुका है. मुमताज़ मोहम्मद कैथा स्कूल हेड मास्टर द्वारा जानकारी दी गई है की हमने लिखित भी जनसंवाद शिविर सहित अन्य माध्यमो से आवेदन और जानकारी भेजी है लेकिन आज तक इस विषय में न तो पंचायत विभाग ने कोई एक्शन लिया है और न ही स्कूल शिक्षा विभाग अथवा पीएचई विभाग ने.

संलग्न - कृपया संलग्न तस्वीरों में देखें - 

  1) बिना शौचालय और पानी का स्कूल परिसर,

  2) स्कूल परिसर में उपस्थित पांचवीं तक के छोटे बच्चे.

  3) खराब पड़ा एकमात्र नलकूप जिसका पानी ही पीने योग्य नही है.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 7869992139, 9589152587

Friday, April 20, 2018

चंद महीने में ही पीसीसी सड़क के उड़े परखच्चे (मामला गंगेव जनपद अंतर्गत मदरी पंचायत के संतोष शुक्ला के घर के पास बनी पीसीसी सड़क का, रीवा मप्र)

दिनांक 21 अप्रैल 2018, स्थान - गंगेव जनपद रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र - शिवानन्द द्विवेदी)

   ज़िले के गंगेव ब्लॉक में एक और भष्ट्राचार का मामला प्रकाश में आया है जिसमे जनपद के मदरी पंचायत में कैलाश हायर सेकेंडरी प्राइवेट स्कूल के पीछे और संतोष शुक्ला के घर के पास अभी महज़ कुछ महीने पहले बनाई गई पीसीसी सड़क के परखच्चे उड़ गए हैं. 

सचिव सरपंच के आगे जनपद और ज़िला सीईओ भी हुए नतमस्तक

    ग्राम मदरी निवासी अवधेश गर्ग, राकेश शर्मा उपाध्याय, गौरव शुक्ला, स्वतंत्र शुक्ला, सौरभ शुक्ला, संतोष शुक्ला, पास स्थित हरिजन परिवार, और अन्य पंचायती हितग्राहियों द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को बताया गया की पिछले 4 से 5 माह पहले बनाई गई इस पीसीसी सड़क के विषय में सीएम हेल्पलाइन और अन्य लिखित माध्यमो से शिकायत जनपद और ज़िला स्तर पर की गई थी लेकिन कोई सुनवाई नही हुई. मदरी के किसान और कांट्रेक्टर राकेश शर्मा उपाध्याय द्वारा बताया गया की उन्होंने इस बात को लेकर लिखित कंप्लेन दर्ज करवाई थी लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई. बता दें की मदरी ग्राम पंचायत में मनरेगा और पंच परमेश्वर के कार्यों में भारी अनियमितता देखी गई है जिस पर समय समय पर आवाज़ उठाई जाती रही है लेकिन मदरी ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव दिनेश उपाध्याय ने मिलकर पूरे पंचायती कार्यों की व्हाट लगा दी है और जनपद सीईओ और ज़िला सीईओ भी इनके सामने बौने साबित हो रहे हैं.

शान्तिधाम, खेल मैदान, चबूतरे सहित दर्जनों पंचायती कार्यों में हुआ भष्ट्राचार

     ग्राम पंचायत मदरी के हितग्राहियों सौरभ शुक्ला, अवधेश शुक्ला, राकेश उपाध्याय, स्वतंत्र शुक्ला, सहित दर्जनों लोगों ने बताया की मात्र पीसीसी सड़क ही नही यहां तो पूरे पंचायती कार्यों में ही फर्ज़ीवाड़ा चल रहा है. शान्तिधाम, खेल मैदान, चबूतरा निर्माण सहित सड़क एवं पीसीसी रोड के निर्माण में भारी धांधली देखने को मिली है. बताया गया की पीएम आवास में भी मनमानी का दौर जारी है जिसमे अपात्र लोगों के नाम आवास योजना का लाभ दिया जा रहा है जबकि वास्तविक हितग्राहियों को पीछे छोंड़ दिया गया है.

मनरेगा जॉबकार्ड धारकों का ए टी एम लेकर निकाला जा रहा है पैसा

  बताया गया की आजकल मनरेगा जॉबकार्ड धारकों के संबंधित बैंक खातों का ए टी एम बैंक कर्मियों की सांठगांठ से इशू करवा लिया जाता है, जिसे सरपंच सचिव और उनके चमचे अपने पास रखते हैं और बिना मनरेगा हितग्राहियों की जानकारी के ही दनादन पैसा निकाला जा रहा है. यह फर्जीवाड़ा भी किसी एक पंचायत तक सीमित नही है. जनपद और ज़िले और संभवतः इस पूरे प्रदेश में आज यही चल रहा है जिसकी भी शिकायतें समय समय पर की जाती रही हैं.

   बिना काम के ही फ़र्ज़ी मस्टर रोल जारी करना, अपने पक्ष के कुछ चमचों का सरपंचों सचिवों द्वारा उस फ़र्ज़ी मस्टर रोल में नाम दर्ज कर देना जिससे जांच के दौरान बयान न बदल पाएं, उन मजदूर चमचों को कुछ दो चार सौ रुपये देकर फुरसत कर देना और बांकी का माल अपने पास रख लेना यह आज लगभग सभी पंचायतों में आम बात है. 

   दूसरे सब्दों में देखा जाए तो केंद्र सरकार की यह बहु उद्देशीय मनरेगा योजना फ्लॉप साबित हो रही है या यूं कहें की मनरेगा के नाम पर माजदूरों का शोषण किया जा रहा है जिसकी जानकारी तक माजदूरों को नही हो पाती और जिन्हें हो भी पाती है उनको कुछ दो चार सौर रुपये पकड़ाकर चुप करवा दिया जाता है.

संतोष शुक्ला के घर के पास पीसीसी सड़क की गुणवत्ता की जांच कर हो रेकवरी

  मदरी निवासी संतोष शुक्ला, गौरव शुक्ला, हरिजन बस्ती, अवधेश शुक्ला, राकेश शर्मा उपाध्याय सहित कई लोगों ने इस पीसीसी सड़क निर्माण में हुए गुणवत्ता की अनदेखी और फ़र्ज़ीवड़े की गहन जांच कर पूरे शासकीय राशि के रिकवरी की बात कही है और साथ ही सरपंच सचिव के ऊपर भष्ट्राचार उन्मूलन के तहत ई ओ डब्लू और लोकायुक्त के माध्यम से भी कार्यवाही की अपील की है. आगे बताया है की इस बात को ज़िले से लेकर प्रदेश और यहां तक की पी एम ओ लेवल तक उठाया जाएगा और पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 और 92 के तहत कार्यवाही की माग की है. इस विषय में यदि तत्काल कार्यवाही कर दोषियों को दंडित नही किया गया तो पंचायत वाशियों ने याचिका दायर करने की भी बात कही है.

संलग्न - कृपया संलग्न पीसीसी सड़क की फ़ोटो देखने का कष्ट करें.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता,रीवा मप्र

 मोबाइल - 7869992139, 9589152587

Saturday, February 17, 2018

भ्रष्ट्राचार की वसूली की नोटिस पर डाढ़ सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा ने पुष्पराज तिवारी को मोबाइल पर दी जान से मारने की धमकी, दाई माई की गाली के साथ बोला कानून मेरी जेब मे, कोई कुछ नही बिगाड़ सकता (ध्यान से सुनें संलग्न ऑडियो रिकॉर्डिंग)

दिनांक 17 फरवरी 2018, स्थान - डाढ़ पंचायत त्योंथर रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

 अभी हाल ही में पिछले महीने डाढ़ पंचायत निवासी एवं विंध्य किसान परिषद के कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी एवं परिषद के जिलाध्यक्ष द्वारा डाढ़ पंचायत में निर्माण कार्यों में हो रहे व्यापक भ्रष्ट्राचार की शिकायत पर सीईओ जनपद पंचायत त्योंथर महावीर जाटव द्वारा जांच कमेटी बैठा कर जांच कराई गई थी जिस पर सीईओ जाटव स्वयं भी जांच स्थल पर आकर लगभग 25 लाख के तीन पीसीसी सड़क निर्माण कार्य के गुणवत्ता की जांच की थी जिस पर उपयंत्री त्योंथर प्रजापति द्वारा जांच रिपोर्ट में तीनों पीसीसी सड़क मापदंड के अनुरूप होते नही पाए गए थे जिस सरपंच सचिव को नोटिस जारी की गई थी इसके बाद वर्तमान  में चल रही लोनियान बस्ती की सड़क को नए सिरे से बनाये जाने और साथ ही पहले से निर्मित हो चुकी द्विवेदी टोला करहिया एवं हरिजन बस्ती डाढ़ की सड़क पर पूरी बसूली की अनुसंशा की बात सीईओ जनपद त्योंथर के नाम अपने प्रतिवेदन में आयी थी।

     जब यह बात डाढ़ सरपंच पुत्र एवं सरपंच प्रतिनिधि सुरेंद्र मिश्रा के पास पहुची तो उसने परिषद के कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी के मोबाइल पर फोन करके उसे दाई माई की भद्दी गालियां दी और बोला कि मैं अपने लड़के को बुलाकर तेरे घर मे घुसकर हाँथ पैर तोड़ जान से समाप्त कर दूंगा अभी तू जानता नही मैंने इसके पहले भी कई लोगों को निपटाया है और मैं कोर्ट केस लड़ लूंगा कोई मेरा कुछ बिगाड़ नही सकता। 

     इस प्रकार संलग्न ऑडियो फ़ाइल में भ्रष्ट्राचार का विरोध करने वाले एक कार्यकर्ता को जिस प्रकार सरहंगई पूर्वक बेझिझक एक सरपंच प्रतिनिधि द्वारा माँ बहन की गालियां देकर धमकाया गया इससे यही साबित होता है कि वास्तव में इन भ्रष्ट्राचारी असामाजिक तत्वों को न तो समाज की कोई चिंता है और न ही नियम कानून का कोई भय। पर दूसरे पक्ष ने भी इस घटना की शिकायत गढ़ थाने में पूरी ऑडियो फ़ाइल के साथ कर दी है परंतु गढ़ थाने में अब तक जांच कर एफ आई आर तक दर्ज नही की गई है इससे साफ पता चलता है कि ऐसे असामाजिक तत्वों की राजनीतिक पकड़ ऊंचे तक है जिसका दुरुपयोग कर ऐसे शातिर जहां भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कानून को भी धता बता रहे हैं। 

      अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आज पूरे देश मे भ्रष्टाचार का जिस तरह से बोलबाला है उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले आम नागरिकों की रक्षा सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? पंचायत विभाग में सैकड़ों ऐसी शिकायतें धूल कहा रही हैं और उन फाइलों को राजनीतिक दबाब और पैसा हजम कर दबा दिया जाता है। कई ऐसे उदाहरण जीवंत हैं जिनमे पंचायती भ्रष्ट्राचारों के धारा 40 और धारा 92 के प्रकरण संबंधित एस डी एम एवं सीईओ कार्यालय में लंबित हैं लेकिन भ्रष्ट्राचार एवं राजनीतिक दबाब कर चलते उनमे कोई सार्थक निर्णय नही लिए जा रहे हैं।

संलग्न - धमकी दिए जाने की ऑडियो फ़ाइल और साथ मे अन्य वशूली संबंधी प्रतिवेदन एवं कार्यस्थल की फ़ोटो।

  - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139