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Thursday, May 17, 2018

शौभाग्य योजना बन रही दुर्भाग्य योजना, हरिजन बस्ती कैथा में सालों से टूटे खम्भे और कटी केबल आज तक नही हुए दुरुस्त, बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बाधित (मामला ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत आने वाले कैथा ग्राम की पुरानी हरिजन बस्ती का जहां घर घर बिजली पहुचाने के लिए किये गई शौभाग्य योजना के सर्वे बाद सब ठंडे बस्ते में)

दिनांक 17 मई 2018, स्थान - गढ़, गगेव रीवा मप्र,

(कैथा, शिवानन्द द्विवेदी, रीवा-मप्र)

        देश भर में शौभाग्य योजनान्तर्गत चल रहे काम में तेजी नही दिख रही है. हो क्या रहा है की मात्र शौभाग्य योजना के नाम पर एक घर में निवासरत चार भाईयों के नाम पर अवैध रूप से बिजली के कनेक्शन जरूर बनाये जा रहे हैं. यह कहां का नियम है की एक घर जिसमे बड़े मुश्किल से चार गरीब परिवार मात्र एक कटिया लगाकर बिजली जला रहे हों उनके नाम पर अलग अलग बिजली के कनेक्शन बना दिए जाएं और उसे शौभाग्य योजना का कनेक्शन बता दिया जाय. कैथा ग्राम में ही शौभाग्य योजना के सर्वे के दौरान यज्ञनारायण केवट के घर में पहले से ही उनके पिता रामेश्वर केवट और यज्ञनारायण केवट के नाम पर घर का कनेक्शन था. अब हुआ यह की जब शौभाग्य योजना के सर्वेयर आये तो यज्ञनारायण केवट के बड़े लड़के अमित केवट के नाम पर भी कनेक्शन कर दिया गया जबकि यह बताया गया की अमित यहाँ पर नही रहता है बाहर रहता है और अभी सभी एकसाथ एक ही घर में रह रहे हैं जिनका एक घर का बिजली कनेक्शन पहले से ही है.

   कैथा हरिजन बस्ती में भी नही किया बिजली सप्लाई

   यही हाल कैथा की हरिजन बस्ती का भी है जहां पिछले साल भर से दो बिजली के खम्भे टूटे हैं साथ ही केबल भी टूटी हुई है. इस बाबत कई बार कंप्लेन भी दर्ज करवायी जा चुकी है लेकिन अब तक कैथा की पुरानी हरिजन बस्ती में राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना के अंतर्गत लगाए गए ट्रांसफार्मर से बिजली सप्लाई नही दी गई है.

   इस मामले को लेकर हरिजन बस्ती कैथा के बिहारीलाल साकेत, द्वारिका साकेत, उग्रसेन साकेत, छठिलाल साकेत, बुद्धसेन साकेत, रामखेलावन साकेत, इंद्रलाल साकेत, नंदलाल साकेत और सुखलाल साकेत आदि का कहना था की हमने कई मर्तबा सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायतें करवायी हैं लेकिन कुछ नही हुआ मात्र फ़र्ज़ी निराकरण दिया जा रहा है. सभी हरिजन परिवार 500 मीटर दूर सोरहवा ग्राम से कटिया लगाकर बिजली जलाने का कभी कभी प्रयास करते हैं लेकिन सोरहवा के कनेक्शन धारी लोग ऐसा नही करने देते क्योंकि सोरहवा के लाइन में इसकी वजह से कई बार फाल्ट लगता रहता है. 

  शौभाग्य योजना का ट्रांसफार्मर लगाने और खम्भा गाड़ने का काम पड़ा अधूरा 

   कैथा में हरिजन बस्ती और केवट बस्ती के बीच में गरीब हितग्राहियों के लिए बिजली पहुचाने के उद्देश्य से एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने का भी कार्य किया जाना था. सर्वे के दौरान यह पाया गया था की इस इलाके में बिजली4 किमी दूर लगे ट्रांसफार्मर से होकर आती है जिससे लगभग हर दूसरे दिन फाल्ट की वजह के लाइन सप्लाई वाधित होती है साथ ही जहां से बिजली सप्लाई हो रही है वहां पर सौ मीटर से कटिया फसाकर बिजली आ रही है जिसके लिए एक अलग से ट्रांसफार्मर लगाने और आवश्यक खम्भे गाड़ने के लिए सर्वे किया गया था लेकिन यह काम आज तक प्रारम्भ नही हुआ है जिससे हरिजन, केवट और अन्य नजदीकी बस्ती के लोगों में काफी आक्रोश है की मात्र बिजली बिल तो मनमुताबिक दिए जा रहे हैं लेकिन घर घर लाइन कनेक्शन नही दिया जा रहा है. सभी ने कहा की ट्रांसफार्मर लगाया जाकर घरों के पास खम्भे गाड़े जाकर ही बिजली कनेक्शन दिया जाना चाहिए न की कटिया द्वारा. सभी का कहना था की उनके घरों में मीटर तक कभी नही लगाया गया जिससे उनके घरों में औसत बिजली बिलिंग की जा रही है. सभी का कहना था कि वह गरीब परिवार 500 से अधिक का बिजली बिल देने के लिए बाध्य हैं जबकि साल भर से कोई भी तरीके की बिजली नही जली है। सबका कहना था की हमने कई बार अपने अपने घरों में मीटर लगाकर ही बिजली बिल भरे जाने की बात कटरा जेई और त्योंथर डीई के समक्ष रखी है लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है.

संलग्न - हरिजन बस्ती कैथा, ब्लॉक गगेव, ज़िला रीवा मप्र में टूटे पड़े खम्भे और उनके पास खड़े हरिजन गरीब हितग्राही.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र, 

मोबाइल - 97869992139, 09589152587

Sunday, April 29, 2018

14 हज़ार लेनदेन की शिकायत आते ही बिजली अधिकारियों को लगा 440 वोल्ट का करंट - अमिलिया ग्राम के 6 महीने से जले 2 ट्रांसफॉर्मर बदले गए (मामला ज़िले के कटरा डीसी अंतर्गत अमिलिया ग्राम के दो जले हुए ट्रांसफॉर्मर का)

दिनाँक 29 अप्रैल 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा, रीवा-मप्र, शिवानंद द्विवेदी)

  जब गरीब किसानों की आवाज़ कहीं न सुनी गई तो उन्होंने अपना सारा दुख दर्द सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के समक्ष आकर रो दिया. उनकी आवाज़ में इतनी पीड़ा थी की उस आवाज़ की गूंज मीडिया के माध्यम से भोपाल और दिल्ली तक सुनी गई. आखिर ऐसा कौन सा नियम है जो गरीब किसानों को बिजली जलाने से रोकता है? जब एक तरफ सरकारें इंडस्ट्री और औद्योगिक जगत को भरपूर बिजली सप्लाई दे रही हैं और बेरोकटोक सब्सिडी दिए जा रही हैं तो आखिर देश का अन्नदाता जो दिन रात खेतों में गर्मी सर्दी वर्षा के वावजूद भी कड़ी मेहनत करके अन्न उगाए जा रहा है उसको बिजली और ट्रांसफार्मर से क्यों वंचित रखा जाय? मप्र सरकार ने किसानों के हित में कई अच्छे निर्णय लिए हैं जिसका नतीज़ा है उन्हें आसान किस्तों में कम राशि पर मोटर पंप का कनेक्शन, अटल बिजली योजना, राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन, और अब शौभाग्य योजनांतर्गत घर घर बिजली. फिर भी यूं कहें की विभागीय लापरवाही अथवा कुछ अन्य कारण. फिर भी कहीं न कहीं ये बात महत्वपूर्ण है की योजनायों का सही तरीके से और समयावधि में क्रियान्वयन किया जाए. क्रियान्वयन में समस्याओं और लेटलतीफी की वजह से आम जनता को परेशानी से गुजरना पड़ता है. 

   शूखे अकाल में मात्र 20 प्रतिशत बिजली बिल जमा पर ही किसानों के बदले जाते हैं जले ट्रांसफार्मर 

    ग्रामीण इलाकों में किसानों की सिंचाई से जुड़े हुए ट्रांसफार्मर बदलने संबंधी नित नए नियम समय समय पर निकलते रहते हैं. अभी पिछले साल के शूखे के पहले तक यह 60 प्रतिशत रखा गया था इसके बाद यह घटकर 40 प्रतिशत हुआ और जब सरकार ने देखा की किसान सूखा अकाल में मारा गया है और उसके पास कुछ बचा नही है तो इस स्थिति में सरकार ने इसे घटाकर मात्र 20 प्रतिशत कर दिया था. अर्थात जिस ट्रांसफार्मर से संबंधित कुल लोड का बिजली बिल यदि 20 प्रतिशत तक भर दिया गया है तो वहां ट्रांसफार्मर लगा दिया जाएगा.

पर बिजली कंपनी नही मानती सरकार के फरमान

    अब यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है की काफी कुछ पहुच पर निर्भर करता है. यदि किसी गांव में कोई बहुत पहुच वाला है किसी नेता से संपर्क में है, मंत्री से संपर्क है तो उस स्थिति में ट्रांसफार्मर लगाने संबंधी विशेष नियम कायदों को फॉलो नही किया जाता. परंतु यदि बेचारे गांव वालों की कोई पहचान नही है तो उनके लिए जले हुए ट्रांसफार्मर बदलवाना टेढ़ी खीर हो जाता है. फिर उनकी कोई सुनवाई नही होती.

आम नागरिक और किसानों का मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता ही बनते हैं सहारा 

   ऐसे में मात्र मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता अथवा गांव का कोई चलता फिरता व्यक्ति जब इन गरीबों की आवाज़ उठाये तभी कुछ हो सकता है. जैसा की कटरा डीसी अन्तर्गत अमिलिया गांव के किसानों के साथ हुआ, जब अमिलिया के किसानों की 6 माह से कोई सुनवाई नही हुई तो वह थक हारकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के पास आये और अपनी पीड़ा व्यथा बतायी. गनीमत तो यह थी मामला जोरदार तरीके से मीडिया में रखा गया जिसमे पूरे गांव भर के इकठ्ठा हुए दर्जनों लोगों ने पहली बार कैमरे के सामने आकर दिल खोलकर पीड़ा व्यथा रखी जो यूट्यूब में वायरल हुआ और साथ ही रीवा ज़िले से प्रकाशित होने वाले लगभग कई महत्वपूर्ण अखबारों में आया तो कटरा डीसी और त्योंथर डी ई के अधिकारियों की नीद हराम हो गई. 

  मामला यहीं आकर नही रुका बल्कि पुनः आज से कल होता देख मामले को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा ऊर्जा मंत्री पारस जैन के निज सचिव पुराणिक मंदर और संभागीय बिजली अधिकारियों के पास तक पहुचा दिया गया तब और भी उथल पुथल मच गई.

   आनन फानन में कटरा डीसी के जे ई अभिषेक सोनी और त्योंथर डी ई पटेल सहित बजाज कंपनी के एरिया इंजीनियर अनिल द्विवेदी एवं राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन योजना के कार्यभार लिए हुए ओ पी द्विवेदी ने भी हाँथ पैर मरना प्रारम्भ कर दिया. बताया गया की आरजीवी योजना में गड़बड़ी की वजह से जेई और डीई को उलझना पड़ा वरना यह कार्य मात्र आरजीवी वालों का ही था.

  अमिलिया के दोनो जले ट्रांसफार्मर बदल दिए गए

     आज जहां कई ग्रामों में सालों से जले हुए ट्रांसफार्मर आज तक नही बदल पाए हैं वहीं मीडिया के प्रभाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सीधे जनहित के मुद्दे को लेकर एकजुट प्रहार से अमिलिया ग्राम के दोनो ही ट्रांसफार्मर बदल दिए गए. दिनांक 29 अप्रैल को सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी को त्योंथर डी ई द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार अब अमिलिया ग्राम खुशहाल स्थिति में है और 29 अप्रैल को ही दोनो ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं. 

पिछले 2 सप्ताह से हुए अथक प्रयास का नतीज़ा है दोनो ट्रांसफार्मर का बदलना

   पिछले दो सप्ताह से लगातार प्रतिदिन इस विषय पर जेई, डीई, आरजीवी, बजाज कंपनी, एसई, और ऊर्जा मंत्री तक के निरंतर संज्ञान में लाया गया तब जाकर आज यह दोनो ट्रांसफार्मर एक साथ बदले हैं. इसके साथ ही अमिलिया ग्रामवासियों का अधिकारियों द्वारा पैसा लेकर ट्रांसफार्मर बदलने का आरोप भी काफी महत्वपूर्ण था जिस पर संबंधित अधिकारियों की नीद हराम हो चुकी थी.

पूरे जिले में सैकड़ों अमिलिया जैसे उदाहरण फिर भी किसानों की कोई सुनवाई नही

    आज लगभग रोज ही मीडिया में यह खबर आम है की अमुक ग्राम में ट्रांसफार्मर जला हुआ है लेकिन बदला नही गया है. पर इन खबरों का कोई विशेष प्रभाव नही हो रहा है. आखिर क्यों? इसका सबसे बड़ा कारण यह है की खबर तो चल जाती है लेकिन उस ग्राम क्षेत्र के आसपास और साथ ही जनप्रतिनिधि इस पर कोई संज्ञान नही लेते हैं. आज जो काम सरपंचों, विधायकों, सांसदों, और अन्य जन प्रतिनिधियों का होना चाहिए वह मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं. आखिर सबसे बड़ा प्रश्न यही है की जिस ग्राम का ट्रांसफार्मर जला हुआ है उस गांव का सरपंच क्या सो रहा है? उस क्षेत्र का जनपद और ज़िला पंचायत सदस्य कहां गया? वहां का विधायक और सांसद कहां गया? इन प्रश्नों से स्पष्ट है कि भारत का लोकतंत्र आज मात्र दिखावा बन कर रह गया है. सभी जनप्रतिनिधि अपनी रोटी सेंकने में लगे हुए हैं और आम जनता और किसान मरने के लिए मजबूर है.

  किसान सम्मान यात्राओं के ढोंग की खुलती पोल

     इसका अंदाजा इसी बात के लगाया जा सकता है की ये नेता और समाज के ठेकेदार कितना बड़ा ढोंग और प्रोपोगंडा करते हैं. अभी अभी पूरे प्रदेश में किसानो के नाम पर किसान सम्मान यात्रा निकाली गई. किसानों की रैली निकाल दिखावे के तौर पर किसानों को सम्मानित किया गया. जब किसान मर रहा है उसकी कोई सुनवाई नही हो रही तो काहे की किसान सम्मान रैली? किसान को उसकी फसल के उचित दाम नही मिल रहे. किसान द्वारा फसल में लगाए गयी पूंजी तक वसूल नही हो पा रही है, किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है, किसान के पिछले 6 माह और साल भर से जले हुए ट्रांसफार्मर तक नही बदले गए हैं तो फिर काहे की किसान सम्मान रैली? क्या पार्टियों के कार्य कर रहे नुमाइंदे ग्राम में भ्रमण के दौरान किसानों की इन मूलभूत समस्याओं के विषय में नही पूंछते? क्या किसान इन ठेकेदारों को यह नही बताते की उनको क्या तकलीफ है? सच्चाई तो यह है सब को सब कुछ पता है लेकिन समस्या के उन्मूलन के लिए कोई प्रयास नही करना चाहता मात्रा दिखावा और ढोंग करना चाहता है जिसका परिणाम है की आज किसान और आम नागरिक विभिन्न प्रकार की मानवाधिकार संबंधी समस्याओं से ग्रस्त है और उसकी कहीं कोई सुनवाई नही हो रही है.

संलग्न - त्योंथर डीई द्वारा ग्रामीणों से बनवाया गया पंचनामा जिसमे शिकायतकर्ताओं से हस्ताक्षर करवाया गया है कि दोनों जले हुए ट्रांसफार्मर बदल दिए गए हैं। साथ ही इस विषय मे शिकायतकर्ता शैलेन्द्र पटेल से चर्चा के कुछ अंश जिसमे पूरे प्रकरण को वह बता रहा है। साथ ही अन्य संलग्न फ़ाइल।

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता, रीवा मप्र,

  मोबाइल 7869992139, 9589152587

Sunday, April 8, 2018

रीवा विद्युत विभाग की धांधली - न कोई मेंटेनेंस न कोई केबलीकरण, हर स्थान पर बिजली के तार खतरे के निशान में, अगडाल/गढ़ फीडर अंतर्गत अकलसी में भी हाई टेंशन लाइन के झूलते हुए तारों से किसान की फसल में लगी आग, सब जलकर खाक


दिनाँक 08 अप्रैल 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र 

(कैथा, शिवानंद द्विवेदी)

    ज़िले में बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार के चलते बिजली के तारों से आगजनी की वारदाते रुकने का नाम नही ले रही हैं. अभी पिछले दिनों अकलसी ग्राम में अकलसी तालाब के पश्चिम दिशा में भूतपूर्व सरपंच मिथिला प्रसाद पटेल के घर की तरफ जाने वाले रास्ते के पास स्थित खेत में स्पार्किंग और झूलते हुए तारों की वजह सेके आग लग गई थी जिसमे पूरे खेत भर में लगी फसल आग के हवाले हो गई. किसी प्रकार ग्रामीणों ने बड़े मुश्किल से आग पर काबू पाया नही तो आसपास के खेत भी साफ हो जाते. यह आग पास ही खेत के बीचों बीच स्थित हाई टेंशन लाइन के मात्र 10 फ़ीट से भी काम ऊंचाई पर झूलते हुए तारों से स्पार्किंग और गुल्ल गिरने की वजह सेके लगी थी. इसमे किसी भी किसान का कोई दोष नही था और मात्र बिजली विभाग की लापरवाही और भष्ट्रचार की वजह सेके ऐसे हादसे आये दिन रिपोर्ट किये जा रहे हैं. 

    मेंटेनेंस और केबलीकरण न होने के कारण बनी है समस्याएं 

   यदि गहराई से देखा जाए तो पता चलेगा की यहाँ कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत आने वआले ज्यादातर ग्रामों में ऑन रिकॉर्ड मेंटेनेंस और केबलीकरण के काम हो चुके हैं परंतु वास्तविक धरातल पर कहीं कोई काम पिछले दशकों से नही हुआ जिसकी वजह के मेंटेनेंस के अभाव में होम लाइन और साथ ही हाई टेंशन लाइन के ज्यादातर खंभे टेढ़े हो गए हैं कहीं जरूरत से ज्यादा झुक गए हैं और इसी प्रकार विद्युत तार भी कमज़ोर होकर खतरे के निशान के बहुत बाहर हो चुकले हैं जिसकी वजह से तार आपस में लड़ते रहते हैं और स्पार्किंग की वजह से आग लगने के चान्सेस बढ़ जाते हैं. दूसरे मौसम में भी आग लगती रहती है परंतु नुकसानी सबसे ज्यादा फसली सीजन में ही होती है जिसमे किसानों की पकी फसल देखते देखते स्वाहा हो जाती है. 

    अभी दिनाँक 06 अप्रैल की शाम 7 बजे के आसपास इसी प्रकार की एक घटना में त्योंथर ब्लॉक एवं डाढ़ पंचायत के सरपंच पुत्र सुरेंद्र मिश्रा की ट्रेक्टर से लदी हुई गेंहूँ की फसल में आग लगने से पूरी फसल सहित ट्रेक्टर भी जल गया था.

    मेंटेनेंस एवं केबलीकरण का मुद्दा इसके पहले भी कई मर्तबा उठाया जा चुका है लेकिन कटरा विद्युत वितरण केंद्र सहित पूरे रीवा के बिजली विभाग के कानों में जूं तक नही रेंग रही है जिसका खामियाजा आम नागरिक और किसान उठा रहे हैं और बिजली की आग से अपनी खड़ी फसल खाक होतई देख रहे हैं. 

  यदि यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले कुछ सप्ताह में ऐसे कई बारदतें और भी सामने आ सकती हैं. बिजली विभाग को मेंटेनेंस की राशि का सही और समुचित उपयोग कर हर ग्राम क्षेत्र में बिजली के तारों और खंभों को दुरुस्त किया जाना चाहिए और साथ ही केबलीकरण के नाम पर जो धांधली विद्युत वितरण कंपनी और साथ ही ठेकेदारों द्वारा की गई है उसकी सही जांच कर पूरी रिकवरी होनी चाहिए.

संलग्न - कटरा विद्युत वितरण केंद्र अंतर्गत अगडाल/गढ़ फीडर में आने वाले अकलसी ग्राम के किसान के खेत में हाई टेंशन लाइन की वजह से लगी आग का दृश्य.

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शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र.

मोब 07869992139

Saturday, January 20, 2018

Rewa, MP - कटरा विद्युत वितरण केंद्र की मनमानी जारी, बिना मीटर कनेक्शन के ही भेजे जा रहे मनमाने बिल।


दिनांक 20 जनवरी 2018, रीवा मप्र

रीवा मप्र। (शिवानंद द्विवेदी)

    गरीबों पर विजली विभाग रीवा का कहर निरंतर जारी है।

              गरीब तबके के भूमिहीन हरिजन आदिवासियों जिनके घर की वासिन्दगी जमीन के पट्टे तक नही और जो एक दो कमरों के मकान में कहीं बसे टिके हुए हैं और मेहनत मजदूरी करके किसी प्रकार जीवन यापन कर रहे हैं , उनके ऊपर भी बिजली विभाग का सितम जारी है।

    इस फोटो में पीड़ित सोमधर आदिवाशी पिता जेठू आदिवाशी निवाशी भमरिया पंचायत सेदहा ब्लॉक गंगेव रीवा मप्र का निवासी है। 

    इस व्यक्ति के घर आजतक कोई बिजली नही जली परंतु औसत बिलिंग जारी है। 

     जिस व्यक्ति की सालाना कमाई ही 10 हज़ार रुपये के अंदर हो वह चार हज़ार का बिल और वह भी बिना बिजली जलाए कैसे दे इस प्रकार कहना था जेठू आदिवाशी का।

     जानकारी अनुसार देखा जाय तो बीपीएल और एस सी एस टी  आदि गरीब वर्गों हेतु सरकार का विशेष प्रावधान है जिसमे विशेष छूट भी मिलती है।

   राजीव गांधी विद्युतीकरण मिशन, दीनदयाल योजना और सौभाग्य योजना आदि से घर घर मीटर लगाकर बिजली सप्लाई की जा रही है जिसमे बिजली विभाग को सख्त निर्देश है कि घर घर जाकर मीटर लगाया जाए और मात्र मीटर रीडिंग के अनुसार ही बिजली बिल भेजा जाए।

     पीड़ित द्वारा बताया गया कि उसके घर के सामने एक डिब्बा लगाया गया था जो ठप्प पड़ा है लेकिन न तो कोई केबल खींची गई और न ही कोई बिजली सप्लाई दी गई लेकिन जैसा कि हर स्थान पर हो रहा है मनमुताबिक औसत बिलिंग प्रारम्भ कर दी गई।

     क्या बिजली विभाग में इतना दम है कि इंडस्ट्रियल क्षेत्र को दी जाने वाली हाई सब्सिडी को बंद करवा दे? 

    क्या बिजली विभाग में इतना दम है कि गाँव गाँव मे घर घर मीटर लगाकर मीटर रीडिंग के आधार पर बिलिंग करे?

    क्या बिजली विभाग नगर निगम रीवा, सहित रीवा के सरकारी कार्यालयों , तथाकथित बड़े अफसरों के बंगलों के लाखों में लंबित बिल की वसूली करने की ताकत है?

    नही मात्र गरीबो, किसानों और ग्रामीणों को ही सताने और लूटने के लिए यह सभी विभाग बने हैं।

    क्या यही है सुशासन और सबसे बड़ा लोकतंत्र?

   - शिवानंद द्विवेदी सामाजिक कार्यकर्ता रीवा मप्र। 7869992139

   संलग्न - कृपया संलग्न फ़ोटो में देखें पीड़ित सोमधर का पिता जेठू आदिवाशी निवासी भमरिया पंचायत सेदहा हिनौती गंगेव ब्लॉक कटरा डीसी रीवा मप्र और साथ मे बिना बिजली जलाए उसके घर का बिल।